(UPDATE-81)
लव यू डॅम इट..!!! " श्रुति, रोहन के आँखों में देखते हुए कह रही थी "क्योंकि में तुमसे प्यार करने लगी हूँ रोहन...ई लव यू..रोहन ई लव यू..." कहते हुए श्रुति, रोहन के सीने पर अपना सर रख दी.
रोहन की हालत तो ऐसी थी जैसे की उसे किसी साँप ने डांस लिया हो और वो हिलना भूल गया हो. वो इतनी देर से श्रुति पर गुस्स्से से बरसे जा रहा था. ना जाने उसका वो गुस्सा कहा हवा हो गया था. और हो भी क्यों ना क्योंकि बात ही ऐसी थी.. ऐसी बात नहीं थी की उसे श्रुति पसंद नहीं थी. वो उसे पसंद थी लेकिन वो एक मर्यादा तक सीमित था. उसने भी नोटिस किया था की श्रुति का जो रावय्या था उसके खिलाफ वो पहले से काफी नर्म पड़ गया था खासकर जब वो और श्रुति उस छोटे से घर में दुश्मनों रिश्ता बनाए थे. लेकिन वो यही समझ रहा था की जैसे दो दोस्तों के बीच रिश्ता होता है वैसा ही दोनों के बीच है. लेकिन उसे मालूम नहीं था श्रुति यूँ अचानक उससे अपने प्यार का इजहार कर देगी. श्रुति ऐसे ही रोहन के सीने से लग कर अपने प्यार का इजहार करती रही. लेकिन रोहन की समझ में नहीं आ रहा था की उसकी बात का क्या जवाब दे. जब काफी देर तक रोहन कुछ नहीं बोला तो श्रुति ने अपना चेहरा रोहन के सीने से उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखने लगी. उसने पाया की रोहन एक कशमकश की हालत में है. जैसे उसके चेहरे पर कई सवाल उभर रहे हो. जब उसे रहा नहीं गया तो वो रोहन को टोकते हुए बोली.
"क्या हुआ रोहन..? क्या सोच रहे हो?"
"आ.आ...क्क्क.कुछ...नहीं.असल में....मेरी समझ में नहीं आ रहा है की.." रोहन को तो जैसे कुछ जवाब देते बन ही नहीं रहा था.
"क्यों? क्या हुआ रोहन तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है?" श्रुति का इतना कहना था की रोहन बिना कुछ सोचे समझे कह दिया.
"ऐसी बात नहीं है...आ...मेरा मतलब है...की...." उसे अब भी जवाब देते नहीं बन रहा था.
"साफ साफ कहो क्या कहना चाहते हो?" श्रुति भी अब थोड़ी उलझन में आ गयी थी. जब रोहन फिर भी कुछ नहीं बोल रहा था तो श्रुति ने फिर से कहा.
"रोहन...? रोहन.? मेरी तरफ देखो.मेरी आंखों में देख कर कहो की तुम्हें मुझसे प्यार है या नहीं है.
"नहीं श्रुति ऐसी बात नहीं है." अब रोहन, श्रुति की आँखों में देखता हुआ कहा. "हां मुझे भी तुमसे प्यार है मगर.."
"मगर? क्या रोहन?" श्रुति ने कहा.
"देखो श्रुति बात को समझो. यह मुमकिन नहीं है"
"साफ साफ कहो ना. तुम्हारा मतलब क्या है?" श्रुति अब बेक़रार होते हुए कहा.
"इसमें बहुत अड़चनें है श्रुति.."
"कैसी अड़चनें रोहन?"
"तुम्हारे स्टेटस और मेरे स्टेटस बिलकुल अलग है श्रुति."
"स्टेटस? अब इसमें स्टेटस कहा से आ गया. में सिर्फ़ इतना जानती हूँ की में तुमसे प्यार करती हूँ और तुम मुझसे बस, पता है रोहन जिस ख्वाब के बारे में मैंने तुम्हें कल रात बताया था. जिसमें में मैं उस नौजवान का चेहरा कई दीनों से देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन नहीं देख पा रही थी. कल मैंने वो सपना फिर से देखा था और उस सपने में मैंने उस नौजवान का चेहरा भी देख लिया था. और जानते हो वो नौजवान कौन है?" रोहन जवाब में कुछ नहीं कहा बस उसकी तरफ देख रहा था. " वो नौजवान तुम थे रोहन.. तुम ही हो मेरे वो सपनों के राजकुमार. जिसे पाने के लिए में अपनी पूरी जिंदगी उसके वेट में काटने को तैयार थी. और आज जब वो मुझे मिल गया है तो वो मुझसे बजाए प्यार मोहब्बत की बातें करने की बजाए स्टेटस की बात कर रहा है." श्रुति, रोहन के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा.
"रोहन? अगर तुम समझते हो मेरी यह दौलत हमारे प्यार में रुकावट बनेगी तो नहीं चाहिए मुझे यह दौलत जो मेरे महबूब को मुझसे दूर रखे. मेरे लिए तो मेरी दौलत तुम ही हो रोहन..तुम हो." फिर श्रुति , रोहन के गले लग कर रोने लगी.. रोहन बड़ा हैरान हो रहा था उस लड़की को देखकर जो उससे इतना दीवानवार प्यार कर रही थी. उसे अचानक अपना प्यार याद आने लगा जो उसने संध्या से किसी जमाने में किया था. लेकिन उस कमबख्त को रोहन के प्यार की कोई कद्र नहीं थी. इसलिए वो उसके प्यार को ठुकरा दी थी. रोहन ने सोच लिया था वो कभी भी श्रुति का दिल नहीं तोड़ेगा जिस तरह संध्या ने उसका दिल थोड़ा था. वो श्रुति को अपने से अलग किया और उसके आँसू पोच्छने लगा.
"इतना प्यार करती हो मुझसे ..मुझे बड़ी हैरत हो रही कहा इससे पहले मेरी जान की दुशमन बनी थी और कहा मुझ पर जान लूटा रही हो." रोहन उसे थोड़ा छेड़ता हुआ कहा.
"तुम वापस से शुरू हो गये ताना देना?" श्रुति अपने आँसू पोंछते हुए कहा.
"अरे में तो मज़ाक कर रहा था. लेकिन एक प्राब्लम अभी है.?" श्रुति हैरत से रोहन की तरफ देखकर कहा.
"अब क्या बाकी है?"
"तुम्हारी उमर कितनी है?
"20"
"और में 26 का हूँ. मतलब में तुमसे पूरे दस साल बड़ा हूँ"
"ओफ्फूहू...रोहन तुम कितनी शर्त रखोगे..दो..
लव यू डॅम इट..!!! " श्रुति, रोहन के आँखों में देखते हुए कह रही थी "क्योंकि में तुमसे प्यार करने लगी हूँ रोहन...ई लव यू..रोहन ई लव यू..." कहते हुए श्रुति, रोहन के सीने पर अपना सर रख दी.
रोहन की हालत तो ऐसी थी जैसे की उसे किसी साँप ने डांस लिया हो और वो हिलना भूल गया हो. वो इतनी देर से श्रुति पर गुस्स्से से बरसे जा रहा था. ना जाने उसका वो गुस्सा कहा हवा हो गया था. और हो भी क्यों ना क्योंकि बात ही ऐसी थी.. ऐसी बात नहीं थी की उसे श्रुति पसंद नहीं थी. वो उसे पसंद थी लेकिन वो एक मर्यादा तक सीमित था. उसने भी नोटिस किया था की श्रुति का जो रावय्या था उसके खिलाफ वो पहले से काफी नर्म पड़ गया था खासकर जब वो और श्रुति उस छोटे से घर में दुश्मनों रिश्ता बनाए थे. लेकिन वो यही समझ रहा था की जैसे दो दोस्तों के बीच रिश्ता होता है वैसा ही दोनों के बीच है. लेकिन उसे मालूम नहीं था श्रुति यूँ अचानक उससे अपने प्यार का इजहार कर देगी. श्रुति ऐसे ही रोहन के सीने से लग कर अपने प्यार का इजहार करती रही. लेकिन रोहन की समझ में नहीं आ रहा था की उसकी बात का क्या जवाब दे. जब काफी देर तक रोहन कुछ नहीं बोला तो श्रुति ने अपना चेहरा रोहन के सीने से उठा कर उसके चेहरे की तरफ देखने लगी. उसने पाया की रोहन एक कशमकश की हालत में है. जैसे उसके चेहरे पर कई सवाल उभर रहे हो. जब उसे रहा नहीं गया तो वो रोहन को टोकते हुए बोली.
"क्या हुआ रोहन..? क्या सोच रहे हो?"
"आ.आ...क्क्क.कुछ...नहीं.असल में....मेरी समझ में नहीं आ रहा है की.." रोहन को तो जैसे कुछ जवाब देते बन ही नहीं रहा था.
"क्यों? क्या हुआ रोहन तुम्हें मुझसे प्यार नहीं है?" श्रुति का इतना कहना था की रोहन बिना कुछ सोचे समझे कह दिया.
"ऐसी बात नहीं है...आ...मेरा मतलब है...की...." उसे अब भी जवाब देते नहीं बन रहा था.
"साफ साफ कहो क्या कहना चाहते हो?" श्रुति भी अब थोड़ी उलझन में आ गयी थी. जब रोहन फिर भी कुछ नहीं बोल रहा था तो श्रुति ने फिर से कहा.
"रोहन...? रोहन.? मेरी तरफ देखो.मेरी आंखों में देख कर कहो की तुम्हें मुझसे प्यार है या नहीं है.
"नहीं श्रुति ऐसी बात नहीं है." अब रोहन, श्रुति की आँखों में देखता हुआ कहा. "हां मुझे भी तुमसे प्यार है मगर.."
"मगर? क्या रोहन?" श्रुति ने कहा.
"देखो श्रुति बात को समझो. यह मुमकिन नहीं है"
"साफ साफ कहो ना. तुम्हारा मतलब क्या है?" श्रुति अब बेक़रार होते हुए कहा.
"इसमें बहुत अड़चनें है श्रुति.."
"कैसी अड़चनें रोहन?"
"तुम्हारे स्टेटस और मेरे स्टेटस बिलकुल अलग है श्रुति."
"स्टेटस? अब इसमें स्टेटस कहा से आ गया. में सिर्फ़ इतना जानती हूँ की में तुमसे प्यार करती हूँ और तुम मुझसे बस, पता है रोहन जिस ख्वाब के बारे में मैंने तुम्हें कल रात बताया था. जिसमें में मैं उस नौजवान का चेहरा कई दीनों से देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन नहीं देख पा रही थी. कल मैंने वो सपना फिर से देखा था और उस सपने में मैंने उस नौजवान का चेहरा भी देख लिया था. और जानते हो वो नौजवान कौन है?" रोहन जवाब में कुछ नहीं कहा बस उसकी तरफ देख रहा था. " वो नौजवान तुम थे रोहन.. तुम ही हो मेरे वो सपनों के राजकुमार. जिसे पाने के लिए में अपनी पूरी जिंदगी उसके वेट में काटने को तैयार थी. और आज जब वो मुझे मिल गया है तो वो मुझसे बजाए प्यार मोहब्बत की बातें करने की बजाए स्टेटस की बात कर रहा है." श्रुति, रोहन के चेहरे को अपने हाथों में पकड़ते हुए कहा.
"रोहन? अगर तुम समझते हो मेरी यह दौलत हमारे प्यार में रुकावट बनेगी तो नहीं चाहिए मुझे यह दौलत जो मेरे महबूब को मुझसे दूर रखे. मेरे लिए तो मेरी दौलत तुम ही हो रोहन..तुम हो." फिर श्रुति , रोहन के गले लग कर रोने लगी.. रोहन बड़ा हैरान हो रहा था उस लड़की को देखकर जो उससे इतना दीवानवार प्यार कर रही थी. उसे अचानक अपना प्यार याद आने लगा जो उसने संध्या से किसी जमाने में किया था. लेकिन उस कमबख्त को रोहन के प्यार की कोई कद्र नहीं थी. इसलिए वो उसके प्यार को ठुकरा दी थी. रोहन ने सोच लिया था वो कभी भी श्रुति का दिल नहीं तोड़ेगा जिस तरह संध्या ने उसका दिल थोड़ा था. वो श्रुति को अपने से अलग किया और उसके आँसू पोच्छने लगा.
"इतना प्यार करती हो मुझसे ..मुझे बड़ी हैरत हो रही कहा इससे पहले मेरी जान की दुशमन बनी थी और कहा मुझ पर जान लूटा रही हो." रोहन उसे थोड़ा छेड़ता हुआ कहा.
"तुम वापस से शुरू हो गये ताना देना?" श्रुति अपने आँसू पोंछते हुए कहा.
"अरे में तो मज़ाक कर रहा था. लेकिन एक प्राब्लम अभी है.?" श्रुति हैरत से रोहन की तरफ देखकर कहा.
"अब क्या बाकी है?"
"तुम्हारी उमर कितनी है?
"20"
"और में 26 का हूँ. मतलब में तुमसे पूरे दस साल बड़ा हूँ"
"ओफ्फूहू...रोहन तुम कितनी शर्त रखोगे..दो..