इसी के साथ वो हॉल तालियो की गड़गड़ाहट के साथ गूँज उठा इतनी मधुर आवाज़ की मालकिन को देखने के लिए में बेचैन हो उठा....मुझे बस उसके होंठ ही नज़र आरहे थे बाकी पूरा चेहरा उसने अपने घूँघट से ढक रखा था....लोग उस पर नोटो की बरसात कर रहे थे... वो बस अपनी जगह किसी मूरत की तरह बैठी रही....
तभी मेरे कंधे पर मुझे किसी का हाथ महसूस हुआ....जय साहब बड़ी देर कर दी आते आते ......कहाँ खो गये थे चलते चलते.....
में--माफ़ कीजिएगा इस लड़की की आवाज़ बहुत अच्छी है जैसे माँ सरस्वती इसके गले में विराज रही हो....
नंदू--मुझे शायद आपने पहचाना नही....मेरा नाम नांदेश्वर है....और प्यार से लोग मुझे नंदू भाई कह कर बुलाते है...
में--में आपको पहचान कैसे पाता नंदू अंकल....हम आज से पहले कभी मिले ही नही है.....
नंदू--बेटा मिलना जुलना ऐसे ही चलता रहेगा अब में तुम्हे अपने बेटे और बहू से मिलवाता हूँ उसके बाद बाते करेंगे....
में--ठीक है अंकल जैसा आप चाहे....
उसके बाद वो मुझे अपने बेटे और बहू से मिलवाते है....में जैसे ही अपने साथ लाए बेग को खोलकर वो गिफ्ट्स निकालने की कोशिश करता हूँ नंदू मेरा हाथ पकड़ के मुझे वो निकालने से मना कर देता है....
नंदू--जय बेटा अभी वक़्त नही आया है कि तुम्हे कुछ भी देने के लिए अपना बॅग खोलना पड़े....दोनो बच्चो को आप अपने पास से 10-10 रूपाए नेग के दे दो इनके लिए यही तुम्हारे पापा के आशीर्वाद से कम नही होगा....
में समझ नही पा रहा था नंदू आख़िर कहना क्या चाहता था....
में--लेकिन में इन दोनो के लिए अलग से गिफ्ट्स लाया हूँ....उनका में क्या करूँ....
नंदू--आप बस इन्हे नेग के रूप में 10 10 रुपये दे दो और कुछ भी देने की ज़रूरत नही है........
में अपनी जेब में 2 हज़ार के नोटो की गॅडी निकालता हूँ और उसमे से आधे नोट में लड़की के हाथ में रखता हूँ और आधे लड़के के....
में--नंदू अंकल ये तो हुआ बस नेग....लेकिन दूल्हा दुल्हन के लिए जो में गिफ्ट्स लाया हूँ वो दिए बिना नही जाउन्गा....
नंदू--हम भी तो यही चाहते है आप कहीं ना जाए ये घर भी आपका ही है....आप जब तक चाहे यहाँ रहे....लेकिन पहले कुछ ज़रूरी बाते करले ताकि आपके दिमाग़ में उठ रहे सारे सवालो को शांति मिल सके....
उसके बाद हम एक रूम में आजाते है....नंदू अंकल मेरे लिए एक पेग बढ़िया स्कॉच का बनाते है और मुझे देकर खुद के लिए भी बनाने लग जाते है....
नंदू--तुमने कभी सोचा नही तुम्हारे पापा की डॅत हुए अभी हफ़्ता भर भी नही हुआ और तुम्हारे पास शादी का इन्विटेशन क्यो पहुँच गया....जबकि इस शहर का बड़े से बड़ा और छोटे से छोटा व्यापारी तुम्हारे पापा की डॅत के बारे में जानता था....
में--ये इन्विटेशन मेरे चाचा जी अपने साथ ले कर आए थे....उनके बार बार कहने पर हे में जाने के लिए राज़ी हुआ था....
लेकिन मुझे आपकी बातो से लग रहा है आपको ज़रूर कोई ख़ास काम होगा....
नंदू--काम तो वाकाई मेरे लिए काफ़ी ख़ास है....मेरे पास तुम्हारे पापा की अमानत पड़ी है वो तुम्हे देने के लिए इस से अच्छा दिन मेरे पास कभी हो भी नही सकता था....
में--अंकल जो भी है वो सॉफ सॉफ कहिए ना....कौनसी अमानत की बात कर रहे हो आप....कौन्से सही समय की बात कर रहे हो आप जो भी है सॉफ सॉफ बोलिए....
नंदू-- तुम्हारे पापा की डॅत से 6 महीने पहले....में उनसे मिला था.....
वैसे तो में उनके लिए हमेशा से एक मुसीबत ही था लेकिन उस दिन मैने उन्हे अपना भगवान मान लिया....
मेरे बेटे को ब्लड कॅन्सर था....में पैसे पैसे के लिए मोहताज होचुका था अपने बेटे के इलाज की खातिर....लेकिन जब में तुम्हारे पापा के पास हाथ फैलाए पहुँचा....एक पल का भी समय नही लगाया उन्होने सोचने के लिए....
उसी वक़्त उन्होने अमेरिका के बड़े से बड़े डॉक्टर को फोन लगा दिया....और हमे वहाँ भिजवा भी दिया पूरे 3 करोड़ रुपये मेरे बेटे के इलाज में खर्च हो चुके थे अमेरिका में....लेकिन उन्होने कभी मुझ से हिसाब नही माँगा....में जब अमेरिका से वापस भारत आया तब में उनसे एक बार मिला था...तब उन्होने मुझे कहा....एक समय था जब में किशोर गुप्ता अपने धंधे की शुरूवात पर था....तब किसी ने मेरी मदद नही करी....मैने अपना सब कुछ खोकर ये मुकाम हासिल किया है....और जब तुम मेरे सामने अपने बेटे की जिंदगी के लिए कुछ रुपये माँगने आए तब....मेरे सामने वही पुराने दिन आ गये थे....जो मैने खोया वो अब दुबारा नही होगा,,तुम्हारे बेटे के इल्लज में जो भी खर्चा आएगा वो में भरुन्गा....और जिस दिन ये ठीक हो जाय उस दिन मुझे बुलाना मत भूल जाना.....
ये कहते कहते नंदू अंकल की आँखो में आँसू आगये और साथ ही साथ मेरे पापा की ये बात सुनकर गर्व से मेरी भी आँखे छल्छला गयी थी....
नंदू--एक बेग मेरी तरफ बढ़ाते हुए....बेटा ये 50 लाख रुपये है....बाकी पैसे भी में जल्दी ही चुका दूँगा....आज मेरा बेटा पूरी तरह से ठीक हो गया है काश तुम्हारे पिता यहाँ होते....इसीलये मैने तुम्हे यहाँ बुला लिया....शायद तुम्हारे पिता की मेरे से जताई गयी आख़िरी इक्षा भी यही थी.....
इसीके साथ वो फूट फूट के रोने लगते है....में उन्हे अपने गले से लगाकर उन्हे धाँढस बांधने की कोशिश करने लगता हूँ....थोड़ी देर बाद वो कुछ नौरमल होते है....उसके बाद में वो बेग उठाता हूँ और बाहर उनका हाथ पकड़ कर ले आता हूँ....
उनके बेटे और बहू के सामने में वो बेग रख देता हूँ और अपने साथ लाए हुए गिफ्ट भी उनके सामने रख देता हूँ....
में--नंदू अंकल से.....मेरे लिए आपके दिए हुए ये 50 लाख भी अनमोल है....और जो गिफ्ट में इन दोनो के लिए लाया हूँ ये भी...
आप अपने बेटे और बहू से इनमें से एक अपने पास रखने के लिए बोल दीजिए ये मान लेना ये पापा की तरफ से वर वधू को तोहफा है....
नंदू अपने बेटे बहू को वो 50 लाख वाला बेग उठाने के लिए बोल देता है....
नंदू--बेटा ये 50 लाख तो में वापस ले रहा हूँ लेकिन बाकी की रकम तुम मुझ से लेने के लिए कभी मना नही करोगे....में एक कर्ज़दार की तरह कभी मरना नही चाहूँगा...
में--अंकल में वो रकम तो आपसे ज़रूर लूँगा....क्योकि अब आपको भी अपना वादा जो पूरा करना है....
नंदू--बेटा तुम बिल्कुल अपने पापा की तरह हो....तुम्हारे बड़े भैया तुम्हारे पापा की परच्छाई थे....लेकिन तुम तुम्हारे पापा की आत्मा हो....
उसके बाद वो मुझे अपने गले से लगा लेते है और मेरे सिर पर अपना हाथ फेरने लग जाते है....
नंदू--बेटा तुम्हारे पापा की कुर्सी खाली पड़ी है उसे सम्भालो....उस कुर्सी पर किसी और का हक़ नही है वो अब से तुम्हारी ही रहेगी....
में--जैसा आप चाहे अंकल....अब में जाने की इजाज़त चाहूँगा....
नंदू--बेटा घर पर आए हो कुछ खा पी कर तो जाओ...
में--नही अंकल आज नही फिर किसी और दिन सही....
नंदू--जैसा तुम चाहो बेटा ये घर तुम्हारा ही है आते रहा करना....
उसके बाद में वहाँ से निकल कर जाने लगता हूँ....में हॉल के दरवाजे के बाहर ही निकला था और अपनी जेब में से चाबी निकालने की कोशिश में वो डीयेने वाले लिफाफे नीचे गिर जाते है.....लेकिन किसी की नज़र उन पड़ जाती है और जैसे ही वो दरवाजे को खोलने की कोशिश करती है उसकी एक उंगली दरवाजे के बीच में आजाति है....और उसकी उंगली से खून की धारा फूट पड़ती है.....वो मेरा लिफ़ाफ़ा उठाए मेरे पीछे पीछे बाहर सड़क पर आजाती है....
में अपनी तरफ आती उस सुरीली आवाज़ की तरफ अपनी एडियों के बल घूम जाता हूँ मेरे सामने वही लड़की खड़ी थी घूँघट में....एक दम दूध से धुला हुआ रंग....होंठ पर जैसे गुलाब रख दिए हो किसीने....
में--जी आप मुझे आवाज़ लगा रही है क्या.....
लड़की--जी ये आपकी जेब में से कुछ गिर गया था वही देने आई हूँ...
में जैसे ही उसके हाथ की तरफ देखता हूँ मुझे वो डीयेने सॅंपल वाले लिफाफे नज़र आजाते है साथ ही साथ उसकी उंगली से निकलता हुआ खून भी जो उन लिफाफो को भिगोएे जा रहा था....
आज कुछ अजीब सा लग रहा था सीने में....उसके चेहरे को देखे बिना ही....वो शक्श मुझे अपना सा लगने लगा था....कुछ तो बात है उसमें....वरना किसी को जानने की बेचेनी मेरे दिल ने कभी महसूस नही करी थी....
में बाइक आगे दौड़ाए जा रहा था उसकी उंगली से अभी भी खून बह रहा था उसके खून से...मेरा बाँधा हुआ रुमाल पूरी तरह से सन चुका था.....उस से काफ़ी ज़िद करने के बाद में उसे डॉक्टर के पास चलने को मना पाया था....
उसके होंठो पर पानी की कुछ बूंदे आ गयी थी जो ऐसा लग रहा था जैसे गुलाबो पर किसीने मोती रख दिए हो...ये बूंदे उसके आँसू थे जो उसकी आँखो से बह रहे थे....
मैने जल्दी ही एक क्लिनिक के बाहर अपनी बाइक रोक दी और लगभग उसे खिचते हुए अपने साथ वहाँ बने एमर्जेन्सी रूम की तरफ बढ़ गया....
डॉक्टर ने उसके घाव पर स्टिचिंग कर के दवा लगाकर बॅंडेज बाँध दी...
उसके बाद वहाँ की फीस भरने के बाद हम लोग फिर से बाइक पर बैठ चुके थे....उसने अपना नाम मुझे शमा बताया था....,
में--शमा जी अब आप को दर्द तो नही हो रहा.....
शमा--नही दर्द नही होता मुझे....दर्द की आदत पड़ चुकी है....
में--ऐसा क्यो कह रही है आप....क्या मुझे आप अपने बारे में कुछ बता सकती है....
शमा--मेरे बारे में जानकार आप क्या करेंगे साहब....ना मेरा कोई जीवन है और ना ही कुछ ऐसा जिसे बताने में मुझे खुशी मिले....
में--अगर आप नही बताना चाहती तो ठीक है...लेकिन सुना है दिल का दर्द बाटने से दर्द कम हो जाता है...इसलिए में आपके दर्द को कम करने की कोशिश कर रहा हूँ....
शमा--पेशे से में एक तवायफ़ हूँ....गाना सुनाकर लोगो का मन बहलाती हूँ....अभी कुछ दिन पहले ही मैने अपना अट्ठरवा साल पूरा किया है....
अब कुछ दिनो बाद में गाने के साथ साथ अपना जिस्म लोगो को देकर उन सब का मन बहलाउन्गि....कुछ दिनो बाद मेरी नथ उतराई की रस्म होने वाली है....में चाह कर भी ये सब होने से नही रोक सकती....
उसकी ये बात सुनकर मैने झटके से अपनी बाइक ब्रेक लगा कर रोक दी....हमारे पास में से काफ़ी सारी गाड़िया तेज रफ़्तार में हॉरेन बजा बजा कर निकल रही थी....लेकिन ये बात सुनके हम लोगो के दरम्यान एक बहुत बड़ी खामोशी छा गयी थी....
उसकी ये बात सुनकर में ये कहने से खुद को रोक नही पाया....
में--अगर आप नही चाहती तो कोई आपको ज़बरदस्ती इस दलदल में कैसे फेक सकता है.....आप पोलीस में कंप्लेन क्यो नही कर देती.....
शमा अपने एक हाथ अपने घूँघट में डालकर अपने बह रहे आँसू पोछते हुए कहती है....
शमा--साहब यहाँ मेरी फरियाद सुनने वाला कोई नही है...और जिन लोगो के पास अपनी दरख़्वास्त ले जाने के लिए भेजना चाहते है....हम उन्ही लोगो की महफील रोशन करते है.....
में--अगर आप चाहो तो में आपकी मदद कर सकता हूँ आपको इस दलदल में से निकालने के लिए....
शमा--मेरी मदद तो मेरा भगवान भी नही करता साहब.....और आप क्यो एक तवायफ़ के पिछे अपना वक़्त ज़ाया करेंगे....
में--में तुम्हे वहाँ से निकालने के लिए अपना पूरा ज़ोर लगा दूँगा....तुम मुझे बोलो बस में तुम्हारे लिए क्या करसकता हूँ....
शमा--साहब आज से 10 दिन बाद मुझ पर बोली लगाई जाएगी....अगर कोई मेरी बोली लगाकर मुझे जीत जाता है तो मुझे सारी उमर उसकी गुलाम उसकी रखेल बन कर रहना होगा...लेकिन अगर कोई भी बोली नही लगाता है तो....मुझे एक रंडी का जीवन जीना होगा....मुझ पर खर्च हुए बचपन से अब तक का पैसा मुझे मेरा जिस्म बेच कर देना होगा....
में--अगर में तुम्हे अभी यहाँ से गायब कर दूं तो....वो लोग तुम्हे ढूँढ नही पाएँगे.....
शमा एक दर्दभरी मुस्कुराहट अपने होंठो पर ले आती है....
शमा--साहब छुप तो परछाई भी नही सकती....उसे भी छुप्ने के लिए अंधेरे में ही जाना पड़ता है...में कही भी भाग जाउ ये लोग मुझे ढूँढ ही लेंगे.....
में--अगर तुम चाहो तो में पोलीस की मदद लेकर तुम्हे वहाँ से निकलवा सकता हूँ....मेरे संबंध काफ़ी बड़े बड़े लोगो से है.....
शमा--हन साहब ऐसा हो सकता है....लेकिन फिर भी आपको मेरी कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी.....
में--अगर तुम उस दलदल से निकलना चाहती हो तो में तुम्हे वहाँ से निकालने के लिए कोई भी कीमत दे सकता हूँ.....
शमा--साहब आप मेरे लिए इतना सब क्यो कर रहे है....आप आज से पहले ना मुझे जानते थे ना ही अब तक आपने मेरा चेहरा देखा है....अगर मैने आपको धोका दे दिया तो....या सिर्फ़ आपसे पैसे लूटने के लिए आपका इस्तेमाल कर रही हूँ तो....आप मेरी मदद क्यो करना चाहते है....
में--तुम्हारी मदद में तुम्हे अपनी छोटी बहन समझ कर कर रहा हूँ...मेरी वो खोई हुई बहन जिसे में पता नही कैसे ढूँढ पाउन्गा....
मुझे किसी ने कहा था कि मेरी एक बहन और है जिसके बारे मे मैं नही जानता और वो तक़लीफ़ में अपना जीवन जी रही है..... इस लिए तक़लीफ़ से गुजरती हर लड़की मुझे अपनी बहन ही लगती है......
शमा--कितनी खुशनसीब होगी आपकी वो बहन जिस दिन आप उसे ढूँढ लेंगे....भगवान से में आज ही आपकी बहन के लिए प्रार्थना करूँगी....
में--शमा अगर आप बुरा ना मानो तो क्या में आपका चेहरा देख सकता हूँ......
शमा--इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है आप ने मुझे अपनी बहन बोला है....बस बुरा एक ही बात का लग रहा है....आप मुझे बार बार मुझे आप कह कर मत बुलाए....
में--ठीक है शमा में तुम्हे आप नही कहूँगा....
इसके साथ शमा अपना चेहरे पर से अपना घूँघट हटा देती है.....
उसकी बड़ी बड़ी आँखे उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी उसके माथे पर एक छोटी सी बिंदी बड़ी ही मनमोहक लग रही थी.... लेकिन ये चेहरा कुछ जाना पहचाना सा लग रहा था....कहाँ देखा मैने इस चेहरे को कुछ समझ नही आ रहा.....
में--शमा क्या हम पहले भी मिल चुके है....तुम्हारा चेहरा मुझे जाना पहचाना सा लग रहा है....
शमा--में तो आपको देखते ही पहचान गयी थी साहब.....
में--अब तुम भी मुझे साहब कहना बंद करो मेरा नाम जय है....तुम मुझे भैया भी बुला सकती हो....
शमा--भैया शायद आपको याद नही होगा....आप कुछ दिन पहले दुबई जा रहे थे....आप बस बैठे बैठे शराब ही पिए जा रहे थे....में उस वक़्त आपकी बगल वाली सीट पर ही बैठी थी और जानना चाहती थी कि आप ऐसा क्यो कर रहे है....आपकी आँखे दर्द से सुलग रही थी जैसे किसी ने आपकी आँखो में तेज़ाब डाल दिया हो उस वक़्त....लेकिन में आपसे बात कर पाती उस से पहले ही वहाँ की एर होस्टेस्स ने आपको संभाल लिया था....
में--तुम मेरे पास बैठी थी और में तुम्हे पहचान भी नही पाया....
शमा--आपने सिर्फ़ एक बार ही मेरी तरफ देखा था....लेकिन में आपको देखे ही जा रही थी....आपके दर्द को में अपने अंदर महसूस कर रही थी....
में--शमा तुम चिंता मत करो अब में...तुम्हे वहाँ से ज़रूर निकाल पाउन्गा....अगर में सही हूँ तो मेरी खोई हुई बहन तुम ही हो....बाकी सारी बाते में तुम्हे अपने घर लेकर आने के बाद करूँगा....क्या मुझे तुम्हारा एक बाल मिल सकता है....में कुछ पहेलियो के जवाब ढूँढ रहा हूँ....शायद कल सुबह तक सारी पहेलिया सुलझ जाएँगी.... मुझे तुम अपना अड्रेस और मोबाइल नंबर भी दे दो...
उसके बाद शमा अपना अड्रेस और मोबाइल नंबर मुझे बता देती है और वो सारी डीटेल में मेरे फोन में एड कर लेता हूँ....
शमा--भैया आप मुझे बचा तो लेंगे ना....??
में--तेरी कसम....बहन तुझे में इस दलदल से निकाल कर ही दम लूँगा....तेरी कसम.....तेरी कसम.....
शमा मेरे सीने से लग कर ज़ोर ज़ोर से रोने लग जाती है.....
शमा--भैया मुझे वहाँ से निकाल लो....वहाँ रोज मुझे नंगा करके वहाँ के आदमियो से मालिश करवाई जाती है....मुझे अपने आप से घिंन आने लग गयी है अब....या तो मुझे वहाँ आकर बचा लो या फिर में खुद खुशी कर लूँगी....मुझ से सहन नही हो रहा है ये सब कुछ....मुझे बचा लो भैया.... मुझे बचा लो.....
में--तू अब चिंता मत कर तेरे आँसुओ को देख कर भगवान ने मुझे तेरे पास भेज दिया....अब ये तेरा भाई तुझे इन सब से बचा कर अपने घर जल्दी ही ले आएगा....तू चिंता मत कर मेरी बहन तू चिंता मत कर....
उसके बाद में वहाँ से अपनी बाइक वापस नंदू के बंगलो की तरफ बढ़ा देता हूँ....वहाँ पहुँचकर में उसे अपने गले से एक बार फिर से लगा लेता हूँ और उसे वापस आने का वादा देकर में वहाँ से निकल जाता हूँ....
में अब सब से पहले कमिशनर ऑफीस की तरफ बढ़ जाता हूँ....वहाँ मुझे कमिशनर जे. प्रसाद से मिलना था....वो मुझे अच्छे से जानते थे....
प्रसाद--जय बेटा कैसे हो....आज यहाँ का रास्ता कैसे भूल गये...
में--अंकल मुझे आपकी मदद चाहिए...मुझे एक लड़की को नरक में से निकालना है....
प्रसाद--किस की बात कर रहे हो तुम बेटा....कौन जी रहा है नरक में.....
में--अंकल एक लड़की है जिसे तवायफ़ के धंधे में ज़बरदस्ती झौंक दिया गया है....मैने उसे अपनी बहन माना है....और में किसी भी कीमत पर उसे वहाँ से निकालना चाहता हूँ....
प्रसाद--कुछ सोच कर.....बेटा तुम कहाँ इन चक्करो में पड़ रहे हो....वो लड़की शायद तुम से पैसा लूटना चाहती है....इसलिए वो तुम्हे एमोशनल ब्लॅकमेन्ल कर रही होगी....
में--नही अंकल वो लड़की झूठ नही बोल रही....और मेरा दिल कहता है ये लड़की ही मेरी खोई हुए बहन है....प्लीज़ अंकल आप मेरी मदद करिए उसे वहाँ से निकालने के लिए जितना भी पैसा मुझे खर्च करना होगा में उसके लिए करूँगा....
प्रसाद--सोच लो बेटा कहीं ऐसा ना हो कि वो लड़की बाद में तुम्हे धोका देकर तुम्हारा पूरा जीवन बर्बाद कर दे....
में--मैने सोच लिया है अंकल बस आप मेरी मदद कर दीजिए....
प्रसाद--ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो....
अंकल अपनी टॅबेल पर रखी हुई बेल बजाते है जिसे सुनकर एक चपरासी अंदर आजाता है....
उस चपरासी को इनस्पेक्टर शर्मा को बुलाने के लिए कहते है....फिर वो चपरासी. बाहर चला जाता है....
कुछ देर बाद हे दरवाजे पर दस्तक होती है....और प्रसाद अंकल उसे अंदर आने के लिए कहते है....
प्रसाद--जय बेटा ये है इनस्पेक्टर राजेश....ये तुम्हारी मदद उस लड़की को वहाँ से निकालने में करेंगे....
राजेश एक 6 फीट लंबा सुघटित जिस्म का मालिक था गोरा रंग, चेहरे पर आत्मविश्वास अच्छे से झलक रहा था उसके....
राजेश--सर किसे कहाँ से निकालना है....
पसद--राजेश....जय को तो तुम जानते ही हो....इन्होने एक लड़की को तवायफ़ के धंधे से बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी उठाई है...और इन्होने उस लड़की को अपनी बहन भी माना है इसलिए तुम्हे जय के साथ मिलकर उस लड़की को वहाँ से आज़ाद करवाना है....
राजेश--सर....क्या इनको ये पता है कि ये धोके का शिकार भी हो सकते है उस लड़की को आज़ाद करवाने के चक्कर में....
प्रसाद--में इन्हे वो सब कुछ बता चुका हूँ लेकिन ये फिर भी उसे बचाने की रिस्क ले रहे है....इनकी नेक नियत पर भरोसा करते हुए तुम्हे उस लड़की को वहाँ से किसी भी तरह निकालना होगा...
राजेश--ठीक है सर पर जाना कहाँ है....
में--बनारस.....
राजेश--कुछ सोच कर.... लगता है उस लड़की के साथ साथ अब कुछ ज़िंदगियाँ और बर्बाद होने से बच जाएँगी....हम कल सुबह ही बनारस के लिए निकल जाएँगे सर.....मुझे खुशी है आपने मुझे इतना अच्छा काम दिया....इस भलाई के काम को में ज़रूर पूरा करूँगा....