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Hindi XXX kahani चीरहरण

Update 33

गौतम सुबह उठा तो उसने सबसे पहले किशोर कुमार के पुराने गाने लगा कर कान में इयर बड्स लगा लिए औऱ ब्रश करता हुआ बाथरूम में आ गया.. टट्टी करने इंग्लिश पोट पर बैठकर गौतम फ़ोन चलाते हुए फ़ोन देख ही रहा था उसे कल आदिल की बात याद आई औऱ उसने व्हाट्सप्प खोल लिया फिर आदिल के भेजे फोटो देखने लगा..
जैसे ही गौतम ने आदिल की व्हाट्सएप मैसेज पर भेज़ी हुई तस्वीर देखी और उनमें किसी जोड़े की शादी को देखा तो वह हैरत में पड़ गया और अपना सर को खुजाते हुए उसने आदिल को फोन कर दिया...

गौतम ने आदिल से तस्वीर के बारे में पूछताछ की और आदिल ने जवाब दिया कि कल जब वो अपने दोस्त मोनू (फोटोग्राफर) की दुकान पर गया था तब उसने दुकान पर यह तस्वीर देखी.. औऱ वही से इन तस्वीरों की पिक लेकर उसे massage किया..
गौतम ने आगे औऱ कुछ पूछा तो आदिल ने जवाब दिया की ये तस्वीर मोनू ने परसो खींची थी जब उसे एक आदमी ने बुलाया था.. किसी पुराने धार्मिक जगह पर ये शादी हुई थी औऱ गिनती के 3-4 लोग ही उसमे शामिल थे..

गौतम ने फ़ोन रख दिया औऱ फ्रेश होकर बाहर आ गया उसने सबसे पहले रूपा को फ़ोन किया औऱ कहा...

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(रूपा 41)
गौतम चिड़चिड़े पन से - ये क्या मज़ाक़ है?
रूपा - अच्छा तो तुम्हे खबर मिल गई? ये मज़ाक़ नहीं है नन्हे शैतान..
गौतम - माँ को पता चलेगा तो क्या होगा पता है ना?
रूपा - जो भी हो.. अब मैं कुछ नहीं कर सकती..
गौतम - तुम भी ना उड़ते तीर लेती हो.. अब संभालना माँ को आपको ही..
रूपा - मैं देख लुंगी.. तुम मत बताना..
गौतम - बताने के लिए ये कोई ख़ुशी खबर थोड़ी है.. आपने भी ना काण्ड कर दिया फालतू में.. पापा ही मिले थे आपको शादी करने के लिए..
रूपा - अच्छा ये सब छोड़.. ये बता तू केसा है..
गौतम - अब तक ठीक था पर आपने जो बम फोडा है उसके बाद सर दर्द होने लगा है..
रूपा हसते हुए - तू जल्दी से मेरे पास आजा मेरे नन्हे शैतान फिर मैं प्यार से तेरा सर दबाकर तेरा सर दर्द दूर कर दूंगी..
गौतम - हम्म्म..
रूपा - अपना ख्याल रखना नन्हे शैतान..
गौतम - ख्याल तो आप अपना रखना मम्मी.. जब से बाबाजी के पास होके आई हो एक बार भी मुझे अपनी गुफा में घुसने नहीं दिया.. इस बार कोई बहाना नहीं चलेगा..
रूपा - इस बार तुझे जो करना हो कर लेना मेरे नन्हे शैतान.. पर जल्दी से आजा बहुत दिन हो गए तुझे देखे हुए...
गौतम - रखता हूँ मम्मी.. कोई बुला रहा है..
रूपा - बाय गौतम..

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(माधुरी 36)
माधुरी - रूपा तुमने ये अच्छा नहीं किया.. किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाना सही नहीं है..
रूपा - मैंने कहा किसी की मज़बूरी का फ़ायदा उठाया है माधुरी? मैंने तो बस एक सौदा किया था जगमोहन के साथ.. तुम भी तो राजी थी उसके लिए..
माधुरी - मैं राजी हुई क्युकी मेरे पास औऱ कोई रास्ता नहीं बचा था.. अगर तुम्हारी शर्त नहीं मानती तो जगमोहन को जेल हो जाती औऱ ये घर भी नीलाम हो जाता.. मैं सडक पर आ जाती..
रूपा - जगमोहन जुए में लाखों रुपए हार गया औऱ फिर रिश्वत लेते भी पकड़ा गया तो इसमें मेरी क्या गलती माधुरी? मैंने तो मदद करने की पेशकश की.. तुमने औऱ जगमोहन दोनों ने इसे माना था..
माधुरी - पर मैं ये नहीं समझ पा रही कि तुमने जगमोहन से शादी क्यों की? उसके पास ऐसा क्या है जो तुम्हे चाहिए.. मैंने बताया था तुम्हे कि वो अब किसी काम का नहीं.. ना उसके पासवर्ड कुछ ऐसा है जो तुम्हे वो दे सकता है..
रूपा - मुझे जगमोहन से सिर्फ उसकी पत्नी होने का दर्जा चाहिए था माधुरी.. वो मुझे मिल चूका है.. अब मुझे औऱ किसी की जरुरत नहीं..
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माधुरी - बहुत अजीब बात है रूपा.. तुमने ऐसे आदमी से शादी की जो अब नामर्द बन चूका है औऱ तुम खुश भी हो.. तुमने जगमोहन की नोकरी बचाई उसे जेल जाने से बचाया औऱ अब इस घर पर बाकी लोन भी चुकाने को तैयार हो.. मैं तुम्हे समझ नहीं पास रही..

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रूपा - माधुरी मैं तुम्हारे साथ इस घर में तुम्हारी बड़ी बहन बनकर रह सकती हूँ.. हमें आपस में लड़ने झगड़ने की जरुरत नहीं है.. मैं तुम्हे एक सच्चाई बताना चाहती हूँ..
माधुरी - कैसी सच्चाई रूपा?
रूपा - माधुरी मैंने जगमोहन से शादी इसलिए नहीं की कि मुझे जगमोहन पसंद है या मैं तुम्हारे साथ इस घर में रहना चाहती हूँ.. मेरे जगमोहन से शादी करने का कारण गौतम है.. मैं गौतम सको एक माँ औऱ एक प्रेमिका दोनों का प्यार देना चाहती हूँ..
माधुरी - ये क्या कह रही हो रूपा.. तुम होश में तो हो? गौतम बस एक बच्चा है.. जब उसे इसका पता लगेगा तो वो क्या सोचेगा तुम्हारे बारे में.. औऱ सुमन? सुमन तो तुम्हारी जान ही ले लेगी.. गौतम पर सिर्फ सुमन का अधिकार है..
रूपा - देखो माधुरी.. मैं जानती हूँ कि तुम भी गौतम के साथ उसी तरह रहना चाहती हो जैसे कि मैं.. मैंने कल तुम्हारी औऱ गौतम कि बाते सुनी थी औऱ मैं जानती हूँ तुम भी गौतम से वैसा ही रिश्ता रखना चाहती हो जैसा मैं रखना चाहती हूँ.. मुझसे तुम्हे कुछ छिपाने की जरुरत नहीं है.. हम दोनों मिलकर गौतम का हर तरह से ख्याल रख सकते है.. औऱ रही बात सुमन की तो उसे किसी भी तरह हमें समझाना पड़ेगा कि वो गौतम के साथ यहां हमारे साथ आकर रहे..
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माधुरी - ये तुम क्या बोले जा रही हो रूपा.. सुमन कभी ऐसा नहीं करेगी..
रूपा - सब होगा माधुरी.. मैं तुम औऱ सुमन तीनो इस घर में एक साथ गौतम की माँ बनकर रहेंगी.. सुमन के पीठ पीछे हम गौतम को माँ के साथ साथ उसकी प्रेमिकाएं बनकर भी उसका ख्याल रखेंगी..
माधुरी कुछ देर सोचकर - क्या ये सच में हो सकता है रूपा? क्या ऐसा मुमकिन है? क्या गौतम हम दोनों के साथ वैसा रिश्ता रखेगा?
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रूपा - हाँ माधुरी.. ऐसा जरुर होगा.. अब किसी तरह बस सुमन को यहां रहने के लिए राजी करना होगा.. मुझे पता है जब वो तुमपर गुस्सा है औऱ जब मेरी औऱ जगमोहन की शादी के बारे में जानेगी तब मुझपर भी गुस्सा होगी.. मगर हमें किसी भी तरह उसे मनाना होगा..
माधुरी कुछ देर ठहर कर - ठीक है रूपा.. मैं तैयार हूँ.. आज से हम दोनों बहने बनकर रहेंगी.. सुमन को मनाने में मैं तुम्हारी हर तरह से मदद करूंगी..
रूपा माधुरी के गले लगते हुए - मैं जानती थी माधुरी तुम जरुरत मेरी बात मान जाओगी..
माधुरी भी रूपा को गले लगाकर - बहन.. मैं तुम्हारे साथ हूँ.. तुम्हारी तरह मैं भी गौतम के बिना नहीं रह सकती..


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रूपा - मैं समझ सकती हूँ माधुरी.. गौतम ने मेरी तरह तुम्हे भी अपना दीवाना बना दिया है..
माधुरी - उसकी क्या गलती रूपा.. उसके प्यारा सा चेहरा मीठी बातें औऱ मर्दानगी किसी को भी अपना गुलाम बना सकती है..
रूपा - सच में माधुरी..

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गायत्री - कुछ दिन औऱ रुक जाती सुमन..
सुमन - माँ.. आप तो जानती है वहा कितना काम पड़ा है? ग़ुगु के आखिरी एग्जाम भी आने वाले है..
गौतम सीढ़ियों से नीचे उतरता हुआ - उनमे अभी समय है माँ.. हम 2-3 दिन औऱ नानी के साथ रह सकते है..
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आरती मुस्कुराते हुए - अब तो आप खुश है बुआ.. मेरे देवर ज़ी ने भी रुकने के लिए हामी भर दी है..
गौतम आरती को देखकर - अब आपने ख्याल ही इतना रखा है मेरा.. आपका कहा कैसे टाल सकता हूँ..
गायत्री - सुमन अब तो हमारे ग़ुगु ने भी कह दिया है अब तो रुकना ही पड़ेगा तुझे कुछ औऱ दिन मेरे साथ..
सुमन - पर माँ..
संजय - पर वर कुछ नहीं सुमन.. रुकना है तो रुकना है.. समझी?
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(कोमल 42)
कोमल - अरे शबनम.. कहा मर गई तू..
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(शबनम 30)
शबनम - आई मालकिन..
कोमल - कल से देख रही हूँ तू आहूत कामचोरी करने लगी है..
शबनम - नहीं मालकिन वो पैर में हलकी सी मोच आ गई थी इसलिए थोड़ा धीरे चल रही हूँ..
संजय - अब तेरे भी मेरो में मोच आ गई? माँ पता नहीं क्या हो रहा है? पहले कोमल फिर आरती बहु औऱ आपके मोच आई अब इस शबनम के भी मोच आ गई..
सुमन गौतम को देखकर - पत्थर की जगह पहाड़ से जाकर टकरायेगी तो मोच तो आएगी ना भईया..
संजय - मतलब सुमन?
सुमन - कुछ नहीं भईया.. सबको कहो देखकर चले.. मोच नहीं आएगी..
शबनम सबको चाय देते हुए गौतम के पासवर्ड आकर - ग़ुगु भईया चाय..
गौतम चाय लेते हुए धीरे से शबनम को - thanks मालकिन..
शबनम मुस्कुराते हुए वापस रसोई में चली जाती है..

चेतन बाहर से हॉल में आते हुए - पापा जीजाजी का फ़ोन आया था.. वो ऋतू को लेकर आने ही वाले है..
गौतम - कल विदाई हुई थी आज वापस भी आ रहे है..
गायत्री हसते हुए - ग़ुगु.. विदाई के बाद दुल्हन को पगफेरे की रसम के लिए वापस अपने माइके आना होता है..
सुमन - रहने दो माँ.. अंग्रेजी स्कूल में जाकर इसे ये सब रस्म औऱ रीवाज ढकोसला लगने लगा है..
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कोमल गौतम का गाल चूमते हुए - ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. मेरा ग़ुगु तो कितना प्यारा है.. शादी वाले दिन मेरे ग़ुगु के सामने कोई औऱ नहीं नज़र ही नहीं आ रहा था.. चादन सा है मेरा ग़ुगु..
सुमन से कोमल जलते हुए - इतना लाड प्यार करने की जरुरत नहीं है भाभी.. ये पहले ही बहुत बिगड़ चूका है औऱ मत बिगाडो इसे..
कोमल - अरे बिगड़ना तो रईसो का शोक रहा है.. अब मेरा ग़ुगु जवानी में नहीं बिगड़ेगा तो कब बिगड़ेगा?
सुमन को कोमल से अब औऱ जलन होने लगी थी औऱ समझ रही थी कोमल क्या करने की कोशिश कर रही है उसने कहा - रहने दो भाभी.. मेरा ग़ुगु कोई रईस नहीं है..
कोमल गौतम के बाल सहलाते हुए - ऐसा क्यों कहती हो सुमन.. इतना सब तुम्हारे भईया ने जो कमाया है उसे खर्च करने वाला भी तो कोई चाहिए... ग़ुगु नहीं करेगा तो कौन करेगा? आखिरी ग़ुगु भी इसी घर का बेटा है..
सुमन से इस बारहा ना गया तो उसने कहा - मैं औऱ मेरा ग़ुगु जिस हाल मैं है खुश है भाभी.. आपको अगर आपके पैसे उड़ाने के लिए कोई वारिश चाहिए तो भईया के साथ एक बच्चा औऱ कर लीजिये...
कोमल सुमन की बात सुनकर मन ही मन सुमन पर झल्ला रही थी औऱ उसे दो चार खरी खोटी सुना देना चाहती थी मगर सबके वहा होने से वो ये बातें मन ही मन दबा गई.. संजय औऱ गायत्री जानते थे की कोमल बाँझ है औऱ सुमन ने अभी अभी उसे ताना मारा था..
गायत्री ने बात सँभालते हुए कहा - अरे अब कोमल को क्या जरुरत है बच्चा करने की.. हमारा ग़ुगु है तो.. चेतन तो संजय की तरह ही काम धंधे में घुस गया.. औऱ ऋतू पराई हो गई.. अब तो आरती से उम्मीद है वो हमें खुशखबरी दे दे..
आरती मुस्कुराते हुए गौतम को देखकर रसोई में चली गई..
गायत्री - देखो कैसे शर्मा के चली गई गई..
संजय - माँ मुझे एक जरुरी काम से बाहर जाके आना है.. एक घंटे में आ जाऊंगा दामाद ज़ी आये तो आप संभाल लेना..
चेतन - पापा मैं भी चलता हूँ..
कोमल - अरे यहां भी तो कोई होना चाहिए..
चेतन - आप लोग हो ना.. ग़ुगु भी तो है..


कोमल सुमन की बातों को दिल में बैठा चुकी थी उसे अपने बाँझ होने का दुख हो रहा था औऱ सुमन पर गुस्सा आ रहा था.. कोमल छत पर बने कमरे के पीछे कोने में सिसकती हुई खड़ी हो कर आंसू बहाने लगी थी..
गौतम जानता था की कोमल को सुमन की उस बात का कितना दुख पंहुचा है.. इसलिए गौतम कोमल के पीछे पीछे कुछ देर बाद ही छत पर आ गया था..
गौतम ने रो रही कोमल को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया औऱ कोमल की गर्दन चूमते हुए कहा..
गौतम - मामी आपके मुंह से रोते हुए सिसकियाँ अच्छी नहीं लगती बल्कि चुदवाते हुए सिसकियाँ अच्छी लगती है..
कोमल गौतम को देखकर आंसू पोछते हुए - तू कब ऊपर आया बेटा? बता तो देता.. मैं रो नहीं रही थी.. मेरी आँखों में तो कचरा चला गया था..
गौतम कोमल को अपनी तरफ घुमाकर दिवार से स्टाते हुए - मुझसे झूठ बोलोगी तो ऐसी गांड मारूंगा मामी अगले दस दिन रेंगति हुई चलोगी.. समझी? माँ की बात का बुरा लगा ना आपको?
कोमल मुस्कुराते हुए - मुझे क्यों सुमन की बात का बुरा लगने लगा बेटा? मैं तो यूँ ही ऋतू को याद करके रो रही हूँ..
गौतम ब्लाउज के ऊपर से कोमल के चुचे पकड़तकर मसलते हुए - मामी आपको झूठ बोलना भी नहीं आता..
कोमल अपने बूब्स ओर से गौतम का हाथ हटाती हुई - ग़ुगु.. कोई आ जायेगा.. बंद कमरे वाली चीज़े खुले में मत करा कर.. ये बोलकर कोमल गौतम को पीछे कमरे में ले जाती है.. औऱ अपनी साडी का पल्लू गिराते हुए गौतम के सामने घुटनो ओर बैठकर उसकी जीन्स खोलते हुए लंड हाथ में लेकर कहती है - सुबह से मेरे आगे पीछे घूम रहा था.. मैं तभी समझ गई थी आज मेरी इज़्ज़त खतरे में है..

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गौतम कोमल को लोडा चूसाते हुए - अब आप हो ही इतनी ब्यूटीफुल मामी.. आपको देखकर दिल कैसे ना करें चोदने का.. रात को तो आप सो गई थी वरना रात को ही मैं आपको प्यार करता..
कोमल मुंह से लंड खड़ा करके खड़ी होती हुई - इतनी जरुरत थी तो जगा लेता ग़ुगु.. मैं कुछ कहती थोड़ी तुझे..
गौतम कोमल को उस कमरे के बेड पर लेटा कर साडी ऊपर करके चड्डी नीचे सरकता हुआ - आप सोते हुए प्यारी लग रही थी मामी.. मुझे जगाना सही नहीं लगा..
ये कहते हुए गौतम ने अपना लंड कोमल की चुत में डाल दिया औऱ धीरे धीरे प्यार से चोदने लगा..
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कोमल गौतम को चूमकर आहे भरते हुए - आज क्या बात है ग़ुगु.. तू इतना प्यार से कर रहा है.. उस दिन तो जान निकाल दी थी तूने.. आज बहुत प्यार आ रहा है तुझे अपनी मामी पर?
गौतम चोदते हुए - मामी आप हो ही इतनी प्यारी.. प्यार तो आएगा ही औऱ आपकी चुत भी बहुत टाइट है.. खामखा जोराजोरी में बेचारी को दर्द सहना पड़ेगा..
कोमल - मेरी इतनी परवाह है तुझे ग़ुगु? काश तू मेरा अपना बच्चा होता.. फिर देखती वो सुमन की बच्ची कैसे मुझे इतना सब सुनाती..
गौतम कोमल को पलटकर पीछे से चुत चोदते हुए - मामी आप भी तो माँ को इतना सब सुना देती हो.. आप दोनों की कैट फाइट किसी फ़िल्मी मूवी से ज्यादा मसालेदार होती है..
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कोमल मुस्कुराते हुए - मैं तेरी माँ से कितना भी लडू ग़ुगु.. तू कभी मुझसे नाराज़ मत होना.. मैं बहुत प्यार करती हूँ तुझे..
गौतम हलके तेज़ धक्के मारते हुए - जानता हूँ मामी.. आप तो मेरी गर्लफ्रेंड हो.. औऱ इतनी टाइट चुत वाली गर्लफ्रेंड से नाराज़ नहीं होता मैं..
कोमल सिसकियाँ लेते हुए - ग़ुगु बेटा.. फ़ोन आ रहा है..
गौतम चुदाई रोककर साइड में पड़े फ़ोन को उठाते हुए - आपका आ रहा है मामी..
कोमल फोन उठाकर - हेलो..
चेतन - माँ जीजाजी.. दस मिनट में पहिचने वाले है..
कोमल - औऱ तु अपने पापा के साथ कब आ रहा है?
चेतन - हम निकल चुके है आधा घंटा लग जाएगा..
कोमल फ़ोन काट कर - ठीक है..
कोमल - ग़ुगु बेटा जल्दी कर दस में ऋतु आने वाली है..
गौतम वापस चुदाई शुरू करता हुआ - ठीक है मामी बस पांच मिनट औऱ.. ये कहते हुए गौतम सुमन की चुत में ताबड़तोड़ झटके मारने लगा जिससे कोमल औऱ ज्यादा सिसकियाँ भरने लगी..
कोमल सिसकिया भरते हुए - बेटा थोड़ा धीरे.. ग़ुगु.. आह्ह... बेटा आराम से.. आह्ह.. ग़ुगु धीरे चोद बेटा अपनी मामी को..

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गौतम - मामी आप लग ही इतनी प्यारी रही हो.. कहा था ना चुदवाते हुए सिसकियाँ लेती हुई अच्छी लगती हो.. रोते हुए नहीं..
कोमल झड़ते हुए - ग़ुगु.. आहहह... बेटा...
गौतम कोमल के साथ झड़ते हुए - आहहह... मामी मैंरा भी हो गया..
कोमल औऱ गौतम एक साथ झड़े औऱ मुस्कुराते हुए कोमल गौतम को बेतहाशा चूमती हुई प्यार करने लगी.. फिर दोनों ने खड़े होकर अपने आपको ठीक किया..
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कोमल मुस्कुराते हुए गौतम का गाल खींचकर - बस.. हो गयी इच्छा पूरी? अब तो खुश मेरा ग़ुगु?
गौतम मुस्कुराते हुए कोमल का हाथ चूमकर - बहुत खुश मामी.. जितना फेशन आप करती हो.. आपको देखकर कोई नहीं कह सकता आपकी इतनी टाइट होगी..
कोमल - तुझे मज़ा आया ना बेटा..
गौतम - बहुत मामी..
कोमल - ग़ुगु तू सुमन को समझा ना.. यही क्यों नहीं रह जाती वो तुझे लेकर.. क्यों ज़िद पर अड़ी हुई है.. मैं जानती हूँ उसके औऱ जगमोहन के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा.. वहा उस छोटे से पुलिस क्वाटर में कब तक दिन गुजारेगी?
गौतम - आप खुद ही क्यों नहीं समझा देती मामी.. मेरे समझाने से तो वो नहीं समझेगी.. उनकी औऱ आपकी लव स्टोरी भी तो बहुत उलझी हुई है..
कोमल गौतम के गाल सहला कर हसते हुए - चुप पागल.. चल नीचे.. ऋतू आ गई लगता है..

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राहुल ऋतू, ऋतू की सास औऱ ससुर सब हॉल में बैठे हुए थे.. उसके साथ गायत्री सुमन आरती औऱ अब कोमल भी आ बैठी थी.. नाश्ता सामने टेबल रखा था.. हंसी ख़ुशी का माहौल था.. शबनम चाय बना रही थी औऱ शबनम के पीछे गौतम उसे इधर उधर छू कर छेड रहा था जिस पर शबनम मुस्कुराते हुए बार बार गौतम को छूने से रोक रही थी..
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गौतम ने थोड़ा सा मौका पाकर शबनम की कमर पर अपने हाथों से चीकूटी काट ली औऱ शबनम गौतम की तरफ बनावटी गुस्से वाली आँखों से देखती हुई धीरे से बोली बोली..
शबनम - अब कुछ किया तो थप्पड़ पड़ेगा..
गौतम मुस्कुराते हुए गाल आगे करके - मारो ना मालकिन..
शबनम रसोई के दरवाजे को देखकर जल्दी से एक प्यार भरा चुम्मा गौतम के गाल पर करके एक धीमा सा थप्पड़ मार देती है..
गौतम शबनम को पकड़कर बाहों में भरता हुआ - गाल पर भी कभी चुम्मा होता है मालकिन? चूमा तो होंठों से होंठ मिलते है तब होता है..
शबनम दरवाजे को देखती हुई - छोड़ ग़ुगु कोई आ गया तो मेरी नोकरी चली जायेगी..
गौतम होंठ आगे करके - पहले चुम्मा दो मालकिन तभी छोडूंगा..
शबनम जल्दी से गौतम के होंठ चूमकर - बस अब छोड़..
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गौतम शबनम को छोड़कर - चाय बनाने के बाद छत पर आ जाना मालकिन.. साथ में एक सुट्टा मारेंगे..
शबनम - अभी नहीं ग़ुगु.. मालकिन बुला लेगी मुझे.. बाद में..
गौतम शबनम का बोबा दबाकर - ठीक है मालकिन..
शबनम मुस्कुराते हुए गौतम को धक्का देकर - अब जा यहां से.. वरना कोई देख लेगा..

गौतम रसोई से हॉल में आ जाता है..
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आरती गौतम का हाथ पकड़कर अपने पास बैठाते हुए - देवर ज़ी आओ.. हमारे साथ भी बैठो.. देखो आपकी दीदी.. आते ही आपके बारे में पूछ रही है.. मैंने भी कह दिया हमने अभी तक देवर ज़ी को कहीं जाने नहीं दिया औऱ रोक कर रखा है..
गौतम ऋतू को देखकर - भाभी दीदी की बोलती बंद है.. लगता है वापस आकर अच्छा नहीं लगा दीदी को..
ऋतू सरक कर अपने बगल में जगह बनाती हुई - तू इधर आ मेरे पास.. अभी बताती हूँ तुझे..
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गौतम उठकर ऋतु के पास बैठ जाता है.. औऱ ऋतू गौतम का कान पकड़कर - कब से आकर बैठी हूँ औऱ तू है की छिपा हुआ था?
राहुल हसते हुए - आराम से ऋतू.. भाई है तुम्हारा..
ऋतू की सास बबिता - हा ऋतू.. कितना जोर से कान खींचा है तूने.. दर्द होगा बेचारे को..
ऋतू - कुछ नहीं होगा इसे.. जब देखो मुझे सताने के बहाने ढूंढता रहता है..
सुमन - ऋतू आराम से बेटा..
ऋतू - आप बीच में मत बोलो बुआ.. जब से गई हूँ सबने फ़ोन किया है एक इसी बेशर्म को मेरी याद नहीं आई..
गौतम कान छुड़ाते हुए - अच्छा सॉरी ना.. छोडो..
संजय औऱ चेतन भी आकर सोफे पर बैठ जाते है..
सब हंसी ख़ुशी के माहौल में थे आपस में बातें कर रहे थे शबनम चाय की ट्रे लाकर चाय बाँट देती है औऱ नाश्ता करते हुए सब चाय पिने लगते है.. कुछ देर इसी तरह बातें करने के बाद में रितु अपने कमरे में चली जाती है और उसके कुछ देर बाद गौतम भी ऋतु के कमरे में चला जाता है..

गौतम ऋतू को गले लगता हुआ - बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू.. याद आई मेरी रात में?
ऋतू - कमीने.. तेरी याद में तो नींद भी नहीं आई.. पता नहीं कैसे रहूंगी तेरे बिना अब..
गौतम - चिंता मत कर ऋतू.. मैं टाइम टाइम पर आता रहूँगा तुझसे मिलने.
ऋतू अपनी साडी उठाकर गौतम का लंड निकालकर अपनी चुत में घुसाती हुई - काश में तेरी दुल्हन बन पाती मेरे भाई.. तुझसे मिलने के लिए छुपना नहीं पड़ता..
गौतम चोदना शुरु करते हुए - फ़िक्र मत कर मेरी बहना जल्दी ही कोई ना कोई औऱ उपाय खोज लेंगे हम दोनों...
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ऋतू चुदवाते हुए - मैं तो कल से तेरे इस लंड के बारे में ही सोच रही थी ग़ुगु.. बहुत मस्त औऱ मोटा है.. काश हर रात ये मेरे नसीब में होता.. पता नहीं कौन इसे हर रात अपनी चुत में लेगी.. भाई तू वादा कर मुझे हर दम ऐसे ही प्यार करेगा..
गौतम - ऋतू तू मेरी बहन है जो कहेगी मैं मरते दम तक वही करूँगा.. बस मुझे अपनी ये गांड दे दे
ऋतू - आज नहीं भाई.. वक़्त नहीं है.. कभी फुर्सत में लेना मेरी गांड.. अभी मेरी चुत से काम चला ले.. अगली बार मैं खुद तेरे सामने अपनी गांड परोस दूंगी..
गौतम - वादा कर रही है ऋतू.. भूलना मत.. अगली बार गांड नहीं दी तो जबरदस्ती ले लूंगा..
ऋतू - ले लेना भाई.. मेरे ऊपर तेरा पूरा हक़ है.. अभी जल्दी कर नहीं तो भाभी आ जायेगी..
गौतम चोदते हुए - बस बहाना झड़ने वाला हूँ तेरी चुत में..
ऋतू - मैं भी झड़ने वाली हूँ भाई.. साथ में झड़ते है.. आहहह...
गौतम रितु एक साथ झड़ जाते हैं और फिर कुछ देर बाद एक दूसरे को देखते हुए बातें करने लगते है..
ऋतू - विक्रम का फ़ोन आया था..
गौतम - क्या बोला उसने?
ऋतू - माफ़ी मांग रहा था.. मैंने कह दिया वापस नज़र आया तो वीडियो नेट पर वायरल कर दूंगी..
गौतम - अच्छा किया बहना.. अब सबसे बचा के रखना अपनी चुत का अनमोल गहना..
ऋतू गौतम को चूमते हुए - वापस जाना पड़ेगा भाई..
गौतम - फ़ोन करती रहना बहना.. अगली बार मिलने का इंतजार रहेगा..
ऋतू - मुझे भी..
ऋतु रस्म निभाकर शाम को वापस चली जाती है औऱ अगले दो दिन गौतम गायत्री कोमल आरती औऱ शबनम की जहा मौका मिलता है वही चुदाई करता है.. औऱ आज सुमन के साथ वापस अजमेर जाने को तैयार था.. दोनों दोपहर को अजमेर के लिए निकलने वाले थे औऱ अभी सुबह हो रही थी..

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देवर ज़ी कुछ दिन औऱ रुक जाओ ना.. आपके बिना सब कुछ सुना हो जाएगा फिर से..
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रुकना तो मैं भी चाहता हूँ भाभी.. मगर क्या करू? आप तो जानती है माँ को अब अगर मैं कुछ बोलूंगा तो वो मुझे कितना सुनाएंगी..
आरती जीन्स के ऊपर से गौतम के लंड पर हाथ फिराती हुई - बहुत ख्याल रखा है अपने अपनी इस भाभी का देवर ज़ी.. औऱ बहुत सुख भी दिया है.. आप तो कुछ दिनों में दिल के अंदर इतना गहरा उतर गए कि सागर की गहराई भी उसके आगे कुछ नहीं है.. मैंने आपका कितना दिल दुखाया कितना कुछ बोला मगर आपने मुझे कितना प्यार किया.. मुझे माफ़ कर देना देवर ज़ी..
गौतम आरती के होंठ पकड़कर - कितनी ड्रामेबाज़ हो आप भाभी.. मैंने कहा ना हर महीने आपसे मिलने आऊंगा.. आप फ़िक्र मत करो.. आपकी चुत को वापस सिकुड़ने नहीं दूंगा..
आरती मुस्कुराते हुए - शुक्रिया देवर ज़ी..
गौतम - सुबह सुबह आपकी चुत से शुरुआत हुई है.. लगता है आज दिन अच्छा जाएगा मेरा..
आरती छत पर से नीचे जाते हुए - वापस चाहिए तो बता दो देवर ज़ी मैं कुछ नहीं बोलूंगी..
गौतम - अब थोड़ा वक़्त लगेगा भाभी..
आरती - ठीक है देवर ज़ी..
आरती छत से नीचे चली जाती हैऔऱ उसके कुछ देर बाद चेतन ऊपर आ जाता है..

यहां अकेला क्या कर रहा है ग़ुगु..
कुछ नहीं चिंटू भईया बस कुछ सोच रहा था..
क्या सोच रहा था ग़ुगु?
भाभी के बारे में भईया.. भाभी ने बहुत ख्याल रखा है मेरा..
चेतन मुस्कुराते हुए - ख्याल तूने भी अपनी भाभी का बहुत रखा है.. वो बता रही थी कैसे तू उसका सबसे प्यारा साथी बन गया..
गौतम - कहा चेतन भईया.. मैं बस थोड़ा हंसबोल लिया भाभी से.. भाभी इतने में ही खुश हो गई..
चेतन - ग़ुगु मैं भी तुमसे सिर्फ 6 साल बड़ा हूँ.. मुझे चिंटू ही कहकर बोल.. जैसे पहले बोला करता था.. ये फॉर्मेलिटी छोड़ दे..
गौतम - ठीक है चिंटू..
चेतन - अच्छा तूने एग्जाम के बाद का क्या सोचा है?
गौतम - कुछ नहीं.. बस कोई जॉब कर लूंगा औऱ क्या..
चेतन - पागल हो गया है हम जॉब देते है करते नहीं है.. तू एग्जाम के बाद बुआ को लेके यही आ जाना.. यहां अपना कितना काम है उसे कौन संभालेगा..
गौतम - नहीं चिंटू.. माँ कभी इस बात के लिए राज़ी नहीं होगी..
चेतन - ग़ुगु.. मैं जानता हूँ बुआ नहीं मानेगी मगर वो तेरी बात मानने से इंकार नहीं करेगी.. औऱ कल रात आरती भी तेरे जाने का सोच कर रो रही थी..
गौतम - भाभी रो रही थी.. मगर अभी तो उन्होंने कुछ नहीं बताया उसके बारे में..
चेतन - औरत को बात छुपीना औऱ बताना अच्छे से आता है ग़ुगु.. मैं जान चूका हूँ कि वो तुझसे प्यार करने लगी है तेरे बिना नहीं रह पाएगी... उसकी ख़ुशी के लिए एक बार कोशिश करना..
गौतम - चिंटू.. भाभी तुम्हारी पत्नी है..
चेतन - काहेकि पत्नी ग़ुगु.. उसे कभी पत्नी वाला सुख तो मैं दे ही नहीं पाया.. मैं सुबह से रात तक इसलिए दूकान पर रहता हूँ कि मुझे आरती की बातें उसके ताने ना सुनने पड़े.. मगर जब से तू आया है उसने एक बार भी मुझसे गुस्से में या अपने अड़ियलपन से बात नहीं की.. ग़ुगु मैं जानता हूँ तू अपनी भाभी के साथ सो चूका है.. तूने उसे वो सुख दिया है जो एक मर्द से एक औरत चाहती है..
गौतम नज़र झुका - मैं बहका गया था चिंटू.. मैं भाभी के साथ वो सब नहीं करना चाहता था मगर अपने आप सब होता चला गया.. मुझे माफ़ कर दे..
चेतन - ग़ुगु.. इसमें माफ़ी वाली कोई बात नहीं है.. मैं तो खुश हूँ कि तू आरती का ख्याल रख रहा था.. मैं अब भी वही चाहता हूँ.. तू ऐसे ही आरती का ख्याल रखे.. मुझे तेरे औऱ आरती के रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं है..
ग़ुगु - मैं जानता हूँ चिंटू तू ऐसा क्यों बोल रहा है.. तू चिंता मत कर भाभी को मैं अच्छे से खुश रखूँगा.. वो तुझे परेशान नहीं करेंगी.. औऱ अब तू अपनी जिंदगी भी खुलकर ज़ी सकता है.. यूँ घुट घुट कर जीने की तुझे क्या जरुरत? दुनिया की परवाह छोड़ दे चिंटू.. दुनिया ने किस किस को क्या कुछ नहीं बोला..
चिंटू - मैं समझ नहीं पाया ग़ुगु.. तू कहना क्या चाहता है..
ग़ुगु चिंटू का हाथ पकड़ कर - चल दोनों भाई कहीं घूम के आते है..
चिंटू - कहा ग़ुगु..
ग़ुगु - अभी पता चल जाएगा..
गौतम चिंटू के साथ कहीं चला जाता है औऱ किसी को कुछ massage करता है...

गौतम चिंटू को लेकर एक फाइव स्टार होटल की तरफ आ गया था जहा किसी फ़िल्म की स्टार कस्ट ठहरी हुई थी.. गौतम चिंटू को लेकर एक रूम में आ गया था..
चिंटू - ग़ुगु मुझे यहां क्यों लेकर आया है? मुझे दूकान जाना है..
ग़ुगु - थोड़ी देर वेट करो चिंटू.. सब पता चल जाएगा..
चिंटू - तू क्या कर रहा है मेरी समझ ही नहीं आता..
गुगु - चिंटू मैं जानता हूँ तुझे लड़कियों में कोई दिलचस्पी नहीं है.. तू गे है.. औऱ तू ये बात अब तक सबसे छीपाता आया है.. मगर अब तुझे इस तरह घुट घुट कर जीने की कोई जरुरत नहीं..
चिंटू हैरानी से - ग़ुगु कैसे?
गौतम - चिंता मत करो चिंटू.. मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा औऱ ना ही तुझे ऐसे घुट घुट के जीने दूंगा..
चिंटू शरमाते हुए - तुझे कैसे पता ग़ुगु.. मेरे बारे में..
गौतम - शादी वाली रात की अगली सुबह.. जब मैं टहल रहा था तब मैंने देखा था.. तू जिस आदमी के साथ था उसे रात को मैने ही बुलाया था..
दरवाजा की बेल बजते ही गौतम दरवाजा खोलकर - आओ वसीम.. किसी ने रोका तो नहीं..
वसीम - ऐसी जगह हमारे जैसे गरीब लोगों तो रोका ही जाता है भईया.. पर आपने रिसेप्शन पर बोला हुआ था इसलिए ज्यादा तकलीफ नहीं हुई आने में..
गौतम - वसीम.. अब से तुम्हे ये काम करने की जरुरत नहीं.. मेरा भाई तुम्हे काम पर रखना चाहता है.. जितना तुम महीने में कमाते हो उससे दुगुनी तनख्वाह मिलेगी.. काम सिर्फ इतना की मेरे भाई को हर दम खुश रखना होगा...
वसीम - जैसा आप बोले..
गौतम चेतन की तरफ इशारा करते हुए - जाओ वसीम भईया इंतजार कर रहे है..
वसीम चेतन के पास जाकर प्यार से उसके होंठ चूमने लगता है औऱ चेतन शर्माते हुए ग़ुगु को देखकर वसीम को रोकते हुए - ग़ुगु सुन.. ग़ुगु..
गौतम रूम से बाहर जाते हुए - एन्जॉय करो भईया..

ये कहकर गौतम रूम से बाहर आ जाता है औऱ दरवाजे पर डु नॉट डिस्टर्ब का sign लटका कर जैसे ही पीछे मुड़ता है उसका पैर फिसल जाता है औऱ वो इस रूम के जस्ट सामने वाले रूम में आगे की तरफ जाते हुए जमीन पर गिर जाता है..
 
Update 34


गौतम जैसे ही रूम के अंदर दाखिल होता हुआ जमीन पर गिरता है वह देखता है कि इस रूम में घनघोर अंधेरा था और कोई भी इस कमरे में नहीं था.
गौतम जैसे तैसे उठकर अपने आप को संभालते हुए पीछे मुड़कर बाहर जाने की तरफ होता है कि कोई औरत रूम के अंदर एक तरफ से आते हुए दरवाजे को बंद कर देती है औऱ अँधेरे में गौतम को कोई औऱ समझकर उसके हाथ में कंडोम देती हुई बेड पर अपनी साडी उठाकर घोड़ी बनती हुई गौतम से कहती है..
औरत - डायरेक्ट साहब.. आप भी कभी भी याद कर लेते है.. इंटरव्यू को बीच में छोड़कर ब्रेक लेके आई हूँ.. एक घंटे है जल्दी कीजिये..
कमरे में इतना अंधेरा था कि कोई एक दूसरे की शक्ल देखना तो दूर एक दूसरे को आसपास खड़ा हुआ भी देख कर नहीं पहचान सकता था कि वह कौन है.. सिर्फ लोग एकदूसरे की परछाई को ही देख सकते थे.. गौतम ने बिस्तर पर घोड़ी बनी हुई औरत की मोटी गांड देखी तो उसके लंड में अकड़न आने लगी.. उसे लगा कि मौका अच्छा है.. और गौतम मौके पर चौका मारे बिना नहीं रह सकता था..
गौतम ने जल्दी से जीन्स नीचे सरका कर बिना कंडोम पहने लंड पर थूक लगाया औऱ औरत के बाल पकड़ कर पीछे से उसकी चुत पर लोडा सेट करके एक जोरदार धक्का मार दिया.. e6d1cc477842fa84ff7388e270c89a14
जिससे गौतम का पूरा लंड औरत की चुत चिरता हुआ एक ही बार उसमें घुस गया मगर साथ में औरत की हालात भी खराब कर गया..
लंड घुसते ही औरत इतनी जोर से चीखी की गौतम घबरा गया.. होटल के रूम अगर साउंड प्रूफ नहीं होते तो औरत की आवाज होटल के बार खड़ी जनता को भी साफ साफ सुनाई दे जाती..
औरत चीखने के बाद दो तीन मिनट तकिये में मुंह देकर पड़ी रही फिर अपने फ़ोन की फ्लेशलाइट ऑन करके अपना चेहरा पीछे घूमती हुई गौतम को देखने लगी..
गौतम औऱ उस औरत ने फ्लेशलाइट में एकदूसरे की शकल देखी तो दोनों हैरानी से एकदूसरे को देखने लगे.. गौतम औरत का चेहरा देखकर हैरान औऱ रोमांचित हो उठा.. घोड़ी की जगह अब औरत पेट के बल बेड पर पड़ी हुई थी औऱ गौतम उसकी चुत में लंड डाले उसके ऊपर पड़ा हुआ था..

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गौतम औरत का चहरा देखकर बोला..
गौतम - बिग फन ma'am...
औरत गौतम को ऊपर से धक्का देकर पलट जाती है औऱ एक जोरदार थप्पड़ गौतम को जमाती हुई कहती है - what the fuck who you are?
गौतम तप्पड़ खाने के बाद असंतुलित होकर वापस औरत पर गिर गया औऱ उसका लंड फिर से संयोगवश औरत की चुत में अपने आप घुस गया जिससे वापस औऱत की चिंख निकल गयी औऱ वो आह्ह.. करते हुए अपनी चुत में गौतम के तगड़े मोटे लंड को महसूस करती हुई सिसक उठी..
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गौतम चुत की गर्माहट औऱ टाइटनेस महसूस करते हुए चोदे बिना नहीं रह सका औऱ चोदते हुए बोला - सॉरी ma'am.. गलती से चला गया.. मैं आपका बहुत बड़ा फन हूँ... आपकी सारी फिल्मे वेबसीरीज देखता हूँ.. आपकी तारे जमीन ओर तो मैंने 50 से ज्यादा बार देखी है..
औरत की चुत में गौतम के लंड से तहलका मच चूका था वो लंड की सख़्ती औऱ उसके घेराव को महसूस करते हुए कामुकता औऱ मादकता से भर चुकी थी.. गौतम बिना किसी का लाज शर्म या हया के उसी तरह औरत के ऊपर पड़ा हुआ उसे चोदने लगा था.
गौतम रोमांचित औऱ ख़ुशी से भरा हुआ था गौतम एक पल को भूल गया था की उसका शैतानी लंड औरत की गहराई में घुसा हुआ उसे चोद रहा है गौतम वापस बोला..
गौतम - tisca ma'am आप मेरी फेवरेट हो.. सच कहु तो आपके आगे करीना कटरीना दीपिका मुझे सब पानी कम चाय है...
(Tisca Chopra 51)
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गौतम ने इतना कहा ही था की दरवाजे पर रिंग हुई..
Tisca ने गौतम को धक्का देकर बगल में गिरा दिया औऱ बेड से उठने लगी.. जैसे ही tisca उठी उसकी जांघ कापने लगी औऱ उसे चुत पर अजीब सा महसूस हुआ उसने हाथ लगाया औऱ देखा तो फ्लेशलाइट में उसे हल्का सा खून दिखा.. Tisca ने फलेश गौतम पर डाल कर गुस्से में एक नज़र गौतम को देखा फिर दरवाजा खोलने बढ़ गई.. गौतम डरकर बेड के पासअलमारी के अंदर छिप गया..
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Tisca लंगड़ती हुई धीरे धीरे दरवाजे तक पहुंची औऱ लाइट ऑन करके दरवाजा खोलकर बाहर देखने लगी..
कमरे के बाहर एक आदमी खड़ा हुआ था जिसने दरवाजा खुलने पर tisca से कहा - tisca it's an emergency.. I have to go to the airport.. Sorry i bothered you & ruin your interview.. इतना कहकर आदमी वहा से चला गया..
Tisca ने दरवाजे के बाहर डु नोट डिस्टर्ब का sign लटका दिया औऱ दरवाजा बंद करके वापस लंगड़ती हुई अंदर आ गई.. Tisca ने टेबल पर वाटर बोतल से पानी गिलास में डाला औऱ पूरा गिलास पानी पीकर वही पड़े सिगरेट के पैकेट से सिगरेट निकालकर लाइटर से सुलगाते हुए दो - तीन कश लेकर बेड को देखने लगी जहा सफ़ेद चादर पर खून की 3-4 बून्द गिरी हुई थी. tisca ने अपनी चुत को लाइट के उजाले में देखा तो पाया की चुत पर हल्का सा खून लगा हुआ था औऱ उसकी चुत में अब कुलबुलाहत हो रही थी जो इस बात का संकेत थी कि उसे गौतम के लंड पसंद आ गया था..

Tisca ने मुस्कुराते हुए अपनी चुत को सहलाया औऱ सिगरेट के अगले कश मारते हुए कुछ सोचने लगी फिर अलमीरा के सामने आकर अलमीरा खोलते हुए गौतम को अंदर बैठा हुआ देखती है जो अब अपनी जीन्स ठीक से पहन चूका था.. लाइट के उजाले में tisca को गौतम बहुत खूबसूरत औऱ प्यारा सा लड़का लगा था लेकिन जो हरकत उसने अभी उसके साथ की थी उस वजह से tisca गौतम को गुस्से भरी आँखों से देख रही थी..
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गौतम tisca को देखकर अलमीरा से बाहर आते हुए - sorry ma'am.. गलती से आपके रूम आ गया था.. वैसे आप टीवी पर जितनी खूबसूरत दिखती हो उससे कहीं ज्यादा रियल में हो.. मैं अपने फ्रेंड्स को बताऊंगा तो उन्हें यक़ीन ही नहीं होगा..
Tisca गौतम को चुपचाप खड़ी हुई देख सुन रही थी औऱ सिगरेट के कश खींचते हुए धुआँ छोड़े जा रही थी..
गौतम आगे फिर कहता है - आपकी न्यू मूवी आ रही है ना सावन की रात? मैंने ट्रेलर देखा था उसका.. मूवी बहुत अमेज़िंग लग रही है...अच्छा ma'am मैं जाता हूँ.. Sorry for troubling you..
गौतम इतना कहकर जाने के लिए पीछे मुड़ा ही था कि tisca ने गौतम के कान पकड़कर वापस अपनी तरफ घुमा लिया औऱ सिगरेट का आखिरी कश लेकर सिगरेट बुझाते हुए गौतम को धक्का देकर बेड पर गिरा दिया औऱ उसके ऊपर चढ़ती हुई गौतम की जीन्स को पकड़कर खोलने लगी.. जीन्स का बटन खोलने के बाद चैन नीचे करके जीन्स नीचे सरका कर tisca ने गौतम को देखा तो पाया कि गौतम चुपचाप tisca को ऐसे देख रहा था जैसे कोई सपना हो..
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Tisca गौतम का लंड एक हाथ में पकड़कर सहलाती हुई हैरानी से उसके लंड को देख रही थी औऱ बार बार गौतम के चेहरे को देखकर दूसरे हाथ से गौतम के गाल बाल औऱ गले पर उंगलियां फिरा रही थी..
Tisca ने अच्छे से गौतम के लंड का जायजा लिया फिर मुस्कुराते हुए गौतम के होंठ पर अपने होंठ रखकर एक प्यार से भरा हुआ चुम्बन करके बोली..
Tisca - क्या age है तेरी?
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गौतम ऐसे tisca को देख रहा था जैसे उसे साँप सूंघ गया हो..
Tisca ने वापस पूछा - 18 का तो है ना तु?
गौतम में इस बार हाँ में सर हिला दिया औऱ tisca ने गौतम के लंड पर अपना मुंह लगा दिया..
Tisca ने गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूमते हुए चूसना शुरु कर दिया औऱ गौतम अपनी पसंदीदा मिल्फ हीरोइन के मुंह से blowjob का सुख अनुभव करके सातवे आसमान पर पहुंच चूका था..

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Tisca लंड के साथ साथ दोनों बॉल्स भी मुंह में लेकर बड़ी आराम औऱ प्यार से चाट औऱ चूस रही थी.. इसके साथ ही वो बार बार प्यार औऱ काम वासना की निगाह से गौतम को देख रही थी जिससे गौतम भी अब लाज शर्म उतारने लगा था..
Tisca ने थोड़ी देर लंड चूसकर गौतम को पीछे धकेल दिया औऱ अपनी साडी उतारकर फेंकते हुए पटीकोत ऊपर करके गौतम के लंड के ऊपर बैठने लगी औऱ उसका लंड अपनी चुत में लेते हुए बोली.. 20739992c06f4009d0830a99d0a2c35f 3036ea67e7573b26ee04d88adfa125fe
Tisca - नाम क्या है तेरा?
गौतम - ma'am गौतम..
Tisca कुछ सोचकर - गौतम... निक नेम ग़ुगु... तू वही है ना जो हर सुबह औऱ शाम मुझे इंस्टा पर गुडमॉर्निंग baby गुडनाइट baby का massage सेंड करता है हार्ट के साथ?
गौतम - ज़ी.. ma'am बहुत बड़ा फन हूँ आपका..
Tisca मुस्कुराते हुए लंड पूरी तरह चुत में लेकर अपनी गांड हिलाते हुए - बड़ा कहा इतना छोटा सा तो है तू.. बस तेरा ये सामान बहुत बड़ा है.. पहली बार किसी इंडियन के पास इतना बड़ा औऱ मजबूत सामान देखा है.. वो भी किसी बच्चे के पास..
गौतमआहे भरते हुए - बीस साल का हूँ ma'am.. बच्चा नहीं हूँ..
Tisca - मैं 51 की हूँ.. मेरे सामने तो छोटा सा baby ही है तू..
गौतम नीचे से झटके मारते हुए - आपको देखकर लगता नहीं की आप 51 साल की हो.. ऐसा लगता है आप अभी भी 25 की हो..
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Tisca सिसकियाँ लेते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोलती हुई - मेरे साथ फल्ट कर रहा है? तेरे सामान के साथ साथ तुझे भी अपनी चुत में अंदर डाल लुंगी.. समझा baby?
गौतम - ma'am सच में.. आप बहुत प्यारी लगती हो मुझे.. आप इतनी बड़ी एक्ट्रेस हो.. मेरा ड्रीम था आपसे मिलना.. मगर ऐसे मुलाक़ात होगी कभी सोचा नहीं था..
Tisca ब्लाउज बेड के एक तरफ पटक कर - कैसी बड़ी एक्ट्रेस baby... हर दिन किसी ना किसी डायरेक्ट प्रोडूसर का बिस्तर गर्म करना पड़ता है तब जाकर छोटा मोटा रोल मिलता.. हमारे जैसी एक्ट्रेस कॉलगर्ल के जैसी होती है.. किसी भी फंक्शन या इवेंट में आधी नंगी होकर पब्लिक को सेड़ूस करती है ताकि पब्लिक में डीमाड बनी रहे औऱ फिर किसी ना किसी मर्द के बिस्तर में जाकर उसे खुश करती है ताकि छोटा मोटा रोल या कोई काम मिल सके..
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गौतम - ma'am मुझे नहीं मालूम था आपकी लाइफ इतनी हार्ड है.. मैंने तो आजतक आपको टीवी पर देखा है या न्यूज़ पेपर में पढ़ा है..
Tisca मुस्कुराते हुए - रोज़ किसी ना किसी को देती हूँ आज देने की जगह तेरी लुंगी...
गौतम tisca का हाथ पकड़ कर साइड में गिरा देता है औऱ मिशनरी में उसके ऊपर आता हुआ लंड का धीमा झटका मारके कहता है - नहीं ma'am.. आज भी आपको देनी ही पड़ेगी..
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औऱ फिर मिशनरी में tisca की चुत को तबाह करने के मिशन पर लग जाता है, अपने झटको की रफ़्तार तेज़ करते हुए गौतम tisca को ताबड़तोड़ चोदने लगता है जिससे tisca की चुदाई की आवाज के साथ साथ उसकी सिस्कारिया भी पुरे कमरे में जोर जोर से गूंजने लगी थी..

इधर tisca के चुदने की शुरुआत हो चुकी थी उधर वसीम औऱ चेतन का एक राउंड कम्पलीट हो चूका था औऱ अब दूसरे राउंड में चेतन वसीम का लंड मुंह में लेकर चूस रहा था..
चेतन ने वसीम औऱ वसीम ने चेतन की गांड चोद कर गुलाब के जैसी खिला दी थी औऱ दोनों में आपसी समझ औऱ कामइच्छा भी पनपने लगी थी..

गौतम बिस्तर पर tisca को खिसका खिसका के चोद रहा था औऱ tisca किसी सस्ती रांड के जेसी टांगे चौड़ी करके गौतम के लंड के जोरदार झटके खाती हुई चिल्ला रही थी..
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गौतम tisca को ऐसे चोद रहा था जैसे वो 50 साल की औरत नहीं बल्कि बाली उम्र की जवान कमसिन कली हो..
गौतम ने tisca की गांड पकड़कर डोमिनट करते हुए उसे घोड़ी बना लिया औऱ बाल पकड़ कर घोड़ी की सवारी करने लगा..

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Tisca लंड के आगे बेबस लाचार औऱ बेचारी सी बनाकर गौतम के झटके खाते हुए अह्ह्ह्ह... उह्ह्ह... की आवाजे निकालने के सिवा कुछ औऱ नहीं कर सकती थी..
गौतम tisca को घोड़ी बनाकर उसकी चुत में लोडा घुसाकर धक्के पर धक्के लगा रहा था जिसके कारण थप थप औऱ घप घप की मधुर आवाज दोनों के कानो में पड़ रही थी..
गौतम ने चोदते हुए tisca कि ब्रा का हुक खोल दिया जिससे अब tisca पूरी तरह नंगी हो चुकी थी..
गौतम ने बाल छोड़कर अब दोनों हाथों से tisca कि कमर को थाम लिया औऱ पूरे जोर से झटके मारने लगा जिससे tisca की पूरी ताकत के साथ चिल्लाती हुई पीछे गौतम को देखकर उसका हाथ पकड़ते हुए अपने आप को छुड़वाने लगी मगर गौतम ने झटके पर झटके मारकर tisca की चुत का जाइका लेने में कोई कसर नहीं छोडी..
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Tisca बेबसी औऱ लाचारी से अपनी 51 साल पुरानी महल जैसी चुत को खंडर बनते हुए देख रही थी औऱ उसका दर्द महसूस करते हुए जो सुख मिल रहा था उसे भोग रही थी.. उसे लुटने में भी मज़ा आ रहा था..
गौतम ने चोदते चोदते tisca की कमर को अच्छे से पकड़ कर उठा लिया औऱ दिवार से चिपका कर छिपकली वाले पोज़ में पीछे से झटके मारते हुए चोदने लगा..
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Tisca के पैरों में कम्पन था मगर गौतम उसकी कमर को अभी भी थामें हुए था औऱ अच्छे से सटा कर tisca को पेल रहा था.. Tisca अब झड़ने लगी थी औऱ झड़ने के साथ ही उसने मूत भी दिया था मगर गौतम को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा वो बस चोदे जा रहा था..
दोनों की चुदाई पिछले आधे घंटे से चल रही थी औऱ Tisca आंनद के अथाह सागर में डूबती हुई गौतम की चुदाई का स्वाद लेते हुए उसपर मोहित हो चुकी थी.. गौतम ने छिपकली बनाकर चोदते हुए tisca के पैर उठा दिए औऱ अब दिवार से स्टाकार tisca को चोदने लगा.. Tisca किसी बेजान खिलोने से गौतम के आगे बेबस होकर चुदवाए जा रही थी जिसमे मज़ा उसे भी आ रहा था.. गौतम में अब tisca को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया औऱ उछाल उछाल कर चोदने लगा
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गौतम के हर झटके पर tisca का बदन ऐसे हिल रहा था जैसे हवा की आंधी में पत्ते हिलते है.. Tisca अब गौतम को कसके पकड़ रही थी औऱ वापस कामुक निगाह से गौतम को देखकर अपनी चुदाई का मज़ा ले रही थी..
गौतम tisca को उछाल उछाल कर चोदता हुआ अपने चरम पर आने लगा था औऱ वो tisca को अब अपने ऊपर लेटाने के लिए खुद बेड पर गिर गया था औऱ tisca गौतम के ऊपर थी..
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Tisca की चूत का चोबारा बन चूका था मगर उसे मिलते सुख के करण उसे इसका अंदाजा नहीं था.. Tisca ने गौतम के लंड पर अपनी चुत रगढ़ते हुए गांड हिलाना शुरु कर दिया औऱ जोर जोर गौतम के लंड को अपनी चुत में आगे पीछे करने लगी जिससे अब दोनों को झड़ने में ज्यादातर वक़्त नहीं लगा औऱ गौतम बिना कंडोम tisca की चुत में झड़ गया औऱ tisca भी गौतम के बाद झड़ गई..
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गौतम औऱ tisca यूँ ही बहुत देर तक बिना कुछ बोले एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे फिर tisca का फ़ोन बजा तो उसने फ़ोन उठाकर बात करना शुरु किया..
Tisca - हेलो..
एक आदमी - where are you? interview is pending.. They asking for you..
Tisca - i don't feel well.. can you postpone this till the night..
आदमी - are you okey?
Tisca - i am okey.. I just want some time.. You know? Please do it for me..
आदमी - okey tisca.. I'll manage..
Tisca फ़ोन काट कर साइड में रख देती है औऱ एक नज़र गौतम पर डाल कर कहती है..
Tisca मुस्कुराते हुए - कुछ चाहिए तुम्हे?
गौतम भोलेपन से - जो चाहिए था आपने दे दिया ma'am.. अच्छा मैं अब जाता हूँ..
Tisca गौतम के सीने के ऊपर अपनी छाती टिकाकर - लेटे रहो चुपचाप.. बाद में जाना.. And Give me your contact नंबर baby..
गौतम tisca के फ़ोन में अपना नंबर सेव करते हुए - सॉरी ma'am.. आपको दर्द हुआ..
Tisca - अच्छा ये बताओ मैं सच में तुम्हारी फेवरेट हूँ या बस ऐसे ही बोल रहे थे?
गौतम - no ma'am.. Seriously.. मैं बहुत बड़ा fan हूँ आपका.. मेरे सब दोस्तों को भी पता है.
Tisca - thanks baby.. तूने बहुत थका दिया मुझे.. मैं थोड़ी देर सो जाऊ ऐसे ही तेरे ऊपर?
गौतम - ज़ी ma'am.. You don't need to take my permission..
Tisca गौतम के होंठ चूमते हुए - such a good boy.. मैं washroom होके आती हूँ.. जाना नहीं.. Okey?
गौतम हाँ में सर हिलाता है औऱ tisca लंगड़ती हुई बाथरूम में चली जाती है..

सुमन फोन पर - कहा है ग़ुगु? आज वापस भी जाना है..
गौतम - माँ चिंटू भईया के साथ हूँ.. आज जाने का मन नहीं है कल सुबह चलते है वापस..
सुमन - तू भी ना.. चल ठीक है..
गौतम - बाय माँ..
सुमन - बाय बच्चा..

गौतम आदिल को फ़ोन करता है..
आदिल - बोल रंडी..
गौतम - अबे रंडी होगी माँ..
आदिल आह्ह करते हुए - वो तो है ही..
गौतम अटपटी आवाज सुनकर - अबे क्या कर रहा है गांडु? ये आवाज कैसी है?
आदिल - भाई अम्मी को पेल रहा हूँ..
गौतम - शबाना मान गई? क्या बात है यार.. झंडे गाड दिए तूने तो...
आदिल - झंडे तो तूने गाड़े थे रंडी.. अम्मी बता रही थी कैसे कैसे चोद के गया था तू.. बहुत तारीफ़ करती है तेरी.
गौतम हसते हुए - भाई तेरी अम्मी है ही चोदने लायक़ तो क्या करता? बहुत प्यार से चुदवा रही थी..
आदिल - वापस कब आ रहा है भाई?
गौतम - कल आऊंगा यार..
आदिल - अच्छा अम्मी को बात करनी है तुझसे.. ले बात कर.
शबाना - हेलो.. गौतम?
गौतम - हाँ अम्मी.. कैसी हो?
शबाना - बस बेटा.. अच्छी हूँ.. तुझे याद नहीं आती मेरी?
गौतम - याद तो बहुत आती है अम्मी पर क्या करू? मज़बूरी है.. वैसे आदिल ज्यादा तंग तो नहीं करता ना..
शबाना - क्या बताऊ बेटा.. ये तो इसके अब्बू के दूकान जाने के बाद फ़ौरन मेरी चुत में घुस जाता है औऱ फिर शाम तक घुसा ही रहता है.. पिछले 7 दिनों में 17 बार चोद चूका है फिर भी इसे आराम नहीं है..
आदिल - भाई अम्मी की चुत है 17 नहीं 70 बार भी चोद लु तब भी मन नहीं भरेगा..
गौतम हसते हुए - ये तो सच कहा तूने भाई.. मैं वापस आता हूँ फिर दोनों सैंडविच बनाकर तेरी अम्मी को साथ में चोदेगे.. क्यों अम्मी चुदेगी ना हम दोनों से साथ में?
शबाना - मेरी चुत को लंड की लत लगा दी तुने.. तुम जो बोलोगे मुझे करना ही पड़ेगा ना..
आदिल - अच्छा भाई फ़ोन रखता हूँ.. पहला राउंड है आज का..
गौतम - अरे रुक लोडे.. तुझे कुछ बताना है?
आदिल - क्या भाई?
गौतम - तुझे पता है मेरी फेवरेट..
आदिल - tisca chopra..
गौतम - हाँ.. अभी अभी उसे पेला है..
आदिल - चल ना रंडी.. सुबह सुबह में ही मिला हूँ तुझे? किसी औऱ को चुतीया बनाना..
गौतम - मत माने गांडु.. तेरी मर्ज़ी..
आदिल - कैसे मानु भोस्डिके? कोई सबूत है तेरे पास?
गौतम - अभी वीडियो कॉल पे तेरी बात करवाता हूँ रुक जा..
आदिल - ठीक है मैं इंतजार कर रहा हूँ.. देखता हूँ तू ने ली है या किसी औऱ को पेल के बकचोदी कर रहा है..

गौतम फ़ोन काट कर एक तरफ रख देता है औऱ tisca बाथरूम से वापस आकर गौतम के ऊपर चढ़कर उसे बाहों में भरके सोने लगती है..
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गौतम - ma'am..
Tisca मुस्कुराते हुए - हम्म्म..
गौतम - ma'am.. मेरे एक फ़्रेंड को आप हेलो बोल दोगी तो सबको मैं बता सकता हूँ आप मुझसे मिली थी..
Tisca गौतम के गाल सहलाते हुए - बात कराओ..
गौतम वीडियो कॉल करता है..
आदिल - हेलो..
गौतम - ma'am..
Tisca फ़ोन लेकर - हेलो..
आदिल हैरानी से - हेलो.. आप..
Tisca - हाउ आर यू?
आदिल हाथ हिलाते हुए - मैं ठीक हूँ मैडम..
गौतम - अब तो यकीन आया?
आदिल - हाँ भाई..
गौतम - चल अब फ़ोन रख.. टाइम नहीं है मेरे पास..
आदिल - भाई सेल्फी लेकर आना..
गौतम - हां हां ठीक है.. फ़ोन काट देता है.. Thanks ma'am..
Tisca smile करती हुई - your welcome baby..
Tisca गौतम के सीने के ऊपर आराम करती हुई नींद में खो जाती है औऱ गौतम भी चेतन से बात करके उसी तरह सो जाता है..

गौतम की जब आँख खुलती है वो देखता है की वो अकेला बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था औऱ tisca आईने के सामने एक फ्रॉक पहनकर सिगरेट के कश लेते हुए तैयार हो रही थी. Tisca ने जब मुड़कर गौतम को देखा तो tisca बोली..
Tisca - उठ गए baby.. नींद कैसी आई?
गौतम - बहुत गहरी.. शाम हो गई?
Tisca सिगरेट पीती हुई - हाँ.. 5 घंटे सो कर उठे हो.. कुछ लोगे.. चाय कॉफ़ी जूस?
गौतम उठकर tisca को बाहों में भरते हुए - चुत ma'am... चुत दे दो एक बार औऱ..
Tisca हसते हुए - आधे घंटे बाद इंटरव्यू है.. दोपहर से बैठे है वो लोग..
गौतम tisca से सिगरेट छीनकर फेंक देता है औऱ tisca को उठाकर बिस्तर पर पटकते हुए - मैं ज्यादा टाइम नहीं लूंगा ma'am.. Promise..
Tisca अपनी फ्रॉक उठाकर पेंटी खिसकाते हुए - मुंबई बुलाऊंगी तो आओगे ना तुम?
गौतम चुत में लंड घुसते हुए - आप मांगोलिया बुलाओगी तब भी दौड़ा चला आऊंगा.. Ma'am..
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Tisca चुदवाते हुए - baby.. स्लोली.. दोपहर से तेरे कारण स्वलिंग हो रही है.. कितना हार्ड किया था तुने.. अब प्यार से करो वरना नहीं करने दूंगी..
गौतम - सॉरी ma'am.. मेरे कारण आपकी फुद्दी सूज गई.. Ma'am.. मुझे सेल्फी चाहिए आप दोगी ना..
Tisca हसते हुए - फ़ोन रख बुद्धू.. ऐसी हालात में सेल्फी लेगा क्या..
गौतम प्यार से चोदते हुए - सॉरी ma'am..
Tisca गौतम को kiss करते हुए - किसने नाजुक लब है तेरे..
गौतम - बच्चों जैसे ना? मेरी gf भी यही कहती है..
Tisca - बच्चा ही तो है तू.. वरना जो काम तुमने दोपहर में किया था अगर तेरी जगह कोई बड़ा होता तो जेल में डलवा देती.. अब जल्दी कर इंटरव्यू है औऱ फिर फ्लाइट भी..
गौतम मुस्कुराते हुए - ma'am एक बात बताऊ.. आपको बुरा तो नहीं लगेगा..
Tisca - बोल ना..
गौतम - आपके नाम पर बहुत मुट्ठी मारी है मैंने.. मेरे बाथरूम की दिवार का कलर बदल गया मेरे मुठ से.. मेरा ड्रीम था आपके साथ ये सब करने का..
Tisca हस्ती हुई - अब तो ड्रीम पूरा हो गया अब तो मास्टर्बशन नहीं करेगा ना.. मुझे याद करके..
गौतम - पक्का नहीं कह सकता ma'am.. याद आ गई तो करना भी पड़ सकता है..
Tisca - जब भी करें मुझे massage करके बता जरुर देना.. अब जल्दी कर.. मेरा तो हो भी गया लगता है..
गौतम - ma'am.. एक रिक्वेस्ट है...
Tisca - अब क्या रह गया baby?
गौतम धीरे धीरे चोदते हुए - ma'am.. Blowjob..
Tisca - नहीं baby.. लिपस्टिक खराब हो जायेगी.. बहुत टाइम लगेगा.. तू चुत से काम चला ले..
गौतम बच्चों सा मुंह बनाके - प्लीज ना..
Tisca एक नज़र गुस्से से देखकर - अच्छा ला..
गौतम बेड पर खड़ा हो जाता है औऱ tisca घुटनो पर बैठके लोडा चूसने लगती है..

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गौतम - उफ्फ्फ.. Ma'am.. आपके ऊपरी होंठ तो नीचे के होंठों से भी मज़ेदार है.. कितना अच्छा blowjob देती हो आप..
Tisca पूरी मेहनत के साथ लंड चुस्ती है औऱ कुछ देर में गौतम का वीर्यपान कर लेती है..
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Tisca - baby अब चल.. जा यहां से.. मुझे भी जाना है.. औऱ contact में रहना..
गौतम कपडे पहनकर प्यार से - जाने से पहले ma'am एक लव बाईट मिलेगी..
Tisca मुस्कुराते हुए गौतम की शर्ट हटाकर उसके निप्पल्स को मुंह में लेती हुई पहले चाटती औऱ चुस्ती है औऱ फिर दाँत से खींचती हुई निप्पल्स के बगल में एक lovebite कर देती है औऱ फिर कहती है..
Tisca अपनी लिपस्टिक ठीक करके - चल अब मैं निकलती हूँ.. बाय gugu baby..
गौतम भी जाते हुए - बाय ma'am...
 
Update 35

मैंने बुलाया तब नहीं आई.. अब किसकी शादी में आई हो?
मेरे बस में थोड़ी है आना जाना.. इस बार असलम लेके आया है मुझे..
अच्छा बताओ कोनसी जगह हो जयपुर में?
गौतम यहां खतरा है आने की सोचना भी मत..
तुझसे मिलने हर खतरा उठा सकता है तेरा आशिक रेशमा.. तू जगह बता..
बाबा समझो वहां सब लोग है जगह भी नहीं है मिलने की..
वो सब मैं देख लूंगा कुतिया तू अड्रेस सेंड कर.
अच्छा ठीक है पर दूर ही रहना यहां लोग बहुत खराब औऱ पुरानी सोच के है.. तेरे साथ मुझे भी सजा देंगे..
तू अड्रेस सेंड कर ना कुतिया.. औऱ किसीकी शादी में आ रहे हो तुम दोनों.. वो भी बताना..
ठीक है कुत्ते.. करती हूँ.. मुझे भी बहुत तलब है तुझे देखने की.. कल शाम को मिलती हूँ...

**************

सुमन कमरे में आती हुई - ग़ुगु? ग़ुगु?
गौतम बाथरूम से - हां माँ?
सुमन - सुबह तो नहाया था बेटा अब क्यों नहा रहा है फिर से..
गौतम - कहीं जाना है..
सुमन - अब कहा जाना है तुझे? कल पूरा दिन बाहर था घर से... आज वापस जाना है?
गौतम - अरे माँ कल तो सारा टाइम चिंटू भईया के साथ दूकान पर था.. आप उनसे पूछ लो..
सुमन - अच्छा ठीक है.. वैसे जाना कहा है.
गौतम - एक स्कूल फ्रेंड के यहां.. कल अचनाक मिल गया था.. उसने बुलाया है उसकी बहन की शादी है आज..
सुमन - अच्छा.. लड़की की शादी है.. कहा है शादी.. कोनसी जगह है?
गौतम - उनके घर पर है.. हबीबगंज में.. बेचारा गरीब दोस्त है माँ..
सुमन - अपने से भी ज्यादा गरीब है?
गौतम - बहुत ज्यादा..
सुमन - तो फिर लड़की को कुछ अच्छा तोहफा देकर आना.. कंजूसी मत करना..
गौतम बाथरूम का दरवाजा खोलकर सुमन का हाथ पकड़ते हुए उसे अंदर खींचकर - आप भी चलो..
सुमन - मुझे नहीं जाना.. तू ही जा.. औऱ बेशर्म कम से कम चड्डी तो पहन ले..
गौतम सुमन को बाहों में भरके - चड्डी पहन कर कौन नहाता है माँ..
सुमन - अरे छोड़ ग़ुगु.. गिला करेगा क्या मुझे भी?
गौतम - मैं तो कब से कहना चाहता हूँ माँ आप ही मना कर रही हो..
सुमन अपने आप को छुड़ाकर - चाय लेले.. बाहर टेबल पर रखी है.
गौतम - माँ हर बार चाय दोगी क्या? कभी अपनी चुत भी दे दो..
सुमन गौतम के गाल पर हलकी सी चपत लगाकर बाथरूम से बाहर जाते हुए - घर में सबकी चुत मिल तो रही है तुझे.. मेरी मारके क्या करेगा..
गौतम - सबमे औऱ आपमें फर्क है माँ..
सुमन अलमीरा से कपडे निकाल कर - क्या फर्क है? जैसे उन सबकी है वैसी मेरी है..
गौतम तौलिये से सर के गीले बाल पोंछता हुआ - तो फिर दे क्यों नहीं देती? कब से तड़पा रही हो.. औऱ क्या निकाला है? मैं सूट पहन कर नहीं जाऊँगा..
सुमन - अच्छा लगेगा तुझपर ग़ुगु..
गौतम तौलिये से बदन पोंछकर बेड पर ड़ालते हुए - अरे मुझे अजीब लगेगा यार माँ..
सुमन - ठीक ये कोट रहने दे.. अब खुश?
गौतम चड्डी पहनते हुए - ठीक है.. ये बेस्ट है..
सुमन जूते निकाल कर - ग़ुगु.. माधुरी से बात की तूने?
गौतम कपडे पहनते हुए - हाँ कल बात की थी.. हमें अपने घर बुला रही थी छोटी माँ..
सुमन मुंह बनाते हुए - उसका घर कैसे हुआ?
गौतम बेड पर बैठकर - अरे छोडो ना माँ.. घर उनके नाम पर हो या आपके.. क्या फर्क पड़ता है.. छोटी माँ कह रही थी कि वही आकर रहना पड़ेगा आपको औऱ मुझे.. आपसे बात भी करना चाहती थी..
सुमन अलमीरा से परफ्यूम निकालकर गौतम को लगाते हुए - तो क्यों नहीं बात करवाई तूने? औऱ उस कमीनी की तो नज़र है ही तुझपर.. तभी तो मान गई.. उस कमीनी को तो छूने तक नहीं दूंगी तुझे..
गौतम - जलन हो रही है आपको?
सुमन परफ्यूम लगाकर - मुझे क्यों उस चुड़ैल से जलन होगी भला? ऐसा है ही क्या उसके पास?
गौतम - छोटा ग़ुगु है ना..
सुमन गुस्से में - असली कमीना तो तू है.. कितना प्यारा सा है मगर सबको पागल करके रखा हुआ है.. रूपा भी फ़ोन पर सिर्फ तेरी बातें करती रहती है..
गौतम अपनी माँ का हाथ पकड़ कर सुमन को अपनी गोद में लंड पर अच्छे से टिका कर बैठाते हुए - अच्छा क्या क्या बातें करती है रूपा मेरे बारे में..
सुमन - यही कि तू कब सोया कब उठा? क्या पहना? क्या खाया? ठीक है या नहीं.. तुझे पैसे की जरुरत है क्या? फलाना डिमखाना.. मैंने तो कल कह दिया.. अरे मैं माँ हूँ ग़ुगु की.. उसका ख्याल रखना आता है मुझे..
गौतम मुस्कुराते हुए - पापा के बारे तो बात नहीं की ना आप दोनों ने..
सुमन - तेरे पापा में ऐसा है ही क्या जो कोई उसके बारे में बात करेगा? अब जाने दे..
गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है माँ बैठी रहो ना कुछ देर..
सुमन - तू मुझे सारी रात भी अपने लंड पर बैठा के रखेगा तो भी चुदने के लिए हाँ नहीं करुँगी.. समझा? (होंठ चूमकर) तू मेरा बेटा है औऱ बेटा ही बनकर रहना पड़ेगा तुझे..
गौतम खड़ा होते हुए - माँ आप ना.. अपनी चुत पर ताला लगवा लो.. किसीको देनी तो है नहीं आपको..
सुमन हसते हुए गौतम को बाहो में भरके चूमती हुई - तू ही ले आ बाजार से एक ताला खरीद कर औऱ लगा दे अपनी माँ की चुत पर..
गौतम सुमन को पीछे करते हुए - छोडो यार माँ.. जाने दो..
सुमन मुस्कुराते हुए अपनी साडी उठाकर चूत दिखाती हुई - गुगु.. सुसु आ रहा है..
गौतम मुस्कुराते हुए सुमन को बेड पर धकेल कर उसकी चुत पर अपने होंठ लगाते हुए चूसने लगता है.. औऱ सुमन गौतम के बाल पकड़ कर उसके मुंह में मूत देती है मगर मूत पीने के बाद भी गौतम सुमन की चुत से अपना मुंह नहीं हटाता औऱ सुमन की चुत चाटने लगता है जिससे सुमन कामुक होती हुई अपनी चुत अपने बेटे को चुसवाने लगती है औऱ कुछ देर की चूसाईं के बाद अपना माल भी गौतम के मुंह में छोड़ देती है..
गौतम माल पीकर मुंह साफ करते हुए - सुबह क्या मूली खाई थी आपने.. कितना अजीब टेस्ट था आज आपकी चुत का..
सुमन गौतम की बात पे हसकर कमरे से जाते हुए - खाई नहीं थी ग़ुगु घुसाईं थी मैंने तो..
गौतम हैरानी से - अच्छा ज़ी.. अब ये सब करने लगी हो आप..
सुमन दरवाजे पर जाकर - क्यों.. नहीं कर सकती मैं?
गौतम पानी पीते हुए - कर सकती हो आपके नसीब में खीरे मूली ही है.. छोटी माँ के नसीब में है छोटा ग़ुगु तो..
सुमन गुस्से में - तेरी छोटी माँ की चिटनी बना दूंगी अगर अब मेरे छोटे ग़ुगु को हाथ भी लगाया तो..
गौतम सुमन की चुची पकड़कर उसको दरवाजे से हटाते हुए - वो तो आप जानो औऱ छोटी माँ जाने.. अभी मुझे जाने दो.. वरना आप इतनी सेक्सी लग रही हो मैं कोई काण्ड ना कर दू आज.. फिर उस न्यूज़ पेपर में हमारी न्यूज़ आ जाएगी..
सुमन प्यार से हसते हुए - ठीक है जा.. अपना ख्याल रखना..
गौतम जाते हुए - ठीक है..

***********

(रेशमा 23)
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कहाँ तक पहुंची कुतिया?
क्या बताऊ यार रास्ते में बाइक खराब हो गई असलम की.. कब से यहां खड़े है..
असलम क्या कर रहा है?
क्या करेगा साला.. बाइक को देख रहा है औऱ सही करने में लगा हुआ है..
अड्रेस बता कुतिया.. कहा खड़ी है.. मैं निकल चूका हूँ घर से..
अरे ये vip रोड पर मदन स्वीट्स के पास.. पर तू यहाँ आके क्या करेगा?
तेरी चुत में उंगली करूंगा कुतिया..
असलम - फोन में क्या लगी हुई है बहनचोद.. इस वायर को पकड़ एक बार.. लगता है वायर में कुछ प्रॉब्लम है..
रेशमा आगे आकर वायर पकड़ती हुई - मैंने कहा था बस से चलते है पर आप नहीं माने..
असलम झाल्लाते हुए - तेरी माँ को चोदू रंडी.. मुंह बंद रखा कर अपना..
रेशमा बड़बड़ाते हुए - चोदने के लिए खड़ा भी होना चाहिए.. हिजरे..
असलम - क्या बोली?
रेशमा - कुछ नहीं.. ज्यादा बिगड़ गई है बाइक? अब क्या करें?
असलम - क्या करें क्या.. तू यही खड़ी रह.. मैं मैकनीक लेके आता हूँ..
रेशमा - मुझे अकेला छोड़ के जाओगे?
असलम - साली कोनसी सुनसान जगह है जो तू इतना डर ही है? खड़ी रह.. चुपचाप..
असलम इधर उधर घूमके वापस आ जाता है उसे कोई मकेनिक की शॉप नहीं मिलती..
रेशमा - क्या हुआ?
असलम गुस्से - होना क्या है.. आज साली तेरी शकल देख ली सुबह सुबह.. दिन तो खराब जाना ही था.. अब इसे हाथों से ले जाना पड़ेगा जब तक कोई मकेनिक नहीं मिल जाता..
असलम बाइक खींचकर ले जाते हुए औऱ रेशमा बैग हाथ में पकड़कर साथ चलते हुए..
रेशमा - अब्बू से बोलके इतनी अच्छी औऱ महंगी बाइक दिलवाई थी दहेज़ में मगर आपने 3-4 साल में ही बाइक की हालात ऐसी कर दी जैसे 20 साल पुरानी हो.. अपनी दारु औऱ ऐयाशी का पूरा ख्याल रहता है मगर कब बाइक की सर्विस करवानी है कब तेल बदलवाना है वो याद नहीं रहता...
असलम - बहन की लोड़ी.. मुंह बंद रख अपना.. वरना सडक पर ही पिटेगी तू..
रेशमा - औऱ कर भी क्या सकते हो आप.. औऱ कुछ तो होता नहीं है..
असलम गुस्से में बाइक गिराते हुए - साली रंडी जब से तू मिली तब से जिंदगी दोज़ख हो गई है.. एक लफ्ज़ औऱ बोला तो यही तलाक़ दे दूंगा..
रेशमा इस बार कुछ नहीं बोलती औऱ असलम वापस बाइक उठाने लगता है की साइड में एक कार आकर उनके पास रूकती है..
गौतम कार का शीशा नीचे करके असलम से - भाईजान ये हबीबगंज कहा पड़ेगा..
असलम गौतम को देखकर - यहां से एक घंटा दूर है.. आगे टूटी पुलिया से लेफ्ट हो जाना..
गौतम मुस्कुराते हुए - बाइक बिगड़ गई है?
असलम - हाँ.. लगता है वायर टूट गया है.. स्टार्ट नहीं हो रही..
गौतम कार से उतरकर - तो कोई मकेनिक क्यों नहीं बुला लेते..
असलम - आस पास कोई मकेनिक नहीं है.. मैं देख चूका हूँ..
गौतम - अरे यार कहा तुम बाबा आदम के जमाने में ज़ी रहे हो.. ये अप्प है ना.. इसमें आप अपनी लोकेशन डाल कर मकेनिक को यही बुला लो.. इस तरह कहा तक इस बाइक को खींच कर ले जाओगे..
असलम - भाईजान मेरा पुराना फ़ोन है आप ही मकेनिक को बुला दीजिये..
गौतम - पर भाईजान मुझे शादी में जाना है..
असलम - भाईजान.. हमें भी हबीबगंज ही जाना है.. मकेनिक आते ही आप चले जाना..
रेशमा मुस्कुराते हुए - कर दीजिये ना मदद.. आपको सबाब मिलेगा..
गौतम असलम से - अब भाभी ज़ी कह रही तो मैं बुला देता हूँ मकेनिक को..
असलम - वैसे आप हबीबगंज में किसके यहां जा रहे है..
गौतम - वो रहमत मिया है ना..
असलम - हाँ अलीगढ वाले..
गौतम - हां वही.. उनकी लड़की से मेरे दूर के भाई का निकाह है आज.. वैसे तो बाराती हूँ पर बारात से अलग ही जा रहा हूँ..
असलम हसते हुए - अरे भाईजान.. क्या इत्तेफाक है.. हम भी वही जा रहे है.. रहमत मिया मेरे खालू के भाई है.. उनकी लड़की के निकाह में शरीक होने के लिए ही हम जा रहे थे.. वो भी क्या इत्तेफाक करता है..
गौतम - सच में भाईजान.. अच्छा आओ.. कब तक यहां खड़े रहोगे.. गाडी में बैठ जाओ.. लाओ भाभी ज़ी बेग मैं रख देता हूँ..
रेशमा - सुक्रिया..
असलम गौतम के साथ कार में आगे बैठ जाता है औऱ रेशमा पीछे..
गौतम गाडी का ac बढ़ा देता है..
गौतम गाडी में गाने चलाते हुए..
असलम - आप ये अंग्रेजी गाने समने के शौकीन है?
गौतम - नहीं ये तो fm चल गया.. मैं गज़ले सुनने का शौकीन हूँ.. आप अपनी तरफ से उस रेक को ओपन कीजिये उनमे पेन ड्राइव पड़ी होगी..
असलम रेक ओपन करते हुए पेन ड्राइव निकालकर गौतम को दे देता है औऱ रेक में रखी हुई एक शराब की खाली बोतल देखकर कहता है - कमाल है भाईजान सब भरी हुई शराब की बोतल गाडी में रखते है आप खाली रखते है..
गौतम कोई ग़ज़ल लगाकर - अरे ये तो पहले की है फेंकना भूल गया शायद.. फेंक दीजिये..
असलम बोतल फेंककर - वैसे आपने नाम तो बताया ही नहीं अपना?
गौतम एक दम से सोचकर - ग़ालिब..
असलम हसते हुए - तालिब सुना है भाईजान पर ग़ालिब?
गौतम मुस्कुराते हुए बैक मीरर में रेशमा का चेहरा देखकर - अब क्या करे साहेब.. अपनों मेरा नाम मिर्ज़ा रखा औऱ दुनिया वालों ने ग़ालिब.. तो बन गया मैं मिर्ज़ा ग़ालिब..
असलम - शेरो शायरी के भी शौकीन लगते है..
गौतम - बेशक़.. लिखते भी औऱ सुनते भी है.. आपका नाम?
असलम - असलम..
गौतम - अच्छा शायद आपका मकेनिक आ गया..
गौतम औऱ असलम गाडी से उतरकर - हां यही बाइक है..
मकेनिक गाडी चेक करके - इसका तो इंजन बैठा हुआ है भाईजान? पूरा खोलना पड़ेगा..
असलम - अरे ऐसे कैसे इंजन बैठ गया..
मकेनिक - लास्ट बार सर्विस कब करवाई थी?
असलम - यही कुछ 2-3 महीने पहले..
मकेनिक - औऱ ओइल चेंज?
असलम - उसका पता नहीं वो भी शायद 4-5 महीने पहले करवाया था..
मकेनिक - महीने में कितना चलती है बाइक?
असलम - पता नहीं.. चलती होगी 3-4 हज़ार किलोमीटर..
मकेनिक हसते हुए - तो क्या टायर बैठेगा? भाईजान किस्मत अच्छी है आपकी.. बाइक अभी तक चल रही थी.. वरना जैसे आप बता रहे हो ये तो कब का हो जाना चाहिए था. हर चीज का ख्याल भी रखना जरुरी है..


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रेशमा - अपने अलावा किसी औऱ का ख्याल हो तो ना..
असलम रेशमा को घूरते हुए - अच्छा छोड़ दो.. हम देख लेंगे..
गौतम - क्या देखोगे असलम मिया? मकेनिक ठीक कह रहा है.. अब इंजन बैठ गया तो बैठ गया.. ले जाने दो बाइक कल बनाके दे देगा..
असलम - अरे नहीं.. मैं अच्छे से जानता हूँ इन लोगों को.. लम्बा चौड़ा बिल बना के दे देंगे..
गौतम - अरे उसकी चिंता आप क्यों करते है.. आप औऱ हम तो सम्बधी है.. भाई तुम ले जाओ बाइक औऱ पूरी नई करके दो.. जो खर्चा होगा मुझसे लेना..
असलम - पर ग़ालिब भाई..
गौतम - अरे छोडो ना.. बिगड़ी हुई बाइक कहा कहा लिए फिरोगे मिया.. निकाह है.. चलकर एन्जॉय करते है.. देखो आपके चक्कर में बेचारी भाभी कब से ऐसे ही खड़ी है.. चलो साथ में चलते है..
गौतम औऱ असलम वापस गाडी मैं बैठ जाते है औऱ रेशमा भी बैठ जाती है..
असलम - ग़ालिब भाई अब रुखा सफर न कटने पायेगा.. कुछ गला गिला किया जाए..
गौतम असलम को देखकर - पर भाभी..
असलम - अरे रेशमा क्या बोलेगी... औऱ अब नहीं लेंगे तो कब लेंगे..
गौतम आगे ठेके पर गाडी रोककर - बताओ असलम मिया क्या पीना पसंद करोगे?
असलम - तुम ही कुछ पीला दो ग़ालिब भाई.. हम तो देसी से विलायेति सब पी जाते है..
गौतम - ठीक है..
गौतम गाडी से उतर जाता है औऱ ठेके पर जाकर एक ब्लैक डॉग की बोतल औऱ पानी ले आता है औऱ असलम को बोतल देकर कहता है..
गौतम वापस धीरे धीरे गाडी चलता हुआ - लो असलम मिया करो शुरुआत..
असलम दो पेग बनाकर - लो ग़ालिब भाई..
असलम औऱ गौतम पेग को चिर्स करके पिने लगते है..
असलम - भाई आज तो मज़ा आ गया आपसे मिलके..
गौतम रेशमा को मीरर से देखकर - मुझे भी..
असलम - अच्छा आप बता रहे थे कुछ लिखते हो.. हमें भी सुनाओ कुछ..
गौतम पेग ख़त्म करके - अजी बस थोड़ा बहुत कोशिश करके है..
असलम द्वारा पेग बनाकर देते हुए - थोड़ा बहुत ही सुना दो यार..
गौतम गाडी सडक के किनारे लगाकर - हम्म्म... तो लिखा है..
कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..
असलम - वाह.. क्या लिखा है ग़ालिब भाई..
गौतम - शुक्रिया मिया..
कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..
इश्क़ की मिठास वो दिल में उतरकर भर गई
असलम - वाह्ह.. क्या मिसरा कहा है ग़ालिब भाई..
गौतम - बहुत शुक्रिया भाई..
असलम - आगे सुनाइए..
गौतम - सुनिये..
कोई हसीन दिलरुबा आँखों में घर कर गई..
इश्क़ की मिठास वो दिल में उतरकर भर गई
सोचा कि उसको चुम लूँगा अगली मुलाक़ात में
वो पारियों की शहजादी चूमके होंठ ही कुतर गई
असलम - अरे वाह ग़ालिब भाई.. मान गए आपको..
गौतम रेशमा को देखकर -शुक्रिया.. आपको केसा लगा भाभी..
रेशमा मुस्कुराते हुए - अभी कहा कुतरा है.. कुतरना तो अभी बाकी है..
असलम - लो ग़ालिब भाई..
गौतम - भाई अब रहने दो.. वरना सब कहने लगेंगे.. शराबी आ गए..
असलम हसते हुए - ये आखिरी है ग़ालिब मिया लो..
एक शेर मेरा भी सुनो..
गौतम पेग लेते हुए - इरशाद..
असलम - तो शेर कुछ ऐसा है..
मैं नहीं हूँ वो जिसकी तुम्हे तलाश है
कुछ नहीं है मेरे पास सिर्फ ये गिलास है
इस गिलास में घुले हुए है मेरे दर्द औऱ ग़म
औऱ पीछे बैठी हुई ये गले में चुबती फांस है
गौतम हसते हुए - लगता है भाभी प्यार नहीं करती आपसे..
रेशमा - प्यार करने लायक़ हो भी तो..
असलम नशे में - सिगरेट है आपके आप?
गौतम - रेक में देखो..
असलम सिगरेट जलाते हुए - एक औऱ सुनो..
ऊगा लूंगा मैं भी फसल जमीन को खोद कर
बना दूंगा तस्वीर इस कागज पे कलम गोद कर
(रेशमा को देखकर)
मेरी जान की दुश्मन बस इतनी बात बता मुझे
तेरे बाप को क्या मिला मेरी अम्मी चोद कर..

गौतम हसते हुए - अरे असलम मिया.. ये क्या था..
असलम - किसी से सवाल था ग़ालिब मिया..
रेशमा - मुझे गाना चलाना है..
गौतम - भाभी फ़ोन कनेक्टेड है आप इसमें चला लो.. चल जाएगा..
असलम नशे में - गाना क्यों चलाना है तुझे..
रेशमा - सवाल का जवाब नहीं चाहिए?
रेशमा गाना चला देती है.. मेरा बुढ़ा बलम करें छेड़खानी.. मेरी चढ़ती जवानी मांगे पानी पानी..
गाना सुनकर असलम का मुंह उतर जाता है..
गौतम हसते हुए - अच्छा बहुत हो गया असलम मिया.. चलो अब चलते है..
असलम गाना बंद करके - ठीक है ग़ालिब भाई..
गौतम गाडी चलाकर शादी वाली जगह ले आता है..

गौतम - लगता है बारात आ चुकी है..
असलम नशे में - हाँ.. आ गई है.. चलिए..
गौतम असलम औऱ रेशमा के साथ गाडी से उतारकर बाहर आ जाता है औऱ शादी वाले घर में आ जाता है जहा बहुत भीड़ थी औऱ घर छोटा था.. पीछे खाली प्लाट पर तम्बू खड़ा करके बारात का स्वागत चल रहा था..
असलम गौतम से - अरे ग़ालिब भाई आप कहा जारहे हो.. चलो ऊपर चलते है.. असलम गौतम को छत पर ले आता है..
गौतम - अरे असलम मिया आप तो इसे भी साथ ले आये..
असलम - इसके बिना कैसे काम चलेगा.. अभी तो आधी भी खाली नहीं हुई.. एक एक पेग औऱ पीते है फिर नीचे जाके dj पर तहलका मचाते है..
गौतम - ठीक है मिया बनाओ पर मेरा वाला पेग बिलकुल लाइट रखना..
गौतम पीछे नीचे की तरफ तम्बू में स्टेज के पास किसी को देखकर फ़ोन करता है..
गौतम - गांडु ऊपर देख..
आदिल ऊपर गौतम को देखता हुआ - अबे साली रंडी तू यहां क्या कर रहा है..
गौतम थोड़ा दूर जाकर - असलम के साथ आया हूँ.. मेरा नाम मिर्जा ग़ालिब बताया है असली नाम मत बताइयो उसे.. आजा ऊपर जल्दी..
आदिल - आता हूँ रंडी..
गौतम - पानी की ठंडी बीतल भी ले आइओ..
असलम - क्या हुआ भाई किस्से बात कर रहे थे..
गौतम - अरे एक दोस्त था.. पानी की बोतल मगवाई है ठंडी.. आ रह है.. आप तो नीट ही बनाने लगे..
असलम - अरे क्या फर्क पड़ता है ग़ालिब भाई..
गौतम - पक्के शराबी हो मिया..
आदिल पानी की बोतल रखकर - क्या हाल है जीजा ज़ी..
असलम - तू भी आया है..
आदिल - हाँ अकेला आया था.. सब घर पर ही है.. आपा कहा है..
असलम नशे में - नीचे होगी कहीं, मुझे क्या मालूम..
गौतम - अच्छा आप लोग बैठो आता हूँ.. आदिल के कान में - पीला पीलाके भंड कर दे मादरचोद को..
आदिल इशारे से - ठीक है..
गौतम नीचे चला जाता है औऱ आदिल बड़े बड़े पेग बनाकर असलम को पिलाने लगता है...

गौतम नीचे आ जाता है औऱ रेशमा को ढूंढने लगता है मगर उसे रेशमा कहीं नहीं नज़र आती.. गौतम जब रेशमा को कॉल करता है तो रेशमा कॉल नहीं उठती औऱ व्हाट्सप्प पर massage करती है.. अभी नहीं उठा सकती..
गौतम बदले में कहता है - औऱ कितना तड़पायेगी.. कुतिया..
रेशमा इस बार अपनी लाइव लोकेशन भेज देती है औऱ massage करती है आजा मेरे कुत्ते मेरे पास..
गौतम लाइव लोकेशन देखकर चल पड़ता है..
गौतम शादी के घर से थोड़ा दूर एक सुनसान मकान के पीछे उस लाइव लोकेशन को देखता हुआ आ जाता है औऱ उस खाली मकान में आकर इधर उधर देखने लगता है.. अंदर में उसे कुछ नहीं दीखता मगर कोई उसका हाथ पकड़ कर खाली मकान के एक कोने में ले जाता है औऱ गौतम हाथ की छुअन की कोमलता से समझ जाता है ये औऱ कोई नहीं बल्कि रेशमा ही है..
रेशमा सीधा गौतम के होठो पर टूट पडती है औऱ उसके होंठों से अपने होंठ से मिलाकर उसे बेतहाशा चूमने लगती है..
गौतम भी अँधेरे में रेशमा को होंठों को पूरी शिद्दत औऱ मोहब्बत के साथ चूमने लगता है..


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रेशमा चूमते हुए गौतम के लबों को दांतो से कुतरने लगती है औऱ गौतम को दर्द देती हुई उसके होंठों को खींच खींच कर गौतम को बेबाकी से अपने मुंह की मिठास औऱ लार के स्वाद से रूबरू करवा देती है..
गौतम आँख बंद करके रेशमा को अपनी बाहों में भरे हुए चूमता हुआ उसके पतले औऱ गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर भरके चूमता हुआ अपने हाथों से उसके बदन की उतार चढाव भरी नकाशी टटोलता है..
10-12 मिनट एकदूसरे को जमकर चूमने के बाद दोनों का चुम्बन किसी की आहट सुनकर टूट जाता है..
औऱ उनको ऐसा लगता है जैसे कोई आया है.. दोनों चुपचाप बाहर की तरफ देखते है जहा एक लड़का एक लड़की के साथ अभी अभी अंदर घुसा था.. गौतम औऱ रेशमा बिना किसी शोर के उनकी तरफ देखते है...

लड़का - मैं तुम्हारे बिना मर जाऊँगा शमा..
शमा - तू समझता क्यों नहीं नीरज.. मैं अगर तेरे साथ यहां से चली गई तो बबाल हो जाएगा.. मेरे अब्बू हमें जान से मार देंगे.
नीरज - बिछड़कर जीने से तो मर जाना अच्छा है शमा.. क्या हमने कसमे वादे इसीलिए खाये थे की एक दिन तू मुझे यूँ छोड़कर चली जाए? तू मुझे प्यार करती है ना.. तो क्यों किसी औऱ के साथ शादी कर रही है.. चल शमा में तुझे लेने आया हूँ..
शमा - तू समझता क्यों नहीं निरज.. आज मेरी शादी है कितनी बदनामी होगी हर जगह..
नीरज - तू बदनामी से डरती है.. मगर मुझसे बिछड़ने से नहीं.. क्या वो आदमी तुझे मुझसे ज्यादा खुश रख पायेगा? बोल जवाब दे..
शमा नीरज को चूमती है औऱ कहती है - मैं तुझे दिल औऱ जान से प्यार करती हूँ.. मगर तू ही बता ऐसे सब कुछ छोड़छाड़ कर भागना सही है? अब्बू अम्मी भाई सबकी नज़र शर्म से झुक जायेगी..
नीरज - उनकी नज़र शर्म से तब नहीं झुकी जब उन्होंने तुझसे 18 साल बड़े आदमी के साथ शादी तय कर दी.. बोल शमा? देख मैं तुझे लेने आया हूँ.. अगर तू मेरे साथ नहीं चली तो मैं यही अपनी जान दे दूंगा..
शमा रोते हुए - ज़िद मत कर नीरज.. जा यहां से.. मुझमे भागने की हिम्मत नहीं है.. मैं बहुत कमजोर हूँ..

इसबार रेशमा की चुडी की आवाज आ जाती है औऱ नीरज औऱ शमा को किसी के यहां होने की आहट मिल जाती है..
नीरज - कौन? कौन है वहा?
गौतम फ़ोन की फलेश लाइट सामने on करके - डरो मत.. हम दोनों शादी में आये..
रेशमा - शमा.. तू ये शादी नहीं करना चाहती?
शमा - मेरे चाहने से क्या होता है रेशमा आपा.. आज तक मेरी पसंद नापसंद घर में किसने सुनी है?
गौतम - देखो अगर तुम दोनों प्यार करते हो औऱ शादी करना चाहते हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ..
शमा - पर अब्बू?
रेशमा - शमा मैं तेरे अब्बू को अच्छे से जानती हूँ.. वो अपने मतलब के लिए तेरा निकाल उस 38 साल के आदमी से करवाना चाहते है.. अभी भी मौका है..
नीरज - मैं कब से कह रहा हूँ शमा.. तुझे बहुत प्यार से रखूँगा.. चल मेरे साथ.. औऱ नहीं चलना तो ले इस पिस्तौल से मुझे गोली मार दे..
गौतम पिस्तौल छीनते हुए - अबे ये पिस्तौल कहा से खरीद लाया तू..
रेशमा - शमा पागल मत बन तेरी लाइफ का सवाल है..
शमा - ठीक है चलो.. मैं त्यार हूँ.. मगर तुम्हारे घरवाले क्या मुझे अपनाएंगे?
नीरज - नहीं अपनाएंगे तो मैं घर छोड़ दूंगा.. पर तुझे हमेशा अपने साथ रखूँगा.. चल रेशमा..
गौतम - अबे ओ मजनू.. घर छोड़ देगा तो रखेगा कहा लड़की को सडक पर? घरवालों से लड़ झगड़ मर घर में ही रखना.. रहता कहा है तू..
नीरज - अजमेर..
गौतम - अजमेर में कहा?
नीरज - पुराना चौखट.. गली नम्बर 22.. उलटे हाथ पर तीसरा मकान..
गौतम - विधयाक मालिराम है ना वहा का?
निरज - हां मालीराम खत्री है..
गौतम - नम्बर दे तेरे..
नीरज नम्बर देकर - अब चल शमा चलते है..
गौतम - मेरी बात सुन.. लड़की का ख्याल रखना.. पुलिस में है मेरा बाप.. इसपर जरा सी खरोच आई तो खानदान चोद के पटक दूंगा तेरा..
नीरज - प्यार करता हूँ अपनी जान से ज्यादा.. उम्र भर साथ रखूँगा..
गौतम - शमा अपनी सारी id औऱ डॉक्यूमेंट साथ लेकर जाना.. कोर्ट मैरिज में जरुरत पड़ेगी..
रेशमा - हाँ शमा..
शमा - नीरज मैं अभी घर जाती हूँ.. थोड़ी देर बाद तुझे बस स्टेण्ड पर मिलूंगी..
नीरज - मैं तेरा इंतजार करूंगा शमा.. शुक्रिया तुम्हारा..
दोनों चले जाते है..
 
Update 37


वीरेंद्र सिंह को गजसिंह औऱ कर्मा डाकू का कोई नाम औऱ निशान नहीं मिला तो थक्कर महल लौट के आ गया..
जब वीरेंद्र सिंह महल आया तो उसके सिपाही भी उसकी बटाइ गई चीज पश्चिम की रेतीली जमीन से लेकर आ चुके थे..
दो दिन पहले सवान की पहली बारिश ने सैनिको के लम्बे इंतजार को समाप्त कर दिया था.. बैरागी को उसकी मगई चीज लाकर दे दी गई थी औऱ अब बैरागी अपने काम में लग गया था..
वीरेंद्र सिंह जागीर की सीमाओ पर चौकसी बढाकर बैरागी के कार्य के सफल होने की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था..

रुक्मा अब पूरी तरफ सकुशल हो गई थी औऱ उसने अपने कश के बाहर खड़े समर से बहुत बार बहाने बहाने से बात करने की कोशिश की थी मगर समर अपनी असली जगह जानता था औऱ उसने राजकुमारी के प्रेम भरे आग्रह औऱ सन्देश का कोई जवाब नहीं दिया औऱ राजकुमारी को हर बार अपने दूर करते हुए अनदेखा कर दिया.. रुक्मा समर का ये व्यवहार समझ पाने में असमर्थ थी.. उसके मन में समर रमाया हुआ था रुक्मा किसी भी शर्त औऱ तर्क पर समर को पाना चाहती थी..

वैद्य ज़ी की आँख लगी तो रुक्मा चुपके से अपने बिस्तर से उठकर कश के बाहर आ गई औऱ इधर उधर देखकर कश के बाहर पहरेदारी पर तैनात समर के गले लगते हुए बोली..
रुक्मा - कल एक चिट्टी रखी थी मैंने तुम्हारे कमरबंध की गठरी में.. तुमने पढ़ी?
समर रुक्मा को अपने से अलग करता हुआ - माफ़ करिये राजकुमारी ज़ी.. मैं आपकी इच्छा पूर्ण नहीं कर सकता..
रुक्मा - मैं तुमसे तुम्हारा जवाब नहीं मांगा.. केवल अपने मन की बात तुम्हें बताइ है. मैं जानती हूं तुम मेरा प्रस्ताव स्वीकार क्यों नहीं कर रहे. तुम्हें इसी बात का भय है ना कि जब मेरे पिता को हमारे प्रेम का पता लगेगा तो क्या करेंगे? समर तुम उनकी चिंता मुझ पर छोड़ दो.. मैं तुमसे प्रेम करती हूं और अब तुम्हारे बिना जीवित नहीं रह सकती..
समर - राजकुमारी ज़ी आपकक्ष के भीतर जाइये.. यदि आपको यहां पर किसी ने मेरे साथ खड़ा हुआ देख लिया तो बिना करण ही लोग आपके और मेरे बारे में भ्रान्ति फैलाने लगेंगे..
रुक्मा - समर मैं तुमसे प्रेम करती हूं.. और मेरा प्रेम इतना कमजोर नहीं है कि किसी के कुछ भी कह देने से उसे हानि हो जाए.. मैंने तुमसे प्रेम किया है और मैं तुमसे वादा करती हूं कि मैं हमारे प्रेम के बीच आने वाली हर चुनौती को स्वीकार करके उस चुनौती का सामना कर सकती हूं और हमारे प्रेम को सुरक्षित रख सकती हूँ इसके लिए मुझे अपने पिता के विरोध में खड़ा होना पड़े तो मैं हो जाउंगी..
समर - किन्तु मैं आपसे प्रेम नहीं करता राजकुमारी.. आपको मेरे जैसे साधारण सिपाही के पास बार-बार आना शोभा नहीं देता..
रुक्मा - क्या शोभा देता है और क्या नहीं.. इसका फैसला तुम मत करो समर.. मैं तुमसे प्रेम करती हूं और बदले में तुम्हें भी मुझसे प्रेम करना पड़ेगा..मेरा प्रेम प्रस्ताव कोई आग्रह नहीं है जिसे तुम ठुकरा कर चले जाओगे.. मैं तुम्हारी राजकुमारी हूं.. औऱ तुम्हारी राजकुमार होने के नाते मेरा तुम पर आधीपत्य है.. तुम्हे मेरा हर आदेश मानना होगा औऱ मेरे कहे अनुसार ही आचरण भी करना होगा..
समर - रानी माँ के आने का समय हो गया है राजकुमारी.. अब आपको भीतर कश में जाना चाहिए..
रुक्मा फिर से समर के गले लगते हुए - मेरे पहले मिलन का भी समय आ चूका है समर.. मैं चाहती हूँ तुम मुझे भोगो.. औऱ मैं तुम्हे..
समर - कैसी बातें कर ही हो आप राजकुमारी.. मैं आपके योग्य नहीं.. अगर किसी को आपकी बातों का पता चला तो मेरा सर धड से अलग कर दिया जाएगा..आप अपने कश में जाइये..
रुक्मा - अभी के लिए मैं जाती हूँ समर.. तुम्हे जोखिम में डालना मेरा उद्देश्य नहीं है.. पर तुम याद रखना मैं तुम्हे अपनेआप से अलग नहीं होने दूंगी..
ये कहकर रुक्मा कश में चली जाती है...

समर के पहरेदारी का समय समाप्त होता है औऱ वो महल में एक जगह बैठकर आराम करने लगता है..
जयसिंह - क्या हुआ समर आज भी यही रुकने की मंशा है? तुम अपने घर क्यों नहीं जाते? तुम्हारी माँ तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही होगी..
समर - मैं बस जाने ही वाला था जयसिंह काका.. बस थोड़ा आराम करने यहां ठहर गया था..
जयसिंह - कोई समस्या है क्या समर.. पिछले 4-5 दिनों से तुम्हे देख रहा हूँ बहुत बुझे बुझे रहते हो..
समर उठते हुए - नहीं काका.. कुछ नहीं.. मैं तो बस यही सोच रहा था कि गजसिंह को कैसे पकड़ा जाए..
जयसिंह - उसकी चिंता तुम छोड़ दो समर.. इस बार उसके लगभग सभी साथी मारे गए है.. अब वो हमले की हिम्मत नहीं करेगा.. मुझे तो बस इस बात का आश्चर्य है कि इतने गुप्त रास्ते के बारे में उसे बताया किसने? जो भी हो.. तुमने अपनी बहादुरी साबित कर दी.. अकेले ही इतने दुश्मनों का खात्मा करना एक वीर योद्धा कि चरम सुक्ति है जिसे तुमने पा लिया है..
समर - आप आराम कीजिये.. अभी आपकी चोट के घाव नहीं भर पाए है.. आपका इतना चलना फिरना ठीक नहीं..
जयसिंह - तुम मेरी चिंता मत करो.. अब तुम जाओ समर..
समर - ठीक है काका..

समर जयसिंह के पास से उठकर अपने घर की तरफ चल देता है और रास्ते में यही सोचता रहता है कि वह घर जाकर अकेला क्या करेगा किस तरह रहेगा अब उसके घर में उसका इंतजार करने के लिए और कोई भी तो नहीं है अगर नियति उसके साथ यह खेल नहीं खेलती और जिस तरह से उसका परिवार पहले था वैसा ही चलता रहता तो कितना अच्छा होता..
समर की मां लता की सच्चाई अगर उससे हमेशा छुपी रहती तो कितना अच्छा होता समर कितनी आसानी से और चैन से जीवन जीता..
समर को लग रहा था कि उसकी मां लता को अपने किये का पछतावा हो रहा होगा औऱ वो शर्म से घर छोड़कर कहीं चली गई होगी, वह अब उससे कभी नहीं मिलेगी.. समर भी अपनी उदासी पर कायम था.. समर को अब लता पर उतना गुस्सा नहीं आ रहा था जितना उसे पहले आ रहा था वह जानता था कि लता ने अपनी जिंदगी बचाने के लिए और अपने जीवन को आसान बनाने के लिए बहुत सारे पाप किए हैं लेकिन उसका असली गुस्सा इस बात पर था कि उसने अपने ही बेटे को मारने की कोशिश की थी.
समर घर जाते हुए रास्ते में यही सोच रहा था कि उसकी मा लता कहां होगी कैसी होगी और किस हाल में होगी.. आखिर वह अकेली जाएगी भी कहां उसके सभी साथियों की मौत हो चुकी है और अब उसके पास कौन सा नया ठोर ठिकाना होगा.. क्या वो वापस अपनी असली जगह चली जाएगी या फिर अब भी कहीं उसका कोई परिचित या कोई साथी बचा होगा जिसके पास लता जाकर शरण लगी..
समर को कहीं ना कहीं अब लता की याद आने लगी थी और वह सोचने लगा था कि क्या वो लता को माफ कर सकता है क्या वो लता था के साथ एक नई शुरुआत कर सकता है और फिर से उसी तरह जिस तरह से वह पहले लता के साथ रहता आया था वापस रह सकता है? समर के दिमाग में बहुत सारी बातें चल रही थी और बहुत सारे ख्याल दौड़ रहे थे ख्यालों से उथल-पुथल होकर उसका सर चकरा रहा था और भारी होने लगा था रास्ते में ही उसने कई बार अपने आप को अलग-अलग बातों में उलझाया हुआ रखा था..

घर पहुंचने में जब कुछ ही फैसला रह गया तब समर यह सोचकर परेशान होने लगा था कि अब उसे कभी अपने घर में उसकी मां लता नजर नहीं आएगी और अब वो कभी लता से नहीं मिल पाएगा इसी के साथ समर लता के साथ बिताये हसीन पलों को और उन यादो को याद कर रहा था जो दोनों ने मां बेटे के तौर पर बिताये थे.. समर को रह रहकर अब लता की याद आने लगी थी और उससे भी ज्यादा समर को अब लता के साथ जंगल पहले सम्भोग का मनोरम दृश्य भी याद आने लगा था जिससे वो कामुकता से भरने लगा था.. समर और लता के बीच बने रिश्ते की नई शुरुआत जंगल के उस जगह से हुई थी जहां लता ने अपने बेटे समर की जान लेने की कोशिश की थी..

समर को लता के बदन का स्पर्श और उसकी कोमलता के साथ-साथ उसके बदन से उठती गंध का भी अहसास होने लगा था.. समर को उस वक़्त गुस्से में कुछ नहीं सुझा तो उसने अपनी माँ लता के साथ सम्भोग कर लिया लेकिन बाद में वही सब उसके दिमाग में चलने लगा.. उसे लगा था की वो लता उर्फ़ लीलावती को सजा दे रहा है मगर जिस तरह लता ने उसके साथ संभोग में भागीदारी निभाई थी उसे लता को किसी बात का पछतावा ना होने का अंदाजा समर को लग चुका था और को जानता था कि लता को उसके साथ संभोग में मजा आया था..

समर लता की तरफ आकर्षित हो चुका था और वह लता को वापस पाना चाहता था लेकिन लता के किए कुकर्मों की वजह से वह लता को ना तो ढूंढने जाने को तैयार था ना उसका मुंह वापस देखने को.. समर ने लता को भूलाने का तय कर लिया और अब आगे से समर ने लता के बारे में और कोई ख्याल नहीं सोचने का भी तय कर लिया..

समर घर की चौखट पर आ पहुंचा और दरवाजा खोलते हुए अंदर घुसा तो उसने देखा कि लता आँगन में पानी का बर्तन लिये खड़ी थी औऱ उसीको देखे जा रही थी.. जब समर आँगन में आया तो लता ने पानी देते हुए कहा..
लता - 5 दिनों से यहां तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही हूँ.. जागीरदार से ऐसी भी क्या निष्ठा औऱ जुड़ाव की घर आने की याद ही नहीं रही..
समर पानी का बर्तन लेकर फेंकते हुए - कहा था वापस अपना मुख मत दिखलाना.. क्यों आई हो तुम यहां?
लता प्यार समर के करीब आते हुए - सजा लेने.. मैं जानती हूँ मेरा कार्य क्षमा के योग्य नहीं है लेकिन तुम अपनी माँ को उसके कार्य की जो सजा देना चाहो, मुझे मंज़ूर है..
समर गुस्से में - अपने बेटे की जान लेने की कोशिश करने वाली माँ नहीं होती लीलावती.. अपना ये ढोंग मेरे आगे मत करो.. अगर तुम यहां से नहीं जाती तो मैं ही चला जाता हूँ..
यह कहकर जैसे ही समर घर के मुख्य द्वार की तरफ बढ़ा लीलावती भाग कर दरवाजा बंद करते हुए दरवाजे से चिपक गई औऱ समर से बोली - ऐसा मत कहो समर.. तुम्हारी माँ अब बदल चुकी है.. चाहे जो इंतिहान ले लो.. तुम कहो तो मैं ही बीरेंद्र सिंह को अपना सच बता दूंगी.. फिर मुझे जो सजा मिले मंज़ूर है.. लेकिन तुम इस तरह मुझे मत धुतकारो..

लता के भागने और दीवार से चिपकने के बीच उसकी ओढ़नी उसके माथे से और उसके आंचल से सरक गई थी जिससे उसके बदन के सुडोल उन्नत उभार, चिकनी नाभी औऱ गर्दन के आसपास लटकती जुल्फे दिख गई औऱ समर के तन बदन में फिर से लता को पाने की लहर दौड़ गई.. समर एक टक लता के बदन को देखने लगा औऱ लता को भी इस बात की खबर थी की समर उसपर मोहित होने लगा है..

लता - मेरा मरना अगर लिखा है तो मैं तुम्हारे हाथों से मरना पसंद करुँगी समर.. तुम ही मेरी जान लेलो.. अगर उससे मुझे माफ़ी मिलती है तो मुझे प्रसन्नता होगी..
समर अपना ध्यान लता के बदन से हटाते हुए - मेरे मार्ग से हटो लीलावती.. मैं तुम्हे औऱ नहीं देखना चाहता..
लता समर को देखकर अपनी चोली उतारते हुए - देखना तो तू चाहता है समर.. आज मैं खुलके दिखा देती हूँ..
लता अपनी चोली उतारकार समर के करीब आती है औऱ उसे अपनी बाहों में भरते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ लगा देती है औऱ समर भी लता के प्रभाव में बहक जाता है..

समर के मन में लता को पाने की दबी हुई इच्छा उसके बाहर आ जाती है और वह अपनी लीलावती की कमर में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचते हुए उठा लेता है और भीतर ले जाकर बिछोने पर पटक देता है..
समर लता के ऊपर आ जाता है और लता भी समर को अपने ऊपर खींच कर लेटा लेती है और उसके मुख से अपने मुख को लगाकर चुंबन शुरू कर देती है दोनों एक दूसरे को भी बेतहाशा चूमते हैं इस तरह की जैसे एक दूसरे को खा जाने की नियत रखते हो.. दोनों के मन में एक दूसरे को पाने की चाहत भरी हुई थी और इसी चाहत का असर था जो दोनों को अब एक दूसरे पर दिखाई दे रहा था दोनों ही एक दूसरे को अपनी अपनी बाहों में जकड़ कर ऐसे चूम रहे थे जैसे दोनों पिछले जन्म के बिछड़े प्रेमी हो..

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दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता समाप्त हो चुका था और अब जो रिश्ता बन चुका था वह एक प्रेमी और प्रेमिका का था जो एक घर में एक कमरे में एक बिछोने में एक दूसरे को अपने-अपने बदन की नुमाइश करते हुए जकड़े हुए थे..
लता ने बिना चुंबन को तोड़े हुए समर के बदन से उसके वस्त्र उतार फेक और अपना घाघरा भी खोलकर नीचे सरकार दिया जिससे दोनों अपनी प्राकृतिक अवस्था में आ गए..

दोनों के मिलन की संक्रमानता पूरे कमरे में फैल रही थी और जिससे पूरा घर मादकता के वातावरण से भरा जा रहा था.. कभी लता समीर को अपने ऊपर खींचकर चूमती तो कभी समर लता को अपने ऊपर खींचकर चूमता.. दोनों एक दूसरे को चूमते हुए अब होठों के आसपास और गर्दन के हिस्से को भी चूमने लगे थे और समर जैसे कामुकता के शिखर पर पहुंचकर अपनी जीभ औऱ होंठ से लता के चेहरे और गर्दन को चूमता हुआ चाटने लगा था..

लता से भी अब ना रहा गया औऱ वो समर का लंड पकड़कर अपनी चुत में घुसाती हुई गांड उठा उठा के चुदवाने लगी.. अपनी माँ की काम कला से प्रभावित समर भी लता की चुत को अपने लंड से जोर जोर से पीटने लगा.. चुदाई की आवाजे चारो तरफ फैलने लगी थी..

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समर ने अपनी मां के चेहरे पर काम के प्रभाव में आ रहे ऐसे हाव भाव देखे की समर लीलावती पर पूरी तरह से मोहित हो गया और अब समर का दिल लीलावती पर पूरी तरह से आ गया..

समर ने लीलावती की चुत से लंड निकालकर उसे पलटने को कहा औऱ लीलावती ने बिना कुछ कहे पलटकर समर को देखते हुए एक हाथ से अपनी गांड खोलकर समर के आगे परोस दी.. समर ने लीलावती के चेहरे को देखते हुए उसकी चुत में वापस लंड पेल दिया औऱ लीलावती के बाल पकड़ कर चोदने लगा.. इस बार लीलावती की चुदाई के शोर में लीलावती की कामनीय सिस्कारी भी शामिल थी..

समर पीछे से अपनी मां लीलावती की ले रहा था और लीलावती अपने बेटे समर को पीछे से दे रही थी.. दोनों के मन में आपस में एक दूसरे के प्रति प्रेम लगाव आकर्षक और मोह वापस आ चुका था मगर उसने अब माँ बेटे का रूप ना लेकर एक प्रेमी और प्रेमिका का रूप लिया था..

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लीलावती झड़ चुकी थी मगर समर अब झड़ने वाला था और लीलावती घोड़ी बनाकर समर के आगे ऐसे चुदवा रही थी जैसे वो उसकी माँ नहीं कोई औऱ हो.. समर लीलावती की चुत में झड़ गया औऱ उसीके ऊपर गिर गया..

लीलावती समर के नीचे से निकलते हुए - तुझे भूक लगी होगी ना समर.. मैं भोजन पका देती हूँ..
समर ताने मारता हुआ - ज़हर तो नहीं मिलाओगी लीलावती?
लीलावती अपना घाघरा उठाते हुए - अब भी रूठें हुए हो अपनी माँ से.. सजा देना चाहते हो..
समर लीलावती का घाघरा छीनकर - सजा तो पूरी रात मिलेगी.. अभी जा पका दे भोजन.. औऱ ये वस्त्र रहने दे.. जब उतारने ही है तो पहनने की क्या आवश्यकता?
लीलावती हसते हुए चले जाती है..

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Update 38

क्या हुआ बैरागी?
कुछ नहीं हुकुम.. बस आपके भय का निवारण होने ही वाला है.. आज आपको आपके भय से मुक्ति दिलाने के लिए मैं उस औषधि को तैयार कर दूंगा जिससे आपका भय समाप्त हो जाएगा..
ये तो बहुत अच्छी बात बताई तुमने बैरागी.. आखिकार मैं अपने भय औऱ पीड़ा से मुक्त हो ही जाऊँगा.. मैं बहुत खुश हूँ बैरागी.. मैं तुझे ये सारे पौधे औऱ औषधिया इस जगह के साथ देता हूँ तू जो चाहे कर मगर मुझे आज मेरा माँगा हुआ उपहार बनाकर दे दे..
आप निश्चिन्त रहिये हुकुम अभी रात के भोजन के साथ आपको उस औषधि का भी सेवन करना होगा.. मैं उसे बनाकर आपकी सेवा में प्रस्तुत कर दूंगा..

बैरागी ने औषधि का निर्माण कर दिया और उसे वीरेंद्र सिंह को खिलाने के लिए रात के खाने के साथ पेश कर दिया जिसे वीरेंद्र सिंह खाता हुआ बड़े चाव से अपने ख्यालों में गुम हो गया और अब उसे किसी बात का और कोई भय नहीं रहा अब वह हमेशा के लिए जीवित रहेगा और अपने जीवन को यूं ही राज करते हुए बरकरार रखेगा..

बैरागी ने औषधि बनाने के बाद वीरेंद्र सिंह को खिला दी थी और अब वह वीरेंद्र सिंह के महल में ही औषधालय में रहकर नई नई औषधि का निर्माण कर लोगों के रोगों का और कष्ट का निवारण करने लगा था वह कई रोगों का उपचार मात्रा देखने से ही कर देता और उसका नुस्खा सुझा देता..
बैरागी दिन ब दिन बहुत ही गुणी औऱ प्रसिद्ध होने लगा था. इसी के साथ उसका मेलझोल वीरेंद्र सिंह की धर्मपत्नी सुजाता से बढ़ने लगा था सुजाता और बैरागी एक साथ मिलकर कई बार घंटे तक लंबी-लंबी बातें करते और अपने बारे में और दूसरे के बारे में यानी एक दूसरे के बारे में नई-नई बातें जानते और पूछते हैं दोनों का मेल मिलाप इस कदर पड़ चुका था कि दोनों के मन में अब एक दूसरे के प्रति आकर्षण जागने लगा था महीनों गुजर गए थे और अब बैरागी और सुजाता का यह प्रेम संवाद अब वास्तविक प्रेम का रूप लेने लगा था बैरागी के मन में अभी भी मृदुला के लिए अकूत प्रेम था जो उसे सुजाता से प्रेम करने से रोक रहा था.

मगर अब सुजाता बैरागी के बिना एक पल भी जीने को तैयार नहीं थी वह चाहती थी कि बैरागी उसे अपना ले और वीरेंद्र सिंह की पीठ पीछे बैरागी और वह एक साथ संबंध बनाकर खुशी से जीवन जी सके और यह बात किसी और के सामने प्रकट नहीं हो.. जिसके लिए बैरागी कभी भी तैयार नहीं था..

समर भी पहरेदारी करते हुए रुकमा के प्यार में पड़ ही चुका था रुक्मा उसे अपने हुस्न और बातों से इस कदर अपने प्यार में उलझा लिया कि वह अब रुकमा के साथ प्रेम के मीठे बोल बोलने लगा था और उसके साथ जीवन बिताने को लालायता मगर घर पर समर का संबंध लीलावती से भी मधुरता था.. वह हर रात लीलावती को अपनी अर्धांगिनी की तरह ही प्यार करता और अब दोनों उसे घर में मां और बेटे की जगह पति और पत्नी की तरह रहने लगे थे..

लीलावती अपनी कोमकला से समर को मोहित कर चुकी थी और हर रात समर की भूख के साथ उसके बदन की भूख को भी ठंडा करती थी उनका प्रेम एक नया मोड़ ले चुका था..
लीलावती औऱ समर जब भी घर में होते दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं होता और दोनों घर के भीतर नंगे ही एक दूसरे के बदन से लिपट मिलते..


वीरेंद्र सिंह औषधि का सेवन करके अब अपने आप को एक अजीत योद्धा समझता था जिसे कोई जीत नहीं सकता था उसने जयसिंह की मदद से अब जागीर के आसपास की जगह भी अपना अधिकार करना शुरू कर दिया था और वह बहुत गर्व से शासन करने लगा था उसे अब अपने घर परिवार की चिंता न होकर अपने साम्राज्य की चिंता ज्यादा होने लगी थी और उसकी वह और पीड़ा समाप्त हो चुकी थी वह बैरागी का सम्मान करता था मगर अब बैरागी उसकी आंखों में चुभने लगा था जिस तरह से बैरागी और सुजाता के बीच नजदीकी बढ़ने लगी थी वीरेंद्र सिंह की नजर उन पर बनी हुई थी वीरेंद्र सिंह सुजाता और वह बैरागी को अपने सामने ही कई बार लंबी-लंबी वार्तालाप करते हुए देखा तो जलन से सिकुड़ जाता और सोचता कि सुजाता उसकी पत्नी होकर एक नीचे कुल के लड़के के साथ इतनी लंबी लंबी बातें क्यों कर रही है और क्यों वह उसके काम में अब उसकी सहायता कर रही है सुजाता का स्वभाव और व्यवहार वीरेंद्र सिंह की तुलना में अब बैरागी के साथ बहुत ही मधुर और शालीन हो चुका था..

सुजाता के मन में बैरागी के प्रति एक अलग प्रेम का भी उद्धव हो चुका था जिसे वह मन ही मन बैरागी को बटा कर उसका प्रेम पाना चाहती थी और उसके साथ नया रिश्ता कायम करना चाहती थी मगर बैरागी इसके के लिए कते भी तैयार नहीं था.. मगर सुजाता ने इतना जरूर कर दिया था कि अब बैरागी मृदुला को याद करता था मगर फिर से प्रेम के बंधन में बंधने को भी आतुर होने लगा था..

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वीरेंद्र सिंह की नजर सुजाता पर थी मगर उसे क्या पता था कि उसकी बेटी राजकुमारी रुकमा एक सिपाही के प्रेम में पड़ी हुई है और वह उसके साथ अब अकेले मिलने भी मिलने लगी है..

वीरेंद्र सिंह के सिपाही जो उसके गुप्तचर थे उन्होंने वीरेंद्र सिंह को सुजाता और बैरागी के पनपते प्रेम और रुकमा और समर के पनपते हुए प्रेम के बारे में अवगत करवाया तो वीरेंद्र सिंह गुस्से से भरकर अपने सिंहासन से खड़ा हुआ और अपनी तलवार लेकर समर की तरफ चलता हुआ क्रोध से भर गया और सोचने लगा कि आज वह समर की जान ले लेगा और उसे बैरागी को भी यहां से निकल बाहर करेगा यह सोचते हुए वीरेंद्र सिंह जा ही रहा था कि उसे किसी गुप्तचर के आने की सूचना हुई..

गुप्तचर ने वीरेंद्र सिंह को बताया कि बैरागी और सुजाता औषधालय में एकांत में कुछ निजी पर गुजर रहे हैं और अब उनके बीच में जो फासला होना चाहिए था वह समाप्त हो चुका है. वीरेंद्र सिंह और गुस्से से भर गया और उसने फिर समर का ख्याल छोड़कर पहले बैरागी से निपटने का फैसला किया और बैरागी की तरफ चलने लगा वीरेंद्र सिंह औषधि में जैसे ही पहुंचा उसने देखा कि सुजाता और बैरागी के मध्य चुंबन हो रहा है..

दोनों के बीच उम्र का फैसला था मगर मन का फैसला मिट चुका था दोनों एक दूसरे को प्रेम करने लगे थे और इसी प्रेम का यह नतीजा था कि बैरागी और सुजाता ने एक दूसरे के होठों को आपस में मिल लिया था और दोनों एक दूसरे को प्रेम से चूमने लगे थे वीरेंद्र सिंह ने जैसे ही उनका चुंबन देखा वह गुस्से से चिल्लाता हुआ बैरागी की तरफ बड़ा और अपनी तलवार से बैरागी पर प्रहार करने लगा बैरागी वीरेंद्र सिंह के प्रहार से बच गया और उसे विनती करते हुए बोला कि मुझे माफ कर दो हुकुम मैं आपका दोषी हूं किंतु मैं रानी मां से प्रेम करने लगा हूं आप मेरी इस गलती को क्षमा कर दो... मगर वीरेंद्र सिंह गुस्से में था उसने बैरागी की एक बात नहीं मानी और उस पर दूसरा प्रहार किया जिससे भी बैरागी ने खुद को बचा लिया और फिर अपने गले में बंधा हुआ ताबीज उतरते हुए कहा कि हुकुम मुझे यह ताबीज उतार लेने दो लेकिन इस बार वीरेंद्र सिंह ने इतना सटीक और सीधा वार किया कि बैरागी के ताबिज़ उतारने से पहले ही उसका गला तलवार से एक ही झटके में अलग हो गया..

जैसे ही बैरागी की गर्दन कटी उसके खून से बहती हुई रक्त ने परछाई का रूप ले लिया जो वीरेंद्र सिंह की तरफ अपने विकराल स्वरूप को लेकर वीरेंद्र सिंह को मारने बढ़ी और उसे मारने वाली थी कि सुजाता बीच में आ गई और सुजाता ने परछाई से वीरेंद्र सिंह को बचाते हुआ अपनी जान दे दी.. वीरेंद्र सिंह की जगह परछाई सुजाता पर आ बड़ी और सुजाता की जान चली गई.. वीरेंद्र सिंह ने जब ऐसा होते देखा उसकी आंखों ने इस दृश्य पर विश्वास नहीं किया और वह सोचने लगा कि बैरागी ने आखिर ऐसा क्या ताबीज़ पहना था और क्यों यह परछाई उसके शरीर से निकालकर उसकी तरफ बड़ी थी लेकिन इसी के साथ अब उसे सुजाता के मरने का बहुत दुख हो रहा था और वह विलाप करते हुए जोर-जोर से सुजाता को देखकर रोने लगा और उसे अपनी गोद में उठाकर दहाड़े मारता हुआ चीखता हुआ रोने लगा...

सिपाहियों ने आकर जब यह हाल देखा तो वह वीरेंद्र सिंह को समझाते हुए उठाने लगे जयसिंह ने वीरेंद्र सिंह को संभालते हुए सारी परिस्थितियों समझी और फिर परिस्थितियों को समझने के बाद वीरेंद्र सिंह को वहां से ले जाकर एक कक्ष में बैठा दिया और बैरागी की लाश को वहां से ले जाकर महल से थोड़ा दूर ही पीछे एक खाली जगह में दफना दिया.. इसी के साथ में सुजाता का भी पूरी रीती और नीति के अनुसार क्रियाकर्म करते हुए अंतिम विदाई दी..

वीरेंद्र सिंह को अपनी हालत पर बहुत रोना आ रहा था उसकी की गई गलती अब उसे पछतावा दे रही थी और उसे बहुत पछतावा हो रहा था वीरेंद्र सिंह के हाथ में अब कुछ भी नहीं बचा था..

वीरेंद्र सिंह ने इसी के साथ में अपने गुस्से में एक औऱ निर्णय लिया औऱ समर को खत्म कर देने के लिए काफी सारे सिपाही उसके घर पर भेजें और जब समर अपनी मां लीलावती के साथ घर पर था तब वीरेंद्र सिंह के सिपाहियों ने उसके घर पर आक्रमण कर दिया और समर के साथ लीलावती को भी मौत के घाट उतार दिया..
समर और लीलावती अपनी मृत्यु को प्राप्त हो चुके थे. समर की खबर सुनकर रुक्मा ने भी आत्महत्या कर ली और उसका प्रेम अधूरा ही रह गया..

वीरेंद्र सिंह ने जब रुक्मा की खबर सुनी तो वो पूरी तरह से पत्थर दिल बन गया औऱ अब उसने अकेले ही जागीर पर शासन करने का निर्णय लिया और केवल अपने विश्वासपात्र सैनिकों को अपने करीब रखने लगा उसने जागीर के आसपास के इलाकों पर अपना कब्जा कर लिया और आसपास की जगीर भी जीत ली जिससे उसका कद और बढ़ चुका था..

वीरेंद्र सिंह अपने महल में आराम से शासन कर रहा था और अब उसने अकेले ही जीवन बिताने का फैसला कर लिया इसी के साथ वह अब नए-नए शौक पलने लगा था उसने वेश्याओं का सहारा लेकर सुजाता को बुलाने का निर्णय किया. इसी के साथ वह भोग विलास में जुट गया था वह अपने जीवन का पूरा आनंद लेना चाहता था इसलिए वह किसी और की परवाह किए बिना अपने ही बारे में सोचने लगा था और उसको अब सुजाता और अपनी पुत्री जो आत्महत्या करके मर चुकी थी उसके भी याद नहीं रही थी..

वीरेंद्र सिंह अब सत्ता के नशे में इतना चूर हो चुका था कि उसे और किसी की परवाह नहीं थी वह आसपास की जगीरो को जीत कर उन पर शासन करने में और भोग विलास करने में ही अपने दिन गुजरने लगा था वह अपनी सत्ता और बढ़ाना चाहता था और शासन बढाकर रियासत पर कब्जा करना चाहता था उसने आसपास और जागीर को जीत लिया था.. आसपास की 8 जागीर को जीतकर वीरेंद्र सिंह अब रियासत पर आक्रमण करने का प्लान बना रहा था और ऐसा ही वह करना चाहता था वीरेंद्र सिंह के मोसेरे भाई जो रियासत के राजा थे उनको वीरेंद्र सिंह का डर सताने लगा था और वह सोचने लगे थे कि वीरेंद्र सिंह रियासत पर कभी भी आक्रमण करके उनको गद्दी से हटा देगा और खुद अब रियासत पर शासन करके पूरी रियासत पर कब्जा जमा लगा..

वीरेंद्र सिंह भी इसी प्रयास में लगा हुआ था. उसने भोग विलास करते हुए और अपने शौक पूरे करते हुए जयसिंह से कहकर सेना को तैयार कर लिया था और अब वह रियासत पर आक्रमण करने ही वाला था..

वीरेंद्र सिंह की शक्तियां बढ़ गई थी उसने द्वन्द युद्ध में कई जागीरदारों को और सरदारों को मार गिराया था जिससे सारे जगह उसकी वाहवाही और बलवान होने की चर्चा थी.. वीरेंद्र सिंह अपनी सेना तैयार करके रियासत पर आक्रमण करने वाला था लेकिन उससे एक रात पहले वह हुआ जो होने की कल्पना किसी ने भी नहीं की थी और ना ही वीरेंद्र सिंह को इस बात का अंदाजा था कि ऐसा उसके साथ हो सकता है और कोई ऐसा भी है जो उसे कीड़ो की मरने के लिए छोड़ सकता है..

मृदुला को अपनी पुत्री मानकर पालने वाला आदमी जिसका नाम जोगी था वापस आ चुका था उसकी सिद्धियां पूरी हो चुकी थी और उसके साथ उसका शेर बालम भी जंगल में उसी जगह आ चुके थे जहां से वह मृदुला और बैरागी को छोड़कर गया था..
जोगी ने जब वापस वहां आकर स्थिति देखी तो पाया कि अब वहां कोई नहीं था और वहा जो कुटिया थी वह भी अब पुरानी सी हो गई थी.. किसी के नहीं रहने से वहां की हालत अब जंगल के बाकी हिस्सों जैसे ही हो गई थी.. आदमी ने जब कुटिया के पास बना हुआ कब्रनुमा खड्डे को देखा तो उसे अंदाजा हुआ कि कुछ ना कुछ अनहोनी जरूर हुई है उसने खड्डे को खोदना शुरू किया और जब उसने खड़े को खुदा तो उसमें मृदुल को पाया.. आदमी का मन इतना हताश निराश और दुखी पीड़ा से भर गया कि उसकी चीख से जंगल की सारी हवाएं ठहर गई और परिंदे पेड़ों से उड़ कर आकाश में इस तरह लहरा गए कि मानो कोई अनहोनी होने ही वाली हो..

जोगी ने मृदुल के सर पर हाथ रखकर उसके पीछे जो कुछ हुआ उसकी सारी कहानी जान ली और उसे पता चल गया कि उसकी जान कैसे गई है..

जोगी ने बैरागी से मिलने की ठानी और वह मृदुला को वापस वही उस कब्र में दफनाकर वहां से चला गया और जाते हुए लोगों से बैरागी के बारे में पूछने लगा पूछते पूछते उसे एक आदमी ने बताया कि उसने बैरागी को जागीरदार वीरेंद्र सिंह के महल में देखा था जहां वह कुछ महीने रहा था..
लोगों ने आदमी को बताया कि कैसे बैरागी ने नए-नए लोगों का उपचार करके लोगों को ठीक किया और उसकी प्रसिद्धि पूरी जागीर में इस तरफ फैली जैसे घास में आग फैल जाती है मगर एक दिन अचानक उसकी कोई खैर खबर नहीं मिली.. जोगी ने जब आगे पूछा तो लोगों ने उसे बताया कि उन्होंने अफवाह सुनी है कि वीरेंद्र सिंह ने बैरागी को मार कर महल के बाहर पीछे वाले खाली जगह में दफना दिया है..

आदमी को पहले ही क्रोध की अग्नि ने प्रज्वलित कर रखा था और बैरागी की खबर सुनकर वह और ज्यादा गुस्से से भर गया उसने महल के पीछे वाली खाली जगह पर जाकर बैरागी को कब्र से निकाल कर उसके सर पर हाथ रखा और उसके साथ हुई हर घटना को जान लिया जैसे ही उसने इस बात को जाना कि वीरेंद्र सिंह ने बैरागी को मारा है वह गुस्से से तिलमिला उठा..
जोगी मृदुला को बेटी मानता था और बेटी के पति को अपना बेटा.. और दोनों की मौत पर आदमी इतना गुस्से से भरा हुआ था कि उसने सारा गुस्सा वीरेंद्र सिंह और उसकी जागीर पर निकलने का तय कर लिया..

वीरेंद्र सिंह जिस सुबह रियासत पर हमला करने के लिए निकलने वाला था उसी सुबह जोगी ने वीरेंद्र सिंह को मारने के लिए उसपर चढ़ाई शुरू कर दी..
जोगी के रास्ते में जितने भी लोग आए जितने भी सैनिक आए जितने भी योद्धा है सभी जोगी के शेर बालम के द्वारा मारे गए..
जब जोगी के सामने एक सेना की एक टुकड़ी खड़ी हुई सी आई तो जोगी ने गुस्से से अपने पैर से ठोकर जमीन पर मारी और उनकी तरफ मिट्टी उड़ा दी.. आदमी की ठोकर मारने से उड़ी हुई मिट्टी का एक एक कण एक-एक परछाई में बदल गया और उन परछाईयों ने सामने खड़ी हुई संपूर्ण सेना की टुकड़ी को पलक झपकते ही एक ही बार में मार दिया..

जोगी को ऐसा करते देखकर बाकी लोग भय से भरकर भागने लगे और सोचने लगे कि वह कौन है और क्यों वीरेंद्र सिंह को मारना चाहता है.. महल औऱ आस पास के लोग जोगी से डरकर भाग निकले औऱ सब के सब जागीर छोड़कर भाग गए..

एक बार में सारी सेना को मारने के बाद में जोगी आगे बढ़ा और महल के भीतर घुस गया...

वीरेंद्र सिंह अपने भोग विलास में डूबा हुआ था कि उसे किसी भागते हुए सैनिक ने आकर इसकी सूचना दी कि किसी आदमी ने उसके सभी सैनिक और पूरी सेना को एक बार में मार दिया है और ऐसा लग रहा है कि वो आदमी उसे भी मार डालेगा..

वीरेंद्र सिंह वैश्याओ के पास से उठ खड़ा हुआ औऱ कश से बाहर निकला उसने देखा की सभी लोग अपनी जान बचाकार भाग रहे है.. अमर होने के नशे में चूर वीरेंद्र सिंह तलवार लेकर उस आदमी की तरफ बढ़ गया..
जोगी ने जैसे ही वीरेंद्र सिंह को देखा उसने वीरेंद्र सिंह के पैरों को किसी मन्त्र की सहायता से वही जकड़ दिया जहा वो खड़ा था..

जोगी वीरेंद्र सिंह के पास आया और उसे घूर कर देखने लगा.. जोगी ने वीरेंद्र सिंह से कहा कि उसने बैरागी को मार कर अच्छा नहीं किया.. वीरेंद्र सिंह ने आदमी का जवाब देते हुए कहा.. कि वह अमर है उसे कोई नहीं मार सकता..
जोगी ने वीरेंद्र सिंह से कहा कि वह उसे मारने नहीं आया बल्कि वह उसे जिंदा रखकर उसके जीवन को जहाँन्नुम बनाने आया है और उसे उसके किए हुए पापों की सजा देने आया है..
आज तक वीरेंद्र सिंह को मरने का डर था अब उसे जीने का डर लगेगा वह मौत को पाना चाहेगा मगर मौत उसे कभी हासिल नहीं होगी और वह कभी मर नहीं पाएगा.. इसी के साथ ही उसका जीवन अब इतना बड़ा और पीड़ादायक हो जाएगा कि उसे हर दिन एक साल के बराबर लगेगा..

वीरेंद्र सिंह को आदमी की बातें सुनकर अजीब लग रहा था और वह सोच रहा था कि यह आदमी कैसे उसके जीवन को नर्क बना सकता है और कैसे उसके वरदान को अभिशाप में बदल सकता है..
वीरेंद्र सिंह के वापस जवाब न देने पर आदमी ने कहा कि उसने प्रकृति के नियम से छेड़छाड़ कि है जो कि उसके दुखों का कारण बनेगा और उसके किए हुए पाप उसके साथ ही रहेंगे..

जोगी का किया विध्वंस इतना भीषण था की जागीर के सभी लोग अपनी जान बचाकर निकले थे महल सुनसान पड़ा हुआ था जहां बस अब एक वीरेंद्र सिंह खड़ा हुआ था और सामने जोगी जिसे अब और कोई धुन सवार नहीं थी..

जोगी ने बैरागी के शरीर के साथ क्रिया करके बैरागी की आत्मा को वीरेंद्र सिंह के ऊपर छोड़ दिया और उसे पाबंद कर दिया कि वह वीरेंद्र सिंह को कभी चैन से सोने और चैन से रहने नहीं देगा..

इसी के साथ ही जोगी ने वीरेंद्र सिंह को भी अपने ज्ञान कला और सिद्धि के माध्यम से औषधि को निषफल किये बिना ही जीने के लिए बाध्य कर दिया.. आदमी ने वीरेंद्र सिंह की दुर्गति करने के लिए उस पर जो सिद्धियों का उपयोग किया उससे अब वीरेंद्र सिंह ना ठीक से खा सकता था ना ही सो सकता था ना ही भोग विलास कर सकता था उसकी उम्र भी अब उसके मृत्यु के समय वाली अवस्था में आ गई थी..

जोगी ने वीरेंद्र सिंह ऐसी दुर्गति की जो वह सपने में भी नहीं सोच सकता था.. वीरेंद्र सिंह अब अपनी उम्र की 11 गुनी लम्बी जिंदगी जीने वाला था.. मगर जिंदा रहने के लिए ना वो कुछ अच्छा खा सकता था.. ना ही भोगविलास कर सकता था.. ना किसी महल में रह सकता था ना ही उसे पूरी नींद आ सकती थी.. ऊपर से उसके सर पर अब बैरागी का भूत भी बैठ गया था जो अक्सर उसे उसकी नींद से जगा देता उसे चैन से सोने नहीं देता.. ना ही उसे चैन से खाने देता.. वीरेंद्र सिंह कोई भी चीज खाता तो रख बन जाती है उसे सड़ा गला ही खाना पड़ता और उसे अब इस तरह जीना पड़ता है जैसे कोई बेसहारा बेबस लाचार तड़पकर जीता है..

वीरेंद्र सिंह ने इस बंधन को खोलने के लिए और इस बंधन से मुक्ति पाने के लिए बड़े से बड़े सिद्ध ज्ञानी पुरुष की शरण में जाकर सिद्धियां और ज्ञान हासिल करने की ठान ली और आसपास जितने भी महापुरुष और महासाधु लोग थे उनकी शरण में जाकर इस बंधन से आजाद होने का उपाय करने लगा लेकिन उसे कहीं भी इसका उपाय नहीं मिला..

वीरेंद्र सिंह जागीर के बाहर भी दूर दूर तक जाकर वापस आ गया.. बहुत सी सिद्धियां और ज्ञान हासिल किये जो समय के साथ उसके साथ ही रहे..
वीरेंद्र सिंह के साथ बैरागी की आत्मा होने के कारण बैरागी को भी उन ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह वीरेंद्र सिंह के साथ-साथ सभी संतो महापुरुषों और सिद्ध बाबोओ और शानो तांत्रिको के चरणों में बैठकर वीरेंद्र सिंह के साथ ही ज्ञान प्राप्त कर रहा था.. इसी के साथ वह वीरेंद्र सिंह को कभी चैन से नहीं रहने दे रहा था वीरेंद्र सिंह अब मौत को तरस रहा था..

वीरेंद्र सिंह को जिंदगी का भय लगने लगा था और वह इसी तरह अपने दिन गुजरने लगा था.. देखते ही देखते दिन गुजरने लगे और फिर महीने साल बीतने लगे साल दर साल बीतने के बाद में बैरागी और वीरेंद्र सिंह साथ में ही रहे..

आखिर में बैरागी ने ही वीरेंद्र सिंह पर तरस खाकर उसे उसकी मुक्ति का राज़ बताया औऱ कहा की यदि कोई उसी जड़ी बूटी को जो बैरागी ने बनाई थी लाकर आपको खिला दे तो वीरेंद्र सिंह की मुक्ति हो जायेगी.. औऱ वीरेंद्र सिंह की मृत्यु के साथ बैरागी भी मुक्त हो जाएगा..

गौतम ये सब सपने में देखकर देखकर सुबह उठा तो उसने सपने के बारे में देर तक सोचा.. उसे समझ नहीं आ रहा था की उसे एक ही कहानी से जुड़े हुए सपने बार बार क्यों आ रहे है?
आज गौतम सुमन के साथ वापस आने वाला था सो उसने वापस सपने के बारे में सोचना छोड़कर नहाने का सोचा औऱ तैयार होकर गायत्री कोमल आरती शबनम सब से मिलकर वापस आने के लिए सुमन के साथ निकल पड़ा..

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प्रणाम बड़े बाबा जी...
किशोर.. तू इस वक़्त यहां? अभी तो सांझ होने में समय है फिर अचानक आने का कारण?
किशोर - बड़े बाबाजी.. बाबाजी के आश्रम में एक आदमी अपनी अंतिम साँसे ले रहा है अजीब रोग हो उसे उसके रोग के उपचार हेतु युक्ति पूछने को भिजवाया है..कहा है यदि आप आज्ञा दे तो बाबाजी आपके पास इसी समय आने को आतुर है..
बड़े बाबाजी - इस वक़्त? जानते नहीं एकान्त में हम अपने साथ समय व्यतीत कर रहे है.. विरम से कह देना अगली बार हम उसे बुलाएंगे.. तब तक वो किसी औऱ को हमारे पास ना भेजे.. किशोर.. तुमको भी नहीं..
किशोर - जो आदेश बड़े बाबाजी.. किशोर जाने लगता है तभी बैरागी वीरेंद्र से कहता है..

बैरागी - मरने वाले के प्राण अगर बच सकते है तो उसे बचाने में कोई परहेज नहीं होना चाहिए हुकुम.. जीवन अनमोल है उसकी सही कीमत मरने से पहले ही समझ आती है.. जब सारा जीवन आँखों के सामने आता है औऱ जीवन में किये अपने सही गलत कामो का तुलनात्मक अध्ययन होता है..
बड़े बाबाजी उफ़ वीरेंद्र सिंह - तू कहना क्या चाहता है बैरागी कि मुझे उस मरते हुए आदमी के जीवन की रक्षा करनी चाहिए? अरे प्रतिदिन सेकड़ो मनुष्य अपने प्राण त्याग कर इस दुनिया से अगले आयाम में चले जाते है.. वो भी यहां से वहा चला जाएगा तो क्या हो जाएगा?
बैरागी - प्रतिदिन मरने वाले सैकड़ो लोगो कि किस्मत में बचना नहीं लिखा होता हुकुम.. उनकी मृत्यु उनकी नियति है मगर जिसके प्राण बच सकते है औऱ आपके करण जा रहे है उसका मरना आपकी हठधर्मिता..
बड़े बाबाजी उफ़ वीरेंद्र सिंह - समझ गया बैरागी.. तू सही कहता है.. मेरे ही समझने का फेर था..

बड़े बाबाजी किशोर को बुलाते है औऱ बाबाजी उर्फ़ विरम तक ये सन्देश पहूँचवाते है की उस रोगी को उनके पास लाया जाए..

विरम उर्फ़ बड़े बाबाजी किशोर औऱ कुछ अन्य लोगों के साथ उस आदमी को बड़े बाबाजी की कुटीया के बाहर लाकर जंजीर से बाँध देते है..
बड़े बाबाजी कुटीया से बाहर आकर रोगी को देखते हुए - क्या हुआ है इसे?
बाबाजी बाकी लोगों को जाने का इशारा करते हुए - गुरुदेव कोई साया लगता है.. मैंने बहुत कोशिश की समझने की मगर समझ नहीं पाया.. इसलिए किशोर को आपके पास भेजा.. इसकी पत्नी औऱ एक बच्ची भी है जो ऊपर आश्रम में रोती हुई मुझसे इसके ठीक होने का गुहार लगा रही है.. अब ये आपकी शरण में है गुरुदेव.. आप इसका उद्धार करें...

बड़े बाबाजी उस आदमी को देखते हुए - साया तो जरूर है.. पर कोनसा? ये समझने में मैं चूक रहा हूँ विरम.. इसकी दशा किसी जंगल के उजड़े हुए बरगद की तरह है औऱ आँखे किसी बांधे हुए तीलीस्म की तरह.. मैं दोनों में अंतर समझने में चूक रहा हूँ..
विरम - अब आप ही आखिरी उम्मीद है गुरुदेव.. आप ही तय करें..
बड़े बाबाजी बैरागी की तरफ देखकर - क्या लगता है?
बैरागी - समझने का फेर तो आपसे पहले भी हो चूका है हुकुम.. मगर इस बार में आपकी मदद किये देता हूँ.. इसके गले के नीचे सीने से ऊपर तीलीस्म की निशानी है.. ये किसी का बाँधा हुआ तीलीस्म है हुकुम..
बड़े बाबाजी बैरागी की बात सुनकर उस रोगी के सर के बाल पकड़ कर उसके मुंह में मिट्टी के कुछ कण डालकर सर पर अपने हाथ में पानी लेकर छिड़काव करते है औऱ उस रोगी का बंधा हुआ तीलीस्म खोल देते है जिससे वो रोगी उस बांधे हुए तीलीस्म से आजाद हो जाता है..

विरम उर्फ़ बाबाजी उस रोगी को संभालते हुए - गुरुदेव ये क्या हो रहा है?
बडेबाबाज़ी उर्फ़ विरम - तेरा रोगी तीलीस्म से आजाद हो रहा है विरम.. इसे ले जा.. औऱ 3 दिन तक पीपल के पेड़ की छाया से भी दूर रख..
विरम उर्फ़ बाबाजी - जैसी आपकी आज्ञा गुरुदेव..
किशोर - आज्ञा बड़े बाबाजी..

विरम उर्फ़ बाबाजी किशोर के साथ उस रोगी को उन आदमियों की मदद से वापस ऊपर आश्रम में ले आता है औऱ उसकी बीवी औऱ बच्ची को 3 दिनों तक उस आदमी को पीपल से दूर रखने की सलाह देता हुआ उसी आश्रम में रहने का सुझाव देता है जिस पर सब राजी हो जाते है...

सबके जाने के बाद वीरेंद्र सिंह बैरागी से पूछता है - मुझसे पहले कब समझने में चूक हुई बैरागी? मैंने तो अब तक सब सटीक ही अनुमान लगाया है..
बैरागी - सबसे जरुरी अनुमान ही अगर गलत लग जाए तो पुरे इतिहास का क्या महत्त्व रह जाएगा हुकुम...
बड़े बाबाजी - मैं समझा नहीं बैरागी?
बैरागी - आपने उस लड़के का पिछला जन्म देखा था याद है आपको..
बड़े बाबाजी - कौन गौतम?
बैरागी - हाँ हुकुम..
बड़े बाबाजी - तो? उसमे क्या गलत अनुमान लगाया मैंने बैरागी? गौतम अपने पिछले जन्म में धुपसिंह का बेटा समर ही तो है..
बैरागी - नहीं हुकुम.. गौतम अपने पहले जन्म में अपने धुपसिंह का असली बेटा था.. समर तो गज सिंह औऱ लीलावती की संतान थी..
बड़े बाबाजी हैरानी से - मतलब धुपसिंह का समर के अलावा भी एक बेटा है.. मुझसे इतना बड़ी गलती हो गई?
बैरागी - अब आपने बिलकुल सही अनुमान लगाया हुकुम.. जो कीच आपने इतने बर्षो में सीधा है मैंने भी सीखा है हुकुम.. जिस तरह आपने ध्यान लगाकर गौतम का पुराना जन्म देखने की नाकाम कोशिश की है.. मैंने भी आपका पूरा इतिहास देखा है...याद है एक बार आप माघ की रात में जंगल से गुजर रहे थे औऱ आपके पीछे जयसिंह औऱ धुपसिंह के साथ कई औऱ सैनिक भी थे.. उस वक़्त आपके पिता कुशल सिंह जागीरदार हुआ करते थे..
बड़े बाबाजी - याद है.. हमने जंगल के बीच दरिया किनारे जमाव डाला था...
बैरागी - हाँ हुकुम.. उस वक़्त जमाव के करीब बनजारों औऱ अन्य काबिलो की बस्तीया भी आबाद थी जहा रात को अपना मन बहलाने धुपसिंह औऱ उसके साथ कई सैनिक गए थे..
बड़े बाबाजी - तो इसमें क्या बड़ी बात है बैरागी.. ये तो कई बार होता आया है.. जंगल से गुजरते वक़्त कबिलो की औरतों से सैनिक सम्बन्ध बनाते ही रहते है..
बैरागी - मगर प्यार नहीं करते हुकुम.. धुपसिंह ने यही किया.. काबिले में ना जाकर बंजारों की बस्ती में चला गया औऱ एक बंजारन से प्रेम कर बैठा.. उस प्रेम का परिणाम ये हुआ कि एक लड़के का जन्म हुआ.. जो धुपसिंह की असली संतान थी औऱ गौतम का पिछला जन्म भी..
बड़े बाबाजी - बैरागी इतनी बड़ी भूल.. मैं कैसे इतनी बड़ी भूल कर सकता हूँ? मेरा मस्तिक गौतम के मिलने के बाद बहुत विचलित रहने लगा है.. मैं ध्यान भी नहीं कर पा रहा हूँ..
बैरागी - आज तृत्या है हुकुम.. मेरा प्रभाव आप पर कमजोर है.. आप थोड़ा आराम कर लीजिये..

बड़े बाबाजी कूटया में जाकर चटाई पर लेटते हुए सो जाते है...
 
Update 39

गौतम जब सुमन को लेकर वापस आने के लिए निकला तो आधे रास्ते में सुमन उससे कार चलाना सिखने की बात करने लगी औऱ गौतम गाडी हाईवे से नीचे उतार कर खड़ी रोड पर ले आया..

गौतम सुमन को गाडी चलाना सिखाने के लिए हाईवे के बगल वाली खाली सुनसान रोड पर ले आया था जहा सुमन गौतम की गोद में बैठकर गाडी चलाना सिख रही थी औऱ गौतम सुमन को धीरे धीरे गाडी चलाना सिखाते हुए उसे बदन का लुफ्त ले रहा था..

गौतम सुमन की कमर पकड़कर उसकी गांड को अच्छे से लंड पर टिकता हुआ - माँ ठीक से बैठो ना यार.. आप तो ऐसे डर रही हो जैसा मेरा लंड चला जाएगा आपकी चुत में..
सुमन स्टाइरिंग पकड़कर धीरे धीरे गाडी चलाते हुए - बेटा चुभ रहा है तेरा.. तूने लोअर क्यों नीचे सरका दिया है अपना..
गौतम - लोअर ही तो सरकाया है माँ.. कोनसी आपकी साडी उठा दी मैंने.. आप गाडी चलाने पर ध्यान दो.. देखो संभाल के ब्रैक औऱ क्लच दबाओ..
सुमन - बेटा मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कब ब्रेक दबाना है औऱ कब क्लच दबाना है..
गौतम सुमन का ब्लाउज खोलकर उसकी ब्रा उतार देता है औऱ सुमन के दोनों चुचे अपने दोनों हाथों के पंजो में पकड़ लेता है औऱ सुमन से कहता है - देखो माँ मैं जब आपका राइट बोबा दबाउ तो आपको ब्रेक मारना है औऱ लेफ्ट बोबा दबाउ तो कल्च दबाना है..
औऱ जब दोनों बोबो एक साथ दबाउ तो हॉर्न दबाना है.. औऱ जब नीचे से गांड पर झटका मारु तो समझ जाना गाडी रोकनी है..
सुमन हसते हुए - गुगु मैं तेरी माँ हूँ बेटा.. औऱ तू मेरे ही मज़े ले रहा है.. बहुत शैतान है तू..
गौतम - अब आपको ही गाडी चलाना सीखना था मैं तो इसी तरह सिखाता हूँ.. नहीं सीखना तो बोलो..
सुमन - ठीक है बेटा.. तुझे जो दबाना है दबा.. पर आज मैं गाडी चलाना सिखकर रहूंगी.. तू मेरा गुरु मैं तेरी चेली..
गौतम - माँ थोड़ी देर के लिए भूल जाओ मैं आपका बेटा हूँ.. अब से मुझे गुरूजी कहना औऱ मैं आपको अपनी चेली समझ कर गाडी चलाना सिखाऊंगा..
सुमन - ठीक है गुरूजी.. आप जैसा बोलो..
गौतम जोर से सुमन का राइट बोबा दबा देता है औऱ सुमन ब्रेक मारने की जगह चिल्ला देती है..
गौतम - ब्रेक मारने की जगह चिल्ला क्यों रही है..
सुमन गौतम को देखती हुई - इतना जोर से क्यों दबाया तूने..
गौतम वापस बोबा दबाकर - गुरूजी से तू करके बात करती है.. कैसी चेली है?
सुमन वापस आह करते हुए - गुरूजी आप बहुत जोर से दबाते हो.. लाल हो गए मेरे चुचे..
गौतम लेफ्ट बोबा दबाते हुए - गुरूजी तो ऐसे ही दबाते है..
सुमन अहह करते हुए कल्च दबती है औऱ अब इसीलिए तरह गौतम हाईवे से सटे सुनसान रास्ते पर सुमन को गाडी चलाना सिखाने लगता है.. औऱ दोनों में बातें होती रहती है.. सुमन भी इस मीठी छेड़खानी का मज़ा लेटे हुए गौतम से गाडी चलाना सीखती है औऱ बार बार गौतम को देखकर उसे थोड़ा डांटते हुए कम छेड़खानी करने औऱ धीरे खेड़खानी करने को कहती रहती है.. मगर गौतम अपने ही हिसाब से सुमन के बदन से छेड़खानी कर मज़े लुटता रहता है..

करीब डेढ़ घंटे इसी तरह दोनों इधर उधर घूमते रहते है औऱ सुनसान जगह के काफी अंदर तक आ जाते है जहा देखने से जंगल सा नज़ारा दिखाई देता औऱ वहा उन दोनों को एक खंडर दिखाई देता है.. जिसके आस पास ना इंसान था ना जानवर.. दूर दूर तक लोगों का नमो निशान तक नहीं था.. गौतम ने जोर से सुमन की गांड पे लंड का झटका दिया तो गौतम का इशारा समझ कर सुमन ने गाडी रोक दी..
सुमन हैरानी से - इतनी सुनसान जगह पर ये खंडर..
गौतम - भूतिया खंडर है माँ.. एक दोस्त ने बताया था यहां के बारे में.. लोग यहां नहीं आते जाते औऱ दो किलोमीटर दूर से ही गुजर जाते है..
सुमन - बेटा मुझे भूतो से बहुत डर लगता है.. चल यहां से चलते है..
गौतम - रुको ना माँ.. कितनी खूबसूरत जगह है.. चलो ना देखते है इस खंडर को..
सुमन - बेटा पर भूत से डरना ही अच्छा है.. यहां से दूर चलते है..
गौतम - माँ आप भी ना.. फालतू ही डरती हो.. भूत जैसा कुछ नहीं होता है.. लोग तो अफवाह उड़ाते है उनसे ही डरते है. आप चलो देखते है इस खंडर को..
सुमन डरते हुए - पर बेटा..
गौतम उतरते हुए - आप भी ना माँ.. चलो उतरो.. मैं हूँ ना..
सुमन अपने कपडे पहन कर गाडी से उतर जाती है औऱ गौतम का हाथ कस कर पकड़ लेती है..
गौतम सुमन के साथ खंडर के अंदर आ जाता है औऱ सुमन डरते हुए कसके गौतम का हाथ पकड़कर उसके साथ चलती है..
सुमन - बेटा ये खंडर तो बहुत डरावना औऱ बड़ा है..
गौतम आगे चलते हुए - आज डरावना है माँ पहले के समय कितना सुन्दर रहा होगा..
सुमन डरते हुए - बस बेटा अब वापस चलते है.. औऱ नहीं देखना..
गौतम सुमन को बाहों में भरके - अभी तो कुछ देखा ही नहीं माँ.. देखो नीचे तहखना है ऊपर भी कमरे बने हुए है.. चलो सीढ़िओ से ऊपर चलते है..
सुमन - बेटा बहुत डर लग रहा है..
गौतम - क्यों बेवजह डरती हो माँ.. चलो ना अभी तो सिर्फ खंडर शुरू ही हुआ है..
गौतम सुमन को बाहों में भरके ऊपर सीढ़ियों की तरफ ले जाता है जहा ऊपर पहुंचने पर दोनों के कान में कुछ आवाजे सुनाई देती है.. जिससे सुमन डर जाती है औऱ गौतम से लिपट जाती है मगर गौतम धीरे धीरे आवाज की औऱ जाने लगता है सुमन भी मज़बूरी में गौतम के साथ जाने लगती है.. धीरे धीरे आवाज साफ होने लगती है औऱ उन दोनों को समझ आ जाता है की ये आवाजे कैसी है..
गौतम औऱ सुमन एक दूसरे को देखते है औऱ गौतम मुस्कुराते हुए आगे चलकर औऱ आवाजे सुनने लगता है अब सुमन को भी आवाजे सुनने की इच्छाहो रही थी.. ये आवाज खंडर के ऊपर पीछे बने आखिरी कमरे से आ रही थी.. जहा किसी की चुदाई का कार्यक्रम कर पुरे जोर के साथ चल रहा था.

गौतम औऱ सुमन उस कमरे के करीब आती है तो दोनों को दिखाई देता है कि एक 25 साल के करीब का लड़का एक 40-42 साल के करीब कि औऱत को चोद रहा था.. नीचे एक कपड़ा बिछाकार दोनों मस्ती से चुदाई कर रहे थे..
औरत चुदवाते हुए - जल्दी कर हरिया.. आज तेरा बाप शहर से वापस आने वाला है..
हरिया चोदते हुए - आ जाने दे मंजू.. कोनसा वो आके हम माँ बेटे के बारे में पता ही लगा लेगा..
मंजू - बेटा 5 साल से अपनी माँ को यहां लाकर चोद रहा है तू.. कभी कोई देख लेगा तो पता नहीं क्या होगा..
हरिया - 5 साल से कौन हमें देखने यहां आया है मंजू? तू क्यों इतना फालतू डरती है? तू अच्छे से जानती है मैं तेरी चुत के बिना औऱ तू मेरे लंड के बिना अब नहीं ज़ी सकते.. तो हर बार इतना क्यों डरती है..

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मंजू - घर में ही चोद लिया कर अपनी माँ को हरिया.. क्यों मुझे चोदने के लिए यहां लाता है बार बार?
हरिया - मंजू घर में जब भी तेरा घाघरा खोलता हूँ कोई ना कोई आ जाता है.. दादी भी घर में रहती है.. यहाँ जितना आराम औऱ सुकून से तुझे चोदने में मज़ा आता है उतना घर पर नहीं आता..
मंजू - शादी कि उम्र हो गई है तेरी.. अब अपनी माँ का पीछा छोड़ दे.. तेरी चाची बता रही थी उसके गाँव में एक अच्छी लड़की है.. मैंने तेरी बात चलाने के लिए कहा है.. अगर सब ठीक रहा तो लगे हाथ तेरा ब्याह इसी बरस हो जाएगा..
हरिया चुत मारता हुआ - मंजू तुझसे कितनी बार कहु मुझे सरला के अलवा किसी से ब्याह नहीं करना..
मंजू चुदते हुए - अरे अपनी उस विधवा भाभी से शादी करके तुझे क्या मिल जाएगा हरिया? तुझे अगर सरला पसंद है तो दो-चार बार चोदकर मज़े लेले.. मैं सब संभाल लुंगी.. पर शादी क्यों करता है.. तेरी चाची बता रही थी लड़की वाले दहेज़ में दुपहिया मोटर देने को त्यार है.. तू बस हाँ कर.. लड़की अठरा बरस की है हरिया.. अभी किसी ने हाथ नहीं लगाया उसे.. कच्ची कली है बिलकुल..
हरिया - क्यों चुदाई के समय सर ख़राब करती है मंजू? सरला को मैं पसंद नहीं करता बल्कि उससे प्यार करता हूँ.. जितना प्यार तुझसे करता हूँ उतना ही सरला से भी.. भईया की मौत के सदमे में भाभी जान देने वाली थी.. पर मैंने भाभी से शादी का वादा किया औऱ समझाया तब भाभी मानी.. मंजू मैं सिर्फ तुझे ही यहां लाकर नहीं चोदता.. सरला भी यहां मुझसे चुदवाती है..
मंजू - हरिया क्यों उस विधवा रांड के चक्कर में इतने अच्छे रिश्ते को लात मार रहा है.. एक बार फिर सोच ले.. मैं तेरी सगी माँ हूँ तेरा बुरा नहीं सोचूंगी..
हरिया एक जोरदार थप्पड़ मंजू के गाल पर जमाता हुआ - बहन की लोड़ी रांड वो नहीं तू है.. मुझसे पहले किस किस से चुद चुकी है तू.. भूल गई? मेरे दोस्तों को भी नहीं छोड़ा था तूने.. सरला तो सिर्फ भईया के बाद मेरे नीचे लेटी है पर तू तो साली कई लोगों के नीचे लेट चुकी है..
मंजू - एक औऱ थप्पड़ मार दे मगर मेरी बात समझ.. तू जवान मर्द है अपनी भाभी को रखैल बनाकर भी रखेगा तो कोई तुझपर सवाल नहीं उठायेगा..
हरिया मंजू के मुंह में लोडा देते हुए - समझ नहीं आता मंजू मेरे बाप ने तेरे जैसी लालची रांड से क्यों ब्याह किया? तेरी चुत अगर मेरी कमजोरी नहीं होती ना मंजू तो मैं कबका तुझे छोड़कर चला गया होता..

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मंजू लोडा चूसते हुए - लालची नहीं बेटा मैं तो बस तेरे भले के लिए बोल रही हूँ.. माँ जो हूँ तेरी..
हरिया मुंह में माल झाड़कर - मंजू ये माँ बेटे वाला रिश्ता गाँव में सबके सामने ठीक है.. अकेले में इस रिश्ते की दुहाई मत दिया कर मंजू.. चल अब कपडे पहन..
मंजू माल पीकर कपडे पहनकर - चल हरिया.. चलते है.
हरिया - चल मंजू..

हरिया औऱ मंजू को गौतम औऱ सुमन छुपकर देख सुन रहे थे.. जब वो दोनों जाने लगे तो गौतम ने चुपके से सुमन को खंडर के एक कोने में लेजाकर खड़ा कर दिया औऱ हरिया औऱ मंजू वहा से चले गए.. उनके जाने के बाद गौतम सुमन को उस कमरे में लाता हुआ बोला..
गौतम - देखा माँ? हर जगह कोई ना कोई बेटा अपनी माँ की चुदाई कर रहा है.. औऱ आप कहती है ऐसा कहीं कुछ नहीं होता.. यहां इतने सारे कंडोम औऱ चड्डीया पड़ी है जो सबूत है इस बात का की यहां हरिया औऱ मंजू ने सगा माँ बेटा होते हुए अपनी चुदाईयो को अंजाम दिया है.. अब आप अपनेआप को रोक रही हो? आप भी मेरे साथ सेक्स करना चाहती हो ये मैं अच्छे से जानता हूँ.. पर आप ना जाने क्यों अपनेआप को मेरे करीब आने से हर बार रोक लेती हो..

सुमन आंसू बहाते हुए - मुझे माफ़ कर दे बेटा पर मैं वो नहीं कर सकती.. मेरा मन उसके लिए गवाही नहीं देता.. तू चाहे तो यही मेरी आबरू लूट ले.. जो चाहता है कर ले मैं मना नहीं करुँगी.. ये कहते हुए सुमन ने साडी का पल्लू गिरा दिया..
गौतम - माँ मुझे अगर आपकी चुदाई इसी तरह करनी होती तो बहुत पहले कर चुका होता.. मुझे आपके बदन के साथ आपकी रूह भी चाहिए.. मुझे कुत्ते बिल्लियों वाली चुदाई नहीं करनी.. जब तक आप अपने हाथ से पकड़ कर मेरा लंड अपनी चुत में नहीं डलवाती.. तब तक मैं आपको नहीं चोदने वाला..
सुमन - मैं मजबूर हूँ बेटा..
गौतम - जब तक आपकी मज़बूरी ख़त्म नहीं हो जाती माँ मेरा लंड आपकी चुत का इंतजार कर लेगा..
ये कहकर गौतम वहा से जाने लगता है मगर सुमन गौतम का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लेती है औऱ उसे गले लगाकर कहती है..
सुमन - ग़ुगु मुझे माफ़ कर दे बेटा.. मैं बहुत बुरी माँ हूँ.. तूने मुझसे पहली बार कुछ माँगा औऱ वो भी मैं तुझे नहीं सकती..
गौतम सुमन के आंसू पोछकर - किसने कहा की आप नहीं दे सकती? आप जरुर देंगी.. मुझे यक़ीन है.. अब चलो माँ.. घर चलते है..
गौतम सुमन को खंडर से वापस गाडी में ले आया.. औऱ गाडी चलाते हुए हाईवे पर आ गया औऱ थोड़ी देर बाद दोनों अजमेर पहुंच चुके थे..

सुमन - नाराज है ग़ुगु?
गौतम गाडी चलाते हुए - नहीं तो..
सुमन - तो फिर इतनी देर से चुप क्यों हो?
गौतम - बस यूँही..
सुमन - मैं जानती हूँ ग़ुगु.. तु क्यों चुप है पर तू समझ.. मैं वो सब नहीं कर सकती.. मैंने इस चुत से तुझे पैदा किया है अब इसी चुत में तुझे वापस लेने का ख्याल मुझे बहुत गलत लगता है..
गौतम - कोई बात नहीं माँ.. मैं आपसे कुछ नहीं कह रहा..
सुमन - ग़ुगु वहा गाडी रोक..
गौतम - माँ वो मिट शॉप है..
सुमन - पता है रोक ना..
गौतम मिट शॉप के आगे गाडी रोकते हुए - यहां क्या करना है आपको?
सुमन मुस्कुराते हुए - दो मिनट रुक मैं आती हूँ..
सुमन गाडी उतर कर मिट शॉप में जाती है औऱ कुछ देर बाद एक काली पन्नी में कुछ लेकर वापस आ जाती है..
गौतम काली पन्नी देखकर - इसमें क्या है?
सुमन - चीकन... तुझे चिकन करी पसंद है ना.. आज अपने हाथों से बनाकर खिलाऊंगी अपने ग़ुगु को..
गौतम गाडी चलाते हुए - अच्छा तो इस तरह से आप मेरा मन बहलाना चाहती हो.. पर आपको बनाना कहा आता है?
सुमन - नहीं आता तो रूपा से पूछ लुंगी..
गौतम ठेके के सामने गाडी रोककर - मिट के साथ दारू तो जरुरी है माँ.. कोनसा ब्राड पीना पसंद करोगी?
सुमन मुस्कुराते हुए - जो मेरे ग़ुगु को पसंद हो..
गौतम जाकर एक शराब की बोतल ले आता है.. औऱ गाडी घर के आगे लगा देता है.. सुमन औऱ गौतम घर के अंदर चले जाते है शाम होने लगी थी.. गौतम ने गाडी रूपा से कहकर वापस भिजवा दी थी..

गौतम शराब के दो पेग बनाकर - लो माँ.. शुरू करो..
सुमन चिकन धोती हुई - रुक ग़ुगु.. इसे धो लिया है बस हल्का सा काट दूँ..
गौतम - फ़ोन में देखकर क्यों बना रही हो माँ? मुझे आता है मैं सिखाता हूँ आज आपको..
सुमन पेग उठाकर गौतम से चर्स करके पेग पीते हुए - अच्छा.. तो सीखा मुझे..
गौतम पेग ख़त्म करके - ठीक है माँ.. आओ यहां..
सुमन पेग ख़त्म करके - चलो सिखाओ..
गौतम - सबसे पहले गैस ऑन करके उसपर पतीला रखो.. फिर सरसो का तेल डालकर गर्म करो..
सुमन मुस्कुराते हुए - इतना तो मुझे भी आता है मेरे शहजादे..
गौतम दूसरा पेग बनाकर एक सुमन को देते हुआ - तेल गर्म होने पर उसमे कुछ खड़े मसाले डालकर थोड़ी सी देर बाद कटे हुए प्यार औऱ हरी मिर्च डाल दो.. फिर उसमें थोड़ा सा नमक डालो..
सुमन पेग आधा ख़त्म करके - उसके बाद ग़ुगु ज़ी?
गौतम दूसरा पेग ख़त्म करके सुमन को बाहों में भरकर - उसके बाद में.. आपके जैसी किसी हसीन औऱ खूबसूरत औरत को तब तक चुम्मो जब तक प्याज थोड़े पक नहीं जाते.. ये कहते हुए गौतम सुमन को चूमने लगता है..

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सुमन गौतम को होंठों से होंठ लगाकर चूमते हुए एक हाथ से कड़ची चलाती रहती है..
थोड़ी देर बाद गौतम से चुम्मा तोड़कर सुमन - तुम्हारे प्याज ने थोड़े पक गए गुगुजी.. अब आगे?
गौतम - अब पतिले में अदरक लसन का पेस्ट डालकर तब तक पकायेगे जब तक साड़ी ब्लाउज औऱ पेटीकोट नहीं खुल जाता.. ये कहकर गौतम सुमन की साडी ब्लाउज औऱ पेटीकोट उतार देता है औऱ सुमन को ब्रा पेंटी में खड़ा कर देता है..
सुमन अपना पेग ख़त्म करके - अब आगे क्या करना चाहिए ग़ुगु ज़ी?
गौतम - अब चीकन को पतिले में डाल देना चाहिए सुमन ज़ी..
सुमन मुस्कुराते हुए चीकन पतिले में डालकर कड़ची चलाती रहती है औऱ गौतम अब तीसरे पेग को बनाकर दोनों के सामने रख देता है..
सुमन नशे में - मुझे नंगा करके खुद कपडे पहन रखा है बेशर्म खोल तू भी.. सुमन भी गौतम के सारे कपडे उतार कर रसोई में वही रख देती है जहा सुमन की साडी ब्लाउज औऱ पेटीकोट रखा था.. गौतम भी अब चड्डी में आ चूका था..
गौतम कड़ची चलाते हुए - अब थोड़ा सा चिकन को भून लेंगे..
सुमन थोड़ी देर बाद एक सिगरेट जलाकर कश लेती हुई नशे में बोली - भूनने के बाद क्या करें ग़ुगु ज़ी..
गौतम सुमन से सिगरेट लेकर कश लेटे हुए सुमन के हाथ में कटोरी देकर बोला - अब सुमन ज़ी जो आपने कटोरी में दही औऱ मसाले डालकर मिक्सचर तैयार किया है उसे पतिले में डाल देंगे..
सुमन कटोरी में दही औऱ सभी मसालो का मिक्सचर डालकर कड़ची चलाते हुए बोली - अब ग़ुगु ज़ी..
गौतम एक सिगरेट का लम्बा कश लेकर सिगरेट सुमन को देते हुए तीसरा पेग ख़त्म करके घुटनो पर बैठकर सुमन की पेंटी नीचे करते हुए सुमन की चुत चाटकर - अब अपनी माँ की चुत तबतक चाटेगे जबतक माँ की चुत जड़ नहीं जाती..

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सुमन कड़ची चलाकर सिगरेट के कश लेटी हुई अपनी एक टांग उठाकर चुत खोल देती है औऱ गौतम से अपनी चुत चटवाने लगती है..
सुमन सिगरेट के कश लेटी हुई गौतम के बाल पकड़कर नशे में उससे अपनी चुत चटवाये जा रही थी औऱ दस पंद्रह मिनट बाद सुमन गौतम के मुंह में झड़ गई..

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गौतम चुत का पानी पीकर अपने पैरों पर खड़ा हो गया औऱ सुमन गौतम को देखकर नशे में कड़ची चलाते हुए बोली - अब क्या करना चाहिए ग़ुगु ज़ी..
गौतम पतिले को देखकर सुमन से बोला - अब सुमन ज़ी पतिले में मिट मसाला औऱ हरा धनिया डालकर धीमी आंच पर तब तक पकायेंगे जब तक मेरा लंड आपके मुंह में पानी नहीं छोड़ देता..
गौतम का इशारा पाकर सुमन मुस्कुराते हुए घुटनो पर आ गयी औऱ गौतम की चड्डी नीचे सरका कर उसका लंड मुंह में लेते हुए रंडियो की तरह चूसने लगी..

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गौतम ने कड़ची चला कर पतिले को ढक दिया औऱ एक सिगरेट जलाकर कश लेते हुए होनी माँ के बाल पकड़ कर उसके मुंह में झटके मारते हुए सुमन को अपना लंड चूसाने लगा..
सुमन ने बीच में तीसरा पेग भी ख़त्म कर लिया औऱ अब नशे में पूरी तरह उतर कर पूरी रांड जैसे गौतम के लंड के साथ साथ उसके आंड को भी चुसने लगी.. गौतम अपनी माँ का ये रूम देखकर मंतरमुग्ध हो गया था सुमन बिलकुल किसी रंडी की तरह गौतम के लंड के साथ साथ उसके टट्टे औऱ जांघो के आस पास की जगह को चूसने चाटने लगी थी..
करीब 20-25 मिनट बाद गौतम का माल सुमन के मुंह में झड़ गया जिसे सुमन पी गई औऱ अगला पेग बनाने लगी.. सुमन के पैर लड़खडाने लगे थे..

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गौतम ने उसे चौथा पेग बनाने से रोक दिया औऱ बाहों में भरता हुआ बोला - लो सुमन ज़ी त्यार है आपकी चिकन करी..
सुमन मुस्कुराते हुए नशे में - तू बहुत प्यारा है ग़ुगु.. आई लव यू..
गौतम एक बड़ी सी प्लेट पर चिकेन करी डालकर - गर्म है सुमन ज़ी थोड़ा ठंडा होने दो.. फिर बताना कैसी बनी है?
सुमन नशे में - तब तक एक पेग औऱ पीते है ग़ुगु..
गौतम - नहीं आपके ज्यादा हो गई है..
सुमन - नहीं हुई.. लो अपने हाथ से पिलाओ एक पेग..
गौतम शराब नहीं डालता औऱ सिर्फ पानी का पेग बनता है..
गौतम पानी का पेग पीलाते हुए - लो सुमन ज़ी पियो..
सुमन पेग पीकर समझ जाती है कि वो सादा पानी था औऱ कुछ नहीं..
सुमन नशे में ग़ुगु का लंड पकड़ कर - मज़ाक़ मत कर गौतम.. बना मेरा पेग मुझे पीना है..
गौतम - पहले ये खाओ.. लो ठंडा कर दिया..
सुमन चिकेन लग पीस उठाकर आधा गौतम को खिलाती है औऱ आधा खुद खा जाती है..
सुमन उंगलियां चाटते हुए - उफ्फ्फ... क्या मस्त बनी है चिकेनकरी ग़ुगु..
गौतम - पहले तो कितना नाटक करती थी. मैं ये नहीं खाती वो नहीं खाती.. घर में नहीं बनेगा.. औऱ अब देखो..
सुमन औऱ गौतम एक दूसरे को चिकेन करी खिलाते हुए हलकी फुलकी छेड छाड़ करते है औऱ खाने के बाद सुमन के जोर देने पर उसे गौतम एक छोटा सा पेग औऱ बना के पीला देता है..
सुमन नशे में गौतम के होंठ चूस कर - आई लव यू बच्चा.. आई लव यू..
गौतम सुमन को रूम में लाकर बेड पर बैठा देता है..
सुमन गौतम को बाहों में भरके नशे में बोलती है - देख तूने अपनी माँ के बोबे दबा दबा के कितने बड़े कर दिए है ग़ुगु.. मेरी ब्रा कितनी टाइट हो गई है.. अब तू ही मुझे नई ब्रा लाकर देगा..
गौतम मुस्कुराते हुए ब्रा उतारकर - ला दूंगा माँ.. अब अपने बच्चे को अपना दूध पीला दो..
सुमन अपना बोबा पकड़ कर गौतम के मुंह में देती हुई - ले बेटा.. पी ना अपनी माँ का दूध.. कौन रोकता है तुझे मेरा दूध पिने से? तेरे लिए ही तो है मेरा दूध.
गौतम बूब्स चूसता हुआ - आई लव यू माँ...
सुमन बोबा चूसाते हुए - आई लोब यू टू बेटा.. चूस मेरा बोबा.. खा जा इन दोनों बोबो को बेटा.. आह्ह..
गौतम बूब्स चूसकर सुमन को पीछे धकेल देता है औऱ बेड पर पीठ के बल गिरता हुआ उसके ऊपर आ जाता है औऱ सुमन के होंठ चूमकर कहता है - माँ ट्रुथ एंड डेयर खेलते है..
सुमन गौतम का चेहरा पकड़कर - ठीक है बेटा..
दोनों कि नज़र मिलती है सुमन कि हार हो जाती है..
गौतम -माँ बोलो ट्रुथ एंड डेयर?
सुमन मुस्कुराते हुए - ग़ुगु ट्रुथ.. पूछ क्या पूछना है तुझे..
गौतम जानता था सुमन पुरे नशे में है उसने सुमन से पूछा - आखिरी बार मामा से कब चुदवाया था?
सुमन नशे में थी उसे समझ नहीं आया था कि गौतम ने उसे कितना बड़ा सवाल पूछ लिया है सुमन नशे में ही बोल पड़ी - दो महीने पहले जब तेरे पापा ने तुझसे वो फ़ाइल मंगवाई थी ना.. इतना बोल कर सुमन को अहसास हुआ की गौतम ने क्या सवाल पूछा है औऱ उसने क्या जवाब दिया है.. सुमन का नशा हल्का हो गया था औऱ नज़र शर्म से नीचे..

गौतम सुमन का चेहरा उठाते हुए बोला - उस दिन आपकी अलमारी में कंडोम देखकर मुझे अजीब लगा था पर अब समझ आया.. उस दिन अलमारी में कंडोम क्यों औऱ किसके लिए रखा हुआ था.. आप चिंता मत करो माँ.. मैं किसी से भी आपके उस राज़ का जिक्र नहीं करूँगा..
सुमन बिस्तर से उठना चाहती थी मगर गौतम ने अब उसे अपनी बाहों में कसके जकड़ दिया था औऱ सुमन शर्म से लाल पड़ रही थी..
गौतम जानता था की सुमन अब कुछ नहीं बोलेगी इसलिए उसने सुमन से आगे अपनी बात कही - माँ शर्माओ मत.. शादी की रात जब आप छत पर मामा से बाटकर रही थी उस वक़्त में उस कमरे के अंदर ही था.. मैंने सारी बात सुन ली थी औऱ मुझे मालूम हो गया था की मेरी तरह ऋतू भी आपकी चुत से निकली है.. हम दोनों के बाप अलग अलग हो पर माँ एक ही है.. आपका ये राज़ किसी को नहीं पता लगेगा माँ.. मैं किसीको नहीं बताऊंगा..
सुमन नशे में - ग़ुगु मुझे माफ़ कर दे..
गौतम - किस बात के लिए माँ? आपने कोई गलती नहीं की.. आप एक खूबसूरत हसीन औरत हो.. अगर आपका ख्याल पापा नहीं रखते तो आपको पूरा हक़ है किसी से भी अपना रिश्ता बनाने का..
सुमन - ग़ुगु उस दिन तेरे मामा ज़ी आये थे.. मगर सालों से उनका हाल भी वैसा ही है.. जैसा तेरे पापा है.. अब वो भी एक मिनट में ही चित हो जाते है.. मैं नहीं जानती ग़ुगु तू मेरे बारे में क्या सोच रहा है ये जानने के बाद.. पर मैने औऱ किसी को अपने करीब नहीं आने दिया..
गौतम - मुझे सफाइ देने की जरुरत नहीं है माँ.. मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ.. ना ही कभी हो सकता हूँ.. मैं खुद चाहता हूँ आप खुश रहो.. मेरे साथ नहीं तो जिसके साथ आपका मन करें उसके साथ..

सुमन मुस्कुराते हुए नशे में लड़खड़ाती हुई उठकर अलमारी से वही कंडोम निकालकर उसमे से एक कंडोम फाड़कर गौतम के करीब आ जाती है औऱ गौतम के लंड को पकड़कर उसे कंडोम पहना देती है औऱ अपनी पेंटी उतारकर गौतम के ऊपर बैठते हुए उसका लंड अपनी चुत में घुसाने लगती है मगर गौतम का लंड टोपे से थोड़ा सा ज्यादा सुमन की चुत में घुसता है गौतम सुमन को रोक देता है औऱ बोलता है..
गौतम - रहने दो माँ.. आप अभी नशे में ही.. आप नहीं जानती आप क्या कर रही हो..
सुमन - मुझे मत रोक ग़ुगु.. मुझे बहुत पहले तुझे अपनी चुत दे देनी चाहिए थी.. तेरे जैसा सुन्दर संस्कारी औऱ सुशील बेटा कब से मेरी चुत के लिए तरस रहा है.. औऱ मैं तुझसे ही अपनी चुत बचा रही हूँ.. मुझे तो अब खुद पर शर्म आने लगी है.. तूने दिन में कहा था ना ले आज मैं खुद तेरा लंड पकड़कर अपनी चुत में डाल रही हूँ.. ले चोद ले अपनी माँ को ग़ुगु.. चोद दे ग़ुगु मुझे..
गौतम लंड पकड़कर उसपर से कंडोम उतार कर फेंकता हुआ - आप नशे में ये सब बोल रही हो माँ.. सो जाओ.. सुबह होने पर आपको पछतावा होगा अगर मैंने कुछ किया तो..
सुमन शराब की बोतल उठाकर पीते हुए - तेरी माँ को अब तेरा लंड चाहिए ग़ुगु.. अगर तू मुझे नहीं चोदेगा तो मैं तुझे चोद दूंगी..
गौतम हसता हुआ सुमन से शराब की बोतल लेकर साइड में रख देता है औऱ सुमन को चूमता हुआ बिस्तर में गिर जाता है औऱ एक हाथ से सुमन की चुत में उंगलि करने लगता है..
सुमन सिस्कारी लेटी हुआ गौतम को चूमने लगती है मगर कुछ देर बाद अपनी चुत से पानी का छिड़काव करके नशे में ही बिस्तर पर हलकी हलकी नींद में खोने लगती है.. गौतम सुमन को बच्चों की तरह सुला देता है औऱ सुमन को बाहों में भरके एक चादर ओढ़कर खुद भी उसीके साथ लेट जाता है..

गौतम का धागा लाल था वो समझ चूका था की अब सुमन की चुत उसके लिए तैयार है औऱ सुमन अब ज्यादा वक़्त नहीं लेगी उसे होनी चुत में एंट्री देने के लिए..

गौतम लेता हुआ था की ररूपा का फ़ोन आता है जिसपर रूपा औऱ माधुरी दोनों होती है औऱ गौतम दोनों से एक साथ बात जरता है.. गोयम बताता है कि कल वो सुमन के साथ बाबाजी के जाने वाला है औऱ वही सुमन से रूपा औऱ माधुरी मिलकर उसे साथ रहने के लिए मना सकती है.. बात करने के कुछ देर बाद गौतम भी सुमन की बाहों में सो जाता है..
 
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गौतम की जब आँख खुली तो उसने देखा कि उसकी मां सुमन उसके पैरों के पास बैठकर उसके लोडे को अपने मुंह में रखकर चूस रही थी और बड़े प्यार से उसके अंडकोष को हाथों से सहलाती हुई लोडे को मुंह में लेकर बार-बार ऊपर नीचे करती हुई चूसे जा रही थी.. happy-new-year-2014-starting-with-this-beautiful-001
सुमन को देखने ऐसा लगता था कि जैसे अभी-अभी वह नहा कर आई है.. और ब्लाउज पेटीकोट पहन कर इसी काम को अंजाम देने में लग गई है..
सुमन के बाल गीले थे जिसे उसने अपने हाथों से ऐसे ही बाँध दिया था..
गौतम ने अपना हाथ ले जाकर सुमन के सर पर रख दिया और प्यार से दो-चार बार अपनी माँ सुमन के सर पर हाथ फेरकर उसके गीले बाल जो सुमन ने बांध रखे थे उनको खोल दिया जिससे सुमन के बाल लहरा गए और खुलकर बिखर गए..

सुमन औऱ गौतम की नजर आपस में मिली तो दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा पड़े और प्यार से मुस्कुराते हुए आँखों ही आंखों में एक दूसरे से बात करने लगे.. दोनों ही आंखों की भाषा समझने में समर्थ थे..
गौतम ने प्यार से अपना लंड चुस्ती अपनी माँ सुमन से कहा - गुडमॉर्निंग माँ..
सुमन ने लोडा मुंह से निकाल कर कहा - गुडमॉर्निंग मेरे शहजादे.. बेड के सराहने चाय रखी है पिले..
गौतम थोड़ा पीछे होकर बेड का सहारा लेकर बैठ गया औऱ मुस्कुराते हुए बोला - आज क्या बात है माँ.. छोटे ग़ुगु इतनी सेवा?
सुमन भी थोड़ा आगे आकर बैठते हुए - क्यों सिर्फ तू ही मेरी सेवा कर सकता है? औऱ फिर से लंड मुंह में लेकर गौतम को देखते हुए चूसने लगी..
गौतम ने चाय की दो-तीन चुस्की ली और फिर सिगरेट उठाकर लाइटर से जलाकर पहला कश लेते हुए सुमन को देखकर कहा - मुंह में ही लेती रहोगी या कभी चुत में भी लोगी माँ? रात को तैयार हो गई थी लेने के लिए.. अब कहो.. लोगी चुत में?
सुमन लोडा मुह से निकालकर हाथ से लंड हिलाते हुए - रात को जो तूने मुझे हद पार करने से बचा लिया उसी का इनाम है ये.. मेरे शहजादे.. कल तो बहुत ज्यादा शराब पी ली थी.. अभी भी हल्का सा सर दर्द है..
गौतम कश लेकर सिगरेट सुमन को देकर चाय पीते हुए - मैंने तो रोका था आप ही नहीं मानी..
सुमन सिगरेट का कश लेकर - कल तेरे ऊपर हद से ज्यादा प्यार आ रहा था.. इसलिए बहक गई थी..
गौतम - अच्छा अब नहीं आ रहा?
सुमन - अब थोड़ा कम आ रहा है..
ये कहकर वापस सिगरेट का कश लेकर लंड मुंह में लेकर चूसने लगी..
गौतम सुमन से सिगरेट लेकर पीता हुआ अपनी माँ सुमन के बाल पकड़ कर प्यार से उसे अपना लंड चूसाने लगा..
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कुछ ही देर में सुमन ने गौतम के लंड से अपने मुंह में वीर्य निकलवा लिया औऱ घट करके पी गई फिर लंड को चूसके साफ करती हुई बेड से खड़ी हो गई..
सुमन - नहा ले शहजादे.. आज बाबाजी के पास चलना है.. याद है ना..
गौतम - माँ..
सुमन - हम्म?
गौतम अपने फ़ोन में रूपा औऱ जगमोहन की पिक दिखा कर - पापा ने रूपा से शादी कर ली..
सुमन ये देखकर गुस्से से - लंड मुरझाये हुए पेड़ पर बेल की जैसे लटक रहा है औऱ शादी पर शादी किये जा रहा है हराम का जना.. नामर्द कहीं का..
गौतम हसते हुए - आपको गाली देना भी आता है?
सुमन - गाली नहीं दू क्या करू? औऱ ये रूपा.. मिलेगी तो इसे भी बताऊंगी मैं.. उस उजड़े हुए म्यार में क्या देख लिया उसने जो शादी कर बैठी..
गौतम - माँ सुना है अब रूपा औऱ माधुरी अब साथ रहती है..
सुमन गुस्से से - साथ रहे या चुत से चुत रगड़ के सोये मेरी बला से.. मुझे क्या? मुझे दोनों दिख गई ना तो खैर नहीं उनकी.. छोड़.. तू नहा ले.. बाबाजी के चलते है..
गौतम खड़ा होकर - माँ.. वहा रूपा औऱ माधुरी भी आ सकती है..
सुमन गुस्से से - तूने रूपा से बात की?
गौतम - अब तक नहीं.. पर क्या पता करनी पड़े?
सुमन - तू उन दोनों से बात नहीं करेगा.. समझा?
गौतम - पर वो करेंगी तो?
सुमन - वो सब मैं नहीं जानती.. मुझे मालूम है वो क्या चाहती है.. वो दोनों मिलके भी तुझे मुझसे नहीं छीन सकती..
गौतम - मुझे आपसे कोई नहीं छीन रहा माँ.. औऱ छोड़ दो ना ये गुस्सा.. मैं आप तीनो का ख्याल रख सकता हूँ.. आप तीनो आपस में बहन बनकर भी तो रह सकते हो.. हमें इस छोटे से पुलिस क्वाटर से भी आजादी मिल जायेगी..
सुमन - मुझे नहीं चाहिए आजादी.. मैं पूरी जिंदगी यहां तेरे साथ बिता लुंगी.. मगर घर की लालच में तेरा सौदा नहीं करुँगी..
गौतम - ये सौदा थोड़ी है माँ.. आप समझो ना.. देखो हम साथ में खुश रह सकते है औऱ मैं वादा करता हूँ की छोटी माँ औऱ मम्मी से आपको कोई परेशानी नहीं होगी.. मैं उनको अच्छे से समझा दूंगा कि आपको बड़ी बहन मानकर ही बात करें..
सुमन अपना पेटीकोट ऊपर करके पेंटी उतारकर फेंकती हुई बेड पर टांग चौड़ी करके लेट जाती है औऱ अपनी चुत खोलके गौतम से कहती है - तुझे मेरी चुत चाहिए ना.. ले आजा मारले मेरी चुत.. मैं नहीं रोकती तुझे.. मगर उन दोनों के साथ रहने के लिए मुझे मत मना..
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गौतम मुस्कुराते हुए पेंटी उठाता है औऱ अपनी माँ सुमन को पहनाते हुए कहता है - आप ना बहुत भोली हो माँ.. अरे वो दोनों मेरी कनिज़ बनकर पड़ी रहेंगी.. आप तो इस शहजादे की शहजादी बनकर रहना.. हफ्ते में एक - दो बार उसकी चुदाई कर भी दू तो क्या बुरा है.. फुल टाइम रहूँगा तो आपके साथ ही..
सुमन कुछ देर सोचकर - नहीं गौतम.. मुझे नहीं रहना वहा उनके साथ..
गौतम - अच्छा ठीक है.. जैसा आप बोलो.. मैं अब कुछ नहीं बोलूंगा आपको.. नहाने जा रहा हूँ नाश्ता बना दो..

गौतम समझ गया था किसी मां के मन में अब उथल-पुथल मच चुकी है.. वह कहीं ना कहीं उसके प्रस्ताव को स्वीकार करने से कुछ ही दूरी पर है.. और अब सिर्फ उसके मन को थोड़ा सा खींचने की जरूरत है और सुमन उसकी बातों पर हामी भर सकती है मगर सुमन का मन साफ साफ उसे कह रहा था की वो गौतम को रूपा औऱ माधुरी से दूर ही रखेगी...

गौतम नहाकर वापस आया तो सुमन उसके कपड़े निकल चुकी थी जिसे गौतम पहनकर रसोई की तरफ आ गया और सुमन से बोला - माँ क्या बनाया है?
सुमन - सैंडविच है.. बस बन ही गए..
गौतम - साडी क्यों नहीं पहनी? वैसे इस गुलाबी सलवार सूट में भी कयामत लग रही हो माँ.. बहुत प्यारी लग रही हो इसमें..
सुमन - लो खा लो.. औऱ तारिक़ के लिए thanks लेकिन मैं अपना मन नहीं बदलने वाली..
गौतम सैंडविच खाते हुए - आपकी मर्ज़ी.. मैं कोनसा कह रहा हूँ..
सुमन भी नाश्ता करने लगती है.. औऱ दोनों फिर घर से बाबाजी के चल देते है..

सुमन बाइक पर गौतम के पीछे उसे दोनों हाथों से जकड़ कर अपना सारा बदन गौतम के बदन से चिपकाये बैठी थी जैसे गौतम उसका बेटा नहीं बॉयफ्रेंड हो.. औऱ बार बार अपने होंठों से गौतम को कान चूमते हुए दांतो से खींच रही थी..
गौतम - माँ इतना मत प्यार करो वरना बाबाजी के जगह आपको किसी oyo में लेजाकर पटक दूंगा..
सुमन हसते हुए - चल पागल.. मैं तो बस मेरे ग़ुगु को खुश करना चाहती हूँ.. तू नहीं चाहता तो रहने देती हूँ..
गौतम - जो करना है कर लो माँ.. मैं कुछ नहीं कहता..
सुमन औऱ गौतम कुछ देर बाद पहाड़ी के नीचे बरगद के पास आकर रुक जाते है औऱ गौतम बाइक खड़ी करके सुमन के साथ सीढ़ियों की तरफ चल देता है जहा से गौतम थोड़ा दूर करीम के ऑटो रिक्शा को देखकर पहचान लेता है औऱ रुक जाता है..
सुमन - क्या हुआ बेटा? रुक क्यों गया?
गौतम - माँ आप जाओ मैं आता हूँ..
सुमन - पर क्यों तू भी चल ऊपर..
गौतम - माँ मुझे सिगरेट की तलब लगी है.. समझो ना.. मैं पीकर आता हूँ आप जाओ..
सुमन - अच्छा ठीक है.. सिर्फ एक ही पीना ज्यादा नहीं..
गौतम - ok माँ..
सुमन ऊपर जाने लगती है औऱ गौतम चुपके से करीम के ऑटोरिक्शा की तरफ बढ़ जाता है..

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गौतम जैसे ही रिक्शा के साइड में लगा पर्दा हटाता है तो उसे रिक्शा में रूपा के साथ माधुरी भी दिखाई देती है..
माधुरी औऱ रूपा जैसे ही गौतम को देखती है गौतम का हाथ पकड़कर उसे रिक्शा में खींच लेती है औऱ रिक्शा का पर्दा लगाकर गौतम को अपने बीच में बैठा लेती है..
गौतम दोनों को देखते हुए - मम्मी.. छोटी माँ.. तुम दोनों यहां.. पता है ना.. माँ ने देख लिया तो क्या कोहराम मचा देंगी..
रूपा गौतम की शर्ट के बटन खोलकर निप्पल्स चाटते हुए - ग़ुगु तुझे सिर्फ सुमन दीदी की परवाह है हमारी नहीं.. 812880-nipple-and-teeth-296x1000
माधुरी bही दूसरा निप्पल मुंह लेकर - हाँ गौतम.. तू सुमन दीदी को दिल से प्यार करता है.. कल से कितने फ़ोन औऱ massages किये पर तू कोई ढंग का जवाब ही नहीं देता..

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गौतम - अह्ह्ह.. बेटे को माँ अपना दूध पीलाती है खुद नहीं पीती... छोटी माँ यार.. माँ साथ में थी पूरा टाइम कैसे रिप्लाई करता.. औऱ कल ही तो आया था आज सुबह उनको सारी सच्चाई बता दी.. वो बहुत गुस्सा थी..
रूपा - तूने समझाया दीदी को?
गौतम - समझाया था पर वो माने तब ना.. तुम दोनों पर गुस्सा है औऱ मुझे सख्त हिदायत दी अगर तुम दोनों से मिला तो बहुत बुरा हाल करेंगी..
माधुरी गौतम के हाथ को पकड़कर - अब क्या करें रूपा? मैं तो गौतम के बिना नहीं रह सकती..
रूपा गौतम के दूसरे हाथ को पकड़कर - मैं कोनसा मेरे नन्हे शैतान के बिना रह लुंगी माधुरी..
रूपा करीम से - करीम रिक्शा कहीं ऐसी जगह ले चल जहा कोई ना हो..
करीम रिक्शा वहां से पहाड़ी के दाई तरफ खाली सुनसान पड़े जंगल की तरफ ले जाता है...
गौतम अपना हाथ छुड़ाकर - देखो तुम दोनों अभी ये सब रहने दो.. मैं माँ को घर छोड़ने के बाद तुम्हारे पास आ जाऊंगा..
रूपा गौतम के लंड पर हाथ रखकर - कोई तो रास्ता होगा दीदी को मनाने का.. क्या वो अपनी ज़िद नहीं छोड़ सकती?
माधुरी भी रूपा के साथ ही गौतम के लंड पर हाथ रख देती है औऱ कहती है - गौतम हमें सुमन दीदी को मनाना ही होगा..
गौतम - थोड़ा टाइम तो दो सोचने के लिए.. मैं कैसे एकदम से कुछ बताऊ?
रूपा गौतम के जीन्स का हुक औऱ चैन खोलकर लंड निकालते हुए हाथ से सहलाकर - मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती नन्हे शैतान.. तुम अच्छे से जानते हो.. तुम्हे कोई ना कोई उपाय ढूंढना ही होगा..
माधुरी भी लंड पर अपना हाथ लगा देती है औऱ रूपा के साथ लंड हिलाते हुए - हाँ गौतम.. रूपा की तरह मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकती.. तुम जल्दी से कोई रास्ता निकालो..
गौतम रूपा औऱ माधुरी के सर पर अपना हाथ रखकर उन दोनों का सर अपने लंड पर झुकाते हुए कहता है - मैं कुछ सोचता हूँ मेरी माताओ.. तब तक तुम दोनों मुझे थोड़ा प्यार तो करो... m-ldpwiqacxt-E-Ai-mh-o-AEa-Aat-MSHPp-Qfs-5351872b
रूपा औऱ माधुरी बिना किसी संकोच के गौतम का लंड एक साथ चूसने लगती है कभी रूपा तो कभी माधुरी गौतम के लंड औऱ आंड को अपने मुंह में भरकर चूसने लगती है.. गौतम प्यार से दोनों के बाल पकड़कर दोनों से एक अद्भुत blowjob ले रहा था जिसमे उसे अतुलनीय सुख की प्राप्ति हो रही थी..

सुमन का फ़ोन आता है औऱ गौतम फ़ोन उठाकर बोलता है..
गौतम - हेलो माँ..
सुमन - पिली सिगरेट?
गौतम - नहीं माँ दो बच्चीया मिल गई थी.. लॉलीपॉप चूसने की ज़िद करने लगी तो उन दोनों को मैं लॉलीपॉप चूसाने लग गया था..
सुमन - किसकी बच्चीया मिल गई ग़ुगु? उनको उनकी माँ के पास छोड़ देना.. औऱ वो रूपा औऱ माधुरी दिखाई दे तो उनसे दूर चले जाना..
गौतम - हाँ माँ.. छोड़ दूंगा..
सुमन - मैं अंदर जा रही हूँ मुझे समय लगेगा तू मुझे बाहर ही मिलना..
गौतम - ठीक है माँ.. फ़ोन काट देता है..

गौतम - मेरी माताओ लंड ही चुस्ती रहोगी क्या आंड भी तो चाट कोई..
रूपा लंड मुंह से निकालकर आंड चाटने लगती है हुए माधुरी लंड को मुंह में भरकर चूसने लगती है..
दोनों अपने मुंह से गौतम के लंड औऱ आंड की भरपूर सेवा कर रही थी औऱ गौतम दोनों के सर पर हाथ रखकर उनके बालों को प्यार से सावंरता हुआ सर पर हाथ फिरा रहा था..
थोड़ी देर लंड चूसाने के बाद गौतम ने कहा - किसी के पास सिगरेट है?
रूपा ने झट से अपने पर्स से सिगरेट निकालकर गौतम के होंठों पर लगा दी औऱ माधुरी ने अपने पर्स से लाइटर निकालकर गौतम के होंठों पर लगी सिगरेट जलाते हुए कहा - औऱ कुछ चाहिए गौतम?
गौतम ने सिगरेट का कश लेकर वापस लंड चूसने का इशारा करते हुए माधुरी से कहा- चुत चाहिए छोटी माँ..
माधुरी औऱ रूपा फिर से मुस्कुराते हुए गौतम के लंड औऱ आंड पर टूट पड़ी औऱ पूरी मेहनत औऱ शिद्दत से उसे खुश करने में लग गई..
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गौतम ने दूसरा कश लिया ही था की आदिल का फ़ोन आ गया..
गौतम फ़ोन उठाकर - हाँ गांडु..
आदिल - अबे रंडी.. है कहा तू?
गौतम रूपा औऱ माधुरी को लंड चूसता देखकर - जन्नत में..
आदिल - क्या किस्मत है बहन के लंड तेरी भी.. पहले चुतो के लिए तरसता था अब चुतो में घुसा रहता है..
गौतम - तेरी आपा आ गई घर?
आदिल - नहीं यार.. असलम है साला.. बोला 3-4 रोज़ बाद आयएगी... तू आएगा मेरे घर? मिल लेना अम्मी से.. मौका मिले तो पेल भी देना.. मैं अब्बू को बिजी रखूँगा..
गौतम - अभी टाइम नहीं है यार.. माँ के साथ बाबा ज़ी के आया हूँ.. कल शाम को दोनों बैठते है फिर बात करेंगे..
आदिल - अच्छा भाई वो तू बोला था लंड बड़ा करवाएगा.. करवा दे यार.. अम्मी को कितना भी चोदू.. साली आराम से चुद जाती है कुछ होता ही नहीं उसको..
गौतम - शाम को बतऊँगा भाई उसके बारे में..
आदिल - भाई किसकी ले रहा है बता तो दे.. कौन है?
गौतम व्हाट्सप्प पर रूपा औऱ माधुरी की लंड चुस्ती तस्वीरे खींचकर आदिल को सेंड कर देता है जिसमे दोनों का चेहरा नज़र नहीं आता..
गौतम - देख ले..
आदिल फोटो देखकर - अबे रंडी.. एक साथ दो दो? बहनचोद तू तो पक्का रंडीबाज़ है.. भाई क्या किस्मत है यार..
गौतम - अच्छा फ़ोन रख अब.. बाद में बात करता हूँ..
आदिल - ठीक है.. (फ़ोन कट जाता है )
रूपा - कौन था?
गौतम - कोई दोस्त था मम्मी.. मिलने बुला रहा था.. अच्छा अब छोड़ दो.. बताओ पहले कौन आ रहा है लंड पर?
माधुरी अपनी साडी उठाकर गौतम के लंड पर बैठकर अपनी चुत में घुसाती हुई - पहले मैं गौतम.. बहुत खुजली चल रही है चुत में... अह्ह्ह्ह...
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गौतम रूपा से - मम्मी छोटी माँ तो सच में बहुत प्यासी है.. लंड पर झट से चिपक गई..
माधुरी लंड पर उछलते हुए - चुदने में कैसी शर्म गौतम.. औऱ जब चोदने वाला कोई होना हो तो मज़ा ही आ जाता है..
रूपा थोड़ी देर बाद चुत में ऊँगली करती हुई - जल्दी कर माधुरी मुझे भी अपनी खुजली मिटवानी है मेरी शैतान से..
माधुरी - बस रूपा.. मेरा तो होने वाला है..
गौतम रूपा से - मम्मी दूदू पिलाओ ना..
रूपा अपना ब्लाउज खोलकर एक चूची गौतम के मुंह में देती हुई - पी ले मेरी शैतान..
गौतम रूपा की चूची को मुंह में भरकर चूसता हुआ - अहह.. बहनचोद...
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माधुरी झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह... गौतम.. अहह..
माधुरी झड़ने के बाद गौतम के लंड से उतर जाती है औऱ लंड चूसते हुए साफ करने लगती है..
गौतम - छोटी माँ आप बाहर जाओ ना.. मम्मी को घोड़ी बनाके चोदना है मुझे..
माधुरी पैंटी पहनते हुए रिक्शा से बाहर उतरकर - ठीक है गौतम..
गौतम रूपा को रिक्शा में घोड़ी बनाते हुए - कोठे पर इतने साल चुदवाने के बाद भी हर बार घोड़ी बनने में नखरे करती हो मम्मी.. कितनी बार कहु.. गांड ऊपर कमर नीचे..
रूपा - सॉरी नन्हे शैतान...
गौतम लंड पकड़कर चुत में लंड घुसते हुए झटका मारकर चोदते गए - सॉरी की बच्ची ये काण्ड करने के लिए मेरा बाप ही मिला था तुम्हे?
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रूपा - अह्ह्ह्ह... शैतान.. तेरी माँ बनने के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ..
गौतम रूपा की गांड के छेद में थूक लगा कर ऊँगली घुसाते हुए - कुछ भी?
रूपा - हाँ... कुछ भी...
गौतम लंड चुत से निकाल कर गांड के छेद में घुसाते हुए - तो अपनी गांड की कुर्बानी दे दे आज मम्मी...
रूपा गांड में लंड जाते ही चीख पडती है
करीम चीख सुनकर रिक्शा के पास आकर - आप ठीक है ना आपा..
रूपा मीठे दर्द में - सब ठीक है करीम..
गौतम - हाँ करीम.. तेरी आपा गांड मरवा रही है मुझसे..
माधुरी पर्दा हटा कर हसते हुए - रूपा तेरी गांड तो गई आज..
रूपा - कमीनी.. तू तो चुत में लेकर बच गई औऱ मुझे गांड देने के लिए छोड़ दिया..
गौतम गांड मारते हुए - मम्मी थोड़ा रुक.. छोटी माँ की गांड भी आज ही मारूंगा..
माधुरी - मैं गांड नहीं देने वाली..
गौतम माधुरी का हाथ पाकर अंदर खींचते हुए रूपा के ऊपर घोड़ी बना देता है औऱ उसकी साडी उठाकर गांड के चीड़ में लंड घुसाने लगता है..
माधुरी दर्द से - थूक तो लगा ले गौतम..
रूपा - बहुत हस रही थी ना.. गौतम बिना थूक के डाल इस कमीनी की गांड में.. सुबह टट्टी करके हुए तेरी याद आये इसे..
गौतम माधुरी गांड चोदते हुए - मेरी माताओ तुम दोनों की गांड तो ऐसी है जैसे ava adems औऱ brandy love एक साथ मिल गई हो.. आज तो पूरा सुखी कर दिया तुम दोनों माताओ ने अपने बेटे को..
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माधुरी - धीरे गौतम.. बहुत दर्द हो रहा है..
रूपा हसते हुए - अब पता चला ना साली..
गौतम माधुरी की गांड से लंड निकाल कर रूपा की चुत में ड़ालकर चोदते हुए - मज़ा आ गया आज तो..
रूपा थोड़ी देर चुदने के बाद वापस बैठकर लंड चुदने लगती है औऱ अब गौतम झड़ने वाला होता है..
गौतम - निकलने वाला है मेरा.. किसे पीना है..
माधुरी - दोनों को ही पीला दे गौतम...
गौतम के वीर्य की पहली 2-3 दार रूपा मुंह पर छुड़वा लेटी है औऱ बाकी माधुरी अपने मुंह पर
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फिर अच्छे गौतम के लंड औऱ टट्टे चाट कर साफ कर देती है औऱ गौतम जीन्स वापस पहन लेता है...

रूपा औऱ माधुरी अपनी अपनी लिपस्टिक ठीक करने लगती है...
रूपा - करीम वापस ले चल रिक्शा...
करीम - ज़ी आपा..
गौतम - चलो ऊपर चलते है..
रूपा - नहीं.. नहीं.. दीदी ने देख लिया तो बहुत गुस्सा होगी हमारे ऊपर..
माधुरी - हाँ गौतम.. पता नहीं क्या करेगी दीदी हमारा.. मेरे बारे में तो वो पहले से ही जानती है..
गौतम - अरे कुछ नहीं होगा.. थोड़ा कुछ बोले भी तो सुन लेना.. माँ यहां बाबाजी के पास इसलिए आती है ताकि उनको घर मिल सके.. तुम बस इतना कह देना की तुम वो घर माँ के नाम कर दोगी तो वो शायद मान जाए.. औऱ फिर मैं तुम दोनों के साथ रह सकूँ..
रूपा - कोशिश करने में क्या बुराई है माधुरी..
माधुरी - ठीक है रूपा..

माधुरी और रूप भी पहाड़ी के ऊपर जाकर बने उसे चुतुरनुमा आकृति वाले स्थान पर जाकर कतार में बैठ गई वह दोनों सुमन के पीछे इस तरह से बैठी की सुमन उन्हें ना देख सके बाबा जी के पास सुमन का नंबर आने ही वाला था और बाबा जी सुमन की बातें सुनते ही वाले थे...

माधुरी और रूपा के सुमन के पास जाने के बाद गौतम पहाड़ी के पास वही आकर बैठ गया जहां पर वह अक्सर बैठा करता था.. जहां उसे बड़े बाबा जी मिले थे और उसे बतलाया था कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. गौतम फिर से वापस इस झील को देख रहा था और यह सोच रहा था कि काश वह वहां जा सकता और उसे झील को करीब से देख सकता लेकिन उसका यह ख्याल उसकी ख्याली दुनिया का एक ख्याल बनकर ही रह गया उसे हकीकत बना नसीब नहीं हुआ.. गौतम अकेला बैठा हुआ था कि उसे नीचे से कोई आता हुआ नजर आया और वह समझ गया कि यह कोई और नहीं बल्कि बड़े बाबा जी उर्फ वीरेंद्र सिंह ही है..

गौतम ने बड़े बाबा जी को देखकर प्रणाम करते हुए उनके पैर छूने चाहे लेकिन बड़े बाबा जी ने गौतम को पैर छूने से रोक दिया और गले लगाते हुए कहा..
बड़े बाबाजी - अरे तुम तो मेरे लिए बहुत कीमती हो बेटा.. औऱ कीमती चीज पैरों से नही गले से लगाईं जाती है.. कहो सब ठीक तो है..
गौतम - हाँ बाबा ज़ी सब ठीक है.. बस कभी कभी थकान रहने लगी है..
बड़े बाबाजी - इतनी मेहनत करोगे तो थकान होगी ही बेटा.. शरीर की अपनी सीमा होती है.. जवानी भी उसे एक हद तक ही पार कर पाती है.. मगर तु चिंता ना कर मेरे पास तेरी थकावट का उपचार है.. जिससे तू जितना चाहे उतना अपनी सीमा को बढ़ा सकता है.. तुझे कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी..
गौतम - वो क्या है बाबाजी?
बड़े बाबाजी जामुन के पेड़ की तरफ इशारा करते हुए - वही.. जा तोड़ ला कुछ जामुन..
गौतम जामुन तोड़कर लाते हुए - लीजिये बाबाजी..
बड़े बाबाजी - अरे ये तेरे लिए है.. इसे खा ले.. तुझे बहुत जरुरत पड़ेगी.. औऱ अब मेरे काम का वक़्त भी नजदीक आने वाला है..
गौतम - आपका जो भी काम है बताइये बाबाजी.. मैं करने को तैयार हूँ.. कितना भी बड़ा औऱ केसा भी हो मैं करूंगा..
बड़े बाबाजी - समय पर सब पता लग जाएगा.. औऱ कुछ चाहिए तो बता..
गौतम - मैं क्या मांगू बाबाजी.. मेरे कुछ समझ नहीं आ रहा.. मुझे कुछ माँगना चाहिए या नहीं.. अब तक किसी से कुछ माँगा भी नहीं है..
बड़े बाबाजी - वो पौधा देख रहा है बेटा..
गौतम - वो नीले फूल वाला?
बड़े बाबाजी - हाँ.. कोई साधारण पौधा नहीं है वो.. आज इसके बारे में किसी को भी रत्ती भर ज्ञान नहीं है.. मगर एक समय था वैश्याव्रती में इसका बहुत इस्तेमाल होता था.. समय के साथ अत्यधिक तोड़ने औऱ इस्तेमाल करने से ये पौधा लुप्त हो गया था.. सैकड़ो सालों बाद फिर से धरती ने इसे अपने गर्भ से जन्म दिया है.. इसके फूलो का लेप यदि किसी महिला की फैली हुई योनि पर रातभर लगा कर रख दिया जाए तो ये उसकी योनि को सिकोड़कर संकुचित कर देता है.. तु इसे लेजा.. जिसके साथ भी मन करें सुख भोग..
गौतम - शुक्रिया बाबाजी..
बड़े बाबाजी - जा.. अब तू ना थकेगा कभी.. ना रुकेगा कभी.. जब मेरे कार्य का समय आएगा ये धागा तुझे याद दिला देगा.. तब तक अपने यौवन का सुख भोग..
गौतम - बहुत बहुत शुक्रिया बाबाजी...
बड़े बाबाजी - औऱ हाँ.. जो सपने तुझे आ रहे है उनको आम मत समझना.. वो तेरे पिछले जन्म से जुड़े हुए है.. उन्हें अच्छे याद रखना.. मेरे कार्य के लिए बहुत जरुरी है वो बातें..
गौतम - तभी मुझे एक ही तरह के सपने बार बार आ रहे है बाबाजी.. मुझे सब याद है.. आप निश्चिंत रहिये..
बड़े बाबाजी - चल मैं चलता हूँ..
गौतम - बाबाजी एक औऱ चीज है...
बड़े बाबाजी - बता बेटा..
गौतम - आपने वरदान तो दिया है जो मेरी साथ सम्भोग करेगा मेरा दीवाना हो जाएगा मगर मैं जिनके साथ भी सम्भोग करता हूँ वो सब मेरी पीछे ही पड़ जाते है.. मैं बहुत परेशान हो गया हूँ बाबाजी.. किसके बात करू किस्से नहीं.. किसके पास जाऊ किसके नहीं..
बाबाजी हसते हुए - बेटा ये धागा तेरी उस समस्या का भी निदान कर देगा.. इसपर हाथ रखकर तू जिसका नाम 11 बार लेगा उसके मस्तिष्क से तेरी सारी यादे चली जायेगी औऱ तू उससे आजाद हो जाएगा..
गौतम धागे को देखकर - शुक्रिया बड़े बाबाजी...

बड़े बाबा जी वहां से वापस नीचे की तरफ चले जाते हैं और गौतम इस पत्थर पर बैठकर वापस जामुन खाने लगता है और सोचने लगता है कि अभी-अभी जो बाबा जी ने कहा है वह सत्य है या नहीं लेकिन उसके मन में इस बात पर शक करने की जरा भी शंका नहीं थी और ना ही कोई और कारण था वह जानता था कि बड़े बाबा जी ने जो भी कहा है वह शत प्रतिशत सत्य ही होगा.. गौतम बेटा जामुन खा रहा था और जामुन खाने के बाद वह उसे पौधे की तरफ बड़ा और उसके कई फूल तोड़कर अपनी जेब में रख लिए और फिर वापस आ गया जहां उसने देखा कि उसकी मां रूपा और माधुरी को एक साथ देखकर उन पर चिल्ला रही थी और उन्हें जोर-जोर से तने मार कर उनके किए हुए काम बताते हुए अपने बेटे से दूर रहने की सलाह दे रही थी..

सुमन - समझ क्या रखा है तुम दोनों ने.. इस तरह किसी के भी घर में डाका डाल दोगी औऱ सुखी रहोगी.. अरे पाप लगेगा तुम दोनों पाप.. रूपा मैंने तो तुम्हे दोस्त माना पर तुम तो डायन निकली..
रूपा - ऐसा नहीं है दीदी.. आप मेरी बात समझो.. मैंने ये सब आपके लिए किया.. आपने ही कहा था ना कि जगमोहन ने आपको छोड़कर माधुरी के नाम पर घर लिया है.. मैंने माधुरी को मना लिया है दीदी.. वो आपके नाम पर घर कर देगी.. हम साथ रहेंगे दीदी.
माधुरी - हाँ दीदी.. रूपा सही कह रही है.. हम एक साथ रहेंगे.. आपकी तरह ही हम भी गौतम का ख्याल रखेगे..
सुमन - अरे थू ऐसे घरपर जो मेरे फूल से बच्चे को तुम दोनों चुड़ैल के हाथों में सौंपकार मिले.. वहा ना मैं आज रहू ना कल.. आज के बाद कभी मुझे अपनी शकले मत दिखाना.. मेरा तुम दोनों से कोई वास्ता कोई रिश्ता नहीं है.. ना ही उस जगमोहन से कोई लेना देना..
रूपा रोते हुए - ऐसा मत कहो दीदी.. मैंने जो किया भूल में किया मुझे माफ़ कर दो.. मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ जैसे आप ग़ुगु को चाहती है वैसे ही मैं भी चाहती हूँ.. मेरा कोई गलत इरादा नहीं है.. मैं उसके करीब भी नहीं आउंगी.. बस दूर से हो देखकर रह लुंगी.. मगर ये बात कहकर मुझे लज्जित ना करो..
माधुरी - हाँ दीदी.. आप सब जानती हो.. मगर मैं भी आपको यक़ीन दिलाती हूँ.. आपको सच में अपनी बड़ी बहन मानकर ही आपका आदर करूंगी.. ग़ुगु से दूर रहूंगी.. उसे एक माँ की तरह ही प्यार करुँगी.. औऱ कभी अपनी हद पार नहीं करुँगी..
सुमन दोनों को देख कर - मैं कुछ नहीं जानती.. तुम दोनों मुझे औऱ मेरे ग़ुगु को अकेला छोड़ दो..
रूपा - दीदी.. हमारी बात मान लो.. मैं वादा करती हूँ हम कल ही आपके नाम वो घर औऱ अपनी वफादारी लिखकर आपको सौंप देंगे.. हमें औऱ सजा मत दो..
माधुरी - हाँ दीदी.. हम परिवार है औऱ परिवार में बिखराव अच्छा नहीं होता.. हम वादा करते है.. ग़ुगु से बस माँ बेटे वाला ही रिश्ता रखेंगे..
सुमन इस बार कुछ नहीं कहती है ग़ुगु को दूर खड़ा देखकर उससे कहती है - ग़ुगु चल.. घर जाना है..
गौतम सुमन के पीछे पीछे चल देता है औऱ रूपा औऱ माधुरी को देखकर मुस्कुराते हुए इशारे से well done.. कहता है..

गौतम नीचे आकर बाइक स्टार्ट करते हुए घर की तरफ चल देता है औऱ सुमन किसी गहरी सोच में पड़ जाती है जिसे गौतम ने उसके चेहरे पर पहले ही पढ़ लिया था.. गौतम बाइक चलाता हुआ बार-बार बैक मिरर से सुमन के चेहरे की तरफ देख रहा था और उसके चेहरे पर आते हुए भाव देखकर वह समझ गया था कि सुमन किसी बहुत गहरी और बहुत उलझी हुई सोच में गम है और कुछ तय करने का सोच रही है गौतम ने जिस तरह सुबह अपनी मां सुमन को रूपा और माधुरी के साथ रहने के लिए कन्वेंस किया था और अभी थोड़ी देर पहले पहाड़ी पर जीस तरह रूपा और माधुरी खुद सुमन को उनके साथ रहने के लिए मना रही थी और बदले में उसके नाम पर घर करने की बात कह रही थी उससे सुमन का दृढ़ संकल्प कहीं ना कहीं डगमगाने लगा था.. गौतम सुमन का चेहरा देखकर समझ गया था कि अब सुमन को मनाने में कोई परेशानी नहीं है वह खुद ब खुद कुछ ही समय में अपने आप मान जाएगी और उसके मन मुताबिक रूप और माधुरी के साथ रहने के लिए तैयार हो जाएगी.. मगर सुमन तो कुछ अलग ही सोच रही थी.. सुबह गौतम औऱ अब दोपहर में रूपा औऱ माधुरी की बातों से गौतम का मन भटका मगर अब वो संभल गई थी..

सुमन अपने ख्यालों में घूम थी और गौतम बाइक चलते हुए उसे ख्यालों में गुम देख रहा था
गौतम ने अब बाइक पर बार-बार ब्रेक मारने शुरू कर दिए जिससे सुमन की छाती गौतम की पीठ पर बार-बार टकराने लगी..
गौतम के ऐसा करने पर सुमन ख्यालों की दुनिया से बाहर आई हुई गौतम को जकड़ कर पकड़ने लगी और अपनी छाती को उसकी पीठ से सटा दिया..

गौतम और सुमन को घर आते-आते दोपहर के चार बज चुके थे और अब घर के अंदर दोनों दूसरे से इस बारे में बात कर रहे थे..
जिस तरह से रूपा और माधुरी ने सुमन से बात की थी रूपा और माधुरी की बात का सुमन पर असर तो हुआ था और वह गूगु को समझने में भी आ रहा था.. सुमन गौतम की बात पर सिर्फ इतना कह दिया था कि उसे सोचने का समय चाहिए इस पर गौतम ने आगे सुमन से कुछ नहीं कहा औऱ बाहर चला गया..

रात को जब सुमन औऱ गौतम एक साथ लिपटकर बिस्तर में सोये तो गौतम ने सुमन की चुत पर उन फूलों का लेप लगा दिया जिसे सुबह उसने सुमन के नींद में होने के दौरान ही गीले कपडे से साफ भी कर लिया औऱ देखने लगा कि क्या वाक़ई सुमन की चुत सिकुड़ी है या नहीं.. मगर अब सुमन जागने लगी थी औऱ सुमन उसे देखकर सोने का नाटक..
 
Update 41

शाम के समय कबाड की दूकान में एक टेबल के आगे कुर्सी लगा के बैठे फारूक का जब फ़ोन बजा तो वो उठ खड़े हुए और दूकान में टहलते हुए बात करने लगा.
कुछ देर बात करने के बाद फारूक ने फ़ोन काट दिया और दूकान की छत पर अपनी मामू की लड़की नरगिस से आशिक़ी लड़ाते अपने बेटे आदिल को आवाज लगाई. जब आदिल आवाज सुनकर नहीं आया तो फारूक ने अपने यहां काम करने वाले रामु को ऊपर छत पर भेजते हुए आदिल को बुलाने का कहा..

फारूक - आदिल.. आदिल.. रामु जा ऊपर देख वो हरामखोर क्या कर रहा है? बुला के ला उसे..

रामु ने अपने मालिक की बात मानकर छत की तरफ रास्ता कर लिया और छत पर आ गया.. आदिल छत के एक कोने में बैठा नरगिस के साथ फ़ोन सेक्स में बिजी था तभी वहा रामु आकर बोला..

रामु - नीचे तुम्हे तूम्हारे अब्बा फारूक मिया बुला रहे है..

आदिल रामु को देखकर - क्या रामु डरा दिया तूने तो.. चल मैं आता हूँ..

रामु वापस नीचे चला जाता है और आदिल उसके पीछे पीछे नीचे आ जाता है..

फारूक - कान में तेल डालके बैठा था क्या भड़वे? कितनी आवाजे लगाई, सुनाई नहीं दिया? चल.. अब जल्दी जा और चाचू के यहां से हिसाब की डायरी ले आ.. महीने का आखिर है सबका हिसाब करना है.. और इस बार टेंडर में सरकारी कबाड की बोली कितनी भेजनी है ये भी पूछ लेना.. पर ज़रा अकेले में, जरुरी टेंडर है..

आदिल - आज तक कोई टेंडर मिला है जो अब मिलेगा... पर ठीक है.. जाता हूँ..

आदिल दूकान से थोड़ा दूर जाकर गौतम को फ़ोन करता है..

आदिल - हेलो.. रंडी..
गौतम - हाँ गांडु.. बोल?
आदिल - दुकान के पास वाली डेयरी पर मिल.. कहीं चलके आना है..
गौतम - अभी मूड नहीं है यार.. बहुत गर्मी है..
आदिल - नाटक मत कर रंडी.. आजा जल्दी.. तेल डलवा दूंगा बाइक में..
गौतम - चल आता हूँ..
गौतम आदिल को डेयरी पर से पिकअप करके चल देता है..

गौतम - बता कहा चलना है?
आदिल - चाचू के यहां..
गौतम - क्यों? अब चाचू की लड़की रज़िया पर दिल आ गया क्या तेरा? वो तो खुश हो जायेगी सुनकर..
आदिल - अबे अब्बू ने भेजा है काम से.. रजिया पे किसका दिल आएगा.. ना शकल है ना सामान.. डायरी लाना है हिसाब की.. चाचू की दूकान से क्या क्या आया है और उनको क्या क्या गया है..

गौतम - अच्छा तो अब कबाड़ीवाले भी बनियो की तरह हिसाब रखने लगे है.. अच्छा है..

आदिल - अबे ओ ठुल्ले की औलाद.. कबाड़ी की सही पर अपनी अपनी दुकान है अब्बू की और चाचू की.. दिनभर कुर्सी पर बैठके काम करते है तेरे बाप की तरह थानेदार का लोडा मुंह में लेकर चूसते हुए ज़ी सर ज़ी सर नहीं करते..

गौतम जोर से - कबाड़ीवाले... कबाड़ीवाले...
आदिल - भोस्डिके, मुंह बंद कर ले अपना.. बकचोद साला..

गौतम - बुरा क्यों मानता है गांडु.. चल टंकी फुल करवा दे..
आदिल - भाई 100 का डाल दे..
गौतम - 100 में भड़वे वापस नहीं लाऊंगा तुझे..
आदिल - ठीक है रंडी.. 200 का डालवा ले..
गौतम - वैसे एक बात बोलनी थी तुझे.
आदिल - हाँ बोल..

गौतम - यहा नहीं, किसी चाय कॉफी की दूकान पर रोक.. बहुत सीरियस है पर मुझे कन्फर्म नहीं है..

आदिल - भोस्डिके, चाय कॉफी तो वैसे ही पीला दूंगा उसके लिए क्यों नाटक कर रहा है..

गौतम - गांडु सीरियस बात है तेरे लिए.. मेरा क्या है मत सुन.. तेरी अम्मी चुदेगी बाद में..
आदिल - वो तो तू पहले ही चोद चूका है.. अब लंड बड़ा करवा रहा है क्या? आगे उस दूकान पर रोक ले..

गौतम आगे एक रेस्टोरेंट पर रोक लेता है और आदिल के साथ अंदर जाकर एक टेबल पर बैठ जाता है..

आदिल - हां बता.. क्या बात है..
गौतम - पहले कुछ मंगवा तो ले गांडु..
आदिल - भाई दो चाय ला दे..
गौतम - दो समोसे भी ले आना..
आदिल - रंडी.. अब अपना घाघरा खोलके बोल भी दे क्या बात है?
वेटर - लो भईया.. समोसे और चाय..
गौतम - भाई एक चिप्स का पैकेट भी देना..
आदिल - भोस्डिके उस दिन बड़े पैसे थे जब मुझे दो मिनट में दो हज़ार भेजे थे.. अब क्या हुआ?

गौतम - भाई पैसे तो अब भी है औऱ इतने है की तेरे बाप की दूकान खरीदकर तेरी अम्मी के भोसड़े में डाल दू मगर खर्च करने में शर्म आती है..

आदिल - बहन के लंड.. बात क्या है वो बता..
गौतम - सुन वो तेरे मामूवाली लड़की नहीं है जिसकी तूने फ़ोन में फोटो दिखाई थी.. जिसके इश्क़ में तू पागल है.. नरगिस..

आदिल - हाँ तो उसका क्या?
गौतम - यार उसको कल हाज़ीवाले की गली में देखा था.. किसी लड़के से बात करते हुए मैंने.. उसका पता किया है, कौशल नाम है लड़के का..

आदिल - तू क्या कह रहा है? साले बहुत लॉयल है वो मेरे साथ..
गौतम फ़ोन दिखाते हुए - तू देख ले यही है ना..
आदिल - पर वो कह रही थी कल अपने खालू के यहां गई थी..

गौतम - भाई बुरा मत मानना.. पर मुझे तो यही खालू तेरी नरगिस का लालू लगता है.. मेरा दोस्त लोकेश भी इसके बारे में बता रहा था..
आदिल - क्या..

गौतम समोसे खाते हुए - छोड़ तू रोने लग जाएगा सुनकर.. यहां के समोसे मस्त है बहनचोद..

आदिल - समोसे गांड में डाल दूंगा.. रंडी.. नरगिस के चक्कर में मेरा यहां दिमाग खराब हो रहा है और तुझे समोसे की पड़ी है.. तेरे दोस्त ने क्या बोला सच बता..

गौतम - सुनना चाहता है तो तेरी मर्ज़ी सुन.. वो कह रहा था की नरगिस को उसके शोहर ने कौशल से बात करते पकड़ लिया था इसलिए तलाक़ दे कर भेज दिया.. और अब भी दोनों छुप छुप के मिलते है..

आदिल - सच कह रहा है ना.. मज़ाक़ थोड़ी कर रहा है मेरे साथ?
गौतम - समोसे की कसम भाई.. चल अब तू तो खाने से रहा.. तेरा समोसा भी मैं खा लेता हूँ..

आदिल - वो कौशल कहा रहता है? जानता है क्या? मिलना है उससे.. बात करनी है..
गौतम - रहता तो हाज़ीवाले मोहल्ले में ही है.. ये ले.. लोकेश से नंबर ले आया था उसके.. कर ले बात..

आदिल नंबर मिलाकर..
आदिल - हेलो..
कौशल - हाँ ज़ी कौन?
आदिल - कौशल बोल रहा है?
कौशल - हाँ बोल रहा हूँ बोलो क्या चाहिए?
आदिल - नरगिस को कैसे जानता है?
कौशल - कैसे जानता है मतलब? सेटिंग है मेरी.. और तू कौन है साले?
आदिल - मै तेरा बाप हूँ साले.. समझा..
कौशल - अबे ओ लोड़ू.. जबान संभालके. नरगिस के चक्कर में कई लड़के मार खा चुके है मुझसे, तेरी भी इच्छा हो मार खाने की तो आ जाना.. कौशल ने फ़ोन काट दिया और आदिल फ़ोन कटने पर उदास होकर अपना सर पकड़ कर वही नीचे की तरफ टेबल को देखने लगा और अपने चुदे हुए इश्क़ का शोक मनाने लगा..

गौतम वेटर से - तुम्हारे यहां बियर वगेरा मिलती है?
वेटर - नहीं भाईसाब..
गौतम - ठीक है एक पानी बोतल ला दे..

वेटर पानी की बोतल दे गया और गौतम आदिल के मुंह को देखने लगा जिसपर मातम छाया हुआ था..

आदिल - अम्मी ने सही कहा था भाई, मैं ही अंधा था. मुझे ही कुछ नज़र नहीं आया.. नरगिस का फ़ोन रात रातभर बिजी आने पर भी मैं समझ नहीं पाया..

गौतम - चल अब ये नरगिस वाला क़िस्सा यही दफ़न कर.. छोटे कबाड़ी के घर चलते है..
आदिल - साले चाचू है मेरे..
गौतम - एक ही बात है भाई.. चल आजा..

आदिल - बहुत दिल दुखा है यार, इस साली नरगिस को तो बताऊंगा मैं.. ऐसा रगड़ के चोदुँगा साली को की याद रखेगी..

गौतम - भाई एक राउंड मुझे भी चाहिए..
आदिल - एक बार मेरा हो जाए फिर एक क्या दो ले लेना.. बहुत शौक है साली को रंडी बनने का.. मैं बनाऊंगा इसको रंडी..

गौतम - ले भाई.. आ गया तेरे चाचू का घर.. ले आ अंदर से जो लाना है..

आदिल अंदर चला जाता है और गौतम घर के बाहर बाइक पर बैठा उसका इंतज़ार करने लगता है की एक लड़कि उसके गाल को पीछे से आकर चुम लेती है..
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गौतम पीछे देखकर - क्या कर रही है?
लड़कि मुस्कुराते हुए - किस्सी कर रही हूँ..
गौतम नाराज़गी से - मैंने कहा है तुझे किस्सी करने को? बेशर्म है क्या बिलकुल..
लड़की - इतनी भी क्या नाराज़गी.. एक किस्सी ही तो की है.. कोनसा तुम्हारा रेप कर दिया..
गौतम - तू करेगी साली मेरा रेप.. एक बार चोद दिया ना पकड़ के.. तो कई दिनों तो ठीक से चल भी नहीं पायेगी..
लड़की प्यार से - तो चोद ना गौतम.. मैंने कब मना किया है तुम्हे.. अम्मी कसम.. पूरा खुश करुँगी.. तू जैसे कहेगा वैसे..
गौतम - इतनी आग लगी है तेरे अंदर तो बोल दे कबाड़ी वाले को तेरा निकाह करवा देगा..
लड़की उदासी से - इस शकल के साथ कौन निकाह करने पसंद करेगा.. इस साल पचीस की हो जाउंगी..
गौतम लड़की का हाथ पकड़ कर - अरे उदास मत हो यार.. तेरा फ़ोन दे..
लड़की फ़ोन देते हुए - लो..
गौतम अपना नंबर देते हुए - आस पास में कोई जगह है सुनसान?
लड़की मुस्कुराते हुए गोतम की बात का मतलब समझकर गौतम का हाथ पकड़ कर उसे घर के पीछे कबाड़ के ढ़ेर से होते हुए एक कोने में लेजा कर - यहां कोई नहीं आएगा..
गौतम लड़की को बाहों में लेते हुए उसके होंठों पर kiss करके - मुंह में लेगी?
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लड़की शरमाते हुए नीचे बैठकर गौतम की जीन्स खोलती हुई उसके लंड को देखकर - गौतम ये.. ये.. तेरा इतना बड़ा?
गौतम लंड लड़की के होंठों पर रगढ़ते हुए - डर गई क्या रज़िया? ले ना..
रज़िया लंड देखकर अपनी चुत मसलते हुए - ले रही हूँ गौतम..
रज़िया जीभ बाहर निकालकर लंड चाटने लगती है और फिर धीरे धीरे मुंह में लेकर चूसने लगती है..
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आदिल फ़ोन पर - अबे रंडी कहा गया तू?
गौतम फ़ोन पर - घर के पीछे हूँ.. रज़िया को मुंह में दे रहा था..
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आदिल - अबे उस कालीकलूटी में तुझे क्या मज़ा आ रहा है..
गौतम रज़िया के बाल मुट्ठी में भीच के मुंह में लंड के झटके मारते हुए - चुप बहन के लंड.. इतनी प्यार से मुंह में लेकर चूस रही है बेचारी.. तू वेट कर..
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आदिल - जल्दी आ भाई.. मेरा दिमाग खराब है आज दारू पियूँगा..
गौतम फ़ोन काट कर - रुक आता हूँ.. रज़िया से.. रज़िया डार्लिग.. जाना पड़ेगा मुझे..
रज़िया मुंह लंड निकालकर जीरो जीरो से हिलाती हुई - फिर कब मिलेगा मुझसे?
गौतम झड़ते हुए - बहुत जल्द.. चुत भी तो लेनी है तेरी.
गौतम का मुठ रज़िया मुंह झड़वा लेटी है और पीते हुए गौतम से अपना छोटा सा बोबा दिखा कर कहती है - एक निशानी तो दे जाओ गौतम...
गौतम जीन्स पहन कर रज़िया का बोबा पूरा मुंह में भरकर चूसते हुए निप्पल्स के पास दो तीन जगह love बाईट दे देता है और रज़िया से कहता है - चलता हूँ.. फ़ोन करूँगा..
रज़िया अपनी चूची सहलाती हुई - मैं इंतजार करूंगी गौतम..

आदिल गौतम के साथ वापस चल देता है...

आदिल दूकान पर डायरी रखकर गौतम से - चल भाई.. आखिरी मंज़िल ले चल..
गौतम - पैसे है तेरे पास?
आदिल उदासी से - हाँ रंडी.. अभी अभी गल्ले से निकाले है..
गौतम - अब्बू के सामने चोरी?
आदिल - अबे अब्बू का ध्यान कहीं औऱ था..
गौतम गाडी स्टार्ट करके - चल भाई आज तो मेरा भी मन है.. आखिरी मंज़िल पर जाकर जाम छलकाते है..

गौतम और आदिल बाइक स्टार्ट करके आदिल के अब्बू फारूक की दुकान से चल पड़ता है और छोटी-मोटी गलियों से होते हुए एक पुराने जमाने वाले बार में पहुंचते हैं जिसका नाम आखरी मंजिल होता है..

बार में कोने की एक टेबल पर बैठके दोनों दो बियर मंगवा लेते है औऱ पीते हुए बात करने लगते है आज आदिल उदासी से अपने दुख दर्द सुना रहा था औऱ गौतम को बता रहा था की वो नरगिस से कितना प्यार करता था औऱ उसे केसा महसूस हो रहा है..

आदिल - बहन की लोड़ी रांड.. साली.. भाई बहुत कुछ सोच रखा था मैंने उसके लिए.. मगर वो साली.. फ़ोन पर कितनी शरीफ औऱ सीधी बनती है.. असल में है छिनाल.. बहुत दर्द हो रहा है यार दिल में..

गौतम - अबे जितना दर्द तेरे दिल में है उतना उसकी चुत में देंगे ना मिलकर अपन दोनों.. तू उससे अभी कुछ मत कहना.. उसे मिलने बुला फिर साली को चोदते है दोनों जमके..

आदिल बियर पीते हुए - सही कह रहा है तू.. ऐसा चोदेग की लोग देखते रह जायेंगे..
गौतम - कबाब तो माँगा ले लोडे.. तभी तो गर्मी आएगी औऱ सारी गर्मी उस कुतिया की चुत पर निकालेंगे..

आदिल वेटर से - भाई एक प्लेट कबाब.. औऱ दो बियर औऱ.. (गौतम से) किसका फ़ोन आ रहा है?
गौतम - तेरी बहन का..
आदिल - क्या कह रही है..
गौतम - रुक पूछता हूँ.. फ़ोन उठाकर - हाँ रेशु..
रेशमा - ओ हो.. रेशमा औऱ कुतिया से सीधा रेशु.. लगता है बहुत मूंड में है मेरा कुत्ता.. क्या कर रहा है?
गौतम - तेरे भाई के साथ बार में बैठकर दारु पी रहा हूँ..

रेशमा - ज्यादा मत पीना ग़ुगु.. उस रात भी तुमने ज्यादा पी ली थी.. औऱ फिर उल्टी सीधी हरकत करने लगे थे..
गौतम - ठीक है.. क्या कर रही हो?
रेशमा - खाना बना के free हुई थी.. अब तुमसे बात कर रही हूँ.. तुमने आदिल को तो नहीं बताया ना हमारे बारे में..

गौतम - तू उसकी चिंता मत कर रेशु.. आदिल को सब पता है औऱ वो किसीसे कुछ नहीं कहेगा.. तुझे भी कुछ नहीं बोलेगा..

रेशमा हैरात से - तुमने आदिल को सब बता दिया?
गौतम - अरे दोस्त है मेरा यार.. अब उसकी बहन पटाऊंगा चोदुँगा औऱ उसे ही नहीं बताऊंगा तो बुरा लगेगा ना बेचारे को..
रेशमा - तू पागल है क्या.. कुत्ते..

गौतम - अबे कुछ नहीं बोलेगा वो.. ना तुझे ना किसी औऱ को.. अच्छा ये बता यहां कब आएगी..
रेशमा - 3-4 दिन बाद असलम को अभी फुर्सत नहीं है..
गौतम - अरे वो बहन का लंड ऐसा क्या कर रहा है जो फुर्सत नहीं है.. अपने बाप की सारी कमाई तो शराब में उड़ा दी अब साला दिनभर दूकान में गद्दे बनाकर उसपे लाठिया पीटता रहता है.. तू जल्दी से आ वरना मैं आ जाऊंगा.. याद रखना..

रेशमा - अब मैं क्या करू यार.. तुमसे सब्र नहीं होता क्या? अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ मिले.. औऱ तुम फिर से पीछे पड़ने लगे.. ऐसा करोगे तो फिर देख लेना..
गौतम - ठीक है.. नहीं पड़ता पीछे.. भाड़ में जा.. फ़ोन काटते हुए..

आदिल - अबे बहन है मेरी.. ऐसे क्यों बात कर रहा है उससे..
गौतम बियर पीते हुए - तेरी बहन है तो क्या सर चढ़ाउ?
आदिल - भोस्डिके प्यार से तो बात कर सकता है.. उस दिन तो कह रहा था दिल आ गया.. रेशमा सिर्फ मेरी रहेंगी..
गौतम बियर पीते हुए - हाँ तो..
आदिल - पहले फ़ोन उठा रंडी.. फिर बात करना..

गौतम फ़ोन उठाकर - बोलो?
रेशमा - बच्चे हो क्या बिलकुल? छोटी छोटी बातों पर नाराज़ हो जाते हो..
गौतम - तू बात ही ऐसी करती है मैं क्या करू?
रेशमा - अच्छा अब नहीं करती.. सॉरी.. वैसे एक चीज देखी है मैंने.. जब से तुमने मेरी ली है ना.. तुम्हारा एडिटूड बदल गया.. पहले मेरी किसी भी बात का गुस्सा नहीं करते थे अब मुझपर हुकुम चलाने लगे हो..
गौतम - तो? मेरी चीज है.. हुकुम नहीं चलाऊंगा?

रेशमा - चलाओ ना.. मैंने कब मना किया.. पर मेरी बात भो तो समझो.. अभी नहीं आ सकती.. मेरा बस चलता तो तुमसे दूर थोड़ी होती..
गौतम बियर पीते हुए - ठीक है रेशु..
रेशमा - शमा कैसी है?
गौतम - कौन शमा?
रेशमा - अरे वही दुल्हन.. जो भागी थी नीरज के साथ.. सुना उसकी बहुत खोज रही है.. उसका बाप तो बंदुक लेकर फिर रहा है.. देखते ही गोली मार देगा..
गौतम - देखता हूँ यार.. अभी तक तो नहीं मिला मैं उससे..
रेशमा - मिले तो कहना संभल कर रहे..
गौतम - ठीक है.. आज पता करता हूँ.. वैसे किसी कुछ पता चला..
रेशमा - नहीं.. असलम कह रहा था अभी कोई खबर नहीं मिली.. जो खत शमा छोडके गई थी उसे पढ़कर सब दिल्ली जाकर उसे ढूंढ़ रहे है..

गौतम - क्या लिखा था खत में?
रेशमा - जो तुमने उसे बताया था लिखने को.. कि वो शादी नहीं करना चाहती. अपने सपने पुरे करना चाहती है.. औऱ दिल्ली मुंबई जैसे शहर में बड़ी औरत बनना चाहती है..
गौतम - सही है.. उसका फ़ोन भी उस रात मैंने एक ट्रक में रख दिया था जो मुंबई जा रहा था.. औऱ नीरज के बारे में कोई नहीं जानता.. तो उसपर कोई शक नहीं करेगा..

रेशमा - पर तुम एक बार शमा से मिल लेना.. वो ठीक है या नहीं..
गौतम - ठीक है रेशु.. चल अब दारु पिने दे..
रेशमा - ज्यादा मत पीना.. समझा... मैं सुबह फ़ोन करुँगी..
गौतम - बाय कुतिया..
रेशमा - बाय मेरे कुत्ते.. दुबारा मेरा फ़ोन मत काटना.. समझा..
गौतम - ठीक है.. फ़ोन काटते हुए..


आदिल - तू पसंद करने लगा है.. रेशमा आपा को..
गौतम - मुझे भी ऐसा लगता है पर एक औऱ है जिसके बारे में भी मुझे यही फीलिंग आती है..
आदिल - कौन है वो?
गौतम - है कोई.. शादी में मिली थी..
आदिल बियर पीते हुए - भूल जा उसको.. रेशमा आपा जैसी नहीं मिलेगी..
गौतम - दिल टूट जाएगा यार उसका..

आदिल - बहन के लंड तो क्या मेरी बहन का दिल तोड़ेगा तू? साले इसलिए तुझे इतनी ऐश कराता हूँ रंडी.. मादरचोद दिल तोड़ेगा मेरी बहन का.. ठुल्ले का मूत..
गौतम बियर पीते हुए - तेरी बहन का दिल तोड़ू या ना तोड़ू.. तेरी गांड जरुर तोड़ दूंगा कबाड़ी की औलाद अगर तू ज्यादा बोला तो..

आदिल बियर पीते हुए - भावनाओं में बहुत गया था यार.. चल छोड़.. एक एक बियर औऱ मगाते है..
गौतम - रहने दे.. कहीं चलके आना है..
आदिल - कहाँ..
गौतम - दुल्हन से मिलके आते है.. जो भागी थी..
आदिल - कहा?
गौतम - यही पास में..
आदिल - किसी को पता चल गया तो गांड पर लठ पड़ेगी तेरे साथ मेरे भी..
गौतम - तो फिर चुप रह.. किसी को बताना मत.. अब चल..

आदिल बिल देकर गौतम के साथ चल देता है और गौतम एक बियर और हाथ में लेकर पीते हुए आदिल के पीछे बाइक पर बैठ जाता है..
आदिल बाइक चलाते हुए - बहनचोद आज बियर भी कोई असर नहीं कर रही.. नरगिस का कुछ करना पड़ेगा..

गौतम पीछे से आदिल को पकड़ते हुए उसके कंधे पर सर रखकर - शनिवार को बुला ले रात में.. बरंगीन सिनेमा दिखाते है उसको..

आदिल - अबे ज्यादा हो गई क्या रंडी? क्या रंडियो की तरह बैठा है.. औऱ रंगीन सिनेमा तो कब का बंद हो गया.. बचपन में ही सुना था उसके बारे में..

गौतम अपना हाथ आदिल के सीने पर फिराते उसे छेड़कर - अबे गवर्नमेंट औऱ पब्लिक की नज़र में बेन है.. मेरा एक कॉलेज फ्रेंड्स है वो जाता है अपनी gf के साथ.. सीक्रेट जगह चलता है औऱ अब सर्फ़ कपल एंट्री मिलती है वहा.. सब हॉल में मास्क लगा के चुदाई करते है खुलम खुला औऱ सामने ब्लू मूवी चलती है फूल आवाज में.. मगर पैसे ज्यादा लेते है सिनेमा वाले..

आदिल हाथ पकड़कर - अबे मेरी इज़्ज़त लूटेगा क्या भोस्डिके.. औऱ कितने पैसे लगते है?
गौतम - वो बता रहा था 3 हज़ार पर कपल एंट्री है..
आदिल - भाई ज्यादा हो गई क्या ठीक से बैठ ना.. और मत पी.. 3 के हिसाब से अपने हो गए 6 हज़ार.. पैसे का भी जुगाड़ कर ले तो एक लड़की औऱ कहा से लाएंगे कपल एंट्री के लिए..

गौतम आदिल की गांड पर हाथ लगाते हुए - ये भी है..
आदिल - मादरचोद हाथ काबू में रख वापस हरकते मत करें.. औऱ तू जानता है किसी को? जो चल सके..
गौतम नशे में - हाँ..
आदिल - कौन?
गौतम जोर से चिल्लाते हुए - शबाना रंडी...

आदिल स्पीड बढ़ा कर बाइक चलाते हुए - चिल्ला मत रंडी.. अम्मी घर का माल है.. घर से बाहर नहीं ले जा सकते औऱ वो जायेगी भी नहीं.. उनके साथ सीक्रेट रखना है सब..

गौतम नशे में आदिल के मज़े लेते हुए - तू अपनी गांड मुझसे मरवा ले तो मैं फ्रेंड् से बात करता हूँ लड़की के लिए.. तू बस पैसे जुगाड़..

आदिल गुस्से से - चुदाईखाने तू आदमी है या हिजड़ा है?
गौतम हसते हुए - अबे मज़ाक़ कर रहा हूँ..
आदिल - भोस्डिके.. कभी मज़ाक़ मज़ाक़ में मेरी गांड मत मार लेना.. फिर बोले मज़ाक़ में मार दी..
गौतम बियर पीके फेंकते हुए - फ़िक्र मत कर साले.. नवाबी शोक नहीं रखता.. बस तेरी गांड में उंगलि करना अच्छा लगता है..

आदिल गांड उठा कर - ले कर ले बहनचोद.. औऱ फिर उस ऊँगली को चूस भी लेना..
गौतम सच में गांड में ऊँगली कर देता है औऱ बाइक स्लीप हो जाती मगर सडक के किनारे घास में गिरती है औऱ स्पीड कम होने से किसी को चोट भी नहीं आती...

गौतम हसते हुए - गांड का छेद तो बहुत बड़ा है.. कोठे पर मरवाता है क्या?
आदिल बाइक उठाते हुए - तेरे साथ गलत दारु पी ली झांट के बाल.. तू किसी दिन मार के छोड़ेगा..
गौतम - चल अब नहीं करू कुछ भी.. पास में ही है.. उसका घर..
आदिल - साले तेरे साथ तो अब दारु नहीं पिऊंगा..
गौतम - छोटी छोटी बातों में क्या नाराज़ होता है यार अपने जीजाजी से..
आदिल - यहां से राइट या लेफ्ट?
गौतम - लेफ्ट.. अच्छा पैसे का जुगाड़ कर लेगा तू?
आदिल - मामू की अम्मी चोदनी पड़ेगी.. उसके गल्ले से पैसे निकल कर उसकी लड़की को ही चोदेगे..

गौतम हसते हुए - कितना घटिया आदमी है तू साले..अच्छा तमीज से रहना.. ऐसा ना लगे हम दारु पी रखे है..
आदिल - मेरा तो नहीं लगेगा तू खुदको संभाल पहले.
गौतम - उस पिले घर के आगे रोक..

आदिल बाइक रोककर लगा देता है औऱ आदिल औऱ गौतम एक दुसरे को देखकर वापस कहते है कोई हरकत मत करना..
 
Update 43

गौतम - इतने दिनों से बस सोच रही हो आप.. हर्ज ही क्या है आपको रूपा और माधुरी के साथ रहने में? कब से वो दोनों आपको बुला रही हैं मगर आप है की जाना ही नहीं चाहती.. ऐसी छोड़ दो माँ.. हम कब तक इस घर में रहेंगे? आप जो चाहती थी वह होने वाला है आपको एक नया घर मिलने वाला है आप घर की मालकिन बनने वाली हो मगर पता नहीं क्यों आपने अपनेआप को रोका हुआ है.. एक बार फिर से सोच लो माँ.. रूपा और माधुरी दिल की बुरी नहीं है.. वह दोनों आपको अपनी बड़ी बहन की तरह रखने को तैयार है.. आप कहेंगी तो मैं भी उन दोनों से दूरी बनाकर रखूंगा.. आप इस तरह वहां जाने से इंकार मत कीजिए..

गौतम ने समझाते हुए अपनी मां सुमन को यह सब कहा तो सुमन पलटकर गौतम को जवाब देती हुई बोली..

सुमन - मैं नहीं जानती ग़ुगु मेरा रूपा और माधुरी के साथ नहीं रहने का फैसला सही है या गलत.. मगर मैं बस इतना जानती हूं कि मैं तुझे उन दोनों के साथ अब और नहीं देख सकती.. मैं किसी भी कीमत पर रूपा और माधुरी के साथ उस घर में नहीं रहूंगी और ना ही तुझे रहने दूंगी..

गौतम सुमन की बातें सुनकर घर से निकलते हुए उसे कहता है..
गौतम - जैसी आपकी इच्छा माँ.. अगर आप नहीं जाना चाहती तो कोई बात नहीं.. मैं आपके ऊपर यहां से चलने के लिए और दबाव नहीं डालूंगा.. आपके साथ मैं यहां भी आराम से रह सकता हूं.. मैं बस आपकी ख़ुशी के लिए आपको समझा रहा था..

ये कहते हुए गौतम घर से निकल जाता है और कार लेके आदिल के चाचा के घर के पास एक मोड़ पर आकर रजिया को फ़ोन करता है और उसे बहाना बनाकर घर से बुलाकर अपने साथ कार में बैठा कर कहीं जाने के लिए निकल पड़ता है..

गौतम के फोन पर आदिल का फोन आ जाता है जो उसे एक जगह मिलने के लिए कहता है..
गौतम आदिल की बताइ किसी जगह पहुंचता है तो देखा है कि आदिल अपने मामू की लड़की नरगिस के साथ खड़ा था.

शाम के 5:00 बजे का समय था और इस वक्त आदिल नरगिस के साथ एक पार्क के पास खड़ा था साथ ही उसके करीब उसके मामा की लड़की नरगिस भी खड़ी थी जो की बुर्के में थी. गौतम रजिया को लेकर उसी पार्क के पास आदिल की खड़ी जगह आ जाता है..

आदिल रज़िया को देखता है तो वो चौंक जाता है रज़िया आदिल को सलाम करती है और आदिल गौतम से कहता है..
आदिल - अबे रज़िया ही मिली थी तुझे?
गौतम - अब तेरी अम्मी को साथ से लाने से मना कर दिया तूने.. तो और किसको लाता? एंट्री चाहिए ना..
आदिल गाडी मैं बैठते हुए - ठीक है चल..

गौतम आदिल नरगिस सबको को गाडी में बैठा लेता है और चल देता है..

आदिल - मास्क तो ले लिये ना तूने?
गौतम - हाँ.. सब है..
नरगिस - मास्क लगाकर फ़िल्म देखेंगे?
आदिल - हाँ ख़ास फ़िल्म है मज़ा आएगा तुझे..
रज़िया - गौतम.. कोनसी फ़िल्म है..
गौतम - अभी पता नहीं.. जाकर पता चलेगा..
नरगिस - कहा जाना है? नया सिनेमाहॉल खुला है?
आदिल - नहीं.. पुराना है.. बहुत ख़ास है.. आसानी से टिकट नहीं मिलती.. बड़ी मुश्किल से मिली है..
रज़िया मुस्कुराते हुए - अच्छा? फ़िल्म देखते टाइम हमारे साथ कुछ ऐसा वैसा तो नहीं करोगे ना..
आदिल नरगिस की चूची पकड़ता हुआ - ज्यादा कुछ नहीं बस एक राउंड लेंगे..
नरगिस आदिल से अपनी चूची छुड़वाते हुए - क्या?
गौतम रज़िया की चुत पर हाथ लगाते हुए - ये..
रज़िया गौतम की तरफ बढ़कर उसके गाल चूमते हुए - सिर्फ एक बार ही लोगे?
गौतम रज़िया के होंठ चूमते हुए - तू एक राउंड ही संभाल लेना मुझे..

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आदिल - गौतम मेडिकल पर रोक कंडोम ले लेता हूँ..
गौतम - छोड़ यार.. ये तो तेरे घर की घोड़िया है इनके साथ भी क्या कंडोम लगा के करेंगे?
नरगिस आदिल से - नहीं.. मैं बिना कंडोम नहीं करने दूंगी..
आदिल - रोक ले यार तू.. ले आता हूँ..
गौतम मेडिकल पर ग़ाडी रोकता है और आदिल कंडोम लेने चला जाता है..

रज़िया गौतम के ऊपर चढ़कर उसके होंठो पर टूट पडती है और अपने होंठों से चूमने लगती है जिसे देखकर नरगिस कहती है..
नरगिस - रज़िया तू तो यही शुरु हो गई.. अरे जगह तो देख ले.. लोग है आस पास..
रज़िया kiss तोड़कर - क्या करू नरगिस.. जब पास में ऐसा हसीन लड़का हो तो कैसे सब्र करू..
आदिल कंडोम लेकर आ जाता है साथ अपने लिए सेक्स पावर की गोली भी ले लेता है..
रज़िया वापस सीट पर आ जाती है और गौतम गाडी को चला कर सीधा एक पुरानी ईमारत के पीछे की बेसमेंट में लगा देता है जहा कोई नहीं था सब सुनसान था..

नरगिस - यहां कोनसी मूवी चल रही है? कोई भी तो नहीं है..
रज़िया - हाँ.. यहां तो कोई नहीं है.. और ये इलाका भी बहुत सुनसान है..
आदिल - अरे ऊपर है सिनेमा हॉल..
नरगिस - इस बिल्डिंग में?
आदिल - हाँ..
रज़िया - झूठ मत बोलो आदिल भाई.. तुम दोनों हमें किसी फ्लेट में लेजाकर पेलने वाले लगते हो..
नरगिस - आदिल.. ये क्या मज़ाक़ है.. तुम्हे करना था तो वही कर लेते.. मैंने मना थोड़ी किया था..
गौतम गाडी से उतरते हुए - अरे ख़ुफ़िया फ़िल्म है.. चलो आ जाओ.. चलते है..

गौतम आदिल रजिया और नरगिस के साथ उस पुरानी बिल्डिंग के बेसमेंट में गाड़ी लगाकर आगे की तरफ आ जाता है और सीडीओ से चढ़ता हुआ तीसरी मंजिल पर पहुंचता है.. यहां तक सारा रास्ता सुनसान था और कोई भी नहीं था मगर जैसे ही वह एक दरवाजे से एंट्री लेकर अंदर घुसते हैं वहां बहुत चल पहला और शोर शराब सब कुछ था.. वहां लोगों की भीड़ लगी हुई थी और सब किसी न किसी के साथ थे.. सब ने मास्क लगाया हुआ था और यहां पर गौतम ने भी सबको मास्क लगाने के लिए कह दिया था..

वहां से एक दरवाजे पर एंट्री पॉइंट था जहां पर दो लोग खड़े हुए थे और पर कपल एंट्री कर रहे थे लोग अपनी टिकट दिखाकर अंदर हाल की तरफ जा रहे थे और अपनी-अपनी सीट पर बैठ रहे थे सामने एक बड़ा सा पर्दा था जैसे कि आमतौर पर सिनेमा हॉल में होता है..
इस हाल की खास बात यह थी कि यहां पर हर तरफ से एंटी और एग्जिट प्वाइंट बने हुए थे पूरा कमरा साउंड प्रूफ था जिससे कोई भी शोर बाहर नहीं जा सकता था. सामने का पर्दा भी बिल्कुल सिनेमा हॉल की तरह साफ सुथरा और क्लियर था जिस पर कुछ ही देर में कोई पिक्चर चलने वाली थी..

गौतम ने रजिया के साथ तो आदिल ने नरगिस के साथ एंट्री ली.. एंट्री लेकर चारों सबसे पीछे की सीट पर बैठ गए जो गौतम के फ्रेंड ने रिक्वेस्ट करके दिलवाई थी..

5:00 बजने वाले थे और 6:15 पर पिक्चर शुरू होने वाली थी जो की डेढ़ घंटे की थी.. आज पिक्चर का थीम incest पर था जिसमें पारिवारिक रिश्तों में व्यभिचार को दिखाते हुए अश्लीलता का प्रदर्शन किया जा रहा था.. फिल्म का पोस्टर देखने से ऐसा लगता था कि इसमें घर में होने होने वाले व्यभिचार को कामुकता के रंग में रंगकर परोसा गया है..

सीट पर बैठते ही गौतम ने नरगिस के गले में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसके होठों पर अपने होंठो रखते हुए उसके होठों को खींचते हुए इस तरह चुम्मा जैसे कि वह आदिल की गर्लफ्रेंड ना होकर उसकी अपनी गर्लफ्रेंड हो..

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नरगिस विरोध करना चाहती थी मगर एकदम से हुए इस हमले पर वह अपनी प्रतिक्रिया देने में असमर्थ थी और उसके होंठ गौतम के होठों के गुलाम बन गए. उसने अपने होठों के जाम गौतम को पिला दिए और जब गौतम उसके होठों को चुमकर चुत पर अपना हाथ रखता है तब नरगिस गौतम को रोक देती है और उसके साथ चुंबन को तोड़ लेती है..

आदिल ये सब देख रहा था मगर उसने गौतम को रोकने का कोई इरादा नहीं किया और ना ही उसने कोई कोशिश की.. वो बस सामने देखता हुआ पर्दे की तरफ देखने लगा..
रज़ीया ने गौतम को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसके होठों पर होंठ लगाती हुई बोली..
रज़िया - मैं हूँ ना.. गौतम.. मेरे साथ करो..
गौतम ने रज़िया को चुमा और चूमते हुए उसके बदन का जायजा लेने लगा. उसके बदन और गांड पर हाथ फिरता हुआ वह रजीया को चूमे जा रहा था कि सामने पर्दे पर पिक्चर शुरू हो चुकी थी..

हॉल के अंदर बैठे हुए सभी कपल एक दूसरे के साथ चुम्माचाटी और दूसरी तरह की कामुक हरकतो में लीन हो चुके थे वही सामने फ़िल्म की शुरुआत में दिखाया जा रहा था की एक 45 के करीब की खूबसूरत औरत एक 25 साल के लड़के के आगे घोड़ी बनी हुई थी और लड़का उसे चोद रहा था.

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फ्लिम में चुत और लंड का सम्पर्क दिखाते हुए उन दोनों के चेहरे भी दिखाए जाते है.. इसीके साथ सामने दिवार पर लटकी घड़ी में रात के 2 बजे का समय दिखाया जाता है और उसके पास एक तस्वीर दिखाई जाती है जिसमे एक 50 साल का आदमी का चेहरा था जिसकी फोटो पर माला चढ़ी हुई थी.. उसी तस्वीर के करीब बाजू में एक और बड़ी सी तस्वीर थी जिसमे वो आदमी इस वक़्त चुद रही उस औरत के साथ खड़ा था और जो लड़का औरत को चोद रहा था वो उन दोनों के पैर छू रहा था.. जिससे पता चलता है की इस वक़्त जो लड़का जिस औरत को चोद रहा है वो उसकी माँ है और उसके बाप की मौत हो चुकी है..

नरगिस और रज़िया को अब पता चल गया था की ये सेक्स मूवी है.. हाल में बैठे हुए कपल में से बहुत से कपल ने अपने कपड़े साइड में रख दिए थे और अपने लंड और साथ आई लड़की की चुत और चुचो को भी नंगा कर दिया था और सेक्स की शुरुआत कर दी थी..

आदिल सेक्स की गोली खा चुका था और इस वक्त उसने नरगिस को अपनी बाहों में लेकर चूमना शुरू कर दिया था इसी के साथ ही गौतम ने भी रजीया के साथ मुंह मारना शुरू कर दिया था और अपना लंड बाहर निकाल कर रजीया के मुंह में दे दिया था जिसे रजीया बड़ी जोर से चूसते हुए मुस्कुराकर गौतम को देख रही थी..

गौतम रजिया को लंड चूसते हुए नरगिस की चुत पर हाथ रखकर उसकी चुत मसल रहा था.. काजल की बाहों में नरगिस यह समझ नहीं पा रही थी कि उसकी चुत पर किसका हाथ है और वह गौतम को अपनी चुत पर हाथ लगाने से नहीं रोक रही थी.. आदिल में जब नरगिस को अपनी बाहों से थोड़ा ढीला छोड़ तब उसे पता चला कि उसकी चुत पर आदिल का नहीं बल्कि गौतम का हाथ था और उसने गौतम का हाथ हटाने की कोशिश की मगर गौतम ने नरगिस की चुत को कस के पकड़ लिया और मसल दिया जिससे नरगिस की आह निकल गई..

नरगिस की नजर जब गौतम के लंड पर गई तब उसकी आंखें खुली की खुली रह गई और लंड चुस्ती हुई रजिया को देखने के बाद में नरगिस की नजर गौतम के चेहरे पर पड़ी जिसपर एक कातिल मुस्कान छाई हुई थी..

गौतम का लंड देखने के बाद नरगिस ने गौतम के चेहरे पर मुस्कान देखी.. नरगिस भी मुस्कुराते हुए गौतम को देखने लगी और इस बार उसने अपनी चुत से गौतम का हाथ हटाने का कोई इरादा नहीं किया और गौतम को अपनी चुत से छेड़खानी करने की इज़ाज़त दे दीं. गौतम एक हाथ से नरगिस की चुत मसल रहा था दूसरे से अपना लंड चुस्ती हुई रज़िया की चुत को मसल रहा था..

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आदिल भी नरगिस के होठों को चूमते हुए उसके बूब्स दबा रहा था और नरगिस के मज़े ले रहा था..

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फिल्म मैं आगे दिखाया गया कि वह लड़का उस औरत के साथ घर के हर कोने में रोमांस कर रहा था और रोमांस करते हुए औरत को खुश रख रहा था साथ ही उसके साथ भर भर के चुदाई का काम भी कर रहा था.. दोनों की चुदाई की धमाकेदार आवाजे हॉल के स्पीकर से इतनी देर आ रही थी की हॉल में कपल की चुदाई की आवाजे उसमे दब कर रह जा रही थी..

आदिल ने नरगिस की सलवार नीचे करके उसे घोड़ी बना लिया और गौतम की तरफ नरगिस का मुंह करके पीछे से कंडोम लगाकर चोदने लगा..

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गौतम के सामने जब नरगिस का चेहरा आया तो गौतम ने नरगिस के बाल पड़कर उसका चेहरा अपने लंड पर झुका दिया और नरगिस पीछे आदिल से चुदवाते हुए आगे रज़िया की तरह गौतम के लंड को चूसने लग गई..

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गौतम के लंड पर रज़िया और नरगिस दोनों का मुंह था और दोनों बड़े चाव से लंड चूसती हुई गौतम के आंड चाट रही थी..
गौतम ने सामने हाल में देखा तो परदे की रोशनी मैं उसे कई कपल चुदाई करते हुए नज़र आ रहे थे उसके पास भी जो कपल बैठा हुआ था सेक्स करने लगा था...

गौतम को अब चुत चोदनी थी उसने नरगिस के मुंह से अपना लंड निकाल लिया और रज़िया की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने लंड पर बैठा लिया..


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गौतम ने चुत पर लंड लगाते हुए झट से रज़िया की चुत में अपना लंड घुसा दिया.. रज़िया बहुत कामुक लड़की थी उस ने अपनी चुत में गाजर मूली बैगन बैलन लोकी सब घुसाईं हुई थी तो गौतम के लंड को अंदर जाने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई मगर जब आधे से ज्यादा लंड जाने लगा तो रज़िया की चीख निकल गई और गौतम ने उसे चोदना शुरु कर दिया..

रज़िया की सडक छाप कुतिया की तरह सिसकते हुए गौतम के लंड पर उछल रही थी और आदिल नरगिस के बाल पकड़ कर पीछे से उसकी चुत मार रहा था और अब वो झड़ने वाला था.. रज़िया भी गौतम का लंड लेते ही झड़ गई और अब उसकी चुत पूरी गीली थी जिससे लंड ऊपर नीचे होने में ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था.. चुदाई चरम पर थी चारो सम्भोग में सुख भोग रहे थे.. फ़िल्म भी अपनी गती से आगे बढ़ रही थी और चुदाई पर चुदाई हो रही थी हॉल में कपल खुलकर एक दूसरे को चोद रहे थे सबकी शर्म निकल चुकी थी..

आदिल भी झड़ गया और सीट पर बैठ गया.. गौतम ने रज़िया को लंड पर से उतार दिया और आगे सीट पर झुका कर पीछे से उसकी चुत मारने लगा.. इसके साथ उसने देखा की नरगिस भी सीट पर बैठकर आदिल का कंडोम बांध कर सीट के नीचे रख रही थी.. गौतम ने थोड़ी देर रज़िया को छोड़ तो वो काम के चरम पर पहुंचकर वापस झड़ गई..

गौतम ने रज़िया छोड़ दिया और नरगिस का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया.. नरगिस भी बिना कुछ कहे गौतम के ऊपर आ गई और बिना कंडोम की परवाह किये गौतम के लंड को सिसकारियों और कामुक आवाजो के साथ चुत में ले गई..
गौतम ने नरगिस को गोद में उठाकर चोदना शुरुआत कर दिया जिसे आस पास के कपल देखकर तालिया बजाते हुए शोर करने लगे... .


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फ़िल्म आधी ख़त्म हो चुकी थी और आदिल ने अब रज़िया का हाथ पकड़कर उसे सीट पर घुमा लिया और चुत में लंड डाल कर चोदने लगा रज़िया आदिल के लंड से आराम से चुद रही थी और गौतम को देख रही थी जो नरगिस को लोडे पर उछाल उछाल के चोद रहा था. नरगिस झड़ गई और हाफने लगी मगर गौतम चोदे जा रहा था.. और ताबड़तोड़ झटके माररहा था.

गौतम ने इशारे से आदिल को कुछ कहा तो वो रज़िया को छोड़कर गौतम के आगे आ गया और नरगिस के पीछे खड़ा हो गया.. गौतम ने चोदना रोका तो आदिल ने नरगिस की गांड के छेद पर अपना खड़ा लंड लगा के झटका मारा और अपना लंड नरगिस की गांड में पेल दिया..

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नरगिस गांड मरवा चुकी थी इससे उसकी गांड में लंड आराम से चला गया और अब वो आदिल और गोतम के बीच आगे पीछे दोनों तरफ से चुद रही थी उसकी चीखे आदिल के कानो में मिश्री बनकर पड़ रही थी.. नरगिस की हालात खराब थी वो दोनों से छोड़ने को कह रही थी मगर दोनों उसको आगे पीछे से चोदे जा रहे थे..
आदिल ने चुदाई के दौरान नरगिस को कौशल की बात बता दीं और गाली देते हुए कहा..
आदिल - मुझे धोखा देगी रंडी.. ले.. चुदाई खानी छिनाल.. लंड चाहिए ना तुझे.. चुद अब..
नरगिस पहले ही इतनी हार्ड चुदाई से थक चुकी थी और अब उसे दर्द हो रहा था वही आदिल की बात सुनकर वो शर्म से लाल हो चुकी थी और अब उसने दोनों से छोड़ने की अपील करना भी बंद कर दिया था..
रज़िया सीट पर बैठी हुई नरगिस की चुदाई देखकर घबरा गई थी और उसने अपनी चुत कपडे से पोंछकर वापस चुदने का इरादा छोड़ दिया रहा..
आदिल और गौतम के साथ नरगिस की चुदाई देखकर लोग तालिया बजाते हुए अपने अपने साथी के साथ मज़े ले रहे थे फ़िल्म में भी चुदाई का सीन चल रहा था जहा माँ रसोई में खाना बनाते हुए बेटे से चुद रही थी..

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आदिल वापस झड़ गया और नरगिस की गांड में खाली होकर सीट पर आ बैठा वही अब गौतम भी झड़ने वाला था उसने नरगिस को सीट पर पटक दिया और रज़िया के बाल पकड़कर उसके मुंह को नरगिस के मुंह के पास लाकर दोनों के मुंह के सामने अपना लंड हिलाते हुए उनके मुंह पर अपना वीर्य एक के बाद एक अपनी पिचकारी से कई धार छोड़कर झड़ गया..
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नरगिस शर्म और चुदाई से बेहाल थी वही रज़िया दो बार झड़कर संतुष्ट और खुशहाल हो चुकी थी..
फ़िल्म समाप्ति की और थी..
रज़िया ने मुंह में लेकर गौतम का लंड साफ किया और अपने मुंह अपने दुप्पटे से.. नरगिस भी उसी दुप्पटे से मुंह साफ करने लगी..

आदिल का गुस्सा शांत नहीं हुआ था वो दो बार झड़ चूका था और होली खाने से अब भी उसका लंड सख्त था उसने पहिसे नरगिस को सीट पर घोड़ी बना लिया और नरगिस शर्म के मारे बिना कुछ बोले सिसकती हुई वापस आदिल से गांड मरवाने लगी..


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थोडी देर बाद गौतम ने आदिल को नरगिस के पीछे से हटा दिया और अपना लंड नरगिस की गांड में घुसा दिया जिससे नर्गिस गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाते हुए गांड मराने लगी आदिल के दिल को सुकून मिल गया और उसने रज़िया को भी उसी तरह घोड़ी बना लिया..
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अगल बगल रज़िया और नरगिस एक जैसी पोज़ में घोड़ी बने हुए थे.. नरगिस की गांड में गौतम खलबली मचा रहा था और रज़िया की चुत में आदिल उतरा हुआ था मगर रज़िया को उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था.. रज़िया अपने दाने को छेड़ती हुई वापस कामुक हो रही थी और आदिल से चुद रही थी वही नरगिस तो ऐसे फसी जैसे रज़िया गुंडों में..

नरगिस ने हाथ जोड़कर गौतम से छोड़ने को कहा तो गौतम को तरस आ गया और उसने नरगिस की गांड से लंड निकाल लिया.. आदिल भी रज़िया के साथ वापस झड़ गया था.

गौतम के लंड पर किसी की नज़र पड़ी तो उसने गौतम को देखकर कहा.. बड़े लंड वाल.. बड़े लंड वाला.. गौतम के आस पास की 3-4 लड़की जो अपने कपल के साथ थी गौतम का लंड देखकर गौतम पर टूट पड़ी और एक साथ उसके लंड को चूसने लगी..

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गोतम को अचानक समझ नहीं आया की ये क्या हुआ.. आदिल रज़िया और नरगिस भी ये सब देख रहे थे.. गौतम सामने 4-5 लड़किया बैठकर उसके लंडपर टूट बड़ी किसी ने उसके टट्टे चाटे किसी ने लंड किसी ने जांघ किसी ने झाट वाला हिस्सा.. गौतम कामुकता से वापस भरने गया था..

फ़िल्म ख़त्म होने ही वाली थी और एक एग्जिट point खुल चूका था जहा से अब कपल बाहर जाने लगे थे.. गौतम लड़कियों के चारे के मास्क उतारे तो उसे बेहद खूबसूरत खूबसूरत लड़किया अपने लंड दिखी जो रसीसजाडीया मालूम पडती थी..

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आदिल ने गौतम से इशारे ने निकलने को कहा तो गौतम ने उसे इशारे से जाने के लिए कहा और आदिल रज़िया को इशारा करके वहा से जाने लगा आदिल के पीछे पीछे रज़िया भी लचकती हुई निकल गई और नरगिस हॉल में लगी सीट का सहारा लेते लेते बाहर निकली उसकी आज हालात खराब हो चुकी थी.. गौतम का लंड बारी बारी से सबके मुंह में जा रहा था और गौतम को लगने लगा था की अब अगर वो नहीं निकला तो लाइट on हो सकती है और फिर उसका चेहरा कोई भी देख सकता है..

गौतम ने लंड हाथ में लिया और मुठियाते हुए सामने बैठी लड़कियों के ऊपर अपना माल छोड़ दिया और हाल से अपने जीन्स पहनते हुए भागकर निकल गया..

आदिल के दिल में सुकून भर गया था उसके सामने नरगिस शर्म से पानी पानी होकर अपनी गांड पकडे खड़ी थी और रज़िया हसते हुए गौतम के लंड से मिले सुकून को महसूस करते हुए..
हॉल से निकले सब लोग आगे पार्किंग में जारहे रहे और गौतम पीछे पार्किंग में आदिल के पास आ गया..

गौतम कार मैं बैठ गया और बाकी लोग भी बैठ गए आदिल वहां से निकल गया और रास्ते में एक चाय की दूकान पर गाडी रोककर चाय वाले से चार चाय देने को कहते हुए आदिल से नरगिस का हाल पूछने को कहा..
गौतम - लगता है नरगिस नाराज़ है..
आदिल हसते हुए - कौशल की याद आ रही होगी..
नरगिस चुप थी और शर्मिंदा भी..
रज़िया - कितना रगड़ के किया था तुम दोनों ने इसके साथ... मैं तो घबरा ही गई थी कही मुझे भी इसकी तरह ना चुदवाना पड़े..
चायवाला - आपकी चाय..
सबने चायवाले से अपना अपना कुल्हड़ लेके चाय पीना शुरु कर दिया.. नरगिस को समझ नहीं आ रहा था वो क्या करें.. वो चुपचाप चाय पी रही थी..
आदिल ने गौतम के कान में कुछ कहा और गौतम ने रज़िया के कान में.. रज़िया हस्ती हुई दोनों को देखने लगी..
सबने चाय पीकर कुल्हड़ बाहर फेंक दिया.. चायवाला आकर - भाईसाब आपकी 4 चाय के 60 हो गए..
गौतम आदिल को देखकर - मेरी पास तो नहीं है आदिल तू देदे..
आदिल - मेरी पास भी नहीं है यार.. रज़िया तू दे दे..
रज़िया - तुम्हारे पास नहीं है तो मेरी पास कय होंगे... मैं भी बिना पैसे आई थी..
गौतम - नरगिस तुम पैसे दे दो..
नरगिस शर्मिंदगी से - मेरी पास भी नहीं है..
आदिल नरगिस को बिना उसका पर्स लिए ही ले आया था इसलिए वो जानता था नरगिस के पास पैसे नहीं है.. वो गौतम और रज़िया के साथ मिलकर ये नाटक कर रहा था..
चायवाला - इतनी अच्छी कार है भाईसाहब आपके पास.. 60 रुपए तो होंगे ही..
गौतम - आज भूल गया पैसे लाना यार.. कुछ और हो सकता है..
चायवाला - क्या मतलब?
आदिल - अरे भाईसाब आप पीछे आओ ना..
चायवाला पीछे कार की खिड़की में देखता हुआ - क्या?
आदिल नरगिस के चुचे पकड़ कर - भाईसाब पैसे के बदले इसके चुचे चूस लो..
चायवाला हैरानी से चुप था..
आदिल - क्या हुआ भाईसाब? आओ अंदर बैठ जाओ.. चूस लो..
चायवाला कामुकता से भर गया और गाडी के अंदर बैठ गया..
आदिल ने नरगिस के चुचे कुर्ती से बाहर निकाल दिए और चायवाला झपट कर नरगिस के बोबे चूसने लगा.. आदिल और गौतम एक दूसरे को देखकर हसने लगे वही नरगिस चुपचाप शर्मिंदा बैठी हुई चायवाले को चुचे चूसा रही थी..
आदिल - भाईसाब सिगरेट मिलेगी..
चायवाला चुचे चूसता हुआ - अभी लाया भाईसाब..
चायवाला एक बड़ी एडवांस सिगरेट और लाइटर लेके आ गया और आदिल को दे कर वापस नरगिस के चुचे चूसने लगा..

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आदिल ने एक कश लेकर सिगरेट गौतम को दे दी..
गौतम सिगरेट के कश लेते हुए चायवाले से बोला - भाईसाहब नाम क्या है आपका..
चायवाला - विनोद कुमार..
गौतम - विनोद भाई एक चाय और पीला दो..
नरगिस विनोद को अब अपने चुचे से हटा कर चुचे कुर्ती में वापस डाल लेती है और मुंह मोड़कर बैठ जाती है..
चायवाला - महगाई का टाइम है भाईसाब.. बिना वैसे कैसे चलेगा..
रज़िया विनोद के लंड पर हाथ रखकर - विनोद भाई.. पीला दो ना..
चायवाला विनोद - लता हूँ बहन जी..
आदिल हसते हुए - क्या बात है.. रज़िया रंडी..
रज़िया नरगिस से - नरगिस.. चुप क्यों है..
गौतम - ये तो कौशल बताएगा..
आदिल हसते हुए - सही कहा..
थोड़ी देर बाद चायवाल चाय लेकर आता है और आदिल और गौतम चाय पिने लगते है वही नरगिस चाय नहीं लती और मुंह बनाके बैठ जाती है रज़िया चाय की चुस्की लेकर चाय तो अच्छी बनाई है..
गौतम - हाँ इनाम तो मिलना चाहिए विनोद को..
चायवाला विनोद - क्या भाईसाहब...
गौतम रज़िया से - रज़िया मुंह में लेके thanks बोल विनोद को..
रज़िया हैरानी से - क्या?
आदिल चाय पीते हुए - बोल दे रज़िया.. तेरा क्या जाएगा बेचारे का भला हो जाएगा..
रज़िया कार का दरवाजा खोलकर इधर उधर देखती है और फिर विनोद की जीप खोलकर उसका लंड मुंह मे लेकर 2-3 बार चुस्ती है और thanks you भैया बोल देती है..
विनोद कामुकता से भरा हुआ देखता रह जाता है और सबके जाने के बाद दूकान के पीछे जाकर मुठ मारता है..

गौतम आदिल रज़िया और नरगिस को ड्राप करके वापस जब घर आया तो रात के 9 बज रहे थे..

कहा था अब तक? और फ़ोन क्यों नहीं उठाया तूने मेरा?
माँ साइलेंट था फ़ोन पता नहीं चला..
मैं यहां अकेली थी ग़ुगु..
माँ.. पुलिस क्वाटर है.. आसपास पुलिस वाले है.. इतने कैमरा और सेक्विरिटी है.. आप फिर भी डरती हो..
मुझे नहीं पता तू मुझे छोडके मत जाया कर शाम के बाद..
गौतम सुमन को बाहों में लेटा हुआ - अच्छा ठीक है मेरी शहजादी.. अब नहीं जाऊँगा शाम के बाद घर से बाहर...
सुमन मुस्कुराते हुए - खाना खा ले.. कब से इंतजार कर रही थी..
गौतम - क्या बनाया है?
सुमन - प्याज के पराठे तेरे पसंद के..
गौतम के गाल को चूमता हुआ - क्या बात है माँ.. आज तो बहुत प्यार आ रहा है अपने बेटे पर..
सुमन खाना ड़ालते हुए - तू नरकज़ तो नहीं है ना ग़ुगु मेरी फैसले से..
गौतम खाना खाते हुए - नहीं माँ.. रूपा और माधुरी के साथ रहना या ना रहना आपकी मर्ज़ी है.. मैं इसमें आपसे क्यों नाराज़ हूंगा? चलो आप भी खाओ.. मैं जानता हूँ आपने भी नहीं खाया होगा..
सुमन भी उसी प्लेट में गौतम के साथ खाना खाने लगती है और कहती है - ग़ुगु.. तू बता रहा था तेरे एग्जाम शुरु है 3 दिन बाद.. तैयारी ठीक चल रही है ना..
गौतम सुमन को खाना खिलाते हुए - आप फ़िक्र मत करो.. आज तक फ़ैल हुआ हूँ जो अब हूंगा.. टॉप करना नहीं है.. फैला होना नहीं है.. पास हो जाऊंगा..
सुमन - आज से हम अलग अलग सोयेंगे ग़ुगु..
गौतम - क्यों?
सुमन - कल रात तो तू बहक ही गया था.. अगर मैं नहीं रोकती तो तू छोटे ग़ुगु को मेरे अंदर डाल दी देता..
गौतम खाने की प्लेट देते हुए - वो तो मै मज़ाक़ कर रहा था माँ.. आप भी ना... चलो जल्दी आओ माँ मैं वेट कर रहा हूँ बिस्तर में..
सुमन मुस्कुराते हुए दिल ही दिल में गौतम को जाते देखकर मचलने लगी थी..
उसने जल्दी से बर्तन धोकर गौतम के पास की राह ले ली और उसके पास चली गई..
पिछली रात की तरह आज भी गौतम ने सुमन के बदन से चड्डी और ब्रा के अलावा सारे कपडे उतार दिए.. और खूबसूरत भी सिर्फ चड्डी में आ गया और सुमन से लिपटा हुआ थोड़ी देर उससे इधर उधर की बात करके सो गया..
 
Update 44

अगले दिन दोपहर में..
लीला दरवाजा खोलकर - तू आ गया बेटा?
गौतम - बस आंटी आपका फ़ोन आते ही दौड़ा चला आया.. गाडी चालान जो सीखना था.. घर पर कोई नहीं है ना..
लीला - कोई नहीं है तू अंदर..
गौतम - कहा गये है सब?
लीला - नीरज के पापा शमा को लेके गाज़ियाबाद गए है कल नीरज और मैं भी जाने वाले है वही कोर्ट मैरिज करेंगे इन दोनों की..
गौतम - और नीरज आंटी?
लीला - अरे उसे मैंने सामान लेने भेज दिया है..
गौतम लीला को बाहों में उठा के कमरे के अंदर बिस्तर में ले जाता हुआ - आंटी आपकी सडक बहुत अच्छी है गाडी चलाने में मज़ा आ गया उस दिन..
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लीला बिस्तर में साडी उठाकर - आज सडक की सफाई की है बेटा.. और मज़ा आएगा.
गौतम पेंट खोलकर लंड चुत पर लगाने ही वाला था की नीरज आ गया और उसने ये सब देख लिया.
गौतम नीरज को देखकर लीला से - आंटी केसा गांडू बेटा पैदा किया है? हर बार गलत टाइम पर आता है..
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नीरज चौंकते हुए - साले तू फिर से मेरी माँ चोद रहा है..
गौतम - तो क्या जबरदस्ती चोद रहा हूँ गांडू? देख नहीं रहा कैसे तेरी माँ टागे खोलके पड़ी मेरी सामने चुदने के लिए..
लीला अपनी चुत को साडी से ढकती हुई नीरज से - तू इतनी जल्दी कैसे आ गया?
नीरज गुस्से से - जिस दुकान पे आपने भेजा था वो बंद है आज... और मुझे नहीं पता था मुझे दूकान पर भेजकर आप ये गुल खिलाओगी...
गौतम लीला की चुत से साडी ऊपर करके चुत चाटते हुए - अब खड़ा खड़ा क्या अपनी माँ की चुदाई देखेगा गांडू.. जा ना यहां से.. एक घंटे बाद आना..
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नीरज लीला से - माँ इसको बोलो यहाँ से चला जाए वरना मेरे हाथ से आज खून हो जाएगा इसका...
लीला सिसकी लेती हुई नीरज से - ये तो यही रहेगा.. तू जा चाय बना.. वरना ये शादी जो तू कर रहा है होने नहीं दूंगी..
नीरज लीला की बात सुनकर खड़ा खड़ा रोने लगता है.. और गौतम चुत चाटने के बाद उसमे अपने लंड पेल देता है और चोदता हुआ बोलता है..
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गौतम - अरे क्यों रो रहा है गांडू.. कोनसा तेरी माँ पहली बार चूद रही है...
लीला कामवासना से भरकर - अह्ह्ह इसे रौने दे बैठके... तू चोद मुझे बेटा...
गौतम मिशनरी में झटके मारता हुआ - मज़ा आ रहा है ना आंटी...
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लीला - हाँ.. बेटा.. आह्ह..
गौतम नीरज से - नीरज कमाल की चुत है तेरी माँ की... बहुत टाइट है यार.. उफ्फ्फ...
लीला - अह्ह्ह्ह... अह्ह्ह्ह... बेटा.. उम्म्म्म.. अह्ह्ह्ह..
लीला की सिस्कारिया कमरे में गूंजने लगी थी और उसी के साथ में लंड चुत के मिलन से मधुर छप छप की आवाज भी..

नीरज अपने कान पर हाथ लगाकर वही बैठा वो अपनी माँ को चुदते हुए देखकर रो रहा था और गौतम उसे देखकर लीला को जबरदस्त तरीके से चोदे जा रहा था..
गौतम ने मिशनरी के बाद घोड़ी बनाके लंड चुत में पेल दिया और पट पट की आवाज के साथ लीला को चोदने लगा और नीरज से बोला..
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गौतम - अबे क्या माल है तेरी माँ.. साले...
लीला - अह्ह्ह.. अह्ह्ह..
गौतम - आंटी आपको तो ब्लू फ़िल्म में होना चाहिए.. बहुत कमाओगी..
लीला - तू दिला दे काम बेटा.. फिल्मो में..
नीरज उठकर आंशू बहाते हुए बाहर जाने लगता है तभी गौतम उससे कहता है..
गौतम - चाय बनाने जा रहा है क्या?
नीरज पलट कर गुस्से से - तेरे लिए चाय बनाऊंगा क्या साले..
गौतम - अबे इतना गुस्सा क्यों है? शमा से चिकनी तो तेरी माँ लीला है.. एक बार चोद के देख शमा को भूल जाएगा..
लीला चुदते हुए सिसकियाँ लेकर - अह्ह्ह बेटा.. कैसी बातें कर रहा है.. आह्ह... अह्ह्ह्ह..
गौतम नीरज से - खड़ा क्या है गांडु? चाय बना रहा है या तेरी माँ को लंड पर बैठाके रसोई में ले जाऊ चाय बनवाने?
लीला - आह्ह... नीरज बना दे बेटा..
गौतम - हाँ.. चाय पीके चला जाऊंगा..
लीला झड़ते हुए - अह्ह्ह... अह्ह्ह...
नीरज रोते हुए रसोई में आकर चाय चढ़ा देता है और अपनी माँ के बारे में सोचने लगता है कि वो कितनी बड़ी वाली रांडी है..
गौतम लीला को उठाके चोदते हुए रसोई में ले आता है..

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गौतम नीरज से - भाई हां या ना बोलके बता तो देता.. चाय बना रहा है या नहीं..
फ़ालतू तेरी माँ को कमरे से रसोई में लेके आया..
नीरज रोते हुए - माँ मैं पापा को सब बता दूंगा.. आपके और इस कमीने के बारे में..
लीला चुदते हुए एक थप्पड़ नीरज के गाल पर जड़ देती है और कहती है - सूअर.. ना जाने कोनसी रंडी को उठा के यहां ले आया.. और मुझे धमका रहा है.. बता दे तेरे पापा को.. अरे उसके लंड में दम नहीं है तभी तो इसके लंड पर बैठी हुँ... तेरे लंड में दम था तो तू बैठा लेता मुझे अपने लंड पर..
गौतम लीला कि चुत में झड़ते हुए - अह्ह्ह्ह.. आंटी.. आह्ह... मज़ा आ गया...

नीरज चाय कप में डालकर रख देता है और गौतम लीला को गोद से उतार कर बिना लंड पेंट में डाले चाय पिने लगता है..
गौतम चाय पीता हुआ - तेरी मा तो तेरा लेने के लिए भी तैयार है.. साले डाल क्यों नहीं देता..
लीला साडी सही करते हुए - ये क्या डालेगा डरपोक..
नीरज गुस्से में आकर अपने आंसू पोंछता है और अपनी माँ लीला कि साडी उठा कर अपना लंड लीला की चुत में पेलते हुए कहता है..
नीरज - बहुत गर्मी है ना माँ तेरी चुत में.. अब से मैं तेरी सारी गर्मी दूर करूँगा..
गौतम हसते हुए चाय पीकर रसोई की सिंक में मूतने लगता है और नीरज लीला को चोदने लगता है.. गौतम चाय पीते हुए मूत कर लंड पेंट में डाल लेता है और नीरज और लीला को देखने लगता है..
नीरज रसोई की स्लीब पर लीला को झुकाते हुए लीला को चोद रहा था और अपनी माँ को रांड छिनाल जैसे उपमा से अलंकृत करता है..
गौतम - अब बोल भोस्डिके.. है शमा तेरी माँ के आगे कुछ?
नीरज लीला को चोदते हुए - शमा की बात मत कर मैं उससे प्यार करता हूँ.. और रही बात माँ की तो इसकी चुत की सारी गर्मी अब मैं निकालूँगा..
गौतम जाते हुए - सोने मत देना रात भर आंटी को..
नीरज - इसे तो लंड पर सुलाऊंगा..
लीला मज़े से गौतम को देखकर - बाए बेटा..
गौतम - बाए आंटी...

************

कुछ दिन बाद...

रूपा झील के पास करीम की रिक्शा में बैठी हुई सडक को देख रही थी.. गौतम एक बस से उतर कर रिक्शा के पास आ गया और टेक्सी में बैठ गया..
गौतम ने बिना कुछ बोले रूपा के होंठो को अपने होंठों से लगा लिया और चूमकर रूपा से बोला..
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गौतम - माफ़ कर दो.. देरी हो गई आने में..
रूपा - करीम.. रिक्शा कहीं ले चल..
करीम - आपा वही ले चलू जहा पहली बार लेकर गया था..
रूपा - हाँ.. ले चल..
गौतम - ज्यादा टाइम नहीं है मम्मी.. रूम ले लेते है किसी होटल में..
रूपा - टाइम क्यों नहीं है..
गौतम - अरे आते आते शाम हो जायेगी.. माँ ने मना किया है शाम के बाद बाहर रहने से.. उन्हें डर लगता है अकेले..
रूपा - हम जल्दी आ जाएंगे..
गौतम - तुम कह रही थी कुछ बात करनी है तुम्हे?
रूपा - वही बैठ कर बात करेंगे..
गौतम रूपा के बूब्स पकड़कर मसलते हुए उसके चेहरे पर चुम्मिया करते हुए - ठीक है..
रूपा गौतम के सर को अपनी गोद में खींच लेती है और अपना ब्लाउज के बटन खोलकर एक चूची गौतम के मुंह पर रख देती जिसे गौतम चूसने लगता है और रूपा साडी का पल्लू गौतम के सर पर डाल कर उसका चहेरा आँचल में छुपा लेती है और रिक्शा से बाहर देखकर इतनी ख़ुशी से मुस्कुराने लगती है जैसे उसे कोई खज़ाना मिल गया हो.. Tamanna-Boob-Sucked2
करीब सब बैक मीरर में देख रह था और उसे समझ नहीं आ रहा था की रूपा इतनी खुश क्यों है?
गौतम ने रूपा का दूसरा चुचा भी निकाल लिया और मुंह में लेकर पूरी काम भावना के साथ चुचक चूसते हुए चुचो को चाट चाट कर पिने लगा.. रूपा के बदन में झुनझुनाहट हो रही थी और वो प्यार से गौतम का सर सहला रही थी..
रूपा गौतम को प्यार भरी और ममता भरी आँखों से देखने लगी.. उसे गौतम आज जान से प्यारा लग रहा था उसका करण सिर्फ वही जानती थी..

उसी जगह वापस आने के बाद गौतम ने रूपा को अपनी गोद में बैठा लिया और उसके होंठों का रस लेते हुए बोला - अब बताओ ना मम्मी क्या कह रही थी तुम?
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रूपा फिर से गौतम के होंठ चूमते हुए - इतनी भी क्या जल्दी है पहले मुझे मेरे शैतान बच्चे के नजूक लबों को तो मन भरके चुम लेने दे..
गौतम चूमते हुए - सॉरी मम्मी.. मैं माँ को साथ रहने के लिए नहीं मना पाया..
रूपा - कोई बात नहीं नन्हे शैतान.. वैसे भी कल मैं वापस माधुरी के साथ उसी फ्लेट में रहने जा रही हूँ..
गौतम - क्यों?
रूपा पर्स से कुछ डॉक्यूमेंट निकालती हुई - हमने वो घर सुमन दीदी के नाम पर कर दिया है.. और अब मैं और माधुरी दोनों ये चाहते है की तू सुमन के साथ उस छोटे से पुलिसक्वाटर से निकलकर उस घर में रहे..
गौतम - पर इतनी मेहरबानी क्यों?
रूपा - कैसी मेहरबानी? उस घर की असली हक़दार तो सुमन दीदी ही है.. और अब तु इसे लेने से मना मत करना.. तुझे दीदी की कसम..
गौतम रूपा के ब्लाउज में हाथ डालकर - अच्छा ये सब छोडो.. प्यार करना शुरु करें?
रूपा मुस्कुराते हुए गौतम की जीन्स का हुक खोलकर चैन नीचे कर देती है और झट से उसका लंड मुंह में लेकर चूसने लगती है..
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गौतम रूपा के पर्स में से सिगरेट लाइटर निकलकर सिगरेट सुलगाते हुए एक दो कश लेकर अपना लंड चुस्ती रूपा को सिगरेट देते हुए कश लेने के लिए कहता है तो रूपा मना कर देती है और लंड चूसने में फिर से मग्न हो जाती है..
गौतम - क्या हुआ मम्मी?
रूपा - मैने सिगरेट छोड़ दी..
गौतम - क्यों?
रूपा - डॉक्टर ने कहा है..
गौतम - डॉक्टर ने क्यों मना किया है?
रूपा - बच्चे को परेशानी होती है..
गौतम - मुझे क्या परेशानी होगी?
रूपा मुंह से लंड निकालकर गौतम को देखते हुए - तुझे नहीं मेरे नन्हे शैतान.. तेरे होने वाले बच्चे को जो मेरे अंदर पल रहा है..
गौतम स्तब्ध भाव से - क्या..
रूपा - क्या नहीं हाँ.. मेरे होने वाले बच्चे के पापा जी..
गौतम - मैं पापा बनने वाला हूँ? बहनचोद.. तुमने बच्चे रोकने वाली पिल्स नहीं ली थी..
रूपा लंड वापस चूसते हुए - तू फ़िक्र मत कर.. मैं संभाल लुंगी.. और मैं ही नहीं माधुरी का भी यही हाल है वो डॉक्टर के पास गई है.. मुझे उस दिन जब हम बाबाजी के पास से आ रहे थे तब पता चला मै पेट से हूँ और माधुरी को आज सुबह..
गौतम मुस्कुराते हुए - यार.. सब माँ बनती है तुम दोनों सीधा दादी बनगी..
रूपा टांग खोलते हुए - अच्छा अब धीरे धीरे चोदना.. पहले वाला शैतान नहीं अब प्यारा वाला शैतान बनकर रहना पड़ेगा तुझे..
गौतम चुत में लंड घुसाकार धीरे धीरे पेलता हुआ - पर तुम जानती हो मम्मी..
रूपा चुदवाते हुए - मैंने कहा ना मैं सभाल लुंगी.. तुझे फ़िक्र करने की जरुरत नहीं है.. बस मिलने जरुर आना.. हम दोनों ने जगमोहन से भी रिश्ता तोड़ दिया है..
गौतम रूपा ब्लाउज खोलकर उसके कबूतर आजाद कर देता है और अपनी टीशर्ट उतारकर रूपा के छाती से अपना सीना सटा देता है और होंठों के करीब होंठ लाकर रूपा की साँसों को महसूस करते हुए उसी तरह चोदते हुए कहता है - मुझे जब भी मौका मिलेग मैं मिलने आऊंगा मम्मी.. छोटी माँ से भी कहना.. आप दोनों अपना और बच्चे का अब और ज्यादा ख्याल रखना..
रूपा चुत में झटके खाकर मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों को चुम लेती है और कहती है - हाँ शैतान...
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रूपा और गौतम के मिलन में सिर्फ उनके बदन ही नहीं मिल रहे थे बल्कि उनकी आत्मा भी उनके शरीर से निकलकर एक दूसरे को का लेना चाहती थी और इसी उद्देश्य को अपने मन में लिए दोनों एक दूसरे को भोग रहे थे..
प्रेम की जितनी कला रूपा को आती थी वह अपनी कलाओं में गौतम को अपने शरीर का सुख दे रही थी..
गौतम घास में पीठ के बल लेटा हुआ था और रूपा उसके लंड पर बैठकर अपने कबूतरों को मसलती हुई और अपने चेहरे पर कामुकता के भाव लाती हुई इठलात हुई मुस्कुराती हुई गौतम को देखकर आंख मारती हुई और उसे छेढ़ती हुई गौतम के लंड को चुत में लेकर गांड हिलाती हुई सम्भोग और प्रेम के नए आयाम से परिचित करवा रही थी रूपा आज कई बार झड़ी थी उसी तरह जैसे पहली बार गौतम की चुदाई से झडी थी.. और आखिर में गौतम ने भी रूपा की चुत में झटके मारते हुए अपना पानी निकाल दिया..

गौतम - मम्मी...
रूपा - हाँ?
गौतम गांड पकड़ते हुए - प्लीज...
रूपा - अच्छा लेले.. आज गांड भी...
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गौतम - मम्मी यार गांड उची करो ना अपनी.. लंड आराम से घुस जाएगा गांड में..
रूपा - धीरे... आहिस्ता घुसाना..
गौतम - फ़िक्र मत करो ज्यादा तकलीफ नहीं दूंगा..
गौतम गांड में लंड का टोपा फंसा कर गांड मारते हुए - लगता है आपसे सच्चा प्यार हो गया है..
रूपा - आहहह ग़ुगु धीरे ना.. बच्चा..
गौतम धीरे धीरे गांड मारते हुए - पता है उस जब उस रात तुम्हे और माँ को साथ में देखा था तब मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था तुम पर मगर फिर माँ के चेहरे पर ख़ुशी देखी तो तुम पर प्यार आने लगा था ..
रूपा - तुम्हारे प्यार ने ही तो मुझे इस तरह झुका रखा है ग़ुगु.. अब तेरे अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए..
गौतम - बहुत टाइट है मम्मी.. बहुत मज़ा आ रहा है अपनी गांड मारने में.. मम्मी आपकी चुत जन्नत तो गांड स्वर्ग का द्वार है सच में.. मेरा निकलने वाला है..
रूपा - ग़ुगु मुंह में देदे..
गौतम - लो मम्मी... आहहह...

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रूपा लंड मुंह में लेकर चूसने लगती है.. और कुछ ही पलो में गौतम रूपा के मुंह में झड़ जाता है..

दोनों सम्भोग समाप्त हो चूका था और अब गौतम एक पेड़ के सहारे बैठा हुआ था वही रूपा भी गौतम की गोद में उसके सीने का सहारा लिए बैठी थी..
गौतम - पता है मम्मी जब पहली बार मैं तुमसे मिला था और तुमने वापस आने के लिए अपनी सोने की चैन मुझे दे दी थी तब मुझे लगा था कि तुम बेवकूफ हो.. मगर बाद में समझ आया कि तुम मेरे मोह में पड़ गई थी..
रूपा - मैं तुझे देखते ही समझ गई थी नन्हें शैतान.. कि तू जैसा भी हो दिल का बुरा नहीं है.. ऊपर से तेरी प्यारी सूरत मेरे मन में तेरे लिए ममता भी जगा रही थी..
गौतम अपने वॉलेट से एक मगलसूत्र निकालकर - ये वही चैन है मम्मी.. जो तुमने मुझे कोठे के उस कमरे में दी थी मैंने इसका मगलसूत्र बनवाया है.. अब मैं इसे अपने हाथों से तुम्हारे गले में पहनाना चाहता हूँ..
रूपा आँखों में आंसू लेकर - गौतम...

गौतम मगलसूत्र पहनाकर पास पड़ी कटीली झाडी के एक कांटे से अपना अंगूंठा लगाकर खून की दो बून्द निकाल लेता है और उस अंगूठे के खून से रूपा की मांग भरके कहता है - लो मम्मी अब से तुम पूरी तरह मेरी हुई..

रूपा की आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़ते है.. और वो गौतम को गले लगा कर अपने पुरे जीवन के सारे दुख दर्द पीड़ा को भुलाकर नए सपने आँखों में सजा लेती है.. और गौतम के गले लग कर ख़ुशी से रोने लगती है..
 
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