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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

दीदी बोली - जबरदस्ती करने की कोई जरूरत नहीं है, जब दुबारा लंड खड़ा हो तब चोद देना | इस तरह से खुद से जबरदस्ती न करो | चूत की प्यास है कुछ देर और प्यासी रह लेगी |

दीदी ने जो भी कहा मेरे कानी तक शायद पंहुचा ही नहीं | मैंने कुछ नहीं सुना था | मैंने दीदी चुताड़ो को पकड़कर फिर उसे को चोदने लगा था | दीदी को लगा मै उनकी सुनने वाला नहीं हूं तो अपने हाथ से चूत दाने को मसलते हुए फिर से टीवी देखने मस्त हो गई थी| असल में दीदी टीवी नहीं देख रही थी मेरी चुदाई का आनंद ले रही थी | इस बार मैंने उन्हें लंबे लंबे और धीरे धीरे धक्के लगा रहा था | जैसा कि दीदी ने खुद बताया था कि आराम से पूरा लंड चूत के आखिर छोर तक घुसेड़ो और फिर पूरा लंड बाहर निकालो | मैं उसी तरह से धीरे धीरे दीदी को चोद रहा था |

धीरे धीरे मेरा लंड फिर से पत्थर की तरह सीधा हो गया | दीदी की चूत की गरमी और उसके चुताड़ो की नरम मांसल अहसास ने मेरे जिस्सम में फिर से उत्तेजना भर दी | बार चोदते चोदते काफी देर तक मेरा लंड दीदी की चूत में ही अंदर बाहर होता रहा लेकिन इस बार पिचकारी नहीं छूटी थी मैं भी हैरान था दीदी की बातों में तो जादू था | जैसा दीदी कह रही थी मैं बिल्कुल वैसा ही करता रहा | इसी बीच में मैंने नोटिस किया दीदी का जिस्म दो बार कांपा | दीदी अभी भी टीवी ही देख रही थी लेकिन साथ में चूत दाने को भी मसल रही थी इधर उनकी चूत में सटासट मेरा लंड आ जा रहा था | अब मै दीदी को जोर जोर से पेल रहा था | मै बुरी तरह हांफने लगा था } और मै बुरी तरह से थक भी गया था | वो तो भला तो मेरी सफ़ेद मलाई का जो दीदी की चूत की सुरंग इतनी चिकनी हो गयी नहीं तो अब तक दीदी की नयी नवेली कसी चूत मुझे अब तक निचोड़ चुकी होती | दीदी खुश हो गई थी काफी देर तक चुदाई के बाद दीदी बोली - मुझे अब कसकर चोदो जितेश , जोर जोर से चोदो | जीतनी तेज मेरी चूत में लंड ठेल सकते हो ठेल दो |

दीदी के कहने से मै तेजी से धक्के लगाने लगा | सटासट मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में आ जा रहा था | मै दीदी की कसी चूत को लगातार दुबारा चोद रहा था | मै दीदी की चूत के हर प्यास बुझाने में दिल जान से लगा हुआ था | मेरे जिस्म में जीतनी ताकत थी उससे दे धक्के पे धक्के लगाकर मै दीदी को चोद रहा था | ऐसा लगा रहा था शायद इसके बाद कभी दीदी को चोदने को ना मिले | मेरा लंड और दीदी की चूत में भीषण घर्षण हो रहा था | दीदी की चूत तो जैसी आग की भट्ठी बन गयी ठिया और उसमे मै अपनी आग की मीनार को दनादन पेल रहा था |

मै - दीदी आपकी चूत ने तो मुझे पागल कर दिया है आःह्ह | इतना मजा तो मुझे पूरी जिंदगी में कभी नहीं मिला |

दीदी - चोदो जितेश, मुझे जी भर के चोदो, मेरी चूत की सारी प्यास बुझा दो | मेरे जिस्म की सारी आग बुझा दो | जमकर चोदो मुझे | जैसे मन हो वैसे चोदो मुझे | जीतनी तेज चोद सकते हो उतनी तेज चोदो मुझे |

मै - हाँ दीदी मैंने अपनी पूरी जान लगा दी है आपको चोदने में |

दीदी में अपने चूत दाने को बुरी तरह मसल रही थी | अभी उनका सर सोफे में घुसा हुआ था | वो भी अपने आखिरी चरम पर थी |

इधर मै दनादन दीदी की चूत में लंड पेले पड़ा था |

दीदी - यस जितेश बस ऐसे ही जोरदार तरीके से मसल डालो इस चूत को ........आआह्ह्ह्ह ऐसे तो मूवी में भी कोई नहीं चोदता है | चोदो मुझे |

न जाने मेरे अन्दर इतनी ताकत कहाँ से आ गयी थी | मै बिना रुके थके दीदी की चूत में लगातार दनादन धक्के मार रहा था | दीदी का जिस्म कसकर हिलने लगा | मैंने कसकर उनके चूतड़ थाम के उन्हें लुढ़कने से रोका और अपना पूरा जोर लगाकर तेजी से लंड को पूरा का पूरा दीदी की चूत में घुसेड लिया | मेरा लंड दीदी की चूत की गहराई में जाकर दुसरे छोर पर टकराया और मेरे अन्दर उबल रहे दावानल का बांध टूट गया | मेरा बदन हिलने लगा | मेरे पाँव जोर जोर से कांपने लगे | मेरे लंड से दीदी की चूत की सुरंग के आखिर छोर पर मेरी सफ़ेद मलाई छुटने लगी | काफी देर तक मेरी पिचकारी निकलती रही | मै पूरी तरह से थक कर पस्त हो चूका था | मुझे नहीं पता कब तक मेरा लंड अपनी मलाई दीदी को चूत में भरता रहा | मै दीदी के चुताड़ो पर ही टिकाकर खड़ा रहा | मेरी पिचकारियो से दीदी की चूत पूरी भर गयी थी | दीदी बोली - जितेश तुमने अपनी दीदी की चूत की प्यास बुझा दी | तुमने मेरी चूत को अपनी मलाई से लबालब भर दिया | असल में इसको चुदाई कहते है | इस उम्र में ही तुम किसी सच्चे मर्द से बढ़कर एक औरत को चोद सकते हो |

मेरा लंड मुरझाने लगा | मै अपने उखड़े प्राण लेकर दीदी की चूत से लंड निकाल कर वही फर्श पर बैठ गया |
 
मैंने देखा एक मोटी सफेद मलाई की धारा दीदी की चूत से फूट पड़ी थी और उनकी मोटी मोटी जांघो पर से बहती हुई नीचे सोफे पर जाकर के गिरने लगी थी | मै हैरान था हे भगवान इतना इतनी मलाई मैंने दीदी की चूत में भर दी है | मेरा लंड इतनी मलाई छोड़ने लगा है मुझे ऐसा लग रहा था जैसे 10 दिनों के अंदर ही मै पूरी तरह से जवान हो गया हूं | पहले मेरे लंड से इतनी मलाई नहीं निकलती थी लेकिन आज इतनी मलाई निकली है उसको देखकर मैं खुद हैरान रह गया था क्या यह दीदी की चूत का कमाल है या मैं दीदी चोदने की वजह से मिलाई ज्यादा निकलने लगी है मुझे कुछ नहीं पता था लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था |

मैंने दीदी से पूछा दीदी - अब ठीक है |

दीदी बेपरवाह लेती अभी भी टीवी ही देख रही थी | वो उसी में मस्त रही या शायद चुदाई से मस्त हो गयी थी | पता नहीं लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया |

मै - दीदी आपकी चूत की प्यास बुझ गई न |

दीदी - आज का सबक क्या है औरत को चोदने में कभी बहुत जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए औरत को आराम से चोदना चाहिए प्यार से चोदना चोदना चाहिए, जब औरत खुद चोदने को काहे तब उसे चोदना चाहिए |

मैं भी वहीं सोफे की किनारे पर सर रखकर लुढ़क गया और दीदी की चूत की दाल से चूत की से बहती हुई मलाई की धार को गौर से देखने लगा दीदी बोली अच्छा एक काम कर मैं तो टीवी देख रही हूं | अभी मेरी चूत के अंदर से मलाई को पूरी तरह से से इकट्ठा कर और एक कटोरी भर के रख दे |

मैंने वैसा ही किया |

दीदी - जरा चाट के तो देख कितनी टेस्टी है |

मैंने मुहँ बनाया |

दीदी बोली - खाना है तो खा नहीं तो इधर ला | इतना कहकर मेरे हाथ से कटोरी लेकर सारी मलाई गटक गयी |

उसके बाद हम दोनों खाना खाया | इसके बाद में दीदी पूरी तरह से नंगी हो गई और बिस्तर पर जाकर लेट गई मैं भी दीदी के साथ बिस्तर पर जाकर लेट गया दीदी अब मेरे ऊपर आ गई थी और मेरी बाहों में समा गई और दोनों गहरी नींद में सो गए कि 2 बार लगातार दीदी को चोदने के बाद में मैं बहुत थक गया था |

हम दोनों सुबह तक अच्छे खासे सोते रहे दीदी बीच में एक दो बार उठी बाथरूम गई उसने मुझे देखा मेरा लंड पूरी तरह से तना हुआ था दीदी हैरान थी कि 2 बार चोदने के बाद भी मेरा लंड मुरझाया नहीं था | उसके बाद दीदी आ करके फिर से सो गई थी मेरा लंड दीदी की चूत के आसपास रगड़ खा रहा था इस बार दीदी ने अपने आप को मेरे से चिपका के सो गई थी मैं दीदी के पीछे लेटा हुआ था |

जैसे ही मुझे एहसास हुआ दीदी आगे लेती है और मेरे तने लंड के ऊपर अपने चूतड़ रगड़ रही है | मैंने दीदी को बाहों में भर लिया अब मेरा लंड दीदी के चूतड़ों पर रगड़ खा रहा था और इसी तरह से हम दोनों एक दूसरे को सहलाते चुमते और चाटते फिर से सो गए |

उसके बाद में सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा मुझे बहुत तेज पेशाब लगी है और मेरा लंड भी पूरी तरह से अकड़ा हुआ है जय जल्दी से भाग कर गया और मैंने बाथरूम में पेशाब करी लेकिन जब वहां से वापस आया तब भी मेरा लंड नहीं मुरझाया था |

मैं हैरान था अब मैं इसका क्या करूं मैंने देखा दीदी बिस्तर पर उल्टा उल्टा लेती हुई है उनके बड़े-बड़े चूतड़ ऊपर की तरफ उठे हुए हैं और उनकी नंगी पीठ भी और साफ-साफ दिख रही है | दीदी ने मुझे एक पिक्चर दिखाई थी जिसमें एक आदमी एक सोती हुई लड़की को चोदता है | मेरे दिमाग में आईडिया आया क्यों ना दीदी को सोते हुए चोदा चोदा जाए और एक सरप्राइज दिया जाए |

मैं दीदी के को एक तरफ खिसकाकर उठाया और उनके पेट के नीचे एक तकिया लगा दी | इससे दीदी के चूतड़ थोड़ा और उठ गए थे जिससे कि उनकी चूत औत गांड और खुलकर बाहर आ गई | उसके बाद मै दीदी के पीछे गया मैं दीदी के चूतड़ों को सहलाते हुए उनकी जांघों को थोड़ा फैला दिया और अपने लंड पर खूब सारी लार लगा करके उसको चिकना किया |
 
दीदी सो रही थी, मै अपने लंड को सहला रहा था फिर मैंने दीदी की चूत पर भी ढेर सारी लार लगा दी | मै बार बार देख रहा था कही दीदी जाग तो नहीं गई लेकिन दीदी गहरी नींद में थी | उसके बाद मैं दीदी के पीछे आ कर के मैंने उनकी गरम गुलाबी चिकनी चूत पर अपना लंड सटा दिया |

जब मैंने लंड को उनकी चूत पर लगाया तो दीदी थोड़ा कसमसाई उसके बाद मै सावधान हो गया लेकिन जब मुझे लगा दीदी फिर से गहरी नींद में चली गई है तो मैंने उनकी चूत में लंड को धीरे धीरे ठेलने लगा | मै बहुत आराम से लंड पर जोर डाल कर दीदी की चूत में घुसेड रहा था और बार बार दीदी की चेहरे को देख रहा था कही दीदी जाग तो नहीं गयी | जब मेरा सुपाडा दीदी की चूत में गायब हो गया तो मैंने अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी | मै दीदी को हलके हलके चोदने लगा था | मै दीदी को सोते सोते चोद रहा था यही सोचकर मेरी उत्दितेजना बहुत बढ़ गयिया और जोश में आकर मैंने एक तेज धक्याका मार दिया | मेरा आधा लंड दीदी की चूत में घुस गया | दीदी कसमसा कर रह गयी | मुझे लगा दीदी जाग गयी है इसलिए मै बिलकुल बुत बनकर बैठ गया | यहाँ तक की अपनी सांसे की आवाज भी दीदी तक नहीं पहुचने दी | दीदी एक एक हाथ उठाया और अपने चुताड़ो पर कुछ टटोलने आ गयी | मैंने झट से दीदी की चूत से लंड निकाला और साइड में लेट गया | दीदी ने अपने चुताड़ो की टोह ली फिर अपने गाड़ के छेद पर उंगली फिराई | उसके बाद अपनी चूत का जायजा लेने लगी | उन्होंने अपनी चूत में भी एक उंगली घुसेड़ी | जा इत्मिनान हो गया की कही कुछ नहीं है तो हाथ वापस सर के नीचे रख लिया | कुछ देर तक मै लंड और अपनी सांसे थामे वैसे ही लेता रहा | जब लगा दीदी फिर से गहरी नीद में चली गयी है तो मै फिर से दीदी के पीछे आ गया | मैंने दीदी की चूत पर अपना लंड लगाया और धीरे से उनकी नरम गीली चूत में घुसेड दिया | कुछ देर तक बहुत हलके हलके धक्के लगाने के बाद मैंने दीदी की चूत में गहराइ तक लंड घुसेड दिया | इस बार दीदी की तरफ से कोई हरकत नहीं हुई | कुछ देर तक मै दीदी की चूत में लंड डाले पड़ा रहा | फिर दीदी की चूत में धक्के लगाने लगा | कुछ देर तक तो लगा सब ठीक है लेकिन उसके बाद जब दीदी के मुहँ से हूँ हूँ की आवाजे निकलने लगी तो मुझे कुछ शक हुआ | पता नहीं दीदी ऐसा सपना आया था या दीदी जान गई थी कि मैं उनको चोद रहा हूं | हालांकि जब मैंने दीदी को आवाज देकर बुलाया तो दीदी जगी नहीं थी | दीदी सो रही थी मैं दीदी को इसी तरह से चोदता रहा और दीदी ऐसे ही हु आं करती रही उसके बाद में मैंने दीदी को एकदम करवट लिटा दिया और फिर चोदना शुरु कर दिया था

दीदी की नींद अभी भी नहीं टूटती थी मैं हैरान था दीदी तो की नींद तो बहुत जल्दी खुल जाती थी अभी क्या हो गया अभी दीदी बिल्कुल सो रही है या सोने का नाटक कर रही है मुझे डर भी लग रहा था लेकिन मेरा लंड दीदी की चूत में सटासट आ जा रहा था | इसलिए मुझे बहुत मजा आ रहा था | दीदी की कसी गुलाबी गरम चूत चोदने का अहसास ही कुछ और था | मुझे नहीं पता था दीदी सो रही है या सोने का नाटक कर रही है लेकिन मुझे लगता था कि नॉर्मल के समय में इतना कुछ होने के बाद जरूर जाग जाती थी लेकिन अभी शायद सोने का नाटक कर रही है लेकिन जब मैंने दीदी को जगाने की कोशिश करी तो ऐसा लगा कि दीदी सचमुच में सो रही है | फिर मैं दीदी को वैसे ही लिटा कर चोदता रहा और चोदते चोदते काफी देर तक मैं दीदी के स्तनों को मुसल्ला रहा उनके चूतड़ों को सहला रहा और उनके उनके पेट को सहलाता रहा | उनकी चूत दाने को रगड़ता दीदी भी सपनों में ही सही हल्की सिसकारियां भर्ती रही | उसके बाद चोदते चोदते आखिरकार मैं उनकी चूत में ही झड़ गया था | शाम से लेकर अब तक दीदी को मैं 3 बार चोद चुका था अभी हिम्मत नहीं थी हालांकि मैं पूरी जैसे जवान था और जोश में भरा हुआ था लेकिन फिर भी मैं थक गया था और मैं उसी तरह से लंड को पूरा का पूरा दीदी की चूत में घुसा के सो गया था | सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा मैं अभी भी सो रहा हूं और दीदी भी सो रही है मेरा लंड दीदी की चूत के पास सिकुड़ा हुआ पड़ा हुआ है और उनकी चूत से निकला हुआ ढेर सारा लंड का रस भी बिस्तर पर पड़ा हुआ है मैंने उठने की कोशिश करी लेकिन मुझे बहुत थकान महसूस हो रही थी इसीलिए लेटा रहा | दीदी की चूत मेरे लंड रस से सनी हुई थी |

तभी दीदी घूम के पलटी और उन्होंने कहा - मजा आया मुझे रात में चोद के मैंने कहा दीदी आप जाग रही थी |

दीदी बोली नहीं जाग तो नहीं रही थी लेकिन मुझे एहसास हो गया था तुम मुझे चोद रहे थे इसका अहसास मुझे हो गया था | मैं अपनी नींद खराब नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने तुम्हें रोका नहीं हो | तुम मुझे चोदते रहे लेकिन मुझे पता चल गया था तुम मुझे चोद रहे हो |

मै - क्या करूं दीदी रात में मन नहीं मान रहा था लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था|

दीदी - कोई बात नहीं इस उमर में ऐसा होता है तुमने भी पहली बार चूत को चोदा है | अभी तो दिन में चार पांच बार भी चुदाई करोगे तो मन नहीं भरेगा | मुझे खुशी है तुमने मुझे एक बार नहीं दो बार नहीं 3 बार चोद दिया है | मै भी कई बार चुदना चाहती थी मेरा भी मन था लेकिन मैं डर रही थी मैं नहीं चाहती थी कि तुम थक जाओ इसीलिए मैंने तुमसे कहा नहीं लेकिन अच्छा हुआ तुमने रात में मुझे चोद दिया | अब मै दिन भर खुस रहूंगी | उसके बाद सुबह में अपनी उस खुशनुमा यादों के साथ में वापस घर चला आया | दीदी के मां-बाप वापस लौट आए थे इसके बाद हमें कम से कम अगले 15 दिन तक बिल्कुल भी टाइम नहीं मिला जब हम और दीदी एक दूसरे को चोद सकें | उधर दीदी के मां-बाप को कुछ न कुछ शक हो गया था इसलिए वह बहुत सख्त निगरानी रख रहे थे हालांकि एक दिन मुझे मौका मिल गया जब मेरे मां-बाप शादी के लिए किसी रिश्तेदार के यहां गए थे मुझे पता था अब रात के 1 बजे से पहले से पहले मां-बाप नहीं आएंगे तो इसलिए मैं अकेला था मैं मासूम समूह बनाकर के रात के 8:00 बजे दीदी के घर गया और उनके मां-बाप से बोला अंकल जी मैं बिल्कुल अकेला हूं मुझे वहां डर लग रहा है क्या मैं आपके यहां रुक जाऊं तो अंकल जी बोले यहाँ तो इतनी जगह नहीं | दीदी बोली यहां रुकने जगह नहीं है तो क्या हुआ चल मैं तेरा साथ तेरे घर चलती हूं | दीदी के माँ बाप जानबूझकर भी मना नहीं कर पाए हालांकि उन्होंने दीदी के साथ छुटकी को भी साथ भेज दिया | अब हमारे लिए मुसीबतें थी कि छुटकी और दीदी साथ में आए थे अब मैं क्या करूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था हालांकि मैंने उसका भी इंतजाम ढूंढ दिया मैंने टीवी पर एक कार्टून मूवी लगा दी | छुटकी उस कार्टून मूवी को देखने में पूरी तरह बिजी हो गई | मै दीदी के साथ दुसरे कमरे में आ गया | उसके बाद पहले दीदी ने मेरा लंड चूसा और उसके बाद मैंने दीदी के 2 बार लगातार चोदा | दीदी भी पूरी तरह से मस्त हो गई थी उसके बाद ही अपने घर चली गई | जाने से पहले सुबह दीदी ने मुझसे कहा - देखो अब हम दोनों जवान है,तुम मुझे चोदते हो | मै तुमारी टीचर हूं और तुम मेरे स्सेटूडेंट | इसलिए अब तुम मुझे दीदी मत कहा करो | जब भी हम अकेले होंगे तो मुझे क्रिस्टीना कहोगे और मैं तुम्हारे जितेश कहा करूंगी मैं समझ गया था | दीदी अब नहीं चाहती कि हमारे बीच में यह सामाजिक रिश्तो का नाम नाम हो इसलिए दीदी चाहती थी कि मैं उनको उनके नाम से बुलाऊं मैंने ठीक है आज से आपको मैं क्रिस्टीना कहा करूंगा | उसके बाद सब कुछ करने के बावजूद मै दीदी को घर में नहीं चोद पा रहा था | किसी तरह से एक बार एक पुराने खँडहर में दीदी को चोद रहा था तभी वहां बिच्छू निकल आया और दीदी बहुत डर गयी | फिर एक दिन मै दीदी को उनके घर में हो चोद रहा था तो छुटकी ने मुझे देख लिया था और उसके बाद में छुटकी थोड़ा डर भी गई थी | बड़ी मुश्उकिल से दीदी ने उसे मनाया | उसे प्यार से समझाया | उसके बाद दीदी ने उसकी पेंट में उंगली करके उसकी चूत को रगड़ने लगी थी जिससे छुटकी को मजा आने लगा था | छुटकी को पटाने में दीदी को बहुत मेहनत लगी थी लेकिन आखिरकार चुटकी मान गई थी अब कि वह यह बात किसी को नहीं बताएगी बदले में छुटकी ने दीदी से ₹2000 लिए और इधर मैंने भी छुटकी की चूत को कस करके चूस दिया था जिसे छुटकी मस्त हो गई थी |
 
छुटकी को पटाने के बाद तो हर दिन हम घर में ही चुदाई करते | एक साल तक लगभग हर रोज ही मै दीदी को चोदता था | मुझे भी बहुत मजा आता था और दीदी को भी चुदवाने की आदत पड़ गयी थी | ऐसा लगता तह जैसे खाना खाना रूटीन हो वैसे दीदी को चोदना रूटीन हो गया था | साल के ख़त्म होते ही दीदी आगे की पढाई के लिए बाहर चली गयी | मुझे चूत की लत लग चुकी थी, 15 दिन तक मैंने किसी तरह सब्र किया लेकिन फिर मेरी हिम्मत जवाब दे गयी | इसलिए मैंने छुटकी को पटाने की कोशिश की | शुराती ना नुकुर के बाद छुटकी मान भी गयी | अब असल मै मै छुटकी को टूशन देने लगा | इसलिए छुटकी मेरे घर पढ़ने आती थी | फिर मैंने छुटकी की सील भी तोड़ी | छुटकी की चूत भी दीदी की तरह कसी हुई थी | माँ हमेशा उपरी मजिल पर रहती थी इसलिए नीचे कमरा बंद करके मै छुटकी को दो दो घंटा टूशन पढ़ाता | छुटकी के नंबर जब अच्छे आने लगे तो किसी कोई कोई शक भी नहीं हुआ | हालाकि पहली चुदाई में छुटकी को उतना खून्न नहीं निकला |

लेकिन छुटकी भी अब जवान होने लगी थी | उसकी छातियाँ भी भर गयी थी |

कहना गलत नहीं होगा की छुटकी की चूत भी दीदी की तरह पूरी तरह से टाइट थी | छुटकी का बदन भी मस्त था | बस नजर की बात थी कभी उस नजर से उसे पहले देखा नहीं था | जब से छुटकी के नंगे बदन के दर्शन हुए | मै तो छुटकी का दीवाना हो गया | एक बार छुटकी की चूत की सील क्या टूटी फिर तो आये दिन चुदाई शुरू हो गयी | क्या मस्त कसा हुआ बदन था छुटकी | अब तो मै दीदी को भूल ही गया | छुटकी थी भी एक नंबर की चुद्द्कड़ | दीदी के मुकाबले ज्यादा बेशर्म और लंद्खोर | कई बार तो टूशन में आते ही दरवाजा बंद करती और कपड़े उतार कर मेरा लंड चूसने लगती | पुरे दो घन्टे बस चुदती ही रहती | जब मै उसको चोदने में ज्यादा थकने लगा तो उसी ने पता नहीं कहाँ से मुझे कुछ गोलियां लाकर दी | जिनको खाकर मेरा लंड बैठता ही नहीं था | 6 महीने तक ये सिलसिला चलता रहा | दीदी छुट्टियों में वापस आई | दीदी मुझे चुदना चाहती थी लेकिन छुटकी जब मौका दे न | दीदी को जब पता चला मै छुटकी को चोद रहा हूँ तो दीदी ने मुझे बहुत बुरा भला कहा, मुझसे खूब लडाई करी की, मार पीट करी , खूब रोई भी आखिर मैंने उनकी बहन को क्यों चोदा |

दीदी रोते हुए बोली - जितेश मैंने इतने लंड देखे हैं लेकिन तुम्हारा लंड सबसे अलग है इसीलिए मैं तुम्हारे लंड से चुदाई करी और मैं तुम्जिंहे चाहती थी तुमारे साथ न जाने कितने सपने देखे थे | ;लेकिन तुमने अपनी हवस की आग में सब बिखेर दिया | एक बार कहते तो सही मेरी याद आ रही है, ख़ुशी खुसी तुमसे चुदवाने चली आती | तुमने मेरा दिल दुखाया हिया अब मेरी हाय लगेगी तुमको जिदगी भर इसी चूत के लिए तरसोगे | दीदी गुस्सा होकर वापस चली गयी |

इधर मै फिर से छुटकी को रोज चोदने लगा हालाँकि मुझे दीदी का दुःख था लेकिन मुझे क्या पता था दीदी मुझे चाहने लगी है | इधर छुटकी तो जैसे हरदम चुदने के लिए तैयार बैठी रहती थी | उसके चक्कर में बिलकुल पढाई नहीं कर पाता | मेरे १२ के एग्जाम आ गए, मुझे पढ़ाई करनी थी लेकिन छुटकी को चुदाई का भूत सवार रहता | जब तक एक बार दिन में मेरा लंड घोट नहीं लेती अपनी चूत में उसका मन ही नहीं भरता था | मेरे आसपास ही मडराती रहती | मै भी उसकी चूत का आदी हो गया था | चोदने का मन न भी हो तो ललक जाग उठती थी | घर में आजकल बहुत भीड़ रहती थी क्योंकि मेहमान आये हुए थे इसलिए स्कूल के बाद मै छुटकी के साथ स्कूल के पीछे बने खेतो में चला जाता था | वही चुदाई करते थे | छुटकी की कसी कुंवारी चूत को मैंने सात महीने में ही बच्चा जनने वाली औरतो जैसी चूत की सुरंग बना दिया था | उसकी चूत का छेद दूर से ही नजर आ जाता था | छुटकी को भी ये बात पता थी इसलिए अक्सर कहती थी तुमारे इस मुसल लंड ने मेरी कमसिन कुवारी चूत का भोसड़ा बना दिया है | शादी के बाद अपने हुसबंद को क्या कहूँगी |

जब वो ये बात बोलती तो मै उसकी चूत की फाके फैलाकर उसकी चूत का खुला चौड़ा छेद देखने लग जाता | उसमे अपनी जीतनी उंगलियाँ हो सकती घुसाने लगता | ऐसा नहीं था की छुटकी ही चुदाई के लिए पागल थी, मेरा भी बहुत मन उसे चोदने का होता था | घर में अक्सर चुदाई संभव नहीं हो पाती थी तो मै उसे अलग अलग जगहों पर चोदता था | मैंने उसे खेतो में चोदा था, नाले के किनारे चोदा था, छुपम छुपाई खेलते हलका सा अँधेरा होने पर उसे एक कोने में ले जाकर चोदा था, छत की मुंडेर पर भरी दोपहरिया में, कड़ाके की सर्दी में उसकी बालकनी में बाहर से चढ़कर | बारिश में भीगते हुए, उफनते नाले के किनारे, पड़ोस गली के अंकल की कर की डिग्गी में | और तो और मंदिर के पिछवाड़े में, चर्च में पादरी की सीट के पीछे | ऐसी ही तोड़े ही न छुटकी की चूत का भोसड़ा बन गया था | लोग जीतनी चुदाई अपने शादी के 20 साल में नहीं करते है उतनी मैंने 7 महीने में कर ली थी |

हमारी चुदाई का ये आलम था कई बार तो मैंने उसे पीरियड्स में चोदा था | पता नहीं मेरे अन्दर हवस कहाँ से भरी थी | मुझे ये चीज बाद में पता चली की छुटकी मुझे के टॉफी खाने को देती थी असल में जो नशीली दवा थी और उत्तेजना बढ़ाती थी | जब मै छुटकी से दूरी बनाने की कोशिश करता तो छुटकी सबकी बताने की धमकी देती | बोर्ड के एग्जाम आ गये थे और छुटकी पढने का टाइम ही नहीं दे रही थी | मै एग्जाम दे रहा था | एक दिन मै अपना आखिरी पेपर देकर जब वापस आया तो मोहल्ले में हंगामा मचा हुआ था | बाद में पता चला छुटकी पेट से है | सबका निशाना मै था | माँ का तो शर्म से घर से बाहर निकालना ही बंद हो गया | बाप ने गाली देकर बाहर निकाल दिया | किसी तरह से कुछ पैसे जुगाड़ करके चाचा के यहाँ पंहुच गया | चाचा आर्मी में थे, वहाँ उन्होंने एक शर्त पर रखने को राजी हुए | वो शर्त थी उनकी बात मानना | अगले दिन से मेरी मिलटरी वाली ट्रेनिंग शुरू कर दी | सुरुआत के तीन महीने तो कमजोरी और नशीली दवाओं के असर को ख़त्म होने तक मेरी बहुत बुरी हालत हो गयी थी | कुत्तो की तरह हांफता रहता | तीन महीने के बाद सब ठीक होने लगा | मेरे अन्दर से चुदाई की जैसे इक्षा ही ख़त्म हो गयी | तब मुझे पता चला सब छुटकी की दी हुई उस टॉफी का असर था | मेरे पिता के यहाँ से न कोई खबर आई न मैंने जानने की कोशिश की | 9 महीने की टट्रेनिंग के बाद मुझे सेना की भर्ती के लिए चाचा बाहर ले गए | इससे पहले वो मेरे घर से सारे डॉक्यूमेंट ले आये | मै पहली बार में ही सेना में सेलेक्ट हो गया | पीछे आतीत का सब कुछ याद रहते हुए भी भूल गया | सेना में आने के बाद भी मेरे माँ बाप ने मुझे नहीं स्वीकारा हालाँकि मै उन्हें पैसे भेजता रहा | सेना में जब फिजा से मिला तो एक बार फिर से दीदी और छुटकी की यादे ताजा हो गयी | फिजा बिलकुल दीदी की तरह स्वाभाव की थी | अन्दर से चुदक्कड़ लेकिन ख्याल रखने वाली | लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, पता नहीं माँ बाप का दिल दुखाने की सजा मिली या दीदी का दिल तोड़ने की लेकिन इतना तो तय किसी न किसी की हाय तो लगी ही है |
 
जितेश - मैडम आप सो गयी |

रीमा उंघते हुई बोली - नहीं तुमारी जिंदगी के बारे में सोच रही हूँ | ऐसा क्यों होता है जब सब ठीक चल रहा हो तो सब बिगड़ जाता है | या जो चाहो वो कभी जिदगी में मिलता ही नहीं | या हम जैसा बनना चाहते है वैसा ही बन जाते है |

जितेश ने एक लम्बी साँस ली - यही जिंदगी है |

रीमा - कभी क्रिस्टीना से मिलाने या पता लगाने की कोशिश नहीं की |

जितेश - नहीं, टूटी कांच दुबारा कब जुड़ती है | दीदी तो कच्ची कांच की थी पहले पता चल जाता तो पलकों पर बिठाकर रखता |

रीमा - कितना बज गया है |

जितेश हाथ वाली घड़ी देखता हुआ - 3 |

रीमा - हमें सोना चाहिए |

जितेश कुछ ही देर में गहरी नीद में सोने लगा लेकिन रीमा की आँखों से नीच कोसो दूर थी | उसे घर रोहित प्रियम रोहिणी सबकी याद आने लगी | कितने परेशान होंगे सब के सब, आखिर मै कहाँ आकर फंस गयी | पता नहीं कब इस जंजाल से निकल पाऊँगी | ये तो किस्मत अच्छी है जितेश भला इंसान है वरना कोई दरिंदा पता नहीं अब तक कितनी बार मेरा जिस्म नोच चूका होता | टैंक्स क्रिस्टीना इसे इतनी कम उम्र में औरत का पाठ पढ़ाने के लिए | यही सब सोचते सोचते रीमा की पलके भी मुंदने लगी |

सुबह जब रीमा की नींद खुली तो देखा जितेश पूरी तरह तैयार हो चुका है और वह तेजी से जमीन के नीचे बनी सुरंग से होता हुआ बाहर निकल गया बाहर जाने से पहले उसने भीमा को बोल दिया कि ड्राई फ्रूट और खाना कहां रखा है | अगर वह नहीं आया तो कम से कम खाना खा लेगी क्योंकि अगर वह दोपहर को ना लौटा तो उसका इंतजार ना करें और वह कोशिश करेगा शाम को लौटने की लेकिन अगर शाम तक भी नहीं लौटता है तो उसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है और चुपचाप फ्रूट खा करके आराम से लेटी रहे और बाहर जाने की बिल्कुल कोशिश न करें चारों तरफ बहुत खतरा है और कोई भी उसको पहचान करके उसकी खबर जो है वह विलास या सूर्यदेव को दे सकता है | रीमा जितेश की हिदायत का पूरी तरह से पालन किया लेकिन जितेश ना तो दोपहर को आया और ना ही शाम को आया रीमा ने खाना खाया और शाम को फल फ्रूट खा कर वह फिर से बिस्तर पर लेट गई लेकिन उसकी आंखों में नींद नहीं थी उसकी आंखों में पिछले चौबीस 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह से तैयार रहा था कहां से कहां पहुंच गई थी | रोहित कैसा होगा प्रियम कैसा होगा अनिल कैसे होंगे उसकी उसकी दीदी रोहिणी कैसी होगी यही सब सोचकर वह परेशान होने लगी थी जब काफी परेशान हो गई तो उसने अपने आपको वहां से हटा के जितेश के बारे में सोचना शुरू किया और जितेश और उसकी दीदी क्रिस्टीना की चुदाई के बारे में सोचने लगी | उसकी कहानी के बारे में सोचने लगी उसके उस फूले हुए मोटे तगड़े लंड को देख करके अपने अंदर जगे अरमानों के बारे में सोचने लगी | रीमा को एक एक पल बाद ही उसे यह सब गलत लगा और वह कुछ और ही सोचने लगी लेकिन इन्हीं सबके उल्टा सीधा सही गलत है ख्यालों के विचार खोते खोते रीमा बिस्तर पर आधी रात तक करवते बदलती रही आधी रात तक लुढ़कते रही हालांकि जितेश बोल कर गया था अगर वह शाम तक ना आए तो कोई चिंता ना करें लेकिन अगर कल तक नहीं आएगा तो उसे चिंता में होना चाहिए था | क्हयोंकि कल तक एक तो खाने को कुछ नहीं बचेगा | रीमा इसी उधेड़बुन में तड़पती फड़कती खुद के बारे में सोचती चिंता में डूबी निराशा से भरी हुई हताशा और उल्लास इन सबके बीच में ऊपर नीचे तैरती हुई किसी तरह से आधी रात को सो गई जब सुबह आंख खुली तो देखा कमरे में अभी भी कोई नहीं इसका मतलब जितेश अभी भी नहीं आया था इधर रात में एक आदमी आया और उसने दरवाजे के अंदर से एक चिट्ठी जो है नीचे सरका दी और तेजी से चला गया | रीमा ने चिट्ठी खोलकर पड़ी और वह हैरान रह गई उसके होश उड़ गए उसे नहीं पता था कि यह सच है या गलत है लेकिन चिट्ठी में लिखा था हो सकता है जितेश अब कभी न लौटे हालांकि वह लिखने वाला भी निश्नचिंत नही था कि कि जो वह लिख रहा है वह कितना श्यौर है उसने चिट्ठी ही में लिख दिया था जो मैं लिख रहा हूं वह मान भी सकते हो और नहीं भी | लेकिन अभी फिलहाल जितेश का कोई सुराग नहीं है वो कहां है किसके साथ है और क्या कर रहा है इसलिए आप कोई गलतफहमी को पाल के मत रखिए मुझसे आपको संदेश को पहुचाने के पहले ही जितेश ने कह दिया था इसलिए मैंने यह संदेश आप तक पहुंचा दिया सुबह जितेश का संदेश पढ़ते ही रीमा और ज्यादा चिंता में डूब गई अब वो क्या करें घर का कमरा बाहर से बंद था सुरंग के जरिए वह बाहर निकल सकती थी लेकिन जितेश ने साफ साफ मना कर रखा था अपनी ही चिंता दुख में से शक्ति रीमा बिस्तर पर ही इधर-उधर उड़ा उड़ा के रोती रही | इसी बीच में कुछ देर बाद वह वह कमरे में का अच्छे से जायजा लेने लगी और उसे एक कैसेट्स मिल गई | वह लगा कर उसे टीवी पर मूवी देखने लगी ताकि इन सब चिंताओं से उसका मन भटक करके कहीं दूर चला जाए लेकिन जो उसने मूवी लगाई थी वह किसी फिल्म की मूवी नहीं थी वह जितेश के खुद के बनाए हुए वीडियो थे जो वह जो जो कि उसका एक तरह से लाइफ एल्बम था वह जितेश के लाइफ एल्बम को पूरी तरह से देखने लगी आखरी में जितेश ने एक वीडियो बनाया था जिसमें उसने एक अच्छा सा मैसेज दिया हुआ था जिंदगी दो पल की है इसे पूरी तरह से जीना चाहिए पता नहीं अगले कल हम जिंदा रहे या ना रहे और यह वीडियो उसने में बाथरूम के अंदर बनाया था जब वह नहा रहा था और अपने लंड को सहला रहा था | रीमा ने उसे एक बार देखा दो बार देखा तीन बार देखा और उसे दोपहर तक देखती रही वह बार-बार जितेश के उस तो जिस्म को देख रही थी और उसके मोटे मुसल लंड को देखने में मस्त थी | रीमा की वासना अंदर से हिलोरे मार रही थी लेकिन उसका मन यह मानने को तैयार नहीं था आखिर रीमा ने भी स्वीकार कर लिया जितेश उसे अच्छा लगने लगा है | और रीमा चाहती थी कि जितेश वापस लौट आए तो वह अपने मन के अरमान पूरे कर ले और अपना सबकुछ जितेश पर लुटा करके जितेश को भी उसके किए का फल वापस लौटा दे | रीमा ने मन ही मन ठान लिया था कि जैसे ही जितेश आएगा सबसे पहले वह अपने आप को , इस खूबसूरत बदन को जितेश को सौंप देगी ताकि उसके एहसान का बदला हमेशा के लिए चुका दे और साथ में उसके अपने अरमानों को भी वह पूरा कर दें | वह जितेश को पसंद करने लगी थी पता नहीं जितेश को पसंद करने लगी थी या सिर्फ उसके मुसल लंड से चुदने की चाहत थी इधर 12:00 बज गए थे अब सिर्फ फल फ्रूट ही खाने को बचे थे रीमा ने काट के फल फ्रूट खाए और फिर बिस्तर पर आगे लेट गई | रीमा का इंतजार खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था शाम हो गई अजितेश अभी तक नहीं लौटा था | इधर शाम का धुंधलका छाने लगा था और इधर धीमा को भी नींद आ गई |

इधर रोहित वापस लौट आया था उसने अनिल के साथ मिलकर रीमा के पोस्टर पूरे शहर में लगवा दिए थे टीवी पर अनाउंस भी करवा दिया था प्रियम और राजू को भी पता चल गया था कि रीमा खो गई है | प्रियम राजू ही क्यों पूरे शहर को पता चल गया था कि रीमा किडनैप हो गई है | पुलिस धड़ाधड़ हर जगह छापे मार रही थी जो भी उसके पास में था वह कर रही थी | वही रोहित अब कुछ ज्यादा ही चिंतित होने लगा था अनिल भी चिंतित होने लगे थे | यहां रीमा एक छोटे से बस्ती के एक छोटे से घर में बंद किसी अनजान आदमी का इंतजार कर रही थी | घर में टीवी था लेकिन सिर्फ कैसेट के लिए चलता था | इसलिए उसे दीं दुनिया की कोई खबर नहीं थी | अब इस कमरे का मालिक जितेश ही उसके दबे हुए अरमानों और ख्वाहिशों की नई मंजिल थी रीमा सो रही थी रात के 9:00 बजे के करीब जितेश वापस लौटा | उसके एक हाथ में पट्टी बंधी थी | दुसरे हाथ में खाने का सामान था | पीठ पर एक बैग भी था जो कि पैसों से भरा हुआ था जितेश के अंदर आते ही पहले बैग खोलकर पैसे गिनने लगा | कुछ देर बाद रीमा की आंखें खुल गई उसने देखा पैसों से भरा हुआ एक बैग है और जितेश उसमें के पैसे गिन रहा था | उसका जैकेट अलग पड़ा हुआ था जिसमे उसकी दो गन रखी हुई थी | और खाने का सामान भी अलग रखा हुआ था | रीमा को देखते ही जितेश बोला- मैडम आप तुम जाग गई | मैं कुछ खास काम से गया हुआ था, वहां जाकर एक गहरी मुसीबत में फंस गया मुझे लगा था कि अब शायद कभी वापस नहीं लूंगा लेकिन ईश्वर का शुक्र है मेरी जान बच गई और मैं वापस लौट आया तुम्हें जब वह चिट्ठी मिली होगी | तब तुम डरी तो नहीं थी |
 
मैं कुछ खास काम से गया हुआ था, वहां जाकर एक गहरी मुसीबत में फंस गया मुझे लगा था कि अब शायद कभी वापस नहीं लूंगा लेकिन ईश्वर का शुक्र है मेरी जान बच गई और मैं वापस लौट आया तुम्हें जब वह चिट्ठी मिली होगी | तब तुम डरी तो नहीं थी |

रीमा - नहीं मैं एक उम्मीद पर जिंदा थी और मेरी उम्मीद सही साबित हुई |

रीमा - तुम वापस आ गए मुझे खुशी है | इतना कहकर रीमा जितेश के पास आ गयी और अपने रसीले कांपते ओंठो को जितेश के सूखे ओंठो पर रख दिया और कस कर चूम लिया और चुमते ही चली गई | जितेश भी पैसा गिनना छोड़ कर रीमा को चूमने लगा | रीमा ने कसकर जितेश को बाहों में भर लिया था जितेश की बाहें रीमा के चुताड़ो के ऊपर चली गई और जितेश ने उन्हें अपनी ताकतवर हथेलियों में लेकर मसलने लगा | रीमा खुद के जिस्म को जितेश के बदन के खिलाफ रगड़ने लगी | दोनों एक दूसरे को पता नहीं कब तक चुमते रहे थे | जितेश समझ गया था रीमा क्या चाहती है लेकिन जितेश ने कहा - पहले खाना खा ले इसके लिए पूरी रात पड़ी है |

रीमा शर्म से झेप गयी | अब उनके बीच का झिझक का पर्दा हट चूका था च आफ गई थी |

जितेश बोला - इसमें शर्माने की क्या बात है कोई नहीं तुम जवान हो सबके मन में अरमान होते हैं मेरे मन में भी हैं मुझे खुशी है तुम भी वही सोच रही हो जो मैं सोच रहा था |

रीमा को ऐसा लगा जैसे जितेश ने उसके मन की बात कर ली है हालांकि को कुछ बोली नहीं |

इधर जितेश ने फटाफट पैसो वाला बैग पैक करके खाना गरम खाने चला गया और बहुत जल्दी खाना गर्म करके ले आया | उसके बाद दोनों बैठ कर खाना खाने लगे | खाना खाने के बाद जितेश बिस्तर पर आ गया और बैग में रखे बचे पैसे गिनने लगा था | बैग में पुरे 300000 थे जब पैसे की गिनती खत्म हो गई तो जितेश ने उन पैसों को एक जमीन में बने ही में एक अलमारी खोलकर रख दिया और ऊपर से फिर से दरी बिछा दी इमरान थी | जितेश आधे से ज्यादा काम तो जमीन के अंदर ही करता है | इसके बाद जितेश रीमा के पास आ गया और रीमा के हाथ अपने हाथों में लेकर उसे सहलाने लगा था | रीमा को अहसास था की अब क्या होने वाला है, कहाँ रीमा अपने ही नंगे बदन को देखने में शर्माती थी | आज एक अनजान मर्द के सामने अपनी अनंत वासनाओं की गुलाम बनकर जवानी का वो खेल खेलने को आतुर थी जो संभ्य समाज में बिलकुल सही नहीं कहा जाता | आभी भी रीमा को नहीं पता था वो जितेश की तरफ आकर्षित है या सिर्फ उसके लंड से चुदने की चाहत में पगलायी हुई है | कुछ भी हो रीमा को जितेश नंगा तो देख ही चूका है | रीमा भी जितेश का लंड देख चुकी है तो अब छिपाने को बचा क्या था | बस वासना का चूत चुदाई का खेल बचा था | रीमा ने इसके लिए पूरी तरह से मन बना लिया था | उसे पता था एक बार ये वक्त निकल गया तो हमेशा जितेश को हाशिल करने की कसक उसके मन में जिंदगी भर बनी रहेगी | भले ही चारो तरफ वह खतरों से घिरी थी लेकिन जो हालत थे और जो मन के दबे अरमान थे उनके हाथो वो बेबस थी या उन्हें पूरा करना चाहती थी | दोनों ने एक दुसरे की कहानी सुनी थी इसलिए हल्का सा भावनात्मक लगाव भी हो गया था | रीमा ने ऊपर जितेश की ही शर्त पहन रखी थी | नीचे वो जितेश का ही एक हाफ पेंट पहने थी | इधर जितेश ने अपने कपड़े उतार दिए | उसे देख रीमा ओ समझ में आ गया था कि अब किसी पर्दे का समय नहीं है | जो उसके दिल में है वही उसे करना चाहिए और खुल कर जीना चाहिए | रीवा ने भी अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और जितेश के करीब आ गई और जितेश के ठोस जिस्म के सहलाने लगी थी | रीमा के नरम हाथों का स्पर्श पाते ही जितेश के अंदर के अरमान फिर से उठने लगे थे | उसे लगा जैसे उसकी टीचर दीदी वापस आ गई हो | ऐसा लगा जैसे वह फिजा का मांसल पेट सहला रहा हो | लेकिन ये न तो क्रिस्टीना थी न फिजा थी ये रीमा थी | रीमा का मादक बदन की गंध जब जितेश की नाक में घुसनी शुरू हुई तो जितेश को अहसास हुआ रीमा की मादकता उसकी दीदी से कई गुना ज्यादा है | रीमा एक सम्पूर्ण भरे पुरे बदन की मालकिन थी | इधर रीमा की शर्ट के बटन खुलते ही जितेश के हाथ बरबस ही रीमा के स्तनों पर पंहुच गए | जितेश रीमा के बड़े बड़े उठे उरोजो को मसलने लगा था | रीमा धीरे-धीरे जितेश के ऊपर झुकती चली गई और उसकी पेंटी की बेल्ट खोल दी और पेंट की ज़िप को खोल दिया और अपना हाथ अन्दर घुसेड दिया | अन्दर जाकर उसके मूसल लंड को टटोल कर उसका साइज़ का जायजा लेने लगी | उसके मुसल लंड के हाहाकारी साइज़ को देखकर के अचंभित होने लगी थी |

रीमा - तुमारा औजार तो बहुत बड़ा है, चीखे उबल पड़ती होगी जिसकी चूत पर ये औजार रख देते होगे |

जितेश रीमा की तारीफ सुनकर खुस हुआ लेकिन उसे टोकते हुए बोला - मैडम ये तो चीटिंग है | सब कुछ खुलकर होगा | ये औजार सौजार नहीं चलेगा | लंड बोलो सीधे |

रीमा उसे ताना देती हुई - ठीक है ठीक है और ये मैडम मैडम भी नहीं चलेगा | रीमा कहो मुझे |

जितेश - ठीक है मैडम अब से रीमा ही बोलूँगा |

रीमा जितेश की पेंट के अन्दर उसका फूलता हुआ लंड सहलाती हुई बोली हैरान होने लगी | आखिर उसे बड़े मोटे मुसल लंड ही क्यों पसंद आते हैं जैसे रोहित का जैसे अनिल का और अब जितेश का | हालांकि उसे अपनी चाहत पर अपनी ख्वाहिशों पर हैरानी के साथ गर्व भी था | आखिर उसे मोटे लंड ही पसंद है तो है | उसने धीरे से अपनी नरम उंगलियों से जितेश के गरम फूल रहे मोटे लंड को पकड़कर बाहर निकालने लगी | जितेश का लंड बड़ी मुश्किल से रीमा बाहर निकाल पाई |
 
उसके लंड के बाहर निकलते ही रीमा की आंखे चौड़ी हो गयी | लंड नहीं था बड़ा सा मुसल था | रीमा तेजी से उसे अपनी मुठ्ठी में भरकर सहलाने लगी | जितेश का लंड पूरी तरह से फूल चूका था | उसका सुपाडा उसकी खाल छोड़ चूका था |

कांपते हाथों से जितेश के उस मुसल लंड को अपने हाथ में थामा और सहलाने लगी | रीमा और जितेश ने एक दुसरे को देखा | रीमा ने जितेश के मुसल लंड पर सख्ती बढ़ा दी और जितेश के लंड को बुरी तरह मसलने लगी | जितेश हैरान रह गया आखिर ये रीमा क्या कर रही है | रीमा ने जितेश की तरफ देखना बंद कर दिया था उसका पूरा जितेश के लंड पर आ गया | जितेश का लंड रीमा के चेहरे के ठीक सामने था | रीमा के हाथो की तेज फिसलन से उठती गर्मी जितेश के लंड की गर्माहट बढ़ाने लगी | जितेश के लंड में तेजी से खून भरने लगा | उसका लंड का कड़ापन बढ़ने लगा | जितेश के शरीर में भी वासना की गर्मी बढ़ने लगी | रीमा के हाथ तेजी से जितेश के लंड की मजबूती चेक कर रहे थे | जितेश का लंड ने बिलकुल 90 डिग्री का कोण बना दिया | जितेश की कामुक कराहे उसकी उत्तेजना के साथ बढ़ने लगी | रीमा ने एक बार तेजी से हाथ पीछे जितेश के लंड की जड़ तक खीच दिए |

जितेश के लंड की खाल पीछे तक खीचती चली गयी उसका लंड का मोटा फूला लाल सुपाडा रीमा की आँखों के सामने चमकने लगा | उसके जिस्म की धधकती आग के कारन उसके ओंठ वासना की प्यास में सुख चले थे | रीमा ने अपनी जीभ के गीलेपन से अपने गुलाबी ओंठो को सींचा, जिससे उसके ओंठो की नमी वापस आई | रीमा ने अपनी उंगली से जितेश के जलते लंड के धधकते सुपाडे के तापमान का जायजा लिया | बहुत तेजी से मुठीयाने के कारन जितेश की सांसे तेज हो गयी थी | रीमा ने अपने रस भरे ओंठो को जितेश के लंड के सुपाडे को छुआ और उसके छेद से निकली नमी की बूंद से अपने ओंठ सींच लिए | रीमा ने जितेश का लंड इतनी तेज मसला था कि जितेश का प्रिकम की बूंद छलक आई | गार्ड की अधबुझायी वासना की आग रीमा अन्दर लगातार जल रही थी | जितेश के मोटे लंड और हट्नेटे कट्टे जिस्म ने उसको और भड़का दिया | रीमा गीली जीभ से गरम सुपाडे को चाटने लगी | उसकी जीभ तेजी से जितेश के सुपाडे के इर्द गिर्द फिसलने लगी | जितेश समझ गया था मैडम अच्छे से खेली खाई लगती हैं | उसके रीमा के मुहँ की तरफ लंड ठेलने की कोशिश की लेकिन रीमा ने चालाकी से लंड को तिरछा कर दिया | रीमा के हाथ जितेश के लंड पर फिसलते रहे |

रीमा - अब कुछ धर्य रखो, अपनी दीदी को भूल जावोगे ये रीमा का वादा है |

जितेश - ओह्ह्ह्ह मैडम |

रीमा - बस आज रात आहे कराहे ही निकलेगी |

रीमा ने फिर से सुपाडे के इर्द गिर्द जीभ नाचनी शुरू कर दी | अपने सुपाडे पर रीमा की गीली रसीली जीभ का ठंडा ठंडा अहसास जितेश को रेगिस्तान में ठंडी फुहार जैसा लग रहा था | कुछ ही देर में जितेश बेचैन होने लगा |

जितेश - मैडम अब चुसो भी कितना तड़पाओगी |

रीमा मादकता में मुस्कुराते हुए - बड़े बेसब्र हो रहे हो , मुझे तो लगा था बड़े धीरज वाले मर्द हो |

जितेश - बस मुझे पता है आपको देख कैसे रोका है खुद को | अब नहीं रोक पाऊंगा |

रीमा - हाहा हाहा थोड़ा हवस में डुबो तो सही, जब तक अन्दर तक गोता नहीं लगाओगे तब तक इस जवानी का असली सुख नहीं भोग पाओगे | जितना सब्र रखोगे उतना ही मजा मिलेगा |

रीमा ने अपने ओठ फैलाये और जितेश के सुपाडे को निगलने लगी | उसके गुलाबी ओंठो ने जितेश के खुल से भरे लाल धधकते सुपाडे को निगल लिया और टॉफी की तरह चूसने लगी | जितेश को पता था मैडम को कुछ भी करने में कोई शर्म हया नहीं है, वरना लंड चूसने में ये अदा ये क़ाबलियत शायद बहुत कम औरतो में होती है | रीमा ने उसकी कामुकता बहुत बढ़ा दी थी फिर भी उसे कोई जल्दबाजी नहीं थी वह सांसे भर करके अपने आप को काबू में रख कर के सुखद एहसास का अनुभव लेने लगा था | रीमा ने धीरे से जितेश के लंड को चुसना शुरु कर दिया था | और अपने कांपते रसीले गुलाबी होठों को उसके लंड पर गोल गोल घुमाने लगी थी | अब कोई शर्म नहीं थी कोई हया नहीं थी कोई पर्दा नहीं जब कोई झिझक नहीं थी | रीमा भी समझ गई थी जब यही नियति है तो क्या शर्म क्या चीज है सब कुछ खुलेआम करो ना | जितेश को भी लग रहा था कि रीमा के साथ खुल करके ही खेलने में समझदारी है इस तरह से शर्माने झिझकने का कोई फायदा नहीं है | जितेश ने फटाफट अपनी चड्डी पैरों से नीचे की तरफ उतार दी और उसके बाद रीमा उसके पैरो के बीच में पूरी तरह से आराम से बैठकर उसके लंड को चूसने, चटाने और चूमने लगी|

इतने अच्छे से रीमा को लंड चूसते देखकर जितेश के मुहँ से सिसकारियां ही फुट रही थी | उससे रहा नहीं गया सिसकारियां भरते हुए बोला - मैडम लग रहा है आपका यह फेवरेट है |

रीमा बोली - नहीं मेरा सब कुछ फेवरेट है वह अलग बात है लोग अक्सर कहते हैं यह काम में बहुत अच्छे से करती हूँ | बाकि काम भी अच्छे से ही करती हूँ ...............................................................बस सबका अपना-अपना टेस्ट है |

जितेश - कुछ भी कमाल का लंड चूसती है मैडम |

रीमा - फिर तुमने मैडम कहना शुरू कर दिया |

जितेश - मै आपको मैडम ही कहूँगा |

रीमा - तुमारा औजार भी कमाल का है |

जितेश - अब मैडम ये तो जुल्म है, ऐसे माहौल में ये शब्द माहौल नहीं गन्दा कर रहे है |

रीमा - तुम मुझे रीमा कहो तो मेरे अन्दर से भी अपनापन निकले | तुमने ही पराया कर रखा है तो मै क्या करू |

रीमा ने लंड को कसकर ओंठो से जकड़कर चूस लिया और लगी हाथ हिलाने |

जितेश के मुहँ से कराह निकल गयी - ठीक है रीमा |

रीमा - ये हुई न बात ..................तुम्हारा मुसल तो बहुत ही बड़ा मोटा है इसीलिए मुझे लग रहा है तुम्हारी दीदी कोई पसंद आ गया था |

जितेश - हां सच कह रही हो रीमा दीदी मेरे लंड की वजह से ही मुझसे प्यार करने लगी थी और शायद इसीलिए उन्होंने अपनी कुंवारी चूत में से चुदवाई थी |

रीमा लंड चूसते हुए बोलती- तुम्हारा लंड है भी कमाल का ..........किस्मत वालों को ही ऐसा लंड मिलता है |

रीमा ने अभी तक सिर्फ जितेश के सुपाडे को ही मुंह में ले पाई थी और चाट रही थी लेकिन अब उसने और गहराई तक रितेश के लंड को मुहँ में निगलने लगी | थोड़ा थोड़ा करके ;लंड को अन्दर ले जाती और चुस्ती | इधर वासना में नहाये जितेश का मन था पूरा का पूरा लंड रीमा के मुहँ में पेल दे और धक्के पर धक्के मार के कसकर रीमा का मुहँ में चोद दे | रीमा जितेश के लंड को और अन्दर तक मुंह में निगलने की कोशिश करने लगी थी हालांकि बार-बार उसके बड़े लंड की वजह से उसे दिक्कत हो रही थी | अब आगे बढ़कर के रीमा उसके लंड को और गहराई तक चूसने चाटने की कोशिश कर रही थी | रीमा अपने हाथ को फिर से लंड की जड़ में ले गयी और लंड के सुपाडे के थोड़ा सा और मुहँ के अन्दर ठेल दिया, देखते ही देखते, खून से भरा लाल सुपाडा रीमा के गीले और गरम मुहँ में समा गया |

जितेश भी रीमा के इस अदाकारी पर फिदा हो गया था उसने आंखें बंद करके पूरी तरह से इस इस मोमेंट को अपने अपने दिलो-दिमाग में सजा लेना चाहा था वह बस इस चीज को इंजॉय करना चाह रहा था उसने सब कुछ रीमा पर छोड़ दिया था | रीमा ने पूरा का पूरा सुपड़ा मुंह में ले रखा था और खास करके अब वह लंड के निचले हिस्से को निगलने की तरफ बढ़ने लगी थी |

रीमा जितेश के लंड के सुपाडे पर जीभ फिराते हुए उसको मुहँ में घोटने लगी थी | बार बार लंड उसके मुहँ में आता जाता | लंड को अन्दर तक ले जाती बाहर लाती सुपाडे को जीभ से चाटती, चूसती जैसे कोई लोलीपोप चूसता है |उसके बाद रीमा ने उसके सुपाडे को कसकर ओठो से जकड लेती | लंड को मुहँ में लेकर ओठ बंद करके सुपाडा चूसने लगती, जैसे बच्चे टॉफी चूसते है , और फिर धीरे धीरे अपना सर हिलाने लगती | रीमा की अदाए और हरकते और लंड पर फिसलते उसके हाथ और ओंठ सब कुछ सोचकर देखकर जितेश पागल हुआ जा रहा था | जितेश कामुक लम्बी कराहे भर रहा था | कुछ देर बाद अचानक जितेश का हाथ रीमा के सर तक पंहुच गया, उसने रीमा के काले बालो को मजबूती से पकड़ लिया और उसके सर को नीचे की तरफ ठेलने लगा | रीमा को पता था लंड चूसते चूसते एक समय आता है जब मर्द अपने खड़े लंड को पूरी तरह से औरत के जिस्म के अन्दर सामने के लिए व्याकुल हो जाता है | उसे फर्क नहीं पड़ता कौन सा छेद है कौन सी जगह है | रीमा इस तरह से अभी लंड गटकने के लिए तैयार नहीं थी | रीमा ने जितेश का प्रतिरोध किया, लेकिन जितेश की ताकत और मजबूती के आगे उसे जितेश का पूरा लंड गटकना पड़ा | जितेश का का लंड उसके रसीले ओठो को फैलाता हुआ, गीली जीभ पर से फिसलता हुआ रीमा के गले में जाकर अटक गया | जितेश ने नीचे से कमर का झटका मारा और रीमा का सर ऊपर उठाया फिर नीचे को दबा दिया | लंड उसके गले में फंस गया | रीमा को लगा किसी ने उसका गला घोट दिया, अन्दर की साँस अन्दर रह गयी बाहर की बाहर, उसका दम घुटते घुटते बचा था | उसको तेज खांसी सी आ गयी और मुहँ में पूरा लंड होने की वजह से घुट कर रह गयी | रीमा ने पूरी ताकत लगाकर खुद के सर को पीछे ठेला और लंड के बाहर निकलते ही लम्बी साँस लेकर खासने लगी | उसके मुहँ से लार की नदियाँ बह निकली | उसकी आँखों से पानी बहने लगा | यही तो रीमा चाहती थी | सामन्य से कुछ हटकर कुछ अलग सा, जो उसके अन्दर की वासनाओं को तृप्ति पंहुचाये भले ही उसके जिस्म को कितनी तकलीफ हो | अभी रीमा को खासी आ गयी, आखो के लालिमा बढ़ने लगी, वो अपनी सांसे काबू कर रही थी लेकिन उसकी चाहत थी जितेश एक बार वैसे ही फिर से उसके मुहँ में लंड ठेले |
 
उसके अपने ओंठ चौड़े किये और उसके लंड को निगलती चली गयी | फिर तेजी से उसके लंड पर अपना सर हिलाने लगी | उसके ओंठ लंड के चारो ओर सरसराने लगे | वो तेजी से लंड को अन्दर बाहर करने लगी | उसके खासने के डर से इस बार जितेश ने उसे हाथ नहीं लगाया लेकिन कुछ देर बाद उसने खुद ही जितेश का हाथ अपने सर पर ले जाकर रख दिया | जितेश ने नीचे से कमर हिलानी शुरू करी और ऊपर से उसका मुहँ स्थिर कर दिया | रीमा के मुहँ की गीली सुरंग में जितेश का लंड सरपट फिसलने लगा | रीमा के मुहँ से बाद गों गों गों गों गों गों गों की आवाजे ही आ रही थी | उसके मुहँ का रस तेजी से बाहर की तरफ बह रहा था और उसकी आंखे लाल होती जा रही थी | जितेश कुछ देर बाद कमर हिलाने के बाद रुक गया |

रीमा के बदन की बढ़ती हुई गर्मी और तेज सांसें भी साफ साफ नजर आ रही थी | इधर जितेश भी पूरी तरह से पस्त हो गया था | इस तरह से लंड को चूसना तो छोड़ो , इधर कई सालों से तो वह बस कभी कभार ही किसी औरत के छूने को पाता था | रंडियों को चोदना अलग बात होती है लेकिन एक औरत जब दिलो जान से किसी को मर्द के साथ में लंड चुस्ती है तो कुछ बात ही अलग होती है |

रीमा के साथ यही मामला था जितेश और रीमा जो है एक दूसरे को सुख देने के लिए एक दूसरे की तरफ आकर्षित हुए थे | अब जितेश का लंड रीमा के मुंह के आखिरी छोर तक पहुंच गया था और अब उसके गले में उसका सुपारा अटकने लगा था रीमा समझ गई थी अगर उसे जितेश का पूरा लंड निकलना है तो उसे इसे गले के नीचे उतारना होगा | रीमा कसकर जितेश के लंड को अपनी गुलाबी होठों की सख्कत कसावट से चूस रही थी ऐसा लग रहा था जैसे जितेश वर्ग में पहुंच गया हो | रीमा के मुहँ की गरम गुनगुनी गुलाबी खुरधुरी जीभ का उसके गरम मीनार की तरह तपते लंड पर अहसास, रीमा की गीली लार के चिकनाहट के साथ उसके लंड पर फिसलते रसीले गुलाबी ओंठ यह ऐसा एहसास था जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता था बस महसूस किया जा सकता था | रीमा उस एहसास को जितेश को महसूस करा रही थी |

रीमा ने थोड़ा सा और जोर लगाया और जितेश के लंड को पूरा निगलने के लिए अन्दर तक घोंट लिया | जितेश का लंड रीमा के गले तक चला गया, उसके बाद उसके गले में उतरने लगा | क्योंकि जितेश का लंड बहुत बड़ा था इसलिए बिना गले के नीचे रीमा के मुहँ में समाने वाला नहीं था | रीमा भी कहाँ हार मानने वाली थी रीमा ने पूरा का पूरा मुहँ खोल दिया और जितेश के लंड को अन्दर तक निगलने लगी | उसके मुंह के लार से जितेश की गोलियों और जांघे गीली होने लगी थी | उसकी आंखों पूरी तरह लाल हो गयी थी लेकिन वो रीमा ही क्या जो हार मान जाए | लंड चूसना उसका सबसे फेवरेट था और वह फटाफट किसी भी अनजान आदमी का लंड भी चूस सकती थी | उसे पता था एक बार यह पूरा का पूरा लंड उसके मुंह में घुस गया तो समझ लो उसकी वासना का एक पड़ाव उसने पार कर लिया जितेश को जो चरम सुख मिलेगा वो अलग | हालाँकि जितेश इस बात को लेकर निश्चित नहीं था की रीमा उसका पूरा का पूरा लंड मुहँ में ले पाएगी और इसीलिए बार-बार आंखें खोल कर देखता था |

रीमा की आंखों से पानी बह रहा था उसकी आंखें लाल हो गई थी लेकिन उसे इसकी परवाह नहीं थी | जितेश समझ गया था रीमा वासना में पूरी तरह डूब चुकी है उसे अपने मुहँ और गले में होने वाली तकलीफ का अहसास तक नहीं है | उसने रीमा के सर पर हाथ रखा और उसके मुंह को नीचे हिला हिला के चोदने लगा था और नीचे से भी कमर के थोड़े थोड़े झटके देने लगा था हालांकि बहुत हल्के हलके झटके मार रहा था और इसी के साथ में वह रीमा के मुंह को चोदने लगा था ताकि कुछ देर के लिए रीमा का थोड़ी सी राहत मिल जाए | कुछ देर तकजितेश ने कमर हिलाई उसके बाद रीमा ने फिर से कमान अपने हाथ में ले ली और अब वह जितेश के लंड को अपने गले के नीचे उतार कर घोटने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई थी | उसने जितेश के लंड पर ढेर सारी लार लगायी और उसे चिकना बनाया और अपना मुंह खोला उसके लंड को निकलती चली गई और उसके बाद में उसने खुद को पूरी तरह से ढीला छोड़ दिया और उसके लंड को अपने गले के नीचे उतारने लगी हालांकि यह संभव नहीं था | फिर भी उसने खुद के सर का सारा बोझ उस तने लंड पर डाल दिया | जितेश का लंड उसके गले को धीरे धीरे चीरते हुए उसके गले में धंस गया | रीमा ने धीरे-धीरे जितेश के लंड को जड़ तक निगल लिया | जब जितेश देखा तो रीमा तो उसकी जड़ तक उसका लंड मुहँ में घोंट के बैठी है तो हैरान रह गया | रीमा ने तेज से सर को पीछे खीचा और लम्बी साँस ली |

रीमा फिर अपनी उखड़ी सांसे काबू करते हुए बोली - इसे मेरे गले के नीचे उतार दो |

जितेश - रीमा अपने आप को क्यों तकलीफ देना चाहती हो, इस आग को बुझाने के और भी तरीके है |

रीमा - इसी तकलीफ में तो मजा है , तुम मुझे चुदाई पर मत पेलो बस मुहँ में लंड पेलो |

जितेश - लेकिन ये इतना बड़ा .........................|

जितेश की बात पूरी भी नहीं हुई - लंड मेरे मुहँ में जायेगा फट तुमारी क्यों रही है | चुपचाप पेलाई करो जैसे कह रही हूँ |

रीमा आराम से बेड पर सीधे लेट गयी और सर नीचे की तरफ लटका दिया | जितेश उसके सर की तरफ पीछे से आया |

उसने रीमा के खुले मुहँ में लंड घुसेड़ दिया और उसके बाद में ठेलता ही चला गया था | उसका दो तिहाई हिस्सा के मुंह में घुस गया था | उसने लंड को पीछे खीचा, रीमा ने लम्बी साँस ली और उसका लंड फिर से रीमा के मुहँ से सरकने लगा | उसने जोर लगाया और लंड रीमा के गले के नीचे उतरने लगा था जैसे जैसे जितेश का लंड रीमा के गले के नीचे उतर रहा था उसका उभार उसे साफ दिख रहा था रीमा गले में जलन होने लगी थी क्योंकि इतना मोटा लंबा लंड उसके गले में सिर्फ एक बार गया था | इससे पहले उसने बस रोहित का ही लिया था | जितेश धीरे-धीरे समझ गया था रीमा क्या चाहती हो और वह पूरी तरह से रीमा के मुंह में अपने लंड को घुसाने लगा था जितेश लंड को पूरी तरह से रीमा के मुंह में उतारने लगा था उसके गले में जो जलन हो रही थी धीरे-धीरे वह जलन लंड के रगड़ने से और बढ़ रही थी लेकिन रीमा को वासना की गर्मी में उसका एहसास शायद ही हो रहा हो | धीरे-धीरे जितेश का लंड रीमा की गर्दन के नीचे उतारने लगा था और एक बार पूरा जोर लगाकर रीमा ने लंबी सांस ली और जितेश के लंड को धक्का मारा और उसका लंड रीमा की जीभ से फिसलता हुआ उसके गले के नीचे तक उतार गया | जितेश के लंड की जड़ को रीमा के ओंठ छु रहे थे | रितेश का लंड पूरी तरह से भी रीमा के मुंह को चीरता हुआ उसके गले में नीचे तक फंसा हुआ था | कुछ देर तक रीमाँ जितेश के लंड को जड़ तक घोंटे रही | उसके बाद उसने फिर से पीछे की तरफ खींचते हुए जितेश के लंड को बाहर की तरफ निकाला और फिर से यही चीज दोहराई और फिर लंबी सांस ली | अब हट झटके के साथ उसके लंड को पूरी तरह से चूसने लगी थी कुछ देर बाद ही रीमा ने जितेश के लंड को ओंठो से जकड़ लिया और जितेश को चोदने के लिए कहा है | जितेश समझ गया उसने पीछे से कमर को हिलाना शुरू कर दिया था जिससे जितेश का लंड रीमा के मुंह में आसानी से आने जाने लगा था | जितेश ने रीमां के सर को पकड़कर के स्थिर किया और कसकर करके रीमा के मुहँ को चोदने लगा था यही तो रीमा चाहती थी | इसी तरह से पूरी तरह से टूट के वासना में डूब जाना ही तो उसकी दिली तम्मना थी | उसे अपनी वासना की उन ख्वाहिश के एहसास तक चुदना था जब तक उसका बदन जवाब ना दे जाए और यह तभी हो सकता था जब उसे एक तगड़ा लंड चोदने के लिए मिले | जितेश के रूप में उसे उसका मन पसंद का लंड मिल गया था | वह अपने सारे अरमान आज पूरे कर देना चाहती थी | उसने रात की शुरुआत मुहँ से करी थी लेकिन कल की सुबह कहाँ पर खतम करेगी इसका उसे भी अंदाजा नहीं था | जितेश भी हैरान था लेकिन खुश था उसे पता था कि रीमा दूसरी औरतों से थोड़ा अलग है इसीलिए उसे यह भी पता था कि रीमा के साथ उसका एक्सपीरियंस की दूसरी औरतों से कुछ ज्यादा ही अलग होगा | ये उसे बस अभी कुछ ही पलों में नजर आ गया था | रीमा पूरी तरह से जितेश का लंड अपने मुंह में ले रही थी और जितेश लम्बे लेकिन बेहद धीमे झटके लगा रहा था |

रीमा के मुहँ में चुदने की आवाजे ही आ रही थी - ख्ख्ख्खक्क्क्कक्क्क ख्ख्ख्खाक्काक्काक आआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्ह, ह्ह्ह्हक्क्क्कक |

अब किसी तरह के एक्सपेरिमेंट का वक्त नहीं था रीमा भी चाहती थी कि अब जितेश कसकर उसके मुंह में लंड को पेल दे |

रीमा - अब बिना मेरी परवाह किये पेल दो मेरे मुहँ में लंड | मिटा लो अपनी हसरत और बुझा दो इस हवस की ख्हवाइश को हमेशा के लिए |

जितेश से भी अब काबू नहीं हो रहा था जैसे ही जितेश ने रीमा के मुंह से लंड निकाला रीमा एक लंबी सांस खींची और उसके बाद जितेश ने रीमा के मुंह में लंड पेल दिया था | इसके बाद में जितेश धीरे-धीरे लेकिन लंबे-लंबे स्ट्रोक रीमा के मुंह में लगातार लगाता रहा | रीमा के मुहँ में रितेश अपना पूरा लंड गले तक उतार रहा था धीरे-धीरे उसने अपने झटके लगाने की स्पीड बढ़ा दी | अब वो एक बार में 10 से 15 झटके लगाता था और फिर लंड को रीमा के मुंह से बाहर निकाल लेता था इसके बाद में रीमा लंबी सांस लेती थी और जितेश फिर से रीमा के मुंह में लंड पेल देता था | रोहित जितेश बस आहें भर रहा था और हाफ रहा था और उसके मुंह से बस कामुक कराहे निकल रही थी | एक रीमा के मुंह से चप चप चक गों गों सप सप की आवाजें आ रही थी | जितेश धीरे-धीरे करके रीमा के मुंह में लंड पेलने की स्पीड बढ़ाता जा रहा था और रीमा भी अपने होठों को पूरी तरह से फैलाए हुए रितेश को लंड को पूरी पूरी तरह अपने मुंह में घोट रही थी | दोनों ही अब बुरी तरह से हांफने लगे थे | रीमा का सीना तेज सांसो के कारन तेजी से हांफ रहा था और जितेश भी उसी तरह से हांफ था | रीमा की जोरदार मुहँ चुदाई चल रही थी ऐसी चुदाई जो हमेशा से रीमा चाहती थी लेकिन उसे सोचने से और ख्वाहिश में लाने से डरती थी | वो जितेश का पूरा लंड घोंट चुकी थी हालांकि यह बहुत ही तकलीफ था | फिर भी उसने अपने दिल की ख्फिवाइस पूरी की | जितेश का पूरा का पूरा लंड रीमा के मुंह में जा रहा था और वह जिस स्पीड से रीमा के मुंह में पूरा का पूरा लंड पेल रहा था वह कल्पना से परे था यही तो चाहती थी यही तो उसका सपना था यही तो उसकी वासना की मानसिक तृप्ति थी अब इससे ज्यादा और रीमा को क्या चाहिए था |
 
जितेश को अपने शरीर में तनाव महसूस होने लगा था उसने रीमा के सर को कसकर जकड लिया ताकि वो हिलने न पाए और बेतहाशा उसके मुहँ में लंड पेलकर उसके मुहँ को चोदने लगा | रीम अभी समझ गयी जितेश झड़ने वाला है उसने भी होंठ फैला दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लंड उसके मुहँ में जा सके | अब सिर्फ मुहँ चुदाई हो रही थी वो भी अपनी फुल स्पीड में | जितेश अपने चरम पर पंहुच पता नहीं क्या क्या बडबडा रहा है – आह रीमा मै झड़ने वाला हूँ, मेरा सफ़ेद रस बस निकलने वाला ही है | तुम पियोगी ना मेरा गरम लंड रस |

रीमा भी उसी वासना की आग में तपती हुई – हाँ उड़ेल दो सारा मेरे मुहँ, भर दो मेरा मुहँ लंड रस से | बुझा दो मेरे ओठो की प्यास , तर कर दो मेरा गला अपनी पिचकारियो से |

जितेश– हाँ बस पिचकारी निकने वाली ही है तुमारी सारी प्यास आज मै बुझा दूगां, युमारी बरसो की प्यास मै आज मिटा दूगां | भर दूगां तुमारा पूरा मुहँ अपनी पिचकारी से |

रीमा – भर दो न मेरा मुहँ अपने गरम लावे से | बहुत प्यासी हो इस प्यासी की सारी प्यास बुझा दो | पिला दो न सफ़ेद गरम लंड रस, सीच दो आज बरसो से पड़ी सुखी जमीन को |

दोनों ही अपनी उत्तेजना में न जाने क्या क्या बडबडा रहे थे |

जितेश ने झड़ने से पहला आखिर झाका दिया | जितेश ने पूरी ताकत लगाकर अपने लंड को रीमा के गले तक ठेल दिया | उसकी जांघे कपने लगी, शरीर अकड़ गया, उसके चुतड अपने आप ही सिकुड़ने फैलने लगे | उसकी गोलियों से तेज बहाव लंड की तरफ आता महसूस हुआ |

जितेश – रीम्म्म्मम्म्मा मेरी पिचकारी छुटने वाली है आआआआआ आआआआआआआआआआ| जितेश के लंड से पिचकारियाँ छुटने लगी |

जितेश के हाहाकारी भारी भरकम मोटे मुसल लंड के आक्रमण से जलते गले में एक गरम पिचकारी लगी, और सीधे गले में उतर गयी | जितेश का सफ़ेद गरम लंड रस बह निकला |

जलते गले में गीले गरम पिचकारी लगने से रीमा के शरीर में एक झुनझुनी सी दौड़ गयी | गरम सफ़ेद लंड रस के स्पर्श से ही उसे हल्का सा ओर्गास्म हो गया | फिर लंड ने पिचकारी की झड़ी लगा दी, जितेश ने थोड़ा लंड बाहर खीचा और मुहँ में झाड़ने लगा ताकि रीमा उसका सफ़ेद गाढ़ा लंड रस का स्वाद ले सके |

काफी देर तक जितेश की कमर हिलती रही, रीमा के मुहँ में वो झड़ता रहे, रीमा उनके लंड रस की एक एक बूंद गटकती चली गयी | जितेश की गोलिया खाली हो गयी, आखिरी बची कुछ बुँदे उसके लाल फूले सुपाडे पर आकर अटक गयी जिन्हें रीमा के अपनी जीभ से चाट लिया | उसके बात रीमा जितेश के लंड को चाटती रही और तब तक चाटती रही जब तक उसमे से एक भी बूंद की गुंजाईश बनी रही |

रीमा ने जितेश के सीने पर अपना सर रख दिया और जितेश ने भी अपना हाथ रीमा की पीठ पर रख दिया | दोनों एक दूसरे के से चिपक कर अपनी अपनी सांसे काबू करने लगे | दोनों तेजी से हाफ रहे थे उनके शरीर पसीने से लथपथ थे | वह दोनों खुद को काबू करने की कोशिश करने लगे और अपनी लंबी लंबी तेज सांसों को नियंत्रित करने लगे | जितेश ने अपनी आंखें बंद कर ली थी उसे जो सुख प्राप्त हुआ था वह जिस आनंद के सागर में गोते लगाकर अभी अभी निकला था उसकी कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी | वह आंखें बंद करके बस उसी पल को हमेशा के लिए अपने दिलो-दिमाग में सजा लेना चाहता था | रीमा भी खुद को काबू कर रही थी | रीमा जितेश जितेश के सीने पर हाथ रखकर उसे हल्के हल्के सहलाने लगी जितेश का हाथ रीमा के चूतड़ों पर चला गया और वह उसके चूतड़ों को सहलाने लगा था | दोनों छत की तरफ देख रहे थे इस लंड चूसाई से रीमा को प्रियम की याद आ गई जब उसने पहली बार प्रियंम का लंड चूसा था इसलिए रीमा अपने पुराने अतीत में चली गई | प्रियम का ख्याल आते ही उसे अपने घर का ख्याल आने लगा | उसे प्रियम रीमा अनिल रोहिणी सब याद आ गए | आखिर वह कैसे होंगे ? कहां होंगे ? मेरे बिना वह किस हालत में जी रहे होंगे पता नहीं उन्होंने खाना खाया होगा नहीं खाया होगा कितने परेशान हो रहे होंगे मेरे लिए ? यही सब सोच सोच कर रीमा की जान निकली जा रही थी कुछ पल पहले वह खुशी और आनंद के सागर में गोते लगा रही थी और अब उसके मन में अवसाद और दुख भरा हुआ था वह समझ नहीं पा रही थी आखिर उन पर क्या बीत रही होगी, वह बस यही सोच सोच कर परेशान हो रही थी पता नहीं किस हालत में वो लोग होंगे और कहां-कहां हाथ-पांव मार रहे होंगे मुझे ढूंढने के लिए मैं यहां से कब निकलेगी मुझे लगता है जितेश से मुझे बात करनी चाहिए मुझे मेरे घर पहुंचा दे | न पंहुचा दे तो कम से कम एक फ़ोन कर दे | या मेरी फ़ोन पर बात करा दे | वो हैरान थी आखिर जितेश इस ज़माने में बिना फ़ोन के रहता कैसे है | यहाँ से निकलने में खतरा तो रहेगा लेकिन कम से कम में जितेश से बात तो कर ही सकती हूं जब भी जितेश को सही लगेगा मुझे यहां से निकाल कर बाहर घर पहुंचा देगा | सूर्य देव के आदमी चारो तरफ घूम रहे होगे | पर क्या करूं खतरा तो है ही है खतरे से डरकर कब तक इस कमरे में बंद रहूंगी |

उधर जब रीमा अनिल और रोहित को नहीं मिली | तो दोनों बेचारे पुरे पुलिस दल के साथ वापस अपने शहर आ गए हैं | हालांकि पोलिस ने अपना पूरा जाल बिछा दिया था | छोटे बड़े हर गुंडे के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी | इधर रोहित ने भी अपने निजी जासूस को रीमा का पता लगाने में लगा रखा था लेकिन समस्या ये थी ये क़स्बा पूरी तरह से सूर्यदेव के कब्जे में था इसलिए इतनी जल्दी यहाँ रोहित के जासूसों के लिए घुसपैठ करना आसान नहीं था | रोहित उनसे बार-बार लगातार संपर्क कर रहा था लेकिन रीमा का कोई अता-पता नहीं था | रोहित कुछ भी कमी बाकि नहीं रखना चाहता था उसने रिटायर हो चुके एक जान पहचान के इंटेलिजेंस के ऑफिसर को रीमा की खोज के लिए लगाया, जिसकी खुद की अपनी जासूसी की एजेंसी थी | उसने रीमा के इस तरह गायब होने की वजह जानने की कोशिश करी, लेकिन इसका जवाब न तो रोहित के पास था न पोलिस के पास | ऊपर से विलास के बेटे की मौत का मामला भी टॉप सीक्रेट हो गया था इसलिए कड़ियाँ जोड़ना तो छोड़ो पकड़ना मुश्किल हो रहा था | विलास अपनी मौत के शोक में आग बबूला बैठा था | अपने घर के क्रिया कर्म करते ही वो कहर बनकर सब पर टूटेगा ये, उसे जानने वाले सबको पता था | सूर्यदेव को भी ये बात पता थी इसलिए उसके पास ज्यादा दिन नहीं थे | उसे भी हर हाल में रीमा को ढूंढकर विलास के सामने करना था नहीं तो वो कुत्ते की मौत मारा जाता | पुलिस अपने स्तर हाथ-पांव मार रही थी लेकिन अब पुलिस कड़ियां जोड़ने पर और जिन लोगों पर शक था उनको उठा उठा कर पकड़ कर पूछताछ कर रही थी और यह काम लंबा था और इसलिए रातो रात रिजल्ट मिल पाना नामुमकिन था | यही सब समझते हुए अनिल और रोहित दोनों ही वापस अपने घर की तरफ लौट आए थे | रोहित के घर पर रोहिणी प्रियम अनिल और उनके दोनों बेटे और बेटी कमरे में बैठे हुए थे टीवी पर रीमा के गायब हो जाने की खबर चल रही थी और पूरे शहर को पता चल गया था कि रीमा गायब हो गई है | प्रियम को भी पता चल गया था रोहिणी को भी पता चल गया था और भी पूरे शहर को भी पता चल गया था | घर में सभी इस तरह से दुख में मायुस सा चेहरा बनाये थे जैसे घर में मातम मनाया जा रहा हो | सभी के मन में एक ही बात थी आखिरी रीमा ने किसी का क्या बिगाड़ा था वह तो इतनी सीधी और सरल थी | कभी किसी से तेज आवाज में बात तक नहीं करती थी | सभी शोक में डूबे हुए थे रोहित और अनिल ने दूसरे को देखा और रोहिणी की तरफ देख कर बोले - बच्चो इस तरह से परेशान होने की जरुरत नहीं है | पोलिस ने बोला है अगले 24 घन्टे में रीमा मिल जाएगी |

रोहित - मुझे लगता है दीदी बच्चों को खाना खिला कर सुला देना चाहिए |

रोहिणी ने भी हामी भरी |

वह प्रियम के साथ-साथ अपने दोनों बच्चों को ले करके खाना खिलाने के लिए ले जाने लगी |

इधर अनिल और रोहित दोनों आगे क्काया किया जाये इस बारे में सोचने लगे | काफी देर तक इसी बात की चर्चा करते रहे कि आखिर और कौन-कौन से तरीके हैं जिसे रीमा को जल्दी खोजा जा सके | तभी रोहित का फ़ोन बजा | वो शहर की ही एक बड़े पुलिस अधिकारी का फ़ोन था |

रोहित के साथ उसकी हाय हल्लो हुई फिर वो पोलिस क्या कर रही है ये अपडेट देने लगा | रोहित ने अपना फ़ोन स्पीकर पर कर दिया |

अधिकारी - रोहित तुम परेशान मत हो | हम रीमा को जल्दी ही खोज लेगें | अब तक मेरा जो अस्सेमेंट है रीमा वही उसी कस्बे में है | कस्बे के बाहर हमने नाकाबंदी कर रखी, वहां से निकलने वाले हर गाड़ी की जाँच की जा रही है | सूर्यदेव नाम के गुंडा वहां तस्करी और दुसरे काले धंधे करके खुद को उस कस्बे का माफिया घोषित कर रखा है | उसके हर आदमी और मूवमेंट पर हमारी नजर है | वहां की पोलिस भी बहुत सहयोग कर रही है | मैंने रीमा के कॉल डिटेल्स निकाल लिए है | उस पर ग्रोसरी स्टोर पर हुए हमले से भी इसका कोई न कोई लिंक हो सकता है | हम हर पहलू से जाँच कर रहे है | कल सुबह तक रीमा की पहचान बताने वाले को हम ढाई लाख का इनाम भी घोषित करवा देगें | इसके अलावा सारे ऑटो और रिक्शा वाले भी हमारे राडार पर है | सूर्यदेव पर हमारी नजर है जरुरत पड़ी तो सूर्यदेव को हिरासत में ले लेगे | असल में वो विलास और मंत्री जी खास आदमी है इसलिए अभी उस पर हाथ डालने का मतलब खुद के हाथ जलाना है | थोड़ा सा धैर्य रखो, अगर हमें एक भी सुराग मिला तो तुरत सूर्यदेव को धर दबोचे |

रोहित - यार मिलन्द ये सूर्यदेव है कौन, इतने सालो से यहाँ हम रह रहे है | आसपास के आठ दस जिलो की तो सारी कुंडली हमें पता है | इसका नाम कभी नहीं सुना |

मिलिंद - हाँ सरप्राइज तो हमारे लिए भी है, सुना है विलास से इसकी कुछ खटपट भी हुई है हालिया बिज़नस को लेकर | फिलहाल इसका नाम तीन साल पहले ही हमारे राडार पर आय है जब हमने १० किलो कोकीन जब्त की थी | चूँकि हमारा जिला नहीं लगता इसलिए फिर ज्यादा कोशिश नहीं की गयी | ऊपर से बॉस का भी आदेश था मामले की जाँच बंद कर दो | लेकिन मै उस जिले से इसके सारे काले कारनामो का किस्सा निकलवा रहा हूँ |

रोहित -अच्छा एक बात बता मिलिंद ये विलास वही न जिसका रिवर लाउन्ज में मंत्री जी के साथ पार्टनर शिप है |

मिलिंद - हाँ वही, तू जानता है उन्हें |

रोहित - हाँ पैराडाइज का सेटअप तो मैंने ही किया था | तभी मुलाकात हुई थी |

मिलिंद - कभी उसके दर्शन हमें भी करा दे |

रोहित - उसमे क्या है कभी भी चला जा |

मिलिंद - हम सरकारी नौकर है, पैसो का पेड़ नहीं लगा है | इतना महंगा है, एक विजिट में दो महीने की सैलरी निपट जाएगी |

रोहित - भाई मजे लेगा तो जेब तो ढीली ही होगी | अच्छा ये सब छोड़ ये बता विलास के साथ कुछ त्रासदी हुई है क्या | शहर की हाई सोसाइटी सर्किल में घूम रहा है कुछ भयानक हो गया है विलास के साथ | उसके बेटे ने आत्महत्या कर ली है |

मिलिंद - टॉप सीक्रेट है बताना मत किसी को, उसके बेटे को किसी ने गोली मारी है वो भी जंगल के बीचो बीच में | उसकी लाश पूरी तरह से नंगी मिली है | किसी लड़की का चक्कर होगा पक्का बता रहा हूँ | आगे जाँच करने का आदेश नहीं वरना सब पता चल जाता | किसी उलटा खोपड़ी के आदमी की बेटी को चोदने की कोशिश की होगी या चुदाई के बीचो बीच पकड लिया होगा | तुरंत ही पेल दिया | ये मै इसलिए कह रहा हूँ वहाँ से एक साड़ी या दुप्पटे का कपड़े के धागे मिले है | मतलब वहां कोई लड़की आई या लायी गयी |

रोहित - ये कब की बात है |

मिलिंद - ये तो रीमा भाभी गायब हुई है | ओह शिट ........................बुत जग्गू और रीमा के बीच कोई कनेक्शन नहीं है |

रोहित - ओह शिट शिट शिट ये मेरे दिमाग में अब तक क्यों नहीं आया |

मिलिंद - क्या नहीं आया ?

रोहित - रिवर लाउन्ज में बवाल हो गया था | जग्गू ने किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करी थी और तुम्हे तो पता है रीमा कितनी आदर्शवादी है | उसने वहां हंगामा खड़ा कर दिया था | हालाँकि वो लड़की थी तो साली रंडी ही लेकिन रीमा को सब अपने जैसे लगते है | सच्चे आदर्शवादी ...................विलास को माफ़ी मांगनी पड़ी थी | लेकिन मुझे डाउट है विलास उस बात को लेकर आगे गया होगा |

मिलिंद - लेकिन वो नशेड़ी उसकी औलाद |

रोहित - लेकिन रीमा के खिलाफ जग्गू .....................वो तो मेरे बेटे प्रियम का भी अच्छा दोस्त था, लेकिन सच ये भी है रीमा की वजह से उसका स्कूल छुट गया था |

मिलिंद - अब आगे क्या करना है, विलास पर सीधे सीधे हाथ डालने का मतलब है नौकरी गयी |

रोहित - मुझे लगता है कुछ न कुछ तो जग्गू और रीमा के बीच कनेक्शन है | मुझे कुछ पता चलता है तो तुझे बताता हूँ |

इतना कहकर फ़ोन काट गया |

थोड़ी देर बाद बच्चे जब खाना खाकर अपने अपने कमरों में चले गए तो रोहिणी भी वहां आ गई और वह भी जानकारियां लेने लगी थी | उसके बाद रोहिणी ने सबके लिए खाना लगा दिया | उसके बाद में बेमन से थोड़ा-थोड़ा खाना रोहित अनिल और रोहिणी ने खाया | अपने अपने कमरे में चले गए थे सबके दिमाग में इसमें बस एक ही बात घूम रही थी आखिर रीमा इस तरह से कैसे गायब हो गई क्या हुआ कैसे हुआ अभी उनको सारी बात नहीं पता चली थी इसीलिए वह इन सब रहस्यों से अनजान थे | सब कुछ बस अनुमानों पर टिका था, रोहित आखिर कैसे पता लगाये की जग्गू और रीमा की बीच क्या कुछ हुआ था | प्रियम से पूछता हूँ शायद कुछ पता चले | लेकिन जब वो प्रियम के कमरे की तरफ गया | तो बाहर की आहट सुनते ही प्रियम सोने का नाटक करने लगा | रोहित उसको सोता देख वापस आ गया और सुबह उससे बात करने की सोचने लगा |

काफी देर तक सभी लोग अपने-अपने कमरे में बिस्तर पर इधर उधर लुढ़कते रहे न रोहिणी की आंखों में नींद थी ना ही रोहित की आंखों में नींद थी ना ही अनिल की आंखों में नींदे और ना ही प्रियम की आंखों में नींद थी | प्रियम को लग रहा कही न कही उसकी वजह से तो चाची मुसीबत में नहीं फंस गयी | आखिर थी तो उसकी चाची ही | चाची से जो भी लड़ाई झगड़ा मारपीट गुस्सा मान मनोबल चलता था वो सब तो रिश्ते का हिस्सा था | उसकी चाची ने ही उसे वह जिंदगी के राज बताएं थे जो शायद उसको अपनी जवानी की दहलीज के आगे निकल जाने के बाद पता चलते | उन्होंने उसे वह सारे राज कच्ची जवानी में बता दिए थे | रीमा चाची की वजह से उसने उतना सब कुछ इस कच्ची उम्र देख लिया था जो शायद उसे अभी देखने की उम्र नहीं थी | चाची ने उसका लंड चूसा था, अपने खूबसूरत से गुलाबी जिस्म का कोना कोना दिखाया था | इसीलिए वह अपनी चाची के जवान गोरे जिस्म का दीवाना था | उसके दिलो-दिमाग मेरी रीमां चाची ही छाई रहती थी | उसे सही गलत न केवल समझती थी बल्कि जवानी के रहस्य भी बताती थी, उन्हें कर कर दिखाती थी | उसका लंड जब जब रीमा चाची के लिए खड़ा हुआ हर बार उसकी प्यास को उन्होंने चूस कर बुझाया था | अफसोस चाची अचानक से गायब हो गयी उनका कोई पता नहीं लग रहा | अपना गोरा बदन दिखाया, अपने दूध दिखाए न केवल दिखाये बल्कि पीने को भी दिया | अपनी गोरी गुलाबी चूत दिखाई और चुदने को भी दिया | नाराज होती थी तो प्यार भी करती थी | आखिर कौन अपने जिस्म का कोना कोना दिखाकर जवानी के गुर अब उसे समझाएगा | जो गलत होता था उसकी सजा देती थी डांटती थी | लेकिन अपने सीने से भी चिपका लेती थी | कौन करेगा इतना प्यार उसे | उसे चाची को दुःख नहीं पंहुचना चाहिए था | माँ की तो कभी शक्ल तक देखने की नहीं मिली अब चाची भी चली गयी | अब क्या करेगा चाची के बिना यही सब सोच सोच का उसकी आंखों में आसूं आ गए | आखिर कहाँ चली गयी तुम रीमा चाची |
 
रोहित की भी आंखों में नींद नहीं आ रही थी वह बार-बार इधर-उधर बिस्तर पर करवट बदल रहा था और रीमा के बारे में सोचा था | आखिरी में इस तरह से कैसे गायब हो गई कि उसका कुछ भी सुराग नहीं मिल पा रहा है | पुलिस भी अपने हाथ-पांव मार रही है | उसके अपने खुद के आदमी भी रीमा को खोजने में लगे हुए हैं | कुछ तो क्लू मिले, कुछ तो सुराग मिले | रीमा की किसी से दुश्मनी भी नहीं थी आखिर अचानक से क्या हो गया | अगर जग्गू से कुछ प्रॉब्लम होती तो रीमा जरुर बताती | पता नहीं वो जिन्दा भी ई या किसी ने ...............नहीं नहीं ये मै क्या उल्टा सीधा सोच रहा हूँ | लेकिन अगर किसी ने सच में उसे मार दिया हो तो | अगर ऐसा होता तो अब तक कहीं न कहीं लाश पुलिस को मिल गई होती | यही सोचकर ही रोहित के रोंगटे खड़े हो गए | उसके बाद में उसने खुद को समझाया और फिर से रीमा के बारे में सोचने लगा |

कितनी खूबसूरत थी कितनी प्यारी सी थी और कितनी सुशील थी जब तक कि उनके बीच की शर्म और लिहाज से पर्दा नहीं हटा | रीमा अपनी मर्यादा में ही रही और वो उसे देख कर बस अपने अरमानो की आहें भरता रहा था | जब एक बार उसके रीमा के बीच की रिश्तो की शर्म का पर्दा हटा , फिर तो गजब हो गया | उसके बाद जिस भी रूप में रीमा को रोहित ने देखा था वह हर बार पहले कि रीमा से बहुत ही अलग थी लेकिन जैसी भी थी कयामत थी कहर ढाती थी | रोहित को वह चरम सुख दिया जो शायद ही कोई औरत दे सकती थी | रोहित के लिए वह बहुत स्पेशल थी भले ही उसके स्वर्गीय भाई की पत्नी हो लेकिन क्या हुआ | रोहित भी रीमा के लिए बहुत खास था और रोहित के लिए रीमा बहुत खास थी | जो सुख उसे रीमा दे सकती थी या दिया था वो शायद ही उसकी आसपास मडराती औरतों के झुंड में से , जो उसके जिंदगी में आई शायद ही कोई कर सकता हो | रीमा से जो उसे सुख मिला जो अपनापन मिला, उसे बाहर की वन नाइट स्टैंड वाली लड़कियां कहां दे सकती थी | कभी-कभी सज धज के ऐसे तैयार होकर निकलती थी तो जब मन करता था बस उसे ही देखता रहा हूं सारा कामकाज भूल जाऊं | रोहित तो उसके चेहरे को काफी देर तक निहारता रहता था | इतनी खूबसूरत इतनी कोमल रीमा कहां होगी, कितनी मुसीबत में होगी, कैसे जी रही होगी पता नहीं | गुंडे बदमाश कौन उठाकर ले गया है पता नहीं | उसके साथ क्या-क्या करेगा ? रीमा को सुरक्षा की चिंता भी रोहित को खाए जा रही थी |

अनिल भी इसी सोच में डूबे हुए अपने बिस्तर पर इधर-उधर लुढ़क रहे थे और उसके दूसरी तरफ करवट करके लेती रोहिणी भी रीमा के बारे में सोच रही थी | आखिर रीमा के साथ क्या हुआ, कुछ किसी को नहीं पता था | दोनों ही अपने अपने खयालो में रीमा के बारे में ही सोच रहे थे | रोहिणी तो जैसे रीमा की दीवानी हो गई थी | इतनी प्यारी और खूबसूरत औरत का कौन दुश्मन हो सकता है | जो थोड़ी सी देर बात करने के बाद अपना पूरा दिल खोल के सामने रख देती थी इतनी भोली सुंदर सुशील दिल की साफ़ लड़की से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है | रोहिणी अपनी भावनाओं के सागर में डूबी हुई यही सब सोच रही थी | इधर अनिल भी रीमा के बारे में ही सोच रहे थे और उनके रात में आने वाले रीमा के सपनों को सोच समझकर लग रहा था कि अब शायद रीमा उनके लिए बस सपना बनकर ही रह जाएगी | आखिर इस तरह से कैसे गायब हो सकती है 3 दिन से ज्यादा होने को आए थे और रीमा का अभी कुछ पता नहीं चल पा रहा था | वो रीमा के हुस्धीन के जाल में अभी भी फंसे हुए थे | धीरे-धीरे अनिल का हाथ खिसकता हुआ उनकी पैंट के अंदर चला गया | वह रीमा की खूबसूरती, अदा और उसकी लटके-झटके आंख बंद करके इमेजिन करने लगे और अपने लंड को सहलाने लगे | रीमा उनकी फेंटेसी थी उनकी सपनों की सौदागर थी | उनके सपनों की अप्सरा थी | उनके ख्वाबों की मलिका थी |

आखिर रीमा आज किसी मुसीबत में है तो अनिल को कैसे चैन हो सकता है लेकिन अपनी उस ख्वाबों की मलिका सपनों की अप्सरा को बारे में सोच समझकर ही अनिल के पेंट में तनाव आने लगता था और अभी भी वही हो रहा था | पड़ोस में दूसरी तरफ मुहँ किए हुए करवट से रोहिणी लेटी हुई थी लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था उनका हाथ अपने लंड पर चलने लगा था और वह रीमा के उस खूबसूरती के स्वप्न में आंखें बंद करके डूबने लगे थे | रोहिणी को भी रीमा याद आ रही थी कैसे दोनों ने पूरी रात हंसी ठिठोली करें और एक दूसरे को ना केवल नंगा किया न केवल एक दुसरे के जिस्म को छुआ बल्कि मन की गहराइयों को भी छुआ था | जिस्म का स्पर्श जब मन की गहराइयो को छु लेता है तो वो दिलो दिमाग में हमेशा के लिए अंकित हो जाता है | उसने रीमा को एक नई चीज सिखाई | वह दोनों ने एक दूसरे के नाजुक से नाजुक प्राइवेट अंगों को छुआ, चुम्मा चाटी और एक दूसरे को वह सुख दिया जो शायद ही एक औरत ही दूसरे औरत को दे सकती है | रीमा कितनी भोली है जैसा रोहणी बताती गई थी रीमा वैसा करती गई | एक दूसरे के स्पर्श ने पनी जवानी के उस सुख को महसूस किया जो शायद ही किसी मर्द के साथ एक औरत को मिल सकता था| औरत का अनुभव ही अलग होता है औरतों का स्पर्श हल्का होता है औरतों का स्पर्श मादक होता है औरतों का स्पर्श सहज होता है औरत का स्पर्श कीमल होता है उस कोमलता के एहसास को याद करके रीमा के जिस्म की उस नरमी को और बदन की गर्मी को याद करके भी रोहिणी मदहोश हुई जा रही थी | आखिरी रीमा चीज ही ऐसी थी | उसके दिमाग पर भी रीमा का नशा पूरी तरह से चढ़ा हुआ था | उसका गुलाबी चिकना दमकता बदन और चिकनी चूत घाटी अभी तक रोहिणी भूली नहीं है | जब पहली बार रीमा को नंगा किया था तो अपलक उसकी खूबसूरती देखती रह गयी थी | आज भी उसकी वो सूरत उसके दिलो दिमाग में बसी है |

रोहिणी का हाथ भी अपने उरोजो को मसलते मसलते अपनी पैंटी के अंदर घुस गया | वह अपने चूत दाने को उंगली से मसलने लगी थी | आखिर रीमा चीज ही ऐसी थी किसी को भी अपनी वासना के सागर में डूबा कर मदहोश कर दें और रोहिणी को रीमा के साथ बिताया हुआ हर वह पल जब वह दोनों एक-दूसरे के शरीर से चिपके हुए थे और उनके बीच में कपड़ों का कोई पर्दा नहीं था एक दूसरे को स्पर्श करते हुए एक दूसरे को टच करते हुए एक-दूसरे के शरीर से शरीर को जोड़ते हुए एक दूसरे की गहराइयों की नाप लेते हुए दूसरे के होंठों को चूमते हुए एक दूसरे में खोई जा रही थी उस पल को याद कर करके और अपने अंदर की दबी हुई लालसा को अपने चूत दाने को मसल मसल करके दिमाग में जी रही थी

अनिल का मूड पूरी तरह से बन चुका था अब क्या करें रोहिणी को चोदे या फिर क्या करें लेकिन हालात ऐसे नहीं थी जो वो रोहिणी से कहें कि उन्हें उसे चोदना है | उन्हें पता था रोहिणी भी दुख से भरी हुई थी | अनिल भी अंदर से उदास थे लेकिन क्या करें हैं | रीमा के मादक जिस्म ने उनके दिलो-दिमाग में जो आग लगा दी थी | उन्उहें कुछ तो करना ही था | अपना लंड को हिला हिला कर के ही अंदर की हवस को बुझाने अनिल जी वहां से उठे और स्टडी रूम में जाकर लेट गए | रोहिणी अपने में खोयी हुई थी इसलिए उसका ध्रूयान उस तरफ गया हि नहि | स्टडी रूम में आकर के लाइट और कमरे के सारे परदे बंद कर दिए | इसके बाद में सोफा लेटकर अपने हाथ से लंड हिलाने लगे | उनके दिलो-दिमाग पर रीमा ही छाई हुई थी | रीमा उनके सपने में अक्सर आती रहती थी और वह सपने ऐसे होते थे कि अनिल को अपनी पिचकारी छोड़नी ही पड़ जाती थी | आज तो हो खुली आंखों से सपना देख रहे थे अपनी रीमां का जो उनकी सपनों की मल्लिका थी लेकिन आज पता नहीं इस अनहोनी के कारण उनसे दूर थी | उन्हें पता भी नहीं था वह कहां है लेकिन उसके नाम की मुठ तेजी से मारने लगे थे और अपने लंड पर हाथ को फिसलने लगे थे | रीमा को चोदने की ख्वाहिश उनके अंदर हमेशा से थी और जब उन्होंने पहली बार रीमा की गुलाबी गरम कसी हुई चूत के दर्शन किए थे तब से तो जैसे उनके ऊपर नशा सा चढ़ गया था | उस कसी हुई गुलाबी चूत को पाने की लालसा में तिल तिल कर घुट रहे थे | ना किसी से कह सकते थे ना किसी को बता सकते थे | बस उसकी गुलाबी चूत की ललक में पागल हुए जा रहे थे | रीमा का वो गोरा दमकता बदन और उसके बड़े बड़े चुताड़ो के बीच में वो गुलाबी चीरा और उसकी दो फांके, उन्ही दो फांको के छेद ने तो उन्हें पागल कर रखा था |

बस एक ही चारा था अपने लंड पर वह सारे अरमानों का गुस्सा उतार देते थे और अभी भी वही हो रहा था उनका हाथ उनके अपने लंड पर बहुत तेजी से फिसल रहा था अब उन्होंने पेंट खोल दी लंड पूरी तरह से तन गया था | कमरे में घनघोर अँधेरा और उस पर भी उनका काला मोटा मुसल लंड लार की चमक से चमक रहा था |

इधर रोहिणी भी अपनी प्यारी सी हंसती खिलखिलाती गुदगुदाती अठखेलियाँ करती रीमा को सोच समझकर के मदहोश हुई जा रही थी आखिरी में कहां होगी..... किस हाल में होगी उसने कुछ खाया होगा नहीं खाया होगा पता नहीं किन जालिमों के हाथ में वह होगी | उसे हमारी याद आ रही होगी या नहीं आ रही होगी | हम उसके लिए कितने परेशान हैं या वह किन मुसीबतों में पड़ी होगी इसका कोई भी अंदाजा नहीं था | यही सब सोच सोच कर रोहिणी परेशान हो रही थी और उसकी पैंटी में उसकी चल रही उंगली थम गई | आखिर वह क्या करें इतनी असहाय कभी नहीं थी वह जान चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी | आखिर रीमा का पता कैसे लगाया जाए | रीमा की कल्पनाओं में खोई हुई रीमा को लेकर परेशान रोहिणी ने भी फिर से अपना हाथ अपनी पैंटी में घुसा दिया | उसने अपनी गर्दन घुमाकर देखी अनिल वहां नहीं थे | वह समझ गई अनिल भी रीमा के नशे में चूर हो गए हैं | अब रोहिणी के सामने खुला मैदान था वह कुछ भी कर सकती थी | उसने अपना नाईट गाउन उतार फेंका | फिर धीरे से पैंटी भी खिसका दी | अब बस उसके जिस्म पर ब्रा रह गयी थी | उन्होंने तेजी से अपनी चूत दाने को रगड़ना शुरु किया | अपनी आंखें बंद कर वह बस रीमा के बारे में सोचने लगी जैसे रीमा अभी उसके पास ही हो | वो बिस्तर पर लेती हो और रीमा उसके ऊपर छाई हो | उसे चूम रही हो सहला रही हो उसके बड़ी-बड़ी उठी हुई छतिया उसकी छातियों से टकराकर के एक दूसरे में चूर हो रही हो | उसके बदन की नरम गर्माहट से रोहिणी की वासना का ज्वार भी बढ़ने लगा हो | दोनों के आपस में रगड़ते बदन एक ऐसी गर्मी पैदा कर रहे हो जो शायद उन दोनों को जलाकर के रख कर देगी | रोहिणी की चूत दाने पर तेज फिसलती उंगली की रगड़न से उसके पूरे शरीर में वासना की तरंगों बहने लगी | रोहिणी ने एक हाथ की उंगलियाँ अपनी चूत घुसा दी दुसरे से वो चूत दाने को मसल रही थी | उसकी कल्पना में ऐसा उसने सोच रखा था जैसे रीमा उसके ऊपर छाई हुई हो उसे चूम रही हो चाट रही हो और उसकी चूत में उंगली कर रही हो, उसके चूत दाने को मसल रही हो | जबकि एक हाथ से वह अपनी चूत दाने को रगड़ रही थी और दूसरे हाथ की उंगलियों से अपनी चूत को चोद रही थी |
 
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