• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Hindi XXX kahani चीरहरण

Update 45

ये कब हुआ?
सुबह 5 बजे के करीब हुआ था भाई.. जब तक हॉस्पिटल लड़कर पहुचे अब्बू जा चुके थे..
गौतम - बुरा हुआ आदिल..

आदिल - हाँ भाई.. पता नहीं था अचानक से इतना सब हो जाएगा..

गौतम ने आदिल से बात करके शबाना की तरफ कदम बढ़ा फिया औऱ एक कोने उदास खड़ी शबाना का हाथ पकड़ कर संतावाना देना लगा..
शबाना उदास थी मगर इतनी भी नहीं वो गौतम के आगे फुट फुट के रोती..
उदास मत हो अम्मी.. मैं औऱ आदिल है आपका ख्याल रखने के लिए..
शबाना ने उदासी के परदे हटा कर एक नज़र गौतम को देखा औऱ फिर उसके गले से लगती हुई बोली..
शबाना - पता नहीं था ऐसे चले जाएंगे..
गौतम शबाना को गले से लगाकर - अब किसको पता होता है अम्मी.. आप उदास मत हो..
शबाना उदासी से - कल तक तो ठीक थे बेटा.. फिर एकदम से...
गौतम आदिल से - मैं तेरी अम्मी को घर लेकर जा यह हूँ.. यहां रहेगी तो उदास रहेंगी ... तू बाइक की चाबी रख ले.. कोई जरुरत हो तो फ़ोन कर देना..
आदिल - ठीक है भाई.. जैसे हॉस्पिटल से बॉडी मिलती है मैं भी घर आ जाऊँगा.. मैं सबको फ़ोन कर रहा हूँ..
गौतम - चलो अम्मी...
गौतम शबाना को लेकर हॉस्पिटल के बाहर आ जाता है औऱ एक रिक्शा पकड़ कर उसे घर ले आता है..

गौतम - अम्मी उदास मत हो..
शबाना - फारूक बहुत अच्छे इंसान थे बेटा..
गौतम - जानता हूँ अम्मी.. मगर अब होनी को कौन टाल सकता है? जो होना था सो हो गया.. अब आप खुदको उदास मत करो..
शबाना - कैसे ना करु बेटा.. 25 साल से साथ थे..
गौतम शबाना के करीब आकर उसे बाहो में भरकर उसके आंसू पोंछते हुए - अम्मी.. मैं जानता हूँ फारूक मिया एक अच्छे इंसान थे.. मगर अब आपको आगे देखना है.. औऱ जीना है..
शबाना गौतम के कंधे पर सर रखकर उदासी से - बेटा.. ये सब क्या हो गया.. अब हमारा क्या होगा?
गौतम शबाना को बिस्तर पर बैठाते हुए - कुछ नहीं होगा अम्मी.. मैं हूँ ना.. चलो अब मुस्कुरा दो.. जीना तो हसके चाहिए ना..
शबाना हलकी सी मुस्कान चेहरे पर ले आती है..

गौतम शबाना की जांघ पर हाथ रखकर - अम्मी आप चाहो तो मैं..
शबाना गौतम के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए - नहीं बेटा.. आज नहीं..
गौतम अपने होंठ शबाना के होंठों के करीब लाकर - किसीको पता नहीं चलेगा अम्मी.. मैं जानता हूँ आप बहुत उदास हो औऱ मैं आपकी उदासी नहीं देख सकता..
शबाना गौतम के होंठों पर एक हल्का सा चुम्बन करके - नहीं बेटा.. कम से काम मैं आज ऐसा कुछ नहीं कर सकती.. आज फारूक के खातिर मैं अपनी हद पार नहीं कर सकती..
गौतम खड़ा होता हुआ - ठीक है अम्मी जैसा तुम कहो.. अभी मैं जाता हूँ.. फारूक मिया को जब ले जाएंगे तब आऊंगा..
शबाना गौतम का हाथ पकड़ कर - थोड़ी देर रुक जा ना बेटा.. मैं तेरे लिए चाय बना देती हूँ..
गौतम वापस बैठता हुआ - रहने दो अम्मी.. आप यही मेरे साथ बैठी रहो...
गौतम शबाना को गोद में बैठाकर बाहों में भर लेटा है औऱ शबाना गौतम के गले में हाथ डालकर उदासी से उसके बाहों में कसी हुई बैठी रहती है..

कुछ देर बाद दरवाजे पर दस्तक होती है..
आदिल गौतम से - भाई तेरी चाबी..
गौतम चाबी लेते हुए - सबको फ़ोन कर दिया?
आदिल - हाँ.. कर दिया.. सब आने वाले होंगे.. आस पड़ोस के लोग भी खबर लगते ही जमा हो जाएंगे..
गौतम - मैं घर जाके आता हूँ.. जब जाने का टाइम तो बता देना..
आदिल - ठीक है.. मैं फ़ोन कर दूंगा.. दोपहर तक ले जाएंगे..
गौतम - वैसे भाई समझ नहीं आया.. एक दम से ऐसा क्या हुआ की हार्ट फ़ैल हो गया.. लोगों को तो एक दो हार्ट अटैक आते पर वो बच जाते है..
आदिल झेपते हुए - पता नहीं..
गौतम - कुछ तो बात है.. चल बात में बात करेंगे इस बारे में.. अभी चलता हूँ..
आदिल - भाई एक काम है..
गौतम - बोल ना..
आदिल - यार वो असलम साला नहीं आ रहा.. रेशमा आपा अकेली आ रही है तू जाकर उनको ले आएगा?
गौतम - ये कोई कहने की बात है.. मैं पहले रेशमा को है ले आता हूँ.. तू बाकी काम देख ले..
आदिल - ठीक है भाई..

गौतम - हेलो रेशु...
रेशमा - गौतम...
गौतम - कहा हो?
रेशमा - यहां से बस में बैठी हूँ.. आधे घंटे में पुरानाकांटा पहुंच जाउंगी.. फिर घर के दूसरी बस पकड़ूँगी.. डेढ़ घंटा लग जाएगा आने में..
गौतम - पुराना कांटा पहुँचो. मैं लेने आ रहा हूँ..
रेशमा - मैं आ जाउंगी गौतम..
गौतम - मैं आ रहा हूँ ना..
रेशमा - ठीक है..

रेशमा बस से उतरकर गौतम से - तू आ भी गया?
गौतम - सुबह का टाइम है ना.. खाली सडक थी.. चलो बैठो..
रेशमा - वैसे अब्बू ठीक तो है ना.. आदिल ने बताया था अटैक आया है उनको..
गौतम - औऱ कुछ नहीं बताया आदिल ने?
रेशमा - नहीं.. फिर फ़ोन काट दिया था..
गौतम रेशमा का हाथ पकड़कर - रेशु.. तेरे अब्बू का इंतेक़ाल हो गया.. हार्ट फ़ैल हो गया उनका..
रेशमा उदासी से - तू मज़ाक़ तो नहीं कर रहा ना baby.. मुझे ऐसा मज़ाक़ अच्छा नहीं लगता..
गौतम रेशमा के गले लगकर - मैं ऐसा मज़ाक़ नहीं करता..
रेशमा उदासी से गौतम को गले लगाकर - अचानक ऐसा क्या हुआ?
गौतम - मुझे नहीं पता रेशु.. सुबह फ़ोन आया तो पता चला.. हॉस्पिटल जाने पर पता चला.. चलो..
रेशमा गौतम के पीछे बैठकर - अब्बू को घर ले आये?
गौतम - हाँ..
गौतम रेशमा को घर छोड़ कर चला जाता है औऱ फिर दोपहर में फारूक के आखिरी मुकाम पर पहूँचने के बाद अगले दिन शाम को आदिल के साथ उसके घर की छत पर आकर बैठ जाता है..

गौतम - साले अब बता सच सच..
आदिल - क्या?
गौतम - फारूक मिया के साथ ऐसा क्या हुआ कि वो लम्बे है हो गए..
आदिल - भाई क्या बात कर रहा है..
गौतम - अबे गांडु मुझे मत सीखा तुझे अच्छे से जानता हूँ मैं.. सच बता.. वरना तू जानता है मुझे..
आदिल - भाई तू बताएगा नहीं किसी को..
गौतम - ऐसी बातें बटाइ जाती है क्या गांडु.. मुझे बस जानना है.. औऱ कुछ नहीं..
आदिल - ठीक है बताता हूँ..
गौतम - बोल..
आदिल - रात को अब्बू औऱ अम्मी सो रहे थे.. तब मैंने अम्मी के कमरे में चला गया..
गौतम - फिर?
आदिल - फिर क्या भाई.. मुझे लगा अम्मी ने अब्बू को नींद की गोली दे दी होगी पर वो भूल गई.. अब तूने जो लेप दिया था वो मैंने अम्मी की चुत पर लगाया था और सच में अम्मी की चुत सिकुड़ गई थी.. मैं करने लगा और अम्मी सिस्कारिया भरने लगी... अम्मी की सिस्कारिया सुनकर अब्बू जाग गए औऱ अचानक हमारी तरफ देखने लगे..
गौतम - तभी बहनचोद...
आदिल - हाँ.. जब अब्बू ने देखा तो अम्मी मेरे आगे घोड़ी बनी हुई थी नंगी.. वो देखकर अब्बू ने अपना दिल पकड़ लिया औऱ बेड से जमीन पर गिर गए..
गौतम एक पल के हंसा फिर हंसी रोक कर बोला - साले.. तभी मैं सोचु..
आदिल - किसीको बताना मत तू.. ना ही अम्मी से इस बारे में जिक्र करना..
गौतम - तू उसकी फ़िक्र मत कर.. मेरी बात सुन.. आज रात मैं यही रुक जाता हूँ.. शबाना औऱ रेशमा दोनों उदास है.. तू शबाना की उदासी दूर कर दे मैं रेशमा की उदासी दूर कर देता हूँ.. तेरे रास्ते का रोड़ा हट गया.. अब तू दिन रात शबाना के करीब रह सकता है..
आदिल - अब्बू था मेरा रंडी.. क्या बोले जा रहा है.
गौतम - भाई फारूक मिया को जाना था वो चले गए.. अब क्या?
आदिल - तो क्या एक दिन मातम भी नहीं मनाऊं?
गौतम - भाई कल पुरे दिन मातम ही तो बना रहा था. अब छोड़ उन बातों को.. नई शुरुआत कर.. तुझे दूकान औऱ तेरी अम्मीजान दोनों को संभालना है..
आदिल - ठीक है..
गौतम - मैं घर कॉल कर देता हूँ.. औऱ रेशमा को लेके ऊपर वाले कमरे में जाता हूँ तू नीचे शबाना को संभाल ले.. कोई बात हो तो फ़ोन कर देना..
आदिल - भाई चुपचाप करना..
गौतम - फ़िक्र मत कर..

गौतम रेशमा से - चल ना रेशु.. तू भी क्या उदास होके बैठ गई..
रेशमा - baby.. रहने दे ना.. अब्बू चले गए है..
गौतम - ठीक है कुछ नहीं करता पर मेरे साथ सो सकती है..
रेशमा गौतम के साथ कमरे में आते हुए - ठीक है baby..
गौतम रेशमा को लेके ऊपर कमरे के बेड पर बाहों में बाहे डाले लेट गया था औऱ नीचे कमरे आदिल शबाना के साथ बेड पर लेटा हुआ था..

आदिल - मुझे लगा था आपने गोली दे दी होगी अब्बू को..
शबाना - मैंने तो दूध में मिला दी थी.. पर मुझे क्या आता था तेरे अब्बू दूध ही नहीं पिएंगे.. औऱ मेरा ध्यान भी नहीं गया उसपर..
आदिल शबाना के ऊपर आते हुए - छोडो अम्मी.. अब से हमें किसीका डर नहीं है..
शबाना - नहीं आदिल अभी नहीं.. मैंने कल गौतम को भी मना कर दिया इसके लिए..
आदिल - तुमने मना कर दिया तो वो रेशमा के पास चला गया.. दोनों का चक्कर चल रहा है..
शबाना हैरानी से - कब से औऱ तुझे कैसे पता?
आदिल - तुम जानती हो असलम को.. किसी काम का नहीं है साला.. रेशमा को कितना परेशान करता है.. औऱ रेशमा गौतम को पसंद करती थी तो मैंने दोनों की सेटिंग करवा दी..
शबाना - अच्छा है.. कम से कम रेशमा खुश तो रहेंगी गौतम के साथ..
आदिल - अम्मी अब खोलो ना सलवार.. अब्बू की जगह मैं हूँ ना..
शबाना - ठीक है.. सलवार सरका दे नीचे औऱ धीरे धीरे कर ले.. उनको पता ना चले..
आदिल - तुम फ़िक्र मत करो अम्मी.. किसीको कुछ पता नहीं चलेगा..
आदिल सलवार सरका कर शबाना की चुत में लंड घुसा देता है औऱ धीरे धीरे चोदने लगता है चुत में लंड जाते ही शबाना भी फारूक को भूलकर आदिल को बाहों में भर लेती है औऱ चुदवाते हुए कहती है..
शबाना - बेटा अब तुझे ही सब संभालना होगा.
आदिल - फ़िक्र मत कर अम्मी.. मैं सब संभाल लूंगा..

4875361
इधर शबाना की चुदाई शुरु हो गई थी उधर गौतम ने भी रेशमा को चुदने के लिए तैयार कर लिया था..
रेशमा सलवार खोलकर - इतनी नौटंकी करने की जरुरत नहीं है.. कर लो जो करना चाहते हो.. मैं तैयार हूँ..
गौतम मुंह बनाकर - तेरा मन नहीं है तो रहने दे.. मैं सब्र कर सकता हूँ..
रेशमा गौतम का लंड पकड़ कर चुत के मुहाने पर लगाती हुई - फिर पता नहीं कब मिलना होगा.. अब्बू तो चले गए.. उनके जाने में तुम्हारा क्या गुनाह.. लो आओ..
गौतम लंड घुसते हुए - शुक्रिया रेशु.. तू ऐसे माहौल में भी मेरे लिए इतना कर रही है.. मैं कभी नहीं भूलूंगा..
रेशमा सिसकती हुई - ग़ुगु आराम से ना.. चुत दीखते ही पता नहीं क्या हो जाता है तुम्हे..


37152411 4914821
गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - तुम्हारी टाइट है रेशु.. मैं क्या करू? तुम्हारी अम्मी तो अब आराम से झेल जाती है एक बार में..
रेशमा - तूने अम्मी के साथ भी किया है?
गौतम झूठमुठ कहानी बनाकर कहता है - मैं क्या करता? तेरी अम्मी पीछे ही पड़ गई थी मेरे.. एक दिन नंगी होकर मेरे ऊपर चढ़ गई.. अब मैं भी मर्द जात हूँ कितना कण्ट्रोल करता..
रेशमा सिसकियाँ भरते हुए - उनकी क्या गलती? पहली बार तुझे देखकर मेरा दिल आ गया तुझपर.. उनका भी आ गया होगा.. सालों से अब्बू औऱ अम्मी के बीच कुछ हुआ भी तो नहीं था.. उसके बाद तो तेरे पीछे पड़ गई होगी अम्मी..
गौतम - पड़ी थी मगर मैंने आदिल को सब बता दिया..
रेशमा हैरानी से - फिर?
गौतम चोदते हुए - फिर क्या? तेरी अम्मी को आदिल सँभालने लगा औऱ मेरी जान छूटी..
रेशमा - मतलब आदिल औऱ अम्मी के बीच..
गौतम रेशमा के बूब्स मसलकर - हाँ रेशु.. मुझे तो लगता है अब भी कमरे में दोनों साथ चुदाई कर रहे है.

9853430
रेशमा चुत से लोडा निकालकर सलवार पहनती हुई - मुझे देखना है.
गौतम - रेशु पहले मुझे कर तो लेने दो..
रेशमा - बाद में कर लेना रात पड़ी है पूरी... पहले मुझे देखकर आना है मुझे.. क्या हो रहा है नीचे..
गौतम जीन्स पहनकर - क्या करोगी देखकर?
रेशमा - कुछ नहीं बस देखना है..
गौतम - चलो..

गौतम औऱ रेशमा नीचे आकर शबाना औऱ आदिल की चुदाई का नज़ारा खिड़की की दरार से देखकर एक दूसरे को देखते है.. आदिल शबाना को घोड़ी बनाये हुए था.

22138962
गौतम दबी हुई आवाज में - बस देख लिया? अब चले..
रेशमा हैरान होकर - चल..
गौतम औऱ रेशमा वापस ऊपर कमरे में आ जाते है..
गौतम रेशमा को बाहों में भरते हुए - क्या हुआ?
रेशमा - कुछ नहीं.. बस यकीन नहीं हो रहा..
गौतम - छोडो ना.. रेशमा.. शबाना औऱ आदिल दोनों खुश है..
रेशमा गौतम को चूमकर - गांड चाहिए थी ना तुम्हे.. आज मार लो.. कुछ नहीं कहूँगी..
गौतम - सच?
रेशमा नंगी होकर बेड पर घोड़ी बन जाती थी औऱ सरसो का तेल गांड के छेद पर लगाकर गौतम के लंड पर भी लगा देती है.. गौतम लंड सेट करके धीरे धीरे अंदर डालने लगता है..
लंड का टोपा अंदर घुसने पर गौतम - दर्द तो नहीं हो रहा ना रेशु..
रेशमा - मैं सब दर्द सह लुंगी जानू तुम मेरी फ़िक्र मत करो.. घुसाओ.. अंदर..
गौतम लंड घुसाने लगता है औऱ बड़ी मसक्कत के बाढ़ आधा घुसा देता है औऱ आधे से ही धीरे धीरे रेशमा की गांड मारने लगता है..

3769271
गौतम - thanks रेशु...
रेशमा कराहती हुई - तुम्हारे लिए कुछ भी जान..
गौतम थोड़ा औऱ लंड अंदर घुसा देता है औऱ रेशमा को स्पीड हलकी सी बढ़ा कर चोदने लगता है तभी आदिल का वीडियो कॉल आता है..
गौतम फोन उठाकर - बोल..
आदिल - क्या कर रहा है?
गौतम - रेशमा की गांड मार रहा था.. तू क्या कर रहा है?
रेशमा - कौन है...
गौतम - तेरा भाई..
आदिल - अम्मी की चुत मार रह था..
गौतम - बात करवा अम्मी से..
शबाना - बेटा..
गौतम रेशमा की गांड मारते हुए - अम्मी कल मुझे मना कर दिया अब आदिल का ले रही हो.. रेशमा ने तुमको देख लिया अभी अभी.. वो सब जान गई है..
शबाना - बेटा कल सुबह बहुत उदास थी. अभी तो तू भी आजा.. मना नहीं करुँगी..
रेशमा - ग़ुगु आराम से..
शबाना - बेटा धीरे.. रेशमा नहीं सह पाएगी..
आदिल - भाई नीचे आजा साथ में करते है..
गौतम - सुन तू अम्मी को लेके आजा ऊपर.. मैं नहीं आ सकता अभी..
आदिल - ठीक है.. फ़ोन कट जाता है..


brandi-love-001-24
गौतम - रेशमा.. थोड़ी गांड उठा यार फिर ठीक से अंदर जाएगा..
रेशमा - लो.. डाल दो.. कर दो मुझे बर्बाद..
गौतम कमर को ठीक से पकड़ कर झटके मारता हुआ - thanks रेशु..
गौतम रेशमा की गांड मार ही रहा था की दरवाजे किसीने बजा दिया..
गौतम - आ जाओ अंदर खुला ही है..
आदिल औऱ शबाना अंदर आते है औऱ शबाना गौतम औऱ रेशमा को देखकर कहती है - हाय.. आराम से.. तूने तो पूरा डाल दिया गांड में..
आदिल - भाई आपा को उस तरफ से कर.. मैं इस तरफ से अम्मी को करता हूँ..

m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-Yhdv-He-EHk-MP7-Dskg-43496051b
गौतम बेड के दाई तरफ रेशमा को लाकर चोदने लगता है औऱ आदिल शबाना को बाई तरफ लाकर चोदने लगता है..
रेशमा शबाना के होंठ चुम लेती है औऱ चुदवाते हुए शबाना को kiss करने लगती है..

m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-bk-Ax-CGob-Lf0-TK9-Gj-35878681b
शबाना झड़ जाती है औऱ आदिल भी झड़ जाता है दोनों कमरे में एक तरफ रखी चेयर पर बैठ जाते है वही रेशमा सिस्कारी लेती हुई गांड मरवाने का कार्यक्रम चलू रखती है झड़ वो भी चुकी थी मगर गौतम के लिए अब भी गांड मरवा रही थी..

रेशमा की गांड का छेद अब अच्छी तरह खुल गया था जिसमे लंड आसानी से आ जा रहा था.. गौतम ने अब जोर के झटके मारने शुरु कर दिए औऱ रेशमा की आवाजे कमरे में घूंजने लगी.. रेशमा अपनी गांड पकड़कर गौतम से छुड़ाने लगी तो शबाना आगे आ गई औऱ गौतम से बोली - हाय कितना जोर कर रहा है बेटा तू..
गौतम ने रेशमा की गांड से लंड निकालकर उसे हटा दिया औऱ शबाना को घोड़ी बनाकर गांड में सीधा लंड अंदर तक डाल दिया..

images
शबाना भी एक दम से गांड में पूरा लंड जाने उचक पड़ी लेकिन गौतम ने बाल पकड़ कर शबाना की गांड मारना शुरु कर दिया..
रेशमा अपनी गांड सहलाती हुई बेड से नीचे गिर पड़ी जिसे आदिल ने अपनी बाहों में उठा लिया.. दोनों नंगे ही थे..
आदिल का लंड वापस खड़ा हो चूका था उसने रेशमा को वापस बेड पर पटक कर टांग खोलते हुए कहा - आपा बड़े लंड से दर्द होता है तो छोटा ले लो..
ये कहते हुए आदिल ने रेशमा की गांड में लंड घुसा दिया जिससे वापस रेशमा गांड मरवाने लगी.. मगर वो आदिल को न देखकर सामने शबाना औऱ गौतम को देखने लगी जो उसकी आँखों के सामने गांड मराई का खेल खेल रहे थे..

pos10655-3000-7
गौतम आदिल से - मादरचोद बोला था ना रेशमा मेरी है हाथ मत लगाना..
आदिल - माफ़ कर दे भाई पर.. एक बार तो लेकर रहूँगा रेशमा आपा की.. ये कहते हुए आदिल ने रेशमा को पलट दिया औऱ उसकी चुत मारने लगा.. कुछ ही देर में रेशमा वापस झड़ गई औऱ बेड से लचकती हुई नीचे उतर गई..
गौतम - गांडू इधर आ.. तेरी अम्मी का सैंडविच बनाते है..

24593401
गौतम पीछे से शबाना की गांड मार रहा था औऱ अब्ब आदिल शबाना की चुत में घुस गया.. दोनों एक टाइम पर शबाना को चोद रहे थे औऱ शबाना खुलकर सिसकियाँ भरते हुए चुदवा रही थी..
आदिल - भाई आगे आ ना मुझे पीछे से करना है.
गौतम - शबाना तू ही पलट जा... औऱ शबाना को घुमा के अपनी तरफ कर लेटा है..
दोनों शबाना को एक साथ चोदते हुए मज़े लेते है..
शबाना आदिल औऱ गौतम के बीच ऐसे फसी हुई थी जैसे बर्गर में टिकिया..


gif-mmf-2-1
आदिल वापस झड़ गया औऱ शबाना का पानी भी फिर से निकल गया था मगर गौतम अब भी मजबूती से मोर्चा संभाले हुए खड़ा था..

उसने आखिर में रेशमा औऱ शबाना को एक साथ घुटनो पर बैठा दिया औऱ लंड चूसाने लगा..


tumblr-nsgkzes-Glp1uyhugao1-400 tumblr-n9a01qiyw-H1tex3mlo1-250
आदिल थोड़ी देर बाद बेड से खड़ा हुआ औऱ कमरे से बाहर चला गया..
रेशमा औऱ शबाना बिना एक दूसरे से शर्म किये गौतम के लंड को चूस औऱ चाट रहे थे..
आदिल बाहर से आया तो उसके हाथ में शराब की आधी खाली बोतल थी जिसमे से उसने दो पेग बना दिए औऱ एक पेग गौतम को देकर बोला - भाई कब झाड़ेगा? अम्मी औऱ आपा का मुंह दुखने लगा होगा अब तो..
गौतम पेग पीकर गिलास वापस देते हुए - यार लंड चूसते हुए कितनी अच्छी लगती है तेरी अम्मी औऱ बहन..
आदिल- अब झाड़ भी दे.. हमारा दो बार हो गया तू एक बार भी नहीं निकाला..
गौतम - ठीक है यार..
गौतम लंड शबाना के मुंह से निकलकर अपने हाथ में पकड़ लेटा है औऱ दोनों को सामने मुंह खोलकर बैठने को बोलता है फिर लंड मुठियाते हुए दोनों के मुंह पर अपने वीर्य की एक के बाद एक लम्बी लम्बी धार मारता है औऱ झड़ जाता है..
आदिल - तूने झाड़ा है या नहलाया है मेरी अम्मी और आपा को..
गौतम - छोड़ ना यार नींद आ रही है..
रेशमा औऱ शबाना मुंह साफ करके खड़ी हो जाती है शबाना गौतम से कहती - चल में सुलाने देती हूँ..
रेशमा - नहीं अम्मी मेरे साथ सोयेगा गौतम.. चल जानू में सुलाती हूँ तुझे लोरी सुनाके..
आदिल शबाना को पकड़कर - तू मुझे सुला दे ना अम्मी..
चारो उसी बेड पर एकदूसरे की बाहों में बाहे डाले औऱ एकदूसरे से लिपटकर नंगे लेट जाते है..
आदिल - असलम साला कल आया नहीं..
गौतम - रेशमा तू असलम से तलाक़ लेले..
रेशमा - फिर?
गौतम - फिर क्या? सलमा ने जैसे घर बदल कर अपने अब्बू के साथ रह रही है वैसे तू आदिल से निकाह करके अपने भाई के साथ रह.. और मैं तो तेरे साथ हूँ ही..
शबाना - घर बेच कर दूसरी जगह जाना पड़ेगा..
आदिल - इसमें हर्ज़ ही क्या है? यहां हमें सब जानते है..

गौतम - शबाना सलमा से बात कर.. वो मदद करेगी..
आदिल - आपा आप करोगी मुझसे निकाह?
रेशमा - कर लुंगी पर गौतम को नहीं छोडूंगी..
गौतम - पहला निकाह होगा जो अकेले में होगा..
आदिल - हाँ.. और हम जल्दी ही यहां से कहीं और चले जाएगे.. दूकान मैं संभाल ही लूंगा..



************


पहाड़ी के पीछे नीचे की तरफ बड़े बाबा जी अपने ध्यान में मग्न थे और उनके पास ही बैरागी की आत्मा भी बैठी हुई उन्हें देख रही थी..

बैरागी जानता था कि बड़े बाबा जी ध्यान कर सकते में अब उतने समर्थ नहीं है उसनका ध्यान भटक रहा है...
जब से गौतम बड़े बाबा जी से मिला था उनका ध्यान डगमगाने लगा था और उनका मन त्रस्त हो चुका था उनके मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे थे और उथल-पुथल मचने लगी थी..

थोड़ी देर ध्यान में बैठने के बाद बड़े बाबा जी एकदम से अपनी आंख खोलकर सामने देखने लगे उनके चेहरे पर आने वाले हाव-भाव यह बताने में बिल्कुल सटीक थे कि उनका ध्यान डगमगा गया है और वह जो देखना चाहते थे वह नहीं देख पाए हैं..
बड़े बाबा जी का इस तरह आंख खोल कर सामने देखना और विचलित हाव-भाव देखकर बैरागी समझ गया था कि वीरेंद्र सिंह जो देखना चाहता है वह नहीं देख पाया है..

वीरेंद्र सिंह ने सामने देखकर एक नजर अपने पास में बैठे बैरागी को देखा और उसकी आंखों में देखते हुए वह समझ गया कि बैरागी को इस बात का अनुमान हो चुका है कि वीरेंद्र सिंह अब ध्यान करते वक्त अपना मन स्थिर नहीं रख पाता और विचलित हो जाता है..

बैरागी और वीरेंद्र सिंह एक दूसरे को देख रहे थे और मन ही मन वह दोनों जानते थे कि वीरेंद्र सिंह ध्यान में क्या देखने की कोशिश कर रहा था और वह क्यों ध्यान करते हुए विचलित हो रहा था बैरागी इस बात से भी पुणता परीचित था कि बड़े बाबा जी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह गौतम का पिछला जन्म देखने के लिए आतुर है और वह इस लिए ध्यान करने बैठे हैं मगर बार बार उनका उचट जाता है...

बैरागी - क्या हुआ हुकुम.. कुछ दिनों से आपका ध्यान बार बार उचट रहा है.. कोनसा ख्याल आपका मन अस्थिर कर रहा है?
वीरेंद्र सिंह - बहुत सारे ख्याल है बैरागी.. किस किस के बारे में बताऊ? मगर जो मेरी समस्या की जड़ में बैठा है वो ख्याल है की आखिरी गौतम पिछले जन्म में कौन था.. धुप सिंह ने किस बंजारन से प्रेम किया था?
बैरागी - इसका जवाब तो आप मुझसे भी पूछ सकते थे हुकुम.. व्यर्थ ही कब से अपने आपको इतनी पीड़ा देने का कार्य कर रहे थे...
वीरेंद्र सिंह आश्चर्य से - क्या तू जानता है बैरागी आखिर गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था?
बैरागी - हां हुकुम... मैं जानता हूं गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था और कहां था.. और मैं उससे मिल भी चूका हूं..
वीरेंद्र सिंह - तु उससे मिल चुका है.. मगर कहां बैरागी? क्या धूपसिंह का असली पुत्र महल के ही किसी भाग में है या महल के आसपास?
बैरागी - नहीं हुकुम... ना तो वह महल में है ना ही महल के आसपास.. वह आपकी जागीर की सीमा के भीतर आने वाले जंगल के मुहाने पर बसी हुई बंजारा बस्तियों का बशिंदा था जिसे जंगल में मैंने देखा था..
वीरेंद्र सिंह - तू उसे कब कैसे मिला बैरागी.. आखिर तूने उसे कहां देखा और क्या बात की?
बैरागी - मैं आपको सब बताता हूं हुकुम.. मैं आपसे कुछ भी नहीं छुपाना चाहता..
वीरेंद्र सिंह - बताओ बैरागी... जल्दी बताओ मैं बहुत आतुर हुआ जा रहा हूं यह सुनने के लिए की गौतम पिछले जन्म में कौन था? और कहां था? मेरी मुक्ति का मार्ग दिखाने वाले तुम अब मुझे बताओ कि मुझे इस जीवन से मुक्ति दिलाने वाला आखिर अपने पिछले जन्म में था कौन?

बैरागी - तो सुनिए हुकुम.. जब मैं अपने उद्देश्य के लिए निकला था तब आपकी जागीर में आने से पहले जंगल के रास्ते पर था.. जहां जंगल के मुहाने पर बसी हुई बस्तियां थी और मैं उनके पगडंडियों वाले मार्ग पर चलता हुआ आपके जागीर की सीमा के भीतर प्रवेश कर चुका था.. जब मैं उस बंजारा कबिले के पास पहुंचा तो मेरी मुलाकात काबिले के सरदार डाकी से हुई..

डाकी कबिले के पुराने सरदार लाखा को द्वन्द युद्ध में मारकर सरदार बना था औऱ लाखा की दोनों पुत्री मुन्नी औऱ शीला को अपनी दासी बनाकर उनका स्वामी... कबले की परम्परा के मुताबिक लाखा की पत्नी को भी डाकी की पत्नी बनना पड़ता मगर लाखा की पत्नी बहुत पहले चल बसी थी औऱ उस वक़्त की कोई पत्नी नहीं थी..

वीरेंद्र सिंह - ये सब मैं जानता हूँ बैरागी.. तू ये बता इन सब में से गौतम का पिछला जन्म कौन था? साफ-साफ बता? आखिर उस कबीले में कौन था जो गौतम का पिछला था..
बैरागी - हुकुम... गौतम का पिछला जन्म और कोई नहीं लाखा की बड़ी पुत्री मुन्नी का एकलौता बेटा हाक़िम था..
वीरेंद्र सिंह - हाक़िम?
बैरागी - हां हुकुम.. हाक़िम.. जब मैं कबीले के सरदार डाकी से मिलकर वापस आने के लिए निकला तब जंगल के रास्ते में एक पेड़ के नीचे मेरी मुलाक़ात हाक़िम से हुई..

गौतम आज इस जन्म में जितना आत्मविश्वास से भरा हुआ निडर निर्भीक और जांबाज है अपने पिछले जन्म में उतना ही कमजोर और डरपोक था..
नाजायज संतान होने के कारण उसे कई बार कबीले के ताने सुनने पड़े. और किसी ने उसका साथ नहीं दिया.. लाखा ने भी हाक़िम को कभी नहीं अपनाया.. हाक़िम पर बस उसकी माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला ही अपने प्रेम की वर्षा करती थी.. और शीला की पुत्री उर्मि भी हाक़िम को अपने दिल में पसंद करती थी मगर जब सरदार बदला और नया सरदार बना तब हकीम का अपनी मां मुन्नी और मौसी शीला से भी मिलना कम हो गया हाक़िम से वो लोग छुप छुप कर मिलते थे..

डाकी ने हाक़िम को काबिले से निकाला दे दिया औऱ हाक़िम की माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला को अपने साथ रखकर भोग विलास करने लगा..
हाक़िम कबीले से दूर जंगल में अपने दिन गुजरने लगा और यह सोचने लगा कि अगर वह कमजोर ना होता इतना डरपोक ना होता और लड़ना जानता तो वह डाकी से लड़कर अपनी माँ मुन्नी औऱ मौसी शीला को उसके चंगुल से आज़ाद करवा लेता.. उसे कबीला नहीं छोड़ना पड़ता उसे कबीले से नहीं निकाला जाता..

हाक़िम जब मुझसे मिला तब उसने अपना दिल खोल कर मेरे सामने रख दिया था हुकुम.. वह अपने मन की हर एक गहराइयों में छुपी हुई बातों को मेरे सामने प्रकट करके मुझे मदद की उम्मीद कर बैठा और मैंने भी उससे मदद करने का वादा किया था..

हुकुम अब आप जान गए हैं कि गौतम अपने पिछले जन्म में कौन था और क्या था अब समय आने वाला है कि आप उसे उसके पिछले जन्म में भेज कर अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं.. मगर आप अच्छी तरह जानते हो कि वह यहां से अपने पिछले जन्म में जितनी भी चीज ले जाएं मगर वहां से एक ही चीज वापस ला सकता है.. अगर वो जड़ी बूटी के अलावा कुछ और लेकर आता है तो फिर आपकी और मेरी मुक्ति अगले बचे हुए 500 सालों तक नहीं हो पायेगी हुकुम..

वीरेंद्र सिंह - तू सही कह रहा है बैरागी.. गौतम अगर जड़ीबूटी के अलावा कुछ और लेकर आ गया तो मेरे साथ साथ तुझे भी मुक्ति मिले बिना ही रह जाएगी.. उसे वापस आने के लिए औऱ कार्य ठीक से करने के लिए कोई ठोस वजह देनी होगी और यह भी तय करना होगा कि वह सिर्फ जड़ीबूटी ही लेकर आए और कुछ नहीं..
बैरागी - वजह तो उसे मिलने वाली है हुकुम.. वह वापस जरूर आएगा मगर क्या वह जड़ी बूटी लेकर आएगा या कुछ और? यह सोचने का विषय है.. अगर आप उसे इस बात पर अडीग कर ले कि वह सिर्फ जड़ी-बूटी लेकर आएगा तब आपका कार्य सिद्ध हो सकता है और हमें मुक्ति मिल सकती है आप जल्दी से उसे इस कार्य के लिए सज्य करें वक्त आने वाला है जब हमें एक साथ मुक्ति मिलेगी और आपका जीवन इस पीड़ा से इस कष्ट से और बंधन से आजाद हो जाएगा..
 
Update 46

केसा गया इम्तिहान?
जैसा हर बार जाता है..
मतलब इस बार भी पास हो जाएगा..
उसमे आपको कोई शक है?
नहीं.. मैं तो बस पूछ रही थी.. आखिरी इम्तिहान भी ख़त्म अब फ्री..
तो? अब आपको कोई औऱ काम है मुझसे?
अरे इतना क्यों बिगड़ता है ग़ुगु..
मैं कहा बिगड़ रहा हूँ माँ.. आप ही कब से कितने फालतू सवाल पूछ रही हो.. हटो मुझे नींद आ रही है..
ग़ुगु अभी तो दिन है औऱ दिन में ही तुझे सोना है?
रातभर जाग कर रिवीज़न कर रहा था.. सुबह एग्जाम देने चला गया अब सोना है.. आप तो आज मेरे पीछे ही पड़ गई माँ..
अच्छा ठीक है सो जा.. शाम को कहीं जाना है..
कहाँ जाना है शाम को?
मेरी एक सहेली है उसने invite किया है 25th एनिवर्सरी मना रही है आज अपनी शादी की..
आपकी कोनसी सहेली आ गई.. आज तक तो किसी से बात करते नहीं देखा आपको.. अब अचानक से ये कौन पैदा हो गई..
अरे है एक सहेली.. तू नहीं जानता.. कभी मेरी साथ मार्केट आता तो जानता.. मगर तू चलता ही नहीं.. कुल्लू दर्जी की दूकान के पास सलून है उसका.. मिसेस झांटवाली नाम है..
गौतम हसते हुए - क्या? झांटवाली ? ये केसा नाम है.. औऱ वो झांटवाली है तो आप क्या बिना झांटवाली हो? आपकी भी तो कितनी लम्बी लम्बी झांटे थी. पहली बार तो मेरी मुंह में ही आ गई थी..
सुमन - मज़ाक़ नहीं.. शाम को 7 बजे हम चल रहे है मतलब चल रहे है..
गौतम - ठीक है चल चलेंगे.. अब सोने दो औऱ शाम को उठा देना..
सुमन - अच्छा मेरी शहजादे..


ग़ुगु कब तक सोता रहेगा बेटा? देख साढ़े छः बज गए.. चल उठ जा.. कब से सो रहा है.. इम्तिहान ख़त्म हुए तो क्या सोता ही रहेगा?
उठ रहा हूँ यार माँ..
उठा जा.. बच्चा.. चल आँख खोल..
चाय बना दो ना एक कप..
कोई चाय वाई नहीं है ग़ुगु.. जल्दी से बाथरूम जा औऱ मुंह हाथ धोकर तैयार हो जा.. जाना है..
माँ छोडो ना.. कहा जाना है.. आप भी किसी ने एक बार बुलाया औऱ जाने को तैयार हो गई...
ग़ुगु एक बार नहीं कई बार बोला है कार्ड भी व्हाट्सप्प किया है.. बेटा अच्छा नहीं लगता ऐसे बार बार बुलाने पर ना जाए तो.. सलून जाती हूँ तो मुझसे पैसे भी कम लेती है.. अगर नहीं गई तो कहीं नाराज़ ना हो जाए..
गौतम उठकर बाथरूम जाते हुए - अच्छा ठीक है.. कपडे निकाल दो.. मैं नहा के आता हूँ..
सुमन - ठीक है.. निकालती हूँ..
गौतम बाथरूम से - आप भी जो करना है कर लो.. फिर मुझे तैयार करके खुद आईने के सामने बैठी रहोगी..
सुमन मुस्कुराते हुए कपडे निकालकर बेड पर रखती हुई - जैसा तेरा हुकुम.. मेरे दिल के चोर..

गौतम नहाने के बाद कपडे पहन के परफ्यूम लगाते हुए - आपके सात बज गए माँ.. मैं तो तैयार हूँ आप हुई या नहीं?
सुमन - बस थोड़ी देर.. होने ही वाली हूँ..
गौतम जूते पहनते हुए - कितना टाइम?
सुमन - बस 10 मिनट ग़ुगु..
15 मिनट बाद..
गौतम - माँ यार औऱ कितना टाइम?
सुमन - हो गया बेटा.. सिर्फ काजल लगा रही हूँ..
गौतम कमरे में आते हुए सुमन को देखकर - साडी भी नहीं पहनी आपने अभी तक?
सुमन - बस पहनने ही वाली हूँ ग़ुगु. तू तो जानता है औरत को तैयार होने में कितना टाइम लगता लगता है बेटा..
गौतम बेड पर बैठते हुए - क्यों हो रही हो इतना तैयार? सोना तो चुत में ऊँगली करके ही है.. फिर ये मेहनत किसलिए?
सुमन मुस्कुराते हुए - तू भी ना ग़ुगु... अब इतने बड़े फंक्शन में जा रहे है. थोड़ा तैयार तो होके ही जाना पड़ेगा.. तेरी तरह फट से तैयार तो नहीं हो सकती ना मैं.. मेकअप करने में टाइम तो लगता ही है ना..
गौतम - तो क्यों करना है मेकअप? मेकअप के बाद आपको देखकर मेरे दिल पर जो छुरिया चलती है उसका क्या? छोटा ग़ुगु तो बेचारा खड़ा का खड़ा ही रह जाता है.. पता नहीं कब उसे आपका खज़ाना मिलेगा..
सुमन हसते हुए आईने के सामने से उठकर साडी उठाकर पहनती हुई - छोटे ग़ुगु को समझाओ कि इस पार्किंग में ये गाडी पार्क नहीं हो सकती..
गौतम - समझें तब ना माँ.. कब से ज़िद पर अड़ा हुआ है.. गाडी तो इसी पार्किंग में लगेगी..
सुमन साडी पहनती हुई - तो अपने से दुगुनी उम्र कि जो तूने दोस्त मनाई है उनकी पार्किंग में गाडी पार्क कर दे..
गौतम - उनमे औऱ आपमें फर्क है माँ...
सुमन साडी पहनकर कुछ सोचती हुई - तो फिर एक ही रास्ता है तुझे दो में एक को चुनना होगा..
गौतम - किन दो में से?
सुमन - मैंने बहुत सोचा औऱ अब अपने मन को समझा लिया है गौतम.. मगर तुझे मेरी औऱ अपनी सभी रखैल में से एक को चुनना होगा.. या मुझे अपना बना ले या उन सब औरतों को जिसके साथ तूने सम्बन्ध बनाये है.. फैसला तेरा है.. मैं ये नहीं बर्दास्त कर सकती जो मेरा हो वो किसी औऱ का भी हो...
गौतम - माँ क्या कह रही हो? वो सब अकेली औऱ प्यार की भूखी है उन्हें मैं प्यार नहीं करूँगा तो कौन करेगा?
सुमन लिपस्टिक लगाते हुए - वो सब मुझसे क्यों पूछता है? मैंने थोड़ी कहा था इतनी सारी औरतों के साथ अपना ये चाँद सा गोरा मुंह काला कर.. अब चल.. पहुंचते हुए आठ बज जाएंगे...
गौतम सुमन के साथ घर से निकलता हुआ - अरे ये क्या बात हुई? समंदर देने के बदले मुझसे मेरी नादिया ही छीन रही हो आप तो..
सुमन दरवाजे पर ताला लगती हुई - सोच ले मेरे कच्चे बादाम.. तुझे जो चाहिए वो मिल जाएगा पर कीमत चुकानी पड़ेगी..
गौतम कार मैं बैठते हुए कार स्टार्ट करके चलाना शुरु करते हुए - कोई औऱ उपाय नहीं है क्या? ये तो बहुत दुविधा में डाल रही हो आप.. मेरे ऐसा करने पर कितनो का दिल टूटेगा पता है ना आपको?
सुमन खिड़की से बाहर देखते हुए - मुझे कुछ नहीं पता.. तुम सोच सकते हो आज रात तक का समय है तुम्हारे पास..
गौतम - इसमें सोचना क्या है.. आप मेरा फैसला जानती हो.. पर आप कैसे मुझसे ये करवा सकती हो माँ.. ऐसा करते हुए मुझे खुद बहुत बुरा फील होगा..
सुमन एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगाकर सुलगाती है औऱ एक कश लेकर कहती है - जब मेरी चुत में अपना लंड डालके मुझे चोदेगा तब तुझे केसा फीलिंग होगा?
गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा मंज़ूर है.. पर एक शर्त मेरी भी है..
सुमन सिगरेट के कश लेती हुई - क्या?
गौतम ठेके के आगे गाडी रोककर - बताता हूँ.. रुको..
गौतम ठेके पर जाकर एक 2 बियर के केन ले आता है औऱ वापस गाडी चलते हुए सुमन को एक बियर का केन खोलकर देते हुए कहता है - आपके अलावा मुझे दो औरत औऱ चाहिए..
सुमन सिगरेट के साथ बियर पीती हुई - नहीं..
गौतम अपनी केन खोलकर उसमे से बियर पीते हुए - इतना तो रहम करो माँ.. बच्चा हूँ आपका.. तरस खाओ मुझपर..
सुमन सिगरेट का कश लगाकर - ठीक है एक.. पर उससे भी कभी कभी वाला रिलेशन रखना पड़ेगा..
गौतम बियर पीते हुए कुछ देर सोचकर - ठीक है..
सुमन - तो बोलो.. कौन होगी वो? कोमल, आरती, रजनी, माधुरी, रूपा, शबाना या शबनम?
गौतम - इनमे से कोई नहीं..
सुमन हैरानी से - तो औऱ कौन है?
गौतम मुस्कुराते हुए - आपकी ननद.. औऱ मेरी बुआ..
सुमन हसते हुए - पिंकी?
गौतम शरमाते हुए - हम्म्म...
सुमन बियर का आखिरी घूंट पीकर केन खिड़की से बाहर फेंकते हुए - एक बार फिर सोच लेना ग़ुगु.. मैंने मज़ाक़ नहीं कर रही..
गौतम - मैंने भी मज़ाक़ नहीं कर रहा.. उन सब से कैसे दूर रहना है मैं अच्छे से जानता हूँ..
सुमन - यही वाला गार्डन है शायद.. नाम पढ़ो जरा..
गौतम पार्किंग में गाडी लगाता हुआ - यही है माँ..
गौतम - चलो.. अंदर चलते है..
सुमन - रुको..
गौतम - क्या हुआ?
सुमन - ग़ुगु अब जब सब होने वाला है तो कुछ बातें साफ साफ कर लेना चाहती हूँ..
गौतम - कोनसी बात माँ..
सुमन - है कुछ बात ग़ुगु.. पहली तो ये की तू मुझे माँ सिर्फ लोगों के सामने कहेगा.. अकेले में सुमन कहकर ही बुलायेगा..
गौतम सुमन की जांघ पर हाथ रखकर सहलाते हुए - जैसा आप कहो सुमन...
सुमन गौतम के हाथ पर अपना हाथ रखकर -औऱ दूसरी की तू मुझे आप नहीं.. तुम या तू ही कहकर बात करेगा..
गौतम हाथ जांघ से चुत पर लेजाकर - जैसा तू कहेगी वैसा ही करूँगा सुमन.. औऱ कुछ..
सुमन - हाँ.. तेरा जब भी कुछ गन्दा कहने का मन हो या गाली देने का मन हो तू दे देगा.. खुदको रोकेगा नहीं..
गौतम - पर मैं गाली नहीं देता..
सुमन - मैंने सब जानती हूँ तू कितनी गाली देता है कैसे गाली देता है..
गौतम - पर सुमन...
सुमन - गौतम अगर तुझे मंज़ूर है तो बोल.. वरना कोई बात नहीं..
गौतम - अच्छा ठीक है.. यार.. औऱ कुछ?
सुमन शरमाते हुए - बिस्तर में बताउंगी..
गौतम मुस्कुराते हुए - तो वापस घर चले?
सुमन हसते हुए - पहले अंदर चलकर मिसेस झांटवाली से मिल तो ले औऱ खाना खा ले..
गौतम गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए - ठीक है. जब इतना सब्र किया है तो कुछ देर औऱ सही..
सुमन भी गाडी से उतरती है गौतम के साथ अंदर आ जाती है..
गौतम चकाचोध देखकर - काफी मालदार पार्टी लगती है..
सुमन - हाँ.. झांटवाली बता रही उसके हस्बैंड का ट्रांसपोर्ट का बीजनेस..
गौतम - अच्छा है.. मैं तो खाना खाऊंगा.. तुम मिल लो जिससे मिलना है...
सुमन - साथ में खाएंगे ग़ुगु.. अभी चल मेरे साथ..
गौतम - यार सुमन..
सुमन - ज्यादा नखरे मत कर.. चल..
गौतम - ठीक है चलो..

गौतम औऱ सुमन झांटवाली से मिलके वापस आ जाते है औऱ खाना खाने लगते है..
गौतम - मेरा तो हो गया.. आप खाओ मैं बाथरूम जाके आता हूँ..
सुमन - ठीक है..
गौतम बाथरूम में जाता है औऱ मूतने लगता है कि उसके फ़ोन पर जगमोहन का फ़ोन आता है..
गौतम - हेलो..
जगमोहन - कहाँ हो बेटा? घर ताला क्यों लगा है.. औऱ सुमन फ़ोन क्यों नहीं उठा रही है?
गौतम - माँ अपनी किसी सहेली के एनिवर्सरी फंक्शन में लेकर आई थी.. औऱ नाराज़ है आप से इसलिए फ़ोन भी नहीं उठा रही होगी..
जगमोहन - बात करवा अपनी मम्मी से..
गौतम वापस जाते हुए - रुको करवाता हूँ..
गौतम - लो बात करो..
सुमन - कौन है?
गौतम - पापा..
सुमन गुस्से से - बोलो.. क्या बात है?
जगमोहन - सुमन.. मेरी बात सुनो.. कल सुबह गाँव से माँ के साथ बृजमोहन और मानसी आने वाले है..
सुमन - तो? मैं क्या करू? औऱ इतने साल बाद तुम्हारे घरवालों को अचानक कैसे याद आ गई? अब क्या चाहिए उनको? जमीन औऱ घर को तो हड़प कर ही गए अब क्या हड़प करना चाहते है?
जगमोहन - सुमन.. फालतू बात मत करो.. बटवारे में पापा की नोकरी के बदले मैंने ही भईया को वो सब रखने को कहा था.. औऱ गौतम को सुबह घर पर ही रखना.. मैं सुबह जल्दी घर आ जाऊंगा..
सुमन - नहीं रहेगा वो घर पर..औऱ तुम अपने घरवालों से कहदो आने की कोई जरुरत नहीं है.. अब 18 साल बाद क्या लेने आ रहे है वो?
जगमोहन - अरे तुमसे तो बात करना बेकार है.. कोई बात नहीं समझती..
सुमन - मैं नहीं समझती तो अपनी उन रखैलो को समझा दो.. पहले तो एक ही थी अब तो दो-दो हो गई.. वो दोनों तुम्हारी बात अच्छे से समझ जायेगी..
जगमोहन - देख सुमन तेरी बातों के करण मैं घर दूर हूँ.. ऐसा करेंगी तो जिंदगी से भी दूर चला जाऊँगा..
सुमन - कल के जाते आज जाओ मेरी बला से.. मुझे क्या सुनाते हो..
जगमोहन - मुझे कुछ औऱ बात नहीं करनी.. कल वो लोग आ रहे है.. तू माँ औऱ बृजमोहन मानसी से कोई कड़वी बात नहीं करेगी.. (फ़ोन काटते हुए)
गौतम सुमन से - कौन आ रहा है? औऱ इतना क्यों गुस्से में हो?
सुमन - तेरी दादी औऱ चाचा चाची आ रहे है..
गौतम हैरानी से - पर पापा का कोई रिश्तेदार नहीं है.. आपने ही तो बताया था.. अब अचानक से ये लोग कहा से पैदा हो गए?
सुमन - पुरानी बात है ग़ुगु.. छोड़..
गौतम - बताओ ना.. क्या मुंह में दही जमा के बैठी हो तुम भी..
सुमन उठकर - चल घर चलते है...
गौतम साथ में चलते हुए - बात क्या है कुछ बताओगी?
सुमन पार्किंग जाते हुए - घर चल बताती हूँ..
गौतम कार में बैठकर - नहीं यही बताओ.. क्या बात है औऱ मुंह क्यों लटक गया तुम्हारा?
सुमन सिगरेट सुलगा कर कश लेती हुई - गौतम.. 18 साथ पहले तक तेरे पापा औऱ मैं गांव में तेरे पापा के परिवार के साथ रहते थे.. तेरे दादा दादी औऱ चाचा ब्रजमोहन चाची मानसी भी साथ रहते थे..
गौतम - कहा? कोनसा गाँव?
सुमन - सलामपुर.. यहां से 3 घंटे का रास्ता है..
गौतम - फिर क्या हुआ?
सुमन - एक दिन तेरे दादा मंगुलाल की मौत हो गई.. उसके बाद जमीन औऱ घर के बटवारे को लेकर तेरे चाचा चाची औऱ हमारे बीच मनमुटाव होने लगा.. तेरे पापा ने तेरे दादा की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर तेरे चाचा को दे दिया.. औऱ हम गाँव से यहां आ गए.. तेरे पापा ने एक छोटी सी हवलदार की नोकरी के बदले सारी जमीन औऱ घर दे दिया.. तेरे चाचा ब्रजमोहन ने अपने नशे की लत औऱ ऐश पूरा करने के लिए जमीन साहूकार को बेच दी..
गौतम - फिर क्या हुआ माँ?
सुमन सिगरेट का कश खींचती हुई धुआँ छोड़कर - होना क्या था ग़ुगु.. 18 साल हो गए मैंने आज तक पलटकर वापस उस गाँव में कदम नहीं रखा ना ही जगमोहन और पिंकी से तुझे इस बारे में बात करने औऱ बताने को कहा.. मैं तुझे सबसे दूर रखना चाहती थी.. मगर अब ना जाने क्यों वो लोग यहां आ रहे है..
गौतम सुमन के चेहरे से जुल्फ हटाते हुए - अरे इतनी सी बात.. तुम चिंता मत करो.. आ रहे है तो आने दो आकर चले जाएंगे.. तुम नहीं चाहती तो मैं उनसे नहीं मिलूंगा..
सुमन मुस्कुराते हुए सिगरेट का अगला कश लेकर - तू कितना अच्छा है ग़ुगु..
गौतम भी मुस्कुराते हुए - तू भी तो बहुत प्यारी है सुमन..
सुमन सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट फेंक देती है औऱ गौतम के लबों पर अपने लब रखकर गौतम के होंठ चूमते हुए कहते है - अब घर ले चल अपनी माँ को..
their-car-kiss-from-s1-is-underrated-v0-3xcl9wwkiaob1 tumblr-n0afki5b-OT1s4xbv4o1-500
गौतम सुमन को खींचकर अपनी गोद में बैठा लेता है औऱ गाडी स्टार्ट करके चलाते हुए - हमारी पहली चुदाई होने वाली है सुमन आज.. कुछ चाहिए तुझे बदले में?
सुमन गौतम को देखकर - तेरा लंड तो मैं ले ही लुंगी.. बाकी जो तुझे देना हो दे देना. तेरा फ़ोन आ रहा है ग़ुगु..
गौतम फ़ोन देखकर - रहने दो बाद मैं बात कर लूंगा.
सुमन - फ़ोन किसका है?
गौतम - अरे कोई स्टेज डायरेक्ट है.. पीछे पड़ा हुआ है कब से..
सुमन - क्या कह रहा है?
गौतम - अरे एक कंडोम कंपनी के प्रमोशन के लिए एक स्टेज नाटक कर रहा है दिल्ली में.. औऱ मुझे लीड एक्टर लेना चाहता है..
सुमन - तो क्या परेशानी है ग़ुगु.. कर ले.. पैसे भी दे रहे होंगे वो..
गौतम - पैसे तो दे रहा है मगर नाटक में सेक्स है भी करना पड़ेगा हीरोइन के साथ.. औऱ ये कोई आम नटाक नहीं है माँ.. सीक्रेट नाटक है 200 लोगों के सामने करना होगा.. इसके बारे में किसीको पता नहीं है.. सब लोग अँधेरे में शो में आते है नाटक देखकर निकल जाते है..
सुमन - अच्छा.. ऐसा क्या सीक्रेट नाटक है?
गौतम - वही.. Incest है.. एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स करता है शो में.. औऱ इस कंपनी का कंडोम लगाता है जिससे दोनों HIV से बच जाते है..
सुमन - ये सब होता है? कैसे कैसे नाटक बनने लगे है.. वैसे पैसे कितने मिल रहे है..
गौतम - एक शो के 2 लाख देने को कह रहा था..
सुमन - अच्छा.. इतने देने को कह रहे है?
गौतम - हाँ.. हीरोइन को तो 5 लाख मिलते है.. शो के बाद डायरेक्ट प्रोडूसर से चुदवाना भी पड़ता है उसको.. पर छोडो.. हमें क्या.. कोनसी हमें पैसो की कमी है..
सुमन गौतम को देखती हुई - अच्छा... बहुत पैसे है तेरे पास?
गौतम - हम्म.. सब बुआ की मेहरबानी है.. बाइक फिर कार... बिना मांगे सब दे देती है.. बहुत प्यारी है..
सुमन जलन से - मैं प्यारी नहीं हूँ?
गौतम घर के आगे गाडी लगाते हुए - ये जानने के लिए तो बिस्तर में चलना पड़ेगा माँ..
सुमन मुस्कुराते हुए - मैंने तो हामी भर दी है मेरी दिल के टुकड़े... अब तू अपनी माँ को घर के बिस्तर में लेटाकर चोद या सडक के किनारे फुटपाथ पर.. मैं मना नहीं करने वाली...
गौतम सुमन को उठाकर घर के अंदर लता है औऱ बेड पर लेटा कर उसकी साडी उठाकर चुत चाटता हुआ चुत गीली करके अपना लंड को चुत पर टिका देता है मगर सुमन एक कंडोम गौतम के लंड पर पहना देती है औऱ अब घुसाने को कहती है.
22657791
गौतम - माँ यार अब क्या कंडोम का नाटक कर रही हो तुम? मैं कल प्रेगनेंसी रोकने की गोली लाकर दे दूंगा..
सुमन लंड पकड़कर अपनी चुत पर रगडती हुई - जब ले आओ तब कर लेना.. अभी तो ऐसे ही करना पड़ेगा..

e3d9ab3bd2a6-b843d31e-716e-4295-b766-155131e3a345
3307751
गौतम सुमन के ऊपर आकर - जैसा तू बोले मेरी मेरी लोडे की ठंडक.. चल घुसा भी ले.. कब तक बस रगढ़ती रहेगी?
सुमन लंड को चुत के छेद पर टिका कर घुसाती हुई - आहहहहह... ग़ुगु कितना बड़ा है तेरा जा ही नहीं रहा अंदर... अह्ह्ह्ह...
गौतम दबाव डालकर लंड का टोपा घुसा देता है औऱ सुमन सिसकियाँ लेने लगती है दर्द से मचल उठती है..
गौतम - अभी तो सिर्फ टोपा गया है औऱ तू तड़पने लगी? चुदाई में क्या होगा?
सुमन सिसकते हुए -अह्ह्ह्ह.. ग़ुगु पता नहीं कैसे सिकुड़कर इतनी टाइट हो गई मेरी चुत? बहुत दर्द हो रहा है बेटा...
गौतम थोड़ा दबाब डालकर लंड अंदर डालने लगता है औऱ कहता है - माँ पूरी टाँगे फैला लो.. दर्द कम होगा..
सुमन टाँगे पूरी चौड़ी करके - बेटा धीरे धीरे घुसाना..
गौतम थूक लगा कर दबाब डालने ही लगता है की घर का दरवाजा बज जाता है...
गौतम गुस्से में - इस वक़्त कौन आ गया मादरचोद?
सुमन चुत पर से गौतम का लंड हटाकर साडी नीचे करके - देख तो ज़रा कौन है?
गौतम लंड पर से कंडोम उतारकर सुमन के ब्लाउज में डालता घुसा देता है औऱ लंड जीन्स में डालकर गेट खोलने जाता है...

आप?
क्या हुआ ग़ुगु?
कुछ नहीं..
आज आखिरी एग्जाम था ना..
हाँ..
ठीक गया?
हाँ पास हो जाऊँगा..
सुमन कहा है?
कमरे में है सो रही है..
ठीक है तू भी जाके सो जा..
सुमन बाहर आते हुए - यहां क्या लेने आये हो? रखैलो ने निकाल दिया किया?
जगमोहन - सुमन.. वापस ड्रामा शुरु करने की जरुरत नहीं है.. कमरे में चलो बैठके बात करते है..
सुमन - कमरे क्यों यही बात करो..
जगमोहन - गौतम सुन रहा है सुमन..
सुमन - तो सुनने दो.. उससे क्या छिपा है? तुम्हारी सारी करतूते तो वो पहले से ही जानता है..
जगमोहन सुमन का हाथ पकड़कर कमरे में ले जाता है औऱ गौतम अपने कमरे के बाथरूम में घुस जाता है औऱ अपने बाप जगमोहन को गाली देते हुए अपनी माँ सुमन की टाइट चुत को याद करके लंड हिलाने लगता है..
गौतम मन में - इस बहन के लोडे को भी अभी आना था.. सुबह नहीं आ सकता था साला.. इतने दिनों से फ़ोन तक नहीं किया औऱ अब अचानक आ धमका.. आज तो माँ चुदने ही वाली थी.. लंड का टोपा घुसते ही मचलने लगी.. जब लंड अंदर जाएगा तो क्या हालत होगी माँ की.. उफ्फ्फ बहनचोद.. सोचकर ही दिमाग खराब हो रहा है.. जिस चुत से पैदा होके निकला हूँ उसी चुत को चोद चोदकर मैंने अपनी माँ को नहीं रुला दिया तो लानत है मेरे मर्द होने पर.. उफ्फ्फ यार.. घोड़ी बनके चुदेगी तो कितना मज़ा देगी मेरी माँ.. कितनी कसी हुई चिकनी कमर है माँ की औऱ गांड तो जैसे मीसर के पिरामिड है.. बिलकुल परफेक्ट.. गोद में उठाके लंड के ऐसे ऐसे झटके मारूंगा ना कि माँ खुद बोलेगी.. बेटा धीरे.. आह्ह.. बेटा धीरे.. इतना माल भरूंगा माँ की चुत में कि पहली बार में ही बच्चा लग जाएगा.. अह्ह्ह..
गौतम ये सब सोचते हुए सुमन कि एक तस्वीर अपने फ़ोन में देखकर अपना लंड हिला रहा था उधर सुमन जगमोहन से झगड़ रही थी..

सुमन - अरे खड़ा होता नहीं तो क्यों शादी पर शादी किये जा रहे हो तुम? औऱ मेरी सहेली ही मिली थी शादी के लिए?
जगमोहन - अब कैसे समझाऊ तुझे? मैं फंसा हुआ था.. मेरी पास औऱ कोई चारा नहीं था.. अगर शादी नहीं करता तो हाथ से ये घर औऱ नोकरी दोनों चली जाती..
सुमन - जाती तो चली जाती.. कोनसा मेरी औऱ मेरे ग़ुगु के काम ही आ रही थी.. घर तो तुमने अपनी रखैलो के लिए बनाया था ना..पता क्या दिल बदला दोनों का और मुझे ये घर इतनी आसानी दे कर चली गई दोनों..
जगमोहन - सुमन रूपा ने मुझे पर दबाव बनाया था शादी का मैं नहीं करना चाहता था.. औऱ अगर किसी को पता चला कि मैंने तेरे अलावा माधुरी औऱ रूपा से शादी कर रखी है तो नोकरी गई समझो..
सुमन - वो सब तुम जानो.. मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है.. तुमसे अच्छी तो तुम्हारी वो बहन पिंकी है.. उसे मैंने कितना भला बुरा कहा.. उसके लिए कितना ज़हर दिल में रखा लेकिन वो जितना मेरी ग़ुगु के लिए करती है उतना तो तुमने अब तक नहीं किया होगा..
जगमोहन - मैं तुमसे लड़ने झगड़ने नहीं आया सुमन..
सुमन - तो क्या अपने मरियल लंड की प्रदर्शनी लगाने आये हो मेरे सामने?
जगमोहन - सुमन.... ये मत भूलो मैं अब भी तुम्हारा पति हूँ औऱ गौतम का बाप..
सुमन - सिर्फ नाम के लिए.. औऱ अब 18 साल बाद क्यों आ रहे है वो लोग? एक छोटी सी नोकरी के बदले इतनी सारी जमीन हड़प कर ली घर भी रख लिया.. अब क्या चाहिए उन लोगों को हमसे?
जगमोहन - पुरानी बातों को छोडो सुमन.. कल जब मम्मी के साथ बृजमोहन आएगा तब पता चल ही जाएगा.. गौतम भी पहली बार अपनी दादी औऱ चाचा चाची से मिल लेगा..
सुमन - कोई जरुरत नहीं है गौतम को उनसे मिलने की.. मेरा बेटा किसीसे नहीं मिलेगा.. समझें तुम..
जगमोहन - वो मेरा भी बेटा है.. तेरे कहने पर मैंने उसे कुछ नहीं बताया.. मगर अब उसे एक बार तो अपने गाँव जाकर सबसे मिलना चाहिए..
सुमन - तुम्हे जाना है चले जाओ.. मैं गौतम को नहीं भेजूंगी.. ना खुद वहा जाउंगी..
जगमोहन - सुमन अब अगर तुम चुप नहीं हुई तो मेरा हाथ उठ जाएगा..
सुमन - हाथ तो नामर्द का भी उठ जाता है.. मर्द हो तो लंड उठा के बताओ.. तब जो कहोगे वो मानुँगी...
जगमोहन बेड पर बैठकर - मुझसे औऱ बहस नहीं होगी.. नींद आ रही है आज यही सोऊंगा..
सुमन लाइट बंद करके तकिया खींचकर बेड पर लेटते हुए - सोने के अलावा कर भी क्या सकते हो..
जगमोहन आगे कुछ नहीं कहता औऱ सो जाता है.. सुमन अपने ब्लाउज में से गौतम का पहना हुआ कंडोम निकालकर अपनर मुंह में डाल लेटी है औऱ चविंगम की तरह चबाने औऱ उसका स्वाद लेने लगती है वही गौतम अब अपनी माँ के नाम पर मुट्ठी मारके बाथरूम से बाहर आ चूका था औऱ अपने धागे को देखकर अब बारी बारी उसने बड़े बाबाजी के बताये अनुसार गायत्री, कोमल, शबनम, पूनम, सलमा, शबाना, रेशमा, आदिल, नरगिस, रज़िया, सिमरन, मनोज के मन से अपनी मनोरम औऱ मधुर मिलन की यादे और बाकी सारी बातें मिटा दी.. औऱ दुखी मन से सबकी तस्वीर देखते हुए अब अपनी माँ सुमन के साथ ही रहने का फैसला करते हुए बेड पर लेट गया.. उसने रूपा और माधुरी को भी छुपके मिलने का फैसला किया.. ऋतू और आरती से भी अपना रिश्ता परदे के पीछे वाला ही रखने का निर्णय लिया..

गौतम का मन दुखी था उसने पिंकी के अलावा लगभग सबके मन से अपनी यादे मिटा दी थी..
उसकी आँखों में नींद नहीं थी औऱ वो सोच रहा था की क्यों सुमन औऱ जगमोहन ने कभी उसे गाँव औऱ बाकी चीज़ो के बारे में नहीं बताया..
गौतम उदासी से पिंकी को फ़ोन कर दिया..
कैसी हो बुआ?
मैं अच्छी हूँ.. तेरा फ़ोन आने औऱ भी ज्यादा अच्छी हो गई बाबू.. आज अचानक इतनी रात को फ़ोन किया है जरुर कुछ बात होगी? कुछ चाहिए? एटीएम कार्ड में पैसे ख़त्म हो गए क्या? मैं अभी डालती हूँ..
अरे नहीं बुआ.. मैंने तो अभी तक एटीएम इस्तेमाल भी नहीं किया है.. औऱ उसमे इतना सारा पैसा है की मेरे इस्तेमाल करने से ख़त्म भी नहीं होगा...
पिंकी - तो ग़ुगु.. फिर क्या बात है? औऱ तेरी आवाज इतनी रूखी क्यों है? तू उदास है?
गौतम - नहीं बुआ.. मैं ठीक हूँ..
पिंकी - सच सच बता बाबू.. मैं अभी तेरे पास आ जाउंगी.. मेरे ग़ुगु को कोई परेशानी है?
गौतम - ऐसा कुछ नहीं है बुआ.. बस आपसे बात करने का मन हो रह था.. इसलिए फ़ोन कर लिया..
पिंकी छेड़ते हुए - अच्छा? गन्दी बातें करनी है मेरी साथ? चुत लंड वाली? मुझे याद करके हिला तो नहीं रहा तू.. वीडियो कॉल कर मुझे दिखा जरा.. मेरा ग़ुगु कैसे नाम की मुट्ठी मार रहा है..
गौतम - बुआ यार.. क्या कुछ भी बोल रही हो आप? मैंने बस नोर्मल्ली बात करने के लिए फ़ोन किया था.. रहने दो..
पिंकी - अच्छा सॉरी बाबू.. बोल.. खाना खाया?
गौतम - हाँ.. आपने खा लिया?
पिंकी - मैंने भी खा लिया बाबू.. बार बार उल्टी हो रही पाता नहीं क्या हुआ है मुझे सुबह डॉक्टर के जाउंगी... अभी बस सोने की तैयारी में थी.. तू पास होता तो लिपटकर सोती..
गौतम - आप पास होती तो मैं सोने कहाँ देता बुआ आपको? रातभर जगा के रखता.. औऱ बहुत तंग करता.. वैसे उल्टी क्यों हो रही है? कुछ गलत तो नहीं खा लिया?
पिंकी - नहीं कुछ गलत नहीं खाया.. और ऐसे तंग होने के लिए तो मैं कब से मरी जा रही हूँ.. तू जीतना तंग करेगा मैं उतना प्यार करूंगी..
गौतम - बुआ कुछ बात करती थी आपसे..
पिंकी - बोल ना बाबू.. क्या बात है?
गौतम - गाँव के बारे में.. कल गाँव से दादी औऱ चाचा चाची आने वाले है..
पिंकी - तुझे किसने बताया..
गौतम - पापा ने.. मगर आज तक उनके बारे में मुझे किसी ने नहीं बताया.. ना आपने ना माँ ने.. ना पापा ने..
पिंकी - बाबू तेरी माँ ने मना किया था सबको.. औऱ वैसे भी क्या फर्क पड़ता है.. गाँव में अब बचा भी क्या है? जितना कुछ था वो तो ब्रजमोहन भईया ने अपने शोक पुरे करने में गवा दिया.. मानसी भाभी ने भी उन्हें नहीं रोका... ले दे के अब एक घर औऱ एक छोटा सा खेत बचा है.. तू सोचना छोड़ दे ग़ुगु उस बारे में..
गौतम - बुआ कुछ बताओ ना स्वभाव केसा है सबका?
पिंकी - मुझे भी कितने साल हो गए बाबू गाँव छोड़े हुए.. मैं क्या बताऊ.. इतने सालो में कुछ बदल गया हो तो..
गौतम - हम्म्म..
पिंकी - तू कल मिलके खुद ही जान लेना..
गौतम - माँ मिलने कहाँ देगी? वो तो कह रही है सुबह जल्दी घर से कहीं चले जाता ताकि वो लोग मुझसे मिल ना पाए.. माँ बहुत नाराज़ लगती है..
पिंकी - नाराज़ तो होगी ही ना.. उनका हक़ जो छीन लिया था औऱ तेरे पापा ने भाईचारा निभाते हुए सारा कुछ दे भी दिया..
गौतम - मुझे गाँव जाने की इच्छा हो रही है बुआ.. आप भी आओगी ना..
पिंकी - नहीं ग़ुगु.. वहा मेरा क्या काम.. मैं तो पहले ही बदनाम हूँ.. वहा ना जाने कैसी कैसी बातें होती है मेरे बारे में..
गौतम - बुआ...
पिंकी - क्या बाबू..
गौतम - गीली वाली चुम्मी चाहिए..
पिंकी हसते हुए - उम्म्महा.. ले खुश? इस बार आना बहुत सारी चुम्मी करूंगी मेरे बाबू को..
गौतम - जल्दी आऊंगा बुआ.. आप तो अब आदत बन चुकी हो..
पिंकी - अच्छा अब सोना है या रातभर बातें ही करनी है.. नींद भी जरुरत है ना बाबू..
गौतम - ठीक है बुआ सोता हूँ.. गुडनाइट..
पिंकी - गुडनाइट बाबू.. बुआ loves you...

गौतम - i love you too बुआ..
 
Update 47


सुबह के सात बज चुके थे औऱ जगमोहन बेड पर ओंधे मुंह पड़ा हुआ कराटे मार रहा था.. सुमन उठकर नहा चुकी थी औऱ चाय बनाकर गौतम के कमरे की तरफ बढ़ गई थी.. गौतम भी आज जल्दी ही उठ गया था औऱ नहा चूका था..
सुमन चाय बेड के ऊपर सिरहने रखती हुई - चाय पिले शहजादे..
गौतम बेड से उठकर सुमन का हाथ पकड़ते हुए - इस शहजादे को चाय नहीं तुम्हारी चुत चाहिए शहजादी..
सुमन मुस्कुराते हुए - शहजादी तो चुत देने के लिए कब से तैयार है पर सही मौका औऱ दस्तूर भी तो हो..
गौतम सुमन का हाथ चूमते हुए - इतना सब्र किया तो कुछ पल औऱ सही..
सुमन गौतम के बालो को हल्का सा इधर उधर करते हुए - अब चाय पीके जा यहां से.. वो लोग आने वाले ही होंगे..
गौतम सुमन को बाहों में भरके गाल पर चुम्बन करते हुए - जो हुकुम मेरी सहजादी..
सुमन वहा से बाहर आ जाती है औऱ गौतम चाय पीके अपनी बाइक उठाकर बाहर चला जाता है..


गोतम कहा है?
मुझे क्या पता? गया होगा अपने दोस्तों के पास..
सुमन तूने जानबूझकर उसे बाहर भेजा है ना..
मैं क्यों उसे भेजनें लगी? वो खुद ही अपनी मर्ज़ी से गया है..
जगमोहन चिढ़ते हुए - मैं भी कहा तुमसे बात करने बैठ गया.. चाय ला दो..
सुमन - बनाके रखी है छन्नी करके पिलो..
जगमोहन उठकर जाता है कमरे से बाहर निकलता है की दरवाजे पर दो औरत औऱ एक आदमी दिखाई देते है..
जगमोहन उन्हें देखकर - माँ..
जगमोहन की माँ हेमा - जग्गू...
बृजमोहन - जग्गू भईया..
जगमोहन - आओ अंदर आओ..
हेमा उस घर देखकर - घर तो बड़ा सुन्दर बनाया है तूने जग्गू?
जगमोहन - आओ ना माँ.. बैठो... अरे सुमन देखो.. माँ मानसी औऱ ब्रजमोहन आये है..
सुमन कमरे से बाहर आकर बेरुखी से देखते हुए..
मानसी - कैसी हो सुमन?
सुमन - जैसी 18 साल पहले थी..
हेमा - बहु हमारा गौतम कहा है? अब तो बहुत बड़ा हो गया होगा.. पिछली बार जब दो साल का था तब देखा था उसे.. उसके बाद तो उसे देखने को आँखे ही तरस गई..
सुमन - मेरा गौतम दोस्तों के साथ बाहर गया है..
मानसी - सुमन तुम गाँव क्यों नहीं आई इतने सालों में..
सुमन - वहां मेरे औऱ मेरे ग़ुगु के लिए अब बचा ही क्या है..
बृजमोहन - ऐसा क्यों कहती हो भाभी.. वहा आपका घर है..
सुमन - घर औऱ जमीने तो तुमने अपने भाई से छीनकर अपने पास रख ली थी याद है.. सुना है सारी जमीन साहूकार को बेच दी तुमने अपनी ऐयाशी पूरी करने के लिए..
हेमा - सुमन.. पुरानी बातों को भूल जाओ.. उनसे अब किसी का भला नहीं होने वाला.. बृजमोहन अब बदल चूका है..
सुमन - सब लुटा कर अब बदलने की क्या जरुरत.. घर औऱ खेत बाकी है उसे भी बेच देते..
जगमोहन - सुमन.. ऐसे बात करते है अपनी सास से.. इतने सालों बाद आये है.. जाओ चाय औऱ नाश्ता बना दो.. सबके लिए..
सुमन बिना कुछ बोले रसोई में चली जाती है औऱ चाय बनाने लगती है..
उसके साथ ही मानसी भी सुमन के पीछे पीछे रसोई में चली जाती है..
जगमोहन बृजमोहन औऱ हेमा के साथ हॉल में लगे बड़े से सोफे पर बैठ जाता है औऱ बातें करने लगता है..
मानसी - सुमन.. लाओ मैं चाय बना देती हूँ.
सुमन - रहने दो मानसी.. मेहमान हो.. मैं बना लुंगी..
मानसी - इतनी भी क्या नाराज़गी सुमन.. मैं कोई पराई तो नहीं हूँ..
सुमन - अपनी भी कहा थी तुम मानसी..
मानसी - मैं जानती हूँ सुमन तुम गुस्सा हो हमसे पर मेरी बस में ना ही कल कुछ था ना ही आज कुछ है..
सुमन - साफ साफ कहो मानसी.. यहां क्यों आई हो?
मानसी - अपने जमाई को लेने..
सुमन - कोनसा जमाई? वो रिश्ता वही तोड़ के मैं यहां आई थी..
मानसी - तुम्हारे मेरे तोड़ने से रिश्ते नहीं टूटते सुमन.. गाँव में पंचायत के लोगों के सामने वो रिश्ता बना था.. बात तय हुई थी..
सुमन - बच्चों की शादी को सरकार भी शादी नहीं मानती मानसी..
मानसी - मगर पंचायत मानती है.. औऱ तुम जानती हो हमारे यहां ये फैसले कितने कड़ाई से निभाये जाते है..
सुमन - निभाए जाते होंगे.. मगर अब नहीं.. मैं मेरे ग़ुगु को हरगिज़ उस गाँव में नहीं जाने दूंगी..
मानसी - जाना तो उसे पड़ेगा सुमन.. कुसुम अब 18 साल की दहलीज़ को लांघ चुकी है.. उसे गौतम को अपनाना ही होगा..
सुमन - ऐसा नहीं होगा मानसी.. गौतम उसी से शादी करेगा जिससे उसका मन होगा..
मानसी - पर उसकी शादी हो चुकी है सुमन.. याद है तुम्हींने मेरी कुसुम को गोद में उठाकर कहा था ये ग़ुगु की दुल्हन बनेगी.. तुम्हारी मर्ज़ी शामिल थी उसमे..
सुमन - तब तक बटवारा नहीं हुआ था मानसी.. मुझे अगर पता होता कि तुम मेरे साथ ऐसा करोगे तो कभी वो सब नहीं करती..
मानसी - मैंने तुम्हारे साथ कभी कुछ गलत नहीं किया सुमन.. तुम जानती हो मेरा दिल साफ है.. अब मैं अपनी बेटी के लिए उसके पति को माँगने आई हूँ.. गाँव आकर गौतम कुसुम को पंचायत के सामने अपना कर अपने साथ रख ले बस.. मैं औऱ कुछ नहीं चाहती..
सुमन - ऐसा नहीं होगा मानसी.. गौतम को भूल जाओ.. कुसुम के लिए कोई औऱ लड़का देख लो..
मानसी - एक बार जिस लड़की का विवाह हो जाता है उसका किसी औऱ के साथ विवाह नहीं करवाया जाता.. अगर गौतम खुद गाँव आकर कुसुम को अपना नहीं बनाता तो मैं पंचायत में गौतम के खिलाफ गुहार लगा दूंगी.. औऱ तुम जानती हो पंचायत के नियम कितने कड़े है..
सुमन - तुम्हे जो करना है करो मानसी.. मेरा गौतम उस गाँव में नहीं जाएगा..
मानसी - उसे आना पड़ेगा सुमन.. वरना पंचायत ने जगन के साथ जो किया था तुम अच्छे से जानती हो.. तुम्हारी ज़िद कहीं सब ख़त्म ना कर दे..
सुमन - धमकी दे रही हो..
मानसी - नहीं.. भीख मांग रही हूँ.. अपनी कुसुम के लिए तुम्हारे गौतम की.. मेरी बात मान जाओ सुमन.. मैंने कुसुम को बहुत सभालके पाला पोसा है.. वो गौतम का अच्छे से ख्याल रखेगी.. औऱ तुम्हे भी कोई शिकायत का मौका नहीं देगी.
सुमन - चाय बन गई है.. लो.. लेजाकर दे दो..
मानसी अपने पर्स में से एक तस्वीर निकालकर सुमन के सामने रख देती है औऱ चाय की ट्रे उठाकर रसोई से बाहर आ जाती है औऱ सबको चाय दे देती है.. सुमन की नज़र तस्वीर पर पडती है औऱ वो कुसुम की तस्वीर को देखने लगती है.. सुमन कुसुम को देखने लगती है और मन ही मन वो भी कुसुम को गौतम के लिए सही मानते हुए दोनों का बंधन होने की बात सोचने लगती है..

************

सलामपुर गाँव में खेतो को पार करके जंगल के मुहाने पर कटीली झाड़ियों के पीछे दो सहेलियां पानी का मग्गा लेके टट्टी करने बैठी थी..
अरे कुसुम.. सुना आज तेरे मम्मी पापा तेरे दूल्हे से मिलने गए है.. कहीं झुमरी के दूल्हे की तरह तेरा दूल्हा भी काला कलूटा औऱ भद्दा निकला तो.. तू चाँद सी चितवन काया वाली औऱ वो अँधेरी काली रात..
कुसुम - नहीं.. मीना.. ऐसा मत बोल.. मैं मर ही जाउंगी अगर ऐसा हुआ तो.. दादी ने बताया था वो बचपन में बहुत प्यारे लगते थे.. अब भी शायद वैसे ही हो..
मीना - अच्छा.. औऱ फुलवा की जैसे शराबी औऱ जुवारी निकला तो..
कुसुम - तू औऱ कुछ नहीं बोल सकती क्या.. मेरी तो टट्टी भी बंद हो गई तेरी बातें सुनकर..
मीना हसते हुए - अरे तो मुझसे कह दे.. तेरी गांड में ऊँगली डालकर निकाल देती हूँ टट्टी..
कुसुम शरमाते हुए मग्गे से पानी हाथ में लेकर गांड धोती हुई - हट बेशर्म.. चल अब..
मीना भी गांड धोती हुई - हाय कैसे शर्माती है तू.. जब तेरा दूल्हा पटक पटक के चोदेगा ना तब सारी शर्म निकल जाएगी.. मेरे वक़्त तो तू भी बड़ा बोलती थी.. अब अपना वक़्त आया तो कैसे चुप है..
कुसुम खेत की पगदंडी से मीना के साथ वापस घर आती हुई - चुदाई में दर्द होता होगा ना मीना..
मीना - पहले पहल होता है फिर मज़ा आता है.. मन करता है बस चुदवाते ही रहो.. देख चुदाई की बात करके तेरे चुचक कैसे खड़े हो गए.. मिलन की रातों में जब तेरे ये नुकिले चुचक तीर की तरह तेरे दूल्हे के सीने में चुभेगे तो उसे मज़ा ही आ जाएगा..
कुसुम शरमाते हुए - धत..
मीना कुसुम के चुचे अचानक से मसलकर - शर्मा क्यों रही है सहेली.. अब तेरे खेत में हल चलाने वाला जल्दी ही आने वाला है.. तेरी छोटी सी चुत को वो बड़ा कर देगा..
कुसुम मुस्कुराते हुए - घर आ गया.. तू भी जा...

**************


पता नहीं आज ये फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा..
रहने दो भईया.. आप तो उसे कल गाँव लेकर आ जाना.. कुसुम औऱ गौतम की रित निभाना है.. फिर जल्द ही दोनों का बंधन भी करवा देंगे..
मानसी - हाँ.. मेरा बहुत मन था गौतम को देखने का.. मगर आज नहीं तो कल सही.. जब वो गाँव आएगा तब देख लुंगी..
हेमा - अब चलना चाहिए.. कुसुम अकेली है.. शाम से पहले वापस पहुंचना है..
जगमोहन - माँ आप रुकिए मैं टेक्सी बुलवा देता हूँ..
सुमन - रहने दीजिये.. मैंने फ़ोन कर दिया था.. गौतम आने वाला होगा वही बस स्टेण्ड तक छोड़ आएगा..
मानसी ख़ुशी से - ये कितनी अच्छी बात है सुमन.. मतलब आज मैं अपने जमाई को देख सकती हूँ..

गौतम बाहर बाइक खड़ी करके अंदर आता है तो उसे देखकर हेमा मानसी औऱ बृजमोहन अपनी जगह से खड़े हो जाते है औऱ मानसी सुमन को देखकर कहती है..
मानसी - सुमन ये हमारा गौतम है ना?
सुमन - मानसी ये मेरा गौतम है..
मानसी सुमन की बात सुनकर आगे बढ़ती है औऱ गौतम को अपने गले से लगाकर - कितने प्यारा औऱ चाँद सा मुखड़ा है.. बिलकुल कोई शहजादा लगने लगा है.. माँ देखो ना..
हेमा आगे बढ़कर गौतम के चेहरे को चूमती हुई - हाँ सुमन.. मेरे पोते के जैसा सुन्दर और प्यारा तो कोई दूसरा ना होगा..
मानसी तस्वीर लेते हुए - अब तक हमसे छुपा के रखा था सुमन ने.. मगर आज देखो..
हेमा - बेटा मैं तेरी दादी..
गौतम पैर छूता है..
हेमा गले से लगाते हुए - अरे रहने दे ये सब.. तू तो मेरा अपना है.. तेरी माँ ने कब से तुझे हमसे छुपा के रखा था.. आज मिला है..
सुमन - ग़ुगु.. दादी औऱ चाचा चाची को बस स्टैंड तक छोड़ आ जरा..
गौतम सुमन की बात सुनकर उन सबको कार में बैठा कर बस स्टेण्ड छोड़कर आ जाता है.. तब तक जगमोहन घर से जा चूका था..


**************

मानसी - कुसुम.. कुसुम.. कहा गई ये लड़की?
कुसुम - माँ सहेली के पास गई थी.. कुछ काम था..
मानसी - कल रीत का सारा सामान तूने रख लिया है ना..
कुसुम - जी..
मानसी - ठीक है.. कल समय से तैयार रहना.. किसी सहेली के यहां ना चले जाना..
कुसुम - माँ..
मानसी - बोल..
कुसुम - वो माँ आप..
मानसी मुस्कुराते हुए - क्या बोल ना..
कुसुम - नहीं.. कुछ नहीं..
मानसी - तेरे दूल्हे से मिली या नहीं यही पूछना चाहती है ना मेरी लाडो..
कुसुम शरमाते हुए - माँ..
मानसी - तस्वीर देखेगी अपने होने वाले दूल्हे की?
कुसुम शरमाते हुए कुछ नहीं बोलती और चुपचाप खड़ी रहती है..
मानसी छेड़ते हुए - नहीं देखनी तो तेरी मर्ज़ी.. मुझे क्या
कुसुम - आप तस्वीर लेके आई हो..
मानसी कुसुम से मसखरी करते हुए - हाँ.. पर क्या फ़ायदा? ना शकल अच्छी है ना रंग अच्छा है गौतम का.. शहर में बिलकुल बेरंग हो गया है.. मुंह भी बांका है.. बोलता है तो लगता है दाँत ही गिर पड़ेंगे.. मैंने तो कहा ये रिश्ता तोड़ देते है पर तेरे पापा नहीं माने.. मेरी वैसे भी कहा चलती है..
कुसुम फ़िक्र से - इतना बुरी सूरत है..
हेमा आते हुए - अरे क्यों छेड़ती है कुसुम को.. देख कैसे चेहरा उतर गया है बेचारी का.. कुसुम ले ये देख तेरे दूल्हे की तस्वीर.. है ना चाँद का टुकड़ा..
कुसुम फ़ोन में तस्वीर देखकर देखती रह जाती है और ख़ुशी से शरमाते हुए अपना चेहरा अपने दोनों हाथों से छुपा कर खड़ी हो जाती है..
मानसी - अरे शर्मा रही है.. माँ जी लगता है गौतम पसंद नहीं आया कुसुम को.. शादी के लिए मना कर देंते है..
कुसुम एक दम से - मैंने ऐसा कब कहा?
मानसी और हेमा एक साथ हँसते है..
कुसुम फ़ोन लेकर अपने कमरे में भाग जाती है और गौतम की तस्वीर देखती हुई उसे अपनी आँखों में बसाने लगती है.. कुसुम के मन में बहुत से ख्याल आ जा रहे थे जिनसे खुश होते और सोचके शरमाते हुए कुसुम गौतम की तस्वीर को अकेले में अपने होंठों से चुम के बार बार उसके साथ शादी होने और प्यार करने के सपने अपनी खुली आँखों से देख रही थी..
कुसुम के मन की सारी चिंता और फ़िक्र निकल चुकी थी जिसके जगह प्यार उमंग और भविष्य की सम्भावनाओं ने ले लिया था.. कुसुम बार बार गौतम की तस्वीर को कभी अपने सीने से लगाती तो कभी चूमती.. उसने अपने फ़ोन के स्क्रीन पर भी गौतम की तस्वीर लगा दी और सोचने लगी की वो गौतम को अपनी पलकों पर सजा कर रखेगी उसे बहुत खुश रखेगी और प्यार करेगी..

**************

क्या हुआ माँ? क्या कह रहे थे वो लोग?
सुमन कुसुम की तस्वीर गौतम को देकर - कल हम गाँव जाने वाले है.. रित निभाने..
गौतम बिना तस्वीर देखे - क्या रित? कोनसी रित औऱ ये तस्वीर किसकी है?
सुमन - ये तेरी दुल्हन की तस्वीर है ग़ुगु..
गौतम बिना तस्वीर देखे रखते हुए - मैं कोई शादी नहीं करने वाला..
सुमन - तेरी शादी हो चुकी है.. जब तू 2 साल का था..
गौतम - क्या बकवास कर रही हो माँ.. मेरी साथ फालतू मज़ाक़ करने की कोशिश भी मत करना.
सुमन - ये मज़ाक़ नहीं है ग़ुगु.. कुसुम तेरे चाचा चाची की एकलौती बेटी है..
गौतम - चाचा चाची की? पर हमारे यहां कजिन मेर्रिज कहा होती है?
सुमन - होती है.. तेरे पापा से पूछना बाकी बातें.. मुझे बहुत काम है..
गौतम - काम गया माँ चुदाने.. ये हो क्या रहा है? साफ साफ बताओगी?
सुमन - ग़ुगु जैसे साउथ इंडिया में कजिन मैरिज होती है वैसे ही हमारे गाँव औऱ आस पास के गाँव में भी होती है.. तेरे पापा जिस समाज से है वो लोग सकड़ो साल पहले साउथ इंडिया आकर यहां बसे थे.. बचपन में मैंने तेरी औऱ कुसुम की शादी करवा दी थी मगर फिर बटवारे में विवाद के कारण मैं तुझे गाँव से लेकर यहां आ गई.. अब हमें वापस जाना होगा औऱ तुझे कुसुम के साथ रित निभाकर उसके साथ बंधन करना होगा..
गौतम - मैं कुछ नहीं करने वाला.. औऱ उस शादी को मना कर दो..
सुमन - नहीं कर सकते ग़ुगु.. अगर हमने मना किया तो मानसी पंचयात में चली जायेगी फिर पंचायत हमारे खिलाफ फैसला कर देगी.. जैसे सालों पहले जगन के साथ किया.. शादी तोड़ने के अपराध में उसे जान देनी पड़ी थी..
गौतम - अब वक़्त बदल चूका है माँ.. क़ानून से काम होता है..
सुमन - पंचायत का क़ानून ही सबकुछ है वहा गौतम. वो लोग नियम के मामले में बहुत कठोर है.. तुझे कल चलना ही होगा..
गौतम - तुम चाहती हो मैं वहा जाऊ औऱ कुसुम के साथ रीत निभाऊ उसे अपनी पत्नी बनाऊ?
सुमन - हाँ.. मैं चाहती हूँ..
गौतम - तो ठीक है मैं कल जाऊँगा.. लेकिन आज तुमको वो सब करना होगा जो मैं कहूंगा..
सुमन अपनी साडी का पल्लू गिराते हुए - मैं तैयार हूँ गौतम..
गौतम सुमन साडी खोलने से रोकता हुआ - यहां नहीं सुमन..
सुमन - तो?
गौतम सुमन को अपने साथ घर से लेकर कहीं बाहर चला जाता है...
 
Update 48

जंगल के खंडर के जिस कमरे में गौतम औऱ सुमन ने हरिया औऱ मंजू को चुदाई करते हुए देखा था वहां अब हलकी सी सफाई कि जा चुकी थी.. एक खाट किसी ने लाकर रख दी थी जिसपर एक रुई का गद्दा भी पड़ा था औऱ साथ में एक फोल्डबल टेबल भी साइड में थी जिस पर शराब की एक बोतल सिगरेट के पैकेट लाइटर औऱ पानी की बोतल रखी हुई थी..

ये सब आज सुबह गौतम ने ही इस कमरे में रखे थे औऱ अब वो अपनी माँ को भी अपने साथ लेकर खंडर के बाहर आ चूका था औऱ गौतम सुमन का हाथ पकड़ कर उसे खंडर के अंदर ले आया.. सुमन को डर लग रहा था मगर गौतम के साथ में होने से उसका डर काफूर भी हो रहा था.. गौतम ने सुमन को अपनी गोद में उठा लिया औऱ सीढ़ियों से खंडर के ऊपरी मंज़िल पर आ पंहुचा..

सुमन के मन में इस वक्त अजीब अजीब ख्याल चल रहे थे और उसके बदन में सुरसुरी कौंध रही थी.. सुमन का दिल जोरो से धड़क रहा था और आने वाले पलों की कल्पना करके काम वासना के भाव से भरी जा रही थी.. सुमन की आंखों के सामने गौतम का चेहरा था जिसे वह बड़ी प्यार से देख रही थी और अपने हाथ से उसके प्यारे मुख को सहला भी रही थी..

सुमन को पता नहीं था कि गौतम के मन में क्या चल रहा है.. गौतम आज किसी भी कीमत पर सुमन को पा लेना चाहता था और इस नियत से वह सुमन को अपनी गोद में उठा खंडर के इस कमरे पर आ रहा था जहाँ उसने सारी तैयारी कर रही थी.. गौतम ने अपने सुहाग दिन को मनाने के लिए पूरा प्रबंध किया हुआ था..

गौतम ने सुमन को लाकर कमरे में बिछी उसी खत पर पटक दिया औऱ शराब कि बोतल खोलकर सुमन औऱ खुद के लिए एक एक पेग बना दिया..
गौतम पेग देते हुए - लो माँ..
सुमन पेग लेकर - यहां इस खंडर में करोगे अपनी ख्वाहिश पूरी?
गौतम पेग पीकर अपने लिए दूसरा पेग बनाते हुए - यहां तु खुलकर चीख-चिल्ला सकती है सुमन.. तेरी आवाजे सुनकर यहां कोई नहीं आएगा.. औऱ तु मुझसे बचकर कहीं भाग भी नहीं पाओगी..
सुमन पेग पीते हुए - मैं क्यों भागने लगी भला.. मैं भी अब तेरे साथ हर हद पार करना चाहती हूँ..
गौतम दूसरा पेग ख़त्म करके एक सिगरेट सुलगा लेता है औऱ सुमन अपना पहला पेग ख़त्म कर देती है.. गौतम सुमन के करीब खाट पर बैठ कर अपना एक हाथ सुमन के गले में डालकर उसका चुचा पकड़कर मसलते हुए सिगरेट के कश लेता हुआ कहता है..
गौतम - एक बात सच सच बतायेगी सुमन?
सुमन गौतम से सिगरेट लेकर कश मारती हुई - पूछ ना मेरी जान.. जो तुझे पूछना है.. आज तेरी माँ नहीं शर्माने वाली.. मेरे चुचे 34 कमर 28 गांड 36 है..
गौतम सुमन के निप्पल्स मरोड़ता हुआ - मेरा असली बाप कौन है?
Divyanka-Boob-Sucked
सुमन सिसकती हुई - आह्ह.. गौतम.. ये तू केसा सवाल कर रहा है.. जगमोहन तेरा बाप है..
गौतम सुमन से सिगरेट लेकर कश मारता हुआ वापस सुमन के चुचे पर उभरा हुआ चुचक मसल देता है औऱ बोलता है - सुमन मै मज़ाक़ नहीं कर रहा.. सच सच बता.. मेरा असली बाप कौन है?
सुमन दर्द से - अह्ह्ह्ह.. ग़ुगु मरोड़ मत मेरी निप्पल्स.. औऱ तू अचानक कैसी बात कर रहा है.. औऱ क्या बेतुका सवाल पूछ रहा है...
गौतम सिगरेट का कश लेकर सिगरेट फर्श पर फेंककर अपने जूते से बुझा देता है औऱ सुमन को धक्का देकर खाट पर पीठ के बल लिटाता हुआ उसके ऊपर चढ़कर उसके बालो को अपनी मुट्ठी में भींचकर पकड़ते हुए कहता है - मुझे चुतिया समझा है माँ तूने? चुपचाप मुझे मेरे असली बाप का नाम बता दे.. वरना आज चोदने के बाद तुझे हमेशा के लिए अकेला छोड़ जाऊँगा..

सुमन हैरानी परेशानी औऱ फ़िक्र से भरी हुई - ग़ुगु तू क्या बोले जा रहा है बेटा.. तू जो बोले रहा है मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा..
गौतम गुस्से में एक जोरदार तमाचा सुमन के गाल पर मार देता है औऱ कहता है - अब समझ आया तुझे रंडी? बंद कर अपना ये संस्कारी बनने का ढोंग.. मुझे पता चल गया तू कितनी बड़ी रांड रह चुकी है..
सुमन अपने गाल पर हाथ लगा कर - बेटा.. मैं सच कह रही हूँ तेरा बाप जगमोहन ही है..
गौतम हलके नशे में थोड़ा पीछे होता है औऱ सुमन की साडी का पल्लू हटाकर सुमने के चुचो पर अपने दोनों हाथ रखकर ब्लाउज को कस के पकड़ता है औऱ इतना जोर से खींचता है कि सुमन कि छाती पर से उसका ब्लाउज एक बार में फटकार अलग हो जाता है औऱ साथ में ब्रा भी उतर जाती है..

गौतम सुमन के दोनों चुचो को अपने दोनों हाथों के पंजो में पकड़कर दबा दबा के मसलते हुए - अब तो सच बोल दे रंडी.. मैं जान गया हूँ जगमोहन मेरा बाप नहीं है औऱ ना ही वो किसी औऱ का बाप बन सकता है.. ना ही कभी बन सकता था.. वो शुरु से बाप बनने के काबिल नहीं था.
a8e18b90bc527afb694612121023ea11
सुमन गोतम को हैरानी से देखती हुई सिसक कर - गौतम तुझे कैसे..
गौतम सुमन के तनकर खड़े हुई चुचक को मुंह में लेकर चूसता हुआ - मुझे कैसे पता? तू यही सोच रही है ना सुमन.. आज मुझे बहुत कुछ पता चला है तेरे बारे में.. अब मुझे सच सच बता कौन है मेरा असली बाप?
909f3d524e7177486d2399eb0724ab32
सुमन गोतम के चेहरे को पकड़कर उसके होंठ पर अपने होंठ रखते हुए चूमती हुई - छोड़ ना गौतम.. अब क्या फर्क पड़ता है.. सालों पहले की बात है..
गौतम सुमन में बाल पकड़कर उसके होंठों को अपने होंठों से अलग करता हुआ उसकी आँखों में देखकर कहता है - फर्क पड़ता है माँ.. तू शादी से पहले जिस जिस के नीचे लेटी है मुझे उनसे कोई मतलब नहीं है.. बस तू इतना बता दे उनमे से मेरा बाप कौन था?
सुमन गौतम के हाथों से अपने बाल छुड़ाकर वापस उसके होंठों पर टूट पडती है औऱ गौतम को चूमती हुई कहती है - उन सब बातों का अब क्या फ़ायदा मेरे शहजादे.. देख तेरी माँ आज तुझे पूरी तरफ से अपनाने को तैयार है.. कर ले अपने मन कि हर ख्वाहिश पूरी बेटा.. होजा मेरे साथ एक जिस्म दो जान..
61hhsmi9oxp61
गौतम फिर से सुमन के होंठों से अपने होंठ हटाते हुए - मुझे जानना है माँ.. कि कौन था वो जिसने तेरी टाँगे चौड़ी करके तेरी चुत में लंड घुसाकार अपना माल तेरी चुत में झाड़ा जिसके करण तूने मुझे अपनी चुत से निकला..
सुमन अपनी साडी निकालकर पटीकोट का नाड़ा खोलती हुई - गौतम तू कैसी बातें लेकर बैठ गया.. आज तेरा औऱ मेरा पहला मिलन है.. देख तेरी माँ ने तेरे लिए आज अपनी चुत के सारे बाल शेव करके चुत को कितना चिकना कर दिया है...
images
गौतम सुमन के मुंह पर थूक देता है औऱ कहता है - हट माँ.. अगर तू मुझे उस आदमी का नाम नहीं बतायेगी तो तुझे चोदने से अच्छा है मैं कोठे पर कोई रंडी चोद लु..
सुमन गौतम का थूक चेहरे से साफ करके मुंह में भर लेटी है औऱ गटकते हुए गौतम का शर्ट खोलती हुई कहती है - मुझे कोठे की रांड समझकर ही चोद ले ग़ुगु.. मैं कोनसी कुछ कह रही हूँ.. तू तो फालतू की ज़िद पकड़ कर बैठ गया.. अब इतने साल बाद क्या मतलब इन बातों का..
गौतम शर्टलेस होकर उठकर कमरे की खिड़की से बाहर जंगल की तरफ देखने लगता है औऱ सुमन से कहता - मुझे मेरे असली बाप का नाम तक नहीं पता औऱ तू कहती है मैं फालतू की ज़िद पकड़ कर बैठा हूँ..
सुमन टेबल पर रखी शराब की बोतल से एक पेग बनती है औऱ पेग के साथ सिगरेट लाइटर हाथ में लेकर गौतम के पास आती है.. - नाम जानने से क्या हो जाएगा गौतम.. हम अब तक जैसे जी रहे थे वैसे ही जी सकते है ना.. तू कब से मेरे पीछे पडा था.. अब जब मैं तैयार हूँ तो तू ऐसे कर रहा है.. ये कहते हुए सुमन ने पेग गौतम के हाथ में दे दिया औऱ उसके होंठों पर एक सिगरेट लगाकर जलाते हुए अपने घुटने पर आ बैठी.. सुमन गौतम की जीन्स का हुक खोलकर उसके लंड को चूमने लगी..
गौतम सिगरेट का कश लेकर पेग पिने लगा औऱ फिर अपने आगे घुटनो पर बैठकर अपने लंड ओर चुम्मिया बरसाती हुई होनी माँ सुमन को देखता हुआ बोला - मैं तुझे औऱ कुछ नहीं कहूंगा सुमन.. तू बस मुझे इतना बता दे की मैं किसके लंड की पैदाईश हूँ?
सुमन लंड पर चुम्मियो की बरसात करने के बाद लंड को मुंह में भरती हुई - आज क्या हुआ है तेरे लंड को गौतम? इतनी चुम्मिया करने औऱ हिलाने के बाद भी खड़ा नहीं हो रहा..
गौतम पेग ख़त्म करके गिलास एक तरफ रख देता है औऱ सिगरेट का लम्बा कश खींचकर सुमन के बाल पकड़कर उसे खड़ा करके उसके मुंह पर सिगरेट का धुआँ छोड़ते हुए कहता है - जब तक इसे अपने बाप का नाम नहीं पता चलता ये खड़ा नहीं होने वाला.. समझी सुमन.. अब बता कौन है मेरा बाप? क्या वो बाबा मेरा असली बाप है जिसके पास जाकर तू कुछ ना कुछ मांगती रहती है..
सुमन हिचकती हुई - गौतम.. बाबाजी के साथ मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा..
गौतम सिगरेट का कश लेकर सिगरेट खिड़की से बाहर फेंक देता है औऱ सुमन की चुत को अपनी मुट्ठी में पकड़कर मसलते हुए कहता है - रिश्ता कैसे नहीं रहा? उसने तुझे नंगा नहीं किया था रातों में? तेरी इस चुत में लंड तो उसका भी जा चूका है.. मैं जान चूका हूँ की बच्चे की मन्नत लेकर आई हर औरत को बाबाजी औऱ उसका साथी किशोर रात रात भर होने बिस्तर में चोदते है.. तुझे भी चोदा होगा ना वहा किसीने जब तू बच्चे की मन्नत लेकर वहा गई थी..

सुमन सिसकियाँ लेती हुई गौतम को बाहों में भरकर उसे चूमती हुई - नहीं मेरे शहजादे.. अह्ह्ह्ह... मैं तेरी कसम खाती हूँ.. मैं उस पहाड़ी पर बाबाजी के बिस्तर में नंगी जरुर हुई थी मगर वक़्त रहते मैंने अपना इरादा बदल लिया था औऱ मैं बीना चुदे ही वहा से वापस आ गई थी..

गौतम सुमन को चूमता हुआ खाट में आ जाता है औऱ उसके चुचो का मर्दन करता हुआ कहता है - वहा नहीं चुदी तो कय हुआ माँ? संजय मामा ने तो तुझे शादी के बाद भी बहुत बार चोदा था.. क्या मैं उसकी चुदाई से पैदा हुआ हूँ?
सुमन गौतम का लंड पकड़कर अपनी चुत पर रगडती हुई - नहीं बेटा.. तेरे मामा ने मेरी शादी के बाद कभी मेरी चुत में अपना माल नहीं झाड़ा.. तू तेरे मामा का बेटा नहीं है ग़ुगु..
11864061 m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-3-Xilovl-XDj-lw-PRR-42127621b
गौतम सुमन के चुचो को दांतो से खींचता हुआ चूसता है औऱ सुमन की आँखों में देखकर कहता है - तो क्या मैं तेरे उस पुराने आशिक विजय का बेटा हूँ, जो तुझे सिनेमा दिखाने के बाद अपने दोस्त कमल की पंचर की दूकान में लेजाकर चोदता था.. जिससे तू अब इतने सालों बाद फिर से इंस्टा पर बात करने लगी है..
सुमन गौतम का लंड चुत पर रगढ़ते हुए चौंककर - गौतम तुझे कैसे पता मैं इंस्टा चलाती हूँ औऱ विजय से बात करने लगी हूँ?

गौतम सुमन की गर्दन चाटता हुआ - पूराना अकाउंट डिलीट करके नया बना लेने से तुझे क्या लगा.. मुझे आता नहीं चलेगा.. शर्मीली सुमन नाम से अकाउंट बनाया है ना तूने नया.. उसपर अपनी चिकनी कमर की फोटो डालने से तुझे क्या लगा मुझे पता नहीं चलेगा? माँ.. तेरी कमर के तिल ने मुझे बता दिया कि ये तेरा अकाउंट है.. मैंने तेरे फ़ोन में इंस्टा के पास देखकर अपने फ़ोन में तेरा अकाउंट खोला था सुबह.. औऱ जिस जिस से तूने जो जो बात कि है सब पढ़ ली..
सुमन शर्माते हुए - गौतम तूने ऐसा क्यों किया.. मुझे शर्मिंदा करने से तुझे क्या मिल जाएगा.. मैं तेरी सगी माँ हूँ क्या ये तेरे लिए काफी नहीं?
31879671
गौतम सुमन की टाँगे चौड़ी करके उसके चुत के दाने को चूमकर होंठों से खींचता हुआ - मुझे बस अपने बाप का नाम जानना है सुमन.. अगर तू मुझे उसका असली नाम बता देगी तो मैं वादा करता हूँ.. मैं अपने ईस लंड की छत्रछाया मैं तुझे हमेशा सुखी रखूँगा.. बता सुमन कौन है मेरा असली बाप? क्या वो विजय का दोस्त कमल है? जो विजय के चोदने के बाद तेरी चुदाई करता था..
सुमन गौतम का सर पकड़कर अपनी चुत में घुसाती हुई - नहीं.. गौतम.. वो ना विजय है ना कमल..
गौतम जोर जोर से सुमन की चुत चाटता हुआ - तो बता ना रंडी.. वो कौन है? कौन है मेरा असली बाप?
सुमन का बदन अकड़ने लगता है औऱ वो गौतम के मुंह में झड़ते हुए एक नाम लेती है - वो तेरे चाचा है गौतम.. बृजमोहन..
b0c7225267413b433f83df295178793c
गौतम के मुंह पर सुमन की चुत से जबरदस्त पिचकारी की धार निकलकर पडती है औऱ गौतम का सारा मुंह सुमन के पानी से भीग जाता है..
सुमन झड़ने के बाद तेज़ तेज़ सांस लेती हुई सिसकियाँ लेकर - वो तेरा चाचा है गौतम.. तेरा चाचा ही तेरा असली बाप है..
गौतम सुमन की चड्डी से अपना चेहरा साथ करता हुआ - बृजमोहन..
सुमन शरमाते हुए पछतावे से - हाँ गौतम हां.. बृजमोहन.. वही है तेरा असली बाप..
गौतम खाट से खड़ा होकर पानी की बोतल से पानी पीते हुए सुमन को देखकर - मुझे सारी बात बता माँ.. उसने कब औऱ कैसे क्या क्या किया तेरे साथ...
सुमन - वो सब जानकर तू क्या करेगा बेटा.. रहने दे उन बातों को..
गौतम वापस खाट पाकर सुमन की टाँगे चौड़ी करके चुत के छेद लड़ लंड टिका कर दबाव बनाते हुए - मुझे सब जानना है माँ.. तेरे साथ उसने कब कब औऱ क्या क्या किया है..
सुमन गौतम के लंड को चुत के अंदर लेने के लिए पकड़ लेती है चुत में घुसाने लगती है जिसमे उसे बहुत दर्द भी होने लगा था
सुमन सिसकियाँ लेती हुई - बता दूंगी बेटा.. सबकुछ बता दूंगी.. अब तुझसे छीपा कर करुँगी भी क्या?

फूलों का लेप लगाने से सुमन की चुत सिकुड़ चुकी थी और उसे गौतम का मोटा लंड लेने में बहुत तकलीफ होने लगी थी सुमन अभी तक केवल लंड का टोपा ही अपनी चुत में घुसा पाई थी कि उसकी आहे निकलने लगी वो तेज़ सिसकियाँ लेने लगी और किसी कुंवारी की तरह मचलने लगी..
सुमन को समझ नहीं आ रहा था कि अचानक उसे यह क्या हुआ है और वह कैसे इतनी सिकुड़ी हुई चुत की मालकिन बन गई है.. गौतम ने अपनी पूरी कोशिश और दबाव डालते हुए सुमन की सिकुड़ चुकी चुत में अपने लंड को टोपे से थोड़ा आगे औऱ प्रवेश करवा दिया औऱ सुमन के चेहरे पर आते कामुकता औऱ दर्द से भरपुर भावो को देखने लगा.. जिसमे उसे अद्भुत आनंद आ रहा था.. गौतम सोच रहा था ईसी योनि से सालों पहले दो बच्चे निकल चुके हैं लेकिन अभी यह योनि कितनी टाइट है और लेप लगाने के बाद कितनी सिकुड़ चुकी है..

सुमन सिसकियाँ भरती हुई - आराम से गौतम बहुत दर्द हो रहा है.. पता नहीं कैसे इतनी सिकुड़ गई..पता नहीं कैसे तेरे इतने बड़े लंड को अंदर ले पाऊँगी..
गौतम सुमन को देखता हुआ - माँ मुझे माफ़ कर दो..
सुमन - क्यों बेटा.. तूने कोनसी गलती कर दी जो तू माफी मांग रहा है.. सारी गलती तो मेरी है..
गौतम - गलती की नहीं माँ.. करने वाला हूँ..
सुमन - कैसी गलती गौतम..
34D8F51
गौतम ने एक हाथ सुमन की गर्दन के नीचे लेजाकर उसका कन्धा पकड़ लिया औऱ दूसरे हाथ से सुमन की गांड औऱ पूरी ताकत से एक धमाकेदार झटके के साथ अपने लंड को सुमन की चुत के अंदर पूरा जड़ तक घुसेड़ दिया जिससे सुमन की चुत में गौतम का पूरा लंड घुस गया औऱ खून की कुछ बुँदे चुत से निकल कर बह गई.. इसीके साथ सुमन के गले से इतनी जोर से चीखे निकली की खंडर से दूर दूर तक हवा में उसकी आवाज सुनाई दे जा रही थी.. गौतम के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी औऱ सुमन के चेहरे पर दर्द शिकायत औऱ रहम की उम्मीद करती आँखों के साथ दया के भाव.

सुमन गुस्से औऱ दर्द से चिल्लाते हुए गौतम के गाल पर थप्पड़ मारती हुई - गौतम मादरचोद..
गौतम सुमन के दोनों हाथ पकड़कर सुमन के होंठों पर अपने होंठ रखकर उसका मुंह बंद करता हुआ - सुमन बेटाचोद..

51ec9d132c437a6575030689ecd5d073
सुमन की चुत में गौतम का लंड बच्चेदानी तक घुसा हुआ था औऱ उसके दोनों हाथ गौतम ने अपने हाथों से पकड़कर सर के ऊपर कर दिए थे.. उसके होंठों पर भी गौतम ने अपने होंठ चिपका दिए थे.. सुमन की आँखों से आंसू की बुँदे निकल कर बह रही थी.. गौतम सुमन की आँखों में रहम औऱ शिकवे के उठते भाव देख सकता था..

गौतम अब प्यार से सुमन के होंठ चूमने लगा था औऱ मगर फिर भी सुमन गौतम का साथ नहीं दे रही थी औऱ गौतम के होंठो की क़ैद से बार बार अपना मुंह इधर उधर घुमाकर अपने होंठों को रिहा करवा रही थी.
गोतम अपनी माँ की इस हरकत पर मुस्कुराते हुए उसे देख कर बार बार उसके होंठों को अपने होंठों में भरकर चुमने की कोशिश कर रहा था औऱ बार बार सुमन गौतम के होंठों से अपने होंठ छुड़वा रही थी.. सुमन जब मुंह घूमती तो गौतम उसके गाल औऱ गर्दन पर चुम लेटा औऱ प्यार से जीभ निकालकर चाट लेटा..

सुमन को अब इस छेदखानी में हल्का मीठा सा मज़ा आने लगा था औऱ उसकी चुत में घुसा हुआ गौतम का शैतानी लड उसे पहले की तुलना में कम दर्द दे रहा था.. 10-15 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा औऱ गौतम सुमन के होंठों के बीच की जंग जारी रही जिसमे बार बार गौतम को सुमन से हार का सामना करना पड़ रहा था.
अब गौतम मुस्कुराते हुए सुमन को देखकर उसे छेड़े जारहा था जिससे सुमन को भी अच्छा लगने लगा था..
गौतमप्यार से - इतने नखरे? लगता है मेरी माँ को बहुत गुस्सा आ रहा है मेरी ऊपर..
सुमन गौतम की बात पर अपने हाथ गौतम के हाथों से छुड़वा कर गौतम के चेहरे को पकड़ लेती है औऱ गौतम के होंठों को अपने होंठों में भरके चूमती हुई दांतो से इतना जोर से काटती है की गौतम की आह्ह निकल जाती है औऱ वो दर्द से चीख उठता है औऱ कहता है..
गौतम - तेरी माँ को चोदू.. खा जायेगी क्या? दर्द होता है ना..

सुमन वापस गौतम के होंठ चूमते हुए - सिर्फ तुझे ही दर्द होता है क्या.. रंडी की औलाद.. एक झटके में इतना बड़ा लंड घुसाया है मेरे दर्द नहीं होता क्या? मेरी चुत से खून निकाल दिया तूने..
गौतम चुत से निकला हुआ खून जो गौतम औऱ सुमन की कटी हुई साफ झांटो पर लंड औऱ चुत के मिलन के आसपास चिपचिप कर रहा था, उसे ऊँगली में लगाकर सुमन के मांग में भर देता है औऱ कहता है - इसी खून से मैं तेरी मांग भर रहा हूँ माँ.. आज से तू मेरी हुई.. मुझे ख़ुशी है मेरी दुल्हन कुंवारी निकली.. आज से तेरी चुत पर सिर्फ मेरा हक़ है सुमन..

सुमन का दर्द अब बहुत कम हो चूका था औऱ मीठा मीठा अहसास हुए होने लगा था.. पिछले 20 मिनट से गौतम का लंड उसकी चुत में पूरा घुसा हुआ था औऱ गौतम उसके ऊपर लेटा हुआ था..
सुमन गौतम होंठ दांतो से खींचकर चूमती हुई अपना मगलसूत्र उतारकर उसे देती हुई - मांग तो भर दी तूने मेरी शहजादे.. मगलसूत्र भी पहना दे..
गौतम मगलसूत्र पहनाता हुआ - शादी मुबारक हो माँ..
सुमन - अब बेटा.. इस हालत में मैं तेरे पैर छूकर तेरा आशीर्वाद कैसे लूँ?
गौतम - चुदाई के बाद पैर छू लेना माँ.. मैं नहीं रोकूंगा.. अब बताओ मुझे वो सब कुछ.. जो तेरे औऱ चाचा के बीच हुआ था.. एक भी बात मुझसे मत छुपाना..
सुमन - मेरी चुत में लंड घुसा के तू मुझसे मेरी चुदाई की कहानी सुनेगा? मुझे शर्म आएगी बेटा..
गौतम सुमन के निप्पल्स से छेड़खानी करता हुआ - पति पत्नी में शर्म अच्छी बात नहीं है माँ.. जो हुआ था वो साफ साफ औऱ खुलके कहो.. मैं सुनने को बेताब हूँ..
सुमन - एक पेग पीके बताती हूँ.. एक बार निकाल ले..
गौतम खाट से थोड़ा दूर रखी टेबल को हाथ बढाकर अपने करीब खींचता है औऱ सुमन से कहता है - लंड नहीं निकलेगा माँ.. पेग मैं यही से बना देता हूँ..
गौतम पेग बनाकर सुमन को पीला देता है.. सुमन पेग पीके एक सिगरेट अपने होंठों पर लगा लेती है औऱ लाइटर से सुलगाते हुए पहला लम्बा कश लेकर धुआँ छोड़ते हुए कहती है..
सुमन - तो सुन मेरे शहजादे.. मैं आज तुझे वो बात बता देती हूँ जो अबतक किसी को नहीं पता.. तेरे चाचा बृजमोहन को भी नहीं..
गौतम - क्या? चाचा को भी नहीं पता मतलब?
सुमन - हाँ गौतम.. तेरे चाचा भी नहीं जामते कि तू उनका बेटा है..
गौतम - ये कैसे मुमकिन है माँ.. चाचा को भी नहीं पता कि मैं उनका बेटा हूँ..
सुमन - हुआ ही कुछ ऐसा था गौतम.. पता नहीं इसमें किसका दोष था..
गौतम - मुझे साफ साफ पूरी कहानी शुरुआत से बताओ माँ.. क्या हुआ था?

सुमन सिगरेट का अगला कश लेकर - बात तेरे पैदा होने से 9 महीने पहले की है जब मेरी शादी को 3 साल हो चुके थे औऱ मुझे कोई बच्चा नहीं हुआ था.. सब मुझे बाँझ समझने लगे थे मगर मैं जानती थी कि कमी मुझमे नहीं है क्युकी ऋतू भी मेरी ही कोख से जन्मी थी.. लेकिन फिर भी मैं सबकी बातें सुनकर बाबाजी के पास एक औलाद की मन्नत लेकर आने लगी.. औऱ हर तरह एक बच्चा पैदा करने के जतन करने लगी.. फिर एक दिन वो हुआ जिसकी मुझे उम्मीद नहीं थी..

सवान के बाद भादो ने गाँव की उस धरती को बारिश की तेज़ तर्रार बूंदो से सराबोर कर रखा था शाम के वक़्त की बात थी जब जगमोहन तेरे दादा के साथ खेत की जुताई के लिए खाद लेने गया था औऱ बारिश का पानी भर जाने से आने जाने वाला रास्ता पानी के भराव से बंद हो चूका था औऱ जगमोहन तेरे दादाजी के साथ वही फंस गया था.. तेरी दादी पड़ोस के गाँव में तेरी दादी हेमा की मुंह बोली बहन माला के यहां उसके बेटे के लगन में गयी थी औऱ वो भी बारिश के करण वही फंस गई थी.. मानसी की तबियत खराब थी और वो गलती से मेरे कमरे में आकर सो गई थी..
मौसम की बरसात, ठंडी बहती हवा औऱ जोबन का बाईसवा साल.. मेरा अंग अंग नई तरंग से भरकर मुझे कामोतेजना में खींच रहा थ.. मैं उस वक़्त मेरे शरीर की आग बुझाना चाहती थी.. शाम से रात का समय हो चला था अमावस की रात में घर के कई कोनो में मैंने दिए जला के रख दिए थे.. लाइट का कोई नामो निशान नहीं था. मैं तेरे चाचा बृजमोहन के कमरे में दिया रखने गई थी कि तभी बाहर से मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी औऱ मैं इससे पहले की पीछे देख पाती किसीने मुझे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया. मेरी हाथ से दिया नीचे गिरकर बुझ गया था औऱ अब कमरे में अंधेरा ही अंधेरा था.. अमावस की उस काली रात में अन्धकार इस तरह फैला हुआ था जैसे दिल्ली की हवाओ में ज़हर...

मैं शराब की आती बू से समझ गई थी की ये ब्रिजमोहन ही है.. उसने मुझे सीधा बिस्तर पर लिटा दिया औऱ मेरी साडी ऊपर करके पीछे से उसने सीधा लंड मेरी चुत में डाल दिया औऱ कुछ देर चोदा.. वो नशे में धुत मुझे मानसी समझकर मुझे चोदे जा रहा था औऱ मैं काम भावना से भरी हुई चुपचाप उससे चुदे जारही थी.. मैं झड़ गई थी औऱ कुछ पलों में वो भी झड़ गया था.. नशे की हालत में बृजमोहन पूरी तरह उतर हुआ था औऱ मुझे चोदने के बाद वो बिस्तर पर ही उल्टा मुंह करके सो गया था.. उसे अँधेरे में ये भी नहीं दिखा कि जिसे वो मानसी समझ रहा था वो मानसी नहीं थी..
चुदने के बाद मैं वहा से बाहर आ गयी जब मौसम ठीक हुआ औऱ तेरे दादा दादी औऱ जगमोहन घर आये तो सब कुछ पहले की तरह ही था.. दिन बीतने लगे औऱ कुछ समय बाद मुझे एक दिन पता चला कि मैं पेट से हूँ.. फिर तू पैदा हुआ औऱ उसके 2 साल बाद कुसुम.. कुसुम के पैदा होने के छः महीने बाद ही हमने मीलकर तेरी औऱ कुसुम कि शादी करवा दी.. मगर फिर बटवारे का विवाद खड़ा हो गया औऱ हमें यहां आना पड़ा..
सुमन आखिरी कश लेकर मुंह से धुआँ छोड़ती हुई - बस गौतम.. यही सब हुआ था..

गौतम सुमन की गांड पकड़कर बिना लंड चुत से निकाले सुमन को खाट के बीच में लाते हुए - टाँगे चौड़ी कर ले माँ.. मैं शुरु कर रहा हूँ..
सुमन टाँगे फैलाती हुई - धीरे धीरे करना बेटा.. अभी भी दर्द बाकी है..
गौतम लंड को आधा बाहर निकालकर वापस अंदर डाल देता है औऱ अब ऐसे ही सुमन को चोदने लगता है..
गौतम चोदते हुए - आज किसी रहम की उम्मीद मत कर मुझसे सुमन..
सुमन खुलकर मादक सिसकियाँ भरती हुई - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.... अह्ह्ह्ह... गौतम.. आह्ह.. अह्ह्ह्ह... बेटा धीरे... अह्ह्ह्ह... गौतम... अह्ह्ह्ह अह्ह्ह.. आराम से बेटा.. अह्ह्ह्ह.. दर्द हो रहा है.. अह्ह्ह्ह... गौतम... अह्ह्ह्ह... bbc-porn-gif-46
दिन के तीन बजे का समय था जब गौतम ने सुमन को खंडर के उस कमरे में चोदना शुरु किया औऱ खाट पर लेटाकर मिशनरी में सुमन की चुत की खुदाई शुरु कर दी.. गौतम पुरे जोश में धक्के पर धक्के मारता हूँ सुमन को चोद रहा था औऱ सुमन गौतम का लंड झेलती हुई किसी कुत्तिया की तरह उसके सीने में अपने नाख़ून गड़ाकर दहाड़े मार मार चिल्ला रही थी औऱ गौतम से आराम से चोदने की गुहार लगा रही थी मगर गौतम अपनी माँ को ऐसे चोद रहा जैसे वो कोई बाज़ारू रांड हो.. गौतम के मन कोई पछतावा औऱ दुख नहीं था वो आज सुमन की चुत पर अपने लंड की सील लगा देना चाहता था औऱ उसके लिए पूरी जोशओखरोश से सुमन को चोद रहा था..
मिशनरी पोज़ में गौतम के मारे हर एक झटके पर सुमन ऊपर से नीचे तक पत्ते की तरफ फड़फड़ाती हुई हिल रही थी औऱ चीखते हुए आह्ह कर रही थी....
गौतम चोदते हुए - औऱ जोर से चिल्ला माँ.. यहां तेरी कोई नहीं सुनने वाला..
सुमन चिल्लाते हुए - आराम से गौतम.. अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह... माँ हूँ तेरी.. अह्ह्ह्ह... धीरे... आराम से..
External-Link-porn-by-pornaddictposts
गौतम सुमकी दोनों टांग अपने कंधे पर रखकर चुत में ताबड़तोड़ झटके मारते हुए - माँ के साथ दुल्हन भी तो है तू मेरी सुमन.. झटके तो ऐसे ही पड़ेगे तेरी चुत में मेरी जान.. जितना जोर से चिल्लाना है चिल्ला..
सुमन सिसकती हुई हाथ जोड़कर - अह्ह्ह्ह... गौतम.. भगवान के लिए.. आराम से बेटा.. मेरे वापस दर्द होने लगा है.. चुत में.. धीरे चोद मुझे.. धीरे चोद बेटा..
गौतम जब सुमन को हाथ जोड़ता देखता है तो वो सुमन के दोनों हाथ अपने हाथ में पकड़ लेता है औऱ जोर से पूरी रफ़्तार से झटके मारने लगता है जिससे सुमन कुतिया की तरह अह्ह्ह... अह्ह्ह.. करती हुई गला फाड़ फाड़ कर चिल्ला है.. औऱ गौतम को देखकर रोने जैसा मुंह बनाकर चुदती है..
सुमन - अब नहीं गौतम.. अब नहीं.. बहुत दर्द हो रहा है. अह्ह्ह्ह... छोड़ मुझे.. आराम से.. गौतम...
गौतम हाथ छोड़कर सुमन की चुत से लंड निकाल लेता है औऱ सुमन की गांड पकड़ कर उसे पलटकर खाट पर अपने आगे घोड़ी बना लेता है औऱ मजबूती से उसकी कमर थाम कर लंड वापस चुत में घुसा देता है जिससे वापस सुमन की आह्ह निकल जाती है.. इस बार चुत औऱ लंड के मिलन की मधुर आवाज से कमरा औऱ खंडर का कुछ हिस्सा गूंजने लगता है..
सुमन - अह्ह्ह.. गौतम.. अह्ह्ह्ह...
गौतम सुमन की कमर पकड़कर चुदाई के मीठे झटके मारता हुआ - अब मज़ा आ रहा है ना माँ? अब तो दर्द नहीं हो रहा ना तेरी चुत में?
सुमन घोड़ी बनी हुई - अह्ह्ह.. बेटा.. आह्ह... अह्ह्ह्ह.. गौतम आराम से... अह्ह्ह.. आराम से.. ऐसे ही.. धीरे धीरे... अह्ह्ह्ह...
गौतम - अब तो नहीं रोकेगी ना माँ मुझे अपनी इस चुत की सवारी करने से
79831-doggy-style doggystyle9891271
सुमन - नहीं ग़ुगु... तू ऐसे ही प्यार से करता रह बेटा.. बहुत मज़ा आ रहा है.. सालों बाद आ जाकर मुझे ठंडक मिल रही है.. अह्ह्ह्ह...
गौतम सुमन के बाल अपनी मुट्ठी में भींचकर पीछे से झटके मारते हुए - बहुतो को चोदा माँ.. पर तेरे जैसी कोई नहीं.. परफेक्ट अरेबियन घोड़ी है तू.. तेरी सवारी करने में लंड को मज़ा आ रहा है..
सुमन - ऐसे ही चोद अपनी माँ को घोड़ी बनाके गौतम.. आह्ह.. चोद मुझे..
गौतम सुमन की बात सुनकर चोदने की स्पीड बढ़ा देता है औऱ रफ़्तार से सुमन की चुत मारने लगरा है..
सुमन - अह्ह्ह.. गौतम.. आराम से दर्द हो रहा है आह्ह.. बेटा.. धीरे...
गौतम सुमन की बात नहीं सुनता औऱ झटके मारता हुआ सुमन के बाल खींचकर मज़े से उसकी चुदाई करता है औऱ सुमन अह्ह्ह करती हुई जोर से चिल्लाने लगती है..
सुमन - गौतम दर्द हो रहा है... आह्ह... धीरे कर.. अह्ह्ह.. आराम से कर गौतम...
गौतम सुमन के बाल छोड़कर उसकी कमर में हाथ डालकर आगे से उसका पेट पकड़ लेता है औऱ उसे अपने ऊपर लेते हुए खुद खाट पर पीठ के बल लेट जाता है औऱ सुमन की चुत में नीचे से धक्के पर धक्के मारते हुए उसकी चुत के दाने को रगडकर मसलने लगता है..
सुमन पूरी कामुकता की नदी में बहती हुई - अह्ह्ह्ह.. बेटा.. उम्म्म्म... अह्ह्ह्ह.... ऐसे ही... अह्ह्ह्ह... चोद गौतम.. उम्म्म्म... अह्ह्ह्ह... उह्ह....
गौतम - मज़ा आ रहा है ना माँ?
सुमन - बहुत मज़ा आ रहा है बेटा.. ऐसे ही चोद अपनी माँ..
645vxe
गौतम सुमन के चुचे पर हाथ रखते हुए - माँ तेरे चुचे कितने तेज़ हिल रहे है..
सुमन - मेरे कहा है बेटा. अब सब तेरा है.. मेरा चुचा मेरी चुत औऱ मैं.. सब.. तेरी है...
गौतम रफ़्तार से झटके मारते हुए चुत के दाने को ऊँगली से तेज़ रगढ़ता है औऱ सुमन को चोदता है..
सुमन मादकता भरी सिस्कारी लेती हुई झड़ जाती है औऱ साथ में तेज़ तेज़ धार निकाल कर चुत से मूत भी देती है जिसमे गौतम का हाथ मूत से गिला हो जाता है औऱ उसका लंड बाहर निकल जाता है..

गौतम का लंड अब भी तनकर योद्धा की तरह खड़ा था औऱ सुमन झड़कर गोतम के सीने के ऊपर से हटकर खाट से उतरती हुई खड़ी होने की कोशिश में लड़खड़ा कर फर्श पर गिर जाती है औऱ खाट पकड़कर वापस खड़ी होने की कोशिश करने लगती है मगर बहुत जोर लगाने पर भी हिलती हुई टांगो से खड़ी होकर काँपती हुई खाट पर वापस बैठ जाती है.. चुदाई में लगी मेहनत औऱ बहे पसीने से शराब का नशा उतरकर पूरा हल्का हो चूका था..
सुमन गौतम को देखती हुई शिकायत भरी आवाज में - प्यार से भी तो कर सकता है तू..
गौतम शराब के दो लार्ज़ पेग बनाकर एक पेग सुमन को देदेता है औऱ दूसरा खुद पिने लगता है.. शराब का पेग ख़त्म होने के बाद गौतम फिर से सुमन को पकड़ लेटा है औऱ खड़ा होते हुए खाट से उतरकर सुमन को अपने आगे झुका लेता औऱ चुत में लंड घुसाकर हलके झटके मारता हुआ उसे चोदता हुआ खिड़की के पास ले आता है जहा से बाहर जंगल का नज़ारा दिख रहा था.. सुमन होने दोनों हाथ खींडकी की दिवार पर रख देती है औऱ पीछे से गौतम सुमन को वापस चोदने लगता है..
doggystyle9042569 fucked-from-behind-while-standing-001
सुमन - एक घंटा हो गया गौतम.. तूने मुझे चोद चोद कर थका दिया.. तेरा कब निकलेगा? अब तक मैं 2 बार झड़ चुकी हूँ.. तू कब झडेगा बेटा..
गौतम पीछे से झटके मारते हुए - इतनी भी क्या जल्दी है माँ.. कितना इंतजार किया है तेरी चुत का.. बहुत सब्र किया है मैंने.. चोदने दे आराम से मुझे...
सुमन - एक ही बार में चोद चोद कर मेरी चुत को ढीली कर देगा क्या?
गौतम सुमन को दोनों हाथ पकड़ कर लंड के झटके मारते हुए - ढीली हो गई तो टाइट करनी मुझे आती माँ.. तू चिंता मत कर.. मेरे लंड को तेरी चुत का नशा हो गया है.. अब ये किसी की बात नहीं सुनने वाला..
सुमन - अह्ह्ह्ह गौतम.. आराम से... अह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ.. देख सामने पेड़ पर बन्दर हमें कैसे देख रहा है.. अह्ह्ह्ह...
गौतम सुमन को चोदते हुए बन्दर से चिल्लाकर कहता है - क्या देख रहा है साले.. माँ है मेरी... है ना सेक्सी? बिलकुल सनी लियॉन जैसी... देख साले मेरी माँ के चुचे पर ये टैटू.. है ना मस्त..
सुमन चुदते हुए हलकी सी हस्ती हुई - गौतम.. पागल हो गया क्या तू? बन्दर से क्या बात कर रहा है..
गौतम रफ़्तार में आता हुआ - जो तू सुन रही है माँ..
सुमन - अह्ह्ह्ह... आराम से गौतम.. दर्द होता है जब तू रफ़्तार से चोदता है.
गौतम सुमन के बाल खींचकर - आदत डाल ले माँ...
सुमन - अह्ह्ह.. रंडी की औलाद... धीरे.. आराम से..
गौतम सुमन को अपनी तरफ पलटकर गोद में उठाकर चोदता हुआ - तुझे रोज़ सपनो में इसी तरह गोद में उठा उठाके चोदता था माँ.. अब जाकर हुई है मेरी ख्वाहिश पूरी..
Gif-sexo-sentada-92
सुमन अपने दोनों हाथ गौतम के गले में डालकर नीचे से गौतम के झटके खाती हुई - पहली बार ऐसा मज़ा आ रहा है बेटा... अह्ह्ह.. मैं तो फिर से झड़ने वाली लगती हूँ.. अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ.. अह्ह्ह...
गौतम - पसंद आया ना माँ तुझे मेरा लंड?
सुमन - मैं तो दिवानी हो गई बेटा.. तेरे लंड की.. अब तो तुझे हरदम खुश रखूंगी.. अह्ह्ह्ह... गौतम.. आई love you.. मेरे शहजादे...
गौतम - आई love you too मेरी शहजादी...
सुमन - अह्ह्ह.. गौतम मेरा होने वाला है वापस...
गौतम सुमन को खाट पर पटककर चोदता हुआ - बस माँ.. मैं भी झड़ने वाला हूँ.. आज तेरी चुत को मैं अपने वीर्य से इतना भर दूंगा कि नो महीने बाड़ तू मेरा बच्चा पैदा करेगी..
सुमन - भर दे मेरे शहजादे.. डाल दे होना माल होनी माँ की चुत में.. झड़ जा..
गौतम गाना गाता हुआ - माँ तेरी जांघो का पसीना बन गया तेल चमेली का.. ओ माँ तेरी जांघो का पसीना बन गया तेल चमेली का..
सुमन चुदवाते हुये हस्ती हुई गाती है - बेटा चोद दे अपनी माँ को खाके गुड़ बरेली का.. ओ बेटा चोद दे अपनी माँ को खाके गुड़ बरेली का..
गौतम - माँ तेरी मोटी मोटी गांड तू रांड बन जा कोठा पे.. ओ माँ तेरी मोटी मोटी गांड तू रांड बन जा कोठा पे..
सुमन - बेटा रांड भी बन जाउंगी तू आजा चोदने कोठे पे.. ओ बेटा रांड भी बन जाउंगी तू आजा चोदने कोठे पे..
गौतम चुत में लंड धीरे धीरे हिलता हुआ - माँ तू मत दबवाये बोबा ब्लाउज हो जाएगा टाइट रे.. ओ माँ तू मत दबवाये बोबा ब्लाउज हो जाएगा टाइट रे..
सुमन झड़ते हुए - बेटा तू मुंह लगा के चूस दे बोबा कर दे ढीला रे.. ओ बेटा तू मुंह लगा के चूस दे बोबा कर दे ढीला रे..
गौतम झड़ते हुए - माँ तेरी चुत में लंड घुसाते ही निकली पिचकारी की धार.. ओ माँ तेरी चुत में लंड घुसाते ही निकली पिचकारी की धार..
सुमन गौतम के होंठ पकड़कर चूमती हुई - चोद के अपनी माँ को तू खुश है ना मेरी यार..
गौतम सुमन की चुत में लंड डाल के लेटा हुआ - बहुत खुश माँ..


दिन के पांच बज चुके थे.. गौतम औऱ सुमन अब खाट पर एक साथ ऊपर नीचे लेटे हुए एकदूसरे को देख रहे थे..
सुमन - शाम होने वाली है गौतम.. अब घर ले चल मुझे..
गौतम - इतनी जल्दी क्या है माँ.. अभी वक़्त है..
सुमन - खंडर है बेटा.. कोई आ गया तो अनर्थ हो जाएगा..
गौतम - कुछ नहीं होगा माँ.. कोई नहीं आने वाला.. औऱ ये बार बार अपनी चुत को कपडे से ढकना बंद कर.. खुला छोड़ दे इसे..
सुमन चुत सहलाती हुई - कितनी बेरहमी से चोदा है तूने मेरी चुत को.. फूलकर लाल हो गई है बेचारी.. मैं तेरी कितनी परवाह करती हूँ मगर तुझे जरा भी तरस नहीं आता मुझपर...
गौतम शराब डालकर पेग बनाते हुए - आता है पर क्या करू माँ.. तेरे बदन का नशा ऐसा है कि बहक जाता हूँ..
सुमन सिगरेट उठाकर सुलगाती हुई कश लेकर - अभी तो तूने मुझे डेढ़ घंटा चोदा है औऱ वापस तेरा लंड खड़ा हो गया..
गौतम पेग पीकर सुमन के होंठों पर लगी सिगरेट का एक कश लेकर सिगरेट फेंक देता है औऱ सुमन की टांग फिर से चौड़ी करके लंड घुसाने लगता है...-
सुमन अजीब ओ गरीब हाव भाव चेहरे पर लाकर - गौतम अब नहीं.. बहुत दर्द होगा.. अब नहीं.. दुखेगा.. बेटा... अह्ह्ह्ह... गौतम.. अह्ह्ह्ह..
गौतम लंड घुसाके चोदना शुरु करते हुए - उफ्फ्फ माँ तेरा ये नखरा.. कहीं मेरी जान ही ना लेले..
6556251-vaginal-porn-gif-sex-393582-sm
सुमन - जान तो तू मेरी लेने पर तुला हुआ है.. मैंने हां क्या की तूने तो रंडी ही समझ लिया.. कैसे नॉनस्टॉप चोदे जा रहा है...
गौतम सुमन की कमर में एक हाथ डालकर उसे गोद में उठा लेता है औऱ खाट से खड़ा होता हुआ शराब की आधी खाली बोतल को दुसरे हाथ में उठाकर सुमन को लंड पर उछालकर चोदता हुआ शराब के घूंट लगाते हुए खंडर के उस कमरे से बाहर आ जाता है औऱ सीढ़ियों से ऊपर छत की ओर चला जाता है.. जहा खुले आसमान के नीचे गौतम नंगा अपनी नंगी माँ को अपने लंड पर उछाल उछाल कर चोदता हुआ शराब की बोतल से शराब के घूंट लगाता है..

E3DC11D m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-3-ZGj-Wx-S4-Vl-U-Y2c-M-9563562b
सुमन गौतम लंड पर उछलते हुए - अह्ह्ह्ह.. हे भगवान.. अह्ह्ह... उफ्फ्फ.. केसा बेटा पैदा किया है मैने.. मुझे रंडियो की तरह खुले में लंड पर उछालते हुए चोदकर शराब पी रहा है..
गौतम सुमन के सर पर बोतल से शराब ढ़ोलता हुआ बोतल खाली कर देता है ओर कहता है - माँ तूने मर्द पैदा किया है.. मर्द...
सुमन लंड पर उछलती हुई - हाँ हां.. अह्ह्ह.. मान गई तू मर्द है.. अह्ह्ह्ह.. अब चल यहां से..
hot-001-1
गौतम खाली बोतल फेंक कर सुमन को लंड पर से नीचे उतार देता है मगर सुमन खड़ी भी नहीं हो पाती ओर गौतम का सहारा लेकर नीचे बैठने लगती है मगर गौतम सुमन को पलट कर अपने आगे झुका लेटा है ओर सुमन की गांड के चुत पर थूक लगा कर अपने लंड सेट करते हुए कहता है..
गौतम नशे में - आखिरी बार गांड कब मरवाई थी तूने?
सुमन अपनी गांड पर लंड महसूस करके गौतम को गांड चोदने से रोकने ही वाली होती है की गौतम उसकी कमर पकड़कर गांड के छेद में थूक लगाकर लंड का इतना जोरदार झटका देता है की लंड आधा गांड में घुस जाता है ओर सुमन पूरी ताकत से चिल्लाती है - गौतम मादरचोद...
सुमन की चीख सुनकर गौतम हसते हुए गांड में धक्के पर धक्का देकर चोदते हुए चिल्लाता है - सुमन बेटाचोद...

image-1-1160
सुमन गांड मरवाते हुए - गौतम मेरी गांड के साथ खिलवाड़ मत कर...
गौतम नशे में - खिलवाड़ कहा कररहा हूँ माँ.. मैं चोद रहा हूँ.. गांड भी एक नम्बर है तेरी तो.. अह्ह्ह..
सुमन पूरी आवाज के साथ चिल्लाती हुई सिसकियाँ लेकर - अह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह.. गौतम.. नहीं.. अह्ह्ह.. गौतम.. छोड़ दे मेरी गांड..
गौतम - चोद के छोड़ दूंगा माँ.. क्यों परेशान हो रही हो..
सुमन - बहुत दर्द हो रहा है बेटा..
गौतम गांड में झेटके पे झेटके मारता हुआ - माँ तू मेरी लिए नहीं सह सकती थोड़ा दर्द..
सुमन गांड मरवाती हुई - तू बहुत बड़ा मादरचोद है गौतम..
गौतम गांड मारता हुआ - तूने ही तो मादरचोद बनाया है माँ.. अब तुझे तेरा ये मादरचोद मुबारक हो..
anal6 gifcandy-anal-242
शाम के छः बजने वाले थे ओर खंडर की छत ओपर गौतम सुमन की अच्छे से गांड मारके उसे लंड चूसा रहा था..
सुमन लंड चुस्ती हुई - कब निकलेगा तेरा.. चुत ओर गांड के बाद अब मुंह भी दुखने लगा है.... मुझे अब डर भी लगने लगा है यहां..
गौतम - डरने की क्या बात है सुमन? तेरा बेटा है ना तेरे साथ.. तू बस मेरी लंड की सेवा कर बाकी सब भूल जा...
tumblr-mdroqj-Pb-PY1rqnws4o1-500 FA68AA4 tumblr-me2bpyyk-Bv1raz5ilo1-500
सुमन लंड को गले तक लेकर जोर जोर से चुस्ती हुई गौतम को देखती है ओर उसके आंड भी हाथ से सहलाती है जिससे गौतम झड़ने के मूंड में आ जाता है ओर सुमन के मुंह से अपना लंड निकलकर हिलाते हुए सुमन के मुंह पर अपने वीर्य की धार मार कर झड़ जाता है..

अपनी माँ के मुंह पर लंड से वीर्य के गाढ़ी पिचकारी की धार मारने के बाद गौतम थोड़ा ठंडा हुआ ओर उसने सुमन की एक चूची पकड़कर उसे खड़ा करते हुए अपने कंधे पर उठा लिया और खंडर की छत से नशे में झूलते हुए कदमो की साथ वापस उसी कक्ष में आ गया जहा चुदाई का शुभारम्भ हुआ था..
गौतम ने सुमन को खाट पर पटक दिया और सुमन खाट पर आते ही आस पास बिखरे अपने कपड़ो को समेटकर बिना खाट से उतरे एक तरफ करने लगी..
गौतम नशे में चूर था उसने अपना लंड अपने हाथ में थाम लिया और खाट पर बैठकर कपडे समेटती हुई अपनी माँ की मुंह पर लंड से निशाना लगाकर मूतना शुरु कर दिया..
गौतम की मूत की धार सीधी सुमन की माथे की बिंदिया पर पड़ी फिर उसके चेहरे की बाकी हिस्सों पर.. सुमन ने जब देखा की उसका बेटा एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर उसके ऊपर मूत रहा है वो कपड़ो को एक गिला होने की डर से एक तरफ रख देती है और अपने चेहरे से होकर अपने बदन पर पडती मूत की धार को अनदेखा करके आगे बढ़ते हुए अपने हाथ से गौतम का लंड पकड़ कर झट से अपने मुंह में भर लेती है और उसका मूत पिने लगती है...

blowjob-gif-18 blowjob-gif-44
गौतम अपनी माँ की मुंह में मूत देता है और सुमन उसका मूत आसानी पी जाती है और पिने की बाद उसके लंड को साफ करके उसे कपडे देते हुए पहनने को कहती है और खुद भी पहनने लगती है..

सुमन फ़िक्र से - तूने ब्लाउज फाड़ दिया अब क्या पहनू मैं?
गौतम नशे में - आजकल ब्लाउज के साथ साड़ी नहीं पहनते माँ.. ब्रा के साथ पहनते है.

गौतम जीन्स शर्ट पहनकर सुमन की पास खाट पर बैठ जाता है और सुमन खाट पर घुटने की बल खड़ी हुई साडी बाँधने लगती है खड़े होने पर उसके पैर काँप रहे थे और चलने में उसे दर्द महसूस हो रहा था सुमन बार बार गौतम को शिकायत भरी नज़रो से देख रही थी और गौतम नशे की सुरूर में अपनी ही दुनिया में खोया था उसे जो सुकून और संतुष्ट सुमन ने आज दे दी थी उसका परिणाम था की गौतम को अब और किसी की याद नहीं आ रही थी..

सुमन खाट से उतरकर चलने को हुई तो लड़खड़ा गई और गौतम की तरफ गिरते हुए उसे पकड़ लिया गौतम समझ चूका था कि सुमन अब कुछ दिनों तक ठीक से चल नहीं पाएगी उसने सुमन को अपनी गोद में उठा लिया और खंडर से बाहर कार में लाकर बैठा दिया.. एक पल की लिए उसे लगा कि कोई उसे देख रहा है मगर जब उसने पीछे देखा तो वहा कोई नहीं था.. गौतम भी सुमन के साथ कार में बैठ गया और अंधेरा होते होते दोनों खंडर से निकल कर घर की लिए चल दिये..

सुमन की चुत और गांड में भले ही दर्द अब तक हो रहा था मगर उसके दिल में एक सुकून और संतुस्टी से घुला हुआ मीठा मीठा अहसास भी था वो गौतम को देखकर मुस्कुराते जा रही थी अब उसे गौतम में बेटे के साथ साथ अपने हवस मिटाकर प्यार देने वाला मर्द भी नज़र आ रहा था..
गौतम ने कार चलाते हुए बार बार रोककर रास्ते में कई बार उल्टिया की हाईवे पर पहुंचते पहुंचते उसका नशा कम हो चूका था गौतम ने सुमन की साथ एक शिकंजी वाले की पास गाडी रोककर 2-3 गलास निम्बू पानी भी पिया जिससे उसका नशा शहर में पहुंचते पहुंचते बिलकुल हल्का हो चूका था...
सुमन ने चुत देकर गौतम का दिल चुरा लिया था वो रास्ते में जहा भी चाट पकोड़ी की दूकान देखती गौतम से कहकर गाडी रुकवाती और बिना गाडी से उतरे मज़े ले लेकर चाट खाती.. सुमन ने साड़ी से बदन इस तरह ढक लिया था कि किसीको उसके ब्लाउज न पहने का पता नहीं चल सकता था.. Cरास्ते में दोनों ने सुमन की पसंद की अलग अलग चाट खाई और एक दूसरे की साथ प्यार भरी बातें करते हुए खाना एन्जॉय किया..
 
Update 49


घर पहुंचते पहुंचते दोनों को रात के 10 बज गए.. गौतम सुमन को गोद में उठा कर घर के अंदर ले गया और दरवाजा बंद कर दिया.. सुमन ने खुदको गौतम की गोद से नीचे उतरवाकर दिवार का सहारा लेती हुई बाथरूम की अंदर जा घुसी.. गौतम भी दूसरे बाथरूम में नहाने चला गया..

काफी देर तक गौतम शावर के ठन्डे पानी की नीचे खड़ा रहा और धीरे धीरे ब्रश करके नहा कर बाहर निकला उसके होंठों पर मुस्कान शाम से ही सजी हुई थी जो अब भी थी.. वो मुस्कुराते हुए ख्यालो में खोया हुआ प्रेम गीत गुन गुना रहा था और जब वो नहा कर बाथरूम से निकला और अपने बाल तौलिये से पोछ कर एक टीशर्ट और लोअर में कमरे से बाहर निकला तो उसने देखा की सुमन रसोई में चाय बना रही थी..

गौतम अपनी माँ को पीछे से बाहों में जकड़ लिया और पीछे से सुमन की गर्दन और गाल चूमता हुआ बोला..
गौतम - चाय की साथ चुत भी चाहिए माँ..
सुमन अपने आप को छुड़वाते हुआ - पेट नहीं भरा क्या तेरा अबतक? दर्द हो रहा है.. लाल होके सुजी पड़ी है पूरी.. अब तो कुछ दिन भूल ही जा मेरी चुत को..
गौतम चुत पर हाथ रखकर प्यार से सहलाते हुए - ज्यादा दर्द हो रहा है?
सुमन - मेरे दर्द से तुझे क्या? केसा जालिम बना हुआ था.. मैं चीख रही थी और तू बस मुझे चोदे जा रहा था.. जरा भी तरस नहीं आया तुझे अपनी माँ पर..
गौतम सुमन को अपनी तरफ पलटकर - गलती हो गई माँ.. माफ़ नहीं करेंगी तू अपने बेटे को?
सुमन - माफ़? खंडर की छत पर खुले आसमान के नीचे मुझे ऐसे लंड पर उछाल उछाल के चोद रहा था जैसे मैं तेरी माँ नहीं कोई रखैल हूँ.. मेरे ऊपर शराब गिरा दी मेरे ऊपर मूत दिया जैसे मैं कोई टके पर चुदाने वाली छिनाल हूँ.. बेशर्मी की सारी हद पार कर दी.. चुत और गांड में दर्द के साथ जलन हो रही है और अब वापस चोदना है शहजादे को..
गौतम सुमन के बंधे हुए बाल खोलकर - अच्छा ठीक है माँ.. पर तू ऐसे मुंह फुला के नाराज़ तो मत हो मुझसे..
गौतम जिस तरह से सुमन को देख रहा था उससे सुमन का दिल अब वापस जोरो से धड़कने लगा था और चुत में दर्द होने के बावजूद उसकी चुत में सरसरी मचने लगी थी और चुत गीली होने लगी थी.. मगर सुमन के लिए गौतम से ऐसी हालात में चुदना मतलब असहनीय दर्द को सहन करना था..

सुमन चाय छन्नी करती हुई - कैसे ना होउ नाराज़.. मेरे ही बेटे ने मेरी इज़्ज़त जो लूटी है आज..
गौतम - अब माँ भी तेरे जैसी पतली कमर और मोटी गांड वाली हो तो बेटा भी क्या करें? लंड तो उसके पास भी होता है..
सुमन चाय देते हुए - माँ सुन्दर हो तो क्या बेटे को चोद देना चाहिए?
गौतम पीते हुए - मैंने तो चोद दी मेरी माँ.. बाकियों का मुझे पता नहीं.
सुमन - चोद दी तो अब सो जा सुकून से.. अब क्यों पीछे पड़ा है.. मुझे तो चैन लेने दे अब..
गौतम सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे अपने सीने से लगाते हुए - मैं तभी सोऊंगा जब मेरी बीवी मेरे साथ बिस्तर होगी..
सुमन गैस के पास पड़ा हुआ चाक़ू उठाके गौतम को दिखाते हुए - बीवी से पहले माँ हूँ तेरी.. अगर जबरदस्ती करने की कोशिश की तो ऐसा सबक सिखाउंगी कि याद रखेगा तू..
गौतम - पहले तो कभी ऊँगली तक नहीं दिखाई अब सीधा चाक़ू दिखाने लगी.. ले चुम लिया तेरे होंठों को अब कहो.. क्या सबक सिखाऊगी मुझे..

सुमन चाकू रखते हुए - होंठों को चूमने से कब रोका मैंने? कुछ और किया तब देखना क्या करती हूँ..
गौतम सुमन को गोद में उठाकर अंदर कमरे में बिस्तर पर ले जाता है..
सुमन - क्या कर रहा है.. छोड़ वरना मारूंगी तुझे.. आज बहुत बदतमीजी कर ली तूने मेरे साथ अब और नहीं..
गौतम सुमन के पास बैठकर - एक कविता लिखी है माँ.. तेरे लिए.. सुना दू..
सुमन - अच्छा तू लेखक भी बन गया? सुना क्या लिखा है तूने..
गौतम कमरे की लाइट्स ऑफ करके बेड पर आ जाता है और सुमन के बगल में बैठ जाता है..
सुमन एक सिगरेट जलाकर कश लेती हुई गौतम को देखने लगती है जो एक नोटबुक और पेन लेकर उसके बगल में आ बैठा था और फोन के टोर्च की रौशनी में नोटबुक पर लिखा हुआ पढ़ने लगा था...
गौतम - सुनो...
सुमन सिगरेट का एक कश लेकर - सुना..
गौतम - लिखा है कि...

कितनी प्यारी प्यारी है..
माँ तू सबसे न्यारी है..
तुझे देखकर सब कहते है..
कि तू बहुत ही संस्कारी है..

सुमन - वाह.. मेरा गौतम तो बहुत अच्छा लिखता है..
गौतम सिगरेट छीनकर बुझाते हुए - आगे सुनो.. और ये सिगरेट रहने दो.. आजकल बहुत सिगरेट पिने लगी हो तुम.. अब बोलना मत बीच में..

तेरे रेशम जैसे बाल है माँ..
सूरत भी क्या कमाल है माँ..
गर्दन सुराहीदार है तेरी..
और होंठ भी लाल लाल है माँ..

तेरी छाती पर चुचक खड़े हुए..
चुचे से चुचे अड़े हुए..
कोहिनूर से ज्यादा कीमती है..
तेरे चुचो पर तिल माँ जड़े हुए..

तेरी चिकनी चिकनी कमर है माँ..
और चालिस के पार उमर है माँ..
जो कहती है दुनिया कहने दे..
तेरा और मेरा प्यार अमर है माँ..

अगर कमर से नीचे आउ मैं..
फिर क्या माँ तुझे बताऊ मैं..
तेरी जांघे पनघट के पत्थर सी..
जिनपे फिसलके गिर जाऊ मैं..

तेरी जांघो के जोड़ पर जंगल है..
तूने साफ किया है मंगल है..
अब हर दिन होगा माँ युद्ध यहां..
जमकर होगा अब दंगल है..

तेरी सुर्ख गुलाबी चुत है माँ..
इससे निकला तेरा सपूत है माँ..
कुछ पवित्र है तो इस दुनिया में..
तेरी चुत से निकला मूत है माँ..

माँ मैं तुझको पाना चाहता हूँ..
दिल से अपनाना चाहता हूँ..
तेरे साथ यहाँ इस बिस्तर में..
माँ मैं उम्र बिताना चाहता हूँ..

गौतम - केसा लिखा है?
सुमन गौतम के हाथ से नोटबुक और पेन लेकर साइड में रख देती है फिर गौतम को पीछे धकेल कर उसकी टीशर्ट उतारते हुए अपना ब्लाउज खोलकर अपनी नंगी छाती गौतम के नंगे सीने से चिपका देती है और कहती है - अगर तू कभी छोड़कर गया तो जान से मार दूंगी तुझे.. समझा? इतना कहकर गौतम के होंठ चूमने लगती है...

m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-JNFCzejl-Y5-QUK1c-44607941b 204336-kissing
गौतम सुमन के होंठों को चूमते हुए अपने मुंह कि लार सुमन के मुंह कि लार से मिला कर चुम्बन को प्रगाड़ करके चुम्बन का आंनद लूटने लगता है..
सुमन चुम्बन तोड़कर - फ़ोन आ रहा है ना..
गौतम - हां.. तेरा है मेरी जान..
सुमन फ़ोन उठाकर - हेलो..
जगमोहन - सुमन.. कल गाँव जाना है रीत निभाने.. सुबह मैं जल्दी आ जाऊंगा.. गौतम को फिर से कहीं मत भेज देना..
सुमन गुस्से से - मुझे सिखाने कि जरुरत नहीं है.. तुम आये तो ठीक है वरना मैं और मेरा ग़ुगु दोनों कल सुबह 9 बजे गाँव चले जायेंगे..
जगमोहन - मैं आ जाऊंगा.. हर वक़्त गुस्से में रहती हो.. फ़ोन कट जाता है..
गौतम - मैं कुसुम से शादी नहीं करूँगा..
सुमन अपनी साडी कमर तक उठाकर चड्डी नीचे सरका देती है और गौतम के लोअर को भी नीचे सरका कर उसका लंड पकड़कर अपनी सूजी हुई चुत के छेद पर टिका कर धीरे से अंदर करती हुई कहती है - शादी तो करनी पड़ेगी मेरे शहजादे...
गौतम सुमन का हाथ पकड़कर - क्या कर रही है दर्द होगा तुझे..
सुमन हाथ छुड़वा कर गौतम का लंड धीरे से अपनी चुत में घुसा लेती है और कहती है - चोदने के लिए मना किया है.. घुसाने के लिए नहीं.. और कुसुम से तो तुझे शादी करनी ही पड़ेगी.. समझा..
गौतम - मैं तेरे अलावा और किसी से शादी नहीं करूँगा..
सुमन मज़ाकिया अंदाज़ में - क्यों? तेरा ये लंड दो बीविया नहीं संभाल सकता?
गौतम - दो नहीं चार संभाल सकता है.. पर मैं नहीं करूंगा शादी..
सुमन गौतम को अपने नीचे पूरी तरह खींचकर करवट लेते हुए - मुझे नींद आ रही है..
गौतम सुमन को अपने ऊपर सुलाते हुए - मैंने कह दिया तो कह दिया.. समझी.. और कल मैं जाऊँगा भी नहीं गाँव..


cuddle-intimate cuddle-bed
सुमन - हम्म..
गौतम - क्या हम्म..
सुमन - सो जा मेरे पतिदेव.. कल मेरी सौतन से भी मिलना है तुझे...
गौतम - तू सुन रही है मैं क्या कह रहा हूँ?
सुमन आँख बंद किये हुए - हम्म..
गौतम - फिर हम्म..
सुमन - सो जा ना ग़ुगु..
गौतम सुमन को थोड़ा ठीक से अपने ऊपर करते हुए चादर ओढ़कर सुलाते हुए - ऐसे चुत में लंड डाल के सोउ?
सुमन उसी तरह आँख बंद किये हुए - हम्म..
गौतम आगे कुछ नहीं कहता और सुमन के सर पर प्यार से हाथ फेरता हुआ उसे सुला देता है और कुछ देर बाद खुद भी सो जाता है..

सुबह जब उसकी आँख खुलती है तो वो देखता है उसका लंड अभी भी उसकी माँ सुमन कि चुत में घुसा हुआ था और वो उसी तरह गौतम के साथ स्टी हुई सो रही थी.. उसके हाथ का धागा सफ़ेद हो चूका था.. और गौतम समझ जाता है कि बाबाजी के कार्य का वक़्त आ चूका है..

सुमन की जब आंख खुली तो उसने देखा कि गौतम उसके बाल संवारते हुए उसे ही देखे जा रहा था.. सुमन ने भी मुस्कुराते हुए गौतम को देखा और गौतम के ऊपर से अपनी चुत से उसका लंड निकालती हुई उठकर बेड पर एक तरफ बैठ गई और पास पड़े ब्लाउज को पहनने लगी...


गौतम ने बेड से खड़े होते हुए अपनी मां को गुड मॉर्निंग बोला और पूछा..
गौतम - चाय बना दू?
सुमन ब्लाउज के बटन बंद करती हुई मुस्कुराकर - हम्म..
गौतम रसोई की तरफ जाते हुए - अब भी हम्म..
गौतम रसोई में जाकर चाय बनाने और सुमन लंगड़ती हुई बाथरूम में नहाने चली जाती है..
बाथरूम से नहा कर वापस आती है तो देखती है कि गौतम उसके सामने हाथों में चाय लिए खड़ा है और उसी को बाथरूम से बाहर आते हुए देख रहा है..
सुमन का बदन गिला था और उसने अपने गीले बालों को भी ऐसे ही बंधा हुआ था.. सुमन ने अपने बदन पर काले कलर का ब्लाउज और पेटीकोट पहना था मगर उसने ब्रा नहीं पहनी थी जिससे उसका कमर से ऊपर बदन साफ साफ नज़र आ रहा था.. ब्लाउज की पारदर्शिता बहुत ज्यादा थी सुमन के खड़े हुए चुचक गौतम को ही देख रहे थे..

सुमन में चाय लेते हुए गौतम से कहा - तू भी नहा ले. जगमोहन आता होगा.. और लंगड़ती हुई अलमीरा की तरफ चली गई.. उसकी चाल देखकर गौतम हसता हुआ बोला..
गौतम - लंगड़ी घोड़ी..
सुमन गौतम की बात सुनकर - लंगड़ी भी तूने ही किया है मुझे.. बिगड़ैल शहजादे..
गौतम बाथरूम में जाते हुए - अच्छा सुन ना सुमन.. मेरे कपड़े निकल देना.. मैं नहाके आता हूँ..
सुमन मुस्कुराते हुए - जैसा आप कहो मेरे पतिदेव...
गौतम नहाने घुस जाता है और सुमन गौतम के कपड़े निकाल कर एक बैग पैक कर लेती जिसमे उसका और गौतम का सामान भरा होता है..
गौतम नहाने के बाद कपड़े पहनकर तैयार हो जाता है और सुमन रसोई में नास्ता बनाने लगती है उसने एक आसमानी शाडी पहनी थी और अब उसके बदन पर पुरे कपड़े थे जिसमे ब्रा ब्लाउज और बाकी चीज़े भी शमील थी..

गौतम कमरे से रसोई में आता हुआ - क्या बना रही हो?
सुमन अंडा फोड़ते हुए - ऑमलेट बना रही हूँ..
गौतम अपने फ़ोन पर किसी का फ़ोन आता देखकर - ब्रेड भी सेक देना माँ..
सुमन बिना पीछे देखे - ठीक है मेरे शहजादे..
गौतम फोन उठाकर बात करता हुआ छत ओर चला जाता है वही नीचे जगमोहन आ जाता है..

जगमोहन - लो.. तुमने नो बजे कहा था मैं आठ पर ही आ गया..
सुमन चाय का कप देते हुए - बहुत बड़ा बहादुरी का काम कर दिया.. 26 जनवरी को सरकार से कहकर मैडल दिलवा दूंगी..
जगमोहन - अरे सुबह सुबह तो मूंड सही रखो.. अब तो घर भी मिल गया तुम्हे.. और पैरों में क्या हुआ?
सुमन - सीढ़ियों से गिर गई.. और घर तुमने तो नहीं दिलवाया.. बात करते हो..
जगमोहन - अंडे? तुम अंडे बना रही हो?
सुमन - तो? ऐसे चौंक क्यों रहे हो.. गौतम को छुप छुप के बाहर खाना पड़ता था तो अब उसकी पसंद का खाना यही घर ही बना रही हूँ.. तुम्हे कोई परेशानी तो कहो..
जगमोहन - हम शाकाहारी लोग है.. और तुम ये सब बना रही हो..
सुमन - तुम्हारे लिए नहीं है.. मैने और मेरे बेटे ने खाना शुरु कर दिया.. अब तुम मना करो या ना करो.. तुम्हरी कोई नहीं सुनने वाला..
जगमोहन - सुमन.. तुम्हारे कारण हुआ है ये.. गौतम पर ध्यान देती तो वो ये सब ना करता.. इतना ना बिगड़ता..
सुमन जगमोहन की बात अनसुनी करते हुए - खुद तीन तीन शादी करके बैठो हो और गौतम के बिगड़ने की बात कर रहे हो..

यहां ये सब चल रहा था कि छत पर गौतम फ़ोन उठाते हुए बोला - गुडमॉर्निंग बुआ..
पिंकी - गुडमॉर्निंग बाबू.. क्या कर रहा है?
गौतम - बस आपको याद कर रहा था..
पिंकी - हाय.. मुझे भी तेरी याद आ रही थी बाबू.. एक खुशखबरी सुननी है तुझे..
गौतम - कैसी खुसखबरी बुआ? माँ बनने वाली हो क्या?
पिंकी - हाँ मेरे बाबू.. तेरी बुआ के पेट में तेरा बच्चा लग गया है.. तू बाप बनने वाला है..
गौतम - क्या जबरदस्त खुशखबरी दी है बुआ सुबह सुबह.. मन कर रहा है आपके पास उड़ के आ जाऊ और गले से लगा के इतना चूमु की होंठ दर्द करने लग जाए..
पिंकी - तो आजा ना बाबू.. मैं सर से पैर तक तेरी ही तो हूँ.. जो करना है वो कर लेना..
गौतम - गाँव जा रहा हूँ बुआ माँ के साथ.. वरना पक्का आ जाता आज आपके पास..
पिंकी - अच्छा मैं ही आ जाउंगी तेरे पास जल्दी..
गौतम - बुआ कुसुम कैसी लड़की है?
पिंकी - अच्छा तो ये बात है.. तेरी माँ मान गई रीत निभाने के लिए.. तभी गाँव की सैर पर निकले हो तुम सब...
गौतम - बताओ ना बुआ.. मैंने कभी देखा तक नहीं उसे.. और अब शादी करने वाला हूँ...
पिंकी - बहुत अच्छी लड़की है बाबू.. तोड़ी सी गुस्सैल है पर तुझे बिस्तर में पूरा खुश रखेगी.. हर सुख देगी..
गौतम - कोई और तो नहीं है उसकी लाइफ में?..
पिंकी - अरे तू जाके खुद ही पता कर लेना अपनी होने वाली दुल्हन के बारे में..
गौतम - मैं शादी भी नहीं करना चाहता बुआ.. मेरे साथ तो माँ जबरदस्ती कर रही है.. अगर उनकी बात ना मानु तो मुझसे रूठ जाएंगी...
पिंकी हसते हुए - अरे भाभी से इतना प्यार है मेरे बाबू को.. उनके रूठने के डर से शादी कर रहा है..
गौतम - छोडो यार बुआ.. इतनी सी उम्र में शादी हो रही है..
पिंकी - बाबू अभी शादी नहीं करनी तो रीत निभा ले बंधन में दो साल बाद ले लेना.. तब तक मगेतर बनाकर रख कुसुम को..
गौतम - ऐसा हो सकता है..
पिंकी हसते हुए - हाँ तू कुसुम को मना ले.. जो कुसुम कहेगी वही होगा.. और कुसुम को शादी से पहले पेट से मत मर देना..
गौतम - मैं तो छूने भी नहीं वाला उसे बुआ..
पिंकी - वो छू लेगी तुझे.. जो उसका होता है उसे वो दिल से लगा के रखती है..
गौतम - इतनी गले पड़ने वाली है लड़की है?
पिंकी - अब तू कुछ समझ.. एक बात तय है वो प्यार बहुत करेगी तुझे.. पलकों पर सजा कर रखेगी तुझे.. तेरी हर बात मानेगी.. 4 साल पहले आखिरी बार जब मैंने उसे देखा तब उसका जोबन फूल सा खिलने लगा था.. अब अठरा की हो गई.. जोबन को तेरे लिए सजा के रखी होगी..
गौतम - मुझे क्या करना है बुआ उसके जोबन से.. मुझे तो आप पसंद हो..
पिंकी - कुसुम होने वाली पत्नी है तेरी बाबू.. तुझे भी उसे खुश रखना होगा समझा.. नहीं तो वो बहुत परेशान करेगी तुझे..
गौतम - देखा जाएगा बुआ.. छोडो.. वैसे आपके पति फ़कीर चंद को पता है आप माँ बनने वाली हो..
पिंकी - वो तो ये खबर सुनते ही ख़ुशी से उछल पड़े थे.. अब भी ख़ुशी से इधर उधर घूम रहे होंगे.. उनको लगता है ये उनका बच्चा है..
गौतम - सही है बुआ.. अच्छा माँ बुला रही है.. बाद में बात करता हूँ..
पिंकी - चल बाय मेरा बाबू...
गौतम - बाय बुआ.. Love you..
पिंकी - love you too बाबू...

जगमोहन - मुझे बात ही नहीं करनी तुमसे.. मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ.. जब चलना हो तो बता देना.
जगमोहन बाहर चला जाता है और गौतम नीचे आ जाता है..
गौतम - तुम्हारे पतिदेव कहा है?
सुमन नाश्ता देकर गौतम के गाल चूमती हुई - वो तो यही पर है..
गौतम नास्ता करते हुए - अरे दूसरे वाले..
सुमन - बाहर चले गए.. इतनी बेज्जती की कि अपनेआप उठकर बाहर चले गए..
गौतम - कभी प्यार से बात कर लो उनसे..
सुमन लंगड़ती हुई कमरे में जाकर बेग उठाकर लाती हुई - तू है ना प्यार करने के लिए और किसी कि क्या जरुरत..
गौतम - तुम्हारा नाश्ता?
सुमन मुस्कुराते हुए - वो तो कल ही हो गया था.. आज भूक नहीं है..
गौतम सुमन को खिलाते हुए - थोड़ा तो खा लो.. आओ.. मैं खिला देता हूँ अपने हाथों से..
सुमन खाते हुए - बस बस.. और नहीं..
गौतम - एक और.. बस..
सुमन - बस गौतम.. पेट भरा हुआ है..
गौतम - ठीक है.. हो गया मेरा भी.. चले..
सुमन - तू बेग लेजाकर रख मैं आती हूँ ये सब साफ करके..
गौतम सुमन के गाल चूमता हुआ - ठीक है मेरी लंगड़ी घोड़ी..
गौतम बेग दिग्गी में रखता है.. वही पास खड़ा जगमोहन कहता है..

जगमोहन - पिंकी बड़ा ख्याल रखती है तेरा.. कार भी दिलवा दी तुझे...
गौतम - आपने तो आजतक कुछ नहीं दिलवाया मुझे.. एक बार बुआ से बात कर लो.. आपको नोकरी भी दिलवा देगी.. कब तक हवलदारी करोगे..
जगमोहन - ये घर मेरी कमाई से बना है बेटा.. और क्या चाहिए तुझे?
गौतम हसते हुए - माँ ने लिया आपकी दूसरी पत्नियों से.. सुना है आपसे रिश्ता भी तोड़ दिया उन्होंने..
जगमोहन - छोड़ उन बातों को..
गौतम - मैं सही कह रहा हूँ.. बुआ से बात कर लो.. लोग मुझे ठुल्ले कि औलाद कहते है बहुत शर्म आती है..
जगमोहन - बेटा पुलिस वाला है तेरा बाप..
गौतम - काहे का पुलिस वाला.. इतने सालों से कांस्टेबल के कांस्टेबल हो..
जगमोहन - मेरी ड्यूटी जयपुर में ips के पास लगने वाली है..
गौतम हसते हुए - वो तो फिर कपड़े धुलवायेगा आपसे.. हो सकता है आपको उसके घर में झाडू भी लगानी पड़े.. मैंने जैसा देखा वैसा बता रहा हूँ..
जगमोहन - मत बता.. अपनी माँ को बुला.. चलना भी है..
गौतम - आ रही है..
जगमोहन - तेरा कोई चक्कर तो नहीं है ना किसी के साथ.. कुसुम से ही तेरी शादी होनी है याद रखना..
गौतम - आप चिंता मत करो.. चक्कर चला के मैं शादी नहीं करता आपकी तरह...
जगमोहन - तू भी तेरी माँ का सिखाया हुआ है क्या? बात बात में ताने मार रहा है..
गौतम - माँ आ गई..

गौतम ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता है और उसके बगल में जगमोहन बैठ जाता है और पीछे सुमन बैठ जाती है.. गौतम गाड़ी चला कर हाईवे पर ले लेता है और गांव चलने के लिए निकल पड़ता है.. रास्ते में किसीने भी ज्यादा बात नहीं की और अगले तीन घंटे में गौतम सुमन और जगमोहन के साथ गांव पहुंच गया था..


मानसी - आओ सुमन.. तुम्हे क्या हुआ?
सुमन - कुछ नहीं हलकी सी मोच आई है पैरों में ठीक हो जायेगी कुछ दिनों में..
हेमा - अरे आ गया मेरा पोता.. हाय किसी की नज़र ना लगे मेरे ग़ुगु को.. कितना प्यारा मुखड़ा है.. बिलकुल राजकुमार लगता है..
जगमोहन - इतना लाड प्यार मत करो माँ.. पहले ही बहुत बिगड़ा हुआ है और बिगड़ जाएगा..
मानसी - भाईसाब अब इसके सिवा कौन है जिसे लाड प्यार करें.. माँ अंदर लेकर चलो हमारे ग़ुगु को.. बाहर किसी की नज़र ना लग जाए..
बृजमोहन - भाईसाब शाम को पंचायत की हाज़िरी में कुसुम और गौतम की रित निभाने की बात है..
जगमोहन - ठीक है बृज.. सब तैयारी तो हो चुकी है ना..
बृजमोहन - हाँ.. रीत निभाने की सारी तैयारी हो चुकी है..
हेमा चाय लेते हुए - कुसुम कहा है? अभी तो इधर उधर घूम रही थी अब नज़र नहीं आ रही..
मानसी - अपने कमरे में होगी माँ.. बाहर आने से शर्मा रही है..
हेमा - और गौतम कहा गया?
सुमन - छत पर गया है.. छत से गाँव दीखता है ना..
मानसी - मैं चाय देके आती हूँ ग़ुगु को..
हेमा - अरे तू क्यों जाती है? कुसुम को भेज.. मिलेंगे तो कुछ बात होगी.. साथ रहना है अब उनको..
मानसी कुसुम के कमरे में जाती हुई - ठीक है माँ जी..
मानसी - कुसुम..
कुसुम - हाँ माँ..
मानसी - ले चाय दे आ तेरे दूल्हे राजा को.. छत पर है..
कुसुम शरमाते हुए - माँ.. आप दे आओ ना..
मानसी - ठीक है तुझे नहीं जाना तो मैं ही दे आती हूँ..
कुसुम - माँ..
मानसी - अब क्या है?
कुसुम चाय लेते हुए - मैं दे आती हूँ..
मानसी मुस्कुराते हुए - अच्छा जी.. सिर्फ चाय देके आना.. समझी..
कुसुम - माँ..

कुसुम चाय लेके छत पर आ जाती है और गौतम को पीछे लहलहाते खेत की और देखते हुए अपनी बढ़ी हुई दिल की धड़कन के साथ उसके पास पीछे की तरफ आ कर खड़ी हो जाती है..

कुसुम नज़र झुका कर - जी चाय...
गौतम जब पीछे मुड़कर देखता है तो फिर देखता ही रह जाता है.. उसके मुंह में जैसे जबान ही नहीं थी उसे कुसुम को देखकर किसी की याद आ गई जिसे वो पहले भी देख चूका था वही चेहरा वही रंग रूप वही आवाज.. गौतम ऐसे खड़ा हुआ कुसुम को देख रहा था जैसे उसने कोई अजूबा देख लिया हो..

कुसुम नज़र झुका कर शरमाते हुए - जी चाय ले लीजिये.. ठंडी हो जायेगी..

गौतम ख्याल से बाहर आता हुआ चाय का कप कुसुम से ले लेता है और कुसुम पहली बार गौतम के चेहरे को देखती है अपनी आँखों में गौतम के सुन्दर चेहरे को बसाने लगती है वही गौतम भी कुसुम के प्यारे से भोले चेहरे को देखे जा रहा था..

गौतम - शुक्रिया..
कुसुम धीमी आवाज में - कुछ और चाहिए?
गौतम - नहीं.. तुम कौन हो?
कुसुम शरमाते हुए - कुसुम..

ये कहते हुए कुसुम नीचे जाने के लिए मुड़ गई और तेज़ कदमो के साथ नीचे अपने कमरे में वापस आ गई.. उसकी होंठों पर मुस्कुराहट, दिल की बढ़ी हुई धड़कन और तेज़ चल रही सांस उसके मन का हाल बयाँ कर रही थी..

गौतम चाय पीते हुए कुछ और सोच रहा था.. कैसे ऐसा मुमकिन है कि एक जैसे दो लोग हो सकते है.. मगर उसने इस बात को छोड़ते हुए गाँव के मनभावन और मनोहर दृश्य को देखते हुए चाय का आंनद लेना ज्यादा जरुरी समझा..

शाम हो चुकी थी और गाँव की चौखट पर पंचायत के सामने अपनी बनाई रीति से कुसुम और गौतम आमने सामने खड़े थे..

पंचायत ने दोनों की रित निभाने का कार्य शुरु कर दिया और सब हंसी ख़ुशी से संपन्न भी हो गया.. आखिर में बंधन जिसमे लड़का लड़की को अपने साथ लेजाकर पति पत्नी की तरह रखता है उसकी तारीख तय करने के लिए दोनों को बात करने के लिए कहा..

गौतम - मुझे थोड़ा समय चाहिए..
कुसुम - मंजूर है..
पंचायत का एक आदमी - कितना समय चाहिए? कोई तारीख कहो..
गौतम - 2-3 साल..
पंच का आदमी - बेटी बोल.. मंजूर है कि नहीं?
कुसुम - नहीं..
पंच का आदमी - तो कितना समय देगी अपने मर्द को बंधन के लिए?
कुसुम - 2-3 हफ्ते दे दूंगी..
गौतम - पागल है क्या? 2-3 हफ्ते? कम से कम दो साल तो चाहिए मुझे.. एक दम से कैसे बंधन में ले लु..
कुसुम - 1 महीना.. बस उससे ज्यादा नहीं..
पंच का आदमी - अरे ये तो पहले से तय करना था ना बृजमोहन और जगमोहन को.. लड़का और लड़की एक मत है ही नहीं..
गौतम - मैं इतना जल्दी ये सब नहीं कर सकता.. मुझे समय चाहिए..
पंच का आदमी - बेटी बोल क्या कहती है.. आखिरी में लड़के को लड़की की ही बात माननी पड़ेगी तू कितना समय देगी अपने दूल्हे को साथ ले जाने के लिए..
कुसुम - उन्हें समय चाहिए तो 2 महीने दे दूंगी...
गौतम - मुझे मंजूर नहीं है..
पंच का आदमी - बेटा तेरे मंजूर करने से कुछ नहीं होता..
गौतम कुसुम से - 6 महीने तो दे कम से कम..
कुसुम गौतम को देखकर - 3 महीने बस.. और नहीं..
पंच का आदमी - तो ठीक है आज से तीन महीने बाद इसी तारीख को यही बंधन होगा और फिर लड़का लड़की को अपने साथ ले जाएगा और पत्नी की तरह रखेगा..

बृजमोहन - पंचो पहले आप लोग खाने की शुरुआत करो..
जगमोहन - हाँ.. रसोई तैयार है..
गौतम वापस घर आ जाता है और उसके पीछे पीछे सुमन भी घर आ जाती है..
मानसी और सुमन घर जाने लगती है तो हेमा उन दोनों को रोक लेती है और कहती है..
हेमा - तुम दोनों कहा चली.. जाने दो उन दोनों को अकेले में बात करेंगे तो अच्छा रहेगा..
सुमन - दोनों झगड़ा ना करें..
मानसी - हां माँ देखा नहीं दोनों कैसे बात कर रहे थे..
हेमा - करते है तो करने दो.. झगडे से प्यार बढ़ता है..
गौतम फिर से छत पर चला जाता है और कुसुम भी उसके पीछे पीछे छत पर आ जाती है..
गौतम गुस्से से - पीछे पीछे क्यों आ रही हो? क्या चाहिए तुम्हे?
कुसुम प्यार से - इतना क्यों बिगड़ते हो..
गौतम - बिगडू नहीं तो क्या करू? तुम्हे बड़ी जल्दी है शादी की.. मैं मना तो नहीं कर रहा शादी से..
कुसुम उसी प्रेम से - हामी भी कहा भर रहे हो.. पहली नज़र में भा गए हो तुम.. कैसे रहूंगी इतना समय दूर मैं?
गौतम पलटकर सिगरेट निकलकर लाइटर से जलाकर कश लेते हुए - अच्छी मुसीबत है..
कुसुम नजदीक आकर गौतम के होंठों से सिगरेट छीनकर फेंक देती है और कहती है - पूरी रात तुम्हारी तस्वीर गले लगाकर तुम्हारे ख्याब देखें है मैंने.. इतना बिगड़ोगे तो अपनी जान दे दूंगी.. फिर तुम्हारी मुसीबत ख़त्म..

गौतम - सिर्फ 21 साल का हूँ मैं.. अभी से शादी कैसे करूंगा? मैं खुद बच्चा हूँ..
कुसुम गले लगते हुए - मैं संभल लुंगी तुम्हे.. शादी कर लेते बच्चा जब तुम कहोगे तब करेंगे..
गौतम - यार कैसी बातें कर रही है शर्म नहीं आती तुझे?
कुसुम मुस्कुराते हुए - आती है ना.. पर तुम्हे देखकर प्यार भी बहुत आता है.. इतने सुन्दर हो मेरी तो नज़र ही नहीं हट रही.. मैं तो चाहती हूँ आज ही हमारा बंधन हो जाए और तुम मुझे ले जाओ अपने साथ.. और खूब सारा प्यार करो..
गौतम कुसुम को देखते हुए - मैंने तो सुना था गाँव की लड़किया बहुत शर्मीली होती है पर तुम तो बहुत अलग हो... तुम्हे तो लड़का होना चाहिए था..
कुसुम - अगर मैं लड़का होती तो तुम लड़की होते.. मेरे साथ में तो तब भी रहना पड़ता तूम्हे.. और मैं तो बहुत बुरा लड़का होती.. रोज़ शराब पीकर तुम्हारे साथ मार पिट करती.. और तुम्हे अपने पैरों में रखती.. और तुम रोज़ मेरे सामने सर झुका कर सुनो जी.. सुनो जी.. करते..
गौतम हसते हुए - अच्छा है तुम लड़का नहीं हो..
कुसुम - हम्म.. माँ भी मेरा गुस्सा देखकर यही कहती है.. तुम्हे भी मुझे झेलना होगा.. मेरे गुस्से को भी संभालना होगा..

गौतम दिवार का सहारा लेकर बैठते हुए - सब मेरे नखरे उठाते है मैं तेरे उठाऊंगा? तू कितनी गलतफहमी में है.. मैं अपनी मर्ज़ी का मालिक हूँ..
कुसुम बगल में बैठती हुई - एक बार मुझे साथ ले जाओ.. फिर देखना मेरी मर्ज़ी से सब करोगे..
गौतम - अच्छा? जादू टोना जानती हो..
कुसुम - हाँ.. दादी कहती है जरुर पिछले जन्म में मैं जादूगरनी थी.. मैं जिसे गुस्से दे देखु वो फूल भी मुरझा जाता है और प्यार से देखु तो मुरझाया हुआ फूल भी खिल उठता है..
गौतम कुछ सोचकर - ऐसी बात है?
कुसुम - हाँ.. कोई शक है तुम्हे?
गौतम कुसुम को घूर कर उसके हाथ पकड़ते हुए - घर में कोई नहीं है..
कुसुम शर्म से नज़र चुराते हुए - बंधन से पहले कुछ करने की सोचना भी नहीं..
गौतम - अगर कुछ कर दू तो...
कुसुम गौतम को देखकर - चूमने की इज़ाज़त है उससे ज्यादा करोगे तो छत से धक्का दे दूंगी..
गौतम - क्या चूमने की..
कुसुम शरमाते हुए - होंठ...
गौतम छेड़ते हुए - कोनसे? ऊपर वाले या नीचे वाले?

कुसुम समझ जाती है गौतम किन होंठों की बात कर रहा है और वो शर्मा कर धत.. कहते हुए गौतम से अपना हाथ छुड़वा कर छत से नीचे चली जाती है और गौतम मुस्कुराते हुए कुसुम के बारे में कुछ सोचने लगता है..

गौतम छत पर खड़ा हुआ ये सब सोच ही रहा था कि उसके फ़ोन पर किसी का फ़ोन आता है..
हेलो..
हेलो गौतम..
हाँ.. तुम कौन?
मैं किशोर.. बड़े बाबाजी बात करना चाहते है तुमसे..
बड़े बाबाजी - गौतम..
गौतम - प्रणाम बाबाजी..
बड़े बाबाजी - मेरे कार्य का समय आ गया है बेटा..
गौतम - बाबाजी मैं कल ही आपके पास आ जाऊंगा..
बड़े बाबाजी - कल नहीं गौतम दो दिन बाद.. अमावस के दिन मेरा कार्य शुरु होगा जो अगली अमावस तक चलेगा..
गौतम - ठीक है बाबाजी मैं आ जाऊंगा..
बड़े बाबाजी - बेटा.. तुम अपने साथ अपनी जरुरत का सारा सामान लेकर आना.. तुम्हे कुछ दिन यही रुकना होगा.. जिसे भी तुम बताना चाहते हो उसे कोई और कारण बताकर आना..
गौतम - टेंशन मत लो बाबाजी मैं कह दूंगा वर्ल्ड टूर पर जा रहा हूँ.. मैं आपके पास आ जाऊंगा..
बड़े बाबाजी - ये मज़ाक नहीं है बेटा.. जैसा कहता हूँ वैसा ही करना..
गौतम - जी बाबाजी.. मैं कोई बहाना बनाकर आपके पास आ जाऊंगा कुछ दिनों के लिए..
बड़े बाबाजी - मैं प्रतीक्षा करूँगा बेटा.. समय से उपस्थित हो जाना वरना तुम्हे जो भी मुझसे मिला है वो तुमसे छीन जाएगा...
गौतम - क्या बात कर रहे हो बाबाजी.. मैं आ जाऊंगा.. आप कुछ भी मत छीनना.. अच्छा अब रखता हूँ..
बड़े बाबाजी - ठीक है बेटा..
 
Back
Top