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परिवार का प्यार ( रिश्तो पर कालिख) complete

हम दोनो जूस पीने के बाद वापस घर की तरफ बढ़ जाते है...घर पहुँच कर में मेरे रूम में घुस जाता हूँ और अपनी बुक्स उठा कर पढ़ने बैठ जाता हूँ....कल से कॉलेज जाना था .

थोड़ी देर बाद नीरा मेरे रूम में आती है....

नीरा--क्या बात है भैया आज बुक्स कैसे उठा ली...

में--कुछ नही यार कल से कॉलेज जाना है...और पता नही वहाँ कुछ पढ़ाया गया है भी या नही... तेरा आज स्कूल कैसा रहा वहाँ कोमल के लिए बात करी तूने....

नीरा--हाँ भैया प्रिन्सिपल ने कल कोमल को स्कूल बुलाया है और कुछ फ़ौरमलिटी है जो में करवा दूँगी कोमल के साथ जाकर...

में--चल अच्छा किया....अब कल में भी दीक्षा दीदी के लिए कॉलेज में बात कर लूँगा...

नीरा--भैया एक किस मिलेगी क्या....

ये सुनते ही में उसे कस कर बाहो में भर लेता हूँ और उसके गालो पर खूब सारी किस कर देता हूँ....बदले में नीरा भी मेरे गाल पर किस कर देती है....

में--मिल गयी किस??अब जा यहाँ से थोड़ी देर पढ़ने दे मुझे....और मम्मी को मेरे लिए एक कॉफी बनाने के लिए बोल दे...

नीरा--मम्मी को क्यो परेशान करते हो....में ही आपके लिए कॉफी बना कर ले आती हूँ...

में-- मुस्कुरा कर नीरा से कहता हूँ....तू मम्मी से बोल कर देख अगर वो तुझे बनाने दे तो बना ला....

उसके बाद नीरा रूम से निकल कर सीधा किचन में चली जाती है वहाँ मम्मी उसे मिल जाती है....

नीरा--मम्मी में भैया के लिए कॉफी बना रही हूँ आप भी लोगि....

मम्मी--कॉफी में बना देती हूँ....तुझे अगर पीनी है तो बोल दे मुझे....

नीरा--ठीक है मेरे लिए भी एक फुल मग कॉफी का बना दो...उसके बाद नीरा वहाँ से उछलती कुदति बाहर निकल जाती है....

तभी दीक्षा अंदर किचन में आजाती है....

दीक्षा--ताई जी आप क्या बना रही हो क्या में आपकी कुछ मदद करूँ....

मम्मी--नही बेटा में बना लूँगी....तेरी माँ क्या कर रही है....

दीक्षा--उनके सिर में दर्द हो रहा है...वो लेटी हुई है....आप बोलो तो बुलाउ उनको....

मम्मी--नही आराम करने दे....तुझे कॉफी पीनी है तो बोल दे में कॉफी बना रही हूँ....और कोमल और नेहा से भी पुच्छ कर आजा...

दीक्षा--ठीक है ताई जी...में अभी पूछ कर आजाती हूँ....

मम्मी--ये ताई ....ताई क्या लगा रखा है तूने या तो मम्मी बोल या फिर बड़ी मम्मी....दुबारा ताई बोली ना तो देख लेना...

दीक्षा--ठीक है ताई जी.....ओह्ह्ह इम सॉरी बड़ी मम्मी जी....

मम्मी--चल भाग यहाँ से और सब से पूछ कर बता दे मुझे....

उसके बाद वो सब से पूछ कर आजाती है बस चाची कॉफी के लिए मना करती है और बाकी सब कॉफी माँग रहे थे....दीक्षा जब रूही से पूछने के लिए रूम में जाती है...तो रूही भी दीक्षा के साथ किचन में आ जाती है...

रूही--मम्मी मुझे ही बोल देती कॉफी बनाने के लिए...आपने क्यो तकलीफ़ करी...

मम्मी--में बना लूँगी तो घीस नही जाउन्गि...चल अब तू तेरा काम कर और जब आवाज़ दूं तब कॉफी लेने आ जाना तेरी...

तेरे चाचा चाची भी शाम को निकलने वाले है वापस गाँव के लिए उनके लिए भी खाना बनाना है मुझे...

रूही--मम्मी आप से कुछ ज़रूरी बात करनी है...क्या आप थोड़ी देर बाद मुझ से बात कर सकती हो....

मम्मी--बोल क्या ज़रूरी बात है...यहीं बोल दे...

रूही--मम्मी रूम के अंदर बोलने वाली बात है किचन में कैसे बोल दूं....

उसके बाद रूही मम्मी के गाल पर किस करती है और किचन से बाहर चली जाती है.

सभी अपने अपने रूम्स में आ गये थे....में पढ़ता पढ़ता कॉफी की चुस्किया भी लगता जा रहा था....आज मेरा मन काफ़ी शांत था....

 
उधर मम्मी भी अपने रूम में चली गयी थी....और उनके पीछे पीछे रूही भी अंदर आ गई थी....

रूही ने मम्मी को पिछे से हग कर लिया था और अपने दोनो हाथ उनके बड़े बड़े बूब्स पर रख कर मसलने लगती है....

मम्मी--रूही क्या हुआ आज तू बड़े मूड में लग रही है...

रूही अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मम्मी की चूत सारी के उपर से ही भींच देती है दूसरे हाथ उनके ब्लाउस में डालकर उनका बूब मसल्ने लग जाती है....

रूही--आप की याद मुझे बहुत आई...मन कर रहा है अभी आपके सामने अपने सारे कपड़े उतार कर आपसे मेरी चूत चुस्वा....

मम्मी--चल अब मुझे छोड़ जो करना हो वो रात को कर लेना...मुझे एक बात बता तुम तो कल शाम को आने वाले थे फिर इतनी रात को कैसे आए वहाँ से....

रूही--में अपने और आपके लिए किसी चीज़ का बंदोबस्त कर रही थी हमेशा के लिए....

रात को जब में जय के रूम में गयी उसे देखने के लिए और फिर मेरा मन नही माना तो मैने उसके होंठो पर किस करदी....जब मैने उसे किस किया तब उसमें से शराब की काफ़ी ज़्यादा स्मेल आरहि थी....मैने इस मोके का फ़ायदा उठा कर जय का लंड भी चूसा और उसका पानी भी पिया....

अब जल्दी ही हम दोनो की चूत में उसका लंड होगा....आपने तो कभी मेरी चूत में उंगली भी नही डाली....लेकिन कल जय का लंड देख कर,मेरी चूत उसका लन्द लेने को तड़प रही है....

हरिद्वार में जब हम निकलने वाले थे तब मुझे पता पड़ा था कि वहाँ कोई बड़ा तांत्रिक आया हुआ है...मैने जब उन्हे अपनी परेशानी बताई तब उन्होने एक दवाई मुझे जय के खाने मिलाने के लिए दे दी थी....जिस की वजह से जल्दी ही हम दोनो की चूत की आग ठंडी हो सकेगी.....

तड़ाक्ककक......एक ज़ोर दार थप्पड़ से रूही का पूरा वजूद झन्झना उठता है....

मम्मी--तेरी हिम्मत कैसे हुई जय को कुछ भी ऐसा वेसा खिला देने की....कहाँ है वो दवाई लेकर आ मेरे पास उसे....

रूही ने अपनी ब्रा के अंदर छुपि हुई एक पूडिया निकाल कर दे दी....और अपने गालो को मसल्ते हुए कहने लगी....

रूही--में जानती हूँ आप मुझे जय से सुख लेने नही दोगि और ना ही खुद लोगि....लेकिन में उसे अपना बना कर ही रहूंगी....

मम्मी--तू शायद जानती नही है तेरे जाने के बाद यहाँ क्या क्या हंगामा हुआ है...

और मम्मी रूही को नीरा से लेकर चाची तक की सारी बाते बताती चली जाती है....

रूही को जब ये सारी बाते पता चलती है तो उसको रुलाई फूट पड़ती है...वो मम्मी के पैरों में बैठकर ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है....

लेकिन मम्मी की आँखो में बस रूही के लिए नफ़रत ही थी....

रूही--मम्मी मुझे माफ़ कर दो....अगर मुझे ऐसा पता होता कि मेरे जाने के बाद यहाँ इतने तूफान आगये है....तो में कभी भी ऐसी हरकत नही करती....

मम्मी--तेरी ये ग़लती जय को पागलपन के अंधेरे में धकेल देती....तूने देखा नही था उसका वो रूप अगर देख लेती तो वही बेहोश हो जाती...मैने नीरा और जय की शादी के लिए हाँ इस लिए करी क्योकि नीरा उसे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करती है....उसे जय के जिस्म का लालच नही है....

रूही--मगर में भी जय से प्यार करती हूँ....में भी उसके लिए जान दे सकती हूँ....और रही बात हवस की तो ये तोहफा आपने ही मुझे बचपन में दे दिया था.....में जय के बिना ज़िंदा नही रह सकती....

मम्मी को भी अब शायद अपनी ग़लतियो का एहसास होने लगा था....कैसे उसने खुद के स्वार्थ के लिए उस मासूम को हवस के गहरे दल दल में धकेल दे दिया था....

 


मम्मी रूही को उठाते हुए...

मम्मी--रूही जो हुआ वो ग़लत था लेकिन उसके बाद तू जो कर रही थी ये उस से भी ज़्यादा ग़लत है....अगर तू जय से प्यार करती है तो उसका दिल जीत....उसका प्यार जीत....तभी तू उसे पा सकती है....लेकिन इस तरह टोने टॉट्को से तू उसका शरीर तो पा लेगी लेकिन कभी उसका प्यार नही पा पाएगी....

बोल मुझे तुझे क्या चाहिए अगर तुझे जय का शरीर चाहिए तो मेरे बोलने भर से वो तेरे साथ वो सब कुछ कर लेगा जो तू चाहती है....लेकिन अगर तुझे उसका प्यार चाहिए तो ये काम तुझे खुद करना पड़ेगा....

अब अपने आँसू पोछ और जो तूने किया है उसके बारे में सोच.....और सोच जय का प्यार तू कैसे पा सकती है....

उसके बाद मम्मी रूही को रूम के अंदर छोड़ कर बाहर निकल जाती है...

और अंदर रूम में रूही बेतहाशा रोए जा रही थी.....बस रोए जा रही थी....

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अब सब कुछ बदल गया था...मेरा हर रिश्ता बदल गया था....जिस बहन से में अपनी जान से ज़्यादा प्यार करता था वो अब मुझे पति के रूप में देखने लगी थी....चाची के साथ जो मैने किया.....उस वजह से एक रिश्ता और बदल गया....चाची की कोख में अपना बीज रोपीत कर चुका था....कुछ रिश्ते अभी और बदलने वाले थे....लेकिन रिश्ते बदलते बदलते कहीं में तो नही बदल जाउन्गा....कहीं में उस प्यार को तो नही भूल जाउन्गा जो मुझे मेरे संस्कारों में मिले ....ये क्या बेचैनी छा गयी है मेरे जीवन में....कैसे ख़तम होगा ये अध्याय....कौन निभाएगा मेरा साथ....क्या बस यही लिखा है मेरे जीवन में.....

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मम्मी--जय उठ जा रात होने वाली है कब तक सोता रहेगा ऐसे ही....

में--मम्मी पढ़ते पढ़ते मुझे कब नींद आ गयी कुछ पता ही नही चला ....

मम्मी--चल हाथ मुँह धो ले....और जल्दी से खाना खाने आजा...

उसके बाद तेरे चाचा चाची भी थोड़ी देर में जाने वाले है....

में-- मम्मी में खाना उनके जाने के बाद खा लूँगा अभी कुछ खाने का मन नही है....

मम्मी--ठीक है तेरा जब मन करे तब खा लेना...लेकिन फ्रेश होकर बाहर तो आजा तेरे चाचा कब से तेरा वेट कर रहे है...

में--ठीक है मम्मी में थोड़ी देर में आता हूँ...

उसके बाद में हाथ मुँह धोकर बाहर चाचा के साथ सोफे पर बैठ जाता हूँ...

में--चाचा हो गया आपका काम....ले लिए खाद और बीज...

चाचा--हाँ बेटा यहाँ अच्छी किस्म के बीज मिल्गये....और अगर इस बार बारिश अच्छी हुई तो फसल भी देखने लायक होगी...

उसके बाद चाचा अपने बेग में से 10 लाख रुपये निकाल कर मेरे हाथ मे रख देते है...

में चाचा जी ये पैसे किस लिए...

बेटा ये वैसे तो तेरे पापा की अमानत थी लेकिन अब ये तेरी है....में अपने हिस्से की खेती के साथ साथ तेरे पापा वाले हिस्से में भी खेती करता था....ये उसी खेती के हिस्से के पैसे है जो में जमा करता रहता था....पहले कभी उस बात पर ध्यान नही दिया मैने लेकिन जब में यहाँ आरहा था तब मुझे अहसास हुआ कि मुझे तेरे पापा के हिस्से वाले पैसे भी देने चाहिए....

में--चाचा जी ये पैसे में नही रख सकता...ये आपकी मेहनत का फल है अगर आप उस ज़मीन पर मेहनत नही करते तो वो बंज़र पड़ी रहती....इसलिए इसे आप ही रखिए...

चाचा--बेटा हिस्से का धन चाहे मेहनत का हो या ज़मीन का वो हिस्सा ही रहता है....अगर तू ये पैसे मुझ से नही लेगा तो में हमेशा तुम्हारा कर्ज़दार ही बना रहूँगा....इसलिए तू ये पैसे रख ले....

उसके बाद चाचा ज़बरदस्ती वो दस लाख रुपये मेरे हाथो में रख देते है....

 
में मम्मी को आवाज़ लगाकर अपने पास बुलाता हूँ और उनसे ये कहता हूँ...

में--मम्मी ये पैसे कल कोमल और दीक्षा दीदी का बॅंक में खाता खुलवाकर एफडी करवा देना और अपनी तरफ से भी 5-5 लाख रुपये मिला देना....

मम्मी--मुस्कुरा कर....मुझे तुझ से यही उम्मीद थी बेटा अपने परिवार का ध्यान अब तुझे ही रखना है और तूने पहला फ़ैसला ही बिल्कुल सही लिया है में कल तुम लोगो के स्कूल कॉलेज से आने के बाद इन्हे बॅंक ले जाउन्गि....

चाचा--जय है तो तू भी तेरे पापा की तरह जिद्दी का जिद्दी....अच्छा मेरा एक काम करेगा जहाँ से में ये बीज लेकर आया था उनके लड़के की परसो शादी है....मैने जब उन्हे बताया कि में किशोर भाई साब का छोटा भाई हूँ तो उन्होने ज़िद्द करते हुए अपने बेटे की शादी का कार्ड थमा दिया अब में तो वहाँ जा पाउन्गा नही इसलिए एक बार वहाँ जाकर उन्हे शादी का तोफ़ा ज़रूर दे आना...

में--ठीक है चाचा जी में चला जाउन्गा...

चाचा--बेटा वो कार्ड मैने तेरी मम्मी को दे दिया है तू वहाँ जाना भूल मत जाना क्योकि ये बुलावा मुझे नही है बल्कि तेरे पापा के सम्मान को था इसलिए अपने पापा के मान के लिए तू वहाँ ज़रूर चले जाना....

में--ठीक है चाचा जी में चला जाउन्गा आप चिंता ना करे...

उसके बाद चाचा और चाची अपना समान लेकर और हम सभी बच्चो को अपने गले से लगाकर विदा लेते है....

उसके बाद में भी अपनी बाइक उठा कर बाहर निकल जाता हूँ...मुझे डॉक्टर के यहाँ से वो डीयेने रिपोर्ट्स लेनी थी...जो कि में सुबह लेना भूल गया था.....

में हॉस्पिटल पहुँच गया था डॉक्टर आलोक अभी किसी मरीज को देखने में व्यस्त थे तब तक में बाहर ही वेट करने लग गया था....

में अपने आस पास दीवारो पर टॅंगी पंटिंग्स देख रहा था....तभी मेरी नज़र एक फॅमिली ट्री पर बनी हुई पैंटिंग पर पड़ी....

उसमे ट्री की रूट्स को पुरखो के रूप में दर्शाया गया था....और तने को फादर के रूप में....उस ट्री की ब्रॅंचस सन्स के रूप में थी और उन ब्रॅंचस में से छोटी छोटी ब्रॅंचस और निकल रही थी जो सन्स के सन्स की थी.....

तभी एक चपरासी मेरे पास आजाता है और कहता है....

चपरासी--डॉक्टर साहब आपको बुला रहे है....अब आप उनसे मिल सकते है....

में--ठीक है काफ़ी जल्दी फ्री हो गये...में आता हूँ...

इतना कह कर में अपनी जगह से उठ गया और डॉक्टर आलोक के कॅबिन की तरफ़ बढ़ गया....

डॉक्टर--आओ जय....लगता है तुम सुबह आना भूल गये थे....कोई बात नही....ये रिपोर्ट्स रेडी है तुम इन्हे ले जा सकते हो....

में--सर मुझे आप से एक सवाल पूछना है...मैने जो आपको डीयेने सम्पेल्स दिए थे वो एक पिता के एक बेटे के और दो बहनों के थे जो कि आपस में मिल रहे थे....लेकिन में एक बेटे के सम्पेल्स देना भूल गया क्या वो ज़रूरी है....

डॉक्टर--अगर कोई ऐसी वेसी प्रॉब्लम. नही है तब तक तो ठीक है लेकिन अगर उस बेटे का डीयेने भी मिल जाता तो अच्छा होता....वैसे तुम कहना क्या चाहते हो सॉफ सॉफ कहो....

 
में--जो मेरा दोस्त है....उसका एक और भाई और चार बहने है....2 बहने दूसरी माँ से है और दो बहने एक अलग माँ से हालकी उनका पिता एक ही है....लेकिन जो सब से बड़ी बात है....जो सबसे बड़ा बेटा है उस से ही छोटे बेटे का जनम हुआ है....लेकिन जो मुख्य पिता है उसके डीयेने सभी बच्चो में ही ये आपकी रिपोर्ट्स कहती है....

अगर छोटे बेटे का बड़ा भाई ही उस छोटे बेटे का बाप हुआ तो क्या डीयेने में कुछ बदलाव होंगे????

डॉक्टर--बदलाव तो बिल्कुल होंगे....मान लो तुम्हारे और तुम्हारे पापा का डीयेने एक जैसा है लेकिन जो तुम्हारे पापा का डीयेने होगा वो थोड़ा सा अलग तरह का होगा....उसी तरह मान लो अगर तुम्हारा जन्म तुम्हारे भाई से हुआ है....तो उसका डीयेने जाँचे बिना में....ये साबित नही कर सकता कि तुम तुम्हारे पापा की पैदाइश हो या भाई की......

डॉक्टर की बात सुन कर मेरे दिमाग़ में हज़ारो तरह के सवाल उठ खड़े हुए....मुझे सोच में डूबा हुआ देख कर....

डॉक्टर--जय तुम एक काम करो मुझे तुम्हारे दोस्त के बड़े भाई का डीयेने भी लाकर दे दो और वो सारे सॅंपल भी एक बार फिर से लेकिन इस बार वो सारे सॅंपल एक अलग एन्वेलप में रिश्ते के नाम के साथ लिख कर लाना....तुम्हारी बातो से लग रहा है ये रिपोर्ट्स अब किसी काम की नही है....इसलिए कल शाम को तुम वो सॅंपल ले आना ताकि में बिल्कुल ठीक ढंग से बड़े से छोटे क्रम में उन्हे जमा सकूँगा....यानी कौन पिता है कौन बड़ा लड़का है कौन छोटी बहन है कौन बड़ी बहन है इस तरह से एक लाइन से में वो रिपोर्ट बना दूँगा....

में--ठीक है सर कल तो में आपके पास आ नही सकूँगा....2 दिन बाद में वो सारे सम्पेल्स एक बार फिर से आपके सामने ले आउन्गा.... अब में चलता हूँ सर...मुझे माफ़ करना में आपका कीमती समय व्यर्थ कर रहा हूँ...

डॉक्टर--कोई बात नही जय....ये तो मेरा काम है...अब तुम जा सकते हो...

और इसके बाद में वहाँ से निकल कर आ गया....समझ में नही आरहा था मुझे क्या करना चाहिए था....क्या मुझे एक बार फिर से गढ़े मुर्दे उखाड़ने होंगे....या लाइफ जैसे चल रही है वैसे ही चलने दी जा सकती है.....लेकिन किसी भुलावे में खुद को रखने से अच्छा तो यही है कि में एक बार फिर से सब सॅंपल्स की रिपोर्ट बनवा ही लूँ....

में अब अपने घर पहुँच चुका था....लेकिन वक़्त ने मुझे फिर से उसी दौराहे पर लाकर पटक दिया था....कौन हूँ में....?? बस एक यही सवाल मेरे दिमाग़ में छाया हुआ था.... उस सवाल के साथ साथ साधु बाबा की कही हुई वो बात भी याद आरहि थी और वही बात मेरे दिमाग़ को विचलित होने से बचा रहा था....

घर के अंदर आकर में सीधा अपने रूम के अंदर घुस गया और अपने कपड़े चेंज करने लग गया.....मेरे पिछे पीछे नीरा भी कमरे के अंदर आ चुकी थी.... उसने आते ही मुझे पीछे से पकड़ लिया....में इस वक़्त सिर्फ़ अपनी वी शेप अंडरवेर में था....

उसके कोमल हाथ मुझे मेरे सीने पर काफ़ी सुकून दे रहे थे मैने अब पलटते हुए उसे अपनी बाहो में भर लिया....

में--क्या बात है आज मुझ पर बड़ा प्यार आ रहा है....

नीरा--ये प्यार तो हमेशा से आपके लिए ही है...बस आप मुझे प्यार दिखाने नही देते...

में--मैने कब रोका है तुझे....

नीरा--आपने रोका नही लेकिन कभी करने भी नही दिया....कम से कम एक किस तो में आपके होंठो पर कर ही सकती हूँ जब तक हमारी शादी नही हो जाती...

में--अच्छा तो अब तू अपनी लिपस्टिक मुझे खिलाना चाहती है....

नीरा--मेरा सब कुछ आपका है....मेरे होंठ मेरा शरीर और मेरी आत्मा ये सब आपके लिए ही बने है.....बस में चाहती हूँ हम जल्दी से जल्दी शादी कर ले....ताकि में अपना सारा प्यार आप पर लूटा सकूँ...

में--बस का मेरी प्यारी राजकुमारी वरना मुझे अभी पंडित बुला कर शादी करनी पड़ेगी....

नीरा--तो फिर बुला लो....में अब आपसे ज़्यादा दिन तक ऐसे दूर नही रह सकती....

में--अब छोड़ मुझे वरना मम्मी आकर तुझे रूम में बंद कर देगी....और ना तुझे मेरे पास आने देगी..,..

ये बात सुनकर नीरा मुस्कुरा देती है....और मेरे गालो पर किस करके वहाँ से चली जाती है....

नीरा का मेरे प्रति प्यार लगातार बढ़ता ही जा रहा था....वो मुझे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करने लग गयी थी......

 
ये बात सुनकर नीरा मुस्कुरा देती है....और मेरे गालो पर किस करके वहाँ से चली जाती है....

नीरा का मेरे प्रति प्यार लगातार बढ़ता ही जा रहा था....वो मुझे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करने लग गयी थी......

में बाहर हॉल में आकर बैठ गया था वहाँ दीक्षा भी बैठी हुई थी और टीवी देख रही थी....

में--दीदी कल कॉलेज का आपका पहला दिन है आइ थिंक आपने अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली होगी...

दीक्षा--हाँ जय भैया.,,,तैयारी तो लगभग पूरी हो गयी है....बस अब तो वहाँ जाने का वेट कर रही हूँ....

में--में आपसे एक बात कहना चाहता.....कॉलेज में और स्कूल लाइफ में काफ़ी अंतर होता है....इसलिए अपने दोस्त हमेशा चुन कर बनाना....

दीक्षा--भैया में ये बात जानती हूँ...आप चिंता मत करे...

इतनी देर में मम्मी मेरे लिए खाना लेकर आ गयी थी....और में वही बैठ कर खाना खाने लगता हूँ.......

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अगले दिन सुबह....रूही की आवाज़ मुझे नींद से जगा रही थी....आज कॉलेज जो जाना था...

में नीरा और कोमल एक बाइक पर थे और रूही और दीक्षा अपनी अक्तिवा पर...

रूही और दीक्षा को मैने कॉलेज जाने का बोल दिया था और कोमल और नीरा को उनके स्कूल छोड़कर उस स्कूल के प्रिन्सिपल से भी मिलना था....

वहाँ के प्रिन्सिपल से मिलकर में जल्दी ही कॉलेज भी पहुँच गया....वहाँ कुछ लेक्चर मैने अटेंड किए और कॅंटीन में आकर बैठ गया.....

कॅंटीन में उस दिन हुई घटना के बाद काफ़ी लोग मुझे जानने लग गये थे...इस लिए वहाँ पहुँचते ही कुछ लड़के लड़कियाँ मेरे पास आकर बैठ गये और पापा की डॅत का अफ़सोस जताने लग गये....उसके बाद बाकी सब चले गये और बस 2 लड़के और एक लड़की मेरे साथ ही बैठे रहे...एक लड़के का नाम अरमान था दूसरे का जॉनी....और जो लड़की थी उसका नाम मीना....

अरमान--जय भाई उस दिन जो कुछ भी हुआ उसके बाद पूरा कॉलेज आपका फॅन हो गया है.....

मीना--आपने उस दिन अच्छा सबक सिखाया था उन सब लड़को को....आपकी वजह से ही यहाँ रेजिंग बंद हो सकी है...

में--मैने ऐसा कुछ भी नही किया बस जो कुछ भी किया वो एक सेल्फ़ डिफेन्स में मुझ से हो गया...

मीना--क्या हम लोग आपके दोस्त बन सकते है....वो आक्च्युयली में हम तीनो ही इस शहर से नही है इस लिए यहाँ किसी को ज़्यादा जानते भी नही है.....

में--अरे ये भी कोई पूछने की बात हुई...वैसे भी मेरा इस कॉलेज में कोई दोस्त नही है....

अरमान--तो फिर आज के कॉफी और समोसे मेरी तरफ से....

में--हाँ....हाँ...क्यो नही मुझे तो कब से भूख लग रही थी....इसी बहाने समोसे की पार्टी भी हो जाएगी....

उसी समय रूही और दीक्षा भी वहाँ आ गये....अब वो तीनो मेरे दोस्त बन चुके थे इसलिए मैने उनसे कुछ ना छुपाते हुए रूही और दीक्षा का इंट्रो उन्हे दे दिया.....

मीना--मुझे तो लग रहा था में अकेली पड़ जाउन्गि इस गॅंग में.....अब तो बराबर की टक्कर हो गयी है....हम भी तीन और तुम लोग भी तीन....

और उसके बाद इसी तरह हँसते मुस्कुराते मेरे कॉलेज का दूसरा दिन ख़तम हो गया था....बड़ा अच्छा लग रहा था....नये दोस्त बना कर....इतने दिनो से लाइफ की गाड़ी जैसे रुक ही गयी थी वो फिर से चल पड़ी अपनी पूरी रफ़्तार से....

हम लोग वापस घर के लिए निकल चुके थे नीरा और कोमल का भी स्कूल अब छूटने ही वाला था....इसलिए में स्कूल के दरवाजे के बाहर ही उन दोनो का वेट करने लग गया.....दीक्षा और रूही को कुछ शॉपिंग करनी थी इसलिए वो सीधा मार्केट चली गयी....

तभी मुझे नीरा और कोमल भी आते हुए दिखाई देगयि....नीरा मेरे पीछे वाली सीट पर मुझ से चिपक कर बैठ गयी और कोमल नीरा के पीछे...नीरा बार बार मेरे पेट पर गुदगुदी करती जा रही थी....साथ ही साथ अपने बूब्स भी मेरी पीठ पर रगडे जा रही थी....जबकि कोमल लगातार स्कूल के पहले दिन क्या क्या हुआ ये बताती जाने लगी....

हम लोग अब घर पहुँच गये थे....

 
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