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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

अपडेट 19

“हल्लो सरमेरा नाम अंकित है मैं सुस का बाय्फ्रेंड हू “

मेरे ऐसे बोलते ही सुस जोरो से हंस पड़ी थी

मैं, सुस, अज्जु और मोनिका के साथ एक माल मे आया हुआ था, वो लोग मेरे लिए कपड़े खरीद रहे थे ताकि मुझे तिवारी से इंट्रोड्यूस करवाया जा सके ..

ऐसे मुझे भी पता नही था की मैं वहाँ जा कर क्या करूँगा लेकिन फिर भी,

ऐसे वो भी नही जानते थे की मैं तिवारी के सामने जा कर क्या उखाड़ लूँगा लेकिन वो भी मुझे उसके सामने भेजने को तैयार हो गये थे क्योकि उन्हे अपनी शादी तोड़ने का यही एकलौता अवसर दिख रहा था ..

“तुम तो पूरे कार्टून लग रहे हो यार “

सुस ने हसते हुए कहा

“पापा या भाई लोग अगर तुम्हे देखेंगे तो तुम्हे छोड़ो मुझे ना मार दे “

मैने एक महँगी ब्रॅंडेड जीन्स पहनी थी लेकिन वो कमर से इतनी नीचे थी की मुझे बड़ा ही अनकंफर्टबल लगा सो मैने उसे उठा उँचा करके पहन लिया लगभग मेरे पेट पर, और शर्ट भी इन कर ली थी ..

“अरे भाई इसे कमर से थोड़ा नीचे पहनते है और देख मैं दिखाताहू “

लेकिन मुझे वो पसंद नही आया क्योकि फ्यूषन अपनी जाग थी मुझे तो अपना कॉमफोर्टब्लेन सुस चाहिए था..

लगभग पूरा दिन घूमने पर कुछ कपड़े मुझे पसंद आए थे वही सुस और मोनिका ने मुझसे दुगुना कपड़े खुद के लिए ले लिए थे, और उनका शॉपिंग जारी ही था ..

“भाई ये लड़किया तो आज मरवाएँगी “

अज्जु ने तब कहा जब वो दोनो सेंडल लेने चले गये और हम कॉफी शॉप मे बैठे कॉफी पी रहे थे

“भाई ये लोग पूरे साल का समान आज ही लेंगी क्या ??”

मैं भी थक चुका था

“क्या पता यार जब शॉपिंग की बात आती है तो सभी लड़कियो का हाल एक जैसा ही हो जाता है, इन्हे कोई भी चीज़ जल्दी पसंद आता ही नही है फिर अलग अलग चीज़ो के लिए अलग अलग शॉप मे जाती है हर शॉप मे एक दो घंटा तो लगा ही देती है … अब देखो ना कहने को तो मोनिका को सुस बिल्कुल भी पसंद नही है लेकिन आज देखो कैसे बेस्ट फ्रेंड बनी फिर रही है दोनो इनकी दोस्ती तो शॉपिंग ने ही करवा दी …”

हम दोनो ही हसने लगे थे

तभी मेरे दिमाग़ मे भाभी का ख्याल आया, उनकी साड़ी पुरानी हो गयी थी , कोई दो साड़ी ही होंगी उनके पास वही बदल बदल कर पहनती है, शायद उन्हे भी शॉपिंग करना पसंद आए …

नही शॉपिंग का मज़ा लेना अमीरो का काम था ना की ग़रीब लोगो का, सबसे पहली ज़रूरत तो रोटी और छत की होती है फिर कपड़ो का नंबर आता है, और इस तरह की शॉपिंग … भाभी तो सोच भी नही सकती ये सब ..

लेकिन फिर भी मेरे दिल मे आया की क्यो ना उनके लिए कुछ लिया जाए शायद एक साड़ी ..

“यार चल ना एक साड़ी देखते है “

अज्जु जो की अभी अभी थोड़ा रिलॅक्स हुआ था उसने मुझे खा जाने वाली नज़र से देखा

“यार सोच रहा हू की भाभी के लिए एक साड़ी ले लू, मेरे लिए तो तुम लोगो ने ये कपड़े ले दिए भाभी के लिए मैं एक साड़ी लेना चाहता हू “

अज्जु के होठों मे मुस्कान आ गयी और वो उठ खड़ा हुआ

हम दोनो पास ही एक सेल मे चले गये जहाँ 50% ऑफ चल रहा था..

मैने अपनी जेब टटोली कोई 200र्स थे जिसे खर्च करने के लिए भाभी ने ही दिया था, मुझे एक साड़ी पसंद आई

“भैया ये कितने की है “

“500र्स “

दुकानदार ने कहा

“ऊहह सस्ती वाली दिखाओ ना “

“रेंज कितने का है “

“200र्स “

दुकानदार ने मुझे घूरा

“अबेतू ले ना मैं तो हू, पैसे की टेन्षन क्यो ले रहा है “

अज्जु की बात सुनकर मुझे अच्छा तो लगा लेकिन मैं भाभी की साड़ी के लिए उससे पैसे नही ले सकता था

“नही भाई, भाभी की साड़ी के लिए तुझसे पैसे नही ले सकता, अगर उन्हे ये पता चलेगा तो बहुत नाराज़ होगी, और गिफ्ट की कीमत नही देखते दोस्त उसमे छिपा प्यार देखते है , जितनी मेरी औकात है उसी हिसाब से मैं भाभी के लिए साड़ी ले जाउन्गा “

इसके बाद अज्जु कुछ भी नही बोला क्योकि शायद वो मेरी भावनाओ को समझ चुका था

दुकानदार ने मुझे साड़ी दिखाई और एक पसंद भी आ गयी , सच मे साड़ी यो का काम बड़ा ही अजीब होता है एक ही जैसे दिखने वाली साड़ी 3000 से 300 तक की मिल सकती है बस क्वालिटी का ही आंतर होता है , मैं ये सारी ले कर खुश था बहुत खुस ……

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“अरे इसकी क्या ज़रूरत थी रे, रानी (संपत की गर्लफ्रेंड, या रखैल भी बोल सकते है ) मुझे अपनी पुरानी साड़ी देने वाली थी “

भाभी ने मेरे हाथो मे वो साड़ी देखकर कहा

“आपकी सभी साड़ी पुरानी हो गयी है, खुद तो कभी लॉगी नही इसलिए मैं ले आया “

उन्होने मुस्कुरा कर उसे पकड़ लिया

साड़ी सस्ती थी लेकिन भाभी के नूर मे तो दाग भी झिल मिला उठता था,

उन्होने मुझे उसे पहन कर दिखाया और मैं बस आँखे भर भर कर उन्हे देखता रहा , सच मे कमाल की थी तो उनकी सुंदरता थी या मेरी नज़रो मे उनके लिए भरा प्रेम और सम्मान मुझे नही टा लेकिन उन्हे देख कर उनसे आँखे हटाने का दिल ही नही चाहता था..

थोड़ी देर के बाद मैं और भाभी दोनो बैठे बाते कर रहे थे

“बेटा तिवारी के पास जाने से बहुत ख़तरा है “

“ख़तरा तो है भाभी लेकिन ख़तरा लेना ही पड़ेगा, और मेरे पास तो अब एक और मकसद हो गया है तिवारी के घर जाने का “

उन्होने आँखे थोड़ी बड़ी कर ली

और मैने नेहा वाली बात उन्हे बताई की कैसे तिवारी और जीवा ने मिलकर उसके पिता की हत्या कर दी

मेरी बात सुनकर भाभी का चेहरा ही उतर गया

“क्या हुआ भाभी ??”

“बेटा वो तिवारी तो है ही कमीना लेकिन जीवा..?? नही बेटा जीवा ऐसा नही कर सकता “

उनकी बात सुनकर मैं चौक गया

“ऐसा आप कैसे कह सकती हो भाभी , जीवा भी तो एक गुंडा था “

“हा वो गुंडा था लेकिन तिवारी के जैसा नही, यहाँ रहकर मैने उसके बारे मे बहुत कुछ जाना है सोनू, सभी उसे भगवान मानते है उसने हम जैसे ना जाने कितनो की मदद की है “

“ह्म वो तो है लेकिन … वो था तो एक डॉन ही ना और ग़लत कम करने वाला सही कैसे हो सकता है “

“हा वो ग़लत काम करता था लेकिन इतना कमीना नही था की किसी को जान से मार दे, मैने तो ये सुना है की वो असल मे ईमानदार लोगो की बहुत इज़्ज़त करता था , और लोग भी उसकी इज़्ज़त करते थे …वो ग़लत काम भी सही तरीके से करता था, कोई ऐसा काम नही करता था जिससे लोगो को नुकसान हो और इसलिए उसकी और तिवारी की लड़ाई हुई “

भाभी की बात सुनकर मुझे लगने लगा की शायद यहाँ रहने के कारण भाभी का माइंड वॉश हो गया होगा , क्योकि यहाँ रहने वाले सभी जीवा के ही आश्रित थे तो उसकी कोई बुराई कैसे कर सकते थे …

“भाभी यहाँ के लोगो ने आपके दिमाग़ मे काबू कर लिया है जो आप जीवा के गुणगान गा रही हो “

मेरी बात सुनकर वो हंस पड़ी

“चल जाने दे वो सब, लेकिन मुझे एक चीज़ तो समझ आ गयी की तू नेहा को पसंद करने लगा है “

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा शरमाया

“हा लेकिन वैसे नही ..”

“कैसे ???”

“अरे भाभी छोड़ो ना ऐसे भी मेरी तो एक ही गर्लफ्रेंड है, जो अभी साड़ी पहने मेरे सामने खड़ी है”

भाभी के होठों मे मेरी बात को सुनकर एक मुस्कान आ गयी, उन्होने मेरे बाजू मे बैठकर मेरे गाल मे के चपत लगा दिया ..

“सुधर जा जब देखो तब यही बात करता है, अब के मार पड़ेगी “

मैं उनके सुंदर चेहरे को देखता रहा, उनके होठों हिल रहे थे जो थोड़े गीले थे, मन कर रहा था की उनके गुलाबी और रस से भरे हुए होठों को अपने होठों मे ले लू, लेकिन मैने अपने दिल को समझाया की ये तेरे प्यार जताने का तरीका नही है …

“क्या देख रहे हो “

भाभी की कोमल आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी ,

“कुछ नही बस आपके इस सुंदर से चेहरे को देख रहा था, आप सच मे बहुत ही खूबसूरत हो “

अनायास ही मेरी निगाहे उनके चेहरे पर जम सी गयी थी , मैं बस उस सुंदर मुखड़े को देखे जा रहा था और उनकी चंचल निगाहे मानो मेरी नज़र को समझते हुए शर्म से झुक चुकी थी

ऐसा लगा जैसे मैं बस डूब रहा था किसी सागर मे उफनते हुए लहरो की तरह मेरे जसबातों भी उफंनने लगे थे ..मैं उनके करीब पहुच गया था ..

“सोनू ..”

उनकी कोमल लेकिन कमजोर सी आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी वो मुझे सचेत करना चाहती थी की मैं जो सोच रहा हू वो सही नही है लेकिन फिर भी उनकी आवाज़ मे वो बात नही थी की मुझे रोक सके , उनकी आवाज़ लहरा रही थी वो धीमी हो चुकी थी, उनके आवाज़ से ज़्यादा शोर तो उनकी धड़कनो का था जो की किसी रेल की भाँति तेज चल रही थी, एक ही लय मे , ऊँची नीचीहोती उनकी छातिया मुझे अपनी ओर खिचने लगी थी , जैसे जैसे वो उपर उठ कर नीचे जाती भाभी की गर्म साँसे मेरे चेहरे से टकरा जाती…..

ये क्या हो रहा था क्या उस दिन जैसे आज भी वासना की आग ने हमे जकड़ लिया था, नही ऐसा नही था उस दिन मेरी नज़रे भाभी के जिस्म मे थी और उससे ही मेरे जिस्म मे वासना की आग भड़कनी शुरू हो गयी थी लेकिन आज नही आज तो मेरी नज़रे भाभी के सुंदर चेहरे पर थी तो फिर आज क्या हुआ था..

मेरा ध्यान मेरे लिंग की ओर गया जो की बिल्कुल भी तनाव की स्तिति मे नही था, मतलब साफ था की ये वासना नही थी कुछ और ही था ,लेकिन क्या था प्रेम??

प्रेम तो भाभी से हमेशा से ही था तो फिर क्या था कोई आकर्षण ??

उनका चेहरा मेरी नज़रो के लिए किसी चुंबक की तरह था, नज़रे तो जाकर बस चिपक ही गयी थी ..

“अब हो गया ना कितना घुरेगा मुझे “

भाभी वहाँ से हट गई और बिस्तेर मे जाकर लेट गई , ये संकेत था की मैं भी अब सो जाऊ , मैं अपने ही ख़यालो मे खोया हुआ उनसे चिपक कर सो गया , लेकिन उनकी भी हालत मुझसे जुदानही थी वो भी इसी सोच मे थी जिस सोच मे मैं था , उनके हाथ मेरे बालो मे ज़रूर चल रहे थे लेकिन आँखे खुली हुई छत को देखे जा रही थी ……..
 
Pavan wrote: ↑ 15 Jul 2021 12:33
बहुत ही शानदार अपडेट किया
 
अपडेट 20

“भाई और कितना देर यहाँ बैठना पड़ेगा ,5 कप चाय पी चुका हू मैं यहाँ बैठकर “

शाम का समय था और अक्की ने मुझे अपने साथ जासूसी मे लगा रखा था , जी हा जासूसी..

मेडम की जासूसी स्नेहा मेडम की जासूसी ..

हम उनके घर के बाहर खड़े हुए थे कुछ 2 घंटे हो गये थे और पास के ही चाय ठेले मे मैं और अक्की बैठे हुए उनके घर को निहार रहे थे…

“चुप करके बैठे रह ना भाई , अज्जु के लिए तू तिवारी के घर जाने के लिए राज़ी हो गया अपनी जान जोखिम मे डालने के लिए भी तैयार है और साले मेरे लिए तू कुछ घंटे बैठा भी नही रह सकता ..” अब अक्की की ऐसी धमकी से मैं फिर से चुप हो गया था ..

“लेकिन भाई तुझे ये आइडिया किसने दिया की मेडम के घर के बाहर बैठे रहो “

“भाई ये आइडिया नेहा का था उसने कहा की पहले पता तो कर ले की वो मॅरीड है या नही या उसका कोई बाय्फ्रेंड तो नही है , इसलिए आज से काम शुरू कर दिया हू ..”

“आज से ….?? साले यानी तू रोज यहाँ आकर बैठेगा”

“ हा तेरे साथ .. और भाई इसी बहाने हम थोड़ा घूम भी लेंगे “

मैं उसकी बात से सिहर गया था ये तो सरासर टॉर्चर था, मैं रोज शाम को ऐसे घंटो बैठकर चाय नही पी सकता था ..

“मेरे भाई इसे घूमना नही कहते, ये मानसिक प्रताड़ना है , मैं तेरा दोस्त हू इसका मतलब ये नही है की तू मुझे ऐसे टॉर्चर करे “

मेरी बात सुनकर अक्की का चेहरा उदास हो गया ..

“ठीक है कल से तू मत आना मैं ही अकेले आ जाउन्गा चाहे इसके बाद मेरे साथ कुछ भी हो जाए तुझे क्या पड़ी है …”

अब ये साला मुझे एमोशनल ब्लॅकमेल करने मे उतारू हो गया था, जिसे सुनकर मेरे होठों मे मुस्कान खिल गई..

“साले इतना एमोशनल अगर मेडम के सामने हो जाएगा ना तो वो सब कुछ दे देगी तुझे “

“भाई सब कुछ नही बस वो मुझे देख कर मुस्कुरा दे यही मेरे लिए बहुत है ,क्या मुस्कान है उनकी .. अनार के दानो जैसे दांतो की पंक्तिया , जब मुस्कुराती है तो लगता है जैसे कमल खिल गया हो “

“भाई कमल कीचड़ मे खिलता है और उनका मूह कीचड़ तो नही है “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा गुस्से से मुझे देखने लगा

“हा साले कमल नही तो गुलाब समझ ले ना”

वो फिर से खो गया और उसके होठों मे मुस्कान आ गयी

“और उनकी बात.. वा क्या आवाज़ है कोमल कोमल , मखमल मखमल , जन्नत जन्नत , वो हूर है परी है मेरे दिल की धड़कन है “
 
अक्की की बकवास शायरी शुरू हो चुकी थी और मेरी नज़र मेडम के दरवाजे पर पड़ी और मैं बुरी तरह से चौक गया ..

“अबे उधर देख ..”

मेडम के घर का दरवाजा खुला और वहाँ से एक आदमी बाहर निकला, अक्की का चेहरा उतर गया था वही मेरी आँखे बड़ी हो चुकी थी क्योकि हम दोनो ही उस शख्स को जानते थे ..

“ये साला यहाँ क्या कर रहा है “

मैने अक्की को बोला उसने मुझे ऐसे देखा जैसे मुझे बोल रहा हो की मुझे कैसे पता होगा और वो सही था उसे कैसे पता होगा लेकिन हम दोनो यहाँ टीन घंटे से बैठे हुए थे और वो आदमी तीन घंटे से मेडम के साथ उनके घर के अंदर था …..

“मेडम उसके साथ 3 घंटे से अकेली थी “

मैने अकेली मे थोड़ा ज़ोर दिया

“हूंम्म”

“आबे क्या ह्म कर रहा है 3 घंटे से अकेली साथ थी मतलब समझ रहा है “

“क्या ??”

अक्की अभी भी जैसे अपनी आँखो पर भरोशा नही कर पा रहा था या फिर किसी सदमे मे बैठा हुआ था ..

“मतलब की पवन सर ही मेडम के बाय्फ्रेंड है “

अक्की का चेहरा पूरी तरह से उतर गया

तभी ठेले के रेडियो मे एक गाना चला

‘क्या से क्या हो गया बेवफा ..तेरे प्यार मे ..’

और अक्की मुझसे बिना कुछ बोले ही अपनी गाड़ी की ओर जाने लगा ..

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स्कूल मे महॉल थोड़ा गमगीन था हमारे ग्रूप मे कोई भी किसी से बात नही कर रहा था और अक्की जैसे किसी सदमे मे था, कॅंटीन वाले ने भी जैसे उसको जलाने की कसम खा ली थी जो साले रोज डिस्को सॉंग या रोमॅंटिक लगा कर रखते थे आज दुखी मन वाले गीत चला रहे थे ..

‘जमाने मे बहला कैसे मुहब्बत लोग करते है ,

वफ़ा के नाम की अब तो शिकायत लोग करते है ..

आँख है भरी भरी और तुम मुस्कुराने की बात करते हो ..’

ये सॉंग प्ले हो रहा था और ना चाहते हुए भी हम सबके होठों मे मुस्कान फैल गयी , सूकर है की अक्की ने हमारे चेहरे नही देखे वरना बेचारी का दिल ही टूट जाता ..

“पहले मुझे एक चीज़ बता की तुम लोगो को किसने कहा था की उसके घर के बाहर खड़ा रहो “

मोनिका थोड़े गुस्से मे बोली

“यार नेहा ने “

अक्की ने भोलेपन से कहा

“हे मैने ऐसा कब कहा था “

नेहा की आवाज़ थोड़ी तेज थी

“तुमने ही तो कहा था की उनके बारे मे जानकारी जुटाओ “
 
“जानकारी जुटाने के लिए कहा था पागल, उनके घर के सामने खड़ा रहने के लिए नही, ये तो है ही पागलु तुम भी इसके बात मे आ गये “

नेहा ने मेरी ओर देखा

“मैं नही तू पागलु .. तूने बोला की जानकारी जुटाओ लेकिन ये नही बताया की कैसे तो मैं क्या करता, अब तो मेडम भी किसी गैर की हो गयी अच्छा ही हुआ की ये सब अपने आँखो से देख लिया “

अक्की का चेहरा फिर से उतर गया था

उसके गुस्से से हमारे होठों पर वैसी ही मुश्कं खिल गई जैसे किसी बच्चे के गुस्से पर खिल जाती है लेकिन फिर उसके दुखी चेहरे को देखकर हम सबका दिल उदास हो गया था, वो हमारे ग्रूप का सबसे प्यारा मेंबर था और उसके चेहरे मे उदासी देखकर सभी का दुखी होना लाजमी ही था..

“तू फिकर मत कर मेरे दोस्त सब ठीक हो जाएगा “

मैने उसके कंधे पर हाथ रखा

“अब क्या ठीक हो जाएगा, मेरे प्यार को तो वो पवन उड़ा कर ले गया “

“यार तुम लोग हो ही चूतिए, ऐसे कौन नज़र रखता है :डेज़्ड: ,तुम लोग खुद को जासूस डॉक्टर.चूतिया समझते हो क्या, या फिर उनकी शागिर्द काजल समझते हो “

मोनिका अपने स्वाभाव के अनुसार थोड़े गुस्से मे चिल्लाई

“ये लोग कौन है ??”

मेरे मूह से निकल गया

“उनकी बात अभी छोड़ो मैने बस एक उदाहरण दिया था, बात ये है की तुम्हे अगर नज़र रखनी ही है तो उसके और भी तरीके थे , और वो तुम्हारी टीचर है यार सबसे अच्छा तरीका तो ये था की तुम उनके पास ट्यूशन शुरू कर दो”

सबकी नज़र मोनिका पर चली गयी , साला ये आइडिया हमारे दिमाग़ मे क्यो नही आया था,

जैसे हमारे दिमाग़ की घंटी बज उठी :आइडिया:

“मैं आज ही उनसे बात करती हू “ नेहा ने तुरंत ही कहा ऐसे भी उसे बॉटेनी पसंद थी

“लेकिन तेरे वहाँ जाने से तो बात बिगड़ जाएगी यानी मेरा मानना है की अक्की को अकेले जाना चाहिए “

मैने तुरंत ही कहा

लेकिन मेरी बात सुनकर नेहा मुस्कुरा उठी

“अरे पागल वो क्या एक लड़के को अकेले पढ़ाएगी मेरे ख्याल से नही कम से कम कुछ लोग तो होने चाहिए ना “

“देखो भाई मैं तो नही जाने वाला, मुझे डॅड के साथ बिज़्नेस का काम देखना होता है और साथ ही मोनिका के साथ मॉडलिंग भी “

अज्जु ने साफ मना कर दिया

“और मैं भी, मुझसे अब ये पढ़ाई होती नही यार “

ये मोनिका थी उसने भी माना कर दिया था

“यार मेरे पास ट्यूशन के पैसे नही है “

मैने अपनी मजबूरी बताई

“आबे उसकी टेन्षन क्यो ले रहा है वो मैं देख लूँगा, तू नेहा और अक्की जाकर मेडम से बात करो और कल से ही जाना शुरू कर दो “

अज्जु ने साफ साफ कह दिया था …

वही नेहा के होठों मे एक अजीब सी स्माइल भी आ गयी थी , मेडम का इरादा कुछ नेक तो नही लग रहा था मुझे ……:अप्रूव:

“क्या मैं क्लास मे इतना बुरा पढ़ाती हू “

हम तीनो स्नेहा में के पास खड़े थे
 
“नही में लेकिन फिर भी हमे और डीटेल मे पढ़ना है, मैं बॉटेनी से ही पीएचडी करना चाहती हू “

“ओकक और ये दोनो, ये तुम्हारे बॉडीगार्ड है क्या “

मेडम ने मज़ाक किया नेहा भी हल्के से हँसी

“मेडम असल मे इनकी बॉटेनी कमजोर है “

“ऊ ओकक तो मुझसे किस पर सबसे ज़्यादा मेहनत करनी पड़ेगी “

स्नेहा मेडम ने मुझे और अक्की को देखते हुए कहा वही नेहा और मेरी उंगली अक्की के उपर थी और वो ..

वो बस मेडम के करीब होने के कारण पसीने से भीग चुका था , और उसकी घबराहट देख कर स्नेहा में के होठों पर एक मुस्कान आ गयी थी …….
 
अपडेट 21

पोलीस आई जी (डाइरेक्टर जनरल ऑफ पोलीस) के कमरे मे महॉल बहुत ही गर्म लग रहा था , आई जी के माथे पर चिंता की लकीर थी वही उसके सामने बैठा हुआ तिवारी गुस्से से जल रहा था , और पास ही कुछ और लोग हाथ बँधे खड़े थे ..

“क्या कर रही है तुम्हारी पोलीस अभी तक एक आदमी को पकड़ नही पाए तुम लोग , 1 इनस्पेक्टर का कतल कर दिया गया साथ ही दो पोलीस वाले और थे , और तुम्हारी निकम्मी पोलीस भी तक खूनी का पता नही लगा पाई है ..”

तिवारी चिल्ला रहा था

हाथ बाँधे एक महिला के चेहरे मे तिवारी की बात सुनकर गुस्सा आ गया

“मंत्री साहब माफ़ कीजिएगा लेकिन पांडे आपका खास आदमी था और सभी जानते है की उसे शराब और शबाब का कितना शौक था, सुना है की वो उस गोदाम मे ओरतो को किडनॅप करके लाया करता था और उनका बलात्कार करता था ऐसे मे कोई भी उसे मार सकता है जिसका उसने जीवन उजाड़ा हो “

तिवारी ने उस बला सी खूबसूरत लड़की की ओर घूर कर देखा , वो एक सफेद कलर की शर्ट पहने हुए थी जो की उसके बदन के हर एक कसाव को साफ साफ दिखा रहा था , साथ ही नीचे एक ब्लू जीन्स थी..

“पूर्वी माइंड युवर लॅंग्वेज..”

आई जी ने उसे दांता

“सर मैने ग़लत क्या कहा है , पांडे जैसे लोगो के कारण हमारे डिपार्टमेंट का नाम खराब हो रहा था और मंत्री जी ने उसके हर ग़लत काम मे हमेशा से परदा डाला है , मैं तो कहती हू की अच्छा हुआ की उस साले को किसी ने कुत्ते की मौत मार दिया “

पूर्वी की बात सुनकर वहाँ खड़े सभी लोग सकते मे आ गये थे लेकिन सभी को पता था की वो सही बोल रही है ..

वही तिवारी गुस्से से उसे घूरा

“अपनी औकात मे रहो लड़की “

उसकी बात सुनकर पूर्वी के होठों मे एक मुस्कान आ गयी

“मनती साहब मैं गॉव. की मुलाज़िम हू, अपनी मेहनत के दम पर यहाँ पहुचि हू, अपना जीवन ईमानदारी से बिताया है तो आप ये मत समझिए की आपसे डर जाउन्गी.. और आप 5 साल के लिए मंत्री है कल पवर मे रहे या ना रहे पता नही लेकिन हमे तो 60 साल तक सर्विस मे रहना है ..”

उसकी बात सुनकर तिवारी का दिमाग़ ही घूम गया आज तक किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी ने उससे ऐसी बात नही की थी ,

“मिश्रा..” वो आई जी हर्षित मिश्रा को देखते हुए बोला

“अरे नेता जी आप शांत हो जाइए , और तुम सब बाहर जाओ “

सभी लोग बाहर चले गये

“ये क्या है मिश्रा ?? तुम्हारे डिपार्टमेंट की एक झांट भर की मुलाज़िम हमे आँखे दिखा रही है, साली को अभी उठवा दूँगा समझा दो उसे “

तिवारी की बात सुनकर मिश्रा मुस्कुरा उठा था

“सर पहली बात तो ये कोई झांट भर की मुलाज़िम नही है, इसका नाम है इनस्पेक्टर पूर्वी पांडे , सीक्रेट सर्वीसज़ की अधिकारी है, क्राइम ब्रांच से लेकर आइ बी (इंटेलिजेन्स ब्यूरो) मे काम कर चुकी है ,इसकी टीम हमारे स्टेट की सबसे बेहतरीन टीम रही है , काजल का नाम तो आप जानते ही होंगे जिसने ठाकुर रणवीर मर्डर केस सुलझाया था, वो भी इसके टीम का हिस्सा रह चुकी है, क्राइम आंड दाता आनलिस्ट मास्टर माइंड विकाश , इनस्पेक्टर वेदांत जिसे अधिकारी उसके टीम मेंबर रह चुके है …आपको तो पता ही होगा “
 
तिवारी ने एक गहरी सांस ली

“ओह तो ये है मिस पूर्वी पांडे, नाम तो सुना था और इसके तेवर के चर्चे भी सुने थे, लेकिन इसके तेवर मैं नही झेलने वाला “

“आप फिकर मत कीजिए मंत्री जी ऐसे केस को अगर कोई अच्छे से सुलझा सकता है तो ये है, मैं इससे बात करता हू “

“कुछ भी करो लेकिन उस साले को मेरे सामने खड़ा करो जिसने पांडे को मारा है “

इतना कहकर तिवारी तेज़ी से वहाँ से निकल गया ,उसके जाने के बाद जो लोग अभी बाहर गये थे वो फिर से अंदर आ गये

“पूर्वी तुम्हे उससे अच्छे से बात करनी चाहिए, मैं भी मानता हू की वो एक भ्रष्ट इंसान है लेकिन क्या करे जनता ने उसे मंत्री बनाया है तो उसका सम्मान तो हमे करना ही होगा “

“हा सर लेकिन इन सालो को जब अपने सामने देखती हू तो खून ही खौल जाता है मेरा “

उसकी बात सुनकर आई जी के चहरे मे मुस्कान आ गयी

“देखो खुद को संभाल लो क्योकि इस केस से तुम्हे बहुत फ़ायदा मिलने वाला है तिवारी के काले चिठे भी निकालने का मौका मिल सकता है तुम्हे, सोचो ..”

पूर्वी ने सच मे ये तो सोचा ही नही था ऐसे भी वो तिवारी को जैल के अंदर देखना चाहती थी लेकिन कोई ऐसा केस उसके पास नही था जिससे वो तिवारी तक पहुच पाए इस केस से शायद वो तिवारी के करीब पहुच पाएगी..

“ओह सर मैने तो ये सोचा ही नही था अगर मेरे दिमाग़ मे ये बात पहले से आई होती तो अभी से ही तिवारी को अपने गियर मे ले लेती “

उसकी बात सुनकर आई जी हसने लगा फिर गंभीर होकर बोला

“तुम अपनी पुरानी टीम के साथ ये काम करो, याद रहे हमारा मिशन पांडे के कातिल को पकड़ने के नाम पर तिवारी के काले करतुतो का पता लगाना और उसके खिलाफ सबूत इकठ्ठा करना होगा “

लेकिन उसकी बात सुनकर पूर्वी का चेहरा उतर गया और वो अपने बाजू मे खड़े दो और लोगो को देखने लगी जो अभी तक हाथ बाँधे खड़े थे ..

वो भी सर उठाए उसे देख रहे थे

“यार तुम लोगो का प्राब्लम सालो पहले था अब तो साथ काम कर लो “

आई जी ने कहा

“सर मैं तो इसके साथ काम करने को तैयार हू लेकिन ये ..मेरे साथ काम करेगा या नही मुझे नही पता “

“विकाश तुम्हे क्या परेशानी है उस घटना को सालो बीत गये है “

पास ही खड़ा विकाश जो अभी हाथ बाँधे ही खड़ा था उसने अपना सिर हिलाया

“सर आप जानते है ना की मेरे और पूर्वी के बीच क्या था, अब मैं शादी शुदा हू और अगर काजल को पता चला की मैं पूर्वी और वेदांत के साथ काम कर रहा हू तो..”

दूसरी ओर खड़े वेदांत के होठों मे मुस्कान आ गयी , वही आई जी एक गहरी सांस लेकर बोल उठा

“देखो विकाश जो हुआ उसे अब भूल जाओ , मैं काजल से बात कर लूँगा और वो समझदार लड़की है , मुझे पता है की पूर्वी और वेदांत की वजह से काजल ने पोलीस डिपार्टमेंट छोड़कर ड्र. चूतिया के साथ मिलकर जासूसी एजेन्सी शुरू कर दिया है लेकिन अब वो बात पुरानी हो गयी है, और तुम लोग अब बच्चे नही रह गये हो , ये केस हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है तो प्लीज़ एक साथ मिलकर काम करो , मुझे इस टीम मे काजल की कमी अभी भी खलेगी लेकिन क्या कर सकते है ..”

काजल का नाम सुनकर वेदांत और पूर्वी ने नाक सिकोडा जैसे उन्हे ये बात बिल्कुल भी पसंद नही आई हो ..

वही विकाश कुछ सोच मे पड़ गया था

“ठीक है सर मैं पूर्वी और वेदांत के साथ काम करूँगा लेकिन ..काजल को मनाने की ज़िम्मेदारी आपकी “

विकाश की बात सुनकर सभी के चेहरे चमक उठे थे …वही पूर्वी के होठों मे एक कमिनी सी मुस्कान भी खिल गयी थी ..
 
अपडेट 22

मैं अभी अभी कॉलेज की कॅंटीन मे पहुचा था , मैं अज्जु और सुस के द्वारा लिए गये कपड़े ही पहने हुआ था , साथ ही सुस मुझे एक दिन पहले ही एक ब्यूटी पार्लर ले गयी थी वहाँ मेरे साथ ऐसी नाइंसाफी हुई की इंसानियत से मेरा विश्वास ही उठ गया ..:?:

कई घंटो तक एक इंसान ने मेरे बालो पर कैची चलाई और किया कुछ भी नही बस कुछ बालो को हल्के हल्के से चांट दिया गया था …

मेरे चेहरे पर ना जाने क्या क्या लगाया गया, उंगलियो के नाखूनओ को भी नही छोड़ा गया था, ऐसे वहाँ से निकलने के बाद मैं किसी मॉडेल की तरह दिख रहा था ..:)

मैं आज पूरी तरह से तैयार होकर कॉलेज आया था क्योकि मुझे आज सुस के साथ उसके घर जाना था ..:अप्रूव:

कॅंटीन मे अज्जु सभी को कुछ बता रहा था ,

“अरे क्या हो गया भाई,, बड़ी खुसुर फुसुर हो रही है “:?:

अज्जु ने मुझे बिना कुछ बोले ही अपना मोबाइल मेरे सामने कर दिया ..

उसमे एक मेसेज मे आई खबर थी और साथ ही कुछ फोटो भी ,

‘फिर शुरू हुआ खूनी खेल (ये हेड्डिंग थी )

शहर मे सालो बाद फिर से गैंग वॉर की घटना सामने आ रही है,

पठान गैंग के कुख्यात शूटर भवानी की दिन दहाड़े हत्या कर दी गयी है , कहा जा रहा है की इस हत्या के पीछे फिर से सक्रिय हो रहे जीवा गैंग के एक नये शूटर का हाथ है …

शूटर ने ना सिर्फ़ भवानी को मारा बल्कि उसके खून से अपना नाम भी लिख दिया, ऐसी हत्या पहले शक्ति गेंग के मेंबर करते थे जब वो अपने दुश्मनों को मार कर उनके खून से अपना नाम लिख देते थे …

लेकिन शक्ति गेंग बहुत पहले ही ख़त्म हो चुकी है लेकिन इस शिवा नाम के शूटर ने भवानी के खून से अपना नाम लिखकर सभी को सकते मे डाल दिया है , कही शक्ति गेंग फिर से सक्रिय तो नही हो गया, या फिर शक्ति गेंग का कोई पुराना मेंबर जीवा के लिए काम कर रहा है ……???’

ये पढ़कर मेरे माथे मे पसीना ही पसीना था, इसमे मैने एक नाम पढ़ा था शिवा … वही फोटोस मे वो लाश दिखाई दे रही थी जिसे बड़ी ही बेरहमी के साथ मारा गया था वही खून से दीवाल मे शिवा लिखा गया था ..

शिवा.. ये तो मेरा नाम था , जीवा गैंग मे एक ही इंसान का नाम शिवा था और वो मैं था लेकिन मैने तो किसी को नही मारा था ?? मारना तो दूर मैं तो ऐसा सोच भी नही सकता था ..

तो ये क्या था….
 
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