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Guest
इस बीच मेरे फ़ोन पर पांच छह पेंडिंग मैसेज डिलीवर हुए। फ़ोन काट कर मैंने नोटिफिकेशन देखे एक मैसेज जोसफ का था, कोई मीडिया भेजा था। कही ये मेरे और उसके बीच उस दिन हुई चुदाई का वीडियो तो नहीं। मेरी तो मैसेज खोलने की हिम्मत ही नहीं। वैसे भी राहुल ने बोला था कि सैंड्रा सब संभाल लेगी।
मैं सोच ही रही थी कि राहुल बैडरूम में आया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके हाथ में एक थर्मस था जो उसने टेबल पर रख दिया। मैं फ़ोन पर्स में रख बेड से उठकर खड़ी हो नजरे नीची कर ली। मेरे यहाँ रुकने का मतलब मेरी उसके साथ आज सुहागरात होने वाली थी।
उसने मेरे पास आकर मुझे पीठ से पकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया। फिर उसने पीछे हटते हुए मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और अपनी तरफ खिंच लिया। कंधे पर लगी पिन से साड़ी अटक गयी, मैंने वो पिन निकाल दी और उसने साड़ी मेरे सीने से अलग कर दी और मेरा ब्लाउज और उसके अंदर के उभार दिखने लगे।
मैने पटली पर लगी पिन भी खोल दी। उसने मेरे पेटीकोट में ऊपर से हाथ डाल मेरी साड़ी की पटली को पेटीकोट से बाहर कर दिया। फिर उसने साड़ी खींचना जारी रखा और मैं गोल गोल घूमने लगी। धीर धीरे मेरी साड़ी मेरे पेटीकोट से उतरने लगी।
जब साड़ी पूरी उसके हाथ में आ गयी तब मैं रुकी। मैं अब पेटीकोट और ब्लॉउज में शर्माए खड़ी थी। उसने मुझे खुद अपना ब्रा निकालने को बोला। मैंने उसकी तरफ पीठ कर ली और ब्लाउज के आगे के सारे हुक खोल दिए।
फिर पीठ पर ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर ब्रा का हुक खोल दिया। मैंने ब्लाउज पहने हुए ही अंदर हाथ डाल ब्रा को निकाल दिया. उसने मुझे उसकी तरफ मुड़ने को बोला और मैंने आगे से खुले ब्लाउज को हाथ से पकड़ कर बंद रखा और उसकी तरफ मुड़ गयी।
उसने मुझे बिस्तर पर लेटने को बोला मैं अपने ब्लाउज को पकड़े बंद रख लेट गयी। वो थर्मस लेकर आया और खोल कर उसमे से एक आइस क्यूब निकाल लिया। उसमे से पानी टपक रहा था। उसने मेरे होंठो के ऊपर आइस क्यूब पकडे रखकर दो तीन ठंडी बूंदें गिराई। मेरा मुँह अपने आप ही खुल गया।
उसने अब वो आइस क्यूब मेरी ठुड्डी से लेकर गले तक प्यार से फिराई । मेरी साँसे बहुत तेज हो गयी और मेरे पुरे शरीर में हलचल सी हुई और मैंने अपने हाथ ब्लाउज से हटा लिए और नीचे बिस्तर को कस कर पकड़ लिया।
मेरा ब्लाउज अभी भी मेरे मम्मे ढके हुए थे पर खुले ब्लाउज में दोनों मम्मो के बीच की थोड़ी वादियां दिखने लगी। वो अब आइस क्यूब मेरे पेट पर नाभी के आसपास लगाने लगा। मेरा बदन अब लगातार फड़क रहा था।
मेरी चूत अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। उसने अब नया आइस क्यूब निकाला जिस पर लगा पानी टपक रहा था और उसने मेरे ब्लाउज का एक हिस्सा मेरे मम्मे से हटा दिया और आइस क्यूब रगड़ने लगा। उसने पहली बार मेरे मम्मे देखे थे और मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे।
मैं अपने सीने को ऊपर उठाये अपने आप को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही थी। मेरे मम्मे पुरे फूल कर निप्पल तन गए थे। उसने दूसरी तरफ से भी ब्लाउज को हटा दूसरा मम्मा बाहर कर दिया। मैं अब भी तेज तेज साँसे ले तड़प रही थी।
उसने आइस क्यूब अपने मुँह में लिया और मेरे मम्मो पर मलने लगा। मैं मुँह खोल बुरी तरह से आहें भर रही थी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा। मैं बिस्तर पर हाथ फैलाये पड़ी थी और मेरे मम्मे खुले पड़े थे। मैंने उन्हें ढकने का प्रयास नहीं किया, वैसे भी वो अब सब देख चूका था।
उसने मेरे ऊपर सर लाते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया। मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए आनंद लेने लगी। उसकी एक के बाद एक ख्वाहिशे पूरी होती जा रही थी और मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं थी।
मेरे मम्मे देखने की उसकी ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी और साथ ही मुझे चूमने की भी। अगले पांच मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते ही रहे और उसने अपनी महीनो की अधूरी चाहत पूरी की।
उसके चूमने में एक अपनापन था जो जैक के चूमने में भी था। मेरे होंठो को छोड़ने के बाद उसके होंठ मेरे मम्मो की तरफ बढे और मेरा एक तना हुआ निप्पल अपने होंठ में भर चूसने लगा।
बारी बारी से उसने कभी मेरे निप्पल को चूसा तो कभी अपने मुँह में मेरे मम्मे को भर लिया। मैं उसके चूसने का आनद ले ही रही थी कि उसने अचानक मेरे मम्मे को काट लिया और लव बाइट दे दी। मैं एकदम से चीखी और उस हिस्से को रगड़ कर अपना दर्द मिटाने लगी। तब तक उसने मेरे दूसरे मम्मे पर भी एक निशान दे दिया।
मैं सोच ही रही थी कि राहुल बैडरूम में आया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके हाथ में एक थर्मस था जो उसने टेबल पर रख दिया। मैं फ़ोन पर्स में रख बेड से उठकर खड़ी हो नजरे नीची कर ली। मेरे यहाँ रुकने का मतलब मेरी उसके साथ आज सुहागरात होने वाली थी।
उसने मेरे पास आकर मुझे पीठ से पकड़ कर अपने सीने से चिपका लिया। फिर उसने पीछे हटते हुए मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और अपनी तरफ खिंच लिया। कंधे पर लगी पिन से साड़ी अटक गयी, मैंने वो पिन निकाल दी और उसने साड़ी मेरे सीने से अलग कर दी और मेरा ब्लाउज और उसके अंदर के उभार दिखने लगे।
मैने पटली पर लगी पिन भी खोल दी। उसने मेरे पेटीकोट में ऊपर से हाथ डाल मेरी साड़ी की पटली को पेटीकोट से बाहर कर दिया। फिर उसने साड़ी खींचना जारी रखा और मैं गोल गोल घूमने लगी। धीर धीरे मेरी साड़ी मेरे पेटीकोट से उतरने लगी।
जब साड़ी पूरी उसके हाथ में आ गयी तब मैं रुकी। मैं अब पेटीकोट और ब्लॉउज में शर्माए खड़ी थी। उसने मुझे खुद अपना ब्रा निकालने को बोला। मैंने उसकी तरफ पीठ कर ली और ब्लाउज के आगे के सारे हुक खोल दिए।
फिर पीठ पर ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर ब्रा का हुक खोल दिया। मैंने ब्लाउज पहने हुए ही अंदर हाथ डाल ब्रा को निकाल दिया. उसने मुझे उसकी तरफ मुड़ने को बोला और मैंने आगे से खुले ब्लाउज को हाथ से पकड़ कर बंद रखा और उसकी तरफ मुड़ गयी।
उसने मुझे बिस्तर पर लेटने को बोला मैं अपने ब्लाउज को पकड़े बंद रख लेट गयी। वो थर्मस लेकर आया और खोल कर उसमे से एक आइस क्यूब निकाल लिया। उसमे से पानी टपक रहा था। उसने मेरे होंठो के ऊपर आइस क्यूब पकडे रखकर दो तीन ठंडी बूंदें गिराई। मेरा मुँह अपने आप ही खुल गया।
उसने अब वो आइस क्यूब मेरी ठुड्डी से लेकर गले तक प्यार से फिराई । मेरी साँसे बहुत तेज हो गयी और मेरे पुरे शरीर में हलचल सी हुई और मैंने अपने हाथ ब्लाउज से हटा लिए और नीचे बिस्तर को कस कर पकड़ लिया।
मेरा ब्लाउज अभी भी मेरे मम्मे ढके हुए थे पर खुले ब्लाउज में दोनों मम्मो के बीच की थोड़ी वादियां दिखने लगी। वो अब आइस क्यूब मेरे पेट पर नाभी के आसपास लगाने लगा। मेरा बदन अब लगातार फड़क रहा था।
मेरी चूत अब थोड़ी गीली हो चुकी थी। उसने अब नया आइस क्यूब निकाला जिस पर लगा पानी टपक रहा था और उसने मेरे ब्लाउज का एक हिस्सा मेरे मम्मे से हटा दिया और आइस क्यूब रगड़ने लगा। उसने पहली बार मेरे मम्मे देखे थे और मेरे शरीर के रोंगटे खड़े हो चुके थे।
मैं अपने सीने को ऊपर उठाये अपने आप को नियंत्रित रखने का प्रयास कर रही थी। मेरे मम्मे पुरे फूल कर निप्पल तन गए थे। उसने दूसरी तरफ से भी ब्लाउज को हटा दूसरा मम्मा बाहर कर दिया। मैं अब भी तेज तेज साँसे ले तड़प रही थी।
उसने आइस क्यूब अपने मुँह में लिया और मेरे मम्मो पर मलने लगा। मैं मुँह खोल बुरी तरह से आहें भर रही थी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे छोड़ा। मैं बिस्तर पर हाथ फैलाये पड़ी थी और मेरे मम्मे खुले पड़े थे। मैंने उन्हें ढकने का प्रयास नहीं किया, वैसे भी वो अब सब देख चूका था।
उसने मेरे ऊपर सर लाते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसना शुरू कर दिया। मैं भी उसके होंठो को चूसते हुए आनंद लेने लगी। उसकी एक के बाद एक ख्वाहिशे पूरी होती जा रही थी और मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं थी।
मेरे मम्मे देखने की उसकी ख्वाहिश पूरी हो चुकी थी और साथ ही मुझे चूमने की भी। अगले पांच मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते ही रहे और उसने अपनी महीनो की अधूरी चाहत पूरी की।
उसके चूमने में एक अपनापन था जो जैक के चूमने में भी था। मेरे होंठो को छोड़ने के बाद उसके होंठ मेरे मम्मो की तरफ बढे और मेरा एक तना हुआ निप्पल अपने होंठ में भर चूसने लगा।
बारी बारी से उसने कभी मेरे निप्पल को चूसा तो कभी अपने मुँह में मेरे मम्मे को भर लिया। मैं उसके चूसने का आनद ले ही रही थी कि उसने अचानक मेरे मम्मे को काट लिया और लव बाइट दे दी। मैं एकदम से चीखी और उस हिस्से को रगड़ कर अपना दर्द मिटाने लगी। तब तक उसने मेरे दूसरे मम्मे पर भी एक निशान दे दिया।