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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

रीमा अन्दर से रो पड़ी, उसका प्रतिरोध एक पल में स्वाहा हो गया, उसका चट्टानी फौलादी इरादा बस जिस्म एक तरंग के भंवर में उड़ गया | मन में घनघोर निराशा भर गयी | उफफ्फ्फ्फ़ नानानान्नाहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीही क्या मेरा बदन भी ....................उफ्नफ्हींफ्फफ्फ्फ़ नहींहीहीहीहीहीही रीमा ये नहीं हो सकता .............................. इसको वही मिलेगा जो मै चाहूंगी | रीमा को यकीन नहीं हुआ उसके बदन की छुपी हुई खवाइश इस तरह की निर्लज्जता की हद तक बदरंग और डार्क हो सकती है | अब क्या बस यही दिन देखना बचा था उसे | एक गार्ड से गांड मरवाने का ख्याल ही उसको इतना घटिया लगा कि उसका मन कसैला हो गया लेकिन उसके बदन की प्रतिक्रिया कुछ और ही थी, आखिर हवस की दुनिया में दिमाग का क्या काम विचारो का क्या काम | उसके मन के कोने में दबा ये अनोखी वासना का डार्क रोमांच उसके शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया | नहीं नहीं ये संभव नहीं है बिलकुल नहीं ..................

गार्ड ने रीमा की पिछली सुरंग की फौलादी जकड़न को चीरते हुए उसकी सुरंग में एक उंगली घुसेड़ दी |

रीमा ने मुहँ से एक लम्बी चीख निकल गयी - आआआआआआआआआआआअ ईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआआ |

उसका लंड रीमा की चूत की दरार पर रगडन खा रहा था | रीमा जिस्म के अन्दर की अनजानी सी वासना की तरंग से सिहर उठी लेकिन अगले ही पल वो अपनी नैतिकता की आवाज सुनकर अपनी चेतना में लौटी |

रीमा ने अपने अन्दर का सारा आत्मबल इकठ्ठा किया और गार्ड को जोर से झटका दिया - छोड़ो मुझे वरना मै शोर मचा दूँगी, फिर सारे गार्ड आ जायेंगे और तुमारा वो हस्र करेगें ....................जिंदगी भर ..................|

गार्ड का वासना का नशा काफूर हो गया ........ गार्ड एक झटके में पीछे हट गया | कुछ देर तक रीमा की गुस्से से लाल लाल आंखे देखता रहा | फिर निराश होकर - क्या मैडम दिखा दी न अपनी औकात | इससे अच्छी तो रंडी होती है पैसे भले ही लेती हो लेकिन कम से कम खड़े लंड को धोखा तो नहीं देती |

रीमा वैसे भी गुस्से से लाल थी गार्ड की बातो ने उसमे और पेट्रोल छिड़क दिया | रीमा ने उसे एक करारा चाटा रसीद कर दिया |

गार्ड भी झुन्झुला गया - एक तो अपना जिस्म दिखा दिखा कर लंड खड़ा कर देती हो और ऊपर से चोदने भी नहीं देती | क्या चाहती हो मैडम |

रीमा भी गुस्से की वजह से अपने काबू में नहीं थी - औकात में रह अपनी |

गार्ड - ठीक है मैडम, इतना कहकर गार्ड अपने कपड़े समेटने लगा |

गार्ड - अपनी चूत अपनी गांड में घुसेड़ लो, रखो अपनी चूत और गांड अपने पास, हाथ से काम चला लूँगा |

गुस्से में रीमा वही नंगी खड़ी कांपती रही | रीमा को लगा वो जीती बाजी जीतते जीतते हार गयी | गार्ड अपने कपड़े पहनने लगा, रीमा के लिए करो या मरो की स्थिति थी | आखिर क्या करे वो | गार्ड ने उसकी गांड में उंगली घुसेड़ कर उसके कुछ अनजाने अरमान जगा दिए थे | आग तो उसके तन बदन में भी लगी हुई थी लेकिन सबसे जरुरी था उसके लिए आजाद होना | वासना और आजादी के मानसिक द्वन्द के ताने बाने में रीमा उलझ कर रह गयी | एक गार्ड के साथ वो इस हद तक चली गयी यही क्या कम था लेकिन आगे जो भी वो सोच रहा था उसको करने की हिम्मत रीमा में नहीं थी |

गार्ड अपनी शर्ट पहन चूका था, वो अपने खड़े लंड को थामते हुए पेंट पहनने लगा |

रीमा को कुछ तो करना था वर्ना अब तक का किया सब ख़त्म - बस औरत की एक न पर सारी मर्दानगी लंड में जाकर घुस गयी |

गार्ड कुछ नहीं बोला |

रीमा - बड़ी कसमे खा रहे थे मुझे आजाद करवाने की, अब क्या निचुड़े लंड की तरह सारा जोश ख़तम हो गया |

गार्ड भी आवेश में - आप ने भी तो वादा किया था चूत मिलेगी चोदने को, आपके बस का कुछ है नहीं, आप रहने दो सारे बड़े लोग ऐसे ही होते है, लंड भी घोटना है और चूत के फटने से भी फटती है | |

रीमा - तुम न एक नंबर के गड फट्टू हो, तुमारे बस का ही नहीं था मुझे यहाँ से निकाल पाना | तुमसे अच्छे हिजड़े होते है कम से कम अपना वादा तो निभाते है |

गार्ड - मैडम आपके बस का नहीं है किसी से चुदवाना | फटती आपकी है चुदवाने में, शायद इसीलिए आपको आपके पति का लंड भी नसीब नहीं हुआ | मुझे छोड़ो आप अपने पति के ;लंड को नहीं खुस रख पाती होंगी शायद इसलिए जल्दी चले गए दुनिया से |

गार्ड की इस बात ने रीमा को अन्दर तक हिलाकर रख दिया |

गार्ड यही नहीं रुका - चूत कितनी भी खूबसूरत हो, कितनी भी अमीर हो चोदेगा तो उसे लंड ही | आपको अपने ऊपर इतना गुमान है लेकिन ऐसे गुमान का क्या फायदा तो चूत लंड खाने को ही तरस जाए | मेरी ख्वाइश का तो छोड़िये आप तो अपने मरहूम पति को भी नहीं देती होंगी | आप अपने रूप में अन्धी हो चुकी है |

रीमा के सब्र का बांध टूट गया , ऐसे उसे आजतक किसी ने चुनौती नहीं दी थी रीमा को अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा गुमान अपनी खूबसूरती और चूत पर ही था | गार्ड की इस बात ने रीमा के अस्तित्व की नीव ही हिला दी | एक औरत एक चूत के रूप में उसके अस्तित्व को ही नकार दिया | रीमा का पूरा वजूद ही हिल गया | | रीमा गार्ड की तरफ लपकी और एक जोरदार झन्नाटेदार झापड़ उसे रसीद कर दिया | उसके बाद बाथरूम में गहरी ख़ामोशी पसर गयी | रीमा और गार्ड दोनों ही सर झुकाए नीचे फर्श को देखते रहे |

कुछ देर बाद गार्ड बस अपने गाल को सहलाता अपनी पेंट ऊपर चढ़ाने लगा |

रीमा पछताने लगी उसे गार्ड की थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था | रीमा ने अपने हाथो अपनी आजदी का टिकट फाड़ दिया था | रीमा का गुस्सा अब उसकी लाचारी और पछतावे में बदलने लगा | उतर गया | रीमा पछताने लगी | आखिर गार्ड गलत क्या कह रहा है | अगर उसे चुदवाना नहीं था तो उसने उसको झूठी दिलासा क्यों दी उसके अरमान क्यों जगाये | क्अया गलती है गार्पड की | उसकी तो इतनी हिम्नीमत नहीं थी की रीमा के बदन को हाथ से छूकर तक देख सके | उसी ने तो उकसाया उसे | उसी ने गार्ड की हिम्मत को चार चाँद लगाये | अब उसकी हिम्मत इतनी बढ़ गयी की वो उसकी गांड में लंड पेलने के सपने देखने लगा | वो गांड जिसको रीमा ने आजतक किसी मर्द को हाथ नहीं लगाने दिया लंड पेलना तो द्दो की बात है | अपनी आजादी के लिए वो इतनी स्वार्थी हो जाएगी की किसी की भी भावनाओं से खेलेगी | ये जो भी हुआ, उसकी वजह से हुआ , बात यहाँ तक कभी पहुँचती ही नहीं अगर वो गार्ड को उसकी औकात में रखती और सच दिखाती | अब झूठ के तो पैर होते नहीं, एक झूठ को बचाने के लिए दूसरा बोलना पड़ा और नौबत यहाँ तक आ गयी | फिर भी उसकी उंगली गांड में जाते ही उसकी पिंडलियों और चूत में होने वाली सनसनाहट क्या थी | कही वो भी तो ..........नहीं रीमा बिल्कुल नहीं | आखिर अपने आत्मसम्मान को गिरवी रखकर रीमा वो ये काम कैसे कर सकती है जो उसने आज तक कभी नहीं किया | करना तो दूर कभी उसके गलती से भी ख्वाब नहीं देखे | क्या इसके बाद वो खुद से नजरे मिला पायेगी | वो अपने अतीत में घूमने लगी |

रीमा की दुनिया में वासना और हवस और सेक्स की दुनिया में सब कुछ गलत ही लगता था | उसे लगता था एक बार शादी के बाद सिर्फ पति के साथ ही चुदाई करनी चाहिए और पति के जाने के बाद वह इसी चीज दिमाग में भरकर जीती रही | रीमा को कभी एहसास ही नहीं हुआ कि औरत की ख्वाहिश भी हो सकती हैं औरत की वासना भी हो सकती है और उस वासना को औरत अकेले ही बुझा सकती है उसे पहली बार अपने अंदर की वासना का अहसास प्रियम और रोहित ने कराया | रोहित और प्रियम ने उसके मस्तिष्क की वर्जनाओं को तोड़ा जिनको लेकर वह काफी सालों से जी रही थी | प्रियम का लंड चूसकर और उसके बाद में रोहित के साथ में चुदाई करने के बाद में भी रीमां को समझ में आया कि सेक्स के कई रूप होते हैं पहले ही रीमां को लगता था सिर्फ चूत की चुदाई ही सेक्स का एक रूप है और बाकी सब गलत है लेकिन प्रियंम का लंड चूसने के बाद में उसके मन के अंदर का ये बंधन टूट गया इसी तरह से रोहित के साथ चुदाई करने के बाद में दूसरे पुरुष के साथ में लंड से चुदाई का खुला खेल करने का उसके मन का भरम टूट गया | जब उसने रिवर लाउन्ज में मालविका और कामिनी को बेधड़क गांड में लंड लेटे देखा था | कितनी बिंदास होकर कितनी बेफिक्र होकर वो अपनी गांड चुदवा रही थी मोटा मुसल लंड अपनी गुलाबी सुरंग की गहराइयो में उतार रही थी तो उसे देख देख कर रीमा हैरान हो रही थी | उसने मालविका और कामिनी को एक निचले दर्जे की चुद्द्कड़ औरते मान लिया था | उसे उस समय लग रहा था वो जो भी कर रही है वो घटिया है और इसलिए वो दोनों औरते भी घटिया है | लेकिन रोहिणी ने उसके दिमाग का ये चट्टान की तरह मजबूत बंधन भी तोड़ दिया | | रोहिणी ने रीमा के अंदर के और भी मानसिक बंधनों को तोड़ दिया रोहिणी ने उसे एक नया रास्ता दिखाया वह रास्ता था उसकी पिछली सुरंग का | रीमा को यकीन ही नहीं हुआ गाड़ की कुटाई से भी उसकी चूत में हलचल मच सकती है, न केवल हलचल बल्कि चूत का पानी छुडवा सकती है | रीमा के लिए ये सब एक अलग अनुभव था उर जब वो खुद इस अहसास से गुजारी तो उसे मालविका और कामिनी होने का मतलब समझ आया | रीमा को यकीन ही नहीं था कि इस तरह की वासना का भी कोई रूप होता है | लेकिन एक बार जब रीमा को एहसास हो गया उसके बाद उसके लिए सेक्स का एक नया मोर्चा खुल गया था | रीमा समझ गयी वासना में कुछ भी सही गलत नहीं होता | वासना की आग बस वासना की ही आग होती है, जो इसमें जलता है उसे ही पता होता है की वो क्या महसूस कर रहा हिया | बाकि दुनिया के लिए ये समझ पाना मुश्माकिल था | जिसने कभी चूत गांड में लंड नहीं लिया वो इसकी प्यास तड़प और दर्कोद को कैसे जान सकता है | रीमा को भी ऐसी ही एक अनजान सी तड़प ललचा रही थी | अब तो रीमा को किसी तरह की कोई शर्म और हया नहीं थी वह सेक्स के पूरी तरह से महसूस करने के चक्कर में रहती थी को सेक्स के पूरे मजे लेती थी और यही बात आज उसके काम आ रही थी आज वह इस गार्ड के साथ में वासना के जिस भंवर में फंसी फस करके अपनी आजादी की राह देख रही थी वहां पर उसे रोहिणी के सिखाये गुर बहुत काम आ रहे थे | शायद उसके अन्दर गांड में लंड लेने की लालसा शायद रोहिणी की ही पैदा की हुई थी या शायद उसे मालविका या कामिनी याद आ रही होंगी | रिवर लाउन्ज के वो सीन कभी भी रीमा की दिलो दिमाग से मिटे ही नहीं | शायद वहां वो सब कुछ इसीलिए इतने गौर से पूरी तरह से डूब कर देख रही थी | शायद उसे हमेशा के लिए सहेज लेना चाहती थी | आज जैसे ही मौका लगा अब सब कुछ आँखों के सामने तैर गया | वो अपनी वासना के आगे लाचार थी | उसकी अनचाही लालसा उसे उसी तरफ खीचे लिए जा रही थी | उसने आजतक कभी किसी का असली लंड अपनी गांड में नहीं लिया था लेकिन यही मौका था जब वो एक अनजान आदमी का लंड अपनी गांड में महसूस कर एक नया अनुभव ले सकती थी | उसने सोचा जब कामिनी अपनी गांड में लंड ले सकती है मालविका ले सकती है तो वो क्यों नहीं | क्या वो उनसे कम मॉडर्न है कम पढ़ी लिखी है | रोहिणी दीदी ने भी तो बोला था कट्टो अपने पिछवाड़े को मजबूत कर | एक बार लत लग गयी तो चूत चुदवाना भूल जाएगी | मजबूरी में ही सही लेकिन अपनी उन जंगली वासनाओं का पता आज तक रीमा को भी नहीं चला और रीमा की इस छिपी वासना का आगे भी किसी को पता तक नहीं चलेगा | रीमा ने सोचा कि इस वक्त उसके पास सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है, उसकी आजादी की आखिरी उम्मीद वही है | क्यों ना एक नया प्रयोग किया जाए उसे पता था गार्ड इसके बाद उसके लिए मर मिट जाने को राजी होजायेगा | वो किसी भी हाल में गार्ड को यहाँ से जाने कैसे दे सकती है
 
रीमा के बदन में भी तो आग लगी थी हालाँकि इस तू तू तू मै मै में सब नशा उतर गया लेकिन अन्दर तो आग जल रही थी रीमा ने भी सोचा जब जिन्दा रहूंगी तभी आगे कुछ सोच पाउंगी | यहाँ तो सूर्यदेव पता नहीं कब क्या करे | उसने यहाँ से निकलने का फैसला कर लिया चाहे जो करना पड़े |

रीमा - मुझे माफ़ कर दो, मुझे गुस्सा आ गया था |

गार्ड - हमें तो बड़े लोगो की गालियां थप्पड़ खाने की आदत है मैडम |

रीमा ने अपनी मुठ्ठी भींचकर सारी हिम्मत जुटाकर - चलो फिर मै तुमारी ख्मेवाइश पूरी कर देती हूँ मेरी गांड मारो, पेलो उसमे लंड लेकिन आराम से |

अभी हुए घट्नाक्रम से निराश हताश गार्ड को यकीन नहीं हुआ, यकीन तो रीमा को भी नहीं हो रहा था आखिर वो क्या करने जा रही है लेकिन रीमा ने यही कहा था और गार्ड ने भी सही सुना था | रीमा को यहाँ से निकलना था और उसके अन्दर की चूत में मची हलचल ने उसके पुरे बदन में हवस की आग जला दी थी | उसकी चूत में तरंगे उठ रही थी | गार्ड से हुई मुहँ चिरौरी के बाद भी उसके अन्दर लगी आग कम जरुर हुई लेकिन शांत नहीं हुई | उसका चेतन मन ये सब करने से रोक रहा था लेकिन रीमा को कुल मिलाकर यही रास्ता नजर आया | शायद उसकी कोने में दबी जंगली वासनाए जाग गयी थी | वैसे भी रोहिणी उसे काफी कुछ सिखा चुकी थी पिछली सुरंग के बारे में | अब जब मुहँ से निकल ही गया है तो रोहिणी का सिखाया आजमाने में क्या हर्ज | रीमा को एक पल लगा खुद को समझाने में | उसके बाद उसने ढेर सारी लार अपने गांड के छेद पर लगा दी |

गार्ड हैरान था उसे अपने कानो पर यकीं नहीं हुआ |

रीमा - जल्दी से आकर मेरी गांड में लंड पेलो नहीं तो मै तुमारी गाड़ मारना शुरू कर दूँगी |

गार्ड जैसे नीद से जागा हो उसने झटपट अपनी पेंट उतारी | अपने लंड पर ढेर सारी लार उड़ेली और रीमा के पास आ गया | गार्ड का लंड पकड़कर उसने अपने गांड के छेद पर लगा दिया |

रीमा - आराम से, मेरी कोमल कसी गांड में अब तक कोई लंड गया नहीं है बिलकुल कोरी कुंवारी गांड है | आज तेरा लंड पहली बार इस सुरंग का फीता कटेगा | आराम से करना धीरे धीरे .................|

रीमा की हिदायत का गार्ड पर कोई असर नहीं हुआ | वो बस पाए मौके को झपट्टा मार कर खा लेना चाहता था | पता नहीं कब मैडम का मन बदल जाये | उसने रीमा की बात सुनी लेकिन वासना के नशे में उसे कुछ समझ नहीं आया न उसने समझने की कोशिश की |

गार्ड को गांड मारने का कोई अनुभव नहीं था | रीमा इस जंगली वासना के बारे में ही सोचकर रोमांचित थी | गार्ड ने पूरा जोर लगाकर लंड को ठेल दिया | रीमा की गांड की दीवारों पर जबरदस्त दबाव पड़ा | रीमा दर्द से बिलबिला गयी लेकिन वासना की गर्मी में दर्द के ऊपर वासना हावी हो गयी | रीमा की पिछली सुरंग का छेद टाइट था | रोहिणी की सीखे और लगातार प्रैक्टिस से रीमा ने अपने पिछली सुरंग को भी अपने वासना के खेल में पूरी तरह शामिल कर लिया था | इसके बाद भी रीमा की गांड का छेद बहुत टाइट था | उसे रोहिणी ने ही बताया था अगर कोई अच्छे गांड में लंड पेले तो भी चूत की खुजली मिटती है | इसके गाड़ ने पूरा जोर भींच दिया और रीमा का फौलादी छल्ला फैलाता हुआ गार्ड के लंड का सुपाडा रीमा की पिछली गुलाबी सुरंग में गायब हो गया |

रीमा चीख उठी आआआआआआआआआआआअराराराराराराराराम्म्म्मममममममममममम स्स्से | ऊऊऊऊऊउईईईईईईईईईइ ममामाममामा ईईईईईईईईई माआआआआआअरररररररररररररररररररररररर डाडाडाडाडाआआआआअलालालालालाल |

रीमा दर्द से बिलबिलाकर रह गयी - चीचीचीचीईईईईईईईईईईईइ रररररररररररररररररररररररररर डाडाडाडाडाआआआआ अलालालालालाल आआआआआऐईईईईईईईईईईइ ममामामामामामाममरररररररररररररररररररररररर गाआआआआआआआआआयियियियियियीय |

रीमा की आँखों में आंसू आ गए | वो दर्द से दोहरी हो गयी | खुद की मुट्ठियाँ भींच कर दर्द को बर्दाश्त करने लगी | रीमा की कमर खुद बखुद आगे को खिसक गयी | रीमा गार्ड से दूर हो गयी, गार्ड का सुपाडा रीमा की गांड के छल्ले की कसी जकड़न से आजाद होकर बाहर आ गया | रीमा की गांड के मुहाने पर जैसे आग लग गयी हो, इतनी जलन होने लगी, ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने नश्तर घुसेड़ उसकी गांड के मुहाने को चीर दिया हो ऐसा तीखा दर्द उठ रहा था | गार्ड ने जोश जोश में के ही झटके में रीमा की गांड का छल्ला चीर के रख दिया था | वो अलग बात थी रीमा इस तीखे दर्द और भीषण जलन से अर्द्ध मूर्छा की हालत में पंहुच गयी |

रीमा - आआआआआऐईईईईईईईईईईइ ऊऊऊऊऊउईईईईईईईईईइ मादरचोद तुझे अपनी कुंवारी करारी गांड क्या दी, तूने तो एक ही बार में नस्तर डाल कर चीर दिया भोसड़ी के | मादरचोद गांड है मेरी, वो भी कुंवारी बोला था न, फिर भी अपना गधे जैसा लंड घोड़े की तरह पेल कर जान निकाल दी मेरी |

रीमा - आआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ओओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह गागागागागाडडडडडडडडडड आआअह्ह्ह्ह |

आआआअराम से नहीं पेल सकता था मादरचोद, कम से कम एक बार छेद खुल तो जाने देता | तुझे कितनी जल्दी है हर बात की |

उसकी गांड ले तीखे दर्द से उसके चूतड़ जांघे कमर पिंडलियाँ सब काँप गए | जब दर्द को सहने की हालत में रीमा आई तो रीमा ने दर्द से सिसकारते हुए ढेर सारा लार अपनी गांड के जलते छेद पर लगाया और सहलाने लगी | रीमा ये देखकर हैरान रह गयी की उसकी चूत झर झर कर बह रही है | रीमा की चूत पानी का झरना बनी हुई है | रीमा ये देख फिर से वासना में डूबने लगी | उसकी गांड की जलन और दर्द अभी बरक़रार थे लेकिन अब बर्दास्त के बाहर नहीं थे | उस दर्द के कारन उसकी जांघे नहीं कांप रही थी | रीमा को अपनी बहती चूत देख हिम्मत मिली | उसने चूत दाने पर अपनी उंगली जमा दी |
 
रीमा - इस आराम से घुसेड़, अनाड़ी लंड की तरह मत चोद, मुहँ में भी इतनी तेज ठोकर मरी थी की जबड़ा खिच गया था | गांड में ठोकर मारी गांड चीर के रख दी मेरी जान निकाल दी | भोसड़ी के कौन सी तेरी अम्मा चुदने जा रही है जो उसे बचाने जाना है | आराम से चोद | जब मुझे ..........चुदवाने वाने वाले को जल्दी नहीं तो तू काहे हड़बड़ी मचाये है |

रीमा को इस तरह से दर्द से तड़पता देख गार्ड की मर्दानी और लंड पूरी तरह से अकड़े हुए थे - मैडम जैसे ढेर सारा सोना किसी भिखारी के सामने रख दो तो पगला जाता है ऐसे ही आपको देखकर मेरे हाथ पाँव लंड सब काबू में ही नहीं है |

रीमा - इतना उतावला काहे हो रहा है, ऐसा नाजुक बदन छूने को मिल रहा है, सहलाने को मिल रहा है तेरा लंड चूस रही थी और अब ऐसी कमसिन कसी गुलाबी चूत की करारी कुंवारी गांड की मख्खन मलाई भी फ्री में मिल रही है ..............................आखिरी बार बोल रही हूँ काबू में रख अपने जोश को वरना लंडो की गांड मारना भी आता है |

रीमा की बात सुनकर गार्ड को हंसी आ गयी |

रीमा गांड का छेद सहलाती खड़ी हुई और तड़ाक से गार्ड को करारा झापड़ जड़ दिया - मै मजाक नहीं कर रही हूँ, तेरे लंड को चूसने के चक्कर में मेरी गांड में खुजली मचने लगी वरना ऐसी गांड फाड़ती तुमारी की जिदगी भर याद रखते |

रीमा ने उसके लंड को कसकर भींच लिया और मसल दिया | गार्ड के कड़क लंड को दर्द तो हुआ लेकिन महसूस नहीं हुआ | रीमा समझ गयी गार्ड पूरी उत्तेजना में है | उसने जल्दी से अपने बदन की वासना बुझाने में ही अपनी भलाई समझी | रीमा इस बार उलटा झुकने की बजाय गार्ड की तरफ मुहँ करके जांघे फैलाकर बैठ गयी | सामने से गार्ड के लंड पर उसका कण्ट्रोल ज्यादा रहेगा |

उसके लंड को खीचकर खुद ही अपनी पिछली सुरंग के गुलाबी छेद से सटा दिया | थोड़ा सा जोर लगाया और उसका सुपाडा रीमा की गाड़ के सख्त छल्ले को चीरता हुआ अन्दर घुस गया | रीमा ने एक लम्बी सीत्कार भरी |

रीमा गार्ड को गन्दी गन्दी गालियाँ देती हुए खुद की कमर हिलाने लगी और फिर गार्ड से कमर हिलाने को बोलने लगी |

रीमा - बुत क्यों बना खड़ा है, लंड पेल न मेरी कसी कुंवारी करारी गांड में |

गार्ड ने कमर हिलानी शुरू की |

रीमा - आराम से आइस्ते से हौले हौले धीरे धीरे |

गार्ड के लंड पर रीमा की गाड़ का छल्ला बहुत कसाव डाल रहा था, गार्ड को बहुत जोर लगाना पड़ रहा था | रीमा भी अपने शरीर को ढीला छोड़े हुई थी | थोड़ी देर कमर हिलाने की बाद रीमा का पिछली सुरंग का गुलाबी छल्ला नरम हो चला | रीमा की गांड में गार्ड का सुपाडा आराम से जाने लगा लेकिन उसका लंड अभी भी रीमा की गांड में घुसना बाकि था |

गार्ड बस रीमा के काहे अनुसार ही कमर हिलाता रहा | रीमा के दिल के कोने में दबी पाशविक वासनाये उभर ही आई थी | उसकी कामना भी पूरी हो रही थी और शायद उसके जानने वाले किसी को कभी पता भी नहीं चलेगा | रीमा कहाँ से चली थी और कहाँ पंहुच गयी थी | एक पल को उसके दिमाग में ख्याल आते लेकिन वासना उनको फिर से दिमाग के किसी अंधे कोने में उठकर फेंक देती | रीमा फिर से अपनी हवस के सागर में डूब जाती, क्या नैतिकता क्या बंधन | एक अनजाने मर्द के साथ सेक्स का वो विकृत रूप जो शायद किसी सामान्य के लिए बहुत ही ज्यादा असामान्य था | रीमा अपनी दबी वासनाओं में इतना ज्यादा जली भुनी थी की जब उसे मौका मिला तो वो कामवासना के सारे बंधन तोड़कर , सारे नियम तोड़कर वो हदों से कही ज्यादा आगे निकल गयी थी |
 
| उसे अपनी जवानी में सामान्य चुदाई नहीं मिली इसलिए उसे असमान्य चुदाई की ख्वाइश इतनी बढ़ गयी की उसके लिए सही गलत अच्छा बुरा सबका भेद मिटा दिया | आज वो एक गार्ड के साथ अपने शरीर के सबसे संवेदनशील कसे हुए छेद के साथ वासना का जबरदस्वोत खेल खेल कर वो अपनी चूत और दिमाग की वासना मिटानी चाहती थी | अभी उसे होश ही नहीं था की वो किस मुसीबत में फंसी है, उसकी हालत क्या है और उसके चारो तरफ कितना खतरा है | अबी वो अपनी आजादी का प्लान बनाते बनाते अपने अन्दर की दबी हुई आग को माचिस लगा बैठी | अब जब आग जल गयी है तो जब तक नहीं बुझेगी तब तक रीमा होश में भी नयी आएगी | रीमा की गांड के मुहाने पर अभी भी बहुत जलन हो रही थी लेकिन लंड की कड़ी मसाज ने उसकी गांड की दीवारों में सनसनाहट पैदा कर दी की उसके आगे रीमा को गांड की जलन का अहसास फीका पड़ गया | |

गार्ड का लंड रीमा की कसी गांड में अन्दर बाहर होने लगा | गार्ड आइस्ते से धीरे से लंड को पीछे ले जाता और फिर धीर से रीमा की गांड में घुसेड देता | रीमा से गाली खाने के बाद उसे समझ आ गया था | जल्दी करी तो रीमा मैडम उसका लंड ही काट लेगी | दो तीन बार रीमा की गांड में लंड पेलता और फिर बाहर निकाल लेता | रीमा की गांड चुताड़ो और जांघो में उठने वाली तरंगे उसके पुरे शरीर को मदमस्त किये हुई थी | | यही सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा | रीमा की उंगलियाँ उसके चूत दाने पर फिर पंहुच गयी | तभी गार्ड ने एक लम्बी ठोकर मारी और उसका आधे से ज्यादा लंड रीमा की गांड की गुलाबी दीवारों को चीरता हुआ अन्दर तक धंस गया | पता नहीं क्यों गार्ड को जोश आ गया, रीमा कुछ समझ पाती इससे पहले ही गार्ड ने रीमा को पलट दिया और उसको आगे की तरफ झुकाकर उसके चूतड़ ऊपर उठा दिए | रीमा आ ऊ कुछ कुक करती या बोलती उससे पहले गार्ड का आधा लंड रीमा की गांड में पैबस्त हो गया | मुहँ से प्रतिरोध करने की जगह रीमा के मुहँ से - आआआआआआआआआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ईईईईईईईईई म्म्म्मम्मामामामामामा आआआआआऐईईईईईईईईईईइ ममामा की सिसकारी निकली |

गार्ड ने अपने झटके तेज कर दिए | उसका लंड गपागप रीमा की गांड की सुरंग की गहराई नाप कर बोरिंग करने लगा | रीमा की जांघो पर तेज ठोकर लग रही थी |

गार्ड - आआआअह्ह्ह मैडम क्या मस्त चूतड़ है मैडम आअहाआअहाआह्ह, क्या कसी गगागागागागागगांड है , मैडम आपकी गांड बहुत कसी हुई है बहुत टाइट है |

रीमा - हा बेबी बहुत टाइट है मेरी गांड |

इस समय रीमा की आवाज किसी कैटेलिस्ट से कम नहीं थी | गार्ड ने एक करारी ठोकर मरी |

रीमा - आआआआआअ ईईईईईईईईईह्हह्हह्हह्हह्हह आआआरररररररररम्म्म्म से ककककक रररर साआआआले|

लेकिन गार्ड तो इस समय अपने ही जोश में था |

गार्ड - मैडम आपकी गांड बहुत कसी है | मेरा लंड चूस कर मसले डाल रही है |

रीमा - या बेबी या बाय मेरी गांड कसी है |

अब बाथरूम में वासना का तूफ़ान मचा हुआ था | गार्ड अपने पुरे जोश में था | हालाँकि उसका आधा लंड ही रीमा की गांड को चीर प् रहा था | लेकिन जो भी था गार्ड के लिए किसी जन्नत से कम नहीं था | उसका जोश अपने चरम पर था | रीमा भी अपनी वासनाओं के अरामान बुझाने को बेताब थी |

गार्ड - हाँ मैडम बहुत कसी है, उफ़ लंड पेलने में बहुत मेहनत लग रही है | आपकी गांड बहुत टाइट है फिर भी मै लंड पेल रह हूँ मैडम |

रीमा - हाँ मेरी कसी गांड ऐसे ही अन्दर तक लंड पेलो |

गार्ड - मैडम आप बहुत अच्छी हो, आपकी गांड क्या मक्खन मलाई है | आआह्ह्ह्ह आपकी कुंवारी गांड कितनी कसी हुई है | मन करता है फाड़ के रख दू , अन्दर तक पूरा का पूरा लंड घुसेड दू | आआआह्ह्ह्ह मैडम बहुत कसी है |

गार्ड - आःह्मैह्डह मैडम आपकी गांड अपने लंड से चीर के रख दूंगा | मैडम आपकी कसी गांड को मै मार रहा हूँ | आआआआह्ह्ह्ह मैडम आपको गांड को फाड़ कर रख दूंगा | ये लो मैडम मेरा पूरा का पूरा लंड, गप्प से अपनी गांड में निगल जावो |
 
इसी के साथ गार्ड ने एक तगड़ा झटका रीमा के चुताड़ो पर लगाया | उसका लंड ने रीमा की गांड के कसे छल्ले की गिरफ्त में कस के रगड़ खाई और गार्गाड के वासना का बांध टूट गया | गार्ड रीमा की कसी गांड के आगे ज्यादा देर टिक नहीं पाया | रीमा की गांड के कसे छल्ले को भले ही गार्ड ने चीर कर खोल दिया हो लेकिन कसावट के आगे गार्ड के लंड ने जल्यादी ही हथियार डाल दिए | रीमा की मस्त गुलाबी गांड के कसे छल्ले की फौलादी जकड़न को फ़ैलाने में गार्ड का लंड खुद को संभाल नहीं पाया | रीमा वासना की जलती आग में तपती बीच भंवर में फंसी थी लेकिन गार्ड की वासना अपने चरम पर पंहुच गयी थी | उसके अन्दर मथ रहा उसकी हवस का आग के गरम सफ़ेद लावे की झील का बांध टूट गया | गार्ड रीमा की गांड में झर झर कर झरने लगा | उसके लंड से सफ़ेद लावे की पिचकारियाँ छुटने लगी | कुछ हो देर में उसने अपने सफ़ेद रस से रीमा की गुलाबी गांड का छेद लबालब भर दिया | रीमा बीच मजधार में जल बिन मछली की तरह अपनी वासना में तड़प रही थी लेकिन उसकी जलती गांड पर गार्ड के सफ़ेद रस की रिमझिम फुहारों ने बहुत राहत पंहुचायी | गार्ड कमर हिलाते हिलाते रुक गया और फिर उसने अपने लंड रस से सने लंड को रीमा की गांड से बाहर निकल लिया | सफ़ेद रस की बुँदे टपकता गार्ड का लंड रीमा के चुताड़ो पर झूल गया |

गार्ड हांफते हुए अपनी सांसे सँभालने में लग गया | इधर रीमा ने अपनी गांड के छेद का जायजा लिया | अपनी उंगली अपनी सुरंग में डुबोकर गार्ड के सफ़ेद रस का स्वाद लिया और फिर सीधी हो गयी | उसका मन तो था गार्ड अभी उसकी गांड में लंड पेलता रहे और उसकी सनसनाहट से उसकी चूत की दीवारों की तरंगो के भंवर में वो गोते लगाती रहे लेकिन न तो समय ऐसा था और न ही माहौल, ऊपर से गार्ड का लंड निचुड़ चूका था | उसने गार्ड का हाथ अपने तने उरोजो पर रखा और दबा दिया | रीमा के तन बदन में आग लगी हुई थी | रीमा ने गार्ड के झुलते लंड को थाम लिया, उसे कुछ देर हाथ से हिलाया | उसके बाद मुहँ में लेकर चटाने लगी और लोलीपोप की तरह चूसने लगी | गार्ड हांफता हुआ रीमा को देखने लगा | गार्ड समझ गया था मैडम अभी झड़ी नहीं है , उनकी चूत ने पानी नहीं छोड़ा है |

रीमा के लंड चूसने से गार्ड के लंड में झुनझुनी होने लगी थी, उसने हाथ खड़े कर दिए लेकिन रीमा ने उसके लंड को नहीं छोड़ा | उसे पता था अभी उसके अंदर रीमा के जिस्म का रस चूसने की लालसा बरकरार है लेकिन अब गार्ड के पांव कांपने लगे थे | उसका लंड जवाब दे गया था |

गार्मैड - मैडम अब और बस का नहीं है कुछ तो आराम करने दो |

रीमा समझ गई थी | गार्ड को अपने चूत और वासना के जाल में फ़साने के चक्कर में खुद ही रीमा अपनी वासना के समुद्र में डूब गयी | अनमने ढंग से ही सही लेकिन उसकी वासना के बुखार में खलल पड़ा | इससे पहले गार्ड कुछ अपना दिमाग लगाये रीमा ने उसके मुरझाये लंड पट तपाक मारते हुए - मजा आया मेरी गांड मार कर |

वो गार्ड से सटकर बैठ गयी |

गार्ड - मैडम आपकी गांड मारने के चक्कर में मेरी गाड़ का तेल निकल गया ...........बहुत कसी गांड है मैडम आपकी, अभी तो बस सुपाडा ही जा पाया है अन्दर |

रीमा - सोचो चूत को चोदने में कितना मजा आएगा |

गार्ड - दम निकल गया मेरे लंड का मैडम आपकी गाड़ का छेद खोलने में |

रीमा - उतना ही मजा आएगा मेरी कसी मखमली गुलाबी चूत चोदने में |

गार्ड - आप कमाल हो मैडम, मतलब अगर हर बीबी आपकी जैसी हो तो कोई भी मर्द किसी परायी औरत को कभी देखेगा ही नहीं |

रीमा - अभी तो सिर्फ ट्रेलर देखा है पिक्चर दिखाउंगी तो सीधे जन्नत पंहुच जावोगे |

गार्ड - मैडम आप लंड चुस्ती भी बहुत अच्छा है बिलकुल लोलीपोप की तरह | मजा आ गया ,मैडम, लंड भले ही मुरझा गया हो लेकिन मन तो कर रहा है | गार्ड बोलते बोलते रुक गया .........शायद जोश जोश में भूल गया था कि वो कौन है |
 
रीमा - जमकर बस मुझे चोदते रहो | जिसका लंड एक बार पकड़ लेती हूँ वो बस ऐसे ही सोचता है | अब मुझे बाहर निकालोगे तभी तो आगे की जन्नत दिखाउंगी |

गार्ड और रीमा एक दूसरे से बिलकुल सटे हुए थे | गार्ड का लंड मुरझा चूका था जबकि रीमा की गांड से उसका सफ़ेद रस निकल कर रीमा के चुताड़ो पर फ़ैल चूका था | रीमा अपने बदन पर फैले उस चिपचिपे रस को देख रही थी | तभी गार्ड उठने लगा | रीमा को अभी और चुदाई की जरुरत थी उसकी चूत ने खुजली मची हुई थी | वो अपने चूत दाने को सहला रही थी | अपनी चुताड़ो पर फैले सफ़ेद गाढे लंड रस से खेल रही थी |

गार्ड एक घंटे के अन्दर दो बार निचुड़ चूका था अब तो उसकी हिम्मत नहीं थी कुछ करने की | लंड को भी तो समय चाहिए फिर से खड़ा होने के लिए | हालाँकि रीमा चाहती तो पांच मिनट में फिर से सीधा करने लागती लेकिन उसे अब यहाँ से निकलने की जल्दी थी | अब वो नर्वस भी हो रही थी | रीमा के हाथ पाँव आगे होने वाले को सोचकर ढीले होने लगे | गार्ड भी वासना की दुनिया से बाहर आया, उसके पाँव अभी भी स्थिर नहीं थे | रीमा और गार्ड ने एक दुसरे को हिम्मत बंधाई |

कुछ देर बाद गार्ड रीमा से अलग होकर कपड़े पहनने लगा | रीमा को अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन उसने तेजी से के साथ उठकर कपड़े पहनने शुरू कर दिए |

फैक्ट्री की झाड़ियाँ झुरमुटो में छिपते छिपाते सुनसान रास्ते से जहाँ गार्ड पेट्रोलिंग करने नहीं आते एक चाहरदीवारी की तरफ ले गया | दीवार एक जगह से हल्की सी टूटी थी और कटीले तारो और देवर के बीच में हल्की सी जगह थी जहाँ से सावधानी से कोई भी बाहर निकल सकता था | गार्ड ने कटीले तारो को थोडा और फैला दिया | पहले वो आसानी से निकल गया , फिर दूसरी तरह जाकर कटीले तारों को फैलाकर और की जगह बना दी | रीमा आराम से तारों

के बीच से सुरक्षित निकल गई हालांकि उसकी शर्ट का एक कोना फंस गया और शर्ट कंधे पर हल्की सी फट गयी | \कंपाउंड से बाहर निकलने के बाद गार्ड रीमा के साथ कुछ दूर तक चला फिर अच्छे से समझकर की रीमा को कितना चलना है किधर चलना है वो तेजी से फिर अन्दर घुस गया | ताकि एग्जिट गेट से बाहर निकल सके और किसी को शक भी न हो | उसके बाद आकर रीमा को तय जगह पर से लेकर यहाँ से निकल भागे |

गार्ड बोला - मैडम अब आप को यहाँ से कुछ दूर तक चलना मैं वहां को खड़ा मिलूंगा मुझे अभी गेट पर एग्जिट की एंट्री करनी होगी उसके बाद ही मैं आ करके आपको वहां से ले लूंगा तब तक आप वहां उस कोने पर उस चौराहे पर

मुझे मिल जाना |

रीमा ने तेजी से सर हिला दिया - मैं समझ गई थी यहां से अकेले ही जाना होगा |

रीमा वहां से तेजी से निकली और एक तरफ बढ़ गई हालांकि वह थोड़ा आगे चलकर रास्ता भूल गई और उसके बाद में गलत रास्ते की तरफ मुड़ गई इधर गार्ड वहां से तेजी से वापस आया और एग्जिट गेट से निकालकर जब चौराहे पर पंहुचा तो रीमा वहां नहीं थी वह परेशान हो गया काफी देर तक इधर-उधर ढूंढा लेकिन रीमा नहीं मिली |

आजादी मिलने की खुशी में रीमा गार्ड द्वारा बताया हुआ रास्ता ज्यादा देर तक याद रख पाई और एक मोड़ पर पहुंचते ही वह कंफ्यूज हो गई किस रास्ते पर जाऊं इसलिए उसने एक रास्ते को पकड़ लिया और उस पर तेजी से भागने लगी | वह गलत रास्ता था इधर जब गार्ड वहां पंहुचा तो उसे वहां रीमा नहीं मिली | उसने आसपास काफी ढूँढा लेकिन रीमा नहीं मिली | अब पहले से ही घबराये गार्ड की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा | वो डर के मारे पसीने पसीने हो गया | क्या करे क्या न करे, मैडम के चक्कर में आकर ये उसने क्या कर दिया, मैडम तो अपना उल्लू सीधा करके निकल गयी लेकिन मेरी तो गर्दन उड़ा दी जाएगी | इधर गार्ड ने बहुत हाथ पाँव मारे लेकिन रीमा नहीं मिली थक हार कर के उसे काफी देर ढूंढने के बाद ................................उसने थके कदमो से अपने घर की तरफ से रवाना हो गया हालांकि वह हैरान था कि रीमा इस तरह से कैसे गायब हो गई हालांकि बाद में उसे लगा कि हो सकता मैडम उसका चुटिया काट रही हो और उसे बेवकूफ बना कर निकल गई वो तेजी से अपने घर की तरफ भागा |
 
इधर रीमा भटकते भटकते एक रास्ते पर दौड़ी चली जा रही थी | तभी उसे एक चाभी लगा स्कूटर दिखाई दिया | रीमा ने चारो तरफ देखा और स्कूटर को स्टैंड से उतारा, थोड़ी दूर पैदल लेकर चली, फिर उस पर पीछे लटकता हेलमेट पहना और एक छोटे से रूमाल से अपना मुहँ बंधा | उसने स्कूटर स्टार्ट किया उर तेजी से उसी रास्ते पर आगे बढ़ गयी |

उसे नहीं पता था कहाँ जाना है क्या करना है बस उसी रास्ते की ओर बढ़ गई उसे नहीं पता कहां जाना है यह कहां रास्ता जाएगा लेकिन वह बस यहां से निकल के बाहर जाना चाहती थी |

उधर अनिल को जैसे ही रीमा के सैंडल में लगे ट्रांसमीटर का सिग्नल मिला पूरी की पूरी पुलिस फ़ोर्स निकल पड़ी | पुलिस की टीमें रवाना हो गई थी और तेजी से वह गंतव्य की ओर पर पहुंच रही थी |

उधर जब काफी देर तक बाथरुम से वापस नहीं आई तो वह महिला गार्ड ने अन्दर जाकर तलाशना शुरू किया और जब उसने बाथरूम खोलकर देखा तो वहां कोई नहीं था उसने हंगामा मचा दिया | उसने तुरंत गेट पर बैठे सिक्योरिटी गार्डों को फोन किया ... गेट से सभी गार्ड को और अपने सारे आदमियों को चौकन्ना कर दिया गया ............पलक देखते ही देखते उस उस गैंग के पूरे नेटवर्क में खबर फैल गई कि एक मैडम भाग गई है उनको जहां भी दिखाई दे उन्हें तुरंत हवाले किया जाए इधर रीमा स्कूटर पर बैठ कर के तेजी से एक रास्ते पर चली जा रही थी | रीमा ने सालो से स्औकूटर नहीं चालाया था इसलिए बड़ी सावधानी से धीमे धीमे चला रही थी | तभी देखा उसने कि उसके पीछे कुछ बाइक सवार लग गए हैं वह हैरान थी उसे नहीं पता पहले तो उसे पता नहीं चला कि उसके पीछे आ रहे हैं लेकिन थोड़ी देर बाद एक ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो रीमा को लगा कि नहीं यह बाइक सवार उसी का पीछा कर रहे हैं उसने स्कूटर की स्पीड बढ़ा दी बाइक सवार ने जोर लगाया और तेजी से आगे पीछे हो लिया हम दोनों के बीच में तेजी से लैस होने लगी थी ऐसा हो गया था दुपहिया वाहन चलाए इसीलिए उसके लिए बहुत दिक्कत हो रही थी लेकिन इस समय तो जान पर बनी थी इसलिए वह कैसे करके

चला रही थी |

रीमा एक अनजान सड़क पर तेजी से चलती जा रही थी रीमा ने सालों से स्कूटर नहीं चलाया था इसलिए उसे स्कूटर को संभालने में दिक्कत हो रही थी लेकिन इस समय उसकी जान पर बन आई थी और इसलिए वह जैसे तैसे भी करके स्कूटर को चला रही थी कुछ देर बाद उसे एहसास हुआ कोई उसका पीछा कर रहा है हालांकि स्कूटर में बैक व्यू मिरर नहीं था इसलिए वह देख नहीं पाई फिर उसने कुछ देर चलने के बाद पीछे गर्दन घुमाकर देखा तो उसे लगा एक बाइक पर दो लड़के शायद उसी का पीछा कर रहे हैं | कुछ देर तक तो रीमा सतर्क होकर सीधे चलती रही फिर जब बाइक सवार पीछे आ गया और उसने रीमा को रोकने की कोशिश की तब रीमा को

पक्का हो गया की वो दोनों उसी का पीछा कर रहे है ........ उसने अचानक से एक्सीलेटर को बढ़ा दिया और तेजी से आगे निकल गई बाइक सवार ने भी स्पीड बढ़ा दी | रीमा की धड़कने तेज हो गयी ...... उसके अन्इदर फिर से सूर्तयदेव की गिरफ्नीत में जाने का खौफ सताने लगा | इतनी जल्दी इन लोगों को कैसे पता चल गया इसका मतलब इन का नेटवर्क बहुत तगड़ा है रीमा के मन में बस यही सवाल बार बार घूमने लगा और दहशत के मारे उसके हाथ पांव कांपने लगे थे | उसने खुद को संभाल कर के स्कूटर को तेजी से आगे बढ़ा दिया ...बाइक पर सवार दोनों लड़के भी रीमा से मजे लेने लगे वह बाइक की स्पीड बढ़ा कर के रीमा के पीछे तक आते और उसके बाद जब रीमा भी थोड़ी सी थोड़ी स्पीड बढ़ा देती तो बाइक सवार थोड़ी सी अपनी स्पीड बढ़ा देते | वो जीतनी स्पीड में स्कूटर दौड़ा सकती थी उतनी स्पीड में स्कूटर दौड़ा रही थी | वह बहुत ही घबरा गई थी अब तो उसके अंदर दिल जोर जोर से धड़क रहा था और दहशत के कारण उसका बुरा हाल हो गया था वह क्या करें क्या ना करें से समझ में नहीं आ रहा था बस उसके दिमाग में बस एक ही चीज दौड़ रही थी कि तेजी से स्कूटर को आगे की तरफ भागते रहो जब तक भगा सको |

इधर इधर सूर्य देव ने वहां के लोकल थाने में भी फोन कर दिया था और बाइक पर सवार लड़कों ने फोन करके सूर्यदेव को रीमा की लोकेशन भी बता दी थी इसलिए सामने से 1 जीप में रीमा को पकड़ने के लिए पुलिस वाले रीमा की उलटी दिशा से वापस कस्उबे की तरफ चल पड़े | रीमा तक कस्बाबे से बाहर आ चुकी थी | रोड जमीन से 50 फीट की पकी ऊँचाई पर बनी थी | दोनों तरफ रोड के ढलान पर बड़े बड़े पत्थर कटाव रोकने के लिए बने थे | बीच बीच में पानी के बहाव के लिए पक्की सीमेंट की नालियां बनी हुए थी | सड़क के दोनों तरफ सिर्फ घना जंगल था | थोड़ा आगे चलकर एक छोटी सी नदी पड़ती थी जो जंगल को दो भागो में बांटती थी | नदी के दूसरी तरफ भी 100 घरो की एक बस्ती थी | पुलिसवालों ने ठीक नदी के पुल से पहले जीप बीचो बीच रोड पर खड़ी कर दी | रीमा की आँखों में पोलिस की जीप देखते ही चमक आ गयी | तभी बाइक सवार ने रीमा को ओवरटेक कर लिया, लेकिन रीमा बायीं तरफ कट मार के बचकर रोड पर चल रहे ट्रक की ओट में हो गयी और फिर उसे क्रॉस करते हुए तेजी से आगे निकल गयी | रीमा ने इधर उधर नजर दौड़ाई चारों तरफ गहरा अंधेरा छाने लगा था | जैसे जैसे जीप करीब आती जा रही थी, रीमा के दिमाग में गार्ड की बात घूम गयी कि यहां पर पुलिस और गुंडे दोनों ही सूर्यदेव के इशारों पर नाचते हैं अब उसके सामने कोई चारा नहीं था | जीप उसका रास्ता रोके बीच रोड में खड़ी हुई थी | रीमा ने अपने स्रीकूटर की स्मापीड थोड़ी सी कम करी और जीप के सामने जाते जाते तेजी से लेफ्ट कट मार के तेजी से स्पीड बढ़ा दी |
 
उल्टा साइड से आगे की तरफ बचकर निकल कर जाने की कोशिश करने लगी लेकिन ही उसने जीप को कट मार कर के थोड़ा आगे बढ़ी सामने से एक ठेलेवाला नजर आया | रीमा को कुछ समझ में ना आया, उसने तेजी से ब्रेक मारे लेकिन वो नाकाफी थे, उसने बायीं तरफ को ही हँडल मोड़ दिया | स्कूटर सड़क पर से उतर कर के नीचे जा रही ढलान पर उतर गया था ढलान पर बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे और उन पत्थरों पर स्कूटर कुछ देर उछालने के बाद रीमा के हाथ से स्कूटर का नियनत्रण समाप्त हो गया | रीमा उसे संभाल नहीं पाई स्कूटर से उछलकर दूर जा गिरी | उसका सर एक बालू से भरी बोरी से जाकर के टकराया रीमा की किस्मत बहुत अच्छी थी

वो ऐसी जगह जाकर गिरी जहाँ पत्थर नहीं थे | असल में मीती डालकर ऊँची रोड बनाई गई थी जिसके कारण वहां पर से पानी निकलने के लिए नालियां बनी हुई थी और एक जगह पर पानी के बहन के कारन कटाव हो गया जिसके कारण गड्ढा हो गया था तो वहां पर सड़क बनाने वालों ने मिट्टी भरकर उसके ऊपर पॉलिथीन बिछा कर टेम्दीपररी नाली बना दी थी और आसपास बालू की बोरियां रख दी थी रीमा बिल्कुल उसी जगह जाकर गिरी और उसका हेलमेट बालू की बोरी से टकराया, उसकी कमर हाथ पाँव में खुरचन आई | उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसने हेलमेट पहन रखा था और सिर में किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई उसके बाद वह वहां से लुढ़कती हुए नीचे की तरफ चली गयी और नदी की रेतीली मिटटी पर जाकर दूर गिरी | पुलिस वाला और बाइक सवार दौड़ कर तेजी से वहां आये जहाँ से रीमा नीचे की तरफ लुढ़की थी लेकिन नीचे अँधेरा था इसलिए कुछ दिखाई नहीं दिया | तब तक ठेलेवाला भी वही आकर नीचे की तरफ देखने लगा | रीमा का स्कूटर रीमा से दूर छिटक कर जा गिरा | उसके अस्थि पंजर सब खुल गए थे |

पुलिसवाले ने हैरान थे कैसी अजीब औरत है खुद को मौत कैसे गले से लगा लिया | बाइक वाले लड़के तेजी से नीचे जाने के लिए आगे बढ़े | तभी ठेलेवाला - अरे कहाँ जा रहे हो |

एक लड़का गुराया - दिख नहीं रहा बुड्ढ़े नीचे जा रहा है |

बुड्ढा उनकी तरफ देखकर - तुमारी कोई रिश्तेदार थी क्या ?

लड़का - अबे अपना काम कर न साले बुड्ढ़े |

बुड्ढा - मैडम इतनी उचाई से गिराने के बाद शायद ही बची हो, अँधेरा हो गया है नीचे नदी के पास जाने का मतलब मौत है |

पुलिसवाला - बुढाऊ सठिया गए हो क्या.............क्या बकवास कर रहे हो |

बुड्ढा - साहब पिछले हफ्ते ही दो लड़का लड़की जवानी के जोश में मेरी बात माने नहीं नीचे चले गए, दो दिन बाद टुकड़ो में लाश मिली है | आपकी इधर ड्यूटी नहीं लगती इसलिए शायद आपको पता नहीं है |

पुलिसवाला - मतलब क्या कहने का तेरा |

बुड्ढा - साहब रात के अँधेरे में जंगल का कौन भरोसा, सुना है एक पागल भालू है जो सिर्फ रात में निकलता है | अब तक 20 लोगो को मार चूका है |

पुलिसवाला - क्या बकवास कर रहा है, एक मारूंगा सही हो जायेगा |

बाइक वाला एक लड़का बोला - सर मैंने भी पेपर में पढ़ा था जगल में एक लड़का लड़की की लाश मिली है | शायद शेर उन्हें खा गया था |

बुड्ढा - शेर नदी के इस पार नहीं आते साहब | मै पिछले पांच साल से यही मशरूम बेचता हूँ बैठकर |

पुलिसवाला - तो |

बुड्ढा - साहब भालू, वो पागल है, मै भी दिन में ही जाता हूँ जंगल में वो भी चार पांच लोग एक साथ |

पुलिसवालो ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और नीचे की तरफ जाने लगे | तभी एक तेज आवाज गूंजी और उनके कदम ठिठक गए | न केवल ठिठक गए बल्कि उलटे हो लिए |

उनके चेहरों पर चिंता और डर की लकीरे साफ़ झलक रही थी | सूर्य देव का साफ-साफ आदेश था कि रीमा उनको जिंदा चाहिए |

बुड्ढा - मैडम तो जिंदा बची नहीं होगी आप भी अपनी जान दांव पर क्यों लगा रहे हैं पुलिस वाला हैरान रह गया |

बुड्ढा की बात में दम था | बुड्ढा बोला - साहब नीचे जंगल है और बहुत घना जंगल है इस जंगल में मैं दिन में उजाले में मशरूम लेने जाता हूँ वो भी पांच लोग एक साथ | अकेले कभी नहीं गया | जो भी रात के अंधेरे में इधर जंगल में कहीं भी आसपास पाया जाता है उसे भालू मार देता है |

वहीं पर खड़े खड़े दो पुलिसवाले और दो बाइक वाले सोच विचार करते रहे उन्हें समझ में नहीं आया आखिर क्या करें सूर्य देव का साफ-साफ आदेश था कि रीमा उन्हें जिंदा सही सलामत चाहिए लेकिनअब क्या करें | तभी पुलिस वाले ने नीचे की तरफ टोर्च लगाकर देखा हालांकि टोर्च की रोशनी जहां तक जा रही थी वहां तक उसे कुछ दिखाई नहीं दिया | काफी देर तक इधर-उधर माथापच्ची करने के बाद उन्हें कुछ समझ में नहीं आया | बाइक सवार लड़का फिर से हिम्मत करके नीचे उतर के जाने की कोशिश करने लगा |
 
बुड्ढा बोला - साहब अब तो आप लौट के नहीं आओगे जाना हो तो जाओ मुझे क्या है |

उन लोगो के सामने अजीब पहेली थी आखिर करें तो क्या करें | सब एक दुसरे को देखते रहे |

फिर आखिर में पुलिस वाले ने पूछा - एक चीज बता तू यह सब कैसे जानता है |

बुड्ढा बोला - साहब मैंने बताया न मेरा मशरूम का काम है मेरे को जंगल में मशरूम लेने जाता हूं और यह काम में आज से नहीं पिछले 20 सालों से कर रहा हूं जंगल में एक भालू भालुनी रहता था वह बहुत ही प्यारा जोड़ा था दोनों आपस में खेलते रहते थे और मस्ती करते रहते थे उनको किसी से कोई मतलब नहीं था नदी के इस तरफ जंगल में वो जोड़ा रहता था और नदी के उस तरफ जो है वह शेर रहते हैं शेर इधर कभी नहीं आते हैं और भालू कभी उधर नहीं जाता है | एक दिन मैंने देखा किसी ने जंगल में भालुनी को गोली मार दी थी, वो पेट से थी | मैं जब तक भाग भाग कर गया तब तक भालुनी मर चुकी थी | और इसी के बाद से वह भालू पागल हो गया उसके बाद उसे जो भी इंसान मिलता है उसे मार डालता है | मैं अक्सर जंगल जाता था भालू मुझे रोज देखता था लेकिन जब से भालुनी मरी मै कभी अकेले जाने की हिम्मत नहीं कर पाया | अन्दर गहरे जंगल में तो कभी जाता ही नहीं हूँ | मुझे जो कहना था मैंने बता दिया साहब अब आपकी मर्जी आप को मरना है तो जाओ | इतना कहकर ठेले वाला अपने ठेले की पास चला गया |

वहां लोगो का तमाशा देखने का मजमा लगाते देख पुलिसवाले सबको भगाने लगे | इधर बाइक वाले लडको ने काफी सोच विचार आने के बाद सूर्य देव को फोन मिलाया और सारी कहानी बता दी |

सूर्यदेव झल्ला कर रह गया और गाली देने लगा - भोसड़ी वालों तुमसे एक काम ढंग से नहीं होता है तेरी आम्मा को चोदूं | सालो मादर चोदो तुम सबको गोली से उड़ा दूंगा एक बार आवो तो सामने |

कुछ देर बात शांत होकर - रीमा का पता लगाओ खाली हाथ आए सब को गोली मार दूंगा | नीचे जाओ और रीमा का पता लगाओ अगर मिल जाती है तो मुझे फोन करना | इसी ऊहापोह में काफी समय बीत गया था आखिरकार उन दोनों लड़के और दो पुलिस वाले एक दूसरे का हाथ पकड़े पकड़े धीरे-धीरे करते हुए नीचे उतर के गए सड़क की ढलान खत्म होते ही कम से कम 20 मीटर बाद उन्हें स्कूटर पड़ा मिल गया था लेकिन उसके बाद उन्होंने इधर-उधर काफी टोर्च मारी लेकिन रीमा का कहीं अता पता ही नहीं था वह हैरान थे इतनी जल्दी भालू रीमा को उठा ले गया | उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था | वह बहुत ही परेशान हो गए थे | जब स्अकूटर है तो मैडम भी आसपास ही होनी चहिये | एक दूसरे का हाथ पकड़े पकड़े और ऊपर वाले की माला जपते जपते उन्होंने चारों तरफ रीमा की ढूंढने की कोशिश की लेकिन उन्हें मिलना तो दूर उसके कोई निशानी तक नहीं मिली वह हैरान थे ऐसे कैसे हो सकता है अचानक से एकदम से रीमा कैसे गायब हो सकती है क्या उसे भालू उठा ले गया अगर उसे भालू ने उठा लिया गया है तो इसका मतलब वो कहीं आस-पास ही होगा उन्हें जल्दी से यहां से भाग लेना चाहिए और वह अपने डर के मारे फिर से वह ढलान चढ़कर के ऊपर सड़क पर आ गए और सूर्यदेव को फोन कर दिया कि साहब स्कूटर तो मिल गया है लेकिन मैडम गायब हो गई हैं |

सूर्यदेव बौखला गया उसे पता था रीमा ही एक ऐसी चाबी है जो उसे जग्गू के बाप विलास के कहर से बचा सकती हैं अगर वो नहीं मिली तो विलास उसको जिन्दा नहीं छोड़े | आखिरकार अपने आदमियों को गली देता हुआ वो खुद ही घटनास्थल की तरफ चल पड़ा|

इधर अनिल और उनकी पुलिस फोर्स फैक्ट्री के गेट पर पहुंच गई थी लेकिन वहां पर गार्डों ने उन्हें अंदर घुसने नहीं दिया क्योंकि सभी के सभी पुलिसवाले सादी वर्दी में थे अनिल ने धमकाने की भी कोशिश करी लेकिन गार्ड टस से मस नहीं हुए उसके बाद अनिल को लगा अब तो समस्या हो जाएगी उसके बाद में उन्होंने रोहित को फोन किया और पुलिस वाले ने अपने साहब को फोन किया काफी देर तक फोन पर इधर-उधर लोगों को फोन नंबर मिलाते रहे आखिरकार अनिल की वहां के कमिश्नर साहब से बात हो गई और उसके बाद कमिश्नर के फोन पर लोकल पुलिस अनिल की मदद करने के लिए आई | उन्होंने गार्डों को धमकाया, गार्डो ने सीधे सूर्यदेव को फ़ोन मिला दिया | सूर्यदेव ने फ़ोन नहीं उठाया | गार्ड अपनी जगह पर अड़ गए और पोलिस को मजबूरन अपने असली रूप में आना पड़ा | गार्डो को पकड़ने और काबू करने के बाद अंदर जाकर के जब उन्होंने पूरी फैक्ट्री की तलाशी ली तो उन्हें कुछ नहीं मिला हालांकि जिस जगह से सिग्नल आया था अनिल सीधे वही गए बाकी पुलिसवाले पूरी फैक्ट्री की तलाशी लेने लगे | अनिल को वह सैंडल रीमा की मिल गई थी लेकिन रीमा वहां नहीं थी | | अनिल ने काफी देर तक सब कुछ बारीकी से देखने के बाद वहां से लौट आए वो पूरी तरह से निराश हो चुके थे आखिर रीमा यहां थी तो कहां गई | गार्डो को पता होना चाहिए | गार्डो को नहीं पता होगा तो किसको पता होगा | गार्डो पर पोलिस के लाठी डंडे बरसने लगे | कुछ ही देर में गार्डो ने मुहँ खोल दिया |

अनिल हैरान थे रीमा यहाँ से इतनी खतरनाक जगह से भाग निकली | उस गार्ड को पकड़कर लाने के लिए पोलिस ने छापे मारने शुरु कर दिए | इधर सूर्यदेव को फैक्ट्री में पोलिस के छापे की खबर लग गयी | जब सूर्य देव को पता चला कि पुलिस जो है वह किसी बाहर के आदमी को उसकी फैक्ट्री में लेकर गई है तो वह आगबबूला हो गया था पूरी बात पता चलने के बाद में उसका गुस्सा कुछ कम हुआ लेकिन उसने गुस्से में आकर के गार्ड और महिला गार्ड दोनों को मौत का फरमान सुना दिया था क्योंकि उन्हीं दोनों के कारण यहां से रीमा भाग कर गई थी आखिरकार गार्ड को सूर्य देव के आदमियों ने धर दबोचा और उससे पूछताछ करने पर जब नहीं ज्यादा कुछ जानकारी नहीं मिली तो उसे गोली मार दी | गार्ड मौत के घाट उतार दिया गया | उसे समझ आ गया था अगर रीमा पोलिस के हाथ लग गयी तो उसका खेल ख़त्म है |

अनिल के अंदर आशा की एक उम्मीद जगी और वो रीमा को ढूढ़ने निकल पड़े | उन्होंने पुलिस से कहा कि पूरे शहर की नाकाबंदी कर दो और इस कस्बे से आने जाने वाले सभी के ऊपर पूरी तरह से निगरानी रखो | कस्बे के चारों तरफ बहुत ही पुलिस का पहरा कड़ा हो गया था बाहर जा पाना लगभग असंभव था |
 
इधर सूर्यदेव भी घटनास्थल पर पहुंच गया था वह हैरान था रीमा के दुस्साहस को देखकर हैरान था किस औरत से पंगा ले लिया है अब तो वह धीरे-धीरे मुसीबत के दलदल में फंसता हुआ जा रहा था इधर अनिल ने रोहित से लंबी चौड़ी बात करी और उसके बाद फैसला किया कि रीमा की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा दिया जाना चाहिए और उसकी फोटो टीवी चैनल पर प्रसारित कर देनी चाहिए रोहित ने भी इससे हामी भरी और अब उसे रीमा की सचमुच में चिंता होने लगी थी अब तक वह सिर्फ इस बात से चिंतित था कि रीमा कहां एकदम से गायब हो गई लेकिन अब तो से लग रहा था कहीं ऐसा तो नहीं कि उसने रीमा को हमेशा के लिए खो दिया है उसने अपने ऑफिस से छुट्टी ली और फ्लाइट पकड़कर के देश वापस आ गया |

इधर रीमा एक कमरे में लेटी हुई थी जब उसको होश आया तो उसने देखा कि वह एक कमरे में लेटी हुई है उसके ऊपर एक चद्दर पड़ी हुई है उसका सिर में बहुत तेज दर्द हो रहा है उसकी कमर और बदन में भी बहुत बहुत तेज दर्द हो रहा है पूरे शरीर में दर्द से बुरा हाल था | ऐसा लग रहा था उसे चक्दिकर आ रहे है | आंखे खुलते ही दिमाग भी सक्रीय हो गया | उसे समझ नहीं आया अभी वो कहाँ है | उसने इधर-उधर गर्दन घुमाकर देखा तो उसे कुछ पता नहीं चला कि आखिर वह इस कमरे में क्या कर रही है उसने अपने दिमाग पर जोर डाला और आखरी चीज जो उसे याद आई है उसका स्कूटर सड़क से उतरकर सड़क के पटान की ढलान पर उतर गया था उसके बाद वह पत्थरों पर स्कूटर को संभाल नहीं पाई थी और लुढ़क गई थी | रीमा के व्यथित मन में एक ही सवाल था मैं कहां हूं क्या मै फिर से सूर्य देव के चंगुल में फंस गई | नहीं अब फिर से नहीं, नहीं अब और नहीं आखिर कितनी बार ..................क्या उन पीछा करने वाले लडको ने मुझे पकड़ लिया........................ वह सूर्य देव के चंगुल में फंस गई है | आखिरकार मै हूँ कहाँ ..................... तभी उसका ध्यान अपने ऊपर पड़ी चद्दर पर गया तो उसे एहसास हुआ है चादर के नीचे वह पूरी तरह से नंगी लेटी हुई है, हाययय वो नंगी, उसने आइस्ते से अपने ऊपर पड़ी चादर को उठाया और देखा | उसकी चोटों पर एक लाल रंग की दवाई लगी हुई थी उसे समझ में नहीं आया यह सब क्या है, उसे लगा कि फिर से सूर्य देव के आदमियों के चंगुल में फंस गई है और चोट लगने के कारण उन्होंने उसकी मरहम पट्टी की | यही सब समझ कर उसका दिल बैठा जा रहा था उसकी आंखों में अंधेरा छाने लगा था और वह सिबुक सिबुक कर करके रोने लगी

कुछ ही देर बाद में जिस कमरे में रीमा लेती थी उसके दरवाजे पर एक दस्तक हुई रीमा चौकन्नी हो गई | उसने तेजी से अपने हाथों से आँखों से बह रहे आंसू पोंछ लिए | हालांकि उसकी कोहनी भी दुख रही थी लेकिन उसने किसी तरह मोड़ कर अपने आंसू पोंचे ताकि सामने वाले को वह लाचार और बेबस ना दिखे | उसने देखा दरवाजा खोलकर एक छ फीट हट्टा कट्टा आदमी अंदर आया उसके हाथ में दो थैले थे उसने आते ही सबसे पहले रीमा की तरफ देखा | रीमा ने जानबूझकर आंखें बंद कर दी थी | उसने एक मेज पर दोनों थैले रखे उसके बाद में उसने पास आकर के रीमा के माथे पर उंगलियों से उसके तापमान का जायजा लिया |

खुद ही बुदबुदाया - बुखार तो नहीं है |

फिर उसने कन्धा हिलाकर रीमा को जगाने की कोशिश की - उठो मैडम, दवाइयाँ खाने का वक्त हो गया है | एक दो बार उसके कंधे हिलाने के बाद रीमा ने धीरे से आंखें खोल दी और उसके मन में हजारों सवाल थे कौन से सवाल पहले पूछे से समझ में नहीं आया था रीमा ने सबसे पहले उससे पूछा - मैं कहां हूं |

वह आदमी काफी ही गंभीर आवाज में बोला - मैडम आपको चोट लगी है आप चिंता ना करें आप जहां भी हैं पूरी तरह से सुरक्षित हैं |

रीमा - तुम सूर्यदेव के आदमी हो |

सूर्यदेव का नाम सुनते ही वो चौंक गया - सूर्यदेव को कैसे जानती हो |

रीवा के मुंह से फिर वही सवाल निकला - मैं कहां हूं |

आदमी थोड़ा भरोसा दिलाने वाले अंदाज में बोला - मैडम आप जहां भी हैं पूरी तरह से सुरक्षित हैं आपको चोट लगी है आपको आराम करना चाहिए और दिमाग पर जोर नहीं डालना चाहिए |

रीमा अन्दर से डर और दहशत से भरी हुई थी लेकिन उसी डर ने उसको हिम्मत भी दी | उसने दृढ़ता से पूछा - मै जानती हूँ तुम सूर्यदेव के आदमी हो |

रीमा के मुंह से सूर्य देव का दुबारा नाम सुनते ही वो आदमी हैरान रह गया - पहले ये बताओ सूर्य देव को आप कैसे जानती हैं |

रीमा भी हैरान रह गई क्या कि सूर्य देव का नाम सुनते ही वह क्यों चौका रीमा ने फिर से उस आदमी को जवाब दिया - सवाल पहले मैंने पूछा है मुझे जवाब चाहिए तुम सूर्य देव के आदमी हो ?

वह आदमी बोला - नहीं मैं सूर्यदेव का आदमी नहीं हूं |

रीमा - फिर तुम कौन हो |

आदमी - मैडम आप ज्यादा दिमाग पर जोर मत डालिए मैं कह रहा हूं ना आप पूरी तरह से सेफ है |

रीमा बोली - मुझे बताओ तुम कौन हो |

आदमी - यूं समझ लीजिए कि मैं सूर्यदेव का दुश्मन हूँ |

रीमा चौंकी ....... उसके सिर में और बदन में तेज दर्द हो रहा था | उस गबरू मर्द के जवाब से रीमा थोड़ा निश्चिंत हुई लेकिन वो सच बोल रहा है इसका कोई भरोसा नहीं था | रीमा का बदन दुःख रहा था वो दर्द से कराहने लगी |

वह आदमी बोला - मैडम मैंने कहा था ना आप अपने दिमाग पर ज्यादा जोर मत दो आप पूरी तरह से सुरक्षित हो , मैं आपके लिए पेन किलर स्प्रे और मरहम पट्टी और दवाइयां लाया हूं | आप को जब यहाँ लाया था तब आप बेहोश थी इसीलिए आपके ऊपर लाल दवाई लगा दी थी | तब मैं आपको दवा नहीं खिला सकता था | अब आप उठ गए हो तो आप पहले यह दवाइयां खा लो | उसके बाद में आपको जो पूछना है आप पूछ लेना |

रीमा ने अपने को उठाने की कोशिश करी लेकिन वह उठ नहीं पाई, वह आदमी आया और उसने रीमा को बिस्तर पर उठाकर बैठाया | लेकिन जैसे ही रीमा बिस्तर पर उठ कर बैठी उसके ऊपर की चद्दर नीचे खिसक कर के कमर तक पहुंच गई और उसके बड़े बड़े उन्नत ठोस तने हुए उरोज नुमाया हो गए रीमा शर्म से दोहरी होकर रह गयी| एक अनजाने मर्द के सामने उसकी चूचियां बिलकुल निवस्त्र नंगी बेपर्दा लेकिन फिर जल्दी ही उसके दिमाग में सवाल आया आखिर मेरे कपड़े कहां गए |

रीमा ने अगला सवाल करते हुए - मेरे कपड़े कहां है |

आदमी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान है - मैडम आप बहुत खूबसूरत हो, कमाल का गोरा गुलाबी बदन है आपका लेकिन आप सवाल बहुत पूछती हो मैंने कहा ना आप आराम करो मैं आपके हर सवाल का जवाब दूंगा |

रीमा बोली - मेरे कपड़े कहां है पहले ये बताओ तुमने मेरे कपड़े उतारे, तुमने मुझे नंगा किया |

आदमी बोला - मैडम आप जितनी ऊंचाई से लुढ़कते गिरी थी बहुत ही किस्मत वाली है जो जिन्दा है वरना वहां से गिरने के बाद कोई बचता नहीं है इतने बड़े-बड़े पत्थर जो ढलान पर पड़े हैं उसमें से कोई से भी आप टकरा जाती ना तो आपका काम तमाम हो जाता |

रीमा को उस पर गुस्सा आ रहा था - मेरे कपड़े कहां है आखिर तुमने मुझे नंगा क्यों किया |

आदमी - मैडम जब आप नीचे गिरी तो आपके कपड़े धूल मिट्टी से पूरी तरह से गए थे आपके शरीर से निकलने वाला खून भी उन कपड़ों में लग गया था और कपड़े जगह-जगह से फट गए थे तो आपके बदन पर जो कपड़े थे वो धुल मिट्टी खून से पूरी तरह से सने हुए थे और फटे हुए भी थे इसीलिए मैंने उतार दिया था ताकि मैं आपके शरीर पर चोटों पर दवाइयां लगा सकूं | अब आप बतावो आपके कपड़े उतारे बिना मै आपके चुताड़ो या सीने पर लाल मलहम कैसे लगा सकता था | आपकी जान बचाने के लिए ही आपको नंगा किया था, आपके हुस्न का दीदार करने के लिए नहीं |

रीमा चुप हो गयी |

वो आदमी आगे बोला - मैडम अगर आप की परमिशन हो तो मैं आपके चोटों पर मरहम पट्टी कर दूं और आपकी कमर पर यह स्प्रे ताकि आप यह जो दर्द से कराह रही है इससे आपको राहत मिलेगी |

रीमा ताना मारते हुए - तुमने मेरे सारे कपड़े उतारे तुमने मुझे नंगा किया तुमने मुझे पूरी तरह से देख लिया, सर से लेकर पैर तक | अब परमिशन क्यों मांग रहे हो |

आदमी मुस्कुराया - लगता है मैडम नाराज है मैडम आपकी जान बचाने के लिए जो जरूरी था मैंने वही किया अभी भी मैं वही कर रहा हूं |

रीमा क्या कहती है अब आखिरकार उसने जो उसके लिए किया है उसके आगे रीमा के पास कोई सवाल बचा ही नहीं था |

रीमा ने भी अपने खुले सीने को नहीं ढका, वही वैसे ही बैठी रही | वो आदमी रीमा के लिए कुछ गोलियां लेकर आया, रीमा ने गोली खा ली | उसके बाद वो रीमा की मरहम पट्टी करने लगा | उसने रीमा की कोहनियों पर दवाई लगायी और टेप से पट्टी लगा दी , फिर कमर और कंधे पर भी यही किया | रीमा उसी तरह से बैठी रही |

आदमी - आप वैक्सिंग करती हो, तभी आपका जिस्म इतना गोरा और चिकना है |

रीमा कुछ नहीं बोली |

आदमी - मै ही जानता हूँ मैंने खुद को कैसे काबू कर रखा है |

रीमा - मेरी इस लाचारी का फायदा उठाओगे , मेरी इज्जत लूटोगे, मेरे साथ बलात्कार करोगे |

आदमी रीमा की पीठ पर दवाई मलता हुआ - मैडम अगर बिना आपकी मर्जी के कुछ करना होता तो अब तक कर चूका होता | मैडम मर्द जेंटलमैन भी होते है | बिना औरत की मर्जी के उन्हें नहीं चोदते |
 
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