• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

तिवारी और जीवा एम एल ए के मरने का जश्न मना रहे थे तभी मैं अपने कमरे मे नहा रही थी ….. पूरे जिस्म मे खून की छीन्टे थे , बाथरूम के बाहर भुवन बैठा हुआ था किसी सोच मे डुबा हुआ था ……..

“कोमल वो पुस्तक वो तो तुम्हारे पास है ना “

मैं नहा कर निकली और भुवन की आँखे बड़ी हो गयी वो बस आँखे फाडे मुझे ही देख रहा था …..

“कोमल तुम “

भुवन इतना ही बोल पाया था , मेरा पूरा जिस्म नंगा था और अभी अभी नहाने के कारण पानी से पूरी तरह से भीगा हुआ था, बालो से पानी की बूंदे टपक रही थी .. मेरे सुडोल और नर्म जिस्म मे अभी भी नमी बरकरार थी ..

मैं इठलाती हुई आई और भुवन की गोद मे बैठ गयी ..

भुवन मानो काँप गया हो , वो अभी मेरे बिस्तर मे ही बैठा हुआ था …

“ये क्या कर रही हो “

“ग़लती हो गयी थी मुझसे ,मैं समझ नही पाई की मैं किससे प्यार करती हू “

मैने अपनी बाँहे भुवन के गले मे डाल दी थी , मैने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया लेकिन भुवन अभी भी कोई प्रतिक्रिया नही दे रहा था ..

“हटो कोमल .. तुम अभी परेशान हो .. ये प्यार नही है ये बस गुस्सा है ..”

मैने उसकी आँखो मे देखा , मेरी आँखे गुस्से से लाल हो गयी थी , ये शख्स मुझे ठुकरा रहा था … लेकिन भुवन की आँखो मे मेरे लिए बस प्यार ही था , कोई डर नही ……..

मैने पास पड़ा तलवार उठा लिया जो अभी भी ना जाने कितने लोगो के खून से भीगा हुआ था , मैने उसे भुवन के गले मे रख दिया

“मुझे ना बोलेगा “

मैने गुस्से मे कहा , ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद के काबू मे नही रह गयी हू ,

लेकिन वो हंसा ..

“तुम मुझे डरा रही हो “ मैं बस गुस्से से उसे देखते रह गयी , मेरे मूह से कोई भी आवाज़ नही निकल रही थी ..

तभी कमरे का दरवाजा खुल गया ..

सामने तिवारी मूह फाडे खड़ा था , उसके हाथो मे शराब की एक बोतल थी , वो बहुत ही खुस लग रहा था… लेकिन हमे इस हालत मे देखते ही उसके चेहरे की हवैया उड़ गयी …….

मैं नग्न बिस्तर मे भुवन के गोद मे बैठी हुई थी और मेरा तलवार उसके गले से लगा हुआ था …..

हम दोनो ने तिवारी को देखा , जहाँ भुवन थोड़ा झेप गया था वही मुझे जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा…

“ये.. ये क्या कर रही हो कोमल ..”

मानो तिवारी का पूरा नशा ही काफूर हो गया हो , वो हकलाने लगा था ..

“भाग यहाँ से मादरचोद वरना इसी तलवार से तेरा गला भी काट दूँगी “

मैं गरजी और अक्सर मैं तब गरजती थी जब मैं शिकार करती थी ..

मेरी आवाज़ सुनकर ही तिवारी काँप गया था , उसके आँखो मे डर उतरने लगा था .. उसके कदम पीछे होने लगे थे ..

वो दरवाजा बंद करने लगा ..

“रुक … दरवाजा खोल के रख …दुनिया को भी तो पता चले की यहाँ क्या हो रहा है ”

वो कुच्छ भी नही कह पाया … वो बस पीछे हट गया … मेरा चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था ..

लेकिन अभी भी भुवन की आँखो मे कोई भी डर नही दिख रहा था और यही बात मुझे और भी बेचैन कर रही थी …

उसने मेरे गालो को सहलाया , मेरे बालो मे अपनी उंगलिया फेरी ……और … और मेरे होंठो मे अपने होंठो को मिला दिया ……..

मेरे आँखो से एक आँसू गिर गया ऐसा लगा जैसे मैं फिर से होश मे आ गयी थी ………

“वो पुस्तक कहाँ है कोमल …… मेरे पिता जी ने कभी मुझे शक्ति परंपरा के बारे मे बताया था , मुझे लग की वो पागल आदमी कुच्छ भी बोलता है , लेकिन मेरे पिता जी तुम्हारे और पुजारी जी के मित्र थे , और अब मुझे भी लगता है की कोई ऐसी बात है जो हमे जानना बहुत ही ज़रूरी है …..”

मैने हा मे सर हिलाया ..

“पिता जी ने अपने अंतिम समय मे मुझे वो पुस्तक दी थी , और कहा था की जब तुम्हे अपना प्यार मिले तो इसे पढ़ना … मैने आज तक उसे नही पढ़ा था शायद आज वो समय आ गया है “

हम दोनो के होंठ फिर से मिल गये थे …….
 
हमारे सामने एक लाल रंग के कपड़े मे लिपटी हुई एक किताब थी , कहने को तो ये महज एक क्तियाब थी लेकिन मेरे लिए ये मेरे जीवन का एक अध्याय होने वाला था..

भुवन ने उसे खोला , एक बहुत पुराना डॉक्युमेंट था जो की पूरी तरह से मैला हो चुका था , कागज पीले पड़ चुके थे , लेकिन लिखावट अब भी स्पष्ट थी , बस दिक्कत ये था की ये संस्कृत मे था, ऐसा नही था की हमे संस्कृत नही आता , हम संस्कृत जानते थे लेकिन उतना नही की पूरा अनुवाद कर सके ..

“इसे किसी संस्कृत के जानकार के पास ले जाना चाहिए “भुवन ने सुझाव दिया ..

“हूंम्म लेकिन कौन ..”

भुवन ने बस थोड़े देर अपना दिमाग़ लगाया

“कॉलेज के संस्कृत के प्रोफेसर के पास चलते है , वो अपने टाइम के यूनिवर्सिटी टॉपर भी थे “

हमने ज़्यादा देर नही की और शास्त्री सर के पास पहुच गये ..

अब हम भले ही पूरे कॉलेज मे बदनाम थे लेकिन फिर भी कॉलेज के कई टीचर्स जानते थे की हम लोग एक सीधे साढ़े से स्टूडेंट ही थे जिन्हे वक्त ने ऐसा बना दिया था ..

उनमे एक शास्त्री सर भी थे ..

“ये क्या है … कोई बहुत ही पुरानी पुस्तक मालूम होती है “

उन्होने पहले तो बड़े ही ध्यान से उसे देखा और फिर पढ़ने लगे ..

“ये तो कोई कहानी मालूम होती है , है क्या ये “

अब हम उन्हे क्या बताते ..

“पता नही सर बस मेरे पिता को पंडित जी ने दिया था और कहा था की जब मैं मर जाऊ तो किसी ज्ञानी व्यक्ति के पास जाकर इस कहानी को सुन लेना .. अब इसमे क्या है हमे नही पता लेकिन मेरे पिता जी की आग्या थी तो… क्या आप इसे पढ़ सकते है “

प्रोफेसर साहब को ज्ञानी बोलने की देर थी ,उनका चेहरा ही चमक गया ..

“हा बिल्कुल , बैठो मैं इसे पढ़ कर सुनाता हू “

और वो उसे पढ़ने लगे ….

सार कुच्छ ऐसा था …….

“ये पुस्तक उसे पढ़ना या सुनना चाहिए जो इसका उत्तराधिकारी हो , शक्ति की संतान हो .

शक्ति कौन है ..??

एक श्राप दिया गया था , एक महिला को , एक साधु के द्वारा ..

महिला की भी कोई ग़लती नही की वो तो बस साधु के प्रेम मे फँस गयी थी और साधु की साधना मे विघन डालने की ग़लती कर दी ..

श्राप दिया गया की तेरे और तेरे संतानो के अंदर काली शक्ति आ जाए ….

तू मानव ना रहे बल्कि राक्षस हो जाए , खुद को भी संभाल ना पाए, जिस प्रेम को पाने के लिए तूने ये सब किया .. जा तू अपने सच्चे प्रेम को भी नही पहचान पाएगी ………

महिला कोमल हृदय थी वो रोई बहुत माफी माँगी , साधु का दिल नर्म हुआ उसे अपनी ग़लती का अहसास हुआ , लेकिन जो संकल्प ले लिया गया था वो वापस नही हो सकता था , इसलिए उन्होने ये कहा की श्राप वैसा ही रहेगा ..

लेकिन .. ये शक्ति हर पीढ़ी के साथ साथ कम होते जाएगी ,केवल महिला संतान मे ही पाई जाएगी , और तब तक प्रगट नही होंगी जब तक सच्चा प्रेम ना मिल जाए .. सच्चे प्रेम को तुम तो नही ढूँढ पाओगी लेकिन वो प्रेम तुम्हे ढूंढेगा , और तुमसे मिलन को बेचैन रहेगा.. तुम उसे इनकार करती रहोगी … इधर उधर भटकॉगी लेकिन आख़िर मे पहचान ही लॉगी …..

ये शक्ति एक श्राप है जो पीढ़ी दर पीढ़ी जाती जाएगी , शक्ति परंपरा मे जन्मी हर महिला के अंदर वही ताक़त होगी जो उसकी मा के पास थी , लेकिन जब तक कोई सच्चा प्यार ना मिल जाए ये ताक़त विकसित नही होगा ..

शक्ति हमेशा अपने सच्चे प्रेम को लेकर उलझन मे रह सकती है , लेकिन अपने दिल की सुनने पर उसे सच्चे प्रेम की पहचान होगी , और उसका प्रेमी ही उसकी ताक़त को काबू मे करने की योग्यता रखेगा ..

दोनो प्रेमियो के मिलन से उत्पन्न महिला संतान के पास ही ये आदमी शक्ति पहुचेगी और इसका जागरण और समापन दोनो ही उसके प्रेमी के द्वारा होगा ..इस तरह धीरे धीरे ही सही लेकिन ये श्राप ख़त्म होते जाएगा … “

इतना बोलते बोलते शास्त्री जी रुक गये …

और नज़र उठाकर मुझे देखने लगे ..

“इसमे अंतिम मे लिखा है की , ये पुस्तक जानकारी के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ते जाएगी …….. मतलब तुम ही …”

मैने एक गहरी सांस ली

“अरे नही , ये पुस्तक तो भुवन के पिता जी ने इसे दी थी … बस इसमे लिखा क्या है ये जानने की बहुत ही उत्सुकता थी ..”

“ओक ओके “
 
हम दोनो ही एक कमरे मे बैठे हुए थे ..

“तो अब तो मान लो की मैं तुम्हारा सच्चा प्यार हू ..”

भुवन ने शुरुआत से कहा..

मैं भी मुस्कुरा उठी ..

“लेकिन भुवन मेरे मा बाप को किसने मारा होगा “

भुवन ने एक गहरी सांस ली ,

“जिसके पास ऐसी ताक़त हो उसके तो कई दुश्मन हो सकते है कोमल … और ये मत भूलो की ये ताक़त कोई वरदान नही है , बल्कि एक श्राप है … तुम्हे इससे मुक्त होना होगा .. “

मैने भी एक गहरी सांस ली

“हा लेकिन श्राप या वरदान ये कौन तय करेगा , वो तो इससे ही तय होगा ना की इसका ईस्तमाल कैसे किया जाता है “

“नही कोमल … आज तक इसका उपयोग सिर्फ़ लोगो के कतल करने के लिए ही किया गया है , तुमने ना जाने कितने लोगो को ऐसे ही काट दिया .. बिना किसी कारण है … हा क्या कारण था उन्हे मरने का .. पावर .. वो भी दूसरो के लिए .. नही कोमल तुम्हे बस यूज किया जा रहा है और मैं ये नही होने दूँगा “

भुवन ने एक गहरी सांस छोड़ी ………

वही मैं भी इसी सोच मे डूबी हुई थी …………..
 
फ्लॅशबॅक ओवर

“तो क्या उसके बाद आपने उन लोगो को छोड़ दिया “

इस बार मैने प्रश्न किया था , कोमल ने मेरे आँखो मे ध्यान से देखा और फिर अपनी बेटी यानी भाभी को बड़े ही प्यार से देखा ..

“हा बच्चो , उसके बाद ही मैने और भुवन ने ये फ़ैसला कर लिया था की हम दोनो इन सबसे दूर चले जाएँगे , मैं और कटले आम नही करना चाहती थी , इसलिए हम दोनो ने गाँव मे आकर बसने का फ़ैसला किया ..

और रातो रात ही वहाँ से भाग गये ,और भुवन के साथ रहते रहते मैं शांत होते गयी

, ये शक्ति बड़ी ही अजीब चीज़ है .. प्रेम से ही जागती है और प्रेमी के साथ शांति से रहने पर धीरे धीरे ये कम होते जाती है और अंत मे ख़त्म हो जाती है …. शायद मेरी मा इसीलिए मारी गयी क्योकि उनकी शक्ति ख़त्म हो चुकी थी “

हम सभी रात से बैठे थे अभी सुबह के 6 बज चुके थे , चाय आ चुकी थी और चुस्कियो के साथ सभी अपने अपने ख़यालो मे खो गये थे …अभी हमे बहुत कुच्छ जानना बाकी था लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो मेरे दिल मे आ रहा था वो ये था की क्या भाभी मे भी वो ताक़त होगी और आख़िर कौन होगा उनका आशिक़ ..??

भैया तो नही थे ये बात तो सॉफ थी , अगर वो होते तो अभी तक उनमे ये पावर जाग गयी होती , कहे अनुसार भाभी उस प्रेमी को नही पहचान पाएगी लेकिन वो उससे मिलन को बेकरार रहेगा , आख़िर कौन है जो उनसे मिलन को बेकरार रहता है …??

मैं सोच मे पड़ा था की मेरी नज़र भाभी पर गयी , वो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी और मेरे दिल मे एक बिजली सी कौंध गयी ………

मैं …………

हा मैं ……

मैं ही तो वो आशिक़ हू … मैं ही तो भाभी से मिलन के लिए बेकरार रहता हू , मैं भाभी के लिए वैसा ही हू जैसा कोमल के लिए भुवन था , जिससे भाभी भी बहुत प्यार करती है लेकिन उस प्यार का नाम कुछ अलग था , यही भुवन के साथ भी था , भुवन कोमल को प्यार करता था ,उसे अपना बनाना चाहता था , मज़े की बात ये है की कोमल भी उसे प्यार करती थी लेकिन उसके प्यार को कभी पहचान नही पाई , जब तक की उसे तिवारी की बेवफ़ाई के बारे मे नही पता चल गया , और भुवन पर ही हमला होने पर कोमल की शक्ति बाहर आई थी ………?

यही सेम केस तो मेरे और भाभी के साथ भी था , भाभी को हमेशा ही लगा की वो भैया से प्यार करती है , लेकिन असल मे वो मुझसे भाई से भी ज़्यादा प्यार करती थी, लेकिन उस प्यार का स्वरूप कुछ आलग ही था …
 
शायद हमारे बीच जो आकर्षण है , वो इसी की ओर संकेत दे रहा है की हम एक दूसरे के लिए ही है .. लेकिन मैं भाभी के लिए हू तो फिर नेहा ?? नेहा का क्या होगा ..

मेरी नज़र नेहा पर पड़ी , वो भी बड़े ही गहरे सोच मे डूबी हुई मुझे देख रही थी , ना जाने उसके दिल मे क्या चल रहा हो ..

तभी मेरे फोन का रिंग बजा , ये अक्की था …

“अक्की इतने सुबह सुबह कैसे फोन कर रहा है “

मैने अपने मन मे ही कहा

“हेलो ब्रो “

“भाई एक अजीब चीज़ हो गयी “

“क्या ..?”

“यार मुझे किसी ने धमकी दी है, वो खुद को शिवा बताता है , वही जिसने इतने सारे कत्ल किए है ,वो बोल रहा था की जिस लड़की से मैं ज़्यादा मिल जुल रहा हू उससे ना मिलू वरना मुझे भी वैसे ही मार डालेगा जैसे ** गाँव मे लोगो को मारा था, वो ये भी बोल रहा हा की जिस औरत गाँव मे वो लोग पकड़े है वो असली शिवा नही है असली शिवा तो वो है …….”

अक्की की बात सुनकर मेरे चेहरे का रंग ही उड़ गया था ,

“तूने ये बात और किसी को बताई क्या ??”

“हा सुस को बताई थी , उसी ने कहा की तुम्हे कॉल करू ..”

“ओके मैं तुझे एक नंबर दे रहा हू उससे बात कर ले मेरा नाम बताना और पूरी बात बता देना… और एक चीज़ बता आज कल क्या तू सुस के साथ ज़्यादा घूम रहा है “

“हा तू और नेहा जब से यहाँ से गये हो तब से सुस के साथ ही घूमता हू , उसके साथ ही ट्यूशन जाता हू और आजकल वो मुझे कॉलेज के लिए लेने भी आ रही है “

मैने एक गहरी सांस ली और उसे ना डरने का बोलकर काजल का नंबर दे दिया ……

“क्या हुआ “

भाभी के पूछने पर मैने सारी बात बता दी

“क्या ..?? लेकिन शिवा बनकर तो कतल कोमल ही कर रही थी ना ..??”

नेहा चिल्ला उठी थी ..

वही कोमल ने नेहा को अजीब निगाहो से देखा

“तुम पागल हो गयी हो क्या , मैने कब कहा की मैं कत्ल कर रही थी .. मैने तो बस ये बताया की मैं ही शक्ति थी , और हा अभी गाँव मे जो चंचल को फ़साय था उसमे मेरा हाथ ज़रूर था , ये काम मैने और सोनू ने मिलकर किया था .. लेकिन बाकी के कतल से मेरा कोई लेना देना नही है “

उनकी बात सुनकर सभी के चेहरे का रंग उड़ गया था , अभी तक तो सभी उन्हे ही वो कातिल समझ रहे थे जिसने शहर मे भी शिवा के नाम से कतल किए थे ..

“अभी भी फोन करने वाला मर्द ही था और सभी कतल तो एक औरत ने किए है , ऐसा फोन मुझे भी आया था जब मैं सुस के साथ ज़्यादा घूम रहा था मेरे ख़याल से इसके पीछे सुस के भाई सगेर भी हो सकता है क्योकि वो सुस के पीछे पागल है “

“उन सबका पता काजल लगा लेगी , तुम लोग अभी थोड़ा आराम कर लो रात भर से जाग रहे हो “

इस बात बोलने वाला डॉक्टर . था …

हम सभी ने हा मे सर हिला दिया .. और अपने अपने कमरे मे चले गये , अभी भी बहुत सारी बाते खुलनी बाकी थी , शायद आज की महफ़िल मे बाकी की बाते पता चले ……
 
इस बार बोलने वाला डॉक्टर . था …

हम सभी ने हा मे सर हिला दिया .. और अपने अपने कमरे मे चले गये , अभी भी बहुत सारी बाते खुलनी बाकी थी , शायद आज की महफ़िल मे बाकी की बाते पता चले ……

दोपहर का वक़्त था हम सभी फिर से एक जगह इकट्ठे हुए थे अभी बहुत सारी बाते जाननी बची थी …

“तो आप लोगो ने बताया नही की कोमल जी आपके साथ कब से थी “

मैने सबसे पूछा , भाभी और महिमा (नेहा की मा) ने एक दूसरे को देखा ..

फिर महिमा बोल पड़ी

“शुरुआत तो तुम्हे ही करनी चाहिए अंकित “

मैने मुस्कुराते हुए कोमल की ओर देखा उन्होने भी आँखो के इशारे से मुझे आगे बढ़ने की हामी दे दी ..

“हुम्म बात तब की है जब भाभी और भैया की शादी हुई , उसके बाद से ही मैं कभी कभी कॉलेज की तरफ घूमने जाता तो इनकी चाय की दुकान मे ज़रूर जाता था , वहाँ ये(कोमल ) मुझे प्यार से बिस्कट, या समोशे खिलाया करती थी ,इसलिए मैं और मेरे दोस्त फ्री की बिस्कट या समोशे खाने पहुच जाते थे …और ये क्योकि मेरी भाभी मा की तरह दिखती थी मुझे इनके पास जाना और भी अच्छा लगता था…

गाँव छोड़ने के बाद मुझे कभी कभी इनकी चिंता होते रहती थी की कही भैया इनपर भी अपना गुस्सा ना दिखा दे ..

जब उस दिन मैं अपने दोस्तो के पास गाँव गया था और वहाँ से लौट रहा था तो यहाँ आने के बाद मैं फिर से वापस गाँव चला गया , मैं उन लोगो को जान से मार देना चाहता था जिन्होने मेरी भाभी और भाई की ये हालत कर दी थी , मैं वापस जा ही रहा था की मुझे ये मिल गयी .. ये डॉक्टर . के बुलावे पर वापस आ रही थी , मैं बेहद नशे मे था और मैने इन्हे बताया की मैं चंचल का कतल करना चाहता हू , तो इन्होने मेरी मदद की बात की , मुझे लगा की यही शिवा भी है और इसलिए लोगो को मारना इनके लिए कोई बड़ी बात नही होगी, तो हम दोनो मिलकर मेरे पुराने घर पहुच गये… मैं अपने घर के बारे मे अच्छे से जानता था इसलिए मुझे ज़्यादा दिक्कत नही हुई और जो हुआ वो आप सबके सामने है …….”

सभी ने एक बार कोमल की तरफ देखा जो की हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ..

“देखो मैने उस दिन सोनू की मदद इसलिए की क्योकि उन लोगो की वजह से मेरी बेटी को ये दिन देखना पड़ा था, वो तो मैं इस गाँव मे नही थी वरना इन लोगो को पहले ही सबक सीखा देती … लेकिन मैं शिवा नही हू , बस इस कतल के लिए शिवा का नाम लिया था “

कोमल ने बड़े ही मासूम से अंदाज मे कहा , इतने लोगो को गाजर मूली की तरह काटने वाली मासूम सी कोमल

“और आप दोनो .. आपको ये कब मिल गयी थी “

मैने भाभी और महिमा ( मेरी सास ) को देखते हुए कहा ..

दोनो के चेहरे खिल गये थे ..

“तो पहले कौन बताएगा “

भाभी ने महिमा की ओर देखा …

और महिमा ने कहना शुरू किया …………
 
महिमा ने कहना शुरू किया ………

फ्लश बॅक स्टार्ट

वो शाम मेरे जीवन की सबसे भयानक शाम थी , मैं अपने पति और बेटी के साथ एक रेस्टोरेंट खाना खाने गयी थी , तभी मेरे पति {इनस्पेक्टर सत्यप्रकाश (सत्या ) } का मोबाइल बज उठा , खाना ऑर्डर किया जा चुका था ……

“जी .. जी सर जी जी .. “

उनका चेहरा पिला हो रहा था , वो कभी मुझे देखते तो कभी बेटी नेहा को ..

अचानक उनके चेहरे का भाव बदलने लगा ..

“नही सर , मैं ऐसा नही कर सकता , मैं नही डरता सर जो गुनहगार है उसे तो सज़ा मिलनी ही चाहिए , हा मेरे पास सबूत है … ओके सर , जय हिंद”

उन्होने फोन रखा तो उनके चेहरे मे एक तेज था ..

“क्या हुआ जी ..”

मैं उनकी इस दशा को देखकर थोड़ी घबरा गयी थी

“कोई बात नही एम एल ए तिवारी का फोन था , मैने जो करीम और जीवा के काले कारनामो के खिलाफ सबूत इकठ्ठा किया है बस उसी के बारे मे बोल रहे थे ..”

जीवा और करीम का नाम सुनकर मेरे चेहरे मे पसीना आ गया था, ये दोनो तब तक शहर के सबसे ताकतवर गुंडे थे , दोनो के गैंग मे आए दिन लड़ाइया होते रहती थी , शक्ति को गायब हुए लगभग 7-8 साल हो चुके थे , शक्ति के जान से जीवा गैंग कमजोर तो हुआ था लेकिन तिवारी के चुनाव जीतने से उसे ताकत मिली थी , तिवारी अब एम एल ए बन चुका था लेकिन उसे और पावर चाहिए थी , उसे मंत्री बनने का भूत चढ़ा हुआ था , इसलिए वो सीधे सीधे करीम का भी ख़ात्मा नही कर रहा था, चालबाजी तो तिवारी के खून मे थी , जीवा की मदद से एम एल ए बनने के बाद भी वो करीम से भी मिला हुआ था, वो जानता था की किसी एक गैंग को पावरफुल बनाने के मतलब है की उसकी ताक़त का कम होना ..

इसीलिए उसने प्रदेश के सबसे इम्मनदार लोगो मे कुच्छ को अपने इलाक़े मे इकठ्ठा किया जिनमे मेरे पति भी थे , और उन्हे करीम और जीवा के खिलाफ सबूत इकठ्ठा करने के लिए कहा और सहायता भी प्रदान की , इसका मकसद उस समय मेरे पति को नही पता था, वो तो यही सोचते थे की तिवारी अच्छा आदमी है और जीवा और करीम के गैंग को ख़त्म करना चाहता है .. लेकिन असल बात तो ये थी की तिवारी असल मे जीवा और करीम गैंग के ऊपर एक नियंत्रण चाहता था और ये उन सबूतो के मध्यम से संभव हो सकता था …….

तिवारी की जीवा से खट पट तो चल ही रही थी साथ ही साथ करीम का डर भी उसे लगा ही रहता था इसलिए एक तीर से दोनो शिकार को साधना की सोची थी , लेकिन उसने ग़लती कर दी , ग़लती यही हो गयी की सबूत हाथ मे आते ही मेरे पति ने उसे अदालत मे पेश करना चाहा, वो इन सबूतो को तिवारी को नही देना चाहते थे , तिवारी ने फोन करके उन्हे समझाया भी और ये भी चेतावनी दी की इससे उनकी जान को ख़तरा भी हो सकता है , अगर जीवा या करीम को पता चल गया तो वो उनके लिए ख़तरा बन सकते है ..

लेकिन मेरे पति तो अपने उसूलो के पक्के थे …….

उन्होने मुझे ना घबराने के लिए कहा और हँसी मज़ाक करते रहे , लेकिन ना जाने मेरा दिल आज क्यो घबरा रहा था ……….

हम खाना खाकर बाहर निकले ही थे की किसी ने हमारे ऊपर हमला कर दिया , मेरे सर पर चोट लगी थी जिससे मेरी आँखे बंद होती गयी …..

जब आँखे खुली तो सामने का नज़ारा देख कर मेरी रूह ही काँप गयी थी ..

सत्या जी को एक चेर पर बाँध दिया गया था वही नेहा कही भी दिखाई नही दे रही थी , मैने खुद की स्थिति पर गौर किया तो मैं और भी चौक गयी थी , मैं एक टेबल मे झुकी हुई थी , मेरे हाथ सामने की ओर बँधे हुए थे , सामने मेरे पति को बाँध कर रखा गया था मेरा चेहरा उनकी ओर ही था , उनकी आँखो मे आँसू थे और पूरा चेहरा खून से सना हुआ था , मुझे समझते देर नही लगी की उनके दुश्मन हमे उठा कर ले आए है …..

“जल्दी से बता दे की वो सबूत तूने कहा छुपाए , क्यो खुद को तकलीफ़ दे रहा है “

ये जीवा था… उन्होने सत्या को बहुत ही मारा था लेकिन शायद सत्या ने अभी तक उन्हे उन सबूतो के बारे मे नही बताया था …

“तुम मेरी जान भी ले लो तो मैं तुझे वो नही दूँगा “

मेरे पति चिल्लाए और फिर से एक जोरो का घुसा उनके चेहरे पर जा लगा …

“साले अपनी नही तो अपने बच्चे और बीवी की तो सोच .. देख उसे .. अपनी बीबी को देख बेचारी जवान है , खूबसूरत है , इसके जिस्म से पूरा माँस नोच खाएँगे ये लोग … वो भी तेरे सामने “

उसकी उस शैतानी बात को सुनकर मेरा दिल ही दहल गया था , लेकिन अब भी मेरे पति के चेहरे पर कोई भी दर का भाव नही आया था ..

तभी कमरा खुला और कुच्छ लोग और वहाँ आ गये , ये क्या???

वो तो करीम था … करीम आते ही जीवा को आदाब करता है ..

“किस्मत देखो जीवा , अगर ये कोई दूसरी जगह होती तो शायद हम दोनो एक दूसरे के खून के प्यासे होते लेकिन आज .. आज हम दोनो को एक होना पड़ा इस साले के कारण “

आते ही करीम ने सत्या के मूह पर एक जोरदार घूँसा मार दिया .. तभी उसकी नज़र मुझपर गयी ..

करीम की तो जैसे आँखे ही चमक उठी थी

“यार जीवा तू सच मे अभी धंधे मे नया ही है , सामने माल पड़ा है और तू इसे हाथो से मार रहा है , वहाँ मार जहाँ इसके दिल मे लगे ..”

वो मेरी ओर बढ़ने लगा था ..
 
“नही कुत्ते उसे अगर कुच्छ किया ना तो तुझे कुत्ते की मौत मारूँगा “

सत्या चिल्लाए और जीवा की भी आँखो मे चमक आ गयी ,

“साला अभी तक इसे इतना टॉर्चर कर रहा था लेकिन अभी तक इतना नही बौखलाया था …”

जीवा भी गंदी हँसी मे हंस रहा था , करीम मेरे पास आ गया और मेरी साड़ी को उठाने लगा ..

“नही ..” मैं और सत्या दोनो ही जोरो से चिल्लाए थे , लेकिन वहाँ मौजूद सभी लोग एक साथ जोरो से हंस पड़े ..

“वाह माल तो बिल्कुल मुलायम है , सबूत ना भी मिले तो भी इसे खाने मे मज़ा आएगा “

“कुत्ते .. मैं तेरा “

सत्या कुच्छ और बोलते उससे पहले जीवा ने उनके चेहरे पर एक जोरो का मुक्का मार दिया , उनके मूह से खून निकल आया था , वही मैं चिल्लाती उससे पहले ही जीवा ने सत्या के गले मे एक चाकू रख दिया , मैं बिल्कुल ही निर्जीव ही हो गयी थी , मेरी बेटी का भी अभी कोई पता नही था, पति की जिंदगी ख़तरे मे थी , इन दोनो के सामने मेरी इज़्ज़त की क्या ही कीमत थी …

करीम ने मेरी साड़ी को मेरे कुल्हों तक उठा दिया था , साथ ही उसने मेरे पेटिकोट को भी उठा दिया था , मेरे पैर , जांघे नंगे सबके सामने थे, मैं रो रही थी लेकिन मेरा रोना किसी के दिल मे कोई भी दर्द नही जगा रहा था बल्कि सभी मेरी मजबूरी मे बस हंस रहे थे , मेरे अंतहवस्त्र ही बचे थे जो मेरी इज़्ज़त को ढँके हुए थे , लेकिन मैं टेबल मे बँधी हुई थी , मेरी छातियाँ टेबल से लगी हुई थी , मेरा पिच्छवाड़ा उभर कर करीम के सामने था , उसने एक ज़ोर से तमाचा मेरे नितंबों मे मार दिया ..और वो जोरो से हंसा

“नही ..” मजबूरी और ज़िल्लत से भरी हुई ये आवाज़ मेरे मूह से निकल गयी थी ..

मैं और भी जोरो से रोने लगी थी , मेरे पति की आँखो मे भी आँसू थे , एक तरह कर्तव्य था जिसको पूरा करने की सपथ उन्होने उठाई थी और दूसरी तरफ वो सप्त थी जो शादी के फेरे लेते हुए उन्होने उठाई थी , दोनो ही वचन थे जिसे उन्हे पूरा करना था , वो अपने आँखो के सामने मेरी इज़्ज़त को लूटता हुआ तो नही देख सकते थे , वो सच्चे पुलिस वाले थे जो अपने कर्तव्य के लिए मौत को तो गले लगा सकते थे लेकिन कैसे अपने पत्नी की इज़्ज़त को लूटता हुआ देखते ..

करीम के हाथ मेरे पैंटी मे घूमने लगी थी और मेरे योनि के ऊपर आ गये ,उसने उस जगह को जोरो से मसल दिया था , मैं बुरी तरह से चीखी जिससे सत्या को पता चल गया था की मेरे साथ क्या हो रहा है ……

“रूको ……….” सत्या जोरो से चिल्लाए

सभी की नज़रें उनके ऊपर ही थी , उन्होने फ़ैसला कर लिया था , फ़ैसला दोनो ही वचनो मे से एक को निभाने का ..

“मैं बताता हू की सबूत कहा है , इसे और मेरी बेटी को छोड़ दो , चाहे तो मुझे मार देना “

करीम पर जैसे इन बातों का कोई असर नही हो रहा था , वो आगे आकर मेरे नितंबों से अपने कमर को लगा दिया , उसका लिंग तना हुआ था जो की मेरे नितंबों मे चुभ रहा था , उसके पठानी सूट मे वो लिंग तना हुआ था , मैं फिर से जोरो से रोई जिसे सुनकर सत्या जोरो से चिल्लाए ……….

“अगर मैने नही बताया तो सबूत ऑटोमॅटिक ही न्यूज़ चॅनेल्स, केन्द्र सरकार और राज्य सरकार तक पहुच जाएगी …तुम सब बर्बाद हो जाओगे “

“करीम रूको “ इस बार जीवा चिल्लाया था , करीम ने बुरा सा मूह बनाया और जीवा के साथ जाकर खड़ा हो गया ,

“बताओ ..”

“पहले मेरी बीबी और बेटी को छोड़ दो “

जीवा जोरो से हंस पड़ा था …..

“मुझे चूतिया समझ कर रखा है क्या , इन्हे जाने दिया तो तू हमे कभी नही बताएगा “

“और अगर मैने बता दिया तो क्या गारंटी है की तुम इन्हे जाने दोगो “

सत्या की बात सुनकर करीम भड़क गया

“साले को यही गोली मरो और इसकी बीबी को मुझे दे दो बात ख़त्म “

लेकिन जीवा अभी भी शांत था

“तो तुम बताओ क्या करना है “ जीवा ने सत्या से कहा

“कोई ऐसा जिसे हम दोनो की चिंता हो वही गारंटी ले सकता है ..”

सत्या की बात सुनकर जीवा थोड़े चिंता मे पड़ गया

“करीम तिवारी को फोन लगाओ … और उसे यहाँ बुलवा , वही इसे समझाएगा “

तिवारी का नाम सुनकर मेरे पति और मुझे दोनो को एक बड़ा झटका लगा था ..

एम एल ए इन लोगो के साथ मिला हुआ था शायद उसी ने हमारी लोकेशन और जानकारी इन लोगो को दी थी ..
 
“अरे तिवारी का काम ख़त्म हो गया , उसने हमे जानकारी दी और बदले मे हम उसके नेक्स्ट चुनाव मे फंडिंग करेंगे बात ख़त्म , अब जो भी मामला है उसे हमे ही निपटाना होगा “ करीम की नज़रें मुझ पर ही टिकी हुई थी उसे ये सब सौदेबाज़ी बिल्कुल भी पसंद नही आ रही थी उसे तो मेरे जिस्म को नोचना था चाहे उसके लिए वो कोई भी कीमत चुकाए ..

लेकिन जीवा नही माना और तिवारी को वहाँ बुलाया गया , उसने जब मेरी हालत देखी तो घबरा गया

“ये तुम लोग क्या कर रहे हो , मैने तुम्हे सिर्फ़ इनस्पेक्टर के लाने के लिए कहा था तुम उसके परिवार को पकड़ कर ले आए “

दया शंकर चीखा ..

“हमे हमारा काम मत समझा अब इस इनस्पेक्टर से डील करवा बात ख़त्म “

करीम ने साफ साफ लब्जो मे कहा था ..

“देखो सत्या मैने तुम्हे पहले भी समझाया था की वो सबूत मुझे दे दो , ऐसे सेन्सिटिव चीज़ो को सम्हालना तुम्हारे बस का नही है “

तिवारी की बात सुनकर मेरे पति के चेहरे मे एक कातिल सी मुस्कान खिल गयी

“वाह एम एल ए साहब खुद मुझे इनके पीछे लगाकर इनलोगो से हाथ मिला लिया , आपने अपन ईमान बेचा होगा लेकिन मैं आज भी ईमानदार हू , लेकिन मुझे अपने परिवार की चिंता है मैं उन्हे ऐसे नही छोड़ सकता “

सत्या की बात सुनकर तिवारी को थोड़ी शर्मिंदगी तो हुई थी लेकिन आख़िर उसने भी अपन ईमान तो बेच ही दिया था

“सत्या ये पॉलिटिक्स है , यहाँ कोई दोस्त या दुश्मन नही होता, ना तुम दोस्त थे ना ही ये दुश्मन थे , और ना ही अब ये दोस्त है और तुम दुश्मन हो , बस यहाँ काम के और बेकार इंसान होते है , जो काम का है वो दोस्त है , और काम बिगाड़े वो दुश्मन और जो बेकार है उससे कोई मतलब ही नही रखा जाता … तो मुझे नैतिकता का पाठ मत पढ़ाओ मैं अपना काम जानता हू .. तुम अपने फॅमिली को बचाओ .. चलो मैं गारंटी देता हू की तुम्हारी बीबी और बेटी की हिफ़ाज़त का जिम्मा मेरा होगा , तुम बस वो सब बता दो जो हम तुमसे जानना चाहते है .”

“लेकिन मैं आपके बातों का यकीन कैसे करू “

सत्या की बात सुनकर तिवारी ने मानो एक गहरी सांस ली

“देखो सत्या मैं कमीना ज़रूर हू लेकिन इतना नही की सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए किसी औरत के इज़्ज़त से खेलु ….. और ऐसे भी मुझपर यकीन करने के अलावा तुम्हारे पास कोई चारा भी नही है ..”

सत्या ने एक नज़र मुझे देखा , वो आज मेरे लिए अपने कर्तव्य की आहुति देने जा रहे थे , उनकी आँखो मे आँसू थे वो मुझे आँखो से ही कह रहे थे की मुझे माफ़ करना …

“ठीक है लेकिन मुझे एक आदमी को बुलाना है , मेरी बीबी और बेटी को उसके हवाले होने के बाद ही मैं सबूतो को बताउन्गा , चाहे तो तुम लोग इन लोगो की निगरानी कर लेना लेकिन उस इंसान तक इन्हे पहुचाओगे “

तिवारी ने कुच्छ सोचकर हा मे सर हिला दिया था ..

थोड़ी देर के बाद मेरे आँखो मे पट्टी बाँधी गयी थी , मेरे पति ने अंतिम बार मेरे कानो मे बस ये कहा था

“मैं तुमसे और नेहा से बहुत प्यार करता हू महिमा, और मैं जिसके पास तुम्हे भेज रहा हू उससे कहना की मुझे माफ़ कर दे मैं टूट गया “

हमे बेहोश कर दिया गया और जब हमारी आँखे खुली तो मैं डॉक्टर . चूतिया के पास थी …….

मेरे पति की तो लाश भी बरामद नही हुई , डॉक्टर . ने बताया की सौदे के मुताबिक जब मैं और नेहा उनको मिले तो उन्होने सत्या से बात की थी और कहा था की हम दोनो उन्हे मिल गये है …

शायद उसके बाद सत्या ने सबूतो के बारे मे बता दिया हो…….
 
फ्लॅशबॅक एंड

पूरे कमरे मे सन्नाटा छा गया था , नेहा अपनी मा के गले से लग कर रो रही थी , डॉक्टर . चूतिया भी मायूस दिख रहे थे ……..

महॉल गमगीन था

“सत्या एक ईमानदार पुलिस वाला था, उसकी मौत जाया नही जाएगी ..”

डॉक्टर . के मूह से बस इतना ही निकल पाया
 
Back
Top