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Hindi Desi Sex Freinds Forever (ek daastaan)

Update 29


J.K. Life Medical

" डॉक्टर डॉक्टर प्लीज मेरे बेटे को बचा लीजिए " शीतल डॉक्टर के पेड़ो में गिर के भीख मांगने लगी ।

डॉक्टर बस ओटी में से बाहर निकले ही थे की एक मां ने उसके आगे झोली फैला दी । डॉक्टर अपने काम प्रोफेशन था । उसे ज्ञान था परिजनों का कैसे नम्रता से नियंत्रित किया जाता है । वो शीतल को उठता है बाजू पकड़ के । तानिया ने शीतल को सहारा दे के बेंच पे बिठा देती हे ।

डॉक्टर ।" ये आप क्या कर रहे है । ऊपर वाले पे आस्था रखिए । "

डॉक्टर आगे बढ़ता है और शुबत मेहरा से बात करता है ।" मिस्टर मेहरा ।"

शुबत मेहरा खड़े हो जाते हे ।" जी डॉक्टर । कंडीशन क्या हे हमारे बेटे की ।"

तभी जतिन रोते हुए डॉक्टर से बिनती करता है ।" प्लीज डाक्टर साहब उसे बचा लीजिए ।"

डॉक्टर हल्का सा मुस्कुराके असबासन देता है ।" जी आप शांति रखिए । ऑपरेशन सक्सेसफुल रहा है । पैसेंट बोहोत बहादुर है इतनी गहरी चोट के बावजूद सांस ले रहा है...हमने अपना बेस्ट दिया है जब होश आएगा तभी हम आगे की कंडीशन बता पाएंगे "

डॉक्टर वाहा से निकल गया । जतिन खुद को संभाल नही पा रहा था । दुख से कमजोर हो गया था खुद का बेटा ऑपरेशन थिएटर में हो तब भला कौन मां बाप शांत रह सकता है ।

सभी मजूद थे शिवाय दीपाली और तरली के इलावा । उनको जबरस्ती घर का खयाल रखने के लिए तपन के घर पे रहने को कहा गया था ताकि घर से किसी प्रकार की जरूरत आन पड़े तो वो दोनो मदद कर सके ।

जतिन को संभाल रहा था शुबत मेहरा , रतन भार्गव और हरिलाल पाठक , तीनों पिता एक पिता की दुख में भागीदारी हो रहा था और अपना कर्त्तव्य निभा रहा था ।

तीन दोस्त हॉस्पिटल के वेटिंग रूम में बस बेजान शरीर बन के बैठा था । बस किसी तरह अपनी आसू रोक के रखे थे ।

कुछ घंटों के बाद तपन को Intensive Care Unit मे शिफ्ट किया गया । डॉक्टर उसे बारी बारी चेक कर रहे थे और इलाज कर रहे थे ।

रात के 10 बजे डॉक्टर परिजनों के पास आ के एक खबर देता है । " पैसेंट को होश आ गया है लेकिन वो सिर्फ अपने तीन दोस्तो से मिलना चाहता है पहले । कुछ नाम बताया था जिशु ,विशु , शेतु कर के "

तीनों दोस्त झट से खुश होते हुए खड़े होते हे ।" हम है सर "

शीतल ।" में भी चलती हूं "

डॉक्टर ।" नही आप लोग अभी नहीं मिल सकते है । ओनली वन पर्सन को मिलने दे सकते हे हम । वो तो पेसेंट ने मांग की और उसकी केयर करते हुए हम तीन दोस्तो को मिलने दे रहे है । आप तीनों आइए मेरे साथ ।"

तीनों डाक्टर के पीछे पीछे Intensive Care Unit में घुस जाते हे । तीनों देख पाता है तपन लाइफ सपोर्ट मशीनों के सहारे लेता है बेड पे ।

डॉक्टर ।" ओनली 15 मिनट ।"

डॉक्टर चला जाता है ।"

जिशू हाथ जोड़ के आसू बहाने लगता है ।" माफ कर दे यार । माफ कर दे ।"

तपन ऑक्सीजन मास्क हटा के मुस्कुराता है । और हाथ आगे बढ़ता है । जिशु उसका हाथ थाम लेता है ।

शेतन और विशु स्टूल पे बैठ जाता है उसके पास । मुस्कुराके के उसे देखता है ।

विशू ।" मेरे पट्ठे कैसा है "

शेतन ।" साले तुझे अब भी मजाक सूंज रहा है ।"

तपन मुस्कुरा के । " अरे तुम दोनों यहां शुरू मत हो जाना ।"

जिशू ।" तू हम तीनों से मिलना चाहता था डॉक्टर ने बताया है ।"

तपन आंखे पलक झलक ऑक्सुजन मास्क लगा का सांस लेता है । और फिर हटा देता है । तो विशू उसको मास्क लगाए रखनें को बोलता है । लेकिन तपन ना में इशारा करता हे ।

तपन ।" खुद को बब्बर शेर समझता था लेकिन जल्द ही आइना दिख गया मुझे । अब समझ आया की मै क्या हूं"

शेतन ।" है यार तू पहले ठीक हो जा फिर बात करेंगे ।"

जिशू ।" हा दोस्त । हमारे लिए तेरी जान बोहोत कीमती है । पहले तू ठीक हो जा फिर बात करेंगे । वैसे डॉक्टर बोला हे तु बोबोट बहादुर है ।"

तपन ।" पता नही कब तक बचूंगा ।"

विशू ।" क्या यार मरना होता तो तभी मार जाता नॉर्मल इंसान की तरह । दो दो रोड घुस के निकल आए थे कोई भला बच सकता था । तुझे कुछ नही होगा । एक बार ठीक हो जा बोहोत लात मारनी हे तेरे पिछवाड़े में ।"

तपन मुस्कुराता है और गंभीर हो के जिशु के तरफ देख के बोलता है ।" में तेरा गुनेगर हूं । बताने की हिम्मत नही हुई । हटाना चाहता था पर डरता था दोस्ती चीन जाने से और आंटी को खोने से । बस मेरी विनती है आंटी को गलत मत समझना । उसकी गलती नही हे जो किया मैने किया । ......" एक गहरी सांस ले के बोला " पता नही तुझे विश्वाश होता है की नही पर में तुम तीनो को कसम खा के कहता हूं । आई लव हर । आंटी से सचमे प्यार करता हूं । मुझे नहीं पता सच्चा प्यार क्या होता है । लेकिन हां इतना बता सकता हूं में उससे दूर नहीं रह पाता । पता नही क्या हे क्या नहीं हे जो में उसने चाह कर भी अलग नही रह पाता । लेकिन दोस्त में जान गया हूं मेरे इस नाजायस प्यार से तुम्हे और बाकी लोगो को चोट पोहोचती है इसलिए में अपना प्यार दफन कर रहा हूं ।"

जिशू तपन का हाथ चूम के रोने लगा ।" नही यार । में समझता हूं पर क्या करे रिश्ते ही बेधंगा है इसलिए । पर कोई बात नही में समझता हूं । क्या मम्मी भी ।"

तपन ।" हा आंटी भी मुझसे प्यार करती हे ।"

शेतन ।" यार रूला दिया रे तुम लोगो ने ।"

जिशु ।" मम्मी खुश है तो में खुश । बस मुझे थोड़ा समय देना ।"

तपन ।" ये एहसान में जिंदगी भर नही चुका पाऊंगा दोस्त ।"

जिशू ।" मैने तुम्हारे मम्मी के जो किया वो । वो पाप में अब कैसे धोऊ "

तपन ।" मुझे अब कई शिकायत नही हे । पर माफ करना मम्मी का में कुछ नही कर सकता । तुमसे नफरत करती होगी या कोई सजा"

जिशू ।" हा में तैयार हूं जो भी फैला ले आंटी में मानने के लिए तैयार हूं माफ तो सायेद न करे । सजा भी दे तो मंजूर है ।"

विशू ।" तुम दोनो ही गिला शिकवा दूर करते रहोगे क्या । इस उल्लू के पट्टे को हमने छुपा के रखा इसलिए हम तीनो से नाराज़ है । उसको तो मनाओ लल्ला लड़ी कर के मेरे को जबरदस्त घुसा पड़ी ।"

जिशु और तपन शेतन की तरफ देखने लगता है तो शेतन जान बूझ कर नाराज होने का चहेरा बनाता है ।

तपन मजाक करते हुए बोला ।" एक बार ठीक होने दे फिर तेरी गांड मरता हूं ।"

शैतान अपनी हसी रोक नही पाया ।" साले तेरी किस्मत अच्छा है वरना ऐसा पेलता ना ।"

तभी डॉक्टर और नर्स आ जाते है और तीनो को विजिटिंग टाइम उप बोल के बाहर निकल देता है ।
 
Update 30


After a few days at Jishant's house

सुबाह के 8 बजे ।

" जिशू । जिशू । अभी तक ये लड़का उठा नही पता नही कब कॉलेज जायेगा ये लड़का । रात को तो बोला था कॉलेज के लिए जायेगा उठा देना । कब से आवाज दे रही हूं लेकिन अभी तक नाश्ता करने नहीं आया ।"

तानिया परेशान हो कर जिशू के कमरे में जाती है । लेकिन जिशू उठ चुका था और बेड पे बैठ के बास्केट बल से ऐसे ही खेल रहा था ।

तानिया ।" अभी तक नाश्ता करने नहीं आया तू । कॉलेज नहीं जाना क्या ।"

जिशू ।" नही मम्मी आज नहीं ।"

तानिया जाने वाली थी बापच मुड़ के जिशू के पास बैठ गई ।" क्या बात है । "

जिशू मुस्कुरा के ।।" कोई बात नहीं । क्या बात होगी ऐसे ही मन नहीं है ।"

तानिया ।" कभी माफ नही कर पाओगे मुझे "

जिशु उसकी एक हाथ गोद में ले के प्यार से बोला ।" नहीं मम्मी ऐसी बात नहीं है । अच्छा कुछ पूछूं तो आप जवाब देंगे बुरा तो नहीं मानेंगे आप ।"

तानिया समझ गई कुछ गंभीर विषय हे लेकिन अब वो हर विषय पे बात करने के लिए तैयार है ।" हा बोलो । कुछ भी पूछ सकते हो तुम । में हर जवाब के तैयार हूं। बल्कि मुझे अच्छा लगेगा तुमसे बात कर के ।"

जिशु ।" आप । आप पापा को । मतलब आप दोनो अलग तो नहीं हो जायेंगे न ।"

तानिया कुछ पल शांत रह के बोली ।" नहीं । मेरे तरफ से ऐसा कोई इरादा नहीं हे । लेकिन हा उसे पता चलेगा तो वो मुझे जरूर छोड़ देगा उसे बर्दास्त नही होगा ।"

जिशू ।" आपके और पापा के बीच प्यार नही है ।"

तानिया ।" पता नही । कोई रिश्ते बिना प्यार के ही चलते रहते हे । ऐसा अक्सर पति पत्नी के साथ होता है । बिना प्यार के ही समाज और घर परिवार के की वजह से बिना प्यार के जी लेते हे । एक समय था प्यार । लेकिन उनके काम ज्यादा इंपोर्टेंट हे तुम्हे तो पता ही हे कभी भी आधी रात को उठ के काम पे जाते हे । तुम पति पत्नी के रिश्ते में नही हो इसलिए थोड़ा समझना मुस्किल है । हमारा लव रिलेशन अभी बोरिंग हो गया है । उसे सुधारने के लिए ना उसने कभी पहल की ना मैने । जीवन में एक रूल बन जाता है । बस हम वोही रुल फॉलो करते आ रहे है । लेकिन ऐसा नही हे की हम एक दूसरे कि फिक्र नहीं है । मतलब वो टच नही हे जो एक दूसरे के लिए फील करे प्यार की विषय में बात करे एक दूसरे को समझे ऐसा कुछ नही । कपड़े या कुछ सामना की जरूरत की बात होती है और कुछ नही "

जिशू ।" मतलब पापा का अब आप पे इंटरेस्ट नहीं या फिर कोई उनको ।"

तानिया ।" नहीं ऐसा मुझे नहीं लगता । वो काम में ही बीजी रहते है । "

जिशु " और तपन ।"

तानिया शर्मा गई । " उसका क्या "

जिशू ।" मतलब चुपके चुपके इश्क करने तक ही सीमित रहेगा या फिर आगे कोई शादी वादी का इरादा भी हे ।"

तानिया मुस्कुराई ।" धेत्त बदमाश । ऐसा कुछ नही है ।"

जिशु । " मम्मी बताओ ना कुछ प्लैनिग हे क्या ।"

तानिया जिशू के माथा चूम कर । " नही कोई प्लानिंग नही हे । शादी वादी वो सब दूर की हे । तुम मेरे लाइफ की सबसे इंपॉर्टेंट चीज हो । में किसी भी हालत में तुम्हे खोना नही चाहता । और समाज कभी ऐसे प्यार को स्वीकार नही करेगा । जैसा हे वैसा ही ठीक है । अच्छा मेरी छोड़ो अपनी बताओ । शीतल आंटी के साथ । बड़े दिनों बाद मुझसे खुल के बात कर रहे हो अच्छा लगा बोहोत खुश हूं में ।"

जिशू ।" शीतल आंटी । वो अच्छी हे "

तानिया सरारत करते हुए ।" ऊन सिर्फ अच्छी हे ।"

जिशु मुस्कुराने लगा ।" ऐसी बात नही हे । ऐसा कोई फीलिंग्स नहीं हे ।"

तानिया ।" विशु ने सब बताया मुझे । कैसे तुम चारो को वरदान मिला । कैसे क्या हो गया । शीतल के साथ इतने मस्ती मजाक करते थे घूमने भी ले गया था । गिफ्ट भी देता था । और कोई फीलिंग नही ।"

जिशू ।" नही मम्मी आप गलत दिशा में जा रही है । हा वो मुझे अच्छी लगी कुछ प्यार के पल बिताए मैने ।अच्छा लगा आंटी के साथ भले ही मेरे मन में तब कुछ और चल रहा था । वो बोहोत भली हे मम्मी पता नही मुझे कभी माफ करेगी या नही । लेकिन अभी ये नहीं कह सकता की शीतल आंटी के लिए मेरे मन वैसा फीलिंग्स है । "

तानिया ।" कर देगी वो माफ । मुझे पता हे हा थोरी मेहनत करनी पड़ेगी तुझे । वैसे विशु ने सब कहानी शीतल और मुझे सब कुछ बता दिया हे ।अच्छा ये बता की तूने अपनी वरदान की दूसरी शक्ति वाली उन तीनो से छुपाए क्यूं ।"

जिशु ।" मतलब आपके पहली शक्ति वाली बात पता है ।" (ओ तेरी ये मैंने क्या बोल दिया )

तानिया शर्म से लाल हो जाती है और जूठा गुस्सा दिखा के बोली ।" जो पूछा उसका जवाब दे ।"

जिशू मुस्कुराता है ।" सॉरी । अच्छा वो जो मुझे टेलीपोर्ट होने का शक्ति मिला हे वो बोहोत दिन बाद मुझे एहसास हुआ । एक दिन में घर पर ऐसे ही सोच रहा था की काश में घर से अभी एक सेकंड में कॉलेज जा पता और तभी में दूसरे सेकंड में खुद को अपने कॉलेज में पाया । तब मुझे समझ आया की मैने ऐसा कभी सोचा नेहि था इल्सिए इस शक्ति का मालूम ही नहीं हुई मुझे । और मैंने तीनों को बताने की सोचा लेकिन तब ये सब हो रहा था और मेरे काम भी आ रहा था और दिखाना भी था अपना एटीट्यूड उस खंडार पे तो बताया नही ।"

तानिया ।" हम्म्म । अब जो हुआ उसे भूल जा। और अपनी दोस्ती के रिश्ते को मजबूद कर । बोहोत किस्मत वाले हो जो तुम्हे ऐसा दोस्त मिला हे । और हा मुझसे अब कुछ मत छुपाना कुछ भी गलत लगे तो बताना । में भी कुछ नही चुपाऊंगी और अब भी कह रही हूं अगर तुम्हे कोई परेशानी है तो बोलो में तपन से रिश्ता तोड़ लूंगी ।"

जिशू ।" नही मेरा ये मतलब नही हे । आप अगर उसके साथ खुश हो तो मुझे कोई परेशानी नही । बस आप जो भी फैसला ले मुझे बताना ।"

तानिया ।" जरूर । पिंकी प्रोमिस । अच्छा कॉलेज नही जा रहे हो तो चलो तपन के घर । तुमने इन दिनों मे बस दो ही दिन खबर लेने गए हो । और अपनी सकती से एक सेकंड में मुझे भी ले चलो ना ।"

जिशू ।" अरे नही उसके लिए आपको ऐसा शक्ति प्राप्त होना चाहिए वो सिर्फ मेरे अकेले के लिए ही हे । और आंटी की वजह से में नहीं गया । वो मुझे देख की ही दुखी हो जाती है ।"

तानिया ।" तुमसे ज्यादा तो साइड मुझसे नाराज़ है वो । सब कुछ मेरी वजह से जो हुई "

जिशू ।" अब बस करो खुद को अब कोसती मत रहो । नियति थी तो हो गया अब चलो अच्छी सी स्माइल दो और तैयार हो जाओ ।"

तानिया उसे प्यारी सी जप्पी दे के अपने कमरे में तैयार होने चली जाती हे ।

One day before Tapan's house

समय रात के 9:30 pm डिनर के बाद ।

शीतल किचन से गर्म दूध ग्लास पे डाला रही थी । जतिन वाहा किचन में ही था ।

जतिन ।" शीतल आज काल तुम चुप चाप सी रहने लगी हो ।"

शीतल मुस्कुरा के ।" आपको ऐसा क्यों लगता है ।"

जतिन ।" अरे भाई ऐसा दिखता हे इसलिए लगता है ।"

शीतल ।" अरे नही थोड़ी तपन का शिंता लगी रहती है ."(जूठ)

जतिन ।" अच्छा । लेकिन टेंशन मत लो डॉक्टर ने कहा था कि उसे एक महीना तक बेड रेस्ट चाहिए लेकिन देखो 10 दिन में ठीक हो गया वो कैसे उछल कूद करना शुरू कर दिया । तुम शिंता मत करो अभी वो बिल्कुल ठीक हे ।आखिर मेरा खून है ।"

शीतल मुस्कुरा के बोली ।" हा इसलिए तो इतनी जल्दी ठीक हो गया । आप जाइए में उसे दूध दे के आती हूं उसे सुला के में कमरे में आती हूं ।" (अब आपको कैसे बताऊं की आपके बेटे के अंदर वरदान प्राप्त बलशाली शक्ति जो हे । मुझे भी विश्वास नहीं होता हे पर ये सच है ।)

शीतल किचन से तपन के कमरे में गई । तपन टीवी पे wwe देख रहा था । शीतल उसे दूध दे के उसके पास ही बैठ गई । तपन धीरे धीरे गर्म दूध पीने लगा ।

तपन ।" मम्मी आप भी दूध पिया करो । आज कल आप भी कमजोर दिख रही हो ।"

शीतल ।" नही मुझे दूध से उल्टी आती है । और में बिलकुल ठीक हूं । "

तपन प्यार से बोला ।" मम्मी आपको में जानता हूं । आप परेशान हो प्लीज बताओ ना क्या बात है ।"

शीतल संकस के साथ बोली " बेटा वो वीडियो क्या सब जगह फैल गया ।"( जिशु ने जो उस दिन शीतल और बाकी सबको अपनी और शीतल की सेक्स टेप भेज के एड्रेस भी भेजा था उसकी बात कर रही थी शीतल ।)

तपन एक चीप ले के बोला ।" मम्मी उसने सिर्फ हम लोगो को भेजा था । और उसपे अलग से ऐसा प्रोग्राम किया गया था की वो एमएमएस अपने आप 5 मिनट के बाद डिलीट हो गया । आप टेंशन मत लो । "

शीतल राहत की सांस लेती है । " गुड नाईट बेटा । ज्यादा देर टीवी मत देखना ।"

शीतल जाने के लिए उठी तो तपन ने उसकी हाथ पकड़ के बिठा दिया ।" मम्मी आप जीशू से नाराज़ मत हो । मानता हूं उसने जो किया गलत किया पर असली गुनहगार में हूं । मैने कर्म ने उसे मजबूर कर दिया था ।"

शीतल के आसू आन पड़े । तपन अपनी मम्मी को गले लगाता है । शीतल सुबक सुबक के बोलती है ।" पता नही क्या हो गया ये सब किसकी नजर लगी हमारे परिवार को । सब कितना खुश थे पर अब ।"

तपन ।" नही मम्मी ऐसा नही हे सब ठीक है । आप दुखी हो इसलिए में दुखी हो जाता हूं । जिशु को गलती का एहसास है और मुझे भी । आप जितना गुनेगार जिशू को मानती हे उतना ही में भी गुनेगार हूं । मुझे माफ कर देना मम्मी ।"

शीतल ।" नही बेटे ।बार बार माफी मत मांगो मैने कब का माफ कर दिया है । बस थोड़ा समय चाहिए । "

तपन ।" हा मम्मी आप समय ले लो । और में वादा करता हूं में पहली वाली खुशियों से भरी माहोल दुबारा ला दूंगा । "

शीतल ।" मुझे तुमपे भोरोषा है । एक बात पूछना चाहती थी की क्या तानिया और तुम अब भी ।"

तपन ।" हा मम्मी । पर इस बार जिशु की सहमति से । वो भी धीरे धीरे एक्सेप्ट कर रहा है । उसने हां कहा है ।"

शीतल " बेटा क्यू आप जिंदगी बर्बाद कर रहे हो । वो तुम्हारी मम्मी की उम्र की है । तुम्हारे दोस्त की मम्मी हे । कही से मेल नहीं हे फिर क्यूं ।"

तपन ।" आप टेंशन मत लो उसने साफ कह दिया हे वो मेरे साथ शादी वादी नही करेगी । प्यार का मतलब सिर्फ शादी करना ही होता है क्या । और वैसे भी हम इस प्यार से ज्यादा अपने परिवार की खुशी पहले देखेंगे हम दोनो वादा किया हे । इस बार किसी को कोई चोट नहीं पोहोचेगा । सब ठीक है मम्मी । अब तो मेरी खेलने कूदने की उम्र है इतना मत शिंता करो । मुझे सबक मिल चुका है और में अब सकझदार हूं । "

शीतल " ठीक है जैसा तुझे ठीक लगे लेकिन एक बात ध्यान रखना सपना मत देखना । कुछ सपने कभी सच नहीं होते । "

शीतल अपने बेटे को लाद प्यार कर के अपने कमरे में चली गई ।
 
Update 31


A day later at Tapan's house

सुबाह का समय 10 बजे ।

जिशू और तानिया तपन के घर का बेल बजाता है । दोनो मन में यही सोच रहे थे की शीतल दरवाजा ना खुले । लेकिन दोनो की किस्मत में शीतल की ही दरवाजा खुलने का लिखा था ।

शीतल दोनो के देख के पहले तो कोई प्रतिक्रिया नहीं देती लेकिन बाद में हल्की सी फिकी मुस्कान के साथ बोलती हे ..." आओ अंदर आओ ."

दोनो अंदर चले जाते है लेकिन दोनो ही असहज महसूस कर रहे थे । इस वक्त तपन के पापा जतिन बैंक जा चुका था ड्यूटी पे ।

शीतल दोनो को बिराज मान होने को बोल के तपन को आवाज लगती ही है । माहोल ऐसा था की जैसे तानिया और जिशू पहली बार मेहमान बन कर आए है । वो मंजर नहीं था जब तानिया या जिशू आते थे शीतल भागी डोरी खुशी से झूमते हुए स्वागत करती थी शिकायत करती थी कि आज इधर की रास्ता कैसे याद आया बगेरा बगेरा । कितनी मजाक मस्ती करती थी और यही नही जिशू या तानिया आती थी तो दोनो बिना बोले ही घुस जाते थे पूरे घर में घुस के अपनापन जताते थे । लेकिन वो मंजर अब नहीं रहा ।

तपन गुनगुनाते हुए चिड़ी से उतर के आता हे ।" हा मम्मी " लेकिन जब सामने जिशू और तानिया को देखता है तो उसे दुविधा होती है की वो किस तरह रिएक्ट करे । क्यों की रिश्ते खुल चुके थे अब उसे साधारण तरीके से रिएक्ट करने में थोड़ा टाइम तो लगेगा ही ।

तपन अपने मर्यादा में रहते हुए मुस्कुरा के बोला ।" अरे आप लोग । नमस्ते आंटी ।"

तानिया मंद ही मंद मुस्कुराती है । " जी अब कैसी है तबियत "

जिशू जूठे गुस्से से आंखे बड़ी कर के तपन को देख रहा था । तपन बस शर्मा के मुस्कुराते रह जाता हे । तानिया मन ही मन मुस्कुराने लगी । उसे भी शर्म आ रही थी लेकिन शीतल को वजाह से ज्यादा असहेज महसूस कर रही थी ।

शीतल भी वोही स्थिति में थी उसके सामने उसके बेटे के गर्लफ्रेंड सामने थी जो उसकी दोस्त थी पहले या सायेद अभी भी है या नही आगे ही देखने को मिलेगा ।

शीतल ।" बैठो में अभी आती हूं ।"

शीतल किचन की तरफ जाने लगी तो उसके पीछे पीछे तानिया भी गई कुछ हिम्मत जुटा के । तपन अपने दोस्त को अपने कमरे में ले के गया ।

तपन " मुझे लगा रोज आओगे खबर लेने । पर आज आए हो ।"

जिशु ।" यार अब बस भी करो तू जानता है । "

दोनो समझ गए की वजह क्या है । इसलिए दोनो उस मुद्दे को दफन कर देते है। वजह था शीतल जो न खुश थी ।

जिशु उसके कमरे के स्टोरेज रैक से एक शोपीस उठा के बोलता है ।" ये तूने कब ली थी ।"

तपन कोई जवाब नही देता बस मुस्कुराता है बस । उसकी मुस्कान देख के जीशू को और समझने की कोई जवाब नही चाहिए थे । उसकी भी मुस्कान निकल जाते हे ।(वो शोपीच तानिया ने गिफ्ट की थी तपन को)

जिशू शोपीच बापच अपनी जगह रख के बैठ जाता है । " और बताओ पैन होता है क्या "

तपन ।" अरे नही एक दम तंदुरुस्त हूं । में सोच रहा हूं काल से कॉलेज जाना शुरू कर दूं ।"

जिशु ।" हा सही कहा । तेरी वजह से हम तीनो की कॉलेज की छुट्टी हो गई 15 दिन तक ।"

तपन ।" तो मैने कहा था तुम तीनो को की में नहीं जा रहा इसलिए तुम लोग भी मत जाओ ।"

जिशु ।" साले अकड़ नही टूटेगा तेरी । खेर छोड़ अपना ज्ञान बाबा हे ना शेतन पंडित । सब संभाल लेगा । "

दोनों हास पड़ते है ।

In the kitchen

शीतल मेहमान के लिए नाश्ते का प्रबंध कर रही थी । तानिया बस जीझक रही थी दोनो सोच रहे थे बात पहले वो करेगी लेकिन कोई नहीं कर रही थी खाली सन्नाटा था ।

तानिया को रहा नही गया तो वो बोली ।" कैसी हो "

शीतल ।" ठीक हों तुम ।"

तानिया ।" में भी ठीक ही हूं । और बताओ कैसी चल रही है ।"

शीतल ।" सब अच्छा ।"

तानिया छींक में उंगली टुकटुकाती हुई इधर उधर नजर करती हुई बोली ।" मुझे माफ कर दो शीतल।"

शीतल ।" कितनी बार बोलूं सबको की सबको माफ कर चुकी हूं । बार बार क्यू याद दिलाते रहते हो"

तानिया की बाह पकड़ के बोली ।" नही तूने हमें माफ नही करी अभी तक । तेरी मन की बात तेरे चेहरे पे साफ दिख रही है कमसे कम मेरे बेटे को तो माफ कर दो। "

शीतल ।" जितना जिशु की गलती थी उतना ही तपन का था । जब तपन को माफ कर दिया तो जिशू को क्यों नही माफ करूंगी । बस मुझे ये सब समझ नही आती हे । अटपटा लगती है ."

तानिया ।" थोड़े टाइम बाद सब ठीक हो जायेगा ।

शीतल ।" तो टाइम दो ना । चलो नाश्ता लगा देती हूं ।"

तानिया मजाक करती हुई बोली ।" तुम हमेशा क्यू पकड़े खिलाती रहती हो हर समय हमें ।"

शीतल बस होंठ की कोने से हलकी सी मुस्कान दे के बोली ।" क्यू की बच्चो को मेरे पोकोरे ही पसंद आते है ।"

तानिया बस मुस्कुरा देती है । दोनों नाश्ते का प्लेट डाइनिंग टेबल पे रख के जीशू और तपन को आवाज देती है ।
 
Update 32


Next day in collage

आज चारो कॉलेज एक साथ आए थे । बाकी के स्टूडेंट्स इन चारो को इतने दिनो बाद देख कर घूर घूर कर देख रहे थे सबके मन में एक ही सवाल था की कहा थे इतने दिन ।

चारो हीरो की तरह एंट्री लेते है । क्लास में प्रोफेसर भी इन चारो से वार्ता लाप लेते हे । और चारो के मज़ाक भी उड़ते हे लेकिन बाकी के स्टूडेंट मजाक में जरा भी नहीं हस्ते क्यू की उनको पता था उनके ऊपर हसा तो चारो मार मार के मिट्टी का स्वाद सखा देंगे ।

विशू और शेतन दोनो कैफेटेरिया में थे ऑफ क्लास के समय ।

विशु ।" लगता है ये दोनो कुछ ज्यादा ही गहरी दोस्ती बन गए पहले से ज्यादा । जब देखो दोनो एक साथ हो जाते हे हमपे ध्यान ही नही रहता "

शेतन हास के ।" दोनो एक ही थाली के जो हो गए । हां हां हां "

विशु ।" चुप चुप आ गए जय वीरू ।"

जिशू और तपन कही से आ रहे थे और उन दोनों के टेबल पर बैठ गए दोनो ।

तपन ।" तुम दोनो हमारे बारे में क्या बोल रहे थे ।"

शेतन ।" कुछ नेही ।"

जिशू ।" नहीं तुम दोनो हमारे बारे में कुछ बोल रहे थे हमारी गड फीलिंग बोल रहा है तुम दोनो हमारी चुगली कर रहे थे ।"

शेतन ।" सुना विशु । हमारी । हमारी । सुना "

विशू ।" हा सुना भाई । क्या करे अब हम दोनों का कोई एहमियत नहीं रही ।"

जिशु ।" लगता है दोनो की पिछवाड़े में बोहोत खुजली हो रही है ।"

तपन ।" अच्छा छोड़ो ये सब बाते । कुछ और टॉपिक लगा बे ।"

विशू ।" हा भाई कुछ और टॉपिक पे बात करते है । अच्छा आज सुबह मेने तेरे घर पे फोन किया था शीतल आंटी ने फोन उठाया था लेकिन आंटी ठीक से बात नहीं कर रही थी । बात क्या है ।"

शेतन विशु को जिशू की तरफ इशारा करता है तो जिशु चिढ़ गया । " क्या बे साफ साफ क्यू नही बोलते तुम लोग ऐसे इशारा बाजी कर के क्या बताना चाहता है ।"

विशू ।" ओके ठीक है सुन । प्रोब्लम तुम लोगो को हा नतीजा हम दोनो क्यू भुगत रहे थे । शीतल आंटी हमसे बात क्यों नहीं करती । में और शेतन रोज इस सांड (तपन) की खबर लेने जाते हे लेकिन शीतल आंटी हमसे ढंग से बात हीं नही करती चेहरा भी ठीक से नही दिखती कोना पकड़ के छुपी रहती थी ।"

जिशु और तपन चुप चाप रहते हे दोनो के पास कोई जवाब नही होता है ।

शेतन ।" क्या हुआ सांप क्यू सूंघ गया ।"

तपन (जिशू से) ।" तुमने मम्मी से माफी नहीं मांगी अभी तक ।"

जिशु ।" कितनी बार माफी मांग चुका हूं लेकिन ठीक से जवाब ही नहीं देती बस हू हा करती है ।"

शेतन और विशू हसने लगता है । ये दोनो चिढ़ जाते हे ।

तपन । " यार माहोल को पहले जैसा करना होगा ।"

विशू ।" पहले जैसा नेही नया माहौल बनाना पड़ेगा गाढ़े । जिसमे खुशियां आ जाए ।"

तपन ।" यार में सोच रहा हूं क्यूं ना अपनी अपनी मम्मियों को ले के कही घूमने चले इससे साइड चीज़े ठीक हो जाए ।"

विशु मजाक के अंदाज में एक साथ ।" हम तुम दोनो जैसे नहीं बे ।"

शेतन ।" हा हमारी ऐसी कोई सोक नही है ।"

जिशु ।" तुम दोनो को ना गु खिला देना चाहिए । दोस्त का ही मजाक उड़ाता है ।"

शेतन ।" हम दोस्त ही दोस्त का मजाक उड़ाएंगे नहीं तो कौन उड़ाएंगे । ये दुनिया वाले । ए विशू जरा दुनिया वाले को एलान कर दे रे ।"

विशु तुरंत टेबल थपथपाने लगता है ।" सुनो सुनो दुनिया वालो ।"

लेकिन उसकी बात पूरी हो इससे पहले ही जिशु और तपन उसे पीटने लगता है । दोनो को चिढ़ते देख के विशु और शेतन हसने लगता हे ।चारो की मस्ती ऐसे ही चलती रहती हे ।

शेतन सीरियस हो कर ।" अच्छा जिशू एक बात बता तुझे शीतल आंटी से माफी मांग कर बापच वो प्यार चाहिए या फिर सिर्फ वाही पुरानी वालीं आंटी चाहिए । बोल तुझे क्या चाहिए में तुझे टिप दूंगा ।"

तपन बेकरार हो गया जवाब जानने के लिए । जिशू क्या जवाब देगा उसके मन में एक जिज्ञासा होने लगा ।

जिशु ।" यार में क्या बोलूं । मुझे खुद नहीं पता ।"

शेतन मजाक में ।" तुझे तो कोई प्राब्लम नही हे ना अगर जिशू ।"

तपन कुछ सोच के असहज में बोला ।" मुझे क्या प्राब्लम होगी ।"

विशु और शेतन हसने लगता है दोनो के खूब मजे लेते हे ।

तपन ।" दुबारा अगर हसा तो दात तोड़ दूंगा समझा ।"

विशू ।" कुल यार ।" (जीशू से) अरे बोल ना ठीक से सोच कर । शर्माता क्यू है "

जिशू ।" हा मुझे अच्छी लगती है बस इतना ही कह सकता हूं ।"

जिशू ऐसे शर्मा जाता हे की शेतन और विशू के साथ तपन भी हास पड़ता हे ।

शेतन ।" ओके सुनो तुम लोग । तपन का आइडिया सही हे हम कही घूमने जाते हे टूर पे ।"

तपन । " हा आज ही सब अपनी अपनी मम्मी को बता देते हे और पापा से भी परमिशन लेते हे ।"

विशु ।" हमारी मम्मिया क्यू । उनका क्या काम ।"

जिशू और तपन इस बार दोनों की लेते है ।

जिशु ।" क्यूं दर लग रहा है कही हम तुम्हारी मम्मी के साथ भी ।"

तपन ।" वैसे आइडिया बुरा नही हे जिशू । मौका अच्छा है ।"

विशू ।" ए मजाक नहीं हा ।"

शेतन ।" हा ऐसी मजाक मत करो । "

जिशू और तपन हाई फाई देते हुए हसने लगते हे ।

तपन ।" क्यूं फात गई न ।"

जिशु ।" पेंट गीली हो गई क्या दर से । अब हमारी मजाक उड़ाओ ।"

विशू और शेतन भीगी बिल्ली बन जाता हे ।

जिशू ।" देख दीपाली आंटी और तरली आंटी साथ में रहेगी तो ग्रुप बन जायेगा । और घूमने का माझा ग्रुप में ही आता है । "

विशु ।" ठीक में आज रात बात करता हूं ।"..

शेतन मुंह छोटा कर के ।" ठीक है करता हूं बात ।लेकिन ।" और खुद ही हसने लगा मजाक के माहोल में ।

फिर चारो हसने लगते है ।
 
Update 33


Navratna village tour

चारो ने मिल के प्रबंध किया एक शांत जगह जहा पे आवादी काम हो हुई हल्ला नहीं किसी भी कथित नियम नहीं जहा खुले मन से टूर का मजा लिया जाय । हरियाली हो खेत हो जिसपे सरसों का फूल खिले पूरे वातावरण को महका दे पशु पंशी की सहल पहल रहे । नदी झरना बहती रहे प्रीकृति का लुफ्त हो किसी तरह की प्रदूषण ना हो बीसुद्ध हवा बिशुद्ध पानी का साधन हो । और ऐसी एक जगह नजर में थी सिर्फ और सिर्फ नवरत्न गांव ।

नवरत्न गांव में ही विशू के पापा हरिलाल का जन्म हुआ था । और हरिलाल के अपने जन्मभूमि में कोई जमीन थी जहा उसका पुराना पुस्तानी विला (देहाती बँगला) था । जिसपे अब कोई नही रहता था । 15- 20 के लिए पापा लोग बच्चो को परमिशन दे दिया था छुट्टी मनाने के लिए ।

नारगढ़ से नवरत्न गांव का सफर लगभग चार घंटे का था । विशू के पापा के पास एक पुराने मॉडल की इनोवा कार थी जो 7 सीटर थी लेकिन किसी तरह से देसी लोगो की स्वभाव से आठ लोग बैठ गए ।

तानिया गाड़ी चला रही थी उसके बगल में शीतल बैठी थी । सेकंड रॉ में दीपाली , तरली और उसके बगल में उसका बेटा शेतन बैठा था । और पीछे तीन दोस्त जिशु , तपन , और विशू । आठ लोगो के लिए तंग जगह थी छे लोगों के लिए आरामदायक होती है हालाकि सीटे बदलने को बात हुई थी हर आधे पानेघंटे में ।

आठ लोग कार के इन्फोटेंट सिस्टम में म्यूजिक बजाते हुए मस्ती करती हुई जा रही थी । लेकिन एक बेचारा मन की अरमान दबा के चल रहा था और वो था तपन जो तानिया के साथ बैठने की अरमान लिए गाड़ी पे चढ़ रहा था । लेकिन उसके दो कमीने दोस्त विशु और शेतन उसके अरमान का सत्यानसा कर दिया था और मन मन हास रहे थे दोनो तपन की सकल देख कर ।

तीनों धीरे धीरे अपने में गप्पे लड़ते हे । विशू भी उनके साथ गप्पे लड़ाने चाहता था लेकिन तीन लोग बैठे होने की वजह से मुड़ नही पता था खुद की किस्मत पे कोचने लगा ।

विशु ।" सालो कमीने मुझे छोड़ के तुम तीनो मजा ले रहे हो ।"

तीनों पीछे हसने लगता है । तपन खुन्नस निकल के बोलता हे ।" क्यू बे अब मजा आ रहा है किसी की इस्सा पे पानी फेक के ।"

विशू हस पड़ता हे ।" मेरा आइडिया नही था बे शेतन का था ।"

शेतन नजर चुराने लगता है । तपन उसे घूरता है वो जिशु के सामने बात छेड़ना नहीं चाहता था इसलिए चुप रह जाता है । जिशु को भी पता चल गया था लेकिन वो अपनी मम्मी और दोस्त के बारे में इतना कैसे खुल सकता था तो इसलिए वो भी कुछ नही कहता ।

कुछ देर बाद जिशु पीछे से बाल खींचता है और ऐसा भाव करता है जैसे उसने कुछ किया ही नहीं । तपन और शेतन भी मन मन मुस्कुराता है । विशू गर्दन घुमा के देखता और तीनो को घूरते हुए बापच सामने देखने लगता है । ऐसा उसके साथ बार बार होता एक शेतन उसकी बाल खींचता हे और दो बार तपन उसकी बाल खींचता है ।

लेकिन इस बार विशु चुप नेही रहता परेशान हो कर चीखता है ।" जिसने भी बाल खींचा हे मेरा उसकी मां की .........."

बगल में बैठे उसकी मम्मी तराली पट से उसकी गाल लाल कर देती हे ।" चुप बेशर्म किसी भाषा बोलने लग गया है तू ।"

पीछे तीनों हास रहा था ।

विशू गाल सहलाते हुए ।" देखो ना ये तीनों मेरा बाल खींच रहा हे ।"

दीपाली कड़क आवाज में बोलती है ।" बदमाश इसलिए पीछे बैठे हो ना तुम लोग ।"

तानिया ड्राइविंग करती हुई बोली ।" तीनों को एक एक झापड़ लगा न दीपाली ।"

दीपाली ।" सही कहा इनलोगो को सच में झापड़ ही मारने चाहिए । छोटे बच्चो की तरह बदमाशी करते रहते हे ।"

तीनों मुंह दबा के हसने लगते है ।

शेतन फूस पूसा के ।" मम्मी ज्यादा होसियार बन रही है अब मम्मी की बाल खींचो ।"

जिशु ।" फिर दीपाली आंटी की । रुको थोड़ी देर अभी नहीं ।"

सफर लग भाग आधे घंटे से चल रहा था । फिर सही समय देख के तीनों एक जिशू पहले शुरुवात करता है । वो दीपाली की शीर के पीछे हल्की सी टिकली मारा । दीपाली फट से तीनों को पीछे मुड़ के देखता है लेकिन तीनों के सकल पे साधारण नम्रता भाव । दीपाली फिर सामने देखने लगती है उसे लगा वहम हे ऐसे ही सीट के हेड रेस्ट पे लग गई होगी ।

कुछ मिनट बाद शेतन अपनी मम्मी की बाल खींचता हे । इस बार दीपाली को पता चल जाता है ।

दीपाली ।" तानिया गाड़ी रोक "

तानिया ।" क्या हुआ दीपा ।"

दीपाली ।" गाड़ी रोक । ये तीनों अब मेरे हाल खींच रहे है ।"

इस बार सबकी हसी छूट गई । सब हंसने लगे ।

तानिया उधर से आवाज लगती हे ।" तुम तीनो को शर्म नही आती अपनी मम्मी और आंटी की बाल खींचते हो बड़ो की आदर करना नहीं चीख क्या "

तीनों धित थे ।

शेतन ।" तानिया आंटी मेने कुछ नही किया मेरी तो मम्मी हे ।"

जिशू ।" मम्मी मैने भी नही किया । मेरी तो मां जेसी आंटी हे ।"

तपन ।" मेने भी नही की आंटी । मेरी भी मां जेसी आंटी है । हे ना दीपाली आंटी ।"

दीपाली मजाक को मजाक में ले के हास के बोली ।" बदमाशों पोहोचने दे एक बार फिर तुम लोगों की खेर नही ।"

तीनों हास रहे थे । तानिया गाड़ी साइड में रोक देती है । " दीपाली तुम गाड़ी चलाओ । देखती हूं कौन बदमाशी करता हे ।"

इस बार कुछ लोगो की सीट चेंज हो जाता है । दीपाली कार चला रही थी शीतल पहले जगह पर बैठी थी लेकिन इस बार दीपाली की बगल में हो गई । और सेकंड रॉ में तीन धुरंधर जिशु,तपन और शेतन बैठ गया । और थर्ड रॉ में तानिया उसके बगल में तराली और उसके बगल में विशू । अब तीनों नटखट बंदर कुछ सैतानी नहीं कर सकते ।

तीन ग्रुप में अलग अलग गप्पे लड़ा रहे थे । थर्ड रॉ में कुछ ज्यादा ही मस्ती हो रही थी इस बार ।

विशू ।"(तानिया से)आंटी अब हम लोगो की बारी "

तरली ।" धेत्त "

तानिया ।" क्या धेत्त थोरी बदमाशी तो सबको माफ है । एक काम करते है तीनों मिल के इन तीनों की बाल खींच के रखते हे ।"

तरली ।" क्या तानिया तुम भी बच्चो के साथ बच्चे बन रही है ।"

विशू ." बच्चो के साथ बच्चा नही बनेंगे तो और क्या बनोगे । मजा आयेगा चलो एक साथ इन तीनों को मजा सखाते है ।"

तराली भी मान गई । और तीन काउंट के साथ तीनों उन तीनो की बाल पकड़ के खींच के रखते है जहां तीनों को दर्द का एहसास होता है ।

जिशू ।" आ छोड़ दो दर्द हो रहा है ।"

तपन ।" आ मर गया ।"

शेतन ।" खाल उधर गया मेरा छोड़ो मेरा बाल ।"

तीनों की चिंख सुन के ये तीनो हसने लगते है । लेकिन खुल के हस्ती थे जो गुमसुम सी रहती थी और वो थी शीतल जिसकी ना चाहते हुए भी हसी छूट गई और ठहाके लगा के हसने लगी थी ।

दीपाली ।" तुम (तानिया और तरली) दोनो भी बच्चो के साथ बच्चे बन रहे हो । "

तीनो उन तीनो की बाल छोड़ देते है । हांसी का माहोल बन जाता है । ऐसे ही हांसी के माहोल में आठों लोग मस्ती से सफर करते है रास्ते के ढाबे पे रुक के मंद पसंद खाना खाते हे । और शाम 6 बजे नवरत्न गांव पोहोच जाते हे विशु के विरासत में आने वाली पुस्तानी कोठी ।
 
Update 34


Vishu's Villa

कार प्रवेशद्वार में दाखिल हो चुका था ।कार से उतर कर सब लोग थकान से अंगड़ाई उबासी लेने लगे काफी लंबा सफर जो था । लेकिन कोठी देख के सबकी आंखों में चमक आ गई । सब लोग बरामदा और कुल 21 कमरे मिला के कोठी बनी हुई जो आज से लगभग 90 साल पुराना था जिसकी दीवारे अभी भी मजबूद था लेकिन कोठी के रंग उतर गया था इसलिए धूमिल और काफी गंदा लग रहा था ।

तभी एक आंगन में बने छोटे से कमरे में एक बूढ़ा अभिनंदन करते हुए स्वागत करने आ गया । उसका नाम था शामू लगभग 60 की उम्र का वो कोठी की देखभाल करता था और वाही अपना अचियाना बना लिया था हर महीने उसे तंखा मिलता था देख रेखं करनें का ।

सामु ।(तराली से) बहु आप लोग आ गए । आइए आइए बड़े दिनों बाद आए हो । मुझे जब काल रात खबर किया तो मैंने आज सुबह सब ताम जाम निपटा के आप लोगो के रहने का आयोजित कर दिया हे ।"

तराली ।" काका शुक्रिया आपका । अचानक बच्चो ने जिद की तो अचानक ही आना पड़ा । माफ करना आपको हमने तकलीफ दी ।"

सामू ।" अरे नहीं बहु आप लोग अपने ही घर आए है तो काहे की तकलीफ । आइए मैंने आप लोगो का कमरा सब ऊपर का ही रखा है आइए मेरे साथ चलिए ।"

तपन।"(विशू से) कमीने तूने बताए नही कभी तुम्हारे पास इतनी बड़ी कोठी हे । पहले पता होता तो हर साल यही छुट्टियां मनाने आते । "

तराली ।" इसे भी ठीक से नही याद बचपन में एक आड बार ही ले के आए थे हम इसे ।"

शेतन ।" आंटी आप लोग तो खानदानी अमीर निकले ।"

तराली हास पड़ी ।" अरे नहीं ये कोठी तो हमारे अकेले की नही हे । इसके कोई मालिक हे विशू के चाचा ताऊ बोहोत लोगो का हिस्सा हे इसमें ।"

विशू ।" सुन लिया अब खुश । "

जिशू ।" लेकिन 60 बीघा जमीन तो हे ना । वो क्या कम है साले ।"

दीपाली जिशू के पिछवाड़े में तपली मरती हुई बोली ।" तुम दोस्त हो की दुश्मन हमेशा जगरतें रहते हो ।"

सब लोग हस पड़े । कोठी डबल स्टोरी का था और सबको ऊपर का सिंगल कमरा दिया सामू ने । लेकिन चार बदमाश एक बड़े कमरे में ढेरा जमा लिया । बाकी चारो औरतों ने सिंगल सिंगल कमरा ले लिया ।

सामू ने अपनी पत्नी को बुला लिया कोठी पे खाना बना के खिलाने के लिए उसकी पत्नी का नाम चबेली थी । और उसने रात खाना बना के सबको डाइनिंग टेबल पे पीडोच दिया ।

in the dining table

तराली ।" तुम लोगो को सायेद खाना पसंद नही आया । आज एडजस्ट कर लो काल में इतनेजाम करती हूं । यहां ऐसा ही खाना चलता हे ।"

दीपाली ।" अरे नहीं अच्छा है कितना अच्छा है सब्जी शाक ।"

तानिया ।" हा सही कहा कमसेकम यहां तो ताजा सब्जी मिल रहा है खाने को ।"

शीतल ।" मुझे अपनी गांव की याद आ गई । यही खाना खा के बड़ी हुई हूं ।"

लेकिन इन चारो को पसंद नही था । खाने के आइटम कुछ इस प्रकार था सावल,रोटी घुईया की सब्जी , बैंगन का पकड़ा , पालक की साक , लूफी की कच्ची सलात बगेरा बगेरा ।

जिशू । (विशू से) अबे में ये सब नहीं खा सकता ।"

शेतन ।" ये खाना खाने से अच्छा है में बुखा ही रहूं ।"

विशु चिढ़ जाता हे ।" तो में क्या करू । मुझे क्यों बोल रहे हो । मुझे थोड़ी पता है येहा कचरा मिलता हे खाने को ।"

तपन ।" अबे साले ये तेरा घर है तुझे पता होना चाहिए था । देखा जाय तो हम तेरे मेहमान हे इसलिए अब हमारी मेहमान नवाजी कर और कुछ अच्छा सा चिकन मटन का जुगाड़ कर ।"

चारो औरते खा रही थी लेकिन ये तीनों बस खाने को हाथ लगाए निवाला बनाते रह गए । इन चारो को देख के चारो औरते डांटने लगी ।

शीतल ।" क्या हुआ तुम लोग खाना क्यू नही खा रहे हो ।"

तपन ।" मम्मी हमारा पेट भरा हुआ ही है ।"

तानिया सबकी नजरों से बचा के प्यार भरी नजरो से खाने को बोलती है । और तपन के लिए यही काफी था । और वो खाना शुरू कर देता है ।

तपन को खाते देख ये तीनों उसे गुस्से से देखने लगे और तीनो समझ गए बकरा क्यूं घास खा रहा हे ।

तराली ।" बेटा आज खा ले काल अपनी अपनी पसंद का खाना बना के देंगे हम खुद ।"

दीपाली ।" बेटा ज़िद्द नहीं करते प्लीज़ आज खा लो काल हम बना देंगे ना । देखो तपन बेटा कैसे खा रहा हे ।"

विशु ।" वो तो खायेगा ही । कमीना सिंधी साला ।" और तानिया की तरफ देखती है ।

तानिया विशू को प्यार भरी गुस्से से देख के चुप रहने का इशारा करती है । विशू भी मुस्कुराता है अब भला वो क्या कर सकता था । प्यार के खातिर दोस्त का साथ छोड़ दिया था तपन ने ।

जिशू ।" ओए चलो हम बाहर खा के आते हे ।"

शेतन ।" हा चलो । "

तीनों उठ जाते है और तीनो को काफी रोका जाता है लेकिन तीनों धित्त कहा सुनने वाले थे ।

शेतन आखरी बार तपन से पूछता है ।" तू आ रहा है या नही ।"

तपन कुछ बोल नही पता बस बेबसी से अपना मुंह छोटा करता है बच्चो जैसा । शेतन को हसीं आ जाता है । तानिया मन ही मन मुस्कुराती हे (बेबी आज तकलीफ सह ले काल सुबह तुम्हारी पसंद की तंदूरी चिकन बना के खिलाऊंगी )

तीनों बाहर खाने चले जाते है । वाहा गांव में तो कोई रेस्ट्रो मिलने से रहा वो भी रात के 9 बजे तो गांव से बाहर एक ढाबे पे दबा के भर पेट खा के आते है और साथ में एक खांबा(व्हिस्की) भी ले के आता है ।

Four friends in the same room

तपन ।" अच्छा किया ये ले आया । यहां ठंड भी हे । मजा आयेगा गर्म गर्म होने में जल्दी पैक बना ।"

विशू ।" साले तुझे देना ही नही चाहिए था । प्यार मिल गया अपने दोस्ती छुट्ट गई साले ।"

तपन ।" अरे मुझे लगा खाने को ऐसे अपमान नेही करना चाहिए इसलिए खा लिया ।"

जिशू गुस्से से उसको लात मारता है ।" साला हरामजादा मेने देखा था मम्मी ने इशारा किया और तूने खाना शुरू किया । "

हां हां हां हां हां हां हां हां

चारो पेक पीने लगे । सुरूर में मस्ती मजाक में गप्पे लड़ाते हुए एंजॉय कर रहे थे । चेतन ने गंभीर मुद्दा छेड़ दिया अचानक ।

चेतन ।" जिशु तो क्या सोचा हे तूने ।"

जिशू ।" क्या किस बारे में "

विशु ।" तपन तू जा दूसरे कमरे में "

तपन ।" अरे मुझे क्यू निकल रहे हो तुम लोग ।"

शेतन ।" साले तेरी मम्मी के बारे में बात करना हे तुझे अच्छा लगेगा सुनने में तेरी मम्मी को जिशू कैसे पटाने वाला हे ये सुन के ।" और तपन को आंख मार के इशारा करता है (तानिया आंटी के कमरे में जा)

तपन समझ जाता हे और खुश होते हुए कमरे से बाहर चला जाता हे ।

विशू ।" तो बता जिशु कोई प्लान है "

जिशू ।" अभी तक कुछ सोचा नहीं अभी जा के बात करता हूं क्या ।"

चेतन ।" अबे साले अभी जायेगा तो तुझे फिर गलत समझेंगे फिर तेरा इमोरेसन खराब होगा और तेरी लव स्टोरी द एंड यही पे । जिस मकसद से यहां आए है हम तू वो मकसद एक चुटकी में खतम करना चाहता है ।"

जिशु ।" तो और में क्या करू ।"

शेतन " एक काम करना । सबको पता है शीतल आंटी सुबाह सुबाह उठ के जॉगिंग करती है । तू काल सुबह 5 बजे से पहले तैयार रहना आगे थोड़ी दूर चुप के रहना और फिर उनको ज्वाइन करना । और प्यार से समझा ।"

जिशु हास के बोला ।" बात तो ठीक लेकिन वो थापड़ बड़ी जोर की मारती है । ठंड में कनपट्टी लाल कर दी तो बोहोत दर्द होगा ।"

हां हां हां हां हां हां

तीनों फिर सो जाते है । विशु और चेतन का कोई लेना देना नही था सफर का थकान था तो दोनों नाक से चिति बजाने लगे नींद की आगोश में जाते है । लेकिन जिशू का थकान किसी अरमान ने मिटा दिया था । बस था तो इंतजार किसी चीज का किसी वक्त का । और वो वक्त यही था जब दोनो सो जाए ।

जीशु अपनी आलौकिक का उपयोग करते हुए मिनी सेकंड में शीतल की कमरे में प्रकट हो गया । उसकी दिल की धड़कन तेज थी एक दर था की शीतल अभी तक जाग तो नहीं रही है ।लेकिन नहीं शीतल सो चुकी थी । एक करवट में सकून से सोई हुई थी गर्दन तक उसकी कंबल थी ।

जिशु की होंठो पे एक मुस्कान आ गई शीतल की कुलमुल गालों वाली मासूम चेहरे को देख कर । दिल में तीस सा उठ गया मानो ये पल ऊसके लिए आनंद की सागर हे जिसे हर पल महसूस करना चाहे हर कोई । वो शीतल के शिरहाने में एक घुटना फर्श पर और दूसरा घुटना हवा में मोड़ के बैठ गया बैठ गया । उसके दोनो हाथ शीतल की बिछोना पर थे और हाथो के ऊपर उसका ठंडी(chin) टिका हुआ था ।

एक पलक निरंतर देखे जा रहा था शीतल की प्यारी चेहरे को । उसकी सासें उसे महसूस हो रही थी दिल में एक प्यार उमंग उठी थी । दिल की धड़कन बढ़ गया था उसे छूने का मन हो रहा था मन हो रहा था की वो अपनी उंगली उसकी शीर पर सेहला दे लेकिन चाह कर भी मजबूर था बेचारा जिशू । (कितनी प्यारी लगती हो आप । काश में आपकी होंठो पे फिर से वोही मुस्कान ला पता । बोहोत बुरा हूं ना में अपने फायदे के लिए आपकी खुशियां चीन लिया मैने । बोहोत बेगरियाद इंसान हूं ना में आपके लिए । बोहोत तकलीफ दी है ना आपको मैने । काश मुझे ये शक्ति ना मिल के समय को आगे ले जाने का शक्ति मिली होती तो में आपकी मुस्कान बापच ले आता । ओह में भी कितना मतलबी हूं जब आपकी खुशी चीनी थी तब तो में साधारण अवस्था में भी आपकी आबरु लूटा था और जब आपकी होंठो पे हांसी लाना चाहता हूं तो में आलौकिक शक्ति के इस्तेमाल करने की कशिश कर रहा हूं । कितना मतलबी खोखला इंसान हूं में । नहीं मुझे अपने आप को सुधार के आपके लिए योग्य पुरुष बनना होगा और तभी में आपको अपनी मुस्कान बपाच ला पाऊंगा । और सायेद तभी आप मुझे दिल से माफ कर पाओ ।"

नाजाने कितनी देर वो शीतल को देखता रहा । जब घुटने दुखने लगे अकड़ आ गए तब वो बापच वाहा से गायब हो के अपने कमरे में दोस्त के साथ बिछौना में लेट गया । लेकिन नींद उसकी कमर के ऊपर छत पर थी जिसको वो निहार रहा था कोई सोच विचार के साथ ।
 
Update 35


Tania's room view

तपन और तानिया दोनो कंबल के अंदर बिस्तर पर जैसे नया जोड़ा हो । जैसे शुरू के रातों में एक दूसरे के बिना नींद ना आता हो ना चैन मिलता हो । बिस्तर में दोनो एक दूसरे की सामने करवट में एक दूसरी की आखों में खोए हुए एक दूसरे की मीठी बातों में प्यार जताते हुए । हर नजर में प्यार मेहसूस करती हुई दोनो एक दूसरे के सासों को महसूस करते हुए कभी गाल सेहलाते हुए कभी एक दूसरे जिस्म को छू के प्यार जताते हुए । कभी बिन बातों से ही मुस्कान निकाल जाती थी दोनो की । मीठी छेड़ छाड़ करते हुए ।

लेकिन दोनो की नंगे बदन साफ़ बता रहा था की दोनो ने अब तक तो कामक्रीड़ा का आनंद ले चुका हे अभी हाल फिलहाल में । लेकिन दोनों मस्ती अभी तक सुस्त नही हुई थी । यौन क्रीड़ा के कीड़े अभी तक जिस्मों पे रेंग रही थी ।

तानिया ।" बेबी तुम ये सब बाते जिशू और बाकी दोस्तों के साथ शेयर तो नहीं करते हो ।"

तपन सरारत से ।" किस बात की बताने की बात कर रही हो आप ।"

तानिया ।" बदमाश । और आप आप क्यू करते रहते हो । जब प्यार करने में उम्र का लिहाज नहीं करते हो तो निभाने में क्यू लिहाज करते हो । कितनी बार कहा है कि आप मत कहा करो ।तुम सुनने में अपना लगता है ।"

तपन माफी की लिहाज से ।" Ok तुम । और वो सब बाते में क्यूं बताऊंगा । दोस्ती अपनी जगह और प्यार अपनी जगह । हर चीज का मिश्रण थोड़ी होता है । हमारी प्यार की निजी बाते उनको क्यू बताऊंगा । भूलो मत में तुम्हारी कितनी इत्ज्जत करता हूं ।"

तानिया उसके होंठ चूम के ।" उमआह्हह मेरा बेबी । I love you ..... "

तपन उसकी शीर हाथो में ले के गाल खा जाता हे ।" मन करता है तुम्हारी गाल खा जाऊं । कितनी soft है एक दम मक्खन honey जैसा । "

तानिया ।" बेबी एक बात करनी थी अगर बुरा ना मानो तो ।"

तपन उसके ऊपर चढ़ कर उसकी गर्दन चूमने लगता है ।" हा बोलो ना बिंदास मेरी प्यारी जान "

तानिया ।" आह्ह्ह अगर जिशु और तुम्हारी मम्मी एक हो जाय हमारी तरह तो तुम्हे कोई प्राब्लम तो नही होगी ना ।"

तपन ।" नही जान मुझे अब कोई प्राब्लम नही होगा मुझमें समझ आ गई है । हा अगर मम्मी भी मान जाय तो अच्छा है लेकिन मम्मी तो हम सबको ठीक से माफ भी नही कर रही है ।"

तानिया ।" करेगी करेगी थोड़ा समय लगेगा । माफ कर दिया कहती है पर दिल में अब भी मलाल है । में भी तुमसे प्यार करने लगी हूं अब तो तुम मेरी एक लत बन चुके हो । तुम्हारे बिना मुझे चैन नही मिलता । तुम्हारे मैसेज हर घंटे ना मिले तो में पागल हो जाती हूं ।"

तपन ने उसकी कंधा चाटते हुए जवाब दिया ।" अच्छा । मेरी भी यही हालत हो जाती है लगता है हम दोनों ही प्यार के भूखे है ।"

तानिया ।" हा सही कहा इसलिए मुझे जी भर के प्यार करो ।"

तपन ।" मन करता है की तुम्हे थका दू । इतना प्यार करू की बिस्तर से ना उठ पाओ तुम ।"

तानिया मुस्कुराती है ।" मौका है 20 दिन मिले है तुम्हे ।"

तपन सरारती मुस्कान देता है और तानिया टांगो के बीच कमर रख के धक्का मारता है । तानिया आंख बंद कर के गहरी सांस की आन्ह्ह्ह निकालती है और सुखद मुस्कान से अपनी कामुक भाव से तपन को खुशी देती है ।

तपन ।" आज काल तुम्हे ज्यादा दर्द नही होता है ।"

तानिया ।" उन्न्ह्ह तुम्हारे पप्पू ने आह्ह्ह्ह जगह बना लिया है आह्ह्ह्ह ।"

दोनो एक दूसरे को भरपूर सुख देने की प्रयास करते है । एक दूसरे को बाहों में कस लेते है । तपन धक्कों की बरसात कर देते है जिससे उसकी जांघ तानिया की बड़ी चूतड़ से टकराने की आवाज गूंजने के साथ उसकी बेइंतेहा सिसकारियों के साथ मधुर कामुक धुन गुनगुनाते हे ।

" बेबी इतनी आवाज मत करो कोई सुन लेगा "

" आह्ह्ह्हह कोई नही सुनेगा उन्न्ह्ह्ह । "

" उम्म्म फिर भी तुम बोहोत आवाज करती हो ।कभी कभी दर लगता है तुम्हारे सात ।"

" उम्मम्म उह्ह्ह्ह तुम मेरे जगह आ के आअह्ह्ह देखो और रोक पाते हो की नही आह्ह्ह । "

" इतना मजा आता है क्या आह्ह्ह्ह्ह "

" हांहह बोहोत ज्यादा युन्ह्ह ही चोदो मुझे आह्ह्हह "

" जब तुम चोदो बोलती हो तो मेरे बदन में और ताकत आ जाती है "

तानिया जवाब नही दे पाती क्यू की तपन ताबड़ तोड़ धक्के लगाने चूरू कर देते है जिससे लन्ड चूत की गेहराई के जड़ तक नाप ले आता है और बापच रफ्तार से घुसता है । तानिया बिलबिला उठती है लेकिन दर्द या तकलीफ से नही बल्कि आनंद से हलकी थोड़ी तकलीफ तो होती थी कभी कभी जब लन्ड बेधंगा जाता था । चूत तो पहले क्रीड़ा की गीली थी और इस क्रीड़ा में भी तानिया की चूत पानी छोड़ती जा रही थी जिससे यौन क्रीड़ा आनंद दायक और आसान पद्धति हो गया था ।

कमरे में तपन के हाफने की आवाज जो उसकी जोश में दम लगाने की वजह से निकल रहा था और तानिया की चिंखे जो उसकी जिस्म की आनंद कह रही थी की उसे स्वर्ग की सुख प्रदान हो रही है ।

तपन की रफ्तार कुछ देर बाद कम हो जाती है और उसी वक्त तानिया झाड़ जाति हे । वो फिर एक बार थक जाती है ।

" उफ्फफ्फ मर गई और कितनी देर आह्ह्हह्ह "

तपन मुस्कुराया " थोड़ी देर और । ज्यादा खुश मत हो इसके बाद फिर शुरू हो जाऊंगा । सुबह होने तक राउंड मरता रहूंगा ।"

तानिया मुस्कुराती है ।" हिहिही । तुम्हारे साथ वो खुशी भी झेल लुंगी में बस तुम खुश रहो ।"

तपन ।" अंकल भी ऐसे राउंड लेता था ।"

तानिया ।" अरे नही अब तो उनका 4 मिनट टिकना मुस्किल हो गया है बोहोत कमजोर हो गए है "

तपन ।" मतलब अभी भी देती हो माना किया था ना मैने तुम्हे जान ।"

तपन गुस्से में आता है और लंड निकाल के बोहोत जोर से घुसा देता हे । तानिया जोर से चिल्लाती है आई ओ होह्ह हो हो फट गई ।

तपन फिर एक बार दात पिंच के धक्का मारता है जोर दार इस बार भी तानिया चिंख पड़ती है और तपन के कमर में अपनी टांगे कस के बांध लेती है ताकि वो दुबारा ऐसा हमला ना कर सकें ।

तानिया प्यार से बोलती हे ।" मंगल सूत्र उसने बंधा है तो निभानी तो पड़ेगी लेकिन उस मंगल सूत्र की प्यार तुम्हे दे रही हू । कुछ तो त्याग देना पड़ेगा ऐसे कांटे भरे प्यार के लिए । क्यू नेहीं समझते बुद्धू राम ।"

तपन शांत हो जाता है और तानिया की गर्दन पर मुंह छुपाता है और बच्चो की तरह बोलने लगा ।" पर तुम सिर्फ मेरी हो "

तानिया उसकी पीठ सेहलाती हे उसके बाल से खेलती है " कहा ना मैने में बस तुम्हारी हूं ।सिर्फ तुम्हारी बाकी की जिंदगी तुम्हारे नाम कर दी हे मैंने । पर क्या तुम मेरे साथ बाकी की जिंदगी गुजार पाओगे क्यू की दस पंधरा साल बाद तो में बुद्धि ही हो जाऊंगी । कभी कभी लगता है में तुम्हारी जिंदगी बरबाद कर रही हूं ।"

तपन फिर से कमर हिलाने लगता है और आखों से आंख मिलता है तानिया भी उसकी आखों में आंखे डाल के डूब जाती है ।

" बरबाद नही आबाद कर रहे हो मुझे प्यार दे के खुशी दे के ।अब बस करो । मजा लो ।"

" हाय इस मजे के लिए तो पूरी रात तेरे साथ गुजरने को तयार हूं । आह्ह्हह तुम्हारे लंड का स्वाद उन्ह्ह्ह क्या बताऊं बेबी आन्ह्ह्ह । चोदो बेबी चोदो आह्ह्हह्ह "

" तुम्हारी ये गठीला भरी हुई कमल बदन को कस के बाहों में भर के तुम्हे चोदने में बोहोत मजा आता है जान ।"

" आन्ह्ह्ह तो चोदो ना आह्ह्ह्ह्ह तोड़ दो मुझे यूफफ्फ्फ आह्ह्ह । "

" ऐसे बोलो मत कच्चा चबा जाऊंगा तुझे "

" अच्छा । ऐसा हे तो उन्ह्ह्ह्ह मेरी चूची को पियो ना और काटो ओह बोहोत मन करता हे उन्ह्ह्ह इन्हे मसलवाने को । मसलों नाहःह "

तपन बैंड हो जाता है और तानिया की चूची जो तरबूज जैसी बड़ी और गूंथा हुए आते जैसी नर्म थी उसको दोनों हाथो में मसलते हुए चूसने लगता है दात भी दबा देता हे चूसने की लय में ।

तानिया मस्ती में तड़प जाति है एक चुदवाते हुए चूची मसलवाने का चुसवाने का सुख दुगनी महसूस करती है और झड़ती है । तपन के बाल खींच खींच के चिल्लाती है ।

ये कामुक रात भर चलता रहा ।और सुबह 4 बजे तपन अपने कमरे में दोस्तो के साथ सो जाता है ।

("ऐसे अपडेट रात को देनी चाहिए थी" हे की नही)
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just joking
 
Update 36


The next morning

हर सुबह नई ताजगी लेकर आती है । हर सुबह दरवाजा खटखटाएगी लेकिन आप सोते रहोगे तो वो निकल जायेगी । आज वो सुबह जिशू के बड़ी ही महत्वपूर्ण था जिसके लिए बेकार था । आज की सुबह यू बेबाजा खामोश हो कर बैठ है नाजाने ख्वाइशों की पतन पतन को ढील देने वाले है या नही । डाली पर चिड़िया कबसे चहचहा रही है अपनी गीत से दुनिया को बोल रही है आपके एक और सुबह एक और दिन पैदा हो गई है । हर सुबह की किरण से फूल खिलते हे लेकिन आज क्या फुल खिलेगा । क्या हर सूर्य की किरणों की तरह अवसरों का प्रकाश होगा आज का दिन ।

जिशु एक बड़े से बरगर पेड़ के आड़ में चुप के मन से प्राथना कर रहा था ।" इतनी शक्ति देना दाता मुझे की मन का विश्वास कोमजोर ना हो ।भूल कर भी कोई भूल होने ना देना हमसे आज़ ।"

अभी भी कोरहा सुबह था सुरज की किरणों की बारिश अभी तक नही हुई थी । अक्सर ऐसी सुबह में लोग शुभकाम के लिए निकलते है या दूर यात्रा पर । लेकिन आज जिशू का जिंदगी का नया पेहलू लिखने जा रहा था जिंदगी की ऐसी परीक्षा जिसमे ना तो किताबी ज्ञान का एतबार था ना हीं रट्टा मारने का उपयोग । कुछ था तो अपने दिल को दर्शाना और मेहसूस करवाना ।

खिलखिलाती सुबाह में ताजगी भरा सवेरा फूलो और बहारो के साथ साथ जिशु की दिल में भी रंग भर रहा था । बस सुबाह के चारे चार बजे उठ के ट्रैक सूट शूज और टोपी पहन के तैयार था शीतल से मुलाकात करने । खाली रास्ते पर उसकी नाजाने कब से नजर गढ़ी हुई थी ।

आखिर वो लम्हा आ ही गया । उसके दिल की रानी मॉर्निंग वॉक करती हुई आ रही थी । पेड़ो मे मोजे पहने फ्लेट जुटी रात की वोही नाइटी और बदन पे सॉल ओढ़े इधर उधर नजारे को देखती हुई और खुश नुमा प्रकृति का एहसास करती हुई ।

जिशू ने उसे थोड़ी कदमे आगे जाने दी । और 50 मीटर की पीछे से जॉगिंग स्टार्ट किया और दौड़ते हुए शीतल की बराबर में चलने लगा ।

शीतल उसे देख के सोक गई और अहसहेज हो गई ।(ये कहा से आ गया । क्या मेरा पीछा कर रहा है । है भगवान इसे दूर कर दे इसके चेहरे से ही चिढ़ होती है । नजाने कहां से ये मेरे पीछे पड़ गया । और दिन याद आ गया जो उसके दर्दनाक लम्हों में एक दिन का लम्हा था । )

जिशु शीतल को देख के मुस्कुराने लगा ।" आप इस ठंड में भी मॉर्निंग वॉक के पे निकली है ।"

शीतल तंज कश के ।" क्यूं नही निकालना चाहिए था । तो फिर तू क्यों निकला है ।"

जिशु मुस्कान लाते हुए ।" वो में हफ्ते में 4 दिन जोगिंग करता हूं । सैटरडे और सन्डे को छोड़ के (जूठ । थोड़ा तो जूठ बनता है यारा नहीं तो मजा कैसे आएगा ) अब आप पूछेगी क्यू वीक में चार दिन ही क्यू तो में बता दूं कि में दो दिन बॉडी की मांसपेशियों को आराम देता हूं । आपका पता है हमारी बॉडी को अगर सही मात्रा में आराम ना मिले तो हमारी बॉडी में जो एंटीबॉडी होती है वो ठीक से काम नही करता हे इसलिए ज्यादा मेहनती लोगो को बड़ी बड़ी बीमारी होती है । (साला कमीना कितना फेकता है ) आप रोज उठती है ना जोगिंग करने ।"

शीतल बेचारी देहाती भली भाली सच में उसकी बाते विश्वाश कर बैठी थी लेकिन चिढ़ भी गई थी खास कर जिशू की कातिलाना मुस्कान से ।( मुझे क्या तू दो आराम कर चार दिन आराम करे मर भी जाओ तो भी मुझे क्या ) " तुम जोगिंग कर रहे हो ना तो जाओ ना आगे दौरों । मेरा दिमाग क्यू खा रहे हो ।"

जिशू उसकी तीखी बाते शरबत की तरह पि जाता है । और वोही मुस्कान लिए बोला ।" अरे में 4 किलोमीटर दोर के आया इसलिए थक गया हूं । तो आपके साथ पेडल ही चलूं तो अच्छा है ।"

शीतल मुंह फेर लेती है (उसे चिढ़ तो रही थी लेकिन जिशू के मुस्कान उसकी दिल में उतर रही थी जो सायेद उसे एहसास ही नही था)

जिशू ।" कितनी अच्छी view है ना सूरज दिखाई देते तो और अच्छा नजारा आता । हमारे शहर में ऐसा नजारा कभी नही दिखते । बस पार्क में ही थोड़ी बोहोत हरियाली दिखाई देती है वो भी एक तरह से आर्टिफिशियल बोला जा सकता हे जितना पढ़ो पे कट कूट के डिजाईन के साथ साथ मेडिसिन चिड़कती है कहा उन पधो में प्रकृति रंग ही गायब कर देते हे । हैं ना आंटी मैंने सही कहा ना ।"

शीतल की मुंह में ताला लगी हुई थी मानो बस कोहनी नजरो से घूरती हे और सीधे देख के चलने लगती हे । लेकिन जिशू मायूस नहीं होता है फिर भी कशिश जारी रखता है वो ।

जिशू ।" आंटी आपको तो गांव के बारे में पता ही होगा थोड़ा अपने गांव के बारे में बताओ ना । "

शीतल चुप ।

जिशू ।" आंटी आपने एक बार बताया था की जब आपके घर में लड़की की बॉक्स बॉक्स वाला ब्लैक एंड व्हाइट tv ले आया था तो आपके घर में मेला लग गया था । हाहा हां हां "(जिशू खुद ही बुर्बक की तरह हसने लगा)

सायेद शीतल की सेहन शक्ति जवाब दे रही थी । और वो फ्रस्ट्रेशन निकल के चिंखी ।" बस्स्स । बस बोहोत हो गया जब में तुमसे बात नही कर रही तो क्यूं मुझसे जबरदस्ती बात कर रहे हो ।"

जिशू का कलीजा रो पड़ता है बस आखों पे आसू आना बाकी था । उसके कदम वोही थाम जाता है गर्दन झुकाए दर्द से मायूस हो जाता है । शीतल आगे बढ़ जाती है गुस्से में बरबराती हुई ।

कुछ पल जिशू की दिमाग में उलझन आ जाती है आखिर शीतल की हसी को बापच से लाए तो लाए कैसे । हर प्लान फैल होते हुए नजर आ रहा है । हर तरफ निराशा ही निराशा ।

जिशु अपनी जूते रगड़ने लगता है मिट्टी पे और दिमाग के घोड़े डोरने लगता है । और उसकी दिमाग से नही दिल की अंदर आवाज आती हे जिस तरह से तूने उसे चोट दिया हे उसी तू चोट खा तभी वो तुझे समझ पाएगी । जिशु मन में बोलता है हा में तयार हूं चोट के बदले चोट खाने के लिए ।

शीतल कुछ 100 मीटर ही दूर चली थी । जिशू एक हाथ में पत्थर उठता है और घुटनों पे खड़े हो के चिल्लाता है ।" आंटी रूक जाओ नहीं तो में अपने शीर पर पत्थर मार लूंगा ।"

शीतल की कदम बस थामने ही वाली होती है लेकिन दिमाग में आता हे ये एक और इसका नया ड्रामा । और बिना रुके चली जाती रहती हे ।

जिशू फिर चिल्ला के बोलता है ।" आंटी रुको वरना में सच में शीर फोड़ लूंगा ।"

लेकिन शीतल नेही रुकती या फिर एक कान से सुन के दूसरी कान से निकल देती है ।

जिशू ।" आंटी एक कदम भी आगे बढ़ाया तो में अपना शीर फोड़ लूंगा जूठ नहीं बोल रहा हूं ।"

शीतल को कोई फर्क नही पड़ता अपनी कदम और तेज कर देती हे । चेहरे पे कठिन भाव जैसे बिन दया की दिल लिए जा रही थी । जरा भी रहम नही आ रही थी जिशू के ऊपर ।

जिशू अपना हाथ ऊपर उठता है और तेज़ी से अपने शीर पर पत्थर मरता है । फिर एक बार और एक ऐसे उसने पांच बार जब पत्थर मारा तो अपने आप ही कोमजोर हो गया । खून तेजी से वेहने लगे थे । शिर से ऊपर से खून बेह के पूरे ट्रैक सूट भिगोने लगे ।

दर्द से कराह उठा बेचारा ।" आंटी रूक जाओ "

लेकिन शीतल अगले मोड़ ले चुकी थी उसकी कदम नहीं रुक रही थी । वो अब मुड़ कर देखे भी तो जिशू को देख नहीं पाएगी । इधर जिशू की दर्द से मारा जा रहा था ऐसा लग रहा था उसे जैसे जिस्म ठंडा पड़ रहा है जान निकल रही हे धीरे धीरे आंखे बंद हुई जा रही थी ।

तभी एक मच्छी वाला साइकिल पे आते हुए दिखाई दिया कैरियर पे मच्छी का हांडी बांध के साइकिल चला के आ रहा था और आज पास के घरों में आवाज लगा रहा था ।" ए मच्छी ले ले मच्छी मच्छी । ताज़ी ताज़ी मच्छी ताजी ताज़ी पोथी मच्छी "

वो आवाज़ लगाते लगाते देखा एक लड़का रास्ते पे लहू लुहान हुए गिरने की हालत मे है । वो मच्छी वाला किस्मत से एक दयालु इंसान निकला । वो तुरंत ही साइकिल खड़ा कर के उतरता हे और जीशू के पास जा के जिशू संभालने लगा और उसे दर भी लग रहा था ।

मच्छी वाला ।" या खुदा ये क्या । तुमहरी ये हालत कैसे हुई ।"

जिशु की आंखे आधी खुली आंखे बस उसे एक नज़र देखता है ।

मच्छी वाला छूट बूट खो देता है वो क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा था उसे ।" लड़के तुम कहां रहते हो । इस गांव के तो नही लगते हो ।"

जिशु बस इतना ही बोल पाता है "कोठी" और वो बेहूस हो जाता है मच्छी वाले के गोद में

मच्छी वाला दर जाता है और उसे हिलाते हुए आवाज देने लगता है लेकिन जिशू होश में नही था । वोही उस रास्ते से एक सब्जी वाला ठेला गाड़ी ले के बाजार में सब्जी मंडी लगने जा रहा था वो भी जिशू को देख के जिशु के पास आया ।

सब्जीब्वाला ।" ये भाई ये क्या हे इसका इतना खून कैसे निकल रहा है । हे भगवान कही इसे किसी ने एक्सीडेंट कर के तो नही भाग गया ।"

मच्छी वाला ।" भाई जरा मदद करो ना बेचारा मार जायेगा ।"

सब्जीवाला ।" मदद तो कर दूं ऐसे किसी की जान कैसे जाने दूं । पर ये हे कोन कुछ बोला क्या ।"

मच्छी वाला ।" बस कोठी बोला और बेहूस हो गया है । आस पास कोई हॉस्पिटल भी नही हे क्या करू अब । मेरे ही गोद में बेहूस हो गया ।"

सब्जी वला दिमाग पे जोर देते हुए ।" याद आया वो स्कूल के पास पुरानी कोठी हे ना सायेद वाहा लोग आए होंगे और ये उन्ही में से ये एक लड़का होगा । "

मच्छी वाला ।" हो सकता है आते वक्त मेने कोठी पे एक गाड़ी भी देखा था । एक काम करते है इसे वाहा ले जाते है वो लोग हॉस्पिटल में ले जायेंगे गाड़ी से ।"

सब्जी वाला ।" हा हा सही कहा इतना तो हम कर सकते हे । देखो तो कितना खून बह रहा हे । चलो एक काम करो मेरे हाथ गाड़ी पे इसे लिटा दो ।"

सब्जी वाला अपना चारा सब्जी एक पेड़ के नीचे रख देता है और मच्छी वाला भी अपना साइकिल पेड़ के नीचे रख के जिशु को हाथ गाड़ी में लिया देता है और दोनो डोरते हुए कोठी पोहोचाने हाथ गाड़ी को धक्का दे के ले जाता । जिशू अज्ञान हो कर पड़ा रहा ठेलें के ऊपर ।

5 मिनट में दोनो कोठी के गेट पे हाथ गाड़ी रोक कर दोनो गेट पे हाथ मारता हे और जोर से चिल्लाता है ।" दरवाजा खोलो । जल्दी खोलो । खोलो दरवाजा ।"

शामू गेट पे ढांग धांग आवाज सुन के जाग जाता है ।" कौन आया इतनी सुबह सुबह और दरवाजा काहे पीट रहा है ।"

शानू अपने कमरे से निकल कर गेट का एक पल्ला खुलता हे और जिशू को लहू लुहान देख के मुंह से " इसे क्या हुआ । कैसे हुआ ।?"

और मालकिन मालकिन चिल्लाते हुए कोठी की ऊपरी मंजिल पे जाता हे और सबको चिल्ला चिल्ला के आवाज दे के उठा देता है और डरते हुए बस " जिशु जिशू जिशू को जिशु को बोलता है"

सभी लोग नींद से उठ के आती हे और " क्या हुआ जिशू जिशू को ।"

शामू ।" जिशू बाबा नीचे । नीचे ।" घबराहट के मारे वो कुछ बोल ही नहीं पा रहा था ।

और वो नीचे दोरता है बाकी सभी नीचे आ जाता है । और जिशू को लहू लुहान देख के सबकी चीख निकल जाती है " जिशू " तीनों औरते रो पड़ती है । और तीनो दोस्त उसे जगाने में लगते है ।

शामू ।" मालकिन जिशु बाबा को हॉस्पिटल ले चलो ।"

तानिया रो रो के ।" हा हा जल्दी ले चलो मेरा बेटा ।"

विशु ।" पर काका यहां हॉस्पिटल कहा है ।"

शामू ।" गांव में नहीं है गांव में सिर्फ दबाखाना है हॉस्पिटल गांव से बाहर मिलेगा ।"

तपन गुस्से से चिल्लाता है ।" तो तू भी चल ना बोल क्या रहा हे ।"

सामू सोक जाता है बस हा में शीर हिलाता है । मच्छी वाला और सब्जी वाला दोनो बस तमाचा देख रहे थे । वो लोग भी क्या करे उनसे कोइ गुना ज्यादा उनके अपने फिक्र कर रहे थे ।

आखिर में जिशु को गाड़ी में बिठा के ले जाता है हॉस्पिटल । कोठी खाली रह जाता है । मच्छी वाला और सब्जी वाला खुद ही गेट बंद कर के अपने काम को निकल जाते है ।
 
Update 37


Vishu's villa (कोठी)

शीतल घर लौट के आती है । वो पूरी कोठी सान मारती हे लेकिन किसी को मजूद नहीं पाती वो । (अरे कहा गए सब लोग । सब लोग एक साथ तेहलने तो नहीं गए है ) वो अपने कमरे में जा सबसे पहले फोन उठाती है और दीपाली को कॉल लगाती है ।

एक लंबी रिंग के बाद उसका कॉल रिसिव होता हे लेकिन दीपाली नहीं तराली उसकी फोन रिसीव करती है ।

तराली जिज्ञासा और परेशान स्वर में " शीतल कहा थी तू "

शीतल उसकी आवाज भांपते हुए ।" क्यू क्या हुआ और तुम लोग कहा हो । यहां तो कोई भी नहीं है कोठी पे । शामू काका भी नही हे "

तराली ।" तू पहले बता कहा गई थी "

शीतल ।" क्या हुआ तू इतनी परेशान क्यूं लग रही है । में मॉर्निंग वॉक पे गई थी तूझे तो पता ही है में हर सुबह वॉक पे निकलती हूं ।"

तराली ।" परेशान । तुझे पाता नही हे क्या । पाता भी कैसे होगा तुझे तू तो थी ही नहीं ।"

शीतल को भाप कुछ भाप होती है कुछ तो हुआ है ।" अरे पर हुआ क्या है ये तो बाता ।"

तराली ।" जिशु का सायेद एक्सीडेंट हुआ हे । हम उसे हॉस्पिटल ले के आए हे शीर पर गहरी छोट आई है । 12 टाके लगे हे शीर पर ।"

शीतल बौचक्का रह जाती है ये सुन के । जैसे पेड़ो तले जमीन खींचक जाती है । उसके हाथ से मोबाइल छूट जाता हे और नीचे कोई टप्पा खा के गिरती है और फोन ऑफ हो जाती है । शीतल धडम से बिस्तर पर बैठ जाती है । आखों के सामने भले ही कमरे का नजारा था लेकिन उन नजरो में जिशु का दुख और दर्द दिखाई दे रही थी जो वो तब समझ ही नही पाई थी । (उसने सोच में ऐसा किया सचमुच अपने शिर फोड़ लि उसने । और एक बार भी मुड़ कर नहीं देखा । ये उसने क्या किया पागल लड़का । उसे कुछ हो ना जाए है प्रभु उसकी रक्षा करना । क्या पागल लड़का है जिशू मुझे उसे संभालना चाहिए था समझना चाहिए था उफ ये लड़का क्यू ऐसा किया । क्या सच मे उसके मन में )

शीतल जिशू के पास जाने के लिए बेकरार हो जाती है एक तड़प उसके दिल में जाग जाती हे । और वो जल्दी जल्दी में बाथरूम में जा के बिना नहा धो के बस मुंह हाथ धो के कपड़े चेंज करती है और जिशु के पास जाने के लिए निकल पड़ती है । लेकिन तभी उसे याद आया की उसे तो पता ही नही हे जिशू को किस हॉस्पिटल में ले के गया हे । और वो दौर कर अपनी कमरे जा के टूटी हुई मोबाइल उठाती हे देखती है उसका मोबाइल अब ऑन होने से रहा नही । वो परेशान हो कर बापच मोबाइल को पटक के जमीन पे रोने लगती है ।

हर आसू की बूंद में मूल सिर्फ़ और सिर्फ़ जिशू की फिक्र थी । दिल में दुआ थी की जिशू को कुछ हो ना जाए । एक पछतावा थी की उसने खुद को वाहा पे रोका क्यू नही जब जिशु उसे रुकने को बोल रहा था और कह रहा था की नही रुका तो वो खुद का शीर फोड़ लेगा । कैसे क्यू उसका विश्वास नही किया उसने क्या इतनी नफरत थी जिशु के लिए ।

शीतल दुबारा गेट पे जाती हे । सुबाह के 6 बज रहे थे और उस वक्त रास्ते पे कोई नजर नहीं आ रहा था । एक तो उसे कोई ऑटो या टैक्सी नही मिल रही थी जो वोहा पिछड़ी गांव में मिलना मुस्किल ही था । और ऊपर से उसे पता भी नही हे किस हॉस्पिटल जाना है ।

वो बस इंतजार करती रही की कोई सवारी उठाने वाला गाड़ी मिल जाए बाकी पूछ ताछ कर के किसी से हॉस्पिटल के बारे में पता कर लेगी । लेकिन एक प्राणी भी नही मिल रहा था गांव में सहल पहल दिखाई ही नहीं दे रही थी ।

कुदरत बनाने वालो को भी शीतल के ऊपर तरस आता है और इसकी मदत के लिए एक औरत और उसके साथ एक बच्चे को उसे रास्ते भेजती हे ।

शीतल उस एक बच्चे को गोद में ले कर आती हुई औरत को देख कर बोहोत खुश हो जाती है और इस औरत की रास्ता काट देती है । वो औरत शीतल की आखों में परेसनी और आसूं साफ देख पा रही थी और उसे भी दया की भाव आ जाती हे ।

शीतल ।" बहन जी आपके पास फोन हे क्या । मुझे एक कॉल करने दीजिए ना प्लीज बोहोत जरूरी है ।"

औरत हाथ में रखी अपना मोबाइल शीतल को दे के बोलती है ।" आप रो रही हे कुछ हुआ है क्या ?"

शीतल ।" हा वो मेरे .......... मेरे बेटा हॉस्पिटल में है ।"

और वो तपन के नंबर पे कॉल लगाती हे जो उसे पहले से याद हे । वो औरत उसे देखती रहती है ये सोच के की क्या हुआ होगा इसके बेटे को ।

तपन फोन उठता है ।" हेलो "

शीतल ।" बेटा में हूं में । "

तपन ।" मम्मी आप । "

शीतल ।" हा में । बेटा वो कैसा है ठीक तो है ना ।"

तपन ।" हा ठीक हे । मम्मी आप दोनो के बीच क्या हुआ था ।"

शीतल के पास कोई जवाब नही थी उस सवाल की । " कौनसे हॉस्पिटल ले गए हो उसे ।"

तपन ।" गांव में कोई हॉस्पिटल नहीं था तो गांव के बाहर एक हॉस्पिटल पे ले कर आया हूं ।"

शीतल ।" बेटा तुम मुझे लेने आओ यहां । मुझे कोई गाड़ी कोई ऑटो नही मिल रहा है । प्लीज लेने आ जाओ ।"

तपन देर जवाबी में बोला ।" ठीक हे में अभी जाता हूं आप बस आधा घंटा रुको ।"

शीतल खुश हो कर ।" हा में यही हूं । आ जाओ ।"

शीतल फोन रख के औरत को बापच देती हे ।" बोहोत बोहोत धन्यवाद आपका । "

औरत ।" शुक्रिया की कोई बात नही जी । वैसे हुआ क्या है ।"

शीतल ।" जी मेरा एक भतीजे का सुबाह एक्सीडेंट हुआ है और वो हॉस्पिटल मे हे ।"

औरत ।" आप परेशान मत हो सब ठीक होगा मालिक देख रहा है आपके लिए दुआ करूंगी । चलती हूं ।"

शीतल ।" हम्मम "

औरत अपने बच्चे को गोद में लिए चली जाती है । क्या कायनात जिशू और शीतल को मिलाने के लिए ये खेल खेल रहा है । शीतल को इंतजार के हर एक पल काटे की तरह चुबती हुई महसूस हो रही थी ।

वक्त आज तक किसी के लिए कहा रुका है आधा घंटा बीत गया और तपन अकेले ही कार ले के आ जाता है । जैसे ही यू टर्न ले के कार रोका शीतल तुरंत बैठ गई ।

शीतल ।" कितनी छोट लगी हे उसे । "

तपन कार आगे बढ़ाते हुए ।" छोट तो ज्यादा ही आया है बोहोत खून बह चुका है । "

शीतल को एक दर लगने लगी ।" क्या वो ठीक हे ।"

तपन अपनी मम्मी को आखों में देख के बोला ।" फिलहाल तो होश में आया है डॉक्टर ने टाके लगा के इलाज कर दिया हे । लेकिन हुआ क्या था । वो बोल रहा हे की जोगिंग करते समय पत्थर से टकरा गया था और गिरने से किसी चीज से चोट आ गई । मुझे पता हे वो जूठ बोल रहा है ।"

शीतल नज़रे चुराने लगी ।" वो वो ।"

तपन ।" अब आप भी जूठ मत बोलना प्लीज मुझे सच जानना है ।"

शीतल थोड़ी संकोच के साथ पूरी कहानी बाता देती है । तपन जिशू के ऊपर गुस्सा हो कर ।" ये जिशू भी ना ।"

शीतल ।" मुझे क्या पाता था वो सच में ऐसा कर लेगा ।"

तपन ।" मम्मी आप उसे जानती हो वो कितना जिद्दी हे । "

शीतल कुछ याद कर के ।" बेटा उसे तो आलौकिक शक्ति मिली है ना ।"

तपन ।" हा तो क्या वो इससे इंसान नही बन जाता क्या । हम चारो की अलग अलग शक्ति है उसे तेलीपोर्ट होने की शक्ति मिला हे ना की पत्थर जैसा शरीर बनने की । "

शीतल ।" माफ करना मेरा वो मतलब नही था ।

तपन गंभीर हो कर ।" मम्मी आप समाज की नजरो से देखोगी तो कभी आपको खुद को खुशी नहीं मिलेगी । अपनी नजरिए से देखो मम्मी बस एक बार देखो अपनी मन की नजरों से । आपकी आंखों में दिखती है जिशू के लिए प्यार ।"

शीतल शर्मा जाती है अपने बेटे के बातों से । और वो दोनों आधे घंटे मे हॉस्पिटल पोहोच जाते हे पूरे रास्ते तपन अपनी मम्मी को प्रेम अनुभवी गुरु की तरह अपनी मम्मी को समझाए जा रहा था ।
 
Update 38


Hospital

शीतल वार्ड में डोरी भागी चली जाती है लेकिन एक नर्स ने उसे रोक लिया । शीतल को दीपाली और तराली समझती हे चारा कुछ लेकिन एक नजर जो शीतल को खा जाने वाली नजरो से देख रही थी । शीतल को उस नज़र का एहसास होती है की उसने उसकी बेटे की ये हालत कर दी है । शीतल को एहसास होता है जिशू का दोषी वो है । वो तानिया को माफी की नजर से देखती है लेकिन तानिया उससे मुंह फेर लेती है एक शब्द भी नहीं बोलती । तानिया दुख में थी और वो जिशू का दुर्दासा की जमीदार शीतल को समझ रही थी ।

दीपाली नर्स से कहती हे ।" प्लीज इसे एक बार मिलने दीजिए ।"

नर्स ।" देखिए आप लोगो को पहले से कह दिया है इतने लोगो को हॉस्पिटल एलाऊ नही करती है मिलने को । और आप है की यही डेरा जमाए बैठे हे । बार बार कह रही हूं कमसे कम आप हॉस्पिटल के बाहर जा के रुकिए । कैफेटेरिया में भी आप लोग रूक सकते हे ।"

खेर काफी निवेदन करने के बाद शीतल को जिशू से मिलने दिया जाता है । तपन , विशू , और शेतन एक दूसरे को इशारा करता है वो इस बात समझते हे अब तोता मैना को अकेला छोड़ देना चाहिए और तानिया, तराली,दीपाली को हॉस्पिटल के बाहर ले जाता है ।

शीतल जिशू को बेड पे अध लिया देखती हे जिसके शिर की ऊपरी हिस्से में मोती बेंदेज बंधा गया था । लेकिन जिशू के चेहरे पे ये क्या । शीतल को देखते ही बड़ी सी मुस्कान ।

शीतल की आसू निकल जाती हे और जिशू के बेड पे बैठ जाती है । जिशू को बस निहारने लगती है प्यार से ।

जिशु मुस्कुरा कर ।" आपकी आखों में आसू अच्छे नही लगती ।"

शीतल भावुक हो कर ।" तो फिर आसू आने क्यूं देते हो । क्या बिगाड़ा मेने तुम्हारा जो मुझे इतना छटा रहे हो । क्यूं किया ऐसा खुद को छोट पोहोछा के क्या साबित करना चाहता था । कबीर सिंग बनना चाहता था तू दारा रांग दारा रांग करना चाहता था तू हा । दिखा दी ना अपनी सड़क छाप आशिकी । तुम्हे क्या लगा मुझे खुशी होगी और में मान जाऊंगी हा । मेरे दिल से पूछ क्या महसूस कर रही हूं में । जब तू मिला था अपनी मम्मी की गोद * बसर का मिला था । यूं कर के गोद में लिया था तुझे और शर्मा के बापच अपनी मम्मी के गोद में गया था तू लेकिन मैने भी हार नही मानी और तुझे चॉकलेट डे के माना के अपनी गोद में खिलाया तेरे कमल गालों को दबाया । वो एहसास आज भी याद है मुझे जब तू मेरे गोद में खुशी से मुस्कुराया तब कितनी खुश हुई थी में । और आज ये सिला दिया मेरे प्यार का हा खुद को छोट पोहोचा के मेरे दिल में घाव भर दिया और ऊपर से एक मां की नाराजगी । तेरी मम्मी भी अब मुझसे नाराज़ हो गई हे ।"

जिशु पहले कबीर सिंह वाली बात पे मुस्कुराया और गंभीर हो के दिल की अल्फाज बयां किया ।" गलती हो गई क्या करू आप जैसा समझदार जो नही हूं । सही कहा में बस आपको दुख पोहचाना जानता हूं आपकी होंठो पे हसी लाने का जनता ही नही में । इसलिए तो आप मुझसे नाराज़ है माफ नही कर पा रही हे मुझे ।बोहोत दुख दिया है मैने आपको पर और दुख नही दूंगा में आपको ये मेरा वादा हे आपसे । में कभी आपको अपना चेहरा तक नहीं दिखाऊंगा । "

शीतल थप्पड़ की इशारा करती हुई ।" मारूंगी एक रख के । खुद को बोहोत बड़ा एहसानमंद हीरो समझ रहा है । "

जिशु आसू पोछ के उसका माथा चूम लेती हे । उसकी जुल्फे जिशू के चेहरे पे रोनौक लाने का काम करती है । दोनो की नजरे मिलती है करीब से और धीरे धीरे शीतल उसे देखती हुई सीधी हो जाती है । " बोहोत दर्द हो रहा है ।"

जिशु मुस्कुरा के अपनी दिल पे हाथ रख के बोला ।" पर यहां ज्यादा दर्द हो रहा है । इसका मलहम मुझे नही मिल रहा है ।"

शीतल सरारत से ।" मलहम बताओ में ला के दे देती हूं ।"

जिशु ।" ये तो इस दर्द की इलाज करने वाली ही जानती हे की कौनसा मलहम लगाना है । "

शीतल की मुस्कान बड़ी हो जाती हे और प्यार से उसे देख के उसकी तरफ झुकी चली जाती है और जिशु के होंठो के करीब होंठ रख देती है और चूमने का भाव कर के नीचे सड़क के जिशू के दिल पर चूम लेती है । जहा जिशू की धड़कन बढ़ गई थी की शीतल उसके लबों को पीने वाली है वोही शीतल की सरारत देख के हांसी निकल जाती हे । और शीतल को भी हांसी आ जाती हे अपनी शरारत पर ।

जिशू ।" यही हांसी तो में देखना चाहता था कब से पाता नहीं कहा गायब हो गई थी । "

शीतल ।" बस अब यहीं हसी देखने को मिलेगी । आखिर मेरा दिल जीत ही लिया तूने जिद्दी कही का ।"

दोनों बस आखों में आखों डाल के देखते रहते हे होंठो में मुस्कान लिए । जैसे आखों से दिल की हजारों बाते कह रहा हो ।

जिशू प्यार से शीतल की गाल सेहला देता हे जिससे शीतल को उसकी मजबूत हाथों का एहसास से उसकी आंखे बंद हो जाती हे एक पल के लिए ।

शीतल उसका हाथ थाम लेती है और चूम लेती है ।" सॉरी "

जिशु ।" प्लीज मत कहो ऐसा । मुझे शर्मिंदा ना करो । "

शीतल ।" पर आज हद पार कर दी मैंने ।"

जिशू ।" कुछ ना कहो । बस मेरी छीने में शीर रख दो आप मुझे आपको महसूस करना है दिल से लगा कर ।"

शीतल झुक जाती हे और जिशु छोड़ी छाती पे गाल रख के जिशू की दिल की धड़कनों को सुनती रहती है । जिशु उसकी एक पीठ पे रख देता है और दूसरा हाथ रेशमि बालो पे उंगलियां फिराने लगता हे । तभी उसकी नजर शीतल की सुन्न गले पर पड़ता हे ।(आंटी ने मंगलसूत्र नहीं पहनी है आज)

जिशु ।" आंटी आपने मंगलसूत्र नही पहना है आज ।"

शीतल कुछ पल रूक के ।" उस दिन के बाद कभी पहनी नही जो तूने उतारा था ।"

जिशु ।" अगर में आपको नया मंगलसूत्र पहनाऊँ तो पहनोगी ।"

शीतल उसके तरफ देखने लगती है प्यार से ।" क्यूं ।"

जिशू ।" में आपका नया पति जो बन जाऊंगा । पहनाने दोगी मुझे ।"

शीतल मुस्कुराती है ।" मुझे ऐसा अकरू पति नहीं चाहिए ।"

जिशू मुस्कुरा कर ।" आप सीधी कर देना मुझे बेलन से मार मार के ।"

हिहिहिही ।

दोनो एक दूसरे से प्यार भरी बातें करती रहती है ऐसे ही ।
 
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