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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

मैंने अपना सर उठाकर देखा तो मुझे बड़ी हैरानी हुई कि वो यूँ इस तरह हमारे सामने बिना दुपट्टा लिए ही चाय देने आई थी जिस पे काशी ने भी उसे कुछ बोलना जरूरी नहीं समझा था। मेरे लिए हैरानी की बात इसलिए थी कि हमारे मज़हब में ये चीज बड़ी खराब समझी जाती है कि कोई लड़की किसी भी अपने भाई या बाप के दोस्त के सामने इस तरह बिना दुपट्टे के जाए। क्योंकी बाहर वालों से हटकर घर वाले ही ऐसा नहीं होने देते, क्योंकि ये कोई अच्छी बात नहीं थी।

मैं नीलू की तरफ देखे जा रहा था हैरानी भरी नजरों से।

जिस पे नीलू ने काशी की तरफ देखा और बोली- “भाई लगता है तुम्हारे दोस्त ने कभी कोई लड़की नहीं देखी है। कभी, जो मुझे यूँ घूरे जा रहा है।

काशी उसकी बात सुनकर हँस दिया और बोला- “तुम ऐसा करो, अभी जाओ यहाँ से हमें कुछ बात करनी है..”

तो नीलू रूम से बाहर घर की तरफ चल दी और दरवाजा के पास जाकर वापिस मुड़ी और काशी से बोली- “भाई अगर तुम्हारा दोस्त रात यहाँ ही रहेगा तो मैं रात को पूरे घर में अकेली कैसे रहूंगी...”

काशी ने कहा- “यार, उसका भी कुछ करते हैं अभी तुम जाओ...”

तो नीलू रूम से निकल गई। तो काशी ने चाय लेते हुये कहा- “यार वो छोटी और अम्मी अब्बू शादी में गये हुये हैं, एक हफ्ते के लिए तो घर पे मेरे साथ बस नीलू ही रह गई है और रात को इसे काफी डर लगता है अकेले में...”

मैंने काशी की बात का कोई जवाब नहीं दिया और खामोश बैठा चाय पीता रहा।

तो काशी चाय खतम करके उठा और बाहर दुकान में चला गया सिगरेट लाने के लिए।

उसके जाते ही नीलू रूम में आ गई और खाली कप उठाने लगी और बोली- “वैसे आप अगर हँसते रहो तो अच्छे लगोगे..."

मैंने नीलू की तरफ देखा और अचानक मेरे दिल में ख्याल आया कि क्यों ना देखा जाए नीलू पे लाइन मारकर तो मैंने कहा- “अगर मैं मुश्कुराने लगूँ तो आप मेरे साथ थोड़ा टाइम बैठोगी?”

नीलू ने फौरन कप वापिस रखे और मेरे सामने जहाँ कुछ देर पहले काशी बैठा था बैठ गई और बोली- “अगर आप ज्यादा फ्री ना होने का वादा करो तो आप जब तक यहाँ हो मैं यहाँ बैठने को तैयार हूँ..”

मुझे नीलू की बात से बड़ी हैरानी हुई, लेकिन मैंने इसका इजहार नहीं किया और बोला- “लेकिन काशी शायद इस बात को बुरा समझे कि आप मेरे साथ बैठोगी?”

 
तो नीलू मेरी बात सुनकर हँस दी और बोली- “नहीं सन्नी जी, मैं अपने भाई को अच्छी तरह जानती हूँ। उसे जरा भी बुरा नहीं लगेगा और वैसे भी हम यहाँ सिर्फ बातें ही तो करेंगे जिसपे कोई भी ऐतराज नहीं कर सकता..."

अभी हम ये बातें ही कर रहे थे कि काशी सिगरेट लेकर आ गया और नीलू को मेरे सामने बैठा देखकर बोला यार नीलू, तुम मेरे इस बेचारे दोस्त को तो बख्श ही डालो ये बड़ा भोला है अभी...”

नीलू मेरी तरफ बड़े अजीब से अंदाज में देखते हुये बोली- “भाई,मैं कौन सा आपके दोस्त को खा जाऊँगी। हम बातें ही तो कर रहे हैं और वैसे भी आपके दोस्त ने ही कहा था बातें करने को..”

काशी- “अच्छा ठीक है, अभी तुम जाओ यहाँ से और खाना तैयार करो तब तक हम कुछ बातें कर लें..”

नीलू कप उठाकर रूम से बाहर चली गई तो काशी ने दरवाजे को लाक किया और मेरे सामने आकर बैठ गया और बोला- “हाँ यार सन्नी, अब जरा बातें हो जायें खुलकर कि आखिर तुझे परेशानी क्या है?"

मैं कुछ देर तक काशी की आँखों में झाँकता रहा और फिर एक ठंडी साँस छोड़ते हो बोला- “तू ने अभी तक वादा नहीं किया मेरे साथ कि आज मैं जो बात तुम्हें बताना चाहता हूँ, तू उस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा, चाहे हमारी दोस्ती रहे या ना रहे.."

काशी- “देख यार सन्नी, अब जब तू ने खुद खुलकर बात करने की सोच ली है तो पहले तो मैं तुम्हें ये बता दें कि मैं जानता हूँ कि तू यहाँ क्या बात करने आया है? लेकिन फिर भी मैं अपनी माँ की कशम खाकर कहता हूँ कि चाहे मेरी जान ही क्यों ना चली जाए, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा...”

मैं थोड़ा हैरान होते हुये बोला- “नहीं काशी, तुम नहीं जानते कि मैं आज यहाँ किसलिए आया हूँ...”

काशी- “देख सन्नी, मैं कशम भी खा चुका हूँ और वादा भी करता हूँ, लेकिन साथ ही ये भी बता दें कि आज मैं तेरे सामने कुछ अपने राज भी बताऊँगा तुम्हें, जिसके बारे में कोई नहीं जानता, मेरे घर वाले भी नहीं... और बाकी रह गई तेरी ये बात कि मैं नहीं जानता... तो सुनो कि तुम यहाँ फरी के सिलसिले में आए हो, और बात करने के लिए ही आये हो। और तुझे एक सच ये भी बता दें कि जब मैं फरी के साथ रूम में था तो वहाँ उसने मुझे अपने मुहल्ले का नाम भी बताया था। लेकिन मुझे तब भी समझ में नहीं आई थी। लेकिन अभी तेरे आने से कुछ पहले मैंने फरी से बात करते हुये तेरा पूछा था कि वो तुम्हें जानती है?

तो उसने कहा “हाँ.. लेकिन ये नहीं बताया कि कैसे जानती है?

लेकिन जब मैंने कुछ ज्यादा जोर दिया तो उसने जो बताया वो मेरे लिए बड़ा ही हैरान करने वाला था।

मैं काशी की बात सुनकर अपना सर थामकर बैठ गया और बोला- “देख यार काशी, ये अच्छा नहीं हुआ। अगर उसे पता चला कि मैंने खुद तुम्हें उसे पटाने के लिए बोला था तो वो और कुछ नहीं समझेगी बल्की सारी जिंदगी मेरे साथ बात भी नहीं करेगी और मैं उसका सामना भी नहीं कर सकूँगा..."

काशी- “देख सन्नी, जो होना था वो हो गया, उसे हम वापिस नहीं ला सकते। लेकिन अब हम अगर चाहें तो फरी बहन को कहीं और किसी के साथ बदनाम होने से बचा सकते हैं...”

मैं काशी की तरफ देखते हुये बोला- वो कैसे?

 
काशी- “देख सन्नी, मेरी बात का गुस्सा नहीं करना, अगर बुरी लगे तो मुझे मना कर देना और बात खतम हो जाएगी और इसमें हम सबका ही फायदा है...”

मैं- “तू बोल जो बोलना है, मैं पूरी बात सुनूंगा तेरी और तेरी किसी बात पे गुस्सा भी नहीं करूंगा.”

काशी- “देखो सन्नी, ये बात तुम भी जान चुके हो और मैं भी कि फरी बहन ने अब जिस चीज का मजा चख लिया है, वो अब उसे रुकने नहीं देगा और अगर हम कुछ नहीं करेंगे तो वो किसी और के पास चली जाएगी।

और ये तो हमारी खुशकिश्मती है कि फरी बहन सबसे पहले अंजाने में ही सही, कहीं और नहीं गई। तो मैं चाहता हूँ कि फरी बहन का मजा हम दोनों खुद ही पूरा करें, तो फरी बहन को बाहर चुदवाने और बदनाम होने से भी बचा सकते हैं.” काशी इतना बोलकर चुप हो गया और मेरी तरफ देखने लगा।

लेकिन मैं कोई भी संकेत नहीं देना चाहता था कि जिससे उसे पता चले कि मेरे दिल में क्या है?

और जब उसे कुछ समझ में नहीं आया तो काशी ने कहा- “सन्नी, क्या सोच रहा है यार कुछ बता तो सही?”

मैंने सर झुका लिया और थोड़ी देर सोचने के बाद अपना सर उठा लिया और बोला- “लेकिन ये सब होगा कैसे कि फरी तेरे साथ-साथ मेरी तरफ भी आ जाए? क्योंकी आखिर वो बहन है मेरी। कैसे होगा ये?”

काशी मेरी बात सुनकर खुश हो गया और उठकर मेरे पास आया और मुझे हाथ से पकड़कर उठा लिया और अपने साथ लिपटा लिया और बोला- “यार सन्नी, मुझे उम्मीद नहीं थी कि तू भी मेरी तरह बहनचोद बनेगा...”

और हाहाहाहा करके हँसने लगा।

फिर काशी ने जो अभी बात की थी उससे मुझे काफी जोर का झटका भी लगा था।

कुछ देर तक ऐसे ही काशी मुझे अपने साथ लिपटाए भींचता रहा और फिर मुझे छोड़कर बोला- “यार तू क्यों परेशान हो रहा है? मैं हूँ ना... सारा काम मैं करूंगा, तू बस देखता जा...”

मैं- “लेकिन यार, अगर सच पूछो तो जब से मैंने फरी बाजी को तेरे साथ चुदवाते देखा है, ये साला लण्ड बैठ ही नहीं रहा। कुछ कर यार, अब बर्दाश्त नहीं होता... जल्दी से बाजी की दिला दे..."

काशी- “सन्नी यार, कल तो नहीं लेकिन परसों तक तेरी बहन तुमसे चुदवा रही होगी ये मेरा वादा है...”

मैं- “लेकिन यार ये होगा कैसे? और अभी जब तू ने मुझे अपने साथ लिपटाया था तो तुमने कहा था कि मैं भी तुम्हारी तरह बहनचोद बनूंगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। इसका मतलब भी बता जरा?”

 
काशी हँसते हुये बोला- “यार अब जब हमारे बीच सब खुलता ही जा रहा है तो एक राज मैं भी तुम्हें बता देता हूँ, और वो ये है कि मैंने तुम्हें बताया था ना कि मैं ऐसे भाई बहन को भी जानता हूँ जो आपस में हर हद पार करके सेक्स करते हैं...”

मैं- हाँ मुझे याद है तू ने बताया था मुझे।

काशी- “तो सुन, वो कोई और नहीं मैं और मेरी बहन नीलू हैं और आज तक किसी को घर में भी इस बात का नहीं पता और मजे की बात ये है कि अगर नीलू ने अपने किसी बायफ्रेंड से चुदवाना हो तो मैं खुद उसे अपने साथ उसकी किसी दोस्त के घर जाने के बहाने ले जाता हूँ..”

मैं हैरानी से काशी की तरफ देखकर बोला- “काशी क्या तू सच बोल रहा है? मुझे यकीन नहीं आ रहा है...”

काशी- “अभी खाना तैयार होने के बाद हम दोनों तेरी बहन के साथ चैट करेंगे, जिसमें मैं उसको बोलूंगा कि नंगी फोटो भेजे अपनी। उसके बाद मैं उसे थोड़ा जेहनी तौर पे अपने इलावा किसी और से भी चुदवाने को मनाने की कोशिश करूंगा। और फिर मैं नीलू से भी पूछ लँगा कि अगर उसे तेरे साथ कोई ऐतराज ना हुआ तो आज की रात मैं और तू मेरी बहन नीलू के साथ मजे करेंगे...”

काशी की बात ने जहाँ मुझे खुश किया वहीं मेरा लण्ड भी खड़ा कर दिया था।

जिसे देखकर काशी हँस दिया और बोला- “अभी नहीं मेरी जान, क्योंकी यहाँ घर साथ-साथ हैं और गर्मियों के दिन हैं तो अक्सर लोग छत (रूफ) पे सोते हैं तो किसी की भी नजर पड़ सकती है। 10:00 बजे के बाद होगा अगर नीलू को कोई मसला ना हुआ और उसने मना ना किया तो...”

मैंने कहा- “यार, तू उसे मना ले ना प्लीज़्ज़... यार आज तो मेरा लण्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा है..."

तो काशी ने कहा- “वैसे एक बात बताऊँ.. मुझे नहीं लगता कि वो मना करेगी। इसलिए दिल छोटा मत कर। मुझे उम्मीद है कि आज की रात हम थ्री-सम जरूर करेंगे..”

उसके बाद खाना खाने तक हम ऐसे ही गप्पें मारते रहे और फिर खाना खाकर जब नीलू ने बर्तन उठा लिए तो थोड़ी देर बाद हमने लैपटाप ओन किया और काशी अपने आई.डी. से आन-लाइन हुआ तो देखा कि फरी बाजी भी आनलाइन ही थी।

काशी- हाय।

फरी- हाय जान, कैसे हो?

काशी- जान, आज की मुलाकात को याद करके लण्ड हिला रहा हूँ।

फरी- मेरी भी हालत कुछ अच्छी नहीं है, और हाँ अभी 15 मिनट बाद बात करना अभी टाइम नहीं है।

काशी- “ओके... लेकिन उसके बाद तुम्हें अपनी पिक भी भेजनी होगी...”

फरी- “ज्यादा बदमाशी नहीं, ओके...”

बाद 25 मिनट तक कोई बात नहीं हुई तो फिर फरी की तरफ से ही बात शुरू हुई।

 
फरी- अब बोलो, अब मैं फ्री हूँ।

काशी- “यार, अपनी कुछ अच्छी वाली पिक भेजो ना, प्लीज़... बड़ा दिल कर रहा है.”

फरी -नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। अगर वो पिक किसी और के हाथ लग गई तो मैं तो गई काम से..”

काशी- “यार, देखने के बाद फौरन डेलिट कर दूंगा। अब तुम इतना ट्रस्ट तो कर ही सकती हो मुझे पे...”

फरी- पक्का डेलीट कर दोगे?

काशी- हाँ... ना यार वादा करता हूँ, डेलीट कर दूंगा।

फरी- “ओके... रुको मैं भेजती हूँ अभी...” कुछ देर में ही फरी की पिक हमारे पास थी जो कि घर की छत पे बनाई हुई थी। लेकिन उसने अपना चेहरा शो नहीं होने दिया था।

काशी- यार फरी, ये क्या कुछ खुली पिक दिखाओ ना?

फरी- नहीं काशी, ये ठीक नहीं होगा।

काशी- अरे बाबा, तुम ऐसे ही बिना चेहरे के पिक भेजो ना।

फरी- ओके... मैं भेजती हूँ, रुको अभी।

उसके थोड़ी देर बाद फरी ने जो पिक भेजी, वो कुछ ऐसी थीं।।

फरी- “अब और नहीं बोलना प्लीज़...”

काशी- ओके जान, लेकिन एक बात अभी करनी है तुमसे अगर बुरा नहीं मानो तो?

फरी- हाँ बोलो, क्या बात है?

काशी- यार क्या तुम्हारा दिल करता है किसी बड़े लण्ड वाले से चुदवाने को?

फरी- “सस्स्स्सीss जानू जी, ये तो मेरे दिल की ख्वाहिश है, लेकिन क्या करूं तुम्हारे लण्ड से ही अब गुजारा करना पड़ेगा...”

काशी- अरे मेरी जान, अगर तुम चाहो तो मैं किसी के साथ मिलवा हूँ?

फरी- नो थैक्स।

काशी- लेकिन क्यों या?

फरी- मुझे अभी बदनाम नहीं होना।

 
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काशी- अरे मेरी जान, अगर तुम चाहो तो मैं किसी के साथ मिलवा हूँ?

फरी- नो थैक्स।

काशी- लेकिन क्यों या?

फरी- मुझे अभी बदनाम नहीं होना।

काशी- लेकिन अगर तुम चाहो तो ऐसा हो सकता है और बदनामी भी नहीं होगी।

फरी- वो कैसे?

काशी- “अगर तुम चाहो तो मैं रूम में बेड के बीच में एक मोटा पर्दा लगा हूँगा, जिसमें तुम्हारे पास मैं हूँगा, लेकिन दूसरी तरफ वो होगा जो तुम्हें बड़े लण्ड का मजा देगा और मजे की बात ये होगी कि तुम दोनों एक दूसरे का चेहरा भी देख नहीं पाओगे।

फरी- “रहने दो, मुझे नहीं करना है ऐसा कुछ भी। अगर कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो मैं क्या करूंगी? ना बाबा ना... मुझे डर लगता है...”

काशी- अच्छा ये बताओ? मुझ पे ट्रस्ट है या नहीं तुम्हें?

फरी- अगर तुम पे ट्रस्ट ना करती तो क्या आज मिलती तुमसे?

काशी- तो फिर भरोसा रखो कि ऐसा कुछ नहीं होगा, जिससे तुम्हारा पहचान लिए जाने का डर हो।

फरी- अच्छा अभी मैं आफलाइन होने लगी हैं, बाद में बात करूंगी।

काशी- ओके... लेकिन सोचना जरूर?

फरी- ओके... मैं सोचूंगी बाइ।

काशी- बाइ और आई लव योउ जान।

फरी- “लोव योउ टू और उम्माह..” उसके बाद फरी आफलाइन हो गई।

तो काशी ने कहा- “ले यार, तेरा काम मुझे लगता है हो ही जाएगा अब..”

तो मैंने कहा- “साले, वो तो ठीक है लेकिन अभी इसका तो कुछ सोच ये फटने को है...”

काशी हँसता हुआ उठा और बोला- “मैं अभी जाकर बात करता हूँ नीलू से, फिर तुझे बताता हूँ.." और रूम से निकल गया।

तो मैं अपने लण्ड को मसलने लगा, फरी बाजी और नीलू की फुद्दी का सोचकर। मैं वहीं बैठा अपने लण्ड को सहलाता रहा और दिल में दुआ माँगता रहा कि नीलू मना ना कर दे।

फिर काशी जब 10 मिनट के बाद वापिस आया तो उसके चेहरा पे मुझे खुशी नजर आई।

तो मैं भी खुश हो गया और पूछा- मान गई हमारी बहन?

 
तो काशी ने हाँ में सर हिलाते हुये कहा- “यार वो हमारी बातें सुनकर गई थी जब मैंने तुम्हें अपने और उसके बारे में बताया था तो उसने तैयारी भी कर रखी थी पहले से ही। वो भी दो लण्ड का मजा एक साथ लेना चाहती है...”

मैं- तो जा ना यार, अब यहाँ क्यों गाण्ड मरवा रहा है?

काशी- “चल यार आ जा फिर। आज हम दोनों अपनी बहन नीलू की फुद्दी और गाण्ड का बाजा बजाते हैं...”

मैंने वहाँ से सिगरेट और लैपटाप उठाया और काशी के साथ चल दिया। जो मुझे अपने साथ अपनी बहन नीलू के रूम में ले गया, जो कि वहाँ बेड के पास ही सर पे दुपट्टा लिए खड़ी थी। मैंने नीलू को दुपट्टा लिए हुये । देखा तो हैरानी से काशी की तरफ देखा।

तो उसने हँसते हुये कहा- “यार ये बड़ी ड्रामेबाज है, इस वक़्त ये शरमाने का ड्रामा कर रही है...”

नीलू काशी की बात पे गुस्सा होते हुये बोली- “भाई आप भी ना..” और पांव पटकते हो बेड पे चढ़कर बैठ गई। तो काशी उसके पास गया और उसके सर पे दुपट्टा ठीक करने के बाद बोला- “सन्नी, देख तो जरा मेरी बहन हम दोनों की नई दुल्हन लग रही है कि नहीं?”

मैंने हँसते हुये कहा- “हाँ यार सच पूछो तो इस वक़्त हमारी बहन दूल्हन ही लग रही है..” और इतना बोलकर मैं बेड पे नीलू के पास ही उसके पैरों की तरफ बैठ गया और काशी भी उसके बाजू में बैठ गया। फिर नीलू का दुपट्टा उतार दिया और उसे अपनी तरफ खींचकर किस करने लगा।

मैं उन दोनों को मसरूफ देखकर फिर से खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारकर नंगा होकर नीलू के पास बेड पे चला गया।

तो काशी अपनी अपनी बहन को छोड़कर खड़ा हो गया और बोला- “आ जा भाई..." और साइड पे होकर अपने कपड़े उतारने लगा।

तो मैंने बेड पे लेटकर नीलू को अपनी तरफ खींचा और उसे किस करने लगा और साथ ही उसे अपने ऊपर लिटा लिया और अपने एक हाथ से नीलू की कमीज को ऊपर उठाकर उसकी नंगी कमर पे हाथ फेरने लगा। काशी भी हमें किस करता और मस्ती करता देखकर अपने कपड़े उतारकर हमारे करीब आया और उसने आते ही नीलू की शलवार को अपने हाथों से पकड़कर नीचे को खींच दिया और अपनी बहन को नीचे से नंगा कर दिया। अब मैं । भी नीलू को छोड़कर खड़ा हो गया और उसकी कमीज भी उतार दी और नीलू को पूरा नंगा कर दिया। क्योंकी नीलू ने पैंटी और ब्रा नहीं पहनी हुई थी तो अब वो भी हमारी तरह नंगी हो चुकी थी।

नीलू नंगी बेड पे पड़ी हमारी तरफ देख रही थी कि काशी आगे बढ़ा और उसेके मुँह के पास जाकर अपना लण्ड नीलू के मुँह पे मारने लगा। तो नीलू ने अपने भाई का लण्ड हाथ में पकड़ लिया और बेड से उतरकर नीचे बैठ गई और अपना मुँह खोलकर भाई का लण्ड मुँह में लेने लगी।

थोड़ी देर तक नीलू अपने भाई के लण्ड के सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसती और कभी उसके लण्ड के सुपाड़े पे अपनी जुबान घुमाने लगती। काशी ने अपना एक हाथ नीलू के सिर के पीछे रखा और अपनी एक टांग बेड पे रखते हुये अपना पूरा लण्ड अपनी सगी बड़ी बहन के मुँह में घुसा दिया और चुसवाने लगा। अब काशी अपना पूरा लण्ड अपनी बहन के गले तक घुसाकर चुसवा रहा था और साथ ही उसके मुँह से- “आहह... चूस साली कुतियाऽ उन्म्मह... मेरी गश्ती पूरा लण्ड खा जा मेरा... ऊओ...” की आवाज भी कर रहा था।

और उस वक़्त नीलू के मुँह से भी पूँऊन्न्न घुड़प्प्प्प्प की आवाज निकल रही थी।

ये नजारा देखकर मेरा लण्ड बुरी तरह मचलने लगा तो मैंने काशी को पीछे किया और खुद आगे होकर अपना लण्ड नीलू के हाथ में दे दिया। तो कुछ देर तक वो मेरे लण्ड को देखती रही और फिर अपनी सांस ठीक करती हुई मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी।

मेरा लण्ड क्योंकी काशी के लण्ड से काफी मोटा और बड़ा था, जिसकी वजह से मेरा लण्ड पूरी तरह उसके मुँह में नहीं आ सकता था। तो वो मेरे लण्ड के सुपाड़े और टोपी को ही चूसती रही।

फिर मैंने थोड़ी देर के बाद ही उसके मुँह से अपना लण्ड निकाल लिया और उसे उठाकर बेड पे बिठा दिया। नीलू को बेड पे इस तरह बैठा देखकर काशी ने कहा- “साली मेरे यार को अपनी फुद्दी दिखा जरा...” और साथ ही हाथ से धक्का देते हुये नीलू को बेड पे लिटा दिया।

उसने अपनी बेड पे लेटते ही अपनी दोनों टाँगों को खोला और अपने दोनों हाथों से अपनी फुद्दी को फैलाते हुये अपना सर उठाकर मेरी तरफ देखा।

अब मुझसे ज्यादा सबर नहीं हुआ तो मैं बेड पे चढ़कर बैठ गया और नीलू को अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी गोदी में बिठा लिया, जिससे मेरा लण्ड नीलू की पानी से लथफथ गीली फुद्दी के नीचे दब गया तो मैं उसकी चूचियों की तरफ झुका। तो वो भी थोड़ा पीछे को झुक गई और अपना एक हाथ नीचे बेड से टिका लिया। तो मैंने उसकी एक चूची अपने मुँह में भर लिया। मैं थोड़ी देर तक ऐसे ही नीलू की दोनों चूचियों को बारी-बारी चूसता रहा।

तो आखिरकार काशी ने कहा- “यार क्या सारी रात इसकी चूचियां ही चूसता रहेगा या फुद्दी भी मारेगा?”

 
मैंने नीलू को बेड पे सीधा लिटाया और उसकी टाँगों को उठाकर अपना लण्ड उसकी फुद्दी में घुसा दिया तो काशी भी बेड पे आ गया और अपनी बहन के चेहरा पे पूरी तरह झुक के अपना लण्ड नीलू के मुँह में डाल दिया, जिसे वो अपने हाथ में पकड़कर चूसने लगी।

कुछ देर तक मैं अपना पूरा लण्ड घुसाए ऐसे ही नीलू की फुद्दी मारता रहा और काशी अपना लण्ड चुसवाता रहा और उसके बाद काशी उठा और मुझसे बोला- “यार, अब तू मेरी जगह पे आ जा और मैं इसकी फुद्दी पे आता हूँ

तो मैंने अपना लण्ड जैसे ही बाहर निकाला, काशी ने नीलू को उठाया और घोड़ी बना लिया और अपना लण्ड अपनी बहन की फुद्दी में घुसा दिया। मैंने आगे होकर अपना लण्ड नीलू के हाथ में दे दिया जिसे वो बड़े मजे से चूसने लगी, चूमने लगी और साथ-साथ अपने छोटे भाई से फुद्दी भी मरवाने लगी।

काशी अब पूरा मजे में अपनी बहन की फुददी मार रहा था और साथ ही- “आह्ह साली कुतियाऽ ले अपने भाई का लण्ड ले... साल्ली गश्ती ऊओ...” की आवाज के साथ लगातार अपनी बहन की फुद्दी मार रहा था और साथसाथ उसकी गाण्ड पे थप्पड़ भी मारता जा रहा था।

अब इस लगातार चुदाई और थप्पड़ों की वजह से नीलू ने भी- “आह्ह... भाई हरामी क्या कर रहे हो? प्लीज़... भाई, थप्पड़ नहीं मारो... उन्म्म ह... भाई और तेज चोदो अपनी गश्ती बहन को...” की आवाजें करने लगी थी।

नीलू की आवाजों में जो लज्जत भरी हुई थी, उन आवाज़ों ने काशी को भी पागल कर दिया था और वो अपना पूरा लण्ड बाहर निकालकर अपनी बहन की फुद्दी में घुसा रहा था और साथ ही- “आह्ह... सालीऽs क्यों क्या हुआ कुतिया? तुझे तो बड़ा शौक है ना नये-नये लण्ड से चुदवाने का? हाँन्न् हरामजादी रंडी... आज तेरी फाइ डालूंगा ऊओSS..” की तेज आवाज़ों के साथ नीलू की फुद्दी मार रहा था।

दूसरी तरफ नीलू की भी बुरी हालत हो रही थी मजे से और वो भी- “आह्ह भाई... मैं तुम्हारी रंडी हूँ... भाई फाड़ डालो मेरी फुद्दीss को ऊओ भाई जान्न्ऽ मजा आ रहा है और तेज चोदोऽ...” की आवाज करती जा रही थी।

अब मुझे लग रहा था कि काशी अपने चरम पे है क्योंकी वो बहुत जनूनी होकर चुदाई कर रहा था और तभी काशी के जिश्म को तेज झटका लगा और उसके मुँह से- “आहह... नीलूऽऽ...” की आवाज के साथ ही फारिघ् हो गया और अपना लण्ड नीलू की फुद्दी से बाहर निकालकर पीछे हो गया।

काशी के हटते ही मैंने नीलू को अपनी तरफ खींचा और एक ही झटके में अपना लण्ड उसकी फुद्दी में डाल दिया और झटके मारने लगा।

तो नीलू के मुँह से- “आह्ह जानSS जोर से चोदो प्लीज़.. ऊओ... जानूऽ तुम्हारा लण्ड पूरा अंदर तक मजा दे रहा है उन्म्म ह... देखो भाई अपनी गश्ती बहन को आईईइ जोर से उन्म्मह... फाड़ डालो मेरी फुद्दी को मेरे । भाई के सामने ही ऊओऽ भाई देखो मेरा निकलने वाला है ऊओऽऽ...” की एक तेज आवाज से नीलू के जिश्म ने झटका खाया और उसकी फुद्दी से पानी का लावा सा बह निकला।

जिससे मेरा भी पूरा जिम कॉप उठा और मैं भी उसके बाद 4-5 तेज और जानदार झटकों के बाद उसकी फुद्दी में ही फारिघ् हो गया। फारिघ् होकर मैंने भी अपना लण्ड बाहर निकाला और बगल में बैठकर सिगरेट निकाला। और पीने लगा।

 
तो नीलू ने मेरे हाथ से छीन लिया और बोली- “क्यों क्या तुम ही अय्याशी करोगे?” और सिगरेटे पीने लगी।

नीलू की बात सुनकर मैं और काशी हँस दिए, और काशी ने कहा- “क्यों सन्नी मेरे यार, मजा आया मेरी बहन के साथ या नहीं?”

तो मैंने कहा- “यार सच तो ये है कि लाइफ में इतना मजा कभी नहीं आया मुझे...”

काशी ने हँसते हुये कहा- “यार ये मजा कुछ भी नहीं है, जब तू अपनी बहन फरी की फुद्दी मारेगा तब देखना कितना मजा आएगा तुम्हें? अपनी बहन की फुद्दी मारने में अपना ही मजा है...”

काशी की बात सुनकर मैं हँस दिया।

नीलू ने कहा- अच्छा जी... तो सन्नी साहब, आप भी मेरे इस हरामी भाई की तरह बहनचोद बनना चाहते हो?

नीलू की बात सुनकर में हँस दिया और बोला- क्यों, नहीं बनना चाहिए?

कुछ देर हँसने मुश्कुराने के बाद नीलू ने कहा- “वैसे अगर तुम्हें अपनी बहन को चोदने के लिए मेरी मदद की जरूरत हो तो बताओ? क्या मैं कुछ मदद करें उसे सेट करवाने में?”

मैं- लेकिन तुम क्यों चाहती हो कि मैं भी अपनी बहन को चोदूं?

नीलू- “सन्नी जी, एक सच्ची बात है और वो ये कि जब लण्ड को फुद्दी दिख जाती है ना... तो फुद्दी में घुसने के लिए तैयार हो जाता है, ये नहीं देखता कि ये किसकी है और किसकी नहीं? और दूसरी बात ये है जो मजा बहन को भाई से चुदवाने में मिलता है वो कहीं और नहीं मिलता...”

काशी- “अरे नीलू, बात ये है कि मैं सन्नी की मदद से आज ही इसकी बहन को चोद चुका हूँ और अब इसकी बारी है बस उसे तैयार करना है...”

नीलू- किस तरह तैयार करोगे इसकी बहन को तुम?

काशी ने नीलू को सारी बात बता दी तो नीलू सोच में पड़ गई और बोली- “हाँ ठीक है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं हो सकता है। तुम ऐसा करो कि अभी तो करो जो करना है। लेकिन जो पर्दा लगाओ वो पतला होना चाहिए, जिसमें आर-पार नजर आता हो। लेकिन रूम में अंधेरा रखना ताकी उसे कुछ नजर ना आ सके। लेकिन जब सन्नी अपना लण्ड अपनी बहन की फुद्दी में घुसा दे, तो तुम लाइट ओन कर देना किसी बहाने से और सन्नी तुम बस सर झुकाए रखना लाइट ओन होने के बाद। ताकी वो अगर देखना भी चाहे तो ना देख सके और जब फारिघ् हो जाओ तब अपना सर उठाना..”

 
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