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Hindi Desi Sex Freinds Forever (ek daastaan)

Update 21


In the market

शीतल अकेले ही थैली भर के बाजार कर रही थी । फुटपाथ में दोनो तरफ सब्जी मंडी बैठी थी और शीतल सड़क किनारे की एक सब्जी दुकान से सब्जी खरीद रही थी । सब्जी वाले से सब्जी का मूल भाव कर रही थी ।

तभी अचानक एक कार साइड से शीतल को टक्कर मारता है । शीतल कुछ दूर ओढ़े मुंह के बल जा के गिरती है ।

कार 1 मिनट के लिए वाहा रोके रहा सभी अपने में व्यस्त था । सब्जी वाला और उसके आस पास वाले ये हादसा देख के चिल्लाया । लेकिन तभी कार वाहा से थोड़ा बैक लेके तेजी से वाहा से आगे निकल गया । सब लोग कार वाले को गालियां दे के चिल्लाते रहे ।

शीतल एक सब्जी वाले दुकान के सब्जी के ऊपर गिरी गई थी । एक पल के लिए उसे होश भी नही रहा उसके साथ क्या हुआ हे लेकिन जब उन खुद सब्जी की ऊपर गिरी हुई पाया तो तब उसे मालूम हुई की किसी कार ने उसे टक्कर मारा है ।

वो सोक में थी एक सदमा जैसा लगा उसे । वो उठने की कशिश की तो उसे दाई झांघो में तेज दर्द हुई टक्कर उसकी दाईं जांघो पे लगी जो थी । वाहा के कुछ औरतों ने उसे सहारा दे के उठाया । तभी एक लड़का भागता हुआ वाहा आ गया ।

शीतल को उस लड़के को देख के बड़ी खुशी हुई और सुरक्षित महसूस हुआ ।

लड़का बड़ी फिक्र मंद हो के शीतल की बाजू पकड़ के बोला ।" आंटी आपको ज्यादा चोट तो नही आई ।"

वो लड़का कोई और नही वल्कि जीशू था । और गाड़ी से एक्सीडेंट करवाने का आइडिया उसका ही था और एक्सीडेंट को अंजाम देने वाला ड्राइवर विशू था जो उसने अपनी वरदान की इस्तेमाल से एक गाड़ी कुछ समय के चुराया थे ।

शीतल दोनो पेड़ो पे खड़ी रहने की कशिश करती हुई धीमी आवाज में बोली ।" थोड़ा दर्द हो रहा हे इस पेड़ में"

तभी वाहा की एक औरत बोली ।" बेटा तुम्हारा आंटी हे क्या । इसे किसी मेडिकल में ले जाओ ।"

वाहा मजूद लोगो ने बोला की यही पे केमिस्ट है पहले केमिस्ट पे बहनजी को ले जा के चेक कराओ और ज्यादा चोट लगी हे तो फिर हॉस्पिटल ले जाओ । सही लोगो ने वोही बोला ।

तो जीशू ने शीतल को सहारा दे के बोला ।" आंटी घबराओ मत सब ठीक हो जायेगा में आपको यहां के केमिस्ट में ले जाता हूं "

शीतल ने किसी तरह दो कदम रखा फिर दर्द से करहाते हुए बोली ।" बेटा मुझसे चला नहीं जा रहा हे ।"

जिशु ने आओ देखा ना ताव वो शीतल को बिना पूछे ही उसको गोद में उठ लिया । शीतल शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन वो बोलने की हालत में नहीं थी । वाहा लोग भी सोक थे काना फूसी कर रहे थे की कैसा बेशर्म लड़का है ।

लेकिन जिशू सभी को अनसुना करते हुए बाजार में ही सबसे बड़े केमिस्ट पे शीतल को गोद में ही उठा के ले के गए ।

केमिस्ट में कोई डॉक्टर तो नही था बी फार्म वाले भी एक तरह से मेडिकल लाइन डॉक्टर की तरह है । केमिस्ट के लोगो ने शीतल को चेक किया मलहम पट्टी की । जांघो के अलावा कही चोट तो नही लगी थी बस माथे पे थोड़ी खरोसे आई थी और कुछ नही । माथे के चोट पे जब ड्रेसिंग कर रहा था ।

तब जिशू बोला ।" आंटी के पेड़ में चोट आई हे लगता है चोट ज्यादा लगी हे चल नहीं पा रही हे ।"

फार्मसिस्ट ।" एक काम करो हमारे यहां लैब में एक्स रे करवा लो । अगर ज्यादा इंज्यूरी आई हे तो हम आपको अच्छे हॉस्पिटल बता देंगे और अगर चोटी मोटी चोट आई है हमारा यहां अच्छा फिजियोथेरेपी भी है वो मेडिसिन दे देगा ।"

जिशू को भी ठीक लगा । (कही मैंने ज्यादा तो नहीं कर दिया) " ठीक करवा लेते हे ।"

फिर शीतल को लैब ले के गया और एक्स-रे बेड पे लिटा दिया गया । जिशू बाहर आना के लिए निकल ही रहा था ।

शीतल ने उसे हाथ पकड़ के रोक लिया । जिशु लेब वाले बंदे से पूछा ।" क्या में यहां रुक सकता हूं आंटी को सायेद दर लग रहा है ।"

लेब वाला बंदा भी थोड़ा लेट जवाब देते हुए बोला ।" पेसेंट को कोई प्राब्लम नही तो मुझे क्या । वैसे आप इनके क्या लगते हो ."

जिशू ।" जी ये मेरी आंटी हे ।"

लेब वाले बंद फिर कोई जवाब नही दिया अपने काम में ज्यादा ही प्रोफेशन था । उसने अपना प्रोसेस शुरू किया ।

शीतल बस जिशू को देख रही थी । और जिशू शीतल की बड़ी केयर कर रहा था ।" आंटी आपको कुछ नही होगा । बस जरा सी चोट है ।" और उसने अपने प्यारे हाथो से शीतल की माथे पे सहलाने लगा ।

लेब वाला बंदा बोला ।" बहनजी आप जरा अपनी सारी को उठाएगी ताकि में अपना काम कर चाकू ।"

शीतल शर्म से पानी पानी हो गई । ज़िदेगी में कभी वो किसी ऐसी स्तिथि में नही आई जहा वो किसी डाक्टर या ऐसे लेब टेकिनिचियान के आगे सारी उठाने पड़ी हो सिवाय अपने बेटे को जन्म देते वक्त के अलावा ।

जिशु ।" एक मिनट में मदद कर देता हूं आंटी ।"
और उसने धीरे से सारी और पेटीकोट एक साथ जांघो तक उठा दिया कुछ दो इंच और ऊपर उठा दी होता तो उसकी पैंटी दिखने लगती । वैसे x-ray करनें के लिया उतना सारी उठाना भी जरूरी था । शीतल ने शर्म से आंखे बंद कर ली । लेब X -ray मशीन से अपना काम करनें लगा ।

जिशु शीतल की माथे पे हाथ फिरते हुए शीतल की भरी जवानी को आखों से नशा उतर रहा था (क्या गोरे गोरे जांघ है चिकनी मोटी । क्या मनचल गुदाज पेट है । चाटने में मजा आएंगे आंटी और ये आपकी तरबूज जो कैद हे ना एक दिन इसका रस पी के प्यास बुजाऊंगा । बोहोत जल्द आपकी ये सुथील सर्बी वाली मोटी बाजू को मसलते हुए चोदूंगा और आपको रखैल बनाऊंगा देखना । वैसे कभी आपको उस नजर से नेही देखा था लेकिन आपने जो राक्षस बेटा पैदा किया है न उसकी वजह से मुझे भी राक्षस बना दिया है । माल अच्छी हो एक दम कश्मीरी माल हो बोहोत जल्द आपको पेलने वाला हूं ।)

तब तक लेब वाले ने अपना काम खतम कर के बोला।" लो हो गया । आपको 10 मिनट में रिपोर्ट मिल जायेंगे ।"

शीतल अभी भी लेती थी । जिशू ने सारी नीचे करते समय शीतल की ब्लैक पैंटी देख ली थी ।(मन कर रहा है यही चोद दूं और फिल्म बना के अपने बेटे को भेज दूं ताकि उसे पता चलें की अपनी मम्मी को कोई चोदता है तो कैसा लगता है)

जिशू जब तक रिपोर्ट नहीं आता तब शीतल से बाते कर के उसका मन बहलाने लगता हे ।

कुछ देर बाद रिपोर्ट आता है तो पता चलता है की हड्डी नही टूटी थोड़ा मॉस आई हे जो दवाई से ठीक हो जायेगा । फिर वाहा के फिजियो थेरपी वाले ने शीतल की जांघ पे एक फ्रैक्चर में लगाने वाली बैंडेज लगा दिया और एक इंजेक्शन और कुछ मेडिसिन दी ।

जिशु ने अपने कार में शीतल को उसके घर ले गया ।
 
Update 22


A week leter

Shine park at 6 pm

विशु " यार इस बार कोई ऐसी वैसी प्लान मत बताना और में ऐसा दुबारा करने नही वाला । मुझे बोहोत अफसोस हुआ खमाखा मेने तेरे बातों में आ के आंटी को चोट पोहोचा दी।"

जिशु ।" कोई न । सब ठीक हे ।"

विशु ।" इस बार क्या प्लान है तेरे ।"

जिशू खुश हो के बोला ।" अरे अभी कोई प्लान नेही उस प्लान से बड़ा मजा ले रहा हूं । पता आंटी आज कल रोज शाम मुझसे कॉल करती है । गप्पे लड़ती है । "

विशु ।," हा हा बड़ी खुश हो रहा हे । इसका मतलब ये नही की शीतल आंटी तेरे प्यार में पड़ गई है । तेरी मम्मी जैसी नही .............(विशु को एहसास हुआ की उसने गलती से क्या बोल दिया )

जिशू गुस्से से उसे देखता है । लेकिन कुछ नेही बोलता ।

विशु ।" सॉरी यार मेरा वो मतलब नहीं था ।"

जिशू ।" हम्म । अच्छा चल तपन के घर चलते है । शेतन को भी वाहा बुला तपन को एहसास कराने का टाइम आ गया है ।"

Tapan's house

टिंग तंग

घर का दरवाजा तपन ने खुला । और खुशी से तीनों दोस्त से मिला ।" अच्छा हुआ तुम तीनो आ गए । में अकेला अकेला बोर हो रहा था ।"

शेतन ।" अरे वाह अच्छी स्वागत हो रही है हमारी । भांग बांग तो नहीं पी रखी तूने ।"

तपन ।" अब घर पे मेरी ले मत । चलो आओ अंदर "

तपन तीनों को घर के अंदर ले आते हे ।

सबसे पहले तपन के पापा तीनों को देख के मजाक में बोला ।" अरे चार बकरे एक साथ कैसे । यहां हलाल होने आए हो क्या मेरे हाथो ।"

जिशू मजाक को मजाक बनाते हुए थोरी ऊंची आवाज में ।" आंटी देखो अंकल हम धमका रहे है ।"

जतिन होंठो पे उंगली रख के ।" अरे मरवाओगे क्या । रात को खाना नहीं मिलेगा मुझे "

चारो हंसते है । तभी शीतल वोहा आती है वो अब अच्छे से चल फिर सकती थी । वो भी तीनों को देख के खुश हो जाती है । लेकिन सबसे पहले जिशु से गले मिलती है ।

ये देख के शेतन बनवाती जलन दिखाते हुए बोला ।" क्या आंटी माना की हम उस दिन वाहा नही थे तो क्या हमे आप नजरंदाज करेगी क्या ।"

शीतल बारी बारी से दोनो के गले मिली और बोली ।" बात वो नही है तुम दोनो तो उस दिन के बाद दिखे ही नही (जब शीतल की एक्सीडेंट वाली खबर मिला दोनो को तो दोनों तुरंत आए थे खबर लेने । दूसरे दिन उनके मां बाप भी आए थे ) लेकिन ये रोज मेरी खबर लेने आता है चाहे दो मिनट के लिए सही पर मेरी खबर तो लेता है ।"

बिशु ।" अच्छा सॉरी आंटी । अब क्या करे आपने हमे कम संस्कार दिए है ।"

शीतल जूठा गुस्सा दिखा के बोली ।" अच्छा उल्टा चोर कटवाल को दाते । अच्छा ठीक हे अब जाओ बैठो में तुम लोगों के लिए पकड़े तल के लाती हूं ।"

शीतल किचन में गई ।

शेतन ।" अंकल उस कार वाले का कुछ पता चला ।"

जतिन ।" अरे नही बेटा आज गया था पुलिस थाना लेकिन कोई सबूत हाथ नही आया कह रहा था । अब किसे पकड़े वाहा कोई सीसी टीवी भी नही था और गाड़ी का नंबर भी नही मिला । लेकिन सान बिन हो रहा है पता चल जायेगा "

जिशू और विशु एक पल के लिए खिफजादा हो गए थे लेकिन अपने आप को संभाल लिया ।

फिर तपन ने अपने दोस्तो को अपने कमरे में ले के गया । और चारो मिल के मल्टीप्लेयर गेम खेलने लगे ।

कुछ आधे घंटे में शीतल चाय पकड़े ले के आई ।" ये लो गरमा गरम नाश्ता ।"

शीतल जब झुक के ट्रे टेबल पे रख रही थी तो उसकी ब्लाउज से चूची आधे से ज्यादा दिखाई दी । और ये शानदार नजारा जिशु ने अपने दिमाग में उतर लिया और एन्जॉय किया ।

शीतल जिशू के बगल में बैठ गई और जिशु के मोबाइल स्क्रीन पे देख के बोली ।" क्या गेम खेल रहे हो ।"

जिशु ।" Wwe आंटी ।"

सब मिल के चाय पकड़ा खाने लगे । जिशू कुछ इशारा देता है विशु को । और फिर शीतल की हाथ पकड़ के उसकी उंगली चूमते हुए तारीफ करने लगता है ।" आंटी आपकी हाथो में जादू है क्या स्वदिस पकड़ा बनाया है । जी करता है आपकी उंगलिया चाट जाऊं ।"

विशू चुपके से तपन को इशारा करता की देख तेरी मम्मी और जिशू को । तपन कुछ ना समझ के कंधे उचका देता हे की क्या हे ।

विशु हस्ता है (गाढ़ा साला)

विशु की हसी से तपन फिर समझ जाता है । और अंदर ही अंदर वो जलने लगता है । कोई दिनों से देख रहा है की जीशू किसी ना किसी बहाने से उसकी मम्मी के साथ ज्यादा ही फ्रैंक हो जाता है मजाक मस्ती करता है ज्यादा ही । वैसे तो ये नॉर्मल था लेकिन तपन कुछ ज्यादा ही जलने लगा कारण था उसकी और जिशू की मम्मी के साथ जो शारीरिक रिश्ता था उसका प्रभाव था जलन का कारण । जो वो खुद नही समझ पाया था ।

शीतल ।" ओह मेरा बच्चा । तुम ही मेरे इन सब में से एक अच्छे बेटे हो । तेरे अंकल और तेरे दोस्त मेरी कभी तारीफ नही करते । जरा सी नमक कम ज्यादा हो गई की नही दोनो बाप बेटे मुझोर बरसते है ।"

जिशू बोला ।" अरे आंटी बंदर क्या जाने अदरख का स्वाद । सोने का असली भाव जौहरी जनता है । और में वो जौहरी हूं आप टेंशन मत लो में हूं ना आपका बेटा "

तपन मन में जलन ले के फिर भी बनवाती गुस्सा दिखा के बोला ." कुछ दिन रुक जा देखना मम्मी कैसे तेरे दिमाग की दही करता हे ."

सब हास पड़ता है । ऐसे ही मस्ती मजाक मे गेम खेलने लगते है । शीतल जिशू के ऊपर प्यार बरसती रहती है ।

कुछ देर बाद विशु बाथरूम चला गया हाथ धोने और उसके पीछे पीछे तपन भी चला गया ।

तपन ।" तू वाहा क्या इसारा कर रहा था वे ।"

विशु ।" क्यू वे तुझे समझ नही आया अब तक । देखा नहीं कैसे तेरी मम्मी और तेरा दोस्त चिपक के एक सोफे पे बैठा है और गुतूर गु कर रही है ।"

तपन छींक से हाथ धो के ।" तू गलत मतलब निकल रहा है । ऐसा नहीं है ।"

विशु सैतानी मुस्कान से ।" देखना कर्मा तुझे रंग ना दिखा दे ।"

तपन । " तू आज काल मुझसे ठीक से बात क्यू नही करता बे । मुझसे प्रोब्लम क्या है तेरे को । कही तूने कुछ बता तो नहीं दिया जिशु को ।"

विशू ।" मुझे तुझसे कोई प्राब्लम नही है भाई । हम दोस्त हे भाई जैसे । मगर तू जो अब तक हमारे पीठ पीछे कर रहा है ना उससे प्रोब्लम है । और रही बात जिशू को बताने की अगर बता दिया होता तो जिशू तेरी जान ले ले । जानता हैं ना कितना गुस्से वाला हे वो । "

तपन ।" देख हजार बार बता चुका हूं । तानिया आंटी और मेरा कुछ अलग रिश्ता है कुछ फीलिंग्स है हमारी बीच । तू गलत नजर से देखना छोड़ दे तब तुझे पता चलेगा ।"

विशू ।" अच्छा मान लिया तेरी बात एक पल के लिए । तो तू भी सोच के देख अगर ये बात जिशू और जिशु के पापा को पता चला तो अगर दुनिया वाले को पता चला तो । ऐसे रिश्ते ज्यादा दिन न ही टिकते है और न ही छुपते हे । अपनी जिंदगी तो बर्बाद कर ही लेगा तानिया आंटी की भी और साथ हमरा जिशू सबके खंडन का नाक काट देगा तब तू ।"

तपन ।" देख आंटी समझदार हे जो भी कर रही है सोच समझ के ही कर रही है । "

विशु ।" हट बे तू ही उसे बहला फुसला के अपने साथ बंधे रखता है ।"

विशु तपन के जवाब सुने बिना बाथरूम से निकल जाता है ।

।।।

ऐसे ही जिशु शीतल आंटी को पटाने में लगा हुआ था । दोनो की बीच फ्रैंक वाली हम उम्र जैसे दोस्त भी बन गए थे । शीतल घर पर बस अकेली अपनी टीवी को ही दोस्त बना का जिंदगी काट रही थी लेकिन जीशू को एक दोस्त के रूप मे पा कर बोहोत खुश थी जो उसका दिल बहलाता था उसको हसाता था प्यार जताता था । और इस काम में विशु हर तरह से मदद कर रहा था । और तपन को जलता था । जिशू भी फोन आए ना आए लेकिन फोन आने का बहाना कर के तपन की तरह अलग हो जाता था मंडली से कुछ समय के लिए और आग में घी डालने का विशु इशारों से करता था तपन भी जल भुन के रह जाता था लेकिन वो चाह कर भी कुछ नही कर पाता था । लेकिन जिशू एक चतुर खिलाड़ी की तरह प्लान को अंजाम दे रहा था उसके इरादे को विशु पढ़ नही पा रहा था वो अनजान था जिशू के असली मकसद से एक मोहरा बन गया था वो ।
 
Update 23


A romantic date

जिशु ने एक प्लान बनाया । और प्लान के मुताबिक जिशू ने शीतल को अकेले निकलने को कहा ।

शीतल भी शॉपिंग के बहाने कर के निकलती है और उसने पहली बार घर पे जूठ बोल के अकेले निकली थी बड़ी साहस के साथ सुबह के 10 बजे । और उसने जिशू की दी हुई ब्लैक सिक्की सारी और ब्लैक ब्लाउज पहनी हुई थी जो ब्लाउज पहना हुई थी वो दीप कट वाली ब्लाउज थी । वो पहनना नहीं चाहती थी लेकिन वो ना पहन के जिशू जताना नेही चाहती की उसे शर्म आती है उस तरह की ब्लाउज पहनने में और ये बात जिशू नोटिस जरूर करता और उसे छेड़ता रहता जिससे वो शर्महार हो जाएगी । और ये नही चाहती थी और उस सारी के साथ दूसरे ब्लाउज मैच नहीं हो रहे थे तो उसने पहन ही ली लेकिन पल्लू के से पिन लगा के लि की उसकी चूची की हल्की सी दरारें नहीं दिखाई दिए जाते जैसा की वो वैसे ही पहनती है कपरे ढंग से । लेकिन उसकी पीठ आधे से ज्यादा से खुली दिख रही थी और वो चाह का भी छुपा नही पाएगी ।

खेर बताते हुए प्वाइंट पे उसने इंतजार किया और उसे जिशु अपने कार में बिठा लिया ।

जिशु कार चलाते हुए शीतल को ऊपर से नीचे तक देखा और उसकी नजर शीतल की उठी हुई छाती पे टिक गई कुछ सेकंड के लिए । शीतल ने भी उसकी नजर को पहचान ली और उसे जिशु की नजर गंदी लगी लेकिन नर्म और साफ दिल औरत जो हमेशा सही दिशा में नजर रखती हुई वो अपने मन को बोली की ऐसे ही टिक गया था उसमे क्या गलत है । कभी कभी हो जाता है ।

जिशू ।" वाओ आंटी आज आप एक दम परी लग रही है ।"

शीतल शर्मा जाती है ।" सच में"

जिशू ।" हा आंटी गोद प्रोमिस । लोग आपके दीवाने हो जायेंगे आंटी आज ।"

शीतल ।" ढेट बदमाश "

जिशु ।" हा हा हा आप तो शर्माती हुई बड़ी प्यारी लगती है । आंटी आज आपको मेरी गर्लफ्रेंड बनना होगा ।"

शीतल बड़ी बड़ी आंखें निकाल कर हेरानी से देखती है जिशु को ।

जिशु मुस्कुरा के ।" अरे आंटी आप तो सीरियस हो गई में आपको नकली गर्लफ्रेंड बनने को कह रहा हूं । सिर्फ आ के लिए "

शीतल उसके बारे में कुछ नही बोलती पर पूछती है ।" मुझे कहा ले जा रहे हो "

जिशु ।" पब में आंटी । आपने तो नाम भी नहीं सुना होगा ना "

शीतल ।" क्यूं नही सुना । मुझे पता है वो गंदी जगह होते है में नही जाने वाली कही और ले चलो ।"

जिशु ।" अरे आंटी आपने जो फिल्मों में देखा ऐसा नही होता है हर पब में । कुछ पब अच्छे होते है और अच्छे अच्छे जेंटलमेंट लोग जाते है। आपको जाना पड़ेगा आपको आज में घुमाऊंगा आप बस मजे करो और में हूं ना डरो मत "

जिशु बहला फुसला के गवार शीतल को पब ले जाता है । बेचारी जिंदगी में पहली बार किसी पब में गई थी शीतल । और पब की चमक धमक देख के देखती रह गई चारो और न चाहते हुए नए नजारे को देख अंदर ही अंदर खुश हो गई थी । दिन के कारण पब गैडरिंग नही था रोमांटिक सॉन्ग बज रहा था और दो जोड़ी कपल्स स्टेज पे डांस कर रहे थे ।

जिशु ने पहले से एक टेबल बुक कर रखा था । उसने शीतल को चेयर पे बिठाया और खुद उसके सामने बैठ गए ।

जिशू ।" क्यूं आंटी किसी लगी पब ।"

शीतल मुस्कुरा के बोली ।" वो लडकिया कैसी बेशर्मी से इतने इतने छोटे छोटे कपड़े पहनी हे देखो तो जरा । कोई शर्म नाम की लिहाज ही नही है आज काल के बच्चो में "

जिशु उसकी हाथ पकड़ते हुए ।" आंटी ये आजकाल का फैशन है ।"

शीतल अपनी हाथ खींच के मजाक करती हुई बोली । " तू क्यों मेरा हाथ पकड़ रहा है । सचमुच का गर्ल फ्रेंड थोरी हूं एक थप्पड़ पड़ेंगे उल्टे हाथ का "

जिशु हास के " तो मारो ना हम तो हे ही इस लायक । आप जैसी मोहतरमा से जलील होने में भी एक मजा है ।"

शीतल मुस्कुरा के बोली ।" सच में मार दूंगी । मजाक मत करो ।"

जिशू ।" अच्छा आंटी आपको यहां आ के अच्छा लगा ।"

शीतल को खुले में आ के बड़ी खुशी हो रही थी की वो आज घूमने आई हे । वो पब में मजूद लोगो को देखने लगी जो हर कोई हाथों में ग्लास लिए पी रहे थे कोई अपने मस्त था तो कोई एक दूसरे के साथ तो कोई डांस कर रहा था ।

शीतल ।" हा बोहोत खुश हूं ।"

जिशू ।" आंटी आप खुश रहा करो । कहा घर में भूत की तरह पड़ी रहती हो।,"

शीतल ।" क्या करू तेरे अंकल मुझे घूमने नहीं ले के जाते कही भी ।"

जिशु ।" कोई बात नही अब से मुझे बोला करो में आपको घूमने ले जाया करूंगा ।"

शीतल मुस्कुराती हुई ।" अच्छा बड़े आए घुमाने । "

जिशू ।" क्यू मेरे साथ आपको अच्छा नही लगता क्या । चलो डांस करते हे ।"

शीतल साफ मना करती हुई ।" क्या डांस और में । नही नही मुझे डांस नहीं आता ।"

जिशु जोर देते हुए । " आओ ना आंटी आपको मेरी कसम । में आपको सीखा दूंगा बोहोत इसी है ।"

शीतल ।" नही नही में नहीं जाऊंगी वाहा ।"

जिशू जान बूझ कर बापच मुंह लटका के बैठ जाता है । शीतल उससे बात करने की कशिश करती है लेकिन जिशू उससे मुंह फेर लेता है ।

आखिर में शीतल मान जाती हे क्यू की वो जिशु का दिल नही दुखाना चाहती ।

शीतल ।" ठीक हे चलो डांस करते हे "

मगर जिशू कोई जवाब नही देता ।

शीतल ।" सच में थप्पड़ मार दूंगी । "

जिशु मुस्कुराते है ।" हिहिही चलो आओ ।"

जिशू ने शीतल का हाथ पकड़ के डांस फ्लोर पे ले के गया शीतल ने भी इस बार चुराने की कशिश नही की वल्कि उसे अच्छा लगा की कोई हक से उसका हाथ पकड़ के साथ ले गया था ।

जिशु उसे दो स्टेप कर के दिखा के सिखाते है । फिर दोनो डांस करने लगते हे । लेकिन शीतल जिशू नज़रे नहीं मिला पा रही थी शर्म के कारण । पहली बार वो कपल डांस कर रही थी वो भी एक जवान लड़के के साथ । जहा उसकी मन में गुदगुदी रोमास महसूस हो रही थी वोही उसे बेहद शर्म भी आ रही थी । उसकी हाइट जिशू की छाती तक थी तो बस जिशू की छाती पतले बालों देखे जा रही थी जो शर्ट के नेक वाली हिस्से दिख रहे थे । और सच बात ये थी कि उसे भी अच्छी लग रही थी जिशू की छाती देखने में ।

जिशु उसके कान में बोला ।" आंटी ये डांस एक दूसरे की आंखों में देख के किए जाते है । देखो बाकी लोग को कैसे एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे "

शीतल एक नजर उठा के बाकी कपल्स को देखती है और फिर शर्मा के नजरे नीची कर लेती है । जिशू की सैतानी दिमाग में मस्ती करने की आइडिया आया और उसने शीतल की कमर के चर्बी की कसावट पे चिकुटी काट ली ।

शीतल झट से ऊपर नजर उठा ली और सीधा जूठा गुस्सा दिखाती हुई जिशु के आंखों में देखने लगी । जिशु मुस्कुराने लगा । दोनो रोमांटिक डांस करने लगे एक दूसरी की आखों में देखते हुए ।

जिशु ।" ये हुई ना बात अब लग रही है आप मेरी जीएफ ।"

शीतल ।" हट बदमाश चुप रह ।"

शीतल अजीब सी खुशी महसूस हो रही थी इसलिए नही की वो पब में आती थी बल्कि सालो बाद वो घर से निकली थी घूमने फिरने के लिए घर का काम छोड़ कर । लेकिन जवान लड़के के साथ नाचते हुए उसे शर्म आ रही थी लेकिन कभी कभी कुछ शर्म आनंद का एहसास कराता है ।

शीतल धीरे से बोली ।" बेटा मुझे बाथरूम जाना है ।"

फिर जिशू ने उसे लेडिस बाथरूम तक छोड़ के आ गया । वो बार पे जा के Tequila shots मारे । बॉडी को जनजनाने के लिए और बिल पे किया ।

उसे एहसास हुआ की शीतल बाथरूम गई हुई दस मिनट से ऊपर हो चुकी है लेकिन अभी तक वो वॉशरोम से लौटी नहीं तो वो खुद वाशरूम की तरफ गया । उसने वाशरूम के दरवाजे पे दो सेकंड के लिए रुका (क्या लेडिस वाशरूम में जाना ठीक होगा ) और फिर वो अंदर गया ।

अंदर का नजारा देख के वो हिल गया । वो सोच भी नही सकता था की उसे ऐसा नजारा दिखने को मिलेगा । वो हैरान था और काफी गुस्से में आ गया जिशु फिर..........................
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Update 24


Inside the washroom of the pub

जिशु को जो दृश्य देखने को मिला वो काफी अप्पत्ति जनक हिंश्र दृश्य था । वाशरूम के बेसिन में शीतल को पीठ के बल झुकाए जा रही थी जबरदस्ती और एक शराबी उसके ऊपर जबरदस्ती करने की कशिश में लगा था । शीतल बलपूर्वक खुद को बचने में पूरी शेष्ठा कर रही थी । बदकिस्मती से पूरा वाशरूम भी खाली था ।

जिशु को इतना गुस्सा आया की वो सीधा जा के उस बलात्कारी को उसकी पीछे की कॉलर पकड़ के खींच लिया और बिना एक पल गवाए घुसो की बरसात कर दिया ।

वो बलात्कारी मार खा खा के दर्द से तड़प उठा और किसी तरह खुद को बचा के वाहा से भाग निकला । शीतल को जिशू एक फरिश्ता नजर आ रही थी जो उसकी आबरु रक्षक के रूप में नजर आ रहें थे ।

शीतल रोटी हुई जिशू के बाहों में समा गई और बेतासाह रोने लगी फूक फूक के । जिशू का मन भी पिघल गया उस वक्त वो चारे प्लान का हिस्सा भूल चुका था । एक सच्ची फीलिंग्स आ रही थी जो एक दया सहानुभूति की अनुभव हो रहा था शीतल के प्रति । और शीतल बाहों में भर के उसे चुप करा रहा था सच्चे मन से ।

जिशू ।" आंटी में आ गया हूं ना अब कोई दर नहीं । उनको सबक सिखा दिया हे मैंने दुबारा किसी पर गंदी हरकत नही करेगा वो । आप चुप हो जाइए कुछ नही हुआ । सही कहती थी आप ये जगह गंदी है मुझे यहां आपको लाना ही नही चाहिए था । सब मेरी गलती हे मुझे माफ कर दो आंटी ।"

शीतल बाद रोए जा रही थी । जिशु की छाती पे मुंह छुपाते हुए । उसके आसू रुक ही नहीं रही थी और ना ही हिचकले रूक रहे थे ।

जिशू ।" बस बस आंटी अब आप बिलकुल शुरक्षित है । चुप हो जाइए में हूं ना मेरे होते हुए अब आपको कोई छू नहीं सकता । "

काफी देर तक शीतल ने रोया और फिर उसके आसू सुख गई लेकिन फिर भी सिसक रही थी । और धीरे से बोली ।" मुझे घर ले चलो ।"

जिशू उसकी हालत देखता है । शीतल की सही नहीं थी और उसकी ब्लाउज की बाई बाजू पूरी तरह से फट चुका हे इस हालत में वो कैसे उसे बाहर ले जाय । तो उसने कुछ सोचा ।

जिशू प्यार से ।" आंटी आपकी बाजू फट गई हे । अगर आप मुझपे भोरोसा करती है तो दोनो तरफ के बाजू निकल देता हूं ब्लाउज का इस तरह से एक डिजाइन बन जायेगा । "

शीतल नजर झुकाए रही कुछ जवाब नही दिया ।

जिशू ।" प्लीज आंटी कुछ बोलिए । में आपकी सहमति बिना कुछ नही कर सकता । "

शीतल धीरे से बस शिर हिला देती है । जिशू के लिए बस यही जवाब काफी था । जिशू शीतल की प्यार से बाजू पकड़ लेता हे और उसके ब्लाउज के दोनो बाजू फाड़ के निकल देता है । अब शीतल की ठोस गोरी चिकनी बाजू दिखाई देने लगे ।

जिशू उसकी कंधा पकड़ के सहारा देते हुए वाशरूम से बाहर ले आता है और फिर हाथ पकड़ पब से गाड़ी तक ले आता हे । और गाड़ी चलाने लगता है ।

शीतल चुप चाप बैठी थी कार मैं वो अभी भी सोक में थी उसके साथ कभी ऐसा घिनौना काम भी हो सकता था उसने कभी सोचा नहीं था ।

जिशु ।" आंटी मुझे माफ कर दो ।"

शीतल ।" माफी किस बात की तुमने तो मुझे बचाया हे ।"

जिशू ।" नहीं पर गलती मेरी हे मुझे आपको ले के नहीं जाना चाहिए था ।"

शीतल ।" कोई बात नही तुम्हे थोरी पता था ऐसा होगा ।"

शीतल बार उस घिनौने इंसान का चेहरा याद आ रही थी जो उसे और दुखी बना रही थी । शीतल फिर चुबकने लगी ।

जीशू कार को साइड में करता है और शीतल की तरह खिचक के उसे अपनी छीने से लगा के चुप कराने लगता है किसी छोटी बच्ची को चुप कराने को तरह आदर करता है ।

जिशू ।" ओह आंटी बस बस अब आपको रोने की जरूरत नही है आप सुरक्षित हे । उसे सबक मिल गया है । " और शीतल की माथे को चूमने लगता है ।

शीतल को उसका सहारा पा के सकुन मिलने लगी । वो चुप होने की कशिश करती है ।

जिशु ।" आंटी आपको इस हालत में घर नहीं छोड़ सकता में आपको कुछ देर के लिए अपने फॉर्महाउस ले के जाता हूं वहा आप थोड़ी देर आराम करेगी तो आप ठीक हो जाएगी ।"

शीतल ।" नही बेटा मुझे घर जाना हे में बिलकुल ठीक हूं "

जिशू ।" प्लीज बातो को समझिए । इस वक्त आप रोटी हुई हालत में जायेगी तो कोई सवाल जवाब देने होंगे । और अंकल से मुझे दर लगता है उनके मूसे इतनी बड़ी है की देख के ही दर लगता है ।"

जिशू हल्का मजाक किया और शीतल की मुस्कान फेल गई । " अंकल से इतना डरते हो "

जिशु फिर मजाक करते हुए ।" कोन भला अपनी जीएफ की पति से नही डरता है । वो भी मूसो वाला वीरप्पन जैसा डाकू दिखने वाला "

शीतल की माइंड ड्राइवेट करने में सक्षम रहा जिशु ।" आंटी थोरी देर के लिए फॉर्महाउस चलो आप वाहा फ्रेश हो के फिर हम घर चलेंगे । देखो आपकी गाल आसूं से गंदी हो गई है "

शीतल ।" अच्छा ठीक है चलो "

जिशू बस मुस्कुरा देता है और कार अपनी फॉर्महाउस की तरफ ले जाता है ।

Jishant Farmhouse

समय 12 बजे ।

जिशु और शीतल फॉर्महाउस के अंदर । केयरटेकर ने कुछ जरूरी खाने पीने का सामान ला दिया और अपने काम में चला गया । बंग्ले के अंदर सिर्फ और सिर्फ शीतल और जिशू ।

शीतल वाशरूम हो कर आती हे । और देखती है कमरे की टेबल में वोदका का बॉटल रखा हे जिशू ने और बेड पे बैठा हे । शीतल के लिए बड़ी ही संकोचूतित माहोल था और वो एक जवान लड़के के साथ किसी घर में एक कमरे में थी और वो भी वोदका सामने थी । लेकिन उस वक्त ये सब खयाल करने में उसकी बुद्धि नही थी ।

शीतल ।" ये क्या हे ।"

जिशू ।" वोदका और क्या ।" जीशू मुस्कुराने लगा ।

शीतल ।" हा वो तो दिख रहा है लेकिन क्यूं लाया तूने ये "

जिशु ।" सोचा था अपनी एक दिन की gf ke साथ पब दारू पी भांगड़ा करेंगे लेकिन वो तो हुआ नहीं । इसलिए अब यहां अरमान पूरी करेंगे "

शीतल जूठा गुस्सा दिखाती हुई । " अच्छा तो इसलिए तू मुझे यहां लाया हे । तुझे पता तो हे की में शराब नही पीटी । "

जिशु ।" चल जूठी मैने खुद देखा हे आपको फंक्शन में पीते हुए "

शीतल मुस्कुरा के बोली ।" वो तो तेरी मम्मी मुझे जबरदस्ती पिलाती है । लोगो की मान रखने के लिए एक पेक पि लेती हूं । लेकिन तूने कभी देखा मुझे पीते हुए । और तुम्हारी उम्र क्या जो ऐसे पीते हो । तुम्हारी मम्मी पापा को पता है । रुक में बता दूंगी फिर तेरी खेर नहीं ।"

जिशू हास के ।" अगर बता दिया बोल दूंगा की आज आपने मुझे खुद पिलाया हे "

शीतल ।" और वो लोग विश्वास कर लेंगे । बदमाश ।"

जिशु ।" में ऐसी कहानी बनाऊंगा की वो लोग अचानी से मान जायेंगे । या फिर आपके बेटे को फसाऊंगा की उसने मुझे पिलाना सिखाया है ।"

शीतल की हसीं छुट गई ।" एक मारूंगी रख के कनपटी पे ।"

जिशू दोनो के लिए एक एक पैग बनाता हे । " आओ बैठो "

शीतल ।" कहा न में नहीं पीती ।"

जिशु उसकी हाथ पकड़ के अपने पास बैठा के समझता हे ।" देखो आंटी में समझ सकता हूं आप इस वक्त कैसा फील कर रही है । मुझे बुरा लग रहा है पर सॉरी । प्लीज आप थोड़ा सा पि लीजिए आपको उस घटना से आगे बढ़ने की मदद मिलेगी । प्लीज मेरी बात मान लीजिए ।"

शीतल कुछ नही बोलती ।

जिशू उसकी हाथ अपने हाथों में ले के रिक्वेस्ट करता है । तो शीतल मान जाती है और दोनो एक एक पैग उठा लेते हे ।फिर दोनो बाते करते हुए हल्के हल्के चिप्स लेते हुए एक एक पैग खत्म करता है ।

दूसरा पेक बनाने लगता है जिशु तो उस रोक देता है शीतल ने ।

जिशू ।" आंटी एक पेग से क्या होगा "

शीतल ।" मैंने कभी एक पेग से ज्यादा नही लिए ।नशा हो जाएगा मुझे ।"

जिशू ।" अरे ये वोदका है ये सिर्फ लेडिस के लिए हे इसलिए इसमें ज्यादा नशा नही रहता है । प्लीज एक पेग और ले लीजिए ।"

ऐसे शीतल को मानते हुए बहलाते हुए बड़े बड़े चार पेग पिलाता है और कुछ अधे घंटे में शीतल को पूरा नशा हो जाता है । उसकी नजरे कमज़ोर हो जाती है शीर भारी सा महसूस होने लगती है और वो संतुलन खोने लगती हे ।
 
Update 25


Jishu carrying out his plan

शीतल झूलने लगी थी जुबान लड़खड़ा रही थी उसकी शरीर के साथ आओ भाव में । जिशू का थोड़ा बोहोत नशा हो गया था वो भी इतने पियक्कर नहीं था । दोस्तो के साथ कभी कबर पिता था लिमिट में । लेकिन नशा ऐसा होता हे इंसान की दिमाग को खोखला कर देता है चीजों बढ़ा चढ़ा देता है सत्र विचार नहीं लेने देते । नशा पलते हुए गुस्से और अंहकार को बढ़ा देता है । जिशू जहा कुछ देर शीतल के लिए पेशिश हो गया था वोही अब मस्ती के मूड में आया था दिल खोल के पेश आ रहा था दिमाग में जो सर्प पनब रहा था वो उबाल उठा था ।

जिशू ।" आंटी आपको नशा हो गया हे ।"

शीतल हस्ती हुई ।" हिहिही खुदी पीला के बोलते हो नशा हो गया है । तुम कमीने हो " (देख लिया नशे का असर जो औरत सायेद ही कभी ऐसी शब्द बोली हो होश में आज नशे में बेबाकी से कैसे कमीने बोल रही है )

जिशू ।" हा हा हा आप नीति हो आंटी ।"

शीतल ।" में नहीं तुम नॉटी हो बदमाश ।"

जिशु करीब जाता है शीतल के और एक दम जांघ से जांघ चिपका के बैठ जाता हे । और शीतल की गले में एक हाथ डाल कर बोलता है ।" आंटी आप इतनी सुंदर हो मुझे लगता है मुझे आपसे प्यार हो गया है । "

शीतल हस्ती है और उसका मुंह पकड़ के हिलाते हुए बोली जैसे छोटे बच्चो को किया जाता है ।" अभी बच्चे हो तुम पहले बड़े हो जाओ फिर प्यार करना ।"

जिशू उसे बेड पे गिरा देता है और उसके ऊपर चढ़ के उसकी कलाई दोनो तरफ कस के माचो मैन की तरह बोलता है ।" एक बार आजमा के देखो "

शीतल खिलखिलाती हुई बोली ।" तुम्हारी नाक हील रही है जैसे दो दो नाक है ।"

दोनों के चेहरे इतने पास थे की दोनो के सासें एक दूसरे को महसूस हो रहे थे । जिशु के गठीला शरीर का भाड़ शीतल की ऊपर थी जिससे वो दबी हुई महसूस कर रही थी । और जिशु को उसकी गोलाइया अपनी छाती से दबी हुई महसूस कर के ही उत्तेजित हो गया था ।(क्या माल हो आंटी तुम । आह क्या सुगंध है तेरी )

शीतल कसमसाने लगी । " उन्ह्ह्ह उठो मुझे पिच दोगे क्या नालायक ।"

जिशू उसकी नाक पे नाक रगड़ के बोला ।" आप कितनी खूबसूरत हे । आप मुझसे शादी कर लो ना आंटी ।"

नशे की सुरूर बढ़ती जा रही थी दोनो की । शीतल को उस माहौल को समझने की ज्ञान नही थी । होश में होती तो पक्का जिशु एक थप्पर लगा के सबक सिखा देती लेकिन इस वक्त उसे अपनी तारीफ सुन के खुश हो रही थी । और तारीफ एक ऐसी चीज है जो किसी की भावनाओं को वस में किया जा सकता हे ।

लेकिन जिशू की पकड़ मजबूत था जो शीतल के लिए थोड़ी तकलीफ और एक मरदाना एहसास थी ।

शीतल ।" में पहले से ही शादीशुदा हूं । देख लो मेरे मांग में सिंदूर है और मंगलसूत्र भी गले में "

जिशु ।" कोई बात नही अब मेरे नाम का सिंदूर लगाओ और मेरे नाम का मंगलसूत्र पहन लो ।"

शीतल ।" ऐसा कैसे हो सकता हे । छोड़ो मुझे बदमाश"

जिशू ।" आंटी क्या आपको अच्छा नही लगता । क्या में बुरा दिखता हूं ।"

शीतल मुस्कुरा के ।" अच्छा क्यूं नही लगोगे भला मेरा इतनी खयाल रखते हो मेरी मदद करते हो मेरे लिए चीज़े ला देते हो मैंने खाना खाया की नही ये तक पूछते हो तो क्यों अच्छे नही लगोगे । बोहोत अच्छे लगते हो तुम मुझे और सनी देओल की तरह हैंडसम लगते हो तुम मुझे । "

जिशु ।" पता है में आपकी इतना क्यूं खयाल रखता हूं क्यू की मुझे आपसे प्यार हो गया है । प्लीज मेरा प्यार एसेप्ट कर लो ।"

शीतल ।" फट्ट ऐसा भी होता हे क्या । में तुम्हे बेटा मानती हूं ।"

जिशु और बहस नहीं करना चाहता अपनी प्यासा होंठ सीधा शीतल की गुलाबी होंठो पे मिला देता है और निचले होंठों को चूसने लगता है । शीतल नशे में थी पर फिर भी उसे सोक लगती है और थोड़ी विरुद्ध करती है लेकिन जिशू को रोक नही पाती हे ।

कितनी देर से बस जिशू होठ चूसे जा रहा था की शीतल की आंखे बंद हो गई थी और प्यार से अपनी हाथ जिशू के पीठ पर रख दी थी । होंठो की गीली मिलन उसे भी आनंद दिला रही थी और दुनिया से बेखबर कर रही थी ।

गरम सासों की ताप बढ़ती चली जा रही थी जब दोनो की आंखे एक दूसरे से टकराई तो दोनो बस एक दूसरे की ही आंखों में खो गए कुछ पल ।

जिशु उत्तेजित हो कर शीतल की गर्दन चूमने लगता है और गंध लेता है । शीतल कसमसाने लगी और मुंह से बोलने लगी ।" नेही ऐसा मत करो बेटा । मत करो । मत करो ।"

लेकिन जिशु नहीं रुक रहा था उसकी गोरी चिकनी त्वासा से जीव से चाट खा रहा था । बहरहाल इतना आनंददायक एहसास को भला केसे नकार सकती है शीतल जैसी प्यासी बेकरार औरत । उसने आनंद में जिशू की पीठ के शर्ट को ही कस के पकड़ ली ।

जिशु स्वाद लेते हुए नीचे हो रहा था और उसने प्यार से पल्लू हटा दिया । शीतल की चूची उभार के नजर आने लगी । शीतल ना ना शिर हिलाने लगी । जिशू मुस्कुरा के आंख मार दिया और उसकी सैतानी देख के शीतल की भी मुस्कान निकल गई और शर्मा गई ।

शीतल उसे विरोध ना करे इसलिए उसकी कलाई पकड़ के ऊपर कर दी जिशू ने और उसकी शीतल की नंगी बगल में जा के अटकी जहा शीतल कभी वैक्सिंग वागेरा नेही करती जिस वजह उसकी गोरी बगल में खूबसूरत मात्रा में काले बाल थी । जिशु अपनी नाक उसकी बगल पे ले जाता हे और गंध सूंघ लेता है । जिशू और जोश में आ जाता है और शीतल की क्लीवेज पे चाटने लगता है और दोनो हाथो से ब्लाउज की हुक खोलने लगता है ।

शीतल ।" बेटा मत करो ऐसा । ये गलत हे ऐसा मत करो ।,"

जिशू दोनो हाथो से चूचियों को मसल देता हे शीतल आनंद से तड़प उठती है " इस्सससस मां " कर के सिसकती है ।

जिशु ब्लाउज के हुक खोल के दोनो चौड़े को फैला देती हे । सफेद ब्रा पे दोनो कबूतर आजाद होने के बेकरार थे । जिशू कमर की इर्द गिर्द घुटनो में खड़ा होता है और शीतल को उठने की इशारा करता है मगर शीतल शर्म से अपनी हाथो से चेहरा छुपा लेती है ।

जिशु उसका हाथ पकड़ के बैठा लेता है और जल्दी जल्दी में शीतल का ब्लाउज और ब्रा भी पीछे की हुक खोल के उतार देता है । बापच शीतल को लिटा देता है । और झुक के नीचे हो के दोनो चूची हाथो में मसलते हुए भूरे रंग के अंगूर जैसे मोती घुंडी मुंह में चूसने लगता है ।

शीतल को इतना आनंद आता हे आंखे भींच देती थे और आह्ह्सस्सस आसस्सस्सस आअह्ह्ह कर के सिसकारी मरने लगती है । जिशू दूध पीने की अंदाज से छपर छपर चूसे जा रहा था । शीतल काम उत्तेजित हो के जिशु की बालो से खेल रही थी ।

चूस चूस के शीतल को पागल भेसिया बना दिया जिशू ने । जिशू बेड से उतरता हे और एक एक कर के कपड़े उतार के खड़ा हो जाता है । शीतल उसकी सिक्स पैक एब्स देख के मुस्कुराने लगती है लेकिन उसकी नजर जब नीचे गई तो उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है । और मन में सोचती है (इतना बड़ा सच में)

जिशु मुस्कुराता है और शीतल की हाथ पकड़ कर बिस्तर से उतार लिया और शीतल भी इस बार प्यार से मान गई । फिर एक बार जिशु उसे बाहों में भर के किस करने लगा । शीतल भी इस बार उसकी होंठ चूसती है ।
 
Update 26


love pleasure

जिशु उसकी गले से मंगलसूत्र उतारने लगा तो शीतल उसकी आंखो में देख कर बोली ।" बेटा ये क्या कर रहे हो । "

जिशु तब तक मंगलसूत्र को पूरा ही उतार देता है और बोला ।" आंटी आज आप मेरी पत्नी होगी "

नशे में भी शीतल उसे आचार्यजनक हो के देखती है । जिशु कमरे में रखी एक नुकीली चीज उठता है और अपनी अंगूठा काट के खून भरी मांग कर देता है शीतल की मांग । शीतल हैरान उसे देखती रहती है ।

जिशु ।" आज से आप मेरी पत्नी हुई ।"

जिशु शीतल की सारी उतर के पूरी तरह से नंगी कर देता है और बिस्तर पे लेटा देता हे । शीतल की चूत झांटों से भरी थी फूली हुई चूत और उभरी हुई दिख रही थी ।

जिशू उसे कोई मौका नहीं देता और उसकी टांगे फैला के मुंह घुसा देता है । शीतल की चूत पहले से ही बोहोत गीली हो चुकी थी और चुसाई की आनंद में और गीली होती जा रही थी ।

जिशु चूत की भूरे रंग की होंठ को चाट रहा था और शीतल अअह्ह्ह्ह आआह्ह्हह्ह कर रही थी मजे में ।

कुछ मिनट चूत चाट के जिशु ऊपर चढ़ जाता है और चूत पे सुपाड़ा लगा के शीतल की मासूम चेहरे को अपने हथेलियों में दबा के पकड़ता है । शीतल मन में (उफ्फ बाबा इतना बड़ा कैसे घुसेगा ) एक सुख अनुभती और दर की लहर उसकी मन में चल रही थी ।

जिशु होंठ चूस के बोला ।" आज हमारा सुहाग दिन है । लोग सुहाग रात मनाते है लेकिन हम सुहाग दिन माना के दुनिया में नया नियम बनायेंगे हम नए पति पत्नी ।"

शीतल कोई जवाब नही देती तो जिशु थोड़ा धक्का मारता है और उसका लंड शीतल की गीली चूत में सुपाड़े से ज्यादा घुस जाता है । शीतल की दर्द से तिलमिलाती हुई चीख के साथ " आन्नन्न्ह हानन्नन " निकल जाती है ।

शीतल अपनी चूत कभी फैली और कसी हुई महसूस नही की । वैसे ही नशे में जिशू की कटपुतली बनी हुई थी और इतने सालो बाद कुंवारी चूत जैसी दर्द महसूस कर के मन ही मन जिशू की दीवानी हो गई थी ।

जिशू और थोड़ा धीरे धीरे पुश करते हुए झड़ तक लंड घुसा दिया । शीतल की आंखे चिकुड़ती गई दर्द से । " आन्नन्न निकालो "

जिशु कोई परवा नहीं करता है और पूछता है ।" मुझे पति बोलो ।"

शीतल उसके बगल से हाथ निकल के उसका कंधा पकड़ के बोलती है तकलीफ में " आह्ह्ह्ह्ह जी हां निकालो ।"

जिशू उसके चेहरे को प्यार से चूम के धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगता है । शीतल बेचारी दबी हुई आह्ह्ह्ह निकल के सेहती जाती है ।

कुछ वक्त के बाद उसकी चूत अपने आप अच्छे से जिशु के लंड का स्वागत करती हे फिर भी चूत कसा हुआ महसूस करती हे और बोहोत मजा भी आने लगती है उसे।

जिशु उसकी आखों में देख रहा होता है और शीतल भी उसकी आंखो में देख रही होती है और मुंह खोल के आहे भर रही होती हे । जिशू प्यार से कमर हिलाते रहता है ।

जिशु ।" मजा आ रहा है ।"

शीतल " आह्ह्ह ऊऊंघ । आईएसएसएसएस आह्ह्हह्ह उफफ्फ बाबा ।"

शीतल की मसूस चेहरा काम उत्तेजक से और ज्यादा कामुक और लुभावना लग रही थी । जिशू उसके मुंह से जवाब सुनना चाहता था और थोड़ा जोर से धक्का मार देता है । " बेबी बोलो ना । आज से में आपको बेबी बुलाऊंगा और आप मुझे क्या कर के बुलाएगी बोलो नह्ह्हह ।"

शीतल अपनी चूत में इतनी मोटी इतना लंबा घुसते हुए आनंद उठाती हे की उस आनंद की तरंग में जवाब दे देती है ।" जी अह्ह्ह्ह्ह मेरे नए पति ।" और बोल के शर्मा जाती हे

शीतल को सेक्स करते वक्त बोलने की आदत नही थी । लेकिन जिशु जैसे नवजवान सिक्स पैक वाला इतने बड़े वरदान प्राप्त लंड के मजे पा कर उड़ रही थी और कुछ वक्त के लिए खुद को जिशू के बाहों में शॉप दी थी ।

जिशु ।" बोलो ना क्या बुलाऊगी मुझे ।"

शीतल शर्माती तो है लेकिन कान में बोलती है ।" आन्ह्ह्ह जानूऊऊ "

जिशू मुस्कुराता हे और बेतासा चूमने लगता है । फिर थोड़ी देर के लिए चूत से लंड निकाल के अलग हो जाता है ।

जिशु बड़े प्यार से कर रहा था जो भी कर रहा था । अश्लील बाते भी प्यार भरी सुर में कर रहा था जिससे शीतल को भी आरामदायक सुखदाई उत्तेजित लग रही थी ।

शीतल को हेडबोर्ड पे तकिया टीका के उसे अध लेती कर के उसे बाहों मे भर के इस बार पूरे जोश में झटके मार मार के तेजी से चोदने लगता है ।

शीतल उसकी कंधे पे हाथ रख के चिल्लाती रहती है ।" आ आ नहीं । आआह्ह्हह्ह । उह्ह्ह्ह ओहहह्ह नहीं । दर्द हो रहा है ऊंगह । मत करो ना ऐसे । उफफफ्फ में मर गई । उपच्छ आह्ह्ह्ह ।" शीतल शिर पटकती रहती है लेकिन उसे भी बेहद आनंद आता हे ।

जिशू उसे आधे घंटे तक ऐसे ही तेजी से चोदता रहता है जिससे शीतल कोई बार पानी की फावड़े निकल के बेड शीट गिला कर देती है ।

जिशू भी थक के बाद में धीमा पड़ जाता है और धीरे धीरे चोदते हुए बोला ।" बेबी को मजा आया ।"

शीतल ।" आज तक उन्ह्ह्ह ऐसा मजा नही आया मुझे ।"

जिशु ।" नए पति के साथ खुश हो."

शीतल शर्मा जाती है ।" हम्मम्म ।"

जिशु ।" ठीक से बोलो ।"

शीतल मुस्कुराती हुई " जी जानु "

जिशू उसकी मुंह को दो उंगली में दबा के जोश में एक जोड़ का झटका दें के बोला ।" पक्का ना "

शीतल किसी तरह दर्द सेह के बोली ।" जी पक्का आह्ह्ह्ह्ह । आपने मेरी जान निकल दी जी ।,"

जिशू ।" क्यू की में असली मर्द हूं । कौन हे मर्द में या वो ।"

शीतल ।," आप " और खुद ही जिशु के होंठ चूसने लगते है ।

जिशु चोदता रहा वक्त बीतता रहा शीतल की चूत से पानी निकल निकल के थक गई थी । दिल से जिशु के लिए कदरदान थी वो । जिशु मज़े से उचकी चूत के अंदर झाड़ जाता है और वो सुख हासिल कर लेता हे जिसके लिए कायनात बदलने को तैयार रहते मर्द जात ।

दोनो एक दूसरे के बाहों में आराम फरमाते हैं घमचम चुदाई के बाद ।
 
Update 27


Jishant fermhouse

समय 5 pm

सुस्त और एक सकून भरी नींद से जब जिशू जाग उठा तो पाया कि बिस्तर पे एक चादर में लिपटे खुद को अकेला पाया । वो इधर उधर देखा तो शीतल उसको कहीं नहीं मिला । वो जल्दी से अपने कपरे पहने और कमरे से बाहर निकल कर नीचे हल में गया ।

शीतल सोफे पे बैठी थी । जिशू उसके पास गया और बैठ गया । लेकिन शीतल रो रही थी शिर पकड़ के । जिशू को समझ नही आया इस परिस्थिति को कैसे संभाले । उसने प्यार से आवाज लगाया ।" आंटी "

शीतल शीर उठा के उसे देखती है और कस के थप्पड़ मारती है । जिशू का गाल झनझना गया एक पल के लिए वो सन्न रह गया उसको ऐसी थप्पड़ की उम्मीद जो नहीं थी ।

शीतल जो एक साधारण सी भोली भाली औरत थी जिसको बाहरी दुनिया से कोई समझ नही थी वो अभी नशे से आजाद परिस्थिति को समझ पा रही थी । और उसने क्या खोया क्या चाल चली गई उसके के साथ अब पूरी तरह से समझ पा रही थी ।

शीतल सोफे से उठ गई और एक थप्पड़ लगा के सारा गुस्सा निकल के बोलने लगी ।" सब समझ आ गया है मुझे । इसी के लिए अपनी चुपड़ी चुपड़ी बाते कर के मेरा दिल जीत के यही करनें के लिए इतने दिन नाटक करता रहा और आज अपना रंग दिखा ही दिया । एक बार भी नही सोचा की ये आंटी तुम्हे अपना बेटे जैसा मानती है । एक बार भी खयाल नही आया तुझे अपने दोस्त की अपने परिवार की । हम एक परिवार की तरह रहते हे जरा भी खयाल नही आया तुझे ।"

जिशू की बोलती बंद हो गई क्या जवाब दे की बहक गया था गलती हो गई । जिशू को भी समझ था एक पत्नी दर्जा क्या होती एक औरत की पवित्रता क्या होती है और उसने फायदा उठाया था ।

शीतल उसकी मुंह पे थूकती हे ।" कभी अपना घिनौना सकल मत दिखाना मुझे दुबारा । और याद रखना मेरा श्राप जरूर लगेगा तुझे । तेरे साथ भी वोही होगा अभी तो तेरी पूरी जिंगेदी पड़ी हे और तेरी लंबी जिंदगी मे ऊपरवाला तुझे ऐसा ही कर्म करवाया तेरे अपनी के साथ । कीड़े पड़ तुझे ।"

शीतल पेड़ पटकती हुई अपनी हैंड बैग उठा के बाहर की तरफ चली गई । जिशू एक बार बुलाता है ।" आंटी । आंटी सुनी तो ।"

लेकिन शीतल मुड़ कर भी नहीं देखती और तेज़ी से फॉर्महाउस से निकल गई ।

जिशू फ्रस्ट्रेशन चीखता है चीज़ों लात मारता है । " हां मैने किया गलत । तो क्या । मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है । देखा जाय तो हम एक जैसे हे अपनों की कुकर्म की सजा हम भुगत रहे हे । आपके साथ जो हुआ आपकी सपूत्र की वजह से हुआ । मेरे अंदर जो दर्द है वो मेरी मम्मी ने मुझे दिया हे अपनी पति के साथ बेवफा तो किया ही है अपने बेटे के दिल पे भी चोट दिया हे । ऐसा चोट जो मुझे नींद तक आने नहीं देता ।" (एक दिन जिशू ने अपनी मम्मी तानिया की पीछा किया तो उसने तानिया की एक किराए की मौकान तक पीछा किया हे जिस मकान में पहले से ही उसका दोस्त तपन मजूद था । दोनो ऐसे गले मिल रहे थे जैसे दोनो एक दुसरे की प्रियाखी हो गीली चुम्मा चाटी से जिशू का दिल वोही पिच पिच कर दिया था)

change of the world

हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां

एक पुराना खंडार था जिस वक्त जिशू पागलों की तरह हास रहा था । वो उस खंडार पे अकेला ही था । दिमाग में एक चतुर चाल होंठो पे एक ऐसी मुस्कान एक ऐसी हसी जिसपे विजयी रंजिश । जैसे एक तड़पता हुआ इंसान आज किसी वजह से बोहोत खुश था या फिर अब जो कांड होने वाला है वो पहले से अंजाम जानता था और वो अंजाम उसे बोहोत खुश करने वाला था या फिर वो अंजाम उसके लिए एक हसीं का पात्र बनने वाले था । इसी सोच ने उसको एक अलग ही रोमांस अनुभव हो रहा था जैसे इस खेल के वो एक चतुर बादशाह था या हे । मुट्ठी पे रेत लेकिन रेत मुट्ठी पे कैद एक अनु भी हाथ से नही गिरा । एक तपस्या थी एक कठिन प्रसेस्था के साथ उसने दर्द सह के आज खंडार की खंबे पे हाथ रख के दूर धुंधले पहाड़ को देख रहा था और उसकी मुस्कान काम नही हो रहा था । बस इंतजार था उसे ...............

Short flashback one

" उम्म उम्म्म नही । अभी नही हे बेब जिशू के पापा के आने के वक्त हो गया है ."

"बेबी पर आपने तो कहा था वो लेट आने वाला है ।"

" हां सही कहां था मैंने 7 बज गए है । वो 6 बजे ही आ जाते हे रेगुलर ड्यूटी से । और वो आने ही वाला है ।"

" तो क्या हुआ वो आयेंगे तो हमे पता चल ही जाएगा ।"

" बेबी मुझे अधूरा काम हमेशा बेचैन करती है । इसलिए । समझ रहे हो ना"...

तानिया ने एक कामुक आदा से इतराती हुई तपन के नाक से छेड़ खानी कर के जवाब दी ।तपन भी मुस्कुराने लगा ।

तभी दोनो के मोबाइल में एक एमएमएस आया ।दोनो मोबाइल में वो एमएमएस देखने लगे । दोनो की पेड़ो तले जमीन खिसक गई । जैसे दिल की धड़कने बंद हो गई हो । चेहरे पे सफेदी आंखे चंचल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं । कोई भाव नही चेहरे पे बस दर खौफ दिल की धड़कने तेज करती हुई । एमएमएस एंड में एक एड्रेस फ्लैश हो रहा था ।

Short flashback second

शेतन ।" यार ये तपन हमे यहां आने को बोल के अभी तक नही आया एक घंटे से इंतजार कर रहे हे ।"

विशू ।" पता नही कहा मर गया कमीना । ये जिशू का भी फोन ऑफ आ रहा है । तपन ने तुझे क्या बोला था ।"

शेतन ।" कुछ नही बोला की एक बात बतानी है और कुछ फैसला लेना है । पता नही क्या चल रहा है पागल के दिमाग में ।"

विशु ।" और थोड़ी देर रुकते हे ।"(अब क्या बात बताने वाला है क्या फैसला लेना बाकी रह गया । एक जिशू भी आज काल कुछ बताता नहीं ठीक से । पता नहीं हमारी दोस्ती को किसकी नज़र लग गई )

तभी दोनो के मोबाइल में एमएमएस आता है । और दोनो की हालत वैसी ही हो जाती है । विशू को गुस्सा तपन से ज्यादा जिशु के ऊपर आ रहा था की उसने ये क्यों किया ।

Short flashback third

शीतल उदास मन से कराई में मुफली तल रही थी शाम की नाश्ते के लिए भुजिया बना रही थी । जतिन अभी तक घर लौटा नही था । उसका मन अभी भी इस घटना के बकीये में ध्यान जा रही थी । कूची दिन हुए थे उस घटना को । जब भी अपने आपसे घृणा होता हे बाथरूम में जा के रगड़ रगड़ के नहाती थी । जिशू के नाम पर नजाने कितनी गालियां कितनी बुरा भला कह के कोचती थी ।

बुजिया तैयार करने के बाद वो गैस्टॉप ऑफ करती है । और उसकी मोबाइल में भी वोही एमएमएस आती है जिसे देख कर उसकी संतुलन खो देती है जमीन पे गिरते गिरते बचा वो कई बर्तन गिर के आवाज गूंज उठी । लेकिन घर पे कोई नही था दोनो नौकर अपने अपने सर्वेन्ट रूम थे उस वक्त उनलोगो ने ध्यान नही दिया बर्तन गिरने की आवाज पर ।

शीतल सुबक सुबक के तैयार होती है उस एड्रेस पे जाने के लिए ।
 
[color=rgb(41,]Update 28

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[color=rgb(41,]Purana Khandar[/color]
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समय 7 बज 30 मिनट 45 सेकंड ।

जिशू तो पहले से मजूद था । लेकिन उसने जिन जिन लोगो को बुलाया था सब मजूद थे । और सब उसके खिलाफ थे । खिलाफ हो भी क्यों ना उसने काम ही ऐसा किया की सबकी दिल दुखा दिया था कोई ओ की तो जैसा पूछ पे आग लगा दिया था । पॉपकॉन की तरह तावे पे उछल रहा था ना बैठ पा रहा था ना उठ पा रहा था । सबके जले पे नमक छिड़कने वाला था आज वो । एक अकेला खिलाड़ी समझ बैठा था अपने मन आत्मविश्वास था उसका तदबीर आज और अभी कुछ ही देर पे पूरा होने वाला था । और सबको अपनी परसाई से वाकिफ करवाने वाला था ।

जिशु खंडार के लिंटर पे ऊपर 10 फीट ऊपर खड़ा था और नीचे (शेतन ,विशु ,तपन, तानिया और शीतल खड़ी थी) जो उसके ऊपर भड़ास निकाल रहा था ।

विशू ।" तूने प्रोमिस किया था की शीतल आंटी के साथ कुछ नही करेगा ।" (इसको आज में जिंदा नहीं छोडूंगा)

शेतन ।" भाई ये सब क्यों किया । एक बार भी मुझे तूने बताना ठीक नही समझा अभी विशु ने सब बता दिया लेकिन उसे भी नही पता था कि तू बदले में ये सब करने वाला है ।" (इसे बस जिशु की गलती दिख रही है अभी तपन की गलती के तरफ ध्यान नहीं दिया)

तपन जो गुस्से में अंगारे बन चुका था खंडार की दीवारों पे मुक्का मार के बोला ।" साले कमीने में तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा । " आग बबूला हुए जा रहा था एक सांड की तरह बस सिंह उपर कर के जीशू पे निशाना साध के रखा ।

तानिया ।" बेटा ये तूने क्या किया है । ऐसा क्यों किया मुझसे एक बार बात तो का लेते ।" ( अपनी गलती का पछतावा करती हुई)

अब वो जिसकी एमएमएस वायरल हुई थी ।शीतल बिलख बिलख के रोई जा रही थी ।" कमीने नरक में भी जगह नहीं मिलेगा तुझे । क्यूं किया मेरे साथ ऐसा क्यू । मुझे बर्बाद कर दिया तूने हरामखोर पाखंडी इंसान । सब मुझपे थूकेंगे अब । कहा मुंह छिपती फिरंगी कहा । मेरा घर उजार के क्या मिला तुझे ।"

जिशू लिंटर से जंप मार के नीचे उतरा । तपन गुस्से में जिशू के सामने जा के पूरी ताकत के साथ एक मुक्का मारता है ।

तभी जिशु सबकी आखों की पलकों में गायब हो जाता है और तपन का बार हवा में चला जाता लेकिन एक खंबे पे मुक्का पड़ जाता है । सभी आचार्य चकित रह गए क्यू की जिशू टेलीपोर्ट हो के दूसरी जगह प्रकट हो गया उन लोगो से दो गज दूर ।

हां हा हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां हां

ये हसी पूरे खंडार पे और उस पहाड़ी एलेका में गूंज उठी । और ये लोग हैरान थे ।

विशु ,तपन और शेतन मन में ये सोच रहे थे ( ये कमीना कैसे यहां से वाहा एक पलक में गायब हो के दूसरी जगह प्रकट हो सकता है । मतलब इसे भी वरदान में दूसरी सकती मिली थी और इसने हमे बताया तक नहीं । पर क्यूं । क्यू नही बताया इसने हमे । इतने दिनो तक ये हमे धोखा दे रहा था )

शीतल और तानिया भूत बनी खड़ी थी इस अद्भुत अविश्वसनीय दृश्य देख के । अच्यार्याचकीट हो के आंखे निकाल के जिशू को देख रही थी । सभी भूल गए थे एक पल के लिए की वो किस मकसद से खंडार के अंदर मजूद हे ।

जिशू थोड़ी और कर्तप दिखता है हास हास के ।सभी हैरान थे । सभी पागल की मानसिकता में थे । तानिया और शीतल तो कुछ समझ ही नही पा रही थी वो दोनो क्या अद्भुत कारनामा देख रही हे । दोनो साधारण इंसान थे उस वरदान की लक्षण समझ के परे थे ।

जिशू मुस्कुराते हुए बोला ।" तपन तुझे बोहोत घमंड है ना अपने ताकत का । आ ले मार ।मार मुझे भाई मार । आज तुझे में एहसास करवाऊंगा असली ताकत किसे कहते हे और इसकी सही प्रोयाग किया कैसे जाता है । बोहोत घमंड हे ना तुझे ।"

तपन कुछ जवाब नही दे पाया बस जिशू को देखता ही रह गया । जिशू के बातों ने जिशू के अंदाज से उसके लहेजे से उसके वो रूप देख के उसके दिमाग खाली हो गया था ।

एक पल के लिए सब लोग नजर नही हटा पा रहे थे जिशू के ऊपर से । सबकी बोलती बंद थी ।

जिशू के आखों से आसूं निकल आए नाजने किस दर्द में तड़प रहा था वो । उसने अपनी नजरे सिर्फ और सिर्फ अपनी मम्मी तानिया की तरफ कर के बोला ।" मम्मी आपको लगता है मैने जो किया वो गलत किया । लेकिन क्या आप जानते है मेरी गलती का नींव कहा से जुड़ा है । जानते हे आप मम्मी कहा से मेरी गलती की नीव जुड़ा हुई हे । मम्मी वो नींव आप और मेरे अजीज दोस्त मेरे भाई जिसे में सगे भाई मानता था तपन । वो नींव आप दोनो हो । मुझे मजबूर का दिया था आप दोनो ने । जिस दिन पता चला उसी दिन से में मर गया हूं । इस दुख से में कभी उभर नहीं पाया आज भी नहीं सायेद कभी नही । मुझे सहारा देने के लिए था मेरा एक भाई जिसे में सगा मानता हूं और वो है बिशु । जिसे ये बात मुझसे पहले पता चली नही तो में किसी को नही बताता । क्यू की इस हमारी दोस्ती टूट जाती हमारी परिवार टूट जाती । शेतन को इसलिए नहीं बताया मैंने उसे । विशु था मुझे सहारा देने के लिए लेकिन वो भी मजबूर था दो दोस्तो में से किसको सुने । मेरा घाव इतना बड़ा था की में जख्म पे मलहल लगाने के लिए कुछ नही था । मम्मी तुम सोच भी नही सकती मुझे कैसा लगता है जब भी आपको तपन के साथ ....(सेक्स ,रोमांस मोज,मस्ती) करते हुए । भला कौन अपनी मम्मी को किसी और के साथ वो भी अपने ही बेटों के दोस्त के साथ । मम्मी मानता हूं एक बार गलती से आपके हाथों से ये सब हो गया । लेकिन आप एक समझदार औरत और समझदार मां और पत्नी थी । पापा को नही बताया तो कमसे कम मुझे बता देते । आखरी मेरे ही दोस्त के साथ । ये तो हक है मेरा क्यू की आपने मेरे दोस्त के साथ रिश्ता बनाया । कोई और होता तो मम्मी ............. में सह भी लेता .............. लेकिन आपने मेरे ही दोस्त के साथ ............. क्यू मम्मी .......... इस हादसे को हुए अभी बोहोत टाइम हो गया है ....... इतने महीने में आपको गलती का एहसास भी नही हुआ और आप तपन के साथ ...........या आप इसे गलती नही जान बूझ के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर समझ के .......... मम्मी मुझसे रहा नही गया और मैने बदले में जो सही लगा वो मैंने किया ।"

जिशू अभी तक बात खतम नही की उसने इस बार तपन से बोला ।" भाई तू मुझे मारने आया था ना । अगर इतना ही बहादुर है सच्चे मर्द होते तो मुझसे बात करते मुझसे कहते की में तुम्हारी मम्मी से प्यार करता हूं । लेकिन तुम कायर निकले । जब तूने मेरे साथ वफा नहीं निभाया तो मैं क्यों निभाऊं । मेने भी तुझे वही दर्द दिया है जो तूने मुझे दिया है दोस्त । कैसा लग रहा है अब । अब तुझे पता चल रहा हे कैसा लगता है जब एक दोस्त दूसरी दोस्त की मम्मी की बिस्तर .............. लगी ना तुझे । हा भाई ऐसे ही लगी थी मुझे और आज भी सहता आ रहा हूं में । अब हम दोनों एक ही नाव पे चबार हे । तू मुझे सबक सिखाना चाहता है और में तुझे । अगर दो दो हाथ भी करना चाहता है तो में तैयार हूं जब तू बोले । अपनी कहानी का तू नायक है और में अपनी कहानी का नायक हूं । "

जिशू शेतन की तरफ खुद एक गुनेगार ठहराते हुए दिखा के शेतन की आखों में देखता है ।" है मेरा भाई । तुझे पराया कर दिया ना मैने । चाय पी गिरी मक्खी की तरह उठा के फेक दिया था मैंने तुझे इस प्लान से । लेकिन में तुझे अपनी ऐसी दुखियारी प्लान में शामिल कर के तेरी हसी नही चिन न नहीं चाहता था । विशू को भी नही बताता लेकिन इसे मुझसे पहले ही पता चल गया था । तू चाहे तो मुझे सजा दे सकता हे ।"

जिशू अब शीतल की तरफ देखता हे ।" आंटी । में आपसे कोई सफाई नहीं दूंगा । बस इतना ही कहूंगा की आपने जो श्राप दी थी वो तो आपके देने से पहले ही लग चुकी थी जो मेरे अपनो के साथ होने वाला था । में जितना भी आपसे माफी मांगू प्रस्सित के लिए कुछ भी नही होगा । इसलिए में ये उचित समझता हूं आप जो भी सजा देना चाहती है जो भी चाहे पुलिस के हाथो पकड़वा के सजा देना चाहती हे । मुझे मंजूर है ।"

जिशु के आसू सुख गए थे स्वगत भाषण से । उसे भी एहसास था उसने गलत किया हे बदले की आग में । और वो खुद चाहता था की उसे सजा मिले ।

तानिया धम से शीर पकड़ के बैठ गई उसने कभी नही सोचा था कि इसका नतीजा इतना भयानक होगा मारने मरने तक तक आ जायेगा ।(नही बेटा में मान टी हूं में गुनेगार हूं । कई बार बेटा कई बार कई बार तुम्हे बताना चाहती थी । लेकिन रिश्ते ही ऐसे हे हमारा की बता नहीं पाई ।आखरी कैसे एक मां अपनी बेटे से उसकी अफेयर के बारे में बता सकती हे । फिर भी बोहोत कशिश की । बोहोत बेटा बोहोत । पर में कमजोर हूं । मुझमें इतनी हिम्मत नही थी लेकिन आज मेरी हिम्मत ना होने की नतीजा मुझे ही नही सबको भुगतना पड़ रहा है । I'm sorry बेटा । माफ कर दो मुझे )

तपन रद्दी में पड़े न्यूज पेपर की तरह मूल्यहीन हो गया था ।( हा दोस्त तुम सही हो । अब तुम्हराब दर्द मुझे एहसास हो रहा है । में भी कमजोर निकला जितनी मेरी ताकत हे उतनी ही खोखला निकला में । क्या फायदा हुए इस वरदान का कुछ नही । सब खत्म हो गया । काश माफी के लायक होता ।"

जिशु (दोस्त में समझता हूं तुम्हारा दर्द । लेकिन गलत तो गलत होता है । में भी सायेद तब तुम्हारा दर्द ठीक से समझ नही पाया जितना अब समझ पा रहा हूं । अगर समझ पाता तो सायेद में कुछ कर पता खुद । सब दर्द तेरे कंधे पे डाल दिया दोस्त । माफ कर दे यारा)

शेतन चिल्ला के बोला ।" ये सब हो क्या रहा है । क्या हे ये सब कोई बताएगा मुझे "

जिशु उसे साइड में ले के गया समझने ।

शीतल (ये क्या बोला रहा है । क्या सुन रहा हूं में । क्या मेरा बेटा और तानिया । क्या सच में । इसलिए जिशु ने मेरे साथ ऐसा किया )

अंधेरा हो रहा था सूरज कब का डाल चुका था । लेकिन आज चांद भी शर्मा रहा था इनलोगो की कायनात देख । तभी एक कड़क बादल गरज उठे आसमान में काली घने मेघ की तकरार कुछ अनहोनी होने का संकट दे रही थी ।जैसे प्रकृति भी नाराज हे इन दृश्य से ।

अचानक खंडार का पुराना चट्ट की मालवा गिरने लगे । विशु और शेतन तो साइड में थोड़ी दूर समझा बुझा सलाह मशरा कर रहे थे ।

जिशू जिस जगह पे था उसके ऊपर कोई मालवा नही था । शीतल , तानिया और तपन जिस जगह थे उस जगह पड़ खंबे टूट के गिर रहे थे । सब कुछ इतना जल्दी हो रहा था जिसकी उम्मीद नहीं थी ।

तीनों वाहा से भागने लगे । शीतल और तपन तो कामयाब हो गए लेकिन तानिया किसी दरार में पेड़ फंस गया । और तपन जल्दी से तानिया के पास गया और तानिया की पेड़ निकलने में लगे थे की उसके ऊपर एक खंबे का मालवा गिर पड़ा । जिसपे लगी दो रोड उसके पीठ से घुस के उसके चीनें से निकल आई ।

जिशु और शीतल एक साथ चिल्लाता है "तपन"
तानिया को कुछ समझ ही नही आया पलक झपटे ही ऐसा हादसा जो हो गया ।

शेतन आवाज सुन के दौर के आ गए और विशु तो अपनी रफ्तार से पहले ही पोहोच गया था तपन के पास ।

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[color=rgb(41,]"Tapannnnnnnnn"[/color]
 
निराशा जनक अपडेट

उम्मीद के मुताबिक अपडेट नहीं रहा.

बहुत सी बातें मन मन मे ही हो गयी,

कोई वाकई मे पछताया या नही, किसे पता चला,

किसी ने कोई सफाई नही दी,
[color=rgb(255,]
तानिया का बात बताने के लिए हिम्मत ना जुटाने की बात[/color] [color=rgb(255,]सोचना हास्यास्पद लगा,
बताने की हिम्मत नही पर अपने बेटे के दोस्त से लगातार चुदने जाने की बहुत हिम्मत थी

जीशू का तपन को कहना कि तानिया से प्यार करता था तो उसे बताता,
यदि तपन बोल देता कि "मैं तेरी माँ से प्यार करता हूँ " तो क्या जीशू कहता कि तू सच्चा प्यार करता है इसलिए जाकर मेरी माँ को चोद कर मजे कर.

या ये कहना चाहिए था, कि हम 1 परिवार थे, मेरी माँ, तेरी माँ सब समान थी तो ऐसा गंदा रिश्ता रखने का सोचा भी कैसे ?[/color]

तानिया को बचा कर तपन उसका सच्चा आशिक साबित हो गया,
इससे आगे भी तानिया बिना पछतावे के तपन से चुदने जाती रहेगी,

जब सबको बुलाया तो सबके सामने सारी बातो का जवाब लेना चाहिए था,

शीतल को ठीक से पता ही नही चला की वाकई मे पुरा मामला क्या था,

वो तो बस अनुमान ही लगा रही है कि शायद तपन और तानिया के बीच कुछ था.
 
तानिया सब जानते समझते हुए भी तपन से चुदने जाती थी, अब तपन ने ही उसे जान पर खेल कर बचाया,

तो ऐसे मे तो तानिया की नज़र मे तो तपन उसका सच्चा आशिक हुआ,

तो आगे वो तपन से रिश्ता क्यों नही रखना चाहेगी.

जिनकी ( तपन और तानिया ) गलती के कारण जीशू को मजबूर होना पड़ा, उसको तपन और तानिया को जलील करते हुए जवाब लेना चाहिए था,

शीतल को भी सही से तपन और तानिया की करतूत का पता चले, जिससे उसे एहसास हो कि उसके साथ जो भी हुआ, वो उसके बेटे के हवस के कारण हुआ,

शीतल द्वारा तानिया को भी जलील करवाना चाहिए था, जिससे तानिया को अपने पत्नी धर्म, माँ का धर्म को भूल कर सिर्फ चुदने के लिए अपनो से धोखा देने पर पछतावा होना चाहिए था,

पर आपने सब गुड-गोबर कर दिया,

तानिया को घायल दिखा कर सबकी नजरो मे सहानुभूति पैदा कर दी, अब सब उसकी फिक्र करेंगे कोई उसकी करतूत के लिए कुछ नही बोलेगा,

तपन ने जान पर खेल कर तानिया को बचाने की कोशिश की तो वो सब दोष से मुक्त और सबकी नजरो मे हीरो हो गया,

जान बचाने के अहसान के बदले तानिया आगे भी तपन से चुदती रहेगी.

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तानिया घायल हो गयी, तपन ने जान पर खेल कर तानिया को बचाने की कोशिश की,

अगले अपडेट के लिए बचा ही क्या है जो अब कोई तपन या तानिया को कुछ बोल पायेगा ?
 
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