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कुशल का अब अपने आप पर क़ाबू नहीं रहा और वो प्रिया मेम के सिर पर हाथ रखकर उसके मुँह को ऊपर किया और अपने होंठ उसके होंठ से चिपका दिया, प्रिया मेम आऽऽऽऽह कर उठी,
कुशल उसे और ज़ोर से जकड़ के उसके होंठ और गाल चूमने लगा, प्रिया मेम अब भी विरोध कर रही थी, तभी कुशल ने उसकी छातियों पर अपना मुँह घुसेडा और उनको मैक्सी के ऊपर से ही चूमने लगा,
प्रिया मेम: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ धीरे दबाओ ना दुखता है,
अब कुशल जोश में आकर उसकी एक चूचि को ब्लाउस के अंदर हाथ डालकर निकाल लिया और उसे दोनों हाथों से दबाने लगा, वो बोला: आऽऽऽऽऽह क्या मस्त चूची है आंटी आपकी, , मैं हमेशा चाहता था कि ऐसी बड़ी बड़ी चूची दबाऊँ और चूसूँ, अब वो उसकी चूची चूसने लगा, निपल में जीभ भी रगड़ने लगा,
अब प्रिया मेम चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽह मरीइइइइइइइ , उइइइइइइ ,
कुशल अब दूसरी चूची भी ब्लाउस से बाहर निकाला और उसे भी दबाया और चूसा, प्रिया मेम उसकी जाँघ दबाए जा रही थी, कुशल ने मस्ती में आकर उसका हाथ अपने तंबू पर रख दिया, प्रिया मेम ने भी बिना देर किए उसे मूठ्ठी में भर लिया और उसको दबाने लगी, अब कुछ बचा नहीं था छिपाने को,
प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽह मजा आ रहा है मेरी जान

प्रिया मेम बिस्तर पर पीठ के बल लेटीं थी और उसकी चूचियाँ अब मैक्सी के बाहर थी और उनपर कुशल का गीला थूक लगा हुआ था ,
जिसे कुशल चूसने लगा, कुशल के हाथ अब उसकी चूचियों पर आ गए थे , वो बोला: आऽऽऽऽऽह आंटी कितने सॉफ़्ट और वो अब अपनी क़मीज़ उतारा और फिर बेल्ट खोला और पैंट भी उतार दिया , चड्डी में से उसके लौड़े का उभार देख कर प्रिया मेम की बुर गीली होने लगी, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त हथियार है - वो सोची, चड्डी में सामने का हिस्सा थोड़ा सा गीला हुए जा रहा था उसके प्रीकम से,

अब वो उसके ऊपर आया और उसके होंठ चूसने लगा, प्रिया मेम भी अब उसका साथ देने लगी, कुशल ने अपनी जीभ उसके मुँह में डाली और प्रिया मेम उसको चूसने लगी, फिर कुशल ने अपना मुँह हटाया और खोल दिया अनुभवी प्रिया मेम ने अपनी जीभ उसके मुँफ़र्म है आपके दूध, म्म्म्म्म्म चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है, फिर वो उसकी चूचि चूसते हुए उनको दबाने लगा,

प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽह बेएएएएएएटा क्या माआऽर ही डालेगाआऽऽ, बहुत मज़ाआऽऽऽऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽ है, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ,

कुशल अब नीचे आया और उसके चिकने पेट को चूमा और नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा,

प्रिया मेम: उइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽ क्याआऽऽऽऽ कर रहे हो, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ,

अब कुशल और नीचे खिसका और उसने पूरी मैक्सी को खोल दिया, अब सिर्फ एक पेटीकोट ही बचा था उसके शरीर पर, प्रिया मेम ने अपनी क़मर उठाकर उसको मैक्सी निकालने में उसकी मदद की, पेटिकोट में वो बहुत मस्त दिख रही थी, अब उसने उसकी नाभि को जीभ से चाटा और पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसको नीचे करने लगा, प्रिया मेम ने भी पूरी बेशर्मी से अपनी क़मर उठाकर उसे निकालने में पूरी मदद की, वो आज पैंटी नहीं पहनी थी, उसकी जाँघें चिपकी हुईं थीं ,उसकी बुर का थोड़ा सा ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा था, वो उसकी जाँघों को सहलाने लगा और फिर उसकी पेड़ू को सहलाया, प्रिया मेम हम्म कर उठी, अब उसने जाँघों को फैलाया और प्रिया मेम ने इसमे भी सहयोग किया,अब मदमस्त जाँघों के बीच कचौरी की तरह फूली हुई बुर और उसकी फाँक की ग़हरी लकीर साफ़ दिखाई पड़ रही थी और उसके लौड़े ने और प्रीकम छोड़ दिया ,

कुशल अब उसकी जाँघों को चूमने लगा और फिर उसकी बुर को भी नाक डालकर सूँघा वो बोला: आंटी आऽऽऽह क्या मस्त गंध है आपकी बुर की, वो उसे सहलाता रहा,फिर वो उसकी फाँकों को फैलाया और वहाँ के गुलाबी हिस्से को देखा और उसमें जीभ डाला और उसे जीभ से मानो चोदने लगा, प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽऽऽह कर उठी,
अब वो उसे चाटने लगा, प्रिया मेम की सिसकियाँ निकलने लगी, अब उसने उसकी जाँघों को और ऊपर उठाया और उसकी गाँड़ के छेद को देखकर मस्ती से ऊँगली से सहलाया और एक ऊँगली अंदर किया , उसने देखा कि ऊँगली आसानी से अंदर चली गयी, वो अब दो ऊँगली डाला और वो भी आराम से चली गयीं, वो बोला: आंटी जी आपकी गाँड़ बहुत मस्त है और खुली हुई है, क्या अंकल गाँड़ भी मारते थे ?

प्रिया मेम: आऽऽऽंह अच्छा लग रहा है बेटा, हाँ मारते थे,

कुशल : आंटी आपके चूतर तो मुझे भी बहुत पसंद हैं , वो उनको चूमकर बोला और फिर जीभ से गाँड़ भी कुरेदने लगा, प्रिया मेम: आऽऽऽऽऽहाह ,

कुशल मुँह उठाकर बोला: आंटी आज आपकी मारूँगा दूसरे राउंड में ठीक है ना?

प्रिया मेम: आऽऽऽह मार लेना बेटा आऽऽऽऽह अब बुर तो मार पहले हाय्य्य्य्य्य्य्य, बहुत खुजा रही है,

कुशल अब उसने उसकी क्लिट को जीभ से छेड़ा तो वो उछल पड़ी और उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ करके उसके मुँह को हटाई और बोली: वहाँ हमला किया तो एक मिनट में ठंडी पड़ जाऊँगी झड़कर,

कुशल मुस्कुराते हुए उठा और आकर उसके बग़ल में लेटा और उसकी चूचियाँ दबाकर चूसने लगा, अब प्रिया मेम भी उठी और उसके ऊपर आ कर उसके निपल्ज़ को दाँत और जीभ से छेड़कर उसे मस्त कर दी फिर नीचे जाकर उसके पेट और नाभि को चूमते हुए उसकी चड्डी तक पहुँची, उसने वहाँ नाक रखी और प्रीकम को सूँघा और फिर उसकी जीभ से चाटकर मस्ती में आकर बोली: आऽऽऽंब तुम्हारी गंध भी बहुत मस्ती ले आने वाली है बेटा, अब वो उसकी चड्डी निकाली और उसका लौड़ा देखकर बोली: आऽऽऽऽहहहह क्या मस्त हथियार है उगफफ कौन ना पागल हो जाए इसको देखकर, म्म्म्म्म्म्म, कहकर वो उसको पूरी लम्बाई में चुमी और चाटी, फिर उसके एक एक बॉल को भी चूम और चाट कर मस्ती से बोली: उम्म्म्म्म्म्म बहुत मस्त है ये , पुच पुच करके उसको चुमी, अब वो अपनी जीभ लेज़ाकर उसके लौड़े के सुराख़ को चाटी और प्रीकम को खा गयी और फिर अब वो उसके सुपाडे को मुँह में लेकर चूसने लगी,

कुशल अब मस्ती में आकर बड़बड़ाया: आऽऽऽऽऽऽह आंटी आऽऽऽऽऽहहह क्या चूसती हो आऽऽऽऽऽप, वाआऽऽऽऽऽऽऽहहह,
प्रिया मेम अब उसको डीप थ्रोट दे रही थी, कुशल अब कमर उछालकर अपना लौड़ा उसके मुँह को नीचे से चोदने लगा, प्रिया मेम अब मज़े से उसको चूसे जा रही थी,
अब प्रिया मेम उठी और आकर उसके ऊपर बैठी और उसके होंठ चूसने लगी, वो भी उसकी बड़ी बड़ी छातियाँ दबाने लगा, अब वो अपनी कमर उठाई और उसके लौड़े को पकड़कर अपनी बुर के मुँह पर रखी और नीचे दबाकर अपनी बुर में उसको अंदर करते हुए उइइइइइइइ कहकर अपनी कमर को पूरा दबा दी और लौड़े को जड़ तक अपने अंदर कर लिया, अब वो अपनी कमर उछालकर उसे चोदने लगी, कुशल भी नीचे से धक्के मारकर ह्म्म्म्म्म्म कहते हुए मस्तीसे उसका साथ देने लगा,

प्रिया मेम : आऽऽऽऽऽहहह बेएएएएएटा आऽऽऽऽऽऽऽह फाऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइइ बुर,

कुशल : ह्म्म्म्म्म्म आंटी क्या मज़ा आ रहा है, प्रिया मेम की कमर हिले जा रही थी, फिर वो बोली: बेटा अब मैं थक गयी हूँ, तुम ऊपर आ जाओ,

कुशल उसको अपनी बाहों में भरकर उसे लिए हुए ही पलट गया और ख़ुद ऊपर आ गया, अब वो उसकी टाँगों को अपने कंधे पर रखकर बुरी तरह से चोदने लगा , अब तो कमरा प्रिया मेम की आऽऽऽऽऽह उइइइइइइइ ऊम ऊम ऊम की आवाज़ों से भर गया, पलंग की चरमराहट अब अपनी चरम सीमा पर था जो बुरी तरह से हिल रहा था,

प्रिया मेम सोची कि जवान लड़के की चुदाई अलग ही होती है, उफफफफ क्या ताक़त है इस लड़के में, फिर वो चिल्ला कर उइइइइइइइइइ मॉआऽऽऽऽ कहकर झड़ने लगी, कुशल भी ह्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा, अब वो आकर उसकी बग़ल में लेट गया, अब वो प्रिया मेम के गाल चूमकर बोला: आंटी आपको पता नहीं है कि आपने आज मुझे कितना मजा दिया है

कुशल ने प्रिया मेम को लुढ़का कर पेट के बल लिटाया और वो उसके मस्त चूतरों को सहलाया और दबाया , फिर वो उनको चूमने लगा, अब प्रिया मेम ख़ुद ही चौपाया बन गयी और अपनी गाँड़ बाहर कर उसे चोदने का मानो आमंत्रण दी, प्रिया मेम बोली: बेटा थोड़ा सा क्रीम लगा ले, और डाल दे, सच बहुत खुजा रही है,

कुशल मस्त होकर क्रीम लेकर उसकी गाँड़ में और अपने लौड़े पर लगाया और उसके चूतरों को फैलाया और अपने लौड़े को उसके छेद में लगाकर धक्का दिया, अब लौड़ा उसकी गाँड़ में धँसता चला गया, प्रिया मेम आऽऽऽहहह मरीइइइइइइइ चिल्लाई,

कुशल अब मस्ती में आकर उसकी गाँड़ मारने लगा, उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मज़ाआऽऽऽ आऽऽऽऽ रहाआऽऽऽऽऽ है, वो अब पिस्टन की तरह आगे पीछे होकर उसकी गाँड़ मार रहा था प्रिया मेम की चीख़ें निकल रही थी, कुशल हाथ नीचे कर के उसकी चूचियाँ दबाए जा रहा था , जल्दी ही प्रिया मेम भी आऽऽऽंहहह करके अपनी बुर की क्लिट मसलने लगी, फिर उसने कुशल का हाथ पकड़ा और उसे अपनी क्लिट में रगड़ने लगी, कुशल अब ख़ुद उसकी क्लिट रगड़ने लगा और गाँड़ में धक्के भी मारता रहा, जल्दी ही दोनों चिल्ला कर झड़ने लगे,

वो हँसती हुई अपनी मैक्सी उतार दी और उसका भरा हुआ जिस्म ब्रा और पैंटी में देखकर वो मस्त हो गया, अब प्रिया मेम भी उसकी छाती को चूमकर उसके निपल्ज़ को जीभ से चाटी और नीचे उसके पेट और नाभि को चाटते हुए उसकी चड्डी को सूँघने लगी,

उसकी चड्डी में लगे प्रीकम को उसने जीभ से चाटा और फिर उसकी चड्डी निकाल कर उसके बड़े लंड को प्यार से सहलाकर चूमने लगी, उसने चमड़ी पीछे करके उसका सुपाड़ा बाहर निकाला और उसको चाटते लगी

कुशल को लगा कि वो अभी ही झड़ जाएगा , सो उसने उसे अपने ऊपर खींचकर उसके होंठ चूसे और ब्रा का हुक खोलकर उसकी ब्रा निकाल दिया, अब उसके नंगे मोटे दूध को वो पागलों की तरह दबाने और चूसने लगा,

फिर उसका हाथ उसकी पैंटी के अंदर गया और उसके चूतरों को वह मसलने लगा, कितने गोल बड़े नरम चूतर थे , उसकी आह निकल गई,के पेशाब के छेद को चाटने लगी, फिर उसने पूरा सुपाड़ा ही मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी,

अब उसने प्रिया मेम को बोल: आंटी मेरी सवारी कीजिए ना,

प्रिया मेम हँसते हुए उसके ऊपर आ गई और अपनी पैंटी उतारकर उसके ऊपर बैठकर उसका लंड पकड़कर अपनी बुर के छेद में लगाकर अंदर कर लिया और फिर एक ही धक्के में वो पूरा लंड निगल गई, उसके मुँह से हाय्य्य्य्य निकली और बोली: हाऊयय्यय क्या मस्त मोटा लंड है तेरा,

कुशल : हय्य आंटी आपकी फुद्दी तो बड़ी ही टाइट है कसम से,

प्रिया मेम : आह आह ह्म्म्मम्म इतने सालो से चूदी नही हूँ ना इसिलए, पर अब तो मैं रोज़ चुदुंगी इस लंड से, बोल चोदेगा न मुझे,

कुशल - "हय्य मेम मैं तो बचपन से आपको चोदने के सपने देख रहा रहा हूँ, अब तो मैं रोज़ आपकी बुर की चुदाई करूँगा पक्का"

प्रिया मेम भी मस्ती से उसके लंड पर उछलकर चुदायी करते हुए बोली: आह बेटा क्या चोद रहा है, तू तो पक्का चुदक्कड है रे हरामी आह हाय्य्य्य्य्य , और वो ज़ोर से चोदते हुए बोली: फाड़ दे अपनी आंटी की बुर आऽऽझहह क्या लंड है रे तेरा हाय्य्य्य्य्य्य मैं गईंइइइइइइइइ, और वो झड़ने लगी, कुशल भी नीचे से धक्का मारतेहुए बोला: आंटी आह तेरीइइइइइइइइइइइ बुर बड़ी गरम है , ले मेरा माऽऽऽऽऽऽऽल्ल्ल्ल्ल लेएएएएएएएएए , और वो भी झड़ गया,
 
अपनी मम्मी को स्विमिंग क्लास ले जाने का वादा करके कुशल अपने दोस्त करण से मिलने के लिए निकल पड़ा, करण उसका बचपन का दोस्त था, या कहें कि लंगोटिया यार था उसका, करण ने ही कुशल के दिल में सेक्स के प्रति इच्छा जगाई थी, दोनों दोस्त मिलकर अक्सर नंगी तस्वीरे और ब्लू फिल्मे देखा करते थे, करण के पापा तो जब वो 10 साल का था तभी चल बसे थे, अब उसकी मम्मी प्रिया ही उसकी देखभाल की जिम्मेदारी सम्भालती थी, दो माँ बेटे में बड़ा ही प्यार था,
करण अक्सर स्कूल में नंगी तस्वीरे लाया करता था जिसे कुशल और वो मिलकर छुप छुप कर देखते थे, दोनों में बड़ा ही याराना था, मुठ मारना भी दोनों ने साथ ही सिखा था, और कई बार तो साथ में मुठ भी मारी थी,
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कुशल अब करण से मिलने के लिए बाइक से उसके घर की तरफ रवाना हो गया, थोड़ी ही देर बाद कुशल करण के घर पहुंच गया, उसने डोर बेल बजाई तो दरवाज़ा प्रिया मेम ने खोला

प्रिया मेम ने एक बहुत ही सुंदर और झीनी सी स्टाइलिश मैक्सी पहनी हुई थी, प्रिया मेम सच में बहुत ही मस्त बदन की गदराई सी ओरत थी, बड़े बड़े मम्मे एकदम गोल गोल और पूरी तरह से टाइट थे, नीचे उसका सपाट पेट और गहरी नाभि और पतली कमर बहुत ही ग़ज़ब ढा रही थी, उसके नीचे मस्त भरी हुई जाँघें और उसके बीच में फूली हुई बुर का अहसास कुशल को मस्त किये जा रहा था, दरअसल कुशल तो पिछले कई सालो से प्रिया मेम को चोदने वाली नजरो से देख रहा था, पर चूँकि वो उसके बेस्ट फ्रेंड की मोम थी इसलिए वो कभी हिम्मत ही नही कर पाया, कुशल खासकर प्रिया मेम के चुतडो पर फ़िदा था, हाय कितना गज़ब का और उठा हुआ पिछवाडा था प्रिया मेम का, उसकी सेक्सी गांड के तो टीचर्स के साथ साथ स्टूडेंट्स भी दीवाने थे, पर उसके स्ट्रिक्ट नेचर की वजह से उसके पास फटकने की कोई हिम्मत भी नही करता था,

कुशल अपने ख्यालो में खोया हुआ था तभी प्रिया मेम ने उसे उसके ख्यालो से बाहर खीचा और बोली

प्रिया मेम - " अरे कुशल बेटा, कहाँ खोये हुए हो इतनी देर से, अंदर आ जाओ, बाहर अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है"

कुशल - "ओह सॉरी मेम, वो मैं कुछ सोचने लग गया था मेम"

प्रिया मेम - "सोचना बाद में, पहले अंदर आ जाओ, चलो" ये कहकर प्रिया मेम ने कुशल को अंदर आने के लिए कहा, कुशल भी फटाफट अंदर आ गया

प्रिया मेम - "अच्छा कुशल बेटा, आज इतने सुबह सुबह कैसे आना हुआ यहाँ"

कुशल -"मेम वो मैं करण से मिलने आया था, कई दिन हो गये न मिले हुए, तो सोचा कि मिल आऊ"

प्रिया मेम -"अरे पर कुशल तो अभी घर पर है ही नही वो तो कल रात अपने किसी फ्रेंड के यहाँ गया था, तो कल से वहीं है, उसे आने में तो अभी 2 घंटे और लगेगे बेटा"

कुशल -"तो फिर मैं चलता हूँ आंटी, फिर कभी आ जाऊंगा"

प्रिया मेम -"अरे ऐसे कैसे चले जाओगे, इतनी दूर से आये हो, कम से कम नाश्ता तो करके जाओ"
कुशल -"नही मेम कोई बात नही मैं करके आया हूँ नाश्ता घर से"

प्रिया मेम -"देखो कुशल मैं कुछ नही सुनने वाली, नाश्ता तो तुम्हे करना ही पड़ेगा, और इसी बहाने मुझे भी थोड़ी कंपनी मिल जाएगी"

कुशल -"चलो ठीक है मेम, आप कहती हो तो रुक जाता हूँ"

प्रिया मेम -"तुम यहीं बैठो, मैं अभी तुम्हारे खाने के लिए कुछ बनाकर लाती हूँ"

ये कहकर प्रिया मुड़कर किचन की तरफ चली गयी, उसके मुड़ते ही कुशल को प्रिया की बड़ी सी गदराई गांड नजर आ गयी, और सुबह से उसका लोडा जो बगावत पर उतर आया था, वो अब दोबारा इस कातिल नज़ारे को देखकर होश में आने लगा, कुशल टकटकी लगाये प्रिया मेम की मोटी गांड को निहारने लगा,

पर तभी अचानक प्रिया मुड़ी और उसने तुरंत कुशल की नजरो को भांप लिया, कुशल तो बिलकुल सकपका गया, पर प्रिया बिलकुल शांत खड़ी रही और बोली

प्रिया मेम -"सैंडविच चलेगी ना कुशल बेटा"

कुशल -"जी...जी....मेम...चलेगी...." कुशल हकलाता हुआ बोला

कुशल को इस तरह हकलाता हुआ देख कर ना जाने क्यूँ प्रिया के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान सी आ गयी, पर उसने इसे ज़ाहिर नही होने दिया

इधर कुशल मन ही मन सोचने लगा "अबे चूतिये, कहीं तो लंड की बजाय दिमाग से काम लिया कर, साले वो तेरी टीचर होने के साथ साथ तेरे बेस्ट फ्रेंड के माँ भी है, और तेरी भी माँ जैसी ही है,,,,,,,,, पर मैं तो खुद अपनी मोम की ले चूका तो इसकी लेने में क्या हर्ज़ है......अरे नही नही बहनचोद ...अगर उसको थोड़ी सी भनक लग गयी तो यही बुरी तरह गांड कुटाई हो जाएगी........और दोस्ती टूटेगी सो अलग......पर मेरे इस लंड को कैसे समझाऊ, ये तो जब देखो मुंह उठाये खड़ा हो जाता है साला...."

कुशल अपनी दुविधा में फंसा था कि तभी प्रिया मेम हाथो में दो प्लेट्स लिए बाहर आ गयी,

प्रिया मेम -"चलो आओ कुशल बेटा, टेबल पर बैठ जाओ, नाश्ता बिलकुल तैयार है"

अब दोनों लोग आकर टेबल पर अगल बगल बैठ गये और प्रिया कुशल और खुद के लिए नाश्ता सर्व करने लगी, जब वो कुशल को खाना दे रही थी तब वो उसके बिलकुल पास थी और कुशल को उसकी मांसल कलाइयाँ और उसकी बग़लें दिखायी दे रही थी जहाँ से पसीने की मस्त तेज़ गंध आ रही थी, अब वो उत्तेजित होने लगा, तभी वो उसके सामने बैठ गयी और बातें करते हुए खाना खाने लगी, कुशल ने देखा कि उसने बड़े गले की मैक्सी पहनी थी और उसकी बड़ी बड़ी पुष्ट गोलाईयां झाँक रही थीं, उफ़ कितने सुडौल दिख रहे थे उनके गोरे दूध,
प्रिया मेम -" अरे मैं पानी लाना तो भूल ही गयी"

और ये कहकर वो उठ कर फ्रिज के सामने झुक कर पानी की बोतल निकालने लगी, झुकने की वजह से उसकी झीनी सी मैक्सी उसकी गांड की गहरी दरार में फंस गयी, अब तो प्रिया मेम की गांड की मस्त छटा देखते ही बन रही थी, कुशल तो एक टक प्रिया मेम की मस्त गांड को घूरे जा रहा था,

प्रिया मेम को भी अपनी मैक्सी अपनी गांड की खाई में धंसी हुई महसूस हुई तो उसने बड़े ही प्यार से अपने एक हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर धीरे धीरे अपनी फंसी हुई मैक्सी को दरार से निकालना शुरू कर दिया
कुशल तो ये नज़रा देखकर बहुत ही ज्यादा गरम हो गया, उसका लंड अब पुरे उफान पर आ चूका था, और उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका लंड जल्द ही उसकी पेंट को फाडकर बाहर निकल आयेगा,
तभी वो हुआ जिसकी उम्मीद कुशल ने सपने में भी नही की थी,
प्रिया मेम ने बड़े ही प्यार से कुशल की ओर देखा और फिर धीरे धीरे अपने रसीले होठो पर अपनी जीभ को फिराने लगी, और साथ साथ अपनी गांड में से अपनी मैक्सी को जान बुझकर और भी धीरे धीरे निकालने लगी

अब कुशल कोई इतना भी बेवकूफ नही था कि इतना भी ना समझे, अब तो कुशल ने सोच लिया कि आज तो माल पूरा गरम है, आज उसे अपनी बचपन की इच्छा जरुर पूरी करनी चाहिए,

ये सोचकर कुशल ने भी धीरे से अपने लंड पर पेंट के उपर से ही हाथ इस तरह से फिराया कि प्रिया मेम को सारा नजारा आसानी से दिख जाये, वो समझ गया था कि चिड़िया प्यासी है, जल्दी ही जाल में फँस जाएगी,

अब प्रिया मेम पानी की बोतल लाकर उसके साथ दोबारा टेबल पर बैठ गयी, इधर कुशल ने अब प्रिया मेम की फ़िट्नेस की तारीफ़ करनी शुरू की,

वो बोला: आंटी आप तो लगता है कि फ़िट्नेस पर बहुत ध्यान देती हैं, आप तो एकदम फ़िट हैं,

प्रिया मेम अपनी तारीफ़ से ख़ुश होकर बोली: हाँ मैं रोज़ सुबह योगा करती हूँ और व्यायाम भी करती हूँ,

कुशल : तभी तो आप करण की मम्मी नहीं उसकी दीदी लगती हैं, ऐसा बोलते हुए वो उसकी छातियाँ देखते हुए जीभ होंठ पर फेरा और बोला: आप इतनी सुंदर भी तो हैं, कि आप को देखकर कोई भी दीवाना हो जाये,

प्रिया मेम -"अच्छा तुझे मैं इतनी सुंदर लगती हूँ क्या?"

कुशल मन ही मन ख़ुश होकर बोला: आंटी, आप इतनी सुंदर हो आपको तो स्कूल के सब बच्चे भी पसंद करते है, और आपको मा- मतलब पसंद मतलब लाइक करते हैं,

प्रिया मेम : तू अभी मा- क्या कह रहा था?

कुशल : कुछ नहीं आंटी, वो बस ऐसे ही मुँह से निकल गया था,

प्रिया मेम : तू माल बोलना चाहता था क्या?

कुशल : आंटी, सॉरी , वो मेरा मतलब है कि बस ऐसे ही कुछ लड़के बोलते हैं,

प्रिया मेम उसकी आँखों मेंदेखते हुए बोली: तू क्या बोलता है? मैं माल हूँ?

कुशल : नहीं आंटी मैं ऐसे कैसे बोल सकता हूँ, आपको,

अब प्रिया मेम को भी इन बातों में मज़ा आ रहा था और वो गरम हो रही थी, उसने अपनी छातियों को खुजाते हुए कहा: तो क्या मैं बेकार दिखती हूँ? माल नहीं लगती तेरे को?

कुशल का लंड झटके मारने लगा,उसका लंड पूरा खड़ा होकर एक तरफ़ से पैंट में तंबू सा बना लिया था, वो चाहता था कि आंटी उस तंबू को देख ले , वो खड़ा हुआ और बोला: आंटी आप सच में बहुत मस्त माल हो, और वो उसकी आँखो में झाँक कर बोला: अगर मैं अंकल होता तो आपको कभी अकेला नहीं छोड़ता,

प्रिया मेम का ध्यान अपने लंड पर ले जाने के लिए उसने अपने तंबू को दबाया और प्रिया मेम की आँखें उसके तंबू को देखकर हैरानी से फटी की फटी रह गयीं, इस छोटे से लड़के का इतना बड़ा हथियार ? अब उसके निपल्ज़ कड़े हो गए और उसकी बुर में जैसे चिटियाँ चलने लगी , वह कई सालो से चुदीं नहीं थी और उसने बुर में ऊँगली भी काफ़ी दिनों से नहीं की थी, इस लिए उसकी बुर गीली होने लगी, उसका हाथ अपने आप ही बुर के पास चला गया और वो उसे दबाने लगी,

प्रिया मेम को अच्छी तरह से अपने तंबू का दर्शन कराकर कुशल हाथ धोकर आया और आकर प्रिया मेम के पीछे खड़ा हो गया, अब उसने प्रिया मेम के कंधे सहलाना शुरू किया और बोला: आंटी आपके गर्दन की मालिश कर दूँ? मम्मी कहती हैं कि मैं बहुत अच्छी मालिश करता हूँ,

उसका स्पर्श पाकर प्रिया मेम सिहर उठी और बोली: मुझे भी हाथ धोने दे ना, बाद में मालिश कर लेना, अब कुशल उसके कंधों के ऊपर से झुक कर ऊपर से उसकी छातियों के बीच में देख रहा था, और बेशर्मी से मुस्करा रहा था और बोला: आंटी आपके ये तो बहुत मस्त हैं, मुझे लगता है कि मैं इनको छूकर देखूँ कि ये असली हैं या नक़ली?

प्रिया मेम हँसते हुए बोली: चल हट बदमाश कहीं का, कुछ भी बोल रहा है?

जब कुशल ने देखा कि वो ग़ुस्सा नहीं हुई है तो उसने रिस्क लेकर उसके साइड में आकर अपने तंबू को छूकर कहा: आंटी, आप भी इसको ग़ौर से देख रही थी, बताइए ना ये कैसा लगा आपको?

प्रिया मेम हड़बड़ा गई और बोली: चलो हटो मुझे हाथ धोने दो,

कुशल इस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था, उसने और बड़ा रिस्क लिया और प्रिया मेम का उलटा हाथ पकड़कर अपने पैंट के तंबू पर रख दिया और उसके पंजे को अपने पंजे से पकड़कर अपने लंड को दबाने लगा,

प्रिया मेम की सिसकारि निकल गई, वो बोली: आह ये क्या कर रहे हो, करण आ जाएगा ? छोड़ो मेरा हाथ,

कुशल समझ गया कि वो गरम हो चुकी है वो बोला: आंटी, वो तो 2 घंटे बाद आएगा ना , आप इसको सहलाओ ना प्लीज़,

अब उसने अपना हाथ प्रिया मेम की मैक्सी के ऊपर से उसके चुचि पर रखा और हल्के से दबा दिया, प्रिया मेम की बुर तो जैसे मस्ती से पानी ही छोड़ने लगी, अब वो भी थोड़ा बेशर्मी से उसके लंड को ऊपर से नीचे तक महसूस करने लगी, अब वो समझ गयी कि ये लंड बहुत लंबा और मोटा है, और उसे बहुत मज़ा देगा, उधर अब कुशल ने भी अपना दोनों हाथ उसकी छातियों पर रखा और उनको दबाने लगा और ऊपर से ही निपल्ज़ को मसल कर उसने प्रिया मेम के अंदर के औरत को जगा दिया और उसे चुदायी के लिए तय्यार करने लगा,

तभी प्रिया मेम बोली: कुशल हटो एक मिनट ,

कुशल एक अच्छे बच्चे की तरह हट गया और प्रिया मेम उठकर हाथ धोकर आइ और खाना सम्भालने लगी,

कुशल ने झूठे बर्तन हटाने में उसकी मदद की और किचन में अचानक उसको बाहों में लेकर उसके होंठों को चूमने लगा, प्रिया मेम ने थोड़े से विरोध के बाद जैसे सम्पर्पण कर दिया, अब कुशल के हाथ उसकी छातियों से होता हुआ उसके चूतरों तक पहुँचा जिनको वो ज़ोर से दबाने लगा,

प्रिया मेम का हाथ उसके लंड पर पहुँच गया और वह भी उसे मसलने लगी, अचानक प्रिया मेम को होश आया और वह बोली: चलो छोड़ो तुम मेरे कमरे में चलो मैं अभी आती हूँ ,

कुशल अच्छे बच्चे की तरह चुप चाप चला गया, इधर प्रिया भी थोड़ी देर बाद अपने कमरे की तरफ चल पड़ी

प्रिया जैसे ही अपने रूम में आई तो देखा कि कुशल बड़े प्यार से बेड पर बैठा उसका इंतज़ार कर रहा था, प्रिया को एक पल के लिए लगा कि उसके पति भी उसका ऐसा ही इंतज़ार करते थे अक्सर, अपने पति की याद आते ही प्रिया मेम की आँखों में हल्का सा पानी आ गया

मेम को इस तरह से देख कुशल बोला -" क्या हुआ मेम, आप रो क्यूँ रही है, क्या आप ये सब नही करना चाहती, अगर नही चाहती तो मुझे बता दीजिये मैं चला जाऊंगा यहाँ से" यह कहकर कुशल बेड से खड़ा हुआ और बाहर जाने के लिए बढने लगा,

पर तभी प्रिया मेम ने उसे पकड़ा और तुरंत बेड पर साथ लेकर बैठ गयी और खुद अपने मुंह को कुशल की बाँहों में देकर सुबकने लगी

कुशल -"क्या हुआ मेम बताइए ना"

प्रिया मेम -"कुछ नही कुशल, बस तेरे अंकल की याद आ गयी वो भी ऐसे ही अक्सर बेड पर बैठकर मेरा इंतज़ार करते थे, उनके जाने के बाद जो जिन्दगी में जैसे चुदाई वीरान ही हो गयी, पर आज तूने मेरी सोयी हुई वासना को दोबारा जगा दिया, मुझे छोड़ कर मत चले जाना तू भी"

कुशल अब प्रिया मेम को अपनी ओर खींचकर बोला: आंटी प्लीज़ चुप हो जाओ, मैं हूँ ना, अब वो अपने हाथ से उसके गाल को सहला कर उसके आँसू पोंछने लगा, कुशल की नाक में उसके सेंट और उसके बदन की मादक गंध भी समा रही थी, ,वो उसको चुप कराते हुए उसके पेट पर से ले जाकर उसकी चिकनी कमर पर एक हाथ रखा और प्रिया मेम को अपनी ओर खिंचा और गाल सहलाकर बोला: आंटी पहले आप चुप हो जाओ, अब प्रिया मेम की एक चूची उसकी बाँह से पूरी सट गयी थी, उसका सिर कुशल के कंधे पर था, प्रिया मेम की आँखें बंद थीं, उसके होंठ खुले थे मानो कह रहे हों मुझे चूस लो,

कुशल का लौड़ा अब पूरी तरह से सख़्त हो चुका था, वो अब उसके ऊपर झुका और उसकी आँख को चूमा और बोला: आंटी प्लीज़ रोना बंद करो, मैं कुछ ना कुछ करूँगा, फिर वो उसकी दूसरी आँख को भी चूमा , अब वो नीचे आकर उसके गाल चूमा और बोला: मेरे रहते आपको कभी आँसू नहीं बहाना पड़ेगा, फिर वो कसकर प्रिया मेम को अपनी बाँह में भींच लिया और प्रिया मेम भी उसकी छाती में अपना मुँह घुसा दी, अब कुशल उसकी नंगी पीठ को सहला रहा था जहाँ ब्लाउस के नाम पर एक छोटा सा पट्टा भर था, अब वो उसके कंधे को चूमने लगा, प्रिया मेम भी मस्ती में आ गयी थी और उसने कुशल के पैंट में तने हुए तंबू को साफ़ साफ़ देख लिया था और अंदाज़ा कर लिया था कि इसका तगड़ा हथियार है, अपना हाथ प्रिया मेम ने उसकी जाँघ पर रखा जो कि तंबू के काफ़ी पास ही था,
 
कुशल बड़ी ही मेहनत से अपने लंड को अपनी पेंट में ठूंसने की कोशिश कर रहा था पर उसका लंड था कि आज पूरी तरह से बगावत पर उतर आया था, स्मृति भी बड़ी टेंसन में आ चुकी थी कि अगर प्रीती ने कुशल को इस हालत में देख लिया तो ना जाने क्या होगा,

और तभी अचानक प्रीती किचन के अंदर आ गयी

प्रीती के इस तरह अचानक आते ही स्मृति और कुशल बुरी तरह सकपका गये, कुशल ने बड़ी ही फुर्ती से अपने आपको अपनी मम्मी के बदन के पीछे कर लिया और स्मृति अब ठीक उसके आगे थी जिससे प्रीती को कम से कम कुशल का खड़ा हुआ लंड तो नही दिख पा रहा था,

स्मृति - "अरे प्री......प्रीती... बेटा..... , बड़ी .....जल्दी फ्रेश हो गयी तुम तो....... चलो तुम बाहर बैठो, मैं अभी तुम्हारे लिए नाश्ता लगाती हूँ टेबल पर....." स्मृति ने घबराते हुए कहा, क्यूंकि कुशल ठीक उसके पीछे खड़ा था और उसका तना हुआ लंड अभी भी स्मृति की गांड को टच किये जा रहा था,

प्रीती - "क्या हुआ मोम , आप इतनी घबराई हुई क्यूँ हो, और ये कुशल आपके पीछे क्यूँ खड़ा है" प्रीती ने तो ये सवाल पूछ कर उन दोनों पर जैसे कोई बम ही गिरा दिया था"

स्मृति -"नही बेटा, मैं कहाँ घबराई हुई हूँ, वो तो बस गैस के नजदीक होने की वजह से पसीना आ रहा है" स्मृति हकलाते हुए बोली

प्रीती - "वो सब तो ठीक है मोम, पर ये कुशल का बच्चा आपके पीछे छुपकर क्यूँ खड़ा है, और कुछ बोल क्यूँ नही रहा"

कुशल की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो चुकी थी, ये तो स्मृति थी जो किसी तरह सिचुएशन को सम्भालने की कोशिश कर रही थी, वरना अभी तक तो आराम से पकडे जाते,

स्मृति -"कुछ नही प्रीती बेटा , वो मुझे कोई डब्बा चाहिए था, पर वो ऊंचाई पर रखा है न इसलिए कुशल को बुलाया था ताकि वो मेरी हेल्प कर दे उसे उतारने में" स्मृति ने बड़ी सी कुशलता से बचाव करने की कोशिश की

प्रीती -"पर वो आपके पीछे छुपकर क्यूँ खड़ा है, क्यूँ बे कुशल बाहर निकल वहां से, मुझे तुझसे कुछ काम है अपने रूम में"

कुशल -" तू...तू...तू चल........म.म्मम्म ...मैं अभी 2 मिनट में आता हूँ बस" कुशल घबरा कर बोला

प्रीती को अब थोडा शक हुआ कि "आखिर मोम और कुशल दोनों ही इतने घबरा कर क्यूँ बाते कर रहे है, कहीं एसा तो नही कि मेरे उपर जाते ही कुशल और मोम......ओह माय गॉड....... ये कुशल तो बड़ा ही कमीना है, एक मिनट का सब्र नही होता इससे, पर मोम को क्या हुआ,, उसने कैसे उसे करने दिया कुछ मेरे होते हुए भी यहाँ.... मोम तो बड़ी ही छिनाल निकली, अपनी बेटी के घर में होते हुए भी देखो कैसे अपने जवान बेटे के साथ रंगरेलिया मना रही है"

स्मृति -"क्या सोचने लगी प्रीती..... तू...तू चल बाहर बैठ मैं अभी कुशल को डब्बा उतरवाने के बाद बाहर भेजती हूँ"
इधर प्रीती को अब अपनी मोम से थोडी जलन होने लगी थी, कि "आखिर मोम में ऐसा क्या है जो कुशल मेरी बजाय मोम के पीछे पागल है, आज तो मोम और कुशल को सबक सिखा ही देती हूँ"

ये सोचकर प्रीती बोली

प्रीती -"नहीं मोम मुझे अभी कुशल से बात करनी है कुछ इम्पोर्टेन्ट काम है, ये ऐसे बाहर नही आएगा, मैं खुद ही इसे खींचकर बाहर निकालती हूँ"

ये कहकर प्रीती अब धीरे धीरे स्मृति और कुशल की तरफ बढने लगी

इधर कुशल और स्मृति के दिलो की धडकन लगातार बढ़ते ही जा रही थी, उनका चेहरा अब पीला पड़ने लगा था, कुशल की तो डर के मारे हालत पतली हो गयी थी

कुशल मन ही मन सोचने लगा " हे भगवान कहाँ फँस गया, आज तो मैं गया काम से, अगर प्रीती को पता चल गया तो वो पक्का घर में सबको बता देगी और अगर पापा को पता चला तो वो तो मेरी गांड ही तोड़ देंगे और शायद मुझे घर से बाहर भी निकाल दें, हे भगवन आज बचा लो फिर कभी ऐसी गलती नही करूंगा, प्लीज़ ...."\
कुशल और स्मृति अपने अपने मन में भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह आज वो बच जाये, पर प्रीती अब धीरे धीरे उनके करीब आने लगी थी और स्मृति और कुशल के आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा था कि तभी

तभी बाहर गाडी के हॉर्न की आवाज़ आई, प्रीती को एक पल में समझ आ गया कि ये तो पापा की गाडी की आवाज़ है, इसका मतलब पापा आ गये,

स्मृति -" अरे.....अरे...प्प्प्पप....प्रीती....लगता है तेरे पापा....आ गये है.....जा...जा गेट खोल दे जल्दी से......." स्मृति ने कांपते होठों से कहा

प्रीती -"जी मोम......" ये कहकर प्रीती किचन से सीधा स्पीड में बाहर निकल गयी और गेट की तरफ बढ़ने लगी
इधर पीछे से कुशल ने फटाफट अपने लंड को पेंट के अंदर फिट करने की कोशीश की, स्मृति ने पलट कर देखा तो पाया की अभी भी कुशल का लंड पूरी तरह नही बैठा था, क्यूंकि स्मृति के पीछे खड़े होने की वजह से कुशल का लंड अपनी मोम की गांड से छु रहा था

स्मृति को कुशल के लंड पर बड़ा गर्व सा हुआ और प्यार भी आ गया, पर वो जानती थी कि ये वक्त सही नही प्यार जताने का, इसलिए स्मृति ने कुशल के लंड को पकड़ा और उसे फटाक से जोर लगाकर ज़िप के अंदर घुसेड़ने की कोशिश करने लगी

पर ये क्या, स्मृति के स्पर्श से तो लंड फिर से ओकात में आने लगा, ये देखकर स्मृति के होठो पर एक मुस्कान सी आ गयी, और उसने तुरंत लंड को छोड़ दिया

स्मृति -" ते तेरा लंड तो बैठने का नाम ही नही ले रहा"

कुशल -"क्या करूं मोम, आपके हाथो के स्पर्श से अपने आप बड़ा हो रहा है"

स्मृति -"पर अभी सही टाइम नही इसे बड़ा करने का, चल जल्दी से अपनी पेंट खोल कर फिर इसे अंदर डाल ले,
तेरे पापा किसी भी वक्त आ सकते है"

कुशल -"हाँ ये सही रहेगा"

ये कहकर कुशल ने फटाक से अपनी पेंट के बटन खोले और फिर अपनी पेंट निचे करके अपने लंड को पेंट में किसी तरह एडजस्ट करके फिर से पेंट पहन ली,

अब जाकर दोनों के साँस में साँस आया,

स्मृति -"आज तो बाल बाल ही बच गये, वरना शामत आ जाती" स्मृति ने अपने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा

कुशल -"हम्म्म्म सही कहा मोम आपने"

स्मृति -"अच्छा अब चल लगता है तेरे पापा आये है देल्ही से"

कुशल -"चलो मोम"

ये कहकर दोनों माँ बेटे किचन से बाहर आ गये और गेट की तरफ बढ़ चले

प्रीती ने अब तक गेट खोल दिया था, पीछे से अब कुशल और स्मृति भी आ गये,

जैसे ही प्रीती ने गेट खोला तो सामने पंकज और आराधना दोनों खड़े थे, उन्हें वहाँ देखकर प्रीती के साथ साथ कुशल और स्मृति भी चोंक गये,

प्रीती -"अरे आरू दीदी , आप पापा के साथ कैसे??? आप तो कोई फैशन डिजाइनिंग का कम्पटीशन था ना"

इससे पहले कि आराधना कुछ जवाब देती पंकज बिच में ही बोल पड़ा

पंकज -"अरे प्रीती पहले हमे अंदर तो आने दे, देखती नही बाहर अभी भी हल्की हल्की बारिश हो रही है, पूरा भिगाएगी क्या हमें"

प्रीती -"ओह सोरी डैड, आइये"

ये कहकर प्रीती ने गेट पूरा ओपन कर दिया ताकि पंकज और आराधना अंदर आ सके, प्रीती ने गौर किया कि आराधना दीदी थोड़ी बदली या कहे कि गदराई सी नजर आ रही थी, और पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिख रही थी, पर प्रीती ने इस ओर ज्यादा ध्यान नही दिया,

अंदर स्मृति और कुशल भी बस अभी अभी किचन से बाहर निकले थे, और उन्होंने देखा कि पंकज और आराधना अपने गिले बालो को झड़काते हुए अंदर आ गये है, आराधना को पंकज के साथ देखकर उन्हें भी सरप्राइज हो रहा था, पंकज और आरू सोफे पर आकर बैठ गये,

स्मृति - "अरे आप बिना बताये, मेरा मतलब है कि एक कॉल तो कर देते कि आप आ रहे हो, और ये आरू आपके साथ क्या कर रही है, इसका तो कम्पटीशन था ना दिल्ली में????"

पंकज -"अरे इसका कम्पटीशन अचानक कैंसिल हो गया, उधर मेरा जो काम था वो भी पूरा हो गया तो सोचा कि आरू को भी साथ ही ले चलू घर पर"

स्मृति -"चलो ये तो आपने अच्छा किया, वरना ट्रेन में तो परेशान हो जाती बेचारी, पर आपको कम से कम एक कॉल तो कर देना चाहिए था ना"

आराधना ने मन में सोचा -" ये मोम बार बार कॉल के पीछे क्यूँ पड़ी है, जरुर अपने उस आशिक के साथ गुलछर्रे उडाये होंगे मोम ने, जो उस दिन कैसे बुरी तरह इनकी चुद....कर रहा था"

(रीडर्स को शायद याद होगा कि दिल्ली जाने से पहले आराधना ने कुशल को स्मृति की चुदाई करते हुए देख लिया था, बस उसने कुशल का चेहरा नही देखा था इसलिए उसे पता नही था कि स्मृति किसके साथ सेक्स कर थी, उसे तो यही लग रहा था कि जरुर कोई बाहर का आशिक होगा मोम का )

आराधना -"अरे मोम, वो मैंने ही पापा को मना किया था कॉल करने को क्यूंकि हम लोग आपको सरप्राइज देना चाहते थे" आराधना ने बड़ी सफाई से झूठ बोल दिया

स्मृति -"चलो कोई बात नही, अब आप दोनों अपने अपने कमरों में जाके फ्रेश हो जाइये, और अपने सर भी पोंछ लेना वरना जुकाम हो जाएगी"

फिर पंकज अपने रूम में चला गया और आराधना अपने रूम में उपर चली गयी, प्रीती भी आराधना के पीछे पीछे उसके साथ ही चली गयी

इधर निचे कुशल और स्मृति ही बचे थे बस,

कुशल -"मोम, अब हम कैसे कर पाएंगे"

स्मृति -"तू चिंता क्यूँ करता है, निकालेंगे कोई न कोई रास्ता, अब तो मैं भी लायन के बिना नही रह सकती, पर अब हमे घर में थोडा सम्भल के रहना होगा, आज भी बड़ी मुसीबत में फँस सकते थे, अगर प्रीती देख लेती तो"

कुशल -"मोम, शायद उपर वाला भी यही चाहता है कि हमारा रिश्ता ऐसे ही बना रहे तभी तो देखो एन वक्त पर हमे बचा लिया और पापा और आराधना दीदी को भेज दिया"

स्मृति उसकी बात पर बस मुस्कुरा दी

कुशल -"अच्छा मोम, मैं अभी बाहर जा रहा हूँ अपने एक फ्रेंड के पास, दोपहर तक आ जाऊंगा"

स्मृति -"अरे पर बाहर तो बारिश हो रही है, और तूने तो नाश्ता भी नही किया अभी तक"

कुशल -"अरे मोम, बारिश तो लगभग खत्म हो चुकी है, और नाश्ता मैं अपने फ्रेंड करण के घर पर कर लूँगा"

स्मृति -"अरे बेटा, ये करण वही है ना जिसकी मोम तेरी क्लास टीचर है, क्या नाम है उनका"

कुशल -" प्रिया मेम"

स्मृति -"हाँ हाँ प्रिया मेम, चल ठीक है तू जा, पर जल्दी आ जाना घर, मैं लायन का वेट करूंगी, शाम को हमे
स्विमिंग क्लास भी तो जाना है, याद है या भूल गया"

कुशल -"ऑफ़ कोर्स याद है मोम, और आज आप लायन के साथ ही जाओगी स्विमिंग" ये कहकर कुशल ने स्मृति की तरफ एक आँख मार दी, स्मृति भी उसकी और देखकर मुस्कुरा दी [/
 
प्रीती अब फ्रेश होने के लिए अपने रूम की तरफ चली गयी, और स्मृति दोबारा किचन में घुस गयी, प्रीती के जाते ही कुशल बड़ी फुर्ती से खड़ा हुआ और सीधा जाकर किचन के अंदर घुस गया, स्मृति को भी इस बात की भनक थी कि जरुर कुशल प्रीती की जाते ही किचन में आ जायेगा और उससे छेड़ छाड़ करेगा, इसलिए उसने भी आज अपनी अदाओ से कुशल और उसके लंड पर कहर ढाने की तैयारी कर रखी थी, जैसे ही कुशल किचन के अंदर दरवाजे तक पहुंचा, स्मृति जानबुझकर अपनी गांड को मटकाते हुए वाश बेसिन में बर्तन धोने लगी

कुशल ने बड़ी गोर से स्मृति की ओर देखा, स्मृति आज वाकई बहुत ही हसीन और सेक्सी लग रही थी, उसने पिंक कलर की झीनी सी सलवार और कुर्ती पहन रखी थी, जिसमे से उसकी गदराई मोटी गांड साफ नज़र आ रही थी, जो उसकी कमर से कम से कम छह इंच उठी हुई थी, और उसकी तनि हुई चुचियो को देखकर तो ऐसा लग रहा था मानो वो उसे चुदाई का खुला निमंत्रण दे रही हों,

जब स्मृति बर्तन धोने के बहाने अपनी गांड को मस्ती से इधर उधर मटकाती तो ऐसा जान पड़ता था कि स्मृति की गांड में कोई छोटी सी बेअरिंग फिट है जो उसकी गांड को मस्त गोल गोल घुमाती है, भले ही स्मृति की उमर ज्यादा हो पर आज भी वो अपनी अदा से अच्छे अच्छे लंडो का पानी निकलवाने की काबिलियत रखती थी, और कुशल तो उसका बहुत बड़ा दीवाना था, वो अच्छी तरह जानती थी कि बिना छुए भी कैसे अपने जलवो से कुशल के खड़े लंड का पानी निकाल सके,

कुशल तो उस वक्त खुद को जन्नत की किसी परी के पास बैठे किसी राजा महाराजा की तरह महसूस कर रहा था क्यूंकि इस वक्त उसके सामने जो मस्त ख़ूबसूरती थी, उसका रसपान वो पिछले 24 घंटे में कई मर्तबा कर चूका था, पर अब भी उसकी प्यास बुझी नही थी,

कुशल तो बेचारा किचन के दरवाजे पर खड़ा उस मस्त गदराई जवानी को देखकर अपने लंड को पेंट के उपर से ही सहलाये जा रहा था, उसकी आँखे बर्तन धोते वक्त उपर निचे होती उसकी मोम की भारी भारी चुचियो पर भी गडी हुई थी,

इधर जब स्मृति जोर लगाकर किसी बर्तन को धोने के लिए निचे की ओर झुकती तो उसकी नारंगी जैसे दूधिया मम्मे उसकी कुर्ती के गहरे गले से से आधे से भी ज्यादा नुमाया हो जाते , यहाँ तक कि उसकी ब्लैक ब्रा के कप्स भी कुशल को साफ़ साफ़ नज़र आ रहे थे

इधर स्मृति ने वाशबेसिन में बर्तन धोने से पहले अपनी कुर्ती को चुपके से साइड में कर लिया था, जिससे उसकी सुंदर सी गांड उभरकर और भी ज्यादा सामने आ रही थी, कुशल की धोकेबाज़ नज़रे तुरंत उसकी ठुमकती गांड की तरफ उठ गई, उस पर जैसे बिजली सी गिर पड़ी, स्मृति भी जान बूझकर बर्तन धोते समय अपनी कमर और गांड को होले होले हिला रही थी,

कुशल ने तुरंत अपनी नज़रे दूसरी तरफ फेरकर देखने की कोशिश की कि कहीं प्रीती तो नही आ रही पर जब उसने मैदान साफ पाया तो वापस अपनी नज़रे अंदर की तरफ घुमानी चाही,पर इससे पहले कि वो अपना चेहरा घुमा पाता, उस पर एक और गाज गिर पड़ी, स्मृति ने जानबुझकर एक बर्तन नीचे गिरा दिया था और अब वो उसे हटाने के लिए झुकी हुई थी

उसकी पतली सी सलवार उसकी मांसल जांघो से बिल्कुल चिपक गयी थी, और स्ट्रेच होने की वजह से सलवार हल्की सी पारदर्शी हो गयी थी, जिसमे से उसकी ब्लू कलर की छोटी सी खूबसूरत पैंटी कुशल की आंखों के सामने आ गयी, उसकी मोटी सी मांसल गदरायी गांड पर उस छोटी सी पैंटी को देखकर कुशल की सांसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी, उसका चेहरा गरम होने लगा, उसे अपने लंड में तनाव महसूस होने लगा,और जल्द ही उसने विकराल रूप ले लिया जिससे उसके पेंट में उभार बन गया था , स्मृति जानबुझकर बर्तन उठाने में ज्यादा वक्त लग रही थी, उसने कनखियों से कुशल की ओर देखा तो पेंट में उसके लन्ड का उभार उसकी आँखों से छुप नहीं पाया, उसके चेहरे पर एक शातिर हंसी आ गयी

इधर अब कुशल से बर्दास्त करना बिलकुल नामुमकिन हो गया था, भले ही उसे प्रीती के आने का डर था, परन्तु स्मृति इस समय जो नज़ारे उसे दिखा रही थी उसे देखकर उसका सारा डर गायब हो गया और अब उसके दिलो दिमाग पर सिर्फ और सिर्फ स्मृति ही छाई हुई थी,
कुशल अब धीरे धीरे आकर सीधा स्मृति की ठीक पीछे आ गया और फिर उसने बड़े ही प्यार से अपने हाथो को स्मृति के पेट के इर्द गिर्द लपेट दिया,
स्मृति अपने शरीर पर कुशल के हाथ का स्पर्श होते ही सिहर उठी, और हद तो तब हो गई जब कुशल ने अपनी एक उंगली कुर्ती को उठाकर स्मृति की नाभि में ले जाकर उसे गोल गोल घुमाना शुरू कर दिया, मानो वो नाभि में से कोई बहुमूल्य वस्तु निकलना चाह रहा हो

कुशल की इस हरकत से स्मृति तो मज़े से पागल हो गई, उसकी वासना अब चरमोत्कर्ष पर पहुंचने लगी, जब उससे बर्दास्त करना मुश्किल हो गया तो उसने अपने एक हाथ को पीछे ले जाकर कुशल के बालों में लगा दिया जिससे कुशल का चेहरा स्मृति के सिर से खिसककर उसकी गर्दन पर आ पहुंचा,

कुशल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए तुरन्त अपने लबों को स्मृति की गोरी गर्दन से चिपका दिया, और कहते है कि लड़की की गर्दन पर अगर कोई किस करे तो उसकी उत्तेजना कई गुना बढ़ जाती है, और यही स्मृति के साथ भी हुआ

कुशल के होठों के स्पर्श अपनी गर्दन पर पाते ही स्मृति अपने काबू से बाहर होने लगी और उसके मुंह से हल्की हल्की आहें भरनी शुरू हो गई
"उन्ह्ह्ह्ह.ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़. ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस
ओह्हहहहहह आआआ...आआआ...... ओह्ह"
स्मृति की आहों की आवाज़ अब धीरे धीरे बढ़ती ही जा रही थी

इधर कुशल समझ गया था कि अब स्मृति गरम होने लगी है, कुशल ने भी मौके का फायदा उठाते हुए स्मृति की नाभि में फंसी अपनी उंगली निकाली और होले होले नीचे की तरह ले जाने लगा, स्मृति को जैसे कोई होश ही नही था,

कुशल का हाथ स्मृति के गोरे पेट से होते हुए अब उसके सलवार की पट्टी पर आ पहुंचा था, कुशल अभी भी लगातार स्मृति की गर्दन पर किस किये जा रहा था, अब कुशल ने धीरे से अपने हाथ की उंगलियों के इस्तेमाल कर सलवार के नाड़े को ढीला किया और स्लो मोशन में अपना हाथ स्मृति की सुलगती चुत की ओर बढाने लगा, कुशल के हाथ और स्मृति की चुत में अब बेहद ही महीन सी पेंटी का कपड़ा था, कुशल अब अपनी उंगलियों को स्मृति की चुत पर पैंटी के ऊपर से ही फेरने लगा,

इधर स्मृति को अब बर्दास्त करना नामुमकिन हुए जा रहा था,उसने कुशल के बालों से अपना हाथ हटाया और धीरे धीरे कुशल की पेंट की ओर बढ़ने लगी, स्मृति ने अब तुरन्त ही कुशल का लंड उसकी पेंट के ऊपर से ही पकड़ लिया, लंड के अहसास से ही स्मृति बुरी तरह गनगना गई, उसकी सांसे भारी होती जा रही थी, अब उसने एक झटके में ही कुशल के पेंट की ज़िप खोली , उसने महसूस किया कि कुशल ने आज चड्डी नही पहनी थी अंदर, ये जानकर स्मृति की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी, उसने तुरंत ज़िप के अंदर हाथ डाल लिया और उसके तने हुए लंड को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया

अपने हाथों मे अपने बेटे के लंड की अकड़न महसूस करते ही स्मृति का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उसकी चूत की फाँकें बुरी तरह कुलबुलाने लगी, स्मृति ने थोड़ी देर तक कुशल के लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर दबाया और फिर अचानक से उसने कुशल के लंड पर मुठ मारनी शुरू कर दी

अपने लंड पर अपनी मोम की गर्म हथेलियों का स्पर्श पाकर कुशल को लगा जैसे उसका लंड इस गर्मी के अहसास से पिघल ही जायेगा, वासना का तूफान दोनों माँ बेटे के दिलो में आ चुका था,

इधर अब कुशल ने भी तुरंत अब स्मृति की पैंटी के इलास्टिक को ऊपर उठाकर अपनी उंगलिया सीधे उसके चुत से सटा दी, और उसकी चुत के दाने को मसलने लगा,

स्मृति तो इस चौतरफा हमले से बुरी तरह आहें भरने लगी
"उन्ह्ह्ह्ह.ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़. ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"
ओह्हहहहहह, उम्ह्ह्ह्ह्ह लायन ऽऽऽऽऽऽऽ...ऽऽऽऽऽऽऽ.योर बिग डिक माय लायन .स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ सो बिग....ओहहहहहह आआआ
मसल डालो मेरी चुत को....ओह यस..."

सससससहहहहहहह...." इतना कहने के साथ ही जल बिन मछली की तरह स्मृति अपनी भरावदार गांड को कुशल की तरफ ऊचकाते हुए तड़प ऊठी, कुशल की सांसे तेज हो चली, उससे अब रुक पाना बड़ा मुशकिल हुए जा रहा था, वो अब तुरंत अपनी मोम की सलवार को पकड़कर निचे की तरफ सरकाने लगा, स्मृति की भी सांसे तीव्र गति से चलने लगी, धीरे धीरे करके कुशल ने अपनी मोम की सलवार को घुटनों तक सरका दिया, कुशल बहुत ही उतावला हुआ जा रहा था, सलवार के घुटनों तक आते ही स्मृति ने खुद अपने दोनों हाथों से अपनी कुर्ती को थाम लिया और कुशल अपनी मोम की पेंटि को दोनों हाथों की उंगलियों में फंसा कर धड़कते दिल से धीरे धीरे नीचे सरकाने लगा,

जैसे-जैसे पेंटी नीचे सरक रही थी, स्मृति की गोरी गोरी भरावदार गांड दिन के उजाले में चमकने लगी , कुशल की तो हालत ही खराब होने लगी थी , अपनी मोम की गोरी गोरी गांड को देखकर उसका गला सूखने लगा था, उसका पूरा बदन उत्तेजना में सराबोर हो चुका था, कुशल ने धीरे धीरे पेंटी को भी घुटनों तक पहुंचा दिया

ये नजारा देखकर कुशल से रुक पाना नामुमकिन सा हो गया था, और वो तुरन्त अपनी पेंट भी उतारने लगा , कुशल को पेंट उतारता देख स्मृति के बदन में गुदगुदी सी होने लगी और वो कुशल से बोली,

"बेटाआआआ पेंट रहने दे, ज़िप से बाहर निकाल कर ही कर ले, प्रीती कभी भी आ सकती है जल्दी कर"

कुशल तो ये सुनकर आसमान पर ही पहुंच गया कि उसकी मोम खुद उसे चुदवाने के लिए बोल रही है जबकि उसकी बेटी भी अभी घर पर है, कुशल के लिए तो इस बात ने आग में घी का काम किया और उसका लंड और भी विकराल हो गया

"कोई नही आएगा मोम आह"

इतना कहने के साथ ही कुशल ने एक हाथ से उसकी टांग को पकड़ कर उठाते हुए थोडा चौड़ा किया और स्मृति की पीठ पर दबाव बनाते हुए उसे आगे की तरफ झुका दिया, स्मृति आश्चर्यचकित होते हुए कुशल के निर्देश का पालन कर रही थी,

कुशल ने अब बिना वक्त गंवाए अपने लंड के सुपाड़े को उसकी चुत के गुलाबी छेद पर टीकाया और पूरी ताकत से एक करारा धक्का उसकी चुत में लगा दिया, इस धक्के की ताकत इतनी थी कि पूरा का पूरा लंड एक ही बार मे चुत के अंदर समा गया, स्मृति के मुहं से हल्की सी आह निकल गई

दोनों माँ बेटो के शरीर में आनंद की एक तेज़ लहर दोड गयी, उन्हें इस बात से और भी ज्यादा मजा आ रहा था कि वो लोग छुप छुप कर सेक्स कर रहे है,

कुशल ने अब अपने लंड को थोडा पीछे खीचा और फिर से एक दनदनाता हुआ शॉट सीधा स्मृति की चुत में पेल दिया, स्मृति इस करारे धक्के को सम्भाल नही पाई और गिरना से बचने के लिए उसने अपने दोनों हाथो को किचन की पट्टी पर जोर से पकड लिया

कुशल अभी तीसरा धक्का लगाने ही वाला था कि उन दोनों के कान में एक जोरदार आवाज़ गूंजी

"मोम.........आपने नाश्ता लगा दिया क्या, मैं निचे आ रही हूँ खाने" ये प्रीती की आवाज़ थी जो अभी अपने कमरे से बाहर ही निकली थी और वो जोर जोर से चिल्ला कर नाश्ते के बारे में पूछ रही थी, प्रीती अब सीढियों से निचे आने लगी

इधर प्रीती की आवाज़ सुनते ही जैसे स्मृति और कुशल सपने से जागे, स्मृति ने बड़ी ही फुर्ती से अपनी पेंटी और सलवार को उपर चढ़ाया और पलक झपकते ही सलवार का नाडा बांध लिया,

पर यहाँ कुशल को थोड़ी परेशानी हो रही थी,क्यूंकि उसका विकराल रूप लेकर खड़ा हुआ लंड उसकी ज़िप के अंदर जा ही नही रहा था, और वो पेंट खोलकर लंड अंदर करने का रिस्क नही ले सकता था, स्मृति भी उसकी और बड़ी ही डरी हुई नजरो से देख रही थी मानो वो कह रही हो कि जल्दी कर कुशल अपने लंड को अंदर डाल फटाफट

पर कुशल का लंड था कि आज बगावत पर उतर आया था, कुशल जोर लगाकर अपने लंड को अंदर ठूंसने की कोशिश कर रहा था पर इसका कोई फायदा उसे नही हो पा रहा था,

इधर प्रीती के कदमो की एक एक आहट किचन में स्मृति और कुशल की धडकनों को बढाये जा रही थी क्यूंकि कुशल का लंड उसकी पेंट के अंदर जा ही नही रहा था,

और तभी अचानक प्रीती किचन के अंदर आ गयी,
 
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बड़ा ही मस्त और गरम सिन था यारो, स्मृति अपने बेटे कुशल का लंड अपनी चूत से अभी अभी बाहर निकाल कर अपनी बिखरी सांसो को समेटने में लगी थी कि तभी अचानक प्रीती ने कमरे में आकर उसे एक मिनी हार्ट अटैक दे दिया, उसे जबरदस्त पसीना आने लगा, डर के मारे उसकी तो हालत खराब हो रही थी, पर दूसरी तरफ कुशल सिर्फ सिर्फ डरने का नाटक कर रहा था,,,,,

प्रीती - मोम, ये....ये...क्या कर रहे हो आप दोनों...ओह माय गॉड....." प्रीती ने चिल्लाकर कहा

स्मृति - "प्र....प्रीति...बेटी....मैं...वो....तुम...गलत...समझ रही हो....प्लीज़....मेरी बात सुनो...." प्रीति के चिल्लाने से स्मृति और भी ज्यादा डर गयी थी...

प्रीति - मोम... आप अपने बेटे के साथ ही....छी....मैं आपको क्या समझती थी और आप तो क्या निकली.....

स्मृति - नही बेटी...मैं. तो बस...

प्रीती - बस क्या....यहीं ना कि बस आप तो अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में ले रही हो मजे से....

स्मृति - प्रीती.....

प्रीती - मोम.... मैंने तो सपने में भी नही सोचा था कि आप अपने बेटे के साथ ही.....छी....आपको श्रम नही आई........

स्मृति - "क्यों...जब तू इसका लंड लेती है तब तुझे शर्म नही आती..." आखिर स्मृति ने बोल ही दिया...

अब घबराने की बारी प्रीती की थी,

प्रीती - क.क..क.. क्या.....ये...ये...आप क्या बोल रही हो मम्मी

स्मृति - मम्मी की बच्ची...ज्यादा स्मार्ट बनती है क्या मेरे सामने, मुझे सब पता है कि कैसे तू कुशल का लंड अपनी चूत में लेती है...समझी...

प्रीती - तो क्या हुआ....आप भी तो लेती हो...

स्मृति - हाँ तो तू मुझे डराती है कमीनी...

स्मृति की खुन्नस देखकर अब प्रीती की हंसी निकल गयी....उसको हँसता देखकर कुशल भी हंसने लगा...उन दोनों को हँसते देखकर स्मृति को अजीब लग रहा था...आखिर माजरा क्या है...ये उसे समझ नही आ रहा था...तभी प्रीती ने उसकी मुश्किल दूर कर दी...

प्रीती - सोरी मोम आपको डराने के लिए.....वो ये सब मेरा ही आईडिया था....

और फिर प्रीती ने अपनी मोम को सारी बात बतानी शुरू कर दी....और उसने ये भी बता दिया कि कैसे वो आरू और सिमरन के साथ लेस्बियन सेक्स करती है...

स्मृति - तुम लोग तो बहुत एडवांस निकले

प्रीती - ये तो कुछ भी नही मोम, अब मैं आपको एक ऐसी बात बताउंगी जिसे सुनकर आप विशवास नही कर पाओगी...

स्मृति - वो क्या....

प्रीती - मोम, आपको पता है.....आरू दीदी है ना...वो..वो पापा से चुद चुकी है....

स्मृति - क्या.....?????????????

प्रीती - हाँ मोम......

स्मृति - पर कब....कैसे...

प्रीती - दिल्ली में......

स्मृति - मुझे तो लगता था कि सिर्फ मैं और कुशल ही एक दुसरे से सेट है पर यहाँ तो सब लोग ही एक दुसरे से सेट है...हा हा हा

स्मृति को हँसते देखकर कुशल और प्रीती के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी....

प्रीती - मोम आप नाराज़ तो नही ना

स्मृति - नही बेटी...मैं किसी से नाराज़ नही हूँ...अगर मैं कुशल के साथ चुदाई कर सकती हूँ...तो आरू भी अपने पापा के साथ कर सकती है...तू भी कुशल के साथ कर सकती है....मुझे सच में कोई दिक्कत नही है अब....

प्रीती - थैंक्स सो मच मोम.....

कुशल - वाओ...अब तो बस मजे ही मजे है...

स्मृति - ओह हेल्लो मिस्टर...रुको...

कुशल - क्या हुआ मोम...

स्मृति - तुम्हे तो अभी सजा भी मिलनी है..

कुशल - सजा कैसी सजा

कुशल और प्रीती दोनों ही मोम की बातो से चोंक गये

स्मृति - सजा इस बात कि तूने मुझे सब कुछ नही बताया...और ये सब मुझे प्रीती ने बताया...जबकि तुझे सब कुछ बताना चाहिए था मुझे...

कुशल - पर मोम

स्मृति - पर वर कुछ नही , अब तुझे सजा तो मिलेगी ही...

कुशल - अच्छा ठीक है..आप बताओ क्या सजा है...

स्मृति - सजा ये है कि अब तुम चुपचाप नंगे उस सोफे पर जाकर बैठ जाओ और जब तक मैं ना बोलूँ वहां से उठोगे नही

कुशल - पर...चलो ठीक है...मैं बैठता हूँ...और ये कहकर कुशल नंगा ही जाकर सोफे पर बैठ गया....

प्रीती - पर मोम हम तो बस मजाक कर रहे थे...

स्मृति - तू मजाक करेगी मेरे साथ...अभी बताती हूँ तुझे....

ये कहकर स्मृति ने प्रीती को बेड पर पटक लिया और खुद उसके उपर चढ़ गयी....

स्मृति : "अब बोल प्रीती की बच्ची ...करेगी मेरे साथ ऐसा मज़ाक....बोल...''

वो झुककर उसके काफ़ी करीब आ चुकी थी...और इसी बीच अपने को छुड़वाने के लिए प्रीती ने अपनी गांड वाला हिस्सा हवा में उठा दिया..

स्मृति को ऐसा लगा जैसे नीचे से कोई उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा है...क्योंकि दोनो की चूत इस वक़्त एक दूसरे बिलकुल ऊपर थी और अपनी चूत पर वो नमकीन सा दबाव महसूस करते ही उसकी चूत को पसीना आ गया...सेल्फ़ लुब्रीकेशन स्टार्ट हो गया अचानक उसमें से..और उसने भी प्रीती की लचीली कमर को पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ा और उसे ऊपर से ऐसे धक्के मारने लगी जैसे वो उसकी चुदाई कर रही हो.

प्रीती जो अभी तक हंस रही थी, स्मृति के ऐसे झटकों को समझकर वो भी हँसना भूल गयी और सीरियस सी होकर उसने अपनी बहन से पूछा : "म....मोम ....ये...ये ...क्या कर रहे हो.....ऐसा तो....आप मुझे चोदने की कोशिश कर रही हो क्या...पर इसके लिए तो लंड चाहिए ना...प्लीज़ मोम कुशल को परमिशन दे दो ना..फिर वो हम दोनों की चुतो की घिसाई करेगा मस्ती से.......''

प्रीती की बात सुनकर सोफे पर नंगा बैठा कुशल के चेहरे पर भी एक चमक आ गयी, उसे लगा कि अब जरुर उसकी मोम गरम होकर परमिशन दे देगी और उसकी सजा खत्म हो जाएगी पर ये शायद उसकी भूल थी...

क्यूंकि स्मृति ने प्रीती की बात का कोई जवाब नही दिया बस ना में सर हिला दिया......और अपने हाथ धीरे-2 उसने प्रीती की टी शर्ट में डाल दिए और ऊपर की तरफ खिसकाने शुरू कर दिए....

जैसे-2 स्मृति की उंगलियाँ सरककर उपर की तरफ आ रही थी...वैसे-2 प्रीती के माथे पर पसीना बढ़ने लगा था...वो चाहकर भी उसके हाथों को रोक नहीं रही थी , आज से पहले उसने ऐसा कभी भी महसूस नही किया था...भले ही वो अपनी बहन और उसकी दोस्त के साथ लेस्बियन सेक्स का मजा चख चुकी थी पर अपनी मोम के साथ ऐसा करने में उसे बहुत ही ज्यादा उत्तेजना महसूस हो रहा था, एक अजीब सा सेंसेशन हो रहा था उसे अपनी चूत पर...स्मृति की घिसाई से...और अब उसकी उंगलियों की थिरकन से भी उसे गुदगुदी महसूस होने लगी थी..

उसने ब्रा नही पहनी हुई थी...और जल्द ही स्मृति की दोनो हथेलियां उसके नन्हे उरोजों से आ टकराई और उसने बड़े ही प्यार से उसके नन्हे चूजों को अपने हाथों में भर लिया..

प्रीती की तो आँखे बंद हो गयी उस एहसास से जब स्मृति ने होले से अपने हाथ के दबाव से उसकी ब्रेस्ट को दबाया..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....आआआआहह....मोम......ये क्या कर रहे ........उम्म्म्ममममममममम....''

वो शिकायत थी या प्रश्न ...ये तो नही पता चल सका...पर प्रीती के हाथों ने अगले ही पल उपर की तरफ आते हुए टी शर्ट के उपर से ही स्मृति के हाथों को पकड़ लिया..स्मृति को लगा की वो हटाने के लिए कह रही है...पर वो धीरे से बुदबुदाई..

''मोम.....प्लीज़ .......ज़ोर से दबाओ ना......ऐसे....''

और उसने अपने हाथों से स्मृति के हाथों को जोर से दबा दिया...और स्मृति के हाथों के नीचे उसकी नन्ही गोल गोल टमाटर भी उस दबाव में आकर नीचुड़कर रह गयी.

स्मृति तो भभक उठी उसके बाद....उसने प्रीती की ब्रेस्ट को इतनी बेदर्दी से दबाना शुरू कर दिया की उसपर लाल निशान बनते चले गये...पर वो रुकी नही..

प्रीती के नुकीले निप्पल भी स्मृति के जालिम हाथों को रोकने में असमर्थ थे..भले ही वो काँटों की तरह उभरकर ब्रेस्ट की रक्षा कर रहे थे पर ऐसे काँटों से शायद इस वक़्त स्मृति को कोई असर ही नही पड़ रहा था...वो तो उन काँटों को भी बीच-2 में ऐसे मसल रही थी जैसे उनमे से दूध निकलने वाला हो..

दूध तो नही निकला..पर उसकी हर उमेठन से प्रीती की सिसकारियाँ ज़रूर निकल रही थी.

अब तो साफ़ हो चुका था की आज ये दोनो बहने अपनी सारी सीमाएँ लाँघने की तैयारी कर रही है.. कुशल तो बेचारा चुपचाप सोफे पर बैठा उनको देख रहा था, सजा तो भुगतनी ही थी, इसलिए कुछ नही कर सकता था, सिवाय अपने लंड को मसलने के.... और जल्द ही इस गरम नज़ारे को देखकर कुशल का लंड दोबारा से तनकर बुरी तरह खड़ा हो गया....

स्मृति तो अभी तक जैसे किसी नशे मे ये सब कर रही थी...ऐसा नशा जो उसके शरीर को अपने बस में करने में असमर्थ था...वो ये भी भूल चुकी थी की ये उसकी वही छोटी बेटी है जिसने उसके प्यार उसके बेटे कुशल पर डाका डाला ...प्रीती तो अपनी जवानी के उस पड़ाव पर थी जहाँ उसे ऐसी बातों में मज़ा मिलता था जो सैक्स से जुड़ी हो...

जैसे ही स्मृति के हाथों ने उसकी नन्ही ब्रेस्ट को छुआ...वो अपने हाथों के दबाव को उनपर डालकर और ज़ोर से दबाने की गुज़ारिश करने लगी स्मृति से..

उसकी ब्रेस्ट ही उसके शरीर का सबसे सेंसेटिव हिस्सा थी..

इसलिए उसपर हाथ लगते ही वो भी अपनी सुधबुध खो बैठी और फिर शुरू हुआ उस छोटे से कमरे में माँ बेटी के जिस्म के बीच उत्तेजना और सेक्स का वो सिलसिला जो शायद अब थमने वाला नही था.

प्रीती ने एक मादक सी अंगड़ाई लेते हुए अपनी टी शर्ट उतार कर दीवार पर दे मारी..

और उसकी साँवली और नन्ही छातियाँ देखकर स्मृति के मुँह में पानी भर आया.

उसके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे...और उसके निप्पल के घेरे पर भी महीन से दाने उगे हुए थे..स्मृति तो उसके निप्पलों की कारीगरी देखकर अचंभित रह गई...क्योंकि उसके दानों पर भी इतनी महीन कारीगरी नही की थी ऊपर वाले ने...वो बिल्कुल सादे से थे...पर उसकी ब्रेस्ट प्रीती के मुक़ाबले काफ़ी बड़ी थी..प्रीती की तो अभी -2 आनी शुरू हुई थी..पर एक बार जब ये भर जाएगी तो कयामत ढाएगी ये लड़की..

और ये तभी भरेंगी जब इनके उपर मेहनत की जाएगी...ये सोचते हुए स्मृति का सिर उसकी छातियों पर झुकता चला गया..और अपने होंठ,दाँत और जीभ रूपी ओजरों से उसने प्रीती के बूब्स पर मेहनत करनी शुरू कर दी..
सबसे पहले अपनी गर्म जीभ से उसने प्रीती के निप्पल्स को छुआ.... प्रीती ने एक तड़प भरी किलकारी मारते हुए अपनी मोम के सिर को पकड़कर ज़ोर से दबा लिया अपनी छातियो पर...और चीख पड़ी वो..

''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.......आआआआआअहह मोम............. ...उफफफफफफफफफफफफ फफफ्फ़.........क्या फीलिंग है ......माय गॉड ..... आआआआआआआअहह........ज़ोर से सक्क करो ना....मोम............प्लीईईईईस......काट लो इन्हे......जोरों से...............दांतो से..................आआआआआआहह उूुुुउउफ़फ्फ़ एसस्स ऐसे ही................. उम्म्म्ममममममममममममममममममममम आआआआआआआहह मोम..........यार .....कहाँ थी आप ......पहले क्यों नही किया ये सब..................उम्म्म्मममममममममममममम.......''

प्रीती तो भाव विभोर सी हुई जा रही थी अपने शरीर को मिल रहे इतने उत्तेजक मज़े को महसूस करते हुए...उसे पता तो था की ऐसा ही कुछ होता होगा..पर अभी जो कुछ भी हो रहा था उसके साथ वो उसे शब्दों मे व्यक्त कर ही नही सकती थी...ऐसा मज़ा ...इतना आनद....उत्तेजना का इतना संचार...ऐसी तड़प...उसने आज तक सोचा भी नही था कि अपनी मोम के साथ सेक्स के खेल में भी इतना मज़ा आता है.

स्मृति के सिर को कभी एक पर तो कभी दूसरी ब्रेस्ट पर वो लट्टू की तरह घुमा रही थी...उसकी लार से उसने अपनी छातियों की पुताई करवा ली...उसके लंबे और नुकीले निप्पल अपने पुर शबाब पर आ चुके थे...वो बेड पर पड़ी हुई किसी मछली की तरह तड़प रही थी.

उसने अपनी नशीली आँखो से स्मृति की तरफ देखा..और फिर अपने हाथ उपर करते हुए उसने स्मृति की ब्रैस्ट को पकड़ लिया...

स्मृति को तो ऐसा लगा जैसे उसके दिल की धड़कन रुक जाएगी..जब प्रीती ने उन्हे मसलना शुरू किया..

''उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उऊहह ...............आआआआआआअहह प्रीती..................उम्म्म्ममममममममम...... .एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......''

और जैसे ही उसके बूब्स प्रीती की नज़रों के सामने आए, अपने आप ही उसका मुँह उनकी तरफ खींचता चला गया..और उसने एक जोरदार झटके के साथ उसकी बड़ी सी ब्रेस्ट को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया..
किसी बच्चे की तरह वो उसके लम्बे निप्पल का दूध पीने लगी..और स्मृति भी अपनी नन्ही बेटी को अपनी छाती से चिपका कर स्मृति ने एक रस भरी सिसकारी मारकर उसे और अंदर घुसा लिया..

''आआआआआआआआआअहह ओह्ह्ह्ह माय बैबी .................. सकक्क मी......सक्क.....इट ......बैबी.....''

बैबी तो पहले से ही उत्तेजना के शिखर पर थी...अपनी मोम की दर्द भरी पुकार सुनकर वो और ज़ोर से उसके दानों को अपने पैने दांतो से कुतरने लगी...किसी चुहिया की तरह...और हर बार काटने पर स्मृति के शरीर से एक अजीब सी तरंग उठ जाती..जिसे प्रीती सॉफ महसूस कर पा रही थी..

ये खेल दोनों के लिए नया नही था....पर सेक्स भी अजीब तरह का खेल है..जितना खेलो उतना ही ज्यादा मजा आता है...

और यही हो रहा था दोनो के साथ...प्रीती के साथ तो कुछ ज़्यादा ही...वो छुटकी कुछ ज़्यादा ही उछल रही थी इस खेल में ...

इसलिए जब अच्छी तरह से उसने स्मृति की ब्रेस्ट का जूस पी लिया तो वो तुरंत खड़ी हुई और उसने अपनी केप्री भी उतार कर फेंक दी...और अब वो स्मृति के सामने बेशर्मों की तरह पूरी तरह से नंगी होकर बैठी थी..

.और अब वो दोनो नंगी बैठी थी एक दूसरे के सामने.

स्मृति की नंगी ब्रैस्ट देखने में काफी यम्मी लग रही थी , वो प्रीती के मुकाबले काफी बड़ी भी थी,इसलिए स्मृति उनको हाथों में लेकर खुद ही दबाने लगी, और अपनी मोटी छातियों में और उभार ले आई

अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनकर दोनो ने एक दूसरे की ब्रेस्ट को अच्छी तरह से चूस डाला था..पर अब क्या करे ,शायद यही सोचे जा रही थी वो दोनो...

उत्तेजना के नशे में प्रीती को सिर्फ़ वही याद आ रहा था की कैसे वो खुद,जब आरू और सिमरन दीदी उसकी चुत चूस रहे थे तो ज़ोर-2 से आहे भरकर मज़े ले रही थी..

बस,प्रीती ने भी वही ठान लिया..

उसने धीरे से धक्का देकर अपनी मोम को बेड पर लिटा दिया..

पहले तो अपनी उँगलियों को स्मृति की चूत में डालकर प्रीती ने अंदर के टेंप्रेचर और चिकनाई का अंदाजा लिया
और फिर धीरे -२ नीचे झुककर वो अपना चेहरा चूत के करीब ले गयी

स्मृति का शरीर भी काँप उठा,ये सोचकर की उसके साथ क्या होने वाला है अब...उसके होंठ थरथरा कर रह गये, पर उनमे से ना नही निकल पाया...और उसने अपने आप को अपनी छोटी बेटी के सुपुर्द करते हुए अपनी आँखे बंद कर ली. और फिर प्रीती नीचे झुकी और उसने अपने होंठों से उसकी गुलाब जैसी चूत की फेली हुई पंखुड़ियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
पहला नीवाला मुँह में लेते ही उसका स्वाद पता चल गया प्रीती को...जो उसे काफ़ी मजेदार लगा..

और स्मृति तो बिफर गयी अपनी चूत की चुसाई से...

''ऊऊऊऊऊऊऊहह प्रीती.............मेरी ज़ाआाआन्न........प्रीती बेटी ........सस्स्स्स्स्स्सस्स..... ये क्या कर दिया............आआआआहह .....बहुत मज़ा आ रहा है ............उम्म्म्ममममममममम..... एसस्स्स्स्सस्स...... अहह.....''

और फिर तो वो बावली कुतिया की तरह उसकी चूत के उपर लगे अखरोट के दाने पर और संतरे की फाँक जैसी चूत को खाने में लग गयी...

अपनी लंबी और गर्म जीभ को उसने अंदर भी धकेला..उसकी मलाई को चाटा ...चूसा...और अंत में पी गयी.
ऐसा स्वाद लगा उसे उसकी चूत का की वो उसे तब तक चूसती रही जब तक स्मृति झड़ने के करीब नही पहुँच गयी..

और स्मृति को तो अपनी चूत चुस्वाते हुए कुशल ही याद आ रहा था....पर कुशल तो बेचारा सोफे पर बैठा अपना लोडा मसले जा रहा था......,.,. सजा भी बड़ी ही अजीब मिली थी बेचारे को.....एक बार तो स्मृति ने सोचा कि अब कुशल की सजा खत्म करके उसे भी चुदाई के इस खेल में शामिल कर ही लिया जाए पर बाद में उसने सोचा कि थोडा सा इंतज़ार और करवाते है उसे...आखिर कुछ सजा तो मिलनी ही चाहिए उसे....इसलिए स्मृति ने दोबारा से अपना ध्यान कुशल से हटाकर प्रीती की और लगा दिया....

अब तो प्रीती ने और भी जोर से उसकी चूत को चुसना शुरू कर दिया...प्रीती को भी अपने मुंह में अपनी मोम और कुशल के वीर्य का स्वाद साथ साथ महसूस हो रहा था जिसे वो मस्ती से चुसे जा रही थी...इधर स्मृति ने अब अपनी ऊँगली को प्रीती की चूत में घुसा दिया.....और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगी....

कुछ ही देर की मेहनत से दोनों की चुतो ने जोरदार तरीके से पानी छोड़ दिया....और दोनों बेड पर लेटकर हांफने लगी..
 
"आह कुशलआआआ उंह " स्मृति अपनी सलवार के ऊपर से ही कुशल के लंड को अपनी चूत पर महसूस करते हुए सिसक उठी..

उसने अपनी टाँगो को कैंची की तरह कुशल की कमर पर लपेट लिया.कुशल ने भी उसके मम्मो को मसलते हुए अपने होंठो को उसकी सुरहीदार गर्दन पर लगा दिया..और उसके गर्दन को चाटने लगा...स्मृति मस्ती में फिर से सिसक उठी, उसने कुशल के सर के इर्द गिर्द घेरा बना कर उससे अपने से और चिपका लिया..

स्मृति- ओह्ह्ह कुशल हां खा जा मुझे आज पूरा का पूरा आहह.सीईइ कुशल आज मेरी आग को बुझा दो कुशलआआआ..

इधर प्रीती उनका ये मस्त नज़ारा देखकर खुद भी गरम हुई जा रही थी, उसने सोचा कि अभी जाकर उन दोनों को रंगे हाथो पकड ले, पर फिर सोचा कि क्यों ना थोड़ी देर और मस्ती करने दे उन्हें....

इधर कुशल भी अब पूरी तरह मस्त होकर अपनी मोम की चुचियों को मसलते हुए, उसके गर्दन को चूम रहा था..और स्मृति उसके सर को सहला रही थी.और बार बार अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा कर अपनी चूत को सलवार के ऊपर से ही, कुशल के लंड पर दबा रही थी..

"ओह्ह्ह कुशल आहह और ज़ोर से दबाओ ना मेरे मम्मे अह्ह्ह अह्ह्ह्ह." स्मृति सिसकी

फिर कुशल उसकी गर्दन को चूमता हुआ नीचे की ओर आने लगा..और उसके कुरती से बाहर झाँक रहे मम्मो के ऊपरी हिस्से को अपने होंठो में भर कर चूसने के कोशिश करने लगा.

"आह हां चुस्ससो अह्ह्ह्ह कुशल आह" ये कहते हुए, स्मृति ने अपने हाथो को कुशल के सर से हटाया, और फिर अपने दोनो हाथों को नीचे ले जाकार अपनी कुरती को पकड़ कर ऊपर करने लगी..ये देख कुशल जो कि अपना सारा वजन स्मृति के ऊपर डाले लेटा हुआ था, वो अपने घुटनो के बल स्मृति के जाँघो के बीच में बैठ गया..

स्मृति ने अपनी कुरती को पकड़ कर ऊपर करते हुए उतार दिया..और फिर चारपाई पर बैठते हुए अपनी फैशन वाली ब्रा के हुक्स खोल कर उसे भी जिस्म से अलग कर दिया..ब्रा को अपने बदन से अलग करने के बाद, उसने कुशल की ओर देखा, जो उसकी बड़ी बड़ी पकी हुई चुचियों को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था.

" ये आपको बहुत पसन्द है ना, लायन जी... ?" स्मृति ने मुस्कुराते हुए कुशल की ओर देखकर कहा, कुशल ने भी हां में सर हिला दिया

कुशल का लंड अब पूरी तरह तन गया था.जो अब सीधा स्मृति की चूत की फांको के ठीक ऊपर था...कुशल ने भी तुंरत अपने लंड को अपनी पेंट की कैद से आजाद कर दिया

स्मृति ने फिर से कुशल को बाहों में भरते हुए, उसके सर को अपनी चुचियों पर दबा दिया.

"आह कुशल चूसो ईससी अहह" कुशल भी पागलो की तरह स्मृति की चुचियों पर टूट पड़ा..और उसकी एक चुचि को मुँह में भर कर उसके अंगूर के दाने के साइज़ के निप्पल को अपनी ज़ुबान से दबा -2 कर चूसने लगा.. स्मृति ने उसके सर को फिर से सहलाना शुरू कर दिया...

स्मृति: आह चुस्स्स्स लो आह कुशल खा जा मेरे मम्मो को अहह उंह सीईईईई आह हाईए मा ओह हां चुस्स्स्स्स कुशल और ज़ोर ज़ोर सी से चूसो

स्मृति की आवाज़ में अब मदहोशी साफ झलक रही थी..उसका पूरा बदन उतेजना के कारण काँप रहा था.उसके गाल लाल होकर दिखने लगे.फिर स्मृति को अपनी चूत की फांको पर कुशल के लंड का गरम सुपडा रगड़ ख़ाता हुआ महसूस हुआ. स्मृति एक दम से सिसक उठी, उसने कुशल के सर को दोनो हाथों से पकड़ कर ऊपर उठाया, उसका निपल खींचता हुआ कुशल के मुँह से पक की आवाज़ से बाहर आ गया..

स्मृति: (मस्ती में सिसकते हुए) हाय कितने जालिम हो तुम..

स्मृति की आँखें अब वासना के नशे में डूबती हुई बंद हुई जा रही थी, उसने अपनी नशीली अध खुली आँखों से एक बार कुशल की तरफ देखा, फिर उसके होंठो से अपने होंठ सटा दिए, कुशल ने भी स्मृति के नीचे वाले होंठ को अपने होंठो में दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया..
उंह अहह उंघह" स्मृति घुटि आवाज़ में सिसक रही थी..

उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाकार कुशल के लंड पर रखा, और उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया, कुशल के बदन में तेज सरसराहट दौड़ गई, स्मृति ने अपने होंठो को कुशल के होंठो से अलग किया और अपनी टाँगो को फेला कर घुटनो से मोड़ कर ऊपर उठा लिया, कुशल तो जैसे इस पल का इंतजार में था..वो अपने घुटनो के बल स्मृति की जाँघो के बीच में आ गया, और एक झटके में उसकी वो सलवार निकल कर फ़ेंक दी और फिर जैसे ही उसकी नज़र स्मृति की फूली हुई चूत पर पड़ी, उसका लंड फिर से झटके खाने लगा, जो उस वक़्त स्मृति के हाथ में था, स्मृति कुशल के लंड की फुलति नसों को अपने हाथ में सॉफ महसूस कर रही थी...

उसने कुशल के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर दबाया, तो कुशल के लंड का सुपडा उसकी चूत की फांको को फेलाता हुआ, छेद पर जा लगा, स्मृति की चूत की फाँकें कुशल के लंड के सुपाडे के चारो तरफ फैलाते हुए कस गई, अपनी चूत के छेद पर कुशल के लंड का गरम सुपडा महसूस करते ही उसके बदन में मानो हज़ारो वॉट की बिजली कोंध गई हो, उसका पूरा बदन थरथरा गया..

स्मृति की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी, स्मृति ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर कुशल की तरफ देखा, और फिर काँपती आवाज़ में बोली.

स्मृति: कुशल अब पेल दे जोर से, अब और इंतज़ार नही होता

अब कुशल ने धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को स्मृति की चूत के छेद पर दोबारा दबाना शुरू किया, जैसे ही उसके लंड का सुपडा स्मृति की गीली चूत के छेद में थोड़ा सा घुसा, स्मृति एक दम सिसक उठी,

स्मृति - हाय...कुशल बस ज़ोर से घस्सा मारो..और एक ही बार मे मेरी फुद्दी की जड़ तक अपने इस मुसल लंड को पेल दो

कुशल: अगर आपको दर्द हुआ तो ?

स्मृति: मैं सह लूँगी.तुम मारो न धक्का

कुशल ने अपनी पूरी ताक़त अपनी गान्ड में जमा की, और अपने आप को अगला शाट मारने के लिए तैयार करने लगा, स्मृति ने अपने दोनो हाथों से कुशल के बाजुओं को कस के पकड़ लिया, और अपनी टाँगों को पूरा फैला लिया..

स्मृति - कुशल.कुशल फाड़ दो अब...

कुशल ने कुछ पलो के लिए स्मृति के चेहरे की तरफ देखा, जो अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी हुई थी, उसने अपने होंठो को दांतो में दबा रखा था. जैसे वो अपने आप को उस दर्द के लिए तैयार कर रही हो, उसके माथे पर पसीने के बूंदे उभर आई थी, कुशल ने एक गहरी साँस ली, और फिर अपनी पूरी ताक़त के साथ एक ज़ोर दार धक्का मारा

कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया, कुशल का आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार मे अंदर जा चुका था.

कुशल ने अपने लंड की तरफ देखा, जो स्मृति की टाइट चूत के छेद में घुस कर फँसा हुआ था, और फिर उसने एक बार फिर से पूरी ताक़त के साथ झटका मारा, इस बार उसके लंड का सुपाडा उसकी चूत की दीवारो को फैलाता हुआ पूरा का पूरा अंदर जा घुसा

"उन्ह्ह्ह्ह.ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़. ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"
ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह कुशलऽऽऽऽऽऽऽ...कुशलऽऽऽऽऽऽऽ. कुशल.स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ.कुशल...." स्मृति ने दर्द से छटपटाते हुए अपने हाथों से कुशल के बाजुओ को इतनी कस के पकड़ा कि उसके नाख़ून कुशल के बाजुओ में गढ़ने लगे, कुशल को अपने लंड के इर्द गिर्द स्मृति की टाइट चूत की दीवारे कसी हुई महसूस हो रही थी, उसके लंड में तेज गुदगुदी सी होने लगी,

दोनो थोड़ी देर वैसे ही लेटे रहे, कुशल अब धक्के लगाने को उतावला हो रहा था, पर स्मृति ने उसकी कमर में अपनी टाँगो को लपेट रखा था, जिसकी वजह से कुशल हिल भी नही पा रहा था, कुछ लम्हे दोनो यूँ ही लेटे रहे, अब स्मृति को अपनी चूत में अजीब सी सरसराहट होने लगी, अब उसे मज़ा आने लगा था, और उसने अपनी टाँगो को जो कि उसने कुशल की कमर पर कस रखी थी, को ढीला कर दिया, जैसे ही कुशल की कमर पर स्मृति की टाँगों की पकड़ ढीली हुई, कुशल ने अपना आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार में स्मृति की चूत से बाहर खींचा, और फिर से एक झटके के साथ स्मृति की चूत में पेल दिया,
धक्का इतना जबरदस्त था कि स्मृति का पूरा बदन हिल गया
"आह शीईइ कुशल उंह धीरे उन्ह्ह्ह्ह.ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़. ओहहहहहह हँ ओहहहहहहह हमममम"
ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह कुशलऽऽऽऽऽऽऽ...कुशलऽऽऽ" स्मृति ने फिर से अपने पैरो को कुशल के चुतड़ों के ऊपर रख कर उसे अपनी तरफ दबा लिया

जब उसे अपनी चूत की दीवार पर कुशल के लंड के सुपाडे की रगड़ महसूस हुई तो वो एक दम से मस्त हो गई, फिर थोड़ी देर रुकने के बाद स्मृति ने कुशल को धीरे से कहा

"कुशल अब धीरे से बाहर निकालो.मुझे कुछ देखना है" ये कहते हुए उसने फिर से अपने पैरो की पकड़ ढीली की और कुशल ने घुटनो के बल बैठते हुए धीरे-2 अपने लंड को बाहर निकालना शुरू किया, फिर से वही मज़े की लहर स्मृति के रोम-रोम में दौड़ गई, उसे कुशल के लंड का सुपाडा अपनी चूत के दीवारो पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस हो रहा था

"ओह्ह कुशल मेरी फुद्दि आह आह बहुत मज़ा आ रहा है..ओह्ह उम्ह्ह." स्मृति बोली

कुशल ने जैसे ही अपना लंड स्मृति की चूत से बाहर निकाला, तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई, उसका लंड स्मृति के चूत से निकल रहे कामरस से सना हुआ था
फिर स्मृति ने अपनी बाहों को खोल कर कुशल को आने का इशारा किया
कुशल उसके ऊपर झुक गया, स्मृति ने उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसके आँखो में झाँकते हुए बोली "मैं तुझसे बहुत प्यार करने लगी हूँ कुशल,मुझे छोड़कर मत जाना कभी" और फिर दोनो के होंठ फिर से आपस में गुथम गुत्था हो गए, फिर से वही उम्ह्ह आहह उन्घ्ह की आवाज़े उनके मुँह से आने लगी

प्रीती भी इस कामुक रासलीला को देखकर बुरी तरह गरमा चुकी थी,,,,,

कुशल का लंड अब अपनि मोम की चूत की फांको पर रगड़ खा रहा था, कुशल भी मस्ती में उसके होंठो को चूस्ता हुआ उसके निपल्स को अपनी उंगलियों से भिचते हुए उसकी चुचियों को दबा रहा था, स्मृति की चूत में कुलबुली सी होने लगी, वो नीचे से अपनी गान्ड को हिलाते हुए कुशल के लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट करने की कोशिश कर रही थी

थोड़ी देर के बाद अचानक से कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत के छेद पर अपने आप जा लगा, स्मृति का पूरा बदन एक दम से थरथरा गया, उसने अपने होंठो को कुशल के होंठो से अलग किया और फिर कुशल की आँखो में देखते हुए मुस्कुराने लगी,फिर उसने अपने आँखे शरमा कर बंद कर ली, उसके होंठो पर मुस्कान फेली हुई थी..

कुशल ने भी बिना देर किए, धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को स्मृति की चूत के छेद पर दबाना शुरू कर दिया..

"उंह कुशल सीईईईई अहह बहुत माजा आ रहा है..." स्मृति बोली

कुशल के लंड का सुपाडा स्मृति की चूत के छेद और दीवारो को फेलाकर रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बढ़ने लगा, स्मृति के बदन में मस्ती के लहरे उमड़ रही थी, उसका पूरा बदन उतेजना के कारण काँप रहा था, उसकी चूत की दीवारे कुशल के लंड को अपने अंदर कस कर निचोड़ रही थी

धीरे-2 कुशल का पूरा लंड स्मृति की चूत में समा गया, स्मृति ने सिसकते हुए कुशल को अपनी बाहों में कस लिया और उसकी टी-शर्ट ऊपर उठा कर उसकी पीठ को अपने हाथो से सहलाने लगी

"आह कुशल करो ना उंह आ सीईईई आह कुशल मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.."

कुशल ने स्मृति के फेस को अपनी तरफ घुमाया, और फिर अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया, स्मृति ने अपने होंठो को खोल दिया, कुशल ने थोड़ी देर स्मृति के होंठो को चूसा, और फिर अपने होंठो को हटाते हुए, उसकी जाँघो के बीच में घुटनो के बल बैठते हुए, अपनी पोज़िशन सेट की, और अपने लंड को धीरे-2 आगे पीछे करने लगा
कुशल के लंड के सुपाडे को स्मृति अपनी चूत की दीवारो पर महसूस करके एक दम मस्त हो गई, और अपनी आँखें बंद किए हुए अपनी चुदाई का मज़ा लेने लगी

"अह्ह्ह्ह कुशल हाईए मेरे फुद्दि आह मारो और ज़ोर से मार आह फाड़ दो अह्ह्ह्ह ऑश"

धीरे-2 कुशल अपने धक्कों की रफतार को बढ़ाने लगा, पूरे रूम में स्मृति की सिसकारियो और बेड के हिलने से चर-2 की आवाज़ गूंजने लगी, स्मृति पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, स्मृति की चूत उसके काम रस से भीग चुकी थी, जिससे कुशल का लंड चिकना होकर स्मृति की चूत के अंदर बाहर होने लगा था, स्मृति भी अपनी गान्ड को धीरे-2 ऊपर की ओर उछाल कर चुदवा रही थी..

"हाई ओईए अहह मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह कुशल बहुत मज़ा आ रहा है.आह चोदो मुझे अह्ह्ह्ह और तेज करो सही.मैं झड़ने वाली हूँ आह उहह उहह उंघह ह कुशल ममैं गाईए अहह.." स्मृति धीरे धीरे आहे भर रही थी

कुशल के जबरदस्त धक्को ने कुछ ही मिनट में स्मृति की चूत को पानी -2 कर दिया था, उसका पूरा बदन रह-2 कर झटके खा रहा था, कुशल अभी भी लगातार अपने लंड को बाहर निकाल-2 कर स्मृति की चूत में पेल रहा था, स्मृति झड़ने के बाद एक दम मस्त हो गई थी, उसकी चूत से इतना पानी निकाला था कि, कुशल का लंड पूरा गीला हो गया था

अब स्मृति अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी थी,और लंबी -2 साँसे ले रही थी, स्मृति ने अपनी आँखें खोल कर कुशल की तरफ देखा, जो पसीने से तरबतर हो चुका था, और अभी भी तेज़ी से धक्के लगा रहा था,अब रूम में सिर्फ़ बेड के चर्मार्ने से चू-2 की आवाज़ आ रही थी..जैसे -2 कुशल झटके मारता, बेड हिलता हुआ हल्की हल्की चू-2 की आवाज़ करता, स्मृति बेड के हिलने की आवाज़ सुन कर शरमा गई, और अपने फेस को साइड में घुमा कर मुस्कराने लगी.

कुशल: (अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए) क्या हुआ.?

स्मृति: (मुस्कुराते हुए) कुछ नही...

कुशल: फिर मेरी तरफ देखो ना.

स्मृति: नही मुझे शरम आती है...

कुशल ने अपने दोनो हाथों से स्मृति के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया, पर स्मृति ने पहले ही अपनी आँखे बंद कर ली, उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान फेली हुई थी, कुशल ने स्मृति के होंठो को अपने होंठो में लेकर चुसते हुए अपने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी और फिर कुछ ही पलो में उसके लड में तेज सुरसुरी हुई, उसका लंड स्मृति की चूत में झटके खाने लगा, और फिर वो स्मृति के ऊपर निढाल हो कर गिर पडा, स्मृति और कुशल दोनों एक साथ झड़ कर शांत हो चुके थे,

स्मृति - आई लव यू कुशल

कुशल - ई लव यू टू मोम

स्मृति - मोम नही स्मृति कहो मुझे

कुशल - आई लव यू टू माय स्मृति

स्मृति और कुशल अभी लेटे लेटे लम्बी लम्बी सांसे ले रहे थे कि तभी अचानक प्रीती ने जोर से कमरे को दरवाज़ा खोल दिया और अंदर आ गई

प्रीती को अंदर देखकर स्मृति की तो सिट्टी पिट्टी गुम हो गई

क्या गज़ब का सिन था, स्मृति और कुशल बिलकुल नंगे बदन बेड पर लेटे थे, स्मृति की चूत से उसका और कुशल का मिला जुला पानी निकलकर बेड को गिला कर रहा था, और प्रीती साइड में खड़ी स्मृति को घुर रही थी...

सिन गरमा गया है दोस्तों, आपको क्या लगता है अब क्या होगा.....
 
प्रीती - देख कुशल देख, इस खूबसूरत बदन को चोदने के लिए तो लोग खून करने को भी तैयार हो जाए, और तू है कि ....

कुशल - नह.....न...नही प्रीती...मुझे मजबूर मत कर...

अब तो प्रीती का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ चूका था, और उसने वो बोल दिया जो शायद वो बोलना भी नही चाहती थी....

प्रीती - क्यों नही चोदना चाहता तू मुझे.... क्या कमी है मुझमे.... और क्या खास बात है मोम में जो तू मुझ जैसी जवान लड़की को छोडकर उसके पीछे पागल हुआ पड़ा है...बोल..

प्रीती की बात सुनकर कुशल बुरी तरह चोंक गया, साथ ही आरू और सिमरन भी अपने माथा पीट बैठे कि इस लडकी ने गुस्से में ये क्या बक दिया...

कुशल को समझ ही नही आ रहा था कि उसकी बहन को उसका ये राज़ कैसे पता चल गया, अब क्या होगा, सोच सोचकर उसका दिमाग भन्ना गया था,

कुशल - ये.....ये... क्या बकवास कर रही है....तू.....

प्रीती - मैं कोई बकवास नही कर रही.... तू मोम को चोदता है ये बात मुझे पता है....

कुशल - क...क....क्या...नही ऐसा कुछ नही है...तू ये सोच भी कैसे सकती है....

प्रीती - ज्यादा नाटक करने की जरूरत नही है....मुझे सब पता है...

कुशल - क्या पता है तुझे

प्रीती - यही कि तू मोम को कई दिनों से चोद रहा है....

कुशल - नही ये सब झूट है...तेरे पास क्या सबूत है.......कि...

प्रीती - कमीने तुझे सबूत चाहिए ना....तो ठीक है, मैं अभी तेरी उस गस्ती मोम के पास जाकर उसी से पूछ लेती हूँ......और फिर पापा को भी बता दूंगी सब...." ये सब बोलकर प्रीती नंगे बदन ही बाहर जाने के लिए बढ़ी.....

आरू और सिमरन को भी समझ नही आ रहा था कि आखिर ये लडकी कर क्या रही है...

पर इससे पहले कि प्रीती दरवाज़ा खोल पाती, कुशल जल्दी से बेड से खड़ा हुआ और भागकर प्रीती को पकड़ लिया....

प्रीती - छोड़ मेरा हाथ, तुझे सबूत चाहिए ना....मैं लाकर देती हूँ तुझे सबूत...

कुशल - ओके..ओके... मैं मानता हूँ मैंने मोम के साथ सेक्स किया है... तुझे उनके पास जाने की जरुरत नहीं है.....प्लीज़ प्रीती पापा को ये सब मत बताना..वरना वो मुझे घर से निकाल देंगे

प्रीती - ठीक है मैं उन्हें नही बताउंगी, पर एक शर्त पर...

कुशल - क्या

प्रीती - तुझे अभी इसी वक्त मुझे चोदना होगा....

कुशल - नही यार मैं ये नही कर सकता....प्लीज़ मेरी मजबूरी समझ

प्रीती - ठीक है तो फिर मैं जा रही हूँ...

पर इससे पहले की प्रीती मुड पाती कुशल ने उसे एक झटके में खिंच कर अपनी बाँहों में लिया और झट से उसके होटों को अपने होटों की कैद में ले लिया... दोनों एक प्रगाढ़ चुम्बन में लीन हो गये.....कुशल जोर लगाकर प्रीती के गुलाबी होठों का रसपान कर रहा था...लगभग 2 मिनट तक दोनों एक दुसरे के होठो को चूसते रहे....

प्रीती - वाह, ये हुई ना बात, अब बाकी का काम भी कर ही डालो...

कुशल - यार प्रीती मेरी मजबूरी है कि मैं चाहते हुए भी तुझे नही चोद सकता....

प्रीती - ऐसी क्या मजबूरी है जो तू मुझे नही चोद रहा है...

कुशल - वैसे भी तुझे मेरे और मोम के बारे में पता चल ही चूका है तो तुझे बताने में कोई हर्ज़ नही... तो सुन क्यों मैं तुझे चाहते हुए भी नही चोद सकता....

प्रीती - हाँ बता........ इधर आरू और सिमरन भी फ़ोन पर चिपके उनकी बाते सुन रही थी....

कुशल - असल में आज जब मैं और मोम स्विमिंग क्लास से वापस घर की तरफ आ रहे थे तो मेरे मुंह से गलती से निकल गया था कि मैं तुझे चोद चूका हूँ....

प्रीती - क्या....इसका मतलब मोम को पता है कि तू मेरे साथ सेक्स करता है...

कुशल - हाँ...पर इस बात से मोम बहुत ही ज्यादा सेड हो गयी थी...और नाराज़ भी.... और उन्होंने मुझे कसम दी कि मैं उनकी मर्ज़ी के बिना उनके अलावा किसी भी और लड़की को नही चोद सकता.....

प्रीती - ओह तो इस वजह से तू मुझे नही चोद रहा...

कुशल - हाँ, मेरी इच्छा तो बहुत ज्यादा है कि मैं तुझे अभी यहीं पटक कर चोद दूँ, पर यार मोम की कसम जो रखी है है..........

प्रीती - ह्म्म्म.....ये तो बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है.

कुशल - अब तू ही बता मैं कैसे मोम की कसम तोड़ दूँ...

प्रीती काफी देर सोच विचार करके बोली..

प्रीती - हाँ वैसे एक आईडिया है मेरे पास

कुशल - वो क्या

प्रीती - देख मोम ने तुझे बाकि लडकियों के साथ सेक्स करने के लिए मना किया है पर उनके खुद के साथ तो मना नही किया ना.....

कुशल - ऑफ़ कोर्स नोट

प्रीती - तो तू एक काम कर, तू अभी मोम के कमरे में जा और उनकी फुद्दी में अपना लंड घुसा कर उन्हें चोद दे

कुशल - पर इससे तुझे क्या फायदा होगा...

प्रीती - सुन तू जब मोम के कमरे में जाये तो दरवाज़ा हलका सा खुला छोड़ देना, और तू जब मोम की बुर में अपना लंड घुसाकर उन्हें पेल रहा होगा तो चुपके से कमरे के अंदर आ जाउंगी और तुम दोनों को रंगे हाथ पकड़ने का नाटक करूंगी...

कुशल - फिर

प्रीती - फिर मैं पहले मोम को थोडा सा डरा दूंगी पापा के नाम से, और फिर मैं उन्हें मजबूर कर ही दूंगी कि वो तुझे मुझे चोदने की परमिशन दे ही दे

कुशल - ह्म्म्म, आईडिया तो तेरा ठीक है पर थोडा सा मुश्किल लग रहा है...

प्रीती - कुछ मुश्किल नही है, अब तू नीचे जा और मोम पूछे तो बोल देना कि हम तीनो लडकियां सो चुकी है, और फिर तू अपना काम शुरू कर देना...ठीक है ना..

कुशल - ह्म्म्म, ठीक है मैं जाता हूँ...

कुशल अब धीरे से गेट खोल कर निचे की तरफ चल दिया....और प्रीती भी अपने कपडे पहनने लगी.....

.....................................................

कुशल जब निचे जा चूका तो प्रीती झट से आरू के कमरे में चली गई...

प्रीती - दीदी, मैं कुशल को निचे ले जा रही हूँ...मैं...

आरू - हाँ हमने सब सुन लिया.. पर देखना कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाये..और लेने के देने ना पड जाये..

सिमरन - अरे आरू हम तो देने के लिए ही तो तैयार बैठी है.....हे हे हे..

सिमरन की बात सुनकर सबके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई..

प्रीती - अच्छा दीदी अब मैं जाती हूँ...शायद निचे कार्यक्रम शुरू हो गया होगा....

........................

इधर अब कुशल स्मृति के रूम में पहुंच चूका था, स्मृति ने जब कुशल को अपने रूम में देखा तो वो चोंक गयी

स्मृति - अरे कुशल, तू इतने रात गये यहाँ क्या कर रहा है........तुझे पता हैं ना कि आज रात हम कुछ भी नही कर सकते , जा जाकर अपने रूम में सोजा

कुशल - मोम, मुझे बिलकुल भी नींद नही आ रही है...प्लीज़ थोड़ी देर अपने पास सोने दो ना....प्लीज़...

स्मृति - नही कुशल, समझा कर यार, उपर तीन तीन लडकियाँ सो रही है, अगर कोई निचे आ गई तो,

कुशल - नही मोम, मैं अभी उन्हें देखकर आया हूँ, वो तो गहरी नींद में सो रही है सब...

स्मृति - नही मुझे ये ठीक नही लग रहा

कुशल - अच्छा ठीक है, माँ, मैं आपको चोदुंगा नही, बस थोड़ी देर आपके पास सोकर वापस चला जाऊंगा...

स्मृति - नही तू कुछ ऐसी वैसी हरकत करेगा जरुर

कुशल - नही मोम, पक्का प्रॉमिस, मैं कुछ नही करूँगा...

सच तो ये था कि स्मृति भी कुशल को देखकर अब गरम हो चुकी थी

स्मृति - चल ठीक है फिर आजा, पर जल्दी ही वापस उपर चले जाना...

कुशल - ठीक है मोम...

ये कहकर स्मृति वापस बेड की तरफ चल दी, कुशल ने बड़ी ही होशियारी से गेट को इस तरफ बंद किया कि उसमे थोड़ी सी जगह रह जाये, ताकि प्रीती आराम से उन दोनों की रासलीला देख सके....

स्मृति - चल अब चुपचाप सोजा

कुशल - नही मोम, हम दोनों एक ही कम्बल में सोयेंगे

स्मृति - पर....चल ठीक है आजा सोजा...

स्मृति भी कुशल के साथ एक ही कम्बल में ही लेट गयी, पर आज की रात क्या होने वाला था इसकी भनक उसको बिलकुल भी नही थी

स्मृति और कुशल एक साथ सो तो गये पर वो दोनों एक दुसरे के बिलकुल करीब लेटे हुए थे, और उपर से स्मृति के जिस्म से बार बार रगड खाने से कुशल के शरीर में एक अजीब सी लहर उठ रही थी जिसकी वजह से उसके सोये लंड में अब थोड़ी थोड़ी हरकत भी होने लगी थी,

कुशल - मोम, क्या आप मेरे उपर आकर सों सकती हो, प्लीज़

स्मृति - नही नही, अगर मैं तेरे और करीब आई तो फिर तो तू मुझे चोदे बिना नही मानेगा

कुशल - प्लीज़ मोम, मैं प्रॉमिस करता हूँ कि आपकी मर्ज़ी के बिना आपको नही चोदुंगा...

स्मृति - पर मैं कितनी भारी हूँ ना....

कुशल - नही आप कोई भारी वारी नही हो, मेरे लिए तो आप फुल की तरफ हल्की हो बिलकुल

स्मृति - चल चल रहने दे, ज्यादा मक्खन ना लगा अब मुझे, सोती हूँ मैं अभी, तभी तुझे पता चलेगा मैं कितनी भरी हूँ....

स्मृति ने कह तो दिया पर उसे भी नही पता था कि उसके इस तरह कहने का कुशल पर क्या असर पड़ेगा खासकर कुशल के लंड पर, क्यूंकि अब कुशल का लंड एक झटके में पूरी तरह तनकर उसकी पेंट फाड़ने को तैयार खड़ा था, कुशल की सिट्टी पिट्टी गुल हो चुकी थी ये सुनकर

अब स्मृति भी धीरे धीरे मुड में आ चुकी थी और वो अब अपने कुशल के सामीप्य का सुख लेना चाहती थी , अब स्मृति धीरे से कुशल के शरीर के उपर आकर लेट गयी, पर जैसे ही वो कुशल के जिस्म के उपर पेट के बल लेटी अगले ही पल उसकी आँखे आश्चर्य के मारे फ़ैल गयी, क्यूंकि उसकी सलवार के उपर कुशल का खड़ा हुआ लंड बुरी तरह से धंसने की कोशिश कर रहा था,

स्मृति के जिस्म में तो एक तेज़ सरसराहट दौड़ गयी, और साथ ही कुशल भी अजीब से सुख की अनुभूति कर रहा था, तभी अचानक ना जाने स्मृति को क्या सुझा और उसने एक झटके में कुशल के होटो पर अपने होठ सटा दिए पर अगले ही पल वापस भी पीछे खीच लिए,

कुशल तो समझ ही नही पाया कि क्या हुआ, पर इतना साफ था कि उसे ये बहुत ही ज्यादा पसंद आया, इधर स्मृति को लगा कि शायद उसने जल्दबाजी कर दी, उसने तो खुद कुशल को मना किया था आज की रात कुछ भी करने के लिए,

इसीलिए स्मृति ने अपना मुंह घुमाया और कुशल के बदन से निचे उतरने लगी कि तभी अचानक कुशल ने उसे पकड़कर वापस अपने शारीर पर खीच लिया और अगले ही पल उसने ज़ोरदार तरीके से स्मृति के होठों को अपने होटों के कब्ज़े में ले लिए और उन फूलों का रसपान करने लगा,

थोड़ी देर बाद जब वो अलग हुए तो स्मृति बोली - कुशल बेटा, अब नही रहा जाता, मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ, तू भी मुझे अपना प्यार दिखा ना

कुशल - मैं भी आपसे बहुत बहुत प्यार करता हूँ मोम

ये कहकर कुशल ने स्मृति को पलट कर खुद उसके उपर लेट गया

स्मृति अब कोई बात करके समय नही गवाना चाहती थी..वो फिर से कुशल के होंठो को चूसने लगी. इस बार उसने कुछ देर कुशल होंठो को चूसने के बाद, अपने होंठो को अलग कर दिया..और कुशल के सर को अपनी गर्दन पर झुकाते हुए बोली.

स्मृति: कुशल मुझे प्यार करो ना.मुझे किस करो. मेरे बदन के हर हिस्से को चुमो, चाटो..खा जाओ मुझे..

कुशल जैसे ही स्मृति के ऊपर आया.स्मृति ने अपनी टाँगे खोल ली, जिससे कुशल की टाँगें उसकी जाँघो के दरमियाँ आ गई.और उसका तना हुआ लंड उसके पेंट में से स्मृति की सलवार के ऊपर से उसकी चूत से जा टकराया..
 
प्रीती - क्या हुआ सो गये क्या...

कुशल - नही....

प्रीती - तो क्या कर रहे हो...

कुशल - कुछ नही बस सोने की कोशिश कर रहा हूँ...

प्रीती - क्यों इतनी जल्दी....

कुशल - इतनी जल्दी कहाँ है, 11 बज चुके है...

प्रीती - पर तुमने तो मुझसे कुछ प्रोमिस किया था ना....

कुशल - प्रोमिस कैसा प्रोमिस

प्रीती - इतनी जल्दी भूल गए या भूलने का नाटक कर रहे हो

कुशल - नही मुझे याद नही तुम कौनसे प्रॉमिस की बात कर रही हो, मैंने तो तुमसे कोई प्रॉमिस नही किया.....

प्रीती - क्यों याद नही, आज दोपहर में लंच के टाइम पर तुमने मुझे मेसेज किया था कि आज रात..." प्रीती को अब सच में गुस्सा आ रहा था.....

कुशल - आज रात क्या..

प्रीती - तू ऐसे नही मानेगा... तूने मुझसे वादा किया था कि आज रात मेरी चूत मारेगा तू, क्यों याद आया या भूल गया....

कुशल प्रीती की इस तरह की भाषा से एक बार चोंक गया पर फिर मेसेज किया

कुशल - सोरी प्रीती, वो तो बस मैंने यूँ ही मजाक में कर दिया था....

प्रीती को अब बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था, और आये भी क्यों ना, उसने तो आज रात के लिए ना जाने क्या क्या सपने सजाये थे और कुशल उसके सपनों पर पानी फेरने वाला था......

प्रीती - मजाक, कैसा मजाक....

कुशल - सॉरी यार पर मैं वो सब नही कर सकता

प्रीती - क्या मतलब नही कर सकता

कुशल - मतलब मैं तुझे नही चोद सकता

प्रीती ने जब उसका ये रिप्लाई पढ़ा तो उसके गुस्से का पारा बिलकुल चढ़ गया.... उसने झट से पहले आरू को मेसेज किया कि - दीदी, मैं अभी कुशल के रूम में जा रही हूँ....वो पता नही क्यूँ मुझे चोदने से मना कर रहा है.... मैं अभी उसके पास जाकर उसे मनाती हूँ... और हाँ मैं आपको कॉल करके फ़ोन चालू रख रही हूँ ताकि आप दोनों हमारी बाते सुन सको....हो सका तो मैं थोड़ी देर में उसे लेकर इस रूम में आ जाउंगी... तब तक आप वेट करो... और ये मेसेज करके प्रीती गुस्से में खड़ी हुई और सीधा कुशल के रूम की तरफ बढ़ गयी....

कुशल की आज किस्मत ख़राब थी कि उसने रूम भी अंदर से लॉक नही कर रखा था, इसलिए प्रीती ने जोर से दरवाजे को धकेला और झल्लाती हुई अंदर आकर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया, कुशल उसे अचानक अपने कमरे में देखकर सकपका गया, गुस्सा उसके चेहरे पर साफ नज़र आ रहा था,

कुशल - प्रीती....तू,,,,तू यहाँ क्यों आई है...

प्रीती - मैं यहाँ क्यों आई हूँ... साले कुत्ते अगर तेरे लंड में दम नही तो मुझे पहले ही बता देता.... कम से कम मैं तेरा इंतज़ार तो नही करती.......

कुशल - देख प्रीती... आराम से बात कर... ऐसे गाली गलोच करना मुझे पसंद नही...

पर प्रीती तो अब जैसे गुस्से से लाल हो चुकी थी....

प्रीती - आराम से.... माय फूट......साले अगर तू मुझे नही चोद सकता तो बता दे..मैं किसी और लंड का इन्तेजाम कर लुंगी....

प्रीती की बात कुशल के साथ साथ फ़ोन पर आरू और सिमरन भी सुन रहे थे, उन्हें भी यकीं नही हो रहा था कि प्रीती ऐसी बाते भी कर सकती हैं

कुशल - देख प्रीती ....यार मैंने सॉरी तो बोल दिया...अब क्यों गुस्सा हो रही है....प्लीज़ सॉरी

प्रीती - मुझे तेरा सॉरी नही चाहिए..

कुशल - तो क्या चाहिए

प्रीती - तेरा ये लंड चाहिए मुझे

और ये कहकर प्रीती कुशल के बिलकुल नजदीक आ गयी और उसके पजामे पर से ही उसके लंड को मुट्ठी में भर लिया... प्रीती की हथेली में आते ही लंड तो अपनी ओकात में आना शुरू हो गया...

प्रीती - ये देख तेरा लंड भी कैसे मेरी फुद्दी में घुसने के लिए तड़प रहा है, अब मुझे और मत तडपा... और जल्दी से अपना ये मुसल लंड मेरी चूत में पेल दे...

कुशल - नही प्रीती..मैं ये नही कर सकता..

प्रीती ( उसके लंड को जोर से दबाते हुए ) - पर क्यों नही कर सकता...

कुशल - अब तुझे कैसे समझाऊ कि क्यों मैं तुझे चाहते हुए भी नही चोद सकता..

प्रीती - नही, लगता है तुझमे दम ही नही जो मेरे जैसी मस्त फुद्दी को चोद सके, क्यूंकि इतनी गर्म चूत को चोदने की हिम्मत सिर्फ एक मर्द में ही हो सकती है, और तू तो नामर्द है कुत्ते...

प्रीती का इतना कहना था कि कुशल ने जोर से खिंच कर एक थप्पड़ प्रीती के गाल पर लगा दिया..

कुशल - क्या बोली साली कुतिया, मुझे नामर्द बोलती है, अगर मेरा बस चलता ना तो अभी तुझे नंगा करके तेरी चूत को फाड़ देता अपने लंड से, और इतनी बुरी तरह चोदता कि तू जिंदगी भर मुझसे चुदवाने के लिए तडपती....साली रंडी...

प्रीती - हाँ तो मैं भी तो यही चाहती हूँ... चोद क्यों नही देता मुझे, दिखा दे मुझे कितनी मर्दानगी है तुझमे...

कुशल - नही मैं तुझे नही चोद सकता...

अब प्रीती के सब्र का बाँध टूटता जा रहा था, क्यूंकि कुशल तो पिघलने के लिए तैयार ही नही था....इधर आरू और सिमरन जो फ़ोन पर उनकी बाते सुन रहे थे, उन्हें भी समझ नही आ रहा था कि आखिर कुशल प्रीती को चोद क्यूँ नही रहा,

कुशल अब चुप हो गया, पर प्रीती इतनी जल्दी हार मानने वाली नही थी... उसने अपना सबसे खतरनाक दांव चल दिया...
और पलक झपकते ही प्रीती ने अपना नाईट गाउन उतारकर फ़ेंक दिया... प्रीती ने अंदर कुछ नही पहन रखा था...

अब प्रीती बिलकुल मादरजाद नंगी खड़ी थी, कुशल की आंखे तो ऐसे खूबसूरत हुस्न को देखकर चुन्धियाँ ही गयी..... और उसका लंड अब उसके पजामे में बिलकुल तनकर खड़ा हो गया...

प्रीती - देख कुशल देख, इस खूबसूरत बदन को चोदने के लिए तो लोग खून करने को भी तैयार हो जाए, और तू है कि ....

कुशल - नह.....न...नही प्रीती...मुझे मजबूर मत कर...

अब तो प्रीती का गुस्सा सातवे आसमान पर चढ़ चूका था, और उसने वो बोल दिया जो शायद वो बोलना भी नही चाहती थी....

प्रीती - क्यों नही चोदना चाहता तू मुझे.... क्या कमी है मुझमे.... और क्या खास बात है मोम में जो तू मुझ जैसी जवान लड़की को छोडकर उसके पीछे पागल हुआ पड़ा है...बोल..

प्रीती की बात सुनकर कुशल बुरी तरह चोंक गया, साथ ही आरू और सिमरन भी अपने माथा पीट बैठे कि इस लडकी ने गुस्से में ये क्या बक दिया...

बड़ी अजीब सी स्तिथि हो गयी दोस्तों... प्रीती नंगे बदन अपने भाई के कमरे में खड़े होकर ये पुच्छ रही थी कि आखिर वो उसे छोडकर उनकी मोम को क्यों चोदता है....सिचुएशन गरमा गयी है...

आपको क्या लगता है अब क्या होगा......
 
कुशल अब सच में एक अजीब सी स्तिथि में फंस चूका था, एक तरफ वो अपनी मोम को वादा कर चूका था कि अब वो उनकी मर्ज़ी के बिना किसी और लडकी की चूत की तरफ देखेगा भी नही और दूसरी तरफ उसकी इच्छा थी कि उसे प्रीती की कोरी मलाईदार चूत से हाथ भी ना धोना पड़े, अजीब उहापोह में फंस चूका था बेचारा, पर अब तो वो अपनी मोम की कसम भी खा चूका था तो वादा तो उसे निभाना ही पड़ेगा, यही सब सोचते सोचते ना जाने कब स्मृति और कुशल वापस घर पहुंच चुके थे,

आरू, प्रीती और सिमरन अपने रूम में बैठी बाते कर रही थी, जब उन्होंने निचे गाडी की आवाज़ सुनी तो उन सबके चेहरे पर एक शातिर मुस्कान आ गयी...

सिमरन - ये ले आरू, आ गया बकरा अपनी अम्मा को चोदकर, हे हे हे

आरू - आने दो, आज तो प्रीती इसका पूरा मजा ले लेगी, क्यों प्रीती

प्रीती - हाँ दीदी, आज तो मैं कुशल को वो जन्नत दिखाउंगी कि आज के बाद ये मोम की चूत को भूलकर सिर्फ मेरी चूत के पीछे ही पड़ा रहेगा देखना....

सिमरन - अरे देखना प्रीती, कहीं हम दोनों को ना भूल जाना,

प्रीती -अरे नही दीदी, एक बार मैं जम कर चुदवा लूँ, फिर तो आप दोनों को भी जल्द ही कुशल के लंड के निचे लेटाने की जिम्मेदारी मेरी, क्यूँ आरू दीदी,, चुदोगी ना कुशल से या सिर्फ आपकी इस चूत पर सिर्फ पापा का ही नाम लिखा है..

आरू - अब भला चूत पर भी किसी का नाम लिखा होता है क्या, हे हे हे

आरू की बात सुनकर प्रीती और सिमरन हंसने लगे........

सिमरन - लगता है मेरी बिल्लो रानी को कुशल का लंड लेने की बड़ी खुजली हो रही है, क्यों आरू.. हो रही है ना तुझे खुजली

आरू - यार तू भी ना, अब एक तो इस प्रीती ने कुशल के लंड के बारे में जब से बताया है, वैसे ही मेरा मन बार बार उसका लंड देखने को हो रहा है अब ऐसे में चूत तो बेचारी टेसुए बहाएगी ही ना... वैसे तुझे इच्छा नही हो रही क्या कुशल का लंड लेने की कमीनी

सिमरन - अरे यार मुझे तो सबसे ज्यादा इच्छा हो रही है, देख मेरे भाई का लंड उतना ज्यादा बड़ा नही और प्रीती की बात अगर सही है तो कुशल का लंड तो मेरे भाई से दुगुना लम्बा और ढाई गुना मोटा है, अब ऐसे लंड को भला मैं अपनी बुर से कैसे दूर रख सकती हूँ, तू ही बता, हे हे हे...........

सिमरन की बाते सुनकर तीनो हंसने लगी....

..............................................................................................................

इधर कुशल और स्मृति अब कार पार्क करने के बाद घर के अंदर आ गये, उन्हें देखकर कोई नही बता सकता था कि अभी अभी ये गाड़ी में रासलीला मना कर आ रहे है,

स्मृति - कुशल बेटा, तू उपर जाकर हाथ मुंह धो ले, मैं भी थोडा फ्रेश हो जाती हूँ, फिर जल्दी से खाना बना देती हूँ, ओके

कुशल - ओके मोम

और कुशल उपर की और जाने लगता है.....तभी अचानक स्मृति ने दोबारा से उसे टोका

स्मृति - कुशल सुन,

कुशल - हाँ मोम

स्मृति - अपना वादा याद रखना.....

कुशल - पक्का मोम...

कुशल ने बोल तो दिया था पर उसे भी पता था कि उसे अपने वादा निभाने में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, प्रीती की जवानी से बचने के लिए उसे ना जाने अब क्या क्या करना पड़ेगा.....यही सब सोचते हुए कुशल अपने रूम में चला गया....

इधर स्मृति भी अपने रूम के अंदर आ गयी.... पर जैसे ही वो अंदर आई... उसने देखा पंकज तैयार अपना बैग पैक कर रहा था जैसे कहीं जाना हो उसे....

स्मृति - अरे आप कहीं जा रहे हो क्या....

पंकज - हाँ यार, अभी अभी गुप्ता का फ़ोन आया था, कल दिल्ली में एक बहुत बड़ा कस्टमर के साथ मीटिंग फिक्स हुई है, इसलिए अभी रात को ही निकलना पड़ेगा....

स्मृति - पर इतनी रात को....

पंकज - क्या करूं यार बिज़नस के लिए जाना ही पड़ेगा....अपना मेनेजर गुप्ता है ना वो भी जाएगा मेरे साथ, अभी रस्ते में उसे भी पिक करना है मुझे

स्मृति - वापस कब आओगे...

पंकज - कुछ कह नही सकता....अगर कल की मीटिंग कामयाब रही तो कम से कम एक हफ्ता वहीं रुकना पड़ेगा....पर अगर ये डील मिल गयी तो हमारे पो बारह हो जायेगे....

स्मृति - पर आप... चलो ठीक है आप तैयार हो जाओ, मैं अभी आपके लिए फटाफट खाना बना देती हूँ... खाना खाकर ही जाना...
पंकज - ठीक है, पर जल्दी करो.....

फिर स्मृति ने जल्दी से कपडे चेंज किये और हाथ मुंह धोकर फटाफट किचन में घुस गयी.... लगभग आधे पोंन घंटे में उसने खाना बना दिया.....इधर पंकज की भी पैकिंग पूरी हो चुकी थी.....

स्मृति ने बच्चो को भी आवाज़ देकर बुला लिया.... कुशल, आरू प्रीती और सिमरन सब निचे आ चुके थे.... आरू ने जब पापा को इस तरह तैयार देखा तो बोली

आरू - अरे पापा, आप इस टाइम ऐसे सूट बूट में कैसे???

पंकज - बेटा, क्या है न कि मुझे वापस दिल्ली जाना है अर्जेंट काम से, १ हफ्ते के लिए.....इसीलिए.....

पंकज की बात सुनकर आरू थोड़ी सी उदास हो गयी, पर वो भी जानती थी कि बिज़नस भी बहुत जरूरी है... इसलिए कुछ नही बोली.....

सभी ने जल्दी से खाना खा लिया और फिर पंकज को कार में विदा किया......

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आरू - मोम, आज सिमरन मेरे साथ ही रुकेगी, आज इनके घर पर कोई नही है ना इसलिए

स्मृति - कोई बात नही बेटी, जैसे तुम्हारी मर्ज़ी, वैसे भी सिमरन तो मेरी बेटी जैसी ही है....

आरू - थैंक यू मोम....

अब सब लोग अपने अपने कमरे में जा चुके थे.........

सब लोग अपनी अपनी जगह खुश थे सिवाय एक इन्सान के, वो था कुशल

क्यूंकि कुशल को पता था कि आज दोपहर को ही लंच के वक्त उसने प्रीती को बोला था कि वो आज रात उसकी चूत की सारी गर्मी निकाल देगा, पर अब वो प्रीती को कैसे मना करेगा, और अगर उसने आज भी उसे मना कर दिया तो वो पक्का उसका मजाक उड़ाएगी...... अजीब हालत हो गयी बेचारे कुशल की.... लंड कह रहा था कि जा जाकर मारले प्रीती की मक्खन चूत... और दिमाग कह रहा था कि नही, मोम से किया वादा नही तोड़ सकते...
अब बेचारा कुशल करे तो क्या करे....

इधर स्मृति आराम से अपने कमरे में आकर सो गई क्यूंकि उसे पता था कि आज रात उसे अकेले ही सोना पड़ेगा क्यूंकि आज तो सिमरन भी यही रुकी है, ऐसे में वो कोई भी रिस्क नही ले सकती थी.....

आरू और सिमरन टकटकी लगाये घडी की तरफ देखकर समय काटने की कोशिश कर रही थी, एक एक पल उन्हें एक एक दिन जितना लम्बा लग रहा था, वो तो बस चाह रही थी थी कि कब कुशल जल्दी से प्रीती के रूम में आये, और उन दोनों की चुदाई शुरू हो, ताकि उन्हें भी कुशल का लंड देखने का मौका मिल सके

प्रीती भी अपने रूम में जीरो वाट का बल्ब जलाये अपने बिस्टर पर करवटे बदल रही थी, पर वक्त तो उसका भी बड़ी मुश्किल से कट रहा था, वो तो बस उस पल का इंतज़ार कर रही थी कि कब उसके गेट का दरवाज़ा खटखटाये और कब कुशल आकर उसकी गरम फुद्दी को अपने लंड के गरमा गरम पानी से लबालब कर दे....

पर वक्त बीतता गया और रात के लगभग 11 बजने वाले थे, पर ना तो उसके दरवाज़े पर कोई दस्तक हुई ना ही कुशल का कोई मेसेज उसके फ़ोन पर आया... अब उससे और इन्तेजार नही हो पा रहा था,

"कहीं वो कुशल भूल तो नही गया दोपहर वाली बात, या फिर कही वो सो तो नही गया है, तभी शायद नही आया होगा, पर अगर वो सो गया तो मुझे चोदेगा कौन, नही नही, मैं उसे नही सोने दे सकती, मुझे उसके पास जाना ही होगा, अगर वो नही आता तो मुझे ही उसके पास जाना होगा, पर फिर आरू और सिमरन दीदी कैसे देख पायेगी, पर..........एक काम करती हूँ, कुशल को मेसेज कर देती हूँ, शायद फिर वो आ जाये...." प्रीती ने मन में सोचा

प्रीती ने कुशल को मेसेज टाइप किया - हाय, प्रीती हियर, सो गये क्या

इधर कुशल के फ़ोन पर मेसेज टोन आते ही कुशल समझ गया कि हो ना हो ये पक्का प्रीती का मेसेज है, पर अब वो क्या करे, वो प्रीती को चोद तो सकता नही था, तो फिर मेसेज पढकर क्या फायदा, उसने कुछ देर इग्नोर किया पर दोबारा प्रीती ने एक और मेसेज भेज दिया....इस बार कुशल से बर्दास्त नही हुआ और उसने फ़ोन उठा कर मेसेज चेक किये
 
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