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Adultery The Innocent Wife (hindi version)

उस शाम को विशाल वापस आया तो सब नार्मल गुजरा। उसको कुछ भी मालूम नहीं पड़ा जो आज उसके घर में गुजरा था। उसके आने से पहले अदिति नहा चुकी थी और एक छोटी सी ड्रेस पहनी हुई थी जो उसके घुटनों के ऊपर पहुँचती थी, और वो विशाल को रिझा रही थी बार-बार उसके करीब आकर अपने जिश्म को उससे टकराते हुए। रात को करते वक्त विशाल ने उसको फिर से वही ससुर वाला रोल प्ले करने को कहा। और कल के लिए उसने अदिति को सेक्सिली ड्रेस होने को कहा और वहाँ अपने बाप और भाई को रिझाने के लिए भी कहा उन 3 दिनों में। अदिति नहीं मान रही थी मगर कहा की उसको खुश करने के लिए ट्राई करेगी। मगर यकीन नहीं की कामयाब होगी यह सब करने में वहाँ। फ्राइडे शाम आई और दोनों तैयार हुए विशाल के गाँव जाने के लिए। अदिति एक बहुत खूबसूरत साड़ी में थी, जो उसकी खूबसूरती पर चार चाँद लगा रही थी।

अदिति सेक्सी, आकर्षक और बहुत हाट दिख रही थी। कोई भी मर्द उसको अपने बिस्तर पर ले जाना चाहेगा जैसी वो दिख रही थी। ऊपर से उसकी मुश्कान, उसकी आँखें और उसकी आवाज सब में जैसे आग में तेल लगा रहे थे। अदिति कुछ ऐसी दिख रही थी। और डेढ़ घंटे के ड्राइव के बाद विशाल के घर वाले मर्द लोग उसको ऐसे देखेंगे जब वहाँ पहुँचगी तो। देढ़ घंटे के ड्राइव के बाद विशाल के बाप के घर पहुंचे दोनों, जहाँ सब लोग इनका इंतेजार कर रहे थे।

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कड़ी_32 दोनों फादर-इन-ला के पुराने घर पहुंचे

दीपक और लीना आँगन में इंतेजार कर रहे थे, क्योंकी लीना ने एस.एम.एस. करके अदिति को बोल दिया था की जब वो नजदीक आएं तो टेक्स्ट करें। ससुर और राकेश ऊपर बरामदे में थे, जो रास्ते पर ही नजर रखता था। घर के पिछवाड़े में कुछ लोग कुछ बना रहे थे, पका रहे थे उत्सव के लिए। उत्सव कुछ वसंत पंचमी के जैसा था और बड़े धूम धाम से मनाया जाता था यहाँ पर। और कल शाम से शुरू होकर रात भर चलेगी।

जैसे ही विशाल की कार अंगने में एंट्री किया लीना खुशी से कूदने लगी, दोनों का नाम लेते हुए। ऐसा लगा की कोई फिल्मी हीरो हेरोयिन की एंट्री हो रही थी। अदिति आँखों में हँसी और खुशी के आँसू भर आए उन लोगों का स्वागत देखकर। उसको एक बहुत उदासी भी महसूस हुई घर को देखते हुए। क्योंकी यह उसका घर रह चुका था। कार गरेज के बगल में पार्क हो गई, राकेश और विशाल के पापा की कार गरेज के अंदर आलरेडी थी। इसलिए विशाल की कार के लिए अब जगह नहीं थी। अदिति कार से पहले निकली।

लीना ने झूमकर उसके गले लगते हुए उसके गाल और माथे पर किस किया चिल्लाते हुए- “तुम तो कमाल की लग रही हो भाभी, एक फिल्मी हेरोयिन की तरह वाह... आप इतनी ज्यादा खूबसूरत कैसे हो गई? मुझे भी अब शहर चले जाना चाहिए। हे दीपक देखो अदिति भाभी कितनी बदल गई है कितनी हाट दिखने लगी है हीहीहीही.."

विशाल के पापा अपने बेटी और बहू दोनों को मुश्कुराते हुए देख रहे थे और कहा- “लीना, तुम वहीं खड़े-खड़े बातें करती रहोगी या उसको अंदर लेकर आओगी भी?"

तब तक विशाल कार से बाहर निकल गया था और लीना ने उसको भी गले लगाया और पूछा- “मेरे गिफ्ट्स किधर है भाई? कौन सा वाला सूटकेस में है? दो मैं सूटकेस को अंदर ले जाती हूँ। सिर्फ इतना बता दो के किस में गिफ्ट्स हैं, सबसे पहले उसी को खोलूँगी हेहेहे.."

विशाल ने हँसते हुए बताया कौन सी सूटकेस में गिफ्ट्स हैं, और लीना ने उस वाले को लिया और दीपक ने एक दूसरा सूटकेस और बैग लिया और दोनों घर के अंदर जाने लगे।

अब यहाँ आने से पहले विशाल ने अदिति से कहा था की अपने पापा के पैर छूने के बाद उनके गले मिले और वो अपने पापा के चेहरे को देखेगा उस वक्त, और राकेश और दीपक से भी गले मिलने को कहा विशाल ने। तो इसलिए वो थोड़ा पीछे रुका हुआ था। क्योंकी देखना चाहता था की अदिति उसके पिता से गले मिलती है तो क्या दिखाई देगा उसे। अदिति नेचलकर बरामदे की तरफ जाते हए दो बार मुड़कर विशाल को पीछे देखा, जिसने उसको आगे बढ़ने के लिए इशारा किया।

विशाल ने अदिति को यह भी कहा था की अपने पल्लू को जानबूझ कर गिरने दे पैर छूते वक्त, और फिर गले मिलते हुए पल्लू को फिर ऊपर करने को। विशाल को यह देखना था की क्या उसके डैड अदिति की क्लीवेज को देखेंगे जब वो झुक कर उसका पैर छुएगी? और विशाल को यह भी देखना था की उसके डैड कैसे रिएक्ट करेंगे जब अदिति उनके गले लगेगी। अदिति विशाल को खुश करने के लिए वो सब कुछ करने को तैयार थी, ताकी नये रोल-प्ले के लिए उसको नई सिचुयेशन मिले। कुछ ऐसा था की खुद अदिति अपने पति की पार्टनर थी इन कामों में इस वक्त। और जब वक्त हुआ अदिति को अपने ससुर का पैर छूने की, तब तक लीना और दीपक घर के अंदर जा चुके थे और राकेश भी उन दोनों के पीछे अंदर चला गया देखने के लिये की उसके लिए भी कोई चीज होगी सूटकेस में। तो अदिति और उसके ससुर अकेले थे वहाँ उस वक्त, जबकी विशाल दूर पीछे कार के पास कुछ करने का बहाना करते हुए अपनी आँखों से अदिति की मूमेंट्स फालो कर रहा था।

अदिति अपने ससुर के सामने झुकी और साड़ी का पल्लू सरक कर बिल्कुल नीचे चला गया जिससे विशाल को बड़ी खुशी हई, और वो बेताबी से देख रहा था अपने डैड के चेहरे पर, और डैड ने सीधे अदिति के क्लीवेज को ही देखा। तब अदिति के कंधे पर हाथ रखकर उसको ऊपर उठाया, और जब तक अदिति वापस ऊपर उठ रही थी तब तक डैड की नजरें अदिति के चूचियों पर टिकी रहीं। और जल्दी से उसने पीछे एक नजर विशाल को भी देखा की कहीं वो देख तो नहीं रहा, और विशाल तुरंत एक तरफ देखने लगा।

जब डैड ने देखा की विशाल कहीं और देख रहा है तो डैड ने फिर अदिति की चूचियों को देखा जो एक बिल्कुल भोली भाली बहू की तरह पैर छूकर वापस ऊपर उठ रही थी, एक छोटी सी मुश्कान लिए हुए होंठों पर। मगर अदिति को बहुत अच्छी तरह पता था की ससुर कहाँ उसको देख रहा था उस वक्त। वो मुड़कर विशाल को दोबारा देखना चाहती थी मगर हिम्मत नहीं हुई।
 
ससुर ने धीरे से अपने हाथ को अदिति के कंधे से उसके पीठ पर किया और अदिति ने पल्लू को लटके हुए ही रहने दिया और अपनी बाहों को ससुर के तरफ बढ़ाते हुए उसको गले से लगाया। अपने चूचियों को उसकी छाती

पर कुचलते हुए महसूस करते अपने दिल की धड़कानों को तेज रफ्तार से धड़कते सुनते हुए। इससे पहले कई बार उनको अदिति ने गले लगाया था। मगर तब कछ भी इस बार की तरह नहीं था। क्योंकी अब तो विशाल ने सब प्लान किया हुआ था और रोल-प्ले खेल चुके थे ससुर के साथ।

जबरदस्त हग के बाद अदिति का हाथ ससुर की कमर पर रुका और चौखट के तरफ चलने लगे दोनों, तो ससुर ने भी अपने हाथ को अदिति की कमर पर रख दिया और दोनों चलते गये आगे, तब अदिति ने पल्लू को हल्के से उठाकर ऊपर किया और ससुर ने उस वक्त फिर एक बार क्लीवेज में झाँका और इस बार पीछे मुड़कर विशाल को देखते हुए कहा- “अरे आओ भाई तुम क्यों इतने धीरे चल रहे हो, थक गये हो क्या?” और ससुर बहू एक कपल दिख रहे थे वैसे चलते हुए।

विशाल ने सब गौर से देखा और तब हजार तरह के सवाल उसके दिमाग को गरम करने लगे। उसने खुद से कहा- “यह दोनों तो एक जोड़ी जैसे लग रहे हैं, लगता है के बिछड़े हुए थे मुद्दत से और आज मिले हैं। सबको भुला के अपने आप में गुम थे यह दोनों। डैड ने उसकी क्लीवेज बहुत अच्छी तरह से देखा। मैंने खूब नोटिस किया, और जब दोनों ने एक दूसरे को हग किया तो सिर्फ जिश्म का ऊपर वाला हिस्सा नहीं हग हुए थे बल्की पूरा जिश्म एक दूसरे से चिपके थे।

अदिति भी खूब चिपक गई थी डैड के जिश्म से नीचे से ऊपर तक पूरा का पूरा। क्या यह दोनों ऐसे कभी हग करते थे जिन दिनों हम यहाँ रहते थे? या ऐसा इसलिए हुआ आज क्योंकी दोनों बहुत दिन बाद मिल रहे हैं? क्या मेरा दिमाग ऐसा सोच रहा है या यह एक नार्मल मिलन था एक ससुर और बहु के बीच जो एक दूसरे के करीब हैं? सच का कैसे पता चलेगा? इन तीन दिनों में क्या-क्या होगा अब जो हम यहाँ गुजारने वाले हैं?"

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कड़ी_33 विशाल और अदिति वापस गाँव में-

ससुर और भाईयों के साथ तब अंदर जाकर अदिति राकेश से मिली जो विशाल का बड़ा भाई था, पूरा ब्रहमचारी कहते थे उसे। क्योंकी 40 साल के ऊपर का था और शादी नहीं किया और कभी नहीं करेगा कहता है। दोनों गले मिले। तब तक विशाल चौखट पर आ गया था और अदिति ने विशाल को देखा ठीक जब वो राकेश की बाहों में थी हग करते हुए। जबकी दीपक और लीना सूटकेस खाली कर रहे थे अपने गिफ्ट ढूँढते हुए।

अदिति का चेहरा थोड़ा सा लाल हुआ जब वो राकेश की बाहों में थी और उसने देखा की उसका ससुर भी उसको राकेश से लिपटे हुए देख रहा था, और तब ससुर ने विशाल की तरफ देखा की क्या वो जेठ और छोटी बहू को गले लगे हुए देख रहा था। राकेश ने भी अपने बाप की तरह अदिति को कसके जकड़ा था, और उसका जिश्म भी बिल्कुल अदिति के जिश्म से सटा हुआ था, ऊपर से नीचे तक जैसे ससुर के साथ हुआ था। राकेश अपनी हथेली को अदिति की कमर पर हल्के से फेरते हुए, अपनी उंगलियों से उसकी ब्रा के स्ट्रैप को जरा सा महसूस किया उस आक्सन के दौरान। तब राकेश को खयाल आया की बाकी के मर्द भी उसी कमरे में थे तो उसकी नजर पहले विशाल पर गई, फिर अपने डैड पर। तब उसने हग को ब्रेक किया अदिति से पछते हए की वो कैसी है?

राकेश ने अदिति को सबको सुनने के लिए यह कहा- “तुम तो पिछले साल से बहुत ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो, लगता है शहर की हवा तुमको बहुत रास आई है..."

यह सुनकर अदिति थोड़ी सी शर्माई और उसका चेहरा और लाल हो गया। उसने अपने ससुर और विशाल को तुरंत देखा की वह लोग कैसा रिएक्ट कर रहे हैं, राकेश की कही हुए बात पर?

मगर लीना ने तुरंत अदिति को देखते हुए कहा- “यह सच है भाभी, मैं तो अभी यही पूछने वाली थी की क्या आप ब्यूटी पार्लर जाती हो या नेचुरल ऐसी दिख रही हो? आप बिल्कुल बदल गई हो भाभी, आप फिल्मी हेरोयिन जैसी दिख रही हो, लोव यू भाभी, लोव यू आ लाट.." और लीना आकर अदिति के बाहों में समा गई।

उन दोनों को एक दूसरे के गले मिलते हुए देखकर दीपक ने कहा- “लगता है भाभी अपने देवर को भूल ही गई है

अब...”

लीना ने अदिति की बाहों से निकली यह कहते हुए- “जाओ भाभी उसके गले मिल लो, वरना वो मेरा दिमाग चाट जाएगा की मैंने उसका हक भी छीन लिया."

मुश्कुराते हुए अदिति दीपक की तरफ गई और उसको बाहों में लेकर गले से लगाया, उसके सिर पर अपना हाथ फेरते हुए। दीपक ज्यादा ऊँचे कद का नहीं था। उसका सिर ठीक अदिति की चूचियों तक पहुँचता था। तो उसका सिर अदिति के छाती पर चिपक गया और अदिति ने उसके सिर पर एक हल्की सी थपथपाहट देते हुए उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।

विशाल, राकेश और उनके बाप तीनों अदिति को दीपक को अपने छाती पर दबाए हुए देख रहे थे, और लीना ने उन लोगों को ध्यान से देखा उस वक़्त। जिस तरह से दीपक अदिति के गले लगा था, ऐसा दिख रहा था की एक जवान माँ ने अपने बेटे को गले से लगाया हआ है, और दीपक का छोटा कद उसको एक छोटे बच्चे का रूप दे रहा था, हालांकी वो 19 साल का था। उस परिवार में बस एक दीपक ही छोटे कद का था। यहाँ तक की लीना भी उससे ऊँची थी कद में।

वो एक लंबी रात थी क्योंकी बहुत सारी बातें करनी थी सबको। डिनर के बाद सब एक साथ मिल बैठे लाउंज में

और रात के दो बजे तक बातें करते रहे, कुछ ड्रिंक्स वगैरा पीते हुए। और उसके बाद सब सोने को गये।

जब अपने कमरे में गये अदिति और विशाल तो अपनी निजी बातें में मसरूफ हो गये। मगर बहुत धीरे-धीरे बातें करनी पड़ी उन्हें, क्योंकी दो बगल वाले कमरे में लोग थे। एक तरफ लीना का कमरअ था और दूसरी तरफ विशाल के पापा का। विशाल ने अदिति से उसके डैड के साथ हग वाली बात किया।

अदिति ने कहा- “उस वक्त मैं भावुक हो गई थी। मेरा रोने का मन कर रहा था क्योंकी एक साल बाद उनसे मिल रही थी और मैंने और कुछ भी नहीं सोचा या महसूस किया उस वक्त हग करते हुए."

विशाल ने कहा- “तुम्हारी पल्लू नीचे थी और तुम्हारी क्लीवेज बिल्कुल दिख रही थी..."

अदिति ने कहा- "मुझको कुछ भी खयाल नहीं था उस वक़्त, और वो सब मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए ही किया था... और उस वक्त मुझको पता भी नहीं चला की तुम्हारे डैड मेरी क्लीवेज को देख रहे थे या नहीं?"

तब विशाल ने पूछा- “क्यों और कैसे दोनों ने एक दूसरे की कमर पर हाथ रखे हुए घर के अंदर गये?”

अदिति ने इसके जवाब में कहा- “वो बिल्कुल नेचुरली हुआ, बिना सोचे समझे अपने आप ही वैसे हो गया.."

जब राकेश के बारे में विशाल ने बात किया तब भी अदिति ने कहा- “मुझको उस वक़्त भी कुछ नहीं महसूस हुआ। सिर्फ जब राकेश ने कहा की मैं बेहद खूबसूरत दिख रही हूँ। तब मुझको लगा के वो फ्लर्टिंग की तरह बात

को कहा था..”

फिर विशाल ने कहा- “किस तरह दीपक का चेहरा तुम्हारी चूचियों पर दबा हुआ था?”

अदिति ने कहा- “मुझे लगा की मैं उसकी माँ हूँ, और अपने बेटे को सीने से लगा रही हूँ..”

इस तरह विशाल को कोई ऐसा जवाब नहीं मिला अदिति से जैसा उसने सोच रखा था, ऐसे रिश्तों के लिए जो उसको उत्तेजित कर सकता। फिर भी विशाल ने कहा- “अब हम ऐसा रोल-प्ले खेलेंगे की वह मर्द लोग तुम्हारे साथ आज सो रहे हैं और उससे खूब एंजाय करेंगे रात भर."
 
अदिति ने ना चाहते हुए भी बहुत हिचकिचाहट से विशाल को उसकी प्यास को उस तरह से बुझाने को राजी हुई और उसको जवाब करना था की राकेश, दीपक और उसके डैड अदिति से संभोग कर रहे हैं। एक ही रोल-प्ले में। अदिति को पहले ससुर के साथ सोना है, तब राकेश के साथ और फिर दीपक के साथ। विशाल को बहुत ही मजा आया रोल-प्ले करते वक्त क्योंकी अदिति तड़पती आवाज में हर खेल में कुछ ना कुछ ऐसी बात कह जाती थी जिससे विशाल का मजा दोगुना हो जाता था।

जैसे के जब दीपक का रोल-प्ले हो रहा था तो जवाब करते वक़्त अदिति ने तड़पती आवाज में कहा था- “दीपक मैं तुझमें एक बेटे को देखती हूँ, तुम कैसे मुझसे यह सब करना चाहते हो?"

और जब राकेश का रोल-प्ले हो रहा था तो अदिति ने कुछ ऐसा कहा था- “भाई जी, मैं आपकी बहुत इज्जत करती हूँ, आपको शादी कर लेनी चाहिए अब। मगर मैं आपकी बहन की तरह हूँ, ओहह... नो आप मेरे साथ क्या कर रहे हो उफफ्फ...”

और जब विशाल ने अपने बाप का रोल अदा किया तब अदिति ने कुछ ऐसा कहा- “पापा आपके साथ एक साल के बाद मिलकर बहुत ही अच्छा लग रहा है, मैंने आपको बहुत मिस किया और आज रात आपके साथ सोकर मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है पापा.”

विशाल को बेहद बेहद मजा आया और उसका एरेक्शन झड़ने के बाद भी नहीं खतम हो रहा था। इतना खुश हुआ वो अदिति की अडल्टरी बातों से। और क्योंकी खड़ा ही था देर तक तो उसने अदिति को पेट के बल किया और फिर से पिछवाड़े में लगाया उस रोज की तरह, दिमाग में यही सोचते हुए की घर के दूसरे मर्द वो कर रहा हैं

अदिति के साथ।

अदिति ने विशाल को कल काम पर नहीं जाने को कहा और कहा की उत्सव के तैयारियों में हाथ बटाए। मगर विशाल का जाना बहुत ही जरूरी था।

सुबह को विशाल को मामूल से ज्यादा सवेरे निकलना पड़ा, क्योंकी ज्यादा दूर ड्राइव करना था आफिस जाने के लिए। इसलिये अदिति को पहले उटना पड़ा विशाल के ब्रेकफास्ट तैयार करने के लिए। जब विशाल आफिस के लिए निकला तो सब सो रहे थे। अदिति ने विशाल को वेव किया और वापस किचेन में चली गई।

विशाल के डैड जाग गये थे, जब विशाल की गाड़ी को आँगन में से निकलता हआ सुना तो। और वो किचेन के तरफ गये तो अदिति को अपनी नाइट-ड्रेस में देखा। अदिति अपने नाइटी में थी पर ऊपर से गाउन पहनी हुई थी। मगर वो इतनी पतली थी की अंदर के सामान नजर आ रहे थे। उस वक्त अदिति ओवेन के पास खड़ी थी कुछ करते हुए और किचेन के दरवाजे की तरफ पीठ किया हुआ था। उसके खुले बाल कुछ पीठ पर तो कुछ कंधे पर बिखरे हुए थे, उसकी नाइटी के नीचे वाले स्ट्रैप को थोड़ा सा ढके हुए।

ससुर ने ऊपर से नजर फेरते हुए आँखों को अदिति की बड़ी-बड़ी गाण्ड पर रोका और उसको पता चल गया की अदिति ने पैंटी नहीं पहनी हुई है, और ऊपर ब्रा भी नहीं पहनी हुई है। क्योंकी पतली नाइटी होने से सब साफ नजर आ रहे थे। उसके खूबसूरत चूतड़ ससुर को अपनी तरफ खिंच रहे थे। सोचना था की अगर उस वक़्त उस ड्रेस ने नहीं ढका होता तो कैसा दिखता वो हिस्सा। ससुर ने उसके हाथ, कलाई और केहनी देखी, तो अदिति कुछ बना रही थी। फिर ससुर की नजर अदिति की पतली उंगलियों पर गई, और अदिति का हाथ उठकर उसके मुँह तक गया, क्योंकी वो मुँह में कुछ डाल रही थी खाने के लिए।

पीछे से सब ससुर देख रहा था खामोश खड़े हुए और अदिति को नहीं पता था की वो उसके पीछे हैं। ससुर को अजीब लगा और उसने अपने गले को साफ करते हुए अपनी मौजूदगी का इशारा किया।

अदिति ने उसको गला साफ करते हुए सुनकर वापस मुड़कर मुश्कुराते हुए उसको देखा यह पूछते हुए- “आप ठीक से सोए पापा? बाकी सब गहरी नींद में हैं अब तक ना?"

ससुर अदिति की आँखों में देखते हुए उस तरफ बढ़ा। और अदिति जहाँ खड़ी थी वहीं खड़ी रही उसी मुश्कान के साथ ससुर को अपनी तरफ बढ़ते हुए देखते। ससुर उसके करीब आया और अपने हाथों को उसके कंधों पर रखते हुए भुनभुनाते हुए कहा- “कल की तरह तुमको कसके बाहों में लेने को मन कर रहा है फिर एक बार...”

खिलखिलते हुए अदिति ने कहा- “क्यों पापा आपने मुझे बहुत ज्यादा मिस किया क्या?"

ससुर ने बिना जवाब दिए अपने बाजू को अदिति के बाजू के नीचे करते हुए अदिति को अपनी बाहों में जोर से लिया और कहा- “फोन पर तुमसे कितनी बार मैंने तो तुमको बताया ना बेटा की तुमको कितना मिस करता हूँ,

और लीना ने बिल्कुल सही कहा की तुम पहले से बहुत ज्यादा खूबसूरत हो गई अब..."

अदिति ने भी अपनी बाहों को उसके चौड़े कंधे पर रखते हुए कहा- “नहीं पापा, मैं बिल्कुल वैसी ही हूँ जैसी यहाँ थी एक साल पहले। आप मुझे इतने दिनों बाद देख रहे हो इसीलिए आपको वैसा लग रहा है...”

ससुर ने कहा- “तुमको देखने को कितना मन कर रहा था मुझे, जब भी इस किचेन में होता हूँ तो तुम्हारी बहुत याद आती है मुझे, तुमको सोचता हूँ और उन दिनों को याद करता हूँ जब तुम यहाँ थी तो मैं कितना खुश था..”

अदिति ने फिर से खिलखिलाकर हँसते हए उसकी पीठ पर हल्के से मारते हुए धीरे से कहा- “वह सब अब उटने वाले हैं, अब छोड़िये मुझको पापा। वैसे मुझे पता था आप जरूर आओगे यहाँ इस वक्त। बल्की मैं आपको एक्सपेक्ट कर रही थी यहाँ..."

ससुर ने कहा- “यह ड्रेस बहुत ही उम्दा है बेटी, मैं इस वाले को नहीं जानता हूँ क्या तुमने नई खरीदी है?"

अदिति ने सिर्फ “हम्म” में जवाब दिया और किसी दरवाजे की खुलने की आवाज सुनाई दी तो झट से अदिति अपने ससुर के बाहों से निकली और अपने कमरे के तरफ जाने लगी।

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कड़ी_34 अदिति अकेली, विशाल आफिस में वापस

वो क्या था?

क्यों अदिति ने कहा- “वह सब अब उठने वाले हैं अब छोड़िये मुझको पापा। मैं आपको यहाँ एक्सपेक्ट कर रही थी.” ऐसा लगा की इन दोनों के बीच कोई सीक्रेट है, ऐसा ही कुछ लगा ना? यह दोनों एक दूसरे के इतने करीब थे? दोनों के बीच कुछ था भी या इनकी ऐसे भी बात करने की आदत थी हमेशा से?

खैर, चलो देखते हैं आगे।

आफिस में विशाल का दिल और दिमाग सिर्फ अपने डैड के घर पर था। बेशक वो वही सबके बारे में सोच रहा था जो कुछ कल उसके नजरों ने देखा।

जिस तरह उसने अदिति को अपने ससुर को हग करते देखा, किस तरह उसकी पल्लू नीचे गिरी थी और उसके डैड की नजरें अदिति की क्लीवेज पर थी। किस तरह राकेश ने अदिति को हग किया था और उसकी उंगलियां किस तरह से अदिति के स्ट्रैप्स पर फीरी थीं। किस तरह दीपक का सिर उसकी चूचियों पर दबा हुवा था। विशाल ने यह भी याद किया की एक-दो बार लीना की नजरें भी दीपक और अदिति पर गई थी, जिस वक्त वो हग कर रहे थे, और तब लीना ने मुड़कर विशाल के चेहरे में देखा था की क्या वो भी उन दोनों को देख रहा है।

अब विशाल ने खुद से यह सवाल किया- “क्यों लीना ने मुझको उस तरह से देखा था जब वह दोनों हग कर रहे थे? लगता है लीना को कुछ पता है। क्या ऐसा हो सकता है की लीना ने कभी डैड और अदिति को साथ देखा हो? क्या ऐसा कुछ है जो लीना को पता है, मगर मुझे बता नहीं सकती? या ऐसा है की लीना भी अदिति की पार्टनर है सब में? ओह माई गोड... अब मैं क्या सोचने लगा? क्या मुझे लीना से बात करनी चाहिये की क्या उसको कुछ पता है? मगर कैसे उससे ऐसी बात पूछंगा मैं? क्या लीना मुझको कोई सीक्रेट बताएगी? कैसे पूछंगा लीना से, कैसे? कोई तरीका है क्या? कैसे इस बात को शुरू करूँगा लीना से? अदिति भी तो आस-पास होगी तो कब और कहाँ लीना से बात कर सकूँगा इस बारे में? बिस्तर पर जिस तरह अदिति ने रोल-प्ले में जवाब किया उससे तो ऐसा लगता है की तीनों से चदवा चकी है। वरना अदिति जैसी भोली भली, मासम कमसिन लड़की जो थी वो पहले कैसे इतनी सही तरीके से जवाब कर सकती है उस खेल में? क्या वो एक छुपी रुस्तम की तरह है, जिसको मैंने बिल्कुल नहीं पहचाना था? नहीं नहीं, यह नहीं हो सकता। मैं नहीं मन सकता इस बात को..."

विशाल का बुरा हाल था इन सबके बारे में सोचते हए, उसकी दिमागी हालत खराब थी। मेंटल स्ट्रेस हद से

ज्यादा हो गया था शायद उस वक्त। कभी-कभी विशाल सोच रहा था की उसकी सेक्सुअल लाइफ अदिति के साथ और भी गरम हो जाएगी, अगर उसको पता चला के सच में घर में से किसी एक मर्द के साथ उसका ऐसा नाता है तो। मगर कभी सोचता था की वो अपनी बीवी से धोखा खाया हुआ भी महसूस कर सकता है, अगर वैसी कोई बात हुई तो। मगर ज्यादा मजा आता था विशाल को यह सोचते हुए की हाँ अगर कोई बात है अदिति की मेरे घर के किसी एक भी मर्द के साथ तो बड़ा मजा आएगा मुझे तो। मेरे लिए तो खुशी की बात होगी वो। और अगर कुछ ऐसा था तो विशाल सब कुछ जानने के लिए बेताब था। वो जानना चाहेगा की कब शुरू हवा? पहले दिन हुआ यह सब? किसने किसको प्रपोज किया, कौन किसके करीब पहले गया एट्सेटरा।

मगर, अगर ऐसी बात हुई भी हो तो कौन उसको सब कुछ डीटेल्स में बताएगा, पहले दिन से? क्या अदिति कभी राजी होगी उसके साथ ऐसे सीक्रेट शेयर करने को, अगर है भी तो? क्या लीना अदिति को धोखा देगी विशाल को बताकर अगर उसे कुछ पता हो भी तो? लीना अदिति को बहुत चाहती थी तो क्या उसको दगा देगी लीना? विशाल का मन किया के आफिस में सब कुछ छोड़ छाड़ कर तुरंत वापस घर लौटे। मगर वैसा करना नामुमकिन था।

कुछ देर बाद विशाल सोचने लगा की इस वक्त वह लोग घर पर क्या कर रहे होंगे? सोचने लगा की वो अपनी सेक्सी, हाट, काम्क वाइफ को अकेले तीन मर्दो के बीच छोड़कर आफिस चला आया है। क्या वहाँ पर कुछ गुजरेगा? विशाल ने सोचा- “क्या अदिति डैड के पास उसके कमरे में चली गई थी, उसे जगाने के लिए जब मैं वहाँ से निकला सुबह को आज?”

विशाल ने सब अपने दिमाग में एक दृश्य की तरह रचा कुछ ऐसे सोचते हुए अपने दिमाग के अंदर- “जैसे ही वो निकला सुबह को, तो अदिति ने चारों तरफ देखा और कोई नहीं नजर आया तो अपने ससुर के कमरे में गई उसको जगाने के लिए। कमरे में जाते ही अदिति ससुर के बेड पर बैठकर उसको हिलाते हुए कहती है- “ओह्ह... पापा मैं आपके लिए कितना तड़प रही हूँ, और आप चैन की नींद सो रहे हो? कम ओन जल्दी उठिए और इससे पहले के और लोग जाग जाएं, आप जल्दी से कर लीजिए जो करना है हरी-अप पापा..."

फिर ससुर जागा और अदिति को बेड पर खींचा, उसके सभी कपड़े निकाले और बिस्तर पर पटका उसको और करने लगा जल्दी-जल्दी। विशाल का जमकर खड़ा हो गया। वो टायलेट गया और अपनी बीवी को अपने बाप के साथ सोचकर मूठ मारा। कमाल है अपनी बीवी को छोड़कर आफिस में उसको याद करके मूठ मारता है।

असल में विशाल के डैड के घर पर लीना उठी तो थोड़ी देर बाद अदिति से कहा उसके साथ चलने को फल तोड़ने के लिये उत्सव के लिए।

मगर लीना के पापा ने कहा- “उसको क्यों कह रही हो? अपनी सहेलियों के साथ जाओ तुम बेटा, अदिति कल इतनी दूर से आई है थकी हुई है उसको आराम करने दो...”

लीना ने अपने पापा को देखा फिर अदिति को और उसे एक आँख मारी लीना ने और कहा- “ओके ओके ठीक है। तुम लोगों को डिस्टर्ब नहीं करूँगी, अपनी सहेलियों को लेकर जाती हूँ मैं..."

उस गाँव में एक परंपरा के जैसा था की जब भी कोई उत्सव, शादी, मंगनी या कुछ ऐसा होता था तो गाँव की लड़कियां पास वाले जंगल में फूल तोड़ने जाती थीं, तब उन फूलों से उत्सव वाली जगह को सजाते थे। मगर लीना ने क्यों कहा की उन दोनों को डिस्टर्ब नहीं करेगी, क्या कोई सीक्रेट था? अगर अदिति को अपने साथ ले जाती तो कैसे उनको डिस्टर्ब करती वो?

उत्सव शाम को शुरू होने वाला था, कुछ गरबा डान्स और फोक गाने विशाल के डैड के अंगने में हुआ करते थे। उस उत्सव के लिए सभी को वहाँ के ट्रेडीशनल कपड़े पहनने होते हैं, शहर के कपड़े उतारकर उस गाँव की ड्रेस में होना होता है उस उत्सव के दौरान। घर के पिछवाड़े में कुछ लोग भंग बना रहे थे। वो औरतें भी पीती थी उस दिन को।

राकेश और दीपक उन आदमियों के साथ लग गये घर के पीछे। अदिति घर में अकेली रह गई थी ससुर के साथ। लीना भी चली गई थी जंगल। फिर भी घर पूरा का पूरा खुला पड़ा था, कोई भी अंदर आता जाता था सिवाए कमरे के। बहत सारे लोग उनके अंगने में आ गये थे और एक टेंट बनाया गया अंगने में घर के सामने। कुछ नौजवान लोग बिजी थे टेंट को बनाने में।

उनमें से एक ने दूसरे से कहा- “हे क्या तुमने विशाल की पत्नी को देखा? क्या लगती है यार... सेक्स बाम्ब लगती है यह तो, उसको पटकने को मन कर रहा है यार...”

दूसरे ने कहा- “यार जब वो शादी करके नई नवेली दुल्हन इस घर में आई थी, तब मैंने पहली मूठ मारा था अपनी जिंदगी की उसको सोचकर। उससे ज्यादा सेक्सी और खूबसूरत दुल्हन मैंने आज तक नहीं देखी है कभी..."

तब एक और नौजवान ने कहा- “सिर्फ तुम और वो नहीं, इस गाँव के सभी बूढ़े और जवान अदिति को सोचकर मूठ मारते थे, जब वो शादी करके इस गाँव में आई तो। इस गाँव की सबसे हाट, सेक्सी और आकर्षक दुल्हन थी वो और आज तक कोई दूसरी अदिति के जैसी नहीं आई है इस गाँव में.."

तभी एक लड़का जो एक स्टूल पर खड़ा एलेक्ट्रिक के वायर सजा रहा था टेंट में, और ऊंचाई पर होने से घर के अंदर भी ताक झाँक कर रहा था, तो उसने कहा- “हे मैंने अभी अदिति को देखा अंदर। वो अपने ससुर से बात कर रही है इस्स्स्स ..”

तब एक और ने धीरे से कहा- “यार जब वो नहाकर अपनी सेक्सी साड़ी में मंदिर जाती थी, तो मैं उसकी कमर

और नाभि देखने के लिए हर रोज उसका इंतेजार किया करता था। साला पंडित भी अपना संभाल रहा होगा जब अदिति उसके सामने जाती होगी उन दिनों.”

और एक ने कहा- “यारो इस घर में तीन मर्द हैं। तुम्हारे खयाल से सबको अपना-अपना हिस्सा नहीं मिला होगा अदिति से?"

तब एक ने जवाब दिया- “दीपक से पूछना पड़ेगा, वो उसके बहुत करीब है, उसकी डार्लिंग भाभी है..”

फिर किसी और ने कहा- “अरे नहीं... एक बार मैंने दीपक से अदिति के बारे में बात किया था, तो उसने मुझे

बहुत मारा था। वो पजेसिव है अपनी भाभी को लेकर.."

जो लड़का स्टूल पर था उसने फिर धीरे से कहा- “इस्स्स... यारों ससुर ने अदिति को हग किया है, वो उसकी बाहों में है इस वक्त सब आकर देखो...”

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कड़ी 35 गाँव में उत्सव और डान्स

मगर जब बाकी के लड़के स्टूल पर चढ़े, ससुर को अपने बहू को हग करते हुए देखने को, तब तक दोनों एक दूसरे की बाहों से निकल चुके थे और दूर हो गये थे। बाकी के लड़कों ने कहा- “अरे यह एक ससुर और बहू के नार्मल गले मिलने वाला सीन होगा। इसके बारे में कुछ ऐसा वैसा नहीं सोचने का...”

और एक ने कहा- “अब अदिति पर तोहमत मत लगाओ, क्योंकी वो तुमको सेक्सी और हाट दिखती है, अगर तुम उसको चोदने का इरादा करते हो इसका मतलब यह नहीं की वो ऐसी है, और अगर वो तुमको नहीं मिल रही है तो यह मतलब नहीं की तुम उसको दूसरे लोगों के नाम के साथ जोड़कर उसको बदनाम करो...”

तब सबने कहा- “हाँ जब तक उसको किसी और के साथ चुदते हुए नहीं देखा जाए, उसके बारे में बिल्कुल ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए...”

आँगन में और बहुत सारे लोग जमा हो गये थे, और अदिति घर के अंदर कुछ काम में बिजी थी। विशाल के दोनों भाई घर के पिछवाड़े से दो बार घर के अंदर आए थे कुछ समान लेने को, और वापस बिजी हो गये भंग को बनाने में दूसरे लोगों के साथ। एक-दो बार ससुर भी घर के पिछवाड़े गया देखने की वहाँ काम कैसा चल रहा है। कुछ लोग बाजे गाजे, ढोलक हार्मोनियम वगैरा के साथ आए थे और कुछ औरतें और लड़कियां नाचने के लिए तैयार थे टेंट में। अदिति भी डान्स में हिस्सा लेने के लिए गाँव की ट्रेडीशनल ड्रेस में तैयार हुई। पिछले साल अदिति खूब नाची थी। विशाल के पिता को बहुत पसंद आया था, और अदिति की बहुत ही तारीफ किया था उसने। तो अब वो फिर नाचने वाली थी।

मगर पिछले साल अदिति ने ऐसी ड्रेस नहीं पहनी थी, पिछले साल वो बहुत टिमिड, शर्मीली थी, और शहर से तो नहीं वापस आई थी। और तब विशाल रोल-प्ले नहीं खेलता था उसके साथ और अदिति को तब इतना सेक्स के बारे में शायद नहीं पता था जितना अब है।

हाँ एक दुपट्टा था छाती को ढकने के लिए, मगर नाचते वक्त तो वो या निकाल दिए जाते थे या कमर पर बाँध लिए जाते थे तो क्लीवेज वैसे ही दिखती रहती थी। और डान्स के दौरान अगर झुक कर डान्स करना था तब तो लगता था की चूचियां ब्लाउज़ से बाहर ही निकल आएंगी। मजेदार बात यह थी की टेंट में जाने से पहले अदिति ऐसी थी घर के अंदर बिना दुपट्टे के और ससुर कई बार उसके सामने से गजरा, उसकी क्लीवेज पर नजर गड़ाते हए। उसकी छाती के ऊपरी हिस्से वाली चूचियों पर उसकी नीली रगें भी दिख रही थी।

ससुर ने उसकी चूचियों को निहारते हए स्माइल किया तब अदिति जल्दी से दुपट्टे को बेड पर से लेने गई अपनी छाती के ऊपर रखने के लिए। ठीक उसी वक्त राकेश घर के अंदर दाखिल हो रहा था, और उसको देखते ही उसका पिता वहाँ से निकल गया। तब तक अदिति अपने कमरे से निकल रही थी दुपट्टे को हाथ में लेकर। और इस बार राकेश आमने सामने हो गया अदिति से, और उसकी नजर उसकी चूचियों पर टीकी थी। चूचियों के वो हिस्से जो छिपे रहते हैं और थोड़ा ज्यादा गोरे दिखते हैं ढकने की वजह से, जहाँ बहुत नाजुक और मुलायम दिखते हैं, वह हिस्से राकेश की आँखों के सामने थे, और उनको अपने सूखे होठों पर जीभ फेरना पड़ा वो देखकर।

जबकी अदिति को नजरें झुकानी पड़ी। क्योंकी उसको पता चल गया की राकेश उसकी क्लीवेज देख रहे हैं।

राकेश ने गला साफ करते हुए कहा- “वाउ कमाल की लग रही हो इस ड्रेस में आज तुम, बहुत सारे मर्द मारे जाएंगे आज टेंट में लगता है..”

शर्माते हुए चेहरा लाल किये हुए अदिति ने नीचे देखते हुए थोड़ा मुश्कुराते हुए जवाब दिया- “मुझे छेड़ना बंद करो आप..” और तब अपने दुपट्टे को अपने सीने पर रखा अदिति ने उस हिस्से को ढकते हुए, फिर भी दुपट्टे की टिश्यू इतनी पतली थी की वह जबरदस्त क्लीवेज फिर भी नजर आ रहे थे दुपट्टे के नीचे।

तब अदिति आगे बढ़ने लगी राकेश को वहीं छोड़कर और राकेश ने चारों तरफ नजर दौड़ाकर अदिति का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा। अदिति ने नहीं सोचा था की वो उसको खींचेगा। इसलिए बिल्कुल अचानक खींचने की वजह से वो सीधे राकेश के जिश्म से टकरा गई और अपने दोनों हाथों को राकेश की छाती पर किया खुद को संभालते हुए।

तब तक राकेश ने उसको बाहों में जकड़ लिया और कहा- “तुम इतनी क्यूट लग रही हो की मैं तुमको एक हग दिए बिना नहीं जाने दे सकता..” कहकर राकेश ने जोर से कसके अदिति को हग किया जिश्म से पूरा जिश्म चिपकाये हुए।

राकेश के पिता ने घर के एक कोने से सब देखा।

अदिति ने राकेश की बाहों में कैद मुश्कुराते हुए कहा- “क्यों, आपने मुझको कई बार बिना क्यूट दिखे ही हग नहीं किया है?"

राकेश ने उसको अपने जिश्म से और चिपकाते हुए जवाब दिया- “वो बात नहीं है अदिति, मेरे खयाल से तुम अच्छी तरह समझ रही हो की मैं क्या कहना चाहता हूँ?"
 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
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