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ऋतु बोली- "आप इसको सुन लीजिए। मैं बाकी काम निपटाकर आती हूँ.."
मैंने कहा- "बाद में कर लेना..."
ऋतु ने कहा- "इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे..."
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मैं समझ गया की इसमें सब लण्ड खड़ा करने वाली बातें हैं। मैंने कहा- “चलो तुम काम निपटाकर आओ मैं सुनता हूँ..” मैंने फिर से प्ले किया पर सुनकर यकीन नहीं हो रहा था मुझे अगर ऋतु की आवाज की पहचान नहीं होती तो मैं इस रेकार्डिंग को नकली ही समझता। बातचीत कुछ इस तरह थी। आप लोग यकीन माना या ना मानो, मैंने स्टोरी के इस पार्ट को लिखने से पहले आज वो कार्डि फिर से सनी, और अल्लमोस्ट मैं सेम लिख रहा है।
अन्- और आज आफिस में कैसा रहा?
ऋतु- जैसा रोज होता है।
अनु- आज कुछ हुआ नहीं क्या, या मोका नहीं मिला?
ऋत्- क्या दीदी आप भी ना... हर टाइम सिर्फ सेक्स के बारे में सोचती रहती हो।
अनु- अरे मुझसे क्या छुपा रही है, बता ना आज तुम लोगों ने सेक्स किया?
ऋतु- नहीं दीदी, मैं आज बहुत थकी थी फिर उनको भी लग रहा था की मैं थकी है। इसलिए आज कुछ नहीं हुआ बस किस ही किया उन्होंने।
अनु- इसका मतलब बो तेरी फीलिंग को देखकर सेक्स करता है?
ऋतु. ही दीदी सच में वो बड़े अच्छे हैं। उनको मेरी छोटी से छोटी प्राबलम भी अपनी लगती है। सच में वो मझे बड़ा प्यार करते हैं।
अनु- मैं तो आज सोच रही थी की तो से मजेदार किस्सा सुनेंगी। तनें तो सच मजा ही खराब कर दिया। चल में बता बो तुझें सेक्स करने से पहले क्या-क्या करता है। पर सब साफ-साफ बोलियो उसमें मजा आता है।
ऋतु- यार दीदी आपको भी ना... चलो मैं आपको सब साफ-साफ ही बताती हैं। सबसे पहले वो मुझे पूरा नंगी करते हैं, फिर वो मेरी एक चूची को चूसते हैं, और दूसरी का निप्पल मसलते हैं। फिर उनका हाथ मेरी गाण्ड पर आ जाता है। वो मेरी गाण्ड को कस-कस के मसलते हैं। मैं उनका लण्ड पकड़कर हिलाती रहती हैं फिर बो मेरी चूत में अपनी उंगली डाल देते हैं। उनकी उंगली पता नहीं क्या करती है की मेरी चूत गीली हो जाती है। वो मेरे दाने को मसलते हैं तो अहह..." साथ में अन् की भी आह्ह... निकलती है।
अन्- हाँ यार सच में... अगर कोई दसरा मेरे दाने को रगड़े तो मजा आ जाए। पर वो तो मेरी चूत को देखते भी नहीं।
ऋतु- दीदी आप उनसे कभी कहो ना की आपको ये सब अच्छा लगता है।
अनु- उहह... क्या कहूँ उनका एक ही डायलाग होता है की 'अनु मुझे सुबह जल्दी उठना है टाइम मत खराब करो जल्दी से पैंटी उतारी और बस ना किस ना चूची दबाते हैं। मेरा इतना मन करता है की वो मेरी चूचियों को मसल दें, और अपने मुँह में लेकर चूसें। पर कुछ भी नहीं करते। बस लण्ड को चूत में डालकर धक्के मारते हैं, दो-चार मिनट में झड़कर बोलते हैं- गुड नाइट..."
ऋतु- "दीदी, आप उनको बायफ्रेंड दिखाओ। हो सकता है उसे देखकर उनका मइ चेंज हो जाए.."
अनु रुचांसी आवाज में. "अरे यार मैं सब ट्राई कर चुकी हैं। वो बायफ्रेंड देखकर भी कुछ नहीं करते। उनका दिमाग सिर्फ अपना पानी निकालने में रहता है। दूसरे के एमोशन्स की कोई परवाह नहीं। अब में अगर ज्यादा कुछ बोलूगी तो पता है उनके दिमाग में यें आएगा की मैं उनसे खुश नहीं हो पाती, और कहीं वो मुझे गलत समझ बैठे तो पता नहीं क्या होगा? हौँ फिर त बता ना... तेरी चत पनिया जाती हैं फिर?"
ऋतु- हाँ फिर में उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसती हैं, उनके लण्ड से हमेशा स्वीट सी महक आती है। मन करता है चूसती ही रहा
अन्- "किस टाइप की महक समझी नहीं मैं?" मैंने पहले भी लिखा हैं मैं अपने लण्ड पर डी.ओ. लगाता हैं।
ऋतु- अब मैं आपको कैसे समझाऊँ? जैसे की भीनी-भीनी खुशबू आती है।
अनु- फिर वो तेरी चूत कब चाटता है? उसका लण्ड जब तैयार हो गया तो वो चूत में नहीं डालता क्या?
मैंने कहा- "बाद में कर लेना..."
ऋतु ने कहा- "इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे..."
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मैं समझ गया की इसमें सब लण्ड खड़ा करने वाली बातें हैं। मैंने कहा- “चलो तुम काम निपटाकर आओ मैं सुनता हूँ..” मैंने फिर से प्ले किया पर सुनकर यकीन नहीं हो रहा था मुझे अगर ऋतु की आवाज की पहचान नहीं होती तो मैं इस रेकार्डिंग को नकली ही समझता। बातचीत कुछ इस तरह थी। आप लोग यकीन माना या ना मानो, मैंने स्टोरी के इस पार्ट को लिखने से पहले आज वो कार्डि फिर से सनी, और अल्लमोस्ट मैं सेम लिख रहा है।
अन्- और आज आफिस में कैसा रहा?
ऋतु- जैसा रोज होता है।
अनु- आज कुछ हुआ नहीं क्या, या मोका नहीं मिला?
ऋत्- क्या दीदी आप भी ना... हर टाइम सिर्फ सेक्स के बारे में सोचती रहती हो।
अनु- अरे मुझसे क्या छुपा रही है, बता ना आज तुम लोगों ने सेक्स किया?
ऋतु- नहीं दीदी, मैं आज बहुत थकी थी फिर उनको भी लग रहा था की मैं थकी है। इसलिए आज कुछ नहीं हुआ बस किस ही किया उन्होंने।
अनु- इसका मतलब बो तेरी फीलिंग को देखकर सेक्स करता है?
ऋतु. ही दीदी सच में वो बड़े अच्छे हैं। उनको मेरी छोटी से छोटी प्राबलम भी अपनी लगती है। सच में वो मझे बड़ा प्यार करते हैं।
अनु- मैं तो आज सोच रही थी की तो से मजेदार किस्सा सुनेंगी। तनें तो सच मजा ही खराब कर दिया। चल में बता बो तुझें सेक्स करने से पहले क्या-क्या करता है। पर सब साफ-साफ बोलियो उसमें मजा आता है।
ऋतु- यार दीदी आपको भी ना... चलो मैं आपको सब साफ-साफ ही बताती हैं। सबसे पहले वो मुझे पूरा नंगी करते हैं, फिर वो मेरी एक चूची को चूसते हैं, और दूसरी का निप्पल मसलते हैं। फिर उनका हाथ मेरी गाण्ड पर आ जाता है। वो मेरी गाण्ड को कस-कस के मसलते हैं। मैं उनका लण्ड पकड़कर हिलाती रहती हैं फिर बो मेरी चूत में अपनी उंगली डाल देते हैं। उनकी उंगली पता नहीं क्या करती है की मेरी चूत गीली हो जाती है। वो मेरे दाने को मसलते हैं तो अहह..." साथ में अन् की भी आह्ह... निकलती है।
अन्- हाँ यार सच में... अगर कोई दसरा मेरे दाने को रगड़े तो मजा आ जाए। पर वो तो मेरी चूत को देखते भी नहीं।
ऋतु- दीदी आप उनसे कभी कहो ना की आपको ये सब अच्छा लगता है।
अनु- उहह... क्या कहूँ उनका एक ही डायलाग होता है की 'अनु मुझे सुबह जल्दी उठना है टाइम मत खराब करो जल्दी से पैंटी उतारी और बस ना किस ना चूची दबाते हैं। मेरा इतना मन करता है की वो मेरी चूचियों को मसल दें, और अपने मुँह में लेकर चूसें। पर कुछ भी नहीं करते। बस लण्ड को चूत में डालकर धक्के मारते हैं, दो-चार मिनट में झड़कर बोलते हैं- गुड नाइट..."
ऋतु- "दीदी, आप उनको बायफ्रेंड दिखाओ। हो सकता है उसे देखकर उनका मइ चेंज हो जाए.."
अनु रुचांसी आवाज में. "अरे यार मैं सब ट्राई कर चुकी हैं। वो बायफ्रेंड देखकर भी कुछ नहीं करते। उनका दिमाग सिर्फ अपना पानी निकालने में रहता है। दूसरे के एमोशन्स की कोई परवाह नहीं। अब में अगर ज्यादा कुछ बोलूगी तो पता है उनके दिमाग में यें आएगा की मैं उनसे खुश नहीं हो पाती, और कहीं वो मुझे गलत समझ बैठे तो पता नहीं क्या होगा? हौँ फिर त बता ना... तेरी चत पनिया जाती हैं फिर?"
ऋतु- हाँ फिर में उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसती हैं, उनके लण्ड से हमेशा स्वीट सी महक आती है। मन करता है चूसती ही रहा
अन्- "किस टाइप की महक समझी नहीं मैं?" मैंने पहले भी लिखा हैं मैं अपने लण्ड पर डी.ओ. लगाता हैं।
ऋतु- अब मैं आपको कैसे समझाऊँ? जैसे की भीनी-भीनी खुशबू आती है।
अनु- फिर वो तेरी चूत कब चाटता है? उसका लण्ड जब तैयार हो गया तो वो चूत में नहीं डालता क्या?