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Hindi XXX kahani चीरहरण

Update 11

सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है

लोक-लाज और शरम से हारे
साकी ना पिने ना जीने दे है

मन मतवाला पहन दुशाला
सबको नचाये ना जीने दे है

मेरी बतिया पढ़ पढ़ रोये
प्रीत ना मारे ना जीने दे है

सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है..


कौन? कौन ये गीत गाता हुआ इधर चला आ रहा है इतनी रात में?

लगता है कोई राहगीर है. बैलगाडी की आवाज भी आ रही है..

मगर इतनी रात में? और इतने घने जंगल के रास्ते से? कोई साधारण आदमी तो नहीं जान पड़ता.

बात तो तुम सही कह रहे हो कर्मसिंह. जिस जंगल से जागीर का हर आदमी दिन के उजाले में गुजरने से डरता है वही ये आदमी रात के इस पहर इतने अँधेरे में अकेला चला आ रहा है..

मुझे तो जरूर कोई बहरूपिया लगता है वीरसिंह. देखो केसा भेस बनाया है. बड़ी बड़ी दाढ़ी कंधे तक उलझें हुए बाल और फटा पुराना शाल बदन पर लपेट रखा है..

देखने से लड़का सा लगता है. मगर इस तरह इतनी रात में यहां इसका क्या काम? रोककर पूछना तो अनिवार्य है..

हाँ मेरा भी यही मत है. इसे रोककर इसके आने का कारण तो पूछना जरुरी है.


सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है

गाँव की नादिया सावन रतिया
सखियाँ छेड़े ना जीने दे है

रंग लगाकर अंग से खेले
प्रियतम रिझाये ना जीने दे है

लम्बा रास्ता तन्हा राही
घर की यादे ना जीने दे

सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है


अरे.. रोको रोको.. कहा चले आ रहे हो आधी रात को इतनी सुरुतान में गीत गाते हुए? और ये क्या भेष बनाया हुआ है? कहाँ के हो? कौन हो? नाम क्या है? यहां आने का कारण? कहीं किसी उद्देश्य से तो नहीं आये.. इस जागीर में? पता है ना यहां का जागीरदार कौन है? वीरेंद्र सिंह.. उनके नाम से आस पास की जागीरो के सरदार और ठिकानेदार खौफ खाते है..

आदमी बैठगाड़ी रोककर जागीर की सीमा पर तैनात सिपाहियो को देखकर मुस्कुरा पड़ता है और उनकी बात सुनता हुआ अपने पास रखे घड़े में बर्तन डालकर उससे पानी पिने लगता है.. जब सिपाहियों के सवाल ख़त्म हो जाते है तब आदमी हलकी सी मुस्कान अपने होंठों पर सजा कर कहता है..

आदमी - मैं तो राही हूँ.. अफगान जा रहा था. अगर इज़ाज़त दो तो चला जाऊ? सुबह तक आपके वीरेंद्र सिंह की जागीर की सीमा से भी बाहर निकल जाऊंगा..

सैनिक - वो तो ठीक है पर उम्र से तो बहुत कम लगते हो फिर इस तरह जोगियो का भेष क्यों बनाया हुआ है? और नाम क्या है तुम्हारा?

आदमी - नाम का क्या है पहरेदार ज़ी, जो जिसके ज़ी में आता है वही कहकर पुकार लेता है. आपके जो ज़ी में आये वो आप कहकर पुकार लो.

सैनिक - हालत से तो भिखारी लगते हो.. भिखारी कहा कर बुलाऊ? तुम्हरे पास ये बैलगाड़ी कहा से आई? किसकी चुरा के लाये हो?

आदमी मुस्कुराते हुए - भिखारी ही कह लो.. वैसे भी सब भिखारी तो है इस जमीन पर.. कोई इंसान से मांगता है तो भगवान् से. बैलगाड़ी तो मेरी ही है चाहो तो इन दोनों बैलो से पूछ लो..

सैनिक - देखो ये पहेलियाँ ना बुझाओ.. साफ साफ बताओ कौन हो और कहा से आये हो..

आदमी - मैंने बता तो दिया, राहगीरी हूँ हिंदुस्तान के अलग अलग हिस्से में घूमता हूँ थोड़ा बहुत वैद्य का हुनर भी जानता हूँ अफगान जा रहा हूँ..

सैनिक - हमें यक़ीन नहीं है लौट जाओ वापस..

आदमी - मैं तो आगे के लिए आया हूँ.. पीछे मुड़कर जाना संभव नहीं..

सैनिक - अगर कहा हुआ नहीं मानोगे तो पकड़ के बंधी बना लिए जाओगे.. और जागीरदार से सजा मिलेगी..

आदमी - तो फिर क़ैद कर लो मुझे. मैं तो वापस जाने से रहा..

सैनिक - जैसा तुम चाहो.. चलो यहां से..

दोनों सैनिक उस आदमी को कैद में डाल देते हैं और उसकी बैलगाड़ी को जपत करके जागीर की सीमा में बाहर बने एक छोटे से सामान ग्रह के बाहर खड़ा कर देते हैं.. आदमी कैद कर लिया जाने पर भी उसी मुस्कान के साथ हंसता रहता है और इस शालीनता और सद्भाव के साथ दोनों सैनिकों और बाकी लोगों के साथ बात करता हुआ बंदी खाने में बैठ जाता है और वापस से वही गीत गाता है जो वह खाता हुआ जंगल के रास्ते से चला आ रहा था और जिसे सुनकर दोनों पहरेदारों ने उसे संदिग्ध मानकर बंदी गृह में डाल दिया था.

आदमी अपनी मस्ती में मस्त बंदीगृह में अकेला बैठा हुआ गीत गाता जा रहा था और अपने पास मौजूद एक पुस्तक को पढ़ता हुआ अपने गले में लटक रहे 1 ताबीज़ को छूता हुआ उसे देखे जा रहा था.. आदमी को देखने से ऐसा लगता था जैसे वह किसी की याद में खोया हुआ मुस्कुराते हुए गीत गा रहा है और अपने प्रीतम को याद कर रहा है और उसकी विरह में सुलगता हुआ अपने मन को उसकी वेदना के सागर में डूबता चला जा रहा है और उससे पार पाने का उसे कोई मन नहीं है.. जिस तरह कोई बूढ़ा अपनी जवानी के दिन याद करके रोमांचित हो उठता है और अपने बच्चों को या अपने पोते पोती हो या नाते नातीयों को अपनी जवानी के किस्से सुनाते हैं उस तरह वह आदमी कुछ याद करता हुआ मुस्कुरा रहा था और बंदी गृह में भी ऐसा लग रहा था जैसे भी आजाद है और उसे कोई कैद नहीं कर सकता..


सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है

बैरी सुख में सोये रे पंछी
सईया जागे ना जीने दे है

उठ उठ रोये रतिया जागे
विरह की राते ना जीने दे है

जग झूठा है यार ही है रब
रब मुंह खोले ना जीने दे है

सुन रे पवन संग ले चल अपने
ज़ी के सपने ना जीने दे है


अपनी मस्ती में मस्त आदमी गीत गाता हुआ गुनगुनाता हुआ और मुस्कुराता हुआ रात भर यूं ही बिता कर सुबह नींद के हवाले हो गया और उसकी नींद किसी पहरेदार के जागने पर ही खुली..


अरे उठो उठो.. कब तलक़ यूँही सोते रहोगे? रात दिन सुबह शाम की कुछ खैर खबर भी रखते हो या नहीं? दिन के इस पहर भी आँखों में रातों सा नींद का जमघट लिए पड़े हो.. जरा बदन को जोर दो उठो.. जागीरदार की बैठक में लेजाना है.. अब वही तय करेंगे तुम जागीर से आगे जाओगे या वापस..

पहरेदार की बात पर आदमी कोई जवाब नहीं देता और चुपचाप खड़ा होकर उसके साथ चलने को सज्य हो जाता है और मुस्कुराता हूआ वापस गीत गाते हुए पहले पहरेदार के साथ चल पड़ता है.. पहरेदार उसे छोटी मोटी गलियों से गुजार कर लाता हुआ महल के मुख्य भाग से दाई ओर एक कमरे की तरफ ले आता है जहां बड़े से हाल में वीरेंद्र सिंह अपनी में बैठक में बैठा हुआ होता है और जागीर में रहने वाले लोगों के साथ किसानों की समस्याओं को सुनकर उसका हल करता है..

आदमी पहरेदार के बताए अनुसार बैठक के मुहाने पर खड़ा हो जाता है और अपनी बारी का इंतजार करने लगता है आदमी वीरेंद्र सिंह को देख रहा था और मुस्कुराते हुए उसके न्याय करने के तरीके और उसके स्वभाव का जाँच रहा था मानो उसकी क़ाबिलियत का परीक्षण कर रहा हो..

समय के साथ भीड़ कम होती गई औऱ कुछ देर बाद वीरेंद्र सिंह के सामने उस आदमी को पेश कर दिया गया जिसे पहरदार ने जागीर की सीमा से कल रात पकड़ा था..


वीरेंद्र - कहो क्या बात है?

पहरेदार - सरकार इस आदमी को कल रात जागीर की सीमा पर तैनात सिपाही कर्मसिंह औऱ वीरसिंह ने पकड़ा है.. कह रहे थे ये आदमी आधी रात को जंगल के रास्ते से अकेला कोई गीत गुनगुनाता हुआ चला आ रहा था.. पूछने पर उलटे सीधे जवाब देता था.. अपना नाम भी उन पहरेदारो को नहीं बताया..

वीरेंद्र आदमी से - क्या नाम है तुम्हारा? कहा से आये हो?

आदमी - मेरा असल नाम तो अब मुझे भी याद नहीं आता हुकुम.. पर सब बैरागी कहकर पुकारते है.. छोटा सा वैद्य हूँ छोटे छोटे मर्ज़ का इलाज़ करता हूँ.. राही भी हूँ इस हुनर को यहां वहा घूमकर सीखता सीखता हूँ.. पहरेदारों से रात में मैंने कहा था मैं अफगान जा रहा हूँ.. अगर वो इज़ाज़त दे देते तो सुबह पहली किरण से पहले आपकी जागीर से बाहर भी चला गया होगा..

बीरेंद्र - वैद्य हो?
बैरागी - हुकुम..

वीरेंद्र - अफगान जाने का प्रयोजन?
बैरागी - सुना है वहा एक ख़ास किस्म का पौधा है जो स्त्री रोग में देह को आराम देता है.. बस उसी की तलाश में जा रहा था..

वीरेंद्र - स्त्री रोग में पौधे से देह को आराम? बड़े अचरज की बात है.. वैद्य ज़ी आपने कभी ऐसे पौधे के बारे में सुना है?

वैद्य - नहीं सरकार.. मुझे तो ये लड़का कोई बहरूपिया लगता है. इसकी बातें सुनकर हँसने को ज़ी चाहता है..

वीरेंद्र - जो भी हो वैद्य ज़ी.. एक बार प्रत्यक्ष में इसके हुनर कोई नमूना तो देखना चाहिए..

वैद्य - ज़ी सरकार आप सही औऱ तर्कसंगत बात करते है..

वीरेंद्र - बैरागी.. क्या तुम किसी बीमार को स्वस्थ कर सकते हो?

बैरागी - बीमार तो यहां बहुत से लोग है हुकुम.. आप बताइये किसे स्वस्थ करना है.

वैद्य - देखा सरकार.. इसे तो यहां सभी बीमार नज़र आते है.. मुझे तो लगता है इसे जागीर से बाहर कर देना चाहिए..

वीरेंद्र - युम्हे यहां कौन बीमार लगता है? औऱ बिमारी क्या है यहां लोगों को?

बैरागी - सबसे पहले तो वैद्य ज़ी की ही बात कर ली जाए हुकुम.. इनके पेट में दाई तरफ थोड़ा नीचे कई बरसो से दर्द है जिसकी वजह से ये बार बार अपना हाथ अपने पेट पर रखकर दबा रहे है औऱ एक पैर को हल्का रखकर चलते है लेकिन सालों से मौज़ूद इस दर्द ने वैद्य ज़ी को नहीं छोड़ा..

उसके बाद जो पहरेदार मुझे यहां लाया है उसे आँख से धुंधला दीखता है.. आपके दाई औऱ नीचे बैठे हुए आदमी के बदन में कम्पन की बिमारी है जो ज्यादा अमल से पैदा हुई है.. औऱ हुकुम आप.. एक बिमारी आपको भी है.. बिमारी से बड़ा भय है..

बैरागी की बात पर सब हैरान थे औऱ वैद्य की हालात पतली थी..

वीरेंद्र - मुझे क्या भय है?
बैरागी - मृत्यु का भय हुकुम..

बैरागी की बात सुनकर वीरेंद्र उसे हैरात के भाव से देखने लगा औऱ सोचने लगा की कैसे बैरागी को इतना सब मालूम हो गया वो भी एक नज़र देखने पर..

वीरेंद्र - अगर तुम्हे जो पौधा चाहिए मैं यही तुम्हे दे दू तो क्या तुमको मेरे इस भय का समाधान कर पाओगे?

बैरागी - मृत्यु तो अंतिम सत्य है हुकुम औऱ सत्य से केसा भय? आपका भय तो केवल आपके मन की उपज मात्र है इसे तो आप स्वम भी दूर कर सकते है. औऱ जो पौधा मुझे चाहिए आप यही मुझे दे दे तो मैं वापस अपनी राह लौट जाऊँगा..

वीरेंद्र - मेरे बस की बात होती तो ये भय मैंने कब का अपने मन से निकाल दिया होता बैरागी.. मैं तुझे अपनी जागीर मैं एक ऊंचा दर्जा देता हूँ.. रहने को इसी महल में अलग स्थान जहा भोग विलास की जो चीज तुझे पसंद हो वो.. अपने इन साथियो के बराबर का कद होगा तेरा. बस मेरा ये रोग ठीक कर दे.

बैरागी - इन सब का मैं क्या करूंगा हुकुम? अकेला आदमी हूँ एक घरवाली थी जिसे 3 महीने पहले बनाने वाले ने अपने पास बुला लिया. कोई संतान नहीं ना ही कोई परिजन.. मैं तो अब बंजारा हूँ हुकुम ठहरना मेरे बस कहाँ?

वीरेंद्र - तो फिर मेरे रोग के उपचार तक यहां अपना बसेरा कर लो बैरागी.. उसके बाद तुम जहा जाना चाहो जा सकते हो.. अब मना मत करना बैरागी क्युकी तुम्हारी ना तुम्हारी जीवन की रेखा मिटा सकती है..

बैरागी - मगर मैं कह चूका हूँ हुकुम आपका रोग आपके मन की उपज है जिसका उपचार करना आपके ही हाथ में है. मैं इसमें भला आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ..

वीरेंद्र - जो आदमी को देखकर उसका रोग बता दे वो रोग का उपचार भी अच्छे से जानता होगा.. औऱ ये बात मैं अच्छे से जानता हूँ बैरागी.. अभी मैं तुमसे ज्यादा बात नहीं करूंगा.. तुम जाओ.. इस जागीर के बंदीग्रह का अनुभव औऱ पीड़ा ले चुके हो अब यहां के मेहमान बनकर आराम उठाओ..

वीरेंद्र पहरेदारो से - आज से बैरागी इस जागीर के मेहमान है इनकी सेवा में कोई कमी ना रहे.. सभा बर्खास्त...


इसीके साथ बड़े बाबाजी जो अपनी कुटिया में सो रहे थे उनकी नींद खुल जाती है औऱ वो सपने में, जो आज से सैकड़ो सालों पहले सच में हुआ था उसे देखकर घबराहट के साथ उठ बैठते है. बड़ेबाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह को अपने सामने एक आदमी बैठा हुआ दिखाई देता है औऱ बड़े बाबाजी एक लम्बी सांस लेकर उस आदमी से कहते है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - कभी तो चैन से सोने दे बैरागी.. सैकड़ो सालों से तू मेरी नींद औऱ सुख छीन के बैठा है.. ना मरने देता है ना जीने.

बैरागी - आपने तो मेरी जिंदगी मुझसे छीन ली हुकुम.. कम से कम आपकी नींद औऱ सुखचैन पर तो मेरा अधिकार बनता है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - तूने भी तो वो किया था जिसे करने की इज़ाज़त मेरे अतिरिक्त किसी को नहीं थी. औऱ तू अच्छे से जानता है उस गलती की सजा केवल मौत थी फिर क्यों मुझे इतनी सजा मिल रही है?

बैरागी - ये सजा मैंने नहीं किसी औऱ ने तय की है आपके लिए हुकुम. मैं तो केवल जरिया मात्र हूँ.. मैंने कहा था मुझे वो ताबीज मेरे गले से उतार लेने दो मगर आपने मेरी एक बात ना सुनी औऱ अपनी तलवार से मेरा सर अलग कर दिया.. उस दिन से आज तक जो जो दुख दर्द औऱ पीड़ाये आपने झेली है ये उसी का परिणाम है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - मैं क्रोध की अग्नि में सुलग रहा था बैरागी.. मुझे कहा सही गलत औऱ अच्छे बुरे का ख्याल था? मगर तूने आज तक नहीं बताया उस ताबीज में ऐसा था क्या? जो तू उस दिन से आज तक इस तरह बेताल बनकर मेरे कंधे पर बैठा है.. तूने तो कहा था तू केवल वैद्य औऱ उपचार जानता है..

बैरागी - उस ताबीज मे ऐसा क्या था वो तो मुझे भी नहीं पता हुकुम. मैं तो बस इतना जानता हूँ कि आपने जो अमर होने कि लालच में प्रकृति के नियम को बदला है उसकी सजा आपको इस तरह मिल रही है.

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - सैकड़ो साल.. बड़े से बड़े तपस्वी औऱ साधुओ के पास रहकर आ चूका हूँ बैरागी.. बहुत कुछ सिखने को मिला इस प्रकृति के कुछ रहस्य भी समझ आये मगर वो नहीं पता चला जो पता करना था.. मगर अब लगता है बैरागी तेरा औऱ मेरा सफर जरूर ख़त्म हो जाएगा. अगर वो लड़का मेरे कार्य में सफल रहा तो मेरे साथ साथ तुझे भी मुक्ति मिल जायेगी..

बैरागी - समय के गर्भ में क्या छीपा है ये तो वही जानता है हुकुम..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - थोड़ी देर तो सोने दे बैरागी इतना सताना ठीक नहीं. देख मेरी आँखे किस तरह पथरा गई है जब इनमे नींद उतरती है तू आकर इनसे नींद छीन लेटा है.. उस दिन से आज तक कोई भी सुख तूने मुझे महसूस नहीं करने दिया.. इतना सब ज्ञान औऱ कलाये जानने के भी मैं तेरे औऱ मेरे लिए कुछ नहीं कर सकता..

बैरागी - मैं भी कब से आपको सुखी देखना चाहता हूँ हुकुम.. मगर मै मजबूर हूँ. कोई है जो मुझसे ये सब करवा रहा है.. जिसके बारे में मुझे भी नहीं पता..

कुटिया के दरवाजे पर खट खट की आवाज आती है तो बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह सामने बैठे बैरागी के साये से बात करना बंद करके थोड़ा तेज़ कहते है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - कौन?
किशोर - बड़े बाबाजी मैं किशोर..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - अंदर आजा..

किशोर कुटिया के अंदर आता है जहा वो बड़े बाबाजी को दण्डवत प्रणाम करके कुटिया में अकेले बैठे बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह से कहता है..
किशोर - बड़े बाबाजी भोर की पहली किरण निकल चुकी है आपके स्नान की सारी व्यवस्थाये हो चुकी है..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र - ठीक है चलो..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह किशोर के अनुरोध पर कुटिया से बाहर आ जाता है औऱ नहाने चला जाता है कुछ देर बाद सूरज जब चढ़ता है तब पहाड़ी पर लोगों के आने का ताँता लगने लगता है.. ये भीड़ बाबाजी से अपने दुखो का समाधान पूछने आये लोगों का था जो एक के बाद एक कतार में बैठ रहे थे..
 
Update 12


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सुबह की पहली निकलते ही शबाना अपने बिस्तर से उठकर घर के कामों में लग गई और रोजमर्रा के काम निपटाते हुए घर में यहां से वहां घूमने लगी. शबनम की बेटी रेशमा अपने ससुराल जा चुकी थी और उसका बेटा आदिल जो अब भी घोड़े बेचकर चैन की नींद सो रहा था शोहर फारूक अपने सुबह के नियत समय पर अपने दुकान जा चुका था. थोड़ी देर बाद आदिल भी उठकर घर से बाहर निकल गया और हर दिन की तरह आवारा गर्दी करने और मोहल्ले में यहां से वहां घूमने लगा. शबाना घर पर अकेली पड़ चुकी थी जैसे वह हरदम रहती थी उसके आसपास ना तो कोई बोलने वाला था ना ही उससे बात करने वाला.

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अपने सुबह के घर के काम निपटाकर शबाना जब बिस्तर पर चैन की सांस लेते हुए दो घड़ी बैठी तब उसका फोन बजने लगा. शबाना ने फोन की तरफ देखा तो मुस्कुराते हुए उसे अपने हाथ में लेकर कुछ सोचने लगी. पिछले कई दिनों से जब से गौतम ने उस दिन शबाना से बात की थी और पूरी बेशर्मी के साथ उसे छेड़ा था तब के बाद अक्सर गौतम शबाना को फोन करके उसे मीठी-मीठी बात करता था और बातों ही बातों में अपने मन की बात कह कर शबाना को शर्मिंदा कर देता था शबाना को भी अब गौतम के फोन का इंतजार रहता और वह उससे बात करने के लिए लालायित रहती. इस बार भी कुछ वैसा ही था शबाना अपने हाथ में फोन लिया गौतम का फोन आता देखकर मुस्कुराते हुए फोन उठाना चाहती थी मगर एक दायरा और एक पर्दा जो उसके और गौतम के बीच अभी था वह शबाना को हर बार एक मुकाम पर लाकर उसे आगे बढ़ने से रोक देता..

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शबाना फ़ोन उठाकर - हेलो..
गौतम - हेलो शबाना बेगम.. कैसी हो?
शबाना - बेशर्म तेरे दोस्त की अम्मी हूँ, थोड़ा तो लिहाज़ कर अपनी और मेरी उम्र का. वरना बहुत मार खायेगा मुझसे.
गौतम - मैं तो तुम्हारे हाथों से मरने को भी तैयार हूँ शबाना.. और लिहाज़ किस बात का? प्यार की कोई उम्र थोड़ी होती है..
शबाना - बेटा तू सामने आ गया ना एक बार तो ऐसा सबक सिखाउंगी की प्यार का सारा भूत उतर जाएगा..
गौतम - अच्छा ज़ी.. ऐसा क्या करोगी बताओ जरा..
शबाना - तू सामने तो आ कमीने.. उस दिन के बाद कैसे बिग्गी बिल्ली की तरह गायब रहता है. बस फ़ोन पर ही तेरी आवाज निकलती है..
गौतम - मिलना तो मैं भी तुमसे चाहता हूँ मेरी शब्बो.. पर क्या करू बहुत काम है और कॉलेज का आखिरी साल है इम्तिहान आने वाले है तो पढ़ना भी जरुरी है.. वैसे अगर तुमको चाहिए तो मुझसे मिलने आ सकती हो.. मगर जरा फुसरत निकाल कर आना.. अब तुमसे लम्बी मुलाक़ाते करने का मन है..
शबाना - बेटा अपनी जवानी को काबू में रख वरना आदिल और आदिल के अब्बू को पता चल गया ना तू मुझसे कैसी कैसी बात करता है और क्या चाहता है तो तेरा क्या हाल होगा तू बखूबी जानता है..
गौतम - अब प्यार किया तो डरना क्या मेरी शब्बो.. तुम्हारे लिए तो ख़ुशी ख़ुशी कुर्बान हो सकता हूँ.. और मैं इतना तो जानता हूँ अगर तुम्हे किसीको बताना होता तो तुम अभी तक उनको सब बता चुकी होती..
शबाना मुस्कुराने लगती है और कहती है - बेटा बच्चा समझके छोड़ देती हूँ वरना तुझे तो कबका एक थप्पड़ में सीधा कर दू मैं..
गौतम - एक बार इस बच्चे से प्यार करके देखो शब्बो बेगम.. पहली चुदाई याद आ जायेगी..
शबाना - जलील इंसान.. कितना बेशर्म है तू? बहुत आग लगी है तुझमे? पता दे मैं अभी आकर तेरी लुल्ली का इलाज़ करती हूँ..
गौतम - शब्बो लुल्ली नहीं लोडा है मेरा.. देखते ही तेरी चुत से पानी बह जाएगा.. वीडियो कॉल कर तुझे दिखाता हूँ..

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शबाना अपने बूब्स सहलाते हुए - क्यों मेरे पीछे पड़ा हुआ है बेटा.. तेरी अम्मी जैसी हूँ मैं और तेरे दोस्त की अम्मी..
गौतम - क्या करू मेरी जान.. तेरे हुस्न के आगे ये सब बातें मायने नहीं रखती.. दिल कहता है अभी तुझे अपनी बाहों में भरके प्यार करू.. तेरे होंठों से शराब पी लू.. तेरे चुचो से दूध पीलू.. तेरे बदन से खेलु.. तेरी चुत को चाट कर साफ करु फिर अपने लंड से तेरी चुत फाड़कर तेरी जवानी का स्वाद चखु..
शबाना अपनी चुत पर उंगलिया रगढ़ती हुई किसीके आने की आहट सुनती है..

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शबाना - लगता है कोई आ रहा है. मैं बाद में बात करती हूँ.
गौतम - शबाना.. शबाना... सुन तुझे व्हाट्सप्प पर मैंने कुछ भेजा है चेक करना..
शबाना फ़ोन काट देती है और बाहर जाकर दरवाजा खोलती है सामने आदिल था.. जो बहुत बुरी हालात में था उसे देखकर ही लगता था की वो मार पिट करके आया है शबाना कि कामुकता ने गुस्से का रूप ले लिया था...

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शबाना - किससे लड़ के आ रहा है..
आदिल - कुछ नहीं छोटी सी बात हो गई थी..
शबाना - क्या छोटी सी बात? और ये चोट?
आदिल - अरे वो कुछ लड़के पप्पू हलवाई के आगे फालतू गाली बक रहे थे सालों का ऐसा इलाज़ किया है आगे कभी बोलेंगे नहीं..
शबाना - दिनभर लड़ाई झगडे औऱ कुत्ते कि तरह घूमने के सिवा कुछ और भी काम है तुझे? अपने अब्बू के साथ दूकान पर ही बैठ जाया कर..
आदिल -अम्मी पकाओ मत.. पहले ही दिमाग ख़राब हो रहा है.. औऱ मत करो..
शबाना - अरे सुन तो दवाई लगा ले चोट पर.. आदिल..

शबाना ने इतना ही कहा था की घर के दरवाजे पर आदिल का एक दोस्त नौशाद आ गया और जो देखने से लग रहा था की बहुत तेज़ी से भागता हुआ आया है उसकी साँसे ऊपर नीचे चढ़ी हुई थी वो हाफ्ते हुए बोला..
नौशाद - आदिल..
शबाना - क्या हुआ?
आदिल - क्या हो गया ऐसे क्यों हांफ रहा है?
नौशाद - अबे वो पुलिस... पुलिस आ रही है.. माज़ीद को भी उठा लिया.. अभी जिसको मारा है वो किसी बिज़निसमेन का बेटा है.. उसके बाप ने पुलिस में शिकायत की है पुलिस सबको उठा रही है..
शबाना - कितनी बार मना किया पर मानने का नाम नहीं अब पता नहीं क्या होगा.. तेरे अब्बू को फ़ोन कर..

इतनी बात हो ही रही थी की पुलिस आदिल के घर आ धमकी और आदिल और नौशाद को पकड़ के अपनी जीब में बैठा लिया.. शबाना ने बहुत कोशिश की मगर कुछ ना कर सकी.. शबाना ने अपने शोहर फारूक को फ़ोन किया और सारी बात बताई फारूक दूकान पर रामु को छोड़कर घर आ गया और शबाना को लेकर पुलिस थाने चला गया..

फारूक - साब बच्चा है गलती हो गयी माफ़ कर दो..
थानेदार - फारूक मिया एक गलती माफ़ करेंगे तो अगली गलती करेगा.. सजा तो देनी पड़ेगी.. और किसी आम आदमी के बच्चे को थोड़ी मारा है इन लोगों ने.. सेठ धनीराम के लड़के को धोया है वो भी cctv के सामने.. ऊपर से प्रेशर है.. रेपोर्ट भी लिख चुके है.. अब तो आई.पी.सी. की कई धाराओं के अंदर आपके लड़के का नाम आ चूका है.. सबूत भी पुरे पुरे है.. 2-3 साल के लिए पक्का अंदर आएगा आपका लड़का..
फारूक - थानेदार साब.. एकलौता लड़का है.. समाज में इज़्ज़त है सब आपके ऊपर है.. कुछ मदद करिये.. आप जो बोले करने को त्यार हूँ..
थानेदार - अरे फारूक मिया.. मैं अगर मदद कर सकता तो मना थोड़ी करता है.. आखिरी मैं भी तो इंसान हूँ.. मगर बात बड़ी है.. आप समझो.. मेरे बस के बाहर है..

फारुख थानेदार से बात करके आदिल को छुड़ाने में नाकाम रहता है और आखिरकार थक हार कर शबाना को लेकर वापस घर आ जाता है.. शबाना और फारूक दोनों ही घर में उदास बैठकर यह सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए और कैसे आदिल को जेल की सलाखों से बाहर निकल जाए. शबाना यह सब सो रही थी कि उसके फोन पर फोन आता है और फोन उठा कर चेक करती है तो उसे पर गौतम का फोन होता है. शबाना फोन काट देती है मगर गौतम वापस फोन करता है जिस पर शबाना छत पर आ जाती है औऱ तंग आकर गौतम से रुखे शब्दों में रहती है.

शबाना - क्या है? क्यों बार बार फ़ोन कर रहा है तू?
गौतम - उफ्फ्फ.. इतना गुस्सा? क्या हुआ मेरी शब्बो का मूंड खराब है?
शबाना - गौतम फ़ोन काट और वापस फ़ोन मत करना.. समझा? वरना अब तक तेरी हरकते मैं बच्चा समझके बर्दाश्त कर रही थी अब नहीं करुँगी..
गौतम - अच्छा बाबा ठीक है नहीं करूँगा पर तुम बताओ तो हुआ क्या है?
शबाना थोड़ा ठंडा पड़के सारी बात गौतम से कहा देती है और गौतम हसता हुआ कहता है..
गौतम - बस इतनी सी बात? इतनी सी बात के लिए मेरी शब्बो परेशान है? तुम कहो तो अभी आदिल को जेल से निकलवा कर घर बुलवा देता हूँ..
शबाना - मज़ाक़ मत कर गौतम..
गौतम - अरे बाबा मैं क्यों मज़ाक़ करूंगा? मेरी शब्बो की तकलीफ अगर मैं नहीं दूर करूंगा तो कौन करेगा?
शबाना - तू सच में आदिल को जेल से निकलवा सकता है?
गौतम - हाँ मगर मुझे भी बदले में तुमसे कुछ चाहिए..
शबाना - मैं वैसा कुछ भी नहीं करने वाली जो तू सोच रहा है.. मैं तुझे भी आदिल के जैसे अपना बच्चा मानती हूँ थोड़ी बहुत मज़ाक़ मस्ती को मेरी हाँ मत समझना..
गौतम - पर मैं तो तुम्हे अम्मी नहीं मानता.. सोच लो.. आदिल की ज़िन्दगी का सवाल है.. मुझे कुछ तो देना पड़ेगा..
शबाना - अच्छा क्या चाहिए?
गौतम - हम्म्म... अब चुत नहीं तो मुंह सही.. Blowjob दे देना..
शबाना - क्या कहा? मतलब?
गौतम हसता हुआ - blowjob का मतलब नहीं पता? कितनी भोली हो तुम.. अरे मतलब नुनु को मुंह में लेके ठंडा कर देना बस.. इतना सा..
शबाना - कमीने तेरा मुंह तोड़ दूंगी मैं.. बेशर्म कहीं का.. अपने दोस्त की अम्मी के साथ ये सब करेगा..
गौतम - फिर तुम्हारी मर्ज़ी.. अब फ़ोन नहीं करूँगा, बहुत तंग करता हूँ ना तुम्हे? बहुत नाराज़गी है तुम्हे मुझसे? अब कभी नहीं परेशान करूंगा..
शबाना - अच्छा ठीक है कुत्ते.. कर दूंगी तुझे ठंडा पर पहले आदिल को घर आने दे..
गौतम - बाद में मुकर तो नहीं जाओगी तुम?
शबाना - नहीं मुकुरूंगी.. बस..
गौतम - अच्छा वो पिक भेजी थी व्हाट्सप्प पर देखी तुमने?
शाबाना - नहीं अभी देखती हूँ..
गौतम - तुम देखके बताओ कैसी है और मैं अभी आदिल को बाहर निकलने का इंतज़ाम करता हूँ.. रखता हूँ..

शबाना व्हाट्सप्प खोलती है तो उसमे गौतम ने शबाना को अपने लंड की फोटोज सेंड की हुई थी जिसे देखकर शबाना की चुत में अजीब सी सुगबुगाहत होने लगती है वही गौतम रजनी को फ़ोन करता है..

गौतम - कैसी हो दीदी..
रजनी - मेरा छोड़ तू अपना बता छोटू.. इतने दिनों से ना massage ना कॉल.. तू इतना बिजी रहता है की अपनी दीदी से बात करने का समय नहीं मिला? याद नहीं आती मेरी?
गौतम - याद उसे किया जाता है दीदी जिसे भूल गए हो.. आप तो मेरे दिल में बस्ती हो..
रजनी - फिर भी अपने दीदी से मिलने की फुसरत नहीं मिलती?
गौतम - फुर्सत तो बहुत है दीदी, पर आपने जो आपके और मेरे बीच एक दायरा बनाके रखा उसे तोड़ने से डर लगता है.. आप तो जाती हो मैं आपको कितना पसंद करता हूँ.. जब भी आपको देखता हूँ बहकने लगता हूँ..
रजनी - ये सब ड्रामा बंद कर मैं अच्छे से जानती हूँ तुझे.. नौटकीबाज़.. बता कब मिलने आ रहा है मुझसे?
गौतम - मैं नहीं आऊंगा दी..
रजनी - अच्छा ज़ी? किस्सी मिलेगी अगर आओगे तो?
गौतम - पक्का?
रजनी - हाँ पक्का.. मेरे छोटे से आशिक..
गौतम - दीदी छः फ़ीट का हूँ आपसे लम्बा.. छोटा किसे बोल रही हो?
रजनी हसते हुए - अच्छा? छोटा बोलने पर मेरा छोटू गुस्सा होता है?
गौतम - दीदी एक बात थी..
रजनी - हाँ बोलो ना.. कुछ चाहिए था?
गौतम - हाँ..
रजनी - क्या चाहिए मेरे छोटे से आशिक़ को?
गौतम - दीदी एक दोस्त है मेरा, आदिल नाम है.. सुबह छोटा सा झगड़ा हो गया था तो पुलिस ने उठाकर जेल में डाल दिया.. **** थाने में बंद है आप कुछ मदद कर सकती हो?
रजनी - बस? अभी फ़ोन करती हूँ..
गौतम - थैंक्स दी..
रजनी - तू कब से थैंक्स बोलने लगा? और व्हाट्सप्प पर डेट और टाइम सेंड किया है टाइम से आ जाना मिलने.. वरना घर उठवा लुंगी तुझे..
गौतम - वक़्त से पहले आ जाऊंगा..

गौतम रजनी से बात करके फोन काट देता है और फिर शबाना को फोन करता है..

शबाना - हेलो..
गौतम - हेलो मेरी शब्बो बेगम.. निकलवा दिया आदिल को जेल से बाहर.. 10 मिनट में घर आ जाएगा आदिल, अब तुमको बताओ कब और कहा दोगी मुझे मेरा इनाम..
शबाना मुस्कुराते हुए - कुछ नहीं मिलेगा तुझे..
गौतम - सोच लो बात से पलट रही हो तुम..
शबाना - सोच लिया..
गौतम - यार मान जाओ ना, अपना वादा निभाने आ जाओ वरना फिर टांग उठा के चुत भी देनी पड़ेगी मुझे..
शबाना हस्ती हुई - कल सुबह 9 बजे घर आ जाना.. दे दूंगी जो कहा है..
गौतम - कंडोम का पैकेट कितने पिस का लाउ शबाना बेगम 3 या 8?
शबाना - कमीने सिर्फ blowjob ही मिलेगा.. जो तय हुआ था.. उससे ज्यादा कुछ नहीं..
गौतम - देखते है.. आज नहीं तो कल मिलेगा तो सब..
शबाना - सिर्फ ख्वाबों में..
गौतम - अच्छा लोडा केसा लगा मेरा?
शबाना हसते हुए - चुप बेशर्म...

शबाना फोन काट देती है और कुछ ही मिनट में उसके सामने उसका बेटा आदिल दरवाजे से अंदर आता होगा दिख जाता है..

अगले दिन सुबह शबाना ने घर के दरवाजे पर किसी के आने की दस्तक सुनी तो वो कामोतेजना से भरकर रोमांचित हो उठी उसे पता था की आज उसके शोहर फारूक आदिल के साथ बाहर गए है जिनको आते आते रात हो जायेगी. घर में शबाना अकेली थी और वो खुद भी गौतम का इंतजार कर रही थी उसके मन में अपनी सुनी पड़ी जिंदगी को फिर से हरा भरा करने का ख़्वाब चल रहा था.. शबाना ने दरवाजा खोलकर जब गौतम को दिखा वो शर्म से आँखे नीचे करती हो दरवाजे से पीछे हट गई और गौतम को अंदर आने की जगह दे दि. गौतम ने अंदर आते हुए दरवाजा लगा दिया. और सामने नजर झुकाए घड़ी शबाना को देखता रहा. कुछ देर दोनों इसी तरह एक दूसरे को प्यार कि नजर से देखते रहे मगर किसी में भी हिम्मत नहीं थी कि दोनों में से कोई भी आगे बढ़कर पहल करता. गौतम ने हीं सिलसिले को तोड़ा और आगे बढ़कर शबाना का हाथ पकड़ते हुए उसके झुके हुए सर को उंगलियों से ऊपर उठा दिया और उसके गुलाबी होंठ अपने होंठ में भरके चुंबन करने लगा.

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शबाना ने गौतम की हरकत का कोई विरोध नहीं किया और ना ही किसी तरह का कोई आपत्ति जाताई, वह भी अपने होठों से गौतम को शराब पिलाने लगी. घर के आंगन में खड़े गौतम और शबाना दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भरकर चूमने लगे थे दोनों में से किसी ने भी अब तक एक दूसरे से कोई बात नहीं की थी. शबाना गौतम की हर हरकत पर चुपचाप खड़ी हुई सहमति दे रही थी और उसे बार-बार कर चूम रही थी गौतम शबाना के बदन को अपने हाथों से नाप रहा था और हर जगह अपने हाथ ले जाकर शबाना के बदन को छू रहा था और छेड़ रहा था. गौतम के इस तरह के व्यवहार से और अपनी सुनी पड़ी जिंदगी में आई इस बहार से शबाना अभीभूत हो चुकी थी और अब उसके मन में काम इच्छा पूरी तरह से जाग चुकी थी वह अपने दोनों हाथों से गौतम का चेहरा पड़े उसे चूम रही थी और उसे अपने होठों के जाम पिला रही थी मानो वो सालों बाद मिले इस मौके को भूनाना चाहती हो और भरपूर मजा लेना चाहती हो अपनी इच्छा पूरी कर लेना चाहती हो.

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दोनों काफी देर से चुम्बन चल रहा था दोनों ही इस चुम्बन को नहीं तोड़ना चाहते थे बहुत लंबे समय से दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे और ऐसा लग रहा था जैसे दोनों एक दूसरे को चूमते चूमते खा जाना चाहते हो तभी गौतम के फोन की रिंग बजी और दोनों के बीच काफी लंबे समय से चल रहा चुंबन टूट गया..

शबाना - किसका फ़ोन है?
गौतम फ़ोन दिखाते हुए - ये साला हमेशा गलत टाइम पर फ़ोन करता है.
शबाना - तू बात कर मैं तेरे लिए चाय बना देती हूँ..
ये कहकर शबाना रसोई की तरफ चली गई और गौतम भी उसके पीछे पीछे रसोई में आ गया और फ़ोन उठाकर स्पीकर पर रख दिया और फिर से शबाना को अपनी बाहों में भरते हुए चूमने लगा..

आदिल - क्या कर रहा है रंडी?
गौतम चुम्बन तोड़कर - तेरी अम्मी शबाना का चुम्मा ले रहा था गांडु.. इतने गुलाबी होंठ है मन करता है खा जाऊ..
शबाना मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों को अपने दांतो से पकड़कर खींचती हुई काट लेटी है और गौतम की आह्ह निकल जाती है फिर शबाना गौतम के होंठों को सहलाती है..
आदिल - अबे किस रंडी को चूस रहा है लोडे.. सच बता..
गौतम - सच बोल रहा हूँ गांडु.. तेरी अम्मी है. अभी तो सिर्फ चुम्मा लिया है शबाना का, चोदना तो बाकी है..
आदिल - भोस्डिके बकवास मतकर सुबह सुबह..
गौतम शबाना की कुर्ती उतारता हुआ - अच्छा बता ना गांडु क्या काम था.. तूने तो दोस्ती ख़त्म कर ली थी ना रात को फिर कैसे फ़ोन कर लिया?
आदिल - अरे यार कल काण्ड हो गया था..
गौतम - हाँ बताया था तेरी अम्मी ने कैसे पुलिस ने तेरी गांड तोड़ी थी कल..
आदिल - उसीके लिए फ़ोन किया है भोस्डिके. आज अब्बू मुझे खालू के यहां कासपुर ले जा रहे है.. कल कोई मन्नत मांगी थी उन्होंने जिसे पूरा करने..
गौतम शबाना की कुर्ती उतारकार उसकी ब्रा देखते हुए - साले तूने बताया नहीं तेरी अम्मी की ब्रा का साइज 38 है.. देखने से 32-34 ही लगते थे.. (बूब्स दबाकर) बहनचोद कितने टाइट है यार तेरी अम्मी के चुचे..

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आदिल - बहन के लंड पागल हो गया सुबह सुबह.. कितनी पी है तूने आज.. मैं जो बोल रहा हूँ वो बता..
गौतम - चल पूछ ना गांडु..
गौतम इतना कहकर शबाना की ब्रा निकाल दी और उसके बूब्स को चाटने और चूसने लगा निप्पल्स को छेड़ने लगा शबाना भी मुस्कुराते हुए गौतम का पूरा साथ दे रही थी

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आदिल - अरे कोई जुगाड़ है क्या यहां कासपुर के पास? किसीको जानता है तू?
गौतम - जानता तो हूँ..
आदिल - बोल ना भोस्डिके.. मुंह में कुछ ले रखा है क्या?
गौतम - हाँ भाई तेरी अम्मी के गुलाबी निप्पल्स है मेरे मुंह में.. बड़े प्यार से अपने चुचे चुसवा रही है हमारी बातें सुन रही है..

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आदिल - क्यों अपनी माँ चुदवा रहा है रंडी.. बताना है तो बता दे वरना फ़ोन रख..
गौतम - रख दे साले.. मैं क्या है?

शबाना गैस पर से चाय उतारकर कप में चाय छन्नी कर लेटी है और अपना चुचा चूस रहे गौतम के मुंह से अपना बोबा निकालकर उसे चाय का कप दे देती है..
आदिल - भोस्डिके क्यों भाव खा रहा है? बता दे ना..
गौतम चाय लेटे हुए - चल ठीक है मगर कुछ करना पड़ेगा उसके लिए पहले..
ये कहते हुए गौतम ने शबाना के सर पर हाथ रख दिया और उसे नीचे बैठने का इशारा किये जिसे शबाना अच्छे से समझा गई और अपने घुटनो पर बैठकर गौतम की जीन्स पर लगा बेल्ट खोलने लगी फिर जीन्स खोलकर नीचे सरका दी..
आदिल - क्या करना है जल्दी बोल रंडी..
गौतम - बहुत रंडी रंडी बोलता है ना मुझे गांडु.. चल अब अब्बू बोल फिर नंबर दूंगा..
शबाना गौतम की बात सुनकर दबी हुई हंसी हँसने लगी और शरारत भरे अंदाज़ से गौतम की टीशर्ट ऊपर करके उसके नाभि पर प्यार से चूमकर अपने दांतो से काट लिया..
आदिल - मादरचोद औकात मत दिखा अपनी.. देना है तो दे वरना माँ चुदा..
गौतम - तेरी मर्ज़ी..वैसे आज तो तेरी अम्मी चुदने वाली है..
आदिल फ़ोन काट देता है..

शबाना - बिलकुल बेशर्म है तू. थोड़ी भी शर्म नहीं है तेरे अंदर..
गौतम - शर्म होती तो तुम इस तरह मेरे सामने बैठकर मेरी चड्डी नहीं उतार रही होती शब्बो बेगम..
शबाना हस्ते हुए - इस तरह से तो मत बुला कमीने.. मुझे शर्म आने लगती है..
गौतम चाय पीते हुए - शर्म ही तो औरत का गहना होता है शब्बो..
शबाना गौतम से नज़र चुरा लेती है और उसकी चड्डी भी नीचे सरका देती है.. जैसे ही गौतम की चड्डी नीचे सरकती है शबाना का मुंह खुला का खुला रह जाता है..

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शबाना सोच रही थी की कल जो फोटोज गौतम ने व्हाट्सअप की थी वो फेक है मगर अब उसके सामने गौतम का झूलता लंड था और शबाना उसे देखकर हैरात से आँखे बड़ी कर चुकी थी.. शबाना को समझा नहीं आ रहा था की कैसे गौतम के पास इतना बड़ा और मोटा लम्बा लंड है ये असाधारण बात थी..
शबाना बिना कुछ बोले बस लंड को देखे जा रही थी और गौतम चाय पीते हुए सारा नज़ारा देखकर मुस्कुरा रहा था..

शबाना ने एक नज़र ऊपर करके गौतम को देखा तो गौतम ने मुस्कुराते हुए कहा..
गौतम - पसंद आया मेरी शब्बो को मेरा लंड?
गौतम के सवाल पर शबाना शर्म से पानी पानी हो गई और फिर आँखे नीचे करके फर्श को देखने लगी मगर गौतम ने शबाना के चेहरे को ऊपर उठाते हुए उसके मुंह में अपना अंगूठा डाल दिया जिसे शबाना शरमाते हुए चूसने लगी.. थोड़ी देर अंगूठा और उंगलियां चूसाने के बाद गौतम ने शबाना को से कहा..
गौतम - इतना शर्माओगी तो कैसे काम चलेगा शब्बो?
गौतम के इतना कहते ही शबाना औऱ शर्म से लाल पड़ गई..

गौतम - यार शब्बो तेरा बेटा पता नहीं क्या चाहता है.. बार बार फ़ोन कर रहा है.. एक मिनट इससे बात कर लू..
गौतम फ़ोन उठाकर - हाँ गांडु बोल?
आदिल - भाई क्यों नखरे कर रहा है देदेना नम्बर..
गौतम - दे तो रहा हूँ.. तू बोल ही नहीं रहा..
आदिल - अच्छा.. अब्बू.. बस बोल दिया अब दे जल्दी.
गौतम - ऐसे नहीं गांडू.. बोल अब्बुजान मेरी अम्मी के मुंह में लोडा डाल दो.
आदिल धीरे से- अब्बूजान मेरी अम्मी के मुंह में लोडा डाल दो.. बस अब दे जल्दी..

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गौतम शबाना के मुंह में लोडा डाल डेता है.
शबाना शरमाते हुए औऱ मुस्कुराते हुए लंड मुंह में ले लेती है औऱ चूसने लगती है..
गौतम - उफ्फ्फ आदिल क्या चुस्ती है तेरी अम्मी यार..
आदिल - मज़ाक़ मत कर रंडी अब दे दे जल्दी नम्बर..
गौतम - व्हाट्सप्प कर रहा हूँ रुक.. फ़ोन कट जाता है..
शबाना रुक शब्द सुनकर लोडा चूसना बंद कर देती है औऱ गौतम को देखती मगर गौतम नम्बर सेंड करके शबाना से कहता.. तुझसे नहीं बोला मेरी जान, तू चुस्ती रह. केसा है मेरा लंड?
शबाना - लज़ीज़ है..
गौतम शबाना के बाल पकड़ कर उसे अपना लोडा अंदर तक चूसाता हुआ - तो पूरा लोना मेरी जान..

शबाना कामुक होती हुई गौतम के लंड को चूस रही थी औऱ उसे देखकर मुस्कुरा रही थी मानो कहा रही हो तुम कितने बेशर्म हो गौतम.. गौतम शबाना के सर पर हाथ रखकर उसे अपना लोडा ऐसे चुसवा रहा था मानो कहा रहा हो आज तो तेरे मुंह के साथ चुत भी सुज्जा दूंगा शबाना..
कुछ देर बाद शबाना के मुंह की गर्माहट औऱ लार से गौतम चरम पर पहुंच जाता है औऱ वो शबाना के मुंह में अपना सारा माल छोड़ कर फारीक हो जाता है.. शबाना मज़े से लंड का माल पीते हुए मुस्कुराती है औऱ फिर चाट चाट के गौतम के लंड को साफ करके खड़ी हो जाती है..

गौतम - क्या चुस्ती हो यार शब्बो, मज़ा आ गया..
शबाना मुस्कुराते हुए सारी शर्म छोड़ देती है औऱ अपनी सलवार का नाड़ा खोलते हुए गौतम से कहती है - अब तुम्हारी बारी.. चलो..
शबाना ने इतना कहकर गौतम के कंधे पर हाथ रखकर नीचे बैठने को इशारा किया मगर गौतम शबाना का मन समझा चूका था औऱ नाटक करते हुए बोला - शब्बो वादा सिर्फ blowjob का था अब आगे मेरा कुछ करने का मूड नहीं है..
शबाना ने गौतम का एक हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया औऱ बोली - मूंड बनाने के लिए मैं हूँ ना बेटा..
गोतम शबाना के बूब्स के निप्पल्स जोर से मसलते हुए - पर मैं आगे कुछ नहीं करने वाला.. बहुत नखरे चोद रही थी ना तुम.. अब मेरी बारी है..
शबाना - पूरा सुलगा कर जलता छोड़ रहा है.. बिना तेरी इज़्ज़त लुटे यहां से जाने नहीं दूंगी तुझे? चुपचाप लाइन पर आजा..
गौतम - नहीं तो क्या करेगी?
शबाना - चिल्ला दूंगी.. इस हालात में जब सब देख लेंगे तो पता है क्या हाल करेंगे?
गौतम - सिर्फ मेरा हाल थोड़ी बुरा होगा?
शबाना - मुझे अपनी परवाह नहीं है.. तू अपनी सोच..
गौतम शबाना का मुंह पकड़ कर - बहुत बोलना आ रहा है ना तुझे?
शबाना - क्या कर लेगा तू?
गौतम - तेरा मुंह बंद कर दूंगा..
शबाना - हिम्मत है तुझमे मेरा मुंह बंद करने की?
गौतम शबाना की बात सुनकर उसके मुंह से अपना मुंह लगा लेता औऱ शबाना को चूमने लगता है जिससे शबाना भी मस्ती से भरकर गौतम के गले में अपने हाथ डाल देती औऱ उसके नाजुक लबों को अपने मोटे औऱ गुलाबी लबों से चूमने लगती है...

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शबाना चूमते हुए गौतम को लेकर अपने बेड रूम में आ जाता है औऱ बिना चुम्बन तोड़े दोनों बिस्तर पर गिर जाते है..

शबाना डोमिनट करती हुई गौतम को पीठ के बल लिटा देती है औऱ उसके ऊपर आकर उसके चेहरे को बार बार चूमने लगती है औऱ गौतम के चेहरे गर्दन औऱ सीने पर अपने होंठों के साथ जीभ से भी चुम्बन अंकित कर देती है.. शबाना पूरी मस्ती में गौतम के सीने पर उसके निप्पल्स को अपने मुंह में भरके चूसने लगती है जैसे उसका दूध निकालकर छोड़ेगी गौतम को भी इसमें बहुत काम सुख मिल रहा था शबाना ने दांतो से उसके निप्पल्स काटने शुरू कर दिया जिसमे गौतम को थोड़ा दर्द होने लगा.. शबाना ने गौतम के बदन पर लव बाईट की झड़ी लगा दी..
शबाना वापस नीचे आगई औऱ गौतम के लंड को मुंह में लेकर वापस उसे चूसना शुरू करदिया..

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शबाना को सालों बाद कोई बिस्तर पर मिला था जो उसे काम सुख देने वाला था शबाना गौतम को अपनी चुदाई कला से रिझाना चाहती थी जिसके लिए वो गौतम को पूरी तरह खुश करने में लगी थी..
गौतम ने किसी रंडी की तरह शबाना के बाल पकड़ लिए औऱ उसके मुंह में झटके मारने लगा.. शबाना किसी रंडी की तरह अपना मुंह चुदवा रही थी.. उसके मुंह में गौतम का लंड आधे से ज्यादा घुस रहा था..
गौतम ने कुछ देर ऐसे ही शबाना का मुंह चोदकर उसके बाल खींचता हुआ उसे ऊपर ले आया औऱ अपने हाथ से शबाना की चड्डी उतारकर उसकी चुत को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया औऱ उसकी चुत का जायजा लेने लगा.

गौतम - ऊपर से कितने नखरे कर रही थी औऱ नीचे सारे बाल साफ करके बैठी.. मेरे लिए काटी है ना झांटे?
शबाना पूरी बेशर्मी से - हाँ तेरे लिए काटी है.. पहले कह देता तुझे बालों वाली चुत पसंद है तो नही काटती..
गौतम - उफ्फ्फ अम्मीजान मार डोलोगी तुम तो..
शबाना - तुम्हारे मुंह से अम्मीजान कितना प्यारा लगता है..
गौतम - अच्छा.. तो बस आज के बाद आपको अम्मीजान कहकर ही बुलाऊंगा..
शबाना हस्ते हुए - चुप बेशर्म..
गौतम - अम्मीजान अब अपनी चुत का रस पीलाओ..
गौतम उठकर शबाना की टांग चौड़ी कर लेता है औऱ उसके जांघो के जोड़ पर अपने मुंह लगा के उसकी चुत सूंघता है जिसकी खुशबु से गौतम काम की हवा में बहने लगता है..
गौतम जैसे ही अपने होंठ शबाना की चुत पर रखता है शबाना काम में डूबी हुई एक आह भारती है औऱ गौतम के सर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसका सर अपनी चुत पर जोर से दबा लेती है..

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तभी गौतम का फ़ोन बजता है जिसे शबाना देखती है औऱ उसपर आदिल का नाम देखकर गुस्से में कहती है - ये अपनी अम्मी नहीं चुदने देगा आज.. गँड़मरा बार बार फ़ोन करके परेशान कर रहा है..
गौतम हसते हुए - इसकी अम्मी चुदने से तो आज इसका बाप भी नहीं रोक सकता..
शबाना हसते हुए फ़ोन गौतम को दे देती है.. गोतम फ़ोन उठाकर शबाना की चुत चाटने लगता है..

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आदिल - क्या कर रहा है?
गौतम - तेरी अम्मी की चुत चाट रहा हूँ..
आदिल - क्यों मज़ाक़ कर रहा है रंडी..
गौतम - रुक फोटो भेजता हूँ.. गौतम सिर्फ चुत की फोटो खींचकर आदिल को व्हाट्सप्प कर देता है.. देख ले खुद चाट रहा हूँ..
आदिल - अबे सच बता किस रंडी की ले रहा है? मुझे नहीं दिलवायेगा?
गौतम हस्ते हुए - अबे तेरी सगी अम्मी है..
आदिल - बहन के लोडे फालतू मज़ाक़ नहीं.. बहुत हो गया तेरा.. औऱ वो जो तूने नंबर दिए थे पैसे ज्यादा मांग रहा है..
गौतम - कितने कम पड़ रहे है?
आदिल - अबे 4 हज़ार मांग रहा है वो भी दो घंटे के.. मैं दो हज़ार देने को त्यार हूँ..
गौतम शबाना को देखकर - बाकी दो हज़ार में सेंड कर रहा हूँ मज़े कर.. औऱ वापस कॉल मत करना शाम तक..
आदिल - बहन के लंड.. होश में है? मेरे टुकड़ो पर पलता है तू.. पैसे कहाँ से आये तेरे पास?
गौतम - बाद में बताऊंगा अभी तेरी अम्मी को चोदना है.. चल रखता हूँ.. पैसे ऑनलाइन कर दिए..
फ़ोन कट हो जाता है..

शबाना - आदिल रडीयों के पास जाता है?
गौतम - कभी कभी जाना पड़ता है अम्मी.. गौतम फिर से शबाना की चुत चाटना शुरू कर देता है.. शबाना भी आगे कुछ नहीं बोलती औऱ अपनी चुत चूसाईं का आनंद भोगने लगती है..

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गौतम पूरी ईमानदारी औऱ स्वाद लेकर शबाना की चुत चाट रहा था औऱ उसकी चुत से निकलता रस पिए जा रहा था.. औऱ शबाना भी सालों बाद मिल रहे सुख का मज़ाक़ उठने लगती है और थोड़ी सी देर बाद ही गौतम में मुंह में झड़ जाती है.. झड़ने के बाद शबाना शर्म से गौतम के सीने में अपने सर छीपा लेती है..
कुछ देर बाद गौतम - शुरू करें?
शबाना शरमाते हुए - हाँ.. मगर संभालके.. 7 साल से कुछ नहीं किया.. औऱ तुम्हारा बहुत बड़ा है..
गौतम मिशनरी पोज़ में आते हुए - तो फिर खुद ही अंदर कर लो..
शबाना कामुक हावभाव के साथ - लंड पकड़कर अपनी चुत के मुहाने पर सेट करती है औऱ हल्का सा गौतम की कमर पर हाथ रखकर अपनी औऱ खींचती है जिससे लंड का टोपा शबाना की गीली चुत में चला जाता है..
शबाना गौतम के देखती हुई उसके होंठो को अपनी क़ैद में कर लेटी है औऱ चूमते हुए लंड को धीरे धीरे चुत में घुसाने की कोशिश करती है मगर गौतम को एक शरारत सूझती है औऱ वो एक जोरदार झटका मार देता है.. झटका इतना तेज़ था की आधे से ज्यादा लंड एक बार में चुत को चिरता हुआ उसमे घुस जाता औऱ शबाना की चिंख निकल जाती मगर घर के बाहर पड़ोस में बज रहे dj की आवाज में उसकी आवाज दब जाती है औऱ शबाना खुद अपने मुंह पर हाथ रख लेती है मगर उसकी आँखों से आंसू औऱ चुत से हल्का खून बह जाता है..

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शबाना गौतम को देखती हुई सिसकी भरने लगती है औऱ गोतम के नीचे से निकलने की नाकाम कोशिश करने लगती है मगर गौतम शबाना को नीचे से निकलने नहीं देता औऱ शबाना को प्यार से चुप कराकर वापस चूमने लगता है..

शबाना सिसकती हुई - पहली बार में ही मेरी चुत का भोसड़ा बना देगा क्या हरामजादे.. कहा था ना प्यार से करना..
गौतम - माफ़ कर दो अम्मी.. बहक गया था.. बाहर निकलूं?
शबाना - नहीं बेटा अब रहने दे ऐसे ही..
कुछ देर बाद जब शबाना शांत होती है गौतम फिर से शबाना को उसी मूंड में आने की कोशिश करने लगता है औऱ शबाना जल्दी ही गौतम की छेड़ खानी से कामुक हो उठती है..
गौतम शबाना के कामुक होने पर धीरे धीरे अपने लंड को उसकी चुत में आगे पीछे करने लगता है औऱ शबाना सिस्कारिया लेटी हुई अपनी चुदाई का सुख भोगने लगती है शबाना इसतरह गौतम को पड़के हुए थी जैसे उसे अपने आप में समाज लेना चाहती हो दोनों के होंठ अब भी आपस में मिलकर एक दूसरे को गिला कर रहे थे..

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मिशनरी के बाद बाल पकड़के डॉगी स्टाइल, काऊ गर्ल औऱ फिर गोद में उठाकर गौतम ने शबाना को रंडी बनाके चोदा.

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शबाना को ऐसा लग रहा जैसे उसे जन्नत मिल गई हो.. गौतम भी अपने दोस्त की अम्मी चोदते हुए पूरा जोश में था औऱ शबाना को नंगा करके बेशर्मी से अपने लंड पर उछाल रहा था.

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शबाना चुदवाते हुए मीठे दर्द औऱ असीम ख़ुशी से कराह रही थी औऱ गौतम को चूमे जा रही थी.. शबाना की चुत से वापस झरना बह चूका था..
शबाना को ऐसा लग रहा जैसे आज वो अलग ही दुनिया में हो उसको आजतक जो नहीं मिल पाया था गौतम ने आज उसे दिला दिया था शबाना के अंग अंग में तरंग की लहर उमड़ पड़ी थी वो गौतम के लिये या उसके कहने पर आज कुछ भी कर सकती थी..

गौतम ने शबाना को वापस बिस्तर पर पटक दिया औऱ मिशनरी में चोदने लगा.. इस बार लम्बे समय से चोदते आ रहे गौतम का झरना भी बह जाना चाहता था औऱ पिछले एक घंटे से शबाना पूरी तरह संतुष्ट होकर गौतम के नीचे पड़ी हुई चुद रही थी.. गौतम ने अपना वीर्य शबाना की चुत में ही भर दिया जो बच्चे दानी में पूरी तरह चला गया..

शबाना - उफ्फ्फ.. ये क्या तूने? अंदर क्यों छोड़ा.
गौतम - मेरी मर्ज़ी अम्मी.. मैं जहा चाहूंगा वही अपना मार निकालूँगा..
शबाना - मैं प्रेग्नेंट हो गयी तो?
गौतम - वही तो मैं चाहता हूँ मेरी जान.. कम से कम एक बच्चा तो तूम मेरा भी अपनी चुत से निकाल सकती हो.
शबाना - अगर तेरा बच्चा मैंने पैदा किया तो मुझे क्या मिलेगा?
गौतम - तुझे क्या चाहिए?
शबाना - तू मुझे छोड़कर नहीं जाएगा कभी.. जब भी बुलाऊंगी आना पड़ेगा मुझसे मिलने..
गौतम - वादा करता हूँ..
गौतम बेडशीट पर खून देखकर- ये कहा से आया?
शबाना हसते हुए - तूने ही तो निकाला है मेरी चुत से.. एक झटके में लोडा अंदर डालेगा तो क्या जूस निकलेगा? सफ़ेद से लाल हो गई बेडशीट..
गौतम - चोदने के बाद बहनचोद भूख बहुत लगती है.. यार कुछ खिला दो अम्मी..
शबाना लड़खड़ाते हुए उठती है औऱ गौतम से मुस्कुराते हुए कहती है - क्या खाओगे क्या बनाऊ?
गौतम भी खड़ा हो जाता है औऱ कहता है - परांठे बना दो..
शबाना - अभी बनाके लाती हूँ..
ये कहते हुए शबाना अपने कपड़े पहनने लगती है मगर गौतम उसे कपडे नहीं पहनने देता औऱ कहता है - रहने दे ना अम्मी.. खाने के बाद वापस उतारना पड़ेगा.. बिना कपड़ो के वैसे भी कमाल लगती है..
शबाना - ब्रा पेंटी तो पहनने दे बेटा..
गौतम - शाम तक कोई कपड़ा नहीं मिलेगा.. चल रसोई में..
गौतम शबाना को उठाके रसोई में ले आता है औऱ शबाना वहा परांठे बनने के लिए आटा लगाने लगती है..

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गौतम शबाना को पीछे से पकड़ लेटा है औऱ उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथो में भरके उसी तरह मसलने लगता है जैसे शबाना आटा मसल रही थी..
शबाना - खाना तो बना लेने दे..
गौतम - तो बना ना अम्मी.. तेरे बोबे पकडे है हाथ थोड़े पकडे है..
गौतम ये कहते हुए अपना लंड भी उसकी चुत में डाल देता है..
शबाना - आह.. आहिस्ता...
गौतम - अम्मी बहुत मस्त चुत है तुम्हारी..
शबाना - एक बात पुछु?
गौतम - हाँ.. पूछ ना..
शबाना - मैं कैसी लगी तुझे?
गौतम - सच बताऊ?
शबाना - हाँ
गौतम - रंडी जैसी..
शबाना - क्या.. रंडी जैसी क्यों?
गौतम - बोल रही थी अगला जन्म लेना पड़ेगा.. 4 दिनो में टांग खोल के नीचे लेट गई.. साली रांड..
शबाना मुंह बनाके - चुद गई तो रंडी हो गई? वरना पिछले 4 दिन से हूर रानी परी शहजादी बोल रहा था.. सच में कमीना है.. ले खा ले..

गौतम शबाना को पलटके अपनी औऱ घुमा लेटा है औऱ उसकी चुत में फिर से लंड डालके बोलता है..
गौतम - तूम अपने हाथ से खिलाओ ना अम्मी..
शबाना - रंडी के हाथ से खायेगा?
गौतम - तूम मेरी पर्सनल रंडी हो तुम्हारे हाथ से तो ज़हर भी खा लू..

शबाना मुस्कुराते हुए गौतम को खाना खिलाती है खाना खाने के बाद गौतम - बाथरूम कहा है?
शबाना - क्यों?
गौतम - क्यों क्या? बाथरूम लगा है..
शबाना नीचे बैठकर गौतम का लोडा पकड़ते हुए आँख मारके - तेरी रंडी है ना.. मेंरे मुंह में कर दे.. औऱ गौतम का लोडा अपने मुंह में डाल लेती है..
गौतम शबाना के सर पर हाथ फेरता हुआ उसके मुंह में मूतना शुरू कर देता जिसे शबाना बड़े आराम से पी लेती है..
शबाना को अपना मूत पिलाने के बाद गौतम रसोई से बाहर आ जाता है.. उसके पीछे पीछे शबाना भी बाहर आ जाई है...

गौतम ने शबाना को अपनी बाहों में भर लिया और उसे उठाकर बिस्तर पर ले गया जहां पहले उसे चुम्मा और उसके बाद उसकी चुत को चाटते हुए गांड के छेद आ गया.. शबाना को अपनी गांड के छेद चटवाने में बहुत मजा मजा आ रहा था और गौतम बड़े चाव से शबाना की गांड के छेद को चाट रहा था.. थोड़ी देर शबाना की गांड की छेद को चाटने के बाद गौतम ने छेद में उंगलि डाल दी औऱ उंगलि से शबाना की गांड चोदने लगा.. थोड़ी देर इसी तरह करने के बाद गौतम ने गांड के छेद पर थूक दिया औऱ अपना लोडा लगा दिया..

शबाना को जब इस बात का एहसास हुआ वह मुड़कर पीछे देखने लगी और गौतम से ऐसा नहीं करने के लिए इशारे में मना करने लगे मगर गौतम ने शबाना की एक न सुनी और अपने लंड का दबाव बनाकर गांड की छेद को चोडा करते हुए अपने लोडे का टोपा गांड के अंदर घुसा दिया.. शबाना आहे भरने लगी औऱ सिसकियाँ लेने लगी और वह बार-बार गौतम से गांड के छेद को छोड़ देने की अपील करने लगी मगर गौतम उसकी अपील नकारते हुए शबाना की गांड में अपना लंड घुसाने को बेताबी से अपना जोर लगा रहा था...
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कुछ पलो में ही उसको सफलता भी मिल गई.. शबाना ने पहले भी अपनी गांड मरवाई थी मगर गोतम के बड़े लंड से मारवाने के कारण उसे दर्द भी हो रहा था लेकिन गौतम की ख़ुशी के कारण शबाना ने अपनी गांड की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया था..


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गौतम अपने दोस्त की अम्मी चोद चूका था औऱ अब बारी गांड की थी जिसे वो चोद रहा था.. आधे घंटे बाद शबाना बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी औऱ उसके ऊपर गौतम शबाना की गांड में लोडा घुसाये लेटा हुआ उसे चोद रहा था..

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शबाना ख़ुशी खुशी अपनी गांड भी गौतम के नाम कर देती है औऱ फिर से गौतम गांड चोदकर लंड का माल शबाना की चुत में भर देता है शबाना की चाल ढाल औऱ हाल सब बदल चूका था.

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दिन के चार बज चुके थे औऱ गौतम शबाना को बाहों में लिये बिस्तर पर लेटा हुआ था तभी वापस आदिल का फ़ोन आता है..
गौतम - कैसी औलाद पैदा की है यार तूने? साला दिन में दस बार फ़ोन करता है..
शबाना - अब तो तूने इसकी अम्मी चोद ली अब क्यों नाराज़ है इससे?
गौतम फ़ोन उठा कर - गांडु बोला था ना शाम तक फ़ोन मत करना फिर क्यों कर रहा है?
आदिल - भाई जरुरी बात है..
गौतम - बोल क्या जरुरी मात है?
आदिल - ऐसे नहीं पार्टी देनी पड़ेगी?
गौतम शबाना को देखकर - अपनी अम्मी के चुदने की पार्टी मांग रहा है क्या?
आदिल - बार बार अम्मी पे मत आ साले..
गौतम शबाना के बूब्स मसलकर - वरना क्या कर लेगा तू? साले इतने मोटे औऱ टाइट बूब्स है तेरी अम्मी के देखते ही मसलने का मन करता है.. पूरी मिया खलीफा दीखती है रांड.
आदिल - औकात में रह भोसड़ीवाले.. वरना मुझसे भी कुछ सुन लेगा..
गौतम - अच्छा क्या जरुरी बात है बता?
आदिल - फ़ोन पर नहीं.. एक घंटे बाद मेरे घर पर मिलना..
गौतम हैरानी से - पर तू तो कासपुर गया था ना?
आदिल - भाई मेरा काम पूरा हो गया तो अब्बू को वही छोड़कर मैं सीधा वापस आ गया.. एक घंटे में घर पहुंच जाऊंगा.. तू भी आ जा..
गौतम - ठीक है..
 
Update 13

आदिल गौतम को लेके एक बार में आ जाता है औऱ दोनों कोने में एक टेबल पर बैठ जाते है..
गौतम - अब बता भोस्डिके क्या बता रहा था तू?
आदिल - भाई ऐसे नहीं आज दारू पीला पहले..
गौतम - ठीक है साले.. मंगवा ले..
आदिल वेटर से - भाई दो बियर...
गौतम - बता ना अब..
आदिल - भाई सलमा आपा का अड्रेस मिल गया..
गौतम - कहा से मिला?
आदिल - अरे मिल गया कहीं से बस..
गौतम - तो बता ना भोस्डिके.. रांडो की जैसे नखरे क्या कर रहा है..
आदिल - भाई जयपुर रहती है सलमा औऱ किसी मॉल में जॉब करती है.. व्हाट्सप्प पर पूरा एड्रेस भेजा है तुझे देख..
गौतम फ़ोन देखकर - सच बोल रहा है ना गांडु?
आदिल - अम्मी कसम भाई..
गौतम - अम्मी से याद आया.. भाई तेरी अम्मी है मस्त माल बहनचोद.. पूरी मिया खलीफा है साली.. पूरा ठंडा कर दिया मुझे आज..
आदिल - बहन के लोडे हद में रह.. क्या बोल रहा है..
गौतम - सच में भाई.. बुरा मत मान यार, तेरी अम्मी पसंद आ गई मुझे..
आदिल - भोस्डिके पागल हो गया क्या? अम्मी है मेरी.. क्यों फ़ालतू बकवास कर रहा है.. बिना पिए ही चढ़ गई क्या तुझे?
गौतम - अरे नहीं यार, सच बोल रहा हूँ थोड़ी सी हेल्प कर दे भाई.. तेरी अम्मी की चुत तुझे भी दिलवा दूंगा..
आदिल - चुदाईखाने अम्मी पर मत जा वरना बुरा हो जाएगा.. सबको रांड समझ लिया क्या तूने?
गौतम - क्या बुरा हो जाएगा गांडु? एक चुत के लिए साले औकात दिखा रहा है.. बचपन से कितनी मदद की है तेरी औऱ तू इतनी सी मदद नहीं कर सकता? बदले में तुझे भी तो दिलवा दूंगा..
आदिल - भाई अम्मी का ख्याल दिमाग से निकाल दे..
गौतम - कैसे निकाल दू भाई.. आगे औऱ पीछे का सामान देखा है तूने शबाना का.. देखते ही रगड़ने का मन करता है बहन की लोड़ी को, शकल देखते ही लंड खड़ा हो जाता है मादरचोद..
आदिल - अम्मी को गाली मत दे भोस्डिके, अब औऱ कुछ बोला तो सच में दोस्ती ख़त्म समझ..
वेटर बियर लाकर टेबल ओर रख डेता है औऱ चला जाता है..
गौतम - अच्छा गाली नहीं दूंगा पर सच बोल रहा हूँ.. बहुत पहले से मैं तुझे ये बात बताना चाहता था, यार मैं पागल हो रहा हूँ शबाना के लिए.. लंड खड़ा है देख..
आदिल बियर पीते हुए - तो बहन के लंड हिला ले ना जाके.. अम्मी नहीं यार.. अम्मी को छोड़ दे..
गौतम - देख भाई मैं जानता हूँ तुझे अगर शबाना की चुत मिले तो तू उसे भी नहीं छोड़ेगा.. भाई मेरा वादा है मेरा मन भरने के बाद तुझे भी तेरी अम्मी की चुत दिला दूंगा.. साले ऐसे रांड चोद के कहा तक काम चलायेंगे औऱ कहा से इतने पैसे लाएंगे? भाई सोच अगर हमें चुदाई करनी हो औऱ तेरी माँ फ्री हमसे चुदती रहे तो हमारा कितना फ़ायदा होगा..
आदिल थोड़ी देर चुप रहकर - अब्बू जान से मार देगा भोस्डिके..
गौतम - अबे पता कैसे चलेगा तेरे अब्बू को? तू बताएगा?
आदिल - छोड़ भाई.. जाने दे यार.. अम्मी को रहने दे..
गौतम - भड़वे ऐसे माल को चोदने की जगह छोड़ने की बात कर रहा है.. तू हाँ कर बस.. बाकी सब मुझपर छोड़ दे.. शबाना को बीच में लेके चोदेगे अपन दोनों.. सैंडविच की तरह.. आगे में लूंगा पीछे से तू लेना.. सोच ले.
आदिल - पर पटायेगा कैसे अम्मी को?
गौतम बियर ख़त्म करके - भाई उसकी फ़िक्र मत कर.. पटाया हुआ है.. बस सही टाइम का वेट कर.. कोई फोटो है शबाना की तेरे पास?
आदिल - फोटो तो बहुत है क्यों?
गौतम - चल बताता हूँ..
आदिल - कहा चलू?
गौतम - लंड के मेल.. ज्यादा सवाल मत कर.. चुपचाप चल..

आदिल गौतम के पीछे पीछे चल देता है औऱ दोनों जेंट्स टॉयलेट में आ जाते है जहा गौतम एक केबिननुमा बाथरूम में घुस जाता है औऱ आदिल को भी अंदर आने को कहता है आदिल के अंदर आते है गौतम उसका दरवाजा बंद कर लेटा है औऱ दिल से कहता है..
गौतम - फोटो दिखा शबाना रंडी की..
आदिल फ़ोन निकालकर - भाई क्या कर रहा है?
गौतम - तेरी अम्मी शबाना रंडी पर लंड हिलाएंगे आज दोनों भाई मिलके.. कोई सेक्सी फोटो दिखा तेरी अम्मी की.. बहन की लोड़ी सस्ती मिया खलीफा..
आदिल फोटो निकालकर - देख ये ठीक है?


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गौतम - अबे कोई ऐसी फोटो दिखा ना जिसमे इसके चुचे दिखे अच्छे से बिना बुरखे के..
आदिल - ले बहन के लोडे ये देख.. है ना मस्त..


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गौतम - मादरचोद कहा छुपा रखी थी ऐसी तस्वीर? क्या माल लग रही है रंडी.. चुचे देख साली के. फोटो ज़ूम कर..
आदिल - हाँ यार.. अम्मी को चोदने का मन तो मेरा भी बहुत है पहले से.. बस डर लग रहा था..
गौतम - क्या अम्मी अम्मी बोल रहा है मदरचोद.. रंडी है अपनी..
आदिल लोडा बाहर निकालकर - भाई इस रंडी की दिलवा दे यार. अब तो तूने मेरे लंड में भी आग लगा दी शबाना के नाम की.. इसे चोदे बिना चैन नहीं मिलेगा.
गौतम अपना लंड निकालकर - चोद दे पटक के तेरे तो घर में ही रहती है साली..
आदिल गौतम का लंड देखकर - अबे इतना बड़ा कैसे हो गया तेरा?
गौतम - जामुन खाकर हो गया भोस्डिके..
आदिल - मुझे खिला दे वो जामुन भाई..
गौतम - पहले तेरी अम्मी को चोद दू तेरे सामने फिर खिला दूंगा..
आदिल - चोद लेना रंडी को भाई मैं कोनसा मना करने वाला हूँ तुझे.. पर मेरा लंड भी अपने जैसा करवा दे..
गौतम - टाइम आने पर सब हो जाएगा तू चिंता मत कर.. अभी तो इस रंडी पर माल निकाल..
आदिल - हिला बहन की लोड़ी पर.. साली रंडी..


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गौतम औऱ आदिल दोनों आदिल के फ़ोन पर शबाना की तस्वीर को देखते हुए मुठ मारने लगते है औऱ आदिल अपना माल उस तस्वीर पर गिरा देता है मगर गौतम अपना माल नहीं गिराता..
आदिल - क्या हुआ निकल नहीं रहा क्या?
गौतम - फोटो पर नहीं भाई, रियल में निकलेगा मेरा..

आदिल फ़ोन उठा लेता है औऱ उसके बाद आदिल अपने फ़ोन की स्क्रीन को गीले रुमाल से साफ करके गौतम के साथ बाहर आ जाता है औऱ दोनों वापस टेबल पर बैठकर एक एक बियर औऱ आर्डर कर देते है..
गौतम - रेशमा का क्या सीन है?
आदिल - कुछ नहीं यार.. निकाह को चार साल हो गये अभी तक बच्चा नहीं हुआ.. जीजा तलाक़ के देने की बोल रहा है..
गौतम - बच्चा नहीं हुआ मतलब कोई कमी है रेशमा में?
आदिल - पता नहीं मुझे जीजा ढीला लगता है..
गौतम - नंबर दे रेशमा के मैं बात कर लूंगा..
आदिल - तू नम्बर का क्या करेगा भाई?
गौतम - भाई तेरी अम्मी के साथ तेरी आपा को भी लंड के नीचे से निकाल दू तो तूझे कोई परेशानी थोड़ी है.. ले नंबर दे..
आदिल नंबर देकर - भोस्डिके चोदने के बाद मुझसे भी चुदवाएगा.. ऐसा ना हो की तू पलट जाए..
गौतम - भाई मेरे बाद तेरा ही नम्बर है.. मेरा मन भर जाए फिर तेरे ही लंड के नीचे रहेंगी दोनों..
आदिल - भाई लंड केसा बड़ा किया बता ना..
गौतम - बताया तो था साले.. जामुन खाकर..
आदिल - मुझे भी खिला दे यार..
गौतम - भाई वो जामुन ख़ास है बहुत दूर एक ख़ास जगह मिलते है ले चलूँगा तुझे कभी..
आदिल - ठीक है भाई.. जल्दी ले चलना..
गौतम - चल अब घर चलते है.. मैं तुझे घर छोड़ देता हूँ..
आदिल - हाँ.. चल..

गौतम आदिल को लेकर उसके घर आ जाता है औऱ घर के बाहर आदिल से कहता है..
गौतम - फारूक कब तक आएगा?
आदिल - अब्बू को आने में 10 बज जायेंगे..
गौतम - अभी 8 बज रहे है.. सुन तेरी अम्मी दरवाजा खोले तो सीधा अंदर जाकर सो जाना. मैं तेरी अम्मी को पटाने के लिए थोड़ी देर तेरी अम्मी से बात करूंगा.. समझा..
आदिल - ठीक है समझ गया..

आदिल दरवाजा बजाता है औऱ कुछ पलो में शबाना लंगड़ाती हुई आकर दरवाजा खोल देती है..
आदिल शबाना के दरवाजा खोलते ही अंदर जाकर अपने कमरे में चला जाता है औऱ गौतम दरवाजे से थोड़ा अंदर आकर दरवाजा लगा देता है..
शबाना - क्या कर रहा है.. आदिल अंदर है
गौतम - तो?
शबाना - देख लेगा.. जा यहां से
गौतम - वो नहीं आएगा.. बस एक चुम्मा लेना है..
शबाना - कुत्ते मेरी चाल बिगाड़ दी औऱ अब चूमा लेने आया है.. जा यहां से मैं फ़ोन करके बुलाऊंगी.
गौतम - बिना चुम्मे नहीं जाऊंगा..
शबाना - चुम्मे के बहाने तू कुछ भी करने लग जाएगा..
गौतम - सिर्फ चुम्मा लूंगा..


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शबाना पीछे आदिल के कमरे की तरफ देखती है औऱ गौतम का हाथ पकड़ कर उसे रसोई के पीछे खाली जगह पर ले जाती है..
शबाना - ले जल्दी कर..
गौतम शबाना के चुचे पकड़के अपनी औऱ खींचता है औऱ उसे अपने गले से लगा लेता है फिर चूमने लगता है.. करीब 2-3 मिनट के चुम्बन के बाद शबाना चुम्बन तोड़ देती औऱ कहती है..
शबाना - अब जा ना बेटा.. कोई देख लेगा तो आफत हो जायेगी..

गौतम अपना लोडा बाहर निकाल लेता है औऱ शबाना के कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे बैठने का इशारा करता है औऱ कहता है..
गौतम - इसे शांत कर दो अम्मी फिर चला जाऊंगा.
शबाना गुस्से से - कितना बेसब्री है तू.. आदिल अंदर है.. तू जा यहां से.. कहा ना बाद में सब कर दूंगी.. मेरा भी मन है मगर.. तू समझता नहीं है..
गौतम शबाना का बोबा पकड़ लेटा है औऱ मसलकर कहता है - इसे तो चूसना पड़ेगा अम्मी... वरना मैं यहां से नहीं जाने वाला..
शबाना - बेटा मान जा ना..
गौतम शबाना के बाल पकड़कर उसे नीचे घुटनो पर बैठा देता है औऱ अपना लंड शबाना के मुंह में डाल कर उसे लंड चूसाने लगता है..

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गौतम - आदिल की चिंता मत कर, तू बस अच्छे से चूस अम्मी.. आदिल नहीं आने वाला..
शबाना बार बार इधर उधर देखकर जोर जोर से गौतम का लंड चूसने लगती है औऱ थोड़ी देर बाद गौतम शबाना के मुंह में झड़ जाता है..


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शबाना गौतम का माल पीकर - अब जा यहां से औऱ फ़ोन करू तभी ही आना..
गौतम शबाना को अपने फ़ोन में कुछ फोटोज जिनमे आदिल ने कुछ देर पहले शबाना की फोटो ओर मुठी मारी थी दिखाकर कहता है - देख तेरे आदिल ने आज तेरी तस्वीर के साथ क्या किया है.
शबाना हैरानी से - तू करवाया होगा उससे ये सब..
गौतम - मैं क्यों करवाने लगा? वो खुद तुझे चोदने की फिराक में है..
शबाना - सच सच बता तेरे आदिल के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है..
गौतम - खिचड़ी क्या पैकेगी अम्मी.. बताया तो मैंने आदिल भी तेरी लेना चाहता है..
शबाना - तूने बताया तो नहीं ना उसे हमारे बारे में?
गौतम - मैंने तुम्हारे सामने ही सब बता दिया.. अब पता नहीं उसने विश्वास किया या नहीं..
शबाना - ठीक है अब जा यहां से.. औऱ सुन..
गौतम - हाँ..
शबाना गौतम को चूमकर - अपना ख्याल रखना..

गौतम जैसे ही घर से बाहर निकलता है उसके फ़ोन पर आदिल का फ़ोन आ जाता है..
आदिल - भाई 15-20 मिनट रसोई के पीछे अम्मी के साथ क्या क्या किया बता तो दे..
गौतम - यार चुम्माचाटी की है बस..
आदिल - चुम्मा हो गया? बहनचोद इतनी जल्दी अम्मी मान गई? साली रांड ही है..
गौतम - बूब्स देख गांडू तेरी अम्मी के जाके बहुत सारी लव बाईट देके आया हूँ..
आदिल - बूब्स पर? वाह भाई मज़े ले रहा है मेरी अम्मी के..
गौतम - चल फ़ोन रख बाद में बात करता हूँ.. फ़ोन कट जाता है..

********

गौतम जब रात को घर आया तो उसने देखा की सुमन औऱ जगमोहन के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा था जिसका कारण वो नहीं जानता था. गौतम के आने पर सुमन अपनेआप को काबू में करती हुई चुप हो गई औऱ जगमोहन भी बिना कुछ बोले हाथ में एक बेग लिए घर से बाहर की तरफ आ गया. गौतम ने अपने पापा जगमोहन से बात करने की कोशिश की मगर जगमोहन किसी की भी सुनने के मूंड में नहीं था वो तुरंत घर से बाहर निकल गया औऱ सुमन अपने कमरे में बेड पर बूत बनी बैठी जगमोहन को जाते हुए देखने लगी वही गौतम के पास दो रास्ते थे एक तो ये कि वो जगमोहन को रोककर उससे पूछता कि वो कहा जा रहा है औऱ उसकी माँ सुमन के साथ झगड़ा क्यों कर रहा था तो दूसरा ये कि वो बेड पर बैठी आंसू बहा रही है औऱ सुमन को अपने गले से लगा कर चुप करवाता औऱ उससे इस झगडे कि वजह जानता..

गौतम ने दूर रास्ते को चुना औऱ जोगमोहन को जाने दिया वही सुमन के पास आकर उसके आंसू पोंछते हुए उसे अपने गले से लगा लिया औऱ उसके आँसुओ का कारण पूछने लगा जिसपर सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया. गौतम बार बार सुमन से पूछे जा रहा था औऱ सुमन चुपचाप गौतम को देखकर उसके चेहरे को चूमती औऱ कुछ नहीं बोलती..

गौतम - हुआ क्या है माँ? आखिर कुछ तो कहो.. ऐसे क्यों चुप बैठी हो.
सुमन - कुछ नहीं ग़ुगु.. तू जा अपने कमरे में, मैं तेरे लिए कुछ खाने को बना देती हूँ..
गौतम - खाना वाना छोडो यार माँ, मैं यहां फ़िक्र से आधा हुआ जा रहा हूँ पहले मुझे पूरी बात बताओ तभी मैं यहां से जाऊंगा वरना यही जमकर बैठा रहूँगा..
सुमन - ग़ुगु तू अभी छोटा है इन सब बातों में मत उलझ, जाने दे.
गौतम - अगर नहीं बताओगी तो मैं आपसे कभी बात नहीं करूँगा औऱ ना ही आपका कहा मानूंगा. आपको मेरी कसम सच सच पूरी बात बताओ मुझे..

गौतम के अपनी कसम देने पर सुमन कुछ नरम सी पड़ गई औऱ गौतम को अपने गले से लगा कर जोर जोर से रोने लगी. उसके सब्र का बाँध टूट चूका था औऱ वो अपने आंसू बहा देना चाहती थी. गौतम ने बड़े ही प्यार से अपनी माँ के आंसू को पोंछा औऱ उसे ढांधस बंधाते हुए सुमन से फिर से पूछने लगा तो सुमन ने सब बताने का फैसला कर लिया औऱ बोली..

सुमन - ग़ुगु.. तेरे पापा अब हमारे साथ नहीं रहेंगे..
गौतम - पर क्यों?
सुमन गौतम को देखते हुए - ग़ुगु.. तेरे पापा ने दूसरी शादी भी की है.. औऱ अब वो वही उसी चुड़ैल के साथ रहेंगे कह रहे थे बस महीने एक बार आएंगे वो भी खर्चा देने.. ये कहते हुए सुमन फिर से रोने लगी..
गौतम - माँ.. पापा नहीं है तो क्या हुआ मैं हूँ ना आपका ख्याल रखने के लिए, चलो चुप हो जाओ औऱ अब ये रोना धोना बंद करो.. वैसे भी वो कोनसा यहां रहते ही थे. मैं तो पहले से जानता था कि वो बाहर किसी औऱ के चक्कर में है आपको नहीं बताया क्युकी मुझे डर था आपको बुरा लगेगा..
सुमन - तू जानता था? पर कैसे?
गौतम - वो छोडो.. आप मिली हो उस चुड़ैल से?
सुमन - नहीं.. कभी नहीं देखा उसे.. पता नहीं क्या जादू किया है उस चुड़ैल ने तेरे पापा पर..
गौतम - कोई जादू नहीं किया माँ, औऱ वैसे भी पापा के वहा रहने से या यहां रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता.
सुमन - ऐसा क्यों बोल रहा है..
गौतम - क्युकी मैं जानता हूँ उनकी बन्दूक को जंग लग चुकी है औऱ अब वो अपनी बन्दुक से गोली नहीं चला सकते..

सुमन गौतम कि बात सुनकर हैरानी औऱ हास्य से मुस्कुरा पडती है औऱ कहती है - शर्म नहीं आती तुझे पापा के बारे में ऐसी बात करते हुए?
गौतम सुमन के होंठों के बिलकुल करीब गाल पर चुम्मा करते हुए दांतो से गाल काट लेटा है औऱ सुमन गौतम कि इस हरकत पर हलकी सी आह निकालकर उसके होंठों को अपनी उंगलियों से पकड़ लेती है औऱ कहती है..
सुमन - देख रही हूँ तू भी दिन ब दिन बहुत बिगड़ता जा रहा है.. कितना जोर से काटा है.. कहा था पुरे दिन आज?
गौतम - कहीं नहीं यार माँ, वो एग्जाम आने वाले है तो उसकी तैयारी के लिए दोस्त के साथ पढ़ाई कर रहा था लाइब्रेरी में बैठकर..
सुमन - चल खाना बना देती हूँ..
गौतम - रहने दो.. आज कहीं बाहर खाने का मन है.. आप अपना मूंड ठीक कर लो फिर चलते है..
सुमन मुस्कुराते हुए - ठीक है.. जैसा मेरा ग़ुगु कहे..
गौतम सुमन की जाँघ पर हाथ रखकर सहलाते हुए - माँ मैं चेंज करके आता हूँ आप कपडे बदल लो..

गौतम अपने रूम में आ जाता है और कपड़े बदलने लगता है तभी उसके फोन पर माधुरी का फोन आता है और माधुरी गौतम से बात करते हुए गौतम को अपनी दशा का बयान करते हुए कहती है कि उसे आज गौतम की सख्त जरूरत है. गौतम माधुरी को मना कर देता है और माधुरी गौतम से मिलने की ज़िद करने लगती है गौतम के बार-बार समझाने पर भी माधुरी उससे मिलने पर अड़ी रहती है और गौतम उसे समझा नहीं पता, आखिर में थक हारकर गौतम माधुरी को एक एड्रेस भेजता है जिसमें किसी होटल का पता होता है माधुरी उसे होटल में मिलने को कहती है गौतम और माधुरी के बीच यह बातचीत होकर फोन कट हो जाता है और गौतम कपड़े बदलकर बाहर आ जाता है कुछ देर में सुमन भी अपने कमरे से बाहर हो जाती है और गौतम के साथ घर से निकल पड़ती है.

गौतम सुमन के साथ किसी होटल के रेस्टोरेंट में जाता है जहां उसने माधुरी को बुलाया था और एक टेबल पर सुमन के साथ बैठ जाता है जहां दोनों आमने-सामने बैठकर खाने का ऑर्डर दे देते हैं आज सुमन ने आगे से नॉनवेज आर्डर किया था और खुद भी बड़े चाव से खा रही थी गौतम को देखकर लग रहा था कि वह आश्चर्य में है और सुमन के व्यवहार पर उसे हैरानी हो रही है मगर वह कुछ नहीं पूछता और सुमन के साथ खाना खाने लगता है. गौतम ने कुछ बाईट ही खाइ थी फिर उसे माधुरी याद आ गई और वह बहाना बनाते हुए सुमन से कहने लगा कि उसे प्रेशर आया है और उसे फ्रेश होने की जरूरत है, यह कहकर गौतम टेबल से उठ गया और रेस्टोरेंट से निकलकर होटल के एक कमरे में पहुंचा जहां माधुरी थी.. माधुरी ने जैसे दरवाजा खोला गौतम माधुरी के लबों से चिपक गया और दरवाजा बंद करते हुए माधुरी को अपने आगोश में लेकर बिस्तर पर ले गया और वहां दोनों का संभोग शुरू हो गया गौतम और माधुरी एक दूसरे को पाने की नीयत से चूम रहे थे और दोनों एक दूसरे को कम सुख देने की भरपूर प्रयास कर रहे थे माधुरी तो जैसे काम के शिखर पर थी उसे तो बस गौतम की कमी खल रही थी जो अब पूरी हो चुकी थी और वो गौतम को अपने से अलग नहीं करने देना चाहती थी.

सुमन ने जब गौतम को बाथरूम की जगह सीडीओ की तरफ जाते देखा तो वह अचरज में पड़ गई और वह सोच लगी कि गौतम फ्रेश होने की बोलकर सीडीओ की तरफ क्यों जा रहा है जबकि बाथरूम तो वही नीचे की तरफ बना हुआ है सुमन को कुछ ठीक नहीं लगा और उसे शक हुआ तो वह गौतम के पीछे-पीछे जाने लगी और पता करने की नीयत से सीडीओ पर आ गई. औऱ सोचने लगी कि गौतम कहां जा रहा है.. सीढ़िया चढने के बाद गौतम उसकी आंखों से ओझल हो गया और सुमन गौतम को यहां वहां देखने लगे मगर गौतम कहीं नहीं मिला.

सुमन ने नीचे वापस जाने का निर्णय लिया तभी उसे ऊपर की तरफ एक आदमी अपना काम करते हुए दिखा जो की होटल का स्टाफ मालूम पड़ रहा था सुमन ने उससे पूछा कि उसने एक लड़के को यहां से आते हुए देखा है क्या? बदले में उस आदमी ने सुमन को जवाब दिया कि एक लड़का अभी-अभी 402 रूम नंबर में गुस्सा है सुमन ये सुनकर थोड़ी सी परेशान हो गई और सोचने लगी कि गौतम 402 रूम नंबर में क्या करने गया होगा. वह रूम के सामने आ गई और रूम के अंदर झांकने की कोशिश करने लगी लेकिन रुम के अंदर देखने का कोई जरिया नहीं था सुमन अंदर झांकने की कोशिश कर ही रही थी कि उस आदमी ने जिसे अभी-अभी सुमन सुमन एड्रेस पूछा था उसने सुमन को अंदर झाँकते हुए देख लिया और उसके पास आकर बोला - ऐसे अंदर कुछ नहीं दिखेगा और एक पीन देते हुए सुमन से कहा कि इसे चाबी की सुराख़ में लगाकर अंदर का नजारा देखा जा सकता है..

सुमन ने पीन लेकर चाबी की सुराग में लगा दिया और घुटने पर बैठ गई अंदर देखने लगी जैसे सुमन ने अंदर का नजारा ददेखा तो उसके पैरों की जमीन हिल गई अंदर गौतम और माथुर के बीच संभोग चल रहा था जिसमें गौतम माधुरी को बिस्तर पर घोड़ी बनाएं चोद रहा था


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सुमन यह नजारा देखकर सोचने लगी कि गौतम उससे बहाना बनाकर यह सब क्यों कर रहा है और जो औरत उसके आगे घोड़ी बनी हुई थी उसकी शक्ल देखते ही सुमन समझ गई कि उसकी उम्र 35 से ऊपर है मगर गौतम को इतनी बड़ी-बड़ी औरतें क्यों पसंद है सुमन ने पहले गौतम को पिंकी के साथ देखा था और अब वह गौतम को माधुरी के साथ देख रही थी जिस तरह से गौतम अपने लंड से माधुरी की प्यास बुझा रहा था उसे देखकर सुमन के दिल में भी हल्का-हल्का दर्द होने लगा और उसकी चुत से हल्की-हल्की पानी के बुँदे बाहर आने लगी उसके दिल में भी अब काम के प्यास आजाद होने लगी थी और सुमन अब यह सोचने की जगह की उसका बेटा क्या कर रहा है और किसके साथ कर रहा है वह खुद का कामोतेजना से ओतप्रोत होकर भरने लगी थी.
गौतम माधुरी के बाल पड़कर उसे बिस्तर पर आडा पटक के चोद रहा था


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ये नज़ारा देखकर सुमन बाहर घुटनों पर बैठी हुई अपने मन को काबू में करती हुई सब देख रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि गौतम अपने से इतनी बड़ी औरत और इतनी खेली खाई लगने वाली औरत को इतनी आसानी से बिस्तर पर चोद-चोद कर रुला रहा था. गौतम ने माधुरी के बाल पड़कर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और उसे अपना लंड चूसाने लगा. यह देखकर सुमन की चुत से पानी बहने लगा और वह दरवाजे के बाहर खड़ी हुई गौतम के लंड को निहारने लगी और उसे आंखों में बसने लगी उसने पिंकी के साथ गौतम की चुदाई के दौरान भी गौतम का लंड देखा था मगर आज उसे और भी ज्यादा साफ नजारे के साथ गौतम के लंड के दर्शन हो रहे थे.. गौतम का लंड बहुत ही सुंदर बलिस्ट और परिपूर्ण लग रहा था जिसे देखकर सुमन की चुत में खुजली चलने लग गई थी मगर वह कुछ नहीं कर सकती थी. सुमन चाहती तो दरवाजा खुलवा कर अंदर जा सकती थी और गौतम और माधुरी को पड़कर हंगामा खड़ा कर सकती थी मगर उसने ऐसा कुछ नहीं किया और वह चुपचाप घुटनों पर बैठकर अंदर रूम में झांकती हुई दोनों की चुदाई देखने लगी.

गौतम ने माधुरी को जिस तरह अपने बस में करके चोदा था उससे माधुरी गौतम की गुलाम हो चुकी थी और आज भी गौतम के कहे अनुसार हर पोज में गौतम को काम संतुष्टि देकर अपने भी मन की इच्छा पूरी करवा रही थी
थोड़ी देर माधुरी को चोदने के बाद गौतम ने माधुरी को घुटने पर बैठा दिया और उसके मुंह पर अपना लंड हिलाते हुए सारा माल उसके मुंह पर निकाल दिया..


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यह देखकर सुमन काम की इच्छा से भर गई और वहां से उठकर वापस नीचे आ गई रेस्टोरेंट में बने लेडीज टॉयलेट में जाकर सुमन ने अपनी उंगली से अपनी प्यास बुझाने का निर्णय किया और कुछ ही देर में उंगली करके बाहर आ गई फिर से वह अपनी टेबल पर बैठ गई और गौतम का इंतजार करते हुए सोचने लगी कि गौतम किस तरह से इतनी अच्छी चुदाई कर लेता है और यह औरत कौन थी जो गौतम से चुद रही थी? देखने से तो वह भी गौतम की मां की बराबर ही लगती थी लेकिन गौतम किस तरह रंडी बनाकर उस औरत को चोद रहा था. आखिर थी कौन? औऱ कैसे गौतम के संपर्क में आइ? और गौतम से अपनी इच्छा या कहो काम इच्छा पूरी करवा रही थी.

गौतम और माधुरी दोनों ही काम के सागर में डुबकी लगाकर बाहर आ चुके थे और अब दोनों ही अपने-अपने कपड़े पहन कर खड़े हो चुके थे और साथ में नीचे आ गए..

गौतम टेबल पर बैठकर सुमन से माधुरी का परिचय करवाते हुए - माँ ये मेरी टीचर है..
सुमन झूठी मुस्कान के साथ - हेलो..
माधुरी भी उसी टेबल पर बैठके - हेलो.. कैसी हो आप..
सुमन - अच्छी..
माधुरी - गौतम बहुत तारीफ़ करता है आपकी.. मेरी माँ ऐसी है मेरी माँ वैसी है.. आज आपसे मिलने का मौका भी मिल गया..
सुमन - ग़ुगु ने कभी आपके बारे में नहीं बताया..
गौतम खाने में तनलीन था..
माधुरी मुस्कुराते हुए - कैसे बताएगा आपने कभी पूछा ही नहीं होगा.
सुमन - आपके गले पर ये निशान? लगता है किसी ने जोर से काटा है आपको..
माधुरी गौतम को देखते हुए - हाँ बहुत जोर से काटा है.. पर इसमें भी मज़ा है आप तो जानती होगी.. आपसे क्या छुपाना..
सुमन - आप यहां अकेली आई है?
माधुरी - हाँ कुछ काम था, पूरा हो गया तो अब चलती हूँ.. आप दोनों अपना खाना एन्जॉय कीजिये..
सुमन - ज़ी..

माधुरी गौतम और सुमन से विदा लेकर बाहर आ जाती है और माधुरी रेस्टोरेंट से निकल जाती है जबकि सुमन माधुरी को जाते हुए तब तक देखने लगती है जब तक कि वह उसकी आंखों से दूर नहीं हो जाती.. सुमन की आंखों में क्रोध और जलन साफ-साफ दिखाई दे रही थी गौतम से माधुरी का मिलन सुमन को जरा भी नहीं भाया था लेकिन सुमन गौतम और माधुरी को पड़कर या उनसे बात करके कि वह दोनों यह सब क्यों कर रहे हैं? नहीं पूछना चाहती थी..

सुमन जानती थी कि गौतम को उसकी बातों का बुरा लगेगा और अगर वह भी उससे रूठ गया तो सुमन कैसे गौतम के बिना जी पाएगी. मगर न जाने क्यों सुमन को अब पहले से ज्यादा गौतम पर लाड और प्यार आने लगा था वह चाहती थी कि गौतम खुश रहे और उसे दुनिया की हर खुशी मिले.. उसके मन में यह भाव अब और ज्यादा उमड़ रहे थे. यह भाव ममता से कहीं ज्यादा आगे के थे सुमन गौतम की ख़ुशी के लिए अब और भी ज्यादा जतन करने का इरादा करती थी.

गौतम - माँ खाना केसा है?
सुमन - बहुत अच्छा..
गौतम - लो ना.. ये मटन खाओ.. बहुत स्वाद बना है..
सुमन खाते हुए - हम्म.. अच्छा है..

गौतम और सुमन दोनों खाना खाने के बाद टेबल से खड़े हो जाते हैं और गौतम बिल पे करके सुमन के साथ रेस्टोरेंट से बाहर आ जाता है जहां गौतम पार्किंग में लगी अपनी बाइक निकाल कर सुनसान पड़ी सड़क पर बाहर आ जाता है और सुमन उसके पीछे बैठने लगती हैं. गौतम थोड़ी देर बाइक चला कर रास्ते में एक सुनसान पड़ी सड़क जहां किसी भी इंसान का कोई नामो निशान नहीं था उसके किनारे अपनी बाइक रोक लेता है और गौतम के बाइक रोकने पर सुमन से पूछता है कि क्या हुआ तब गौतम कहता है कि उसे बाथरूम आया है गौतम बाइक से उतरकर सड़क के किनारे बाथरूम करने लगता है और सुमन बाइक से उतरकर गौतम को बाथरूम करते हुए देखने लगती है गौतम का लंड उसकी आंखों के सामने था मगर सुमन के सामने गौतम के पीठ होने के कारण उसे देख नहीं पा रही थी.. सुमन के मन में उसे देखने की इच्छा थी मगर वह क्या कर सकती थी वह खुलकर गौतम से उसका लंड दिखाने के लिए का भी नहीं सकती थी और गौतम यह जान भी नहीं पा रहा था कि उसकी मां सुमन उसके लंड को देखने के लिए बेताब है और उसे मन ही मन में चाहने लगी है कुछ देर बाद गौतम बाथरूम करके वापस बाइक के पास आ गया जहां उसकी मां समान खड़ी थी सुमन गौतम को देखे जा रही थी और उसमें ही कोई हुई थी..

गौतम - माँ सिगरेट लाई हो?
सुमन अपने पर्स से सिगरेट का पैकेट औऱ लाइटर गौतम को देते हुए - लो..
गौतम एक सिगरेट निकालकर अपने होंठों पर लगा लेता औऱ सुमन गौतम के हाथ से लाइटर लेकर अपने हाथ से मुस्कुराते हुए गौतम के होंठों पर लगी सिगरेट सुलगा देती है गौतम अपनी माँ के इस व्यवहार से चकित था मगर उसने कुछ नहीं कहा..

गौतम दो कश लेकर सिगरेट सुमन को दे देता है और सुमन भी दो तीन कश लेकर वापस से सिगरेट गौतम को दे देती है दोनों के बीच इस दौरान कोई बात नहीं होती मगर आंखों ही आंखों में बहुत सी बातें एक दूसरे को समझ आ जाती है जो बातें मुंह से कहने में दोनों को ही शर्म आ रही थी..

सिगरेट के खत्म होने पर गौतम वापस अपनी बाइक स्टार्ट करके उसे पर बैठ गया और सुमन भी उसके पीछे बाइक पर बैठ गई और दोनों वापस घर आ गए..
सुमन और गौतम अपने-अपने कमरे में जाकर सोने की तैयारी कर रहे थे और दोनों ने हीं अपने-अपने कपड़े बदल दिए थे रात के 11:00 बज रहे थे गौतम को जब अपने कमरे में नींद नहीं आई तो वो सुमन के कमरे में आ गया और उसने देखा कि सुमन भी आंखें खोलकर बिस्तर पर करवटें बदलती हुई इधर-उधर देख रही है अब तक दोनों में कोई बात नहीं हुई थी मगर सुमन ने गौतम को कमरे के दरवाजे पर खड़ा देखा तो वह हैरानी से बोली..

सुमन - क्या हुआ ग़ुगु?
गौतम - माँ मैं आपके साथ सो जाऊ?
सुमन मुस्कुराते हुए - इसमें पूछने की क्या बात है बेटा आजा.. सुमन ने अपनी दोनों बाहे फैला कर ऐसा कहा था औऱ गौतम आगे बढ़कर सुमन के गले से लग गया औऱ बिस्तर पर सुमन औऱ गौतम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भरे लेट गए..
गौतम सुमन के चुचे पर हाथ रखकर - माँ..
सुमन जानती थी गौतम उससे क्या पूछने वाला है इसलिए सुमन खुद ही गोतम से बोली - दूदू पीना है..
गौतम की आँखों में चमक आ गई औऱ वो बोला - हम्म..
सुमन ने अपना ब्लाउज औऱ ब्रा उतार कर बिस्तर के कोने पर रख दी औऱ गौतम को चुचे चुसवाने की नियत से इशारा कर दिया गौतम ने भी अपनी टीशर्ट उतारकार साइड में रख दी औऱ दोनों माँ बेटे कमर से ऊपर पूरी तरह नंगे होकर बिस्तर पर अपनी मर्यादा भूल रहे थे..

गौतम सुमन के चुचे पकड़कर मसलते हुए उनका दूध पी रहा था औऱ बार बार निप्पल्स को मरोड़ कर सुमन की काम पिपासा बढ़ा रहा था. आज गौतम जिस तरह से सुमन के बूब्स पर लव बाईट दी थी उससे सुमन को साफ पता चल गया था की अगर गौतम को उसकी चुत मिल जाए तो वो उसे भी चोद देगा.. मगर सुमन गौतम की मनमानिया सहते हुए अपने बूब्स को चुसवाने औऱ उनपर होने वाली लव बाईट का मज़ा ले रही थी..

करीब आधे घंटे गौतम ने सुमन के चुचो का स्वाद चखा औऱ उनपर अपने प्यार की छाप छोड़ी फिर सुमन ने गौतम से कहा..
सुमन - ग़ुगु.. अब तक मन नहीं भरा तेरा?
गौतम - क्यों.. आपको नींद आ रही है माँ?
सुमन - नहीं बस ऐसे ही पूछा बेटा.. तुम जितना चाहो मम्मा का दूदू पी सकते हो..
गौतम - माँ एक गेम खेलोगी मेरे साथ? ट्रुथ एंड डेर वाला..
सुमन - ठीक पर कोई फालतू सवाल या काम नहीं बताना मुझे समझा?
गौतम सुमन के ऊपर आता हुआ - पक्का माँ.. अच्छा पहले eye कोंटेक्ट करते है जिसने पहले पलके झुका ली वो हार जाएगा..
सुमन - ठीक है.. चलो..

बिस्तर पर सुमन पीठ के बाद लेटी हुई थी और सुमन के ऊपर गौतम लेटा हुआ था गौतम के सीने में सुमन के निपल्स कड़क होकर इस तरह चुब रहे थे जैसे कोई तीर चुभ रहा हो जिसमें गौतम का बहुत आनंद आ रहा था सुमन भी इस बात से पूरी तरह वाकिफ थी और जानती थी कि गौतम को उसके ऊपर इस तरह लेटने में मजा आ रहा है.. सुमन औऱ गौतम दोनों कमर से ऊपर नंगे थे.. सुमन ने अपने दोनों हाथ गौतम के गले में डाल दिया और उसकी आंखों में देखने लगी.. सुमन ज्यादा देर तक अपनी आंखें खोल पाने में सफल नहीं रही और उसने अपनी पलके झुका कर झपका दी.. जिससे वो हार गई..
गौतम मुस्कुराते हुए - बताओ माँ ट्रुथ या डेर?
सुमन - ट्रुथ..
गौतम - शादी पहले कितने बॉयफ्रेंड थे आपके?
सुमन - ये क्या सवाल है.
गौतम - इतना आसान सवाल तो है.. बताओ ना..
सुमन - 2 थे.. एक स्कूल में एक बाहर..
गौतम - सेक्स किया था आपने उनके साथ?
सुमन - ग़ुगु एक ही सवाल करना था वो हो गया..
गौतम - माँ बताओ ना.. वही सवाल है अभी..
सुमन शरमाते हुए - हम्म किया था.. अब चलो वापस आँख मिलाओ.. वापस खेलते है..
सुमन और गौतम वापस से आई कॉन्टेक्ट खेलने लगे जिसमें वापस से सुमन की हार हो गई..
गौतम - बोलो.. ट्रुथ या डेर?
सुमन - तुम पता नहीं क्या पूछोगे.. इस बार डेर..
गौतम - अच्छा तो आपका डेर ये है की आप मुझे 2 मिनट लीप kiss करोगी..
सुमन हँसते हुए - सीधा बोल ना तुझे मेरे बोबो के बाद होंठ चाहिए चूसने के लिए.. बहुत बिगड़ गया है तू.. जवानी चढने लगी है तुझे..


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सुमन बातें कर रही थी कि गौतम ने सुमन के होठों को अपने होठों में ले लिया और उसे चूमने लगा सुमन ने उसका कोई विरोध नहीं किया और प्यार से हंसते हुए मुस्कुराकर गौतम को अपने होंठ चूसाने लगी.. गौतम और सुमन के बीच चुंबन बहुत गहरा हो चुका था दोनों ही एक दूसरे को भर भर के अपने लबो के जाम पिला रहे थे और एक दूसरे के होंठों से मदिरा का प्याला पी रहे थे, 2 मिनट लंबा होने वाला चुंबन कब 10 मिनट से ऊपर हो गया दोनों को पता ही नहीं चला और दोनों आप एक दूसरे के मुंह का स्वाद लेने में और देने में लगे थे दोनों की जीभ वापस में ऐसे लड़ रही थी जैसे कुश्ती के अखाड़े में पहलवान लड़ते हैं. सुमन काम के सागर में इतनी डूब गई थी कि उसने गौतम के लबो को चूमते हुए और चूसते हुए उसपर एक जोर की लव बाईट कर ली जिससे गौतम की आवाज निकल गई और दोनों का चुंबन टूट गया..
सुमन - तू ठीक है ना ग़ुगु? गलती से काट लिया बेटा.. माफ़ कर दे मम्मा को.. देखा मुझे..
गौतम - कुछ नहीं हुआ माँ.. सब ठीक है..
सुमन - सॉरी बेटू.. इतना जोर से काट लिया तेरे होंठों को..
गौतम सुमन के निप्पल्स मसलते हुए - कोई बात नहीं माँ.. वैसे किसिंग बहुत अच्छा करती हो आप.. कहा से सीखा बताओ ना?
सुमन आह भरते हुए - कहीं नहीं बेटा.. तू भी बहुत अच्छा चूमता है.. दो मिनट से कब दस मिनट हो गए पता ही नहीं चला.
गौतम - आओ माँ वापस खेलते है..
सुमन - नहीं अब नहीं.. ना जाने तू क्या क्या पूछेगा औऱ क्या क्या करवा लेगा मुझसे..
गौतम सुमन की गांड पर हाथ रख देता है औऱ गांड मसलते हुए कहता है - प्लीज ना माँ..
सुमन भी काम की अग्नि में जल रही थी उसने गौतम का हाथ अपनी गांड से नहीं हटाया औऱ गोतम से बोली - ग़ुगु तू ना बहुत शैतान हो गया है.. आजकल बिलकुल भी मेरा कहा नहीं मानता.. चल ठीक ही मिला ले आँखे.. इस बार मैं तुझे हरा के रहूंगी..

गौतम और सुमन फिर से ऑइ कांटेक्ट करते हैं और इस बार वापस गौतम सुमन को हरा देता है
गौतम - बड़ी आई थी आप मुझे हराने वाली.. चलो बताओ क्या लोगी..
सुमन मुस्कुराते हुए - ट्रुथ..
गौतम - अच्छा तो बताओ पापा औऱ आपके बीच कब से सेक्स नहीं हुआ..
सुमन प्यार से गौतम के होंठ पकड़कर - कैसे कैसे सवाल पूछ रहा है, लगता है मार खाने का इरादा है मेरे ग़ुगु आज..
गौतम उदास मुंह बनाकर - नहीं बताना तो ठीक है जाने दो, सो जाते है..

सुमन ने गौतम का चेहरा अपने हाथ में ले लिया औऱ उसके होंठों पर एक के बाद एक 8 चुम्मे कर डाले औऱ फिर प्यार से बोली - आठ साल हो गए.. बस.. अब चल अच्छे बच्चे की तरह सो जा.. औऱ कोई ऐसी वैसी शरारत मत करना वरना बहुत मारूंगी तुझे...
गौतम - ठीक है जैसा आप कहो.. एक बात बोलू..
सुमन - हम्म..
गौतम बूब्स पकड़कर निप्पल्स से खेलते हुए - आपके बूब्स पर टैटू बहुत अच्छा लगेगा..
सुमन - तू कहेगा तो बनवा लुंगी.. पर बनता कहा है टेटू?
गौतम- उसकी फ़िक्र आप मत करो मैं आपको ले चलूँगा मैं जानता हूँ जो ये बनाता है..
सुमन - अच्छा ठीक है पर कोई सस्ता वाला देखना..
गौतम - उसकी चिंता आप मत करो.. वैसे आपके इंस्टा अकॉउंट का क्या हुआ?
सुमन - वो मैंने डिलीट कर दिया..
गौतम - पर क्यों? इतने सारे फॉलोअर थे आपके..
सुमन - बस ऐसे ही ग़ुगु.. लोग बहुत गंदे massage करते थे..
गौतम - कब डिलीट किया
सुमन - एक हफ्ता हो गया..
गौतम - कोई बात नहीं.. आपका मन हो तो वापस बना लेना.
सुमन - हम्म.. चलो अब मम्मा को गुड नाईट किस दो औऱ सो जाओ..
गौतम सुमन के होंठ चूमने लगता है औऱ सुमन गौतम के चेहरे को पकड़ के चूमती हुई अपनी जीभ वापस गौतम के मुंह में डाल देती है औऱ उसे चूमने लगती है.. दोनों एकदूसरे को चूमने के बाद एक दूसरे से लिपटकर सो जाते है..


नींद आते ही गौतम को सपने में एक गाँव दीखता है जहाँ दो औरत तेज़ी से कहीं जा रही थी.. गौतम को ऐसा लग रहा था जैसे उसे ये गाँव औऱ जगह देखी हुई है औऱ वो उन औरतों को जानता है.. गौतम सपने में आगे जो देखता उससे वो नींद में बड़बड़ाने लगता है..
 
Update 14

बिस्तर पर चादर के नीचे सुमन और गौतम कमर के ऊपर नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए एकदूसरे को बाहों में भरकर सोने लगे थे. सुमन प्यार से गौतम का चेहरा अपने सीने से लगाकर उसके सर के ऊपर हाथ फेर कर उसके बाल सहलाती हुई उसे सुला रही थी जिससे गौतम को कुछ ही देर में नींद आ गई और वह सपनों के सागर में खो गया.. वह सपना देखने लगा औऱ सपने में उसने देखा की एक औरत जो करीब 60 साल की है जल्दी में दूसरी औरत से बात करती हुई कहीं जा रही थी..

अरे कहा था ना ताई वही रुक जाओ.. अब देखो कैसी हालात हो गई है लता की..
तू ज्यादा बात मत कर शान्ति.. जल्दी से गर्म पानी करवा के ले आ.. लगता है कुछ ही देर में बच्चा होने वाला है..
शान्ति - ठीक है ताई.. अभी करवा के लाती हूँ..

शांति ताई को अंदर लता के पास छोड़कर खुद बाहर आ जाती है और बाहर परेशानी में इधर-उधर घूम रहे लता के पति धूपसिंह से कहती है कि उसे गर्म पानी चाहिए धूपसिंह शांति को चूल्हे की तरफ इशारा करते हुए कहता है गर्म पानी किया हुआ पड़ा है.. लता चूल्हे से गर्म पानी का भगोना उठा कर कमरे के अंदर आ जाती है और लल्ली ताई को पानी का भगोना दे देती है..

कुछ देर बाद लता एक जुड़वा भाई बहन को जन्म देती है जिसे हाथ में लेकर ताई शांति को देखती और शांति भी ताई को देखने लगती है..

लता बच्चों को जन्म देकर बेहोश हो चुकी थी और उसे हो रहे दर्द से थोड़ा आराम मिल गया था..
शान्ति - ताई.. मैं धुप भाईसाब को बता के आती हूँ..
लल्ली ताई - अरे रुक कम्भख्त..
शांति - क्या हुआ ताई इतनी ख़ुशी की खबर है धुप भाईसाब कुछ ना कुछ इनाम जरूर दे देंगे खुश होकर..
लल्ली ताई - अरे इनाम से कब तक काम चलेगा?
शान्ति - तो ताई?

लल्ली ताई - एक काम कर.. इस बच्ची को तू पीछे के दरवाजे से बाहर ले जा औऱ घर में रख, 11 कोस पर जो नोगी गाँव है वहा के साहूकार के यहां बच्चा नहीं है उसने कहा भी था बच्चा लेने के लिए.. वो बड़ी औऱ मोटी रकम देगा. जिससे हम आराम से बैठके खा पी सकते है..

शान्ति - सही कह रही हो ताई.. वैसे भी कोनसा धुप भाईसाब औऱ लता को पता लगने वाला है इस बात का.. लाओ दो मुझे बच्ची मैं अभी पीछे के रास्ते से उसे ले जाती हूँ..

लल्ली ताई - संभालके.. बहुत ध्यान से कोई देख ना ले.. बड़ी जिम्मेदारी का काम है.. मैं बच्चे को धुप सिंह के पास बाहर ले जाती हूँ.. थोड़ी देर में लता को भी होश में आ जायेगी..
शांति - हां ताई.. चलो..

लल्ली ताई हाथ में बच्चा लिए कमरे से बाहर आ जाती है और दूर पेड़ के नीचे दांतों में उंगलियां दबाए इधर से उधर घूम रहे धूप सिंह को बुलाते हुए कहती है..
लल्ली ताई - अरे ओ धुपया.. आ जाओ.. लल्ला हुआ है लल्ला.. देख केसा चाँद खिला है तेरे आँगन में..

धुपसिंह लल्ली ताई के पास आ कर मुस्कुराते हुए बच्चे को अपनी गोद में ले लेता है औऱ अपने हाथ से सोने की अंगूठी निकालकर लल्ली को दे देता है..
लल्ली ताई - अरे इस अंगूठी से क्या होगा धुपया.. पहली बार में लल्ला हुआ है कुछ औऱ भी दिओ..
धुपसिंह बच्चे को देखता हुआ - क्या चाहिए ताई..
लल्ली ताई - अब तुझे क्या कहु धुपया.. तू जानता है मेरी हालात ना खाने को है ना पहनने को.. इस अंगूठी से कुछ दिन काम चल जाएगा मगर फिर वही हालात होगी.. तू तो जागीरदार के दिए खेत भी जोतता है.. 3-4 महीने का अनाज दे दे तो बरसात के दिन आराम से कटे..

धुपसिंह - 3-4 महीने क्यों ताई तू साल भर का अनाज लेजा..
लल्ली ताई - तेरा भाला हो धुपया.. आज तेरे माँ बापू जिन्दा होते तो बहुत खुश होते.. अब जा अपनी लुगाई के पास.. थोड़ी देर में वो होश में आ जायेगी.. अब तुझे ही ख्याल रखना है माँ बेटे दोनों का..

इतना कहकर ताई वहां से चली जाती है और धूपसिंह कमरे के अंदर जाकर लता के करीब बैठ जाता है और बच्चे को खिलाता हुआ लता के होश में आने का इंतजार करता है कुछ ही पलों में लता भी होश में आ जाती है और दर्द से राहत पाकर मुस्कुराती हुई धूपसिंह और उसके गोद में बच्चे को देखती हैं.

धुपसिंह - बेटा हुआ है लता.. शकल तेरे ऊपर गई है..
लेता - मैंने कहा था मैं माइके से किसीको बुला लेती हूँ आपको कितना कस्ट हो रहा है मेरे कारण..
धुपसिंह - तू आराम कर.. ये बातें फिर कभी करना..

दूसरी ओर जैसे ही शांति बच्चों को लेकर घर के पिछले दरवाजे से निकली वह इधर-उधर से छुपती छुपाती हुई जंगल के मुहाने पर पहुंच गई. शान्ति को सामने से जागीरदार के सैनिक करते हुए दिखाई दिए तो वह थोड़ा सा जंगल के अंदर आ गई और वहीं से किनारे किनारे अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए चलने लगी.. मगर शांति को पता ही नहीं चला कि वह जंगल के अंदर किनारे किनारे नहीं बल्कि थोड़ा सा और अंदर आ चुकी है जहां जंगल के जानवर उसके आसपास मंडरा रहे थे और परिंदे रात के इस पहर जंगल को अपनी आवाजों से और भयानक कर रहे.

शांति ने रात के अंधेरे में भी अपने से थोड़ा सा दूर एक बाघ को देख लिया जिसकी आंखें चमक रही थी मगर उस बाघ का ध्यान कहीं और था. शांति की हालत खराब हो गई उसके बदन में कंपन होने लगा और उसे डर था की कहीं बच्ची अब रो ना दे.. क्योंकि अगर उसने रोना शुरू कर दिया तो बाघ निश्चित ही उसके यहां होने का अनुमान लगा लगा और अपने नुकीले पंजों और दातों से उसकी हत्या करके उसे खा जाएगा..

शांति धीरे-धीरे पीछे हटने लगी और पीछे हटते हुए उसका पर एक पत्थर से टकरा गया जिससे वह जमीन पर गिर गई और बच्ची भी नीचे गिर गई और रोने लगी.. बच्ची की आवाज करने पर शांति डर से तिलमिला गई और अपनी जान बचाने के लिए बच्ची को वहीं छोड़कर पीछे की ओर भागने लगी.

शांति तब तक भागती रही जब तक उसके पैरों ने उसका साथ नहीं छोड़ दिया.. शांति भगते भगते जंगल से बाहर आ चुकी थी और सड़क से एक किनारे आकर एक जगह बैठ गई औऱ लम्बी लम्बी सांस लेने लगी.. शांति की साँसे बहुत तेज ऊपर नीचे हो रही थी और उसका मन घबराहट के मारे उथल-पुथल हो रहा था. शांति अपनी जान बचाकर भाग आई थी मगर उसे यह ध्यान नहीं था कि वह उस बच्ची को वहीं छोड़कर आ चुकी है और बाघ उसकी आवाज सुनकर उसके निश्चित ही करीब आ जाएगा और उसे मार डालेगा.

शांति ये सोच सोच कर रोने लगी थी कि उसने एक बच्ची को मौत के मुंह में डाल दिया है और वह खुद डरपोक की भांति अपनी जान बचाकर भाग आई है.

लल्ली ताई जब धूपसिंह के घर से निकली और अपने घर आ रही थी तभी उस रास्ते में शांति डगर के किनारे बैठी हुई रोती हुई दिखाई पड़ी.. ताई ने आगे बढ़कर शांति से उसके रोने की वजह पूछी और उसे चुप करते हुए क्या हुआ बताने को कहा तो ताई के पूछने पर शांति ने साफ-साफ शब्दों में अपने साथ जो कुछ हुआ उस कहानी को बयां कर दिया जिससे ताई भी शांति के साथ में वही बैठ गई और जो कुछ हुआ उसपर अफसोस करने लगी. दोनों ने काफी देर तक वहीं बैठकर एक दूसरे को संभाला और फिर दोनों ने एक मत होकर वापस जंगल में जाकर उसे बच्ची को तलाशने की सोची.. दोनों डरते-डरते धीरे-धीरे जंगल में कदम बढ़ाती हुई जा रही थी..


शांति के बच्ची को छोड़कर भाग जाने के बाद बाघ के कानों में जब बच्ची के रोने की आवाज पड़ी तब बाघ उस बच्ची के करीब आने लगा और जब बाघ ने उस बच्ची को जमीन पर पड़ा रोता हुआ देखा तो उस बाग ने बच्ची जिस कपड़े में थी उस कपड़े को अपने मुंह से पकड़ लिया और कपडे के साथ बच्ची को उठाकर थोड़ा सा दूर जंगल की जमीन पर बेसुध होकर सो रहे एक आदमी के पास ले आ गया..

आदमी मटमेली जमीन पर इस तरह लेटा हुआ सो रहा था जैसे कोई राजा मखमली बिस्तर पर सोता है. बच्ची के रोने की आवाज से उस आदमी की नींद नहीं खुली मगर बाघ के पंजों की छुअन से उस आदमी की नींद टूटी गई.. आदमी ने जब बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो वह उठ कर बैठ गया और अपने पास रखें एक पानी के भरे सुराही जैसे चमड़े के अंदर से पानी निकाल कर अपने मुंह पर मरता हुआ अपने सामने खड़े बाग और बगल में जमीन पर पड़ी रोती हुई बच्ची को देखने लगा..

आदमी ने बाघ को देखते हुए उससे पूछा - यह किसे अपने साथ ले आया बालम.. और फिर उस बाघ के सर पर हाथ रखकर अपनी आंखें बंद करते हुए जो कुछ घटा था सारा दृश्य देख लिया औऱ माजरा समझ लिया..

आदमी के बदन पर फटे पुराने मट मेले कपड़े थे सर औऱ दाढ़ी पर बाल बड़े-बड़े और देखने से लगता था कि आदमी कई दिनों से नहीं नहाया है हालत से दिन हीन लगने वाला ये आदमी इतने भयानक जंगल में अकेला एक कुटिया बनाकर रहता था और उसने जिस बाघ को पाला हुआ था उसका नाम बालम रखा था.. जिस तरह से उस आदमी ने बाघ के सर पर हाथ रखकर बाग के दिमाग की याददास्त देख ली थी उससे यह आदमी कोई साधारण व्यक्ति नहीं मालूम पड़ता था.. कद काठी और चेहरे से साधारण औऱ सामान्य से भी कम दिखने वाला यह आदमी जिस तरह से इतनी बेपरवाही और निडरता से इतने बयानक जंगल में विहार कर रहा था उससे लगता था कि यह कोई चमत्कारी आदमी है..

आदमी ने बच्ची को उठा कर लिया और अपनी गोद में लेकर अपनी कुटिया की तरफ आ गया जहां पीछे-पीछे बाघ भी उसके साथ आ चूका था.. उस कुटिया और उसके आसपास की जगह को देखने से ऐसा लगता था जैसे वह आदमी कई बरसो से कोई कठोर साधना कर रहा है और उसी में तनलीन रहता है.. आदमी को कुछ भी कहा जा सकता था लेकिन कोई भी संज्ञा उसके लिए परिपूर्ण नहीं थी वह तांत्रिक अघोरि या औघड़ कुछ भी हो सकता था.

लल्ली ताई औऱ शान्ति उस जगह तक आ गए जहां बच्ची गिरी थी लल्ली ताई और शांति को बच्ची कहीं नहीं मिली.. काफी देर तक ढूंढने के बाद दोनों ने यह समझा कि वह बाघ उस बच्ची को उठाकर ले गया है और उसको मार के खा चुका है वापस जंगल से बाहर आ गई और इस बारे में किसी से भी बात न करने और कुछ भी नहीं बोलने का निश्चय किया और एक दूसरे से वादा करते हुए इस बात को यहीं पर भूल जाने का निर्णय किया.

वही आदमी ने बच्ची को अपने साथ रख लिया और उसे अपने बच्चे की तरह पढ़ने लगा. बच्ची जैसे-जैसे बड़ी हुई वो उस आदमी को बाबा कहकर पुकारने लगी और अपना असली बाप समझती थी. बच्ची ने उस आदमी से उसकी विद्या सीख ली.. दोनों जंगल में किसी कुटिया में रहने लगे थे और हंसी खुशी से अपना जीवन जी रहे थे आदमी ने बच्ची को एक नाम भी दिया था.. आदमी बच्ची को उसके शीतल स्वाभाव के कारण मृदुला कह बुलाता था.. मृदुला ने कुटिया को महल की तरह सजाया था औऱ अब उस आदमी जिसे बाप वो मानती थी उसको रोज़ नहाने धोने औऱ साफ रहने को मजबूर करती थी.. आदमी भी अपने जीवन में मृदुला के आने से बहुत खुश था उसकी साधना पहले से अच्छी होने लगी थी औऱ उसने मृदुला को अपनी बेटी मानकर जीना शुरू कर दिया था उसने मृदुला को बहुत कुछ ऐसा सीखा दिया था जिससे मृदुला अकेली ही पूरी फौज का काम तमाम कर सकती थी औऱ बड़े बड़े भूत प्रेत को अपनी मुट्ठी में कर सकती थी..

दिन गुजरते गए, मौसम बदलते गए, साल दर साल बीतते गए औऱ मृदुला का जोबन खिलने लगा.. उसके अंग इस तरह खिलकर फूटने लगे जैसे गुलाब की कली खिलकर फुटती है.. मृदुला के उतार चढाव कामदेवी का वरदान थे जो अब मृदुला के मन को काम की औऱ बढ़ाने लगे थे.. वो अब अपनी उम्र के अठरवे साल पर आ चुकी थी..

आदमी को इसकी बिल्कुल भी भनक नहीं थी वह इसी तरह अपनी साधना में तनलीन रहता और सुबह शाम मृदुल के हाथ का पकाया भोजन खाकर आराम करता.. मृदुला ने अक्सर उस आदमी से जंगल के बाहर की दुनिया देखने के लिए आग्रह किया.. मगर आदमी अपनी साधना अधूरी छोड़कर जाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था और हर बार मृदुला को कुछ ना कुछ कह कर या बहाना बनाकर उसकी बात को टाल देता.

एक दिन जब मृदुल पानी का घड़ा लिए नदी की तरफ जा रही थी तभी उसने अपने जीवन में पहली बार अपने पिता के अतिरिक्त किसी आदमी को देखा जो नदी के मुहाने पर बैठा हुआ पानी पी रहा था. रंगरूप और कदकाटी में हसीन तरीन दिखने वाला यह लड़का मृदुला के मन को पहली नज़र में ही भा गया था..

लड़का देखने से करीब 22 साल का लगता था चेहरे पर दाढ़ी मूछ नहीं थी चेहरा साफ औऱ खिला हुआ था और कंधे तक लंबे बाल थे एक नई सी शाल उसने ओढ़ रखी थी.. अपनी हथेलियों में नदी का पानी भरके पिता हुआ वह लड़का मृदुला के मन को लुभा रहा था. मृदुला 18 साल की हो चुकी थी और अब उसे कामइच्छा औऱ प्रेम का भाव परेशान करने लगा था.

मृदुला ने जब उसे लड़के को पानी पीकर नदी से दूर जाने के खड़ा होता देखा तब वह उस लड़के के पास आ गई और उसके पीछे कुछ दूर खड़ी होकर कर बोली..

मृदुला - कौन हो तुम?
लड़का हैरानी से - तुम कौन हो औऱ इतने घने के बीच यहां क्या कर रही हो? तुम्हे पता नहीं यहां कितने खूंखार जानवर रहते है.. (लड़का मृदुला के जोबन को देखकर उसपर मोहित हो चूका था मगर उसके अंदर हैरत भी थी)
मृदुला - यहां पहली बार आये हो?
लड़का - हाँ पर तुम अकेली यहां क्या कर रही हो?
मृदुला - मैं यही रहती हूँ अपने बाबा के साथ.
लड़का हैरानी से - इस जंगल में?
मृदुला - हाँ.. तुम कहा रहते हो?
लड़का - मैंरा तो कोई ठिकाना नहीं.. यहां वहा घूमता हूँ.. गलती से जंगल में आ गया औऱ रास्ता भूल गया. प्यास लगी थी तो पानी पिने लगा..
मृदुला करीब आते हुए - नाम क्या है तुम्हारा?
लड़का - रागी..
मृदुला हसते हुए - नाम रागी है औऱ बैरागी सा भेस बनाया है..
लड़का मुस्कुराते हुए - तो फिर बैरागी ही कहकर पुकार लो.. तुम्हारा नाम क्या है?
मृदुला - मेरा नाम मृदुला है बैरागी..
बैरागी - ठीक है मृदुला चलता हूँ.. अगर वापस कभी मिलना हुआ जरूर मिलूंगा.
मृदुला - पर तुमने तो कहा कि तुम्हारा कोई ठिकाना नहीं है.. फिर कहा जा रहे हो..
बैरागी - बंजारा हूँ एक जगह ज्यादा देर तक रुकू तो ज़ी उचटने लगता है.. जाना तो पड़ेगा..
मृदुला के चेहरे पर ख़ुशी का जो भाव था वो अब गंभीर हो गया था.. उसने बैरागी के औऱ करीब आते हुए कहा - अगर मैं ना जाने दू तो?
बैरागी मुस्कुराते हुए - मुझे यहां रोक कर क्या करोगी.. मैं तुम्हारे किस काम आ सकता हूँ?
मृदुला - बाबा ने बताया था इस जंगल के बाहर लोग शादी ब्याह करके साथ रहते है.. तुम मुझसे ब्याह कर लो.. फिर हम भी साथ रहेंगे..
बैरागी हसते हुए - तुम्हे शर्म नहीं आती लड़की होकर ऐसी बात करते हुए?
मृदुला - शर्म क्यों आएगी.. मैंने कुछ गलत तो नहीं किया..
बैरागी - ठीक है.. मेरे तो आगे पीछे कोई नहीं है.. तुम्हारे तो बाबा है उनसे तो पूछ लो..
मृदुला - चलो साथ में चलकर पूछते है..
बैरागी - अगर मैंने झूठ बोलकर तुम्हारे बाबा को मना लिया तो?
मृदुला - तुम मेरे बाबा के सामने झूठ बोल ही नहीं सकते..
बैरागी - ऐसा क्यों?
मृदुला - मेरे बाबा आँख पढ़कर अतीत जान लेते है.
बैरागी - ऐसी बात है तो चलो.

मृदुला जब बैरागी को अपने साथ लेकर अपनी कुटिया के बाहर आई तब उसे उसके पिता कहीं जाने की तैयारी करते हुए दिखे.
मृदुला ने अपने पिता से पूछा कि वो कहां जाने की तैयारी में है उसके पिता ने सामने खड़े बैरागी और मृदुल को साथ में देखकर सारा माजरा समझ लिया और उनसे कहा की उनकी साधना का ये चरण पूरी हो चुकी है और उन्हें अपनी साधना की आखिरी चरण पूरी करने के लिए यहां से बहुत दूर जाना पड़ेगा.
इसीके साथ उन्होंने यह भी कहा कि वह बैरागी और मृदुला दोनों के मन से सहमत है और वो आज शाम जाने से पहले पुरानी रीती से दोनों ब्याह करवा देगा..

उस बूढ़ा हो चुके आदमी ने मृदुला और बैरागी का ब्याह एक पुरानी रीति से करवा दिया और खुद कुटिया से जरूरी सामान लेकर एक रास्ते चल दिया.. बूढ़े आदमी ने मृदुला से वापस मिलने का वादा किया और उसे भरोसा दिया कि वह जहां भी रहेगा मृदुला से मिलने जरूर आएगा.. मृदुला ने भी रोते हुए अपने पिता को विदाई दी और अपना नया जीवन शुरू करने के लिए बैरागी के साथ उस कुटिया में रहने लगी..

एक दोपहर के उजाले में जब कुटिया के अंदर बैरागी और मृदुला प्रेम प्रसंग कर रहे थे तब उन्हें कुछ लोगों के आने की आहट सुन दी और दोनों प्रेम करना छोड़कर बाहर आ गए.. दोनों ने देखा की कुटिया के आसपास बहुत सारे डाकू इकट्ठा थे जिनमें से कई डाकू के बदन पर घाव के निशान थे औऱ उनके पास लूट का सामान भी था डाकू की संख्या करीब 20-25 होगी..

डाकूओ ने भी दोनों को देख लिया और मृदुला बैरागी औऱ डाकू आमने सामने खड़े हो गए. डाकुओं के मुखिया ने जैसे ही मृदुला को देखा वह उसे पर लट्टू हो गया और कामुकता से भरकर बैरागी से कहा कि है उस लड़की को उनके हवाले कर दे और वहां से चला जाए. बैरागी ने जवाब में पास में पड़े गंडासे को उठाकर उस डाकू के ऊपर फेंक दिया.. गंडासा डाकू की छाती में धंस गया औऱ डाकू एक पल में ही प्राण त्याग कर जमीन पर गिर गया. अपने मुखिया की मौत देखकर बाकी सारे डाकू गुस्से से दिलमिला गए और चिल्लाते हुए बैरागी को मारने के लिए जपटे मगर जैसे ही सारे डाकू एक साथ बैरागी को करने के लिए झपटे मृदुला ने जमीन की मिट्टी उठाकर उन डाकुओ पर फेंक दी.. जैसे मृदुला ने जमीन की मिट्टी उठाकर डाकूओ पर फ़ेंकी मृदुला की फ़ेंकी मिट्टी का एक-एक कण एक एक प्रेत में बदल गया औऱ उन प्रेतो ने एक पल में ही सारे डाकुओ के सर उनके कंधे से उतार दिए औऱ वापस मिट्टी बनकर जमीन पर गिर पड़े.. बैरागी ने जब इस तरह से मृदुला को क्रोध में देखा औऱ उसके द्वारा की गई इस भयावह घटना को देखा वो आश्चर्य डर औऱ जिज्ञासा के भाव से भरते हुए मृदुला को देखने लगा..

मृदुला ने जब बैरागी को तरह से खड़ा हुआ देखा तो उसने अपने गले से एक ताबीज निकाल कर बैरागी को पहना दिया और कहा ये ताबिज़ उसे चोट पहुंचाने वाले इंसान को कभी चैन से जीने नहीं देगा..


20 साल बीत जाने के बाद धुपसिंह औऱ लता को इस बात की भनक तक नहीं लगी थी कि लता ने उस रात जुड़वा भाई बहनों को जन्म दिया था जिसमें से बच्ची को लल्ली औऱ शांति ने चुरा लिया था जो अभी बैरागी के साथ जंगल में उस कुटिया में रहती थी.. धुपसिंह औऱ लता ने अपने बेटे का नाम समर रखा था औऱ समर अब अपने पिता कि तरह ही जागीरदार की हिफाज़त में लगी राजा की सेना की टुकड़ी में था..

बैरागी और मृदुला को उस कुटिया में रहते 2 साल हो चुके थे औऱ अब मृदुला 8 माह की गर्भवती थी उसका बच्चा होने वाला था बैरागी ने मृदुला से बार बार जंगल बाहर चलने औऱ किसी गाँव में रहने की गुहार की मगर मृदुला ने मना कर दिया औऱ बैरागी के साथ जंगल से बाहर जाने को इंकार कर दिया बैरागी ने बार बार मृदुला को समझया था कि उसे इस्त्री रोग औऱ बच्चे के जन्म का उपचार नहीं आता मगर मृदुला ने उसकी एक ना सुनी औऱ जंगल ना छोड़ने की अपनी ज़िद पर अड़ी रही..

आखिरकार वही हुआ जिसका बैरागी को डर था बच्चा पैदा करने के दौरान मृदुला औऱ उसके बच्चे दोनों की मौत हो गई और बैरागी फिर से अकेला हो गया. उसके मन में एक बार फिर से दुख दर्द तकलीफ का बसेरा हो गया.. बैरागी मृदुला औऱ बच्चे का अंतिम संस्कार करके जंगल छोड़ दिया और पागलों की तरह भटकने लगा. बैरागी किसी फकीर की तरह दिन बताने लगा और भूख लगने पर भिखारी की तरह मांग कर खाने लगा.. 2 महीना इसी तरह बिताने के बाद जब उसने गांव में इसी तरह एक और महिला को मारते देखा तो उसने इस रोग का इलाज करने के लिए दवा बनाने का निश्चय किया. उसे शरीर की समझ थी उसके मुताबिक जदिबूती से लोगों का इलाज़ करने लगा औऱ घूम घूम के जदिबूती औऱ इलाज़ की खोज करने लगा..

बैरागी ने मृदुला के साथ रहकर बहुत सी चीज सीखी थी जो उसके इस कार्य में उसकी बहुत मदद कर रही थी बैरागी ना गांव-गांव घूम कर बहुत से लोगों का इलाज किया और बहुत सी आज के समय छोटीमोटी कही जाने वाली बीमारी को ठीक किया. बदले में कुछ लोगों ने उसे भरपेट खाना खिलाया तो कुछ लोगों ने वहीं रहने के लिए जमीन देनी चाहिए लेकिन बैरागी ने एक जगह रहने से इनकार कर दिया और अपना मकसद पूरा करने के लिए एक बैलगाड़ी ले ली और उस पर बैठकर गांव गांव घूमते हुए स्त्री रोग का इलाज ढूंढने निकल पड़ा

बैरागी को अब किसी बात की फ़िक्र नहीं थी वह अपने आप में मस्त अपनी पत्नी मृदुला को याद करते हुए प्रेम से भरे गीत गाते हुए और अपनी पत्नी के साथ बिताये प्रेम से परिपूर्ण उन पलों को याद करते हुए मुसाफिरों की तरह घूमने लगा और बीमारियों का इलाज ढूंढने लगा किसी एक पुराने वैद्य के कहने पर उसने एक खास किस्म की जड़ीबूटी तलाश करने का निर्णय किया जिसके लिए वह बहुत दूर सफर पर निकल पड़ा लेकिन रास्ते में ही वीरेंद्र सिंह के पहरेदारो ने उसे पकड़ कर क़ैद कर लिया..

सुबह के 4:00 बजे गौतम इस सपने से बाहर निकल आया और अपने सपने की हकीकत को झूठ मानते हुए यह बस उसका एक वहम समझ कर इसे भूल जाने का निर्णय कर वापस सो गया..
 
Update 15

गौतम - माँ.. माँ..
सुमन - क्या हुआ ग़ुगु?
गौतम - मेरा फ़ोन देखा आपने? मिल नहीं रहा..
सुमन - हाँ.. पर अगर मैंने बता दिया तो मुझे क्या मिलेगा?
गौतम - मैं क्या दे सकता हूँ आपको? मेरे पास तो कुछ भी नहीं है आपको देने के लिए..
सुमन - मुझे कुछ चाहिए भी नहीं.. बस तू मेरे साथ तुम नानी के चल.. मैं तुझे अकेला छोड़कर नहीं जा सकती..
गौतम - यार माँ.. मैं नहीं जाऊ वहा.. आप जानती हो ना मामी केसा बर्ताव करती है हमारे साथ?
सुमन - पर नानी तो तुझे बहुत प्यार करती है.. अभी फ़ोन आया तब भी कह रही थी ऋतू की शादी में ग़ुगु को लेके ही आना..
गौतम - मैं नहीं जाऊ.. आप मत बताओ फ़ोन कहा है..
सुमन - अपनी माँ की बात नहीं मानेगा? मेरे लिए भी नहीं जाएगा?
गौतम - आप ना ये इमोशनल ब्लैकमेल करना बंद कर दो मुझपे कोई असर नहीं होने वाला इसका.. समझें?
सुमन - ठीक है.. वैसे भी इस घर में मेरा है ही कोन जो मेरी बात सुने और मुझसे प्यार करें? सबको अपने मन की करनी है तो करो सब.. मुझे क्या?
गौतम सुमन की बात सुनकर उसके पास आता है और उसे अपने बाहों में भरके गाल पर चूमता हुआ कहता है - अब ये ड्रामा बंद करो मेरी ड्रामा क्वीन माँ.. मैं नहीं जाने वाला मतलब नहीं जाने वाला..
सुमन मुस्कुराते हुए - बिना ड्रामा के तू मानता कहा है?
गौतम - अच्छा फ़ोन पता है कहाँ है मेरा?
सुमन - बाथरूम में तो नहीं भूल गया?
गौतम - अरे यार माँ.. आप ना सच में जीनियस हो.. वही रखकर भूल गया शायद..
सुमन - पर तू बाथरूम में फ़ोन क्यू लेके जाता है?
गौतम हस्ते हुए - ये राज़ की बातें है बताई नहीं जाती.. नज़र लग जाती है..
सुमन - सब पता है मुझे तेरी राज़ की बातें.. क्यू इतनी देर बाथरूम में लगती है तुझे? थोड़ा कण्ट्रोल.. समझा
गौतम - शर्म नहीं आती बच्चे से ऐसी बात करते हुए..
सुमन - तुझसे और शर्म? बिलकुल भी नहीं.. अच्छा चाय बना दूँ?
गौतम - गर्मी देख रही हो आप? चाय पिलाओगी..
सुमन - ठीक है फिर जूस बना देती हूँ मेरे ग़ुगु के लिए..

गौतम फ़ोन लेने बाथरूम की तरफ चल देता है और जब वो फ़ोन देखता है तो उसमे रजनी के 6 मिस्ड कॉल आये हुए थे.. गौतम कॉल बैक करता है..
गौतम - हेलो.. दीदी..
रजनी - काहे की दीदी? तुम दीदी का फ़ोन उठाते नहीं हो..
गौतम - वो फ़ोन कहीं रखा हुआ था दी और साइलेंट पर था तो पता नहीं चला.. वैसे आपने उस क्रिमिनल को पकड़ लिया?
रजनी - हम्म.. पकड़ भी लिया और जेल में भी डाल दिया.. तुमने जो बताया था सब सही था.. सब बहुत खुश है उसके पकडे जाने से..
गौतम - और मेरा इनाम?
रजनी - तुम्हारा इनाम?
गौतम - हाँ.. क्या तय हुआ था भूल गई आप?
रजनी - सब याद है छोटे भाई.. व्हाट्सप्प चेक करो औऱ समय पर आ जाना..
गौतम - बाए दी..
रजनी - बाए छोटे भाई..

सुमन - लो जूस..
गौतम - आपका ग्लास कहाँ है?
सुमन - मैं बाद में बना के पी लुंगी.. तु पिले..
गौतम - बाद वाद कुछ नहीं.. इसीमे से आधा ख़त्म करो.. चलो..
सुमन - कितनी ज़िद करता है ग़ुगु तू?
गौतम - ज़िद है तो ज़िद है.. लो पीओ..
सुमन - बस बस.. अब तुम पिलो..
गौतम - माँ..
सुमन - बोलो..
गौतम - वो आज एक फ़्रेंड के घर फंक्शन है इसने बुलाया है..
सुमन - ठीक है तो जाओ.. मगर रात को जल्दी आ जाना..
गौतम - माँ थोड़ा दूर है उसका घर.. रात को देर हो सकती है..
सुमन - ये वही फ़्रेंड तो नहीं है जिसने तेरे होंठ लाल किये थे अपनी लिपस्टिक से? और जिसके कारण तू बाथरूम में इतना वक़्त लगता है?
गौतम - माँ.. क्या कुछ भी बोल रही हो? नार्मल फ़्रेंड है बस सब दोस्त आ रहे तो बस मुझे भी जाना है..
सुमन - ठीक है पर याद रखना.. वापस वैसा कुछ हो तो कंडोम जरूर पहन लेना.. और अपने दोस्त से कहाना कभी घर भी आये..
गौतम - आप भी ना, कुछ भी बोल रही हो.. चलो.. मैं चलता हूँ..

गौतम रजनी के दिए एड्रेस पर जाता है औऱ बहुत देर तक उसका वेट करके रजनी से मिलने पुलिस स्टेशन पहुंच जाता है..

मैडम आपसे कोई मिलने आया है..
रजनी - बैठने को कहो..
ज़ी मैडम..
रजनी किसी मुक़दमे की फ़ाइल में आँखे गड़ाये बैठी थी औऱ बड़ी बारीकी से फ़ाइल को पढ़ रही थी मानो बहुत बड़ा औऱ जरुरी केस हो.. रजनी को बैठे बैठे डेढ़ घंटा हो गया था औऱ उसने फ़ाइल से जुडी हुई सारी डिटेल औऱ कहानी जान ली थी.. वो इस काम को करने में इतनी डूब गई थी की उसके दिमाग से ये भी निकल गया था कि कोई उसका इंतजार कर रहा है.. रजनी का फ़ोन साइलेंट पर था.. फाइलों से जब रजनी का ध्यान हटा तो उसने बेल बजाकर किसी को बुलाया और उससे चाय के लिए.. कुछ देर बाद एक हवलदार चाय का कप लेकर रजनी के चेंबर में टेबल पर रख देता है और रजनी से कहता है..
मैडम काफी देर हो गई उस लड़के को आपका इंतजार करते हुए..
रजनी झट से बोली - कौन लड़का?
हवलदार - मैडम वो बताया था ना आपको कोई आपका वेट कर रहा है.. डेढ़ घंटा हो गया अभी तक आपके बुलाने का वेट कर रहा है..
रजनी चाय का कप लेते हुए - अंदर भेजो.. देखु कौन है..
गौतम चम्बर के गेट पर नॉक करता हुआ - अंदर आ सकता हूँ मैडम?
रजनी चाय का कप रखकर खड़ी होती हुई - छोटू.. आई ऍम सो सॉरी... प्लीज मुझे माफ़ कर दे.
रजनी कि बातों से ऐसा लग रहा जैसे उसे कोई बात याद आ गई हो जिसमे उसकी गलती थी औऱ वो उस गलती कि माफ़ी मांग रही थी..
गौतम - कोई बात नहीं मैडम.. आप लोगों की हिफाज़त का काम करती हो. छोटी मोटी बात आपको कहा याद रहेगी?
रजनी गौतम को गले लगाकर - मुझे ताने मार रहे हो? हम्म? औऱ इतने नाराज़ हो कि अपनी दीदी को वापस मैडम बोलने लगे.. प्लीज माफ़ कर दो..
गौतम एक छोटा सा पेपरबॉक्स देकर - कोई बात नहीं.. लो.. हैप्पी बर्थडे दीदी.. केक लाया था..
रजनी मुस्कुराते हुए बॉक्स लेकर टेबल पर रख देती है औऱ गौतम के होंठों पर अपने होंठ रखकर बड़े प्यार से एक चुम्मा अंकित कर देती है मानो अब तक गौतम के किये इंतज़ार का इनाम उसे दे रही हो.

गौतम रजनी के चुम्बन से स्तब्ध था उसे एकदम से अपने साथ हुई इस प्यार भरी औऱ मज़ेदार घटना का अंदाजा भी नहीं था.. गौतम ने भी प्यार से रजनी के चुम्बन को स्वीकार कर लिया औऱ अपने होंठों को लेकर रजनी के होंठों से लड़ाई करने लगा.. कुछ सेकंड के बाद ही रजनी ने चुम्मा तोड़ लिया औऱ मुस्कुराते हुए गौतम से बोली - किस्सी का वादा था मैंने पूरा किया..
गौतम - बस इतनी सी देर?
रजनी - इससे ज्यादा देर में तुम बहक जाओगे.. मैं अच्छे से जानती हूँ..
गौतम - आपकी मर्ज़ी..
रजनी - चलो आज पार्टी करते है..
रजनी गौतम को लेकर पुलिस स्टेशन बाहर आ जाती है और गौतम को पुलिस की कार में आगे बैठाकर खुद कार को कर ड्राइव करने लगती है दोनों कार में अकेले कहीं जाने के लिए निकल जाते है..

रजनी गौतम को लेकर लॉन्ग ड्राइव पर निकल चुकी थी और पुलिस की गाड़ी को उसने हाईवे पर चढ़ा दिया था हाईवे पर रजनी गाड़ी चलती हुई गौतम से इधर-उधर की बातें करने लगी और गौतम से मजाक मस्ती करने लगी मजाक मजाक में गौतम भी पूरी तरह खुलकर रजनी से अपने मन की बात करने लगा था..

रजनी - मेरे आशिक तू बहुत छोटा है.. मैं तेरे साथ प्यार नहीं कर सकती.. तू समझता क्यों नहीं..
गौतम - दीदी बहाने बनाना बंद करो.. मैं जानता हूँ आप भी मुझे पसंद करती हो..
रजनी - तू है ही इतना प्यारा, पसंद तो करूंगी ही.. तुझे मिलकर मुझे राहत भी मिलती है औऱ सुकून भी.. पर तेरे इस प्यारे से मासूम चेहरे के पीछे जो बुरा दिमाग है ना, जिसमे तू हमेशा मेरी लेने के बहाने ढूंढता है उससे डर लगता है..
गौतम - पुलिसवाली होकर मुझ जैसे कमजोर लड़के से डरती हो दीदी..
रजनी गाडी सडक के किनारे लगाकर - अरे अरे कमजोर औऱ तुम.. शकल दिखाओ जरा अपनी.. कितने भोला बनता है तू..
गौतम - बनने की क्या जरुरत है. मैं कोई आपको चालक लगता हूँ दीदी?
रजनी जेब से सिगरेट निकालकर सुलगाते हुए - लगता नहीं है पर तू है चालक.. कुत्ते की जैसे मेरे पीछे पड़ा हुआ है लेने के लिए..
गौतम - तो दे क्यों नहीं देती आप.. छोटा भाई बोलती हो ना मुझे? अपने छोटे भाई के लिए इतनी सी कुर्बानी नहीं दे सकती..
रजनी गौतम का हाथ पकड़कर अपने चुचो पर रख देती है औऱ उससे कहती है - मेरे चुचो के साथ खेलना है तो खेल सकता है पर मेरी चुत का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे समझा.
गौतम - ऊपर से क्या खेलु दीदी.. थोड़ा खोल के दिखाओ ना..
रजनी सिगरेट का कश लेकर - बहुत बड़ा वाला कमीना है तू.. औऱ सिगरेट गौतम को पकड़ने के लिए दे देती औऱ अपनी वर्दी के बटन खोलकर गौतम से कहती है - ले.. खेले जितना खेलना है तुझे..
गौतम सिगरेट का कश लेकर - ब्रा तो हटाओ दीदी.
रजनी ब्रा खोलकर पीछे रख देती है औऱ गौतम को सिगरेट पिता देखकर कहती है - सिगरेट मत पी मेरी तरह आदत लग जायेगी तुझे?
गौतम रजनी के निप्पल्स पकड़कर मसलते हुए - आदत तो आपके दूदू पिने की भी लग जायेगी दीदी..
गौतम इतना कहकर रजनी के बूब्स पर झुक जाता है औऱ रजनी के निप्पल्स किसी प्यासे की तरह चूसने लगता है.

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रजनी सिगरेट के कश लेती हुई गौतम के बालों में हाथ फेरकर अपने चुचे औऱ चुचक चूसाईं का सुख महसूस करने लगी.. उसे गौतम के इस तरह बूब्स चूसने से अतुलनीय आनंद की अनुभूति हो रही थी औऱ वो गौतम के बाल पकड़ कर सिगरेट पीते हुए बारी बारी से उसे अपने चुचे चुसवा रही थी..

रजनी - इतना तेज़ मत काट छोटू, दर्द होता है..
गौतम अपने मुंह से निप्पल्स निकालकर - दीदी यहां कोई देख लेगा आपको.. कहीं औऱ चले..
रजनी गाडी स्टार्ट करके आगे हाईवे से नीचे ले लेती है औऱ सुनसान पड़ी जगह पर लगा देती है औऱ फिर पुलिस की वर्दी उतारते हुए गौतम से कहती - ले मेरे छोटू से भाई पिले दीदी के दूदू..
गौतम बूब्स मसलते हुए - दीदी साइज क्या है आपका?
रजनी - 34 है क्यों?
गौतम - नीचे का पूछा था दीदी..
रजनी हसते हुए - साइज जानकार क्या करेगा? 38 है.. वैसे भी मैं देने वाली तो हूँ नहीं तुझे..
गौतम प्यार से - देनी तो पड़ेगी दीदी.. औऱ आप खुद दोगी.
रजनी - इतना कॉन्फिडेंस?
गौतम आँख मारके - हाँ.. मैं बाथरूम करके आता हूँ.. ये कहते हुए गोतम कार से नीचे उतर जाता है औऱ रजनी भी बिना वर्दी पहने कार से नीचे उतर आती है. कमर से ऊपर पूरी तरह नंगी हो चुकी रजनी एक औऱ सिगरेट सुलगा लेती है कश लेती हुई गौतम को मूतते देखती है..
गौतम - दीदी..
रजनी - क्या हुआ छोटू..
गौतम लंड की तरफ इशारा करके - हथियार देखोगी मेरा..
रजनी मुस्कुराते हुए सिगरेट का कश लेकर - नहीं देखनी तेरी छोटी सी पिस्तौल मुझे..
गौतम मूतता हुआ रजनी की तरफ मुड़ जाता है औऱ रजनी से कहता है - पिस्तौल नहीं दीदी AK47 है मेरे पास.. अब कहो? दोगी या नहीं.

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रजनी गौतम का लंड देखकर खड़ी की खड़ी रह जाती है औऱ हैरानी के साथ नज़र फाड़ कर गौतम के लंड को देखती रह जाती है.. जैसे ही कुछ देर रजनी गौतम के लंड को घूरती उसकी चुत में खुजली चलने लगती है औऱ रजनी के दिल में प्यार की सुगबुगाहत उठने लगती है..
गौतम मूतने के बाद बिना लंड को पेंट में वापस किये रजनी के पास आ जाता है औऱ लंड को हाथ में लेकर हिलाता हुआ पूछता है - बोलो ना दीदी.. लोगी अपने छोटू का लंड अपने अंदर?
गौतम की बात सुनकर रजनी का ध्यान उसके लंड से टूट जाता है औऱ गौतम की कलाई के धागे के साथ शर्म से रजनी का चेहरा भी लाल हो जाता है.

गौतम अपने कलाई पर बंधे धागे को लाल देखकर रजनी का मन समझ जाता है औऱ रजनी के हाथ से सिगरेट लेकर उसके बाल पकड़ कर जबरदस्ती नीचे बैठाते हुए रजनी के मुंह पर अपना लंड रगड़ने लगता है..
रजनी - छोटू बाल मत खींच ना..
गौतम - मुंह खोलो दीदी..
रजनी गोतम को देखकर - शकल से लगता है साँप भी नहीं होगा तेरे पास, पर तू कमीना चड्डी में अजगर लिए बैठा है.
गौतम सिगरेट का कश लेकर - अब इसे मुंह में भी गुसा लो दीदी..
रजनी मुस्कुराते हुए - पहले स्वाद तो लेलु..
रजनी गौतम के लंड को चूसने लगती है औऱ गौतम के लंड पर भूखी शेरनी की तरह टूट पडती है.. रजनी के मुंह की गर्माहट औऱ लार से गोतम स्वर्ग के सुख भोगने लगा था.

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गौतम कश लेकर - दीदी बिलकुल रांड लगती हो..
रजनी मुंह से लंड निकाल कर - आज तो तुझे कच्चा खा जाउंगी छोटू.. औऱ फिर से लोडा चूसने लगती है..
गौतम फ़ोन निकाल कर रजनी के लंड चूसने की वीडियो बनाने लगता है औऱ रजनी से कहता है - दीदी कहो तो फेमस कर दू आपको.. FHD में वीडियो बन रही है आपकी..
रजनी मुंह से लंड निकाल कर अपने बूब्स के बीच लंड लेकर बूब्स से लंड रगड़ने लगती है औऱ गौतम से कहती है - लग रही है ना तेरी दीदी पोर्नस्टार छोटू? अच्छे से वीडियो बना अपनी दीदी की..


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गौतम - क़यामत हो दीदी आप तो..
रजनी - कब से हिला रही हूँ कब निकलेगा तेरा?
गौतम - मेरा तो आपकी चुत में ही निकलेगा दी.. आओ.. गौतम रजनी की पेंट खोलकर गाडी के अंदर पटक देता है औऱ अपने भी कपडे उतार देता है. उसके बाद रजनी को कार के बोनट पर बैठाकर टांग खोलते हुए रजनी की चुत में उंगलियां करने लगता है..
रजनी - छोटू अब तू डाल दे मेरे अंदर भाई.. मुझसे रहा नहीं जा रहा..
गौतम - अभी तो आपकी चुत चुसनी बाकी है दीदी..
इतना कहकर गौतम रजनी की चुत चूसाईं के लिए अपना सर उसकी चुत पर लगाने के लिए आगे बढ़ता है औऱ रजनी खुद अपनी गांड उठाकर गौतम के मुंह के आगे अपनी चुत कर देती है.. गौतम के होंठ जैसे ही रजनी की गीली चुत पर लगते है वो काम के आसमान में उड़ने लगती है औऱ सिस्कारी भरने लगती है

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गौतम बड़ी ही ईमानदार औऱ चाव से रजनी की चुत के चटकारे ले रहा था औऱ रजनी तो गौतम के चूसने पर उसके मुंह में दो मिनट के अंदर ही झड़ गई.. गौतम बड़ी बेशर्मी से रजनी की चुत का बहता पानी पिने लगा औऱ रजनी गौतम के सर पर हाथ रखकर अपने साथ घट रही इस अनोखी औऱ काममयी घटना का मज़ा लेने लगी औऱ कुछ पलो में झड़ गई..

गौतम चुत चाट कर मुंह पोछता हुआ रजनी की चुत अपनी मुट्ठी में पकड़कर मसलता हुआ बोला - बोलो थानेदारनी ज़ी.. चोद दिया जाए या छोड़ दिया जाए आपको..
रजनी सिस्कारी लेती हुई - चोद दिया जाए छोटे भाई.. छोड़ दोगे तो उठाके जेल में बंद कर दूंगी..
गौतम - जैसा आपका आदेश थानेदारनी ज़ी..
गौतम रजनी को गाडी के बोनट से नीचे उतार लेता औऱ गाडी के बोनट पर झुका कर पीछे से रजनी की चुत पर अपना लंड सेट करके कहता है..
गौतम - घुसा दू दीदी?
रजनी - घुसा दे छोटू..
गौतम - दर्द होगा..
रजनी - होने दे दर्द..
गौतम - चुत फट जायेगी..
रजनी - फट जाने दे..
गौतम - हफ्ते तक ठीक से चल नहीं पाओगी..
रजनी - कोई बात नहीं..
गौतम - कंडोम लगाऊ?
रजनी - तू कंडोम लाया है?
गौतम - हाँ दीदी..
रजनी - लगा ले पर कुत्ते तू कैसे जानता था मैं मान जाउंगी?
गौतम - क्युकी आप भी मुझसे प्यार करती हो दीदी.. आपके चेहरे पर दीखता है आप मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो.
रजनी - इतना सब जानता है तो अब क्यों सता रहा है अपनी दीदी को? घुसा दे ना..
गौतम - कंडोम तो पहन लू दीदी..
रजनी - रहने दे छोटू बस अंदर मत छोड़ना..
गौतम - जैसा आप कहो.. लो सम्भालो अपने छोटू का पहला धक्का..

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गौतम के पहले धक्के से साथ ही रजनी की चुत से चररर की आवाज के साथ रजनी के मुंह से जोर की चिंख बाहर निकल पडती है औऱ पहले धक्के में ही गौतम रजनी के चुत का दरवाजा तोड़कर चुत के अंदर घुस जाता है औऱ अपने लंड से उसकी चुत के साथ जंग छेड़ देता है जिसमे हल्का सा खूनखराबा भी हो जाता है मगर ना रजनी को इसकी परवाह थी ना गौतम को. गौतम रजनी की चुत में ऐसे झटके मार मार के चोद रहा था जैसे अमीर घर की बिगड़ी हुई औलादे सडक से सस्ती रांड उठा कर चोद देते है..

गौतम रजनी को गाड़ी के बोनट पर झुकाकर उसके बाल पकड़ के पीछे से धक्के पर धक्का मार रहा था और उसके झटके खाते हुए रजनी ऐसे हिल रही थी जैसे गाँव में सुहागरात को चुदाई के दौरान खटिया हीलती है.

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गौतम चोदते हुए - उफ्फ्फ यार दीदी कितनी टाइट है आपकी.. ऐसा लग रहा है कोई कच्ची कली चोद रहा हूँ..
रजनी - थोड़ा धीरे भाई.. बहुत दर्द हो रहा है..
गौतम - दो इंच के छेद में दस इंच का लंड घुसेगा तो दर्द होगा ही ना दीदी.. चिंता मत करो इस चुदाई के बाद बड़े से बड़े लंड आसानी से झेल जाओगी.
रजनी - अंदर मत निकालना भाई..
गौतम रजनी को लगातार चोदते हुए उसके बाल खींचकर ऐसे धक्के मार रहा था जैसे वो घुड़सावारी कर रहा हो.

गौतम ने रजनी को अपनी तरफ घुमा लिया औऱ गाड के बोनट पर लेटा के उसकी चुत में वापस लंड डाल दिया औऱ चोदने लगा.. रजनी की कोठे की सस्ती रांड सी आह्ह अह्ह्ह्ह.. कर रही थी औऱ सिस्कारी भरते हुए गौतम की चुदाई का सुख अनुभव मर रही थी. आज रजनी के मन में पुरुषो के लिए मज़ूद नफरत का अंत हो चूका था औऱ उसके मन में छुपी सादगी औऱ नारी ममता का पुनर्उदय हो चूका था..

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गाडी के बोनट पर कुछ देर रजनी को रंडी बनाके चोदने के बाद गौतम ने रजनी को अपनी गोद में उठा लिया औऱ उछाल उछाल के चोदते हुए उसकी चुत का चुबारा बनाना शुरू कर दिया.. रजनी इतनी जोर जोर से चिल्लाते हुए चुद रही थी की उसकी आवाज बहुत दूर से सुनी जा सकती थी मगर वो दोनों ऐसी जगह चुदाई कर रहे थे जहा दूर दूर तक आदमी का नमोनिशान तक ना था.

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गौतम ने थोड़ी देर के बाद रजनी को नीचे उतार दिया औऱ बोनट का सहारा लेकर उसकी एक टांग उठाके रजनी की चुत वापस चोदने लगा..

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रजनी तो जैसे पिछले एक घंटे से अपनी चुदती हुई चुत से पानी पर पानी बहा रही थी औऱ कई बार झड़ चुकी थी एक बार बीच में उसने चुदाई के दौरान मूत भी दिया था..

गौतम ने टांग उठाके चोदने के बाद रजनी को गाडी में बैठा दिया औऱ उसकी चुत जो चुदाई के कारण अब खिलकर फ़ैल चुकी थी में वापस अपना लंड घुसा कर वापस चोदना चालु कर दिया रजनी तो जैसे तृप्त होकर चुदवा रही थी औऱ गौतम के झड़ने का इंतजार कर रही थी उसे मालूम ही नहीं हुआ कब गौतम के साथ चुदाई में पिछला एक घटा बीत चूका था..

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आखिर में रजनी को अपनी गोद में अपनी तरह मुंह करके बैठा लिया औऱ सीट पर बैठे बैठे रजनी को चोदने लगा.. औऱ अपना सारा माल रजनी की चुत में भर दिया.. रजनी निढाल हो कर गौतम पर गिर चुकी थी.. दोनों पसीने से तर बतर थे..

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गौतम - मज़ा आया दीदी?
रजनी लम्बी लम्बी सांस लेते हुए - मैं तो पागल हो गई.. तू बस नाम का छोटू है भाई, मैंने तो सोचा भी नहीं था चुदाई में इतना मज़ाक़ मिलता है..
गौतम - दीदी अब तो ये मज़ाक़ आप कभी भी ले सकती हो.. मैं आपको मना नहीं करूँगा..
रजनी - तूने तो मेरी फाड़ के रख दी गौतम.. लगता है ठीक से चल भी नहीं पाउंगी..
गौतम - मैंने तो पहले ही कहा.. आप ही मुझे बच्चा समझ रही थी..
रजनी गौतम को चूमते हुए - तू बच्चा नहीं जोनी सीन्स का बाप है छोटे भाई..

गौतम औऱ रजनी आपस में ये बातें कर रही रहे थे की किसी ने चोरी छिपे आकर उनके मुंह पर रुमाल रख दिया जिसमे बेहोश करने की दवा मिली हुई थी..
गौतम औऱ रजनी दोनों तुरंत बेहोश हो गया औऱ उनकी जब आँख खुली तो वो दोनों किसी सुनसान जगह पुराने कारखाने में एक कमरेनुमा जगह में थे औऱ एक बड़े से बिस्तर पर अगल बगल दोनों नंगे लेटे हुए थे..

दोनों के हाथ पैर ऊपर नीचे रस्सी से बांधे जा चुके थे औऱ एक लड़की गौतम के पास बैठकर उसका लोडा मुंह में लिए चूस रही थी..

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रजनी लड़की को देखकर - कामिनी कौन है तू? छोड़ दे मेरे भाई के लंड को वरना तुझे जान से मार दूंगी..
लड़की रजनी की बात पर ध्यान नहीं देती औऱ गौतम का लोडा चुस्ती रहती है...
रजनी गुस्से से - बहन की लोड़ी रांड.. छोड़ दे मेरे भाई के लंड को..
लड़की रजनी को अनदेखा करते हुए अपनी चड्डी नीचे सरका कर गौतम के लंड को अपनी चुत में लेटे हुए गौतम के लंड पर बैठ जाती है औऱ चरर की आवाज के साथ गौतम का लंड अपनी चुत में घुसा लेती है औऱ गीतम के लंड पर उछलने हुए जोर से आहे बरने लगती है जिसे देखकर रजनी गुस्से से तिलमिला जाती औऱ उस लड़की को गौतम से दूर करने की नियत से उसकी औऱ उठने की कोशिश करती है मगर रस्सी से बंधे होने के कारण कुछ नहीं कर पाती औऱ पीठ के बल ही लेटे हुए लड़की को गालिया देने लगती है जबकि गौतम लड़की के दिए blowjob औऱ अपने लंड पर उछलने से कामुक हो चूका था औऱ चुपचाप ये सब होता देख रहा था..

रजनी - साली छिनाल रंडी है कौन तू.. औऱ हमें यहां क्यों लेकर आई है? बहन की लोड़ी मेरे हाथ खोल मैं अभी तेरी जान ले लुंगी.. कुतिया साली छोड़ मेरे भाई को.. बता ना रंडी.. कौन है तू..
बिल्लू अंदर आते हुए - ये मेरी बहन है बबली भोसड़ीवाली..
रजनी - कमीने तू.. तू जेल से कब छूटा?
बिल्लू - जेल की संलाखे बिल्लू सांडा को नहीं रोक सकती पुलिसवाली रांडी.. मुझे पकड़ के खुदको बहुत बड़ी तोप समझ रही थी तू.. मैंने बोला था ना मैं तुझे नहीं छोडूंगा.. (पिस्तौल निकालकर) आज तुझे बताऊंगा कि मैं क्या चीज हूँ..
रजनी - भड़वे तेरी बहन तेरे सामने किसी औऱ के लंड पर उछलकर चुद रही है तुझे शर्म नहीं आ रही..
बिल्लू हस्ते हुए - चुदने शर्म कैसी रंडी.. मेरी बहन मेरी रखैल है.. मेरी बहन तो रात में मेरे औऱ मेरे इन दोनों साथियों के लंड पर भी उछलती है.. वैसे साली तू भी कम नहीं, अपने भाई के साथ गाडी में चुदवा रही थी.. अब हम भी तेरी इस चुद का मज़ा लेंगे..

ये कहते हुए बिल्लू ने कंडोम पहन लिया औऱ रजनी पर चढ़ गया औऱ अपना लंड उसकी चुत पर सेट करते हुए अंदर धकेलने लगा..
गौतम - बिल्लू छोड़ दे मेरी बहन को वरना तुझे बहुत बुरी मौत दूंगा..
बिल्लू ने अपनी पिस्तौल बेड पर रख दी औऱ गौतम को एक के बाद एक दो तीन जोरदार थप्पड़ मारके - चुप बहन के लोडे.. वरना एक गोली में यही ढेर कर दूंगा.. तेरी बहन तो आज मुझसे औऱ मेरे साथियो से चुदकर रहेगी..
रजनी - मादरचोद हाथ काट दूंगी अगर मेरे भाई को हाथ लगाया तो..
बिल्लू अपना लंड रजनी कि चुत में ड़ालते हुए - उफ्फ्फ जानेमन.. बोलती है तो कितनी मस्त लगती है तू.. पुलिस वाली को चोदने का मज़ा ही अलग है.. बिल्लू रजनी को चोदने लगा मगर रजनी गौतम के लंड से चुद चुकी थी तो उसे बिल्लू के लंड के अंदर आने वाले पर कोई दर्द तकलीफ महसूस नहीं हुई औऱ वो बिल्लू को गालिया देते हुए चुदवाती रही..

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बबली - बिल्लू भईया देखो ना ये साला चूजा मुझे kiss नहीं कर रहा..
बिल्लू रजनी को चोदते हुए रजनी को एक थप्पड़ मार देता है - साली अपने भाई को बोल चुपचाप मेरी बहन की हर बात माने वरना अच्छा नहीं होगा..
गौतम - साले मेरी बहन पर हाथ उठाया तो हाथ उखाड़ दूंगा तेरा..
बिल्लू रजनी को दूसरा थप्पड़ मारकर - ले साले क्या कर लेगा तू..
रजनी - एक बार मेरे हाथ खोल दे फिर बताती हूँ तुझे मैं क्या चीज हूँ..
बबली गौतम के होंठों को चूमते हुए उसके लंड पर आगे पीछे होने लगती है एक ही बिस्तर पर बिल्लू औऱ उसकी बहन गौतम औऱ रजनी के साथ चुदाई कर रहे थे..

बिल्लू थोड़ी देर में ही झड़कर रजनी के ऊपर से हट जाता है.. बिल्लू के बाद बारी बारी उसके साथी कंडोम लगा कर रजनी की चुदाई करते है औऱ आधा घंटा बीत जाता है जबकि गौतम रजनी की चुदाई होते हुए देखकर गाली देने औऱ चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर पाता.. गौतम का मन बबली को अच्छे से चोदने का भी था मगर वो सिर्फ लेटे हुए अपने लंड के ऊपर बैठी बबली को धीरे धीरे आगे पीछे होता देखकर चुप ही पड़ा था..

रजनी को बिल्लू औऱ उसके साथियो के सामान्य लंड से चुदकर कोई फर्क ही नहीं पड़ा वो वैसे ही लेती रही जैसे पहले थी.. बबली को आज परम सुख मिल रहा था एक तो इतना बड़ा लंड ऊपर से इनता स्टेमिना की आधे घंटे से ज्यादा का समय बीत जाने पर भी गौतम का नहीं झड़ना..
बबली - भईया ये लड़का तो कमाल है.. कब से उछल रही हूँ मगर इसका निकलता ही नहीं..
बिल्लू - जल्दी कर बबली अब इन दोनों को निपटा के यहां से जाना भी है..
रजनी - तू हमारी जान लेगा कमीने.. तुझे पुलिस नहीं छोड़ेगी..
बिल्लू हस्ते हुए - छोड़ेगी तब जब पकड़ेगी.. औऱ तुम दोनों की तो लाश भी किसीको नहीं मिलेगी..

गौतम बबली से चुम्बन तोड़कर धीरे से कान में - मुझे औऱ मेरी बहन को बचा ले बबली.. तुझे ऐसा मज़ा दूंगा तू खुश हो जायेगी..
बबली भी धीरे से - वादा करता है?
गौतम - कसम खाता हूँ..
बबली नज़र बचा कर गौतम के दोनों हाथ खोल देती है औऱ बेड पर पड़ी बिल्लू की पिस्तौल उठाकर बिल्लू औऱ उसके पास बैठकर शराब पीते दोनों साथियों को एक के बाद एक गोली मार देती औऱ मौत के घात उतार देती है..

गौतम बबली को अपने लंड पर से हटा कर रजनी की औऱ अपने पैरों की रस्सी खोल दोनों को पूरी तरह आजाद कर देता है.. रजनी गौतम से लिपट जाती है औऱ दोनों एक दूसरे से नंगे बदन चिपक जाते है..


बबली पिस्तौल फेंककर गौतम से - बहन का मिलन ख़तम हो गया हो तो अब मेरी चुत की खुजली मिटा दे..
रजनी गुस्से से बबली की तरफ बढ़ती हुई - साली कामिनी मैं बताती हूँ तुझे तो.. ये कहते हुए रजनी बबली के गाल ओर एक थप्पड़ जड़ देती है औऱ फिर बबली भी गुस्सा होकर रजनी को थप्पड़ जड़ देती है औऱ दोनों एक दूसरे से लड़ने लग जाते है..

रजनी औऱ बबली दोनों गौतम के लिए नंगी बिस्तर पर लड़ाई करते हुए एक दूसरे को नाखुनो से नोच रही थी जबकि गौतम बिस्तर से खड़ा होकर थोड़ी दूर टेबल रखी पानी की बोतल से पानी पिता हुआ दोनों को लड़ते हुए देख रहा था..

रजनी बबली दोनों थक्कर चूर हो चुकी थी औऱ जोर जोर से हांफ रही थी दोनों की हालात ख़राब थी.. दोनों जैसे लड़ाई के बीच में दो मिनट का बीच में गेप लिया हो ऐसा लग रहा था दोनों थोड़ी शांत होकर एक दूसरे को देख रही थी फिर गौतम की आवाज सुनकर उसे देखने लगी..
गौतम दूर खड़ा हुआ - लड़ना क्यों बंद कर दिया?
बबली औऱ रजनी ने एक नज़र गौतम को फिर एकदूसरे को देखा.. फिर जैसे इशारे से कुछ फैसला करके दोनों बिस्तर उतर कर गौतम के करीब आ गई औऱ गौतम को बिस्तर पर गिरा कर एक साथ उसके लंड पर टूट पड़ी..

गौतम - अह्ह्ह्ह.. आराम से यार...
रजनी औऱ बबली दोनों गौतम के लंड औऱ गोटे मुंह में लेकर चूस रही थी औऱ गौतम को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी..


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गौतम ने रजनी औऱ बबली दोनों के बाल पकड कर दोनों के मुंह आपस में भिड़ा दिए औऱ दोनों के होंठों में से अपने लंड को गुज़ारने लगा..

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गौतम थोड़ी देर बाद दोनों को घोड़ी बना लेता औऱ कभी रजनी तो कभी बबली की चुत मारता है...

रजनी औऱ बबली गौतम के साथ थ्रीसम कर रही थी औऱ उसका मज़ा ले रही थी.. गौतम ने बबली औऱ रजनी दोनों को ही रगड़ के चोदा औऱ दोनों के मुंह पर अपना वीर्य छोड़कर उनका फेसियल कर दिया..

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रजनी की तो चाल में लंगड़ा पन आ चूका था मगर बबली तो बहूत चुदी हुई थी उसे ज्यादा तकलीफ नहीं हुई औऱ वो अपनी चुत को शांत करवा कर हलकी सी लचक औऱ दर्द के साथ उठ गयी..

गौतम - तूमने तो अपने भाई को गोली मार दी?
बबली - साले ने रखैल बनाके रखा था.. जब देखो किसी से भी चुदवा देता था.. मैं कब से उसे मारना चाहती थी..
रजनी - अच्छा किया बबली.. कपडे कहा है हमारे?
बबली - बाहर रस्सी पर..
रजनी - इन लाशों का क्या करें?
बबली - करना क्या है. केरोसिन डालके आग लगा देती हूँ कमीनो की लाश के..
रजनी - इस बारे में किसी से कोई बात नहीं करेगा.. वैसे अब तक तू अपने भाई की रखैल बनकर रह रही थी अब कहा जायेगी?
बबली - पता नहीं.. जहा किस्मत ले जाए.. वही चली जाउंगी..
रजनी - ऐसा कर मेरे साथ चल.. मेरे घर में काम कर लेना..
बबली - मैं वहा क्या करुँगी?
रजनी बबली के बूब्स पकड़के मसलते हुए - देख ये मेरा मुंह बोला भाई है मेरे साथ नहीं रहता.. तू साथ रहेगी तो इसकी कमी मुझे कम खलेगी.. औऱ तुझे भी भी रहने को छत मिल जायेगी..
बबली रजनी की चुत पर हाथ लगा कर सहलाते हुए - ठीक है रजनी..
गौतम - क्या बात है दीदी.. आपको तो एक औऱ मिल गई..
रजनी हसते हुए - कपडे पहन अब चलते है यहां से..

रजनी बबली औऱ गौतम तीनो वहा से गाडी लेकर निकल गए और रजनी से गौतम को उसके घर छोड़कर बबली को अपने साथ अपने घर ले गई..

गौतम घर आ कर सुमन से बिना बात किये ही खाना खा कर उसजे साथ सो गया जो सुमन को अजीब लगा.. लेकिन सुमन ने गौतम से कुछ नहीं पूछा औऱ सोने दिया मगर उसके फ़ोन को अपने हाथ में लेकर उसका फ़ोन खोलते हुए चेक करने लगी.. गीतम ने व्हाट्सप्प से लेकर इंस्टा तक सब अप्प पर लॉक लगाया हुआ था मगर गैलरी में उसने लॉक नहीं लगाया था औऱ सुमन ने गैलरी में आज का बनाया हुआ उसकी औऱ रजनी की चुदाई का वीडियो देख लिया औऱ सुमन गौतम को गुस्से औऱ काम की निगाहो से देखने लगी...

सुमन सोच रही थी की गौतम कितना बिगड़ चूका है की अपने इतनी बड़ी बड़ी औरतों के साथ ये सब बिना शर्म के ही करने लगता है...
 
Update 16


बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - कौन? कौन है बाहर?

किशोर - बड़े बाबाजी.. मैं किशोर..

बड़े बाबाजी - किशोर.. तुम.. आज दोपहर मैं ही आ गए.. कहो कैसे आना हुआ?

किशोर - बड़े बाबाजी वो बाबाजी पूछ रहे थे कि क्या वो आपसे मिल सकते है?

बड़े बाबाजी - अचानक विरम को मुझसे क्या काम पड़ गया?

किशोर - बड़े बाबाजी सेठ धनीराम भी है बाबाजी के साथ.. आपसे मिलने कि आज्ञा चाहते है.. पूछ रहे थे जब आप उचित समझें तब वो आ जाए..

बड़े बाबाजी - किशोर विरम से बोल कि वो अभी मुझसे मिलने आ सकता है.. मैं मिलने को सज्य हूँ..

किशोर - जैसे आप कहे बड़े बाबाजी..


किशोर - बाबाजी बड़े बाबाजी ने अभी मिलने के लिए कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - किशोर तू सच कह रहा है? आज मिल सकते है हम..

किशोर - ज़ी बाबाजी.. बड़े बाबाजी ने अभी ही आपको सेठ धनीराम के साथ उपस्थित होने को कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - अच्छा तो फिर हमें बिना देरी किये यहां से गुरुदेव के पास पहुंचना चाहिए..

धनीराम - आज तो नसीब पुरे उफान पर लगता है बाबाजी.. वरना दिन हफ्ते या महीने ना जाने कितना टाइम लगता बड़े बाबाजी के दर्शन करने के लिए..

बाबाजी उर्फ़ विरम, धनिराम औऱ धनिराम के पीछे एक नौकर अपने हाथ में कई डब्बे लिए हुए चल देते है..


बाबाजी - इन डब्बो में क्या ले आये हो धनिराम...

धनिराम - इनमे शहर के सबसे नामी हलवाई के दूकान की ताज़ा बनी मिठाईया है बाबाजी.. आपके लिए जो लाया तो वो नोकर से कहकर आपकी धर्मपत्नी के पास भिजवा दी औऱ ये बड़े बाबा ज़ी के लिए है..

किशोर - मगर बड़े बाबाजी तो ताज़ा मिठाई छोडो ताज़ा दाल रोती तक नहीं खाते.. सन्यासी इतने बड़े है कि क्या बताया जाए? कल जो बना था आज खाते है औऱ आज जो बना है वो कल खाते है.. हमेशा बासी खाना ही खाते है बड़े बाबाजी..


बाबाजी उर्फ़ विरम, धनीराम औऱ किशोर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह की कुटिया के बाहर आ जाते है..


बाबाजी उर्फ़ वीरम आवाज लगाते हुए - गुरुदेव...

अंदर से बड़े बाबाजी - आजा वीरम.. ले आ धनिराम को..

बाबाजी औऱ धनीराम कुटिया में आते हुए - प्रणाम बाबाजी.. प्रणाम गुरुदेव..

बड़े बाबाजी - कहो धनिराम.. इस बार क्या चाहते हो..

धनीराम नोकर को इशारे से मिठाई के डब्बे बड़े बाबाजी के सामने रखने के लिए कहता है औऱ नौकर धनीराम के कहे अनुसार बड़े बाबाजी के सामने मिठाई के डब्बे रख देता है जिसमे से उठती महक उस मिठाई की गुणवत्ता औऱ किस्म को उजागर कर रही होती है..



बड़े बाबाजी - मैं तो रूखी सुखी खाने का आदि हूँ धनिराम मुझे ये सब लालच क्यों दे रहा है.. तू बता तुझे क्या चाहिए?

धनिराम - बाबाजी.. आप तो जानते ही है सब.. फिर मेरा सवाल भी जानते ही होंगे तो आप ही बता दीजिये.. क्या मैं जो नया काम शुरू करने जारहा हूँ वो मेरे हित में रहेगा या मुझे नुकसान पहुचायेगा?

बड़े बाबाजी - हित तेरे धैर्य पर निर्भर है औऱ नुक्सान तेरी अधीरता पर.. अभी उचित समय की प्रतीक्षा कर धनिराम.. तेरी पुत्रवधु के गर्भ से अगले माह कन्या जन्म लेगी जिसके हाथ से तू जो भी कार्य शुरू करेगा सब फुले फलेगा.. कुछ चाहता है तो बता नहीं तो अब जा यहां से..


बड़े बाबाजी के कहने पर बाबाज़ी औऱ धनीराम कुटिया से बाहर आकर वापस पहाड़ी ओर जाने लगते है औऱ इधर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह सामने रखी मिठाईया देखकर मुंह से लार टपकाने लगता है औऱ बाबाजी औऱ धनिराम के जाने के बाद डब्बे में से मिठाई निकालकर जल्दी से अपने मुंह में भर लेता है मगर जैसे ही बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह मिठाई अपने ने मुंह में डालता है मिठाई राख़ में बदल जाती है औऱ बड़े बाबाजी जोर जोर से थूकते हुए घड़े से पानी निकाल कर पिने लगता है औऱ अपने बगल में लेटे वैरागी के साये से कहता है..

बड़े बाबाजी - एक टुकड़ा तो खाने दे बैरागी.. कितना समय बीत गया बस बासी खाना ही खा रहा हूँ.. बहुत मन करता है कुछ स्वादिस्ट खाने का..

बैरागी - पर मैंने तो आपको कभी कुछ खाने से रोका ही नहीं हुकुम..

बड़े बाबा उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - याद है बैरागी जब हमने एक साथ भोजन किया था.. तब तूने मुझसे क्या कहा था..

बैरागी - मुझे तो आज भी एक एक पल याद है हुकुम.. मुझे जब आपके पहरेदार उस बैठक से एक आलीशान कश में ले गए थे औऱ मैं वहा टहल रहा रहा.....


फलेशबैक शुरू


पहरेदार बैरागी को वीरेंद्र सिंह की बैठक से अपने पीछे पीछे महल के एक अलीशान कमरे में ले आता है जो काफ़ी बड़ा औऱ सुन्दर था साथ में ही पहरेदार बैरागी के लिए साफ कपडे औऱ नहाने की व्यवस्था भी कर देता औऱ बढ़ेबाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह का संदेसा सुनाते हुए बैरागी से कहता है की जागीरदार ने उसे शाम के भोजन पर आमंत्रित किया है. बैरागी को नहाने औऱ हज़ाम से अपनी हज़ामत करवाने का कहकर पहरेदार उसके कमरे के बाहर आकर दो लोगों को पहरेदारी करने के लिए लगाता है औऱ खुद वापस वीरेंद्र सिंह के बैठक की तरफ चला जाता है..


बैरागी कई हफ्तों से नहीं नहाया था औऱ आज उसके नहाने औऱ अपने बड़े बड़े बाल औऱ दाढ़ी मुछ कटवाने औऱ वीरेंद्र सिंह के भिजवाए वस्त्र पहनकर उसका रूप पहले की तरह खिल उठा था.. उसके चेहरे से उसके दर्द का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था औऱ उसकी पीड़ा को भाँपना मुश्किल था..


बैरागी ने दिन में उसके सामने लाया गया भोजन करने से इंकार कर दिया था औऱ स्वच्छन्द भाव से अपने कमरे से बाहर आ गया औऱ महल के बाग़ की तरफ टहलने लगा..

बाग़ में खिले हुए फूल औऱ उन फूलों से उठती हुई महक बाग़ के आस पास का वातावरण को अपनी खुशबु से सराबोर कर रही थी..

बैरागी महल से बाग़ में उतरती सीढ़ियों पर बैठ गया औऱ सामने खिलते हुए फूलों का जोड़ा देखकर अपने औऱ मृदुला के साथ बिताये उन हसीन तरीन पलो को याद करने लगा जिसमे दोनों ने साथ में जीवन के उस सुख को अनुभव किया था जिसे परमात्मा ने मनुष्य को वरदान के रूप में दिया है..


बैरागी बैठा हुआ अपने अतीत के पन्ने बदल रहा था की उसके कानो में मिठास घोल देने वाली मधुर आवाज सुनाई देने लगी औऱ वो अपने अतीत से वर्तमान में आ गया.. किसी औरत के गाने की इस आवाज ने बैरागी को अपनी जगह से उठने पर मजबूर कर दिया औऱ बैरागी आवाज का पीछा करते हुए बाग़ को पार करके एक मंदिर के पास आ गया मगर मंदिर के अंदर जाने की हिम्मत उसकी नहीं हुई औऱ वो मंदिर के बाहर ही खड़ा होकर उस गाने को सुनने लगा..


औरत ने बैरागी के मंदिर तक आने के कुछ देर बाद गाना बंद कर दिया. औरत के हाथ में थाली थी जिसमे पूजा का सामान रखा हुआ था औऱ साथ में प्रसाद.. औरत ने मंदिर में खड़े लोगों को प्रसाद बाँटा औऱ अपनी सेविकाओं को साथ लेकर मंदिर से बाहर आ गई..


औरत का नाम सुजाता था जो जागीरदार वीरेंद्र सिंह

की पत्नी थी.. सुजाता ने मंदिर से बाहर आने के बाद बैरागी को बाहर खड़े देखा तो सुजाता की सेविका ने सुजाता को बैरागी के बारे मे बताते हुए कहा कि बैरागी वीरेंद्र सिंह के मेहमान है औऱ आज ही महल में अतिथि बनकर आये है..

सुजाता अपनी सेविका से ये जानकार बैरागी की औऱ बढ़ी औऱ अपने साथ से प्रसाद देने लगी औऱ बोली..

सुजाता - मंदिर के बाहर खड़े होकर क्या कर रहे हो? मंदिर के अंदर क्यों नहीं आये? सब लोगों ने भगवान के दर्शन किये एक तुम ही उनके दर्शन से वंचित रह गए..

बैरागी ने सुजाता के पहनावे औऱ भाषा की शालीनता औऱ मुख पर तेज़ देखते हुए पहचान लिया कि ये इस जागीर के मालिक वीरेंद्र सिंह की पत्नी है..

बैरागी प्रसाद लेने से मना करते हुए - माफ़ करना रानी माँ.. मैं ईश्वर की परिकल्पना में विश्वास नहीं करता इसलिए ये प्रसाद मेरे लिए केवल मिठाई मात्र ही है.. मैं इसे प्रसाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता.. औऱ रही बात मेरे मंदिर के अंदर आने की है तो मैं पहले ही आपको अपने कुल गौत्र से अवगत करवा देता हूँ.. मैं एक नीच जाती मैं पैदा हुआ हूँ जिसका छुआ आप खाना भी पसंद नहीं करते..

सुजाता मुस्कुराते हुए अपने हाथों से बैरागी को प्रसाद खिला देती है औऱ कहती है - जात पात औऱ उच नीच तो समाज में रहने वाले लोगों के बनाये जाल है बेटा.. ईश्वर के सामने तो क्या राजा क्या रंक सभी सामान है.. मैंने प्रसाद समझकर दिया है तू मिठाई समझकर खा ले..

बैरागी हाथ फैलाते हुए - अगर ऐसी बात है तो एक औऱ लड्डू खिला दो रानी माँ.. कई दिन हो गए पेट में अन्न डाले.. अब तो जैसे बदन में खून सूखने लगा है..

सुजाता बैरागी के हाथ में लड्डू देते हुए - इतनी सी उम्र में ये मायूसी? कोई बात है जो दिल में चुबती है? बता दे.. बताने से मन हल्का हो जाएगा..

बैरागी लड्डू खाते हुए - अपनी पीड़ा औऱ दुख मनुष्य अगर अकेला भोग ले तो अच्छा है.. बताने से व्यथा बन जाती है जिसे सुन पाना सबके बस में नहीं होता..

सुजाता - तेरी आँखों में विराह का दुख नज़र आता है.. कोई ऐसा छोड़कर चला गया है जिसका वापस पाना संभव है.. सही कहा ना मैंने?

बैरागी - छोड़कर जाने वाले की विराह में जलना तो बहुत साधारण बात है रानी माँ.. मेरी प्रीत तो गंगा के पानी की तरह पवित्र है जो मेरे प्रियतम को हमेशा मेरे साथ रखती है.. मैं जब चाहु उससे बात करता हूँ.. उससे रूठता हूँ उसे मनाता हूँ..

सुजाता की सेविका - आपको अब महल में वापस चलना चाहिए.. हुकुम ने आपसे शीघ्र आने का आग्रह किया था..

सुजाता बैरागी से - प्रेम अंधे की आँख है बेटा.. प्रेम तो वासना को जानता भी नहीं.. प्रेम से वासना लाखों कोस दूर ही रहती है.. मैं तेरे अंदर झांककर देख सकती हूँ कि तू अपने प्रेमी से अब भी कितना प्रेम करता है..

बैरागी - प्रेम तो अविरल चलने वाली हवा का नाम है रानी माँ.. वक़्त के साथ कम ज्यादा होना प्रेम नहीं.. मेरा प्रेम मेरी मृदुला के लिए मेरे अंत तक ऐसे ही बना रहेगा.. इसे कोई भी मेरे ह्रदय से नहीं निकाल सकता..

सुजाता मुस्कुराते हुए - मृदुला.. जिसके स्वभाव में शालीनता हो.. हम्म्म.. मैं तेरी पीड़ा तो नहीं मिटा सकती.. ना ही तेरी मृदुला को ये बता सकती हूँ कि तू उससे कितना प्रेम करता है.. पर इतना जरूर कर सकती हूँ कि आज रात रात्रिभोज पर अपने हाथ से खाना पका कर खिलाऊ.. रात्रिभोज पर प्रतीक्षा रहेगी..

बैरागी - रानी माँ..

बैरागी सुजाता के रास्ते से परे हट जाता है औऱ सुजाता महल की औऱ चली जाती है उसके पीछे पीछे सुजाता की सेविकाऐ भी चली जाती है औऱ बैरागी मंदिर से वापस बाग़ की तरफ आकर बाग़ पार करते हुए महल में घूमने लगता है जहा गलती से वह कोषागार की तरफ आ जाता है औऱ उसमे प्रवेश करने वाला होता है की तभी पीछे से एक लड़का उसके कंधे पर हाथ रखकर बैरागी को पीछे खींच केता है औऱ दिवार से सटा के अपनी तलवार बैरागी के गले पर रख देता है..


लड़का - कौन है तू? और यहा क्या कर है?

बैरागी लड़के की सूरत देखकर हैरान हो गया था उसे जैसे अपनी आँखों पर यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि वो क्या देख रहा है.. औऱ जो वो देख रहा है, वो सच है भी कि नहीं..

लड़का- बता.. वरना अभी तेरे कांधे से सर उतार लूंगा..

बैरागी मुस्कुराते हुए - साधारण सा आदमी हूँ.. दिखाई नहीं देता?

लड़का - मसखरी बंद कर नहीं तो तेरी जीवन लीला यही समाप्त हो जायेगी..

एक पहरेदार आते हुए - समर छोड़ उसे.. समर.. ये तो हमारे हुकुम के मेहमान है आज ही पधारे है.. छोड़ समर...


पहरेदार समर के हाथों की तलवार से बैरागी को बचा लेता है मगर पहरेदार के समर को पीछे धकेलने पर समर की तलवार की हलकी सी खरोच बैरागी के गले पर लग जाती है जिससे बैरागी के गले से खून की एक बून्द निकल पडती है.. पहरेदार बैरागी को वहा से बाहर ले जाता है मगर समर जैसे वही जम जाता है.. समर चाहकर भी अपनी जगह से नहीं हिल पाता औऱ अचरज से इधर उधर देखने लगता है, उसके आस पास कोई नहीं था मगर उसे महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके सर पर मंडरा रहा है.. समर ने फिर से अपनी तलवार मजबूत पकड़ ली औऱ अपनी पूरी ताकत से अपनी जगह से हिलते हुए पीछे घूम गया जहा उसे एक परछाई दिखी.. समर ने आगे बढ़कर परछाई के पास जाने की कोशिश की मगर समर ने जैसे ही उस परछाई के पास जाने के लिए पहला कदम बढ़ाया एक हवा का झोंखा समर को पीछे उड़ा के ले गया औऱ समर दिवार से टकरा गया जिससे उसके सर से हल्का सा खून निकलने लगा..

परछाई समर के करीब आने लगी औऱ समर भी अपने आप को सँभालते हुए फिर से खड़ा होने लगा मगर इस बार परछाई में समर को एक लड़की की छवि दिखी औऱ उसके हाथों की तलवार उठने की जगह अपनेआप नीचे झुक गई.. समर ने गौर से उस छवि को देखा तो उसे उस छवि में अपना ही अक्स दिखाई दिया.. बिलकुल उसीके जैसे नयन नक्श औऱ चेहरा परछाई की छवि में समर को दिखा.. परछाई ने आगे बढ़कर जैसे समर को जान से मारने की नियत से प्रहार करना चाहा बैरागी वापस आते हुए समर का हाथ पकड़ कर समर को उसकी जगह से खींच लेता है औऱ परछाई का वार बेकार हो जाता है..

इससे पहले की परछाई अपना दूसरा वार करती बैरागी परछाई के पास जाता है औऱ उसे अपने गले से लगाकर अपने आप में समाहित कर लेता है औऱ वो परछाई लुप्त हो जाती है..


समर अभी तक उस परछाई की सूरत में ही अटका हुआ था उसे अपने सामने हो रही किसी भी चीज का कोई होश नहीं था.. उसने अभी अभी कुछ ऐसा देखा था जो देखना किसी भी आम इंसान के लिए संभव नहीं था उसके सामने एक परछाई थी जिसने लगभग उसके प्राण ले ही लिए थे. मगर एन मोके पर बैरागी ने आकर उसके प्राण बचा लिए..


बैरागी परछाई को अपने आप में समाकर वापस समर के करीब आ जाता है औऱ उसे सहारा देते हुए उठा कर वहा से बाहर ले आता है जहा दूसरे पहरेदार समर को देखते ही उसे एक जगह बैठा देते है.. बैरागी समर के सर पर गली चोट को देखते हुए उसका उपचार करने लगता है तभी उसे समर की गर्दन पर वैसा ही तिल नज़र आता है जैसा उसने प्रेम प्रसंग के समय मृदुला की गर्दन पर देखा था.. बैरागी कै मन में उसी तरह कई प्रश्न घूम रहे थे जैसे समर के मन में घूम रहे थे दोनों को ही अपने सवाल के जवाब नहीं मिले.. बैरागी सोच रहा था क्यों समर की शकल सूरत मृदुला से इतनी मेल खाती है औऱ उसके गर्दन पर वो तिल के निशान जो मृदुला के भी थे कैसे बने हुए है? बैरागी ने समर का उपचार कर दिया औऱ वहां से चला गया समर भी अपनी जगह बैठा रहा औऱ बैरागी कब वहा से गया उसे पता ही नहीं चला..


बैरागी अपने कमरे में था की एक पहरेदार ने उसके कमरे के दरवाजे पर दस्तक देते हुए रात्रिभोज के लिए साथ आने का कहा.. जिसपर बैरागी उस पहरेदार के साथ साथ होकर चल दिया.. पहरेदार उसे लेकर जागीरदार के निवास स्थान पर ले आया जहा एक बड़े से कमरे में जागीरदार वीरेंद्र सिंह सामने की तरफ एक बड़े से आसान पर बैठा हुआ था..

वीरेंद्र सिंह - आओ बैरागी बैठो..

वीरेंद्र सिंह ने वैरागी को अपने सामने कुछ दूर नीचे जमीन पर बिछी चटाई पर बैठने को कहा जहा चौकी पर खाली खाने की थाली रखी हुई थी..

बैरागी उस थाली के सामने बैठ जाता है तभी वीरेंद्र सिंह पहरेदार को कुछ इशारा करता है औऱ पहरेदार समर को उस बड़े से कमरे में ले आता है.. समर के हाथ में बेड़िया थी औऱ उससे उसकी तलवार भी छीन ली गई थी..

वीरेंद्र सिंह - कोषागार में इस पहरेदार ने तुम्हारे साथ जो किया उसकी सुचना हमे मिल चुकी है.. तुम्हारा दोषी तुम्हारे सामने है बैरागी जो सजा इसे देना चाहो दे सकते हो.. चाहो तो इसकी तलवार से इसका सर अलग कर दो..

बैरागी अपनी जगह से खड़ा हो कर समर के करीब जाता है औऱ वीरेंद्र सिंह से कहता है..

बैरागी - मेरे साथ जो हुआ वो मेरी भूल का परिणाम था हुकुम.. मगर ये तो अपना कर्तव्य का निर्वाहन कर रहा था.. इसे इस तरह बाँध कर लाना तो आपका न्याय नहीं हो सकता..

सुजाता कमरे में प्रवेश करते हुए - बिलकुल सही कहा तुमने.. जिसका सम्मान होना चाहिए उसका अपमान करना उचित नहीं..

समर औऱ बैरागी झुककर प्रणाम करते हुए - रानी माँ..

वीरेंद्र सिंह - मगर इसने हमारे अतिथि के गले पर अपनी तलवार रखी है.. सजा तो इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता समर के हाथों की बेड़िया खोलती हुई - अतिथि अगर वर्जित जगह पर प्रवेश करें तो पहरेदार का कर्तव्य है उस अतिथि को सही रास्ता दिखाए.. इससे जो कुछ हुआ वो भूलवश हुआ अगर इसे पता होता की ये आपका अतिथि है तो कभी ऐसी भूल नहीं करता..

बैरागी - रानी माँ.. सत्य कहती है हुकुम.. समर से जो कुछ हुआ वो उसके अज्ञान औऱ मेरी भूल के कारण हुआ.. जिसका फल हम दोनों को मिल चूका है.. इस तरह इसे सजा देना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?

वीरेंद्र सिंह - अज्ञान में ही सही मगर इस लड़के ने हमारे अतिथि पर तलवार उठाई है कुछ तो सजा इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता - आपके अतिथि के अपमान की सजा, हम इस लड़के को देते है.. आज ये लड़का कोषागार की पहरेदारी से हटाकर महल के उस हिस्से की पहरेदारी करेगा जहा हम निवास करते है.. अब से ये हमारी रक्षा करेगा..

वीरेंद्र सिंह - ये तो कोई सजा नहीं हुई..

सुजाता अपने साथ आई सेविकाओ को खाना परोसने का इशारा करते हुए - एक योद्धा से उसकी जगह छीन लेना उसकी जान लेने से ज्यादा कहीं बड़ी सजा है.. आप तो अच्छे से जानते है.. अब भोजन करिये..

वीरेंद्र सिंह आगे कोई औऱ बात नहीं करता औऱ सेविकाओं के द्वारा परोसा गया भोजन बैरागी को खाने के लिए बोलकर स्वम भी खाने लगता है..


सुजाता समर को उसकी तलवार लोटा देती है औऱ समर सुजाता के पीछे पीछे उस कमरे से बाहर आ जाता है औऱ थोड़ा दूर सुजाता के पीछे चल कर सुजाता से कहता है..

समर - मेरी जान बचाने के लिए धन्यवाद रानी माँ...

सुजाता मुस्कुराते हुए - इसमें धन्यवाद केसा? तू अपना कर्तव्य का पालन कर रहा था.. तेरी जान लेना जागीरदार का पाप होता औऱ मैं कैसे ये पाप होने दे सकती थी..


वीरेंद्र सिंह - तुम्हारे सामने खाने की कितनी ही स्वादिस्ट वस्तुए पड़ी है बैरागी.. मगर तुम हो की बस ये साधारण सी चीज खाये जा रहे हो..

बैरागी - मेरा भोजन तो मेरे प्रियतम के बिना अधूरा है हुकुम.. मेरे भोजन करने का उद्देश्य मात्र इतना की मैं अपने शारीर को तब तक जिन्दा रख सकूँ जब तक मुझे वो नहीं मिल जाता जिसे में खोज रहा हूँ.. मेरे लिए इन सब व्यंजनो का कोई महत्त्व नहीं..

वीरेंद्र सिंह - जैसा तुम चाहो बैरागी.. कल मैं तुम्हे कुछ ऐसा दिखाऊंगा जिसकी तुम्हे तलाश है.. मगर अभी मुझे भोजन का स्वाद लेने की इच्छा है.. इस तरह का स्वादिस्ट भोजन सबके भाग्य में नहीं...

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम ऐसा भोजन सबके भाग्य में कहा.. आप आराम से भोजन करिये.. आगे भविष्य के घर्भ में क्या छीपा है किसको पता?


फ़्लैशबैक ख़त्म


भविष्य के गर्भ में क्या छीपा है किसीको क्या पता...

बड़े बाबाजी उफ़ वीरेंद्र सिंह - सही कहा था तूने बैरागी.. मुझे कहा पता था कि भविष्य ने मेरे लिए अपने गर्भ में क्या छीपा रखा था.. रोज़ पचासो तरह के व्यंजन खाने का अभ्यास मैं साधारण खाने के एक निवाले को भी तरस जाऊँगा.. रोज़ बासी खाना खाते हुए सैकड़ो साल बीत गए मगर मेरी ये सजा है की ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती.. मृत्यु मोक्ष लगने लगी है वैरागी..

बैरागी - अगर आपने वो जदिबूती नहीं खाई होती तो मैं ही आपको मुक्ति दे देता हुकुम.. मुझसे भी आपकी ये दशा नहीं देखी जाती.. आपके साथ ही मेरी मुक्ति भी जुडी हुई है.. मैं भी कब से आपके साथ आपकी परछाई बनकर रहता आया हूँ..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - एक बात सच बताऊ बैरागी.. उस दिन जब तू मेरे सामने चटाई पर बैठकर सारा भोजन छोड़कर सिर्फ सादा खाना खाने लगा था तब मैंने सोचा था कि तू बस कुछ दिन ही अपनी पत्नी का शोक मनायेगा औऱ आनंद से जीवन बिताएगा.. मगर तु तो आज साढ़े तीन सो साल बीत जाने के बाद भी अपनी पत्नी को ऐसे याद करता है जैसे तेरी विराह अभी शुरू हुई हो.. तेरे गीत सुनकर तो मुझे भी सुजाता की याद आने लगती है.. कितना उज्वल प्रकाश से भरा हुआ चेहरा था उसका..

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम.. रानी माँ की करुणा सब पर बनी हुई थी.. आपके लिए उन्होंने अपने प्राण तक दे दिए..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - उसी बात का तो मुझे अब भी दुख है बैरागी.. काश उसदिन मेरे ही प्राण चले गए होते..

बैरागी - बार बार उस पाल को याद करके क्यों उदास हो रहे हो हुकुम.. चलिए जंगल में चलते है.. खुली हवा में सांस लोगे तो अच्छा लगेगा..
 
Update 16


बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - कौन? कौन है बाहर?

किशोर - बड़े बाबाजी.. मैं किशोर..

बड़े बाबाजी - किशोर.. तुम.. आज दोपहर मैं ही आ गए.. कहो कैसे आना हुआ?

किशोर - बड़े बाबाजी वो बाबाजी पूछ रहे थे कि क्या वो आपसे मिल सकते है?

बड़े बाबाजी - अचानक विरम को मुझसे क्या काम पड़ गया?

किशोर - बड़े बाबाजी सेठ धनीराम भी है बाबाजी के साथ.. आपसे मिलने कि आज्ञा चाहते है.. पूछ रहे थे जब आप उचित समझें तब वो आ जाए..

बड़े बाबाजी - किशोर विरम से बोल कि वो अभी मुझसे मिलने आ सकता है.. मैं मिलने को सज्य हूँ..

किशोर - जैसे आप कहे बड़े बाबाजी..


किशोर - बाबाजी बड़े बाबाजी ने अभी मिलने के लिए कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - किशोर तू सच कह रहा है? आज मिल सकते है हम..

किशोर - ज़ी बाबाजी.. बड़े बाबाजी ने अभी ही आपको सेठ धनीराम के साथ उपस्थित होने को कहा है..

बाबाजी उर्फ़ विरम - अच्छा तो फिर हमें बिना देरी किये यहां से गुरुदेव के पास पहुंचना चाहिए..

धनीराम - आज तो नसीब पुरे उफान पर लगता है बाबाजी.. वरना दिन हफ्ते या महीने ना जाने कितना टाइम लगता बड़े बाबाजी के दर्शन करने के लिए..

बाबाजी उर्फ़ विरम, धनिराम औऱ धनिराम के पीछे एक नौकर अपने हाथ में कई डब्बे लिए हुए चल देते है..


बाबाजी - इन डब्बो में क्या ले आये हो धनिराम...

धनिराम - इनमे शहर के सबसे नामी हलवाई के दूकान की ताज़ा बनी मिठाईया है बाबाजी.. आपके लिए जो लाया तो वो नोकर से कहकर आपकी धर्मपत्नी के पास भिजवा दी औऱ ये बड़े बाबा ज़ी के लिए है..

किशोर - मगर बड़े बाबाजी तो ताज़ा मिठाई छोडो ताज़ा दाल रोती तक नहीं खाते.. सन्यासी इतने बड़े है कि क्या बताया जाए? कल जो बना था आज खाते है औऱ आज जो बना है वो कल खाते है.. हमेशा बासी खाना ही खाते है बड़े बाबाजी..


बाबाजी उर्फ़ विरम, धनीराम औऱ किशोर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह की कुटिया के बाहर आ जाते है..


बाबाजी उर्फ़ वीरम आवाज लगाते हुए - गुरुदेव...

अंदर से बड़े बाबाजी - आजा वीरम.. ले आ धनिराम को..

बाबाजी औऱ धनीराम कुटिया में आते हुए - प्रणाम बाबाजी.. प्रणाम गुरुदेव..

बड़े बाबाजी - कहो धनिराम.. इस बार क्या चाहते हो..

धनीराम नोकर को इशारे से मिठाई के डब्बे बड़े बाबाजी के सामने रखने के लिए कहता है औऱ नौकर धनीराम के कहे अनुसार बड़े बाबाजी के सामने मिठाई के डब्बे रख देता है जिसमे से उठती महक उस मिठाई की गुणवत्ता औऱ किस्म को उजागर कर रही होती है..



बड़े बाबाजी - मैं तो रूखी सुखी खाने का आदि हूँ धनिराम मुझे ये सब लालच क्यों दे रहा है.. तू बता तुझे क्या चाहिए?

धनिराम - बाबाजी.. आप तो जानते ही है सब.. फिर मेरा सवाल भी जानते ही होंगे तो आप ही बता दीजिये.. क्या मैं जो नया काम शुरू करने जारहा हूँ वो मेरे हित में रहेगा या मुझे नुकसान पहुचायेगा?

बड़े बाबाजी - हित तेरे धैर्य पर निर्भर है औऱ नुक्सान तेरी अधीरता पर.. अभी उचित समय की प्रतीक्षा कर धनिराम.. तेरी पुत्रवधु के गर्भ से अगले माह कन्या जन्म लेगी जिसके हाथ से तू जो भी कार्य शुरू करेगा सब फुले फलेगा.. कुछ चाहता है तो बता नहीं तो अब जा यहां से..


बड़े बाबाजी के कहने पर बाबाज़ी औऱ धनीराम कुटिया से बाहर आकर वापस पहाड़ी ओर जाने लगते है औऱ इधर बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह सामने रखी मिठाईया देखकर मुंह से लार टपकाने लगता है औऱ बाबाजी औऱ धनिराम के जाने के बाद डब्बे में से मिठाई निकालकर जल्दी से अपने मुंह में भर लेता है मगर जैसे ही बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह मिठाई अपने ने मुंह में डालता है मिठाई राख़ में बदल जाती है औऱ बड़े बाबाजी जोर जोर से थूकते हुए घड़े से पानी निकाल कर पिने लगता है औऱ अपने बगल में लेटे वैरागी के साये से कहता है..

बड़े बाबाजी - एक टुकड़ा तो खाने दे बैरागी.. कितना समय बीत गया बस बासी खाना ही खा रहा हूँ.. बहुत मन करता है कुछ स्वादिस्ट खाने का..

बैरागी - पर मैंने तो आपको कभी कुछ खाने से रोका ही नहीं हुकुम..

बड़े बाबा उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - याद है बैरागी जब हमने एक साथ भोजन किया था.. तब तूने मुझसे क्या कहा था..

बैरागी - मुझे तो आज भी एक एक पल याद है हुकुम.. मुझे जब आपके पहरेदार उस बैठक से एक आलीशान कश में ले गए थे औऱ मैं वहा टहल रहा रहा.....


फलेशबैक शुरू


पहरेदार बैरागी को वीरेंद्र सिंह की बैठक से अपने पीछे पीछे महल के एक अलीशान कमरे में ले आता है जो काफ़ी बड़ा औऱ सुन्दर था साथ में ही पहरेदार बैरागी के लिए साफ कपडे औऱ नहाने की व्यवस्था भी कर देता औऱ बढ़ेबाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह का संदेसा सुनाते हुए बैरागी से कहता है की जागीरदार ने उसे शाम के भोजन पर आमंत्रित किया है. बैरागी को नहाने औऱ हज़ाम से अपनी हज़ामत करवाने का कहकर पहरेदार उसके कमरे के बाहर आकर दो लोगों को पहरेदारी करने के लिए लगाता है औऱ खुद वापस वीरेंद्र सिंह के बैठक की तरफ चला जाता है..


बैरागी कई हफ्तों से नहीं नहाया था औऱ आज उसके नहाने औऱ अपने बड़े बड़े बाल औऱ दाढ़ी मुछ कटवाने औऱ वीरेंद्र सिंह के भिजवाए वस्त्र पहनकर उसका रूप पहले की तरह खिल उठा था.. उसके चेहरे से उसके दर्द का अंदाजा लगा पाना मुश्किल था औऱ उसकी पीड़ा को भाँपना मुश्किल था..


बैरागी ने दिन में उसके सामने लाया गया भोजन करने से इंकार कर दिया था औऱ स्वच्छन्द भाव से अपने कमरे से बाहर आ गया औऱ महल के बाग़ की तरफ टहलने लगा..

बाग़ में खिले हुए फूल औऱ उन फूलों से उठती हुई महक बाग़ के आस पास का वातावरण को अपनी खुशबु से सराबोर कर रही थी..

बैरागी महल से बाग़ में उतरती सीढ़ियों पर बैठ गया औऱ सामने खिलते हुए फूलों का जोड़ा देखकर अपने औऱ मृदुला के साथ बिताये उन हसीन तरीन पलो को याद करने लगा जिसमे दोनों ने साथ में जीवन के उस सुख को अनुभव किया था जिसे परमात्मा ने मनुष्य को वरदान के रूप में दिया है..


बैरागी बैठा हुआ अपने अतीत के पन्ने बदल रहा था की उसके कानो में मिठास घोल देने वाली मधुर आवाज सुनाई देने लगी औऱ वो अपने अतीत से वर्तमान में आ गया.. किसी औरत के गाने की इस आवाज ने बैरागी को अपनी जगह से उठने पर मजबूर कर दिया औऱ बैरागी आवाज का पीछा करते हुए बाग़ को पार करके एक मंदिर के पास आ गया मगर मंदिर के अंदर जाने की हिम्मत उसकी नहीं हुई औऱ वो मंदिर के बाहर ही खड़ा होकर उस गाने को सुनने लगा..


औरत ने बैरागी के मंदिर तक आने के कुछ देर बाद गाना बंद कर दिया. औरत के हाथ में थाली थी जिसमे पूजा का सामान रखा हुआ था औऱ साथ में प्रसाद.. औरत ने मंदिर में खड़े लोगों को प्रसाद बाँटा औऱ अपनी सेविकाओं को साथ लेकर मंदिर से बाहर आ गई..


औरत का नाम सुजाता था जो जागीरदार वीरेंद्र सिंह

की पत्नी थी.. सुजाता ने मंदिर से बाहर आने के बाद बैरागी को बाहर खड़े देखा तो सुजाता की सेविका ने सुजाता को बैरागी के बारे मे बताते हुए कहा कि बैरागी वीरेंद्र सिंह के मेहमान है औऱ आज ही महल में अतिथि बनकर आये है..

सुजाता अपनी सेविका से ये जानकार बैरागी की औऱ बढ़ी औऱ अपने साथ से प्रसाद देने लगी औऱ बोली..

सुजाता - मंदिर के बाहर खड़े होकर क्या कर रहे हो? मंदिर के अंदर क्यों नहीं आये? सब लोगों ने भगवान के दर्शन किये एक तुम ही उनके दर्शन से वंचित रह गए..

बैरागी ने सुजाता के पहनावे औऱ भाषा की शालीनता औऱ मुख पर तेज़ देखते हुए पहचान लिया कि ये इस जागीर के मालिक वीरेंद्र सिंह की पत्नी है..

बैरागी प्रसाद लेने से मना करते हुए - माफ़ करना रानी माँ.. मैं ईश्वर की परिकल्पना में विश्वास नहीं करता इसलिए ये प्रसाद मेरे लिए केवल मिठाई मात्र ही है.. मैं इसे प्रसाद के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता.. औऱ रही बात मेरे मंदिर के अंदर आने की है तो मैं पहले ही आपको अपने कुल गौत्र से अवगत करवा देता हूँ.. मैं एक नीच जाती मैं पैदा हुआ हूँ जिसका छुआ आप खाना भी पसंद नहीं करते..

सुजाता मुस्कुराते हुए अपने हाथों से बैरागी को प्रसाद खिला देती है औऱ कहती है - जात पात औऱ उच नीच तो समाज में रहने वाले लोगों के बनाये जाल है बेटा.. ईश्वर के सामने तो क्या राजा क्या रंक सभी सामान है.. मैंने प्रसाद समझकर दिया है तू मिठाई समझकर खा ले..

बैरागी हाथ फैलाते हुए - अगर ऐसी बात है तो एक औऱ लड्डू खिला दो रानी माँ.. कई दिन हो गए पेट में अन्न डाले.. अब तो जैसे बदन में खून सूखने लगा है..

सुजाता बैरागी के हाथ में लड्डू देते हुए - इतनी सी उम्र में ये मायूसी? कोई बात है जो दिल में चुबती है? बता दे.. बताने से मन हल्का हो जाएगा..

बैरागी लड्डू खाते हुए - अपनी पीड़ा औऱ दुख मनुष्य अगर अकेला भोग ले तो अच्छा है.. बताने से व्यथा बन जाती है जिसे सुन पाना सबके बस में नहीं होता..

सुजाता - तेरी आँखों में विराह का दुख नज़र आता है.. कोई ऐसा छोड़कर चला गया है जिसका वापस पाना संभव है.. सही कहा ना मैंने?

बैरागी - छोड़कर जाने वाले की विराह में जलना तो बहुत साधारण बात है रानी माँ.. मेरी प्रीत तो गंगा के पानी की तरह पवित्र है जो मेरे प्रियतम को हमेशा मेरे साथ रखती है.. मैं जब चाहु उससे बात करता हूँ.. उससे रूठता हूँ उसे मनाता हूँ..

सुजाता की सेविका - आपको अब महल में वापस चलना चाहिए.. हुकुम ने आपसे शीघ्र आने का आग्रह किया था..

सुजाता बैरागी से - प्रेम अंधे की आँख है बेटा.. प्रेम तो वासना को जानता भी नहीं.. प्रेम से वासना लाखों कोस दूर ही रहती है.. मैं तेरे अंदर झांककर देख सकती हूँ कि तू अपने प्रेमी से अब भी कितना प्रेम करता है..

बैरागी - प्रेम तो अविरल चलने वाली हवा का नाम है रानी माँ.. वक़्त के साथ कम ज्यादा होना प्रेम नहीं.. मेरा प्रेम मेरी मृदुला के लिए मेरे अंत तक ऐसे ही बना रहेगा.. इसे कोई भी मेरे ह्रदय से नहीं निकाल सकता..

सुजाता मुस्कुराते हुए - मृदुला.. जिसके स्वभाव में शालीनता हो.. हम्म्म.. मैं तेरी पीड़ा तो नहीं मिटा सकती.. ना ही तेरी मृदुला को ये बता सकती हूँ कि तू उससे कितना प्रेम करता है.. पर इतना जरूर कर सकती हूँ कि आज रात रात्रिभोज पर अपने हाथ से खाना पका कर खिलाऊ.. रात्रिभोज पर प्रतीक्षा रहेगी..

बैरागी - रानी माँ..

बैरागी सुजाता के रास्ते से परे हट जाता है औऱ सुजाता महल की औऱ चली जाती है उसके पीछे पीछे सुजाता की सेविकाऐ भी चली जाती है औऱ बैरागी मंदिर से वापस बाग़ की तरफ आकर बाग़ पार करते हुए महल में घूमने लगता है जहा गलती से वह कोषागार की तरफ आ जाता है औऱ उसमे प्रवेश करने वाला होता है की तभी पीछे से एक लड़का उसके कंधे पर हाथ रखकर बैरागी को पीछे खींच केता है औऱ दिवार से सटा के अपनी तलवार बैरागी के गले पर रख देता है..


लड़का - कौन है तू? और यहा क्या कर है?

बैरागी लड़के की सूरत देखकर हैरान हो गया था उसे जैसे अपनी आँखों पर यक़ीन ही नहीं हो रहा था कि वो क्या देख रहा है.. औऱ जो वो देख रहा है, वो सच है भी कि नहीं..

लड़का- बता.. वरना अभी तेरे कांधे से सर उतार लूंगा..

बैरागी मुस्कुराते हुए - साधारण सा आदमी हूँ.. दिखाई नहीं देता?

लड़का - मसखरी बंद कर नहीं तो तेरी जीवन लीला यही समाप्त हो जायेगी..

एक पहरेदार आते हुए - समर छोड़ उसे.. समर.. ये तो हमारे हुकुम के मेहमान है आज ही पधारे है.. छोड़ समर...


पहरेदार समर के हाथों की तलवार से बैरागी को बचा लेता है मगर पहरेदार के समर को पीछे धकेलने पर समर की तलवार की हलकी सी खरोच बैरागी के गले पर लग जाती है जिससे बैरागी के गले से खून की एक बून्द निकल पडती है.. पहरेदार बैरागी को वहा से बाहर ले जाता है मगर समर जैसे वही जम जाता है.. समर चाहकर भी अपनी जगह से नहीं हिल पाता औऱ अचरज से इधर उधर देखने लगता है, उसके आस पास कोई नहीं था मगर उसे महसूस हो रहा था जैसे कोई उसके सर पर मंडरा रहा है.. समर ने फिर से अपनी तलवार मजबूत पकड़ ली औऱ अपनी पूरी ताकत से अपनी जगह से हिलते हुए पीछे घूम गया जहा उसे एक परछाई दिखी.. समर ने आगे बढ़कर परछाई के पास जाने की कोशिश की मगर समर ने जैसे ही उस परछाई के पास जाने के लिए पहला कदम बढ़ाया एक हवा का झोंखा समर को पीछे उड़ा के ले गया औऱ समर दिवार से टकरा गया जिससे उसके सर से हल्का सा खून निकलने लगा..

परछाई समर के करीब आने लगी औऱ समर भी अपने आप को सँभालते हुए फिर से खड़ा होने लगा मगर इस बार परछाई में समर को एक लड़की की छवि दिखी औऱ उसके हाथों की तलवार उठने की जगह अपनेआप नीचे झुक गई.. समर ने गौर से उस छवि को देखा तो उसे उस छवि में अपना ही अक्स दिखाई दिया.. बिलकुल उसीके जैसे नयन नक्श औऱ चेहरा परछाई की छवि में समर को दिखा.. परछाई ने आगे बढ़कर जैसे समर को जान से मारने की नियत से प्रहार करना चाहा बैरागी वापस आते हुए समर का हाथ पकड़ कर समर को उसकी जगह से खींच लेता है औऱ परछाई का वार बेकार हो जाता है..

इससे पहले की परछाई अपना दूसरा वार करती बैरागी परछाई के पास जाता है औऱ उसे अपने गले से लगाकर अपने आप में समाहित कर लेता है औऱ वो परछाई लुप्त हो जाती है..


समर अभी तक उस परछाई की सूरत में ही अटका हुआ था उसे अपने सामने हो रही किसी भी चीज का कोई होश नहीं था.. उसने अभी अभी कुछ ऐसा देखा था जो देखना किसी भी आम इंसान के लिए संभव नहीं था उसके सामने एक परछाई थी जिसने लगभग उसके प्राण ले ही लिए थे. मगर एन मोके पर बैरागी ने आकर उसके प्राण बचा लिए..


बैरागी परछाई को अपने आप में समाकर वापस समर के करीब आ जाता है औऱ उसे सहारा देते हुए उठा कर वहा से बाहर ले आता है जहा दूसरे पहरेदार समर को देखते ही उसे एक जगह बैठा देते है.. बैरागी समर के सर पर गली चोट को देखते हुए उसका उपचार करने लगता है तभी उसे समर की गर्दन पर वैसा ही तिल नज़र आता है जैसा उसने प्रेम प्रसंग के समय मृदुला की गर्दन पर देखा था.. बैरागी कै मन में उसी तरह कई प्रश्न घूम रहे थे जैसे समर के मन में घूम रहे थे दोनों को ही अपने सवाल के जवाब नहीं मिले.. बैरागी सोच रहा था क्यों समर की शकल सूरत मृदुला से इतनी मेल खाती है औऱ उसके गर्दन पर वो तिल के निशान जो मृदुला के भी थे कैसे बने हुए है? बैरागी ने समर का उपचार कर दिया औऱ वहां से चला गया समर भी अपनी जगह बैठा रहा औऱ बैरागी कब वहा से गया उसे पता ही नहीं चला..


बैरागी अपने कमरे में था की एक पहरेदार ने उसके कमरे के दरवाजे पर दस्तक देते हुए रात्रिभोज के लिए साथ आने का कहा.. जिसपर बैरागी उस पहरेदार के साथ साथ होकर चल दिया.. पहरेदार उसे लेकर जागीरदार के निवास स्थान पर ले आया जहा एक बड़े से कमरे में जागीरदार वीरेंद्र सिंह सामने की तरफ एक बड़े से आसान पर बैठा हुआ था..

वीरेंद्र सिंह - आओ बैरागी बैठो..

वीरेंद्र सिंह ने वैरागी को अपने सामने कुछ दूर नीचे जमीन पर बिछी चटाई पर बैठने को कहा जहा चौकी पर खाली खाने की थाली रखी हुई थी..

बैरागी उस थाली के सामने बैठ जाता है तभी वीरेंद्र सिंह पहरेदार को कुछ इशारा करता है औऱ पहरेदार समर को उस बड़े से कमरे में ले आता है.. समर के हाथ में बेड़िया थी औऱ उससे उसकी तलवार भी छीन ली गई थी..

वीरेंद्र सिंह - कोषागार में इस पहरेदार ने तुम्हारे साथ जो किया उसकी सुचना हमे मिल चुकी है.. तुम्हारा दोषी तुम्हारे सामने है बैरागी जो सजा इसे देना चाहो दे सकते हो.. चाहो तो इसकी तलवार से इसका सर अलग कर दो..

बैरागी अपनी जगह से खड़ा हो कर समर के करीब जाता है औऱ वीरेंद्र सिंह से कहता है..

बैरागी - मेरे साथ जो हुआ वो मेरी भूल का परिणाम था हुकुम.. मगर ये तो अपना कर्तव्य का निर्वाहन कर रहा था.. इसे इस तरह बाँध कर लाना तो आपका न्याय नहीं हो सकता..

सुजाता कमरे में प्रवेश करते हुए - बिलकुल सही कहा तुमने.. जिसका सम्मान होना चाहिए उसका अपमान करना उचित नहीं..

समर औऱ बैरागी झुककर प्रणाम करते हुए - रानी माँ..

वीरेंद्र सिंह - मगर इसने हमारे अतिथि के गले पर अपनी तलवार रखी है.. सजा तो इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता समर के हाथों की बेड़िया खोलती हुई - अतिथि अगर वर्जित जगह पर प्रवेश करें तो पहरेदार का कर्तव्य है उस अतिथि को सही रास्ता दिखाए.. इससे जो कुछ हुआ वो भूलवश हुआ अगर इसे पता होता की ये आपका अतिथि है तो कभी ऐसी भूल नहीं करता..

बैरागी - रानी माँ.. सत्य कहती है हुकुम.. समर से जो कुछ हुआ वो उसके अज्ञान औऱ मेरी भूल के कारण हुआ.. जिसका फल हम दोनों को मिल चूका है.. इस तरह इसे सजा देना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?

वीरेंद्र सिंह - अज्ञान में ही सही मगर इस लड़के ने हमारे अतिथि पर तलवार उठाई है कुछ तो सजा इसे मिलनी ही चाहिए..

सुजाता - आपके अतिथि के अपमान की सजा, हम इस लड़के को देते है.. आज ये लड़का कोषागार की पहरेदारी से हटाकर महल के उस हिस्से की पहरेदारी करेगा जहा हम निवास करते है.. अब से ये हमारी रक्षा करेगा..

वीरेंद्र सिंह - ये तो कोई सजा नहीं हुई..

सुजाता अपने साथ आई सेविकाओ को खाना परोसने का इशारा करते हुए - एक योद्धा से उसकी जगह छीन लेना उसकी जान लेने से ज्यादा कहीं बड़ी सजा है.. आप तो अच्छे से जानते है.. अब भोजन करिये..

वीरेंद्र सिंह आगे कोई औऱ बात नहीं करता औऱ सेविकाओं के द्वारा परोसा गया भोजन बैरागी को खाने के लिए बोलकर स्वम भी खाने लगता है..


सुजाता समर को उसकी तलवार लोटा देती है औऱ समर सुजाता के पीछे पीछे उस कमरे से बाहर आ जाता है औऱ थोड़ा दूर सुजाता के पीछे चल कर सुजाता से कहता है..

समर - मेरी जान बचाने के लिए धन्यवाद रानी माँ...

सुजाता मुस्कुराते हुए - इसमें धन्यवाद केसा? तू अपना कर्तव्य का पालन कर रहा था.. तेरी जान लेना जागीरदार का पाप होता औऱ मैं कैसे ये पाप होने दे सकती थी..


वीरेंद्र सिंह - तुम्हारे सामने खाने की कितनी ही स्वादिस्ट वस्तुए पड़ी है बैरागी.. मगर तुम हो की बस ये साधारण सी चीज खाये जा रहे हो..

बैरागी - मेरा भोजन तो मेरे प्रियतम के बिना अधूरा है हुकुम.. मेरे भोजन करने का उद्देश्य मात्र इतना की मैं अपने शारीर को तब तक जिन्दा रख सकूँ जब तक मुझे वो नहीं मिल जाता जिसे में खोज रहा हूँ.. मेरे लिए इन सब व्यंजनो का कोई महत्त्व नहीं..

वीरेंद्र सिंह - जैसा तुम चाहो बैरागी.. कल मैं तुम्हे कुछ ऐसा दिखाऊंगा जिसकी तुम्हे तलाश है.. मगर अभी मुझे भोजन का स्वाद लेने की इच्छा है.. इस तरह का स्वादिस्ट भोजन सबके भाग्य में नहीं...

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम ऐसा भोजन सबके भाग्य में कहा.. आप आराम से भोजन करिये.. आगे भविष्य के घर्भ में क्या छीपा है किसको पता?


फ़्लैशबैक ख़त्म


भविष्य के गर्भ में क्या छीपा है किसीको क्या पता...

बड़े बाबाजी उफ़ वीरेंद्र सिंह - सही कहा था तूने बैरागी.. मुझे कहा पता था कि भविष्य ने मेरे लिए अपने गर्भ में क्या छीपा रखा था.. रोज़ पचासो तरह के व्यंजन खाने का अभ्यास मैं साधारण खाने के एक निवाले को भी तरस जाऊँगा.. रोज़ बासी खाना खाते हुए सैकड़ो साल बीत गए मगर मेरी ये सजा है की ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती.. मृत्यु मोक्ष लगने लगी है वैरागी..

बैरागी - अगर आपने वो जदिबूती नहीं खाई होती तो मैं ही आपको मुक्ति दे देता हुकुम.. मुझसे भी आपकी ये दशा नहीं देखी जाती.. आपके साथ ही मेरी मुक्ति भी जुडी हुई है.. मैं भी कब से आपके साथ आपकी परछाई बनकर रहता आया हूँ..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - एक बात सच बताऊ बैरागी.. उस दिन जब तू मेरे सामने चटाई पर बैठकर सारा भोजन छोड़कर सिर्फ सादा खाना खाने लगा था तब मैंने सोचा था कि तू बस कुछ दिन ही अपनी पत्नी का शोक मनायेगा औऱ आनंद से जीवन बिताएगा.. मगर तु तो आज साढ़े तीन सो साल बीत जाने के बाद भी अपनी पत्नी को ऐसे याद करता है जैसे तेरी विराह अभी शुरू हुई हो.. तेरे गीत सुनकर तो मुझे भी सुजाता की याद आने लगती है.. कितना उज्वल प्रकाश से भरा हुआ चेहरा था उसका..

बैरागी - सही कहा आपने हुकुम.. रानी माँ की करुणा सब पर बनी हुई थी.. आपके लिए उन्होंने अपने प्राण तक दे दिए..

बड़े बाबाजी उर्फ़ वीरेंद्र सिंह - उसी बात का तो मुझे अब भी दुख है बैरागी.. काश उसदिन मेरे ही प्राण चले गए होते..

बैरागी - बार बार उस पाल को याद करके क्यों उदास हो रहे हो हुकुम.. चलिए जंगल में चलते है.. खुली हवा में सांस लोगे तो अच्छा लगेगा..
 
Update 19



तुझमे मज़ा ही नहीं है बहनचोद.. हट.. तेरी शकल देखकर लंड भी खड़ा नहीं होता मेरा.. ये कहते हुए असलम बिस्तर से खड़ा हो जाता है औऱ अपने सामने टांग खोले लेटी रेशमा को दो-चार औऱ गालिया देकर साइड टेबल पर पड़ा शराब का एक पेग एक घूंट में ख़त्म करता है औऱ फिर सिगरेट सुलगा कर कश लेता हुआ कमरे से बाहर चला जाता है औऱ रेशमा चुपचाप बिस्तर पर पड़ी रहती है, असलम के कमरे से बाहर जाने के बाद अपनी सलवार पहनकर बिस्तर पर अपने दोनों पैरों को साथ में जोड़ कर अपना सर अपने घुटनो में रखकर रोने लगती है..

आदिल की बहन रेशमा की शादी कुछ साल पहले असलम से हुई थी असलम औऱ रेशमा की शादीशुदा जिंदगी सही नहीं चल रही थी दोनों में प्यार था ही नहीं.. असलम बहुत शराब औऱ सिगरेट पिने का आदि थी औऱ शादी के वक़्त तक उसका लंड ढीला पड़ चूका था.. शादी के बाद कुछ महीने तो उसने ढीले लंड से ही रेशमा के साथ सम्भोग किया जिसमे हर बार रेशमा मज़बूरी में असलम के साथ ये सब करती मगर फिर असलम का लंड खड़ा होना भी बंद हो गया जिससे वो बस रेशमा से छेड़खानी ही करता उसके अलावा कुछ नहीं.. असलम भी बखूबी अपनी कमजोरी जानता था इसलिए उसने उसने अपने घरवालों के ताने मारने औऱ रेशमा को बाँझ कहने पर भी उसे शादी के चार साल बाद भी तलाक नहीं दिया औऱ रेशमा को बस एक चीज समझने लगा था.. रेशमा को शादी के बाद कभी असलम से जिस्मानी सुख नहीं मिला..

रेशमा अपना सर घुटनो में दिए बैठी थी की उसके व्हाट्सप्प नम्बर कोई massage आया जिसके नोटिफिकेशन से उसका ध्यान अपने दुख से फ़ोन की तरफ चला गया..
रेशमा ने देखा की उसके व्हाट्सप्प पर किसी अनजान नम्बर से कुछ massage आया है जिसकी DP में एक बच्चे की स्माइल इमोजी थी..
हेलो..
रेशमा ने रिप्लाई किया - कौन?
आपका आशिक..
रेशमा ने गुस्से से फ़ोन नम्बर ब्लोक करके वापस नीचे रख दिया औऱ उसी तरह बैठ गई..
कुछ देर बाद वापस रेशमा के फ़ोन पर अलग नम्बर से व्हाट्सप्प नोटिफिकेशन आया औऱ उसने इस बार जब DP देखी तो उसने देखा की उसपर गौतम की एक प्यारी सी तस्वीर लगी थी..
गौतम - हेलो..
रेशमा गौतम की तस्वीर देखकर थोड़ी हैरान हुई लेकिन फिर उसने गौतम के massage का रिप्लाई किया..
रेशमा - बोलो..
गौतम - आई लव यू..
रेशमा ने जब ये मैसेज देखा उसके दिल में अजीब सी हलचल होने लगी, उसे पहले गुस्सा आया मगर फिर उसका गुस्सा मीठी से अहसास में बदल गया.. आज तक किसीने उसे आई लव यू नहीं बोला था औऱ असलम से ये उम्मीद करना बेईमानी थी..
रेशमा कुछ पल ठहर कर रिप्लाई किया - पहले वाला massage भी तूने किया था ना? थप्पड़ खाने का इरादा है क्या? बोलू अब्बू को?
गौतम - बोल दे.. तेरी ख़ुशी के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ..
रेशमा - कमीने सुधर जा.. आदिल की बहन हूँ मैं.. औऱ तुझे मेरा नम्बर कहा से मिला?
गौतम - नम्बर तो आदिल के फ़ोन में देख लिया था.. औऱ सुधरने के लिए बिगड़ा ही कहा हूँ मैं.. बस तुमसे प्यार करता हूँ.. पहले बोल नहीं पाया तो अब बोल रहा हूँ..
रेशमा - बड़ा आया प्यार करने वाला.. 4 साल बड़ी हूँ तुझसे.. औऱ घर के सामने आकर .. जोर जोर से कबाड़ी वाले चिल्लाने में शर्म नहीं आती तुझे?
गौतम - शर्म नहीं मज़ा आता है जानू.. औऱ 4 बड़ी हो तो क्या हुआ? इतना दम है कि बिस्तर में रुला दूंगा..
रेशमा को अब गौतम से चैट करने में मज़ा आने लगा था औऱ सोच रही थी उसका दिनभर खाली पड़ा समय गौतम से बात करके आराम से गुजर सकता है..
रेशमा - बड़ा आया रुलाने वाला.. ये आशिक़ी ना कहीं औऱ जाकर झाड़ना.. मेरे पास देने के लिए सिर्फ थप्पड़ है.. खाना हो तो बताना..
गौतम - हाँ खाना है.. बताओ कहाँ आना पड़ेगा खाने के लिए?
रेशमा मुस्कुराने लगी औऱ रिप्लाई किया - लगता है तेरे घर आकर आंटी से शिकायत करनी पड़ेगी तेरी.. बहुत ज्यादा बिगड़ गया है तू.. कमीना अपने दोस्त कि बहन को ही नहीं छोड़ रहा..
गौतम - बहन छोडो मैं तो अम्मी के चक्कर में भी हूँ.. देखता हूँ मेरे दोस्त आदिल की अम्मी ज्यादा मस्त है या बहन..
रेशमा - कुत्ते तू पक्का पीटने वाला है मेरे हाथों से.. 5-6 दिन बाद जब घर आउंगी तब बताऊंगी तुझे..
गौतम - इतना लम्बा इंतजार करना पड़ेगा तुम्हारा?
रेशमा गौतम का रिप्लाई देखकर मन ही मन मुस्कुराते हुए सोचने लगी थी गौतम कैसे इतनी बेशर्मी से उससे बात कर रहा है औऱ उससे इसमें क्यों एक अजीब सुकून मिल रहा है..
रेशमा - गर्लफ्रेंड नहीं है तेरी?
गौतम - ये क्यों पूछ रही हो?
रेशमा - पहले बता है या नहीं..
गौतम - नहीं है..
रेशमा - तभी तू अपने दोस्त की बहन के पीछे पड़ा है कमीने.. चुपचाप सुधर जा वरना अच्छा नहीं होगा.. कुत्ता कमीना..
गौतम - अच्छा वरना क्या कर लोगी तुम? औऱ बार बार कुत्ता मत बोलो समझी? तुम खूबसूरत हो इसका मतलब ये नहीं कि मैं तुमसे कुछ भी सुन लूंगा..
गौतम से अपनेआपको खूबसूरत होने की बात सुनकर रेशमा के मन में गौतम के लिए आकर्षण पैदा होने लगा था औऱ वो इसमें एक ख़ुशी को महसूस कर रही थी.. उसका मन अब गौतम से औऱ बात करने का हो रहा था..
रेशमा - हो तुम कुत्ते, औऱ कुत्ते ही नहीं कमीने भी हो.. बेशर्म भी हो औऱ बेवकूफ भी.. समझें?
गौतम - रेशमा देखो मैं तुम्हे पसंद करता हूँ औऱ तुम हसीन औऱ प्यारी हो इसका मतलब ये नहीं मैं कुछ भी सुनूंगा.. अब अगर मुझे कुछ बोला तो फिर देखना..
रेशमा वापस गौतम की बात सुनकर मीठे अहसास से भरी जा रही थी उसे लगने लगा था की गौतम उसके अकेलेपन को काटने का जरिया हो सकता है..
रेशमा - नहीं तो क्या करोगे? मम्मी से शिकायत करोगे मेरी.. अरे मेरा बाबू.. इतनी बात पर रोने लगा..
गौतम - ज्यादा ना मेरे मज़े मत ले.. वरना बाद में ऐसा रुलाऊंगा ना याद करेगी..
रेशमा - जाके कार्टून देख टीवी में, बड़ा आया रुलाने वाला.. शकल देखने से लगता है तू लड़का नहीं लड़की है.. प्यार करेगा मुझसे.. कुत्ता..
गौतम - अपनी माँ चुदा.. नहीं करूँगा अब massage... बार बार कुत्ता बोल रही है..
रेशमा - गाली देना भी आती है तुझे? मैं समझी अभी भी मम्मा का दूदू पिता होगा..
रेशमा को इस बार अपने massage का रिप्लाई नहीं मिला तो उसने वापस massage किया..
क्या हुआ? नाराज़ हो गया मेरा कुत्ता.. इतनी जल्दी प्यार का भूत उतर गया?
इस massage को भी गौतम ने seen करके छोड़ दिया औऱ रिप्लाई नहीं दिया..
रेशमा वापस - बोल ना कुछ अब.. अभी तो प्यार मोहब्बत की बातें कर रहा था.. अब चुप हो गया..
वापस massage को गौतम ने seen करके छोड़ दिया औऱ रिप्लाई नहीं दिया अब रेशमा हलकी सी बेचैन होने लगी थी..
रेशमा - सच में बुरा लगा? अच्छा सॉरी.. अब तो रिप्लाई कर..
गौतम ने इसे भी seen करके छोड़ दिया औऱ कुछ रिप्लाई नहीं दिया तो रेशमा गुस्से औऱ बेचानी से भर गई उसने सीधा नम्बर डायल करके गौतम को फ़ोन लगा दिया..
गौतम फ़ोन उठाके - हेलो..
रेशमा - हेलो के बच्चे.. रिप्लाई करने में उंगलियां घिस जाती हो तेरी? जवाब क्यों नहीं दे रहा?
गौतम - तूने ही तो कहा.. सुधर जा.. मैं सुधर गया.. औऱ वैसे भी मुझे बार बार खूबसूरत लड़कियों से कुत्ता सुनने का शोक नहीं है..
रेशमा - अच्छा ज़ी.. फ़ोन में घुसके ऐसा थप्पड़ मारूंगी ना होश ठिकाने आ जाएंगे तेरे.. चुपचाप व्हाट्सप्प पर बात कर मुझसे.. समझा? औऱ कुत्ता तो तू है, मैं बोलूंगी तुझे कुत्ता..
गौतम - बाद में बात करूंगा, मुझे नींद आ रही है.. सोना है..
रेशमा - सच में तू लड़की ही है.. कुत्ते.. कितने नखरे कर रहा है..
गौतम - मैं नखरे कर रहा हूँ? औऱ तू क्या कर रही है?
रेशमा - मैं करुँगी ही.. तू आया है मेरे पास, मैं नहीं आई..
गौतम - गलती हो गई मेरी जो मैं आ गया.. वापस नहीं आऊंगा..
रेशमा - वापस आने के लिए मैं तुझे जाने दूंगी तब ना.. बहुत शोक है ना तुझे अपने दोस्त की बहन पटाने का? तुझे तो मैं अपना कुत्ता बनकर रखूंगी अब..
गौतम - मुझे कोई शोक नहीं है कुत्ता बनने का, अपने शोहर को बनाना.. मुझे माफ़ कर.. सुबह बहुत काम है, सोना है मुझे..
रेशमा फ़ोन पर kiss देते हुए - उम्म्महां... सो जा मेरे कुत्ते.. सुबह बात करूंगी तुझसे..
गौतम हसते हुए - मैं नहीं करूँगा...
रेशमा किसी के आने की आहट सुनकर..
रेशमा - कोई आ रहा है.. रखती हूँ.. बाय बेबी...
रेशमा फ़ोन काट देती है औऱ बिस्तर पर उसी उदासी के साथ बैठ जाती है कि सामने दरवाजे से असलम नशे में चूर होकर लड़खड़ाते हुए आकर बिस्तर पर गिर जाता है औऱ थोड़ी देर में खराटे भरने लगता है वही रेशमा के मुंह से बेबी सुनकर गौतम को अजीब अहसास होने लगता है.. औऱ वो मुस्कुराते हुए बिस्तर में उल्टा लेट के रेशमा को याद करता हुआ मुस्कुराने लगता है..
रेशमा गौतम का नम्बर Kutta नाम से सेव कर लेती है औऱ उसकी व्हाट्सप्प DP को देखते हुए कुछ सोचकर मुस्कराने लगती है फिर एक के बाद एक कई चुम्मे गौतम की तस्वीर पर कर देती है औऱ उसे अपने सीने से लगाकर मीठे सपनो में खोकर सो जाती है..

रात के साढ़े गयराह का समय हो चूका था औऱ गौतम अभी अभी रेशमा से बात करके सोने के लिए लेटा था
वही सुमन की चुत सुलग रही थी वो बिस्तर पर करवट बदलते हुए सोने की नाकाम कोशिश कर रही थी उसकी चुत ना जाने क्यों अपने आप गीली हुई जा रही थी औऱ उसके सामने आज सुबह की हसीन यादे आने लगी थी जब गौतम ने उसकी चुत को चाट कर उसकी चुत से अमृत वर्षा की थी.. सुमन का दिल वापस उसी वर्षा में भीगने को आतुर हो रहा था औऱ वो चाहती थी की गौतम उसे वापस वही सुख दे जो उसने सुबह उसे दिया था. सुमन की हालत एक ऐसी प्रियतमा की हो चुकी थी जिसे ना तो मिलन चाहिए था ना ही जुदाई.. सुमन से रहा ना गया तो वो बाथरूम में घुसकर अपनी चुत को उंगलि से ठंडा करने की कोशिश में लग गई मगर उसकी चुत में अब गौतम के मुंह का जाइका लग चूका था औऱ वो चाहती थी की गौतम उसकी सुलगती चुत को चूसकर ठंडा कर दे..

सुमन ने बाथरूम में उंगलि करनी बंद कर दी औऱ अपनी साडी को कमर से ऊपर उठाकर अपनी लम्बी लम्बी झांटो को साफ झरने में लग गई.. कुछ पलों में उसकी चुत के आस पास के सारे बाल साफ हो गए औऱ उसकी गुलाबी चुत निखर कर औऱ भी ज्यादा आकर्षक बनकर सामने आ गई.. सुमन अपनी गुलाबी चुत देखकर बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए उस पर हाथ फेरकर गौतम को याद करने लगी औऱ अब उसने गौतम से वापस अपनी चुत शांत करवाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था मगर जब उसने दिवार पर लटक रही घड़ी देखी तो कुछ असमंजस में पड़ गई.. रात के बारह बज चुके थे औऱ इस वक़्त गौतम के पास जाना उसे अजीब लग रहा था.. उसे लग रहा था की गौतम सो चूका होगा औऱ अब वो अपनी इच्छा को पूरी नहीं कर पाएगी, सुमन उदासी से वापस बिस्तर पर आ गई औऱ अपनी सुलगती हुई चुत को सहलाते हुए गौतम को याद करने लगी..

सुमन इसी तरह कुछ देर लेटी रही औऱ अपने ख्यालों में खोकर गौतम औऱ उसके बीच सुबह हुआ प्यार की पहली उपलब्धि को याद करते हुए काम की आग में सुलगने लगी.. इसी तरह लेटे लेटे आधा घंटा औऱ बीत चूका था मगर सुमन को ना नींद आ रही थी ना सुकून मिल रहा था औऱ ना ही अपनी सुलगती चुत से छुटकारा मिल रहा था.. उसने गौतम के पास जाने का वापस सोचा मगर घड़ी में समय औऱ गौतम को नींद से जगाने का ख्याल उसे रोकने लगा..

सुमन ने अपना फ़ोन उठाकर गौतम को व्हाट्सप्प पर massage करने की सोची जिससे वो पता लगा सके की गौतम जाग रहा है या नहीं.. सुमन ने व्हाट्सप्प पर गौतम को massage किया औऱ उसके रिप्लाई का इंतजार करने लगी..

गोतम अभी भी रेशमा की यादो में खोया हुआ था मगर फ़ोन पर नोटिफिकेशन बीप की आवाज सुनकर उसका ध्यान रेशमा की यादो से उचट गया औऱ उसने अपने फ़ोन को हाथ में लेकर उसमे आये सुमन के massage को देखा..
सुमन - ग़ुगु सो गया क्या?
गौतम अपनी माँ का massage औऱ घड़ी में समय देखकर समझ गया की सुमन के मन में क्या चल रहा है.. गौतम massage देखकर मुस्कुराने लगा औऱ सोचने लगा कि अब उसकी माँ सुमन भी उसके लिए तैयार है.. गौतम ने तुरंत रिप्लाई करने का ख्याल दिमाग से निकाल दिया औऱ थोड़ा इंतेज़ार करने लगा..
इधर सुमन बेसब्री से गौतम के रिप्लाई का इंतजार कर रही थी मगर जब उसे दस मिनट गुजरने के बाद गौतम का रिप्लाई नहीं मिला तो वो निराश होकर फ़ोन बिस्तर पर पटक दिया औऱ एक तकिये को अपनी छाती से लगाकर बिस्तर ओर बैठ गई औऱ नाउम्मीदी से उदास हो गई.. सुमन ऐसी बैठी ही थी कि उसके फ़ोन पर नोटिफिकेशन की आवाज हुई औऱ सुमन ने फ़ोन हाथ में कर उसमे गौतम का massage देखा..
गौतम - नहीं माँ.. आप भी नहीं सोइ अभी तक?
सुमन की सारी उदासी हवा हो गई औऱ वो ख़ुशी से भर गई सुमन ने रिप्लाई किया..
सुमन - बेटू मुझे नींद नहीं आ रही?
गौतम - मुझे भी नींद नहीं आ रही माँ..
सुमन - नई जगह है ना शायद इसलिए.. एक दो दिन में आदत लग जायेगी..
गौतम - वो भी है पर आप जानती हो मुझे आपके साथ सोने की आदत लग चुकी है..
सुमन मुस्कुराते हुए - जानती हूँ बेटू.. पर यहां साथ नहीं सो सकते.. किसीने देख लिया तो बात का बतंगड़ बना देंगे..
गौतम - सही कह रही हो माँ.. किसीने देख लिया तो सोचेंगे हमारे बीच अफेयर चल रहा है..
सुमन - बेटू..
गौतम - हां माँ...
सुमन - तेरे रूम का सामने वाला दरवाजा बंद है क्या?
गौतम - हां क्यों?
सुमन - कुछ नहीं.. मैंने भी अपने रूम का सामने वाला दरवाजा बंद कर रखा है..
गौतम - तो?
सुमन - तो मेरे ग़ुगु ज़ी.. मैं पीछे हम दोनों के रूम की कॉमन बालकनी से तेरे रूम में आ रही हूँ.. पीछे बालकनी वाला दरवाजा खुला रखना..
गौतम - आ जाओ माँ.. खुला ही है..

गौतम ने अपनी टीशर्ट औऱ लोवर निकाल दिया औऱ सुमन का इंतज़ार करने लगा.. दो मिनट बाद सुमन भी अपनी साडी निकालकर सिर्फ ब्लाउज औऱ पेटीकोट में पीछे बालकनी के दरवाजे से गोतम के रूम में आ गई औऱ दरवाजा लगा दिया..
सुमन - बेशर्म कुछ पहन तो ले..
गौतम अपनी वी-शेप चड्डी के ऊपर से लंड को मसलते हुए - चड्डी पहन तो रखी है माँ.. औऱ इतना कहकर गौतम आगे बढ़ गया औऱ सुमन को अपनी बाहों में भर लिया..
सुमन - आराम से ग़ुगु.. कितना कसके पकड़ता है तू..
गौतम - आप ना चुप रहो.. समझी? मैं कब से आपका वेट कर रहा था औऱ आपने massage किया तो रात के पौने एक बजे..
सुमन - माफ़ कर बेटू.. मुझे लगा तू सो गया होगा..
गौतम सुमन का ब्लाउज खोलते हुए - माँ आप जानती तो हो आपका दूध पिए बिना मुझे नींद नहीं आती, आपके बिना कैसे सो सकता हूँ मैं?
सुमन - सॉरी बेटू.. माफ़ कर दे.. कल से इतनी देरी नहीं करुँगी..
गौतम ब्लाउज उतार कर ब्रा खोलते हुए - कोई बात नहीं माँ.. आपके लिए सब माफ़ है..
सुमन अपनी चूचियाँ गौतम को दिखाती हुई - देख तूने इनका क्या हाल किया था सुबह.. पुरे बूब्स पर तेरे काटने से कितने निशान बन गए.. भाभी पूछ रही थी इतनी ढक कर क्यों साडी पहनी है.. अब उनको क्या बताऊ? मेरा ग़ुगु मेरे बदन पर जगह जगह काटने के निशान छोड़ता है..
गौतम सुमन के पेटीकोट के नाड़े को खींचकर खोलता हुआ - किस बेशर्म का नाम ले रही हो माँ इस वक़्त.. सच कहु तो उसकी शकल देखकर मुझे गुस्सा आने लगता है..
पेटीकोट उतरने से सुमन भी गौतम की तरह चड्डी में आ जाती है औऱ कहती है..
सुमन - ऐसा क्यों बोलता है बेटू.. मामी है तेरी, औऱ इस बार तो तुझे बहुत प्यार भी कर रही है.. देखा नहीं कैसे आते ही तुझे अपने गले से लगाया था भाभी ने औऱ तेरे लिए कितना प्यारा औऱ महंगा सूट लिया है उन्होंने.. खाने के समय भी तो अपने हाथ से तुझे खाना खिला रही थी औऱ तुझे चुम रही थी..

गौतम सुमन को बाहों में उठाकर उसके साथ बिस्तर में गिरते हुए - प्यार नहीं कर रही माँ.. मामी लेना चाहती है मेरी.. सुबह जब मेरे गले लगी थी तब उनका हाथ आपके छोटे ग़ुगु पर था.. आप तो बातों में खोई हुई थी आपको पता भी नहीं चला.. मामी ने अच्छे से मेरे लंड को दबा के मसला था औऱ उसके बाद से मेरे पीछे पड़ी हुई है.. खाने के समय भी मामी अपने पैर से मेरे पैर को रगड़ रही थी.. मैं तो बस आपके कहने पर चुप हूँ वरना मामी को ऐसा सबक सिखाऊ की याद रखे वो रंडी..
सुमन गौतम के होंठ अपनी ऊँगली से पकड़कर - ग़ुगु चुपकर.. मामी को गाली देता है.. कितनी बड़ी है तुझसे वो.. औऱ थोड़ा बहुत तुझे इधर उधर छू लिया तो क्या हो गया उसमे..
गौतम - मामी की तरफदारी इसलिए कर रही हो ना क्युकी वो अब तमीज में बात कर रही है? मुझसे बढ़कर हो गई आपके लिए मामी?
सुमन गौतम के सीने के ऊपर आकर उसे चूमते हुए बोली - अच्छा ज़ी.. बाहर जब बड़ी उम्र की औरतों के साथ मुंह काला करता है तब तुझे शर्म नहीं आती.. औऱ घर की किसी औरत ने जरा छू लिया तो गुस्सा आ गया मेरे शहजादे को..
गौतम सुमन के कूल्हे मसलकर - किसके साथ मुंह काला किया मैंने.. जरा बताओगी आप?
सुमन गौतम की चड्डी में हाथ डालकर उसके लंड को मसलते हुए - मेरा मुंह मत खुलवा मेरे शहजादे.. मैं सब जानती तूने किस किसको अपने लंड पर खिलाया है..
गौतम सुमन के होंठों को चूमकर - तो बताओ ना.. ऐसे पहेलियाँ क्या बुझाती हो..
सुमन गौतम के चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़कर एक लम्बा औऱ गहरा चुम्मा करते हुए - पिंकी के साथ उस रात तूने क्या क्या किया था मैं सब जानती हूँ.. उसके बाद होटल के रूम नम्बर 402 में तेरी वो टीचर क्या नाम बताया था तूने उसका माधुरी.. उसके साथ तूने जो गुल खिलाये थे वो भी मुझे मालुम है.. औऱ उस पुलिसवाली रजनी को खुलेआम जो तूने रगड़ा था ना उसका वीडियो भी मैंने तेरे फ़ोन में देखा पूरा देखा है.. इसके बाद तेरे फ़ोन में जो बुर्केवाली औरत की तस्वीरे है उसे देखकर लगता है तूने उसके साथ भी अपना ये गोरा मुंह काला किया हुआ है.. बेशर्म इतनी बड़ी बड़ी औरत के साथ मुंह काला करने के बाद अपनी सगी मामी के थोड़ा सा छूने पर मुझसे बच्चों की तरह मामी की शिकायत कर रहा है..

गौतम सुमन से ये सब सुनकर हैरान औऱ शर्म से लाल हो चूका था उसे समझ नहीं आ रहा था आगे सुमन से क्या कहे औऱ क्या करें.. सुमन गौतम के मनोदशा समझ रही थी औऱ सुमन ने ही गौतम से आगे बात करना शुरू किया..
सुमन प्यार से गौतम के चेहरे को अपनी तरफ करके - क्या हुआ मेरे शहजादे.. हो गई बोलती बंद? तेरी माँ हूँ मैं.. समझा?
गौतम - आप सब जानती हो फिर मुझसे कुछ नहीं बोली..
सुमन - क्या बोलती? वैसे भी अगर तुझे बड़ी औरत पसंद है तो इसमें क्या बुराई है? तेरी ख़ुशी के आगे तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ.. तुझे अगर रूपा आंटी भी पसंद है बता मैं उसे मना लुंगी तेरे लिए..
गौतम मुस्कुराते हुए - अच्छा.. अब मेरे लिए दलाली भी करोगी आप?
सुमन हंसकर - तेरी लिए वो भी कर लुंगी..
गौतम - मुझे रूपा आंटी पसंद है पर आप रहने दो मैं खुद ही उन्हें मना लूंगा..
सुमन के लंड को मसलते हुए - मामी अगर छोटी मोटी छेड़-छाड़ी करें तो बुरा मत मानना ग़ुगु..
गौतम सुमन के निप्पल्स मरोड़ते हुए - आप फ़िक्र मत करो.. मामी को अब मैं बताऊंगा.. औऱ ऐसा बताऊंगा की मामी जिंदगी भर याद रखेगी..
सुमन हंसकर - वैसे एक बात कहूं बेटा..
गौतम सुमन के खड़े हुए चुचक मुंह में लेकर चूसते हुए - बोलो ना माँ..
सुमन - कोमल भाभी को ऐसे पेलना कि वो ऋतू की शादी तक ठीक से चल भी ना पाए..
गौतम हँसते हुए सुमन को देखकर - आप चिंता मत करो माँ.. मामी की ऐसी माँ चोदुँगा साली शादी के बाद भी लगड़ाकर ही चलेगी..
सुमन हस्ते हुए - गाली भी कितनी प्यारी लगती है तेरे इस मुंह से..
गौतम - आप कहो आपके लिए भी दो चार गाली अपने मुंह से निकाल दू..
सुमन - तू मुझे जो गाली देना चाहे दे सकता है ग़ुगु.. पर अब मेरा एक काम कर दे..
गौतम सुमन की चड्डी में हाथ घुसाते हुए - मैं जानता हूँ माँ आप किस काम से आई हो.. मैं अभी आपको खुश कर देता हूँ.. आपने चुत के सारे बाल साफ कर दिए?
सुमन - मेरे ग़ुगु के मुंह में आते थे ना इसलिए साफ कर दिए..
गौतम - उफ्फ्फ माँ.. कितनी चिकनी हो गई आपकी चुत..
सुमन - अब मेरी चुत पर अपना हाथ ही फेरता रहेगा या अपने इन प्यार से नाजुक होंठों का कमाल भी दिखायेगा?
गौतम - माँ.. पहले 1-1 पेग हो जाए?
सुमन - नहीं ग़ुगु..
गौतम - रूपा आंटी के साथ तो मना नहीं करती आप..
सुमन - अच्छा ठीक है पर यहां शराब क्या है?
गौतम - उसकी चिंता आप मत करो मैं साथ लाया था..
सुमन - ग़ुगु तू ना बहुत कमीना हो गया है..
गौतम अलमीरा खोलकर बेग से शराब की बोतल निकालता है औऱ दो प्लास्टिक के ग्लास निकालकर दोनों का एक एक पेग बनाता है औऱ सुमन के साथ चेस करते हुए एक सांस में सुमन के साथ पेग पी जाता है..
गौतम - माँ एक औऱ..
सुमन - नहीं ग़ुगु.. अब नहीं..
गौतम - अच्छा एक शर्त लगाते है..
सुमन - क्या?
गौतम - अगर मैंने 5 मिनट में आपको खुश कर दिया तो आप एक औऱ पेग मेरे साथ पिओगी..
सुमन - ठीक है लगी शर्त..
गौतम बेड के साइड टेबल से सिगरेट का पैकेट निकालकर एक सिगरेट अपनी माँ सुमन के गुलाबी होंठों पर लगा देता है औऱ फिर लाइटर से अपनी माँ के होंठों पर लगी सिगरेट जलाकर, सुमन की चड्डी नीचे सरकाते हुए उसकी चुत पर अपने होंठ लगा देता है जिससे सुमन के मुंह से सिस्कारी निकल जाती है औऱ वो एक हाथ से सिगरेट के कश लेटे हुए दूसरे हाथ से गौतम के बाल पकड़कर गौतम का सर अपनी चुत पर दबा लेती है औऱ चुत चटाई का अतुलनीय अद्भुत अकल्पनीय सुख भोगने लगती है..

गौतम किसी कुत्ते की तरह सुमन की चुत चाटे जा रहा था औऱ सुमन सिगरेट के कश लेते हुए सिसकारिया भरती हुई गौतम को वासना की नज़रो से देखे जा रही थी.. सुमन इतनी काम की आग में जल रही थी की पांच मिनट तो दूर उसके उंगलियों में सुलगती सिगरेट आधी ख़त्म होने से पहले ही उसकी चुत ने अपना पानी गौतम के मुंह में छोड़ दिया औऱ सुमन चरम सुख को अनुभव करती हुई निढाल हो गई.. गौतम ने चुत का पानी पीते हुए अच्छे से सुमन की चुत चाट कर ऊपर आ गया औऱ सुमन के हाथ से सिगरेट लेकर एक लम्बा कश मारके सिगरेट बुझा देता है औऱ सुमन से बोलता है..
गौतम - माँ लगता बहुत देर से रोके हुए थी आप अपनेआपको..
सुमन थोड़ा रूककर बिस्तर से उठकर दोनों के लिए शराब का दूसरा पेग बना लेती है औऱ एक पेग गौतम के हाथ में दे देती है औऱ दूसरा खुद पीकर कहती है..
सुमन - तू ना बहुत गन्दा है ग़ुगु.. ऐसी बुरी आदत लगा दी है एक दिन में कि बस.. अब तो लगता है बिना अपनी चुत चटवाए नींद ही नहीं आएगी..
गौतम पेग पीकर - तो क्या हुआ माँ.. मैं हूँ ना आपके पास.. आपकी इस पगुलाबी चुत को चाट चाटकर ठंडा करने के लिए..
सुमन को नशा होने लगा था..
सुमन - आजा ग़ुगु.. मैं भी तुझे खुश कर देती हूँ..
गौतम सुमन को कंडोम देकर - लो माँ लगा दो.. मैं समझ सकता हूँ आपको blowjob देने में उल्टी आती है.. मैं जबरदस्ती आपसे कुछ नहीं करवाना चाहता..
सुमन मुस्कुराते हुए गौतम से कंडोम लेकर फाड़ते हुए गौतम के लंड पर लगा देती है औऱ कहती है - तेरी इन्ही प्यारी प्यारी औऱ मीठी बातों के कारण कभी कभी मुझे लगता है कि मैं तुझे अपनी चुत भी दे दूँ.. मगर फिर तेरा औऱ मेरा रिश्ता बीच में आकर मेरे मन को पिंजरे में डाल देता है..
गौतम - माँ..
सुमन - हां ग़ुगु?
गौतम - क्या मैं आपको आपके नाम से बुला सकता हूँ अभी के लिए?
सुमन मुस्कुराते हुए - हम्म.. जैसा तु चाहे..
गौतम अपने लंड को सुमन के मुंह में ड़ालते हुए - एक बात बोलू सुमन..
सुमन लोडा मुंह में लेकर चूसते हुए गौतम को देखकर - हम्म.
गौतम - मुझे पापा से जलन होती है.. कश पापा की जगह आप मुझे मिली होती.. मैं आपको कभी वो दुख नहीं देता जो पापा ने आपको दिए है.. हमेशा आपको प्यार करता औऱ खुश रखता..
सुमन मुंह से एक पल के लिए लंड निकालकर नशे में हसते हुए - अच्छा हुआ नहीं मिली वरना मैं अगर तेरे पापा की जगह तुझे मिली होती तो तू सुहागरात में ही मेरी इस छोटी सी चुत को अपने इस लंड से फाड़कर उसका भोसड़ा बना देता..
गौतम सुमन के मुंह में वापस लंड डालकर उसे लोडा चुसवाते हुए - मैं मज़ाक़ नहीं कर रहा सुमन.. मुझे जगमोहन से बहुत जलन होती है औऱ उसपर हंसी भी आती है.. साले के लंड में जरा सा भी दम नहीं है मगर दोदो जन्नत की हूर जैसी बीवी रखी हुई है..
सुमन मुंह से लंड निकालकर - तू जानता है उस दूसरी बीवी को ग़ुगु.. मिला है कभी उस औरत से?
गौतम वापस लोडा मुंह में डालकर चुसवाते हुए - हां जानता हूँ सुमन औऱ मिला भी हूँ.. आप भी मिली है उससे..

सुमन लोडा चूसते चूसते - कौन है वो..
गौतम - पहले वादा करो आप गुस्सा नहीं करोगी.. सुमन लोडा चूसते हुए - नहीं करुँगी.. बता ना..
गौतम - सुमन उस रात होटल के रूम नम्बर 402 में आपने जिस औरत को मेरे साथ देखा था वो मेरी टीचर नहीं बल्कि आपकी सौतन माधुरी थी..
सुमन ये सुनकर गौतम के लंड को चूसना बंद करके उसके लंड को अपने दातो से पकड़ लेती है..
गौतम आह भरके - सुमन दर्द हो रहा है.. आह्ह.. छोडो ना सुमन..
सुमन थोड़ा औऱ अपने दातो की पकड़ गौतम के लंड पर मजबूत कर लेती है औऱ गौतम के चेहरे पर झलकता दर्द देखने लगती है..
गौतम फ़रियाद करता हुआ - माँ दर्द हो रहा है.. छोडो ना..
सुमन अपने मुंह से लंड निकालकर गुस्से से - उस डायन के साथ मुंह काला करते शर्म नहीं आई तुझे? तू जानता है उसके कारण हमें कितना दुख सहना पड़ा है.. फिर भी उसके साथ तूने सब कुछ किया..
गौतम अपने लंड को संभालता हुआ - उसका क्या दोष माँ इसमें.. पापा ने धोके से फसाया था उसे.. औऱ सच कहु तो आपसे ज्यादा गुस्सा मुझे उसपर आया था.. मगर वो भी आपकी तरह ही खूबसूरत औऱ हसीन थी.. मेरी नफरत कब प्यार में बदल गयी पता नहीं चला..
सुमन गुस्से से - मेरी तरह?
गौतम - सॉरी माँ.. आपसे थोड़ी कम..
सुमन - वो हमारे बारे में सच जानती है?
गौतम - नहीं अभी बताया नहीं उसे.. उस दिन आपके पूछने पर आपको बताया था ना शादी में लड़की मिली थी.. जिसके साथ पहली मुलाक़ात में सब हो गया था..
सुमन - वो माधुरी ही थी?
गौतम शरमाते हुए - हाँ.. पापा ने उसे घर भी दिलवाया है शहर के बीच पोश कॉलोनी में.. काफी अच्छा औऱ बड़ा है..
गौतम के लंड पर लगा कंडोम सुमन के दांतो की पकड़ से फट चूका था..
सुमन गौतम के लंड पर लगा कंडोम उतारते हुए - मुझे उससे बात करनी है.. तू कल उसे सारी सच्चाई बता देना..
गौतम - पर माँ सच्चाई जानने के बाद वो मुझे ठरकी समझेगी.. मैं पहले ही 3 दिन से उसका फ़ोन नहीं उठा रहा..
सुमन दूसरा कंडोम फाड़कर गौतम के लंड पर पहनाती हुई - वो तो तू है ही.. मैं भी तुझे कितना मासूम औऱ भोला समझती थी मगर तेरी इस भोली सी शकल के पीछे एक शैतान है..
इतना कहकर सुमन गौतम का लंड वापस चूसने लगती है...
गौतम सुमन के सर पर हाथ रखते हुए - ठीक है मेरी सुमन, जैसा आप कहो..

सुमन अब जोर जोर से औऱ पूरी मेहनत के साथ गौतम का लंड चूस रही थी उसे लोडा चूसते हुए बहुत देर हो चुकी थी मगर गौतम अपनेआप को बहुत कण्ट्रोल किये हुए सुमन को प्यार से देख रहा था औऱ blowjob का सुख ले रहा था.. सुमन पिछले 20 मिनट से गोतम के लंड को चूसकर उसका पानी निकालने की कोशिश कर रही थी मगर उसे सफलता नहीं मिल सकी थी.. गौतम समझ सकता था की सुमन का मुंह अब दर्द करने लग रहा होगा इसलिए उसने सुमन से कहा..
गौतम - माँ एक पेग औऱ बनाउ? लास्ट..
सुमन ने गौतम के लंड को मुंह से निकाल दिया औऱ हाँ में सर हिला दिया..
गौतम दो पेग बनाकर ले आया औऱ एक सुमन को देते हुए दूसरा खुद पिने लगा.. गौतम ने एक सिगरेट भी जला ली थी जिसके कश लगाते हुए वो अपने सामने घुटनो पर बैठी अपनी माँ सुमन को देख रहा था.. सुमन ने एक झटके में पूरा पेग ख़त्म कर दिया औऱ फिर वापस गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.. इस बार सुमन नशे में पूरी तरह उतर चुकी थी औऱ खुलकर गौतम का लोडा चूस रही थी गौतम चाहता तो अब अपने लंड पर से कंडोम हटाकर अपनी माँ से अपना लंड चुसवा सकता था मगर उसने ऐसा नहीं किया औऱ अपना पेग ख़त्म करके एक हाथ से सिगरेट के कश लगाता हुआ दूसरे हाथ से अपनी माँ के बाल पकड़ कर उसके मुंह में अपना लोडा तेज़ी दे अंदर बाहर करने लगा.. कुछ मिनटों बाद ही गौतम झड़ गया. सुमन गौतम के लंड पर से कंडोम उतार कर गाँठ लगाती हुई कंडोम को बेड के किनारे फर्श पर रखकर खड़ी हो गई औऱ गोतम के हाथ सिगरेट लेकर कश मारती हुई गौतम को देखने लगी गौतम भी तृप्त होकर सुमन के सामने खड़ा हुआ उसे ही देखे जा रहा था.. दोनों माँ बेटे एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे औऱ एकदूसरे को देख रहे थे..

गौतम ने कुछ देर इसी तरह खड़े रहकर सुमन के हाथ से सिगरेट लेकर बुझा दी औऱ सुमन की कमर में हाथ डालकर उसे अपने करीब खींचकर गले लगाते हुए चुम लिया औऱ दोनों वापस बिस्तर में गिर गए..
दोनों का ये चुम्बन बहुत देर तक चला औऱ जब टुटा तो दिवार पर लटकी घड़ी रात के दो बजने का फरमान सुना रही थी..
सुमन की आँखे नशे में होने का संकेत दे रही थी औऱ गौतम भी सुरूर में था.. मगर गौतम सुमन को उसके नशे का फ़ायदा उठाकर उसके साथ सम्भोग करना नहीं चाहता था.. इसलिए गौतम ने सुमन को अपने गले से औऱ कसके लगाते हुए प्यार से उसकी जुल्फ संवार कर उसके चेहरे को देखते हुए, सुमन के कंधे पर अपने हाथो से थपकिया देकर सुलाने की कोशिश करने लगा..
नशे में डूबी सुमन की आँख खुली हुई थी वो बस गौतम को देख रही थी.. उसका दिमाग अभी भी सब देख सुन रहा था, सुमन को अहसास हो रहा था कि कैसे गौतम उसे अपनी बाहों में भरके बच्चों की तरह सुलाने की कोशिश कर रहा था.. सुमन मुस्कुराते हुए अपनी आँख बंद कर लेती है औऱ कुछ पल बाद गहरी नींद में चली जाती है..
सुमन के नींद में जाने के बाद गौतम को अहसास होता है की उसका लंड अभी भी पूरी औकात में खड़ा था.. औऱ ऐसा होना स्वाभाविक भी था गौतम की बाहों में एक हसीन औऱ बेहद खूबसूरत औरत नंगी लेटी हुई थी भले वो गौतम की खुदकी माँ थी मगर उसके रूप ने गौतम के मन की सरहद पार कर दी थी..

गौतम सुमन को सुलाकार बिस्तर से उठ गया औऱ एक कंडोम पहनकर अपनी सोती हुई माँ के हुस्न को देखकर उसे चोदने के ख़्वाब देखता हुआ मुठ मारने लगा.. झड़ने के बाद गौतम अपनी माँ को फिर से बाहों में लेकर सो गया..

सुबह साढ़े छः बजे सुमन की आँख जब खुली तो उसने देखा की गौतम उसे बच्चों की तरह अपनी बाहों में लेकर सो रहा था. सुमन को गौतम पर रात की बात याद करके औऱ अभी सोता देखकर बहुत प्यार आ रहा था.. वो धीरे से गौतम की बाहों से निकली औऱ उठकर अपने कपडे पहनते हुए कमरे की हालत ठीक करके वापस बालकोनी से अपने कमरे में आ गई.. गौतम उसी तरह सोता रहा..
 
Update 20


सुबह नहाने के बाद जब सुमन नीचे गायत्री के पास गई तो घर औऱ शादी के काम में ऐसी उलझी की उसे गौतम से मिलने की फुर्सत ही नहीं मिली..

घर के नोकर अब्दुल की बीवी शबनम ने पहले सुमन का कमरा साफ किया औऱ फिर गौतम के कमरे में आ गई.. सफाई के दौरान जब शबनम को वीर्य से भरा हुआ रात में सुमन का गाँठ मारके रखा हुआ कंडोम मिला तो वो हैरानी से सो रहे गौतम को देखने लगी.. शबनम को लगा कि गौतम ने कंडोम में मुठ मारके गाँठ लगा कर यहां रख दिया है.. फिर उस कंडोम को कचरे में डालकर गौतम के कमरे की सफाई करके बाहर आ गई..

चाय बनते बनते सुबह के नो बज चुके थे औऱ सभी लोग नीचे बैठके शादी की तैयारियों को लेकर बातें कर रहे थे.. शबनम ने एक कप चाय का हाथ में लेकर सीढ़ियों से ऊपर जाने लगी तो पीछे से ऋतू ने उससे कहा..
ऋतू - शबनम तू कहा जा रही है..
शबनम पलटकर - ग़ुगु भईया को चाय देने..
ऋतू - मुझे दे, मैं दे आती हूँ ग़ुगु को चाय.. तू सबके लिए नास्ता बना दे..
शबनम - ठीक है दीदी..

ऋतू चाय का कप लेके ऊपर गौतम के रूम में आ जाती है जहा गौतम अब भी बेसुध सो रहा था.. ऋतू चाय बेड के ऊपर टेबल पर रख कर..
ऋतू गौतम को जगाते हुए - ग़ुगु.. ग़ुगु.. उठ जाओ.. सोते रहोगे क्या? ग़ुगु.. उठो ना..
गौतम आँखे खोल कर ऋतू को देखते हुए बेरुखी से - क्या है?
ऋतू गौतम की बेरुखी नज़रअंदाज़ करके - कब तक सोते रहोगे.. उठो ना.. चाय पिलो..
गौतम आँख बंद किये हुए ही जवाब देता है - मैं पी लूंगा, जाओ आप..
ऋतू - ग़ुगु चाय ठंडी हो जायेगी.. उठो ना..
गौतम उठते हुए बैठ जाता है..
ऋतू - कितनी देर तक सोता है.. पापा औऱ भईया से नहीं मिला ना तू.. वो कल रात औऱ अभी सुबह भी तुझे याद कर रहे थे..
गौतम चाय की एक चुस्की लेकर - मुझसे मिलकर क्या भला हो जाएगा उनका?
ऋतू गंभीर होकर - इतना भी क्या है ग़ुगु.. कल भाभी से इतनी बेरुखी से बात की औऱ अब मुझसे भी.. पता है भाभी को कितना बुरा लगा तेरी बातों का?
गौतम चाय पीते हुए - बुरा लगा तो मैं क्या करू? आप भी बुरा मान जाओ उनकी तरह..
ऋतू - तुझे ना बहुत बिगाड़ के रखा है बुआ ने अपने लाड प्यार से.. मैं कितनी प्यार से बात कर रही हूँ औऱ तू कितनी बदतमीजी से जवाब दे रहा है..
गौतम - मैंने कहा है मुझसे बात करने के लिए? मत करो.. चैन से सोने भी नहीं देते..
ऋतू - तू ना बहुत ज्यादा बोल रहा है ग़ुगु.. छोटा भाई है इसलिए तेरी बातें बर्दाश कर रही हूँ..
गौतम चाय का कप रखकर - मत करो बर्दाश्त.. वो तो माँ की ज़िद के कारण यहां आना पड़ा है वरना आता भी नहीं..
ऋतू गौतम की इस बात से उदास हो गई औऱ गौतम से बोली - मुझे लगा तू रूठा हुआ है पर तू तो नफरत करने लगा है हमसे.. तुझे नहीं पसंद तो ठीक है अब कभी बात नहीं करुँगी तुझसे..
गौतम वापस चादर ओढ़के सोते हुए - मैं किसीसे नफरत नहीं करता.. औऱ बात नहीं करोगी तो मेहरबानी होगी आपकी..

ऋतू चाय का कप जो गौतम के पिने से आधा खाली हो चूका था उठाकर कमरे से बाहर आ गई औऱ उसकी आँख से आंसू निकल पड़े जिसे उसने पोंछ लिया औऱ रसोई में कप रखकर अपने कमरे जाकर बैठ गई..
तीन घंटे बाद ऋतू की भाभी आरती ऋतू के पास आ गई औऱ उससे बोली - क्या हुआ दुल्हन? पार्लर नहीं चलना? उठो..
ऋतू - मन नहीं है भाभी आज कहीं जाने का..
आरती ऋतू की शकल देखकर - तू इतनी उदास क्यों है? किसी ने कुछ कहा है क्या? फ़ोन पर अपने दूल्हे से लड़ाई हो गई?
ऋतू - नहीं भाभी..
आरती - तो ऐसे उदास क्यों है..
ऋतू - कुछ नहीं भाभी, बस मन नहीं है बाहर जाने का..
आरती - मन को मना औऱ उठ जा दुल्हन.. पार्लर तो जाना ही पड़ेगा..
ऋतू झूठी मुस्कान होंठों पर लेकर - रुको भाभी मैं चेंज करके आती हूँ..
आरती - जल्दी मैं बाहर हूँ इंतजार कर रही हूँ..

आरती घर के बाहर आकर कार के पास खड़ी हो जाती है औऱ ऋतू का वेट कर रही होती है की गौतम नहाधो के बाहर आ जाता है गौतम ने पिंकी बुआ के गिफ्ट किये कपडे पहने हुए थे जिसमे वो किसी फ़िल्मी हीरो से कहीं ज्यादा आकर्षक औऱ स्मार्ट लग रहा था उसकी मासूम औऱ भोली सूरत उसके हट्टे कट्टे औऱ लम्बे चौड़े शारीर खिल रहा था.. आरती से गौतम को देखकर बिना उससे बात किये नहीं रहा गया औऱ जब गौतम कार की तरफ जाने लगा है तब आरती गौतम से कहने लगी..
आरती - आज किस पर बिजली गिराने का इरादा है गौतम ज़ी.. बड़े तैयार होके निकले हो.. यहां पहले दिन ही गर्लफ्रेंड बना ली क्या?
गौतम आरती औऱ उसकी बात को अनदेखा औऱ अनसुना करके कार मैं बैठ गया औऱ जैसे ही दरवाजा बंद करने के लिए हाथ बढ़ाया आरती कार के गेट पर आ खड़ी हुई औऱ गौतम को देखकर मुस्कुराते हुए बोली..
आरती - बात भी नहीं करोगे आप अपनी भाभी से? इतनी बुरी तो नहीं हूँ मैं?
गौतम - आपके बुरे या भले होने से मुझे क्या मतलब? दरवाजा छोडो जाना है मुझे..
आरती मुस्कुराते हुए - अरे बड़े बदतमीज हो तुम तो देवर ज़ी.. 24 घंटे गुस्सा नाक पर ही रहता हो क्या?
गौतम - आपको समझ नहीं आती क्या? मैं नहीं करना चाहता आपसे बात.. छोड़िये दरवाजा..
आरती गौतम की बात सुनकर - जाओ नहीं छोड़ती दरवाजा... कुछ बिगाड़ लोगे अपनी भाभी का तुम? बोलो? बात करने का ढंग तो ऐसा जैसे किसी रियासत के राजकुमार हो औऱ मैं तुम्हारी दासी.. सीधे मुंह बात भी नहीं करनी आती..
गौतम - मुझे सीधे मुंह बात करनी भी नहीं आप लोगों से.. आपको नज़र नहीं आता क्या, मैं आप लोगों को पसंद नहीं करता? फिर जबरदस्ती क्यों मेरे पीछे को पड़े रहते हो.. अपने काम से काम क्यों नहीं रखते? या फिर खानदानी आदत ही खराब है आपकी?
आरती इस बार गौतम की बात से घायल हो चुकी थी उसको गौतम की बात का उतना ही बुरा लगा था जितना तीन घंटे पहले ऋतू को लगा था.. आरती गुस्से से भर गई औऱ कार का दरवाजा छोड़ते हुए बोली..
आरती - अरे ओ भिखारी.. ज्यादा ना खुदको हीरो मत समझ.. मांगी हुई गाडी में बैठकर कोई मालिक नहीं बनता.. समझा? प्यार से बात कर रही हूँ तो सर चढ़कर नाच रहा है.. खानदान पर जा रहा है.. चल निकल..
गौतम पलटकर कुछ नहीं बोलता औऱ कार का दरवाजा बंद करके वहाँ से चला जाता है जबकि गौतम के जाने के बाद आरती को महसूस होता है कि उसने गौतम से गुस्से में क्या क्या कह दिया था.. आरती को अजीब लग रहा था औऱ अपनी बातों पर पछतावा भी हो रहा था.. मगर जब ऋतू बाहर आई तो उसने इस बारे में उसे कुछ नहीं बताया औऱ उसके साथ पार्लर चली गई..

गौतम के दिल में आरती की बातें तीर की तरह चुभ चुकी थी उसे अब ऋतू के साथ आरती भी आँखों में चुबने लगी थी.. मगर गौतम ने उस बात को वही छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला किया औऱ कार को शहर के एक बड़े मॉल की पार्किंग में पार्क करके माल के अंदर आ गया फिर अपने फ़ोन में कुछ देखकर ग्राउंड फ्लोर पर ही बने एक बड़े से मार्ट में घुस गया जहा बहुत सी खाने से लेकर पहनने तक की अलग अलग चीज़े थी..

गौतम इधर उधर घूमने लगा जैसे किसी को तलाश करहा हो.. बहुत देर तक घूमने के बाद उसे एक कोने में कपडे रखती हुई एक लड़की दिखी जिसे देखकर गौतम उसके पास आ गया औऱ उसके पीछे खड़ा होकर बोला..
गौतम - मेरी साइज का कुछ मिलेगा?
लड़की ने कपडे रखना छोड़कर एक नज़र पीछे देखा औऱ बोली - क्या साइज है आपका? इतना कहकर लड़की एक टक गौतम को देखती ही रह गई..
गौतम - ज़ी एक्स्ट्रा लार्ज़..
लड़की कपडे छोड़कर खड़ी हो गई औऱ गौतम के गले लगकर गौतम से बोली - तू यहां क्या कर रहा है?
गौतम - बस आपको तलाशते हुए चले आये.. पुरे दो साल लगे है ढूंढने में..
लड़की मुस्कुराते हुए - दस मिनट में लंच होने वाला तू बाहर वेट कर मैं ये काम ख़त्म करके आती हूँ..
गौतम - पक्का?
लड़की गौतम के गाल चूमकर - पक्का मेरी जान..
गौतम बाहर चला जाता है औऱ लड़की का वेट करने लगता है साथ ही आदिल को फ़ोन करता है..
आदिल - हां रंडी.. मिल गई सलमा?
गौतम - सही एड्रेस है गांडु.. सलमा आपा यही काम करती है.. अच्छा ये बता तेरी औऱ शबाना की बात कहा तक पहुंची?
आदिल - भाई अम्मी के हॉर्न दबाने तक बढ़ गई..
गौतम - सही है मादरचोद.. साले चुचे तक तो आ गया तू.. पर जबरदस्ती तो नहीं की ना तूने?
आदिल - अरे नहीं रंडी.. अम्मी तो आगे से अपने चुचे हिला हिला कर हिंट दे रही थी..
गौतम - लगा रह गांडु फिर तो.. अच्छा बाद में बात करता हूँ.. सलमा आपा आ रही है.. गौतम फ़ोन काटकर जेब में रख लेटा है..
सलमा आकर मुस्कुराते हुए - अच्छा मुझे क्यों ढूंढ़ रहा था तू दो साल से?
गौतम - कुछ पूछना था आपसे..
सलमा - हाँ पूछो..
गौतम - यहां नहीं बाहर..
सलमा - बाहर क्यों?
गौतम सलमा का हाथ पकड़कर - चलो ना बताता हूँ..
गौतम सलमा का हाथ पकड़ कर मॉल से बाहर ले आता है औऱ पार्किंग में लाकर गाडी में बैठा देता है..
सलमा - गौतम कहा ले जा रहा है? औऱ ये कार किसकी है?
गौतम - है किसी की आपा.. आप बैठो ना.. थोड़ा घूमके आ जाएंगे..
सलमा - गौतम सिर्फ आधे घंटे का लंचटाइम है वापस आने में देर हो गई तो बहुत मारूंगी तुझे..
गौतम हसते हुए - नहीं होगी आपा आप परेशान मत हो..
गौतम गाडी को चला के एक आइसक्रीम वाले के पास रोकता है औऱ आइसक्रीम लेकर वापस गाडी चलाते हुए एक सुनसान जगह गाडी लगा देता है..
सलमा मुस्कुराकर आइसक्रीम खाते हुए - इतनी सुनसान जगह क्यों लाया है मुझे? मेरे साथ कोई ऐसी वैसी हरकत की तो तुझे बहुत मारूंगी..
गौतम मुस्कुराते हुए - ऐसी वैसी हरकत तो आप ही करती हो.. याद दिलाउ आपको?
सलमा आइसक्रीम का खाली डब्बा बाहर फेंककर मुस्कुराते हुए - मुझे सब याद है.. अब बता क्या पूछने वाला था तू? औऱ मेरा एड्रेस कैसे मिला तुझे?
गौतम - अड्रेस तो उसी गड़मरे ने लाकर दिया है जो उस दिन आपके औऱ मेरे बीच में आ गया था..
सलमा हँसते हुए - आदिल ने?
गौतम - हाँ.. पर पहले आप ये बताओ आप अचानक बिना बताये कहा चली गई थी? पता है कितना बुरा लगा मुझे?
सलमा गौतम के गाल खींचकर - अब्बू ने जल्दबाज़ी में निकाह करवा दिया था.. इसलिए जाना पड़ा..
गौतम - तो आप अब शादीशुदा हो?
सलमा - नहीं.. पिछले साल तलाक़ भी हो गया..
गौतम - क्यों?
सलमा - जिससे शादी हुई उसने किसी औऱ के चककर में मुझे छोड़ दिया..
गौतम सलमा का हाथ पकड़कर - तब भी आपने मुझसे बात नहीं की..
सलमा गौतम के करीब आकर गौतम के गाल चूमते हुए - कैसे बताती मेरी जान.. नम्बर नहीं थे ना..
गौतम - फ़ोन दो आपका..
गौतम नम्बर एक्सचेंज करके - अब से आपको कुछ भी प्रॉब्लम हो मुझे बताओगी आप.. समझी? वरना मार मार के सुजा दूंगा आपको..
सलमा हस्ते हुए गौतम के ऊपर आ जाती है औऱ उसके होंठों को अपने दांतो से खींचती हुई एक चुम्बन करके - किसे सुजाएगा मार मारके?
गौतम अपना हाथ से सलमा की चुत को सलवार के ऊपर से सहलाने लगता है औऱ कहता है - इसे सुजा दूंगा आपा..
सलमा गौतम की इस बेशर्म से दंग रह जाती है औऱ उससे कहती है - हाथ हटा कमीने.. कितना बेशर्म हो गया है तू..
गौतम - अच्छा ज़ी आप करो कुछ नहीं.. मैं करू तो हंगामा?
सलमा मुस्कुराते हुए - लंच ख़त्म होने वाला है अभी टाइम नहीं इसका.. कल ऑफ ले लुंगी फिर दिनभर जो भी करना है मेरे साथ कर लेना..
गौतम - सोच लो आपा.. मैं कल कोई रहम नहीं करने वाला आपके ऊपर..
सलमा - मैं चाहती भी नहीं हूँ मेरी जान तू मुझपर रहम करें.. चल अब वापस छोड़ दे वरना मैनेजर काम से निकाल देगा..
गौतम - अभी तो दस मिनट है..
सलमा हंसकर - तो?
गौतम - तो की बच्ची.. चुपचाप किस्सी करो मुझे..
सलमा गंभीर होती हुई - शुक्रिया गौतम..
गौतम - किसलीये?
सलमा - मुझसे मिलने आने के लिए..
गौतम सलमा के होंठों को अपने होंठों से लगा देता है औऱ सलमा भी पूरी शिद्दत के साथ गौतम को चूमने लगती है..
दोनों का चुम्बन 3-4 मिनट चलता है जिसमे दोनों एकदूसरे को ऐसे चुम रहे थे जैसे खा जाना चाहते हो..
फिर सलमा चुम्बम तोड़कर कहती है - गौतम अब चल यहाँ से..
गौतम - ठीक है आपा.. पर कल मैं आपकी नहीं सुनूंगा..
सलमा गौतम के ऊपर से उतरकर अपनी सीट पर आ जाती है औऱ गौतम गाडी चलाकर वापस मॉल की तरफ आने लगता है..
सलमा - शबाना चाची का फ़ोन आया था..
गौतम - आपकी लोगों की अब तक बात होती है? वैसे क्या बोल रही थी वो?
सलमा - सब जो तू उनके साथ करके आया है.. वो भी डिटेल में..
गौतम मॉल के सामने गाडी रोककर हैरानी से सलमा को देखता हुआ - क्या..
सलमा हँसते हुए गौतम के लंड पर हाथ रखकर - क्या नहीं मेरी जान.. शबाना.. सब बताया है उन्होंने एक एक बात.. बहुत तारीफ़ कर रही थी तेरी.. बोल रही थी तेरे जैसा मर्द नहीं देखा..
गौतम - शर्म नहीं आती तुम दोनों को.. मेरे बारे ऐसी बातें करते हुए?
सलमा - तुझे शर्म नहीं आती अपने दोस्त की अम्मी को अपनी हवस का शिकार बनाते हुए?
गौतम - औऱ क्या बोला शबाना ने?
सलमा - औऱ ये बोला कि जब तक तू यहां है मैं तेरा अच्छे से ख्याल रखु?
गौतम - मतलब आपको पता था मैं यहां आपके पास आने वाला हूँ?
सलमा मुस्कुराते हुए गौतम के होंठ चूमकर - चल बाय मेरी जान..
इतना कहकर सलमा गाडी से उतर जाती है...
गौतम - अरे जवाब तो दो आपा.. आपा..
सलमा - जवाब कल मिलेगा मेरी जान..

सलमा वापस मॉल में चली जाती है गौतम गाडी स्टार्ट करके शहर घूमने लगता है.. औऱ उसे शहर घूमते घूमते शाम हो जाती है गौतम सडक के किनारे एक चाय वाले के पास बैठा हुआ था तभी उसके फ़ोन पर माधुरी का फ़ोन आता है जिसे वो कुछ दिनों से अनदेखा कर रहा था.. मगर आज गौतम ने फ़ोन उठा लिया औऱ गाडी में बैठकर बात करने लगा..
गौतम - हेलो...
माधुरी - फ़ोन क्यों नहीं उठा रहा तू चार दिन से मेरा? मुझसे मन भर गया है तो साफ साफ बता दे.. साले ऐसा इंतज़ाम करूंगी कि याद रखेगा.. अब कुछ बोलेगा या मुंह बंद करके सुनता ही रहेगा तू..
गौतम - एक फोटो व्हाट्सप्प की है आपको.. देख लो.. इतना कहकर गौतम फ़ोन काट देता है औऱ माधुरी को जगमोहन औऱ सुमन के साथ अपनी फॅमिली फोटो सेंड करता है..
माधुरी जल्दी से अपना व्हाट्सप्प खोलती है औऱ फोटो देखकर चौंक जाती है बहुत देर तक वो चुपचाप उस तस्वीर को देखती रहती है उसे यकीन ही नहीं होता कि गौतम उसके पति जगमोहन की औलाद है माधुरी बिना पालक झपकाये फोटो देखती रहती है मगर फिर फोटो हटा कर गौतम को वापस फ़ोन करती है..
गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..
माधुरी गुस्से से - हेलो के बच्चे.. कहा है तू अभी?
गौतम - नानी के यहां आया हूँ माँ के साथ.. शादी है किसी की..
माधुरी - वापस कब आएगा?
गौतम - एक हफ्ता लग जाएगा माधुरी..
माधुरी - अब तो मुझे मेरे नाम से मत बुला कमीने.. छोटी माँ लगती हूँ तेरी.. उस रात इसीलिए तू इतने सवाल कर रहा था ना मुझसे?
गौतम मुस्कुराते हुए - सॉरी छोटी माँ..
माधुरी - सॉरी के बच्चे.. वापस आ फिर बताती हूँ तुझे तो.. शादी की पार्किंग में मेरे फ़ोन पर जगमोहन की तस्वीर देखकर सब कुछ जान गया था ना तू.. फिर भी मेरे साथ वो सब किया ना तूने..
गौतम हसते हुए - मज़ा ही इतना दे रही थी आप छोटी माँ.. कैसे रोकता अपनेआप को..
माधुरी प्यार से - जो अपनी माँ के साथ चुदाई करता है उसे पता है ना दुनिया क्या कहती है?
गौतम - पता है मादरचोद हूँ मैं.. बस अब खुश आप?
माधुरी हँसते हुए - अब बाप नामर्द हो जाए तो बेटे को ही मर्द बनकर घर की औरत को बाज़ारू बनने से बचाना पड़ता है.. इसके लिए बेटे को मदरचोद भी बनना पड़े तो कैसी शर्म?
गौतम - कोनसी सेक्स स्टोरी का डायलॉग है ये..
माधुरी - ये हमारी सेक्स स्टोरी का डायलॉग है..
गौतम - बहुत अच्छा... अच्छा छोटी माँ मैं फ़ोन रखता हूँ बाद में बात करूंगा.. माँ का फ़ोन आ रहा है..
माधुरी - अपना ख्याल रखना मेरे मादरचोद बेटे..
गौतम - आप भी अपना ख्याल रखना.. मेरी बेटाचोद छोटी माँ..

फ़ोन कट जाता है औऱ गौतम सुमन का फ़ोन उठाकर बात करने लगता है..
गौतम - हेलो..
सुमन - ग़ुगु कहा है बच्चा?
गौतम - माँ शहर घूम रहा था..
सुमन - बाकी का शहर कल घूम लेना अब घर आ जा.. खाने का समय होने वाला है..
गौतम - ठीक है माँ.. आ रहा हूँ..
गौतम फोन काटकर गाडी नानी के घर की तरफ मोड़ लेता है औऱ एक घंटे में नानी के घर पहुंच जाता है जहा गाडी घर के बाहर पार्क करके सीधा अपने कमरे में चला जाता है औऱ नहा कर एक टीशर्ट औऱ लोवर पहन लेता है.. तभी शबनम गौतम के कमरे में आकर कहती है..
शबनम - ग़ुगु भईया.. आपको मालकिन नीचे खाने के लिए बुला रहा है..
गौतम शबनम को देखकर अपनी कलाई पर बंधा धागा देखता है जो लाल हो चूका था फिर शबनम से कहता है - औऱ कौन है नीचे?
शबनम - सब है.. मालिक औऱ छोटे मालिक भी घर आ चुके है..
गौतम शबनम के बिलकुल करीब आकर - नाम क्या है तेरा?
शबनम शरमाते हुए - शबनम..
गौतम शबनम को बाहों में भरते हुए - भईया मत बोला कर मुझे.. समझी? तेरे मुंह अच्छा नहीं लगता..
शबनम शरमाते हुए - ज़ी भईया..
गौतम - फिर भईया बोल तूने?
शबनम शर्माती हुई गौतम की आँखों में देखकर - गलती से मुंह से निकल गया..
गौतम - तेरे मुंह का इलाज करना पड़ेगा..
इतना बोलकर गौतम शबनम के होंठ पर अपने होंठ लगाकर उसे चूमने लगा.. शबनम भी शर्माते हुए गौतम को चुम रही थी औऱ बेसब्री से गौतम के गले लग चुकी थी..
दोनों के बीच चुम्बन कुछ पल चला ही था की नीचे से किसी के ऊपर आने की आहट सुनकर दोनों अलग हो गए औऱ अपने आप को सँभालते हुए खड़े हो गए..
गौतम कमरे से निकलकर नीचे सीढ़ियों की तरफ आ गया जहा से शबनम का शोहर अब्दुल उसे ऊपर छत की तरफ जाता हुआ दिखा.. शबनम भी गौतम के पीछे पीछे नीचे आ गई.. गौतम ने देखा की सभी लोग डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए है..

संजय गौतम को देखकर - ग़ुगु.. यहां आ बेटा.. कितने साल हो गए तुझे देखे हुए.. तू तो बिलकुल बदल गया है.. मेरे पास आके बैठ..
चेतन - हाँ पापा.. पहले जब देखा था तो बिलकुल छोटा सा था अब देखो कितना बड़ा हो गया है.. बिलकुल हीरो लगता है..
कोमल - सच कहा तूने चेतन.. पता नहीं सुमन ऐसा क्या खिलाती है हमारे ग़ुगु को.. आजा ग़ुगु तू मेरे पास आके बैठ..
गायत्री - अरे सब मिलके नज़र लगाओगे क्या मेरे नाती को.. एक तो छः साल बाद आया है..
गौतम सबकी बातें सुनकर अनसुनी कर देता है औऱ सुमन के पास वाली कुर्सी पर आकर बैठ जाता है.. गौतम को सुमन के पास जाकर बैठता देखकर संजय औऱ कोमल दोनों का मुंह उतर जाता है मगर गौतम बिना किसी से कुछ भी बोले सामने रखी उल्टी प्लेट को सीधा करके चपाती औऱ सब्जी लेकर खाना खाने लगता है..
आरती औऱ ऋतू सब कुछ देख औऱ समझ रही थी मगर बोलने की हिम्मत किसी में नहीं थी.. गौतम ने जिस तरह अभी अभी संजय औऱ कोमल के अपने साथ बैठकर खाना खाने के प्रस्ताव को ठोंकर मारते हुए सुमन के पास बैठते हुए संजय औऱ कोमल की बेज्जती की थी उससे माहौल थोड़ा बदल गया था..

संजय गौतम से - क्या हुआ बेटा.. कुछ बोल क्यों नहीं रहे..
गौतम बिना अपने मामा संजय को देखे जवाब देता है - छाले हो रहे है मुंह में.. बोला नहीं जा रहा..

सुमन के साथ साथ ऋतू औऱ आरती गौतम के बनावटी बहाने की वजह अच्छे से जानते थे मगर अब संजय कोमल औऱ चेतन के साथ कोमल को भी गौतम के यहां पर बेमन से आने का पता चलने लगा था..
संजय या किसी औऱ ने वापस गौतम के बारे में कुछ नहीं कहा औऱ बात को किसी औऱ मुद्दे पर घुमाकर बात करने लगे औऱ खाना खाने लगे..
गौतम चुपचाप खाना खाकर बिना किसी को देखे या बात किये वापस अपने कमरे में चला गया औऱ कुछ देर अपने कमरे में रहकर फिर घर की छत पर आ गया औऱ टहलने लगा..
सबका खाना हो चूका था.. कोमल सुमन को अपने साथ लेजाकर शादी के लिए की हुई खरीददारी का सामान दिखाने लगी.. संजय औऱ चेतन बुकिंग होटल का जायजा लेने निकल पड़े था.. ऋतू अपने कमरे में अपने दूल्हे से बात करने में व्यस्त थी औऱ गायत्री टीवी देखने में.

आरती को गौतम पर गुस्सा दिन से ही चढ़ा हुआ था.. हालांकि थोड़ा सा अफ़सोस उसे अपनी बात पर भी था मगर अभी जिस तरह से गौतम ने उसके ससुर संजय औऱ बाकी लोगी के साथ बर्ताव किया था वो गौतम को फिर कुछ कड़वा सुनाना चाहती थी..
आरती गौतम के कमरे में आ गई मगर गौतम उसे वहा नहीं दिखा फिर वो गौतम को घर में इधर उधर देखने लगी.. औऱ जब आरती छत पर पहुंची तो उसे गौतम छत की दिवार पर बैठा हुआ दिख गया.. आरती गौतम की तरफ आ गई औऱ गौतम के पास बैठकर गौतम का दिल दुःखाने की नियत से बोली..
आरती - क्या देख रह है?
गौतम एक नज़र आरती की तरफ देखकर वापस सामने देखने लगता है औऱ आरती की बात का कोई जवाब नहीं देता..
आरती वापस बोलती है - बता ना? सामने इन घरों को देख रहा है क्या?
गौतम बिना आरती को देखे - हाँ..
आरती गौतम का जवाब सुनकर वापस बोलती है - देख ले ज़ी भरके.. क्युकी ऐसे घर खरीदना तो ना तेरे बाप के बस में है ना तेरे..
गौतम समझ गया था की आरती उसका दिल दुखाना चाहती है औऱ उसी के लिए यहां आई है मगर वो उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, ना ही आरती की बातों से अपनेआप को हर्ट होने देता है..
आरती की बात पर जब गौतम कोई जवाब नहीं देता तो आरती फिर गौतम का दिल दुःखाने के लिए बोलती है..
आरती - तेरा बाप पुलिस में चौकीदार है ना..
गौतम सामने देखते हुए - हवलदार..
आरती - जो भी है.. है तो छोटा सा सरकारी नोकर ही.. कितना कमा लेता होगा महीने..
गौतम उसी तरह - 35 हज़ार..
आरती हसते हुए - उससे ज्यादा तो सिर्फ मेरे पार्लर का खर्चा है महीने का.. अच्छा एक बात बता.. तेरे जैसे भिखारी के पास ये लेटेस्ट iphone कैसे आया?
गौतम - बुआ ने गिफ्ट दिया..
आरती इस बार भी हसते हुए - गिफ्ट दिया है या भीख दी है तुझे.. भिखारी?
गौतम - पता नहीं..
आरती गौतम का दिल दुःखाने का भरसक प्रयास कर रही थी मगर गौतम उसकी बात सुनकर अनसुना करते हुए सामने के खूबसूरत नज़ारे को देखे जा रहा था..
आरती को समझ नहीं आ रहा था वो ऐसा क्या बोले जिससे गौतम को बुरा लगे.. आरती ने अपनी तरफ से जो कुछ बोल सकती थी बोल रही थी.. आरती गौतम का दिल दुःखाने का प्रयास कर ही रही थी नीचे से कोमल छत पर आती हुई बोली..
कोमल - क्या बातें चल रही है दोनों देवर भाभी में?
आरती पीछे देखकर - कुछ नहीं मम्मी ज़ी.. मैं तो बस देवर ज़ी से पूछ रही थी कॉलेज में पढ़ाई कैसी चल रही है? है ना देवर ज़ी..
गौतम एक नज़र पीछे कोमल औऱ आरती को देखकर वापस उसी तरह सामने देखने लगता है..
कोमल - अरे इसमें पूछना क्या है.. हर साल अव्वल आता है हमारा ग़ुगु.. सुमन सब बता देती है.. हर चीज में फर्स्ट है..
आरती - वो तो देवर ज़ी को देखने से ही लगता है.. अच्छा मम्मी ज़ी.. कल जो आपने देवर ज़ी के लिए सूट लिया था मुझे पसंद नहीं आया..
कोमल - क्यों? अच्छा तो है पुरे 32 हज़ार का.. सुमन औऱ ऋतू को भी पसंद आया था..
आरती - पर मम्मी ज़ी सिर्फ 32 हज़ार का ही था.. मेरे एकलौते देवर ज़ी के लिए तो लाखों का सूट लेना चाहिए था..
कोमल - तू ही जाके लेले अपने लाडले देवर के लिए जो तुझे लेना है.. किसने रोका है? अच्छा मैं नीचे जाती हूँ.. ये कम्बख्त अब्दुल कहा मर गया..
कोमल के जाने के बाद आरती गोतम से - बता भिखारी कुछ चाहिए तो? कीमत की चिंता मत कर.. तेरे बाप की तरह हवलदार नहीं है यहां कोई.. मैं तो खानदानी अमीर हूँ..
गौतम दिवार से उठकर आरती के बिलकुल सामने खड़ा हो जाता है औऱ मुस्कुराते हुए कहता है..
गौतम - आपके कुछ भी बोलने से मुझे फर्क नहीं पड़ने वाला.. माँ ने अपनी कसम दी थी आने के लिए इसलिए यहां आना पड़ा.. औऱ रही बात उस सूट की तो मैं पहनना तो छोडो.. थूकू भी ना, तुम लोगों की दी हुई किसी चीज पर..
आरती गुस्से से - अबे साले भिखारी.. औकात मत भूल अपनी.. बड़ी बड़ी बातें करने से कोई बड़ा नहीं बन जाता.. हालत भिखारीयों वाली बातें नवाबो की..
गौतम मुस्कुराते हुए - कुछ सालो पहले आपके पति की मुझसे ज्यादा खराब हालत थी पूछना कभी फुर्सत में उनसे.. आपकी प्यारी ननद ने तो मेरा चोरी तक नाम लगा दिया था.. ये तो बताया होगा किसीने आपको..
आरती भी मुस्कुराते हुए - उस बेचारी की क्या गलती.. तू शकल से चोर लगता है ना इसलिए लगाया होगा..
गौतम आगे कुछ नहीं बोलता औऱ नीचे जाने के मुड़ जाता है तभी आरती कहती है..
गौतम - क्या हुआ? बुरा लगा मेरे प्यारे देवर ज़ी को?
गौतम मुड़कर मुस्कुराते हुए एक नज़र आरती को देखता है औऱ फिर नीचे अपने कमरे में आ जाता है..
आरती ने अपनी बातों से हर कोशिश की थी गौतम का दिल दुःखाने की मगर इस वक़्त उसका अपना दिल दुखने लगा था.. उसे लग रहा था जैसे उसके शब्दों से ज्यादा कड़वी औऱ नोकिली गौतम के होंठों की मुस्कान थी.. आरती भी कुछ देर बाद नीचे आ गई..

गायत्री के कमरे में महफिल सजी हुई थी गौतम को छोड़कर सभी लोग वहा मोज़ूद थे औऱ हंसी मज़ाक़ कर रहे थे.. आज सारी रात यही बैठके बिताने का प्लान था कभी फ़िल्मी गानो पर सब झूमते तो कभी क़िस्से कहानियो में खोकर खूब जोर से हँसते..
सुमन भी यहां बैठी हुई ख़ुशी से नाच गा रही थी.. उसने गौतम को आज के इस प्रोग्राम की जानकारी दे दी थी.. औऱ गौतम भी अपने कमरे में रेशमा से बहुत देर तक चैटिंग करके अब सो चूका था..

सुबह 4 बजे तक सबका नाच गाना यूँही चलता रहा औऱ फिर कई लोग थक्कर सो गए जिनकी नींद 9 बजे खुली.. शबनम चाय बना चुकी थी औऱ कुछ लोगों को छोड़कर सब चाय पीते हुए बाते करहे थे.. आने वाले मेहमानो को सीधा वेडिंग होटल के कमरों में पहुंचाया जा रहा था.. आरती एक चाय का कप उठाकर गौतम के रूम में आ गई जहा गौतम नहाकर कपडे पहने के बाद अब अपने जूते पहन रहा था..
आरती रूम में आते हुए गौतम के सामने चाय का कप रखकर - इतना सजधज के कहा जा रहा है?
गौतम - भिखारी के लिए कब से चाय लेकर आने लगी आप.. औऱ रात को पेट नहीं भरा.. सुबह भी आ गई..
आरती - क्या करू? अब तो बिना तुझे बेज्जत किये मेरा मन ही नहीं भरता..
गौतम जूते पहनकर - ठीक है फिर जल्दी मन भर लो.. मुझे जाना है..
इतना कहकर गौतम अपने बाल सही करने लगा औऱ फिर जीन्स पर बेल्ट लगाने लगा..
आरती - तू बताएगा क्या मुझे कब क्या करना है? अपनी मर्ज़ी से तुझे बेज्जत करुँगी तेरे कहने पर नही..
गौतम बेल्ट लगाकर कमरे से बाहर जाने लगता है कि
आरती गेट के सामने आ जाती है..
आरती - तुझे अपने मामा-मामी से, चेतन से ऋतू से मुझसे हम सबसे जलन होती है ना..
गौतम - हां होती है.. देखो मैं तो झलकर काला पड़ गया.. अब सामने से हटो.. मुझे बाहर जाना है..
आरती गौतम के बिलकुल करीब आती हुई - अगर नहीं हटू तो? कुछ बिगाड़ लोगे मेरा?
गौतम - भाभी दूर हटो..
आरती - अरे वाह.. पहली बार भाभी बोला तूने मुझे.. पहले पता होता तो इतनी दिल दुखने वाली बातें तो ना करती तुझसे..
गौतम - आपसे किसने कहा आपकी बातों से मेरा दिल दुखा है..
आरती गौतम के गले लगकर - मतलब तू जानता था मैं सिर्फ तेरा दिल दुखने के लिए वो सब कड़वी बातें बोल रही थी.. पता है कितना बुरा लग रहा था मुझे तुझसे वो बातें बोलकर.. तूने ऋतू को भी कितना उदास किया है.. बेचारी का कल से मुंह उतरा हुआ है..
गौतम आरती को खुदसे अलग करते हुए - हटो कहीं जाना मुझे..
आरती - कहा जाना है? औऱ इतना तैयार हुआ है पक्का किसी लड़की से ही मिलने जा रहा होगा..
गौतम - आपसे मतलब? आपके पास औऱ कोई काम नहीं है क्या?
आरती फिर से गौतम के गले लगते हुए - नहीं है..
गौतम - इतना क्यों चिपक रही हो भाभी.. छोडो ना..
आरती - पहले बता जा कहा रहा है तू?
गौतम - कहीं नहीं बस शहर घूमने जा रहा था..
आरती - चल मैं घुमाती हूँ तुझे शहर..
गौतम - मैं खुद घूम लूंगा, आप हटो..
आरती - मन नहीं कर रहा हटने का.
गौतम - भाभी अपने पति के जाकर लिपटो.. मुझे छोड़ दो..
आरती गौतम को छेड़कर हस्ते हुए - चेतन में कोई मज़ा नहीं है देवर ज़ी.. मुझे आपके जैसा चिकना खूबसूरत औऱ प्यारा मर्द चाहिए.. जैसे साली आधी घरवाली होती है वैसे देवर भी आधा घर वाला होता है.. थोड़ी बहुत मस्ती तो कर ही सकती हूँ तेरे साथ..
गौतम - सुबह सुबह मैं ही मिला हूँ क्या आपको..
गौतम इतना कहकर आरती को अपने से दूर हटाते हुए कमरे से बाहर आ जाता है और आरती पीछे से मुस्कुराते हुए कहती है.. वापस जब आओगे तब बताऊंगी तुम्हे देवर ज़ी.. मैं नहीं छोड़ने वाली तुम्हे.. गौतम अपनी कर लेकर घर से निकल जाता है..

गौतम ने शहर के एक अच्छे होटल में ओयो रूम बुक किया था जहां वह सलमा को रास्ते से पिकअप करके आ जाता है. आज सलमान ने कम से छुट्टी ले ली थी और वह जानती थी क्या आज गौतम और उसके बीच कोई नहीं आने वाला. सलमा गौतम पर पूरी तरह से लट्टू थी और गौतम भी सलमा को भोगने की नीयत से आज उसे अपनी बाहों में लेकर चूम रहा था.

सलमा गौतम इस तरह से एक दूसरे को चूम रहे थे जैसे उनका मिलन अधूरा रह गया हो वो जल्द से जल्द उसे पूरा कर लेना चाहते हो. आज सुबह बहुत आकर्षक और सुंदर लग रही थी उसने जो सिंगार किया था गौतम उसे देखकर पूरी तरह से काम भावना में डूब चुका था और सलमा को अपनी बाहों में भरकर उसके रसीले होठों का स्वाद ले रहा था. सलमा भी पूरे मन से गौतम को अपनी बाहों में कस्टे हुए उसके होठों से अपने होंठ लगाए हुए उसे चूम रही थी और ऐसे चूम रही थी जैसे उस चूमकर अपना बना लेना चाहती हो.

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गौतम चंदन के दौरान सलमा के बाद उनके उतार-चढ़ाव को अपने हाथों से महसूस कर रहा था और उसे अनुभव कर रहा था. सलमा की छाती पर उगे हुए संतरे काफी बड़े आकार के थे जिसे गौतम अपने हाथों से बार-बार दबाते हुए सलमा को काम भावना में डूबा रहा था. सलमा की चुंबन के दौरान गौतम के शरीर को अपने हाथों से तलाश रही थी और तराश रही थी. दोनों का संबंध लगातार चलता जा रहा था और इसमें दोनों कोही काम सुख की प्राप्ति हो रही थी इसी बीच दोनों एक दूसरे के पतन को अपने हाथों से हर जगह छूते हुए एक दूसरे को काम की भावना से ओतप्रोत होकर पाने की इच्छा रखते हुए अपने में समाने की भावना से भरते हुए चूम रहे थे.

गौतम ने चुंबन तोड़ते हुए सलमा की कमर में हाथ डालकर उसे दीवार से चिपका दिया और उसकी छाती पर उगे हुए संतरों को अपने दोनों हाथों से मसलते हुए सलमा से पूछा..
गौतम सलमा की कुर्ती उतारते हुए बूब्स मसलकर - आपा ये तो पहले से दुगुने लग रहे है.. लगता है बहुत मेहनत हुई है इन पर..

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सलमा गौतम की शर्ट निकालती हुई - मेहनत तो बहुत हुई है गौतम सिर्फ ऊपर ही नहीं नीचे भी.. पर मेरी मर्ज़ी से पहली बार होगी..
गौतम सलमा की ब्रा खींचते हुए - फ़िक्र मत करो आपा.. आज कोई मादरचोद बीच में नहीं आने वाला.. उस दिन का अधूरा काम मैं आज पूरा कर दूंगा..
सलमा घुटनो पर बैठकर गौतम की जीन्स खोलते हुए - मैं तो कब से इस मोके का इंतजार कर रही थी गौतम.. कल की रात मैंने कैसे निकाली है क्या कहु..
गौतम सलमा के बाल पकड़कर अपनी चड्डी नीचे सरकाते हुए - सब्र का फल नमकीन होता है सलमा आपा.. लो टेस्ट करो.. ये कहते हुए गौतम ने अपना हथियार सलमा के मुंह में डाल दिया और सलमा आंखें फाड़ कर सिर्फ गौतम के हथियार को देखने लगी जो इस वक्त आधा उसके मुंह में घुसा हुआ था.

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गौतम ने सलमा को रिएक्ट करने का कोई मौका नहीं दिया और सीधा उसके मुंह में अपना हथियार डालकर अपना हथियार सलमा से चूसाने लगा. सलमा भी हैरानी से चकित होकर सोच में पड़ गई कि गौतम का हथियार इतना बड़ा कैसे हुआ और वह यही सोचते हुए गौतम का हथियार चूस रही थी. गौतम तो बस सलमा की सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उसके मुंह में अपना हथियार जोर-जोर से आगे पीछे कर रहा था औऱ इस पल का आनंद उठा रहा था.

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गौतम ने कुछ देर बाद अपना सारा वीर्य सलमा के मुंह में छोड़ दिया और सलमा उसे पीती हुई हांफ कर उसी तरह बैठी रही..
गौतम अपने लंड को साफ करता हुआ सलमा से थोड़ा सा दूर हो गया और बेड पर बैठ गया सलमा अपने घुटनो से खड़ी होकर अपने पैरों पर आ गई और मुस्कुराते हुए अपने होंठो को साफ कर गौतम से बोली..
सलमा - तू तो पहले से बड़ा हो गया है गौतम..
गौतम - तेरा भी साइज़ दुगुना हो गया है आपा.. सच बताओ किस किस ने मेरी सलमा पर मेहनत की है.
सलमा गौतम के करीब आकर अपने सलवार का नाड़ा उसके हाथ में देती हुई - छोड़ ना गौतम.. अब किस किस नाम बताऊ तुझे? औऱ ये मुझे आपा मत बोल अब से सिर्फ सलमा..
गौतम नाड़ा खींचकर सलवार नीचे कर देता है औऱ सलमा को अपने ऊपर गिरा लेता है औऱ कहता है - तू मेरी पहली मोहब्बत है सलमा.. औऱ मुझे जानने का पूरा हक़ है कि मेरी पहली मोहब्बत कहा कहा किस किस से चुद चुकी है..

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सलमा गौतम के ऊपर से उठ जाती है एक सिगरेट जलाकर कश मारती हुई गौतम से कहती है - गौतम क्या बताऊ तुझे.. मुझे सबसे पहले घर में अब्बू ने ही गन्दा कर दिया था.. जवानी जब अठरा साल पर पहुंची तो अम्मी का इन्तेकाल हो गया औऱ उसके बाद अब्बू ने मुझे कई बार गन्दा किया.. रोज़ नशे में रात रातभर मेरे ऊपर चढ़कर अब्बू अपनी हवस मिटाते थे.. ऐसा लगता था मैं उनकी बेटी नहीं बीवी हूँ..
गौतम सलमा का हाथ पकड़कर अपनी बाहों में जकड़ लेता है, उसे पीठ के बल बिस्तर में लेटा कर उसकी ब्रा उतार देता है औऱ सलमा के गोरे चुचो पर कड़क होकर खड़े हुए सलमा के काले चुचक अपने में लेकर चूसते हुए पूछता है..
गौतम - अब्बू के बाद?

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सलमा सिगरेट का कश लेकर गौतम को अपने चुचे चुसवाते हुए - जब अब्बू का मुझसे मन भर गया तो उन्होंने दूसरी शादी कर ली औऱ मेरा निकाह जावेद से करवा दिया.. सुहागरात को जब जावेद मेरे ऊपर चढ़ा तो उसे पता चल गया की मैं कुंवारी नहीं हूँ.. उसके बाद से वो हर बार मुझसे लड़ाई झगड़ा करता औऱ अलग अलग लड़कियों से बात करता आखिरी में उसने किसी औऱ जे चक्कर में मुझे तलाक दे दिया..
गौतम सलमा की चड्डी में हाथ डालकर उसकी चुत पकड़कर मसलते हुए - जावेद के बाद?
सलमा सिसकि लेकर सिगरेट का अगला कश लगाते हुए - जावेद से तलाक के बाद तो जैसे झड़ी लग गई लोड़ो की मेरी चुत में.. पहले रहने के लिए कमरा दिलाने वाला दलाल क़ासिम फिर कमरा देने वाला सोहन उसके बाद नौकरी दिलाने वाला राकेश औऱ अखिर में मेरा मैनेजर नीलेश.. एक बाद एक सबने मेरी इस चुत को अपनी मनमर्ज़ी से चोदा.. गांड को भी सलामत नहीं छोडा किसीने..
गौतम अपने मुंह से सलमा का चुचक निकालकर - मतलब मेरी मोहब्बत को कोठे की रांड समझकर मेरे अलावा सबने चोदा है.. तलाक़ के बाद वापस अब्बू के पास भी तो जा सकती थी..
सलमा - वहा जा कर कोनसी बच जाती वहा भी जाकर चुदना ही था..
गौतम हसते हुए - आदिल के साथ जब शराब लेने ठेके गया था तब तेरे अब्बू को देखा था मैंने.. उसने जिससे निकाह किया था वो लड़की अपने आशिक के साथ भाग गई.. तेरा अब्बू तो अब अकेला घर में हिलाता होगा अपना.. सुना है तेरे तलाक़ के बाद तेरा पता भी लगाने की कोशिश की थी उसने..
सलमा सिगरेट बुझाते हुए - मुझे ढूंढ़कर क्या मिलेगा अब्बू को..
गौतम - क्या पता तेरी वापस याद आ रही हो उसे.. एक बार जाकर मिल लो..
सलमा - मुझे किसी से नहीं मिलना..
गौतम सलमा की चुत पर आते हुए - तेरी मर्ज़ी..
ये कहते हुए गौतम सलमा की जांघों के जोड़ पर अपना मुंह लगा देता है और उसकी चुत को चाटने लगता है..
सलमा गौतम के बाल पकड़कर उसे अपनी चुत चटाते हुए - अह्ह्ह्ह... गौतम.. उफ्फ्फ.. मेरी जान..

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गौतम अपने पूरे अनुभव और प्रयास के साथ सलमा की जांघो के जोड़ पर अपना मुंह लगते हुए उसे चूस और चाट रहा था जिसमें सलमा को कामसुख की प्राप्ति हो रही थी और उसके सिसकी आप कमरे में गूंजने लगी थी.. सलमा से रहा ना गया और उसने थोड़ी सी चुसाई के बाद ही अपना पानी गौतम के मुंह पर छोड़ दिया औऱ अपने हाथ से कपड़ा लेकर गौतम का मुंह साफ करने लगी..
गौतम - बता तो देती यार.. पुरे मुंह को नहला दिया तूने..
सलमा हस्ती हुई - सॉरी मेरी जान.. तूने इतनी प्यार से किया की मुझसे रहा ही नहीं गया.. ला मैं साफ कर देती हूँ..
गौतम का मुंह साफ करने के बाद शर्मा गौतम के ऊपर चढ़ गई और उसपर चढ़ते हुए उसका लंड अपनी चुत में सेट करके घुसा ने लगी मगर वह तुमने उससे ऐसा करने से रोक दिया और उससे कहा..
गौतम - इतनी भी क्या जल्दी है सलमा.. पहले मुझे तेरा वही डांस देखना है जिसके कारण मुझे तुझसे मोहब्बत हुई..
सलमा मुस्कुराते हुए - कोनसा डांस गौतम..
गौतम - वही जो तूने आफरीन के निकाह में किया था.. उसी गाने पर.. मैं सोंग प्ले करता हूँ..
गौतम उठकर सामने लगी हुई होटल की टीवी में अपना फोन कनेक्ट करके एक गाना प्ले करता है और सलमा जो की नंगी बिस्तर पर बैठी थी वह सामने आकर नाचने लगती है..

मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं
थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है
मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं
थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है
मिलन होगा अभी एक रात की दूरियां है
मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं
थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

गौतम नंगा बिस्तर पर बैठा हुआ अपने लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाता हुआ अपने सामने नाच रही नंगी सलमा के हिलते चुत्तड़ औऱ चुचे देखकर कामुक हो रहा था.. सलमा बिना किसी शर्म लिहाज़ के गौतम के सामने नंगी अपने चुचे और अपने चूतड़ हिलाकर गाने की धुन पर ऐसे नाच रही थी जैसे वो कोई हीरोइन हो बॉलीवुड की..

लम्बी लम्बी ते काली काली रातों में
काहे चूड़ियां खनकती है हाथों में
लम्बी लम्बी हो लम्बी ते काली काली रातों में
काहे चूड़ियां खनकती है हाथों में
ना आना तू निगोड़ी चूड़ियों की बातों में
लम्बी लम्बी ते काली काली रातों में

सलमा का नाच देखकर गौतम खड़ा हो जाता है औऱ अपना खड़ा लंड लेकर सलमा के साथ हल्का सा ठुमका लगाते हुए नाचने लगता है..

ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया
मैं नइ जाना नइ जाना तेरे साथ मुंडेया
ले जा वापस हो ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया मैं नइ जाना नइ जाना तेरे साथ मुंडेया
सतायेगा जगायेगा तू सारी रात मुंडेया

गौतम सलमा को अपनी बाहों में भरके बिस्तर पर पटक देता है औऱ उसके ऊपर चढ़ता हुआ सलमा के गर्दन औऱ चुचे चूमने लगता है.. मगर सलमा गौतम को पलट देती है, उसके ऊपर चढ़ जाती है औऱ काऊगर्ल पोजीशन में बैठके गाने के हूबहू भाव अपने चेहरे पर लाकर गौतम को देखते हुए गाने की धुन के साथ हल्का नाच दिखाते हुए अपने चुचे पकड़कर गाती है..

मेरे दर्जी से आज मेरी जंग हो गई
कल चोली सिलाई आज तंग हो गई
करे वो क्या तू लड़की थी अब पतंग हो गई
तेरे दर्जी से आज तेरी जंग हो गई

सलमा इसके आगे गौतम के दोनों हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रख लेती औऱ आगे गाने के साथ गाती हुई गौतम के साथ पलटने लगती है..

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मेरे सैयां किया ये बुरा काम तूने
कोरे कागज पर लिख दिया नाम तूने
कहीं का भी नहीं छोड़ा मुझे है राम तूने
मेरे सैयां किया ये बुरा काम तूने
मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है मिलन होगा अभी एक रात की दूरियां है मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियां हैं
थोडा ठहरो सजन मजबुरियां है

गौतम गाना ख़त्म होने के साथ ही सलमा को पलट देता है औऱ मिशनरी में आते हुए एक झटके में अपना लहंद सलमा की चुत में घुसाकर उसके होंठो को अपने होंठों में गिरफ्तार करते हुए सलमा की चुदाई शुरू कर देता है.. सलमा की खुली हुई चुत में गौतम का लंड खलबली मचाता हुआ चला गया था औऱ पहले झटको में ही सलमा इसे समझ गई थी आज उसकी चुत भोसड़ी में बदल जायेगी..

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सलमा हर झटके पर आहे भरते हुए गौतम को अपने अंदर खींचने लगी थी औऱ उसके होंठों से होंठ लगाकर मुंह का रसपान करते हुए अपनी चुदाई का वो सुख भोग रही थी जो उसे पहली बार अपनी मर्ज़ी से मिल रहा था.. सलमा को अच्छे से पता था की अब उसकी चुत चुत नहीं भोसड़ा बनने वाली है..

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मिशनरी के बाद घोड़ी बनकर सलमा गौतम के आगे झुकी हुई थी औऱ गौतम अपने चुदाई कला से सलमा को जीतने में लगा हुआ था औऱ इसमें उसने सफलता भी पा ली थी..
गौतम सलमा के बाल पकड़ कर उसे ऐसे चोद रहा था जैसे वो कोई दो टके की रंडी हो.. सलमा चुपचाप चुदाई का मज़ा लेटे हुए गौतम की हर बात माने जा रही थी..
गौतम ने सलमा का एक पैर हवा में उठा कर अपने कंधे पर ले लिया औऱ फिर उसका एक हाथ पकड़ के बिस्तर पर आड़ा पटक के चोदने लगा..

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सलमा बस आहे भरने औऱ सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर रही थी ऐसी चुदाई उसकी आज तक नहीं हुई थी औऱ अब उसे गौतम से इश्क़ हो चूका था.. सलमा गौतम को देखते हुए उससे चुदवा रही थी औऱ उसकी आँखों में गौतम के लिए अब प्यार औऱ परवाह झलकने लगी थी..

गौतम ने थोड़ी देर इसीलिए तरह सलमा को चोदकर उसे अपने ऊपर ले लिया औऱ नीचे से झटके मारते हुए चोदने लगा

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सलमा दो बार झड़ चुकी थी मगर अब भी चुदाई चालू थी सलमा की कामुकता उफान पर..
सलमा - गौतम तू तो कमाल है.. उफ्फ्फ... आज तो हलात ही ख़राब कर दी तूने..
गौतम - पहली मोहब्बत है तू सलमा.. मेरा लंड तो बैठने का नाम ही नहीं ले रहा..
सलमा - चोद गौतम.. आहहह..
गौतम ने सलमा को गोद में उठाकर अच्छे से चोदते हुए अपना माल सलमा की चुत में भर दिया औऱ उसे kiss करता हुआ बोला..
गौतम - लोग कहते है किसीको अपनी पहली मोहब्बत नहीं मिलती.. गलत कहते है साले.. मुझे आज मिल गई..
सलमा - अपनी चुदी हुई मोहब्बत पाकर तू इतना खुश है.. काश मैं अपनी पहली चुदाई तेरे साथ कर पाती..
गौतम - पुरानी बातों को भूल जा सलमा औऱ अब से अपना ये खज़ाना किसी औऱ को मत देना..
सलमा - तू जैसा कहेगा वैसा ही करुंगी मेरी जान..
गौतम - मेरी माने तो सलमा तू वापस अपने अब्बू के पास चली जा.. वहा तेरा अपना घर है.. इस तरह रहने की क्या जरुरत?
सलमा - पर गौतम.. अब्बू..
गौतम - अपने अब्बू से बोल घर बेचकर शहर के किसी दूसरे हिस्से में घर ले ले औऱ वहा तुझसे निकाह करके रहे..
सलमा - अब्बू औऱ मेरा निकाह? ये कैसे मुमकिन है?
गौतम - सलमा किसी को कुछ नहीं पता चलेगा.. तू चाहे तो तेरे अब्बू से मैं बात करता हूँ.. मैं तुझे उस तरह हर किसी के आगे रंडी जैसे झुकते हुए नहीं देख सकता..
सलमा - ठीक है लेकिन मैं बच्चे सिर्फ तेरे ही पैदा करुँगी..
गौतम - उसकी चिंता तू मत कर सलमा.. ये कहते हुए गौतम फिर से सलमा को बिस्तर पर पटक देता है औऱ वापस फिर से उसकी चुदाई शुरू कर देता है औऱ वापस अपना सारा माल उसकी चुत में भरके होटल से वापस आ जाता है..
 
Update 21


भोस्डिके क्या लंड है तेरा दो मिनट में हो ढह गया.. इससे अच्छा तो मैं गाजर मूली डाल लू अपनी चुत में.. किसी काम का नहीं है तू..

मालकिन माफ़ कर दो फिर से खड़ा कर लेता हूँ..

साले जब तक तेरा खड़ा होगा सुबह की दोपहर हो जायेगी.. मेरी गलती है तेरे जैसे ढीले को काम पर रख लिया.. खड़ा नहीं हो रहा तो छोड़, मेरी चुत को चाटकर ही शांत के दे..

जैसा आप कहो मालकिन..

कोमल घर के नौकर अब्दुल के सामने अपनी साडी कमर से ऊपर करके बैठी थी औऱ अब अब्दुल कोमल की चुत को चाटने लगा था..

कोमल - भोस्डिके ठीक से चाट ना.. वो भी नहीं आता क्या तुझे?

अब्दुल - माफ़ करना मालकिन.. चाटता हूँ..


घर के लगभग सभी लोग वेडिंग होटल जा चुके थे औऱ घर में कुछ ही लोग बचे थे.. गौतम को सुबह जब सिगरेट पिने की तलब लगी औऱ वो छत पर आ गया जहा घर का एक्स्ट्रा सामान रखने के लिए दो कमरे बने हुए थे उसीके पीछे खाली जगह पर बाथरूम भी था.. गौतम छत पर आ गया औऱ उस कोने की तरफ जाके सिगरेट पिने की सोची मगर वहा जाते ही उसे अपनी मामी कोमल की सिस्कारी साफ साफ सुनाई देने लगी.. गौतम ने हलके से कदम बढ़ा कर कमरे में झाँक कर देखा तो उसे सामने अब्दुल औऱ कोमल दोनों साथ ही दिखाई दिए जो ऊपर लिखी हुई अवस्था में थे..


गौतम ये देखकर मुस्कुरा बैठा औऱ अपना फ़ोन निकालकर दोनों का वीडियो बनाने लगा.. वीडियो बनाते बनाते गौतम ने कमरे का दरवाजे को धक्का देकर खोल दिया औऱ कमरे में आ गया.. अब्दुल औऱ कोमल गौतम को देखकर हड़बड़ा गए औऱ अपने आपको ठीक करते हुए खड़े हो गए..

गौतम - अरे रुक क्यों गए? प्लीज कंटिन्यू.. बहुत अच्छी वीडियो बन रही है मामी..

अब्दुल औऱ कोमल एक दूसरे की तरफ देखकर चिंता औऱ फ़िक्र के भाव से भर गए फिर अब्दुल कमरे से बाहर जाने लगा तो गौतम ने उसे जाने से रोक दिया औऱ बोला..

गौतम - कहा जा रहे हो अब्दुल मिया.. रुक जाओ.. क्यों मामी? घर के नौकर के साथ ही.. मामा में दम नहीं है क्या? वैसे दम तो इसमें नहीं लगता..

कोमल गौतम के करीब आकर - ग़ुगु.. बेटा वीडियो डिलीट कर दे..

गौतम - ये तो पुरे घर को दिखाऊंगा मामी.. बहुत गर्मी है ना आपके अंदर..

कोमल गौतम को पकड़कर - ग़ुगु.. मेरी बात सुन.. मेरी बात मान बेटा.. मैं तेरी मामी हूँ ना? देख मैं कहीं की नहीं रहूंगी.. तू चाहता है मैं बर्बाद हो जाऊ?

गौतम कोमल से - ठीक है मामी.. पर पहले बताओ इस नौकर के साथ कब से चल रहा है ये सब?

कोमल - कुछ महीने हो गए बेटा.. तू तो जवाँ है समझता है औरत की जरुरत.. पर ये निकम्मा भी किसी काम का नहीं..

गोतम अब्दुल से - इधर आ..

अब्दुल करीब आता है तो गौतम खींच के एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल ओर रसीद कर देता है औऱ कहता है..

गौतम - चल निकल यहां से भड़वे..

अब्दुल अपना सा मुंह लेके नीचे चला जाता है औऱ गौतम कोमल से कहता है..

गौतम - मामी वीडियो में डिलीट नहीं करने वाला..

कोमल प्यार से - ग़ुगु मेरा अच्छा बच्चा है.. देख अपनी मामी को तू ऐसे परेशान करेगा तो तुझे पाप लगेगा..

गौतम - रहने दो मामी.. घर के नौकर के साथ ये सब कर रही हो औऱ मुझे पाप पुण्य का ज्ञान दे रही हो.. मैं ये वीडियो मामा औऱ चेतन को दिखा के ही रहूँगा..

कोमल - ग़ुगु.. देख तुझे जो चाहिए में सब दिला दूंगी पर तू इस बात को यही भूल जा बेटा..

गौतम - मामी आप भी भाभी की तरह मुझे भिखारी समझती हो ना?

कोमल - पागल हो गया है क्या तू ग़ुगु.. तू मेरे लिए चेतन जैसा है.. मैं अपने ही बच्चे के लिए ऐसा क्यों सोचूंगी भला.. देख बेटा.. मेरी बात सुन.. तू अगर बात मानेगा ना तो मैं तेरे लिए एक फूल सी लड़की देखूंगी शादी के लिए..

गौतम - माफ़ करना मामी.. पर मैं आपकी बात नहीं मानुगा.. मैं जा रहा हूँ मामा के पास..

कोमल गौतम के पैर पकड़कर - ग़ुगु देख ऐसा मत कर.. मैं कहीं की नहीं रहूंगी.. मैं तेरे आगे हाथ पैर जोड़ती हूँ बेटा..

गौतम - छोडो मामी.. अभी तो मौका मिला आपसे बदला लेने का..

कोमल - किस बात का बदला ग़ुगु? मैं जानती हूँ तू मुझसे नाराज़ है पर ये सब करके तुझे केसा बदला मिलेगा? मैं तुझे अपना बच्चा मानती हूँ ग़ुगु मेरे साथ ऐसा मत कर.. कोमल की आँखों में आंसू थे..

गौतम - मुझसे कोई उम्मीद मत करो मामी..

ये कहते हुए गौतम नीचे आने लगता है औऱ उसीके पीछे कोमल भी गौतम को पुकारती हुई आ जाती है..

गौतम नीचे हॉल में खड़े अपने मामा संजय की गरफ बढ़ता है औऱ कोमल की जैसे सांसे अटक जाती है..

गौतम संजय के करीब जाकर फ़ोन दिखाते हुएबिलकुल धीरे से कहता है - मामा ज़ी वो मामी कह रही थी की दीदी की शादी में ये वाली डेकोरेशन हो तो बहुत अच्छा रहेगा..

संजय कुछ देर गौर से गौतम के फ़ोन को देखकर कोमल की औऱ चला जाता है औऱ कोमल तो जैसे अब अपनी बर्बादी का इंतजार करते हुए नम आँखों के साथ मोन खड़ी थी..

संजय - इतनी बात के लिए आंसू को बहा रही हो..

कोमल जो कुछ सोच के खड़ी थी संजय की बात सुनकर उससे बाहर निकलती हुई - क्या..

संजय - अरे तुम जो डेकोरेशन चाहती हो वही होगा शादी में.. ग़ुगु तू वो पिक मुझे व्हाट्सप्प कर दे मैं डेकोरेशन वाले को भेज देता हूँ.. तेरी मामी की पसंद की डेकोरेशन ही होगी..

ये कहकर संजय चेतन के साथ अब्दुल को लेकर वेडिंग होटल चला जाता है औऱ कोमल से जल्दी ही तैयार होकर गौतम के साथ वेडिंग होटल आने को बोल जाता है..

कोमल गौतम को गुस्से की नज़र से देखने लगती वही गौतम मुस्कुराते हुए अपनी मामी कोमल को देखकर मुंह बनाते हुए कोमल को चिढ़ाता है..

कोमल गौतम की औऱ बढ़ती है लेकिन गौतम सीढ़ियों से ऊपर की तरफ बढ़ जाता है.. कोमल भागती हुई गौतम के पीछे पीछे उसके कमरे में चली जाती है जहा गौतम हसते हुए कोमल से कहता है..

गौतम - डर गई थी ना आप?

कोमल गौतम को पकड़कर धीरे से उसके गाल पर थप्पड़ मारकर - तूने तो जान ही निकाल दी थी मेरी.. मैं समझी तू सब बता देगा संजय को..

गौतम कोमल को बाहों में भरते हुए - वो तो मैं अब भी बता सजता हूँ.. पूरा वीडियो है आपका मेरे पास..

कोमल प्यार से - ग़ुगु डिलीट कर दे ना उसे..

गौतम - इतनी आसानी नहीं करूंगा मामी..

कोमल - तुझे क्या चाहिए बता ना.. मैं सब दिला दूंगी तुझे..

गौतम - सबसे पहले तो आपके होंठों से एक छोटा सा चुम्मा चाहिए..

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कोमल मुस्कुराते हुए - बस इतनी बात.. कोमल अपने होंठ गौतम के होंठो से मिलकर गौतम को चूमने लगती है औऱ गौतम भी इस चुम्बन का मज़ा लेने लगता है.. कुछ देर बाद गौतम चुम्बन तोड़कर मामी एक सेकंड फ़ोन आ रहा है..

गौतम फ़ोन उठाकर - हेलो..

सुमन - ग़ुगु कहाँ है तू?

गौतम - माँ मैं घर पर हूँ..

सुमन - बेटा वेडिंग होटल आने के लिए कहा था ना तुझे? अब तक घर पर है..

गौतम - वो माँ जरुरी काम आ गया था.. मैं आता हूँ..

सुमन - ठीक है तेरे मामा से बात हुई है अभी अब सिर्फ तू औऱ तेरी मामी घर पर है तू अपनी मामी को भी साथ ले आना..

गौतम- ठीक है मा.. फ़ोन कट जाता है..

कोमल वापस गौतम को चूमने के लिए बढ़ती है तो गौतम उसे रोक देता है - एक मिनट मामी.. वीडियो डिलीट कर देता हूँ..

कोमल गौतम के लंड पर उसकी जीन्स के ऊपर से हाथ फेरती हुई नीचे बैठ जाती है औऱ गौतम की जीन्स खोलने लगती है..

गौतम - मामी माँ का फ़ोन आया था सब वेडिंग होटल जा चुके है घर अब कोई नहीं है.. चलो सब बुला रहे है..

कोमल जीन्स नीचे सरकाकर - बुलाने दे ग़ुगु.. अब तो मैं तुझे खुश करके ही यहां से कहीं जाउंगी..

गौतम - सोच लो मामी.. मैं बहुत बड़ा जानवर हूँ..

कोमल चड्डी नीचे करके हस्ते हुए - कितना बड़ा जानवर है तू..

इतना कहते ही कोमल के सामने गौतम का लंड आ जाता है औऱ उसका मुंह बंद हो जाता है.. गौतम कोमल के मुंह पर लंड के थप्पड़ मारते हुए बोलता है..

गौतम - क्या हुआ मामी?

कोमल - ग़ुगु.. तो तू तो बहुत बड़ा..

गौतम कोमल के इतना कहते ही उसके मुंह में लंड डाल देता है..

गौतम - अब कुछ मत बोलो मामी..

कोमल गौतम के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगती है..

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गौतम कोमल को देखते हुए अपना हथियारों उसे चुसवा रहा था और कोमल भी बड़े चाव से गौतम का हथियार मुंह में लेकर चूस रही थी. दोनों एक दूसरे की तरफ देखे जा रहे थे और दोनों में काम इच्छा जागने लगी थी जो दोनों की आंखों में दिखाई देने लगी थी. गौतम कोमल के बाल पड़कर उसे ऐसे अपना हथियार चुसवा रहा था जैसे कोमल उसकी मामी नहीं कोई पेशेवर रंडी हो..


कुछ देर यूँही गौतम ने कोमल को अपना लॉलीपॉप चुसवा कर उसे नंगा कर दिया औऱ कखुद भी अपनी जन्मजात अवस्था में आ गया.. गौतम ने कोमल को बिस्तर पर पटक दिया और उसकी टांगे चोडी करते हुए उसकी चुत अपना हथियार सेट करने लगा..

गौतम को अपनी मामी कोमल की हालत खराब करनी थी इसलिए उसने चुत के छेद पर अपने लोडे को सेट करते हुए थूक लगाकर एक ही झटके में अपना लोडा और उसके अंदर घुसा दिया जिससे कोमल बिन पानी मछली जैसे तड़पने लगी और झटपटाने लगी..

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कोमल की चुत से रक्त की धार भी बह निकली थी जो उसके कई सालों से ना चुदने औऱ चुत के सिकुड़ जाने का प्रमाण थी.. कमल जोर जोर से चिल्ला रही थी और चिंख रही थी अगर घर में उसकी चिंख पुकार सुनने वाला कोई नहीं था.. गौतम ने अपने रूम में टीवी को फुल वॉल्यूम पर करके सोंग प्ले कर दिए थे जिससे भी कोमल की आवाजे दब रही थी.. गौतम ने कोमल के मुंह पर हाथ रखकर उसकी आवाज दबाने की कोशिश नहीं की औऱ कोमल की उस हालात को देखकर मज़े लेने लगा..

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गौतम ने एक दो झटके और जोर-जोर से मारे और अपना पूरा हथियार कमल की गुफा के अंदर फिट कर दिया.. कोमल गौतम को जोर जोर से थप्पड़ मर रही थी औऱ अपने ऊपर से हटने औऱ अपना लंड बाहर निकालने के लिए कह रही थी मगर गौतम सब कुछ सहकारी भी कोमल के ऊपर ही पड़ा रहा औऱ कोमल से बोला..

गौतम - क्या हुआ मामी? पसंद नहीं आया जानवर?

कोमल - मदरचोद रंडी की औलाद ऐसे कौन चुत में लंड घुसाता है? भड़वे जान निकाल देगा क्या मेरी?

गौतम हँसते हुए धीरे धीरे चोदना शुरू करते हुए - मामी क्या करू? कच्ची कलियों की चिंख तो सब निकलवा देते है मुझे तो आपके जैसी पुरानी मदमस्त औरतों की चिंखे सुनने में मज़ा आता है..

कोमल - आहहह... साले कमीने.. तूने तो पूरा खोल के रख दिया मुझे.. आअह्ह्ह... केसा मासूम दीखता है पर है पूरा हरामजादा..

गौतम धक्के की स्पीड बढ़ाते हुए - आपने ही कहा था आप मुझे खुश कर दोगी.. आप बोलो चोदना छोड़ देता हूँ मामी..

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कोमल - आहहह... अह्ह्ह्ह.... अब मेरी सुलगती चुत को आराम औऱ मज़ा मिलने लगा है तो छोड़ने की बात कर रहा है तू.. अह्ह्ह्ह... चुपचाप चोद मुझे वरना तुझे मार डालूंगी..

गौतम कोमल के बूब्स मसलकर उसकी चुत में जोर जोर से झटके मारते हुए - अगर पहले पता होता कि आपकी चुत इतनी टाइट है मामी, तो मैं आते ही आपको चोद के सुखी कर देता..

कोमल - तू तो वो मर्द निकला ग़ुगु जिसे जवाँ बूढ़ी सब औरत पाना चाहती है.. मैं तो पागल हो रही हूँ ग़ुगु.. ये कहते हुए कोमल झड़ जाती है..

गौतम - इतनी जल्दी झड़ गई मामी..

कोमल - जल्दी कहा है ग़ुगु आज तक सबसे लम्बा सेक्स है ये मेरा..

गौतम - अभी शुरू हुआ है..

गौतम कोमल को कुतिया बनाके उसकी चुत औऱ गांड पर थूक देता है औऱ अपना लंड वापस उसकी चुत में डाल के चोदने लगता है..
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कोमल - अह्ह्ह्ह... ग़ुगु तू तो घोड़ा है बेटा.. रुकने का नाम ही नहीं ले रहा..

गौतम - आपके ऊपर गुस्सा ही इतना है मामी कि आपको चोद चोद कर ढीला करने का मन हो रहा है..

कोमल - छोड़ ना पुरानी बातों को ग़ुगु.. भूल जा..

गौतम - कैसे भूल जाऊ मामी.. आपने भी दीदी की साइड ली थी उस दिन..

कोमल - ग़ुगु चुदाई के बीच तू क्या वो बातें लेकर आ गया बेटा..

गौतम जानभूझकर अपना लंड चुत से निकालकर कोमल की गांड के छेद पर रखकर झटके से घुसा देता है जिससे उसके लंड का टोपा कोमल की गांड के छेद में घुस जाता है औऱ कोमल वापस चीख पुकार मचाते हुए गौतम से छोड़ने की अपील करती मगर गौतम कसके कोमल को पकड़के उसकी अपील खारिज कर देता है औऱ चिल्लाती हुई अपनी मामी कोमल की गांड में औऱ जोर से झटका मारते हुए अपना आधा लंड अंदर घुसा देता है..

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कोमल की हालात ख़राब थी औऱ वो गौतम को गालिया बकते हुए उससे छुड़ने की कोशिश कर रही थी मगर गौतम की पकड़ से कोमल नहीं छूट पाती औऱ अब गौतम कोमल की गांड अपने आधे से ही चोदने लगता है..

गौतम पीछे से कोमल के गले में हाथ डालकर उसकी एक चूची पकड़ लेता है औऱ दूसरे हाथ से कोमल की जांघ पकड़के उसकी टांग उठा लेता है औऱ कोमल की गांड मारने लगता है..

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कोमल इतनी तेज़ तेज़ गौतम को गाली दे रही थी की उसकी आवाज पुरे घर में गूंज रही थी..

गौतम गांड मारते हुए - मानना पड़ेगा मामी.. आपकी जवान भले ही कड़वी हो मगर आपका बदन रसीला है.. बिलकुल चाशनी जैसा..

कोमल - साले बाज़ारू समझ रखा है क्या मुझे तूने? हरामजादे छोड़ मेरी गांड को.. मादरचोद गांड मत मार..

गौतम - आराम से चोद लेने दो मामी आपकी गांड.. कोनसा मेरे चोदने से आपकी गांड घिसकार छोटी हो जायेगी..

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कोमल - बहुत बड़ी गलती कर दी मैंने तुझे बच्चा समझके.. तू तो सांड है सांड.. पहली बार गांड मरवा रही हूँ वो भी तेरे इस गधे के लंड से.. मेरे आगे पीछे दोनों छेदो को तूने चोद चोद के कुआ बना दिया मादरचोद... आधे घंटे से चोद रहा है कुत्ते औऱ कितना चोदेगा मुझे? तेरा निकलता क्यों नहीं.. मेरी हालत खराब हो रही है..

गौतम कोमल को अपने ऊपर ले लेता है उसकी गांड फिर से चोदते हुए उसकी चुत में ऊँगली करने लगता है..

गौतम - मामी सच बताओ मज़ा आ रहा है या नहीं..

कोमल - इस मज़े के साथ कितना दर्द हो रहा है वो भी बताऊ तुझे साले भड़वे.. इतना कहते ही कोमल का मूत निकल जाता है.. मगर गौतम को फर्क नहीं पड़ता औऱ वो कोमल की गांड चोदता रहता है..

कोमल की गांड के छेद में धीरे धीरे अब गौतम का पूरा लंड जा चूका था औऱ उसे अब पहले से कम दर्द हो रहा था..गौतम जब निकलने वाला हुआ तो उसने कोमल की गांड में से लंड निकालकर चुत में घुसा दिया औऱ मिशनरी में कोमल को चोदने लगा जिससे कोमल का सारा दर्द अब एक नशे औऱ मज़े में बदल गया...

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कोमल - चोद बेटा, ऐसे ही चोद अपनी मामी को.. अह्ह्ह्ह..

गौतम - मज़ा आ रहा है ना मामी..

कोमल - बहुत मज़ा आ रहा है बेटा.. पहली बार मिल रहा है ऐसा मज़ा.. चोद अपनी मामी को..

गौतम - मामी चुत में ही निकाल दूँ ना..

कोमल - नहीं ग़ुगु.. चुत में नहीं..

गौतम कोमल की नहीं सुनता औऱ कोमल की चुत में पूरा माल भर देता है औऱ कोमल के ऊपर उसी तरह लेट जाता है दोनों कुछ देर उसी तरह पड़े रहते है..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम के गाल खिंचकर - अब तो सारी नाराज़गी दूर हो गई ना तेरी? कैसे रंडी बनाके चोदा है मुझे.. शर्म भी नहीं आई तुझे बिलकुल.. अब अपना लंड मेरी चुत से निकल ग़ुगु.. उठ जा मेरे ऊपर से.. वेडिंग हॉल भी चलना है..

गौतम अपना लंड चुत से नहीं निकालता औऱ बोलता है - थोड़ी देर साँप को बिल में ही रहने दो ना मामी..

कोमल - गांड में दर्द हो रहा है अभी भी ग़ुगु.. तुझे मेरी गांड नहीं मारनी चाहिए थी बेटा..

गौतम प्यार से - पहली बार तो दर्द ही होगा मामी.. आप फ़िक्र मत करो अगली बार प्यार से करूँगा..

कोमल - बेटा मैं करने दूंगी तब ना.. अब सिर्फ आगे से एंट्री मिलेगी तुझे पीछे से एंट्री नहीं मिलेगी, पीछे से नो एंट्री है.

गौतम - नो एंट्री में पार्किंग करना मुझे अच्छे से आता है मामी.. अब जाओ तैयार हो जाओ वेडिंग होटल चलते है..

गौतम कोमल के ऊपर से हट जाता है..

कोमल जैसे बेड से खड़ी होती है लड़खड़ाकर फर्श पर गिर जाती है जिसपर गौतम हँसने लगता है..

गौतम - क्या हुआ मामी सहारा चाहिए?

कोमल गुस्से से - कमीने हस क्या रहा है.. इतना बुरा चोदा है ठीक से चल भी नहीं पा रही..

कोमल दिवार का सहारा लेकर खड़ी होती है औऱ लंगड़ाकर धीरे धीरे अपने कमरे में चली जाती है..

गौतम भी नहाने बाथरूम में घुस जाता है..

गौतम नहाकर बाहर आ जाता है औऱ तैयार होकर कोमल के कमरे में घुस जाता है जहा कोमल भी तैयार हो चुकी थी औऱ अपने माथे पर बिंदिया लगा रही थी..

गौतम पीछे से आकर कोमल को बाहों में पकड़ते हुए आईने के सामने - सेक्सबोम्ब लग रही हो मामी.. मन कर रहा है वापस बिस्तर में ले जाऊ औऱ आपके यौवन की बारिश में वापस भीग जाऊ..

कोमल मुस्कुराते हुए गौतम के गाल पर चुम्मा देकर - अपनी इस घोड़ी को अब थोड़ा आराम दे ग़ुगु.. पहले ही तेरे कारण मेरी चाल ढाल सब बिगड़ चुकी है.. चलने में भी दर्द हो रहा है..

गौतम - मैंने पहले ही कहा था आपसे.. पर आप ही नहीं मानी.. अब भुगतो..

कोमल - आराम से ग़ुगु.. मुझसे चला नहीं जा रहा.. कोमल लंगड़ा कर चल रही थी तो गौतम ने कोमल को अपनी बाहों में उठा लिया औऱ घर बंद करके बाहर आ गया औऱ कोमल को कार में बैठा दिया फिर कार चलाकर वेडिंग होटल की औऱ कार चलाने लगा..

चेतन फ़ोन पर - मम्मी आप कहा रह गई.. यहां सब बुला रहे है आपको..

कोमल - बेटा ये ट्रैफिक भी ना.. इस शहर में कहीं आना जाना मतलब ट्रैफिक में फंसना..

चेतन - ठीक है मम्मी कितना समय लग जाएगा आपको आने में..

कोमल - नहीं पता बेटा.. अभी तो किसी मंत्री का काफ़िला आने वाला है उसके ट्रैफिक में रुके हुए है हम दोनों.. आधा घंटा भी लग सकता है..

चेतन - ठीक है मम्मी.. मैं पापा को बता देता हूँ..

कोमल - ठीक है बेटा.. फ़ोन कट हो जाता है..

गौतम - झूठ बोलने में तो उस्ताद हो मामी.. मंत्री का काफ़िला.. हम्म??

कोमल मुस्कुराते हुए - वो सब छोड़ बेटा अब चोद अपनी मामी को.. फिर से मेरी चुत में खुजली हो रही है..

गौतम कार की पिछली सीट पर साडी औऱ पाटीकोट कमर तक उठाकर अपनी टांग चौड़ी करके पीठ के बल लेटी अपनी मामी कोमल के सामने बैठा था.. गाडी रास्ते में सुनसान जगह पर खड़ी थी..

गौतम अपने लोडे पर थूक लगा कर वापस कोमल के अंदर घुस गया औऱ उसे चोदने लगा..

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कोमल - आह्ह.. ग़ुगु आराम से बेटा.. आराम से..

गौतम - क्या हुआ मामी.. अभी तो कह रही थी वापस चुदना है अब सिसकने लगी..

कोमल - बेटा ऐसे चोदेगा तो तेरी माँ भी सिसक सिसक कर रोयेगी.. आह्ह.. तू तो ज़ालिम है..

गौतम कोमल के बाल पकड़कर चुत मारता हुआ - आप तो मस्त हो मामी.. मेरी सारी नाराजगी को अपनी चुत देकर दूर कर दिया आपने..

गौतम ये कहकर वापस मामी की चुत में झड़ जाता है औऱ दोनों अब वेडिंग होटल की तरफ आ जाते है..

कोमल की हालत देखकर सभी लोग कोमल से उसके लंगड़आने की वजह पूछते हैं मगर कोमल बस इसे मोच का नाम देकर सबसे अपना पल्ला छुड़ा लेती है और लंगड़ाती हुई अपने होटल रूम में चली जाती है.. सुमन कोमल की हालत देखकर गौतम की तरफ देखती है और गौतम से इशारों में पूछता है की क्या हुआ?

गौतम जीन्स के ऊपर से अपने हथियार पर हाथ लगाते हुए सुमन को देखकर इशारे से कहता है.. चुद गई मामी..

सुमन गौतम का जवाब सुनकर हंसने लगती है और फिर कोमल का हाथ पकड़ते हुए उसे उसके होटल के कमरे की तरफ ले जाती है..

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वेडिंग होटल मैं सभी मेहमान आ चुके थे और शादी की रस्में पूरे जोर शोर और खुशी उल्लास के साथ निभाई जा रही थी सभी लोग अपनी मस्ती में मस्त शादी के माहौल में मगन थे. संजय और उसका बेटा चेतन और बाकी मेहमान जिन्हे ख़ास तौर पर आमंत्रित किया गया था वह सभी दी गई हुई जिम्मेदारियां को उठाते हुए व्यवस्थाओं का जायजा लेकर इधर से उधर घूम रहे थे और होटल में खाने से लेकर रहने तक अलग-अलग व्यवस्थाओं को देख रहे थे और सभी से ठीक से कार्य करने का आदेश भी सुना रहे थे.

महिलाएं अपने एक अलग माहौल में थी वह एक बड़े से हाल में एक साथ बैठी हुई नाच गाने का प्रोग्राम कर रही थी जहां कुछ महिलाये ढोलक की ताल पर अलग-अलग गीत गा रही थी और हाथ से तालियां बजाते हुए बीच में नाच रही महिलाओं को देखकर उनका हौसला बढ़ाते हुए नाचने को उत्साहित कर रही थी. हाल में चारों ओर कई महिलाएं बैठी हुई थी और बीच में कुछ महिलाएं नाच रही थी नाचते हुए महिलाओं में एक समान भी थी जो ढोलक की ताल पर नाचते हुए अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन कर रही थी.

गौतम अभी-अभी उस हाल की तरफ बढ़ा था कि उसे खिड़की से नाचती हुई अपनी मां सुमन दिखाई दी और उसके कदम अपने आप उसी जगह रुक गए जहां से गौतम सुमन को नाचते हुए देखने लगा. गौतम अपनी नज़रें भर कर अपनी मां सुमन को नाचते हुए देख रहा था और उसकी आंखों में सुमन का यह मनमोहक और मनभावन रूप सुमन के प्रति उसकी काम भावनाओं को और भी प्रबल कर रहा था. गौतम एक प्रेमी की नजरों से आज पहली बार अपनी मां सुमन को देख रहा था सुमन के हिलते हुए उरोज और बाहर निकले हुए नितंब के साथ साथ साड़ी से साफ-साफ दिखाई देती है उसकी चिकनी कमर और उसके चेहरे की हंसी मुस्कुराहट के साथ लहराते उसकी जुल्फे गौतम के दिल पर छुरिया चल रही थी.

गौतम का मन अभी सुमन को अपना बना लेने का हो रहा था मगर इस माहौल में सुमन से अपने प्यार का इजहार करना और उसे अपने दिल की बात बताना गौतम के लिए असंभव था. गौतम अब तक सुमन को अपनी मां के रूप में ही देखता आया था मगर अब वह सुमन को अपनी बीवी या अपनी होने वाली दुल्हन के रूप में देख रहा था. वह खिड़की के बाहर खड़ा-खड़ा अंदर झाँककर सुमन को देखते हुए सोच रहा था कि वह सुमन को अपना बना कर रहेगा और इसके लिए उसे जो भी करना पड़े वह करेगा.

गौतम तब तक सुमन को खिड़की के बाहर खड़ा होकर देखता रहा जब तक कि वह अंदर ढोलक की ताल पर अपनी गांड और चूची हिलाते हुए नाचती रही. नाचने के बाद जब सुमन थक्कर चूर हो गई हो तो नीचे गद्दे पर बैठ गई और पानी पीते हुए अपनी मां गायत्री और भाभी कोमल के साथ ढोलक की ताल पर गीत गाने लगी और बीच में नाचती हुई महिलाओं का उत्साह बढ़ाने लगी.

गौतम अब भी अपनी मां को ही देखे जा रहा था जैसे उसकी नजरों को कुछ और देखने की चाह ही नहीं बची थी. कुछ देर बाद जब सुमन उठकर बाथरूम के लिए जाने लगी तब गौतम भी उसके पीछे-पीछे बाथरुम की ओर चल दिया और सुमन के साथ होटल के कोने में बने लेडिस बाथरूम में घुसते हुए गौतम ने सुमन को पकड़ कर बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया.

सुमन अचानक हुए इस हमले को देखकर चौंक गई थी मगर जैसे ही उसकी आंखों के सामने गौतम का चेहरा आया उसकी आंखों ने राहत की सांस ली और वह गौतम के गाल सहलाकर उसे डांटते हुए बोली..
सुमन - कोई देख लेगा ग़ुगु.. पागल हो गया है क्या तू..
गौतम - पागल तो आपने कर दिया है माँ.. इस तरह अपने चुचे औऱ चुत्तड़ हिला के नाचोगी तो कैसे खुदको कंट्रोल कर पाऊंगा..
सुमन हसते हुए - चल अब तंग मत कर.. बहुत जोर की सुसु आई है.. करने दे..
गौतम साडी के ऊपर सुमन की चुत सहलाते हुए - सुसु क्या होती है माँ? खुलकर बोलो ना मूतना है आपको..
सुमन गोतम का हाथ पकड़ते हुए - ग़ुगु छोड़.. क्या कर रहा है.. कोई भी आ सकता है यहां.. जा यहां से जल्दी.. मुझे जोर की आई है..
गौतम - मेरे साथ ट्रुथ एंड डेयर खेलना पड़ेगा एक बार..
सुमन - रात को जितना खेलना हो खेलना ग़ुगु अभी जा तू यहां से..
गौतम - सिर्फ एक बार माँ..
सुमन आँख मिलाते हुए - ठीक जल्दी खेल..
गौतम और सुमन अपनी नज़रे मिलाकर खेलने लगते हैं जिसमें गौतम जीत जाता है और सुमन फिर से हार जाती है..
सुमन - अच्छा अब बोलो जल्दी.. क्या करना है..
गौतम सुमन की साडी उठाते हुए - कुछ नहीं माँ.. प्यास लगी है बस आपका मूत पीला दो..

इतना कहकर गौतम अपने घुटनों पर बैठ जाता है और सुमन की साड़ी के अंदर घुस जाता है गौतम सुमन की चड्डी नीचे सरकाकर उसकी जांघों के जोड़ पर अपना मुंह लगा देता है और अपनी जीभ से सुमन के नारीत्व को चूसने चाटने लगता है..

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गौतम ने सब इतना जल्दी किया था कि सुमन को उसे रोकने का समय ही नहीं मिल पाया और सुमन गौतम के इशारों पर नाचने के लिए तैयार हो चुकी थी सुमन में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह गौतम को हटा सके या उसे मना कर सके..
गौतम लगातार सुमन की चुत को चाट रहा था जिससे सुमन के सब्र का बांध टूट गया औऱ और वह अपनी चुत से मूतने लगी.. गौतम ने सुमन की चुत से मूत की पहली बूंद आते ही सुमन के जांघो के जोड़ पर अपना मुंह चिपका दिया और अपनी माँ मूत पिने लगा..

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सुमन भी अपने काम भावनाओं को दबाने में सफल नहीं रही और उसकी काम इच्छा गौतम के सामने उजागर हो गई. सुमन गौतम के बाल पड़कर उसके मुंह में ऐसे मूतने लगी जैसे वो बाथरूम में मूत रही हो.
गौतम अपनी मां सुमन की चुत से निकलता हुआ उसका मूत ऐसे पी रहा था जैसे उसे अमृत मिल गया और वह उसकी एक बूंद भी जाया नहीं करना चाहता हूं.. सुमन का सारा मूत पीने के बाद भी गौतम ने उसकी चुत से अपना मुंह नहीं हटाया और वैसे ही उसकी चुत चाटने और चूसने लगा.
सुमन ने भी गौतम को अपनी चुत से तब तक नहीं हटाया जब तक सुमन अपने बेटे गौतम के मुंह में झड़ नहीं गई..

गौतम अपनी मां का मूत पीने के बाद अब सुमन के झड़ने पर उसका नारीत्वपान भी कर चूका था..
गौतम यह सब पीकर अपने घुटनों पर से खड़ा हो गया और अपने सामने शर्म से लाल होकर खड़ी अपनी माँ सुमन को देखकर बोला..
गौतम - आई लव यू सुमन..
सुमन अपनेआप को सही करते हुए - अब जा गौतम.. कोई देख लेगा तो हंगामा हो जाएगा..
गौतम बाहर जाते हुए - जा रहा हूँ माँ.. पर शाम पांच बजे आप होटल की छत पर आकर मिलना.. मुझे कुछ बात करनी है आपसे..
सुमन - आ जाउंगी.. तू जा अब.. बाहर देखकर निकलना.. कोई देख ना ले..
गौतम - कोई नहीं है बाहर आप चिंता मत करो..

गौतम बाथरूम से बाहर निकाल कर वेडिंग लॉन की तरफ आ जाता है और उसके पीछे सुमन कुछ देर बाद बाथरूम से निकालकर उस हाल वापस बैठ जाती है जहां लेडिस का नाच गाना चल रहा था.. सुमन का मन न जाने किस मीठी खुशी का शिकार हो गया था उसे बार-बार गौतम का चेहरा नजर आने लगा था और जो आज गौतम ने उसके साथ किया था वह एक अनोखी घटना थी जिसे याद करके सुमन गौतम की यादों में खोई हुई सोचने लगी थी कि गौतम ने आखिर ऐसी गंदी हरकत उसके साथ क्यों की.. हालांकि उसकी इस गंदी हरकत में सुमन को भरपूर मजा मिला था औऱ वो चाहती थी कि ऐसा मज़ा उसे वापस मिले..

गौतम ने अपनी मां की काम इच्छा तो जगा कर ठंडी पूरी कर दी थी मगर उसके मन में जो काम की आग जगी थी उसे अभी तक पानी नहीं मिल पाया था.. गौतम अपने खड़े हुए लंड को लेकर वेडिंग होटल से लेकर वेडिंग लोन तक इधर से उधर घूम रहा था और किसी ऐसे शिकार की तलाश कर रहा था जिसके साथ वह अपनीहवस औऱ काम इच्छा शांत कर सके..
गौतम ने वेडिंग होटल की दूसरी मज़िल पर कोमल को अपने रूम जाते देखा था वो भी उसके पीछे उसके रूम में चला गया औऱ दरवाजा बंद करते हुए कोमल को बाहों में भरके बिस्तर पर गिर गया..
गौतम ने कोमल साड़ी उठाते हुए उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया औऱ चोदने लगा.. कोमल इस हाल में थी कि उससे ना कुछ बोला जा रहा था ना ही गौतम को रोका जा रहा था वह बस किसी खिलौने की तरह गौतम की बाहों में खेल रही थी. गौतम ने सुबह कोमल कसके चोदा था और ऐसा रगड़ा था कि उसे चला नहीं जा रहा था और अब भी उसे किसी रंडी जैसे अपने नीचे लेटा कर वो रगड़ रहा था. कोमल तीसरी बार चुद रही थी उसे जैसे मज़ा और सजा एक साथ मिल रही थी..
कोमल - कमीने क्यों मेरे पीछे पड़ा है.. मुझसे क्या दुश्मनी है?
गौतम - तुझसे नहीं मामी मुझे तो तेरी चुत से दुश्मनी है.. जब इसे चोद चोद कर भोसड़ा नहीं बना दूंगा मुझे चैन नहीं मिलने वाला..
कोमल - मैंने कब मना किया है तुझे चोदने के लिए ग़ुगु.. पर प्यार से बेटा ऐसे मत रगड़ मुझे.. सुबह से चला भी नहीं जा रहा अब तो लगता है ठीक से उठ भी नहीं पाउंगी..
गौतम - मामी दोदो बच्चे निकलने के बाद भी ऐसी चुत है आपकी जैसे अभी तक बच्चा नहीं हुआ हो.. लगता है मामा दूकान के चक्कर में आपको भूल गए है..
कोमल - तेरे मामा में दम नहीं है बेटा.. तभी तो तेरे आगे घोड़ी बनके झुकी हुई हूँ..

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गौतम कमल को जमके रगड़ता है और आधे घंटे बाद उसके कमरे से निकल जाता है इस बार भी कोमल ने अपने आगे के साथ पिछवाड़ा भी गौतम को सौंप दिया था जिसके साथ गौतम ने अभी-अभी बहुत मजे किए थे. कोमल की हालत इस तरह थी जिस तरह सुहागरात के बाद कुंवारी दुल्हन की होती है.. उसकी बिगड़ी हुई चाल औऱ बिगड़ चुकी थी अब उसके लंगड़ेपन में औऱ लचक आ गई थी.. उसने सबको ये ही बताया था की उसे मोच आई थी..
 
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