S
StoryPublisher
Guest
नेहा ने नाक सिकोडा
“नही यार नेहा, तू मुझे बचपन से जानती है ना, कभी तुझे लगा की मैं किसी लड़की पर लट्तू हो गया हू, या किसी के पीछे पड़ा नही ना .. ये अलग है यार पता नही की ये प्यार है या फिर महज एक अट्रॅक्षन लेकिन जब से उन्हे देखा हू साला बस उनका ही चेहरा मेरे दिमाग़ मे छाया
हुआ है, बस उनकी ही याद आ रही है कितनी सुंदर है यार वो …”
अक्की ने एक गहरी सांस ली और वो फिर से किसी ख्वाबो की दुनिया मे खो गया था, वही हम एक दूसरे को देखने लगे, असल मे मुझे भी अभी तक लगा था की ये महज एक अट्रॅक्षन होगा लेकिन अक्की को देखकर लगा की बात थोड़ी सीरीयस ज़रूर है .. अक्की ने बोलना शुरू रखा
“यार उनकी वो बड़ी बड़ी आँखे, घने बाल, मुस्कुराता हुआ चेहरा, नर्म गुलाबी होठ …”
“और पतली कमर..”
मोनिका बोली और हमे देखकर हसने लगी लेकिन हमारा अक्की तो खोया हुआ था
“हाँ वो भी … क्या पतली कमर , तुम मेरा मज़ाक उड़ा रहे हो जाओ यार मैं नही बताता तुम लोगो को कुछ ..”
वो नाराज़गी मे अपना मूह फूला कर बैठ गया उसे ऐसा करते हुए देखकर एक बार तो सभी हंस पड़े लेकिन फिर जब हमने देखा कि वो नाराज़ है तो फिर उसे मनाने भी लगे, हम सब ने मिलकर फ़ैसला किया कि हमसे जो भी बन पड़ेगा वो करेंगे, और हमारा अक्की खुश भी हो गया , वो तो मानो मेडम के साथ एक ख्वाब भी बुनने लगा था …..
अक्की के जज्बातों की हमे कद्र थी लेकिन हमे ये भी अंदेशा था कि हो ना हो इससे उसका दिल भी टूट सकता है.. खैर जो भी अभी उसे भी इस आहसास के मज़े लेने दो ..
हवेली आने पर मुझे संपत मामा मिल गये,
“क्यो शिवा तिवारी की लड़की का कुछ हुआ “
“हाँ शायद दोस्ती हो जाए उससे :अप्रूव:“
उनके होठों मे एक मुस्कान आ गयी
“बेटा नागिन से दोस्ती नही करते, या तो उसका ईस्तमाल करते है या फिर उसका सर कुचल देते है वरना वो खुद को ही डस लेती है “
उनकी बात सुनकर मैं अवाक रह गया था
“वो अच्छी लड़की है मामा जी, और कमीना तो तिवारी है “
मेरी बात सुनकर उन्होने बस एक गहरी सांस छोड़ी
“बेटा उस कमिने का ही तो खून है ना वो लड़की भी, कोई भरोशा नही है की कम पीठ मे चाकू मार दे “
उनकी आवाज़ मे दर्द था, ऐसा दर्द जो मुझे अहसास दिला रहा था कि कही ना कही मामा ने भी तिवारी से धोखा खाया होगा ..
“क्या बात हुई थी आपकी और दया संकर के बीच “
उन्होने फिर से गहरी सांस छोड़ी
“जब तू तैयारी हो जाएगा तब तुझे बता दूँगा , बस ये समझ ले की उस कमिने ने हमे बहुत बड़ा धोखा दिया था , उसे भी हमने अपना दोस्त माना था लेकिन वो ….. छोड़ ये सब बाते जब समय आएगा तुझे पता चल जाएगा ..”
उन्होने मेरे कंधे मे हाथ रखा और वहाँ से चल दिए , जैसा मुझे पहले लगता था कि ये लोग गुंडे टाइप के लोग है और बहुत ही खतेरनाक लोग है ऐसा कुछ भी नही था, ये तो बड़े ही सामान्य से लोग थे जो प्रेम की भाषा बोलते थे …लेकिन शयड दिल मे कुछ गहरे दर्द दबाए हुए थे जो
दर्द ही इन्हे ग़लत काम करने को मजबूर किया था
“नही यार नेहा, तू मुझे बचपन से जानती है ना, कभी तुझे लगा की मैं किसी लड़की पर लट्तू हो गया हू, या किसी के पीछे पड़ा नही ना .. ये अलग है यार पता नही की ये प्यार है या फिर महज एक अट्रॅक्षन लेकिन जब से उन्हे देखा हू साला बस उनका ही चेहरा मेरे दिमाग़ मे छाया
हुआ है, बस उनकी ही याद आ रही है कितनी सुंदर है यार वो …”
अक्की ने एक गहरी सांस ली और वो फिर से किसी ख्वाबो की दुनिया मे खो गया था, वही हम एक दूसरे को देखने लगे, असल मे मुझे भी अभी तक लगा था की ये महज एक अट्रॅक्षन होगा लेकिन अक्की को देखकर लगा की बात थोड़ी सीरीयस ज़रूर है .. अक्की ने बोलना शुरू रखा
“यार उनकी वो बड़ी बड़ी आँखे, घने बाल, मुस्कुराता हुआ चेहरा, नर्म गुलाबी होठ …”
“और पतली कमर..”
मोनिका बोली और हमे देखकर हसने लगी लेकिन हमारा अक्की तो खोया हुआ था
“हाँ वो भी … क्या पतली कमर , तुम मेरा मज़ाक उड़ा रहे हो जाओ यार मैं नही बताता तुम लोगो को कुछ ..”
वो नाराज़गी मे अपना मूह फूला कर बैठ गया उसे ऐसा करते हुए देखकर एक बार तो सभी हंस पड़े लेकिन फिर जब हमने देखा कि वो नाराज़ है तो फिर उसे मनाने भी लगे, हम सब ने मिलकर फ़ैसला किया कि हमसे जो भी बन पड़ेगा वो करेंगे, और हमारा अक्की खुश भी हो गया , वो तो मानो मेडम के साथ एक ख्वाब भी बुनने लगा था …..
अक्की के जज्बातों की हमे कद्र थी लेकिन हमे ये भी अंदेशा था कि हो ना हो इससे उसका दिल भी टूट सकता है.. खैर जो भी अभी उसे भी इस आहसास के मज़े लेने दो ..
हवेली आने पर मुझे संपत मामा मिल गये,
“क्यो शिवा तिवारी की लड़की का कुछ हुआ “
“हाँ शायद दोस्ती हो जाए उससे :अप्रूव:“
उनके होठों मे एक मुस्कान आ गयी
“बेटा नागिन से दोस्ती नही करते, या तो उसका ईस्तमाल करते है या फिर उसका सर कुचल देते है वरना वो खुद को ही डस लेती है “
उनकी बात सुनकर मैं अवाक रह गया था
“वो अच्छी लड़की है मामा जी, और कमीना तो तिवारी है “
मेरी बात सुनकर उन्होने बस एक गहरी सांस छोड़ी
“बेटा उस कमिने का ही तो खून है ना वो लड़की भी, कोई भरोशा नही है की कम पीठ मे चाकू मार दे “
उनकी आवाज़ मे दर्द था, ऐसा दर्द जो मुझे अहसास दिला रहा था कि कही ना कही मामा ने भी तिवारी से धोखा खाया होगा ..
“क्या बात हुई थी आपकी और दया संकर के बीच “
उन्होने फिर से गहरी सांस छोड़ी
“जब तू तैयारी हो जाएगा तब तुझे बता दूँगा , बस ये समझ ले की उस कमिने ने हमे बहुत बड़ा धोखा दिया था , उसे भी हमने अपना दोस्त माना था लेकिन वो ….. छोड़ ये सब बाते जब समय आएगा तुझे पता चल जाएगा ..”
उन्होने मेरे कंधे मे हाथ रखा और वहाँ से चल दिए , जैसा मुझे पहले लगता था कि ये लोग गुंडे टाइप के लोग है और बहुत ही खतेरनाक लोग है ऐसा कुछ भी नही था, ये तो बड़े ही सामान्य से लोग थे जो प्रेम की भाषा बोलते थे …लेकिन शयड दिल मे कुछ गहरे दर्द दबाए हुए थे जो
दर्द ही इन्हे ग़लत काम करने को मजबूर किया था