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Guest
कॉलेज पहुचने के बाद मुझे समझ नही आ रहा था की मैं सुस के बारे मे कुछ बात करू या नही, आख़िर अज्जु ने पूछ ही लिया
"तो सुस तुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी ना? क्या हुआ…"
अब मैं उसे क्या बताता
"हुम्म उसके पापा से मिला … उन्होंने मुझे सुस का बॉडीगार्ड बना दिया है और साथ ही उसके घर मे भी रहने के लिए कहा है"
लेकिन मेरे चेहरे के भाव जैसे अज्जु से छिपे नही रह सके
"कोई और बात भी है क्या ?"
अज्जु मेरे चेहरे को घूर रहा था जिससे मुझे थोड़ी असहजता का आभास हुआ
"नही यार"
अज्जु ने उस समय तो कुछ नही कहा और बात आई गयी हो गयी…
"तो कल से स्नेहा मेडम के पास ट्यूशन शुरू करना है .."
नेहा बोल उठी थी ,वही अक्की का चेहरा लाल हो चुका था
हम सभी के होठों पर मुस्कान आ गयी..
"हा भाई याद है हमारे अक्की भाई की भी सेट्टिंग करवानी पड़ेगी"
और मैं भी हंस पड़ा,लेकिन अक्की का चेहरा थोड़ा सा मुरझा गया था..
"यार लगता है उनका तो पहले से ही सिर के साथ सेट्टिंग है...लगता है मेरा प्यार तो बस एकतरफ़ा ही रह जाएगा .."
अक्की के चेहरे मे आई ये उदासी मुझे अच्छी नही लगी..
"अबे अभी कैसे बोल सकता है की मेडम की सेट्टिंग होगी ही,हो सकता की वो महज दोस्त हो, जैसे तू और नेहा इतने अच्छे दोस्त हो अब कोई ग़लत समझ जाए तो क्या कर सकते है"
मेरी बात सुनकर जैसे अक्की की आँखो मे एक चमक आ गयी
"हा ये भी हो सकता है दोनो दोस्त ही होंगे "
अक्की की चाहत देखकर नेहा ने उसके माथे पर एक हल्की सी चपत लगा दी..
"पगलू कही का "
हम सभी के चहरे खिल चुके थे लेकिन अज्जु अभी भी मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था…
***********
"बता बात क्या है,क्या बोला सुस ने तुझे, कुछ उल्टा सीधा किया होगा ना तो उसकी खैर नही है"
कॉलेज ख़त्म होने के बाद अज्जु ने मुझे अकेले मे बुला लिया था ,उसने अभी अभी एक सिगरेट जलाई और मेरे ओर बढ़ा दिया ..
मुझे समझ नही आ रहा था की मैं इसे कैसे बताऊ..
"अबे बोल ना ,मूह मे ताला लगा कर क्यो रखा है अब"
"यार वो बड़ी अजीब सी बात हुई कल ,बस भाई इसे अपने तक ही रखना किसी से कहना मत.."
और मैं उसे सब सच सच बताते गया ,वो कभी चौक्ता तो कभी हंस पड़ता था ,तो कभी गंभीर हो जाता था,मैने उसे ये भी बताया की भाभी सुस के दिए अपार्टमेंट मे नही जाना चाहती…
"ह्म तो तूने क्या फ़ैसला किया सुस को लेकर.."
यार मेरे दिमाग़ मे भी नही आया ये सब ,मुझे नही लगता की मुझे सुस से प्यार हो सकता है
..
"अच्छा ...और नेहा से"
मैं नेहा का नाम सुनकर चौक गया
"अब नेहा बीच मे कैसे आ गयी"
वो हल्के से हंस पड़ा
"साले तुझे क्या लगता है की हम लोग अंधे है, नेहा की आँखो मे तेरे लिए प्यार साफ साफ दिखता है ,भाई नेहा बहुत अच्छी लड़की है ... अगर तुझे सुस और नेहा के बीच चुनना पड़े तो मैं चाहूँगा की तू नेहा का साथ दे…"
नेहा और सुस , जैसे एक रस्सी के दो किनारे थे एक दूसरे से बिल्कुल ही अलग… जहाँ नेहा हल्की बयार (ठंडी हवा) थी तो सुस किसी तूफान की तरह .. नेहा किसी खिले हुए फुलो की खुसबु सी थी तो सुस जैसे इतरा का तीखा पन लिए..
"तो सुस तुझे अपने पिता से मिलवाने ले गयी थी ना? क्या हुआ…"
अब मैं उसे क्या बताता
"हुम्म उसके पापा से मिला … उन्होंने मुझे सुस का बॉडीगार्ड बना दिया है और साथ ही उसके घर मे भी रहने के लिए कहा है"
लेकिन मेरे चेहरे के भाव जैसे अज्जु से छिपे नही रह सके
"कोई और बात भी है क्या ?"
अज्जु मेरे चेहरे को घूर रहा था जिससे मुझे थोड़ी असहजता का आभास हुआ
"नही यार"
अज्जु ने उस समय तो कुछ नही कहा और बात आई गयी हो गयी…
"तो कल से स्नेहा मेडम के पास ट्यूशन शुरू करना है .."
नेहा बोल उठी थी ,वही अक्की का चेहरा लाल हो चुका था
हम सभी के होठों पर मुस्कान आ गयी..
"हा भाई याद है हमारे अक्की भाई की भी सेट्टिंग करवानी पड़ेगी"
और मैं भी हंस पड़ा,लेकिन अक्की का चेहरा थोड़ा सा मुरझा गया था..
"यार लगता है उनका तो पहले से ही सिर के साथ सेट्टिंग है...लगता है मेरा प्यार तो बस एकतरफ़ा ही रह जाएगा .."
अक्की के चेहरे मे आई ये उदासी मुझे अच्छी नही लगी..
"अबे अभी कैसे बोल सकता है की मेडम की सेट्टिंग होगी ही,हो सकता की वो महज दोस्त हो, जैसे तू और नेहा इतने अच्छे दोस्त हो अब कोई ग़लत समझ जाए तो क्या कर सकते है"
मेरी बात सुनकर जैसे अक्की की आँखो मे एक चमक आ गयी
"हा ये भी हो सकता है दोनो दोस्त ही होंगे "
अक्की की चाहत देखकर नेहा ने उसके माथे पर एक हल्की सी चपत लगा दी..
"पगलू कही का "
हम सभी के चहरे खिल चुके थे लेकिन अज्जु अभी भी मुझे अजीब निगाहो से देख रहा था…
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"बता बात क्या है,क्या बोला सुस ने तुझे, कुछ उल्टा सीधा किया होगा ना तो उसकी खैर नही है"
कॉलेज ख़त्म होने के बाद अज्जु ने मुझे अकेले मे बुला लिया था ,उसने अभी अभी एक सिगरेट जलाई और मेरे ओर बढ़ा दिया ..
मुझे समझ नही आ रहा था की मैं इसे कैसे बताऊ..
"अबे बोल ना ,मूह मे ताला लगा कर क्यो रखा है अब"
"यार वो बड़ी अजीब सी बात हुई कल ,बस भाई इसे अपने तक ही रखना किसी से कहना मत.."
और मैं उसे सब सच सच बताते गया ,वो कभी चौक्ता तो कभी हंस पड़ता था ,तो कभी गंभीर हो जाता था,मैने उसे ये भी बताया की भाभी सुस के दिए अपार्टमेंट मे नही जाना चाहती…
"ह्म तो तूने क्या फ़ैसला किया सुस को लेकर.."
यार मेरे दिमाग़ मे भी नही आया ये सब ,मुझे नही लगता की मुझे सुस से प्यार हो सकता है
..
"अच्छा ...और नेहा से"
मैं नेहा का नाम सुनकर चौक गया
"अब नेहा बीच मे कैसे आ गयी"
वो हल्के से हंस पड़ा
"साले तुझे क्या लगता है की हम लोग अंधे है, नेहा की आँखो मे तेरे लिए प्यार साफ साफ दिखता है ,भाई नेहा बहुत अच्छी लड़की है ... अगर तुझे सुस और नेहा के बीच चुनना पड़े तो मैं चाहूँगा की तू नेहा का साथ दे…"
नेहा और सुस , जैसे एक रस्सी के दो किनारे थे एक दूसरे से बिल्कुल ही अलग… जहाँ नेहा हल्की बयार (ठंडी हवा) थी तो सुस किसी तूफान की तरह .. नेहा किसी खिले हुए फुलो की खुसबु सी थी तो सुस जैसे इतरा का तीखा पन लिए..