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दीदी ने दुबारा मेरा हाथ पकड़ा और अपनी गुनगुनी नरम चूत पर रख दिया जो कि बिल्कुल पूरी तरह से चिकनी और सफाचट थी | मुझे दीदी की गरम जवान बदन की गर्माहट गुना गुना सा महसूस हुआ और मेरे अंदर एक सनसनी सी दौड़ गई और मेरे पेंट में भी कुछ हरकत होने लगी | दीदी ने मेरे पैंट के ऊपर अपना हाथ जमा दिया और ऊपर नीचे करके सहलाने लगी मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि हो क्या रहा है | दीदी ने मेरा हाथ पकड़कर चूत के ओठों और दरार पर सहलाने को बोला | दीदी ने मेरा दूसरा हाथ अपने सीने पर रख दिया और उन्होंने कहा इसे दबावों | मुझे फिर समझ में नहीं आया तो दीदी ने खुद ही अपनी उठी हुए उरोजो को मसल कर बताया की कैसे मम्मो को दबाते है | जब दीदी ने खुद दबाकर बताया तो मै भी सीख गया | मै दीदी के उभरे हुए बड़े बड़े मम्मो को दबाने लगा | दीदी की छाती दबाने में बहुत ही मजा आ रहा था | धीरे धीरे मेरी पेंट में तनाव बढ़ने लगा मुझे समझ में नहीं आ रहा था ऐसा क्हायों हो रहा है | हाँलांकि सुबह सुबह जब मैं पेशाब करने जाता था तब यह बिल्कुल तना हुआ मिलता था पर मुझे लगता था कि पेशाब भरी होने के कारण ऐसा होता होगा | लेकिन अभी तो मुझे पेशाब नहीं लगी थी फिर भी यह सीधा हो रहा था यह मेरे लिए एक हैरानी की बात थी | दीदी मेरे और करीब आ गई और उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और कहा - तूने मै कैसी लगी | तुझे रोज तो पूछता था दीदी यहां तुमारे बाल क्यों | तुझे चड्ढी क्यों नहीं पहनती | आज देख न तो मेरी चूत पर बाल है और आज मैंने चड्डी भी पहनी है |
मै - दीदी आपके बाल क्या हुए |
दीदी - कभी अपने पापा को दाढ़ी बनाते देखा है |
मै - हाँ |
दीदी - उसी तरह चूत के बालो की भी सेविंग की जाती है | अच्छा अब बता तुझे मै चड्डी पहन के ज्यादा अच्छी लगती हूं या बिना चड्ढी के |
मै - दीदी सच कंहू तो अब से आप मुझे बिना चड्डी के ज्यादा अच्छी लगती हो | आप दूसरी लडकियों से बिलकुल अलग हो आपकी गुलाबी चिकनी चूत का मै दीवाना हो गया हूँ |
दीदी - अच्छा चल अब तू मुझे बता तुझे मेरी चूत कैसी लगती है क्या मैं भी तेरे लिए उतनी ही खास हूं इतना कह कर के दीदी बिस्तर पर लेट गई और उन्होंने अपनी टांगे उठा कर के मोड़ कर पेट से चिपका ली | इस दीदी की चूत बिलकुल साफ़ साफ़ चमकने लगी |
कमरे में बल्ब की आ रही हल्की सुनहरी रोशनी में दीदी का बदन देख कर के तो जैसे मैं हुस्न परियों के स्वर्ग में पहुंच गया हूं |
मै तो दीदी की खूबसूरती देख कर ही मदहोश हो गया | मुझे कुछ और याद ही नहीं रहा | मै बस दीदी की गुलाबी सुनहरे बदन की एकटक देखने लगा |
दीदी मेरी ख़ामोशी से बेचैन हो रही थी - बता न मेरी चूत कैसी लगी तुझे |
मै जैसे किसी सपने से बाहर आया - हाँ दीदी आपकी चूत किसी अप्सरा की जैसी मस्त और खूबसूरत है | बस नीचे के बाल बनाकर इसे ऐसी ही हमेशा चिकनी बनकर रहा करो | दीदी आप तो ऐसे लग रही है जैसे हुस्न परी हो मुझे इतनी हसींन कभी नहीं लगी | आपने इतना खूबसूरत बदन इन कपड़ो में छिपा रखा था उर मुझे भनक तक नहीं लगने दी | दीदी के चूतड़ और जांघे ऐसे चमक रहे हैं जैसे उनसे सुनहरी रोशनी निकल रही हो | दीदी के गुलाबी जिस्म से जैसे लग रहा हूं सोने की रंगत का की रोशनी अपने आप निकल कर चारो ओर फ़ैल रही हो |
मै - मुझे तो पता ही नहीं था दीदी कि चूत होती कैसी है उसको क्या कहते हैं लेकिन मुझे जो भी समझ में आ रहा है दीदी इस कच्ची उम्र में उसके हिसाब से आपकी चूत बहुत खूबसूरत है आपकी चूत बहुत बहुत बहुत खूबसूरत है | सिर्फ आपकी चूत ही नहीं आपके रसीले गुलाबी ओंठ आपकी चंचल हसींन आंखें आपके नरम गुलाबी गाल आपका पतला गला, सपाट पेट , आपके बड़े बड़े दूध से उठा हुआ सीना और आपके बड़े बड़े चूतड़, ये मांसल नरम गुदाज जांघे | दीदी मै आपका एदीवाना हो गया हूँ बस मन कर रहा है ऐसी ही आपको देखता रहू | हुए रोज आपकी पेट आप खाना भी आपकी कमर का पूरा बदन किसी हुस्न परी से कम नहीं है
आप इतनी खूबसूरत होगी इतनी गोरी होगी मुझे तो अंदाजा ही नहीं था आप बहुत ही खूबसूरत है इतनी खूबसूरत है कि मेरे पास उसको बयान करने के लिए शब्द नहीं है देखो ना दीदी आपकी कसी गुलाबी चूत इस बल्ब की रोशनी से किस तरह से सोने की तरह दमक रही है आपके चूतड़ से कैसे सुनहरी सी रोशनी निकल रही है | मेरे पेंट में झटके लगने लगे और मेरा लंड तनने लगा | मै हैरान था ये क्या हो रहा है | लेकिन ,मै दीदी के हुस्न में इतना मदहोश था की मैंने उधर ध्यान ही नहीं दिया |
दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हो गयी | शायद उनकी तारीफ अभी तक किसी ने नहीं की थी |
दीदी - तो तू बता अब मैं तुझे कपड़े पहनकर ट्यूशन पढ़ाया करूं या पूरी तरह से कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करू |
मै - दीदी इस समय आप मुझे बहुत अच्छी लग रही हो है मुझे लग रहा है आप मुझे कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करो |
दीदी बोली जोश में आकर के - यह हुई ना बात |
इतना कहकर उन्होंने कस कर के मेरे पैंट के ऊपर बने हुए उभार को कस कर जकड़ लिया - मुझे समझ नहीं आया कि यह क्या है |
मैंने दीदी से पूछा - दीदी मुझे तो अभी पेशाब भी नहीं लगी है फिर यह मेरा लंड इस तरह से अकड़ कर तब क्यों गया है | वैसे तो ये बस सुबह सुबह होता है |
दीदी बोली- तेरा बहुत बड़ा है यह आदमी का लंड है अब तू मर्द हो गया है अब जैसे ही औरत की चूत तुझे दिखेगी, यह खड़ा हो जाया करेगा और उसको चोदने का तुझे मन करेगा |
मै - दीदी आप क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा |
दीदी - तुम परेशान मत हो ठीक है धीरे धीरे धीरे सब बताऊंगी सब करके भी दिखाऊंगी तो हैरान मत हो |
इतना कह कर के दीदी ने मेरी पैंट के अंदर की ज़िप खोली और अपना हाथ अंदर घुसा करके मेरे लंड को थाम लिया और ऊपर नीचे करके हिला करके मुठ मारने लगी | मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मरी थी इसलिए मुझे कुछ समझ में नहीं आया |
दीदी ने कहा - अब एक काम कर चल पीछे की तरफ झुक जा |
मै वैसे ही पीठ के बल जमीन पर लेटता चला गया | दीदी झट से उठी और अपनी चड्ढी निकाल फेंकी और मेरे मुहँ पर आकर बैठ गयी |
दीदी - कभी हथेली पर लगी आइसक्रीम चाटी है |
मै - हाँ दीदी |
दीदी - बस उसी तरफ मेरी चूत चाट |
मै जीभ निकालकर दीदी की चूत चाटने लगा | दीदी की गरम नरम चिकनी चूत चाटने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था | दीदी भी मदमस्त होने लगी | उनके मुहँ से मादक आवाजे निकलने लगी | दीदी सी सी सी सी करने लगी थी मुझे लगा कि दीदी को तकलीफ हो रही है मैंने दीदी से मैंने पूछा - दीदी आपको कही दर्द हो रहा है | \
दीदी मेरे भोलेपन पर हंसने लगी - अरे पगले यह दर्द नहीं है ये तो मजे की सिसकारी है मुझे बहुत मजा आ रहा है तू और कस के मेरी चूत को चाटता रह | इतना कहकर दीदी ने अपनी चूत के ओंठ उंगलियों से फैला दिए और उसके अन्दर तक जीभ घुसेड कर चूत चटाने को कहने लगी | मैंने बिलकुल वैसा ही किया | दीदी अब आगे की तरफ झुक गयी और मेरे लंड को अपने हाथ से सख्ती से जकड लिया और मुठीयाने लगी | जैसे जैसे मै दीदी की चूत में जीभ घुसेड़कर चाटता , दीदी आनंद से मस्त हो जाती और मेरे लंड को और कसकर मसलने लगती | दीदी मेरे लंड को तेजी से मुठिया रही थी मेरी सांसें तेज होने लगी थी और मुझे पसीना आने लगा था मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या है जो भी हो रहा था उसने मुझे बहुत मजा आ रहा था | दीदी ने मेरे माथे पर पसीने की बूंदें देखि तो दूसरी तरफ को चल रहा टेबल फैन मेरी तरफ को कर दिया और इससे मुझे काफी राहत मिली थी | दीदी कुछ देर तक तेजी से अपने हाथ को हिलाती रही धीरे धीरे मेरी आंखें बंद होने लगी और मैं आनंद के सागर में डूबने लगा था मैं दीदी की चूत चाटना भूल गया था दीदी के हाथ तेजी से मेरे लंड पर आगे पीछे हो रहे थे और वह बहुत तेजी से मेरे लंड को मसल रही थी कुछ देर बाद मेरे शरीर में अजीब सी ऐठन होने लगी | मेरे लंड से तेजी से एक पिचकारी निकली और दीदी के हाथ और उनकी छाती को भिगो गई | दीदी उसके बाद भी नहीं रुकी | मेरी सांसे पूरी तरह उखाड़ चुकी थी मै अपनी सांसे काबू करने लगा | कुछ देर बाद उन्होंने मेरा लंड छोड़ दिया | उन्होंने अपने ऊपर पड़े हुए उस सफेद पदार्थ को चाट लिया और अपने हाथों को चाटने लगी फिर उन्होंने एक रुमाल से मेरे लंड को पूछा और मेरी पैंट के अंदर घुसेड़ कर चेंन बंद कर दी और अपनी उंगलियां को फिर से चाटने लगी | मै दीदी की तरफ देख रहा था | दीदी मेरी पेंट की तरफ |
दीदी हल्का सा बुदबुदाई - कितना बड़ा औजार है अभी से |
मै - दीदी कुछ कहा आपने |
दीदी - तेरा लंड अभी से जवान मर्दों से भी बड़ा है आगे चलकर तो तेरा हथियार मुसल ही बन जायेगा |
मै - दीदी ये सब क्या था वैसे |
दीदी - आज की ट्यूशन खत्म हो गई , कल एक नया पाठ सिखाउंगी | अब घर जा किसी को मत बताना तुझे मेरी कसम | मजा आया |
मै अपनी किताबे समेटता हुआ - बहुत |
दीदी भी अपने कपड़े पहनने लगी - अभी तो शुरुआत है |
मै - दीदी आपके बाल क्या हुए |
दीदी - कभी अपने पापा को दाढ़ी बनाते देखा है |
मै - हाँ |
दीदी - उसी तरह चूत के बालो की भी सेविंग की जाती है | अच्छा अब बता तुझे मै चड्डी पहन के ज्यादा अच्छी लगती हूं या बिना चड्ढी के |
मै - दीदी सच कंहू तो अब से आप मुझे बिना चड्डी के ज्यादा अच्छी लगती हो | आप दूसरी लडकियों से बिलकुल अलग हो आपकी गुलाबी चिकनी चूत का मै दीवाना हो गया हूँ |
दीदी - अच्छा चल अब तू मुझे बता तुझे मेरी चूत कैसी लगती है क्या मैं भी तेरे लिए उतनी ही खास हूं इतना कह कर के दीदी बिस्तर पर लेट गई और उन्होंने अपनी टांगे उठा कर के मोड़ कर पेट से चिपका ली | इस दीदी की चूत बिलकुल साफ़ साफ़ चमकने लगी |
कमरे में बल्ब की आ रही हल्की सुनहरी रोशनी में दीदी का बदन देख कर के तो जैसे मैं हुस्न परियों के स्वर्ग में पहुंच गया हूं |
मै तो दीदी की खूबसूरती देख कर ही मदहोश हो गया | मुझे कुछ और याद ही नहीं रहा | मै बस दीदी की गुलाबी सुनहरे बदन की एकटक देखने लगा |
दीदी मेरी ख़ामोशी से बेचैन हो रही थी - बता न मेरी चूत कैसी लगी तुझे |
मै जैसे किसी सपने से बाहर आया - हाँ दीदी आपकी चूत किसी अप्सरा की जैसी मस्त और खूबसूरत है | बस नीचे के बाल बनाकर इसे ऐसी ही हमेशा चिकनी बनकर रहा करो | दीदी आप तो ऐसे लग रही है जैसे हुस्न परी हो मुझे इतनी हसींन कभी नहीं लगी | आपने इतना खूबसूरत बदन इन कपड़ो में छिपा रखा था उर मुझे भनक तक नहीं लगने दी | दीदी के चूतड़ और जांघे ऐसे चमक रहे हैं जैसे उनसे सुनहरी रोशनी निकल रही हो | दीदी के गुलाबी जिस्म से जैसे लग रहा हूं सोने की रंगत का की रोशनी अपने आप निकल कर चारो ओर फ़ैल रही हो |
मै - मुझे तो पता ही नहीं था दीदी कि चूत होती कैसी है उसको क्या कहते हैं लेकिन मुझे जो भी समझ में आ रहा है दीदी इस कच्ची उम्र में उसके हिसाब से आपकी चूत बहुत खूबसूरत है आपकी चूत बहुत बहुत बहुत खूबसूरत है | सिर्फ आपकी चूत ही नहीं आपके रसीले गुलाबी ओंठ आपकी चंचल हसींन आंखें आपके नरम गुलाबी गाल आपका पतला गला, सपाट पेट , आपके बड़े बड़े दूध से उठा हुआ सीना और आपके बड़े बड़े चूतड़, ये मांसल नरम गुदाज जांघे | दीदी मै आपका एदीवाना हो गया हूँ बस मन कर रहा है ऐसी ही आपको देखता रहू | हुए रोज आपकी पेट आप खाना भी आपकी कमर का पूरा बदन किसी हुस्न परी से कम नहीं है
आप इतनी खूबसूरत होगी इतनी गोरी होगी मुझे तो अंदाजा ही नहीं था आप बहुत ही खूबसूरत है इतनी खूबसूरत है कि मेरे पास उसको बयान करने के लिए शब्द नहीं है देखो ना दीदी आपकी कसी गुलाबी चूत इस बल्ब की रोशनी से किस तरह से सोने की तरह दमक रही है आपके चूतड़ से कैसे सुनहरी सी रोशनी निकल रही है | मेरे पेंट में झटके लगने लगे और मेरा लंड तनने लगा | मै हैरान था ये क्या हो रहा है | लेकिन ,मै दीदी के हुस्न में इतना मदहोश था की मैंने उधर ध्यान ही नहीं दिया |
दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हो गयी | शायद उनकी तारीफ अभी तक किसी ने नहीं की थी |
दीदी - तो तू बता अब मैं तुझे कपड़े पहनकर ट्यूशन पढ़ाया करूं या पूरी तरह से कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करू |
मै - दीदी इस समय आप मुझे बहुत अच्छी लग रही हो है मुझे लग रहा है आप मुझे कपड़े उतार के ट्यूशन पढ़ाया करो |
दीदी बोली जोश में आकर के - यह हुई ना बात |
इतना कहकर उन्होंने कस कर के मेरे पैंट के ऊपर बने हुए उभार को कस कर जकड़ लिया - मुझे समझ नहीं आया कि यह क्या है |
मैंने दीदी से पूछा - दीदी मुझे तो अभी पेशाब भी नहीं लगी है फिर यह मेरा लंड इस तरह से अकड़ कर तब क्यों गया है | वैसे तो ये बस सुबह सुबह होता है |
दीदी बोली- तेरा बहुत बड़ा है यह आदमी का लंड है अब तू मर्द हो गया है अब जैसे ही औरत की चूत तुझे दिखेगी, यह खड़ा हो जाया करेगा और उसको चोदने का तुझे मन करेगा |
मै - दीदी आप क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा |
दीदी - तुम परेशान मत हो ठीक है धीरे धीरे धीरे सब बताऊंगी सब करके भी दिखाऊंगी तो हैरान मत हो |
इतना कह कर के दीदी ने मेरी पैंट के अंदर की ज़िप खोली और अपना हाथ अंदर घुसा करके मेरे लंड को थाम लिया और ऊपर नीचे करके हिला करके मुठ मारने लगी | मैंने आज तक कभी मुठ नहीं मरी थी इसलिए मुझे कुछ समझ में नहीं आया |
दीदी ने कहा - अब एक काम कर चल पीछे की तरफ झुक जा |
मै वैसे ही पीठ के बल जमीन पर लेटता चला गया | दीदी झट से उठी और अपनी चड्ढी निकाल फेंकी और मेरे मुहँ पर आकर बैठ गयी |
दीदी - कभी हथेली पर लगी आइसक्रीम चाटी है |
मै - हाँ दीदी |
दीदी - बस उसी तरफ मेरी चूत चाट |
मै जीभ निकालकर दीदी की चूत चाटने लगा | दीदी की गरम नरम चिकनी चूत चाटने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था | दीदी भी मदमस्त होने लगी | उनके मुहँ से मादक आवाजे निकलने लगी | दीदी सी सी सी सी करने लगी थी मुझे लगा कि दीदी को तकलीफ हो रही है मैंने दीदी से मैंने पूछा - दीदी आपको कही दर्द हो रहा है | \
दीदी मेरे भोलेपन पर हंसने लगी - अरे पगले यह दर्द नहीं है ये तो मजे की सिसकारी है मुझे बहुत मजा आ रहा है तू और कस के मेरी चूत को चाटता रह | इतना कहकर दीदी ने अपनी चूत के ओंठ उंगलियों से फैला दिए और उसके अन्दर तक जीभ घुसेड कर चूत चटाने को कहने लगी | मैंने बिलकुल वैसा ही किया | दीदी अब आगे की तरफ झुक गयी और मेरे लंड को अपने हाथ से सख्ती से जकड लिया और मुठीयाने लगी | जैसे जैसे मै दीदी की चूत में जीभ घुसेड़कर चाटता , दीदी आनंद से मस्त हो जाती और मेरे लंड को और कसकर मसलने लगती | दीदी मेरे लंड को तेजी से मुठिया रही थी मेरी सांसें तेज होने लगी थी और मुझे पसीना आने लगा था मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या है जो भी हो रहा था उसने मुझे बहुत मजा आ रहा था | दीदी ने मेरे माथे पर पसीने की बूंदें देखि तो दूसरी तरफ को चल रहा टेबल फैन मेरी तरफ को कर दिया और इससे मुझे काफी राहत मिली थी | दीदी कुछ देर तक तेजी से अपने हाथ को हिलाती रही धीरे धीरे मेरी आंखें बंद होने लगी और मैं आनंद के सागर में डूबने लगा था मैं दीदी की चूत चाटना भूल गया था दीदी के हाथ तेजी से मेरे लंड पर आगे पीछे हो रहे थे और वह बहुत तेजी से मेरे लंड को मसल रही थी कुछ देर बाद मेरे शरीर में अजीब सी ऐठन होने लगी | मेरे लंड से तेजी से एक पिचकारी निकली और दीदी के हाथ और उनकी छाती को भिगो गई | दीदी उसके बाद भी नहीं रुकी | मेरी सांसे पूरी तरह उखाड़ चुकी थी मै अपनी सांसे काबू करने लगा | कुछ देर बाद उन्होंने मेरा लंड छोड़ दिया | उन्होंने अपने ऊपर पड़े हुए उस सफेद पदार्थ को चाट लिया और अपने हाथों को चाटने लगी फिर उन्होंने एक रुमाल से मेरे लंड को पूछा और मेरी पैंट के अंदर घुसेड़ कर चेंन बंद कर दी और अपनी उंगलियां को फिर से चाटने लगी | मै दीदी की तरफ देख रहा था | दीदी मेरी पेंट की तरफ |
दीदी हल्का सा बुदबुदाई - कितना बड़ा औजार है अभी से |
मै - दीदी कुछ कहा आपने |
दीदी - तेरा लंड अभी से जवान मर्दों से भी बड़ा है आगे चलकर तो तेरा हथियार मुसल ही बन जायेगा |
मै - दीदी ये सब क्या था वैसे |
दीदी - आज की ट्यूशन खत्म हो गई , कल एक नया पाठ सिखाउंगी | अब घर जा किसी को मत बताना तुझे मेरी कसम | मजा आया |
मै अपनी किताबे समेटता हुआ - बहुत |
दीदी भी अपने कपड़े पहनने लगी - अभी तो शुरुआत है |