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XXX Kahani - हीरोइन

वो बेड पर बैठी और अपनी टी शर्ट उतार फेंकी और फिर हाथ पीछे करते हुए उसने अपनी ब्रा भी उतार कर नीचे कर दी...
उसकी मस्त और चिकने बूब्स देखकर राजेश के खड़े लंड ने एक जोरदार झटका मारकर उसकी सराहना की



फिर वो थोड़ा आगे झुकी और उसने एक बार फिर से अपने पापा का लंड मुंह में लिया और उसे चूसने लगी , ऐसा करते हुए वो मुंह से आवाजें भी निकाल रही थी

उम्मम्मम्मम्म ओह्ह्ह्हह्हह पापा। ....... इटस सोओओ टेस्टीssssssss उम्मम्मम्मम्मम आई वांट आलsssssss ''

और फिर उसने हाथ नीचे करके उसकी बॉल्स को भी मसला

ये लम्हा राजेश को इतना उत्तेजित कर गया की उसके लंड ने बर्फ़ीली आग उगलनी शुरू कर दी जिसे उसने बड़ी ही कुशलता से अपने मुँह में लेकर निगल लिया....



उसके लंड को पूरा चाटने के बाद वो फिर से उपर आई और मुस्कुराते हुए उसने राजेश को देखा और ''आई लव यू पापा'' कहते हुए उसे फिर से स्मूच करने लगी....

इस बार राजेश के हाथ उसकी नंगी कमर को सहला रहे थे, उसकी नजरें इस वक़्त ईशा के तने हुए स्तनों पर थी ...
उसके भरे हुए बूब्स देखकर राजेश पलके झपकना भी भूल गया....

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राजेश को ऐसे अपलक अपनी आप को निहारते देखकर ईशा ने खुद ही उसके हाथ पकड़े और अपने बूब्स पर रख दिया..

उफफफफ्फ़ कितने मुलायम थे वो....
रुई के गोले जैसे

राजेश ने उन्हे अपनी हथेलियो में पकड़कर ज़ोर से भींच दिया...
वो उसकी उंगलियो के बीच से इधर उधर निकलकर ऐसे झाँकने लगे कैसे पानी के गुब्बारे को पकड़कर दबाने से होता है..

''आआआआआआआआहह पापा.......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... धीरे......प्लीज़.....''

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अब राजेश से सब्र नही हुआ और उसने आगे बढ़कर उसके बूब्स को अपने मुँह में रखकर चुभलाना शुरू कर दिया..

''ओह्ह माय डार्लिंग पापा.....प्लीज़ सक इट....... हाआरडररर ''

राजेश ने उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ ज़ोर से दबोच सा लिया....
और उसके बूब को पूरा मुँह में रखकर खा गया.

उफफफफफ्फ़ क्या सेक्सी नज़ारा था....
ईशा का पूरा मुम्मा अपने पापा के मुँह में था,
जिसे वो चुसवा भी रही थी और आनंद से भरी किलकरियाँ भी मार रही थी...

[color=rgb(0,]''ओह पापा......... इट्स फीलिंग सोओ गुड....... यससस्स पापा........ ऐसे ही......सक्ककक मिि हार्ड........ काटो इन्हे......ज़ोर से.....चबा जाओ.......निप्पल्स चूसो ना पापा...... उम्म्म्मममममममममममममम यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ऐसे ही...... अहह......''[/color]

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ऐसा करते हुए वो राजेश की गोद में चड़कर उसकी जाँघ पर बैठ गयी...
एक पैर इधर और दूसरा उधर...
और अपनी चूत को उसपर घिसते हुए जोरों से रगड़ने लगी....
और जल्द ही अपना मुम्मा चुस्वाते हुए, अपने पापा की गोद में झटके मारते हुए वो जोरों से झड़ने लगी....

''आआआआआआआआआआआअहह पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममम......... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... आई एम् कमिंग........''

राजेश को भी अपनी बेटी की गर्माहट अपनी जाँघो पर पिघलती हुई महसूस हुई..

और एक बार फिर से दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर एक लंबी स्मूच में बदल गये...

अभी तो ये शुरूवात थी...
आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी.
 


ऐसा करते हुए वो राजेश की गोद में चड़कर उसकी जाँघ पर बैठ गयी...एक पैर इधर और दूसरा उधर...
और अपनी चूत को उसपर घिसते हुए जोरों से रगड़ने लगी....और जल्द ही अपना मुम्मा चुस्वाते हुए, अपने पापा की गोद में झटके मारते हुए वो जोरों से झड़ने लगी....
''आआआआआआआआआआआअहह पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममम......... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... आई एम् कमिंग........''
राजेश को भी अपनी बेटी की गर्माहट अपनी जाँघो पर पिघलती हुई महसूस हुई..और एक बार फिर से दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर एक लंबी स्मूच में बदल गये...अभी तो ये शुरूवात थी...आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी.

************
अब आगे
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अभी तक वो सिर्फ़ टॉपलेस थी
नीचे उसने स्लेक्स अभी तक पहनी हुई थी,
जो झड़ने के बाद काफ़ी गीली हो चुकी थी,
ईशा का बदन अभी तक ऑर्गेज़म के झटके मार रहा था...
रह रहकर उसकी नन्ही चुचियों में एक सिहरन सी दौड़ जाती जिसका कंपन राजेश को भी महसूस होता....
शायद इतने जबरदस्त तरीके से वो पहली बार झड़ी थी.

राजेश की बाहो में लेटे हुए जब उसने अपनी नशीली आँखे खोली तो ऐसा लगा जैसे वो किसी गहरी नींद से जागी हो...
और अचानक उसे लगा की वो ईशा को नही बल्कि शेफाली को देख रहा है...
वही नशीलापन,
वही कशिश,
वही गहराई
और
वही सैक्सीनेस.
सब दिख रहा था उन आँखो मे.

ईशा ने अपना एक हाथ उसके चेहरे पर रखा और उसे सहलाने लगी...
सहलाते हुए वो अपनी उस उंगली को उसके होंठो तक ले आई जिसमे ईशा ने वो शेफाली की अंगूठी पहनी हुई थी...
और वो बुदबुदाई : "कैसा फील हो रहा है डार्लिंग....''

ये शायद राजेश की लाइफ में पहली बार था जब ईशा ने उसे बिना 'पापा' बोले सबोधित किया था.

एक पल के लिए तो उसकी गांड ही फट गयी ये सोचकर की इस वक़्त उसकी बाहों में उसकी जवान बेटी नही बल्कि शेफाली है...
पर फिर उसने उस विचार को झटका देकर निकाल दिया क्योंकि वो पहले ही जान चुका था की शेफाली जो भी कर रही है उसे मज़े देने के लिए और उसके भले के लिए ही कर रही है...

वो मुस्कुराया और बोला : "बहुत मज़ा आ रहा है जानेमन ''

ये सुनते ही वो पागलों की तरह उसके चेहरे और होंठो को चूमने लगी और अपनी जीभ और होंठों से चूम-चूमकर उसे भिगो ही डाला उसने..

और बोली : "इतने सालो से इस प्यार के लिए तरस गयी थी मैं ...अब मिला है मुझे ये प्यार...अब देखना , कितना प्यार करती हू तुम्हे और करवाती हूँ ...''

ये कहकर वो राजेश के गले लगकर चिपक गयी...
राजेश को शेफाली के इस इक़बालनामे को सुनकर काफ़ी खुशी भी हो रही थी और आने वाली दिनों में मिलने वाले मज़े को सोचकर उसे अपनी किस्मत पर नाज़ भी हुआ की इतने करोड़ों लोगो के होते हुए इस शेफाली ने मज़े देने के लिए उसे चुना है.

खैर, अभी के लिए तो उसे अपनी प्यास बुझानी थी और एक जवान जिस्म से बह रहे रस से अच्छी ड्रिंक कोई हो ही नही सकती थी,
इसलिए उसने हाथ नीचे करते हुए उसकी स्लेक्स को उसकी गांड से नीचे खिसका दिया,
ऐसा लगा जैसे फुटबॉल के उपर से रबड़ का कवर निकाल फेंका हो..
नीचे से हश्ट पुष्ट और स्वस्थ गांड निकल आयी राजेश के सामने,

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उसने उन्हे पकड़कर भींच दिया,
ईशा को ऐसा फील हुआ जैसे किसी ने उसकी गांड नही बल्कि नींबू निचोड़ दिया हो,
जिसके नीचूड़ने से उसकी चूत का रस पानी की तरह छींटे मारता हुआ बाहर गिरने लगा.

''आआअहह......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... मज़ा आ गया ......''

राजेश ने उसकी गांड अपनी तरफ घुमा ली और अपने लंड को उसकी गांड के गद्दे पर दबाकर उसकी पीठ से जोरदार तरीके से चिपक गया..

ईशा ने खुद ही बाकी की बची हुई स्लेक्स को नीचे खिसका कर अपनी टाँगो से निकाल फेंका...
अब वो जन्मजात नंगी थी,
एकदम नंगी...
अपने प्यारे पापा की बाहों में जकड़ी हुई,
नंगी ईशा.
 
राजेश ने उसका मुँह अपनी तरफ किया और उसे गले लगाकर उसके हर मुलायम अंग को अपने जिस्म पर महसूस करने लगा..

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वो हग कब किस्स में बदल गया उसे भी पता नही चला....
होंठो को अच्छी तरह चूसने के बाद वो नीचे गया और उसके दोनो अमरूदों को भी चबाया और निचोड़ा...
और फिर, नीचे से आ रही भीनी-2 खुश्बू ने उसे अपनी तरफ खींचना शुरू किया...
राजेश पर जैसे उस गंध का नशा सा चढ़ रहा था...
एक तो वो कुँवारी चूत की खुश्बू थी उपर से उसकी खुद की बेटी की चूत से निकल कर आ रही थी वो गंध...
ऐसे में उस से बर्दाश्त करना मुश्किल सा हो रहा था,
वो खिसकते हुए जब नीचे तक पहुँचा तो उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत चूत दिखाई दी....
एकदम सफाचत...
एकदम कोरी...
एकदम गोरी

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राजेश ने जब उसकी गांड को मसला था तो उसकी चूत का सारा रस निकलकर बेड पर गिर चुका था....
और अब उसमें से रिस रिसकर एक-2 बूँद गाड़े पानी की निकलकर बाहर आ रही थी.

राजेश नीचे हुआ और उसने झुकते हुए अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत के लबों पर रख दी.

उफफफफफफफफ्फ़....
ये तो उपर वालो होंठो से भी ज़्यादा मुलायम थे.

एक गहरी सिसकारी मारी ईशा ने जब उसे अपनी चूत पर पहली बार एक जीभ का एहसास हुआ तो...

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.....उम्म्म्मममममममममममममम पापा.............. अहह''

राजेश ने उसकी चूत की फांको को फेलाकर अपनी जीभ अंदर डालनी चाही तो वो चीख ही पड़ी....
''ओह नो पापा......प्लीज़.................... ऐसे मत करो......दर्द हो रहा है............''

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उसका कहना लाज़मी था,
क्योंकि आवेश में आकर राजेश ने शायद कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से उसकी चूत के किवाड़ खोल दिए थे..
पर वो शायद आराम से करता तब भी ईशा को यही शिकायत होनी थी,
क्योंकि वो चूत थी ही इतनी टाइट.

राजेश ने उपर मुँह करते हुए उसके चेहरे को देखा और बोला : "बैबी...अभी तो ये सिर्फ़ मेरी जीभ है, जब मेरा पेनिस अंदर जाएगा तो कैसे सहन करोगी...''

ईशा (डरते हुए) : "वो कैसे जाएगा अंदर....उसमें तो काफ़ी पेन होगा ना...और आपका पेनिस तो है भी काफ़ी मोटा...और आगे से देखा है उसे...एकदम गोल्फ की बॉल जैसा मोटा है आगे से...''

राजेश उसकी बात सुनकर हंस पड़ा...
पर अंदर ही अंदर उसे हैरानी भी हुई की शेफाली की आत्मा के होते हुए ईशा को डर क्यों लग रहा है...
अभी थोड़ी देर पहले तक तो उसका असर था उसके उपर...
फिर अचानक ये बदलाव कैसे आ गया ईशा मे...

उसे ऐसी गहरी सोच मे डूबे देखकर ईशा बोली : "क्या सोचने लगे पापा....''

राजेश : "उम्म कुछ नही....वो बस...तुम्हारी बात को सोच रहा था...''

फिर अचानक राजेश उठा और उसने स्टडी टेबल पर पड़ी गोल्फ बॉल उठा ली जो शायद ईशा उसकी गोल्फ किट में से निकाल लाई थी, उसी को देखकर शायद उसके जहन में राजेश के लंड को बॉल के साथ कम्पेयर करने का ख़याल आया होगा..

उसे बॉल उठाते देख ईशा बोली : "ये ये....क्या कर रहे है आप पापा...''

राजेश : "कुछ नही....बस तुम्हे कुछ दिखा रहा हूँ...''

फिर उसने उस बॉल को उसकी चूत से निकल रहे रस में अच्छी तरह से भिगोया ,
जिसके बाद वो एकदम हीरे की तरह दमकने लगी...
फिर उसने धीरे-2 करते हुए उस बॉल को ईशा की चूत में धकेलना शुरू किया.

ये देखकर ईशा की हवाइयां उड़ने लगी.
तब उसे एहसास हुआ की उसके पापा शायद उसका डर मिटाने के लिए अपने लंड के टोपे के बराबर की बॉल उसकी चूत में डालकर दिखा रहे है ताकि लंड लेते वक़्त उसे ज़्यादा डर ना लगे...

पर अभी के लिए उसकी हालत काफ़ी खराब होने लगी...
क्योंकि बॉल ने उसकी चूत के होंठो को लगभग अपने चारों तरफ लपेट सा लिया था और उसे थोड़ा दर्द भी हो रहा था..
पर मीठा वाला..

वो सिसकारी मारती हुई अपनी फटी हुई आँखो से उस छोटी सी बॉल को अपनी चूत में जाते हुए देखने लगी...
और धीरे-2 उसके पापा ने वो प्रयोग पूरा करते हुए वो बॉल उसकी चूत में पूरी घुसा दी

उसकी चूत के होंठो ने बॉल को चारों तरफ से लपेटकर उसे बाहर निकलने से रोका हुआ था और अंदर की संकरी दीवार ने उसे और अंदर जाने से.
 
पर बड़ा ही मनमोहक दृश्य था वो...
और आनंदमयी भी.

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शायद अंदर ही अंदर ईशा चाह रही थी की काश वो बॉल अंदर तक चली जाए...
पर ये कैसे पासिबल हो सकता था...
हाँ, उसके पापा का लंड ज़रूर जा सकता था अंदर...
और अगर ऐसा हुआ तो कितना अच्छा लगेगा ना उसे...
बॉल की तरह मोटा लंड उसकी चूत में से रास्ता बनाता हुआ जब अंदर तक जाएगा तो कितना अच्छा लगेगा उसे,
उस एहसास हो जीने का एक अलग ही मज़ा होगा..
ये सोचकर वो मंद-2 मुस्कुराने लगी.

राजेश ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और बोला : "देखा...ये तो अभी सिर्फ़ शुरूवात है, अभी और अंदर जाएगा तो ज़्यादा मज़ा आएगा...''

उसने हाँ में सिर हिला कर अपनी मोन स्वीकृति दे डाली.

पर पहले ही दिन राजेश उसे पूरी तरह से भोगना नही चाहता था...
उसके लंड में अब उतनी भी ताक़त नही रह गयी थी जितनी जवानी के दिनों में होती थी...
हालाँकि एक बार और झड़ने के लिए उसका लंड तैयार था पर एक नयी नवेली चूत को चोदने के लिए जिस कडकपन की ज़रूरत एक मर्द को होती है वो अभी के लिए नही थी उसमें...
आज के कड़कपन का रिचार्ज ख़त्म को चुका था उसका...
हाँ , कल या परसो में वो एक नये दिन के साथ नयी शुरूवात करके उस चूत का उद्घाटन ज़रूर कर सकता था.

इसलिए अभी के लिए उसने उस रसीली बॉल को उसकी चूत के घरोंदे से बाहर निकाला और उसकी जगह अपना मुँह लगाकर वहाँ से अवीरल बह रहे रस को चूसने लगा...

ईशा एक बार फिर से उसी गहरे एहसास में डूब गयी जो कुछ देर पहले उसे मिला था...
और अपने पापा के सिर को अपनी चूत में अंदर तक समेटते हुए उनके होंठो को अपनी चूत के होंठो से रगड़ने लगी...

''आआआआआआआआआहह पापा.................. उम्म्म्ममममममममममम..... मज़ा आआआआआ रहा है.......... अहह....ऐसे ही करते रहो........ अहह....''

राजेश ने अपने होंठो को गोल करते हुए जितना हो सकता था आगे तक निकाला और उन्हे एकसाथ उसकी चूत के अंदर घुसेड दिया, उसके होंठों को ईशा की चूत के होंठों ने ढक सा लिया, और फिर वो उन्न्नध्ह हुउन्न्न् करते हुए उस एक इंच के छोटे से लंड से उसकी चूत की खुजली दूर करने लगा...

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वो ज़ोर से चीखी : "अहह..... पापा........................... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स..... अहह.... मार डालोगे क्या................. उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़...... कितना मज़ा आ रहा है ऐसे करवाने में .....अहह....''

मज़ा तो उसे ही आ रहा था....
राजेश का लंड तो ऐसे ही झूल रहा था बेड से नीचे लटका हुआ,
उसने भी एक छलाँग मारी और उछलकर बेड पर आया और 69 के पोज़ में उसे अपने उपर लिटाया और एक बार फिर से उसकी चूत चूसने लगा......
जो ईशा इतनी देर से सिसकारियाँ और चीखें मार रही थी उसके मुँह को बंद करने के लिए इससे अच्छा कोई ओर उपाय हो ही नही सकता था..

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और जल्द ही दोनो की घुटि-2 सिसकारियाँ निकलने लगी
और अगले ही पल ईशा की चूत का ढेर सारा रस निकलकर राजेश के मुँह में जाने लगा और राजेश के लंड का पानी निकलकर ईशा के मुँह में.

ईशा ने अच्छी तरह से अपने पापा के लंड को सॉफ किया, उनके लंड की आख़िरी बूँद तक निचोड़कर पी डाली और फिर फिसलकर वापिस अपने पापा की तरफ मुँह किया और उनसे लिपटकर आँखे बंद कर ली....

राजेश भी झड़ने के बाद गहरी साँसे लेता हुआ ईशा के मखमली बदन को सहलाते हुए आँखे बंद करके लेट गया....
और उसकी आँख कब लग गयी उसे भी पता नही चला..

अचनका लगभग 1 घंटे बाद उसे कुछ हिलता हुआ सा महसूस हुआ....
कमरे में अंधेरा था इसलिए उसे कुछ सॉफ-2 दिखाई नही दे रहा था...
ईशा और वो अभी तक नंगे होकर एक दूसरे से लिपटकर सो रहे थे...
कोई सामने खड़ा हुआ ईशा को हिला कर उठाने की कोशिश कर रहा था

और तभी उसे फुसफुसाति हुई सी आवाज़ सुनाई दी , जो उसकी बीबी रजनी की थी

वो उनके बेड के पास खड़ी हुई ईशा को झंझोड़ कर उठाने की कोशिश कर रही थी..

रजनी को देखते ही राजेश की सिट्टी पिटी गुम सी हो गयी....
उसकी जवान बेटी नंगी होकर उससे लिपट कर सो रही थी और उसकी बीबी उनके कमरे में आकर ईशा को उठाने का प्रयास कर रही थी,
उसे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे...
अब वो उठकर भाग तो नही सकता था,
इसलिए उसने गहरी नींद में सोए रहना ही बेहतर समझा...
पर आने वाले पल उसकी लाइफ को पूरी तरह से बदलने वाले थे.
 
मैंने कहा था न टर्न पर टर्न ,लेकिन वो शायद आपकी कहानियों को दस फीसदी भी नहीं ,

बचपन में एक कविता पढ़ी थी , चेतक की वीरता , श्यामनारायण पांडेय जी की ,

राणा की पुतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था

गिरता न कभी चेतक तन पर
राणाप्रताप का कोड़ा था
वह दौड़ रहा अरिमस्तक पर
वह आसमान का घोड़ा था


न जाने क्यों आपकी कहानी पढ़कर याद आ जाती है वो लाइनें ,... वैसा ही कंट्रोल आपका है पात्रों पर , घटनाओं और कथाक्रम पर ,.... कोई सोच भी नहीं सकता था

गोल्फ बाल

रजनी ,

लेकिन उसके साथ ही मन और तन का अद्भुत संगम , हम में से उनके देह की हालत , शरीर की हरकतें बयान कर लेते हैं , पर साथ साथ और कहानी को कब रोक देना है

हम सब पाठक /पाठिकाएं
सोच रहे थे

होगा होगा होगा ,

लेकिन मामला आपने 69 की ओर मोड़ दिया ,

और कहानी रोकी कहाँ , ...रजनी ,...

फिर ईशा और शेफाली का लिंक

वही ऊँगली , जिसमें शेफाली की अंगूठी पहनी थी , ...एक अच्छी कहानी पर्त दर पर्त मज़ा देती है , और सच में यह कहानी एकदम अलग है ,...
 


अचानक लगभग 1 घंटे बाद उसे कुछ हिलता हुआ सा महसूस हुआ....कमरे में अंधेरा था इसलिए उसे कुछ सॉफ-2 दिखाई नही दे रहा था...ईशा और वो अभी तक नंगे होकर एक दूसरे से लिपटकर सो रहे थे...कोई सामने खड़ा हुआ ईशा को हिला कर उठाने की कोशिश कर रहा था , और तभी उसे फुसफुसाति हुई सी आवाज़ सुनाई दी , जो उसकी बीबी रजनी की थी, वो उनके बेड के पास खड़ी हुई ईशा को झंझोड़ कर उठाने की कोशिश कर रही थी..

रजनी को देखते ही राजेश की सिट्टी पिटी गुम सी हो गयी....उसकी जवान बेटी नंगी होकर उससे लिपट कर सो रही थी और उसकी बीबी उनके कमरे में आकर ईशा को उठाने का प्रयास कर रही थी, उसे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे...अब वो उठकर भाग तो नही सकता था, इसलिए उसने गहरी नींद में सोए रहना ही बेहतर समझा...पर आने वाले पल उसकी लाइफ को पूरी तरह से बदलने वाले थे.

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अब आगे
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शायद ये पल राजेश की लाइफ का सबसे गांड फाड़ू पल था,
उसकी वाइफ ने आज तक उसपर शक नही किया था क्योंकि राजेश ने ऐसा कोई मौका ही नही दिया था उसे,
और आज वो रंगे हाथो पकड़ा गया था अपनी बीबी के सामने
और वो भी अपनी नंगी बेटी के साथ......

रजनी ने फिर से ईशा को झींझोड़ा और फुसफुसाई : "ईशा.....ओ ईशा.....उठ....खड़ी हो...''

ईशा की गहरी साँसे राजेश की गर्दन पर पड़ रही थी....
उसने ऊंघते हुए अपनी आँखे खोली और बुदबुदाई : "क्या है मोम ....क्यूँ उठा रहे हो....''

रजनी : "चल उठ, मेरे साथ बाहर आ ड्राइंग रूम में....''

और इतना कहकर वो बाहर निकल गयी....
राजेश भी अपनी अधखुली आँखो से हैरान परेशान होकर उसे जाते हुए देखता रहा..
और वो हैरान परेशन इसलिए था की रजनी ने कुछ बोला क्यों नही,
उन दोनो को ऐसी हालत में सोते देखने के बाद भी उसका रिएक्शन एकदम शांत सा था...
और तो और वो फुसफुसा कर बाते कर रही थी ताकि राजेश की नींद ना खराब हो जाए...
और फिर अचानक उसे फिर से शेफाली का ध्यान आया और इन सब बातों को शेफाली की मेहरबानी समझ कर अपने विचारों पर विराम लगा दिया.

तब तक ईशा उठ चुकी थी...
और उठकर अपने कपड़े देख रही थी जो पूरे कमरे में इधर उधर फेले पड़े थे...
उसकी हालत भी कुछ ऐसी ही थी, बिखरी हुई सी, पर इस हालत में वो और भी ज़्यादा सैक्सी दिख रही थी.



उसे शायद फिर से कपड़े पहनने का आलस आ रहा था इसलिए वो ऐसे ही उठी, एक नज़र उसने सोते हुए राजेश पर डाली और नंगी ही बाहर की तरफ चल दी..हालाँकि उसके पैर में प्लास्टर लगा था, पर एक पैर को मोड़कर वो राजेश की लाई बैसाखी के सहारे चलती हुई बाहर आ गयी.

राजेश भी तुरंत उठा और बंद दरवाजे के पीछे से बाहर ड्राइंग रूम का नज़ारा देखने लगा,
उसके मन में भी उत्सुकतता थी की आख़िर वो इतनी रात को ईशा को ऐसे बाहर क्यों बुला रही है..

बाहर रजनी एक सोफे पर बैठी उसका ही इंतजार कर रही थी, उसे ऐसे नंगी ही बाहर आते देखकर वो मुस्कुराइ और उठकर उसे गले से लगा लिया.. और फिर उसे अपनी गोद में लेकर बैठ गयी...

माँ बेटी का ऐसा प्यार देखकर राजेश भी हैरान हो रहा था..

रजनी ने उसके फूल जैसे नर्म मुम्मो पर लगे राजेश के दांतो के निशान देखे और बोली : "देखा, मैने कहा था ना , पापा के दांतो से बचकर रहना, काफ़ी तेज है वो,ख़ासकर आगे के दो दाँत, देख मुझे भी काटा था कल...''

इतने कहते हुए रजनी ने अपने गाउन की सामने वाली जीप नीचे की और अपना दांया मुम्मा बाहर निकाल कर उसपे लगे राजेश के दांतो के निशान दिखाने लगी..

ईशा ने हंसते हुए अपनी मोम के निशान को सहलाया और बोली : "इस दर्द में भी अपना ही मज़ा है मॉम ..जैसे भी है ये निशान, इन्हे महसूस करके बहुत अच्छा फील हुआ...''

रजनी भी मुस्कुराइ और बोली : "अच्छा छोड़ ये सब, पहले बता की हुआ या नही...''

ईशा (थोड़ा मायूस सा चेहरा बनाकर बोली ) : "नही मॉम ...आज रात नही हुआ...इन्फेक्ट पापा ने पूछा भी था, और मैने हां भी कर दी थी, पर पता नही क्यों सिर्फ़ सकिंग करके ही सो गये वो...मैं भी काफ़ी थक गयी थी इसलिए नींद आ गयी वरना पापा को सोने नही देती जब तक वो मेरी वर्जिनिटी नही ले लेते...''

ये सब बाते दोनो इतने आराम से कर रही थी मानो रात को क्या पकना है ये डिसकस कर रहे हो...
और राजेश उनकी बाते सुनकर फिर से उसी हैरानी परेशानी में डूबने लगा जो उसे थोड़ी देर पहले महसूस हुई थी.

रजनी : "कोई बात नही....आज नही तो कल वो कर ही लेंगे...अब जब हमने इतनी मेहनत से ये सब प्लान किया है तो ऐसे ही थोड़े जाने देंगे, असली चुदाई का मज़ा ज़रूर मिलेगा तुझे...''

ईशा भी आँखे चमकाती हुई बोली : "हाँ बिल्कुल, जैसा मज़ा आप ले रहे हो आजकल, दिन रात...''

ये सुनकर दोनो माँ बेटियाँ ज़ोर-2 से हँसने लगी....
और राजेश बेचारा चूतिया सा बनकर उनकी बाते सुनता रहा और समझने की कोशिश करने लगा की आख़िर ये हो क्या रहा है..

जब उन्होने हँसना बंद किया तो ईशा बोली : "मॉम, आपने और राधिका ऑन्टी ने मिलकर जो ये प्लान बनाया है ना, इसमे मज़ा भी बहुत आ रहा है, और रोमांच भी फील हो रहा है...''

राजेश ने जब राधिका आंटी का नाम सुना तो उसका माथा ठनका,
ये तो चाँदनी की माँ का नाम है,
ईशा और चाँदनी तो काफ़ी सालो से दोस्त है और अक्सर ईशा को छोड़ने या लेने जब भी वो चाँदनी के घर जाता तो राधिका उसे ज़रूर मिलती,
और क्या माल है वो,
एकदम गदराया हुआ सा बदन था उसका...
डाइवोरसी थी और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी



घर में सिर्फ़ वो अपनी बेटी के साथ ही रहती थी
राजेश का मन कई बार हुआ की उसके उपर लाइन मारके देखे, पर अपनी ही बेटी की सहेली की माँ के साथ ऐसा कुछ करना उसे शोभा नही देता था, इसलिए बेचारा कुछ नही कर पाया था आज तक..

अक्सर वो फॅमिली गेट-टुगेदर में भी मिला करती थी और शायद इसलिए रजनी की भी ख़ास सहेली बन चुकी थी वो..

पर ईशा ये क्या बोल रही थी अभी, की राधिका आंटी के साथ मिलकर अच्छा प्लान बनाया रजनी ने...
अब तो उसे दाल में कुछ काला लग रहा था..
 
रजनी ने ईशा की बात सुनी और बोली : "बैबी, ये सब तो तुम्ही दोनो के लिए किया है हम दोनो ने...''

तुम्ही दोनो याहि ईशा और चाँदनी के लिए...
तो इसका मतलब ये सब प्लान था...
कल वो चांदनी का घर पर रुकना और उसके साथ मजे लेना और आज की रात ईशा का उसके साथ मजे लेना ?
पर कैसे ??
ये कैसे हो सकता है आख़िर..???

राजेश को तो लग रहा था की ये सब शेफाली का पर्ल सेट और उसकी आत्मा का असर होने की वजह से है...
तो क्या वो सब ग़लत था...

और उसकी बात को अगले ही पल ईशा ने साबित भी कर दिया

ईशा : "हम दोनो के लिए भी किया और अपने आप के लिए भी....है ना...हे हे''

ईशा की बात सुनके रजनी फिर से मुस्कुरा उठी और बोली : "ये तो बस यूँ समझ लो की पापा के उस हेरोयिन के साथ लगाव का फायदा उठाकर और उसके भूत के चक्कर मे फँसाकर ये सब करवाया है...सो ऐक्चुयल में तो हम सभी को शेफाली को थेंक्स बोलना चाहिए...''

इतना कहकर वो दोनो उपर मुँह करके बोली : "थेंक्स शेफाली''

और एक बार फिर से दोनो की हँसी पूरे घर में गूँज गयी...

अब तो राजेश को पक्का विश्वास हो चुका था की वो एक बहुत बड़े षड्यंत्र का शिकार बन चूका है ...
हालाँकि इसमें उसका कोई नुकसान नही था,
बल्कि इस प्लानिंग का विक्टिम बनकर भी उसे फायदा ही हुआ था....
अपनी बीबी के बदले हुए रूप का,
चाँदनी और ईशा के जवान जिस्म को भोगने का मौका जो मिला था उसे...

पर उन्होने ऐसा क्यों किया.....
और उन्होने शेफाली के नाम का फायदा उठाकर इतनी सफाई से ये सब कैसे किया की उसे भी भनक तक नही लग पाई की वो सब एक्टिंग कर रहे थे.

उसे अपना माथा घूमता था सा प्रतीत हुआ,
शेफाली तो फ़िल्मो में काम करती थी
पर आज उसकी लाइफ खुद एक फिल्म की स्टोरी बनकर रह गयी थी,
ऐसी स्टोरी जिसमें सैक्स था
सस्पेंस था
हॉरर था
यानी कुल मिलाकर एक धमाकेदार स्टोरी का हीरो बन चुका था वो.

पर अभी भी कई सवाल थे जिनका जवाब मिलना बहुत ज़रूरी था,
और इसका सिर्फ़ एक ही उपाय था...
रजनी की डाइयरी.

जी हाँ , रजनी के पास एक डायरी थी जिसमें वो अपनी लाइफ की आप बीती और ख़ास चीज़े लिखा करती थी,
ये अलग बात थी की आज तक उसे वो डाइरी देखने का मौका नही मिला था,
शादी के बाद वो 2 डायरियां भर चुकी थी और आजकल तीसरी चल रही थी,
यानी इतने सालो का लेखा जोखा उसकी डाइरी में क़ैद था,
राजेश ने भी आज तक उसे देखने की जिद्द नही की थी क्योंकि एक समझदार पति होने का फ़र्ज़ वो अपनी तरफ से निभाना चाहता था...
पर इसके बावजूद भी रजनी उन डाइरीस को अपनी अलमारी की सेफ में लॉक करके ही रखती थी...
जिसकी चाभी उसके पर्स में रहती थी.

वो ये सोचे जा रहा था और बाहर एक अलग ही लीला शुरू हो चुकी थी..

रजनी ने अपनी गोद में बैठी ईशा के बूब्स को सहलाते-2 उसे पीना भी शुरू कर दिया था...
ये शायद राजेश को अपनी लाइफ का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला था
जिसमें एक माँ अपनी ही बेटी का दूध पी रही थी...
और अपनी मस्त चुचियाँ पिलाते हुए ईशा भी अजीब तरह से पीछे सिर करके सिसकारियाँ मार रही थी...

वैसे एक बात तो सच है दोस्तो, एक औरत को कैसे सक्क और किस्स करना है ये दूसरी औरत को ज्यादा अच्छे से पता होता है.
अपने होंठो, दांतो और जीभ का दबाव किस पॉइंट पर कितना रखना है ये उनसे अच्छा कोई मर्द भी नही जान सकता क्योंकि ऐसा करते हुए वो सामने वाले के बदले अपने शरीर पर उस प्रभाव को महसूस करते है, वो उसे उतना ही चूसते और चुभलाते है जितना खुद को अच्छा लगता है...
और शायद यही कारण था की इस वक़्त ईशा भी कुछ ज़्यादा ही सैक्सी तरीके से सिसकारियाँ मार रही थी,
इतनी तो उसने अपने पापा की गोद में बैठकर नही मारी थी जितनी अपनी माँ की गोद में बैठकर मार रही थी..

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रजनी का भी एक मुम्मा अभी तक बाहर ही लटका हुआ था, ईशा ने नीचे होते हुए उसे अपने मुँह में लिया और एक बार फिर से रजनी को 15 साल पीछे ले गयी जब वो उसे अपना दूध पिलाया करती थी...
 
रजनी भी उन चिर-परिचित होंठो के एहसास को महसूस करके ईशा को अपनी छाती की ओर भींच सी रही थी..

''आआआआआआआआअहह........ मेरी बच्चीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उम्म्म्ममममममममममममममममममममम......चूसssssssss ज़ोर से....''

रजनी के ऐसा कहने की देर थी और ईशा ने खड़े होकर अपनी माँ का गाउन निकाल फेंका और उसे भी अपनी तरह नंगा कर दिया....

कमरे की मद्धम रोशनी में रजनी का मांसल बदन जगमग करके नहा उठा...



रजनी ने आँखो का इशारा करके ईशा को अपने बेडरूम में आने को कहा, और वो दोनो एक दूसरे का हाथ पकड़कर राजेश और रजनी के बेडरूम में आ गये...

पीछे-2 राजेश भी ईशा के बेडरूम से निकलकर बाहर आया, उसे अपने बेडरूम का दरवाजा खुला हुआ ही मिला, दोनो माँ बेटियों को बहुत जल्दी थी एक दूसरे को प्यार करने की शायद.

अंदर का नज़ारा देखा तो उसके लंड ने अंगड़ाइयां लेनी शुरू कर दी,
रजनी ने अपनी जवान बेटी को काम पर लगा दिया था,
उसने ईशा के सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा रखा था जिसे ईशा बड़ी उत्तेजना के साथ चूस रही थी.

ये थी मॉडर्न जमाने की औलाद,
जो कुछ देर पहले पापा का लंड चूस कर आई थी और अब अपनी माँ की चूत चूस रही थी..



रजनी की चूत का बाँध शायद शाम से ही बँधा सा पड़ा था जब से उसने राजेश को ईशा के साथ सोने के लिए भेजा था, और उन बाप बेटी की चुदाई को सोचकर ही वो अंदर से भरी पड़ी थी,
सुबह का भी इंतजार नही हुआ था उससे ,
इसलिए रात को ही उसे उठाकर बाहर ले गयी ये पता करने की उसकी ठुकाई हुई या नही...
सच में , राजेश को इन माँ बेटी के रिश्ते की गहराई का अंदाज़ा भी नही था.

पर इस वक़्त तो ईशा ठुकाई कर रही थी रजनी की चूत की,
अपनी नन्ही सी जीभ से...
वो जीभ उसकी चूत में किसी ड्रिल की तरह अंदर बाहर कर रही थी और हर बार खुदाई के रूप में ढेर सारा शहद निकाल कर बाहर ले आती...
ये रसीली लड़ाई करीब 10 मिनट तक चली और उसके परिणामस्वरूप जब रजनी झड़ी तो उसने एक जोरदार बौछार मारकर ईशा के चेहरे को भिगो डाला...

''आआआआआआआआआआआआहह मेरी जाआआआआन...... उम्म्म्ममममममममममममममम..............''

इतना कहकर वो वहीं गिर पड़ी...
और ईशा अपने चेहरे की मलाई सॉफ करते हुए उपर तक आई और अपने नंगे जिस्म को अपनी माँ के नंगे बदन के साथ मिलाकर उनसे लिपटकर सो गयी...
ईशा तो पहले ही 2 बार झड़ चुकी थी इसलिए उसमे अब और हिम्मत नही थी अपनी चूत की खुदाई करवाने की,
और जैसा उसके रूम में हुआ था, बाप बेटी के साथ,
वैसा ही अब इस रूम में माँ बेटी कर रही थी
सैक्स के बवंडर के निकल जाने के बाद दोनों एक दूसरे से लिपटकर सो गये.

पर राजेश के दिमाग़ में अब चैन नही था....
उसे तो इस षड्यंत्र की तह तक जाना था और इसके लिए उसे वो डायरीस पढ़नी ज़रूरी थी,
वो किचन में गया जहाँ फ्रिज के उपर रजनी का पर्स रखा रहता था, उसमें से उसने चाभी निकाली , और फर्स्ट फ्लोर में पड़ी रजनी की अलमारी खोली और वो तीनो डाइयरीस निकाल कर ले आया, जिसमें वो सारे राज दफ़न थे और अपने रूम का दरवाजा अंदर से लॉक करके उन्हे पढ़ना शुरू कर दिया..

आज की रात उन्हे पढ़कर कई राज से परदे उठने वाले थे.
 

सैक्स के बवंडर के निकल जाने के बाद दोनों एक दूसरे से लिपटकर सो गये.पर राजेश के दिमाग़ में अब चैन नही था....उसे तो इस षड्यंत्र की तह तक जाना था और इसके लिए उसे वो डायरीस पढ़नी ज़रूरी थी, वो किचन में गया जहाँ फ्रिज के उपर रजनी का पर्स रखा रहता था, उसमें से उसने चाभी निकाली , और फर्स्ट फ्लोर में पड़ी रजनी की अलमारी खोली और वो तीनो डाइयरीस निकाल कर ले आया, जिसमें वो सारे राज दफ़न थे और अपने रूम का दरवाजा अंदर से लॉक करके उन्हे पढ़ना शुरू कर दिया..आज की रात उन्हे पढ़कर कई राज से पड़दे उठने वाले थे.

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अब आगे
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टोटल 3 डायरीस थी,
पहली 2 डायरीस में तो शादी के बाद से लेकर ईशा के जन्म तक की कहानी थी...
इसलिए उन्हे उपर-2 से पढ़कर राजेश ने 10 मिनट में ही तीसरी डायरी उठा ली, जो आधी से ज़्यादा भर चुकी थी...
इस डाइयरी में ही वो सभी राज थे जो राजेश के लिए एक पहेली बन चुके थे.

उसने पढ़ना शुरू किया , जिसमें रजनी ने लिखा था की

ईशा के जन्म के बाद मुझमें सैक्स की चाहत ख़त्म सी हो गयी है....
राजेश के कहने पर ही मैं बुझे मन से सैक्स किया करती थी वरना अंदर से मुझे कुछ फील ही नहीं होता था.


राजेश भी सोचकर उस वक़्त का अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगा..
उसे याद आया की उन दिनों रजनी कैसे एकदम से सैक्स के नाम से दूर भागने लगी थी...
और शायद वही दौर था जब दोनो के बीच शारीरिक संबंधो में बदलाव आने शुरू हुए थे...
हालाँकि एक डॉक्टर होने के नाते वो भी जानता था की औरत के शरीर में प्रेगनेंसी के बाद हॉर्मोनल चेंजस आते है जिसमें ऐसा अक्सर होता है...
पर फिर भी एक ठरकी मर्द होने के नाते वो अपने लंड की ठरक दूर करने के लिए उसे अपने अनुसार ही पेलता रहता था.

आगे डाइरी में उसने लिखा था की कैसे रजनी ने अपनी लाइफ ईशा का इर्द गिर्द ही रखनी शुरू कर दी और इसी में उसे सबसे ज़्यादा खुशी मिलती थी...
अगले 15-20 पन्नो में उसकी जवानी की दहलीज तक पहुँचने का सफ़र था...
और आख़िरकार एक पन्ने पर आकर उसकी नज़रें रुक गयी.

ये 112th के बोर्ड एग्जाम्स के दिन थे जब ईशा और चाँदनी अक्सर घंटो तक एक दूसरे के साथ कमरे में बैठकर पढ़ा करती थी...
राजेश को भी याद आया की उन दोनो पर राजेश और रजनी ने कैसे प्रेशर बनाकर रखा हुआ था ताकि कॉलेज में एडमिशन के लिए अच्छे नंबर आए.

रजनी ने एक वाकये का ज़िक्र किया हुआ था उस पेज पर जब ईशा और चाँदनी रूम में बैठकर स्टडी कर रहे थे..

दोनो बच्चे रूम में बैठकर पढ़ रहे थे...मैं भी काफी थकी हुई थी इसलिए रूम में जाकर सो गयी जो मेरा रोज का नीयम था... अचानक मेरी नींद खुली क्योंकि मुझे ज़ोर से पेशाब आया था...अभी मुझे एक घंटा और सोना था, इसलिए जल्दी-2 पेशाब करके मैं बेड तक आई पर फिर सोचा की एक बार बच्चों से पूछ लेती हूँ की किसी चीज़ की ज़रूरत तो नही है, ये सोचकर मैं उनके रूम में गयी पर वो अंदर से लॉक था, वो पहले भी ऐसा अक्सर करते थे पर इसके लिए मैने उन्हे डाँटकर मना किया हुआ था, मैं जैसे ही दरवाजा खटकाने लगी तो अंदर से मुझे ईशा की सिसकारी सुनाई दी....मेरा दिल धक् से बैठ गया...उस सिसकारी की गहराई बता रही थी की अंदर क्या चल रहा है...मैं एक स्टूल उठा कर लाई और उसपर चड़कर दरवाजे के उपर बनी विंडो से अंदर झाँक कर देखा और अंदर का नज़ारा देखकर मेरा शक़ यकीन में बदल गया

चाँदनी और ईशा एकदम नंगी होकर बेड पर बैठी थी...
दोनो नंगी होकर एक दूसरे से चिपकी हुई बैठी थी और एक दूसरे के मुम्मे सहलाते हुए, स्मूच कर रही थी...बीच-2 में चाँदनी का हाथ ईशा की चूत को भी मसल रहा था जिसकी वजह से वो सिसकार रही थी....




ये देखकर मेरा पूरा शरीर काँप सा गया...मैं चेयर से गिरते-2 बची...नीचे उतरकर मैं वापिस रूम में गई और फफक-2 कर रोने लगी...ये सोचकर की आख़िर ये सब कब हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ...उसकी बेटी एक लेस्बियन है.....ये कैसे हो सकता है...राजेश और उसके प्यार में क्या कमी रह गयी थी जो ईशा इस दिशा में चली गयी....माना की इस उम्र में प्यार और एट्रेक्शन होता है, सैक्स के प्रति जिज्ञासा रहती है, पर एक लड़की के साथ ...छी: ...वो ऐसा कर भी कैसे सकती है...

फिर मैने सोच लिया की शाम को चाँदनी के जाने के बाद वो ईशा को समझाएगी और फिर भी वो ना मानी तो राजेश के घर आने के बाद उसे ये सब बताएगी और ईशा की पिटाई करवाएगी...


राजेश भी ये सब पड़कर सोचने पर विवश हो गया की उसकी बेटी गे कैसे हो सकती है...
 
आगे रजनी ने लिखा

शाम को जब मैने ईशा को समझाने की कोशिश की तो उसने अलग ही रंग दिखना शुरू कर दिया...पहले तो ये जानकार वो डर गयी की मुझे उसका पता चल चुका है पर बाद में वो उस रिश्ते की तरफ़दारी करने लगी...दूसरे देशो के एग्ज़ाम्पल देने लगी...अपने देश के नये क़ानून के बारे में बताने लगी जिसमें सविधान में भी इस रिश्ते को स्वीकृति मिल चुकी थी...

पर बात क़ानून और सविधान की नही थी....दुनिया में क्या हो रहा है इस से मुझे कोई मतलब नही है, पर ये सब मेरे घर में नही होना चाहिए...शायद एक माँ होने के नाते या एक रूढ़िवादी परिवार में जन्म लेने के कारण मुझमें ये सब बाते अंदर तक समा चुकी थी.

वो जब नही मानी तो मैने अगले दिन ईशा के स्कूल जाने के बाद चाँदनी की माँ राधिका को अपने घर पर बुलाया...मुझे लगा की अब इसके सिवा कोई और चारा नही रह गया है, पर मेरी लाइफ का सबसे बड़ा शॉक लगा जब मुझे पता चला की वो उन दोनो के रिश्ते के बारे में पहले से ही जानती है.

राधिका : "देखी रजनी, मैने पहले भी तुम्हे इस बारे में बताने की सोची थी पर मुझे पता था की तुम्हारे घर का माहौल अलग है, मैं तो सिंगल मॉम हूँ , अगर मेरी बेटी किसी लड़के के साथ चक्कर चलाए और कुछ उंच-नीच हो जाए तो मेरा तो कोई आगे है ना पीछे, मैं क्या करूँगी, चाँदनी को लड़को से दूर रखने की नसीहत देने वाला बाप भी नही है मेरे पास तो...पर यही काम अगर वो एक लड़की के साथ करती है तो इसमें मुझे कोई बुराई नही दिखती...ये सेफ भी है और दोनो के विचारो में अपनी सहमति जताकर हम इन बच्चों का भरोसा भी जीत सकते है....समझने की कोशिश करो रजनी, आजकल जमाना बदल रहा है....हमे भी बदलना होगा...मैने चाँदनी और ईशा को पहले ही समझा दिया है की अभी के लिए ये सब ठीक है पर आगे चलकर तुम्हे लड़को में भी इंटेरेस्ट रखना होगा और उनसे ही शादी भी करनी होगी....और वो दोनों इसके लिए राजी भी हैं''

उसकी बात मेरी समझ में आ गयी....उसके बाद मैने ईशा और चाँदनी को नही रोका...अब तो वो दोनो दरवाजा खुला छोड़कर भी अपने कामो में लगे रहते थे....



और एक दिन तो उन्होने मुझे भी इस काम में शामिल कर लिया....शुरू में थोड़ा अजीब लगा पर जब उन दोनो ने उपर और नीचे दोनो जगह से मुझे चूसा तो एक अलग ही मज़ा मिला...शायद राजेश से इतने दिनों तक दूर रहने के बाद मेरे शरीर को भी इस प्यार की ज़रूरत थी....दोनो बच्चियों ने मुझे अच्छी तरह से चूम चाटकार वो प्यार दिया जिसके लिए मेरा बदन काफ़ी दिनों से तड़प रहा था.



पर एक औरत होने के नाते मुझे एक मर्द के प्यार की भी ज़रूरत थी, जिसके लिए मुझे राजेश के लंड का ही सहारा लेना पड़ता था ...हालाँकि वो थोड़े थके होते थे पर 15-20 दिन में एक आध बार उनसे चुदाई करवाकर और बाकी के दीनो मे चाँदनी और ईशा से बदन चुस्वाकार मेरे शरीर की ज़रूरत पूरी होने लगी...2 बार तो राधिका भी हमारे ग्रूप का हिस्सा बनी...उस पार्टी को शब्दो मे बयान करना काफ़ी मुश्किल है, पर वो एक अलग ही तरह का एक्सपीरियन्स था..बीच-2 में मैं और राधिका उन्हे समझाती भी रहती थी की ये उपर के प्यार मे कुछ नही रखा, असली मज़ा तो मर्द के लंड से ही मिल सकता है.

ऐसे करते-2 एग्जाम्स के बाद दोनो का कॉलेज में एडमिशन भी हो गया.

इसी बीच एक दिन राधिका ने मुझे एक सुझाव दिया...
मैं जिस तरह से राजेश के लंड की तारीफ अक्सर बच्चों और उसके सामने कर दिया करती थी तो उसने कहा की क्यों ना राजेश को भी इस खेल में शामिल किया जाए...मेरे लिए ये सोचना भी एक पाप जैसा था, पर राधिका के समझाने का तरीका ही ऐसा था की मैं भी सोचने पर विवश हो गयी

राधिका : "देखी रजनी, एक बार इन लड़कियो को किसी लंड की आदत पड़ गयी तो आजकल के लड़को को तो तुम जानती ही हो, उन्हे बस अपने मज़े से मतलब होता है...जैसे आज तक हमने इन्हे बचा कर रखा है वैसे ही आगे भी वो सेफ्टी बनी रहे और इन्हे लाइफ में दूसरे रिश्ते यानी मर्द के सुख से भी परिचित करवाए इसके लिए एक ही उपाय है, हमें राजेश को भी इसमें इन्वॉल्व करना होगा...मुझे पता है तुम्हारे लिए ये सोचना भी मुमकिन नही है की एक बाप अपनी ही बेटी को कैसे प्यार करेगा, पर मेरी बात मानो, एक जवान शरीर हर मर्द की कमज़ोरी होती है, और तुम्हारा पति भी कम ठरकी नही लगता मुझे, जब भी मिलता है तो उसकी आँखो में छुपी भूख मुझे सॉफ दिखाई देती है....हम लोग ट्राइ करेंगे, इसके लिए ईशा से पहले चाँदनी के साथ राजेश की सेट्टिंग करवाएँगे...उसने अगर अपनी तरफ से कोई पहल नही की तो हम ये आइडिया ड्रॉप कर देंगे...''

मैं तब तक समझ चुकी थी की ये बात तो सही है, ऐसा करने से कोई बदनामी भी नही होगी और घर की बात घर में ही रह जाएगी..

राधिका : और ये सब हमें प्लानिंग करके ही करना होगा ताकि उसे कोई शक ना हो, और सब कुछ ऐसा लगे जैसे ये अंजाने में ही हुआ है.''

उस वक़्त मुझे ये बात समझ नही आई पर राधिका ने कहा की वो वक़्त आने पर इस बात को संभाल लेगी.
 
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