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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

दीदी ने दुबारा मेरा हाथ पकड़ा और अपनी गुनगुनी नरम चूत पर रख दिया जो कि बिल्कुल पूरी तरह से चिकनी और सफाचट थी | मुझे दीदी की गरम जवान बदन की गर्माहट गुना गुना सा महसूस हुआ और मेरे अंदर एक सनसनी सी दौड़ गई और मेरे पेंट में भी कुछ हरकत होने लगी | दीदी ने मेरे पैंट के ऊपर अपना हाथ जमा दिया और ऊपर नीचे करके सहलाने लगी मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि हो क्या रहा है | दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर चूत के ओठों और दरार पर सहलाने को बोला | दीदी ने मेरा दूसरा हाथ अपने सीने पर रख दिया और उन्होंने कहा इसे दबावों | मुझे फिर समझ में नहीं आया तो दीदी ने खुद ही अपनी उठी हुए उरोजो को मसल कर बताया की कैसे मम्मो को दबाते है | जब दीदी ने खुद दबाकर बताया तो मै भी सीख गया | मै दीदी के उभरे हुए बड़े बड़े मम्मो को दबाने लगा | दीदी की छाती दबाने में बहुत ही मजा आ रहा था | धीरे धीरे मेरी पेंट में तनाव बढ़ने लगा मुझे समझ में नहीं आ रहा था ऐसा क्हायों हो रहा है | हाँलांकि सुबह सुबह जब मैं पेशाब करने जाता था तब यह बिल्कुल तना हुआ मिलता था पर मुझे लगता था कि पेशाब भरी होने के कारण ऐसा होता होगा | लेकिन अभी तो मुझे पेशाब नहीं लगी थी फिर भी यह सीधा हो रहा था यह मेरे लिए एक हैरानी की बात थी | दीदी मेरे और करीब आ गई और उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और कहा - तूने मै कैसी लगी | तुझे रोज तो पूछता था दीदी यहां तुमारे बाल क्यों | तुझे चड्ढी क्यों नहीं पहनती | आज देख न तो मेरी चूत पर बाल है और आज मैंने चड्डी भी पहनी है |

मै - दीदी आपके बाल क्या हुए |

दीदी - कभी अपने पापा को दाढ़ी बनाते देखा है |

मै - हाँ |

दीदी - उसी तरह चूत के बालो की भी सेविंग की जाती है | अच्छा अब बता तुझे मै चड्डी पहन के ज्यादा अच्छी लगती हूं या बिना चड्ढी के |

मै - दीदी सच कंहू तो अब से आप मुझे बिना चड्डी के ज्यादा अच्छी लगती हो | आप दूसरी लडकियों से बिलकुल अलग हो आपकी गुलाबी चिकनी चूत का मै दीवाना हो गया हूँ |

दीदी - अच्छा चल अब तू मुझे बता तुझे मेरी चूत कैसी लगती है क्या मैं भी तेरे लिए उतनी ही खास हूं इतना कह कर के दीदी बिस्तर पर लेट गई और उन्होंने अपनी टांगे उठा कर के मोड़ कर पेट से चिपका ली | इस दीदी की चूत बिलकुल साफ़ साफ़ चमकने लगी |

कमरे में बल्ब की आ रही हल्की सुनहरी रोशनी में दीदी का बदन देख कर के तो जैसे मैं हुस्न परियों के स्वर्ग में पहुंच गया हूं |

मै तो दीदी की खूबसूरती देख कर ही मदहोश हो गया | मुझे कुछ और याद ही नहीं रहा | मै बस दीदी की गुलाबी सुनहरे बदन की एकटक देखने लगा |

दीदी मेरी ख़ामोशी से बेचैन हो रही थी - बता न मेरी चूत कैसी लगी तुझे |

मै जैसे किसी सपने से बाहर आया - हाँ दीदी आपकी चूत किसी अप्सरा की जैसी मस्त और खूबसूरत है | बस नीचे के बाल बनाकर इसे ऐसी ही हमेशा चिकनी बनकर रहा करो | दीदी आप तो ऐसे लग रही है जैसे हुस्न परी हो मुझे इतनी हसींन कभी नहीं लगी | आपने इतना खूबसूरत बदन इन कपड़ो में छिपा रखा था उर मुझे भनक तक नहीं लगने दी | दीदी के चूतड़ और जांघे ऐसे चमक रहे हैं जैसे उनसे सुनहरी रोशनी निकल रही हो | दीदी के गुलाबी जिस्म से जैसे लग रहा हूं सोने की रंगत का की रोशनी अपने आप निकल कर चारो ओर फ़ैल रही हो |

मै - मुझे तो पता ही नहीं था दीदी कि चूत होती कैसी है उसको क्या कहते हैं लेकिन मुझे जो भी समझ में आ रहा है दीदी इस कच्ची उम्र में उसके हिसाब से आपकी चूत बहुत खूबसूरत है आपकी चूत बहुत बहुत बहुत खूबसूरत है | सिर्फ आपकी चूत ही नहीं आपके रसीले गुलाबी ओंठ आपकी चंचल हसींन आंखें आपके नरम गुलाबी गाल आपका पतला गला, सपाट पेट , आपके बड़े बड़े दूध से उठा हुआ सीना और आपके बड़े बड़े चूतड़, ये मांसल नरम गुदाज जांघे | दीदी मै आपका एदीवाना हो गया हूँ बस मन कर रहा है ऐसी ही आपको देखता रहू | हुए रोज आपकी पेट आप खाना भी आपकी कमर का पूरा बदन किसी हुस्न परी से कम नहीं है

आप इतनी खूबसूरत होगी इतनी गोरी होगी मुझे तो अंदाजा ही नहीं था आप बहुत ही खूबसूरत है इतनी खूबसूरत है कि मेरे पास उसको बयान करने के लिए शब्द नहीं है देखो ना दीदी आपकी कसी गुलाबी चूत इस बल्ब की रोशनी से किस तरह से सोने की तरह दमक रही है आपके चूतड़ से कैसे सुनहरी सी रोशनी निकल रही है | मेरे पेंट में झटके लगने लगे और मेरा लंड तनने लगा | मै हैरान था ये क्या हो रहा है | लेकिन ,मै दीदी के हुस्न में इतना मदहोश था की मैंने उधर ध्यान ही नहीं दिया |

दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हो गयी | शायद उनकी तारीफ अभी तक किसी ने नहीं की थी |

दीदी - तो तू बता अब मैं तुझे कपड़े पहनकर ट्यूशन पढ़ाया करूं या पूरी तरह से कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करू |

मै - दीदी इस समय आप मुझे बहुत अच्छी लग रही हो है मुझे लग रहा है आप मुझे कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करो |

दीदी बोली जोश में आकर के - यह हुई ना बात |

इतना कहकर उन्होंने कस कर के मेरे पैंट के ऊपर बने हुए उभार को कस कर जकड़ लिया - मुझे समझ नहीं आया कि यह क्या है |

मैंने दीदी से पूछा - दीदी मुझे तो अभी पेशाब भी नहीं लगी है फिर यह मेरा लंड इस तरह से अकड़ कर तब क्यों गया है | वैसे तो ये बस सुबह सुबह होता है |

दीदी बोली- तेरा बहुत बड़ा है यह आदमी का लंड है अब तू मर्द हो गया है अब जैसे ही औरत की चूत तुझे दिखेगी, यह खड़ा हो जाया करेगा और उसको चोदने का तुझे मन करेगा |

मै - दीदी आप क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा |

दीदी - तुम परेशान मत हो ठीक है धीरे धीरे धीरे सब बताऊंगी सब करके भी दिखाऊंगी तो हैरान मत हो |

इतना कह कर के दीदी ने मेरी पैंट के अंदर की ज़िप खोली और अपना हाथ अंदर घुसा करके मेरे लंड को थाम लिया और ऊपर नीचे करके हिला करके मुठ मारने लगी | मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मरी थी इसलिए मुझे कुछ समझ में नहीं आया |

दीदी ने कहा - अब एक काम कर चल पीछे की तरफ झुक जा |

मै वैसे ही पीठ के बल जमीन पर लेटता चला गया | दीदी झट से उठी और अपनी चड्ढी निकाल फेंकी और मेरे मुहँ पर आकर बैठ गयी |

दीदी - कभी हथेली पर लगी आइसक्रीम चाटी है |

मै - हाँ दीदी |

दीदी - बस उसी तरफ मेरी चूत चाट |

मै जीभ निकालकर दीदी की चूत चाटने लगा | दीदी की गरम नरम चिकनी चूत चाटने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था | दीदी भी मदमस्त होने लगी | उनके मुहँ से मादक आवाजे निकलने लगी | दीदी सी सी सी सी करने लगी थी मुझे लगा कि दीदी को तकलीफ हो रही है मैंने दीदी से मैंने पूछा - दीदी आपको कही दर्द हो रहा है | \

दीदी मेरे भोलेपन पर हंसने लगी - अरे पगले यह दर्द नहीं है ये तो मजे की सिसकारी है मुझे बहुत मजा आ रहा है तू और कस के मेरी चूत को चाटता रह | इतना कहकर दीदी ने अपनी चूत के ओंठ उंगलियों से फैला दिए और उसके अन्दर तक जीभ घुसेड कर चूत चटाने को कहने लगी | मैंने बिलकुल वैसा ही किया | दीदी अब आगे की तरफ झुक गयी और मेरे लंड को अपने हाथ से सख्ती से जकड लिया और मुठीयाने लगी | जैसे जैसे मै दीदी की चूत में जीभ घुसेड़कर चाटता , दीदी आनंद से मस्त हो जाती और मेरे लंड को और कसकर मसलने लगती | दीदी मेरे लंड को तेजी से मुठिया रही थी मेरी सांसें तेज होने लगी थी और मुझे पसीना आने लगा था मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या है जो भी हो रहा था उसने मुझे बहुत मजा आ रहा था | दीदी ने मेरे माथे पर पसीने की बूंदें देखि तो दूसरी तरफ को चल रहा टेबल फैन मेरी तरफ को कर दिया और इससे मुझे काफी राहत मिली थी | दीदी कुछ देर तक तेजी से अपने हाथ को हिलाती रही धीरे धीरे मेरी आंखें बंद होने लगी और मैं आनंद के सागर में डूबने लगा था मैं दीदी की चूत चाटना भूल गया था दीदी के हाथ तेजी से मेरे लंड पर आगे पीछे हो रहे थे और वह बहुत तेजी से मेरे लंड को मसल रही थी कुछ देर बाद मेरे शरीर में अजीब सी ऐठन होने लगी | मेरे लंड से तेजी से एक पिचकारी निकली और दीदी के हाथ और उनकी छाती को भिगो गई | दीदी उसके बाद भी नहीं रुकी | मेरी सांसे पूरी तरह उखाड़ चुकी थी मै अपनी सांसे काबू करने लगा | कुछ देर बाद उन्होंने मेरा लंड छोड़ दिया | उन्होंने अपने ऊपर पड़े हुए उस सफेद पदार्थ को चाट लिया और अपने हाथों को चाटने लगी फिर उन्होंने एक रुमाल से मेरे लंड को पूछा और मेरी पैंट के अंदर घुसेड़ कर चेंन बंद कर दी और अपनी उंगलियां को फिर से चाटने लगी | मै दीदी की तरफ देख रहा था | दीदी मेरी पेंट की तरफ |

दीदी हल्का सा बुदबुदाई - कितना बड़ा औजार है अभी से |

मै - दीदी कुछ कहा आपने |

दीदी - तेरा लंड अभी से जवान मर्दों से भी बड़ा है आगे चलकर तो तेरा हथियार मुसल ही बन जायेगा |

मै - दीदी ये सब क्या था वैसे |

दीदी - आज की ट्यूशन खत्म हो गई , कल एक नया पाठ सिखाउंगी | अब घर जा किसी को मत बताना तुझे मेरी कसम | मजा आया |

मै अपनी किताबे समेटता हुआ - बहुत |

दीदी भी अपने कपड़े पहनने लगी - अभी तो शुरुआत है |
 
खाना कब का ख़त्म हो चूका था रीमा उंगलियाँ चाट चाट कर जितेश की कहानी सुनती रही | जितेश ने बर्तन समेटे और रखने चला गया | रीमा भी उठकर हाथ धोने चली गयी | रीमा ने कमर के नीचे एक तौलिया लपेट ली | हाथ धोकर जब रीमा वापस आई तो उसके मन में बस आगे की कहानी सुनने की ललक बाकि थी | रीमा बिस्तर पर लेट गई और चादर से खुद को ढक लिया |

जितेश ने भी जमीन पर अपना बिस्तर लगा लिया | उसके बाद जितेश ने एक मोमबत्ती बुझा दी | अब कमरे में बस एक मोमबत्ती भर का उजाला था |

रीमा - आगे सुनावो |

जितेश बिस्तर पर आकर लेट गया और सर के किनारे दो तकिये लगा लिए और रीमा की तारफ मुहँ करके करवट लेकर आगे की कहानी सुनाने लगा |

आज जो भी हुआ उसे सोच सोच कर मेरी आंखों की नींद गायब हो गई थी मैं बस उसी के बारे में सोच रहा था दीदी के वह गुलाबी चूत और चिकनी सफाचट इलाका मेरी आंखों से वह हट ही नहीं रहा था धीरे-धीरे मेरे लंड में फिर से तनाव आने लगा था मुझे समझ में नहीं आया क्या करूं मैंने अपनी पैंट के अंदर हाथ को घुसेड़ा और तेजी से अपने लंड को मुट्ठी में भरकर बिलकुल वैसे हिलाने लगा जैसा दीदी ने किया था | मै बिलकुल दीदी की तरह अपना लंड हिलाने लगा | जैसे जैसे मैं दीदी के बारे में सोचता जाता था मेरे लंड में कड़ापन आने लगा था लेकिन लंड को हिलाते हिलाते दीदी के उस खूबसूरत जिस्म के सपनों में खोया हुआ सो गया | सुबह जब आंख खुली तो लंड उसी तरह से तना हुआ था | आंख खुलने के साथ ही सपना भी टुटा | जल्दी से भागकर बाथरूम में घुस गया और फिर स्कूल के लिए तैयार होने लगा | शाम को जब स्कूल से घर आया आया तो पता चला दीदी थी किसी काम से बाहर गई हुई है इसलिए टाइम पर नहीं आ पाएंगी इसलिए आज की ट्यूशन कैंसिल | शायद इसलिए आज स्कूल भी नहीं आई थी | मै दीदी की सपनो में खोया अगले दिन का इन्तजार करने लगा | उसके अगले दिन मै जानबूझकर थोड़ा सा लेट गया था दीदी तीन बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही थी | बाकि बच्चे ट्यूशन पढ़ने आए नहीं थे | दीदी ने जल्दी से उन बच्चों को निपटा दिया और उसके बाद मुझे पढ़ाने लगी थी | उन्होंने 2 घंटे लगातार जान करके मुझे मैथ पढ़ाई | उसके बाद में जब मेरा दिमाग जवाब देना शुरु हो गया |

मै - दीदी अब बस करो मेरा दिमाग थक गया है |

तो दीदी ने कहा - कमरे में चल मैं तेरे दिमाग की थकान दूर करती हूं | दीदी ने झांक करके अपनी बहन को देखा, वो कार्टून देखने में खोयी हुई थी | दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खीचते हुए कमरे में लिए चली गयी |

दीदी ने ऊपर एक टी-शर्ट और नीचे एक लंबा सा लहंगा पहन रखा था | कमरे में जाते ही दीदी ने दरवाजा बंद किया और फटाक से अपनी टी-शर्ट उतार दी उन्होंने टी-शर्ट के अंदर कुछ भी नहीं रखा था दीदी के बड़े-बड़े सफ़ेद उरोज जिनको मैं तब दूध कहता था वह मेरे सामने थे | मै दीदी के दूध देखकर हैरान रहा गया | कितने गोरे और चिकने और बड़े थे | मैंने भी आप देखा ना ताव मैं भी जोश में था मैंने जाकर के उनके दोनों उरोजो को अपने हथेली में जकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा था | बड़ा मजा आ रहा था मैं बार-बार उन्हें दबाने लगा था दीदी मेरे और पास आ गई और उन्होंने मुझे अपने से सटा लिया | दीदी ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को कस के पकड़ लिया और अपनी पेट से चिपका लिया था दीदी तेजी से अपनी कमर हिलाने लगी थी और मैं उनके दूध दबा रहा था धीरे-धीरे मेरी पैंट में तनाव बढ़ने लगा मुझे नहीं समझ में आ रहा था इसा क्यों हो रहा है लेकिन बड़ा मजा आ रहा था | दीदी के नरम नरम बदन से निकलती जवानी की गरम आंच से मेरे अंग का रोम रोम उत्तेजित होने लगा | दीदी ने मेरे चूतड़ को छोड़ कर नीचे की तरफ झुकती चली गयी और तेजी से मेरी पेंट खोल दी | मैंने जानबूझकर आज चड्ढी नहीं पहनी थी | जैसे ही दीदी ने मेरी पेंट को नीचे खीचा मेरा तना हुआ लंड हवा में उछल गया और दीदी की चेहरे से जा टकराया | | ये देख दीदी औत मै दोनों हंस पड़े | दीदी ने मेरे गरम लंड को अपने नरम हाथों से थामते हुए खिलखिलाते हुए कहने लगी - अरे आज तो यह बड़ी जल्दी तैयार हो गया क्या बात है तुम बड़ी जल्दी सीख रहे हो जितेश |

मैं कुछ कह नहीं पाया लेकिन मुझे बड़ा मजा आ रहा था |

दीदी ने एक हाथ से मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए और मेरी शर्ट उतार दी |

उसके बाद तेजी से लंड को मुठीयाने लगी थी उन्होंने मेरे लंड को पकड़ कर के उसके सुपाडे को खोल करके नंगा कर दिया | उसकी खाल को खीच करके नीचे की तरफ धकेल दिया | अब मेरे लंड का लाल फूला हुआ सुपाडा पूरी तरह से अनावृत था |

दीदी ने मेरे लंड को जड़ से कसकर पकड़ा और दुसरे हाथ से मुझे बिस्तर पर पीछे की तरफ धकेल दिया | मै पीठ के बल बिस्तर पर लुद्जक गया | दीदी ने नीचे झुकते हुए मेरे जांघो के बीच मेरे लंड पर झुक गयी और मेरे खून से भरे लाल सुपाडे पर अपने गुलाबी रसीले ओंठ चिपका दिए | दीदी के गुलाबी नरम होठों का सुखद रेशमी स्पर्श बस एक अनुभव था जो मै शब्दों में बयां नहीं कर सकता | जैसे ही दीदी ने अपनी गीली खुरधुरी जीभ मेरे लंड के गरम सुपाडे पर घुमाई | वो गीला रसीला अनुभव मुझे मदहोश करता चला गया | मुझे समझ नहीं आया था की वो क्या था लेकिन जो भी था स्वर्ग का अनुभव कराने वाला था | दीदी मेरा लंड चूस रही थी | मुझे तो अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था | जिस उम्र में लोगो को औरत मरद के बीच का क ख ग नहीं पता होता उस उम्र में दीदी मुझे जवानी के उस सुख का अहसास करा रही थी जिसको मै शब्दों में बयां नहीं कर सकता | दीदी धीरे-धीरे मेरे लंड को अपने मुंह में लेने लगी थी और कस कर चूसने लगी थी | उनके मुंह की गीली खुरखुरी जीभ और उसके उस गीले रसीले एहसास की वजह से मैं बिल्कुल जैसे स्वर्ग में पहुंच गया हूं | मेरा लंड तेज खून के दौरान के कारण गर्म था और उस पल जब दीदी के मुहँ की लार की ठंडी चासनी लगी तो जैसे मैं आनंद से पागल हो गया था | दीदी ने मेरे लंड को जड़ से कस कर पकड़ा और सुपाडे को पूरी तरह से मुहँ में घोट कर चूसने लगी थी | मैं मदहोश होने लगा था हालांकि मैं ये सब दीदी सीखना चाहता था इसलिए मैंने दीदी से पूछा - यह क्या है |

दीदी मेरे लंड को मुहँ से निकाल कर बोली - कल तूने मेरी जांघों के बीच में घुस करके करके मेरी चूत को चूसा था तुझे याद है न |

मै- हाँ दीदी |

दीदी बोली - उसे चूत का चूसना कहते हैं जब कोई आदमी किसी औरत की चूत को चूसता है तो उसे चूत चूसाई कहते हैं |

मै - अच्छा दीदी |

दीदी - तूने कभी कंपट टाफी चुसी है | वो टॉफी जिस पर एक डंडी भी लगी होती है |

मै दीदी के लंड चूसने के कारन बहुत उत्तेजित था - हाँ दीदी बहुत बार चुसी है |

दीदी - तो समझ ले यह तेरा लंड है जो ये उसी टॉफी की तरह है | इसको चूसने में बहुत मजा आता है और आखिरी में इसमें से भी ढेर सारा रस निकालता है | इसे मै चूस रही हूं इसे लंड का चुसना कहते हैं |

मै - दीदी जैसे टॉफी मीठी होती है क्या लंड के रस में भी क्या मिठास होती है | इसमें क्या उसी तरह से मीठा मीठा रस आता है |

दीदी - इसमें कोई मीठा रस नहीं होता है, लेकिन इसका रस बहुत टेस्टी होता है | इसमें एक अलग सा स्वाद होता है, इसका स्वाद जिसने चखा है वही बस जानता है कितना टेस्टी स्वाद होता है | इसका एहसास सिर्फ उसी को होता है जो लंड को चूसता है |

मैं - दीदी क्या लड़के भी लंड चूसते हैं |

दीदी लंड चूसते चूसते अपनी हंसी को कंट्रोल नहीं कर पाई, फिर खुद को काबू करके बोली - जो लड़के गांड मरवाते हैं वह लंड चूसते हैं | लेकिन जो लड़के चूत चोदते हैं वो चूत चूसते है |

मै - इसका मतलब मैंने आपकी चूत चुसी थी तो क्या मै आपकी चूत को चोदुंगा |

दीदी - अब समझ में आया है तुझे |

मेरी शंका अभी दूर नहीं हुई थी - तो दीदी क्या मैं आपकी चूत को चोदने वाला |

दीदी - हाँ कभी न कभी तो जरूर चोदोगे, अगर मेरे अच्छे स्टूडेंट बने रहे |

मै - दीदी किसी की चूत को चोदते कैसे हैं | दीदी - अभी धीरे धीरे धीरे तुझे सब पता चल जायेगा क्यों परेशान है तू सबकी क्यों चिंता कर रहा है | मैं तुझसे सिर्फ बता नहीं रही हूँ मै तो करवा भी रही हूँ | हर चीज का प्रैक्टिकल भी करेगा | मै तुझे सिर्फ सिर्फ चूत लंड के बारे में ही नहीं बता रही रही बल्कि क्या होता है ये दिखा भी रही हूँ | तो समझ ले जब चूत चोदने के बारे में बताउंगी तो चूत चुदवा करके भी सिखाउंगी |

मै आनंद के सागर में गोते लगाता दीदी से सवाल पे सवाल किये जा रहा था मेरे सवाल अभी भी खतम नहीं हो रहे थे - अच्छा दीदी फिर भी एक सवाल है क्या आपने इससे पहले कभी चूत चुदवाई है |

दीदी बोली - नहीं पर मैंने दूसरों को चोदते हुए देखा है इसलिए मुझे पता है कैसे चूत चोदी जाती है |

मै - तो दीदी आपने कभी अपनी चूत चुदवाई नहीं मैंने कभी किसी की चूत चोदी नहीं तो हम आपस में चुदाई करेंगे कैसे |

दीदी - तू उसकी चिंता मत कर मेरे पास कुछ सीडी है उनमें अच्छे से बताया गया है कि किसी की चूत को पहली बार कैसे चोदना चाहिए और मैंने उसे एक बार नहीं दो बार नहीं 50 बार देखा है ठीक है | इतना ही नहीं उनको देख देख कर के मैंने अपनी चूत की कई बार प्यास बुझाई है, लेकिन उसमे चूत के अन्दर कभी कुछ नहीं गया | अब मैं चाहती हूं कि मेरी चूत में कोई लंड जाए | मै एक लम्ठीबे तगड़े लंड से चुदना चाहती थी | मै चाहती थी कोई मर्द का बच्चा मेरी सील तोड़े | फिर तेरे साथ खेलते खेलते मुझे तेरे लंड के साइज़ का अहसास हुआ तब से मै तेरे लंड की चाहत पाले बैठी हूँ लेकिन तेरा लंड मेरी चूत में जाएगा उससे पहले मैं तुझे अच्छी से ट्रेनिंग दूंगी ताकि चुदाई में कोई दिक्कत ना हो | यह कहते-कहते दीदी धीरे धीरे मेरे लंड को निगलने लगी थी और हर बार थोड़ा सा लंड मुहँ में और अन्दर लेकर के ऊपर चुस्ती हुई चली जाती थी मुझे बहुत मज़ा आ रहा था | दीदी के मुहँ से बेतहाशा लार बहने लगी थी उनकी आँखों में लालिमा छा गयी थी | मैंने देखा धीरे-धीरे दीदी ने पूरा लंड अपने मुंह में निगल दिया है दीदी मेरा पूरा लंड घोंट गयी | मेरा लंड पूरी तरह से गायब हो गया है मैं कुछ पल के लिए हैरान रह गया था क्या दीदी के मुंह में इतनी जगह है कि मेरा पूरा का पूरा मुसल लंड दीदी के मुहँ में समां गया |
 
फिर मैंने दीदी से पूछा - दीदी यह पूरा का पूरा लंड आपके मुंह में गायब हो गया क्या आपको दिक्कत नहीं हो रही थी |

दीदी बोली - अरे नहीं पगले इसके लिए इसके लिए थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ती है पर मुझे बहुत मजा आ रहा है कि मैं तेरा लंड पूरा का पूरा चूस रही हो | जब कोई औरत पूरा का पूरा लंड मुहँ में लेकर चूसती है तो उसे भी बहुत मजा आता है और चूसवाने वाले को तो जैसे जन्नत ही मिल जाती है | दीदी की आंखे पूरी तरह से लाल हो गयी थी |

मै - दीदी आपकी आँखों की क्या हुआ |

दीदी - ये औरत का नसीब है उसे मजा लुटने के लिए भी दर्द से गुजरना पड़ता है | आगे चलकर सब समझ जाओगे | अब बस लंड चूसने का मजा लूटो |

मैने धीरे धीरे आंखें बंद कर ली थी दीदी का साथ तेजी से मेरे लंड पर आगे पीछे होने लगा था उनके गुलाबी होंठ मेरे लंड पर कस के चिपके हुए थे और वह तेजी से अपना सर हिला रही थी | मेरा लंड सटासट दीदी के गीले मुहँ में आ जा रहा था | मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मैं बिल्कुल ही बेहोश होने की कगार पर पहुंच गया था मैं पूरी तरह से मदहोश हो चुका था दीदी के मुंह से चपड़ चपड़ की आवाज आने लगी थी |

दीदी ने उस खामोशी को तोड़ते हुए उससे पूछा - जितेश कैसा लग रहा है तुझे मजा आ रहा |

मैं - हां दीदी बहुत मजा आ रहा है | बस ऐसे ही चूसती रहो | मुझे तो पता ही नहीं था दीदी कि लंड को चुसवाने में इतना मजा आता है आपने मुझे जन्नत की सैर करा दी |

दीदी समझ गई मैं पूरी तरह से वासना में डूब चुका हूं उसके बाद दीदी ने अपने होठों से और कसकर मेरे लंड को जकड़ लिटा और सर हिलाने लगी | दीदी तेजी से मेरे लंड को चूसने लगी थी उनका सर और उनके हाथ तेजी से मेरे लंडपर फिसल रहे थे | उसको कसकर जकड़कर मसल रहे थे | उनके गुलाबी होंठ और उनके हाथों की उंगलियां मेरे लंड पर बहुत ही सख्ती से तेजी से ऊपर नीचे फिसल रही थी | तभी मेरी कमर में एक झटका मारा मुझे समझ में नहीं आया यह क्यों हुआ लेकिन दीदी समझ गई |

दीदी ने कहा - ऐसा लग रहा है तुझे मेरा मुंह चोदने का मन हो रहा है तूने अभी अभी झटका मारा है अच्छा एक काम कर चल ठीक है मैं अपने को मुहँ के ओंठो को फैलाकर खोलकर चौड़ा कर देती हूँ फिर तू मेरे मुहँ चोद ले | इतना कहकर दीदी ने मेरे लंड की जड़ में अपनी उंगलियाँ का एक सख्तूत घेरा बना दिया | फिर मुहँ में ढेर सारी लार मेरे लंड पर उड़ेल दी | फिर पुरे लंड को लार से सान दिया |

फिर दीदी बोली - अब नीचे से कमर हिला मुझे समझ नहीं आया दीदी के कहने का क्या मतलब है |

मैने पूछ लिया - क्या मतलब है दीदी इसका |

दीदी बोली - अभी तेरी कमर हिली थी ना |

मैंने कहा - हाँ हिली थी तो |

दीदी - पगले तेरी कमर हिलाने का मतलब है तू मेरे मुंह को चोदना चाहता है तो अब एक काम कर अब मैं तेरा लंड चुसना बंद कर रही हूं और तू नीचे से अपनी कमर हिलाकर मेरे मुहँ को चोद |

मुझे कुछ समझ में नहीं आया - लेकिन दीदी मैं कैसे करूंगा |

दीदी - तू पूरी तरह से पागल है क्या या बिलकुल गधा है | क्या कैसे करेगा, मुहँ चोदना है .................अच्छा चल ठीक है मैं तुझे बताती हूं एक काम कर तू अपनी कमर को हल्का सा ऊपर की तरफ उठा | और फिर नीचे ले जा |

मैंने बिलकुल वैसा ही किया | उसके बाद दीदी बोली अब जोर जोर से ऊपर नीचे कर | मै वैसे ही करने लगा |

दीदी बोली - ठीक है |

इसके बाद दीदी ने मेरे लंड के चारों तरफ कस कर के अपने होंठ चिपका दिए और फिर बोली चल अब

अपनी कमर हिला मैंने अपनी कमर को हल्के से ऊपर की तरफ उठाया मेरा लंड सरकता हुआ दीदी के मुंह में चला गया उसके बाद फिर से कमर जब नीचे आई तो लंड फिर से दीदी के मुंह से बाहर आ गया उसके बाद फिर से मैंने ऊपर की तरफ कमर हिलाई तो फिर से दीदी की मुंह में लंड तेजी से घुस गया मुझे बड़ा मजा आया तो मैंने तेजी से कुछ ज्यादा ही कमर उठा दी और मेरा तना हुआ लंड दीदी के मुंह में जा कर के बहुत तेजी से लगा था दीदी के दांत मेरे लंड पर लग गए थे | मैं चीख पड़ा और दीदी भी | दीदी के मुंह में जोर से ठोकर लगी थी तो दीदी भी चीख पड़ी |

दीदी बोली - पगले ऐसे नहीं करते हैं आराम आराम से धीरे धीरे करना है | आराम से कमर हिला |

मैंने हलके हलके से कमर हिलाने शुरू की और मेरा लंड दीदी के मुंह में धीरे-धीरे जाने लगा और बाहर आने लगा था पहले दीदी ने मेरे लंड के ऊपर अपने होठों को हलके से सटा रखा था लेकिन जैसे-जैसे मैं कमर हिला रहा था वैसे उसे दीदी अपने होठों को मेरे लंड पर कसके चिपकाती चली गई थी और अब उन्होंने मेरे लंड को अपने होठों से कसकर जकड़ लिया था मेरा लंड अब आसानी से दीदी के मुंह में नहीं जा रहा था तो मुझे कमर से जोर लगाना पड़ रहा था | मुझे बहुत मजा आ रहा था कुछ देर तक ऐसे ही कमर हिलाता रहा और दीदी मेरे लंड के चारो ओर कसकर अपने ओंठ चिपकाये रही और मेरे लंड को चूसती रही | दीदी न केवल मेरे लंड को अपने होठों की सख्ड़त जकड़ने से चूसती रही बल्कि अपना मुहँ भी चुदवाती रही | दीदी के मुहँ से लगातार लार बहती रही आयर मेरे लंड को जमकर भिगोती रही | हम दोनों ही बुरी तरह से हांफने लगे थे | शरीर पसीने पसीने हो चूका था | दीदी की आंखे बुरी तरह से लाल हो गयी थी | दीदी की आंखे और चेहरे को देखकर एक चीज तो समझ आ गयी थी लंड को अच्छे से चुसना कोई मजाक नहीं है | दीदी मेरे लंड को पूरा का पूरा चूसने के लिए कितनी मेहनत कर रही थी ये उनकी लाल आंखे ही बता रही थी | जब हम दोनों ही बुरी तरह हांफने लगे तो उसके बाद दीदी ने मेरे लंड को मुंह से बाहर निकाल दिया था और तेजी से मुठीयाने लगी और कुछ देर तक बुरी तरह से मुठियाती रही | उसके बाद फिर से चूसने लगी थी मै बस आनंद के सागर में गोते लगाता हुआ अपनी कमर अभी भी हिला रहा था |

और दीदी ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से एक छल्ला बना दिया था और उसी छल्ले में फंसा कर मेरे लंड को मसल रही थी | बार बार उस छल्ले को लार से भर देती ताकि मेरा लंड उस उंगलियों की बनी सुरंग में सरपट दौड़ता रहे | मै फिर से तेजी से कमर हिलाने लगा | मेरा लंड दीदी के उंगलियों की सुरंग की सख्त जकड़न में बुरी तरह मसल कर आगे पीछे होने लगा | जैसे जैसे मैं कमर हिला रहा था ऐसे की दीदी के उंगलियों के बने छल्ले में रगड़ खाकर होता हुआ लंड अपनी केचुल छोड़ दुसरे छोर पर बिलकुल नंगा होकर निकलता | उनके हाथ के बने छल्लों के बीच से मेरा लंड फिसलता हुआ दूसरी तरफ जाकर के खुल जाता था और उसके ऊपर की खाल पूरी तरह से खींची जाती थी और फुला हुआ लाल सुपाड़ा पूरी तरह से दूसरी तरफ छोर पर निकल जाता था मैंने कमर हिलाने बंद नहीं की थी दीदी ने धीरे धीरे कसके मेरे लंड को मसलना जारी रखा और उसके बाद में मेरे लाल गुलाबी सुपाडे को अपने मुंह में ले लिया और कस कर चूसने लगी थी |
 
इधर मैंने अपनी कमर हिलानी बंद कर दी थी जैसे-जैसे मैंने कमर हिलानी बंद करी दीदी ने अपने हाथों से हिला हिला कर मेरे लंड को मसलने लगी थी ऐसा लग रहा था जैसे दीदी जल्दी से जल्दी मेरे अंदर की मलाई को निकाल करके खाना चाहती हो |

दीदी - तूने कमर हिलानी क्यों बंद कर दी ...... चोदना ऐसे ही सीखेगा क्या बिना कमर हिलाए चुदाई नहीं होती समझ में आया |

जितेश और उसकी दीदी की चूत चुदाई की कहानी सुनकर रीमा को बुखार चढ़ने लगा | उसके हाथ चादर के अन्दर उसकी तौलिया को खोलते हुए गुलाबी चूत के लाल चूत दाने तक पंहुच गए | रीमा की एक उंगली उसके उस गुलाबी लाल दाने पर थिरकने लगी |

जितेश भी अब सीधे लेट गया | उसके मन में भी सुरूर चढ़ने लगा था | उसने भी अपने ऊपर चादर डाल ली और उसका हाथ भी उसके मुसल लंड तक पंहुच गया | चूँकि मोमबती खाना गरम करने वाली जगह पर रखी थी इसलिए जितेश की हरकत तो रीमा देख सकती थी लेकिन रीमा क्या कर रही है ये जितेश नहीं देख सकता था | दुसरे रीमा बेड पर लेती थी और जितेश जमीन में इसलिए रीमा के लिए जितेश को देखना बहुत आसान था | रीमा समझ गयी जितेश क्रिस्टीना को याद कर रहा है, उसका लंड उसकी दीदी की याद में अकड़ने लगा है | इसलिए वो ऊपर से चादर डालकर अब उसे मसलने लगा है रीमा की चूत दाने पर फिसलती उंगली से रीमा की आवाज में मादकता आने लगी |

रीमा - फिर क्या हुआ | जितेश ने आगे कहानी सुनानी शुरू की |

मैंने फिर से कमर हिलाने शुरू कर दी थी लेकिन इस बार दीदी की उंगलियों का छल्ला बहुत सख्त था इसलिए मेरा लंड उसने फंस जा रहा था दीदी ने ढेर सारी लार मुंह से निकाल कर मेरे लंड पर मसल दी और फिर मेरा लंड आराम से दीदी के उंगलियों के बनाए छल्लो के बीच से फिसलने लगा था मैं धीरे-धीरे जोर जोर से झटके लगाने लगा था | दीदी ने भी हाथों से जोर जोर से झटके लगाकर मेरे लंड को मसलने लगी थी | दीदी ने अपने उंगलियों के छल्लों के आखिरी सिरे पर अपने ओंठ सटा दिए | जिससे कि उनके दोनों हाथों की उंगलियों के बने छल्लो से लंड फिसलता हुआ ऊपर की तरफ निकल जाए और उसका सुपाडा सीधे दीदी के मुहँ की रसीले ओठो की जकड़न में समां जाए | अब मैं नीचे से धक्का मारता था तो दीदी की दोनों हाथो की उंगलियों के छल्लों को चीरता हुआ ....फिसलता हुआ लंड दूसरी छोर पर निकल जाता था और दीदी के नरम ओंठो की सुरंग में समां जाता | दीदी कसकर लंड के सुपाडे को चूस लेती | काफी देर तक यही सिलसिला चलता रहा मैं नीचे से जोर-जोर से बड़े-बड़े धक्के लगाता रहा | सांसे मेरी धौकनी बन चुकी थी लेकिन मैं पूरी तरह से जोश में भरा हुआ था इसलिए मुझे थकान महसूस नहीं हो रही थी कुछ देर बाद दीदी ने फिर से मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया था और अपने दोनों हाथों से मेरे लंड को कसके मसल रही थी और सुपाडे को चूसने लगी थी और जैसे जैसे लंड के ऊपर दीदी अपनी सख्त जकड़न बढ़ाती जा रही थी मेरे लंड में सनसनाहट पड़ने लगी थी मेरा बदन अकड़ने लगा था और मेरे हाथ पांव सब कांपने लगे थे और एकदम से जैसे लगा जैसे कोई तेज लहर आई और मै उसमे बहता चला गया |

जल्द ही मेरा दिमाग और बदन दोनोई मेरे काबू में नहीं थे तेजी से मेरे लंड से पिचकारिया छूटने लगी थी मैं स्खलन की इस भंवर मदहोश हो गया था | मेरे लंड से निकलने वाली पिचकारी दीदी के चेहरे पर जाकर लगी थी उनकी आंख पर जाकर लगी थी उनकी नाक पर जाकर लगी थी और कुछ सीधे उनके मुंह में चली गई थी दीदी उन्हें तुरंत गटक गई और उसके बाद भी उन्होंने मेरे लंड को मसलना और चाटना नहीं छोड़ा था | तब तक मसलती रही जब तक कि उसके अंदर से एक एक बूंद उन्होंने नहीं निकाल दी | दीदी धीरे-धीरे करके सब चट कर गई उन्होंने अपने चेहरे के ऊपर लगी हुए सफ़ेद मलाई को भी चाट नहीं डाला | अपनी उंगलियों को चाट गई और मेरे लंड को भी चाट गई थी मैं तो बिल्कुल निढाल होकर पर पड़ गया था मेरा लंड सूखने लगा था लेकिन दीदी को बहुत मजा आया और मुझे भी बहुत मजा आया था मैं अपनी तेज सांसों को काबू कर रहा था और दीदी मुझे देख रही थी

कुछ देर तक दीदी मुझे निहारती रही और फिर पूछने लगी - कैसा लगा लंड चूसना मजा आया |

मैंने एक लंबी साँस ली और बोला - हां दीदी बहुत मजा आया |
 
दीदी बोली - जवानी के खेल में ऐसे ही मजा आता है अभी तो मैंने सिर्फ तुझे जवानी का एक खेल का दर्शन कराया है ऐसे जवानी के हजारों खेल हैं जिनको खेल करके तू हमेशा जन्नत की सैर करेगा |

मैंने दीदी से पूछा - दीदी इससे पहले भी आपने किसी का लंड चूसा है |

दीदी बोली - हां स्कूल में दो लड़के थे और दोनों लड़कियों से बहुत परेशान करते थे | इसलिए मुझे उनसे बचने के लिए मैंने उनके लंड चूसने शुरू कर दिए थे |

मै - दीदी आपने मेरा लंड क्यों चूसा मैंने तो आपसे कहा भी नहीं था |

दीदी - अरे पगले एक बार लंड चूसने की लत लग जाए तो फिर हमेशा लंड की तलाश ही लगी रहती है | पहले पहले तो मुझे मजा नहीं आता था और मुहँ में भी दर्द होता था लेकिन अब लंड चूसते चूसते मेरी आदत पड़ गई थी | मुझे मजा भी आने लगा था |

4 महीने हो गए वह दोनों लड़के तो कॉलेज चले गए आगे की पढ़ाई के लिए | मेरे को तो आदत लग गई थी, जब तक लंड चूसकर उसकी मलाई न पिऊ, मन में बेचैनी सी रहती थी |

दीदी एक लम्बी साँस लेती हुई - मुझे लगा तू समझेगा इसीलिए मैंने तुझसे यह सारी बातें बताएं और मुझे ख़ुशी है कि तूने सब कुछ बहुत अच्छे से सीख रहे हो और किसी को बता भी नहीं रहे हो | इसीलिए तो मेरे लिए तुम खास है और हमेशा खास रहोगे | यह सब चीजें अपने बहुत खास आदमी को सिखाई जाती हैं |

मैं - कितना खास हूं दीदी मै आपके लिए |

दीदी - तू बहुत खास है मेरे लिए, तू सोच तुझे अपनी चूत भी दे सकती है ये तेरी दीदी चोदने के लिए | चूत सिर्फ किसी बहुत खास आदमी को ही चोदने के लिए दी जाती है |

मै हैरानी से - ऐसा क्या होता है चूत चुदाई में | चूत इतनी खास क्यों है दीदी | चूत सिर्फ किसी बहुत खास आदमी को ही चोदने के लिए क्यों लड़कियां देती है |

दीदी मेरे बाल सहलाती हुई - तुझे पता नहीं है लड़की की चूत बहुत खास होती है, ये लड़की का सबसे अनमोल गहना होती है इसीलिए इसे लड़कियां छिपाकर बचाकर रखती है | चूत सबसे नाजुक होती है | किसी भी चूत का छेद किसी लड़की के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बढ़ा उपहार होता है | तुझे पता है जब एक आदमी अपने लंड से चूत को चोदकर अपनी मलाई चूत की गहराई में छोड़ देता है तो इससे बच्चा पैदा होता है |

मै हैरानी से - बच्चा पैदा करने के लिए चुदाई करनी पड़ती है, तो अगर मै आपको चोदुंगा तो आपको बच्चा पैदा हो जायेगा |

दीदी मेरी मासूमियत पर हंसने लगी - हाँ हो भी सकता है |

मै डर गया - दीदी फिर मै आपको कभी नहीं चोदुंगा |

दीदी - अरे पगले, बच्चा पैदा करने के लिए एक खास टाइम पर चोदना होता है |

मै - अच्छा और वो टाइम का कैसे पता लगता है |

दीदी - हर समझदार लड़की को वो टाइम पता होता है |

मै - चुदाई इतनी खास है दीदी |

दीदी - हाँ |

मै - इसका मतलब आपकी चूत भी बहुत खास है बाकि सब लडकियों की तरह |

दीदी - हाँ इसीलिए पूरी दुनिया चूत के पीछे भागती रहती है |

मै - तो पूरी दुनिया बच्चा पैदा करने के लिए इस चूत के पीछे पड़ी रहती है |

दीदी - हाँ चूत का असली काम तो वही है लेकिन आदमी को नरम नरम कसी हुई चूत चोदने में मजा आता है | ऐसे समझ, जब एक लड़की पहली बार चुदती है तो उसका चूत का छेद कुंवारा होता है और जब लड़की किसी लड़के को वो कुवारी चूत चोदने को देती है तो वो लड़का पूरी जिंदगी के लिए उसका गुलाम बन जाता है, उसकी हर बात मानता है |

मै - तो मै भी आपका गुलाम बन जाऊंगा |

दीदी - मजे भी तो तू ही लूटेगा मेरी चूत भी तुझे बार बार चोदने को मिलेगी |

मै - ऐसा क्यों दीदी आपको मजा नहीं आएगा चुदाई में |

दीदी - आता है लेकिन जब कोई ठीक से चूत को चोदता है |

मै - ठीक से क्या मतलब |

दीदी - अरे बाबा इतनी जल्दी है तुझे सब जानने की , सब बताउंगी धीरे धीरे | तू इतना खास है की तेरे से अपनी जिस्म और रूह का कुछ भी नहीं छिपाउंगी | तुझे पता नहीं तुम कितना खास है तूने मेरी ४ महीनो की प्यास बुझा दी है |

मै - ये कौन सी प्यास है, प्यास लगती है तो पानी पीते है |

दीदी - तुझे नहीं पता, ये जिस्म की प्यास है जवानी की प्यास है ये सिर्फ पानी पीने से नहीं बुझती |
 
मै - दीदी अब आगे क्या है आगे का कल बताऊंगी |

तब तक एक काम कर | दीदी ने मुझे एक सीडी लगाई और मै उसे देखने लगा | उसी सीडी में दिखाया था कैसे लोग सेक्स करते हैं | मैंने और दीदी ने आधे घंटे बैठकर वह पूरी वीडियो देखें इसी बीच दीदी ने मुझे अपनी बाहों में भरके बैठाए रखा | मैं दीदी को सहलाता रहा और दीदी मुझे सहलाती रही | कभी मैं उनके दूधो को मसलता कभी मैं उनके पीठ को सहलाता था | दीदी पहले अपनी चूत सहलाती रही , फिर मेरे लंड और गोलियों को सहलाने लगी | मैं भी उनके पीछे जाकर उनके बड़े-बड़े मांसल चूतड़ों की मालिश करने लगा था | फिर दीदी पलट कर मुझे बांहों में भर लेती और मेरे सीने को सहलाती कभी वह मेरे गालों को सहलाती कभी चूमने लगती | कभी मेरे मुरझाये लंड को सहलाती कभी मेरी गोलियों से खेलने लगती |

हम लोग आधे घंटे तक यही करते रहे और उस ब्लू फिल्म को भी देखते रहे | इसके बाद पता नहीं दीदी को क्या हुआ वह उठकर के एक तरफ चली गई और दूसरी सीडी ले आई थी और उन्होंने वह सीडी लगा दी और उसके बाद में वह थोड़ा सा शहद और मक्खन भी ले आई | उन्होंने अपनी चूत के दोनों गुलाबी ओंठो को अच्छे से फैला दिया और उसमे शहद भर दिया |

दीदी - चल चाट इसे |

मैं आज्ञाकारी बालक की तरह उनकी जांघों के बीच में आ गया था उन्होंने अपने दोनों पैर हवा में उठा दिए थे और मैं कसकर के कुत्ते की जीभ निकालकर उनकी चूत को चाटने लगा था और चाटते चाटते मैंने उनके चूत पर लगे हुए शहद की एक एक बूंद को अच्छे से चाट गया था | दीदी पूरी तरह से मदमस्त हो गई थी | दीदी अलग-अलग पोज में बैठ कि मुझे अपनी चूत दिखाती है और फिर उस पर मक्खन लपेट देती |

मक्खन लपेटने के बाद मुझे आदेश देती - चल खा मेरी मक्मुखन मलाई जैसी चूत को , चाट इसे |

मै दीदी की जांघो के बीच में घुसकर दीदी की चूत और आसपास के सारे इलाके को तब तक चाटता रहता जब तक मक्उखन ख़त्सेम न हो जाये | इसी बीच में मेरे लंड में फिर से हरकत होने लगी थी यह सब करते करते लगभग एक घंटा हो गया था | मुझे लग रहा था कहीं कोई आ ना जाए | हो सकता है दीदी की छोटी बहन ही आ जाये | हम दोनों को ऐसी हालत में पकड़ ले |

मुझे डर भी लग रहा था मैंने दीदी ने पूछा - दीदी आपको नहीं लगता को ज्यादा देर हो गई है दीदी बोली नहीं कोई दिक्कत नहीं है | छुटकी अभी भी कार्आटून देख रही है और आधे घंटे तक वो वहां से नहीं उठने वाली | जब तक मम्मी पापा नहीं आते तब तक वो टीवी के सामने से उठने से रही | तू चुपचाप बस मेरी चूत चाटता रह | दीदी की मक्खन लगी चूत को मैंने अच्छे से चाटा था इसके बाद दीदी ने और ढेर सारा मक्खन लगा दिया | दीदी को बड़ा मजा आ रहा था | वो मेरे चूत चाटने से बिलकुल मदमस्त हो गयी थी | उनकी नशीली आँखे देख ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने कोई नशा कर रखा है लेकिन असल में वो वासना के नशे में बुरी तरह से डूबी हुई थी |
 
मैं उनकी चूत को फिर से चाटने लगा | दीदी बार बार मख्खन लगाती रही और मैं उसे बारी-बारी से चाटता रहता था , दीदी बीच बीच में एक दो बार कांपी भी जबदस्त |

उस कांपने का रहस्य मुझे बाद में पता चला | ये सब करते थे काफी देर हो गई थी और मेरा लंड फिर से पूरी तरह से खड़ा हो गया था दीदी अब बिस्तर पर लुढ़क गई थी और उन्होंने अपने पास में मुझे बुलाकर तेजी से अपने हाथ से मेरे लंड को मसलना और मुठियाना शुरू कर दिया था और वह एक हाथ से मेरे लंड को मुखिया रही थी और दूसरे हाथ से वह अपने बड़े-बड़े दूधों को मसल रही थी उसके बाद दीदी ने मेरे लंड को छोड़ा और बोली - चल तू मेरी चूत को देख करके मुठ मार |

मैं दीदी के जांघो के बीच में उनके चेहरे के सामने आ करके बैठ गया | दीदी ने पूरी तरह से जागे फैला दी थी उनकी गुलाबी चूत के दोनों गुलाबी फाके भी अलग हो गए थे और मुझे उनकी कसी हुई गुलाबी मखमली चूत की सुरंग की गुलाबी लालिमा के दर्शन होने लगे थे | क्या चूत थी बिलकुल गोरी चिकनी सफाचट | कही कोई दाग नहीं, कही कोई बाल नहीं | गोरेपन और गुलाबी लालिमा लिए दीदी की चूत खूबसूरती की एक मिसाल थी | जिसे बस महसूस किया जा सकता था | चूत के अंदरूनी ओंठ भी होते है ये मुझे तब पता चला जब मैंने दीदी से पुछा - दीदी ये आपके चूत के ओंठो के अन्दर गुलाबी पंखुडियां कैसी है | क्या यही गुलाबी चूत होती है |

दीदी - नहीं पगले ये तो मेरी चूत के अंदरूनी ओंठ है | जब ये ओंठ खुलते है तब चूत का छेद दीखता है | अभी जितना कहाँ है उतना कर, आगे सब बताउंगी |

दीदी अपने दोनों हाथों से अपने दोनों दूधो को मसलने लगी थी | और उन्होंने मुझे अपने दोनों हाथों से अपने लंड को कस के मुठीयाने को कहा था | मैं दीदी के चूत के बिल्कुल सामने बैठकर तेजी से अपने लंड को मुठिया रहा था, लेकिन मेरी नजर दीदी की गुलाबी करिश्माई हसींन चूत से हट ही नहीं रही थी | मेरा हाथ मेरे लंड को बुरी तरह मसले जा रहा था, दीदी बड़े ही कामुक अंदाज में मुझे देख रही थी | मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन दीदी के पूरे बदन को देख कर पूरी तरह से पागल हो गया था | मैं तेजी से अपने लंड को हिला रहा था |

मै हांफता हुआ - दीदी अपनी चूत के बारे में और बताओ न |

दीदी अपने दूध को मसलना छोड़ कर अपनी चूत को सहलाने लगी | दीदी ने अपनी चूत के उपरी सिरे को उंगली से रगड़ने लगी |

दीदी - पहले ये बता तुझे क्या क्या पता चल गया है |

मै अपनी तेज सांसो को संभालता हुआ तेजी से लंड पर अपनई हथेली की मुट्ठी को फिसलाता हुआ बोला - दीदी आपकी चूत देख ली, चूत के ओंठो को पहचान गया हूँ | चूत का चीरा भी आपने बता दिया | अब आगे भी बताइए |

दीदी ने आपनी उंगलियों से अपनी गुलाबी चिकनी चूत को फैलाया, दीदी की आपस में चिपकी हुई चूत की पंखुड़िया खुल गयी | उनके दोनों फांके अलग हो गए | दीदी ने चूत के उपरी हिस्से को कसकर पीछे को खीचा तो एक लहसुन के इतना लाल लाल दाना उनकी खाल से बाहर आ गया | दीदी उस पर उंगली लगाती हुई बोली - इसे चूत दाना कहते है | और ये नीचे की तरफ जा रही पंखुडियो की चूत के अंदरूनी ओंठ कहते है |

मै हैरानी से दीदी की खुली चूत की गुलाबी चमत्कारिक रंगत देखने लगा | इससे मेरा लंड पर फिसल रहा हाथ रुक गया |

दीदी तेज आवाज में - अगर लंड को मसलना रोका तो कुछ नहीं बताउंगी | मुझे मेरी गलती का अहसास हुआ |

मेरे हाथ ने लंड पर फिर से स्पीड पकड़ ली |

दीदी - स्पीड कम नहीं होनी चाहिए |

मै दीदी की गुलाबी चूत देखकर उत्तेजना से नहा गया | मैंने लंड को और तेज मुठियाना शुरू कर दिया |

दीदी - तो बोल इस गुलाबी दाने को क्या कहते है |

मै हांफते हुए - चूत दाना दीदी |

दीदी - ये औरत की वासना का बटन होता है | अगर तुम्हे कोई लड़की चोदनी है और उसका मन नहीं है तो बस जाकर हलके हलके इस दाने को मसलने लगाना | लड़की अपने आप ही गरम हो जाएगी और ख़ुशी ख़ुशी चुदने को राजी हो जाएगी |

मै - दीदी इसीलिए आप इसे रगड़ते हो |

दीदी - हाँ जिन औरतो को चुदवाने के लिए लंड नसीब नहीं होता वो इसी चूत दाने को रगड़कर अपनी प्यास बुझाती है |

मै - दीदी आपने भी इसे रगड़कर अपनी प्यास बुझाई है |

दीदी - हाँ पगले यही तो कर रही हूँ अब तक |

दीदी - जब लंड चूत में जाता है ये चूत के पतले ओंठ लंड को सहलाते है |
 
मेरी उत्तेजना का ज्वार अब चरम पर पंहुचने लगा था | फिर दीदी ने नीचे की तरफ उंगली ले जा करके बताया, जहाँ पर ये चूत के अंदरूनी ओंठ ख़त्म होते है वहां से चूत की मखमली गुलाबी सुरंग का मुहाना शुरू होता है |

मै गौर से दीदी की चूत की गुलाबी मखमली सुरंग का छेद देखने लगा | लेकिन मुझे तो छेद कही दिखा नहीं |

मै - दीदी आप बोल रही थी चूत में छेद होता है लेकिन मुझे तो कही नहीं दिख रहा |

दीदी - अरे पगले छेद होता है लेकिन अभी मेरी चूत के दीवारों ने उसे कसकर बंद कर रखा है | इसलिए वो बंद है |

मै - दीदी - आपकी चूत में से पानी निकल रहा है क्या |

दीदी - हाँ जब लड़की को चुदास चढती है और वो चूत दाने को रगडती है तो चूत से पानी रिसता है जिससे चूत गीली हो जाती है |

मै - दीदी अपनी चूत की दीवारे फैलावो न मुझे आपकी चूत का छेद देखना है |

दीदी - चूत की दीवारे मै नहीं फैला सकती, उन्हें सिर्फ लंड फैला सकता है, जब मेरी चूत में लंड घुसेड़ोगे तब खुद ब खुद चूत की दीवारे फ़ैल जाएगी तब देख लेना मेरी चूत का छेद |

मै अपनी उत्तेजना के आखिर पड़ाव की पार करने लगा था | दीदी की चूत को देखकर तो जैसे मेरी उत्तेजना समय से पहले बह निकली |

मै अपने चरम के कुछ आखिरी पल में बेतहाशा लंड मुठीयाने लगा | कुछ ही देर में मेरी पिचकारी छूटने वाली थी, मेरे हाथ की स्पीड और कांपती टांगो को देखकर दीदी समझ गई थी मेरी पिचकारी छूटने वाली है मेरे शरीर की अकड़न से ही उन्हें अंदाजा हो गया था | उन्होंने कहा था मै पानी मलाई उनकी चूत के मुहाने पर निकाल दू | मै दीदी की चूत के पास लंड ले गया और तब तक मेरी वासना का बांध टूट चूका था | मै बस तेजी से कराहने लगा | मैंने दीदी चूत के जस्ट ऊपर अपनी पूरी पिचकारी निकाल दी | उनकी पेट के नाभि के नीचे और चूत के ऊपरी हिस्से पर मैंने सारी मलाई निकाल दी | यह देखकर वह बहुत खुश हुई | मै तेजी से हांफता हुआ निढाल सा वही बैठ गया | दीदी एक उंगली से उस मलाई को उसी इलाके में धीरे-धीरे से घुमाने लगी थी | मैं पूरी तरह से पस्त गया था | दीदी की चूत भी बहने लगी थी | दीदी तो जैसे जन्नत में पहुंच गई थी | एक ही घंटे के अंदर उन्होंने मेरी दो बार मलाई निकाल दी थी और मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी कि मैं ठीक से खड़ा हो सकूं मैं वहीं बैठे बैठे बिस्तर निढाल होकर लुढ़क गया |

जितेश को लग रहा था रीमा नीचे उसकी तरफ नहीं देख रही है और सिर्फ उसकी कहानी सुन रही है इसलिए वो तेजी से अपनी चादर के अन्दर अपने लंड को मसल रहा था | रीमा भी चूत में दो उंगलियाँ करके खुद की चूत में मची सनसनाहट मिटाने की असफल कोशिश कर रही थी | जितेश की हिलती चादर देख रीमा समझ गयी की अन्दर क्या चल रहा है | इधर मोमबत्ती अपनी आखिरी सांसे ले रही थी | कुछ ही देर में भभक कर बुझ गयी | अब कमरे में घनघोर अँधेरा था |

रीमा - छुप क्यों हो गए जितेश, आगे बतावो फिर क्या हुआ |

रीमा की आवाज खुद वासना में लड़खड़ा रही थी, उसकी सांसे तेज हो चली थी | इधर जितेश का तो और भी बुरा हाल था | उसकी तेज सांसे और हांफता सीना अभी इस हालत में नहीं था की वो आगे की कहानी सुना सके | उसने एक लम्बी साँस ही और हल्की आवाज में आगे की कहानी सुनानी शुरू कर दी | रीमा उसकी तेज सांसे सुन सकती थी लेकिन रीमा खुद अपनी लगायी आग में घिरी थी वो कहाँ से जितेश के बदन में लगी आग की फिक्र करती | दोनों को साधने वाला बस एक कहानी ही थी | जितेश ने आगे कहानी सुनानी शुरू कर दी | इसी के साथ जितेश का हाथ लंड पर फिसलने लगा और रीमा की उंगलियाँ उसकी चूत में अन्दर बाहर होने लगी |
 
इसके बाद कई दिन बीत गए थे दीदी को मेरे मुझे दीदी और मुझे अकेले कभी मौका ही नहीं मिला था असल में दीदी की बहन बीमार हो गई थी जिसकी उसे दीदी को उसका ख्याल रखना था इसलिए मुझे सिर्फ चुपचाप की पढ़ कर वापस लौट आता पड़ता था | इधर दीदी को भी लग रहा था कहीं ऐसा ना हो कि रोज रोज मिलने के चक्कर में किसी दिन पकड़े जाएं इसलिए दीदी भी सावधान हो गई थी और शायद उनके मां-बाप को थोड़ा सा शक भी हो गया था | छोटे शहरो में गॉसिप वाली औरते कुछ भी अफवाह उड़ा देती है | मेरे केस में भी मोहल्ले की किसी औंटी ने दीदी की माँ के कान भर दिए | हालाँकि वो लाख कोशिशो के बाद कुछ भी नहीं जान पाए लेकिन उनके मन में संखा जरूर पैदा हो गई थी इसीलिए आजकल ऑफिस से जल्दी आने लगे थे | हालांकि कुछ दिनों बाद जैसे सब नॉर्मल हो गया और उनके मां-बाप भी चर्च से देर में वापस आने लगे थे और छुटकी भी बाहर खेलने जाने लगी थी |

1 दिन की बात है बाहर बहुत गर्मी थी और दीदी के बरामदे में कूलर भी नहीं था इसलिए मैं और बाकी बच्चे दीदी के कमरे में बैठकर ट्यूशन पढ़ रहे थे मुझे नहीं पता था कि आज दीदी के मां-बाप घर वापस आएंगे ही नहीं क्योंकि आज दीदी के मां-बाप किसी की शादी करवाने के लिए दूसरे शहर गए हैं | वहां पर उनकी एक रिश्तेदारी है तो वह छुटकी को भी ले गए थे | दीदी के एग्जाम चल रहे थे इसलिए उन्होंने जाने से मना कर दिया | अब तो रोज मन होता था दीदी को नंगा देखने के लिए लेकिन क्या करें मजबूरी थी कम से कम 10 दिन हो गए थे तब से और आज तक मैंने दीदी की एक झलक भी ठीक से नहीं देखी थी | रोज रात में लंड पकड़ कर दीदी के नाम पर मुथियाता था लेकिन दीदी का जिस्म देखने को तरस रहा था |

दीदी ने हालांकि बताया नहीं कि उनके मां-बाप किसी की शादी करवाने के लिए दूसरे शहर गए हुए हैं लेकिन जब ट्यूशन खत्म हुई और उसके बाद दीदी बोली - अच्छा एक काम करो आज तुम्हारी एक एक्स्ट्रा क्लास लगा देते हैं तब मेरी बुझी हुई उम्मीदों पर एक नई रोशनी पड़ी | मैं अंदर उत्साह से भर गया मैं समझ गया कि आज फिर से दीदी के साथ मुझे जवानी के नए गुर सीखने को मिलेंगे |

दीदी बोली - अच्छा ठीक है चलो मैं तुम्हें कुछ और सवाल बताती हूं उसके बाद में तुम जा सकते हो |

मुझे समझ में नहीं आया कि दीदी अभी तो एक्स्ट्रा क्लास की बात भी कर रही है उसके बाद जाने को भी कह रही हैं |

दीदी ने मुझे एक सवाल बताया और बोली - अब ऐसा करो तुम घर जाओ | अभी मुझे कुछ काम है इसलिए तुम्हें मैं थोड़ी देर बाद बुलाती हूं | उसके बाद मै किताब लेकर मायूस सा दीदी के घर से अपने घर की तरफ चल दिया था | शाम के आठ बजे थे मै अपना होमवर्क बस ख़त्म ही कर पाया था | बाहर झांक कर देखा तो मेरी माँ किसी से बाते कर रही थी | मैंने देखा कि दीदी मेरे घर आ गई है और मेरी मम्मी से बातें कर रही हैं |
 
दीदी ने मम्मी से बोला कि आज रात को अकेली हैं और उनके मां-बाप दूसरे शहर में शादी करवाने गए हुए हैं वह छुटकी भी उनके साथ घूमने के चक्कर में गई हुई है इसलिए क्या मैं आज रात उनके यहां रात में सो सकता हूं मेरे कानों में जैसे ही शब्द बड़े मेरी तो बांछें खिल गई थी | ना कि मैं अपना उत्साह छिपाए हुए चुपचाप अपनी किताबों को बैग में रखकर और तैयार हो गया |

मेरी मां बोली - ठीक है खाना खिलाने के बाद इसको आपके यहां भेज दूंगी खाना |

दीदी बोली - मेरे यहाँ खाना कुछ ज्यादा हो गया है तो कोई दिक्कत नहीं आज मेरे यहां खाना खा लेगा |

माँ को थोडा अचरज हुआ - ठीक है अगर तुम्हें लगता है तो चले जाओ इसी बहाने कुछ वहां पढाई भी कर लेगा |

दीदी ने बोला - वैसे मैथ में काफी अच्छा हो गया है लेकिन मैं चाहती हूं यह मैथ में डिस्टिंक्शन लाए |

यह सुनते ही मां खुश हो गई |

मै - हाँ बेटा तेरी टूशन से इसकी मैच बहुत अच्छी हो गई है मुझे बड़ी खुशी है |

इसके बाद दीदी ने मुझे पुकारा और मुझे अपनी मैथ और साइंस की सारी बुक्स बैंग में भर कर लाने को कहा |

दीदी - चलो आज रात मै ढेर सारा मैथ पढ़ाती हूं साइंस भी पढ़ाती हूं |

मै तो पहले से ही तैयार था, मैंने बैग में किताबे रखने का नाटक किया दीदी के साथ चल दिया था | दीदी ने घर में आते ही अपना मैंन गेट बंद कर दिया और लाइट बुझा दी | मेरे अंदर से खुशी का ठिकाना नहीं था मैं इतना खुश था कि10 फुट उछालना चाह रहा था आज फिर से दीदी के साथ में जवानी का मजा लूटूँगा | लेकिन वहां पहुंचते ही मेरा सारा जोश तब काफूर हो गया जब दीदी बोली अच्छा काम करो अपनी मैंथ और साइंस की किताब खोलो और पढ़ाई शुरू कर दो | तब तक मैं खाना गरम करके लाती हूँ | फिर साथ में खाना खाएंगे | मैं निराश होकर के अपनी किताबें खोल कर बैठ गया | दीदी उधर खाना गर्म करती रही और उसके बाद कुछ देर बाद वह खाना लेकर आ गयी | हम दोनों ने खाना खाया | उसके बाद ने दीदी मुझे फिर से कुछ सवाल समझाने लगी थी हालांकि मेरा मन बिल्कुल नहीं लग रहा था लेकिन मैं उन्हें नाराज नहीं कर सकता था | मेरी नजर बार-बार उनके चेहरे और सीने पर जा रही थी | कुछ देर बाद दीदी ने खुद ही किताबे हटाकर अलग रख दें और पता नहीं कौन सी एक सीडी लेकर आए और उसे लगा दिया और टीवी पर मूवी देखने लगी थी |

मैं भी धीरे-धीरे उनके पास चल गया था | वह कोई रोमांटिक मूवी चाहिए मेरा उस मूवी में बिल्कुल मन नहीं लग रहा था | दीदी के जब मैं पास गया तो दीदी ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मैं अपने हाथ खिसकाते हुए दीदी के स्तनों पर ले गया | उनके बड़े-बड़े उठे हुए ठोस सुडौल उरोंजो को ऊपर से ही मसलने लगा था | दीदी ने मना नहीं किया | धीरे धीरे मै मै हाथ फिसलाते हुए दीदी के नीचे सलवार में घुसेड़ने लगा तो दीदी ने रोक दिया और बोली अभी नहीं |

मैंने कहा - क्यों क्या हुआ दीदी |

दीदी बोली - पिछले १० दिन में वहां बहुत जंगल हो गया है |

मैं कुछ समझा नहीं | मेरे बने मेरे कन्फ्यूज्ड चेहरे को देखकर बोली - झांटे बड़ी हो गई हैं उन्हें बनाना होगा |

मैं समझ गया कि वहां पर बाल उग आए हैं |

मैं - तो अब आगे क्या करना |

दीदी बोली नहीं - धीरज रखो, जंगल साफ़ करने में टाइम लगेगा तब तक सब्र करो | लेकिन मुझे सब्र नहीं था |

दीदी चाहती थी पहले मूवी खत्म करें उसके बाद आगे कुछ करे | लेकिन मुझे सब्र नहीं था मैंने अपना हाथ वहां घुसेड़ दिया और दीदी की चूत के जंगलों के बीच से जाकर के दीदी के चूत के दाने को सहलाने लगा था दीदी भी धीरे-धीरे उत्तेजित होने लगी थी | जैसे ही मूवी खत्म हुई दीदी ने तुरंत मेरे सारे शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी पेंट उतार के अलग फेंक दी | अब मैं दीदी की तरह नीचे चड्डी नहीं पहनता था जैसे ही मेरी पेंट नीचे खिसकी मेरा तना हुआ मोटा तगड़ा लंड दीदी की आंखों के सामने था |

दीदी ने बिना देर किए मेरा लंड सीधे अपने मुंह में रख लियाऔर सुपाडे को कस के ऑटो से चूसने लगी थी| मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था मैं सिसकारियां भरता रह गया था | दीदी कसके लंड को चूसने लगी और मसलने लगी | मैं आनंद के सागर में गोते लगाने लगा था लेकिन कुछ देर बाद दीदी ने मेरे लंड को चूसना छोड़ दिया और मेरी गोलियों से खेलने लगी थी | मुझे बहुत मजा आ रहा था लेकिन इस तरह से दीदी के लंड छोड़ने का कारन मुझे समझ में नहीं आया था मेरा बहुत मन कर रहा था दीदी मेरा लंड चुसे|

मैंने दीदी का हाथ फिर से अपने लंड पर लगाने की कोशिश की लेकिन दीदी ने मुझे झटक दिया |

मैंने दीदी से पूछा - दीदी क्या हुआ, मेरा लंड चूसो न बहुत मन कर रहा है |

दीदी बोली - आज तुझे कुछ नया सीखना होगा | अब हर पुरानी चीज नहीं चलेगी | ठीक है तेरा मन जरूर कर रहा है लेकिन तुझे एक चीज याद रखनी चाहिए मेरा मन क्या कर रहा है, ये ज्यादा जरुरी है | मेरा मन तेरा लंड चूसने का नहीं है | तेरा लंड खड़ा था इसलिए मैंने चूस दिया था कि तुझे थोड़ा सा राहत मिल जाए हालाँकि तब भी मेरा मन तेरा लंड चूसने का नहीं है |

मै - ठीक है दीदी फिर आपका क्या मन है |
 
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