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Desi Sex Kahani - THE DARKNESS RISING

(UPDATE-51)

रेस्ट हाउस तक पहुंच जाए. पर उसने ऐसा ना करने की बजाए कही और चला गया. पर क्यों???" परवेज़ अब भी सवालों के घेरे में घिरा हुआ था.
"हो सकता है सरकार, की इस जानवर को मारने के बाद उन्हें कोई और जानवर दिख गया हो या फिर वो उन्हें मारने की कोशिश कर रहा हो. और वो उसी से बचते बचाते हुए कही दूर निकल गये होंगे." भीमा ने शंका जाहिर की.
"हम..मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है. खैर यहां खड़े रहने से और बातें करने से कोई फायदा नहीं होगा. बल्कि हमें आगे बढ़ना चाहिए. मेरे ख्याल से हमें इस खाई की और आगे बढ़ना चाहिए जहाँ से इसकी ढलान कम होती होगी. हो सकता है रोहन यही सोच कर आगे बढ़ा होगा की ढलान अगर कम हो जाए तो रोड पर जाकर किसी की मदद माँग लेगा."
"ठीक है जैसा तुम ठीक समझो" परवेज़ ने कहा.
फिर वो तीनों उसी दिशा की और बढ़ने लगे. अभी वो कुछ देर ही आगे तरफ पाए थे की तभी, भीमा को अपने डायन और की झाड़ियों में जैसे कुछ सुरसूराहट सी आवाज़ आने लगी. पहले तो उसने अपना वहाँ समझ कर कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन कुछ दूर और आगे बढ़ने पर उसे फिर वही सुरसूराहट दोबारा सुनाई दी तो हूँ ठिठक कर रुक गया. और उस झाड़ियों की और देखने लगा.
"क्या हुआ भीमा?" भीमा को अपने पीछे ना आता हुआ देख कर परवेज़ ने उससे पूछा.
"स्शह.." भीमा अपनी उंगली से परवेज़ को खँसो रहने के लिए कहा और अपने हाथ के इशारे से बताने लगा की वहां पर कुछ है. सुशांत भी देख लिया था की भीमा रुक गया है और उस झाड़ियों की और देख कर किसी के होने का इशारा कर रहा है. भीमा के इशारा करने पर सुशांत और परवेज़ अपनी अपनी गुण संभाल लिए और उसी झाड़ियों की तरफ बढ़ने लगे. अभी वो तीनों कुछ ही दूर गये थे की तभी उन्हें कुछ लाल सी रोशनी सा दिखा. यह देख कर वो रुके और सोचने लगे की यह क्या चीज़ है. वो अभी कुछ समझ पाते की इससे पहले हूँ लाल रोशनी आगे की और बढ़ने लगी. जब हूँ लाल रोशनी उनके कुछ करीब आई तो उन्हें पता चला की वो कोई लाल रोशनी नहीं थी बल्कि वो लावे से भारी हुई आँखें थी. और उस आँखों का मालिक कोई और नहीं वैसा ही एक दरिन्दा था जिसे उन्होंने वहां पर मारा हुआ पाया था. उन्हें उस वक्त वो दरिन्दा मारा हुआ जितना भयानक लग रहा था उससे कही ज्यादा उन्हें वो वहशी, ज़िंदा रहते हुए लग रहा था. वो दरिन्दा अब उन्हीं की और तरफ रहा था उन्हें अपना अगला शिकार बनाना के लिए. उसे अपनी तरफ बढ़ता देख भीमा की चीख निकल गयी.
"यययययएह..कयययया.हाीइ.हे भगवान. बचाऊओ.." चिल्लाता हुआ भीमा अपनी उल्टी दिशा में भागने लगा लेकिन, उसे भागने का कोई मौका ही नहीं मिला क्योंकि, वो वहशी दरिन्दा अपने मुंह से एक भयानक दहाड़ निकालते हुए भीमा को अपने तेज नाखूनओ वाले पंजे से पकड़ा और झट से उसकी गर्दन उसके धड़ से आज़ाद कर दिया. भीमा को तो अपनी मौत का मातम करने का भी समय नहीं मिला. परवेज़ और सुशांत तो मानो एकदम सुन्न से हो गये थे, जैसे उनके बदन में कोई खून ही ना हो. अभी वो दरिन्दा भीमा को चियर फाड़ ही रहा था की सुशांत को जैसे होश आ गया की उसने अभी अभी क्या देखा है और भीमा के साथ क्या हुआ है. उसे ख्याल आया की अगर हूँ ऐसे ही खड़ा रहा तो यह हैवान उन्हें भी नीवाला बना देगा. उसने जल्दी से अपनी गुण उस दरिंदे की और तानी और निशाने लेते हुए उस दरिंदे के दिमाग में गोलियाँ दागने लगा. वो जब तक गोलियाँ चलता रहा जब तक वो दरिन्दा मर नहीं गया. कुछ देर जब उसे लगा की यह मर गया है तो वो गोलियाँ चलना बंद कर दिया. दहशत के मारे परवेज़ और सुशांत के मुंह से कोई आवाज़ ही नहीं निकल रही थी. वो दोनों एक दूसरे की और देख रहे थे. मानो पूंछ रहे हो की यह एकदम से क्या हो गया.अभी उन्हें संभालने का वक्त भी नहीं मिला था की तभी परवेज़ ने देखा की सुशांत से थोड़ी दूरी पर दो वही वहशी दरिंदे दहाड़ते हुए आ रहे है. सुशांत भी उनकी दहाड़ सुनकर पलटकर देखने लगा उन हैवानो को. एक पल के लिए वो फिर से वही जम सा गया की तभी..परवेज़ ने चिल्लाकर कहा.
"सुशांत भागो..जल्दी.हम उनका मुकाबला अपनी बंदूक से नहीं कर पाएँगे. जितनी जल्दी हो सके भागो यहां से.." परवेज़ की आवाज़ सुशांत के कानों में पढ़ते ही जैसे उसके पैर में जान आई हो और फिर वो भी परवेज़ के साथ में भागने लगा. वो दोनों इतनी तेजी से भाग रहे थे जैसे वो मॅरतॉन दौड़ रहे हो. जैसे उन्हें अव्वल आना हो. कुछ देर तक ऐसे ही भागते भागते जब उन्हें इस बात का एहसास हुआ की अब वो खूनी दरिंदे उनके पीछे नहीं है तो दोनों रुके और अपनी अपनी साँसें बेहाल करने लगे.
"यह क्या..
 
(UPDATE-52)

हो गया सुशांत? कैसे जानवर थे वो? इतने भयानक?" परवेज़ अपनी साँसें बेहाल करते हुए सुशांत से कहने लगा.
"मेरी भी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. मुझे तो एक पल ऐसा लग रहा था की जैसे मेरे पैरों में जान ही ना हो." सुशांत ने कहा.
"अब क्या करे सुशांत?" परवेज़ ने कहा.
"रुको यार थोड़ा साँस तो लेने दो." सुशांत थोड़ी देर तक ऐसे ही खड़े खड़े अपने आपको संभालने लगा. "मुझे तो भीमा की मौत पर अफ़सोस हो रहा है. बेचारा पहले ही हमारे साथ आने से कटरा रहा था. हम ही ने उसे फोर्स करके अपने साथ बुला लिया और देखो, क्या हो गया उसके साथ." सुशांत ने कहा.
"हम भी क्या कर सकते थे. हमें थोड़े ही पता था की हमारा पाला किससे पढ़ने वाला है. ऐसा खतरनाक जानवर मैंने अपनी पूरी लाइफ में नहीं देखा. पता नहीं क्या चीज़ थी." परवेज़ ने कहा.
"खैर जो हो गया सो हो गया. अब हमें अपनी जान की फिक्र करनी चाहिए. पता नहीं साले फिर किधर से टपक जाए. जितनी जल्दी हो सके हमें यहां से निकलना होगा और फिर रेस्ट हाउस पहुंच कर मुझे अपने हेडक्वॉर्टर में इत्तिला देनी पड़ेगी की कैसे कैसे खूओकार जानवर यहां घूम रहे है. अगर इन्हें जालीद नहीं रोका गया तो यह कोहराम मचा देंगे." सुशांत ने कहा.
"लेकिन सुशांत , रोहन का क्या होगा? क्या हम उसे ऐसे ही चोद दे इन हैवनो के हाथों में." परवेज़ ने कहा.
"हम कुछ भी नहीं कर सकते परवेज़. हम उनका अकेले मुकाबला नहीं कर सकते. हमें मदद बुलानी होगी तभी हम रोहन की जान बच्चा सकते है. तुम्हीं ने तो कहा था की रोहन इतनी आसानी से हार मानने वालो में से नहीं है. हो सकता है की रोहन अब भी उनका कही मुकाबला कर रहा हो. में पूरी फोर्स लेकर आएँगे और रोहन की तलाअश में लग जाएँगे." सुशांत ने परवेज़ को समझाया. परवेज़ और भी कुछ कहना चाह रहा था लेकिन उसे भी यही लग रहा था की सुशांत जो बोल रहा है ठीक ही बोल रहा है. वो दोनों अकेले मिल कर उन दरिंदो का मुकाबला करके रोहन को नहीं ढूँढ सकेंगे. आख़िर में दोनों ने यही फैसला किया की हूँ रेस्ट हाउस पहुंच कर और फोर्स माँग कर उनकी मदद से रोहन को तलाश करेंगे. वो चाहते तो वही से अपने अपने मोबाइल फोन से भी मदद मंगवा सकते थे पर उन्हें जंगल होने की वजह से कोई नेटवर्क नहीं मिल रहा था.

श्रुति थोड़ी देर बाद बड़ी मेहनत से रोहन को उस घर में ला पाई. उसका दम फूलने लगा था उसे घसीट कर यहां लाने पर. उसने रोहन को वही घर के अंदर छोडा और अपनी साँसें बेहाल करने लगी.थोड़ी देर वो ऐसे ही खड़ी रही, फिर जब उसकी साँसें बेहाल हुई तो उसने उस घर के मालिक की तलाश में उस घर का मुआईना करने लगी. उसने देखा की वो एक छोटा सा घर था जिसमें दो कमरे थे. पहले वाले कमरे में सब कबाड़ का ही सामान रखा हुआ था. फिर वो अंदर वाले कमरे में गयी तो उसने देखा की वहां पर एक पलंग है जिस पर एक चादर बिकचा हुआ था. उसने करीब जाकर उस पलंग को देखा तो उसपर जो चादर बिछा हुआ था वो एक दम गंदा हुआ था धूल से .उसे ऐसा लगा के जैसे कई दीनों से पलंग के ऊपर बिछा हुआ चादर ऐसे ही पड़ा है. और आस पास भी हर एक सामान पर धूल जमी हुई थी जैसे यहां कोई कई दीनों से आया ही नहीं है और यह घर भी लगता है ऐसे ही टेबल से खाली पढ़ा हुआ है.

तभी उसे रोहन का ख्याल की वो तो उसे वही बाहर वाले कमरे में चोद कर आई है. उसे फौरन ध्यान आया की अगर वो ऐसे ही गीले कपड़े में रहेगा तो यक़ीनन बीमार पढ़ जाएगा लेकिन, फिर अचानक उसे ख्याल आया की वो उसके कपड़े कैसे बदलेगी क्योंकि वो एक मर्द है और वो एक औरत. उसे पहले थोड़ा अटपटा लग रहा था की वो कैसे उसके कपड़े बदले और दूसरे उसे अपना स्टेटस का भी ख्याल आ रहा था की उसने आज तक अपने खुद के गंदे कपड़े को छ्छूवा तक नहीं है तो उसके कीचड़ से साने हुए कपड़े कैसे निकालेगी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी ऐसा काम करने को पर उसे ख्याल आया की अगर वो उसके कपड़े नहीं बदलेगी तो वो बीमार पढ़ जाएगा. और अगर वो बीमार हो गया, तो वो अकेली बिना इसकी मदद से इस जंगल से कैसे बाहर निकलेगी.यही सब सोचते हुए वो रोहन के पास गयी और उसे फिर से खड़े से पकड़ कर अंदर वाले कमरे में जहाँ पलंग रखी हुई थी लाने लगी.फिर उसे ख्याल आया की अगर वो उसके कपड़े ुआटरेगी तो उसे दोबारा क्या पहनाएगी. ऐसे नंगे तो नहीं चोद सकती है उसे. कुछ ना कुछ तो पहनना पड़ेगा इसे. वो यहां वहां देखने लगी की शायद इस घर में जो रही रहा था उसका कोई पुराना कपड़ा पड़ा हो पर उसे ऐसा कोई कपड़ा नहीं दिखा. तभी..
 
(UPDATE-53)

उसकी नज़र उस पलंग की चादर पर पढ़ी. उसने वो चादर पलंग से खींच लिया और उसे देखने लगी. हालाँकि वो थोड़ा गंदा थे पर रोहन का जिस्म ढकने के लिए पर्याप्त (सफिशियेंट) था . फिर उसने रोहन पर निगाह डाली और सोचने लगी इसे आख़िर हुआ क्या है? एक पत्थर पर ही लगने से इतने लंबा बेहोश हो गया की अभी तक इसे होश ही नहीं आया है. अगर इसे होश आ जाता तो वो खुद ही अपने कपड़े बदल लेता, उसे इस तरह भंगी बनकर उसके कपड़े नहीं बदलना पढ़ता. उसने कभी सोचा भी नहीं था की उसे अपनी जिंदगी में यूँ किसी के कपड़े बदलने होंगे और वो भी एक मर्द का. और वो भी वो मर्द जिसकी वजह से उसकी यह हालत हुई थी. फिर उसने सोचा की अगर वो यहां से निकलना चाहती है तो उसे हर हाल में इसके कपड़े उतारने होंगे नहीं तो यह बीमार पढ़ जाएगा.

फिर श्रुति ने हिम्मत करके रोहन के कपड़े उतारने लगी. पहले उसने शुरूआत उसकी शर्ट से की. उसने रोहन की शर्ट के बटन्स खोलने लगी. जब पूरे बटन्स खुल गये तो उसने रोहन को पेट के बाल घुमाया ताकि उसका शर्ट उसके बदन से निकाल सके. शर्ट निकालने के बाद श्रुति की नज़र रोहन के जीन्स पर गयी. उसके हाथ थोड़े से काँपने लगे की यह सोच कर उसे रोहन की जीन्स उतारना होगा. लेकिन जैसे तैसे उसने हिम्मत करके रोहन की जीन्स के स्तनों को खोलने लगी. फिर स्तनों खोलने के बाद उस जीन्स को उसकी पेंट से निकालना भी तो था. यही सब सोककर उसकी जान आधी हुई जा रही थी. इससे पहले आज तक उसने कभी अपनी लाइफ में किसी भी मर्द को आंडरवेयर में नहीं देखा था. फिर भी कुछ सोच कर उसने रोहन की पेंट को उतारने लगी. लेकिन वो जीन्स बारिश में भीगने से रोहन के बदन से चिपक गयी थी जिसकी वजह से श्रुति को जीन्स निकालने में कठिनाइया हो रही थी. फिर भी जैसे तैसे करके उसने उसकी जीन्स को उसके टांगों से आज़ाद कर दिया. पर इस दौरान जब वो उसकी जीन्स को निकाल रही थी तो उसने अपनी आँखें बंद करके ऊपर की और देख रही थी ताकि उसकी नज़र रोहन के आंडरवेयर पर ना पड़े. आख़िरकार बड़ी मेहनत से उसने रोहन की जीन्स को उसके टांगों से आज़ाद कर दिया. पर अब उसके लिए समस्या यही थी उसी आंडरवेयर को कैसे निकाले क्योंकि वो भी जीन्स की तरह पूरी भीग चुकी थी. श्रुति की हालत खराब होने लगी जब उसने सोचा की उसे यह गंदी सी आंडरवेयर निकालना पड़ेगा. यही सब सोचकर उसे उबकाईयाँ आने लगी. पर फिर भी हिम्मत करके उसने रोहन की आंडरवेयर निकालने का निर्णय किया और जैसे ही. वो उसकी आंडरवेयर को निकालने के लिए आंडरवेयर को ऊपर से छ्छूवा उसे उसी वक्त एक दम ज़ोर की उबकाईयाँ आने लगी और वो भाग कर एक कोने में उल्तियाँ करने लगी. रोहन का शर्ट और जीन्स निकालने में तो ज्यादा हैरानी तो नहीं हुई पर आंडरवेयर निकालने में उसकी हालत खराब होने लगी थी. वो सोचने लगी की वो आंडरवेयर को ऐसे ही पड़े रहने देगी और उसके ऊपर से पलंग की चादर लपेट देगी. मगर उसे ख्याल आया की अगर वो आंडरवेयर निकाले बिना चादर लपेट देगी उससे भी प्राब्लम हो जाएगी. क्योंकि वो आंडरवेयर भी पूरी भीग चुकी थी और भीगी हुई आंडरवेयर पहने रहने से भी प्राब्लम हो सकती है. मगर श्रुति इसी दुविधा में थी की वो कैसे रोहन की आंडरवेयर उतारेगी और फिर उतारने के बाद जो चीज़ उसे नज़र आएगी....तो फिर...क्या होगा सोचने लगी श्रुति. इस दुविधा में ना पढ़ना पड़े वो जाकर फिर से रोहन को हिलाकर उठाने की कोशिश करने लगी की अगर यह उठ जाएगा तो अच्छा रहता. पर लाख उठाने के बाद भी रोहन की आँख नहीं खुल रही थी. रोहन तो खुमबकरण की तरह सोया हुआ था. उठने का नाम ही नहीं ले रहा था. आख़िर तक हार के श्रुति ने तय कर लिया की वो रोहन की आंडरवेयर को उसे उतारना पड़ेगा. श्रुति फिर रोहन के पास बैठ गयी और अपनी आँखें बंद करके ऊपर की और देखने लगी . फिर अपना हाथ से रोहन की आंडरवेयर उतारने लगी. पहले उसने आंडरवेयर के ऊपर के हिस्से को पकड़ा और धीरे धीरे उसे उतारने लगी. जैसे जैसे वो उस आंडरवेयर को उतार रही थी उसे फिर से उबकाईया आनी शुरू हो गयी. मगर इस बार श्रुति झट से रोहन की टांगों से उस भीगी हुई आंडरवेयर को निकाल दिया. फिर उसने जल्दी से उस आंडरवेयर को एक तरफ फेंक दिया. फिर वो जल्दी से पलटी और उस पलंग की चादर को अपने हाथों में ली और अपनी आँखें बंद करके रोहन के ऊपर लपेटने लगी. फिर अचानक उसे ध्यान आया की उसने बजाए रोहन को पलंग में लिटाने के वो उसे वही ज़मीन पर ही छोढ़ी हुई थी. उसने देखा की ज़मीन ठंडी हो रही थी और इस तरह ठंडी ज़मीन पर उसे नहीं लिटाना चाहिए. फिर श्रुति ने रोहन को खड़े..
 
(UPDATE-54)

से पकड़ा और उसे पलंग पर डालने लगी. मगर जब वो उसे पलंग पर लिटा रही तो उसे में अचानक रोहन के ऊपर लिपटा हुआ वो चादर रोहन के ऊपर से सरक गया और श्रुति को रोहन के पूरे जंगल का नज़ारा दिखा दिया... यह देख कर श्रुति एक दम चीख मर के रोहन को ऐसे ही पलंग में चोद कर दूसरी तरफ देखने लगी. उसका दिमाग एक दम झांजना गया था रोहन के लंड को देख कर. उसने अपनी जिंदगी में पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था. श्रुति ने जल्दी से रोहन के ऊपर वो चादर डाली. वो कुछ देर ऐसे ही बैठी रही. उसके दिमाग में रही रही कर रोहन का लंड का नज़ारा घूम रहा था.

फिर वो अपने दिमाग को झटक कर अपना ध्यान कही और लगाने की कोशिश करने लगी. उसे अचानक ख्याल आया की रोहन की तरह वो भी पूरी तरह भीग चुकी थी. अगर वो भी अपने कपड़े नहीं बदलेगी तो वो बीमार पढ़ जाएगी. वो सोचने लगी के रोहन को ढकने के लिए तो उसे पलंग की चादर मिल गयी थी पर वो अपने कपड़े उतार कर फिर क्या पहनेगी. इसके सामने बिना कपड़े के भी नहीं रही सकती क्या पता इसे कब होश आ जाए. यही सब सोचते सोचते वो फिर से पूरे घर में कोई कपड़ा तलाश करने लगी ताकि उसे अपना टन ढकने के लिए कोई कपड़ा मिल जाए. मगर इतना ढूंढ़ने पर भी उसे कोई कपड़ा नहीं मिला तभी, उसकी नज़र अचानक बाहर वाले कमरे पर पढ़ी. उसने देखा की उस कमरे की खिड़की पर एक छोटा सा परदा लगा हुआ था. वो उस खिड़की की तरफ गयी तो उसने देखा की उस खिड़की पर जो परदा लगा हुआ था वो काफी छोटा था और वो उसका टन ढांकने के लिए नाकाफ़ी था. मगर श्रुति के पास इसके अलावा कोई चारा भी तो नहीं था. उसने आख़िर मान मसोसकर उस खिड़की पर लगा हुआ वो छोटा सा परदा खिच लिया. वो सोचने लगी के वो अपने कपड़े उतारकर सूखने के लिए डाल देगी और अंदर वाले कमरे के छ्हॉकट पर बैठ जाएगी ताकि अगर कभी रोहन की आँख खुले तो उसे आभास हो जाए और फिर वो उसे बाहर वाले कमरे में आने से रोक देगी ताकि वो उसे इस रूप में ना देख सके. यही सब सोचते हुए श्रुति ने अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया.. कपड़े उतारने के दौरान में श्रुति बार बार उसी कमरे और देख रही थी जहां रोहन बेहोश पढ़ा हुआ था. उसे डर था की कही वो होश में ना आ जाए और उसे कपड़े बदलते हुए ना देख ले. जब श्रुति ने अपने पूरे कपड़े उतार लिए तो उसने वही परदा जो खिड़की पर लगा हुआ था उसे अपने बदन पर लपेटने लगी. मगर वो परदा इतना छोटा था की श्रुति का पूरा बदन उसमें नहीं समा पा रहा था. फिर भी कैसे करके उस पर्दे से अपने बदन को ढँकने लगी, उस पर्दे को अपने बदन से लिपटाने के बाद ऊपर से श्रुति के आधे से ज्यादा चुचियां नुमाया हो रही थी और नीचे से उसकी पूरी झांगे दिख रही थी. वो परदा नीचे से सिर्फ़ उसकी चुत ही ढक पा रहा था. श्रुति ने एक बार सोचा की वो वापस से अपना कपड़ा पहेनले पर, ऐसा करने में उसे कोई समझदारी नहीं लगी क्योंकि उसके कपड़े पूरे गीले हो चुके थे और वापस से गीले कपड़े पहनने का मतलब था बीमार पढ़ना जो वो नहीं चाहती थी. श्रुति ने सोचा क्या फर्क पढ़ता है अगर वो उसका पूरा टन नहीं ढक पा रहा है क्योंकि यहां इस आदमी के अलावा है ही कौन. वो उसे उस कमरे से बाहर आने ही नहीं देगी तो किसे को उसको ऐसी हालत में देखने का सवाल ही नहीं पैदा होता. यही सब सोचने के बाद श्रुति ने अपनी ब्रा, पैंटी, जीन्स और रोहन की वो जॅकेट जो रोहन ने उसे दी थी पहनने लिए उसे भी सूखने के लिए डाल दिया. फिर उसे याद आया की रोहन के कपड़े भी तो गीले है अगर वो उसे सूखने के लिए नहीं डालेंगी तो वो भी गीले रही जाएँगे. मगर उसके लिए दिक्कत यह थी की ऐसी हालत में रोहन के कमरे में जाए कैसे. अगर वो ऐसे हालत में गयी तो कही उसकी आँखें ना खुल जाए." मगर जाना तो पड़ेगा" सोचते हुए श्रुति अपने हाथ से अपने सीने को ढँकते हुए रोहन के कमरे में गयी और उसकी शर्ट, जीन्स को उठाने लगी की तभी उसकी निगाह रोहन की आंडरवेयर पर पढ़ी, और वो सोचने लगी के इसे उठाए की नहीं. उसने दो सेकेंड तक सोचा फिर उस आंडरवेयर को रोहन की शर्ट से पकड़ते हुए उठा लिया और उस कमरे से बाहर निकल गयी फिर सारे कपड़े सूखने के लिए डाल दिया. फिर श्रुति रोहन के कमरे के बाहर वाले दरवाजे की ओट लेते हुए इस तरह बैठ गयी के अगर रोहन जगह जाए तो उसे आभास हो जाए और वो रोहन को कमरे से बाहर आने पर रोक दे.

श्रुति..
 
(UPDATE-55)

को अभी वहां पर बैठे हुए कुछ ही देर हुए थे की उसकी आँखें नींद से बोझल होने लगी. पर वो सोना नहीं चाहती थी क्योंकि अगर वो सो गयी तो रोहन को रोकेगी कैसे. यही सब सोचते सोचते. वो फिर भी नींद की आगोश में कब चली गयी उसे पता ही नहीं चला.

रोहन की जब आँख खुली तो उसने अपने आपको एक कमरे में पाया. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो इस वक्त कहा पर है. वो अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगा की वो यहां पर कैसे है. फिर उसे याद आया की वो एक कीचड़ भरे रास्ते से चल रहा था की तभी उसका पैर फिसला था और वो एक पत्थर से जा टकराया था. फिर उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ होश नहीं था, मगर वो यहां कैसे आया , मगर सबसे बड़ा सवाल यह है की उसे यहां लाया कौन? फिर रोहन उठ कर बैठने की कोशिश करने लगा तभी उसे एक दम से शॉक लगा क्योंकि उसने देखा की उसके बदन पर उसका एक भी कपड़ा नहीं था. उसके बदन में इस वक्त सिर्फ़ एक मैली चादर थी. उसे बड़ी हैरत हुई उसके कपड़े कहा गये और कौन इन्हें उसके बदन से निकाला. तभी उसे अचानक उस लड़की का ख्याल आया जो उसके साथ में थी जब वो बेहोश हुआ था. वो एक दम झट से पलंग से उतरने लगा पर अभी भी उसके सर के चोट की वजह से वो अपना नियत्रन नहीं कर पाया और लड़खड़ाकर गिर गया.

धम्म की आवाज़ से श्रुति जो एक दम गहरी नींद में चली गयी थी अचानक हुए इस शोर से उठ गयी. उसने देखा की वो आवाज़ अंदर वाले रूम से आई थी. वो समझने की कोशिश करने लगी की यह आवाज़ कैसी थी. उसने देखा की वो व्यक्ति जो बेहोश पलंग पर पड़ा हुआ था वही ज़मीन पर इस वक्त गिरा हुआ था.
"अफ..क्या हुआ तुम्हें? तुम ठीक तो हो?" श्रुति ने रोहन की तरफ देखते हुए कहा जो इस वक्त उठने की कोशिश कर रहा था.
"हां में ठीक हूँ. मगर में यहां पर कैसे आया." रोहन उठ ते हुए कहा. फिर वो देखने लगा की श्रुति की आवाज़ किधर से आई थी तो वो कमरे के दरवाजे के बाहर की और देखने लगा पर उसे श्रुति कही नज़र नहीं आ रही थी. इसलिए फिर वो कमरे से बाहर जाने के लिए अपने कदम बढ़ने लगा. श्रुति ने भी देख लिया था की रोहन बाहर आ रहा है. उसने फौरन उसे रोकते हुए कहा.
"वही रुको तुम... बाहर आने की कोशिश मत करो."
"क्यों क्या हुआ?" रोहन ने श्रुति से कहा.
"कुछ भी नहीं पर तुम बाहर नहीं आओगे." श्रुति ने जल्दी से कहा.
"अच्छा ठीक है नहीं आओंगा मगर यह बता में यहां पर कैसे आया.?" रोहन ने कहा.
"यहां पर कैसे आए का क्या मतलब. मैंने ही तुम्हें यहां पर लाई हूँ. जब तुम उस पत्थर से टकरा के बेहोश हो गये थे." श्रुति ने कहा.
"क्या? तू मुझे इधर लेकर आई...? कैसे?" रोहन हैरत से कहते हुए थोड़ा रुका फिर कहा.
"घसीटते हुए लाई और कैसे.गोद में तो नहीं उठा के ला सकती थी." श्रुति ने कहा.
"अच्छा ठीक है. पर मेरे कपड़े किधर है?"
"वो गीले हो गये थे. तो मैंने सोचा की अगर तुम गीले कपड़े में रहोगे और ऊपर से इतने ठंड पढ़ रही है तो तुम बीमार पढ़ जाओगे. इसलिए मैंने उन कपड़ों को उतार कर उन्हें सूखने के लिए डाल दिया." श्रुति ने कहा.
"क्या? तुमने मेरे कपड़े उतारे..? मेरे कपड़े....? " रोहन एक दम हैराअनी से पूछा.
"मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था..मुझे करना पढ़ा." श्रुति थोड़ा झेपते हुए कहा.
"अच्छा..." कहते हुए रोहन थोड़ा सोचने लगा फिर कहा."शुक्रिया तेरा". मगर श्रुति ने कुछ नहीं कहा. दोनों के बीच ऐसे ही थोड़ी देर तक खामोशी रही. फिर रोहन ने कहा.
"अगर मेरे कपड़े गीले हो गये थे तो तेरे भी कपड़े गीले हुए होंगे तो क्या तूने उन्हें भी...." कहते हुए रोहन रुक गया. उसे बाद में समझ में आया की क्यों श्रुति उसे कमरे से बाहर आने के लिए रोक रही थी. वो सोचने लगा की शायद उसने भी इसी की तरह कोई चादर लपेट के रखा है. पहले तो श्रुति को कुछ कहते नहीं बना फिर कुछ देर बाद उसने कहा.
"हां मेरे भी कपड़े गीले है और मैंने उन्हें भी सूखने के लिए डाल दिया है."
"ओह अच्छा...लेकिन तुझे क्या लगता है यह जो गीले कपड़े है इस तरह टाँगने से सूख जाएँगे?" रोहन ने कहा.
"क्यों क्या हुआ?.. हां मुझे पता है पर में क्या करती, इन्हें और कहा डालती. बाहर तो बारिश हो रही है." श्रुति ने कहा.
"हम..वो तो है. मगर हम ऐसे कब तक बैठे रहेंगे. इस तरह तो पूरा दिन निकल जाएगा पर कपड़े नहीं सूखेंगे." रोहन ने कहा.
"तो तुम्हीं बताओ इसके अलावा कोई चारा है?" श्रुति ने कहा.
"हमें उधर उस चिम्नी में आग जलानी पड़ेगी और उसके आस पास कपड़े को टाँग देंगे ताकि उसकी गरमाहट से सारे कपड़े जदली सूख जाए." रोहन ने कहा.
"वो तो ठीक है पर इसके लिए तुम्हें इधर इस रूम में आना पड़ेगा और..
 
(UPDATE-56)

मेरी हालत ऐसे है के इस हालत में में तुम्हारे सामने नहीं आ सकती."
"श."रोहन ने सिर्फ़ इतना कहा.
"तो एक काम करो तू ही उधर आग जला दे." रोहन ने कहा.
"
"
"एक बात कहना है तुमसे?" श्रुति वही से कुछ देर के बाद कहा.
"क्या? बोल?" रोहन ने कहा.
"तुम्हें ऐसे कोन से बेहोशी आ छा गयी थी की इतना तुम्हें हिलाने के बावजूद भी तुम्हें होश नहीं आ रहा था?"श्रुति ने कहा.
"पता नहीं मुझे मेरे सर के उस हिस्से पर चोट लगने के बाद क्या हो जाता है की मुझे कुछ होश ही नहीं रहता." रोहन ने कहा.उनके बीच ऐसे ही कुछ देर तक बातें होती रहती है की तभी अचानक...श्रुति को अपने पास से कुछ रेंगता हुआ महसूस हुआ. पहले तो श्रुति ने इसे अपना वहाँ समझा. पर वो चीज़ फिर उसके पास से गुज़री तो उसने देखा की वो एक बड़ा सा बारे बारे बालों वाला काला चूहा था. श्रुति ने अपनी जिंदगी में इतना भयानक चूहा नहीं देखा था. उसने एक जोरदार चीख मर के रोहन वाले कमरे में भागी. रोहन भी श्रुति के इस तरह चीख मारने पर एक दम चौंक गया. वो उठ के देखने लगा की क्यों अचानक यह लड़की चीखने लगी है. लेकिन उसने देखा की वो लड़की एक दम बदहवासी में उसकी तरफ भागते हुए आ रही है और इसी बदहवासी में जो पर्दे का कपड़ा उसने अपने टन पर लपेटा हुआ था वो कब का नीचे गिर चुका था. रोहन की तो साँसें जैसे जम सी गयी हो श्रुति को इस रूप में देख कर. उसके जिस्म पर एक भी कपड़ा नहीं था. बिलकुल मादरज़ाद नंगी हालत में थी श्रुति, रोहन से आकर लिपट गयी. श्रुति को अभी होश नहीं था की उसके जिस्म पर इस वक्त कोई कपड़ा नहीं था. वो बस उस चूहे से खौफ के मारे अब भी चिल्ला रही थी जैसे वो कोई बहुत भयानक जानवर देख ली हो. पहले तो रोहन की कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे श्रुति को इस हालत में देखने के बाद मगर जब श्रुति लगातार चिल्लाती रही तो उसका ध्यान बाहर वाले कमरे की और गया. फिर वो श्रुति को अपने से अलग करते हुए बाहर वाले कमरे की तरफ देखने लगा की ऐसा क्या था जिसकी वजह से यह लड़की इतना चिल्ला रही है. उसने देखे की वहां पर एक चूहा अभी भी यहां से वहां भाग रहा था. रोहन समझ गया इसी चूहे को देख कर यह लड़की इतना चिल्ला रही है. रोहन ने पास में पड़ा एक लकड़ी का डंडा अपने हाथ में लिया और चूहे पर अपना सटीक निशाना साधते हुए एक जोरदार प्रहार किया जो उस चूहे के सर पर जा लगा और उस चूहे ने वही पर अपना दम तोड़ दिया.

उसके बाद रोहन पलट कर श्रुति की तरफ देखा तो उसे अब भी होश नहीं था वो अब भी भी लिबास वाली हालत में थी..रोहन ने देखा की वो अब भी उस चूहे के खौफ के सदमे में है तो उसने अपनी नज़र दूसरी और कर के उससे कहा.
"मर गया है वो चूहा. घबराने की कोई जरूरत नहीं है" फिर रोहन वहां पर पढ़ा हुआ वो छोटा सा कपड़ा हाथ में उठाया और श्रुति की तरफ बढ़ा दिया.रोहन का उस कपड़े को अपनी तरफ फेंकते हुए देखकर श्रुति को एहसास हुआ की उसके बदन पर जो परदा लिपटा हुआ था वो कब का उसके बदन से निकल चुका था और वो इस वक्त बिलकुल नंगी हालत में थी. उसने जल्दी से वो परदा अपने चारों तरफ लपेटना चालू किया. फिर वो देखने लगी की रोहन क्या उसकी तरफ देख रहा है. लेकिन उसने पाया की रोहन अब उस चिम्नी में आग जलाने की कोशिश कर रहा था. उसे बड़ी शर्म आ रही थी की वो इतनी बदहवासी में यह देखे बिना की उसके बदन में कुछ है या नहीं वो सीधा जाकर रोहन से लिपट गयी थी. वो सोचने लगी वो क्या करती वो चूहा था ही इतना भयानक की उसे देखने के बाद तो मानो उसके रोंगटे खड़े हो गये हो. फिर उसने रोहन की तरफ देखा तो रोहन उस चिम्नी में आग जला चुका था और इस समय वो सारे गीले कपड़े सूखने के लिए उस आग से थोड़ा दूर सूखाने के लिए डालने लगा.
"अब तू ठीक है?" रोहन अंदर वाले कमरे में बगैर देखे कहा.
"हां...में अब ...ठीक हूँ." श्रुति को शर्म के मारे कुछ बोला भी नहीं जा रहा था.
"एक चूहे से इतना डरती है....खैर मेईने अपने और तेरे कपड़े सूखने के लिए डाल दिए है अब यह धीरे धीरे कर के सूख जाएँगे." रोहन ने कहा.
"ओके.." श्रुति ने सिर्फ़ इतना ही कहा.
"एक काम कर तू. में अंदर वाले रूम में चला जाता हूँ और तू इस रूम में आकर आग से अपने आपको सेकेंड ले. तुझे ठंड लग रही होगी"
"नहीं में ठीक हूँ" श्रुति ने कहा.
"ऐसे कैसे ठीक है? जब मुझे इतनी ठंड लग रही है तो तेरा क्या हाल हो रहा होगा. तू इधर आ जा और आग के सामने सेकाई कर ले इससे तुझे थोड़ी राहत मिलेगी...
 
(UPDATE-57)

मेरा क्या है में तो इस ठंड का आदि हूँ." कहते हुए रोहन उस दरवाजे के करीब पहुंच गया. श्रुति को कुछ जवाब देते नहीं बन रहा था मगर उसे वास्तव में ठंड बहुत लग रही थी क्योंकि एक तो जनवरी की सर्दी और ऊपर से बाहर इतनी मूसलाधार बारिश. जिसकी वजह से मौसम का तापमान बहुत गिर गया था. श्रुति के लिए इतनी ठंड बर्दाश्त करना उसके बस से बाहर था. जब रोहन उसे आग के सामने सेकाई करने का ऑफर दिया तो पहले उसने इनकार किया पर रोहन के बार बार आग्रह करने पर वो राजी हो गयी.
"ठीक है में उस रूम में आ रही हूँ, तुम ज़रा अपना मुंह दूसरी और कर लो." शरई ने कहा.
"हां हां बाबा ..मुझे पता है. में पहले से ही दूसरी और मुंह किया खड़ा हूँ.तू जल्दी से आजा." रोहन ने श्रुति के सवाल का जवाब देते हुए कहा. फिर श्रुति उठ कर बाहर वाले कमरे की और जाने लगी. उसने देखा की रोहन दूसरी और मुंह किए हुए खड़ा था. लेकिन अभी वो उस चिम्नी की तरफ जा ही रही थी अचानक से ....एक दम ज़ोर से बिजली कड़की. और फिर बिजली के इस कदर ज़ोर से कड़कने से श्रुति एक दम डर गयी और फिर से रोहन को पीछे से लपेट लिया. इस बार रोहन को कोई हैरत नहीं हुई की क्यों श्रुति चीख मर के उससे लिपट गयी है क्योंकि वो समझ गया था की यह सब की वजह अभी जो इतनी ज़ोर से बिजली कड़की है वो है. अभी वो कुछ कहने ही वाला था की तभी उसे श्रुति के इतन्ने कसके लपेटने का एहसास हुआ. उसे एहसास हो रहा था की श्रुति की चुचियाँ उसकी पीठ में चुभ रही है. एक तो इतना सर्द मौसम और ऊपर से बाहर बरसात माहौल को और भी रोमॅंटिक बना रही थी. उसे महसूस हुआ की जैसे उसके पैंट में कोई हलचल सी हो रही हो. उसे एहसास हुआ की नीचे से उसका लंड एक दम टांट जा रहा है. अब उसे अपनी दिल की धड़कने तेज होने लग रही थी. उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उसका दिल किया इस लड़की को अपनी तरफ करके उसके बदन से लिपट जाओं और उसे दीवाना वार उसके बदन को चूमते जाओं. मगर वो ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहता था. ऐसा नहीं था की रोहन ने कभी इससे पहले सेक्स नहीं किया था. उसे उसी वक्त याद आया जब वो नया नया बालिग हुआ था तो उसके अंदर ऐसे ही जवानी जोश मारा करती थी. फिर उसे एक लड़की से प्यार हो गया था और उसने उस लड़की के साथ सेक्स भी किया था. रोहन तो उस लड़की के प्रति वफादार था पर उस लड़की ने किसी और लड़के के साथ अपना टांका भिड़ा के उसका दिल तोड़ दिया था. फिर तबसे और आज जब उसकी उमर 30 की हो गयी उसने आज तक किसी भी लड़की की तरफ नज़र उठाकर नहीं देखा. उसे लड़की ज़ात से ही नफरत हो गयी थी लेकिन आज हालत ऐसे हो गये की उसे अपने आपको संभालना मुश्किल हो रहा था. उसे वो ग्यारह बारह साल पुराना वाक़िया याद आने लगा था. खैर उसने अपने आप पर काभू रखा और श्रुति से कहने लगा.

"घबरा मत...बिजली ही कड़क रही है इसमें इतना घबराने वाली कौनसी बात है."
"वो..मुझे बिजली से बहुत डर लगता है" श्रुति अब भी घबराते हुए कह रही थी.
"अपना दिल मजबूत कर कुछ नहीं होता बिजली से..में अंदर जा रहा हूँ तू आग से सेकाई करले." रोहन कहते हुए अंदर वाले रूम की तरफ बढ़ने लगा की तभी फिर से पहले से भी ज्यादा बिजली कड़की और श्रुति इस बार फिर रोहन से लिपटी तो नहीं लेकिन चीखें जा रही थी जैसे कोई उसकी जान लेने आ रहा हो. रोहन ने देखा की श्रुति एक दम डर के मारे चीखें जा रही है तो उसने तुरंत जाकर श्रुति को अपनी बाहों में ले लिया. बाहर लगातार बिजली का कडकना जारी था और बिजली के कड़कने से जितनी ज़ोर से आवाजें आती उतनी ही ज़ोर से श्रुति, रोहन को अपने से और लिपटा लेती. फिर ऐसे ही कुछ देर तक उसने श्रुति को अपनी बाहों में लिए रहा. उसे तब होश आया जब एक बार फिर श्रुति की चुचियाँ उसके सीने से चिपकी हुई थी और उसका लंड फिर से तनटानने लगा था. उसके अंदर एक बार से फिर से वही उमंगें जगह रही थी जिसे उसने बरसों पहले सुला दिया था.
अब बिजली का कडकना बंद हो गया था. श्रुति भी कुछ देर तक रोहन की बाहों में अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही थी. उसे तो जब होश आया जब उसे एहसास हुआ की उसकी चुचियाँ रोहन के सीने से टकरा रही थी. फिर उसे अपनी नाभि के पास कुछ चुभता हुआ महसूस होने लगा. पहले तो वो समझी नहीं की यह क्या चीज़ है पर उसने थोड़ा दिमाग लगाया तो उसे 1000 वॉल्ट का झटका लगा की यह तो रोहन का ...वो एक दम से रोहन से अपने आपको चुधते हुए अलग हो गयी...
 
(UPDATE-58)

फिर कुछ देर तक रोहन की आँखों में देखा और उसके बाद अपनी नज़र दूसरी और फेयर ली. इस वक्त श्रुति की भी धधकने बहुत तेजी से चल रही थी. उसे भी रोहन की बाहों में यूँ लिपटे रहना अच्छा लग रहा था. उसका दिल किया की वो एक बार फिर से रोहन से लिपट जाए पर उसने अपने आपको काबू में रखने की कोशिश करने लगी. रोहन भी उसे अपने से दूर जाते हुए देखा. फिर उसने देखा श्रुति एकदम गहरी गहरी साँसें ले रही है जिससे उसकी चुचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी. रोहन ललचाई हुई नजारे से उसकी ऊपर नीचे होती चुचियों को देख रहा था . श्रुति की चुचियाँ जितनी ऊपर नीचे हो रहित थी रोहन को उतना अपने ऊपर काबू करना मुश्किल हो रहा था. उसे नहीं मालूम की इस समय यह लड़की क्या महसूस कर रही है, उसके जज़्बात क्या है, क्यों वो भी वैसा ही महसूस कर रही है जैसा वो महसूस कर रहा है. उसे तो बस इस वक्त अपने अंदर एक ज्वालामुखी बनता हुआ महसूस हो रहा था. फिर वो बिना सोचे समझे श्रुति के करीब गया और उसका चेहरा अपने हाथों में लेते हुए अपनी तरफ करके झट से अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए. .
श्रुति अचानक होने वाले रोहन के इस रावय्यए से हक़्क़ा बक़्क़ा हो गयी थी. कुछ देर तक तो उसे समझ ही नहीं आ रहा था की रोहन क्या कर रहा है. जब उसे समझ में आया तो उसने फिर से रोहन को अपने से दूर किया. जब श्रुति ने रोहन को अपने से दूर किया तो रोहन को ऐसा लगा के जैसे उसका कोई अधूरा काम चुत गया हो. उसने देखा की श्रुति अभी भी तेज तेज साँसें ले रही थी और वो उसके इस बर्ताव से कोई ज्यादा खफा नहीं हुई थी जितना वो जानता था.वरना कोई और मौका होता तो वो ना जाने उसके साथ क्या कर देती. मगर इस समय वो इस समय दूसरी और मुंह करके रोहन से आँखें चुराते हुए दूसरी और देख रही थी. रोहन भी इसे एक ग्रीन सिग्नल की तरह लिया और फिर से श्रुति के करीब जाकर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और फिर से उसके होठों पर चूमने लगा. श्रुति फिर से उसे अपने से दूर करने लगी मगर इस वक्त वो ज्यादा ज़ोर नहीं लगा पा रही थी उससे अलग होने से जिसका मतलब यह था आग उसके अंदर भी लगी थी. बस वो हिचकिचा रही थी कुछ भी करने से. थोड़ी देर तक तो श्रुति , रोहन को अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी लेकिन जब रोहन उसका होठों को चूमना नहीं छ्चोढा तो उसे फिर कोई ज्यादा मज़ामाहट नहीं की. श्रुति भी इस वक्त आहिसा आहिस्ता रोहन का होंठ चूमने में उसका साथ देने लगी. उसे भी धीरे धीरे बहुत मजा आ रहा था. जब वो दोनों ऐसे ही कुछ देर एक दूसरे को चूमते रहे थे की तभी..रोहन ने अपना बाया हाथ श्रुति के डाई चूची पर रख दिया और से दबाने लगा. श्रुति जैसे फिर से नींद से जगह गयी. उसने रोहन का हाथ वहां से हथने की कोशिश करने लगी क्योंकि उसे अचानक ख्याल आया की वो यह क्या कर रही है. वो किसी भी हालत में अपनी जवानी यूँ किसी दूसरे मर्द को नहीं सौंप सकती थी. उसे तो वही उसके सपनों वाला शहज़ादा याद आया जो उसे उसके सपनें में आकर परेशान किया करता था. इस बार ज़ोर लगाकर रोहन को अपने से दूर किया और जाकर अंदर वाले कमरे में चली गयी. रोहन को थोड़ा हैरत हुई इसे अचानक क्या हुआ. अभी तो बराबर वो भी उसका साथ दे रही थी यह अचानक क्या हुआ. रोहन के दिल में अभी भी आग लगी हुई थी. वो अपने दिल में लगी हुई आग को जल्द से जल्द भुजाना चाहता था. वो भी उसी कमरे में गया जहां श्रुति गयी हुई थी. रोहन ने देखा की श्रुति कमरे के एक तरफ उसकी तरफ पीठ किए हुए खड़ी थी. रोहन, श्रुति का करीब जाकर उससे लिपट गया और दीवाना वार उसकी पीठ पर और कान के पीछे चूमने लगा. जब वो उसकी कान और गर्दन के पीछे चूम रहा तो श्रुति एक दम से बेक़ाबू होने लगी. शायद यह एरिया इसकी कमज़ोरी थी. वो पलटी और रोहन का चेहरा अपने हाथों में लेते हुए उसके होठों पर चूमने लगी. रोहन भी अब बेक़ाबू होकर उसे चूमने लगा. कुछ देर वो दोनों ऐसे ही एक दूसरे को चूमने लगे की श्रुति ने रोहन का बाआया हाथ अपने हाथों में लेकर अपने डाई और की चूची पर रख दी. रोहन उसकी इस हरकत पर थोड़ा चौंक गया. वो भी थोड़ा मुस्कराया और अपने दोनों हाथों से श्रुति की चुचियों को मसलने लगा. श्रुति के मुंह से आआहह..आआहह..आअहह की आवाजें निकालने लगी. श्रुति अब एक दम पागल होने लगी थी. फिर रोहन, श्रुति के जिस्म पर लिपटा हुआ वो कपड़ा एक झटके से अलग करते हुए उसे एक कोने में फेंक दिया. श्रुति अब एक दम नंगी हालत..
 
(UPDATE-59)

में उसके सामने खड़ी थी. मगर इस समय हालत कुछ और थे. वो अब रोहन से शर्मा नहीं रही थी बल्कि वो चाह रही थी वो उसकी जिस्म से खेले, जो उसकी मर्जी में आए करे, उसे वो जन्नत की सैर कराए. रोहन से श्रुति को अपने गोद में उठाया और उसे ले जाकर पलंग में लिटा दिया. जब रोहन ने श्रुति को पलंग में लिटाया तो दोनों की आँखें एक दूसरे से मिली. श्रुति उसे देख कर थोड़ा सा मुस्कराई जैसे कह रही हो अब देर किस बात की जल्दी से मेरा काम तमाम कर दो क्योंकि अब मुझे बर्धाष्त नहीं हो रहा है. रोहन भी जैसे उसके जज़्बात समझ गया था. उसने अपने बदन पर पलंग का लिपटा हुआ चादर अपने बदन से हटा दिया . श्रुति ने देखा की रोहन के ऊपर लिपटी हुई चादर के हटने से उसे वो चीज़ दिखी जो उसने रोहन को इस पलंग पर लिटाते हुए देखा था. लेकिन तब वो कितना छोटा और कितना शांत था.. मगर इस वक्त वो ऐसा लग रहा था जैसे दाहाकता हुआ कोयला, एक दम ताना हुआ.
रोहन, श्रुति के ऊपर झुकते हुए उसे फिर से उसके होठों पर चूमने लगा. श्रुति भी इस खेल में उसका भरपूर साथ देने लगी. वो भूल चुकी थी की वो अपनी जवानी किसी और के लिए महफूज़ रखी थी. उसे तो बस इस वक्त अपने अंदर उठ रहे तूफ़ानो को शांत करना था और इसके लिए वो रोहन का साथ दे रही थी. रोहन, श्रुति के होठों पर चूमने के बाद नीचे आता हुआ उसके गले पर चूमने लगा फिर कुछ देर तक ऐसे चूमते रहने के बाद वो और थोड़ा नीचे आया और एक हाथ से श्रुति के चूची को पकड़ा और दूसरी चूची को अपने मुंह लेकर उसके निप्पल को चूसने लगा. श्रुति एक दम पागल हुई जा रही थी. वो रोहन के सर के बालों को पकड़ कर उसे और अपनी तरफ दबा रही थी. जिसका मतलब यह था वो उसे और श्ििडडत से उसके निप्पल को चूज़. रोहन उसका इशारा समझते हुए वैसा ही कर रहा था. वो बड़ी बड़ी दोनों निपल्स को चूसते जा रहा था. जब काफी देर तक उसने उसके निपल्स को चूस लिया तो वो और नीचे आकर उसके पेट को चूमने लगा फिर थोड़ी देर बाद वो श्रुति के नाभि की और गया और उसकी नाभि के अंदर अपनी जबान फेरने लगा. रोहन का ऐसा करना ही था की श्रुति एक दम से अपनी कमर उठाने लगी. वो एक दम जंगली बिल्ली की तरह छटपटाने लगी. वो रोहन के बालों को एक दम तेजी पकड़ कर उसे भींचने लगी. इतना भीचने लगी की रोहन को थोड़ा दर्द भी होने लगा लेकिन उसने अफ नहीं किया और अपने कार्य को करने में लगा रहा. जब काफी देर तक वो उसकी नाभि से खेल चुका तो उसने थोड़ा और नीचे आते हुए श्रुति के ग्राय्न एरिया (दो टांगों के बीच का हिस्सा) के पास आया और वहां पर चूमने लगा. रोहन की इस हरकत से श्रुति एक दम से बिलबिला उठी और एक आवाज़ निकालते हुए आआआआआआआआअहह.......उसकी चुत ने ढेर सारा पानी छोडा. रोहन ने भी देखा उसकी इस हरकत से श्रुति झाड़ चुकी थी. फिर उसके बाद रोहन रुका नहीं बल्कि अपने कार्य में और तेजी लाता हुआ श्रुति की चुत की चिड़िया को चूमने लगा. फिर उसके बाद उसकी चुत पर अपनी जबान फेरने लगा. श्रुति जो अभी अभी झड़ी थी रोहन की एक और हरकत पर वापस से जोश में आने लगी थी. उसे रोहन का उसकी चुत में इस तरह से चूमना बहुत अच्छा लग रहा था. जब रोहन काफी देर तक उसकी चुत ऐसे ही चाटता रहा तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने आख़िर कार अपने मुंह खोला और कहने लगी.
"प्लीज़..अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा...प्लीज़ जल्दी करो...प्लीज़!!!!!! रोहन समझ गया था की उसका क्या मतलब है. वो चाहती है की वो उसकी चुत में अपना गर्म लोहा डाल दे. उसने भी सोचा की इसे और तड़पाना अच्छा नहीं है बल्कि वो भी जल्द से जल्द उसकी चुत में समा जाना चाहता था. फिर उसके बाद रोहन अपने घुटने के बाल बैठा और अपने लंड को अपने हाथ में लेते हुए श्रुति की चुत के मूहने पर रख दिया और फिर श्रुति के ऊपर लेट गया. फिर उसके बाद उसने आहिस्ता आहिस्ता अपना लंड श्रुति की चुत में डालने लगा. लेकिन अभी उसने थोड़ा ही ज़ोर लगाया था की श्रुति एक दम दर्द से चिल्लाने लगी.
"आाआहिसतीए....दर्द ..हो रहा है." श्रुति ने एक दम दर्द में आकर कहने लगी. रोहन को थोड़ी हैरत होने लगी उसे क्यों इतना दर्द हो रहा है. इतना दर्द तो उसे होता जो पहली बार किसी का लंड अपनी चुत में लेती है. यानि की वो लड़की जो कुँवारी होती है..तो इसका मतलब यह कुँवारी है..रोहन को विश्वास नहीं हो रहा था की यह लड़की जिस सोसाइटी से ताल्ल्लुक रखती है वहां पर भी कोई ऐसी लड़की होगी जो कुँवारी हो...खैर उसने इसके आगे कुछ और नहीं सोचा और श्रुति जैसा कह रही थी..
 
(UPDATE-60)

वैसा ही करने लगा. पहले पहले उसने धीरे धीरे से डालने शुरू किया. लेकिन जब उसने देखा की श्रुति से दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा है तो उसने सोचा की अगर ऐसा चलता रहा तो यह उसे डालने ही नहीं देगी. फिर उसने श्रुति के दर्द की परवाह ना करते हुए एक झटके में अपना 7 इंच का लंड उसकी चुत में घुसेड़ दिया.
"आआआआआआआआआहह..मममम्मममममममममममाआआआ....ओह में गोद्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड.........." श्रुति एक दम से पगला गयी थी रोहन के इस तरह से लंड उसकी चुत में घुसने से. रोहन के इस तरह से अपना लंड डालने से श्रुति की हाइमेन झिल्ली थी वो फॅट चुकी थी और ढेर सारा खून उसकी चुत से रिस रहा था. रोहन ने देखा श्रुति को वास्तव बहुत दर्द हुआ था. लेकिन वो भी क्या करता कभी ना कभी तो उसे डालना ही था. फिर उसने सोचा चलो अब चला ही गया है तो क्यों इस कार्य को बंद करूं. उसने फिर से श्रुति की चुत में लंड डाले और उसे धक्के देने लगा. श्रुति को रोहन से ऐसे उम्मीद नहीं थी वो इतना दर्द में छीकेगी और वो उसकी दर्द की परवाह ना करते हुए अपना काम जारी रखेगा. लेकिन जब रोहन के काफी धक्के श्रुति अपनी चुत में सहे तो उसे भी धीरे धीरे अब काफी मजा आने लगा. अब उसके मुंह से आवाजें आने लगी थी. मगर इस बार वो आवाज़ों में फर्क था. इससे पहले इसने जो आवाजें निकाली थी वो दर्द की वजह से निकाली थी और जो इस बार निकाली थी वो उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी आवाजें थी. रोहन ऐसे ही श्रुति की चुत में लंड अंदर बाहर करने लगा. और श्रुति को तो अपने ऊपर काबू ही नहीं हो रहा था. वो रोहन की पीठ पर अपने हाथ फिरने लगी, बल्कि उसकी पीठ पर कई जगह अपने तेज नूकिले नाखूनओ से खरोचने भी लगी. श्रुति को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो इस वक्त जन्नत में सैर कर रही हो. वो अपने आपको सातवें आसमान में उधता हुआ महसूस कर रही थी. उसे नहीं मालूम था की चुदाई में इतना भी मजा आता है. वरना वो कभी का किसी से अब तक चुदाया ली होती. वो चाह रही थी रोहन उसे ऐसे ही चोद था रहे. यही सब वो सोच रही थी की तभी उसके मुंह से आवाजें आने लगी.आहह...आअहह...म्‍म्म्मममम..फिर उसके बाद उसकी चुत ने ढेर सारा सफेद पानी छोडने लगी. श्रुति अब शांत होने लगी. लेकिन रोहन अभी भी शांत नहीं हुआ था. वो ऐसे ही श्रुति को छोढ़े जा रहा था. फिर उसके बाद तकरीबन 5 मिनट की चुदाई के बाद श्रुति ने एक बार फिर से अपना पानी छोडा था लेकिन रोहन का अभी बस नहीं हुआ था की तभी रोहन, श्रुति को एक दम कस के पकड़ ते हुए उसकी चुत में अपने गर्म लोहे से कई सारे लावे चोदने लगा. उसके लंड से इतना लावा छूता जैसे वो कई बरसों से उसके अंदर कैद हो. रोहन कुछ देर तक ऐसे ही श्रुति के ऊपर लेता रहा.. जब उसके अंदर थोड़ी ऊर्जा आई तो वो श्रुति के भाई तरफ होकर लेट गया. श्रुति ने भी देखा की रोहन उसके बाजू में लेट गया है. अब वो दोनों तेज तेज साँसें ले रहे थे. मानो ऐसा लग रहा था की कितनी मेहनत करके आए है. अब से कुछ देर पहले जो तूफान उनके अंदर उम्दा था वो अब शांत हो चुका था. फिर शरइत अपनी पीठ रोहन की तरफ करते हुए दूसरी और देखने लगी. फिर वो सोचने लगी उसने यह क्या कर दिया .उसने कैसे कैसे ख्वाब देखे थे . उसने आज तक कभी भी कोई बाय्फ्रेंड नहीं बनाया था. वजह सिर्फ़ वही एक ही थी. वो उसका सपनों का राजकुमार. वो जानती थी की यह सब फिल्मी बातें है लेकिन ना जाने उसे इतना अपने इस सपने पर इतना विश्वास था की एक ना एक दिन उसके ख्वाबों में आने वाला वो राजकुमार जरूर आएगा. और इसी लिए वो आज तक कुँवारी थी. लेकिन आज, वो सोचने लगी के वो अब और कुँवारी नहीं कहलाएगी . उसे बड़ी हैरत हो रही थी की उसने अपना कुँवारापन तुद्वाया भी तो किसके जरिए. जिससे वो सबसे ज्यादा नफरत करती थी उसके जरिए. वो व्यक्ति जो उसे इस खौफनाक जंगल में और उन खौफनाक जानवरों के चंगुल में फँसाया था. उसे अपने आप पर हैरत हो रही थी. खैर अब क्या कर सकते है जो हो गया सो हो गया. और यही सोचते सोचते उसे कब नींद आ गयी उसे कुछ पता ही नहीं चला.

उमेश चंद्रा तिवारी अपने केबिन में बेचैने से यहां वहां टहल रहा था की तभी सुशांत उस की इजाज़त लेता हुआ अंदर आया. सुशांत को अंदर आता हुआ देख कर उमेश ने कहा.
"कहो सुशांत अब तुम कौनसी मनहूस खबर लाए हो?" उमेश परेशानी भरे लहज़े में कहते हुए कहा.
"मनहूस नहीं सर! बहुत ही खौफनाक खबर कहो. में और मेरा दोस्त वहां पर अपने एक दोस्त की तलाश में गये थे. हम उसको तलाश ही कर रहे थे की तभी हमें एक गाड़ी..
 
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