(UPDATE-61)
मिली और उसके आस पास मानव कंकाल मिले. पहले तो हमें समझ में नहीं आया की यह सब क्या और कैसे हुआ. हम इसी के बारे में सोच ही रहे थे तभी हमने एक ऐसे हैवान को देखा जिसको देखने के बाद अच्छे अच्छे के होश उड़ जाएँ. वो हैवान एक बंदर की शकल वाला था और उसने देखते ही देखते हमारे साथ पास का एक गाँव वाला और भी था उसको चियर फाड़ के उसको मौत के घाट उतार दिया. में तो उस हैवान को देख कर ही अपने होश खो बैठा था. लेकिन में और मेरा दोस्त जैसे तैसे करके वहां से अपनी जान बचके भाग लिए." फिर सुशांत थोड़ा रुक कर फिर से कहा " सर! हमें जल्द से जल्द कुछ करना होगा वरना..." सुशांत कुछ और कहने ही वाला था की तभी उमेश जो इतनी देर से खामोश बैठा हुआ सुशांत की बातें सुन रहा था कहने लगा.
"तुम जिस जानवर के बारे में बता रहे हो उसके बारे में हमें पता है. लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था जो कालगरह में हुआ वो वहां पर भी हो जाएगा."
"वही तो में भी कह रहा हूँ सर! अगर हम उन जानवरों को जल्दी नहीं रोके तो प्रलय मच जाएगी. हमें जल्दी से कोई एक्शन लेना होगा." सुशांत ने कहा.
"मैंने अल्लरेअदी तमाम फोरेस्ट रेंजर्स को हर टूरिस्ट स्पॉट पर तैनात किया हुआ. बल्कि अब हमें उन सब टूरिस्ट्स को इस जंगल से जितनी जल्दी हो सके बाहर निकालना होगा. अगर हमने जल्दी कुछ नहीं किया तो पता नहीं क्या हो जाए." उमेश ने कहा.
"वो तो ठीक है सर! लेकिन इस वक्त मुझे मेरे दोस्त की जान बचना बहुत जरूरी है. पता नहीं उसके साथ क्या गुजर रही हो."
"वो तुम्हारा कौन दोस्त है? और इस वक्त अकेले उधर क्या कर रहा था.?" उमेश ने सुशांत से सवाल पूछा. पहले तो सुशांत थोड़ा झिजक की वो क्या जवाब दे इसे. वो कैसे बताता की वो एक पोचर है और वो भी खुद उसके साथ मिला हुआ है. लेकिन फिर वो हिम्मत करके जवाब दिया.
"सर! वो एक नेचर फोटोग्राफर है. वो अक्सर इस नेशनल पार्क में आता जाता रहता है और थोड़ा अद्वेंटरऔस भी है इसलिए कही भी और किसी भी वक्त चला जाता है. "
"तो तुम्हें क्या लगता है उसके साथ में कुछ नहीं हुआ होगा? जैसा तुम बता रहे हो की वो जानवर तुम्हारे ऊपर हमला किया था तो हो सकता है उस पर भी हमला किया होगा. अगर वो ज़िंदा भी होता तो अब तक उसका पता चल जाना था." उमेश ने कहा.
"वो तो ठीक है सर लेकिन हम उम्मीद तो नहीं चोद सकते. प्लीज़ सर! मुझे अपने साथ गार्ड्स ले जाने की पर्मिशन दे दीजिए." सुशांत इस बार उससे थोड़ा रिकवेस्ट करने लगा.
"ओके ओके ठीक है! जब तुम इतना कह रहे हो तो ठीक है ले जाओ. लेकिन अगर सुबह तक ना मिले तो वापस चले आना. समझ जाना की वो अब ज़िंदा नहीं है. और इसके अलावा हमें और गार्ड्स की जरूरत भी पड़ेगी पूरा जंगल खाली करने के लिए."
"ओके सर! में समझ गया. जैसा आप कह रहे है वैसे ही होगा. अब में चलता हूँ." सुशांत अपनी सीट से उत्ते हुए उमेश की केबिन से निकल गया.
उमेश की ऑफिस से निकालने के बाद सुशांत अपने साथ और गार्ड्स लिया और रेस्ट हाउस पहुंच कर परवेज़ को भी अपने साथ ले लिया. फिर उसके बाद वो सब उसी जगह पर पहुंच गये जहां पर उस गाड़ी के पास वो सारे कंकाल मिले थे. वहां पहुंच कर सुशांत ने अपने सारे गार्ड्स को जरूरी निर्देश दिए और वो सब रोहन की तलाश में निकल पड़े.
इधर दिल्ली में,
रात की खामोशी में अपने अपार्टमेंट में आरती अपने बेडरूम में दो दिन से थके होने के कारण एक दम गहरी नींद में सोई हुई थी. तभी उसके पलंग के पास में रखे हुए टेबल पर रखा हुआ उसका मोबाइल बजने लगा. आरती नींद से बेमन से उत्त्ते हुए फोन में देखे बिना ही फोन काट दिया. अभी उसे फोन काटे हुए थोड़ा ही देर हुआ था की उसका मोबाइल दोबारा बजने लगा. इस बार चिथड़े हुए उसने उत्त्ते हुए अपना मोबाइल उठाया और देखने लगी के किसका फोन है. उसने देखा की उसका एक फोटोग्राफर दोस्त मयंक का फोन था. वो अपने में बड़बड़ाते हुए बोली "ओफफो हो...अभी इसे क्या काम पढ़ गया. इतनी रात को फोन कर रहा है."
"क्या बात है मयंक? ऐसा कौनसा जरूरी काम पढ़ गया जो रात के 3 बजे मुझे नींद से जगा के परेशान कर रहे हो?" आधी नींद में डूबते हुए आरती ने दूसरी तरफ मयंक से कहा.
"एक जर्नलिस्ट के लिए क्या रात और क्या दिन. तुम्हें तो हर वक्त तैयार रहना चाहिए की कही कोई खबर तुम्हारा वेट कर रही हो." मयंक ने कहा.
"आआआहह..." एक लंबी जमाई लेती हुई आरती ने फिर मयंक से पूछा "ओके ठीक है अब यह लेक्चर देना बंद करो..और कहो किस लिए फोन किए हो."
"तुम कहा हो इस वक्त अभी?" मयंक ने कहा.
"ओह कामन मयंक..अब यह क्या सवाल है? ओफ्कोर्स में सो रही हूँ तो अपने घर पर..
मिली और उसके आस पास मानव कंकाल मिले. पहले तो हमें समझ में नहीं आया की यह सब क्या और कैसे हुआ. हम इसी के बारे में सोच ही रहे थे तभी हमने एक ऐसे हैवान को देखा जिसको देखने के बाद अच्छे अच्छे के होश उड़ जाएँ. वो हैवान एक बंदर की शकल वाला था और उसने देखते ही देखते हमारे साथ पास का एक गाँव वाला और भी था उसको चियर फाड़ के उसको मौत के घाट उतार दिया. में तो उस हैवान को देख कर ही अपने होश खो बैठा था. लेकिन में और मेरा दोस्त जैसे तैसे करके वहां से अपनी जान बचके भाग लिए." फिर सुशांत थोड़ा रुक कर फिर से कहा " सर! हमें जल्द से जल्द कुछ करना होगा वरना..." सुशांत कुछ और कहने ही वाला था की तभी उमेश जो इतनी देर से खामोश बैठा हुआ सुशांत की बातें सुन रहा था कहने लगा.
"तुम जिस जानवर के बारे में बता रहे हो उसके बारे में हमें पता है. लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था जो कालगरह में हुआ वो वहां पर भी हो जाएगा."
"वही तो में भी कह रहा हूँ सर! अगर हम उन जानवरों को जल्दी नहीं रोके तो प्रलय मच जाएगी. हमें जल्दी से कोई एक्शन लेना होगा." सुशांत ने कहा.
"मैंने अल्लरेअदी तमाम फोरेस्ट रेंजर्स को हर टूरिस्ट स्पॉट पर तैनात किया हुआ. बल्कि अब हमें उन सब टूरिस्ट्स को इस जंगल से जितनी जल्दी हो सके बाहर निकालना होगा. अगर हमने जल्दी कुछ नहीं किया तो पता नहीं क्या हो जाए." उमेश ने कहा.
"वो तो ठीक है सर! लेकिन इस वक्त मुझे मेरे दोस्त की जान बचना बहुत जरूरी है. पता नहीं उसके साथ क्या गुजर रही हो."
"वो तुम्हारा कौन दोस्त है? और इस वक्त अकेले उधर क्या कर रहा था.?" उमेश ने सुशांत से सवाल पूछा. पहले तो सुशांत थोड़ा झिजक की वो क्या जवाब दे इसे. वो कैसे बताता की वो एक पोचर है और वो भी खुद उसके साथ मिला हुआ है. लेकिन फिर वो हिम्मत करके जवाब दिया.
"सर! वो एक नेचर फोटोग्राफर है. वो अक्सर इस नेशनल पार्क में आता जाता रहता है और थोड़ा अद्वेंटरऔस भी है इसलिए कही भी और किसी भी वक्त चला जाता है. "
"तो तुम्हें क्या लगता है उसके साथ में कुछ नहीं हुआ होगा? जैसा तुम बता रहे हो की वो जानवर तुम्हारे ऊपर हमला किया था तो हो सकता है उस पर भी हमला किया होगा. अगर वो ज़िंदा भी होता तो अब तक उसका पता चल जाना था." उमेश ने कहा.
"वो तो ठीक है सर लेकिन हम उम्मीद तो नहीं चोद सकते. प्लीज़ सर! मुझे अपने साथ गार्ड्स ले जाने की पर्मिशन दे दीजिए." सुशांत इस बार उससे थोड़ा रिकवेस्ट करने लगा.
"ओके ओके ठीक है! जब तुम इतना कह रहे हो तो ठीक है ले जाओ. लेकिन अगर सुबह तक ना मिले तो वापस चले आना. समझ जाना की वो अब ज़िंदा नहीं है. और इसके अलावा हमें और गार्ड्स की जरूरत भी पड़ेगी पूरा जंगल खाली करने के लिए."
"ओके सर! में समझ गया. जैसा आप कह रहे है वैसे ही होगा. अब में चलता हूँ." सुशांत अपनी सीट से उत्ते हुए उमेश की केबिन से निकल गया.
उमेश की ऑफिस से निकालने के बाद सुशांत अपने साथ और गार्ड्स लिया और रेस्ट हाउस पहुंच कर परवेज़ को भी अपने साथ ले लिया. फिर उसके बाद वो सब उसी जगह पर पहुंच गये जहां पर उस गाड़ी के पास वो सारे कंकाल मिले थे. वहां पहुंच कर सुशांत ने अपने सारे गार्ड्स को जरूरी निर्देश दिए और वो सब रोहन की तलाश में निकल पड़े.
इधर दिल्ली में,
रात की खामोशी में अपने अपार्टमेंट में आरती अपने बेडरूम में दो दिन से थके होने के कारण एक दम गहरी नींद में सोई हुई थी. तभी उसके पलंग के पास में रखे हुए टेबल पर रखा हुआ उसका मोबाइल बजने लगा. आरती नींद से बेमन से उत्त्ते हुए फोन में देखे बिना ही फोन काट दिया. अभी उसे फोन काटे हुए थोड़ा ही देर हुआ था की उसका मोबाइल दोबारा बजने लगा. इस बार चिथड़े हुए उसने उत्त्ते हुए अपना मोबाइल उठाया और देखने लगी के किसका फोन है. उसने देखा की उसका एक फोटोग्राफर दोस्त मयंक का फोन था. वो अपने में बड़बड़ाते हुए बोली "ओफफो हो...अभी इसे क्या काम पढ़ गया. इतनी रात को फोन कर रहा है."
"क्या बात है मयंक? ऐसा कौनसा जरूरी काम पढ़ गया जो रात के 3 बजे मुझे नींद से जगा के परेशान कर रहे हो?" आधी नींद में डूबते हुए आरती ने दूसरी तरफ मयंक से कहा.
"एक जर्नलिस्ट के लिए क्या रात और क्या दिन. तुम्हें तो हर वक्त तैयार रहना चाहिए की कही कोई खबर तुम्हारा वेट कर रही हो." मयंक ने कहा.
"आआआहह..." एक लंबी जमाई लेती हुई आरती ने फिर मयंक से पूछा "ओके ठीक है अब यह लेक्चर देना बंद करो..और कहो किस लिए फोन किए हो."
"तुम कहा हो इस वक्त अभी?" मयंक ने कहा.
"ओह कामन मयंक..अब यह क्या सवाल है? ओफ्कोर्स में सो रही हूँ तो अपने घर पर..