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XXX Kahani - हीरोइन

जाँघ से थोड़ा उपर उसके नर्म चूतड़ भी हिचकोले खाते हुए इधर उधर हो रहे थे...
जैसे नर्म मक्खन से बने दो गुंबद उसके हाथ लगाने से डॅन्स करने लगे हो...
मन तो उसका कर रहा था उन्हे भी दबोचने का पर वो हद में रहकर ही सब कुछ करना चाहता था ताकि मर्यादा बनी रहे.

कुछ देर तक वैसे करने के बाद वो बोला : "पीछे शायद प्राब्लम नही है....तुम पलट जाओ, मैं आगे से चेक करता हूँ .....''

राजेश ने उसे बोल तो दिया पलटने के लिए पर उसका खुद का लंड उसके साथ विद्रोह कर रहा था...
उसकी पेंट में उसने हाहाकार मचा रखा था...बड़ी मुश्किल से उसने चांदनी के पलटने से पहले अपने लंड को साइड में एडजस्ट किया

चाँदनी अपने नशीले बदन को घुमाकर पलट गयी...
उसके गुलाबी चेहरे को देखकर सॉफ पता चल रहा था की उसकी हालत कितनी खराब हो रही है इस वक़्त....
उसकी साँसे तेज़ी से चल रही थी....
टी शर्ट में उसके नुकीले निप्पल सॉफ दिख रहे थे...
उसकी टी शर्ट भी थोड़ा खिसक कर उपर आ चुकी थी और उसकी धँसी हुई सैक्सी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी...
एकदम सपाट पेट था उसका.

और जैसे ही उसकी नज़र नीचे होते हुए उसकी चूत वाले हिस्से पर गयी, उसे वहां एक गीला धब्बा साफ दिखाई देने लगा..
यानी जब वो उल्टी होकर लेती थी तो अपनी चूत को वो बेड पर घिस भी रही थी...
और उत्तेजना वश उसकी चूत का रस निकल कर उसकी शॉर्ट्स पर आ लगा था...
राजेश समझ चुका था की लड़की गर्म है, ऐसे में वो कुछ भी करेगा तो वो बुरा नही मानेगी.

वो बुरा मानेगी या नही, ये जानने के लिए उसने इस बार हाथ सीधा उसके पेट पर रख दिया....
वो किसी नागिन की तरह मचल उठी..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआआआआआआआआआआअहह...........''

आँखे बंद थी उसकी पर राजेश के स्पर्श ने उसे बेकाबू सा कर रखा था...
राजेश ने उसके शरीर से हाथ हटाए बिना अपना हाथ खिसकाते हुए नीचे करना शुरू किया...
राजेश का हाथ उसकी शॉर्ट्स के बेल्ट वाले हिस्से को छूता हुआ जैसे ही चूत पर बने उस धब्बे तक पहुँचा तो उसे अपना हाथ सुलगता हुआ सा महसूस हुआ...
अंदर से आ रही गर्म हवा उसके हाथ की उंगलियो को झुलसा सा रही थी...
गीले कपड़े से निकल रही सोंधी खुश्बू अब पूरे कमरे में फैल चुकी थी.

राजेश का हाथ वहीँ रुक सा गया और बाकी का काम चाँदनी ने खुद कर दिया...

मचलते हुए उसने अपना हाथ राजेश के हाथ पर रखकर उसे ज़ोर से दबा दिया और एक जोरदार सिसकारी मारी...

''आआआआआआआआआआआहह अंकल.................उम्म्म्ममममममममम........... यहीं हो रहा है दर्द.......बहुत ज़्यादा........''

ऐसा कहते हुए उसने अपनी आँखे खोल दी.

और उसी वक़्त जैसे राजेश को अपनी ग़लती का एहसास हुआ...
वो भला ये क्या करने जा रहा था.
अपनी बेटी की सहेली के साथ वो ऐसे कैसे कर सकता है...

चाँदनी ने जैसे उसकी आँखो मे आई इस कशमकश को पढ़ लिया

वो बोली : "प्लीज़ अंकल....चेक करो ना....ठीक से....''

राजेश : "न....नही...चाँदनी.....ये....ये ग़लत है...''

चाँदनी उठकर बैठ गयी और राजेश के दोनो हाथों को पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और बोली : "आप ऐसे क्यों बोल रहे हैं.....मेरी जगह अगर ईशा होती तो आप उसका भी तो चेकअप करते ना.....''

ईशा का नाम लेकर जैसे उसने आग में घी सा डाल दिया...

ये राजेश की लाइफ का वो काला सच था जो उसने आज तक किसी को नही बताया था..

उसे अपनी जवान हो रही बेटी से बहुत लगाव था और वो लगाव कब वासना में बदल गया था वो भी नही जानता था...
घर मे जवान बेटी को दिन रात अपने सामने देखना, उसके छोटे-2 कपड़ो से झाँक रही जवानी को चोरी छुपे देखकर अपनी आँखे सेंकना, उसे गले से लगाकर उसके नन्हे चुचे अपनी छाती पर महसूस करना या बेबाकी से कभी उनपर हाथ लगा देना ये उसका रोज का नियम था, कई बार जब वो लाड करते-2 उसकी बाँहों में ही सो जाती थी तो वो अपने हाथ उसकी कमर और नर्म कुल्हो पर फेरता रहता था और रजनी की नज़रें जब उसपर नही होती थी तो वो उसके होंठो को चूम भी लेता था, पर ज़्यादा ज़ोर से नही...

और आज चाँदनी ने इस मौके पर ईशा का नाम लेकर उसके अंदर अपनी बेटी के लिए दबी उन भावनाओं को और भड़का दिया था जिसके बारे में उसके सिवा किसी और को पता नही था...
और वो ईशा को हीरोइन बनाने पर भी इसी वजह से तुला हुआ था क्योंकि वो चाहता था की वो इस फील्ड में आकर खुल जाए ताकि वो उसकी निखर रही जवानी का अच्छे से मज़ा ले पाए..

चाँदनी ने उसके चेहरे पर उड़ रही हवाइयाँ देखी तो वो बोली : "मुझे भी आप ईशा ही समझो ना ....... पापा..''

'पापा' उसने इतनी मासूमियत से बोला की राजेश को एक पल के लिए लगा की उसकी खुद की बेटी ईशा उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है..

चाँदनी ने अपने हाथ में पकड़े राजेश के हाथो को अपनी छाती पर रखकर ज़ोर से दबा दिया....
राजेश के हाथ काँप गये अपनी हथेली पर चाँदनी के निप्पल्स की चुभन महसूस करके.

चाँदनी : "आओ ना पापा......प्लीज़ मेरा चेकअप करो...''

इतना कहते हुए उसने राजेश को बेड पर बिठा दिया और खुद उसकी गोद में आकर बैठ गयी...
राजेश का एक हाथ उसकी कमर पे था और दूसरा अभी भी उसकी गोल चुचियों पर, जिन्हे वो होल-2 दबाने लग गया था..
 
अब उसे अपनी गोद मे बैठी चाँदनी नही बल्कि खुद की बेटी ईशा दिखाई दे रही थी जो उसकी बाहो में आकर खुद ही सब कुछ करने को तैयार थी.

चाँदनी उसे देखकर मुस्कुराए जा रही थी...
उसने अपनी बाहें राजेश के गले में डाल दी और उसके गालो पर किस्स करते हुए बोली : "आप इतना घबरा क्यों रहे हो पापा....आप अच्छे से चेकअप करो ना...मुझे कोई इश्यू नही है...''

ये कहकर वो राजेश को अपनी तरफ से पूरी छूट दे रही थी....
राजेश का दिमाग़ एक बार फिर से शेफाली के भूत की तरफ घूम गया, भला ऐसे कौन लड़की खुद ही किसी अंजान मर्द की गोद में आकर बैठ जाती है...
पर अंदर ही अंदर उसे ये भी लग रहा था की शायद उसकी पर्सनॅलिटी को देखकर ये जवान लड़की उसे अपना दिल दे बैठी है....
ऐसी उम्र में अक्सर होता है ये, अपनी सहेली हे स्मार्ट पापा को देखकर कई लड़कियों का दिल फिसल जाता है.

पर शायद ये राजेश का अपने दिल को बहलाने का बहाना था, क्योंकि अंदर से उसे यही लग रहा था की इसपर शेफाली के साए ने पूरी तरह से क़ब्ज़ा कर लिया है..

पर जो भी था, उसे इस मौके का अच्छे से फायदा उठा लेना चाहिए था...

वो उसके मोठे मुम्मो को दबाता हुआ उसके मासूम से चेहरे को देखने लगा...और बोला : "यहाँ भी दर्द है क्या....''

उसने हां में सिर हिलाया....और बोली : "सबसे ज़्यादा.''

राजेश : "तो एक काम करो....सारे कपड़े उतारो...मैं देखकर ही बता पाउँगा की क्या तकलीफ़ है....''

चाँदनी ने अपने होंठ दांतो तले दबा लिए और सैक्सी हँसी हंसते हुए बोली : "ओ के डॉक्टर....''

और फिर वो उछलकर खड़ी हो गयी....
एक ही पल में उसने अपनी टी शर्ट और शॉर्ट्स निकाल फेंकी...
अब वो उसके सामने ब्रा और पेंटी में खड़ी थी..

राजेश को अभी तक अपनी किस्मत पर विश्वास नही हो रहा था,
जो लड़की उसे अभी 1 घंटा पहले ही मिली थी, वो उसके कहने पर एक ही बार में अपने कपड़े उतारकर नंगी होने जा रही थी उसके सामने.

वो सामने खड़ी थी और उसने अपनी कमर मटकाते हुए अपनी पेंटी नीचे कर दी...



एकदम सफाचत चूत थी उसकी...

राजेश को देखकर वो अभी तक मुस्कुराये जा रही थी.

राजेश के हाथ सीधे अपने लंड पर आ गये और वो पेंट के उपर से ही उन्हे मसलने लगा...

चाँदनी ने राजेश को देखते हुए अपनी ब्रा के हुक भी खोले और उसे भी उतार कर फेंक दिया...

इस बार शायद उसे थोड़ी शर्म आ रही थी, इसलिए उसने अपनी नन्ही चुचियाँ राजेश की आँखो के सामने आने से पहले ही उन्हे हाथो से छुपा लिया...पर इस वक़्त वो पूरी नंगी होकर खड़ी थी उसके सामने...

उसकी सैक्सी कमर और नंगी गांड राजेश की आँखों के सामने थी, वो जान बूझकर दूसरी तरफ मुंह करके अपने मुम्मो को राजेश से छुपा रही थी, पता नहीं वो शरमा रही थी या उसे टीज़ कर रही थी

उफफफफ्फ़.....
ये जवान लड़कियो का बदन कितना नशीला होता है...
एकदम पतला और छरहरा..
ज़रा भी एक्सट्रा माँस नही....
राजेश से अपनी चूचियां छुपाने के चक्कर में वो दूसरी तरफ घूम गयी, पर चुचियों से भी ज़्यादा सैक्सी अपनी नन्ही गांड उसके सामने नंगी करके परोस दी.

राजेश का दिल धड़कना ही भूल गया उसके मस्त चूतड़ देखकर...
वो बड़े ही सैक्सी ढंग से अपने बदन को छुपा भी रही थी और दिखा भी रही थी...



चाँदनी ने उसे अपने हाथ से लंड मसलते हुए देखा तो बोली : "अरे ...आप क्योँ तकलीफ़ करते हो पापा....मैं हूँ ना....''

इतना कहते हुए वो नंगी ही चलती हुई उसके सामने आकर बैठ गयी...
तब जाकर राजेश ने उसके मुम्मों का चेहरा देखा...
एकदम गोल मटोल से थे वो...
कड़क निप्पल, बाहर की तरफ निकले हुए.

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राजेश ने हाथ आगे करते हुए उन्हे होले से दबा दिया....
वो सिसक उठी , राजेश थोड़ा नीचे झुका और और धीरे- 2 अपने होंठ उसकी तरफ बढ़ाने लगा...
चाँदनी की आँखे खुद ब खुद बंद होती चली गयी और राजेश ने अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उन्हे चूसना शुरू कर दिया...

''उम्म्म्ममममममममममममममममम....पुचहssssss .........''

चाँदनी ने अपने होंठो की मदिरा पिलाते -2 उसके लंड को पेंट से बाहर निकाल लिया....

उफ़फ्फ़....
क्या साइज़ था, उसकी आँखे फटने को हो गई राजेश के कड़क मोटे लंड को देखकर..

और उसे नीचे से चाटती हुई ऊपर तक आयी, फिर उसने अपना मुँह खोला और धीरे-2 करके उसके पूरे लंड को वो अपने मुँह में निगल गयी.....



राजेश ने सीसियाते हुए उसके सिर को पकड़कर अपने लंड पर पूरा दबा दिया और बचा खुचा लंड भी उसके गले मे उतार कर ज़ोर से चिल्ला उठा : "आआआआआआआ......... मेरी बच्चीsssssssss .........ईशाsssssss .........चूस इसे........''
 
फिर तो जैसे सच में चाँदनी में कोई भूत सवार हो गया...
वो अपने करामाती मुँह से राजेश के लंड को बड़ी ही कुशलता के साथ चूसने लगी.

कुछ देर तक उसे चूसने के बाद चांदनी ने सांस लेने के लिए उसे थोड़ी देर के लिए बाहर निकाला, पर उस वक़्त को भी उसने बेकार नहीं जाने दिया, राजेश को एक के बाद दूसरे मजे देने के लिए उसने लंड को अपनी नन्ही चूचियों के बीच फंसाया और अपने हाथो से उसे दबा कर राजेश को टिट फकिंग का मजा देने लगी

ये शायद राजेश की लाइफ का सबसे हसीन पल था , इतनी खातिरदारी तो उसे और उसके लंड को आज तक नहीं मिली थी



राजेश जो काफ़ी देर से अपने लंड को संभाल कर बैठा था, 5 मिनट में ही झड़ने लगा...

''आआआअहह ओह उम्म्म्मममममममम मैं तो गया.......''



चाँदनी ने उसके लंड को अपनी तरफ घुमाकर अपने पूरे चेहरे पर उसकी बौछारें करवा ली...
उसका चेहरा देखते ही बनता था,
राजेश के सफेद रस ने उसके चेहरे को अच्छी तरह से पोत कर रख दिया था..



वो गहरी साँसे लेता हुआ वहीं बिस्तर पर ढेर हो गया....

तभी नीचे से रजनी की आवाज़ आई : "अजी सुनते हो....डिन्नर तैयार हो गया है....आप लोग नीचे आ जाओ...''

राजेश हड़बड़ा कर उठ बैठा....
चाँदनी ने मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर लगी मलाई को उंगलियो से इकठ्ठा करके चाटनी शुरू कर दी और बोली : "आप जाओ नीचे, खाना खा लो, मेरा तो हो गया डिन्नर...''

राजेश अवाक सा होकर उसके इस रूप को देखता रह गया...
और सोचने लगा की काश ईशा भी एक दिन उसके साथ ऐसा ही करे.

खैर,
वो जल्दी से उठा, अपनी पेंट और हुलिया ठीक किया और नीचे चल दिया...

और पता नही क्यूँ , उसका लंड अभी तक बैठने का नाम नही ले रहा था.
 
अपडेट - 7
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चाँदनी ने मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर लगी मलाई को उंगलियो से इकठ्ठा करके चाटनी शुरू कर दी और बोली : "आप जाओ नीचे, खाना खा लो, मेरा तो हो गया डिन्नर...''

राजेश अवाक सा होकर उसके इस रूप को देखता रह गया...और सोचने लगा की काश ईशा भी एक दिन उसके साथ ऐसा ही करे.खैर, वो जल्दी से उठा, अपनी पेंट और हुलिया ठीक किया और नीचे चल दिया...और पता नही क्यूँ , उसका लंड अभी तक बैठने का नाम नही ले रहा था.

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अब आगे
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नीचे पहुँचकर राजेश ने देखा की डिन्नर लग चुका है,
वो टेबल पर बैठ गया, ईशा को चलने में तकलीफ़ थी, इसलिए उसका डिन्नर प्लेट में लगाकर उस तक पहुँचा दिया था रजनी ने.

रजनी : "क्या हुआ...चाँदनी नही आई..?"

राजेश (हड़बड़ाते हुए) : "वो...वो.....कह रही है की भूख नही है...''

रजनी उसके करीब आई और नीचे झुकते हुए उसने राजेश के कड़क लंड को पकड़कर धीरे से सहला दिया और बोली : "ऐसा क्या खिला दिया उसे जो उसकी भूख मिट गयी...कहीं मेरे हिस्से की क्रीम तो नही खिला दी...''

उसकी बेबाकी पर राजेश हैरान सा होकर उसे देखता रह गया और वो खिलखिलाकर हँसती हुई सी वहाँ से निकलकर किचन में भाग गयी

ये रजनी का एकदम नया रूप था...
कहाँ तो वो किसी और लड़की या औरत के नाम से भी चिढ़ जाती थी और अब खुद ही उसकी बेटी की उम्र की लड़की का नाम लेकर इतना भद्दा मज़ाक कर रही है, जैसे इस बात से उसे कोई फ़र्क ही नही पड़ता...

वैसे रजनी ने अंदाज़ा तो एकदम सटीक लगाया था ,
राजेश उसके हिस्से की क्रीम ही तो खिला कर आ रहा था चाँदनी को,
जिसे खाकर उसकी भूख मिट चुकी थी.

कुछ देर बाद रजनी भी आ गयी और दोनो ने मिलकर डिन्नर किया..

राजेश एकदम चुप था, शायद उसे अभी तक अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था..
एक जवान लड़की के हुस्न का दीदार करना और उसके मज़े लेना इस उम्र में इतना आसान नही होता...
पर जितने आराम से उसे आज ये सुख मिला था वो उसकी समझ से परे था...
एक के बाद एक किस्से होते जा रहे थे उसकी लाइफ में, जब से वो शेफाली वाला नैकलेस सेट लाया था वो,
उस नैकलेस के बारे में सोचते ही उसका दिमाग़ फिर से उसी बात की गवाही देने लगा की हो ना हो उसी का हाथ है उसकी लाइफ में आए इन सुखद हादसों में.

खाना खाकर वो बाहर बने पार्क में कुछ देर टहलने निकल गया और रजनी किचन समेटने लगी.

पार्क में जाकर राजेश ने शुरू से लेकर आज तक के सारे किस्से जोड़े,
उसका दिल तो पहले ही इस बात को मान चुका था,
आज दिमाग़ भी मानने पर मजबूर हो गया की शेफाली के नैकलेस का ही कमाल है ये.

और ये सब बाते सोचते हुए उसने ये भी नोट किया की अगर सच में ये भूत-प्रेत का असर है तो जो भी हो रहा है उसके अच्छे के लिए ही तो हो रहा है...
यानी उसे सैक्स का मज़ा मिल रहा है.
और इसमें उसे कोई बुराई नही दिखी और ना ही इस बात से या किसी और बात से उसे कोई नुकसान हुआ था अभी तक.

और जहाँ नुकसान ना हो, फायदा भी मिले और वो भी सैक्स के रूप में तो इसमें डरने जैसी तो कोई बात ही नही हो सकती..

पर शेफाली की आत्मा उसके उपर ही इतनी मेहरबान क्यों है,
ये सोचते हुए उसने अपना सिर खुजलाना शुरू कर दिया...
क्योंकि उसकी तरह तो शेफाली के लाखों -करोड़ों प्रशंसक होंगे जो शेफाली के बारे में सोचकर मुट्ठ मारा करते थे..
फिर ये ख़ास मेहरबानी उसी पर क्यों कर रही है शेफाली की आत्मा.

फिर उसे अपने एक सहायक डॉक्टर विकास की बात याद आई..
एक बार जब वो विकास के साथ मिलकर एक बॉडी का पोस्टमार्टम कर रहा था तो उसने कहा था की मरने के बाद आत्मा काफ़ी देर तक शरीर के आस पास रहती है...
ये देखने के लिए की कौन-2 उसे मरा हुआ देखकर दुखी है, कौन कैसी बातें बना रहा है, कौन खुश है, कौन हंस रहा है...वगेरह वागेहर...

और उसने ये भी कहा था की उस वक़्त उस शख्स की आत्मा भी वहीं मौजूद है जिसका वो दोनो पोस्टमॉर्टम कर रहे थे......
उस वक़्त तो राजेश ने विकास की बातो को मज़ाक में उड़ा दिया था पर आज उसे वो सब सही लग रहा था...
क्योंकि शेफाली जब मरी थी तो उसके आस पास कोई नही था...
उसके रिश्तेदार बरसों पहले उसकी अय्याश लाइफ की वजह से उसका साथ छोड़ चुके थे, और जब वो मरी तो उसके पास रोने वाला भी कोई नही था...
और राजेश को अच्छी तरह से याद है की उसकी बॉडी को देखकर उसका खुद का रोना निकल गया था और भावेश में बहकर उसने उसका माथा भी चूम लिया था...
और शायद शेफाली की आत्मा उसी से खुश होकर उसपर ये मेहरबानियां कर रही थी..

हालाँकि भूत का असर था उसकी लाइफ में पर अच्छे वाला... जो उस नेकलेस के थ्रू उसे पहनने वाले के जिस्म को राजेश की इच्छाओं और इमैजिनेशन को पूरा करवाती थी , और एक बार नैकलेस को पहनने के बाद वो इंसान उसे अगर उतार भी दे तो उसका असर बना ही रहता था, जैसे रजनी पर अभी तक बना हुआ था और अब चांदनी पर भी उसका असर पड़ चुका था.

उसने एक गहरी साँस ली और उपर देखते हुए धीरे से बुदबुदाया "थेंक्स शेफाली...थॅंक्स फॉर एवरीथिंग ..''

और उसी वक़्त उसे एहसास हुआ जैसे एक ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे को छूकर निकल गया...
यानी उसका अंदाज़ा सही था.
शेफाली उसके आस पास ही थी.

राजेश ने उसी वक़्त अपने दिलो दिमाग़ का डर निकाल फेंका और सोच लिया की जब ये मेहरबानी उसपर हो ही रही है तो उसे अच्छे से एंजाय करना चाहिए...
क्योंकि इस वक़्त उसे इन सबके पीछे अपनी बेटी ईशा की जवानी को हासिल करने का तरीका नज़र आने लगा था, जिसके बारे में सोचकर उसका लंड हमेशा कड़क रहता था..
 
और वो फिर से कड़क हो गया...अपने लंड को एडजस्ट करता हुआ वो वापिस घर की तरफ चल दिया.

घर पहुँचकर वो कुछ देर तक ईशा के पास बैठा, पैर में बेंडेज लगाने की वजह से उसने शॉर्ट्स पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी जाँघ चमकती हुई दिखाई दे रही थी...
राजेश का मन तो कर रहा था की जीभ निकाल कर उसकी चिकनी जाँघो को चाट ले पर उसे अंदर ही अंदर ये भी पता था की अभी तो नही पर एक बार वो नैकलेस पहन ले तो ये काम ज़रूर हो सकता है...
शेफाली उसकी बेटी को उसके लिए तैयार करेगी..
ये सोचते हुए वो मंद मंद मुस्कुराने लगा.

अपने पापा को ऐसे बेवजह मुस्कुराते हुए देखकर ईशा बोली : "पापा....क्या बात है, क्या सोच कर मुस्कुरा रहे हो...''

राजेश : "उम्म...ना.....नही ...कुछ भी तो नही....बस ऐसे ही...चलो अब तुम आराम करो, कल बात करते है, कल मॉर्निंग में एक एक्सरे करवाने के लिए तुम्हे मेरे साथ हॉस्पिटल चलना होगा ओके ...सो जाओ अभी...गुड नाइट.''

इतना कहकर उसने एक गीला सा चुम्बन उसके माथे पर किया और उपर बने बेडरूम की तरफ चल दिया..
और जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो अंदर का दृश्य देखकर उसकी साँसे मानो वहीं रुक सी गयी

अंदर का सीन ही इतना सैक्सी था
उसकी बीबी रजनी अपने पूरे कपड़े उतारकर बेड पर नंगी लेटी हुई थी...
और उसकी गदरायी हुई गांड दरवाजे की तरफ थी,
राजेश को दूर से ही उसकी मोटी गांड में से झाँक रहे उसके दोनो छेद सॉफ नज़र आ रहे थे..

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राजेश मन ही मन बुदबुदाया : "उफफफ्फ़ शेफाली....तुम तो मार ही डालगी मुझे...''

राजेश को वहीं दरवाजे पर खड़ा देखकर रजनी ने पीछे सिर घुमाकर उसे देखा और बोली : "अब वहीं खड़े रहोगे या मेरा भी चेकअप करोगे डॉक्टर साहब...''

वो समझ गया की वो उसे चाँदनी वाली बात पर अभी तक छेड़ रही है...

राजेश मुस्कुराता हुआ आगे आया और दरवाजा बंद करके उसने वहीँ खड़े-2 सारे कपड़े निकाल फेंके..
अभी एक घंटे पहले ही उसके लंड ने माल निकाला था चाँदनी के चेहरे पर और तब से वो अभी तक खड़ा ही हुआ था...
इन्फेक्ट रजनी के सहलाने के बाद और पार्क में शेफाली की मेहरबानियों के बारे में सोचकर उसके लंड का तनाव और भी बढ़ चुका था..

इसलिए जब उसने कपड़े उतारे तो उसका लंड अपनी चरम सीमा में खड़ा हुआ रजनी के नंगे बदन को लपलपाते हुए देख रहा था.

राजेश को आता देखकर रजनी ने अपनी कमर उपर उठा दी...
आज वो सीधा उसके तीर को अपनी चूत में घुसवाना चाहती थी....
राजेश ने भी बेड पर अपने दोनो घटने रखे, लंड पर ढेर सारी थूक लगाई और एक ही झटके में उसकी गांड को गाड़ी के स्टेयरिंग की तरह पकड़कर उसकी चूत में अपना मूसल जैसा लंड पेल दिया...

''आआआआआआआआआआहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... उम्म्म्ममममममममममममममम...... सही जगह पर वार किया है डॉक्टर साहब....यहीं सबसे ज़्यादा दर्द हो रहा था....''

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राजेश ने उसकी गोरी गांड पर एक जोरदार चपत लगाई और आगे झुकते हुए उसकी चूत में ज़ोर-2 से अपना लंड पेलने लगा...

पूरे कमरे में उहह आहहह की आवाज़ें गूंजने लगी...

ये वो वक़्त था जब साथ वाले कमरे में चाँदनी कुछ देर पहले की घटना के बारे में सोचकर अपनी चिपचिपी चूत को उंगलियों से सहला रही थी..

और जैसे ही उसे दूसरे कमरे से आती हुई आवाज़ें सुनाई दी तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
वो समझ गयी की क्या हो रहा है...
वो मन ही मन बुदबुदाई : 'वाह....क्या स्टेमीना है अंकल का...'

और फिर उछलकर अपने बेड से खड़ी हुई और दबे पाँव बाहर निकालकर दूसरे रूम की तरफ चल दी...
पर वो दरवाजा अंदर से बंद था...
उसकी बेचैनी बढ़ने लगी जब उसने फिर से अंदर से आ रही रजनी आंटी की वो मदहोशी भरी आवाज़ सुनी

''आआआआआआआआहह राजऐशssss ....... उम्म्म्मममममम..... और ज़ोर से चोदो मुझे ........ जोर से चोदो ना.......''

तभी उसे ध्यान आया की दोनो बेडरूम की बालकनी एक ही है,
वो फिर से भागती हुई अपने रूम में गयी और बालकनी का दरवाजा खोलकर दूसरे रूम के पीछे पहुँच गयी...
वो दरवाजा भी बंद था पर उसकी खिड़की पर लगा परदा हटा हुआ था, वहां से उसे अंदर की पूरी चुदाई दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर उसका दिमाग़ ही खराब हो गया...

शायद उसकी लाइफ का ये पहला मौका था जब वो ऐसी लाईव चुदाई देख रही थी...
 
राजेश के झटकों से रजनी अपने चौपाये से फिसलकर नीचे गिर चुकी थी और पूरी तरह से बेड पर उल्टी होकर लेटी थी, पर राजेश का लंड उसी तरह से पीछे से उसकी चुदाई कर रहा था जैसे पहले कर रहा था...
इस पोज़ में लंड थोड़ा टाइट होकर अंदर बाहर हो रहा था जिसमें उसे पहले से ज़्यादा मज़ा मिल रहा था और शायद इसलिए इसकी सिसकारियों में पहले से ज़्यादा नशा था..

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''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स...... ओह राजेश...... माय डार्लिंग................. ऐसे ही डालो..... अंदर तक........चोदो मुझे.....''

राजेश अभी कुछ देर पहले ही झड़ा था और इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो पूरी रात इसी तरह रजनी की चुदाई कर सकता है और उसका लंड तब भी नही झाड़ेगा.

उधर चाँदनी की हालत भी फिर से खराब होने लगी....
उसने अपनी टी शर्ट के स्ट्रेप्स नीचे खिसका दिए और अपने बूब्स बाहर निकाल लिए.

और जैसे ही उसने बूब्स बाहर निकाले, राजेश की नज़र उसपर पड़ गयी,
वो खड़ी ही ऐसी जगह थी, बालकनी में , बिल्कुल सामने,

अभी तक मस्ती में रजनी की चूत मार रहे राजेश की हालत खराब होने लगी उसे ऐसा करते देखकर...
वो बड़ी ही बेशर्मी और बेबाकी के साथ अपने बूब्स बाहर निकाल कर उसे मसल रही थी..
और दूसरे हाथ से अपनी चूत भी सहला रही थी..

अपनी बीबी की चूत में लंड होने के बावजूद उसे दूर से चमक रही चाँदनी की चूत अपनी और आकर्षित कर रही थी..
काश वो पहले ही उसकी चूत मार लेता, बेकार में सिर्फ़ मुट्ठ मरवाकर उसे छोड़ दिया..

वो ये सोच ही रहा था की उसे अचानक रजनी की फुसफुसाती हुई आवाज़ सुनाई दी

''राजेश.....वो देखो सामने....चाँदनी हमे छुप कर देख रही है...''

राजेश की तो गांड ही फट्ट गयी ये सुनकर....
उसने तो ये सोचा भी नही था की जैसे वो उसे देख सकता है , बेड पर उल्टी लेटी हुई रजनी को भी तो वो दिखाई ही दे रही होगी...
वो तो मज़े में अपनी चूत में अंदर बाहर हो रहे लंड का मज़ा ले रही थी,
थोड़ा सा चेहरा उपर किया तो सामने शीशे के पीछे खड़ी चाँदनी दिखाई दे गयी, जो इस वक़्त अपनी आँखे बंद किए बड़े ही मज़े में अपनी चुचि और चूत मसल रही थी...

राजेश ये सुनते ही रुक गया....
रजनी ने जब उसे रुकता देखा तो बोली : "अरे ...तुम क्यों रुक गये...उसे देखने दो..यही तो उम्र है ये सब सीखने की...यू प्लीज़ फक मी हार्ड.....''

राजेश समझ गया की ये शेफाली की आत्मा ही रजनी से बुलवा रही है , उसे और क्या चाहिए था, रजनी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वो पहले से ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा...
आज तो सच में उसका लंड स्टील जैसा बन चुका था...

और ये चुदाई कम से कम आधा घंटा और चलने वाली थी...

और राजेश ये नही जानता था की इस वक़्त रजनी के मन में क्या चल रहा है..
पर उसे अच्छे से पता था की अगले आधे या एक घंटे में जो भी होगा उनके बेडरूम में वो मजेदार ही होगा.
 


UPDATE - 8


''राजेश.....वो देखो सामने....चाँदनी हमे छुप कर देख रही है...''

राजेश की तो गांड ही फट्ट गयी ये सुनकर....उसने तो ये सोचा भी नही था की जैसे वो उसे देख सकता है , बेड पर उल्टी लेटी हुई रजनी को भी तो वो दिखाई ही दे रही होगी...वो तो मज़े में अपनी चूत में अंदर बाहर हो रहे लंड का मज़ा ले रही थी, थोड़ा सा चेहरा उपर किया तो सामने शीशे के पीछे खड़ी चाँदनी दिखाई दे गयी, जो इस वक़्त अपनी आँखे बंद किए बड़े ही मज़े में अपनी चुचि और चूत मसल रही थी...राजेश ये सुनते ही रुक गया....रजनी ने जब उसे रुकता देखा तो बोली : "अरे ...तुम क्यों रुक गये...उसे देखने दो..यही तो उम्र है ये सब सीखने की...यू प्लीज़ फक मी हार्ड.....''

राजेश समझ गया की ये शेफाली की आत्मा ही रजनी से बुलवा रही है , उसे और क्या चाहिए था, रजनी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वो पहले से ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा...
आज तो सच में उसका लंड स्टील जैसा बन चुका था...और ये चुदाई कम से कम आधा घंटा और चलने वाली थी...और राजेश ये नही जानता था की इस वक़्त रजनी के मन में क्या चल रहा है..
पर उसे अच्छे से पता था की अगले आधे या एक घंटे में जो भी होगा उनके बेडरूम में वो मजेदार ही होगा.

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अब आगे
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राजेश के हर झटके से अब रजनी और भी ज़्यादा कामुक तरीके से अपनी चुदाई करवा रही थी...
वो ज़ोर से चीख रही थी ताकि बाहर खड़ी चाँदनी तक उसकी सिसकारियाँ पहुँच सके..

''ओह राजेश....... ज़ोर से चोदो मुझे...... उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारा ये मोटा लंड ..... आअहहह मज़ा आ रहा है आज तो बहुत चुदवाने में....... आज ये कुछ.....अहह ज़्यादा ही .....उफफफफफफ्फ़ ....मोटा लग...... रा है........ अहह...... ऐसे ही चोदो मुझे.....डार्लिंग.......''

राजेश भी मंद -2 मुस्कुराते हुए अपने काम में लगा रहा....

राजेश अब उसके ऊपर लेट कर उसे चोद रहा था....
इस पोज़ में तो राजेश के लंड का आखरी कतरा भी रजनी की चूत में उतर चुका था..



ये शायद रजनी के लिए भी काफ़ी आनंददायक पोज़ था
क्योंकि उसके बाद उसका ध्यान चाँदनी से हट सा गया
और वो आँखे बंद करके अपने पिछवाड़े कब्बड्डी कर रहे राजेश के लंड का मज़ा लेने लगी
जो उसकी चूत की अंदरूनी रेखा तक जाता और उसे छूकर फिर से वापिस भाग जाता.

रजनी ने अचानक आँखे खोली और एक बार फिर से चाँदनी की तरफ दौड़ाई जो उन्हे देखकर अभी तक अपनी मुनिया को मसल रही थी..
अब उसने अपनी टी शर्ट उपर कर ली थी और शॉर्ट्स को नीचे...
एक तरह से वो लगभग नंगी खड़ी होकर अपनी चूत की जबरदस्त घुटाई कर रही थी....



अब शायद रजनी के दिमाग़ में कुछ शैतानी उभरने लगी थी...
वो धीरे से राजेश से बोली : "डार्लिंग...मुझे उपर आने दो...''

राजेश तो मस्ती में उसकी चूत मारने में लगा था,
आज तक वो ऐसे बोलकर उपर नही आई थी उसके...
वो समझ गया की वो चाँदनी के लिए शो का इंतज़ाम कर रही है..
उसे तो वैसे भी कोई दिक्कत नही थी इसमें..
उसने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और बेड पर उल्टा होकर लेट गया...
वो बेड पर तिरछा होकर इस पोज़ में लेटा की थोड़ा सा सिर पीछे करने से उसे भी चाँदनी दिखाई दे रही थी.

चूत से निकलने के बाद राजेश के लंड की शक्ल बहुत ही ख़तरनाक नज़र आ रही थी,
ऐसा लग रहा था जैसे किसी जंगली सूअर के उपर चमकीले तेल की मालिश कर दी हो..

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और उसके इस भयानक और मोटे लंड को देखकर चाँदनी की हालत और भी ज़्यादा खराब हो गयी...
पहले रूम में तो इतना मोटा और चमकीला नही लग रहा था अंकल का लंड, ये चूत में जाने के बाद उसे क्या हो गया है...
बेचारी यही सोचकर अपनी चूत मसलने लगी की अगर ये भयानक शक्ल वाला लंड इस वक़्त अगर उसकी चूत में चला गया तो उसका क्या हाल होगा.

इस बात को सोचकर ही उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ गयी..

वो ज़्यादा नही देख पाई उसके लंड को क्योंकि एक बार फिर से रजनी उसके उपर आ बैठी थी और उसके घोड़े जैसे लंड की सवारी करते हुए दूर तक दौड़ती चली जा रही थी..



राजेश की भी आँखे बंद होती चली गयी ,
मज़ा ही इतना ज़्यादा मिल रहा था उसे आज...

शादी के इतने सालो बाद अब उसे असली मज़ा मिल रहा था चुदाई का अपनी बीबी के द्वारा...
वो मन ही मन शेफाली को धन्यवाद दे रहा था रजनी के इस बदलाव के लिए..
और नीचे से लंड को उपर की तरफ धक्के मारते हुए जोरों से उसकी चुदाई भी कर रहा था.

और जल्द ही राजेश के लंड ने शोले उगलने शुरू कर दिए....
सिर्फ़ 1 घंटे में ये दूसरी बार था जब उसके लंड ने अपना गाड़ा माल निकाला था.

बाहर खड़ी चाँदनी ने भी अपनी चूत से चाँदनी टपका डाली...
तीनो अब अपनी-2 जगह पर पड़े गहरी साँसे ले रहे थे.

चाँदनी दबे पाँव अपने रूम में वापिस गयी, कपड़े पहने और सो गयी..
आज के लिए उसके साथ भी काफ़ी कुछ हो चुका था.
 
अगली सुबह राजेश ने ईशा को भी साथ लेकर जाना था हॉस्पिटल उसका एक्सरे करवाने,
चाँदनी को उसके घर छोड़ना था रास्ते में, इसलिए वो भी नहा धोकर जल्दी तैयार हो गयी और करीब 10 बजे वो तीनों एक साथ कार में बैठकर घर से निकल गये.

रास्ते भर राजेश चाँदनी के नशीले बदन को देखता रहा और वो भी अपने सीने को उभार-2 कर राजेश को अपने बदन के जलवे दिखाती हुई पीछे बैठी ईशा से गप्पे लड़ाने में व्यस्त रही.

जब उसका घर आया तो वो उतार गयी, राजेश को बाइ बोलकर वो जाने लगी तो उसने चाँदनी से कहा : "अपना ही घर समझो चाँदनी बेटा...आते रहा करो...''

चाँदनी मुस्कुराती हुई बोली : "जी अंकल...अब तो आना जाना लगा रहेगा...वैसे भी ईशा को कॉलेज के नोट्स देने आती ही रहूंगी....''

फिर अचानक वो जाते- 2 पलटी और बोली : "ओह्ह शीटssss ....अरे ईशा ये अंगूठी तो रह ही गयी तेरे उस सेट की...''

इतना कहते हुए उसने अपनी उंगली से वो अंगूठी निकाल कर ईशा को दे दी जो शेफाली वाले सेट का ही हिस्सा थी,ईशा ने उसे लिया और अपनी उंगली में पहन ली.

राजेश तो मन ही मन खुश हो गया, ये सोचकर की चलो, अब शेफाली अपनी अंगूठी के मध्यम से उसकी बेटी को भी उसके लिए तैयार करेगी.

अंगूठी लौटाकार चाँदनी अपनी नन्ही सी गांड मटकाती हुई अपने घर में चली गयी.

राजेश उसे दूर तक जाते हुए देखता रहा, तभी पीछे से ईशा ने पुकारा : "हो गया पापा....चली गयी वो....अब चलो .''

बेचारे राजेश को बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई ...
उसकी बेटी ने उसे रंगे हाथो पकड़ लिया था अपनी सहेली को ऐसे घूरते हुए...
पर वो मंद-2 मुस्कुरा भी रही थी, यानी उसे इस बात का गुस्सा नही था.

राजेश बेक मिरर में उसे मुस्कुराते हुए देखता हुआ जल्द ही हॉस्पिटल पहुँच गया..

राजेश ने हॉस्पिटल से व्हील चेयर मँगा ली और उसे अपनी गोद में उठाकर चेयर पर बिठाया..
राजेश ने उसके पैर का एक्सरे करवाया , उसमें हेयर लाइन फ्रेक्चर निकला , इसलिए राजेश ने तुरंत उसे एक महीने का कच्चा प्लास्टर करवा दिया, दिक्कत बस यही थी की अब उसे एक महीने तक हर काम के लिए दूसरे पर डिपेन्ड होकर रहना पड़ेगा..
कॉलेज की तो छुट्टी ही करनी पड़ेगी शायद.

खैर, उसे चेयर पर बिठाकर वो अपनी कार तक ले गया और गोद में लेकर उसे कार की अगली सीट पर बिठाया..
ईशा ने अपनी बाहें राजेश के गले में डाल दी थी और इस वजह से उसे सीट पर बिठाते हुए राजेश का चेहरा बिल्कुल उसके करीब था...
ईशा की तेज साँसे उसके चेहरे से टकरा रही थी.
वो जैसे राजेश की गंध सूंघ रही थी और अपनी गर्म साँसे छोड़कर राजेश को उत्तेजित भी कर रही थी...
सीट पर बिठाने के बाद भी उसने अपनी बाहें नही निकाली राजेश की गर्दन से...
और जैसे ही राजेश उसे कुछ बोलने को हुआ उसने झट्ट से अपने होंठ अपने पापा के गालों से सटा कर एक लंबा किस्स कर दिया.

हालाँकि आज से पहले भी कई बार ईशा ने उसके चीक्स पर किस्स किया था पर आज का ये चुंबन कुछ अलग ही था...
वो अपना सिर हिला कर अपने होंठो को उसके गाल पर रगड़े जा रही थी...
अगर उसने लिपस्टिक लगाई होती तो राजेश का पूरा गाल रंगीन हो जाना था.

राजेश ने भी उसे नही रोका और उसके नाज़ुक होंठो का स्पर्श महसूस करके आनंद लेता रहा...
करीब 2 मिनट बाद जब वो रुकी तो राजेश का गाल गीला हो चुका था...
ईशा के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी.

वो बोली : "आप कितने क्यूट हो पापा...मन करता है आपको किस्स करती रहूं..करती रहूं...''

राजेश बेचारा बस मुस्कुरा कर रह गया...
वो समझने की कोशिश कर रहा था की वो किस वे में ऐसा बोल रही है...
पर अंदर ही अंदर वो जानता था की अंगूठी पहनने के बाद उसपर शेफाली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है...
और ये किस्स वो किस वे में करने को बोल रही थी..

उसने कार स्टार्ट की और मंद-2 मुस्कुराते हुए घर की तरफ चल दिया...
अब उसकी लाइफ का नया चेपटर जो खुलने वाला था.
 
वो अपना सिर हिला कर अपने होंठो को उसके गाल पर रगड़े जा रही थी...अगर उसने लिपस्टिक लगाई होती तो राजेश का पूरा गाल रंगीन हो जाना था. राजेश ने भी उसे नही रोका और उसके नाज़ुक होंठो का स्पर्श महसूस करके आनंद लेता रहा...करीब 2 मिनट बाद जब वो रुकी तो राजेश का गाल गीला हो चुका था...ईशा के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी.

वो बोली : "आप कितने क्यूट हो पापा...मन करता है आपको किस्स करती रहूं..करती रहूं...''

राजेश बेचारा बस मुस्कुरा कर रह गया...वो समझने की कोशिश कर रहा था की वो किस वे में ऐसा बोल रही है...
पर अंदर ही अंदर वो जानता था की अंगूठी पहनने के बाद उसपर शेफाली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है...और ये किस्स वो किस वे में करने को बोल रही थी..उसने कार स्टार्ट की और मंद-2 मुस्कुराते हुए घर की तरफ चल दिया...अब उसकी लाइफ का नया चेपटर जो खुलने वाला था.

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अब आगे
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घर पहुँचकर भी राजेश ने ईशा को गोद में उठाया और अंदर ले गया...
ईशा ने अपनी बाहें राजेश के गले में डालकर अपने नन्हे बूब्स उसकी छाती से सटा रखे थे.

रजनी को वो पहले ही फोन पर प्लास्टर वाली बात बता चुका था, उसने ईशा के रूम को ढंग से सॉफ सुथरा करके उसके लिए नर्म गद्दा लगा दिया ताकि लेटे रहने में उसे ज़्यादा परेशानी ना हो.

ईशा को उसके बेड पर लिटाते हुए राजेश ने जब उसे छोड़ा तो ईशा ने अपनी बाहे उसके गले से निकाली ही नही...
बेचारे राजेश को उसके साथ-2 बेड पर झुक कर बैठे रहना पड़ा..

राजेश : "छोड़ो ईशा...ये क्या कर रही हो...''

ईशा : "नो पापा...आप मेरे पास ही रूको आज...कहीं नही जाना..''

नंदिनी उन बाप बेटी की नोक झक देखकर हंसते हुए बोली : "आप दोनो आपस मे निपटो, मैं किचन में जाकर डिन्नर बना लेती हूँ ''

इतना कहकर वो उन्हे उसी हालत मे छोड़कर किचन में चली गयी...
रजनी के जाते ही ईशा ने राजेश को पूरा अपने उपर खींच लिया..
उसकी ताक़त देखकर राजेश भी हैरान रह गया, उसने शूज़ भी नही उतारे थे,
उस हालत में वो पूरा अपनी फूल जैसी बेटी पर लेटा हुआ था.

राजेश : "ये क्या बचपन है ईशा...छोड़ो मुझे...शूज़ भी नही उतारे मैने..''

ईशा ने राजेश को अपनी बगल में लिटाया और उपर उठकर उसके शूज़ निकाल फेंके और वापिस आकर अपने पापा से लिपट कर आँखे बंद कर ली...
राजेश उसके मासूम से चेहरे को देखकर ये अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था की ये उसे सच में अपने पापा पर प्यार आ रहा है या फिर शेफाली की आत्मा उस से ये सब करवा रही है...
पर वो कुछ समझ नही पाया.

वो भी आँखे बंद करके अपनी बेटी के साथ लेट गया..
काम तो ज़्यादा नही किया था आज उसने पर आने-जाने मे ही उसकी कमर दुखने लगी थी,
ऐसे लेटने में उसे भी आराम मिल रहा था.

उसकी आँख कब लग गयी उसे भी पता नही चला...ईशा भी सो चुकी थी.

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रात 9 बजे रजनी ने आकर उसे जगाया की खाना बन चुका है, वो उठा और कपड़े बदलकर फ्रेश हुआ और रजनी के साथ बैठकर खाना खाया..ईशा अभी तक सो रही थी..शायद गोलियों का असर था.

[color=rgb(0,]डिन्नर के बाद रजनी बोली : "ऐसा करो आज आप ईशा के साथ ही सो जाओ...उसे आप पर कुछ ज़्यादा ही लाड़ आ रहा है..ऐसा ना हो की रात को उठकर आपको आवाज़ें लगाने लगे..और उसे भूख लगे तो प्लीज़ खाना गर्म करके दे देना उसे, मुझे भी आज कुछ ज़्यादा नींद आ रही है..''[/color]

इतना कहकर वो अपने बेडरूम में चली गयी...
राजेश बेचारा अवाक सा बैठा देखता रह गया...
उसने सोचा की रजनी भी तो ईशा के पास सो सकती थी, उसे खाना भी गर्म करके दे सकती थी, आज एकदम से ये पापा पर लाड़ वाली बात निकालकर वो खुद उसे सोने के लिए कह रही है, यानी शेफाली उससे ये सब करवा रही है...

ईशा के साथ रात भर सोने की बात सोचते ही राजेश का लंड सुर सुर करने लगा...
अभी कल ही उसकी कमसिन सहेली को अपना लंड चुस्वाकार और उसके कच्चे बदन को नंगा देखकर उसे ये तो यकीन हो ही चुका था की ईशा अपनी सहेली से एक कदम आगे ही निकलेगी, क्योंकि ईशा का शरीर थोड़ा भरा हुआ और ज़्यादा कटावदार था.

खैर, वो अपनी तरफ से कोई भी ऐसी हरकत नही करना चाहता था जिससे उसकी बेटी को बुरा लगे...
क्योंकि अंदर ही अंदर उसे अभी तक यही लग रहा था की ये सब शायद उसका वहम है,
रजनी में आए बदलाव शायद नेचुरल थे और चाँदनी भी शायद अपनी दोस्त के पापा पर मोहित होकर वो सब कर बैठी थी...
पर ईशा के बारे में ऐसा कुछ भी नही था...
वो हमेशा उसकी बातो का विरोध ही करती थी,
ये तो बस वो उसकी इतनी तिमारदारी कर रहा था शायद इसलिए उसे अपने पापा पर लाड़ आ गया था वरना आज तक उसने इस तरह से कभी प्यार नही किया था उसे.
 
वो आँखे बंद करके ये सब सोच रहा था की अचानक ईशा ने अपनी एक टाँग और बाजू उसके उपर रख दी और उससे लिपट कर सो गयी..

उसने अपना घुटना जहां रखा था उसके ठीक नीचे राजेश का लंड था...
हालाँकि वो सो रहा था इस वक़्त पर ईशा के जिस्म के एहसास ने उसके अंदर तरंगे उठानी शुरू कर दी थी.

उसने ईशा के चेहरे की तरफ देखा और उसे पुकारा पर वो शायद नींद में थी,
उसने जवाब नही दिया और उसी हालत में सोई रही.

राजेश भी आँखे बंद करके सोने की कोशिश करने लगा...
पर उसे काफ़ी देर तक नींद नही आई, फिर भी बिना हीले डुले वो लेटा रहा.

अचानक उसे ईशा के हाथ हिलते हुए महसूस हुए,
वो अपने हाथ की उंगलियो से उसकी छाती पर उगे बालों को सहला रही थी...
टी शर्ट के बटन खोलकर उसके हाथ कब अंदर आ गये थे ये उसे भी पता नही चला था.

कुछ देर बाद उसके हाथ नीचे की तरफ आने लगे और सीधा आकर वो राजेश के लंड पर जम गये..

अब तो राजेश को पूरा विश्वास हो गया की ये लाड प्यार एक बाप बेटी वाला नही रह गया था...
पर वो देखना चाहता था की वो कितना आगे जा सकती है, इसलिए बिना आँखे खोले वो अंजान बनकर सोया रहा...
वो काफ़ी कोशिश भी कर रहा था की किसी दूसरी चीज़ के बारे में सोचे ताकि उसका लंड एकदम से खड़ा ना हो,
पर जिस अंदाज से ईशा उसके लंड को सहला रही थी, उसे निचोड़ रही थी,वो दूसरी तरफ ध्यान रख ही नही पाया और उसके लंड में अपने आप वृद्धि होने लगी.

जैसे ही ईशा को खड़े लंड का एहसास हुआ, उसकी गर्म साँसे राजेश को अपनी गर्दन पर महसूस होने लगी....
और फिर उसने अपनी गीली जीभ निकाल कर राजेश को चाटना शुरू कर दिया...
राजेश भी हैरान सा होकर बिना हीले डुले ईशा का ये रूप देख रहा था क्योंकि वो जिस अंदाज में चाट रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत खेली खाई लड़की है....
बिल्कुल पोर्न स्टार जैसी प्रोफेशनल की तरह बिहेव कर रही थी वो...
धीरे-2 ईशा राजेश के चेहरे को चाट्ती हुई उपर तक आई और उसके गालो को चाटने लगी. उनपर किस्स करने लगी....
राजेश के सूखे होंठ फड़क से रहे थे इस अंदाज़े से की कुछ ही पलों में शायद उनका नंबर भी आने वाला है, और उसे ज़्यादा इंतजार भी नही करना पड़ा, ईशा ने अपने गर्म और गीले होंठ उसके होंठो पर रखकर उन्हे सींचना शुरू कर दिया...

ये पहली बार था जब वो अपनी ही बेटी के होंठो को अपने होंठो पर महसूस कर पा रहा था...
वो तो राजेश के होंठो को ऐसे चूसने मे लगी हुई थी जैसे बरसो से उनकी प्यासी हो...
एक हाथ उसका अपने पापा के लंड पर था, और होंठ उसके होंठो पर...

राजेश से अब सोए रहना मुश्किल सा हो रहा था...
उसने ऊंघते हुए अपनी आँखे खोली और चौंकने का नाटक करते हुए ईशा से कहा : "उम्म्म्म......ईशा.....ये ये.....क्या कर रही हो बेटा...''

''शःह्ह्ह्ह डोंट से एनिथिन्ग पापा....... जस्ट रिलॅक्स.....''

और इतना कहते हुए वो उसे चूमती हुई नीचे की तरफ चल दी....
और ठीक उसके लंड के उपर जाकर जब उसका चेहरा रुका तो राजेश को समझते देर नही लगी की शेफाली अब ईशा से क्या करवाने वाली है.....
ईशा ने उसके पयज़ामे को नीचे किया और उसके लंड को बाहर निकाल कर उसपर अपनी गर्म सांसो का फव्वारा छोड़ा और फिर एकदम से गप्प करते हुए वो उसके लंड को निगल गयी....

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''आआआआआआआआआआआअहह ईशा..................... मेरी बच्चीइइइइइइइइईईईईईईईईईईईईईईईईई''

बेचारा कुछ और नही बोल पाया सिवाए उसके सिर को अपने लंड पर पूरा दबाने के....

ईशा का मुँह तो छोटा सा था पर उसने एक ही बार मे अपने बाप के लंड को पूरा मुँह में लेकर नीचे तक नाप डाला...

और फिर सडप -2 करते हुए वो पूरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी...
अभी तक दोनो के कपड़े अपनी जगह थे , सिर्फ़ राजेश का लंड ही बाहर था जिसे चूसकर वो उसे मज़ा दे रही थी....

राजेश ने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसकी ब्रा के हुक्स को चुटकी से खोलने की कोशिश की पर वो असफल रहा , एक दो बार फिर से तरय किया पर हुआ ही नहीं, ईशा की हंसी निकल गयी ये देखकर ,
वो बोली : "रुको... में करती हूँ''
 
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