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परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख) complete

नीरा--ठीक है आप परेशान मत होना में आ रही हूँ....आप मुझे एरपोर्ट लेने आजना.....

में--नीरा भाभी की कुछ हॅवी साड़ी ले आना अपने साथ....मम्मी को बोल देना वो तुझे दिलवा देंगी भाभी से.....अब तू खाना खा कर निकलने की तायारी कर और फ्लाइट में बैठने से पहले मुझे कॉल ज़रूर कर देना.....

नीरा--ठीक है में सब कर लूँगी....अब में फोन रख रही हूँ....जल्दी हे आपके सामने होउंगी में अब....

उसके बाद नीरा फोन काट देती है....और तभी अचानक मेरा फोन बजने लगता है.....वो कॉल डॉक्टर आलोक का था....

डॉक्टर--भाई कहाँ हो....यार माफ़ करना दिन में रूही आई थी लेकिन में किसी कारण से कहीं गया हुआ था तो उसे रिपोर्ट नही दे पाया था...4 बजे मैने तुम्हे फोन भी किया था लेकिन तुम्हारा फोन बंद आरहा था.....

में--कोई बात नही सर....में उस समय फ्लाइट में था अगर रूही ने भी मुझे कॉल किया होगा तो उसे भी मेरा नंबर बंद मिला होगा....

डॉक्टर--अच्छा सुनो वो रिपोर्ट्स रेडी हो गयी है....उस में सब कुछ ठीक है.....घर के मुखिया से ही सारे बच्चे है.... और जो नया वाला सॅंपल देकर गये थे वो तुम्हारे दोस्त की सग़ी बहन है....मेरे ख्याल से अब कोई कन्फ्यूषन नही रहा होगा तुम्हारे मन में.....

में--सर आपने एक बड़ा बोझ मेरे सीने से उतार दिया है....

डॉक्टर--अब वादे के मुताबिक तुम मुझे बताओ सच क्या है.....

में--सर ये काफ़ी लंबी कहानी है....में एक बार घर आ जाऊ उसके बाद आपको सारी बाते बता दूँगा.....

उसके बाद डॉक्टर आलोक फोन काट देते है और....में गंगा का जल हाथ में लेकर उसे पी कर अपने सिर पर छिड़क लेता हूँ....

जो काम में करने जा रहा था वो काम गंगा मेँया के आशीरावाद के बिना पूरा नही हो सकता था....

एक पाप करने जा रहा था में.... जो समाज के नियमो के खिलाफ था....एक पाप करने जा रहा था में....जिसे पापी भी इसी समाज ने बनाया है..... एक ऐसा पाप जो सब कुछ बदल के रख देगा मेरे जीवन में.....

में वहाँ से उठ कर अपनी होटेल की तरफ चल पड़ा, अपने दिल में चल रहे तूफान को लेकर....होटेल में अभी राजेश नही आया था....मैने अपने लिए कुछ पीने का सामान मंगवा लिया और थोड़ी देर मे मेरे सामने एक शराब की बोतल और कुछ खाने का सामान पड़ा था....

मेने जल्दी जल्दी अपने तीन पेग ख़तम करे और एक फोन लगा दिया.....

में--सुहानी कैसी हो....??

सुहानी--क्या बात है सर आज काफ़ी दिनो बाद याद किया....सब ठीक तो है ना

में--तुम तो जानती हो सुहानी....जब में हर तरफ से मुसीबतो से घिर जाता हूँ....तब तुम्हारी याद आ ही जाती है.....

सुहानी--क्या हुआ सर....कौनसी मुसीबतो की बात कर रहे हो आप....

में--सुहानी...समझ में नही आरहा में ये बात तुम से कैसे कहूँ....

सुहानी--जहाँ तक में आपको समझ पाई हूँ सर....आपके फ़ैसले आप दिल से लेते हो....लेकिन कभी कभी दिमाग़ का इस्तेमाल भी करना ज़रूरी होता है...अगर आप किसी ऐसी उलझन में हो जो आप मुझे बता नही सकते....इसका मतलब आपने अपने दिमाग़ को यूज़ लेना शुरू कर दिया है....आप ने जो करने की सोचा है वो बिल्कुल ठीक ही होगा सर....क्योकि कभी कभी दिल और दिमाग़ दोनो का ही सही सेमाल करना ज़रूरी होता है....आपने जो भी फ़ैसला लिया है आप अपना ध्यान पूरी तरह से उसी पर रखे....क्या होगा और क्या नही उसके परिणामो के बारे में मत सोचिए....

में--सुहानी में बस यही जानना चाहता था जो में कर रहा हूँ वो सही भी है या नही....

 
सुहानी--सर में जानती हूँ आप किसी का बुरा नही कर सकते....लेकिन अगर आप किसी का अच्छा करने की कोशिश कर रहे है तो फिर सोचना कैसा.....आप जो भी करोगे वो अच्छा ही होगा....सोचना बंद करो और अपने काम को अंजाम तक पहुचाओ....

में--एक बार फिर तुमने मेरे भटकते हुए दिल को सही रास्ता दिखा दिया है....में जल्दी ही दुबारा अपने परिवार के साथ तुमसे मिलने आउन्गा....

सुहानी--युवर मोस्ट वेलकम सर....आपसे मिलने के लिए में भी बेकरार हूँ....जल्दी आइए....

और उसके बाद सुहानी फोन काट देती है और में अपना पेग ख़तम कर के एक और पेग बना लेता हूँ.....

मेने सारी सोच अपने दिमाग़ से निकाल दी और ऐसे ही टीवी देखने लग गया....तभी मेरा मोबाइल एक बार फिर से बजने लग गया.....ये कॉल राजेश का था.....

राजेश--जय क्या हो रहा है....

में--राजेश भाई बस आप ही का वेट कर रहा था....कब तक आओगे आप..??

राजेश--दरअसल मुझे टाइम लग जाएगा ऑफीस में ही....रेड के लिए टीम रेडी कर रहा हूँ...अभी तक ये किसी को नही बताया गया है कि ये टीम किस लिए है..,..सिर्फ़ यहाँ के कमिशनर को पता है. इस बारे में....

में--कल रात को आपको रेड करनी है वहाँ पर...और मेरी बहन नीरा आ रही है यहाँ....

इसलिए में अब आपसे दुबारा यहाँ नही मिल पाउन्गा.....

राजेश--उसे क्यो बुला लिया आपने इस काम के बीच में.....

में--उसका होना काफ़ी ज़रूरी है राजेश भाई....ये में आपको समझा नही पाउन्गा लेकिन उसके बिना में शमा को यहाँ से निकाल कर नही ले जा पाउन्गा....

राजेश--ठीक है जय भाई जैसा आप सही समझे....में अब बनारस मे आपसे नही मिलूँगा....

में--ठीक है राजेश भाई अब सीधा उदयपुर में ही मिलना होगा.....

उसके बाद में वो फोन डिसकनेक्ट कर देता हूँ और फिर से टीवी देखने लग जाता हूँ....होटेल मे मैने नीरा के आने का बता दिया था....इसलिए नीरा के रुकने में कोई परेशानी नही थी....

तभी......................

 
तभी एक बार फिर से मेरा फोन घनघनाने लग गया.....इस बार कॉल नीरा का था....

नीरा--जान में एरपोर्ट पहुँच गयी हूँ....आपने खाना खा लिया....

में--नही नीरा खाना नही खाया मैने अभी तक.....लेकिन तू तो कुछ खा कर निकली है ना....

नीरा--भूख तो नही थी लेकिन मम्मी ने ज़बरदस्ती खिला दिया....आप भी कुछ खा लो...

में--चल अच्छा किया....अब जल्दी से तू यहाँ मेरे पास आजा....खुद को काफ़ी अकेला महसूस कर रहा हूँ में आज.....

नीरा--आप चिंता मत करो...सब ठीक हो जाएगा.....मेरी फ्लाइट का टाइम हो गया है अब में फोन काट रही हूँ....यहाँ पहुँच कर आपको रिंग करती हूँ.....

फोन एक साइड में रखने के बाद एक बार फिर से में ख्यालो में डूब गया..और कब मुझे नींद ने अपने आगोश में ले लिया मुझे पता ही नही चला...,.

सपने मे मुझे फिर से वही साधु बाबा नज़र आने लगे....वो मुझ से कुछ कह रहे थे....

साधु--बेटा तूने बिल्कुल सही फ़ैसला लिया है.....वरना कब तक वो मासूम बच्ची भगवान के चर्नो में अपना सिर पटकती रहती....

में--बाबा ये फ़ैसला कैसे सही है.....एक बहन की कुर्बानी देकर दूसरी बहन को बचाना...,.ये कहाँ का इंसाफ़ है....

साधु--नीरा तुमसे प्यार करती है.....उसके लिए सारी दुनिया में तुम से बढ़ कर कुछ नही है....और कभी ना कभी तो ये होना ही था...ये मत सोचो कि तुम लोगो के प्यार का गवाह एक मामूली कोठा बनेगा....बस इतना सोचो कि उस कोठे में भी भगवान विराज्ते है....तुम जो कर रहे हो सही है....और जो आगे भी करोगे वो भी सही ही होगा....तुम्हे अभी काफ़ी लंबा रास्ता तैय करना है.....और ये कोठा तुम्हारी पहली मंज़ील है.....

अब उठ और अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़....उठ और जो जीते जी मर चुके है उन्हे फिर से जीवन दान दे....उठ अब और किसी बालक की भाती सोना बंद कर....समय तेरी प्रतीक्षा कर रहा है....उठ तेरा प्यार तुझे याद कर रहा है......

और इसीके साथ में हड़बड़ा के उठ जाता हूँ मेरा पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था.......में तुरंत अपने मोबाइल को उठाता हूँ और उस में समय देखने लगता हूँ....2.30 बज गये थे....में फटाफट उठा और फ्रेश होकर होटेल द्वारा मँगवाई गयी टेक्शी में बैठ कर एरपोर्ट की तरफ चल पड़ा.......

में एरपोर्ट पहुँच गया था.....मुझे नीरा वही इंतजार करती हुई मिल गयी बिल्कुल मासूम सी गुड़िया लग रही थी वो इस समय....मुझे देखते ही वो भागकर मेरे सीने से लग गयी....

नीरा--पता है कितना डर लगता है जब आप साथ में नही होते मेरे....

में--मेरे होते हुए तुझे कैसा डर चल अब होटेल चलते है....फिर बाकी की बाते वही करेंगे....

नीरा--मेरे माथे पर किस करते हुए.....आइ लव यू जान....

उसके बाद हम फिर से होटेल की तरफ बढ़ जाते है....

होटेल पहुँच कर में नीरा को फ्रेश होने के लिए कहता हूँ और एक बढ़िया साड़ी पहने ने के लिए कह देता हूँ.....

जब वो साड़ी पहन कर बाहर आजाति है तो में उसे बस देखता ही रह जाता हूँ....किसी परी से कम नही थी मेरी नीरा.....

वो मेरे सामने आकर खड़ी होगयि और में उसे अपलक निहारे जा रहा था....

नीरा--कहाँ खो गये....मुझे इस तरह देखना बंद करो शर्म आ रही है मुझे....

में--तुम्हारी खूबसूरती का कोई मुक़ाबला नही है नीरा....सच मे मैने कुछ अच्छे काम किए होंगे तभी एक पत्नी के रूप में तुम मुझे मिल रही हो.....

नीरा--अब बंद भी करो मेरी तारीफ़ करना....और मुझे जल्दी से बताओ कि क्या हुआ है जो इतना जल्दी सब कुछ कर रहे हो.....

में खुद का ध्यान नीरा की खूबसूरती से हटते हुए कहता हूँ....

में--नीरा हमारी एक बहन और भी है....में उसे ही बचाने यहाँ आया हूँ....

नीरा--क्या....??ये क्या कह रहे हो आप....एक बहन और....कहाँ है वो मुझे अभी उस से मिलना है....मेरी एक बहन और है और ये आप मुझे अब बता रहे हो....

में--नीरा में पहले खुद कन्फर्म करना चाहता था....लेकिन अब कन्फर्म हो गया है....कि शमा ही हमारी बहन है.....

नीरा--तो फिर हम अभी तक यहाँ क्यो रुके है चलो....चलके शमा को घर ले चलते है....

में--ये इतना आसान नही है नीरा....वो एक कोठे पर है....और उसको यहाँ से भगा के लेजाना काफ़ी मुश्किल है....

नीरा--तो आपने अब तक क्या सोचा है....में शमा से मिलने के लिए मरी जा रही हूँ...अब आप जल्दी उसके पास मुझे ले चलो....

में--शमा की मालकिन कामली बाई ने एक शर्त रखी है....कि शमा की नथ उतराई उसी के कोठे पर होगी....मुझे उस वक़्त कुछ समझ में नही आया इसलिए उसे मैने कह दिया ये सब कुछ मेरी पत्नी के सामने होगा....

 
नीरा--आपका मतलब ये है कि उस कमरे में हम तीन जने होंगे और कमरे के अंदर नथ उतरई शमा की नही बल्कि मेरी होगी......

में अपना सिर झुका कर नीरा को हाँ में जवाब दे देता हूँ.....

नीरा--मुझे कोई परेशानी नही है....अगर आपने सोच हे लिया है तो.....में आपसे इतना प्यार करती हूँ कि आप अगर मुझे किसी चौराहे पर भी नंगा होने को कहोगे तो में खुशी खुशी अपने प्यार की खुशी के लिए अपने सारे कपड़े वही उतार दूँगी....शमा तो फिर भी मेरी बहन है....

में--नीरा में जानता हूँ तू मुझ से कितना प्यार करती है....इसीलिए बिना सोचे समझे तुझे उस गंदे महॉल में ले जाने के लिए तैयार हुआ......

लेकिन अब सब ठीक है....मैने सब कुछ सोच लिया है....में तुझ से पहले शादी करूँगा.....और उसके बाद ही हम वहाँ चलेंगे....

सुबह 6 बज गये थे....हम लोगो को बाते करते करते....मैने होटेल वालो से एक कार का इंतज़ाम करने को कहा जिसे में खुद ही चलाने वाला था.....जब हम लोग अपने रूम में से निकलकर होटेल लॉबी में पहुँचे तो वहाँ मोजूद सभी लोगो की नज़रें बस नीरा पर ही टिकी हुई थी.....उसकी खूबसूरती के वार से तो वहाँ मोजूद औरते और लड़किया भी खुद को ठंडी साँस भरने से नही रोक पाई.....हम लोग सीधा गंगा नदी के किनारे बने एक मंदिर में पहुँच गये....रास्ते में एक सुनार की दुकान से हमने एक मंगल सूत्र भी खरीद लिया था और पुजारी को कुछ पैसे देकर वहाँ हमने पूरे धार्मिक रीति रिवाज से शादी कर ली.....नीरा गजब ढा रही थी ....

उसकी माँग में मेरे नाम का सिंदूर भरा हुआ था....और सीने पर लटकता . नीरा की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहा था.....साक्षात रति का अवतार लग रही थी नीरा.....

हम दोनो का रिश्ता अब बदल चुका था....अब हमारे बीच भाई बहन के रिश्ते की जगह पति पत्नी के रिश्ते का मजबूत बंधन पड़ चुका था...

मंदिर से भगवान का आशीर्वाद लेकर हम वहाँ से वापस सीधा होटेल पहुँच गये....

रूम के अंदर पहुँचते ही मैने नीरा को कस कर अपनी बाहो मे भर लिया....

नीरा--अरे थोड़ा सब्र करो पहले जो काम करने आए है उस पर ध्यान दो....

में--नीरा के गालो पर हाथ फेरते हुए कहता हूँ....सही कहा नीरा तुमने....मुझे अभी बॅंक जाना है....वहाँ से कुछ पैसे भी निकलवाने है....

नीरा--ठीक है आप जाकर आओ तब तक में थोड़ा फ्रेश हो जाती हू....और शमा के यहाँ कब चलना है....

में--शमा के पास हमे 2 बजे तक पहुँचना है....अभी 10 बज रहे है....जब तक में बॅंक का काम निपटा लेता हूँ....

नीरा---ठीक है आप जाइए....में आपके आने का इंतजार करूँगी....

उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा बॅंक पहुँचता हूँ....और बॅंक से पैसे निकलवाने के बाद.....में बाज़ार से कुछ फ्रूट्स और मिठाई खरीद लेता हूँ.....मुझे बाजार में घूमते हुए 12 बज चुके थे उसके बाद में वहाँ से निकल कर सीधा होटेल पहुँच जाता हूँ.,.,रूम मे नीरा मेरा इंतजार कर रही थी....जब उसने दरवाजा खोला वो कुछ इस तरह लग रही थी..

में उसकी तरफ लगातार देखे ही जेया रहा था....और उसके करीब जा कर मैने पहले उसके माथे को चूमा और फिर....उस की आँखो से थोड़ा काजल निकाल कर उसकी गरदन के पीछे एक काला टीका लगा दिया...

में--जिस जगह हम जा रहे है...वहाँ सब की नज़रे तुम पर ही होंगी....और में नही चाहता किसी की भी बुरी नज़र तुम पर पड़े.....

नीरा--इतना प्यार करते हो मुझ से....

में--हाँ मेरी जान......तेरे लिए में कुछ भी कर जाउन्गा....

नीरा--अब बातें बनाना बंद करो और जल्दी चलो में शमा को देखने के लिए बैचेन हो रही हूँ कब से....

में--नीरा शमा को यही पता है कि में अपनी वाइफ के साथ यहाँ आ रहा हूँ..,.अपने बारे में उसे कुछ नही पता........

नीरा--जब हम यहाँ से उसे ले जाएँगे तो उसे सब कुछ सच सच बता देंगे....और वैसे भी अब में आपकी पत्नी हूँ....इसलिए मुझे अब कोई डर नही है....

उसके बाद हम दोनो उसी कार में बैठकर गलियो में से होते हुए....उस कोठे के बाहर तक पहुँच गये....पूरा बाज़ार सज़ा हुआ था जैसे वहाँ कोई शादी का महॉल हो....

 


जब हम दोनो कार से उतरे तो हर किसी की निगाहे सिर्फ़ नीरा पर ही थी....में जल्दी जल्दी उस जगह से नीरा को उस कोठे में ले आया ....

वहाँ नज़्म पहले से ही खड़ी थी....उसके हाथो में आरती का सुंदर थाल था अंदर आते ही उसने हम दोनो की साथ में आरती उतारी....और मैने कुछ 500-500 के नोट उस थाली में रख दिए....

नज़्म--क्या किस्मत पाई है बाबूजी आपने....इतनी सुंदर बीवी हर किसी को नही मिलती....कभी किसी की बुरी नज़र ना लगे इनको....

और ये कह कर वो हम दोनो का रास्ता छोड़ देती है....कामली बाई भी हॉल में ही हमे मिल जाती है....सब से पहले कामली बाई नीरा की बालाएँ लेती है....और एक नींबू नीरा के उपर वार के नज़म को उसे चौराहे पर रख कर आने को कह देती है....

कामली--वाह जनाब इतनी खूबसूरती मैने आज तक नही देखी....अब तो आपके पास दो दो खूबसूरती की मिसाले हो गयी है....

नीरा--कामली जी अगर आप बुरा ना माने तो क्या में अब शमा से मिल सकती हूँ....

कामली--इस में बुरा मानने वाली बात कौनसी है....अब तो वैसे भी वो आप लोगो की हो चुकी है....जैसे चाहो वैसे मिलो....उसके बाद सुम्मी नीरा को एक रूम की तरफ ले जाती है वहाँ शमा बेसब्री से हमारा इंतजार कर रही होती है.

नीरा और सुम्मी के चले जाने के बाद....में और कामली बाई मिनी बार वाले रूम में चले जाते है....अंदर बैठते ही में उसे 15 लाख रुपये दे देता हूँ.....

कामली--जनाब क्या कमाल का रूप है आपकी पत्नी का....कोई बूढ़ा भी देख ले तो शेर बन जाए....

में--कामली बाई नीरा के लिए कहा गया हर बुरा शब्द....मेरे गुस्से को बढ़ा देता है...इसलिए आपसे गुज़ारिश है आप उसके लिए कुछ ग़लत ना बोले....

कामली--नही...नही....जनाब में तो तारीफ़ कर रही थी....में उस हुश्न की मल्लिका के लिए बुरा कैसे कह सकती हूँ.....

अब बताइए क्या लेंगे आप ठंडा या गर्म...

में--कुछ भी पिला दीजिए जो आपको पसंद हो....

उसके बाद कामली बाई....मेरे लिए एक चाँदी के ग्लास में शराब भर के ले आती है और पहला सीप मारने के बाद में उस से कहता हूँ.....

में--कामली बाई वादे के मुताबिक मैने आपको पैसे देकर अपना वादा पूरा कर दिया है....अब आपकी बारी है वादा पूरा करने की.....

कामली--पूछिए जनाब क्या पूछना चाहते है....अब शमा आपकी हो गयी है....और शमा के साथ जुड़ा हर राज़ भी....

में--शमा आपके कोठे पर कैसे पहुँची.... इसके माँ बाप कौन है....???

कामली--19 साल पहले मेरे पास दीनू इस बच्ची को लेकर आया था....बच्ची को देख कर लग रहा था कि कुछ दिन पहले ही ये पैदा हुई है.....पहले तो मैने उस हरामजादे को खूब पिटवाया अपने आदमियो से....इतनी मासूम बच्ची को अपनी माँ से जुदा करने के लिए....और जब उस से पुछा गया ऐसा उसने क्यो किया है तो उसने किसी का नाम लिया.....

में--किसका नाम लिया कामली बाई...याद करिए...

कामली--दीनू किसी मुंबई में रहने वाले प्रधान की बात कर रहा था....उसने इस बच्ची को ख़तम करने की सुपारी दी थी....लेकिन ज़्यादा पैसा कमाने के चक्कर में वो इसे मेरे पास बेचने के लिए ले आया.....

में अपने मन में ही प्रधान का नाम सुनकर चोन्के बिना नही रह सका....

में--क्या मुझे प्रधान या दीनू के बारे में कोई जानकारी मिल सकती है.....

 
कामली--जनाब जिस तरह से मैने अभी तक आपके बारे में नही पूछा वैसे ही मैने ना ज़्यादा प्रधान के बारे में पूछा और ना ही दीनू के बारे में.....लेकिन दीनू की पिटाई करवाने के बाद उसकी जेब में जो भी माल था वो सब निकाल लिया गया था....तकरीबन 20000 रुपये और कुछ कागज भी मिले थे उसकी जेबो मे से.....उन कागजो में उसका गाड़ी चलाने का लाइसेन्स भी था....

में--क्या में वो सब कागज देख सकता हूँ...

कामली--बेशक जनाब.....माना कि ये कागज मेरे किसी काम के नही थे लेकिन अमानत के तौर पर आज भी मैने संभाल कर रखे है...क्या पता वो अपने कागजात लेने वापस आता लेकिन 19 सालो में वो दुबारा कभी नही आया....में अभी वो कागजात ले कर आती हूँ....

में--मन मे ही सोचे जा रहा था....प्रधान और दीनू के बारे मे....इन दोनो का नाम मैं पहले भी कही सुन चुका था....लेकिन कहाँ सुना कुछ याद नही आ रहा था....लेकिन अगर कामली के पास दीनू का ड्राइविंग लाइसेन्स पड़ा है तो इसका मतल्ब जल्दी ही इस पहली से परदा हट जाएगा.....

तभी कामली भी वापस आचुकी थी...उसने वो कागज मेरे हाथ में पकड़ा दिए....

उन कागजो में कुछ हिसाब किताब लिखा था कुछ रसीद थी सामानों की और एक ड्राइविंग लाइसेन्स

में उस लाइसेन्स को उलट पुलट कर देखने लगता हूँ....दिनेश वर्मा....सोन ऑफ गोपाल लाल वर्मा

अथवा लाने नियर क्रिस्टल अपार्टमेंट सूरत गुजरात.....

मेरे पास दीनू का 19 साल पहले का पता आचुका था...

में--कामली बाई क्या में इसे अपने पास रख सकता हूँ....

कामली--ज़रूर जनाब....लेकिन मेरे मन में एक सवाल उठ रहा है....आप क्यो गढ़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश कर रहे है....

गढ़े मुर्दे नही में बिछड़े हुए कुछ अपनो को मिलाने की कोशिश कर रहा हूँ....कम से कम शमा जान तो पाएगी कि उसके माँ बाप कौन है....

कामली--जनाब आप सही कह रहे है....लेकिन ये कोठा है और यहाँ जो एक बार आजाता है उसे दुनिया इतनी आसानी से नही अपनाती है...

में--आपको कोई ऐतराज तो नही है अगर में शमा के माँ बाप को ढूँढने की कोशिश करूँ....

कामली--जनाब ऐतराज कैसा शमा की पूरी कीमत दी है आपने....आप जो चाहे वो करे लेकिन इस कोठे के कुछ उसूल है इन्हे आपको पूरा करना बाकी है....अब आप शमा की नथ उतराई की रसम जल्दी से जल्दी पूरा कर दीजिए....

में--कामली बाई आपसे एक चीज़ माँगूँ....

कामली--हुकम कीजिए जनाब....

में--जब हम लोग यहाँ से जाए....तो वो खून से सना हुआ कपड़ा आप मुझे वापस लौटा दीजिएगा....क्योकि में तंत्र मंत्र पर काफ़ी यकीन रखता हूँ और में नही चाहता कोई भी उस कपड़े का ग़लत यूज़ करे.....

कामली--जनाब यहाँ के रिवाज के अनुसार कोठे के चारो तरफ घुमा लेने के बाद वो कपड़ा हमारे किसी काम का नही होता वैसे तो हम उसे जला देते है लेकिन अगर आप उसे अपने साथ लेजाना चाहे तो ले जा सकते है.....

 
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