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Guest
तिवारी और जीवा एम एल ए के मरने का जश्न मना रहे थे तभी मैं अपने कमरे मे नहा रही थी ….. पूरे जिस्म मे खून की छीन्टे थे , बाथरूम के बाहर भुवन बैठा हुआ था किसी सोच मे डुबा हुआ था ……..
“कोमल वो पुस्तक वो तो तुम्हारे पास है ना “
मैं नहा कर निकली और भुवन की आँखे बड़ी हो गयी वो बस आँखे फाडे मुझे ही देख रहा था …..
“कोमल तुम “
भुवन इतना ही बोल पाया था , मेरा पूरा जिस्म नंगा था और अभी अभी नहाने के कारण पानी से पूरी तरह से भीगा हुआ था, बालो से पानी की बूंदे टपक रही थी .. मेरे सुडोल और नर्म जिस्म मे अभी भी नमी बरकरार थी ..
मैं इठलाती हुई आई और भुवन की गोद मे बैठ गयी ..
भुवन मानो काँप गया हो , वो अभी मेरे बिस्तर मे ही बैठा हुआ था …
“ये क्या कर रही हो “
“ग़लती हो गयी थी मुझसे ,मैं समझ नही पाई की मैं किससे प्यार करती हू “
मैने अपनी बाँहे भुवन के गले मे डाल दी थी , मैने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया लेकिन भुवन अभी भी कोई प्रतिक्रिया नही दे रहा था ..
“हटो कोमल .. तुम अभी परेशान हो .. ये प्यार नही है ये बस गुस्सा है ..”
मैने उसकी आँखो मे देखा , मेरी आँखे गुस्से से लाल हो गयी थी , ये शख्स मुझे ठुकरा रहा था … लेकिन भुवन की आँखो मे मेरे लिए बस प्यार ही था , कोई डर नही ……..
मैने पास पड़ा तलवार उठा लिया जो अभी भी ना जाने कितने लोगो के खून से भीगा हुआ था , मैने उसे भुवन के गले मे रख दिया
“मुझे ना बोलेगा “
मैने गुस्से मे कहा , ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद के काबू मे नही रह गयी हू ,
लेकिन वो हंसा ..
“तुम मुझे डरा रही हो “ मैं बस गुस्से से उसे देखते रह गयी , मेरे मूह से कोई भी आवाज़ नही निकल रही थी ..
तभी कमरे का दरवाजा खुल गया ..
सामने तिवारी मूह फाडे खड़ा था , उसके हाथो मे शराब की एक बोतल थी , वो बहुत ही खुस लग रहा था… लेकिन हमे इस हालत मे देखते ही उसके चेहरे की हवैया उड़ गयी …….
मैं नग्न बिस्तर मे भुवन के गोद मे बैठी हुई थी और मेरा तलवार उसके गले से लगा हुआ था …..
हम दोनो ने तिवारी को देखा , जहाँ भुवन थोड़ा झेप गया था वही मुझे जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा…
“ये.. ये क्या कर रही हो कोमल ..”
मानो तिवारी का पूरा नशा ही काफूर हो गया हो , वो हकलाने लगा था ..
“भाग यहाँ से मादरचोद वरना इसी तलवार से तेरा गला भी काट दूँगी “
मैं गरजी और अक्सर मैं तब गरजती थी जब मैं शिकार करती थी ..
मेरी आवाज़ सुनकर ही तिवारी काँप गया था , उसके आँखो मे डर उतरने लगा था .. उसके कदम पीछे होने लगे थे ..
वो दरवाजा बंद करने लगा ..
“रुक … दरवाजा खोल के रख …दुनिया को भी तो पता चले की यहाँ क्या हो रहा है ”
वो कुच्छ भी नही कह पाया … वो बस पीछे हट गया … मेरा चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था ..
लेकिन अभी भी भुवन की आँखो मे कोई भी डर नही दिख रहा था और यही बात मुझे और भी बेचैन कर रही थी …
उसने मेरे गालो को सहलाया , मेरे बालो मे अपनी उंगलिया फेरी ……और … और मेरे होंठो मे अपने होंठो को मिला दिया ……..
मेरे आँखो से एक आँसू गिर गया ऐसा लगा जैसे मैं फिर से होश मे आ गयी थी ………
“वो पुस्तक कहाँ है कोमल …… मेरे पिता जी ने कभी मुझे शक्ति परंपरा के बारे मे बताया था , मुझे लग की वो पागल आदमी कुच्छ भी बोलता है , लेकिन मेरे पिता जी तुम्हारे और पुजारी जी के मित्र थे , और अब मुझे भी लगता है की कोई ऐसी बात है जो हमे जानना बहुत ही ज़रूरी है …..”
मैने हा मे सर हिलाया ..
“पिता जी ने अपने अंतिम समय मे मुझे वो पुस्तक दी थी , और कहा था की जब तुम्हे अपना प्यार मिले तो इसे पढ़ना … मैने आज तक उसे नही पढ़ा था शायद आज वो समय आ गया है “
हम दोनो के होंठ फिर से मिल गये थे …….
“कोमल वो पुस्तक वो तो तुम्हारे पास है ना “
मैं नहा कर निकली और भुवन की आँखे बड़ी हो गयी वो बस आँखे फाडे मुझे ही देख रहा था …..
“कोमल तुम “
भुवन इतना ही बोल पाया था , मेरा पूरा जिस्म नंगा था और अभी अभी नहाने के कारण पानी से पूरी तरह से भीगा हुआ था, बालो से पानी की बूंदे टपक रही थी .. मेरे सुडोल और नर्म जिस्म मे अभी भी नमी बरकरार थी ..
मैं इठलाती हुई आई और भुवन की गोद मे बैठ गयी ..
भुवन मानो काँप गया हो , वो अभी मेरे बिस्तर मे ही बैठा हुआ था …
“ये क्या कर रही हो “
“ग़लती हो गयी थी मुझसे ,मैं समझ नही पाई की मैं किससे प्यार करती हू “
मैने अपनी बाँहे भुवन के गले मे डाल दी थी , मैने अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया लेकिन भुवन अभी भी कोई प्रतिक्रिया नही दे रहा था ..
“हटो कोमल .. तुम अभी परेशान हो .. ये प्यार नही है ये बस गुस्सा है ..”
मैने उसकी आँखो मे देखा , मेरी आँखे गुस्से से लाल हो गयी थी , ये शख्स मुझे ठुकरा रहा था … लेकिन भुवन की आँखो मे मेरे लिए बस प्यार ही था , कोई डर नही ……..
मैने पास पड़ा तलवार उठा लिया जो अभी भी ना जाने कितने लोगो के खून से भीगा हुआ था , मैने उसे भुवन के गले मे रख दिया
“मुझे ना बोलेगा “
मैने गुस्से मे कहा , ऐसा लग रहा था जैसे मैं खुद के काबू मे नही रह गयी हू ,
लेकिन वो हंसा ..
“तुम मुझे डरा रही हो “ मैं बस गुस्से से उसे देखते रह गयी , मेरे मूह से कोई भी आवाज़ नही निकल रही थी ..
तभी कमरे का दरवाजा खुल गया ..
सामने तिवारी मूह फाडे खड़ा था , उसके हाथो मे शराब की एक बोतल थी , वो बहुत ही खुस लग रहा था… लेकिन हमे इस हालत मे देखते ही उसके चेहरे की हवैया उड़ गयी …….
मैं नग्न बिस्तर मे भुवन के गोद मे बैठी हुई थी और मेरा तलवार उसके गले से लगा हुआ था …..
हम दोनो ने तिवारी को देखा , जहाँ भुवन थोड़ा झेप गया था वही मुझे जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा…
“ये.. ये क्या कर रही हो कोमल ..”
मानो तिवारी का पूरा नशा ही काफूर हो गया हो , वो हकलाने लगा था ..
“भाग यहाँ से मादरचोद वरना इसी तलवार से तेरा गला भी काट दूँगी “
मैं गरजी और अक्सर मैं तब गरजती थी जब मैं शिकार करती थी ..
मेरी आवाज़ सुनकर ही तिवारी काँप गया था , उसके आँखो मे डर उतरने लगा था .. उसके कदम पीछे होने लगे थे ..
वो दरवाजा बंद करने लगा ..
“रुक … दरवाजा खोल के रख …दुनिया को भी तो पता चले की यहाँ क्या हो रहा है ”
वो कुच्छ भी नही कह पाया … वो बस पीछे हट गया … मेरा चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था ..
लेकिन अभी भी भुवन की आँखो मे कोई भी डर नही दिख रहा था और यही बात मुझे और भी बेचैन कर रही थी …
उसने मेरे गालो को सहलाया , मेरे बालो मे अपनी उंगलिया फेरी ……और … और मेरे होंठो मे अपने होंठो को मिला दिया ……..
मेरे आँखो से एक आँसू गिर गया ऐसा लगा जैसे मैं फिर से होश मे आ गयी थी ………
“वो पुस्तक कहाँ है कोमल …… मेरे पिता जी ने कभी मुझे शक्ति परंपरा के बारे मे बताया था , मुझे लग की वो पागल आदमी कुच्छ भी बोलता है , लेकिन मेरे पिता जी तुम्हारे और पुजारी जी के मित्र थे , और अब मुझे भी लगता है की कोई ऐसी बात है जो हमे जानना बहुत ही ज़रूरी है …..”
मैने हा मे सर हिलाया ..
“पिता जी ने अपने अंतिम समय मे मुझे वो पुस्तक दी थी , और कहा था की जब तुम्हे अपना प्यार मिले तो इसे पढ़ना … मैने आज तक उसे नही पढ़ा था शायद आज वो समय आ गया है “
हम दोनो के होंठ फिर से मिल गये थे …….