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रात के करीब 12 बज रहे थे जब भुवन वहाँ आया , उसके साथ कुछ लड़के और थे , वो बियर की पूरी करीब 10 पेटी वहाँ रखकर चले गये …
“अरे ये सब क्या है “ मैं अपने कमरे मे अकेले थी असल मे ये मेरा कमरा नही था लेकिन मेरे लिए खाली करवाया गया था ..
“अरे इसे सुबह हॉस्टिल के फ्रीज़र मे रखवाना है ताकि कल शाम को यहाँ की लड़कियो को बियर की पार्टी दिया जाए “
भुवन की बात सुनकर मेरा मूह खुला का खुला रह गया
“पागल है क्या लड़किया ये पिएंगी …. किसी को पता चला ना तो इनके मा बाप इन्हे कॉलेज से खिचकर घर ले जाएँगे ..”
वो दौर था जब लड़किया ज़्यादा पढ़ाई नही करती थी , सिर्फ़ पढ़े लिखे घर की लड़किया ही कॉलेज जाया करती थी , उस समय लड़कियो का बियर या सिगरेट पीना बहुत बोल्ड कदम माना जाता था , मजेदार बात ये है की कही कही आज भी ऐसा ही माना जाता है …
“अरे फिकर ना कर सब पीती है “
हम दोनो ही हॉस्टिल के छत पर बैठे तारो को देख रहे थे, आसमान मे तारे चमक रहे थे और हमारे हाथो मे बियर की बॉटल ..
“भुवन अगर मेरे जीवन मे सबसे ज़्यादा कोई अहमियत रखता है तो वो तू है “
मैं हल्के नशे मे आ चुकी थी और भुवन के लिए मेरा प्यार उमड़ने लगा था ..
भुवन मेरी बात सुनकर बस हल्के से मुस्कुराया
“अच्छा और तिवारी “
“तिवारी क्या ??” मैं उसके बात से चौक गई थी
“जिस तरह से तू उसे देखती है तेरी आँखे तो कुच्छ और ही कहती है “
भुवन की बात सुनकर मैं थोड़ा घबरा गयी थी , मैं जानती थी की वो मुझे प्यार करता है लेकिन कभी कहता नही , उसके आवाज़ की उदासी भी इसका सुबूत थी ..
“देख भुवन अभी मैं..”
“कोमल मैं तुझसे प्यार करता हू “ भुवन ने एक ही सांस मे कह दिया था .. मैं स्तब्ध ही उसे देख रही थी मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दूं, वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , बचपन से उसने मेरे खुद के भाइयो से ज़्यादा मेरी हिफ़ाज़त की थी, मैं उसका दिल नही दुखाना चाहती थी ..
“मैं जानता हू कोमल की तुम भी ये जानती हो , और ये भी जानता हू की तुम मुझे प्यार नही करती … और मैं शायद ये कभी तुमसे ना कहता लेकिन ……. “
मैने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..
“तू मेरे जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है भुवन और हमेशा रहेगा .. तू ऐसे दुखी ना होना , मैं किसी की भी रहु लेकिन दोस्त मैं हमेशा तेरी ही रहूंगी ..”
भुवन के चेहरे मे हल्की सी मुस्कुराहट आई उसने मेरे गालो को थाम लिया और हल्के से एक चुम्मन मेरे माथे मे कर दिया ..
“दया शंकर मुझे सही लड़का नही लगता कोमल, मैं जानता हू की तू उसे पसंद करती है लेकिन वो अलग ही तरह का कमीना है , अपने फ़ायदे के लिए कुच्छ भी कर सकता है “
भुवन ने पहली बार दया शंकर के बारे मे मुझसे कोई बात की थी
“शायद हा वो कमीना है लेकिन क्या मेरे लिए भी , मतलब मुझे तो लगता है की वो मुझसे प्यार करता है ..”
“हो सकता है लेकिन कोई भी फ़ैसला बहुत ही सोच समझ कर लेना कोमल , मैं तुम्हे दुखी नही देख सकता “
भुवन की इस बात से मैं उसके सीने से लग गयी , अब ये शराब का नशा था की हमारे बीच का दोस्ताना की मैं अपना दिल खोल कर उससे प्यार जताना चाहती थी ..वो अपनत्व जताना चाहती थी जो एक दोस्त मे होता है ..
वो भी मेरे बालो को सहला रहा था ,
“फिकर मत करो तुम तो हो ना मुझे हर मुसीबत से बचाने वाले “
मैने मुस्कुरा कर उसे देखा
“हा मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा ही खड़ा रहूँगा लेकिन … लेकिन कोमल मैं नही चाहता की तुम्हारा दिल टूटे क्योकि दिल टूटने पर कोई किसी के काम नही आता , वो दर्द उसे भी भोगना पड़ता है जिसका दिल टूटता हो ..”
उसकी बात भी सही थी लेकिन प्यार भी तो ऐसी चीज़ है की करने वाला भी करने के लिए छटपटाता रहता है , और जब हो जाए तो फिर उस बेचैनी मे दर्द भरी आहे भरता है , जब अपने प्रेमी से मिलता है तो उसकी ख़ुसी मे खुस होता है और फिर बिच्छुड़ने पर उस दर्द से दुखी होता है..
अजीब सा मामला है प्यार का , लेकिन अभी मेरे लिए ऐसा नही था ,मेरे पास सोचने समझने के लिए समय था , मेरे साथ भुवन था जो मुझे सही सलाह दे सकता था ..
लेकिन दिक्कत ये थी की क्या मैं उसके सलाह को मानती ???
और यही डर भुवन के मान मे भी था ………
इसी सोच मे डुबे हुए मैं भुवन के बाँहो के घेरे मे दबी हुई थी की ..
“दया शंकर ..”
भुवन ने ऐसे कहा जैसे उसने तिवारी को देखा हो , मैं उससे अलग हुई तो छत के नीचे खड़ा हुआ दया शंकर हमे दिखाई दिया वो हमे ही घूर रहा था ..
रात के आँधियरे मे ना जाने उसने क्या देखा था लेकिन ये बात तो साफ थी की उसने हमे पहचान ज़रूर लिया था , और बस वही स्तब्ध सा खड़ा था ….
भुवन ने चिल्लाकर उसे बुलाया लेकिन वो बिना कुछ बोले ही वहाँ से निकल गया …………
मैं और भुवन दोनो ही समझ गये थे की तिवारी ने हमारे बारे मे क्या सोचा लिया है ……….
“अरे ये सब क्या है “ मैं अपने कमरे मे अकेले थी असल मे ये मेरा कमरा नही था लेकिन मेरे लिए खाली करवाया गया था ..
“अरे इसे सुबह हॉस्टिल के फ्रीज़र मे रखवाना है ताकि कल शाम को यहाँ की लड़कियो को बियर की पार्टी दिया जाए “
भुवन की बात सुनकर मेरा मूह खुला का खुला रह गया
“पागल है क्या लड़किया ये पिएंगी …. किसी को पता चला ना तो इनके मा बाप इन्हे कॉलेज से खिचकर घर ले जाएँगे ..”
वो दौर था जब लड़किया ज़्यादा पढ़ाई नही करती थी , सिर्फ़ पढ़े लिखे घर की लड़किया ही कॉलेज जाया करती थी , उस समय लड़कियो का बियर या सिगरेट पीना बहुत बोल्ड कदम माना जाता था , मजेदार बात ये है की कही कही आज भी ऐसा ही माना जाता है …
“अरे फिकर ना कर सब पीती है “
हम दोनो ही हॉस्टिल के छत पर बैठे तारो को देख रहे थे, आसमान मे तारे चमक रहे थे और हमारे हाथो मे बियर की बॉटल ..
“भुवन अगर मेरे जीवन मे सबसे ज़्यादा कोई अहमियत रखता है तो वो तू है “
मैं हल्के नशे मे आ चुकी थी और भुवन के लिए मेरा प्यार उमड़ने लगा था ..
भुवन मेरी बात सुनकर बस हल्के से मुस्कुराया
“अच्छा और तिवारी “
“तिवारी क्या ??” मैं उसके बात से चौक गई थी
“जिस तरह से तू उसे देखती है तेरी आँखे तो कुच्छ और ही कहती है “
भुवन की बात सुनकर मैं थोड़ा घबरा गयी थी , मैं जानती थी की वो मुझे प्यार करता है लेकिन कभी कहता नही , उसके आवाज़ की उदासी भी इसका सुबूत थी ..
“देख भुवन अभी मैं..”
“कोमल मैं तुझसे प्यार करता हू “ भुवन ने एक ही सांस मे कह दिया था .. मैं स्तब्ध ही उसे देख रही थी मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं उसका क्या जवाब दूं, वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था , बचपन से उसने मेरे खुद के भाइयो से ज़्यादा मेरी हिफ़ाज़त की थी, मैं उसका दिल नही दुखाना चाहती थी ..
“मैं जानता हू कोमल की तुम भी ये जानती हो , और ये भी जानता हू की तुम मुझे प्यार नही करती … और मैं शायद ये कभी तुमसे ना कहता लेकिन ……. “
मैने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..
“तू मेरे जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा है भुवन और हमेशा रहेगा .. तू ऐसे दुखी ना होना , मैं किसी की भी रहु लेकिन दोस्त मैं हमेशा तेरी ही रहूंगी ..”
भुवन के चेहरे मे हल्की सी मुस्कुराहट आई उसने मेरे गालो को थाम लिया और हल्के से एक चुम्मन मेरे माथे मे कर दिया ..
“दया शंकर मुझे सही लड़का नही लगता कोमल, मैं जानता हू की तू उसे पसंद करती है लेकिन वो अलग ही तरह का कमीना है , अपने फ़ायदे के लिए कुच्छ भी कर सकता है “
भुवन ने पहली बार दया शंकर के बारे मे मुझसे कोई बात की थी
“शायद हा वो कमीना है लेकिन क्या मेरे लिए भी , मतलब मुझे तो लगता है की वो मुझसे प्यार करता है ..”
“हो सकता है लेकिन कोई भी फ़ैसला बहुत ही सोच समझ कर लेना कोमल , मैं तुम्हे दुखी नही देख सकता “
भुवन की इस बात से मैं उसके सीने से लग गयी , अब ये शराब का नशा था की हमारे बीच का दोस्ताना की मैं अपना दिल खोल कर उससे प्यार जताना चाहती थी ..वो अपनत्व जताना चाहती थी जो एक दोस्त मे होता है ..
वो भी मेरे बालो को सहला रहा था ,
“फिकर मत करो तुम तो हो ना मुझे हर मुसीबत से बचाने वाले “
मैने मुस्कुरा कर उसे देखा
“हा मैं तो तुम्हारे साथ हमेशा ही खड़ा रहूँगा लेकिन … लेकिन कोमल मैं नही चाहता की तुम्हारा दिल टूटे क्योकि दिल टूटने पर कोई किसी के काम नही आता , वो दर्द उसे भी भोगना पड़ता है जिसका दिल टूटता हो ..”
उसकी बात भी सही थी लेकिन प्यार भी तो ऐसी चीज़ है की करने वाला भी करने के लिए छटपटाता रहता है , और जब हो जाए तो फिर उस बेचैनी मे दर्द भरी आहे भरता है , जब अपने प्रेमी से मिलता है तो उसकी ख़ुसी मे खुस होता है और फिर बिच्छुड़ने पर उस दर्द से दुखी होता है..
अजीब सा मामला है प्यार का , लेकिन अभी मेरे लिए ऐसा नही था ,मेरे पास सोचने समझने के लिए समय था , मेरे साथ भुवन था जो मुझे सही सलाह दे सकता था ..
लेकिन दिक्कत ये थी की क्या मैं उसके सलाह को मानती ???
और यही डर भुवन के मान मे भी था ………
इसी सोच मे डुबे हुए मैं भुवन के बाँहो के घेरे मे दबी हुई थी की ..
“दया शंकर ..”
भुवन ने ऐसे कहा जैसे उसने तिवारी को देखा हो , मैं उससे अलग हुई तो छत के नीचे खड़ा हुआ दया शंकर हमे दिखाई दिया वो हमे ही घूर रहा था ..
रात के आँधियरे मे ना जाने उसने क्या देखा था लेकिन ये बात तो साफ थी की उसने हमे पहचान ज़रूर लिया था , और बस वही स्तब्ध सा खड़ा था ….
भुवन ने चिल्लाकर उसे बुलाया लेकिन वो बिना कुछ बोले ही वहाँ से निकल गया …………
मैं और भुवन दोनो ही समझ गये थे की तिवारी ने हमारे बारे मे क्या सोचा लिया है ……….