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Adultery कीमत वसूल

ऋतु आज जल्दी ही झड़ गई। उसने झड़ते ही मुझे अपनी बाहों में कस लिया। मैं भी अब कहां रूकने वाला था। दो मिनट बाद मैंने भी अपना माल ऋतु की चूत में झाड़ दिया। ऋतु और में दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।

फिर मैंने ऋतु से कहा, "मेरे लण्ड को साफ कर दो.."

ऋतु समझ गई की उसको क्या करना है। उसने अपनी पैंटी से मेरे लौड़े को पोंछकर साफ कर दिया। मैं अब उसकी पैंटी से ही लण्ड को साफ करवाता था। फिर ऋतु में अपने कपड़े पहने, और जाने के लिए तैयार हो गई।

मैंने उसको कहा- "अनु तुमसे कितने साल बड़ी है?"

ऋतु ने कहा- "4 साल... वैसे आपको उनकी उम का क्या करना है?"

मैंने कहा- "कुछ नहीं, वैसे ही पूछ रहा हूँ... अनु के पति क्या करते हैं?"

ऋतु ने कहा- वो जाब करते हैं।

मैंने कहा- चलो अब तुम जल्दी से जाओ, नहीं तो देर हो जाएगी।

ऋतु मुझे बाइ बोलकर चली गई।

ऋतु के जाते ही अंजू मेरे केबिन में आई और बोली- "सर ऋतु का नया मोबाइल आपने देखा है?"

मैं समझ गया इसको ऋतु का मोबाइल देखकर जलन होने लगी है। मैंने कहा- "उसके हाथ में देखा तो था मैंने। पर क्या हुआ?"

अंजू बोली- "सर, उसकी दो महीने की सेलरी से भी ज्यादा का मोबाइल है। उसने कैसे लिया होगा?"

मैंने कहा- "हा सकता है उसको किसी ने गिफ्ट दिया हो?"

अंजू मुझे शक भरी निगाहो से देखते हुए बोली- "कहीं आपने तो गिफ्ट में नहीं दिया उसको?"

मैंने कहा- "मैं क्यों देने लगा?" में अंजू के सामने बिल्कुल अंजान बन गया। फिर मैंने कहा- "अज तुम इन सब बातों में क्यों पड़ती हो? तुमको अगर बैसा मोबाइल पसंद है तो तुम भी ले लेना, इसमें कौन सी बड़ी बात है?"

अंजू एक लंबी सांस लेते हुए बोली- "सर हमारी ऐसी किश्मत कहां की हम इतना महंगा मोबाइल खरीद सकें?"

मैंने उसको कहा- "कुछ पाने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है.."

अंजू मुझे सवालिया नजरों से देखते हुए बोली "मर क्या में मेहनत नहीं करती? मुझे इतने टाइम हो गया आपके आफिस में, आपको भी पता है मैं अपना काम जितनी मेहनत से करती हैं..."

मैंने अंजू से कहा- "अजू मेरी बात का वो मतलब नहीं, जो तुम समझ रही हो..."

अंजू बोली- "प्लीज सर आप मुझे बताइए ना... मुझे किस तरह और मेहनत करनी चाहिए?

मैंने अंजू से कहा- "अभी तो मुझे जाना है। कल मैं तुमको अच्छे से समझाऊँगा..."

अंजू बोली- "ओके सर... कल मैं आपसे जरा समझंगी..."

फिर मैं आफिस से निकाल आया। मैं रात को देर तक सोचता रहा की अंजू खुद मेरे पास आकर मुझे अपनी जवानी आफर कर रही हैं और मैं कितना चुतिया है जो उसको आज तक ट्राई नहीं किया। पहले से किया होता तो आज तक उसकी चूत का मजा ले रहा होता। मैं मन ही मन उसको चोदने का ख्वाब देखने लगा। मुझे अपनी किश्मत पर जाज होने लगा की मेरे पास चत खुद आकर चुदवाने को बोल रही है। फिर इन्हीं सोचो में कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।
 
अगले दिन लंच टाइम से पहले अंजू मेरे केबिन में आई।

मैंने उसको कहा- "आओ अंजू कोई काम है?"

अंजू बोली- "सर, आप कल जो बात कर रहे थे। उसी बात को पा समझने आई हैं."

मैंने कहा- "ही ही याद आ गया." मैंने अज से कहा- "बैठा..."

अंजू मेरे सामने चेयर पर बैठ गई।

मैंने बोलना शुरू किया. "देखो अज, इस दुनिया में हर इंसान की किश्मत अलग होती है। ज़्यादतर लोग अपने हालात से समझौता कर लेते हैं, और जिस हाल में होते हैं उसी को अपनी किश्मत समझ लेते हैं। पर कुछ लोग जिनमें हौसला और हिम्मत होती है, वो अपनी किश्मत को खुद बनाते हैं। अब तुम सोचकर बताओ की इनमें से तुम अपने को किस टाइप का मानती हो?"

अंजू ने कहा "सर मैं अपनी किश्मत को बदलना चाहती हैं पर कैसे? ये मेरी समझ नहीं आ रहा। पर मुझे कुछ बनना है। इसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हैं। मुझे इस लाइफ से नफरत होने लगी है। मुझे इस तरह से घुट घुट कर जीना पसंद नहीं है..."

मैंने उसकी आँखों में आँखें डालते हुए कहा- "तुम आगे बढ़ने के लिए क्या कर सकती हो?"

अंजू में कहा मैं कुछ भी कर सकती है।

में अपनी चेयर से उठा और अंजू के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना हाथ उसके कंधे पर रख दिया। अंजू ने अपना चेहरा घुमाकर मेरी तरफ देखा। मैंने उसको कहा- "मैं तुमको कामयाब होने का रास्ता बता सकता हैं। और मुझे यकीन है की तुम कामयाब हो जाओगी। पर हर कामयाबी की कोई कीमत होती है। अगर बो कीमत चुकाने का होसला तुम में है तो बताओ?" कहकर में दो मिनट चुप रहा।

फिर मैंने अंजू से कहा- "किस सोच में डूब गई?"

अंजू ने सोचते हुए जवाब दिया- "क्या कीमत हैं कामयाब होने की? मैं हर कीमत अदा करने को तैयार हैं.."

मैंने कहा- "गड.." और में फिर जाकर अपनी चेयर पर बैठ गया। मैंने अंजू से कहा- "उठकर खड़ी हो जाओ..

अंजू खड़ी हो गई।

मैंने उसको कहा- "पहले केबिन को अंदर में लाक कर दो.."

अंजू ने कहा "लाक क्यों करना है?"

तम में सबसे बड़ी कमी यही है की तुम हर बात में सवाल करती हो..."

अंजू ने लाक कर दिया।

फिर मैंने अंजू से कहा- "अब जरा अपनी शर्ट के बटन खोला.."

अंजू मुझे ऐसे देखने लगी जैसे की मैंने उसको कोई गाली दी हो। वो बोली- "सर, ये आप क्या कह रहे हैं? मैं आपके सामने अपनी शर्ट के बटन कैसे खोल सकती हैं? में इस टाइप की लड़की नहीं हैं। मैं आपकी इतनी स्पक्ट करती हैं, और आप मुझे इतनी चीप बात बोल रहे हो। आपको कोई गलतफहमी हो गई है सर। में कोई कालगर्ल नहीं हूँ."

मैंने उसको कहा- "तुमने अभी क्या कहा था? की मैं कोई भी कीमत अदा कर सकती हूँ.."

अंजू बोली- "सर, मेरा मतलब वो नहीं था। मैं तो अपने काम से, अपनी मेहनत और लगान से आपका दिया कोई भी काम पूरा करने को कीमत समझ रही थी.."

मैंने कहा- "अंजू, तुम सच में इतनी भोली हो या बनकर दिखा रही हो?"

अब तो अंजू की आँखों में आँसू आ गये, और वो अपने हाथों से अपने चेहरा को टक करके फफक-फफक कर रोने लगी। में समझ चुका था की पासा उल्टा पड़ गया। मैं उठकर उसके पास गया और अंजू को दिलासा देते हए बोला- "अंजू तुम पास हो गई.."

अंजू ने मुझे देखा और बोली- "पास... मतलब?"

मैंने कहा- "अंजू, मैं तुम्हारा टेस्ट ले रहा था तुम उसमें 100% पास हो गई.."

अंजू का रोना बंद हो गया।
 
मैंने उसको कहा- "मैं तुमको क्या इतना कमीना लगता ही तुम अगर ऐसा करने को तैयार हो भी जाती तो भी मैं तुमको नहीं करने देता। पगली में तो सिर्फ ये देख रहा था की तुममें सेल्फ रेस्पक्ट कितनी है?"

अंजू हैरान होते हए बोली- "सर, आप सच बोल रहे हैं?"

मैंने अपने चेहरा पर शराफत की चादर ओट ली। मैंने कहा- "हौं अंजू, मैं सिर्फ तुम्हारा इंतेहन ले रहा था। अगर तुमको बुरा लगा हो तो मुझे माफ करना.."

अंजू मेरे आगे हाथ जोड़ती हुई बोली- "नहीं सर, आप मुझसे बड़े हैं। आप मुझसे माफी नहीं माँगी। मैं ही पागल हूँ जो आपको गलत समझ बैठी। आप मुझे माफ कर दीजिए."

मैंने अजू में कहा- "मैं तुमसे बहुत खुश हूँ। मैं तुम्हारी सैलरी 11000 बढ़ा दूंगा."

अंजू सुनते ही खुश हो गई और बोली- "सर आप इंसान नहीं देवता हैं.."

मैं मन ही मन सोचने लगा- "इसने आज मेरा खेल बिगड़ दिया, वरना में इसको आज दिखाता की मैं कितना कमीना ..."

मैंने कहा- "अब तुम जाओ और इस बात का जिक्र किसी से नहीं करना, वरना कोई गलत ना समझ बैठे..."

अंजू ने कहा "नहीं, मैं किसी से कोई बात नहीं करूंगी... और वो चली गई।

अंजू के जाने के बाद मैं लंबी सांस लेकर सोचने लगा- "आज किश्मत अच्छी थी जो बच गया, वरना ये साली पागल लड़की आज मेरी इज्जत का तमाशा बनवा देती..."

में घर आया तो अपना खराब मह ठीक करने के लिए विस्की पीने लगा। मैंने एक बार पीनी शुरू करी तो पीता हो गया। 4 पंग पीने के बाद मुझे लगने लगा की अब मेरा दिमाग फ्री हआ है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मेरे जैसे खिलाड़ी को काई अनाड़ी समझकर हरा जाएगा। मुझे अपनी हार बर्दाश्त नहीं हो रही थी, पर मैं कर भी क्या सकता था?

मैं अपने को समझाता हआ बोला- "कोई बात नहीं। आज नहीं तो फिर सही। इसको तो मैं अब चोदकर ही दम लँगा। कभी ना कभी मोका जरूर मिलेगा और फिर मैं इसको कुतिया बनाकर चोदूंगा। इसकी शराफत की ऐसी बैंड बाजाऊँगा की साली याद रखेगी....

फिर मझें याद आया को मैंने जो डी.वी.डी. सेब की है उसको तो देखा ही नहीं। मैंने अपना लप्पी आन किया

और डी.बी.डी. देखने लगा। मैंने शुरू से आखिर तक डी.बी.डी. को देखा। अनु के बल खाते जिस्म को देख-देखकर मैं आहे भरता रहा, उसके दिल के आकार के चूतड़ों में थिरकन देखकर होश खोने लगा। मैं दिल ही दिल में सोचने लगा की अन् को में कैसे चोद सकता है? उसकी तो शादी हो चुकी है और वो देल्ही में रहती है। कैसे उसका चोद सकता है? कौन मेरे इस काम में हेल्प कर सकता है? मुझे कोई भी विकल्प नहीं मिला। दिमाग खराब होने लगा था अनु को देख-देखकर। पर जो चीज हासिल नहीं हो सकती उसको कैसे हासिल करग? ये बात समझ में नहीं आ रही थी। यही सोचते-सोचते में सो गया।

कई दिन बीत गये। मैं अपने दिल में अनु को चोदने की तमन्ना लिए हए था। पर कुछ हो नहीं पा रहा था। मुझे अब अन् को चोदना एक ख्वाब जैसा लगने लगा था। अचानक मेरी किश्मत एक बार फिर से मेरा साथ देने लगी। मैं अपने कैबिन में बैठा था।

ऋतु मेरे पास आई और बोली- "सर मुझे घर जाना है.."

मैंने कहा- क्या हुआ?

उसने कहा- "आज मेरी दीदी आ रही है..."

मैंने कहा- कौन अनु?

ऋतु ने कहा- हाँ अनु दीदी और जीजू भी,

मैंने कहा- कब आना है उन लोगों ने?

तु ने कहा- "3:00 बजे तक आ जाएंगे.."

मैंने कहा- किसी खास काम से आ रहे हैं क्या?
 
ऋतु ने कहा- जब से अन दीदी की शादी हुई है तब से वो कभी रहने नहीं आई। अब बो रहने आ रही है।

मैंने कहा- और तुम्हारे जीजू भी यही रहेंगे?

ऋतु ने कहा- नहीं, वो तो सिर्फ उनको छोड़ने आ रहे हैं। दीदी तो 15-20 दिन अब यही रहेंगी.."

मैं मन ही मन खश होने लगा।

फिर ऋतु ने कहा- "जब से अन् दीदी की शादी हुई है वा आईता है कई बार, पर कभी रुकी नहीं। अब वो कुछ दिनों के लिए रहने आ रही है..."

मैंने कहा- "ओके.. तुम जब मन हो चली जाना.."

अत ने मुझे स्वीट सी स्माइल दी और चली गई। मैं फिर से अन के बारे में सोचने लगा। आज फिर में उसकी चूत की याद मुझे सताने लगी। में चूत भी क्या चीज है? सब लड़कियों की होती एक जैसी है, पर हर चूत को हम देखते अलग-अलग हैं। मैं अपने काम में ध्यान देने की नाकाम कोशिश करने लगा। पर मेरा मन अब भी अन् की तरफ भटक रहा था। मैं अब फिर से सोचने लगा की मैं कैसे अन को अपने लण्ड के नीच ला सकता हैं। इसी सोच ने मुझे किसी काम में मन नहीं लगाने दिया। फिर मैंने एक आइडिया सोचा। अगर वो काम कर गया तो मैं अन् को अपने नीचे ले सकता है।

मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।

अगले दिन ऋतु आफिस जरा देर से आई।

मैंने पूछा- "सब ठीक तो है?"

ऋतु बोली- "सारी सर, मैं लेट हो गई.."

मैंने कहा- कोई बात नहीं कल वैसे भी तुम्हारे गेस्ट आए हए थे पर आज तुम मुझे थोड़ा सा थकी लग रही हो।

ऋतु ने कहा- सर, बों में रात को ठीक से सो नहीं पाई इसलिए थोड़ा थकी हैं।

मैंने कहा- रात को नींद नहीं आई?

उसने कहा- "बस ऐसी ही दीदी से बातें करती रही। बातों-बातों में पता ही नहीं चला कब सुबह हो गई.."

मैंने जरा उत्सुक होते हुए पूछा- "ऐसी कौन सी इंटरेस्टिंग बातें हो रही थी?"

उसने कहा- "कोई खास नहीं बस इधर-उधर की..."

मैंने कहा- "फिर भी कुछ पता तो चले हमें भी बताओ.."

ऋतु ने मुझे छेड़ते हए कहा, "आपके बताने की बात नहीं है. उसके चेहरा से साफ लग रहा था की वो कछ छुपा रही है।

पर मैं कहां मानने वाला था। मैंने कहा- "प्लीज बताओं ना..."

तब ऋतु बोली- "वो हमारी पसनल बातें थी.."
 
मैंने कहा- "फिर भी कुछ पता तो चले हमें भी बताओ.."

ऋतु ने मुझे छेड़ते हए कहा, "आपके बताने की बात नहीं है. उसके चेहरा से साफ लग रहा था की वो कछ छुपा रही है।

पर मैं कहां मानने वाला था। मैंने कहा- "प्लीज बताओं ना..."

तब ऋतु बोली- "वो हमारी पसनल बातें थी.."

मैंने उसको अपनी गोद में खींच लिया और उसकी चूचियों को दबाते हए कहा- "अब हमसे भी ज्यादा कुछ परसजल हो गया है?"

ऋतु बोली- “नहीं आपमें कुछ नहीं पाती है। पर वो ना कुछ और बात थी..' कहते-कहते उसके चेहरे पर शर्म

छा गई।

मैंने उसको कहा- "अगर तुम मुझे नहीं बताना चाहती तो मत बताओ। मैं भी अब तुमसे पर्सनल बातें नहीं शेयर करेंगा...

ऋतु ने कहा- "आप तो नाराज हो गये। अच्छा बाबा मैं आपको सब बताती है। पर पहले आप कसम खाइए की ये बातें सिर्फ आप अपने तक ही रखोगे..."

मैंने उसको कहा- "मैं तुम्हारी कसम खाता हूँ.."

ऋतु ने बताना शुरू किया. "कल रात जब जीज चले गये तब दीदी ने कहा- "मैं आज ऋतु के साथ सो साऊँगी.."

इसलिए शिल्पा मम्मी के रूम में सो गई, मैं और दीदी दसरे रूम में सो गये। मैं दीदी से काफी फ्रैंक हैं। दीदी

और में एक दूसरे से सब तरह की बातें शेयर करती हैं। पहले तो दीदी अपनी ही बातें करती रही।

फिर दीदी ने मुझसे कहा- "ऋतु तेरी बाड़ी में एकदम से चेंज आ गया है। मैंने ये बात तभी नोटिस कर ली थी जब तू मेरे घर आई थी। पर वहां मुझे बात करने का मौका नहीं मिला। अब बता क्या कर रही है आजकल?"

मैंने ऋतु से कहा- "फिर तुमने क्या कहा?"

ऋतु बोली- "ना जानें क्यों में दीदी से कुछ छुपा नहीं पाई, और मैंने दीदी को सब बता दिया की कैसे मैं आपसे मिली और फिर क्या-क्या हुआ?"

मैंने कहा- फिर अनु ने क्या कहा?"

ऋतु- "दीदी ने कहा की ये सब मेरी बजह मा है। मेरी शादी के लिए अगर मम्मी ने लोन ना लिया होता तो तुम्हारे साथ ये सब नहीं होता। मेरी बजह से तुम्हारी लाइफ बर्बाद हो गई."

मैंने थोड़ा अपने को संभालते हुए कहा- "फिर तुमने क्या कहा?"

ऋतु- "मैंने कहा की नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है। वो बड़े अच्छे इंसान हैं। उन्होंने मुझे पाने के लिए जो कुछ भी किया बेशक वो देखने में गलत लगता हो। पर वो मुझे जिस तरह प्यार करते हैं, शायद मेरा पति भी नहीं करता....

ये सुनकर दीदी ने मुझसे हैरान होकर पूछा "इसका मतलब तू इस बात से खुश है?"

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मैंने कहा- "हौं। मैं उनसे बहुत खुश हैं। शायद मुझे अपनी लाइफ में उनसे बढ़कर कोई मिल भी नहीं सकता था.." और ऋतु मुझे बड़े प्यार से देखने लगी।

मैंने कहा- बस यही बातें करती रही रात भर या कोई और बात भी हुई?
 
ऋतु बोली- "और भी बहुत बातें हुईं अभी मैं आपको सब बता रही है रुकिये तो..."

उसके बाद दीदी ने मुझसे पूछा- "तुझे सेक्स में मजा आता है या मजकी समझ के करती है?"

मैंने कहा- "पहली बार तो इतना दर्द हुआ था की लगने लगा था जैसे मर जाऊँगी। पर अब मजा आता है..."

दीदी हँसते हए बोली- "पागल पहली बार तो सबको दर्द होता है। पर मजा लेने के लिए थोड़ा सा दर्द तो सहना ही पड़ता है.." फिर दीदी ने मुझसे पूछा- "आपका लण्ड कितना बड़ा है?"

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मैंने उनको जब बताया तो एकदम से उनके चेहरा के भाव बदल गये थे। ऐसा लग रहा था जैसे की उन्हें मुझसे जलन होने लगी हो। फिर अन् दीदी के मुंह से निकला- "हाय राम... इतना बड़ा लण्ड... काश मुझे भी मिलता.."

मैंने दीदी से कहा- "जीजू का छोटा है क्या?"

दीदी ने कहा- "नहीं। इतना छोटा भी नहीं है पर तेरे वाले का साइज इनसे बड़ा है। पर मुझे तो जो मिलना था मिल गया अब क्या होना है?" फिर दीदी ने मुझ से पूछा- "वो तुझं रोज चोदता है या कभी-कभी?"

तब मैंने बता दिया- "मुझं रोज ही चोदते हैं, और कई बार तो दो-दो बार भी हो जाता है, और हम तो अब नई नई स्टाइल में सेक्स का मजा लेते हैं...' कहकर ऋतु ने मुझे शरारत से देखा।

में भी मुश्कुरा पड़ा। मुझे अब्ब मजा आने लगा था। क्योंकी ऋतु अब सब बात बिना शर्माये बता रही थी। मैंने कहा- "फिर उनका क्या रिएक्सन था?"

दीदी ने ये सुनकर आइ: भरी और बोली. "हम तो सिर्फ अपनी टांगों को फैलाकर पड़ जाते हैं, और वो अपना काम निकालकर मुँह फेर के सो जाते हैं। मैं सारी-सारी रात आग में झुलसती रहती हैं, उनको कुछ खबर ही नहीं होती..."

मैंने ऋतु में कहा- "अनु से तुमने ये नहीं पूछा की वो लोग ओरल सेक्स करते है या नहीं?"

ऋतु बोली- "मैंने पूछा था पर वो बोली की जीज सीधा चुदाई करने लग जाते हैं और कुछ नहीं करते। अगर मैं कहूँ भी तो मेरी बात टाल देते हैं। जीजू दीदी की सिर्फ उसी चीज को ही काम में लेते हैं, बाकी उनको कुछ नहीं करना होता...

मैंने कहा- उसी चीज का मतलब?

ऋतु ने शर्माते हए कहा- "जाओ मैं आपसे बात नहीं कर रही। आप मेरे मुँह से क्या-क्या बुलवा रहे हो?"

मैंने कहा- "अच्छा-अच्छा मैं समझ गया। तुम आगे बताओं और क्या कहा अनु ने?"

ऋतु बोली- "फिर मैंने और दीदी ने एक दूसरे की चूचिया दबाड़ और एक दूसरे की...."

मैंने कहा- "साफ-साफ बताओ ना?"

ऋतु बोली- "आप समझ जाओ ना."

मैंने कहा- "मुझे समझ में नहीं आया, तुम साफ बता दो। अब सब बता दिया फिर क्यों शर्मा रही हो?"

ऋतु ने कहा- "हम दोनों ने एक दूसरे की चूत को चाटा..."

मैंने कहा- अन् को मजा आया?
 
मैंने कहा- "मुझे समझ में नहीं आया, तुम साफ बता दो। अब सब बता दिया फिर क्यों शर्मा रही हो?"

ऋतु ने कहा- "हम दोनों ने एक दूसरे की चूत को चाटा..."

मैंने कहा- अन् को मजा आया?

ऋतु ने कहा- "वो तो पागल हो गई थी, बोली की मैंने आज तक इतना सुख कभी नहीं पाया, जितना तूने मुझे दिया है। और आपको पता है मैंने जब दीदी से कहा की मैं तो कुछ भी नहीं करना जानती जितना बो (मेरे लिए) जानते हैं। वो जब मेरी चूत को चाटते हैं तो ऐसा लगता है जैसे मैं स्वर्ग में आ गई हैं.." कहते-कहते उसने अपनी निगाहों को मुझसे चुरा लिया।

मैंने कहा- "तुमने मुझे तो ये बात कभी नहीं बताई की मैं जब तुम्हारी चूत चाटता हूँ, तुम स्वर्ग में चली जाती हो."

ऋतु बोली- "आपको क्या बताऊँ मैं... आपको खुद पता चलना चाहिए..."

मैंने कहा- "हाँ, ये तो मेरी कमी है। चलो अब पता चल गया..." और मैं उसको बोला- "अब मैं तुमको इससे भी ज्यादा मजा दूंगा.."

फिर मैंने कहा- "तुम्हारी दीदी ने फिर क्या कहा?"

ऋतु बोली- "उन्होंने कहा तो कुछ भी नहीं पर आपकी बातें मुझसे सुन-सुनकर उनको कुछ हो जाता था."

मैंने ऋतु से कहा- "ऋतु एक काम करोगी?"

ऋतु ने पूछा- क्या?

मैंने कहा- "आज रात को तुम अपनी दीदी के साथ जब बात करो, तब अपने मोबाइल में रेकार्ड कर लेजा। पर ये बात अनु को पता नहीं चलनी चाहिए की बातें रेकार्ड हो रही हैं.."

ऋतु मेरी बात सुनकर बोली- "सर, ये ठीक नहीं है, मैं ऐसा नहीं करूँगी। दीदी मुझे अपना समझकर मेरे से बात करती हैं, मैं उनको धोखा नहीं दे सकती."

मैंने ऋतु से कहा- "तुम मुझसे ऐसी बात कर रही हो? मैं क्या गैर हैं? मैं तो ये देखना चाहता हूँ की तुम लोग कैसी बात करते हो। मुझे आज तुमने जो बातें बताई हैं, उनको सुनकर ही इतना उत्तेजित हो गया है और जब मैं तुम लोगों की असली आवाज में बातचीत सुनूँगा, तो उसमें कितना मजा आएगा?"

ऋतु बोली- "नहीं सर। में आपको जो भी बात होगी सब आकर बता दूँगी । पर प्लीज... आप मुझे ये सब करने को मत कहिए..."

मैंने ऋतु को एमोशनल ब्लैकमेल करते हुए कहा- "मैं तुमको अपनी बाइफ समझता हैं, और तुम मेरी इतनी छोटी सी बात नहीं मान सकती। तम्हारी इस बात से मझे लग रहा है की तम मुझे अपना हब्बी नहीं मानती। अगर मानती होती तो अपने हब्बी के लिए इतना भी नहीं करती?" मेरा तीर सही निशाने पर लगा।

ऋतु ने हथियार डाल दिए और बोली- "मैं आपकी बात मानकर जैसा आप कहोगे वैसा करेंगी। पर आप कभी ऐसा नहीं कहना..."

मैंने कहा- "अपने मोबाइल की रेकार्डिंग जरा चेक करवाओं मुझे?"

फिर मैंने उसके मोबाइल मैं अपनी आवाज की काई करी और सुनी। मस्त साफ आवाज थी। मैं खुश हो गया। मैंने मन में सोचा मोबाइल की कीमत डबल हो गई।

मैने ऋतु को कहा. "अब तुम जाओ। तुम आराम करोगी तभी रात को बातें करोगी..'

ऋतु चली गई।

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अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो सबसे पहले दिमाग में यही बात आईकी ऋतु में रंकाई की होगी या नहीं? अगर की होगी तो क्या होगा? और फिर इतने में आफिस जाने का टाइम हो गया। मैं जल्दी से आफिस चला गया।

ऋतु अभी तक नहीं आई थी में उसका इंतजार करने लगा। ऋतु को देखकर मुझं चैन मिला।

मैंने उसको अपने केबिन में आते ही पीछे से पकड़ लिया, और उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथ से दबाता हुआ बोला- "मेरी जान आज बड़ी प्यारी लग रही हो.." और उसकी गाण्ड से रगड़ खाकर मेरा लण्ड खड़ा हो गया तो मैंने उसको कहा- "पहले ये बताओं वो काम हुआ या नहीं?"

ऋतु ने अपना मुँह बनाते हुए कहा- "सारी कल मेरी दीदी से बात ही नहीं हो पाई.."

मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- "कल शिल्पा भौहमारे पास सोने की जिद करने लगी। उसके सामनें कैसे बातें होती?"

मैं अपना मन मसोसकर रह गया। मैंने कहा- "मुझे पता था कोई ना कोई गड़बड़ जरूर होगी..."

ऋतु ने मेरी तरफ बड़े प्यार से देखा और कहा- "कोई बात नहीं। आपको वैसे भी सिर्फ सुनकर मजा ही तो लेना

था, वो तो आपको वैसे ही आ रहा है.."

मैंने कहा- कहां आ रहा है?

ऋतु ने मेरे लौड़े को पकड़ते हुए कहा- "इतनी देर में ये मुझे चुभ रहा है इसलिए."

मैंने कहा- "वो तो तुम्हारी गाण्ड की गर्मी से हो गया.." फिर मैंने कहा- "अब मैं तुम्हें कोई काम नहीं कहंगा."

ऋतु ने जब मैरा मूड खराब होते देखा तो ऋतु जोर से हँसने लगी और बोली- "मैं तो आपको बना रही थी..

मैंने कहा- क्या मतलब?

उसने कहा- आपका काम हो गया है।

मैंने खुशी से उसको चूमकर कहा- "सच?"

उसने कहा- "लीजिए सुन लीजिए.."

मैंने उसका सेल लिया और रेकार्डिंग की फाइल को प्ले किया और सुनने लगा।

एकदम से ऋतु में कहा- "जरा रुकिये."

मैंने बंद कर दिया।

ऋतु बोली- "आप इसको सुन लीजिए। मैं बाकी काम निपटाकर आती हूँ.."

मैंने कहा- "बाद में कर लेना..."

ऋतु ने कहा- "इसको सुनने के बाद आप मुझे कोई काम नहीं करने दोगे..."
 
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