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विक्की
दो घंटे तक हम सब ने मन लगाकर पढ़ाई की और फिर लक्ष्मी आंटी किचन में खाना गरम करने चली गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांकते हुए पूछा कि खाना कब परोसना है?
हम दोनों ने हाथ मुंह फिर से धोए और लक्ष्मी आंटी को खाना परोसने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने सब के लिए खाना परोसा और हम ने खाना खाते हुए लक्ष्मी आंटी को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।
लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर कहा कि कुछ साल बीच में जाने के कारण थोड़ी देर लग रही है। लक्ष्मी आंटी को डर था कि उसे आज वापस भेज दिया जाएगा और इसलिए उसने दोपहर को ही हमारे लिए खाना बनाया था। कल से वह दोपहर को पढ़ाई करेगी और शाम को हमारे आने के बाद खाना बनाएगी। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई में मदद करने का वादा किया।
खाने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के मना करने पर भी उसे साफ सफाई में हाथ बटाया और काम ख़तम होने पर नहाने चले गए। हम दोनों नहाकर बाहर आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में इंतजार करने को कहा और नहाने चली गई। हम दोनों ने बेडरूम में जा कर बत्तियां बुझा दी और बेसब्री से लक्ष्मी आंटी का इंतजार करने लगे।
बाथरूम में से पानी की आवाज बन्द हो गई और अंधेरे में से एक एक कदम हॉल में आया। हॉल में बत्ती जली और लक्ष्मी आंटी की मोहनी मूर्ति बेडरूम के दरवाजे में नजर आई। लक्ष्मी आंटी के पीछे उजाला था और आगे अंधेरा था। इसलिए हम दोनों को गीले बालों से satin में अर्ध पारदर्शी gown में रती की मोहक छवि नजर आई। लक्ष्मी आंटी ये जानती थी कि हम दोनों पर क्या असर होगा क्योकि वह वहीं खड़ी हो गई।
अब लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहों को फैलकर दरवाजे के दोनों तरफ छुआ और अपने आप को दरवाजे के बीच लाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी गिली जुल्फें चेहरे से पीछे लेते हुए अपने कामुक बदन की झलक दिखाई। लक्ष्मी आंटी ने फिर अपने हाथों से अपने गले पर बने पाशवी प्रणय के निशानों को सहलाते हुए हमें तड़पाया। लक्ष्मी आंटी के हाथ धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उसके मम्मे दबाने लगे। कोई औरत अपने बदन को सहलाते हुए इतना तड़पा सकती है यह बात हमें अब समझ आई। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और नीचे लाते हुए अपने पेट पर satin gown को लगाते हुए अपनी उंगलियों को गाउन के डोर में फंसाया।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और गाउन का डोर खुल गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने कंधे गोल घुमाए तो लक्ष्मी आंटी के संगमरमरी बदन से satin के परदे का फिसलना तय था। लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर घुटनों को सीधे रखते हुए नीचे गिर gown उठाया।
अगर 3 घंटे पहले लक्ष्मी आंटी ने राहत नहीं दी होती तो हमारे गोटे फटकर बेड पर हमारा रस फैला चुके होते। हम दोनों मंत्रमुग्ध हो कर रती के यौवन का छलकता प्याला देख रहे थे।
लक्ष्मी आंटी ने अपने satin gown को हॉल के सोफे पर उड़ाया और एक ओर मुड़कर खड़ी हो गई। लक्ष्मी आंटी का एक हाथ उसकी पीठ पर उपर होते हुए satin bra की निचली गांठ को लगा। दो उंगलियों से गांठ को खींच कर छुड़ाने के बाद वह हाथ नीचे गया। दूसरे हाथ ने बालों को कंधों पर लेते हुए गले के पीछे की गांठ खींचकर खोली। उंगलियों से छूटते ही लक्ष्मी आंटी की satin bra नीचे गिर गई।
लक्ष्मी आंटी ने दुबारा झुककर जब अपनी ब्रा उठाई तो उसके जुलते गोलों पर जड़ी बेरीयां साफ नजर आई। लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर पीठ करके ब्रा को गाउन के साथ रख दिया। लक्ष्मी आंटी ने वैसे ही खड़े होकर कमर में थोड़ी झुक गई। लक्ष्मी आंटी के हाथ उसके घुटनों के से उपर उसकी जांघों को सहलाते हुए satin पैंटी कि कमर में लगी गांठों को लगे। दोनों हाथों की दो दो उंगलियों से दोनों ओर के डोर खींच लिए। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि हम दोनों ने बिना बोले एक दूसरे से बात कर ली थी।
दोनों ओर की गांठें खुल गई और satin की वह गीली पैंटी लक्ष्मी आंटी की उंगलियों में झूलने लगी।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों तो. आह!!! मां!!!."
मैंने झुकी हुई लक्ष्मी आंटी की रस भरी योनि में अपना लिंग भर दिया और बिना वक्त गंवाए उसकी तेज चुदाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से दरवाजे के दोनों छोर पकड़ कर अपनी चुदाई के लुफ्त उठाने लगी।
मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उन्हें खींच कर लक्ष्मी आंटी को थोड़ा उठाया। लक्ष्मी आंटी के उठने से लक्ष्मी आंटी की चूत में रगड़ते मेरे सुपाड़े की दिशा बदली और लक्ष्मी आंटी के G-spot में झनझनाहट हुई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत में मुझे कस कर पकड़ लिया और रस की फुहार उड़ाते हुए झड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी के डांस से उत्तेजित मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कोख में ठूंस कर झड़ने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने दरवाजे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और नीचे घुटनों पर बैठ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाया और बेड की ओर ले गया। लक्ष्मी आंटी थक कर चूर बेड पर पेट ओर जमीन पर पैर रखकर लेट गई। लक्ष्मी आंटी के फैले हुए पैरों के बीच में मेरा रस टपक कर जमीन पर दाग बना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और मेरी ओर देख मुस्कुराई। मैंने लक्ष्मी आंटी के बालों को पीछे कर के अपने होंठों को उसके होठों पर लगाया।
लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने से पीछे ध्यान नहीं दिया। सन्नी ने अपने लौड़े को वेसलीन से पूरा पोत लिया था और उसकी नजर लक्ष्मी आंटी की तंग गली पर थी। लक्ष्मी आंटी ने अपना चुंबन तोड़कर मुझे पूछा,
"सन्नी बाबू? वोह. आह. सन्नी. बाबू!!! अन्ह. हा.."
सन्नी ने अपने भाले की जड़ को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाते हुए उसे अपने प्यार का पूरा नाप दिया। वेसलीन और लक्ष्मी आंटी को इस चुदाई की आदत हो जाने के कारण सन्नी अपना काम पूरा कर पाया था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए तेज धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बड़ी ही आसानी से अब सन्नी के हर धक्के का साथ देना शुरू किया।
सन्नी लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए उसे बता रहा था कि वह उसे कैसे रात भर तड़पाएगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे साथ देते हुए उकसा रही थी कि वह और ज्यादा जोर से और तेज धक्कों से उसे चोदे। लक्ष्मी आंटी के उकसाने के बाद सन्नी के साथ मै भी गरमाने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को बेड पर दबाते हुए उसकी गांड़ कि गहराई में अपना पानी छोड़ दिया और खुद बाहर निकल आया।
लक्ष्मी आंटी अपनी चूत और गांड से गरम वीर्य टपकाते हुए बेड के किनारे पड़ी थी कि सन्नी बेड के सिरहाने बैठ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को खींच कर बेड पर ऐसे लिटाया कि पेट के बल लेटी लक्ष्मी आंटी के मुंह में सन्नी का लंबा चिकना लौड़ा था। मुंह भरा हुआ हो तो बातें नहीं करते इस बात को स्वीकार कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में डुबकी लगाकर आए हुए लौड़े को अच्छे से चूस कर साफ़ करने लगी। खींच कर बेड पर लाते हुए लक्ष्मी आंटी के पैर अब जुड़ जाए थे। उसकी गदराई गांड़ और चिकने बदन ने मुझे बुलाया और मैं खींचा चला गया। लक्ष्मी आंटी के घुटनों के बगल में अपने घुटनों को रख कर मै लक्ष्मी आंटी की पीठ पर लेट गया।
मेरे मूसल का सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ के सुराख पर दब गया तो लक्ष्मी आंटी ने अपना सर उठा कर,
"विक्की बाबू!!" की गुहार लगाई।
क्या लक्ष्मी आंटी चाहती थी कि मैं उसकी गांड़ मारूं या गांड़ नहीं मारूं?
समझदार लोग हमेशा दूसरों के भलाई की बात सोचते हैं। इसलिए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। सन्नी के लौड़े पर अपना मुंह दबाकर चीखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर फैलाने की कोशिश की। मेरे घुटनों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को दबोच लिया था और उसकी वीर्य से लबालब भरी गांड़ को दबाकर पतली बना दिया था। वेसलीन, वीर्य और लक्ष्मी आंटी की अंदरूनी चिकनाहट से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। लक्ष्मी आंटी का सर सन्नी ने अपने लौड़े पर दबा दिया और मुझे देख कर सन्नी ने आंख मारी।
अभी अभी तो मै झड़ा था और लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ को काफी देर चोदना बाकी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ उसी अंदाज में मारते हुए उसे बता रहा था कि उसकी गांड़ मुझे कितना सुख दे रही है। लक्ष्मी आंटी भी कराहकर सन्नी का लंबा लौड़ा चूसते हुए अपनी गांड़ को दबाकर मुझे साथ दे रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहला कर चूमते हुए उसकी गांड़ मारना जारी रखा।
लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए सन्नी का लौड़ा देखना मुझे रास नहीं आ रहा था और शायद यही तकलीफ सन्नी को भी थी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के मुंह से अपना लौड़ा बाहर निकाला और बगल में लेट कर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से सन्नी का हथियार सहलाते हुए तयार रखा जब मैंने अपने लौड़े के धक्के का जोर बढ़ा दिया। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में अपना रस छोड़ कर मैं लक्ष्मी आंटी के उपर से सरक गया।
इस से पहले कि सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ लेता लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू आप दोनों को सुबह जल्दी उठना चाहिए इस लिए अब आप दोनों सो जाओ। बाकी का खेल कल सुबह खेलेंगे।"
सन्नी ने शिकायद की तो लक्ष्मी आंटी ने उसे पीठ पर लिटाकर उस पर चढ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी थुंक से सन्नी का लौड़ा गीला कर दिया और खुद उसके लौड़े को अपनी योनी मुख पर रगड़ने लगी। कुछ ही पल में सन्नी के लौड़े पर थुंक, वीर्य और स्त्री उत्तेजना का काम रस मल दिया गया। लक्ष्मी आंटी ने अब सन्नी के लौड़े पर अपना वजन रखा और सन्नी के लौड़े ने लक्ष्मी आंटी की गरमी का नाप लिया। सन्नी आराम से लेट कर लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहा था और लक्ष्मी आंटी भी अपनी मर्जी से अपनी ताल पर चुदाने में व्यस्त हो गई थी। लक्ष्मी आंटी झडते हुए चुदा रही थी और चुदाते हुए झड रही थी।
रात के अंधेरे में यौन सुख की किलकारियों के बीच हम सब की कामक्रीड़ा कब खत्म हुई और कब सोए किसी को पता नहीं चला।
विक्की
दो घंटे तक हम सब ने मन लगाकर पढ़ाई की और फिर लक्ष्मी आंटी किचन में खाना गरम करने चली गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांकते हुए पूछा कि खाना कब परोसना है?
हम दोनों ने हाथ मुंह फिर से धोए और लक्ष्मी आंटी को खाना परोसने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने सब के लिए खाना परोसा और हम ने खाना खाते हुए लक्ष्मी आंटी को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।
लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर कहा कि कुछ साल बीच में जाने के कारण थोड़ी देर लग रही है। लक्ष्मी आंटी को डर था कि उसे आज वापस भेज दिया जाएगा और इसलिए उसने दोपहर को ही हमारे लिए खाना बनाया था। कल से वह दोपहर को पढ़ाई करेगी और शाम को हमारे आने के बाद खाना बनाएगी। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई में मदद करने का वादा किया।
खाने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के मना करने पर भी उसे साफ सफाई में हाथ बटाया और काम ख़तम होने पर नहाने चले गए। हम दोनों नहाकर बाहर आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में इंतजार करने को कहा और नहाने चली गई। हम दोनों ने बेडरूम में जा कर बत्तियां बुझा दी और बेसब्री से लक्ष्मी आंटी का इंतजार करने लगे।
बाथरूम में से पानी की आवाज बन्द हो गई और अंधेरे में से एक एक कदम हॉल में आया। हॉल में बत्ती जली और लक्ष्मी आंटी की मोहनी मूर्ति बेडरूम के दरवाजे में नजर आई। लक्ष्मी आंटी के पीछे उजाला था और आगे अंधेरा था। इसलिए हम दोनों को गीले बालों से satin में अर्ध पारदर्शी gown में रती की मोहक छवि नजर आई। लक्ष्मी आंटी ये जानती थी कि हम दोनों पर क्या असर होगा क्योकि वह वहीं खड़ी हो गई।
अब लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहों को फैलकर दरवाजे के दोनों तरफ छुआ और अपने आप को दरवाजे के बीच लाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी गिली जुल्फें चेहरे से पीछे लेते हुए अपने कामुक बदन की झलक दिखाई। लक्ष्मी आंटी ने फिर अपने हाथों से अपने गले पर बने पाशवी प्रणय के निशानों को सहलाते हुए हमें तड़पाया। लक्ष्मी आंटी के हाथ धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उसके मम्मे दबाने लगे। कोई औरत अपने बदन को सहलाते हुए इतना तड़पा सकती है यह बात हमें अब समझ आई। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और नीचे लाते हुए अपने पेट पर satin gown को लगाते हुए अपनी उंगलियों को गाउन के डोर में फंसाया।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और गाउन का डोर खुल गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने कंधे गोल घुमाए तो लक्ष्मी आंटी के संगमरमरी बदन से satin के परदे का फिसलना तय था। लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर घुटनों को सीधे रखते हुए नीचे गिर gown उठाया।
अगर 3 घंटे पहले लक्ष्मी आंटी ने राहत नहीं दी होती तो हमारे गोटे फटकर बेड पर हमारा रस फैला चुके होते। हम दोनों मंत्रमुग्ध हो कर रती के यौवन का छलकता प्याला देख रहे थे।
लक्ष्मी आंटी ने अपने satin gown को हॉल के सोफे पर उड़ाया और एक ओर मुड़कर खड़ी हो गई। लक्ष्मी आंटी का एक हाथ उसकी पीठ पर उपर होते हुए satin bra की निचली गांठ को लगा। दो उंगलियों से गांठ को खींच कर छुड़ाने के बाद वह हाथ नीचे गया। दूसरे हाथ ने बालों को कंधों पर लेते हुए गले के पीछे की गांठ खींचकर खोली। उंगलियों से छूटते ही लक्ष्मी आंटी की satin bra नीचे गिर गई।
लक्ष्मी आंटी ने दुबारा झुककर जब अपनी ब्रा उठाई तो उसके जुलते गोलों पर जड़ी बेरीयां साफ नजर आई। लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर पीठ करके ब्रा को गाउन के साथ रख दिया। लक्ष्मी आंटी ने वैसे ही खड़े होकर कमर में थोड़ी झुक गई। लक्ष्मी आंटी के हाथ उसके घुटनों के से उपर उसकी जांघों को सहलाते हुए satin पैंटी कि कमर में लगी गांठों को लगे। दोनों हाथों की दो दो उंगलियों से दोनों ओर के डोर खींच लिए। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि हम दोनों ने बिना बोले एक दूसरे से बात कर ली थी।
दोनों ओर की गांठें खुल गई और satin की वह गीली पैंटी लक्ष्मी आंटी की उंगलियों में झूलने लगी।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों तो. आह!!! मां!!!."
मैंने झुकी हुई लक्ष्मी आंटी की रस भरी योनि में अपना लिंग भर दिया और बिना वक्त गंवाए उसकी तेज चुदाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से दरवाजे के दोनों छोर पकड़ कर अपनी चुदाई के लुफ्त उठाने लगी।
मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उन्हें खींच कर लक्ष्मी आंटी को थोड़ा उठाया। लक्ष्मी आंटी के उठने से लक्ष्मी आंटी की चूत में रगड़ते मेरे सुपाड़े की दिशा बदली और लक्ष्मी आंटी के G-spot में झनझनाहट हुई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत में मुझे कस कर पकड़ लिया और रस की फुहार उड़ाते हुए झड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी के डांस से उत्तेजित मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कोख में ठूंस कर झड़ने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने दरवाजे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और नीचे घुटनों पर बैठ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाया और बेड की ओर ले गया। लक्ष्मी आंटी थक कर चूर बेड पर पेट ओर जमीन पर पैर रखकर लेट गई। लक्ष्मी आंटी के फैले हुए पैरों के बीच में मेरा रस टपक कर जमीन पर दाग बना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और मेरी ओर देख मुस्कुराई। मैंने लक्ष्मी आंटी के बालों को पीछे कर के अपने होंठों को उसके होठों पर लगाया।
लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने से पीछे ध्यान नहीं दिया। सन्नी ने अपने लौड़े को वेसलीन से पूरा पोत लिया था और उसकी नजर लक्ष्मी आंटी की तंग गली पर थी। लक्ष्मी आंटी ने अपना चुंबन तोड़कर मुझे पूछा,
"सन्नी बाबू? वोह. आह. सन्नी. बाबू!!! अन्ह. हा.."
सन्नी ने अपने भाले की जड़ को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाते हुए उसे अपने प्यार का पूरा नाप दिया। वेसलीन और लक्ष्मी आंटी को इस चुदाई की आदत हो जाने के कारण सन्नी अपना काम पूरा कर पाया था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए तेज धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बड़ी ही आसानी से अब सन्नी के हर धक्के का साथ देना शुरू किया।
सन्नी लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए उसे बता रहा था कि वह उसे कैसे रात भर तड़पाएगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे साथ देते हुए उकसा रही थी कि वह और ज्यादा जोर से और तेज धक्कों से उसे चोदे। लक्ष्मी आंटी के उकसाने के बाद सन्नी के साथ मै भी गरमाने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को बेड पर दबाते हुए उसकी गांड़ कि गहराई में अपना पानी छोड़ दिया और खुद बाहर निकल आया।
लक्ष्मी आंटी अपनी चूत और गांड से गरम वीर्य टपकाते हुए बेड के किनारे पड़ी थी कि सन्नी बेड के सिरहाने बैठ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को खींच कर बेड पर ऐसे लिटाया कि पेट के बल लेटी लक्ष्मी आंटी के मुंह में सन्नी का लंबा चिकना लौड़ा था। मुंह भरा हुआ हो तो बातें नहीं करते इस बात को स्वीकार कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में डुबकी लगाकर आए हुए लौड़े को अच्छे से चूस कर साफ़ करने लगी। खींच कर बेड पर लाते हुए लक्ष्मी आंटी के पैर अब जुड़ जाए थे। उसकी गदराई गांड़ और चिकने बदन ने मुझे बुलाया और मैं खींचा चला गया। लक्ष्मी आंटी के घुटनों के बगल में अपने घुटनों को रख कर मै लक्ष्मी आंटी की पीठ पर लेट गया।
मेरे मूसल का सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ के सुराख पर दब गया तो लक्ष्मी आंटी ने अपना सर उठा कर,
"विक्की बाबू!!" की गुहार लगाई।
क्या लक्ष्मी आंटी चाहती थी कि मैं उसकी गांड़ मारूं या गांड़ नहीं मारूं?
समझदार लोग हमेशा दूसरों के भलाई की बात सोचते हैं। इसलिए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। सन्नी के लौड़े पर अपना मुंह दबाकर चीखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर फैलाने की कोशिश की। मेरे घुटनों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को दबोच लिया था और उसकी वीर्य से लबालब भरी गांड़ को दबाकर पतली बना दिया था। वेसलीन, वीर्य और लक्ष्मी आंटी की अंदरूनी चिकनाहट से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। लक्ष्मी आंटी का सर सन्नी ने अपने लौड़े पर दबा दिया और मुझे देख कर सन्नी ने आंख मारी।
अभी अभी तो मै झड़ा था और लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ को काफी देर चोदना बाकी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ उसी अंदाज में मारते हुए उसे बता रहा था कि उसकी गांड़ मुझे कितना सुख दे रही है। लक्ष्मी आंटी भी कराहकर सन्नी का लंबा लौड़ा चूसते हुए अपनी गांड़ को दबाकर मुझे साथ दे रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहला कर चूमते हुए उसकी गांड़ मारना जारी रखा।
लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए सन्नी का लौड़ा देखना मुझे रास नहीं आ रहा था और शायद यही तकलीफ सन्नी को भी थी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के मुंह से अपना लौड़ा बाहर निकाला और बगल में लेट कर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से सन्नी का हथियार सहलाते हुए तयार रखा जब मैंने अपने लौड़े के धक्के का जोर बढ़ा दिया। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में अपना रस छोड़ कर मैं लक्ष्मी आंटी के उपर से सरक गया।
इस से पहले कि सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ लेता लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू आप दोनों को सुबह जल्दी उठना चाहिए इस लिए अब आप दोनों सो जाओ। बाकी का खेल कल सुबह खेलेंगे।"
सन्नी ने शिकायद की तो लक्ष्मी आंटी ने उसे पीठ पर लिटाकर उस पर चढ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी थुंक से सन्नी का लौड़ा गीला कर दिया और खुद उसके लौड़े को अपनी योनी मुख पर रगड़ने लगी। कुछ ही पल में सन्नी के लौड़े पर थुंक, वीर्य और स्त्री उत्तेजना का काम रस मल दिया गया। लक्ष्मी आंटी ने अब सन्नी के लौड़े पर अपना वजन रखा और सन्नी के लौड़े ने लक्ष्मी आंटी की गरमी का नाप लिया। सन्नी आराम से लेट कर लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहा था और लक्ष्मी आंटी भी अपनी मर्जी से अपनी ताल पर चुदाने में व्यस्त हो गई थी। लक्ष्मी आंटी झडते हुए चुदा रही थी और चुदाते हुए झड रही थी।
रात के अंधेरे में यौन सुख की किलकारियों के बीच हम सब की कामक्रीड़ा कब खत्म हुई और कब सोए किसी को पता नहीं चला।