कुछ देर बाद जब वो लड़के जो बाजी को ही ताड़ रहे थे वहाँ से चले गये, तो मैंने बाजी से कहा- “आप उस लड़के को अपने पीछे आने का इशारा करो, और अगर वो आ गया तो आप घर की तरफ चल देना। ओके?”
बाजी ने हाँ में सिर हिला दिया तो मैं वहाँ से उठा और एक साइड पे जाने लगा तो बाजी ने थोड़ी देर बाद उस लड़के को अपनी तरफ आने का इशारा किया और उठकर घर की तरफ चल दी। मैं अब करीबी दुकान के पीछे खड़ा हुआ सब देख रहा था। कुछ देर तक वो लड़का इधर-उधर देखता रहा, लेकिन जब मैं उसे कहीं दिखाई नहीं दिया तो उसने थोड़ी हिम्मत की और बाजी के पीछे कुछ फासला रखकर चलने लगा।
तो मैं भी उसके पीछे चलने लगा। थोड़ी दूर आने के बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और उस लड़के के पास पहुँच गया और बोला- “क्या हाल है भाई?”
वो लड़का एकदम से उछल पड़ा और इससे पहले के कुछ करता मैं बोल पड़ा- “घबराओ नहीं यार, मैं तुम्हारा दोस्त बन सकता हूँ और वो भी जिसके पीछे तुम जा रहे हो...”
लड़का- मैं कब किसी के पीछे जा रहा हूँ?
मैं- यार मेरा नाम सन्नी है अगर तुम भी अपना नाम बता दो तो आसानी रहेगी बात करने में।
लड़का- मेरा नाम विक्की है। लेकिन तुम क्या बात करना चाहते हो मेरे साथ?
मैं- यार मैं थरी-सम करना चाहता हूँ, क्या तुम उसमें मेरा साथ दोगे?
विक्की हँसते हुये- “देखो सन्नीजी, यहाँ इस तरह तुम मुझे उल्लू नहीं बना सकते समझे? माना कि मैं यहाँ घूमने आया हूँ, लुटने नहीं..."
मैं- “यार अगर तुम्हें यकीन नहीं है तो जाओ जहाँ जाना है, मुझे कोई और मिल जाएगा। अगर दिल मान जाए तो आ जाना, वो सामने मेरा घर है.." और साथ ही अपने घर की तरफ इशारा कर दिया, जहाँ फरी दरवाजे में ही खड़ी हमारी तरफ देख रही थी।
विक्की फरी की तरफ देखकर बोला- क्या तुम सच में थरी-सम करना चाहते हो?
मैं- हाँ... और बाकी अगर तुम चाहो तो? वरना कुछ और इंतजाम करना होगा मुझे।
विक्की- लेकिन मैं ही क्यों, कोई और नहीं मिला तुम्हें?
मैं- अब तुम ही सबसे पहले अकेले नजर आए, जो उसे उल्लू की तरह भूखी निगाहों से खा जाने की कोशिश कर रहे थे, तो मैंने सोचा कि तुम्हें ही साथ मिला लिया जाए। इसलिए तुमसे बात की है।