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Guest
“अबे तुझे क्या हो गया “
अज्जु ने मुझे हिलाते हुए पूछा
“कुछ नही यार .. ये साली अजीब सी खबर है लेकिन इसमे तू इतना एक्शिटेड क्यो है भाई “
मैने अज्जु को घूर कर देखा ,
“अरे यार जिसका खून हुआ है ना भवानी , उसे मैं अच्छे से जानता था , वो असल मे तिवारी अंकल का खास आदमी था “
“ऊहह लेकिन इसमे तो पठान गैंग लिखा हुआ है “
“अरे भाई ये सभी लोग एक ही है , पठान गैंग अब तिवारी गैंग बन गया है … जो दोनो पहले अलग अलग थे अब एक हो गये है , वही ये जो जीवा गैंग है वो पहले शक्ति गेंग हुआ करता था , ऐसा मैने सुना है अपने पापा से , मुझे भी उतना नही पता “
“ऊहह तो जीवा गैंग वालो ने तिवारी के खास आदमी को मार दिया है “
मैने धीरे से कहा
“यही तो मजेदार बात है दोस्त … जीवा गैंग वालो ने नही बल्कि शक्ति गेंग वालो ने मारा है “
“लेकिन तूने तो कहा की दोनो एक ही है “
“हा लेकिन फिर भी अलग है , दोनो गैंग के लोग भले ही एक होई गये हो लेकिन ये स्टाइल शक्ति गैंग का था , तिवारी अंकल और मेरे पापा तो कल रात से ही बहुत बेचैन थे , ऐसे छोड़ ना यार हमे क्या … ऐसे तू तो पूरा हीरो दिख रहा है बे, सुस ने तो तुझे चमका ही दिया “
मुझे अचानक ही याद आया की मैं कहा हू , अभी ये सब सोचने का समय नही था और सोच कर मुझे कुछ मिलने वाला भी नही था, ये सब बात का पता मुझे संपत मामा से पता चल जाना था ..:
“हा यार सुस ने बोला था की आज मुझे अपने घर ले जाएगी “
“हा लेकिन आज तो मुझे लगता की वो तुझे नही ले जाएगी , उसके घर का महॉल तो आज बहुत ही गर्म होगा, भवानी उसके पिता का बेहद ही खास था “
“हुम्म “
तभी मेरी नज़र नेहा पर पड़ी जो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी, मैने आँखो से ही पूछ लिया की क्या हुआ और उसने आँखो से ही मुझे बता दिया की मैं अच्छा लग रहा हू ..उसकी इस अदा से मेरे मान मे एक अजीब सी टीस सी उठ गयी ..:
मेरे दिमाग़ मे अभी भी भवानी की मौत की तस्वीरे घूम रही थी, कहने को मैं शांत था लेकिन मान मे बहुत ही बेचैनी चल ही रही थी …
अज्जु ने मुझे हिलाते हुए पूछा
“कुछ नही यार .. ये साली अजीब सी खबर है लेकिन इसमे तू इतना एक्शिटेड क्यो है भाई “
मैने अज्जु को घूर कर देखा ,
“अरे यार जिसका खून हुआ है ना भवानी , उसे मैं अच्छे से जानता था , वो असल मे तिवारी अंकल का खास आदमी था “
“ऊहह लेकिन इसमे तो पठान गैंग लिखा हुआ है “
“अरे भाई ये सभी लोग एक ही है , पठान गैंग अब तिवारी गैंग बन गया है … जो दोनो पहले अलग अलग थे अब एक हो गये है , वही ये जो जीवा गैंग है वो पहले शक्ति गेंग हुआ करता था , ऐसा मैने सुना है अपने पापा से , मुझे भी उतना नही पता “
“ऊहह तो जीवा गैंग वालो ने तिवारी के खास आदमी को मार दिया है “
मैने धीरे से कहा
“यही तो मजेदार बात है दोस्त … जीवा गैंग वालो ने नही बल्कि शक्ति गेंग वालो ने मारा है “
“लेकिन तूने तो कहा की दोनो एक ही है “
“हा लेकिन फिर भी अलग है , दोनो गैंग के लोग भले ही एक होई गये हो लेकिन ये स्टाइल शक्ति गैंग का था , तिवारी अंकल और मेरे पापा तो कल रात से ही बहुत बेचैन थे , ऐसे छोड़ ना यार हमे क्या … ऐसे तू तो पूरा हीरो दिख रहा है बे, सुस ने तो तुझे चमका ही दिया “
मुझे अचानक ही याद आया की मैं कहा हू , अभी ये सब सोचने का समय नही था और सोच कर मुझे कुछ मिलने वाला भी नही था, ये सब बात का पता मुझे संपत मामा से पता चल जाना था ..:
“हा यार सुस ने बोला था की आज मुझे अपने घर ले जाएगी “
“हा लेकिन आज तो मुझे लगता की वो तुझे नही ले जाएगी , उसके घर का महॉल तो आज बहुत ही गर्म होगा, भवानी उसके पिता का बेहद ही खास था “
“हुम्म “
तभी मेरी नज़र नेहा पर पड़ी जो मुझे अजीब निगाहो से देख रही थी, मैने आँखो से ही पूछ लिया की क्या हुआ और उसने आँखो से ही मुझे बता दिया की मैं अच्छा लग रहा हू ..उसकी इस अदा से मेरे मान मे एक अजीब सी टीस सी उठ गयी ..:
मेरे दिमाग़ मे अभी भी भवानी की मौत की तस्वीरे घूम रही थी, कहने को मैं शांत था लेकिन मान मे बहुत ही बेचैनी चल ही रही थी …