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मौत की चाल
''पेट्रोल पंप...पेट्रोल पंप...।
"-डॉली के मुंह से उत्साह भरा स्वर सुनकर राज का ध्यान सड़क के किनारे की ओर गया। उसे देखकर हैरानी हुई। वहां सचमुच एक पेट्रोल पंप दिख रहा था।
वहां पेट्रोल पंप मिलना सचमुच अप्रत्याशित था। राज को इसकी जरा भी उम्मीद नहीं थी कि यहां इस बियाबान जंगल में उन्हें पेट्रोल मिल जायेगा।
उसने कार पेट्रोल पम्प के अंदर ले जाकर फ्यूलिंग मशीन के पास ले जाकर रोकी।
वहां दूर-दूर तक कोई बंदा दिखाई नहीं दे रहा था।
राज ने कार का हॉर्न बजाया लेकिन इसके बाद भी वहां किसी इंसान के दर्शन नहीं हुए।
''तुम यहीं रूको
"-फिर वो डॉली को कार में ही रहने की हिदायत देते हुए कार से उतरा-
''मैं अभी आता हूं।
"
''कहां जा रहे हो...
?"-डॉली ने प्रतिरोध जताने की कोशिश की।
''बस अभी आया।
"-कहकर राज पेट्रोल पम्प पर ही बने केबिन की ओर बढ़ गया। चलते चलते ही उसने सरसरी निगाहों से आसपास का जायजा लिया। पेट्रोल पम्प काफी उजाड़ लग रहा था। इधर-उधर कचड़ा भी फैला पड़ा था
, जैसे बरसों से तो वहां सफाई ही न हुुई हो। पेट्रोल पम्प के केबिन की हालत भी काफी खस्ता लग रही थी।
केबिन का दरवाजा भिड़ा हुआ था। राज ने दरवाजा खटखटाया।
कोई प्रत्युत्तर नहीं मिलने पर उसने दरवाजे को धकेल कर देखा।
केबिन खाली था।
उसे निराशा होने लगी।
इतनी मुश्किल से एक पेट्रोल पम्प मिला
, वो भी बेकार!
उसने केबिन के अंदर नजर मारी। वहां सब कुछ बिखरा पड़ा था। एक कुर्सी
, मेज रखे थे और बहुत सारा छोटा-मोटा सामान कचड़े की तरह बिखरा हुआ था। खाने-पीने की चीजों के पैकेट
, बोतलें वगैरह भी पड़ीं थीं।
लगता था वहां काफी मजे किए गए थे।
और वो डॉली के साथ यहां इस सुनसान
, बियाबान
, उजाड़ जंगल में भाड़ झोंक रहा था।
राज ने मुँह बिचकाया और वापस जाने के लिये पलटा।
पलटते ही वो इतनी जोर से चौंका
, जैसे उसे इलेक्ट्रिक शॉक लगा हो।
उसके ठीक पीछे एक आदमी खड़ा था।
राज हैरान था कि वो आदमी बिना कोई आहट किए कब इतने दबे पांव चलतेे हुए उसके ठीक पीछे पहुंच गया।
बल्कि सच्चाई तो यही थी कि एकदम से उस तरह उस आदमी के सामने आ जाने से वो थोड़ा घबरा भी गया था।
''पेट्रोल खत्म हो गया क्या?"-गंदा सा दिखने वाला वो आदमी माचिस की तीली से अपने दांत कुरेदता हुआ राज पर नजरें गड़ाकर बोला।
उस आदमी की उम्र 40-50 वर्ष रही होगी। उसके बाल भी बिखरे
, कपड़े भी मैले-कुचैले हो रहे थे। दाढ़ी भी थोड़ी बड़ी हुई थी। उसने जींस और शर्ट तथा शर्ट के ऊपर जैकेट पहन रखी थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखों में पीलापन था।
''हां। हमें पेट्रोल चाहिए।
"-राज अपनी भारी आवाज में बोला। फिर पेट्रोल पंप की हालत को देखते हुए उसने तुरंत ही सवाल किया-
''यहां पेट्रोल तो होगा न
?"
वो कुछ देर तक राज को घूरता रहा
, फिर हंसा-
''जरूरत से ज्यादा है।
"-कह कर वो घूम कर फ्यूलिंग मशीन की ओर बढ़ गया।
राज ने सिर को झटका दिया और उसके पीछे-पीछे अपनी कार तक पहुंचा।
उस आदमी ने फ्यूलिंग मशीन से पाइप उठाया और कार के पेट्रोल टैंक का पेट भरने लगा।
उसने राज से ये तक नहीं पूछा कि कितना पेट्रोल डालना है। उसके सीधे टैंक में पाइप लगा देने से राज को हैरानी हुई। आखिरकार उसने खुद ही कहा-
''टंकी फुल कर दो।
"-लेकिन उसकी बात पर उस व्यक्ति ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।
''वैसे तुम मेरे केबिन में क्या ताका-झांकी कर रहे थे
?"-अचानक उस शख्स ने राज से पूछा।
''ताकाझांकी नहीं कर रहा था।
"-राज बोला-
''किसी को ढूंढ रहा था
, जो पेट्रोल भर सके।
"
''खुद भर लेते
"-वो आंखें सिकोड़ कर उसकी ओर देखते हुए बोला-
''पैसे काउंटर पर छोड़ जाते।
"
उसकी बात पर राज के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
''इंडिया में ऐसा कब से होने लगा
?"-कार में बैठी डॉली ने कहा।
डॉली की आवाज सुनकर वो आदमी कार की सामने वाली खिड़की की ओर पलटा और उससे बाहर झांक रही डॉली की ओर देखने लगा।
डॉली भी अपने सनग्लासेस से उसे देखती रही
, जो कि उसने यूं ही लगा लिये थे।
कुछ देर डॉली को घूरने के बाद वो फिर राज की ओर पलट गया।
''तुम
"-उसने राज की ओर अपनी उंगली ऐसे तानी जैसे खंजर भोंक रहा हो-
''आर्मी में हो क्या
?"
''नहीं तो। ऐसा क्यों लगा तुम्हें
?"
''तुम्हारी आवाज काफी भारी है।
"-वो अजीब ढंग से हंसा-
''उससे मुझे लगा।
"
''मैं
पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हूं।
"-राज ने कहा
राज की बात सुनकर वो ठहाका मारकर हंस पड़ा। उस जंगल के सन्नाटे में उसकी वो हंसी काफी अजीब लग रही थी।
''पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर
?"-फिर वो हंसी रोक कर बोला-
''तब तो बिल्कुल सही जगह आए हो तुम।
"
''मतलब
?"-राज की भवें उठीं।
उसने राज को चेन स्मोकिंग से खराब हो रहे दांतों की झलक दिखाते हुए कहा-
''अब तो यहां आ ही गये हो। समझ जाओगे।
"
राज उससे और भी सवाल करता लेकिन उसे वो आदमी कुछ सनकी किस्म का लगने लगा था इसलिए उसने उससे और कुछ पूछने का इरादा ड्रॉप कर दिया।
पेट्रोल भरने के बाद उसने पाइप कार की पेट्रोल टंकी से निकालकर वापस फ्यूल मशीन पर टांग दिया।
''सुनो
, मुझे और पेट्रोल चाहिए होगा।
"-राज बोला-
''लेकिन मेरे पास पेट्रोल रखने के लिए कुछ नहीं है। क्या तुम्हारे पास...
?"
''हां।
"-पम्प अटेंडेंट बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोला-
''मेरे पास वो चीज है।
"
फिर वो अपने केबिन की ओर बढ़ गया।
कुछ ही देर में वो केबिन से एक पेट्रोल की भरी हुई कैन लेकर वापस लौटा।
''पेट्रोल पंप...पेट्रोल पंप...।
"-डॉली के मुंह से उत्साह भरा स्वर सुनकर राज का ध्यान सड़क के किनारे की ओर गया। उसे देखकर हैरानी हुई। वहां सचमुच एक पेट्रोल पंप दिख रहा था।
वहां पेट्रोल पंप मिलना सचमुच अप्रत्याशित था। राज को इसकी जरा भी उम्मीद नहीं थी कि यहां इस बियाबान जंगल में उन्हें पेट्रोल मिल जायेगा।
उसने कार पेट्रोल पम्प के अंदर ले जाकर फ्यूलिंग मशीन के पास ले जाकर रोकी।
वहां दूर-दूर तक कोई बंदा दिखाई नहीं दे रहा था।
राज ने कार का हॉर्न बजाया लेकिन इसके बाद भी वहां किसी इंसान के दर्शन नहीं हुए।
''तुम यहीं रूको
"-फिर वो डॉली को कार में ही रहने की हिदायत देते हुए कार से उतरा-
''मैं अभी आता हूं।
"
''कहां जा रहे हो...
?"-डॉली ने प्रतिरोध जताने की कोशिश की।
''बस अभी आया।
"-कहकर राज पेट्रोल पम्प पर ही बने केबिन की ओर बढ़ गया। चलते चलते ही उसने सरसरी निगाहों से आसपास का जायजा लिया। पेट्रोल पम्प काफी उजाड़ लग रहा था। इधर-उधर कचड़ा भी फैला पड़ा था
, जैसे बरसों से तो वहां सफाई ही न हुुई हो। पेट्रोल पम्प के केबिन की हालत भी काफी खस्ता लग रही थी।
केबिन का दरवाजा भिड़ा हुआ था। राज ने दरवाजा खटखटाया।
कोई प्रत्युत्तर नहीं मिलने पर उसने दरवाजे को धकेल कर देखा।
केबिन खाली था।
उसे निराशा होने लगी।
इतनी मुश्किल से एक पेट्रोल पम्प मिला
, वो भी बेकार!
उसने केबिन के अंदर नजर मारी। वहां सब कुछ बिखरा पड़ा था। एक कुर्सी
, मेज रखे थे और बहुत सारा छोटा-मोटा सामान कचड़े की तरह बिखरा हुआ था। खाने-पीने की चीजों के पैकेट
, बोतलें वगैरह भी पड़ीं थीं।
लगता था वहां काफी मजे किए गए थे।
और वो डॉली के साथ यहां इस सुनसान
, बियाबान
, उजाड़ जंगल में भाड़ झोंक रहा था।
राज ने मुँह बिचकाया और वापस जाने के लिये पलटा।
पलटते ही वो इतनी जोर से चौंका
, जैसे उसे इलेक्ट्रिक शॉक लगा हो।
उसके ठीक पीछे एक आदमी खड़ा था।
राज हैरान था कि वो आदमी बिना कोई आहट किए कब इतने दबे पांव चलतेे हुए उसके ठीक पीछे पहुंच गया।
बल्कि सच्चाई तो यही थी कि एकदम से उस तरह उस आदमी के सामने आ जाने से वो थोड़ा घबरा भी गया था।
''पेट्रोल खत्म हो गया क्या?"-गंदा सा दिखने वाला वो आदमी माचिस की तीली से अपने दांत कुरेदता हुआ राज पर नजरें गड़ाकर बोला।
उस आदमी की उम्र 40-50 वर्ष रही होगी। उसके बाल भी बिखरे
, कपड़े भी मैले-कुचैले हो रहे थे। दाढ़ी भी थोड़ी बड़ी हुई थी। उसने जींस और शर्ट तथा शर्ट के ऊपर जैकेट पहन रखी थी। उसकी बड़ी-बड़ी आंखों में पीलापन था।
''हां। हमें पेट्रोल चाहिए।
"-राज अपनी भारी आवाज में बोला। फिर पेट्रोल पंप की हालत को देखते हुए उसने तुरंत ही सवाल किया-
''यहां पेट्रोल तो होगा न
?"
वो कुछ देर तक राज को घूरता रहा
, फिर हंसा-
''जरूरत से ज्यादा है।
"-कह कर वो घूम कर फ्यूलिंग मशीन की ओर बढ़ गया।
राज ने सिर को झटका दिया और उसके पीछे-पीछे अपनी कार तक पहुंचा।
उस आदमी ने फ्यूलिंग मशीन से पाइप उठाया और कार के पेट्रोल टैंक का पेट भरने लगा।
उसने राज से ये तक नहीं पूछा कि कितना पेट्रोल डालना है। उसके सीधे टैंक में पाइप लगा देने से राज को हैरानी हुई। आखिरकार उसने खुद ही कहा-
''टंकी फुल कर दो।
"-लेकिन उसकी बात पर उस व्यक्ति ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।
''वैसे तुम मेरे केबिन में क्या ताका-झांकी कर रहे थे
?"-अचानक उस शख्स ने राज से पूछा।
''ताकाझांकी नहीं कर रहा था।
"-राज बोला-
''किसी को ढूंढ रहा था
, जो पेट्रोल भर सके।
"
''खुद भर लेते
"-वो आंखें सिकोड़ कर उसकी ओर देखते हुए बोला-
''पैसे काउंटर पर छोड़ जाते।
"
उसकी बात पर राज के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
''इंडिया में ऐसा कब से होने लगा
?"-कार में बैठी डॉली ने कहा।
डॉली की आवाज सुनकर वो आदमी कार की सामने वाली खिड़की की ओर पलटा और उससे बाहर झांक रही डॉली की ओर देखने लगा।
डॉली भी अपने सनग्लासेस से उसे देखती रही
, जो कि उसने यूं ही लगा लिये थे।
कुछ देर डॉली को घूरने के बाद वो फिर राज की ओर पलट गया।
''तुम
"-उसने राज की ओर अपनी उंगली ऐसे तानी जैसे खंजर भोंक रहा हो-
''आर्मी में हो क्या
?"
''नहीं तो। ऐसा क्यों लगा तुम्हें
?"
''तुम्हारी आवाज काफी भारी है।
"-वो अजीब ढंग से हंसा-
''उससे मुझे लगा।
"
''मैं
पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर हूं।
"-राज ने कहा
राज की बात सुनकर वो ठहाका मारकर हंस पड़ा। उस जंगल के सन्नाटे में उसकी वो हंसी काफी अजीब लग रही थी।
''पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर
?"-फिर वो हंसी रोक कर बोला-
''तब तो बिल्कुल सही जगह आए हो तुम।
"
''मतलब
?"-राज की भवें उठीं।
उसने राज को चेन स्मोकिंग से खराब हो रहे दांतों की झलक दिखाते हुए कहा-
''अब तो यहां आ ही गये हो। समझ जाओगे।
"
राज उससे और भी सवाल करता लेकिन उसे वो आदमी कुछ सनकी किस्म का लगने लगा था इसलिए उसने उससे और कुछ पूछने का इरादा ड्रॉप कर दिया।
पेट्रोल भरने के बाद उसने पाइप कार की पेट्रोल टंकी से निकालकर वापस फ्यूल मशीन पर टांग दिया।
''सुनो
, मुझे और पेट्रोल चाहिए होगा।
"-राज बोला-
''लेकिन मेरे पास पेट्रोल रखने के लिए कुछ नहीं है। क्या तुम्हारे पास...
?"
''हां।
"-पम्प अटेंडेंट बीच में ही उसकी बात काटते हुए बोला-
''मेरे पास वो चीज है।
"
फिर वो अपने केबिन की ओर बढ़ गया।
कुछ ही देर में वो केबिन से एक पेट्रोल की भरी हुई कैन लेकर वापस लौटा।