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अंजाने में बहन ने ही चुदवाया पूरा परिवार complete

मैंने भी रूम का दरवाजा लाक कर दिया और अम्मी के करीब ही बेड पे जा बैठा, जिससे अब कुछ रूम का मंजर इस तरह था कि मैं बेड पे बैठा हुआ था और अम्मी नीचे मेरे पैरों में बैठी हुई थी। कुछ देर तक मैं अम्मी की तरफ देखता रहा और अम्मी अपना सिर झुकाए मेरे पैरों में बैठी रही।

मैंने धीरे आवाज में अम्मी से कहा- “अम्मी मुझे आप से ये उम्मीद नहीं थी कि आप हमारी इज्जत इस तरह गैरों के आगे नीलाम करती फिरोगी, आपको जरा भी शर्म नहीं आई कि आपकी दो बेटियां भी हैं, और बेटा भी है। अगर कोई गड़बड़ हुई तो हम किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे। और जब ये सब मैं फरी बाजी और निदा को बताऊँगा तो उनपे आप का ये रूप खुलने के बाद क्या हालत होगी कभी सोचा आपने?”

मेरी बात खतम होते ही अम्मी ने अपने दोनों हाथों से मेरे पांव पकड़ लिए और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे और अम्मी रोती सी आवाज में बोली- “प्लीज़... सन्नी बेटा इस बात को अपने तक ही छुपा लो बेटा। अगर तुम्हारी बहनों को पता चला तो मैं उनकी नजरों से गिर जाऊँगी बेटा, और कभी उनके सामने अपनी आँख भी । नहीं उठा सकेंगी। प्लीज़.. सन्नी मैं माँ हूँ तुम्हारी। मुझे एक बार माफ कर दो। मैं आज के बाद ऐसा कभी नहीं करूंगी।

मैं ऐसे ही बैठा अम्मी की तरफ देखता रहा और अपने पांव अम्मी से छुड़ाने की कोई कोशिश भी नहीं की, और कुछ देर के बाद बोला- “नहीं अम्मी, मुझे फरी बाजी और निदा को सब बताना ही होगा। क्योंकी आप और सफदर अंकल कब से ये सब कर रहे हो, और अब भी अगर मुझे पता ना चलता और मैं देख ना लेता तो भी पता नहीं कब तक आप लोग हमारी आँखों में धूल झोंकते रहते और इस बात की आगे क्या गारंटी होगी कि आप सच में दोबारा ये सब नहीं करोगे?”

अम्मी ने अब भी ना तो मेरे पांव छोई और ना ही सिर उठाया और ऐसे ही बोली- “बेटा मैं माँ हूँ तुम्हारी। मैं तुम्हारी और तुम्हारी बहनों के सिर की कसम खाती हूँ कि आज के बाद ऐसा कभी नहीं करूंगी."

मैंने अम्मी को टोक दिया और बोला- “ठीक है अम्मी, मैं सोचूँगा कि आप पे भरोसा करते हुये आपको मोका दिया जाए या फिर निदा और फरी बाजी को बता दिया जाए? लेकिन आप ये बताओ कि आपका और सफदर अंकल में ये सब कब से चल रहा है?”

अम्मी ने अपना सिर उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर से सिर झुका लिया और बोली- “सफदर के साथ 15 साल हो गये हैं."

मैं अम्मी की बात सुनकर हैरान रह गया और बोला- “तो क्या आप और सफदर अंकल अब्बू की मौत से पहले से ही ये सब कर रहे हो, और अब्बू को पता भी नहीं चला?”

 
अम्मी ने अपना सिर नहीं उठाया और खामोश बैठी रही। लेकिन मेरे पांव अब अम्मी ने छोड़ दिए थे।

मैंने अम्मी की तरफ से कोई जवाब ना मिलने पे कहा- “आप बता क्यों नहीं रही अम्मी?”

तो अम्मी ने कहा- “ये सब तुम्हारे अब्बू की इजाजत और मर्जी से होता रहा है...”

अम्मी की बात सुनकर मुझे एक जोर का झटका लगा, क्योंकी मुझे अम्मी से ऐसे किसी जवाब की उम्मीद नहीं थी। जिससे मुझे झटका सा लगा और मैं खामोश सा हो गया। अम्मी ने भी अपना सिर उठाया और मेरी तरफ देखती रही और फिर से सिर झुकाकर खामोश हो गई और मैं भी कुछ देर तक खामोश बैठा अपनी अम्मी की तरफ से मिलने वाले जवाब पे गौर करता रहा।

कुछ देर बाद मैंने एक लंबी सी सांस ली और बोला- “तो क्या अब्बू और सफदर अंकल के इलावा भी आपने किसी के साथ किया है?”

अम्मी ने हाँ में सिर हिला दिया और बोली- “तुम्हारे अब्बू कभी कभार अपने एक-दो दोस्तों को ले आया करते थे घर पे, और शराब पिया करते थे। जिसमें वो लोग मुझे भी शामिल कर लिया करते थे जिसके बाद सब मिलकर मेरे साथ किया करते थे..."

अम्मी की बातों से मुझे हर पल नया झटका मिल रहा था और अब अम्मी भी बिना झिझके मुझे हर बात बताती जा रही थीं। मैंने कहा- “तो फिर आप किस तरह कसम खा सकती हो कि आप ऐसा कभी नहीं करोगी? क्योंकी आपको जो आदत पड़ चुकी है, वो आसानी से जाने वाली तो नहीं है..”

अब की बार अम्मी खामोश रहीं तो मैंने अम्मी से कहा- “अब आप कब तक यूं मेरे पैरों में बैठी रहोगी ऊपर आ जाओ बेड पे और मुझे सोचने दें कि मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए और इस घर के लिए?”

अम्मी नीचे से उठी और बाथरूम चली गई और हाथ मुँह धो के वापिस आ गई और बेड पे बैठ गई। मैं उठा और लाइट बंद करके जीरो पावर की लाइट ओन कर दी और बेड की एक साइड पे लेट गया।

 
अम्मी बेड की दूसरी साइड लेट गई और बोली- “सन्नी बेटा अगर तुम अपनी माँ को माफ कर सको तो अच्छा है क्योंकी मैं जानबूझ के ये सब नहीं करती। ये सब तुम्हारे अब्बू की लगाई हुई आग का नतीजा ही है कि आज मैं अपने ही सगे बेटे से माफी माँग रही हूँ, मेरे लिए इस बुरा और क्या हो सकता है?”

मैंने अम्मी को कोई जवाब नहीं दिया तो अम्मी ने करवट बदल के अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और अपनी गाण्ड मेरी तरफ कर ली और मैं इंतजार करने लगा कि अम्मी सो जायें और मैं कुछ हरकत करूं और अब तो मुझे कुछ-कुछ उम्मीद भी हो चली थी कि अम्मी मुझे कुछ भी करने से मना नहीं करेगी, क्योंकी अम्मी ने खुद ही मुझे बता दिया था कि वो कितनी बड़ी गश्ती हैं।

अम्मी मेरी तरफ अपनी कमर किए लेटी हुई थीं और मैं बार-बार उनकी गाण्ड की तरफ देखते हुये अपना लण्ड मसल देता था, क्योंकी मुझसे अब और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हो रहा था। लेकिन क्योंकी अभी मुझे कुछ देर । इंतेजार करना था, जिसकी वजह से मैं बड़ी मुश्किल से अपने आपको कंट्रोल कर पा रहा था।

खैर, अम्मी को करवट बदल के लेटे हो अभी कोई 5 मिनट ही हुये होंगे और इस दौरान मैं ये भी जानता था कि अम्मी अभी तक सोई नहीं होंगी क्योंकी आज उनका राज मुझे यानी उनके एकलौते बेटे को पता चल चुका था, तो अम्मी को नींद किस तरह आ सकती थी? लेकिन अब मुझमें बर्दाश्त खतम हो चुकी थी, जिसकी वजह से मैंने उसी वक़्त रिस्क लेने का फैसला किया, और धीरे से खिसक के अम्मी के करीब हो गया।

और अम्मी की तरफ करवट लेते हुये अपना लण्ड जो कि पहले ही जोश से भरा हुआ था, अपनी माँ की गाण्ड पे टच किया और साथ ही अम्मी को आवाज देने लगा- “अम्मी क्या आप जाग रही हो अभी? अम्मी-अम्मी..."

लेकिन अम्मी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो मैं समझ गया कि मेरे लण्ड के टच होते ही अम्मी सब कुछ समझ चुकी होंगी और अब देखना चाहती होंगी कि मैं कहाँ तक जाता हूँ? जिसकी कि मैं अब परवाह करना भी नहीं चाहता था। अम्मी की तरफ से कोई जवाब ना मिलने पे मैंने अपना बाजू अम्मी के ऊपर रख दिया फैलाकर, जिससे मेरा हाथ अम्मी के बाजू से होता हुआ अम्मी की चूचियों पे चला गया।

मेरा हाथ अम्मी की चूचियों से टच होना ही था कि मेरा पूरा जिम मजे की एक अंजानी लज्जत से सिहर उठा और साथ ही मैंने अपना लण्ड अपनी माँ की गाण्ड पे थोड़ा जोर से दबा दिया। जिससे मेरा लण्ड अम्मी की। गाण्ड की दरार में सलवार के ऊपर से ही घुस गया, और साथ ही मैं अपनी अम्मी की चूचियों को भी हल्के से सहलाने लगा। जिससे मेरा मजा सातवें आसमान तक जा पहँचा। लेकिन अम्मी खामोश पड़ी ये सब होने दे रही थी, जिससे मेरा हौसला बढ़ता चला गया। कुछ देर तक मैं अम्मी की चूचियों सहलाता रहा और उसके बाद मैंने अपना हाथ अम्मी की चूचियों से नीचे खिसकाया और अम्मी की सलवार तक ले गया और हाथ से अम्मी की कमीज का पल्लू हटा दिया।

 
अपना हाथ जैसे ही अम्मी की सलवार में घुसाने लगा, तभी अचानक अम्मी का जिश्म हिला और अम्मी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और अपना चेहरा पीछे मेरी तरफ घुमाकर देखते हुये बोली- “सन्नी ये क्या कर रहे हो तुम? मैं माँ हूँ तुम्हारी...”

अम्मी की बात सुनकर मुझे थोड़ा गुस्सा आ गया और मैंने अपना हाथ अम्मी से छुड़ा लिया और बोला- “हाँ... पता है आप मेरी माँ हो, लेकिन ये बात आपको तब याद नहीं होती जब आप सफदर अंकल से चुदवाने जाती हो, या फिर अब्बू के सामने उनके दोस्तों से चुदवाया करती थी। अगर मैंने कुछ कर दिया तो आपको हर बात याद आने लगी है.”

अम्मी ने अपने आपको मेरी तरफ घुमाने की कोशिश की जिससे कि मैं धक्का लगने से सीधा हो गया और अम्मी मेरी तरफ करवट लेकर अपने हाथ को सिर के नीचे टिकाकर जिससे अम्मी का चेहरा मुझसे ऊंचा हो। गया। अम्मी बोली- “देखो सन्नी, हम माँ बेटा हैं। मैं मानती हैं कि मैं आज तक अपनी मर्जी से या तुम्हारे अब्बू की खुशी के लिए जो कुछ करती रही हूँ गलत था, लेकिन अगर तुम ये चाहते हो कि मैं वो सब कुछ तुम्हारे साथ करूं तो बेटा ये नहीं हो सकता। क्योंकी हमारा मुअशरा और मजहब हमें इस चीज की इजाजत नहीं देता..."

अम्मी की बात खतम होते ही मैं उठकर बैठ गया और बोला- “मैं जानता हूँ कि ये सब गलत है, और अगर किसी को पता चला तो बहुत बुरा होगा और मैं मानता हूँ कि ये बहुत बड़ा गुनाह है। लेकिन जब आप आज तक गैर मर्दो के साथ गुनाह करती आई हो, तो मुझे भी इस गुनाह का मजा लेना है। और अगर आप ने मना किया तो याद रखना अम्मी कि मैं किसी से कुछ बोलूंगा तो नहीं, लेकिन हमेशा के लिए आपको और घर को छोड़कर चला जाऊँगा...”

ये धमकी मैंने इसलिए दी थी कि मकान और दुकान वगैरा अब्बू मेरे नाम कर गये थे मरने से पहले ही, जिसकी वजह से अम्मी मुझे कभी खुद से अलग नहीं कर सकती थीं।

 
मेरी बात सुनकर अम्मी के चेहरा में परेशानी के आसार नजर आने लगे, तो मैंने कहा- “देखो अम्मी, बात ये है। कि आप क्या करती थीं, अब भी करती रहो। लेकिन अब अब्बू की जगह आप मुझे अपनी लाइफ में शामिल कर लो, इसमें हम सबका ही भला है..”

अम्मी कुछ सोच में पड़ गईं और कुछ देर बाद बोलीं- “लेकिन सन्नी बेटा, फरी और निदा को अगर पता चल गया तो मैं उनको क्या मुँह दिखाऊँगी?”

अम्मी की बात से मैं खुश हो गया और बोला- “देखो अम्मी, बात ये है कि जब तक हम कोई बे एहतियाती नहीं करेंगे उन्हें कैसे पता चलेगा किसी बात का? और अगर उन्हें कुछ पता चला भी तो वक़्त आने पे देखा जाएगा। जो बात अभी हुई नहीं उसके लिए इतनी परेशानी क्यों उठाना?”

अम्मी- “लेकिन फिर भी सन्नी, ये सब गलत है बेटा। आखिरकार, मैं माँ हूँ तुम्हारी...” अम्मी ये बात करते हुये ट्राउजर में खड़े मेरे लण्ड की तरफ ही देख रही थी। जिससे मैंने और ज्यादा टाइम जाया करना मुनासिब ना समझते हुये अम्मी की तरफ करवट ली और अपनी अम्मी के सीने से लग गया और अपने होंठ अम्मी के साफ्ट होंठों पे रख दिए और किस करने लगा।

मैं अम्मी को थोड़ी देर तक किस करता रहा जिसमें अम्मी मेरा साथ नहीं दे रही थी। जिसका मैंने कुछ भी बुरा नहीं माना। क्योंकी मैं समझ सकता था कि अम्मी इतनी जल्दी नहीं खुलने वाली। और उठकर बैठ गया और अम्मी की तरफ देखते हुये हल्का सा मुश्कुराया तो अम्मी ने मुँह बनाते हुये अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं अम्मी की टाँगों के पास खिसक आया और अपने दोनों हाथ अम्मी की सलवार पे डाले और धीरे से नीचे खिसकाने । लगा और साथ ही मैं अम्मी की तरफ भी देखता जा रहा था, जहाँ अब मुझे अपनी अम्मी के चेहरे पे पशीना साफ नजर आने लगा था। लेकिन अम्मी ने ना तो मेरा हाथ रोका और ना ही अपनी आँखें खोली।

 
Thanks to all

 
मैंने धीरे-धीरे अम्मी की सलवार उतार दी, जिससे अम्मी की चिकनी और मुलायम रानें बिल्कुल नंगी मेरे सामने आ गईं। मैंने अम्मी की रानों को पकड़कर धीरे से फैला दिया जिन्हें अम्मी ने अपस में दबा रखा था। जैसे ही अम्मी की रानों को खोलकर मैंने अपनी अम्मी की फुद्दी को देखा तो मेरा लण्ड तेजी से झटके खाने लगा, । क्योंकी आज मैं उस औरत की फुद्दी को देख रहा था, जिसकी फुद्दी में से मैं निकला था। अम्मी की फुद्दी बिल्कुल साफ थी बलों का जरा भी नाम-ओ-निशान तक ना था। जिसे देखते ही मेरे मुँह में पानी भर आया और मैं अम्मी की टाँगों को पूरा खोलते हुये बीच में आ गया और अपना सिर झुकाकर अम्मी की फुद्दी चाटने लगा।

अम्मी की फुद्दी जो कि पहले ही अपने ही पानी से भीगी हुई थी, और एक नमकीन सा और बड़ा अजीब सा टेस्ट दे रही थी। मैं अपनी जुबान को ऊपर से नीचे की तरफ चलाते हुये चाटने लगा।

जिससे कुछ ही देर में अम्मी भी अपनी गाण्ड को थोड़ा सा उठाकर मेरे मुँह की तरफ दबाने लगी और साथ ही हल्की आवाज में- “सस्सीईई.. आअहह... सन्नी मत करो ऊओहह... बेटा..” की आवाज के साथ ही मेरा सिर अपनी फुद्दी की तरफ दबाने लगी।

मैं भी अपनी जुबान को अम्मी की फुद्दी में घुसाकर चुसाई करने लगा, जिससे अम्मी की सिसकियां और भी बढ़ने लगीं और उनके मुँह से- “आअहह... सन्नी उनम्म्मह... हाँन् खा जाओ आज अपनी अम्मी की फुद्दी को ऊऊओहह... सन्नी जुबान को पूरा घुसाकर चाटोओ प्लीज़्ज़... हाँन् मजा आ रहा है बेटा उफफ्फ़..” की आवाज करने लगी।

अम्मी की इन आवाजों से मुझे साफ पता चल रहा था कि अब अम्मी पूरी तरह गरम हो चुकी हैं, और कोई भी लम्हा जिसमें अम्मी की फुद्दी पानी छोड़ने वाली है, तो मैं अचानक अम्मी की फुद्दी को चाटना छोड़कर उठा

और अपने कपड़े उतारने लगा। अम्मी ने एक झटके से अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखने लगी और जैसे ही मैं नंगा हुआ तो अम्मी की नजर मेरे लण्ड पे टिकी हुई थी और उनकी जुबान खुश्क होते होंठों पे घूम रही थी।

 
क्योंकी मैं भी काफी देर से खुवारि काट रहा था इसलिए अब और ज्यादा देर ना करते हुये मैं फिर से अम्मी की टाँगों में आ गया और अपना लण्ड अम्मी की फुद्दी पे टिकाकर हल्का सा झटका दिया तो मेरा लण्ड अम्मी की गीली फुदी में बड़े मजे से जाने लगा, और अम्मी ने लण्ड के घुसते ही अपनी आँखों को बंद कर लिया और । नीचे से अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड की तरफ दबा दिया। मैं अम्मी का इशारा समझते हुये अम्मी की टाँगों को । पूरा फैलाकर अपना वजन टाँगों पे डालकर अपने लण्ड को थोड़ा बाहर खींचते हुये पूरी जान से झटका दिया और अपना लण्ड अपनी अम्मी की फुद्दी में घुसा दिया।

लण्ड के पूरी जान से घुसते ही अम्मी के मुँह से- “सस्सीईई... धीरे करोऽss सन्नी बेटा, ऐसे क्यों कर रहे हो? आआहह..” की आवाज निकल गई।

अम्मी की बात सुनते ही मैंने फिर से वैसे ही झटका दिया और बोला- “साली गश्ती ज्यादा नखरा ना कर जितने लण्ड तू अपनी फुद्दी में ले चुकी है, तुझे अब क्या फरक पड़ता है धीरे या जोर से करने का?"

मेरे हर झटके से अम्मी के मुँह से लज्जत भरी सिसकियां निकल रही थीं और साथ ही अम्मी- “आअह्ह... सन्नी बेटा आराम से करो ज्यादा मजा आता है... ऊऊह्ह... सन्नी बहुत अरसे के बाद ऐसे जवान लण्ड का मजा मिला है तेरी माँ को बेटा आअह्ह... धीरे-धीरे पूरा गहराई में घुसाकर चोदो बेटा उनम्म्म ह..” की आवाज करने लगी।

और अपनी गाण्ड मेरे हर झटके पे उछाल के मेरे लण्ड की तरफ भी दबाती जिससे मेरे हर झटके की स्पीड बढ़ जाती और फिर अम्मी ने अपनी टाँगों को मुझसे छुड़ा लिया और मुझे अपने ऊपर खींचकर अपनी टाँगों को मेरी कमर पे कस लिया, जिससे मुझसे झटके सही से नहीं लग रहे थे। तो अम्मी नीचे से अपनी फुद्दी को ऊपर नीचे घिसने लगी, जिससे मैं मजे से पागल होने लगा और अम्मी की कमीज को ऊपर करके ब्रा से अम्मी की चूचियों को निकालकर चूसने लगा।

तब अम्मी खुद ही अपनी फुद्दी को मेरे लण्ड पे रगड़ के मजे लेने लगी और साथ ही- “आआहह... सन्नी बेटा उंम्म्मह... बड़ा मजा आ रहा है मेरी जान... आज के बाद अपनी अम्मी की भूख तुम मिटाया करना बेटा । उनम्म्मह... ऊऊह्ह... सन्नी मैं गई सन्नी थोड़ा जोर से मसलो मेरे मम्मों को ऊऊह्ह.. उनम्म्मह...” की आवाज के साथ ही जैसे अम्मी की फुद्दी में गरम-गरम सेलाब सा आ गया और अम्मी निढाल सी हो गई।

 
मैं सीधा हुआ और फिर से अम्मी की फुद्दी में तेजी से अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा, जिससे रूम में थप्प-थप्प की आवाजें गूंजने लगीं और फिर मैं भी दो मिनट में ही अम्मी की फुद्दी में फारिघ् हो गया और अम्मी के ऊपर ही गिरकर लंबी सांसें लेने लगा।

थोड़ी देर हम दोनों माँ बेटा ऐसे ही लेटे रहे और फिर अम्मी ने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया जिससे मैं अम्मी की साइड में होकर लेट गया। अम्मी ने मेरी तरफ करवट ली और अपनी एक टांग मेरे ऊपर रख ली और बोलीक्यों सन्नी, अब खुश हो न तुम? मेरे साथ ये सब करके अब तो तुम अपनी अम्मी और बहनों को छोड़कर नहीं जाओगे ना?”

मैंने भी अम्मी की तरफ करवट ली और अम्मी के सीने से लग गया और बोला- “नहीं अम्मी, जिस तरह आप मुझे प्यार करती हो मैं आपको छोड़कर जाने का सोच भी नहीं सकता कभी। वो तो मैं बस मजाक कर रहा था बस...” और इतना बोलते हुये अम्मी से बुरी तरह चिमेट गया और किस करने लगा।

अम्मी भी मुझे किस का जवाब किस से देती रही और फिर मेरे सीने पे हाथ रखकर मुझे अलग कर दिया और बोली- “बस सन्नी बेटा, अब और कुछ नहीं। आज के लिए इतना ही बहुत है। अब सो जाओ...” और खुद उठकर अपने कपड़े लेकर बाथरूम में जा घुस गई।

मैं अम्मी के बेड पे नंगा ही पड़ा रह गया और सोचने लगा कि क्या मैंने अपनी अम्मी के साथ ये सब जो किया है, क्या ठीक है? तो मेरे अंदर से जवाब आया कि हाँ जिस तरह तुम्हें और फरी बाजी को चुदाई की जरूरत है,

उसी तरह अम्मी भी लण्ड की प्यासी हैं और उन्हें भी पूरा हक है कि अपनी लाइफ एंजाय करें। ये सोच आते ही में मुतमइन हो गया और अपनी आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगा।

 
मुझे अपनी आँखें बंद किए अभी कुछ ही देर हुई थी के अम्मी रूम में आ गई और खामोशी से मेरे साथ बेड पे लेट गई, लेकिन कुछ बोली नहीं और खामोशी से लेटी रही। मैं भी चुपचाप लेटा रहा, क्योंकी मैं समझ रहा था कि अम्मी को ये सब जो अम्मी और मेरे बीच हुआ है उसे हजम करना मुश्किल हो रहा होगा। जिस वजह से । मैंने भी अम्मी से कोई बात नहीं की और आँखें बंद किए सोता बना रहा, जिससे कब मेरी आँख लगी मुझे पता ही नहीं चला।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो 9:00 से ऊपर का टाइम हो रहा था लेकिन मैं अभी भी नंगा ही अम्मी के बेड पे लेटा हुआ था, लेकिन अब मेरे ऊपर अम्मी ने चादर डाल दी थी। मैं जल्दी से उठा और अपने कपड़े उठाकर बाथरूम में जा घुसा और नहाकर कपड़े पहनकर बाहर निकला तो देखा कि बाजी फरी बाहर बैठी टीवी देख रही थी। लेकिन अम्मी और निदा कहीं भी नजर नहीं आ रही थीं।

फरी मुझे देखकर मुश्कुराने लगी और टीवी बंद करते हुये बोली- “क्यों भाई क्या हाल है आपका? लगता है रात नींद ठीक से नहीं आई मेरे भाई को...”

मैं भी हँस दिया और बोला- “हाँ यार नई जगह थी ना इसलिए..” और फरी के करीब ही बैठ गया और बोला“अच्छा ये अम्मी और निदा नजर नहीं आ रहे, कहाँ हैं दोनों?”

फरी ने कहा- “भाई अम्मी और निदा जरा सफदर अंकल की तरफ गई हैं, अभी आ जायेंगी। आप बैठो मैं नाश्ता लाती हूँ आपके लिए। लगता है काफी भूख लग रही है आपको?”

फरी की बात समझते हुये मैं भी हँस दिया और बोला- “नहीं यार, अब ऐसी भी कोई बात नहीं। बस थोड़ा थका हुआ हूँ घूमने फिरने से ठीक हो जाऊँगा। बाकी तुम बैठो मैं खुद ही नाश्ता ले लेता हूँ। तुम्हारा पांव ठीक नहीं है..."

फरी ने कहा- “नहीं तुम बैठो। अब काफी बेहतर है, हल्की सी मोच थी अब आराम है। मैं लाती हूँ नाश्ता..” और उठकर किचेन की तरफ चल दी।

मेरा नाश्ता, जो कि पहले से ही तैयार था, बाजी जल्दी से ले आई और आते ही मेरे सामने नाश्ता रखते हुये बोली- “तो क्या रहा भाई? कहाँ तक बात पहुँची रात को?”

मैंने नाश्ते की तरफ हाथ बढ़ते हुये कहा- “यार जो तुम चाहती थी वो सब हो गया है। अब अम्मी हमारे हाथ में हैं और अब हमें कोई मसला नहीं है...”

बाजी खुशी से मुझे लिपट गई।

मैंने बाजी को पीछे हटते हुये कहा- यार नाश्ता तो आराम से कर लेने दो मुझे।

बाजी ने मुझे छोड़ दिया और बोली- “भाई अब मजा आएगा अम्मी भी हमारा साथ देंगी। और निदा को कोई मसला ही नहीं है हमसे...”

 
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