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XXX Kahani - हीरोइन

उसने एक बार ये भी पूछा था की राजेश को क्या पसंद है, तब मैंने उसे ईशा को हीरोइन बनाने के बारे में भी बताया था और शेफाली के प्रति राजेश के लगाव के बारे में भी..तभी वो समझ गयी की वही एक रास्ता है जिसका इस्तेमाल करके राजेश को इसमें इन्वॉल्व किया जा सकता है.

एक दिन राधिका घर आई और उसने मुझे समझाया की राजेश की ईशा को हीरोइन बनाने वाली बातों को सीरियसली लिया करे और ईशा को भी चांदनी की तरह कॉलेज ड्रामा में पार्ट लेने के लिए कहा ताकि राजेश को लगे की उसकी बातें मानी जा रही हैं.

पर अगले ही दिन राजेश के हॉस्पिटल जाने के बाद जब रजनी ने टीवी ओंन किया तो उसमे शेफाली की सुसाईड की न्यूज़ आ रही थी....इस न्यूज़ को देखकर मुझे लगा की हमारा सारा प्लान चोपट हो रहा है पर राधिका को जब फोन किया तो उसने कहा की ये तो एक ऑपर्चुनिटी है जिसका हमें इस्तेमाल करना है.

उसने समझाया की हम ऐसा माहौल क्रियेट करेंगे जिसमें राजेश को लगे की शेफाली की आत्मा अब उनके घर आ चुकी है....और वही ये सब करवा रही है....रही सही कसर उस पर्ल सेट ने पूरी कर दी जो राजेश हॉस्पिटल से चुरा कर ले आया था...राजेश ने जब वो सेट निकाल कर अपनी ड्रॉयर में रखा तो मैने उसे देख लिया, मैने जब वो ड्रॉयर खोली तो उसमें एक प्लास्टिक पाउच में वो सेट था, और उसपर शेफाली के नाम की स्लिप लगी थी, मुझे समझते देर नही लगी की ये उसकी बॉडी से उतरा हुआ सेट है जो मेरा भोला पति उसकी निशानी के तौर पर अपने साथ ले आया है...वैसे तो शेफाली की आत्मा का नाटक नॉर्मली ही स्टार्ट कर देना था पर अब इस सेट को एक जरिया बनाकर वो नाटक अच्छे से किया जा सकता था, बस मेरे दिमाग़ में उसी वक़्त एक प्लानिंग ने जन्म ले लिया और मैने वो सेट निकाल कर पहन लिया.


राजेश ने जब ये सब पड़ा तो उसने अपना माथा पीट लिया.....
और अपनी बीबी और राधिका के दिमाग़ की दाद भी दी उसने....
क्योंकि उसे उस दिन तो ये सब इत्तेफ़ाक ही लगा था जब रजनी ने वो सेट पहना था और रात को उसे चुदाई की एक अलग ही दुनिया दिखाई थी. तब राजेश को पगा था की उस सेट को पहनने की वजह से रजनी में ये चेंजेस आये हैं.

आगे के पेजस पर रजनी ने वही सब लिखा जो उसके साथ घटित हुआ था....
रजनी ने ये भी लिखा की अब खुलकर सैक्स करने की वजह से उसे भी काफ़ी अच्छा लग रहा था....
आजतक वो जिन बातो से शरमाती थी यानी कॉक सकिंग, और रेग्युलर सैक्स या और भी कुछ, वो सब अब काफ़ी अच्छा लगने लगा था उसे...राधिका को भी उसने जब पर्ल सेट के बारे में बताया तो उसने भी इस प्लान की तारीफ की....आगे रजनी ने लिखा था की उनका प्लान यही था की राजेश को इस बात का यकीन दिलाया जाए की जो भी उस सेट को पहन रहा है वो शेफाली की आत्मा की वजह से उसके साथ सैक्स करने को, हर तरह के मज़े लेने को तैयार है....इसलिए चाँदनी को भी वो सेट प्लान के अनुसार पहनाया गया और ईशा को भी....आगे चलकर शायद राधिका भी वो पहने.

राधिका के बारे में सोचकर ही राजेश के लंड ने फूलना शुरू कर दिया.

और अपने लंड को मसलते हुए वो बोला : "प्लान तो तुम सभी ने बहुत अच्छा बनाया है....और सबसे बड़ी बात मुझे इसमें मज़ा भी आ रहा है...पर अभी तक तुमने मुझे अपने इशारों पर नचाया है, अब मेरी बारी है....तुम्हारा प्लान अपने हिसाब से ही चलेगा पर होगा वही जैसा मैं चाहूँगा....क्योंकि अब मुझे भी इस बात का डर नही है की ईशा क्या सोचेगी...रजनी को पता चलेगा तो उसे कैसा लगेगा....बेटी की सहेली चाँदनी के साथ ऐसा कुछ करना सही नही होगा...या फिर एक डाइवोर्सी लेडी राधिका को पटाना एक डॉक्टर को शोभा नही देता....अब तो ये सब होगा भी और शोभा भी देगा...''

ये बुदबुदाते हुए उसने उस डायरी को एक कुटिल मुस्कान के साथ चूमा और उसे लेजाकर फिर से उसी जगह रख दिया जहाँ से उठाई थी.

अब पासा पलट चुका था....
जो शिकारी थे अब शिकार बन चुके थे
और शिकार अब शिकारी बनकर ये सोच रहा था की इस मौके का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा कैसे उठाया जाए.

आने वाले दिनों के बारे में सोचकर राजेश का लंड एकदम से टाइट होने लगा.
 
और अपने लंड को मसलते हुए वो बोला : "प्लान तो तुम सभी ने बहुत अच्छा बनाया है....और सबसे बड़ी बात मुझे इसमें मज़ा भी आ रहा है...पर अभी तक तुमने मुझे अपने इशारों पर नचाया है, अब मेरी बारी है....तुम्हारा प्लान अपने हिसाब से ही चलेगा पर होगा वही जैसा मैं चाहूँगा....क्योंकि अब मुझे भी इस बात का डर नही है की ईशा क्या सोचेगी...रजनी को पता चलेगा तो उसे कैसा लगेगा....बेटी की सहेली चाँदनी के साथ ऐसा कुछ करना सही नही होगा...या फिर एक डाइवोर्स लेडी राधिका को पटाना एक डॉक्टर को शोबा नही देता....अब तो ये सब होगा भी और शोभा भी देगा...''

ये बुदबुदाते हुए उसने उस डायरी को एक कुटिल मुस्कान के साथ चूमा और उसे लेजाकर फिर से उसी जगह रख दिया जहाँ से उठाई थी.अब पासा पलट चुका था....जो शिकारी थे अब शिकार बन चुके थे और शिकार अब शिकारी बनकर ये सोच रहा था की इस मौके का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा कैसे उठाया जाए.आने वाले दिनों के बारे में सोचकर राजेश का लंड एकदम से टाइट होने लगा.

**************
अब आगे
**************

अगले दिन की प्लानिंग राजेश ने बेड पर लेटे -2 ही बना ली...
वो आने वाले दिनों में होने वाली संभावनाओ को ध्यान में रखते हुए ये सब कर रहा था
जिससे उसे ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा मिले.

राजेश अगली सुबह जल्दी उठ गया, वो सोया तो ईशा के बेड पर हुआ था और वो वहाँ थी नही..
रात को अपनी मोम के साथ मज़े लेने के बाद शायद वो वहीं सो गयी थी...उसने वापिस आने की जहमत भी नहीं उठायी,
वो उठा और अपने बेडरूम की तरफ चल दिया...
वहाँ दोनो माँ बेटियाँ एक दूसरे से लिपटकर नंगी ही सो रही थी...
हालाँकि उन्होने एक ब्लेंकेट ओढ़ रखा था पर उनके नंगे कंधे बाहर थे जो ये बयान कर रहे थे की मज़े लेने के बाद उन्होने कुछ पहनने की जहमत ही नही उठाई.

राजेश ने उस वक़्त एक सेंडो और पायजामा पहना हुआ था, वो मुस्कुराता हुआ बेड के अंदर घुसा गया, और वो जान बूझकर दूसरी तरफ से अंदर गया जहाँ ईशा सो रही थी...
अब ईशा उन दोनो के बीच में थी...
एकदम नंगी,
रजनी की तरह.

राजेश का लंड तो उसके नंगे बदन को सोचकर ही खड़ा हो चुका था,
इसने पायजामे में उभरे लंड को ईशा की चिकनी गांड पर दबाते हुए उसे पीछे से दबोच कर अपनी बाहों में ले लिया...
उसके अमरूद के साइज़ के नन्हे और कठोर बूब्स को उसने जब अपने हाथो में पकड़ा तो उसके मुँह से एक सिसक सी निकल गयी...
उसके हाथो में अपनी बेटी के बूब्स थे और हाथो के पिछले हिस्से पर रजनी के मोटे मुम्मो का दबाव....
ऐसा सुखद एहसास उसे आज तक नही हुआ था...

अचानक उसे महसूस हुआ की ईशा जागने को हो रही है,
उसने गहरी साँस लेते हुए एक मजेदार सी अंगड़ाई ली और फिर अपनी नशीली आँखे खोलकर सामने सो रही रजनी को बड़े ही प्यार से देखा...
राजेश ने तब तक अपने हाथो की पकड़ ढीली कर दी और आँखे बंद करके सोने की एक्टिंग करने लगा..

और ईशा को जब एहसास हुआ की कोई उसके पीछे चिपककर सो रहा है तो उसने तुरंत पीछे गर्दन घुमाई,
अपने पापा को अपने साथ लिपटकर सोते देखा तो एक पल के लिए उसकी सिट्टी पिटी ही गुम हो गयी, क्योंकि इस वक़्त वो अपनी मोम के साथ नंगी सो रही थी...
यानी उसके पापा ये बात शायद जान चुके थे की माँ बेटियाँ नंगी सोई हुई है...
या शायद नही...
उसने राजेश के चेहरे को गोर से देखा,
उन्हे थोड़ा सा हिलाकर पुकारा भी पर वो उठा नही...
फिर उसने तुरंत गर्दन घुमा कर अपनी माँ को उठाया..
वो भी उंघते हुए बोली : "क्या है ईशा...इतनी सुबह क्यों उठा रही है...''

ईशा : "मोम ....यहाँ देखो...पापा लेटे हैं मेरे पीछे...''

रजनी भी चोंक गयी...
उसे तुरंत अपनी और ईशा की हालत का ध्यान आया,
चादर उठा कर देखा तो दोनो नंगी ही थी अभी तक...
राजेश का हाथ ईशा की छाती पर रखा हुआ था.

रजनी : "ये कब आए यहाँ ....इन्होने देख तो नही लिया हमे ऐसी हालत में.''

ईशा : "आई डोंट नो मोम ....मैने भी अभी देखा...पर आई थिंक कमरे में अंधेरा था, इसलिए सीधा आकर सो गये ये...वर्ना चिल्ला कर उठा देते हम दोनों को...''

रजनी कुछ देर तक सोचती रही और बोली : "यू डोंट वरी, जस्ट एंजाय....ज़्यादा कुछ हुआ तो वो शेफाली है ना, वो संभाल लेगी...''

इतना कहकर दोनो माँ बेटियां हँसने लगी...
ईशा ने राजेश के हाथ पर हाथ रखकर उसे अच्छी तरह से अपने जिस्म से चिपका लिया..
रजनी की नींद खुल चुकी थी और उसका इस तरह से साथ लेटे रहना शायद उसे भी सही नही लगा, इसलिए वो नंगी ही अपने बिस्तर से निकली और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गयी.

इधर ईशा धीरे-2 वो अपनी कमर मटका कर अपने नंगे चूतड़ राजेश के लंड पर रगड़ने लगी...
राजेश के लंड का आकार बढ़ने लगा और उसके हाथ की ग्रिप भी उसके मुम्मो पर ज्यादा होती गयी.

ईशा का एक हाथ पीछे की तरफ आया और उसने अपना हाथ सीधा राजेश के पायजामें में घुसा दिया और उसके खड़े लंड को पकड़ लिया...
अब राजेश के बस की बात नही थी ज़्यादा देर तक सोने का नाटक करना, इसलिए वो भी जम्हाई लेता हुआ उठ गया

राजेश : "उम्म....गुड मॉर्निंग हनी...''

ईशा भी मुस्कुराती हुई अपने पापा की तरफ घूम गई और उनके लिप्स पर एक प्यारी सी किस्स करते हुए बोली : "गुड मॉर्निंग पापा...उठ गये आप...''

ह्म....
इतना कहकर राजेश ने अपनी जवान बेटी के जिस्म को अपने आगोश में लेकर एक गहरी साँस ली....
उसका लंड इस वक़्त स्टील की तरह खड़ा था और वो अगर चाहता तो रात के अधूरे काम को अभी निपटा डालता क्योंकि सुबह के इरेक्शन में अलग ही बात होती है..

पर अब वो पूरी कहानी जान चुका था,
इसलिए अपने प्लान के अनुसार अभी तो उसे कुछ दीनो तक ईशा को तड़पाना था और उसके मज़े धीरे-2 लेने थे....
इसलिए उसने वो सब भी नही पूछा की वो इस रूम में कैसे आई या वो अपनी माँ के साथ नंगी क्यों सो रही थी...
 
ईशा का हाथ एक बार फिर से उसके पयज़ामे में जाने लगा तो राजेश ने उसे रोक दिया और बोला : "अभी नही...आज हॉस्पिटल जल्दी जाना है...मुझे नहाने जाना है अभी....''

ईशा ने रुंआसा सा मुँह बना लिया और बोली : "आप चले जाओगे तो मुझे कौन नहलाएगा...''

बात तो वो सही कह रही थी,
उसके पैर में प्लास्टर लगा हुआ था, अकेले नहाना तो उसके बस की बात नही थी...
वैसे तो रजनी को ही नहलाना चाहिए था उसे
पर आजकल समीकरण बदल चुके थे उनके रिश्तों के
इसलिए वो अपने पापा को नहलाने के लिए बोल रही थी.

उसकी प्यारी सी ख्वाहिश सुनकर राजेश मना नही कर पाया और बोला : "ओ के ...मैं पहले इस प्लास्टर को कवर करता हूँ किसी चीज़ से...''

वो उठा और किचन से एक प्लास्टिक रोल ले आया जो फ्रूट्स को कवर करने के लिए रखा हुआ था...
उससे उसने ईशा के पैर को अच्छी तरह से कवर करके पैक कर दिया.
अब वो नहाने के लिए बिल्कुल तैयार थी.

इसी बीच रजनी भी नहा धोकर बाथरूम से बाहर आ गयी...
राजेश को ईशा के पैर को कवर करते देख वो समझ गयी की नहलाने के लिए वो सब कर रहा है,
इससे पहले की राजेश उसकी मदद लेता, बड़ी चालाकी से वो वहाँ से निकलते हुए बोली : "आप इसको नहलाओ , मैं तब तक आपके लिए ब्रेकफास्ट और लंच का टिफ़िन तैयार कर देती हूँ.''

दोनों को उनकी मर्ज़ी के काम करने के लिए छोड़कर वो किचन में जा घुसी.

राजेश ने अगर डायरी ना पढ़ी होती तो वो शेफाली की करामात ही समझता इसे भी,
पर अब वो सब कुछ जान चुका था,
और वो जानता था की रजनी ये सब उन्हे चुदाई के लिए पूरी तरह से छूट देने के लिए ही कर रही है..

राजेश अपने कपड़े उतारे और वो भी नंगा हो गया और उसने ईशा को अपनी गोद में उठाया और बाथरूम की तरफ चल दिया...
अपनी नंगी जवान बेटी को वो एकदिन इस तरह से उठा कर बाथरूम में ले जाएगा, ये शायद उसने भी नही सोचा था.



बाथरूम काफ़ी बड़ा था, हालाँकि उसमें बाथटब नहीं था जिसकी कमी इस वक़्त राजेश को काफी खल रही थी पर फिर भी शावर के नीचे अच्छी तरह से मज़े लिए जा सकते थे.

ईशा को शावर के नीचे खड़ा करके राजेश उसे उपर से नीचे तक देख रहा था
और ईशा मन में सोच रही थी की शायद अब वो पल आने वाला है जब उसके पापा उसकी चूत का उद्घाटन करेंगे,
पर वो नही जानती थी की राजेश उन सबका खेल अब समझ चुका है...
वो तो अब अपने हिसाब से ही चलेगा.

खैर, अभी के लिए मज़े लेने के लिए राजेश जब पूरा नंगा हुआ तो दिन की रोशनी मे अपने पापा का खड़ा लंड देखकर एक पल के लिए तो ईशा भी घबरा गयी...

वो हकलाते हुए बोली : "पा...पापा....ये ...ये कैसे अंदर जाएगा....''

जवाब में राजेश मुस्कराता हुआ उसके करीब आया और शावर चला कर उसे लेकर पानी के नीचे खड़ा हो गया...
और धीरे से उसकी गर्दन को चूमते हुए बोला : "शुरू में बस तकलीफ़ होगी...फिर तो खुद ही इसे अंदर लेने के लिए तड़पेगी..''

ये बात तो वो भी जानती थी...
पर अभी तक जिसकी चूत पर सिर्फ़ अपनी सहेली के होंठ और जीभ का वार हुआ हो, वो ऐसे ख़तरनाक लंड को देखकर डरेगी तो सही ना.


जब दोनो के जिस्म पर गिरकर उनकी आग को और भी भड़का रहा था...
ईशा से वो गर्मी बर्दाश्त नही हुई और वो उछलकर अपने पापा के गले से लिपट गयी....
उसके कच्चे टिकोरे छप्प की आवाज़ के साथ राजेश की छाती से छिपककर पिसते चले गये.

अब बारी थी राजेश के गेम प्लान की, जो उसने रात को सोच कर रखा था...

वो उसे अपने बदन से चिपका कर धीरे से बोला : "अब तो तुम हीरोइन बनोगी ना...''
 
इस बात का ऐसे मौके पर ज़िक्र करना ईशा को चौंका सा गया...
पर फिर भी अपने आप को संभालते हुए वो बोली : "जी पापा...जैसा आप कहे...कॉलेज में भी स्टेज शो करते हुए मैं यही सोच रही थी की आपकी बात सही है...मुझे भी अब इसमे इंटेरेस्ट आ रहा है...मुझे भी अब हीरोइन बनना है...''

राजेश ने उसका कान चुभलाते हुए पूछा : "किस हेरोयिन की तरह बनना चाहोगी....''

ईशा : "शेफाली की तरह.....वाइल्ड....सैक्सी ....जैसी आपको पसंद है...''

राजेश जानता था की वो यही बोलेगी....
इन माँ बेटियो ने अच्छी तरह से सोचकर प्लान बना रखा था की राजेश का चूतिया शेफाली के नाम से ही काटना है...

राजेश पहले तो सिर्फ़ सोचता था अपनी बेटी को हीरोइन बनाने के लिए,
पर अब उसने ठान लिया था की वो उसे बनाकर ही रहेगा..
फ़िल्मो में काम करने वाली ना सही,
उसकी पर्सनल हीरोइन ज़रूर बनाएगा वो उसे...
ये सोचता हुआ वो उसे गले लगाकर मंद-2 मुस्कराने लगा और धीरे से बोला : "हाँ ...क्यों नही...मैं बनाऊंगा तुम्हे ....टॉप की हीरोइन.''


और फिर जैसे उसपर कोई भूत सवार हो गया....
वो ईशा को पागलो की तरह चूमने लगा....
नीचे झुकते हुए उसने उसके पानी में भीग रहे मुम्मो को मुँह में भरा और उनका पानी निचोड़ कर पीने लगा....

ईशा का एक पैर उपर आकर उसकी जाँघ को रगड़ने लगा...
साफ़ दिख रहा था की उसकी चूत में खारिश हो रही है...
जिसे वो अपने पापा के लंड से बुझाना चाहती थी...
पर अभी के लिए राजेश ने अपना लंड नही बल्कि अपनी 2 उंगलियाँ उसकी चूत में उतार दी...

''आआआआआआआआआआआआअहह.......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...........पापा.... ........म्‍म्म्मममममम''

उसकी चूत इस वक़्त वेल्वेट जैसी फील हो रही थी...
इतना रस भरा हुआ था उसके अंदर जिससे शराब का एक जाम तैयार किया जा सकता था..

और ऐसे जाम को पीने के लिए राजेश नीचे झुका और उसने अपना मुँह उसकी रसीली चूत पर लगा दिया....


ईशा खड़ी हुई थी और उसने अपना एक पैर अपने पापा के कंधे पर रख दिया और उनके सिर को पकड़ कर अपना बेलेन्स बनाया, बाकी का काम राजेश ने अपनी नुकीली जीभ से उसकी चूत भेदकर कर दिया...
एक रसीली लय के साथ वो ईशा की चूत अपने मुँह से चोद रहा था...
और वो पागल हुए जा रही थी अपने शक्तिमान पापा से मिल रही इस मुख चुदाई को महसूस करके...

''आआआआआआआआआआआआआअहह पापा......ओह मेरे प्यारे पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममम मज़ा आ रहा है....... प्लीज़ पापा......ज़ोर से चूसो....... खा जाओ....मुझे.......... मेरी चूत को......ईईट मिईई पापा.......... ओह पापा.....आई एम कमिंग पापा....... आई एम कमिंग.......''

उसका शरीर काँप सा गया....
जब वो झड़ने लगी तो.

राजेश ने उसे सहारा दिया और उसकी दूसरी टाँग को भी अपने दूसरे कंधे पर लिया और उसकी दोनो जांगो के बीच अपना मुंह पूरा घुसा गया....
वो एक भी बूँद जाया नही जाने दे सकता था.
 
और जब उसने झड़ना शुरू किया तो राजेश को ऐसा लगा जैसे वाइब्रेशन के साथ ईशा के शरीर से रबड़ी निकल कर उसके मुँह में जा रही है...


''ओह पापा....... आई लव यू''

इतना कहकर उसका शरीर थरथराते हुए अपने पापा के जिस्म से चिपक सा गया....
वो काफ़ी देर तक कांपती रही और राजेश भी अपनी प्यारी बेटी के इस अनोखे झड़ाव को अपने होंठो पर महसूस करके काफ़ी खुश था...
होता भी क्यों नही,
ऐसी नशीली शराब पहली बार पीने को मिली थी उसे.

और वो जानता था की अब ये होता रहेगा..

कुछ देर बाद ईशा अपने पैरों पर खड़ी हुई और मुस्कुराते हुए अपने पापा से गले लगकर उन्हे प्यार करने लगी...
राजेश ने भी साबुन उठाकर उसके पूरे बदन पर लगाया और उसे अच्छे से नहलाया...
ईशा के हर अंग को ख़ासकर उसके बूब्स, चूत और गांड को वो अच्छे से रगड़ रहा था,
आने वाले दिनों में ये अंग बहुत काम आने वाले थे.


राजेश का लंड अभी तक खड़ा था...
और उसे पता था की उसका क्या करना है...
ईशा को नहलाने के बाद उसने उसे टॉवल दिया और उसे बाहर भेजते हुए बोला...

''तुम अंदर जाओ....और मोम को भेज देना....''

ईशा ने मुस्कुराते हुए अपने पापा के खड़े लंड को देखा और बोली : "समझ गयी पापा....अभी भेजती हूँ...''

इतना कहकर वो अपने चोट लगे पैर को संभालते हुए बाहर आई और किचन में काम कर रही रजनी को पीछे से जकड़कर, धीरे से उनके कान में बोली : "मोम ....छोड़ो ये सब....अंदर जाओ बाथरूम में ...पापा बुला रहे है....और उनका लंड पूरा खड़ा है इस वक़्त...''

अपनी ही बेटी के मुँह से अपने पति के खड़े लंड की बात सुनते ही रजनी की चूत एकदम से पनिया गयी...
उसने 2 बूँद पानी वहीं खड़े-2 छोड़ दिया....

और मुस्कुराते हुए वो ईशा की तरफ पलटी और शरमाते हुए उस से बोली : "बेशरम कहीं की....चल तू जा अपने रूम में , कपड़े पहन ले...मैं आती हूँ अभी...''

इतना कहकर वो नशीली चाल चलती हुई बाथरूम की तरफ चल दी....
आज बरसों बाद वो राजेश से बाथरूम में चुदने वाली थी.
 

"मोम ....छोड़ो ये सब....अंदर जाओ बाथरूम में ...पापा बुला रहे है....और उनका लंड पूरा खड़ा है इस वक़्त...''

अपनी ही बेटी के मुँह से अपने पति के खड़े लंड की बात सुनते ही रजनी की चूत एकदम से पनिया गयी...उसने 2 बूँद पानी वहीं खड़े-2 छोड़ दिया....और मुस्कुराते हुए वो ईशा की तरफ पलटी और शरमाते हुए उस से बोली : "बेशरम कहीं की....चल तू जा अपने रूम में , कपड़े पहन ले...मैं आती हूँ अभी...''

इतना कहकर वो नशीली चाल चलती हुई बाथरूम की तरफ चल दी....आज बरसों बाद वो राजेश से बाथरूम में चुदने वाली थी.

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अब आगे
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रजनी की हालत ऐसी हो रही थी की उसे किचन से बाथरूम तक का सफ़र कोसो दूर लग रहा था...
वो अपनी गीली छूट को जाँघो के बीच दबाती हुई धीरे-2 कदमो से उस तरफ जा रही थी ,
और उसकी चूत हर कदम पर जांघो के बीच दबकर निम्बू की तरह खुद ब खुद निचुड़ रही थी

इस वक़्त अगर उसकी रसीली गांड पर कोई ज़ोर से चांटा मारता तो चूत में से झनझनाकर गाड़े रस की बारिश हो जाती..

उसने कुरती और नीचे एक ढीला सा पयज़ामा पहना हुआ था, कुरती उसने निकाल फेंकी और ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी...
इतनी बेशरम शायद वो आज से पहले कभी नही हुई थी जब उसकी बेटी घर पर हो और वो राजेश के साथ ऐसी रासलीला मनाने जा रही हो..
पर इस वक़्त शायद उसका खुद पर भी काबू नही रह गया था और ये बात उसके खड़े हुए निप्पल्स सॉफ दर्शा रहे थे...
नंगे होने के बाद उसके मुम्मे और उनपर लगे निप्पल्स और भी कठोर हो चुके थे.



अब तो बस उसका मन कर रहा था की राजेश उन्हे पकड़े और निचोड़ डाले...
अंदर ही अंदर उसकी रगों में जो मीठा सा दर्द उठ रहा था वो इसी तरीके से जा सकता था.

उसने जल्दी से अपना पायजामा भी उतार फेंका और बाथरूम के अंदर जा घुसी.

अंदर का नज़ारा देखकर उसके तन बदन की आग और भी भड़क उठी...
राजेश अपने पूरे शरीर में साबुन लगाकर अपने खड़े लंड को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लेकर मसल रहा था...
शायद ईशा के जवान जिस्म को सोचकर वो अपने नाग को सहला कर शांत करने की कोशिश कर रहा था.

उसने भी जब रजनी को नंगी ही अंदर आते देखा तो उसके हाथो की गति और तेज हो गयी...
पर फिर उसने हाथो को बड़ी मुश्किल से रोका, क्योंकि ऐसा करके तो वो खुद ही अपना माल निकाल देता और फिर रजनी को बुलाने का कोई मतलब ही नही रह जाना था.

और आज तो उसे रजनी की चूत अच्छी तरह से चोदनी थी...
उसने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने गले से लगाकर उसके पूरे शरीर पर अपना बदन रगड़ने लगा...उसके होंठो को मुँह में लेकर उन्हे चूसने लगा और उसकी देसी शराब जैसे होंठो का मज़ा लेने लगा.

रजनी भी अपने भरे पूरे मुम्मो को राजेश के बदन से रगड़कर अपनी खुजली कम करने की कोशिश करने लगी... राजेश ने उसे सामने से पूरा रगड़ा और फिर उसे पलटाकार उसकी गांड से चिपक गया और अपने हाथ आगे करके उसके मोटे मुम्मो को अपने हाथो से निचोड़ने लगा.

उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जादू था राजेश के हाथो में...
इन्फेक्ट मुम्मो को कैसे निचोड़ा जाता है ये एक मर्द ही अच्छे से जान सकता है
यही तो सोचती हुई आ रही थी वो की उसका पति उसके मुम्मो को पकड़े और निचोड़ डाले.

राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर फिसलकर उनकी मसाज करने लगे..



साथ ही साथ वो उसकी भरंवा गांड पर अपने खड़े लंड की रगड़ाई भी कर रहा था...
साबुन की फिसलन इतनी थी की वो अगर अपने लंड को पकड़कर उसकी गांड पर लगाता तो भी वो वहाँ जा घुसता...
हालाँकि आज तक राजेश ने कभी गांड नही मारी थी रजनी की पर अब शायद शेफाली की कृपा से वो काम भी कर सकता था...
पर ये जगह पहली बार गांड मरवाई के लिए सही नही थी क्योंकि उसमे दर्द भी होना था उसे
और इस वक़्त वो उसे दर्द नही बल्कि मज़े देना चाहता था.
 
पर मज़े देने के बारे में तो रजनी ने भी सोच रखा था,
वो पलटी और नीचे बैठकर उसने राजेश के लंड को पकड़ लिया...
एक बार फिर से अपने लंड की चुसाई के बारे में सोचते ही उसका लंड और कड़क हो उठा...
रजनी ने बड़े प्यार से राजेश के कड़क लंड को देखा और अपनी जीभ निकाल कर उसे चाटने लगी..
राजेश ने शावर ओंन कर दिया था ताकि उन दोनो के जिस्म की गर्मी कम भी होती रहे.



कुछ देर तक लंड को जीभ से चाटने के बाद वो उसे निगल गयी और जोरों से चूसने लगी.

राजेश ने बड़ी मुश्किल से अपने आप को झड़ने से बचाया जब रजनी ने अपनी पूरी ताकत से उसके लंड को चूसा और उसकी बाल्स को अपने हाथो से मसला.

ये नये-2 तरीके पता नही रजनी कहाँ से सीख रही थी पर उसे भी अब इन सबको करने में काफ़ी मज़ा मिल रहा था..

अब राजेश के बस की बात नही रह गयी थी और देर तक रुके रहना..
उसने रजनी को खड़ा किया आर उसकी एक टाँग उठा कर उसे कमान की तरह तिरछा किया और उसकी चूत में तीर की तरह अपना लंड पेल दिया.

''आआआआआआआआअहह मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी...................... उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़...... धीरे राजेश..........तुम तो फाड़ ही डालोगे मेरी चूत को.....''


ये उसने इसलिए कहा था क्योंकि राजेश का तरीका बड़ा ही वहशियाना था...
आज तक उसने इतनी ज़ोर से झटका मारकर अपना लंड अंदर नही डाला था...
पर ये शायद उसकी उत्तेजना थी या फिर इतनी देर से खड़े लंड की फरमाइश जो उसने ऐसा तरीका अपनाया था उसकी चूत में जाने का.

एक हाथ से उसने जाँघ को पकड़ा और दूसरे से उसकी गांड को सहारा दिया ताकि वो नीचे ना गिर जाए...
रजनी ने भी अपने लचीले शरीर को पूरा खोलकर सामने वाली दीवार पर अपना पैर टीकाया और राजेश के लंड को अंदर बाहर करते हुए उसके मज़े लेने लगी..

और जब रजनी चीखी थी तो अपने रूम में नंगी होकर अपने कपड़े पहनने की कोशिश कर रही ईशा भी चोंक गयी....
अपनी माँ की चीख और बाद में आ रही सिसकारियों का ऐसा असर हुआ उसपर की वो कपड़े पहनना छोड़कर नंगी ही बिस्तर पर लेट गयी और अपनी गीली चूत को बुरी तरह से रगड़ने लगी..

और अपनी अधूरी चुदाई की शिकायत करती हुई बुदबुदाने लगी.

''आआआआहह......पापा......गंदे पापा.....मोंम को चोद रहे हो....आआआहह......मुझे कब.... उम्म्म्ममम चोदोगे पापा..... कितने गंदे हो आप..... कल रात भी नही किया....अहह और आज भी नही...... कर तो सकते थे ना ....अभी.... बाथरूम में ...जैसे मोंम को फक्क कर रहे हो....वैसे ही.... मुझे भी कर देते........अहह......बड़े गंदे हो आप.....आई हेट यू पापा.........गंदे पापा........उननननहहहह ''



और ये बड़बड़ाते हुए उसकी आँखो के सामने पापा का नंगा लंड भी नाच रहा था....
जिसे वो इस वक़्त अपनी चूत में महसूस कर रही थी उंगली के रूप में...
और उसी एहसास को एक आनंदमयी सिसकारी के साथ अंदर तक महसूस करके वो झड़ गयी....
10 मिनट में ये दूसरी बार था जब वो झड़ी थी पर उसकी प्यास अभी भी नही बुझी थी.

दूसरी तरफ राजेश ने रजनी को घुमाकर उसका मुँह सामने कर दिया और उसकी दोनो बाहें पकड़कर अपना लंड उसकी बुर में पेलकर उसे पीछे से चोदने लगा.

ये एक ऐसा पोज़ था जिसमें उसका गीला लंड उसकी रसीली चूत में अंदर तक ठोकर मार रहा था.



हर झटके से रजनी के मुम्मे उछलकर उसके चेहरे से टकराने की कोशिश करते और फिर वापिस आकर उसकी छाती पर ठोकर मारते...
पीछे से राजेश के लंड की ठोकर और आगे से उसके खुद के मुम्मो का प्रहार उस से सहन नही हो रहा था.

वो चीखने लगी

चिल्लाने लगी
''आआआआआआआआआहह साआआआआआआआाालल्ल्ले.........मार डाला..... अहह........ फकककककककक मिईिइ राजेश.......... ऐसे ही.....मारो मेरी ......अहह...... चूऊऊऊऊऊऊऊऊत....... म्‍म्म्ममममममम ममममममममम ....... मैं तो गयी......... मैं ग...ईईईईईईईईईईईईई आआआआआहहहहहह ''

और एक लंबी सिसकारी मारकर उसने राजेश के लंड का अभिषेक कर दिया अपनी चूत के रस से.

और राजेश ने भी उसकी भरंवा गांड मसलते हुए उसकी चूत के लॉकर में अपने लंड का पानी डिपॉज़िट करवाना शुरू कर दिया....
पर वो माल इतना ज़्यादा था की बैंक का लॉकर तोड़कर बाहर तक आ गया और जाँघो से होता हुआ पानी में बहने लगा..

उसके बाद दोनो ने एक दूसरे के शरीर को अच्छी तरह से सॉफ किया, और नहा धोकर अपने कमरे में आ गये.

तब तक अपने कमरे में नंगी लेटी ईशा ने भी अपने कपड़े पहन लिए थे और अपनी सुबकती हुई चूत को दिलासा देकर उसे जल्द ही पापा के लंड से मिलवाने का वादा भी किया उसने.

रजनी जल्दी से कपड़े पहन कर वापिस किचन में चली गयी,
उसे अभी नाश्ता भी तैयार करना था और राजेश के लिए लंच भी पेक करना था.
 
राजेश अपने कमरे में तैयार हो ही रहा था की तभी उसका ध्यान घर की सफाई करती पिंकी पर गया...
वो उनके घर की नौकरानी थी, जो करीब 2 साल से उनके घर का काम किया करती थी...
देखने में काफी सैक्सी थी, साँवले रंग के बावजूद एक आकर्षण था उसके चेहरे पर...शरीर कसा हुआ था था.

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राजेश ने आज तक उसके बारे में कभी दूसरी तरह से नही सोचा था
पर आज वो सोच रहा था और सोचते-2 उसने एक प्लान भी बना लिया...
और ऐसा प्लान जिसमें खुद रजनी उसे उसके सामने परोसेगी.

मुस्कुराते हुए उसने अपनी ड्रॉयर खोली और उसमें से शेफाली वाला नेकलेस निकाल लिया,
उसे देखते हुए वो सोचने लगा की आज तक वो टेबल के दूसरी तरफ बैठकर उस हार के बारे में सोचा करता था पर आज वो टेबल के इस तरफ आकर बैठ चुका था और अब वो उस हार की असलियत जानता था..
हालाँकि उसमें ऐसी कोई शक्ति नही थी जो उसके पहनने वाले को उसके प्रति सेक्सुअली अट्रेक्ट करे पर आज जो उसने प्लानिंग की थी उसके बाद उस हार में वो शक्ति आने वाली थी..

फिर उसने पिंकी को देखा और बोला : "अर्रे पिंकी, ये देखो ज़रा...कैसा हार है ये...''

पिंकी ने उसे देखा तो उसकी आँखे चमक उठी...
उसे हाथ मे लेते हुए बोली : "अर्रे वाह , ये तो बहुत अक्चा हार है साहब...मेमसाब का है क्या ''

राजेश : "अर्रे नही...ये तो बस ऐसे ही ऑनलाइन मंगवाया था....पर उसका नही है....उसे पसंद भी नहीं आया, मैं सोच रहा था की ये तुम रख लो...''

पिंकी ने चौंकते हुए उसे देखा और उसे वापिस देते हुए बोली बोली : "नही साहब...मैं कैसे...?? ''

राजेश ने ज़बरदस्ती उसके हाथ में वो हार धकेलते हुए कहा : " अर्रे चिंता मत करो...तुम रखो...मैं बोल रहा हूँ ना...रजनी के लिए मंगवाया था पर उसे पसंद नही है...इसलिए तुम रख लो,''

राजेश के इस गिफ्ट को पाकर उसका चेहरा खिल उठा...
वो भी सोचने लगी की इस खड़ूस को अचानक क्या हो गया...
आज तक उसे ढंग से देखा तो है नही और आज एकदम से उसे गिफ्ट दे रहा है...
कही उसपर लाइन तो नही मार रहा...
वैसे मार भी रहा है तो उसे बुरा थोड़े ही लगेगा...
इतने हेंडसम है साहब.

ये सोचकर वो खुद ही शर्मा गयी और उसने तुरंत राजेश के दिए गिफ्ट को अपने गले में डाल लिया...
और फिर गुनगुनाते हुए घर की सफाई करने लगी.

राजेश भी मुस्कराते हुए कमरे से निकलकर बाहर आया और डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसने नाश्ता किया और फिर टिफ़िन लेकर वो अपने हॉस्पिटल की तरफ चल दिया....

उसने अपना जाल फेंक दिया था, अब बाकी का काम शेफाली के हार ने करना था.
 

राजेश के इस गिफ्ट को पाकर उसका चेहरा खिल उठा...वो भी सोचने लगी की इस खड़ूस को अचानक क्या हो गया...आज तक उसे ढंग से देखा तो है नही और आज एकदम से उसे गिफ्ट दे रहा है...कही उसपर लाइन तो नही मार रहा...वैसे मार भी रहा है तो उसे बुरा थोड़े ही लगेगा...इतने हेंडसम है साहब.

ये सोचकर वो खुद ही शर्मा गयी और उसने तुरंत राजेश के दिए गिफ्ट को अपने गले में डाल लिया...
और फिर गुनगुनाते हुए घर की सफाई करने लगी.राजेश भी मुस्कराते हुए कमरे से निकलकर बाहर आया और डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसने नाश्ता किया और फिर टिफ़िन लेकर वो अपने हॉस्पिटल की तरफ चल दिया....उसने अपना जाल फेंक दिया था, अब बाकी का काम शेफाली के हार ने करना था.

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अब आगे
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हार पहेन्ने के बाद टोपींकी खुद को कहीं की महारानी समझ रही थी...उसने अपनी सॅडी का आँचल तोड़ा और नीचे किया ताकि हार पूरा दिखाई दे...बातरूम मे जाकर वो काफ़ी देर तक उसे निहारती भी रही.

फिर वो एक गाना गुनगुनाती हुई घर का काम करने लगी...
आज सच में उसे अंदर से खुशी हो रही थी...
शादी को 5 साल हो चुके थे उसकी पर आज तक उसके बेवड़े पति ने एक भी गिफ्ट नही दिया था उसे...
हालाँकि दूसरे घरों में काम करने की वजह से वहां की मेमसाब् पुराने कपड़े दे दिया करती थी पर आज तक किसी ने ऐसा नया हार नही दिया था.

ईशा अपने रूम में नाश्ता करने के बाद दवाई लेकर फिर से सो गयी..
रजनी बैठ कर अपना सीरियल देख ही रही थी की तभी उसकी नज़र पिंकी के गले में पड़े नेकलेस पर गयी...
और उसे देखते ही उसके तोते उड़ गये.

वो लगभग चिल्लाते हुए बोली : "अर्रे पिंकी.....ये....ये हार तेरे पास कैसे....''

वो मुस्कुराते हुए बोली : "ये....ये तो साहब ने दिया है मुझे....''

रजनी ने अपना माथा पीट लिया...
ये राजेश को क्या हो गया है...
ये उसे क्यों दे दिया...
आज तक की जो प्लानिंग उन लोगो ने की थी वो इसी हार के इर्द गिर्द ही तो थी...
अगर ये हार पिंकी के पास चला गया तो उनका सारा प्लान ही खराब हो जाएगा...
वैसे तो राजेश को इस बात का अब भरोसा हो चुका था की सिर्फ़ हार को पहनने मात्र से ही शेफाली की आत्मा उस शरीर पर जादू सा कर देती है, बाद में वो हार पहना हो या ना पहना हो, शेफाली का वो जादू बरकरार ही रहता है...
और अभी तक वो, ईशा और चाँदनी तो उस हार को पहन कर मज़े भी ले चुके थे...
पर अभी तो राधिका भी बची थी और हो सकता है बाद में भी वो हार काम आता.

लेकिन राजेश ने वो हार पिंकी को देकर उनके सारे मंसूबों पर पानी ही फेर दिया था.

और पिंकी को वो हार देने के 2 ही मतलब ही सकते थे....
एक, वो उस हार को उसे देकर अपने घर से शेफाली के साए को दूर करना चाहता था ,
दूसरा, वो शायद ये हार पिंकी को देकर उसके उपर भी शेफाली का असर देखना चाहता था...
यानी राजेश का मन पिंकी को चोदने का था.

नही नही....
ऐसा नही हो सकता....
जब राजेश के सामने इतने अच्छे विकल्प है, कच्ची जवानियां है तो वो उस कामवाली के पीछे क्यों भागेगा.

पर ये भी तो हो सकता है की वो देखना चाहता हो की उस हार का असर पिंकी पर होता है या नही...
हाँ , ये पासिबल है,
और शायद इसलिए उसने ऑफीस जाने से पहले वो हार उसे दिया हो ताकि शाम तक या कल उसका असर देखने को मिल जाए..

पर कोई जादू या शेफाली की आत्मा हो तभी तो असर होगा,
ये तो उन सबका प्लान था जो आपस में मिलकर बनाया गया था...
पर अब पिंकी के बीच में आ जाने से उस प्लान की ऐसी तैसी हो चुकी थी.

उसने तुरंत राधिका को कॉल मिलाया और उसे विस्तार से सारी बाते बताई...
और जिन बातों का उसे अंदेशा हो रहा था वो भी बताया.

राधिका भी चकरा गयी इस बात को सुनकर...
फिर दोनो ने यही उपाय निकाला की या तो पिंकी को अपने खेल में शामिल कर लो या फिर उसे एक्टिंग करने के लिए कहा जाए ताकि राजेश का भरोसा उस हार पर बना रहे. और साथ ही उससे वो हार भी वापिस ले लिया जाए.

उस कामवाली को अपने प्लान में शामिल करने का तो सवाल ही नही उठता था,
वो 10 घरों में काम करने वाली औरत अगर बाहर जाकर ये बोल दे की राजेश की बीबी और बेटी ने उसका लंड लेने के लिए ये सब प्लानिंग की है तो वो दुनिया को मुँह दिखाने लायक नही रहेगी.

इसलिए उसे पटाकर राजेश के साथ चुदाई के लिए तैय्यार करवाना पड़ेगा...
और उससे वो हार भी वापिस लेना पड़ेगा
यही सही ऑप्शन था.

कुछ देर बाद जब पिंकी घर का सारा काम निपटा कर जाने लगी तो रजनी ने उसे अपने कमरे में आने के लिए कहा...

उसके अंदर आते ही रजनी ने उसके हाथ में 500 का नोट रख दिया और बोली : "ये पैसे रख ले और आज से अगले 3-4 दिन तक मेरे बदन की मालिश भी कर दिया कर...पिछले कुछ दिनों से काफ़ी दर्द हो रहा है..''

पहले हार और अब 500 रुपय पाकर पिंकी तो खुशी के मारे चहकने ही लगी...

वो बोली : "ठीक है मेमसाब्....आप कपड़े निकालो, मैं तेल गर्म करके लाती हूँ ''

और वो पैसे अपने ब्लाउज़ में ठूसकर वो किचन में चल दी.
 
रजनी भी इन लोगो का नेचर अच्छे से जानती थी, इसलिए पहले ही पैसे दिखाकर उसे खुश कर दिया ताकि बाद में वो उस काम के लिए मना ना कर पाए..

एक बार पहले भी उसने पिंकी से मालिश करवाई थी, तब उसे 50 रुपय दिए थे.और तब उसने ब्लाउज़ और पेटीकोट पहन कर मालिश करवाई थी...
पर आज उसने वो दोनो चीज़े भी उतार दी और सिर्फ़ पेंटी और ब्रा में अपने बेड पर लेट गयी.

जब पिंकी अंदर आई तो एक पल के लिए रजनी को ऐसी अवस्था में लेटे देखकर वो चोंक गयी...
पर फिर मंद-2 मुस्कुराते हुए वो बेड के किनारे पर बैठी और गर्म तेल लेकर रजनी के कंधे और बाजुओं को रगड़ने लगी.

पिंकी : "आप तो कपड़ो के अंदर और भी ज़्यादा सुंदर दिखते हो मेमसाब्...साहब तो देखकर पागल हो जाते होंगे इतने गोरे जो हो आप...''

रजनी : "होरे रंग से क्या होता है...दिखने में सैक्सी होना चाहिए...छाती और गांड में चर्बी होनी चाहिए, कोई भी मर्द खुश हो जाएगा...''

पिंकी भी अपनी रजनी के मुंह से इतनी खुली बातों को सुनकर खिलखिला कर हंस दी..

पिंकी : "आप सही बोली मेमसाब्...पर मेरा मरद है ना...वो तो गोरे रंग को देखकर लार टपकाता है....वो तो एक दिन आपके बारे में भी...''

कहते-2 वो रुक गयी...

रजनी के पूरे शरीर में चींटियां सी रेंगने लगी जब उसने ये सुना तो....

वो बोली : "क्या बोला तेरा मरद ....बोल ना....क्या बोला बिरजू''

पिंकी : "वो...वो कुछ नहीं ...बस ऐसे ही....सॉरी...ग़लती से निकल गया...''

रजनी : "देख, जल्दी से बोल, मैं कुछ नही कहूँगी...''

पिंकी (डरते-2 बोली) : "वो...वो उस दिन जब घर की चाबी लेने यहाँ आया था और आपको देखा था तो..तो....रात को...मेरे उपर चड के....वो...बोल रा था....की...''

रजनी : "अर्रे, आगे भी बोल, क्या बोल रहा था....तेरी तो गाड़ी ही रुक गयी...''

पिंकी : "वो बोल रहा था की तेरी मेमसाब् कितनी चिकनी है...मेरे नीचे आए तो फाड़ कर रख दूँ उनकी...''

पिंकी का पति बिरजू दिहाड़ी पर काम करने वाला एक मजदूर था, जो कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करता था

रजनी का दिल धक्क से रह गया ये सुनकर...
वैसे वो अक्सर रिक्शे वाले या धोबी को देखकर उत्तेजित हो जाया करती थी...
पर इस तरह एक मजदूर के दिल की बात अपने बारे में सुनकर उसकी चूत में पानी ज़रूर भर आया...
और निप्पल भी गर्व के मारे फूल कर कुप्पा हो गये..

पिंकी ने उसके बाद कोई वैसी बात नही की...
बस धीरे-2 रजनी के बदन पर तेल लगाती रही...
जब वो कमर से नीचे तेल लगा रही थी तो रजनी ने हाथ नीचे करके अपनी पेंटी उतार दी....
अब उसकी नंगी और चिकनी गांड पिंकी की आँखो के सामने थी.



एक पल के लिए तो बेचारी पिंकी की समझ में भी नही आया की उसकी मेमसाब् ऐसा क्यों कर रही है...
पर अभी जो वाक़या हुआ था उसके बाद उसकी ज़ुबान पर जैसे ताला लग गया था,
इसलिए गर्म तेल लेकर वो उसके दोनो चूतड़ों को रगड़ने लगी.

रजनी की चूत इस वक़्त बुरी तरह पनिया रही थी....
शायद बिरजू की बात सुन सुनकर और उसके बारे में सोचकर...
वो आँखे बंद किए सोच रही थी की बिरजू उसे घोड़ी बनाकर, पीछे से उसकी चूत को बुरी तरह से चोद रहा है.



वो अपनी जाँघो को आपस में रगड़कर चूत को सहलाने का काम भी कर रही थी,
बाकी की कसर पीछे से पिंकी के हाथ उसकी गांड को रगड़कर कर रहे थे....
एक अलग ही सेंसेशन फील हो रहा था उसे इस वक़्त.

फिर अपनी नशीली आवाज़ में रजनी बोली : "तेरे पति को तो गोरे रंग वाली मेमसाब् पसंद आती है....तुझे भी तो आते होंगे गोरे रंग वाले साब लोग पसंद...''

पिंकी ये सुनते ही मुस्कुरा उठी और बेझिझक बोली : "हाँ ...आते है ना....गोरे-2 साब लोगो का हथियार भी तो गोरा होता होगा...उसे चूसने में कितना मज़ा आएगा....''

और एक बार फिर से अपनी कही बात को बोलकर वो पछता गयी....
और अपनी जीभ को दांतो तले दबाकर अपने सिर पर एक चपत लगाई और मन ही मन खुद पर कंट्रोल करने को कहा..

और यहाँ रजनी के ख्यालात उससे अलग थे...
उसे काला पसंद था...
हालाँकि राजेश का भी कोई गोरा चिट्टा नही था...
पर उसे काला नही कहा जा सकता था...
रजनी के हिसाब से तो मोटा, काला , घने बालो से घिरा हुआ लंड उसकी उत्तेजना को किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाएगा...
 
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