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Adultery Meri Bhabhi Ma मेरी भाभी माँ

मेरी आँखे झट से खुली सामने इनस्पेक्टर भाभी के जिस्म से साड़ी को हटा चुका था और पूरे हवस के आगोश मे आकर उनके पेट पर अपना मूह चला रहा था ..

मेरा दिमाग़ शांत हो चुका था एक बार मैने भाभी के चहरे को देखा , उनकी आँखो से दर्द साफ साफ झलक रहा था , वो बेचारी मेरी जान बचाने के लिए चुप हो चुकी थी और अपने जिस्म का ईस्तमाल करने की इजाज़त दे चुकी थी , हमारी नज़रे मिली उनकी आँखो मे मेरे लिए अब भी वही प्यार था और उसी प्यार ने मेरे अंदर एक हिम्मत और ताक़त का संचार कर दिया ,मैने नज़र घुमाई तो मुझे इनस्पेक्टर के कपड़े

एक ओर पड़े हुए दिखाई दिए , वही उसका रेवोल्वेर भी रखा हुआ था , बाकी के लोग भाभी के जिस्म की नुमाइश का मज़ा उठा रहे थे यही समय था और मैं तुरंत ही उठा और पूरी ताकत लगा कर उस रेवोल्वेर को पकड़ने के लिए झपटा ,बस जैसे पलक सी झपकी हो और मेरे

हाथो मे एक पिस्टल थी इससे पहले कोई भी कुछ समझ पाता मैने दो गोलियाँ सीधे इनस्पेक्टर पर चला दी …

ढाय धाय

गोलियाँ सीधे उसके माथे पर लगी और उसकी खोपड़ी ही खुल गई ,वो सीधे भाभी के उपर गिर गया ,भाभी के चहरे पर बस खून ही खून

दिखाई देने लगा था ,उसके बाकी के साथी कोई हरकत करते उससे पहले ही मैने अपनी बंदूक तान दी ..

“खबरदार अगर कोई हिला तो भुन कर रख दूँगा “

सभी सकते मे आ चुके थे ,लेकिन वो ट्रेंड लोग थे एक ने तुरंत अपनी पिस्टल निकाली और तभी किसी ने उसे पिछे से उसके सर पर एक रॉड दे मारा , वो कोई नही बल्कि कालवा ही था जो मेरे साथ आया हुआ था , उसने उसके हाथो से पिस्टल ले ली और बाकियो पर तान दी ,

“तुम ये ठीक नही कर रहे हो कालवा , इसका साथ देकर तुम भी नही बचोगे , जानते हो ना इनस्पेक्टर किसका आदमी था ,और पोलीस वाले

को मारने के कारण ये तो जाएगा ही जाएगा लेकिन तुम भी इसके साथ जाओगे याद रखना ..”

एक सिपाही चिल्लाया

“सब जानता हूँ कि ये किस नेता का कुत्ता था और उसके ही दम मे उच्छलता था , लेकिन मादरचोद मैने इसे पहले भी समझाया था कि मजदूरो से पंगा ना ले इस साले ने मेरी बात नही सुनी .. सोनू “

कालवा ने मुझे एक इशारा किया और मैने दो गोली और चला दी दोनो सिपाहियो को गोली लगी एक के माथे पर और दूसरे के सीने पर ,भाभी भी अब खड़ी हो चुकी थी लेकिन उनकी आँखो मे ख़ौफ़ साफ साफ दिखाई दे रहा था , उनका प्यारा सोनू अब एक कातिल बन चुका था वो भी पोलीस वालो का ..

“अब तुम किसके साथ हो बे , पोलीस वाले के साथ मरोगे या फिर भागो गे “

कालवा ने वहाँ आए बाकी के 3 लोगो से कहा

“कालवा भाई वो सब तो ठीक है लेकिन तुम जानते हो दया संकर तिवारी मंत्री है और ये इनस्पेक्टर पांड्या उसका खास आदमी था , पूरी

ताकत लगा देगा इस लड़के को खोजने मे और साथ मे तुम भी पिस जाओगे ..”

“तू मेरी फिकर मत कर बेटा तू अपनी फिकर “

“भाई हम किसी को कुछ नही बताएँगे हमे जाने दो , हम भी तो हामिद के ही आदमी है तुम तो हमे पहचानते हो “

उनमे से एक ने कहा , कालवा थोड़ी देर के लिए सोच मे पड़ गया और मुझे देखने लगा

“कालवा भाई अगर इन लोगो को छोड़ दिया तो ये तो जाकर सभी को बता देंगे “

मेरा डर भी स्वाभाविक था

“फिकर मत कर ये लोग मूह नही खोलेंगे ये हामिद के आदमी है और हामिद मेरा दोस्त है , लेकिन तुम लोग जाकर हामिद को ये बता देना

कि इनस्पेक्टर पांडे को किसने मारा है “

उसके होठों मे एक अर्थपूर्ण मुस्कान खिल गई थी जिसे मैं समझ नही पा रहा था, वो लोग भागे , भाभी तब तक अपनी साड़ी पहन चुकी थी ..

“यहाँ से जल्दी निकलना होगा और साथ ही ये इलाक़ा भी छोड़ना होगा , खबर तुरंत फैल जाएगी कि तुमने पांडे को मारा है और फिर तुम्हारे लिए बच पाना आसान नही होगा ..”

कालवा की बात सुनकर भाभी की हालत खराब हो गई थी वही मेरे दिल मे ज़रा भी डर नही था ..

“लेकिन कहाँ जाएँगे ??”

कालवा मुस्कुरा उठा

“अगर तिवारी से कोई बचा सकता है तो एक ही आदमी है यहाँ के भगवान जीवा के गॅंग का लेफ्ट हेड संपत ..”
 
अपडेट 8

कालवा मुझे और भाभी को संपत के पास ले गया, शहर से दूर एक वीरान सी जगह थी, लेकिन एक बड़ी सी हवेली थी, हमे एक कमरे मे बैठने के लिए बोलकर कालवा कही चला गया …

“सोनू मेरे कारण तुझे कितनी मुसीबतो का सामना करना पड़ेगा रे, जी करता है कि खुद को मार ही डालु “

भाभी की बात सुनकर मैं सकते मे आ गया था

“खबरदार अगर ऐसा सोचा भी तो , आपको एक खरोच भी आए तो मेरी जान निकल जाती है और आप मरने की बात कर रही हो , अगर आपको कुछ हो गया तो सोचा है मेरा क्या होगा , मैं तो जीते जी ही मर जाउन्गा, आप मेरी भाभी माँ हो अब आँसू पोछो और एक मुस्कान मुझे दिखाओ .”

उन्होने प्यार से मेरे गालो पर अपना हाथ फेरा..

“ये दुनिया जिस्म की भूखी है बेटा , यहाँ लोग प्रेम का मतलब भी नही समझते , सभी को जिस्म की चाहत है भले ही वो प्यार से मिले या फिर

छीन कर लिया जाए , तेरा भाई भी वैसा ही था , पता नही तू किस मिट्टी का बना है जिसने मुझे प्रेम किया ना कि मेरे जिस्म से “

वो बेहद ही एमोशनल हो गई थी , मैने उनकी आँखो मे देखा वो प्रेम का पूरा दरिया था , भीगी हुई आँखे रो रो कर लाल हो गई थी , चेहरे की रंगत भी उड़ गई थी लेकिन मज़ाल है कि उनकी खूबसूरती मे थोड़ी भी कमी आई हो … वो चाँद की तरह थी अगर दाग भी लग जाए तो दाग ही सुंदर हो जाता है , चेहरे मे लगे कुछ चोट के निशान भी वैसे ही सुंदर हो गये थे , उन चोटो से थोड़े थोड़े खून का रिसाव तो हो रहा था

लेकिन वो वही जम से गये थे , उनके ब्लाउस के कुछ भाग फट चुके थे और साड़ी भी जल्दबाज़ी मे पहनी गई थी ,इन सबके बावजूद वो मेरे लिए किसी देवी की तरह सुंदर थी और उनकी सुंदरता से उनका मातृत्व झलक रहा था उन्हे देखकर ही मेरी आँखो मे आँसू आ गये लगा कि

अभी उनके पैरो मे गिर जाउ उनके शरण मे अपना पूरा जीवन बिता दूं ..

वो मेरी आँखो मे आए आँसुओं को अपने उंगली के सहारे से पोच्छने ल्गी ..

“अब तू क्यो रो रहा है ..”

इस बार उनके होठों मे मुस्कान थी जैसे उन्हे पता हो कि मेरी आँखो मे आए हुए इस आँसू की वजह क्या है ,मैं भी बस हल्के से मुस्कुरा गया….

तभी कमरे का गेट खुला और एक बड़ी बड़ी मुन्छो वाला व्यक्ति वहाँ दाखिल हुआ साथ ही कालवा भी था …

उसने एक बार मुझे देखा तो एक बार भाभी को उपर से नीचे तक देखा और फिर कालवा को देखने लगा ..

उसकी आँखो मे कुछ ऐसा था जो मुझे समझ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है ..

“तो लड़के तुमने मार दिया पांडे को “

“जी ..”

“सही किया, साला था ही हरामी, क्या नाम है तुम्हारा “

“जी सोनू “

“सोनू…?? नाम से ही बच्चा लग रहा है और काम बड़े बड़े , और तुम्हारा नाम? “

उसने भाभी की ओर देखा, भाभी थोड़ी सहम सी गई थी संपत का चेहरा था ही ऐसा ख़ूँख़ार वो तो चेहरे से ही कोई छटा हुआ बदमाश लगता था ..

“आरती “

“आरती .. हहा तभी वो पांडे तुम्हारी आरती उतारने ले गया था “

वो एक गंदी सी हँसी हंसा, कालवा भी मुस्कुरा उठा लेकिन मेरी आँखो मे आग आ गई थी, संपत ने मेरी आँखो को देखा ..
 
“सही कहता था तू कालवा इस साले की आँखो मे ही आग है.. ठीक है जब तक मामला शांत नही हो जाता तुम दोनो यही रहो और तुम

लड़के अपना नाम बदल लो और मेरे गॅंग मे शामिल हो जाओ क्या है ना मैं मुफ़्त मे किसी के लिए कुछ भी नही करता ..

मैने सर हिलाकर हामी भरी..

“फिकर मत कर मेरे रहते तुम दोनो को तिवारी तो क्या उसका बाप भी छु नही पाएगा …”

संपत एक दमदार आवाज़ मे बोला ..

“धन्यवाद भैया “

भाभी के मूह से निकल गया जिसे सुनकर संपत के चेहरे मे एक मुस्कान आ गई

“भैया नही मामा, मामा बोलना अब से तुम दोनो मुझे “

संपत की बात सुनकर हम दोनो ही एक दूसरे को देखने लगे ..

“जी मामा ..”

“गुड चलो तुम दोनो का कमरा दिखा देता हूँ “

सच मे वो एक बड़ी सी हवेली थी , मुझे और भाभी को लेकर संपत आगे आगे चल रहा था वही कालवा ने हमसे विदा ले लिया था , हवेली के आँगन मे कई लोग बैठे हुए थे सभी के हाथो मे बड़ी बड़ी बंदुके थी और सभी की निगाहे मेरे और भाभी के उपर ,मुझे ये भी शक़ हो रहा था की कही भाभी को यहाँ लाकर मैने कोई ग़लती तो नही कर दी ..

खैर जो भी हो जब खाई मे कूद ही गये है तो देखा जाएगा और जैसे संपत ने हमसे बात की और हमे मामा बुलाने के लिए कहा उससे मुझे

थोड़ी आत्मीयता की भी फीलिंग हुई ..

दूसरे मंज़िल पर हमे आजू बाजू के दो कमरे दिखाए गये, दोनो कमरे हमारी झोपड़ी से बड़े थे

“तुम दोनो अपना कमरा सॉफ कर लेना, और कल से तुम औरतों के साथ काम करोगी और तुम मेरे साथ चलना तुम्हे थोड़ी ट्रैनिंग की ज़रूरत होगी ,और हाँ नाम बदल लेना जिसे सुनकर लोग डरे ना कि हंस दे ..”

वो बड़ी ही आत्मीयता से मुस्कुराया, ना ही मुझे और ना ही भाभी को कुछ समझ आ रहा था, संपत का हमारे लिए ये आत्मीय व्यवहार दोनो को ही समझ नही आ रहा था ..

हम अभी भाभी के कमरे मे जाकर बैठे थे, सभी चीज़े अपनी सही जगह पर रखी हुई थी , एक बिस्तर लगा हुआ था एक इंसान के रहने के लिए बहुत जगा थी , उसी कमरे से सटा हुआ एक दूसरा दरवाजा भी था जो कि मेरे कमरे की ओर खुलता था , मैं भी अपने कमरे मे चला गया था दोनो दरवाजा बंद कर लेते थे भविस्य की चाह मे लेकिन मुझे अपने पास भाभी की कमी खल रही थी ,वो झोपड़ी इतनी छोटी थी कि हमे

एक दूसरे के पास रहने की आदत सी लग गई थी , मैने दोनो कमरे के बीच के दरवाजे को खोल दिया , मैने देखा की भाभी की आँखे बंद थी और वो अपने बिस्तर मे लेटी हुई थी लेकिन उनके चेहरे से लग रहा था कि वो किसी बहुत ही गहरे सोच मे डूबी हुई है , मैं उनके पास जा कर बैठ गया ..

वो चौक गई

“तू कैसे अंदर आ गया “ उन्होने देखा कि उनके कमरे का दरवाजा अभी भी बंद था ..

मैने मुस्कुराते हुए हमारे कमरे के बीच के दरवाजे की ओर इशारा किया , पता नही उन्हे क्या हुआ वो थोड़ा सा उठी और मेरे गले मे अपनी बाँहे डालकर झूल गई , इसका असर ये हुआ कि मैं भी उनके साथ बिस्तर मे गिर गया , मैं उनके उपर था और वो मेरे नीचे वो मुझे कस कर जकड़े हुए थी ..

“अरे भाभी ये क्या कर रही हो “

उनके ऐसा करने से तो मैं भी चौक गया था ,लेकिन उन्होने कुछ भी नही कहा बल्कि मुझे अपने से और जोरो से सटाने लगी ..

मैने भी उनसे अलग होने के लिए कोई ज़ोर नही दिया बल्कि बस उनके उपर ही लेटा रहा , थोड़ी ही देर मे उन्होने अपना बंधन थोड़ा ढीला किया और प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी ,

मैने अब अपना चेहरा थोड़ा उपर किया …

उनकी आँखो मे आँसू के दो तीन कतरे थे जो उनके गालो से होते हुए लुढ़क रहे थे , मेरे होठ उनके उन आँसुओ को अपने अंदर समाने लगे थे , मैं हल्के हल्के उनके गालो पर अपने होठों को चला रहा था , उनका लाल चेहरा और भी खिल गया था , होठों मे एक बड़ी सी मुस्कान

खिल गई थी लेकिन अब भी आँखो से एक दो आँसू टपक ही जाते थे , उनका चेहरे मेरे लार और उनके आँसू से गीला हो रहा था , लेकिन इन सबमे मेरे अंदर एक उत्तेजना ने जन्म ले लिया , वो उत्तेजना थी और अधिक की कामना की उत्तेजना ..

मैं थोड़ा उत्तेजित होने लगा था , मेरे होठ प्रेम से आँसुओ को पीने की बजाय थोड़ा गालो को काट भी रहे थे , ऐसा लग रहा था कि मैं इन गालो

को खा ही जाउ , और मेरे अंदर क्या हो रहा था शायद भाभी ने उसे समझ लिया था उन्होने मुझे खुद से अलग किया ..
 
“सोनू इतना अधीर होना सही नही है , ये तेरे अंदर के प्रेम को मार देगा और …”

वो चुप हो गयी और मैं उनकी बातों को समझने की कोशिस करने लगा ..मेरी आँखे ही बोल रही थी कि मुझे उनकी बाते समझ नही आई है ..

उन्होने प्यार से मेरे बालो को सहलाया

“बेटा प्रेम अधीर नही होता वासना होती है , प्रेम मे अधिरता वासना को जन्म दे सकती है “

मैं बुरी तरह से चौक गया था

“भाभी आप ये क्या कह रही हो मैने कभी आपको गंदी नज़रो से नही देखा है “

“मुझे पता है सोनू, लेकिन जिस्म की वासना भी तो कुछ पाने की वासना से ही जन्म लेती है ना , जैसे अभी तू मेरे गालो को काटने की इक्षा कर रहा था …”

उनकी बातों को सुनकर जैसे मुझे मेरी ग़लती का आभास हुआ ..

“मुझे माफ़ कर दो भाभी मैं …”

उन्होने मेरे होठों पर अपनी उंगली रख दी

“मैं समझती हूँ तुझे खुद ही नही पता था कि तू क्या कर रहा था , लेकिन अब तू जवान हो गया है बेटा अब तुझे एक गर्ल फ्रेंड की ज़रूरत है “

उनके होठों मे के शरारती सी मुस्कान खिल गई

“क्या भाभी आप भी मेरी गर्लफ्रेंड तो एक ही है और वो हो आप ,मेरी बहन, मेरी माँ, मेरी भाभी और मेरी गर्लफ्रेंड भी सब कुछ आप ही हो “

भाभी के बुझे हुए चेहरे मे अचानक से हँसी आ गई वो जोरो से हंस पड़ी ..

“चल बदमाश…”

“भाभी आपको ये संपत कैसा लगा ??”

मेरी बात सुनकर जैसे वो फिर से उसी मनोस्तिति मे पहुच गयी जहाँ वो पहले थी , उनका चेहरा फिर से गंभीर होने लगा था ..

“ये इतना बड़ा गुंडा होकर जिस तरह से हमारी मदद कर रहा है और जिस भाषा मे हमसे बात कर रहा है वो सच मे थोड़ा अजीब सा है .. “

मैने भी सहमति मे अपना सर हिलाया..

“सोनू अगर वो लोग तुझसे कोई ग़लत काम करवाए तो सॉफ मना कर देना बेटा , मैं नही चाहती कि तू ग़लत राह पर चल पड़े जहाँ से वापस आना ही मुस्किल हो जाए और तुझे अपना कॉलेज भी फिर से शुरू करना होगा शायद अलग नाम से तू कुछ बन जाएगा तो हम कही भी आराम से रह लेंगे..”

मैने हाँ मे सर हिलाया तभी मुझे याद आया कि संपत ने मुझे एक नया नाम सोचने के लिए कहा था..

“भाभी आप मेरे लिए एक नया नाम सोचो ..”

वो थोड़ी देर सोचने लगी

“ हुम्म अंकित कैसा रहेगा ..”

मैं भी खुस हो गया

“वाह क्या बात है वैसे अंकित ही क्यो..??”

“बस ऐसे ही मैं आरती और तू अंकित “

हम दोनो ही जोरो से हंस पड़े थे
 
अपडेट 9

“अंकित ???”

मैं सुबह संपत और उसके गिरोह के साथ खड़ा था

वो एक दूसरे को देखने लगे और फिर सभी एक साथ मिलकर जोरो से हंस पड़े …

मैं उन लोगो का चेहरा देखता रह गया

“अबे साले तुझे गॅंग का मेंबर बनना है ना कि कॉलेज मे अड्मिशन लेने जा रहा है .. कुछ ऐसा नाम रख जो कि हमारे गॅंग के हिसाब से सही लगे ..”

सभी का चेहरा सोचने वाला हो गया था

“भाई पप्पू हॅटेला कैसा रहेगा ..”

कोई एक बोला, लेकिन संपत ने उसे घूर कर देखा

“ये तेरे जैसा कोई चिंदी नही है जो चिंदी सा नाम दे रहा है , ये चमन चूतिए वाला नाम आपने गान्ड मे घुसा ले ..”

संपत की बात सुनकर सभी हसने लगे और वो बोलने वाला भी बिना किसी शर्म के दाँत निकालने लगा ..

“सला क्या नाम रखे इसका ..”

संपत अपना सर खुजलाने लगा था

तभी हवेली के आँगन मे बने हुए मंदिर का घंटा बजा..

मैने देखा कि भाभी शिव लिंग पर पानी चढ़ा रही थी और आस्था से अपने आँखे बंद किए हुए थी…

शायद वो मेरे लिए ही कोई दुआ माँग रही थी , शायद मेरी सलामती के लिए या ये कि मैं इस बुरे रास्ते मे भी अपने को बचा कर रखू…

“शिवा ..”

मेरे मुख से अचानक ही निकल गया ..

संपत ने एक बार मंदिर की ओर देखा और उसके होठों मे एक मुस्कान खिल गई ,

“वाह ये हुई ना बात तू आज से हमारा शिवा है , जो उस तिवारी की इट से इट बजा कर रख देगा , उस दानव को उसके करमो की सज़ा देगा ..

हर हर महादेव ..”

“हर हर महादेव …” सभी जोरो से चिल्ला पड़े थे ..
 
वही मेरी नज़र भाभी पर पड़ी हम दोनो ही हैरत से सभी को देख रहे थे आख़िर ये लोग मुझ जैसे बच्चे पर इतना क्यो भरोसा दिखा रहे थे ..???

दिन बीतते गये और भाभी वहाँ की महिलाओ के साथ रम गई वही मुझे बड़ी ही कठिन ट्रैनिंग दी जा रही थी , 1 ही महीने मे मैने गन चलाना सिख लिया था , मेरा निशाना भी बड़ा ही अच्छा था और साथ ही साथ मेरा शरीर भी अच्छा विकसित हो रहा था ,

मुझे समझ नही आ रहा था की आख़िर ये सब क्यो, लेकिन ये हो रहा था …

एक दिन अचानक संपत ने मुझे बुलाया

“शिवा मैं सोच रहा था कि तुम्हे कॉलेज जाय्न कर लेना चाहिए “

मैने बड़े ही आश्चर्य से उसे देखा

“बात ऐसी है ना कि हमारे पूरे गॅंग मे कोई भी ज़्यादा पढ़ा लिखा नही है , कम से कम तू पढ़ लिख लेगा तो हम तिवारी जैसे आदमी पर भारी

पड़ जाएँगे …”

“लेकिन मामा तिवारी से लड़ना ही क्यो है “

मामा मुस्कुराने लगे

“समझ जाएगा तू फिकर मत कर अभी कॉलेज जाने की तैयारी कर ले और तूने जो नाम बताया था ना उसी नाम से जाएगा तू कॉलेज “

“अंकित ??”

“हाँ वही अंकित के नाम से जाना तू “

“लेकिन मेरे पास उससे रिलेटेड कोई भी डॉक्युमेंट्स नही है “

संपत जोरो से हंस पड़ा

“फिकर मत कर सब एक साप्ताह मे आ जाएगा, तेरा आधार कार्ड से ले कर स्कूल की सारी मारक्शीट तक सभी आ जाएगी..”

मैं बस उसे आँखे फाडे देखता रहा ,

ऐसे इस बात से भाभी बहुत ही खुस थी और दिल के किसी कोने मे मैं भी , लेकिन फिर भी मुझे अब इस जीवन से भी प्यार होने लगा था , मैं सिर्फ़ भाभी और संपत के लिए कॉलेज जा रहा था क्योकि यहाँ इतने दिन रहते हुए मेरे दिमाग़ मे लोगो ने बस यही भरा था की मैं कोई स्पेशल आदमी हू जिसे कोई बहुत ही बड़ा जनहित का काम करना है …
 
अपडेट 10

स्वर्गीय रतन चंदानी मेमोरियल आर्ट आंड साइन्स कॉलेज ..

मेरे सामने एक बड़ा सा बोर्ड लगा हुआ था, आज मेरा यहाँ पहला दिन था, संपत मामा ने सब कुछ जुगाड़ लगा दिया था, मैने बीएससी करने

के लिए यहाँ आया हुआ था, ये कॉलेज इस सिटी का जाना माना कॉलेज था और इसकी स्थापना यान के एक बड़े बिज़्नेस मॅन राज चंदानी ने अपने पिता के याद मे बनवाया था..

मैने एक गहरे सांस भारी , मैं थोड़ा नर्वस भी था क्योकि पढ़ाई छोड़े बहुत दिन हो चुके थे , मैं कहा डॉन बनने के सपने देखने लगा था और कहा फिर से वही किताबो का बोझ धोना पड़ेगा , दूसरी तरफ यहाँ मेरा कोई दोस्त भी नही था जिसके साथ मैं थोड़ी मस्ती कर सकता , खैर

सब कुछ सही हो जाएगा यही सोचकर मैं अपने क्लास मे गया और एक पिछे की सीट पर बैठ गया .. क्लास अभी खाली ही थी ..

थोड़ी ही देर मे कोई 50-60 बच्चे वहाँ आ चुके थे ,लेकिन अभी भी लास्ट मे रखी इस सीट मे कोई नही बैठा था , मुझे लगा की शायद मुझे यहाँ अकेले ही बैठना होगा , मैं अपने स्कूल के दोस्तो को मिस करने लगा था , यहाँ सभी किसी ना किसी के साथ था सिर्फ़ मैं ही अकेला था , सभी एक दूसरे से बात कर रहे थे ,ये सामान्य सी बात थी कि यहाँ अधिकतर यही के स्कूल्स के बच्चे आते थे या आस पास के छोटे शहरो और

गाँवो से , और सभी ग्रूप्स मे आते थे , मुझे लगा की मैं किसी दूसरी दुनिया मे पहुच गया हू , ये सभी लोग मुझसे बहुत अलग भी थे ,

अधिकतर तो इंग्लीश मे बात करने वाले थे और मैं ठहरा शुद्ध देसी इंसान ..

सच बोलू तो मुझे शहर आए इतने दिन हो गया था लेकिन मुझे कभी नही लगा कि मैं एक गाँव से आया हुआ हू क्योकि मैं जान भी रहा वो लोग या तो बेहद ही ग़रीब थे या फिर बिना पढ़े लिखे गुंडे , लेकिन आज ये सब मुझसे बहुत ही अलग लग रहे थे , मैने एक सस्ती सी जीन्स और शर्ट पहनी थी जो मुझे लगता था की ये मेरे गाँव के सबसे अच्छे और रहीस या पढ़े लिखे लोगो के बच्चे पहनते थे, लेकिन इन लोगो के कपड़ा भी बड़े ही शानदार थे , लड़कियो को तो जीन्स पहने इतने करीब से मैने आज ही देखा था कुछ तो स्कर्ट मे भी थी ..

इन सब को देखकर मैं और भी नर्वस हो गया था मुझे समझ आ गया था कि मुझे पूरा कॉलेज इस लास्ट की बेंच मे बैठकर अकेले ही बितानी है मेरा कोई भी दोस्त यहाँ नही बनने वाला सभी मेरे स्टॅंडर्ड के बहुत उपर के लोग है , और स्टॅंडर्ड आख़िर मैं मेनटेन भी कैसे करता , कॉलेज की फीस संपत मामा दे रहे थे , मेरा और मेरी भाभी का पूरा खर्च तो वही उठा रहे थे अभी तक मैने उनके लिए कोई काम भी तो नही किया था ..

“कहा फँसा दिया मामा सला मैं गन चलाते हुए ही ठीक था “

मैने अपने मन मे कहा ,

आख़िर पहली क्लास शुरू हुई , ये केमिस्ट्री की क्लास थी एक सिर अंदर आए ..

“आज आप लोगो की पहली क्लास है बच्चो आप सभी का हमारे कॉलेज मे वेलकम , मेरा नाम पवन है और मैं आप लोगो का केमिस्ट्री का टीचर हू .. क्योकि आज पहली क्लास है तो पढ़ाई करने से अच्छा है क्यो ना हम आप सभी का इंट्रोडक्षन ले ले ,आप सभी अपना नाम बोलिए,

आपके 12त स्टॅंडर्ड का पर्सेंट और साथ ही की आप जीवन मे आगे क्या बनना चाहते है “

पर्सेंट इसलिए भी पुछा जा रहा था क्योकि यहाँ दो ही टाइप के लोगो का अड्मिशन होता था या तो जिसने 95% से उपर लाए हो या फिर जिसने मॅनेज्मेंट को अच्छे ख़ासे पैसे खिलाए हो

सिर के बोलने के बाद एक एक करके लोग उठाने लगे और अपना अपना इंट्रोडक्षन देने लगे तभी कुछ लोग क्लास के बाहर आए

“मे आइ कम इन सर “

उनमे से एक ने कहा सिर ने पहले तो उन्हे घूरा

“पहली क्लास मे ही लेट हो तुम लोग , ये कोई टाइम होता है क्या आने का “

“सॉरी सर “

सभी ने एक साथ कहा

“ठीक है अंदर आ जाओ लेकिन याद रखना आज पहली और आख़िरी बार है अब लाते आए तो अंदर आने नही दूँगा “
 
मैने देखा की वो दो लड़कियो और दो लड़को का एक ग्रूप था ,वो देखने से ही बड़े ही ज़हीन लोग लग रहे थे , दो लड़कियो मे एक ने पिंक और दूसरे ने ब्लॅक स्कर्ट पहनी थी दोनो ही चेहरे से अच्छे घर के लग रहे थे वही उनके चेहरे की चमक और खूबसूरती ऐसी थी कि एक बार को क्लास मे सभी की नज़रे उनपर ही जाकर टिक गई थी , साथ ही दोनो लड़के भी बड़े ही ड्रेसिंग लग रहे थे , वो अंदर तो आ गये लेकिन फिर आँखे घूमाकर बैठने के लिए जगह देखने लगे , पूरा क्लास भरा हुआ था सिवाय मेरे और मेरे बाजू वाले टेबल के एक टेबल मे दो लोग

आराम से बैठ सकते थे और अड्जस्ट करके 3 भी , लास्ट मे खाली टेबल को देखकर सभी की आँखे चमक गई ..वही मेरे दिल की धड़कने अचानक से ही बढ़ गई , मैने तो सोचा था कि मैं पूरे कॉलेज अकेले ही रहने वाला हूँ और ये साले तो बड़े ही हाइ क्लास लग रहे थे पता नही लेकिन मैं और भी नर्वस होने लगा था ,मैं ठहरा गाँव का एक सीधा साधा आदमी पता नही क्यो मेरे दियंग मे अजीब तरह की बाते आ रही थी, मुझे लगा जैसे मैं खुद को इन सबसे इन्फीरियर महसूस कर रहा था और यही कारण था की मेरे दिल की धड़कने भी तेज हो गयी थी ,

“बॉस क्या हम दोनो यहाँ बैठ सकते है ?“

एक लड़के ने कहा, मैने बस हां मे सर हिला दिया

दोनो लड़के मेरे बाजू मे बैठे वही दोनो लड़किया बाजू वाले टेबल मे , बैठते ही उन्होने एक दूसरे के साथ खुसुर फुसुर शुरू कर दी थी किसी ने अभी तक मुझसे कोई बात नही की थी वही लोग एक एक करके अपना इंट्रोडक्षन दे रहे थे , मुझे देख के आश्चर्य भी हुआ कि साले यहाँ

सभी के सभी 90% के उपर वाले ही है ,जब संपत मामा ने मेरी मारक्शीट मे 96% डलवाए थे मैने उनसे कहा था कि मामा ये थोड़ा ज्यदा हो जाएगा ,लेकिन यहाँ आने के बाद पता चला की लोग सच मे इतना लाते भी है ..

अब आख़िरी नंबर. हम लोगो का था , लड़कियो ने शुरू किया ,पहले पिंक वाली खड़ी हुई

“हाई माइसेल्फ नेहा , मेरा पर्सेंटेज 95.56 है और मैं आयेज जाकर बॉटेनी से पीएचडी करना चाहती हू क्योकि मुझे नेचर से बहुत प्यार है और ख़ासकर प्लॅंट्स से “

वो बैठी और ब्लॅक वाली खड़े हो गई

“हाई माइसेल्फ मोनिका, मेरा पर्सेंटेज 92 , और मैं आगे चलकर मोडीलिंग करना चाहती हू ..”

उसकी बात सुनकर सभी का ध्यान उसपर चला गया वो थी भी बहुत खूबसूरत और साथ ही उसका आटिट्यूड और कॉन्फिडेन्स भी कमाल का था , लड़को की नज़र देख कर ही मैं समझ गया था की ये इस क्लास के सभी लड़को के दिल का धड़कन बनने वाली है

उसके बाद साइड वाला लड़का खड़ा हुआ

“हाई मेरा नाम है अर्जित और मेरा पर्सेंटेज है 85% (सभी उसकी ओर देखने लगे क्यो कि ये अब तक का सबसे कम था ,समझ मे आता था कि इसके बाप ने अच्छे पैसे दिए होंगे ) और मैं आगे चलकर राज चंदानी जैसा बिज़्नेस मॅन बनना चाहता हू और इसके साथ ही साथ मैं

मोडीलिंग भी करना चाहता हू “

क्लास की कुछ लड़किया उसे ऐसे देख रही थी कि उनकी आँखो से ही पता चल रहा था कि वो इस लड़के से कितना इंप्रेस है ..

मैने एक बार अर्जित की ओर देखा सच मे उसकी पर्सनॅलिटी मे कोई बात तो थी , लंबा-चौड़ा , गोरा-नारा , हत्ता-कत्ता लड़का था ,साथ ही दिखाने मे भी बहुत ही हॅंडसम था

फिर मेरे बाजू मे बैठा लड़का उठा

“हाई दोस्तो मेरा नाम आकाश है आप मुझे प्यार से अक्की भी बोल सकते है , मेरा पर्सेंटेज 96 था और मैं आगे केमिस्ट्री से पीएचडी करना चाहता हू , मुझे केमिकल्स और उसके कॉंबिनेशन्स बेहद ही पसंद है मैं उनही पर रिसर्च करना चाहता हू “

उसकी आवाज़ बहुत ही सॉफ्ट थी , एक छर्हरे बदन का लड़का था मेरे ही जैसा था लेकिन उसके चेहरे , आवाज़ और आँखो मे एक मासूमियत थी , साथ ही साथ एक चर्म भी था… मैने इतने देर मे पवन सर को पहली बार किसी का इंट्रो सुनकर खुस होते देखा था , शायद वो इसलिए भी क्योकि वो खुद भी केमिस्ट्री के टीचर थे ..

इन सबके बाद मेरी बारी आई , मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था , लोग इंट्रो सुन सुनकर ऐसे भी बोर हो चुके थे और मैं इंटो देने वाला अंतिम शख़्श था

“जी मेरा नाम अंकित है (मेरे मूह से सोनू निकलने वाला था फिर एक बार शिवा याद आया लेकिन फिर याद आया कि यहाँ के लिए मेरा नाम अंकित है ) ..

जी मेरा पर्सेंटेज ..(मैं थोड़ी देर सोच मे पड़ गया ) जी वो 96 है “

और मैं चुप हो गया , मेरी अजीब बातों ने सभी का ध्यान मेरी ओर खीच लिया था सभी मुझे अजीब निगाहो से घूर रहे थे और साथ ही मेरे साथ बैठे लोग भी जो अभी तक मेरी तरफ कोई भी ध्यान नही दे रहे थे ..

“तुमने बताया नही कि तुम आगे जाकर क्या करना चाहते हो “

पवन सर ने कहा और मैं थोड़ा सोच मे पड़ गया कि ये क्या मुसीबत है
 
“सर कुछ भी कर लूँगा बस मेरी भाभी माँ को वो पसंद आए, रोज़ी रोटी चलनी चाहिए ..ऐसे भी तो मज़दूरी ही कर के गुज़रा कर रहे है, पढ़

लेंगे तो शायद कुछ अच्छी कमाई कर ले ”

एक बार को ऐसा लगा जैसे सभी को साँप ही सूंघ गया हो..

लेकिन फिर पवन सर ना जाने क्यो ताली बजाने लगे , मैं खुद भी शॉक मे था कि आख़िर उन्हे क्या हुआ है

“बहुत बढ़िया , देखो बच्चो हमारे साथ एक ऐसा शख्स भी है जिसने अपनी विषम परिस्थितियो के बावजूद हिम्मत नही हारी और 96% के साथ इस कॉलेज मे हमारे साथ है , इसे कहते है स्पिरिट , इसे अपनी नही बल्कि अपनी फॅमिली की चिंता है .. गुड बेटे तुम्हारी भाभी माँ को तुम्हारे उपर गर्व होगा और तुम उन्हे एक अच्छी जिंदगी दे पाओगे जैसा मेहनत तुमने 12त मे किया था वैसा ही यहाँ भी करना और अच्छे ग्रेड से

ग्रॅजुयेट होना हम तुम्हे स्कॉलरशिप दिलवाएँगे ताकि तुम आगे की पढ़ाई कर सको… ग़रीबी मे भी पढ़ने का हौसला इसे कहते है बच्चो इससे कुछ सीखो आप लोग भी ..”

पूरे क्लास मे तालियो की गड़गड़ाहट गूँज उठी थी , मुझे खुद भी यकीन नही हो रहा था कि लोग फेक मारक्शीट से मिले फेक नाम वाले इंसान के फेक ग्रेड के उपर तालिया बजा रहे थे … किसी ने सच ही कहा है की जो दिखता है वो बिकता है ….

क्लास मेरे इंट्रो के साथ ही ख़त्म हो गई , मैं अभी इन सबसे सम्हल पता उससे पहले ही मेरे बाजू वाला शख्स बोल पड़ा ..

“हाई आइ आम अक्की , तुमने कॉन से स्कूल से पढ़ाई की है “

वो अपना हाथ मेरे ओर बढ़ाते हुए बोलने लगा उसके बाद ही अर्जित ने मुझसे हाथ मिलाया.. वही मोनिका और नेहा ने मुझे दूर से ही हाई कहा , ये सब करते हुए मैं अपने दिमाग़ मे उस स्कूल का नाम सोच रहा था जो की मेरे मारक्शीट मे था ..

“गवर्नमेंट स्कूल “

मुझे बस इतना ही याद आया था स्कूल का नाम भी मैं भूल गया था..

“वाउ गवर्नमेंट स्कूल से भी पढ़ कर तुमने बहुत अच्छा मार्क लाया है , और वो भी काम करते हुए यू आर ग्रेट मान”

पिंक ड्रेस वाली परी बोल उठी जिसका नाम नेहा था , लेकिन इन सबमे मुझे समझ आ गया था की लोग मुझे इतना भाव क्यो दे रहे थे , मेरा पर्सेंट और साथ ही ये कि मैने मज़दूरी करते हुए पढ़ाई की है , अब हँसी तो मुझे भी आ रही थी लेकिन मैं उसे रोके हुए था , मेरे कपड़ा ऐसे भी ग़रीबो वाले ही थे और अभी के हालात मे मैं था भी एक ग़रीब ग़ुरबत मे पड़ा हुआ आदमी . और संपत मामा की बनाई मारक्शीट के मार्क ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. देखने से ऐसा लग रहा था की मैने बहुत ही मेहनत और संघर्ष करके ये मार्क लाए है और इतने बड़े कॉलेज मे अड्मिशन के काबिल बन पाया हू ..

“थॅंक्स …”

मैने नम्रता के साथ कहा

“तो तुम क्या काम करते थे स्कूल के टाइम पर “

अर्जित ने पुछा, ये साले अमीर लोगो को ग़रीबो के जीवन मे थोड़ा ज्यदा ही इंटेरेस्ट होता है

“वो मैं समान ढुलाई का काम करता था , ट्रॅक्स मे समान डालना और उतारने का काम था ..”

मैने लाला के पास किए काम का बयान कर दिया था , वो लोग मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे मैं कोई एलीयन हूँ ..

“ओह माइ गॉड ये तो बहुत ही मेहनत का काम होता है यार , तुम पढ़ते कब थे , टाइम मिल जाता था ??”

इस बार भी नेहा ही थी उसके आवाज़ मे एक दर्द था , दर्द मेरे लिए , उसका मासूम सा चेहरा उसके दुख को और भी खिल कर बाहर

निकल रहा था ..जब इतना हो ही चुका था तो मैने सोचा की क्यो ना थोड़ा और मिर्च मसाला लगा दिया जाय..

“हाँ काम से आता था उसके बाद खोली मे बैठकर रात मे पढ़ लेता था, अधिकतर वहाँ लाइट नही होती थी तो स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ा करता था “

मैने ये सुन रखा था की कई महान इंसानो ने स्ट्रीट लाइट के नीचे पड़कर काबिलियत हासिल की थी वही चीज़ मैने यहाँ चिपका दी थी ..

“ओह माइ गॉड ..”

दोनो लड़कियाँ एक साथ बोल उठी

“कोई नही दोस्त तू फिकर मत कर अब हम तेरे साथ है , तुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो हमे बोल देना , और आज से तू अपना दोस्त है, आज से हमारा 4 का नही बल्कि 5 का ग्रूप होगा , क्यो दोस्तो “

अर्जित ने बहुत ही गर्मजोशी के साथ कहा, और सभी ने एक स्वर मे हाँ से हाँ मिलाया ..

भगवान सच मे दयालु है , कुछ झूठ से ही सही लेकिन मुझे ऐसे दोस्त मिल गये थे जो सच मे ग़रीबो की और उनके मेहनत की इज़्ज़त करते थे , उनके दर्द के लिए जिनके दिल मे संवेदनाए थी, शायद अब मेरा कॉलेज अकेले इस लास्ट बेंच मे बैठकर नही बीतेगा , ये लोग मुझे बड़े ही

सच्चे लगे थे और मैं इनके साथ खुश भी था , ये मेरे साथ एक दोस्त की तरह ही व्यवहार करने लगे थे शुरू मे मैं ही थोड़ा नर्वस था लेकिन

कुछ ही देर मे मुझे लगा की ये भी मेरे पुराने दोस्तो की ही तरह है बस थोड़े अलग परिवेश मे पले बढ़े है ..

अब मेरे होठों मे एक मुस्कान थी और साथ ही दिल मे एक जोरो की इक्षा जागी कि जल्दी से घर जाकर सब कुछ भाभी को बताऊ …
 
अपडेट 11

भाभी की हँसी से पूरा कमरा ही कुंदन जैसे चमक उठा था , मेरी बात सुनकर वो बहुत हंस रही थी …

तभी उन्होने मुझे प्यार से देखा ..

पता नही उनके अंदर कितना प्रेम छिपा था कि जब भी मुझे देखती थी उनकी आँखे प्रेम से पूरी तरह से तर होती थी , उनके स्पर्श मे भी प्रेम ही प्रेम था वो प्रेम की एक जीती जागती मूरत थी …

“तूने वहाँ भी मेरा ज़िकरा कर दिया ना “

अब मैं इसका क्या जवाब देता , मेरे जीवन मे उनके अलावा था ही कौन जिसका ज़िकरा करता ..

“भाभी आप भी ना आपके सिवा और किसका ज़िकरा करूँगा ..”

वो मुस्कुराइ

“अच्छा ये तो बता कि आख़िर तेरे दोस्त कैसे है “

“भाभी मुझे तो बहुत ही अच्छे लगे , नेक दिल लोग है “

“देख बेटा अमीर लोगो से तोड़ा दूर ही रहना चाहिए , मैने उनके बारे मे बहुत बुरा सुना है , सुना है कि उन्हे दिल की कोई भी कदर नही होती , वो इंसानियत से ज्यदा पैसो को महत्व देते है , और जसबतो और प्रेम की उन्हे कोई भी कदर नही होती …”

“अरे भाभी ये सब सुनी सुनाई बाते है और अगर ऐसा होता तो क्या वो लोग मुझ जैसे फटीचर से बात भी करते , लेकिन उन्होने ना सिर्फ़ प्रेम से मुझसे बात की बल्कि उन्होने मुझे अपना दोस्त भी बनाया और कौन है जिसे पैसे से प्रेम नही है , पैसे पर तो पूरी दुनिया ही वारी है…”

“वो सब ठीक है बेटा मैं बस इतना कह रही हू की कही दिल ना लगा लेना उनसे “

मैं जोरो से हंस पड़ा

“अरे भाभी मैं उनसे मोहोब्बत नही कर रहा हू जो दिल लगाउन्गा बल्कि वो तो बस मेरे दोस्त है ..”

“अच्छा..?? बेटा दोस्ती मे भी दिल लगता है वो रिश्ता तो ऐसा रिश्ता है जिसमे सबसे ज़्यादा मुहब्बत होती है , प्रेम होता है और भरोशा होता है …ऐसे उनमे दो लड़किया भी तो है ना एक तो मॉडेल बन रही है लेकिन वो दूसरी वाली क्या नाम है उसका ..??”

“नेहा “

“हाँ नेहा मुझे लगता है वो ऐसी है जिससे मुहब्बत हो जाए “

उनकी बात मे एक शरारत भी थी , मैं भी उनके साथ मुस्कुरा उठा था ..
 
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