जगदीश राय: ओके
.बेटी.। तुम क्या निचोड़ेगी.पहले से तेरे दीदी ने निचोड लिया है इसे.।
आशा: पापा.बहुत रस बचा है इसमे.अभी दिखाती हु.
और आशा तेज़ी से लंड चूसने लगी। पूरे गले तक लेने लगी। जगदीश राय आँखे बंद किये अपने लंड के दर्द को बर्दाष्त कर रहा था। और देखेते ही देखते जगदीश राय का लंड , १० मिनट के भयंकर चूसाई के बाद ,बिलकुल रॉड की तरह खड़ा हो गया।
टट्टो में बहोत दर्द हो रहा था, पर न जाने क्यू, इस दर्द से लंड पर और प्रभाव पड़ रहा था और लंड और कड़क हो चला था। इसके बीच आशा ने गांड में से पूँछ को "फोक" की आवाज से बाहर खीच लिया।
आशा बिना चेतावनी दिए, घूम गयी और सीधे अपनी गांड के छेद में लंड घुसेड दिया। बिना तेल लगाये हुआ गाँड का छेद,में जगदीश राय का दर्दनाक लंड चीरता हुआ घूस गया।
जगदीश राय के आखों से आसूँ निकल गया, पर उसने अपनी चीख़ को रोका।
आशा को भी दर्द हुआ, पर आशा को दर्द से मजा आ रहा था।
आशा : अब दिखाती हु आपके इस लंड को.बहुत चोद रहा था दीदी की चूत को.अब इसका सामना मेरे गांड से है.
जगदीश राय: आह.धीरे बेटी धीरे.
यह कहना मुश्किल हो गया था की कौन मरद और कौन औरत।
आशा एक हाथ से अपने चूत को सहला रही थी और अपनी सूखी गांड लंड पर पटक रही थी। क़रीब चुदाई डेढ़ घन्टे तक चली। आशा 3 बार झड चुकी थी,
जगदीश राय का लंड पूरा लाल हो चूका था। और जो जगदीश राय को डर था वह होने वाला था। उसका लंड झडने के कगार पर था। और झडते वक़्त टट्टो का दर्द वह सह नहीं सकता था।
जगदीश राय: बेटी.रुक.जा.में झडने वाला हु.।मुझे.।दरद.होगा.रुक रुक.।आह.नहीं.आह.ओह।
झगीश राय , इतना ज़ोरो से चीख़ पड़ा के टट्टो-से दर्द का जैसा बम फटा हो। वह पागलो की तरह कापने लगा।। और लंड आशा की गांड के अंदर पिचकारी मारता गया। हर पिचकरी का दर्द एक चीख़ ले आता।
आशा, अपने पापा के ऊपर हंसती जा रही थी। उसे अपने पापा के इस दुर्दशा पर मजा आ रहा था।
जगदीश राय , अभी झड़ना , ख़तम कर ही रहा था की अचानक से दरवाज़ा खूल गया।
दोनो चौक पडे। झडते हुए पापा के ऑंखों के सामने रूम के उजाले में , पतली मैक्सी पहने निशा खड़ी थी।
निशा गुस्से से जगदीश राय और आशा को घूरे जा रही थी।
.बेटी.। तुम क्या निचोड़ेगी.पहले से तेरे दीदी ने निचोड लिया है इसे.।
आशा: पापा.बहुत रस बचा है इसमे.अभी दिखाती हु.
और आशा तेज़ी से लंड चूसने लगी। पूरे गले तक लेने लगी। जगदीश राय आँखे बंद किये अपने लंड के दर्द को बर्दाष्त कर रहा था। और देखेते ही देखते जगदीश राय का लंड , १० मिनट के भयंकर चूसाई के बाद ,बिलकुल रॉड की तरह खड़ा हो गया।
टट्टो में बहोत दर्द हो रहा था, पर न जाने क्यू, इस दर्द से लंड पर और प्रभाव पड़ रहा था और लंड और कड़क हो चला था। इसके बीच आशा ने गांड में से पूँछ को "फोक" की आवाज से बाहर खीच लिया।
आशा बिना चेतावनी दिए, घूम गयी और सीधे अपनी गांड के छेद में लंड घुसेड दिया। बिना तेल लगाये हुआ गाँड का छेद,में जगदीश राय का दर्दनाक लंड चीरता हुआ घूस गया।
जगदीश राय के आखों से आसूँ निकल गया, पर उसने अपनी चीख़ को रोका।
आशा को भी दर्द हुआ, पर आशा को दर्द से मजा आ रहा था।
आशा : अब दिखाती हु आपके इस लंड को.बहुत चोद रहा था दीदी की चूत को.अब इसका सामना मेरे गांड से है.
जगदीश राय: आह.धीरे बेटी धीरे.
यह कहना मुश्किल हो गया था की कौन मरद और कौन औरत।
आशा एक हाथ से अपने चूत को सहला रही थी और अपनी सूखी गांड लंड पर पटक रही थी। क़रीब चुदाई डेढ़ घन्टे तक चली। आशा 3 बार झड चुकी थी,
जगदीश राय का लंड पूरा लाल हो चूका था। और जो जगदीश राय को डर था वह होने वाला था। उसका लंड झडने के कगार पर था। और झडते वक़्त टट्टो का दर्द वह सह नहीं सकता था।
जगदीश राय: बेटी.रुक.जा.में झडने वाला हु.।मुझे.।दरद.होगा.रुक रुक.।आह.नहीं.आह.ओह।
झगीश राय , इतना ज़ोरो से चीख़ पड़ा के टट्टो-से दर्द का जैसा बम फटा हो। वह पागलो की तरह कापने लगा।। और लंड आशा की गांड के अंदर पिचकारी मारता गया। हर पिचकरी का दर्द एक चीख़ ले आता।
आशा, अपने पापा के ऊपर हंसती जा रही थी। उसे अपने पापा के इस दुर्दशा पर मजा आ रहा था।
जगदीश राय , अभी झड़ना , ख़तम कर ही रहा था की अचानक से दरवाज़ा खूल गया।
दोनो चौक पडे। झडते हुए पापा के ऑंखों के सामने रूम के उजाले में , पतली मैक्सी पहने निशा खड़ी थी।
निशा गुस्से से जगदीश राय और आशा को घूरे जा रही थी।