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Adultery कीमत वसूल

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कुछ देर इस पोजीशन में चुदाई करने के बाद मैंने अनु से कहा "अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ.."

अनु ने मजाक करते हए कहा- "आप मेरे बजन से दब जाओगे..."

मैंने कहा- "ऐसे बजन से दबने के लिए तो सब खुशी से राजी हो जाएंगे." अन् को मैंने अपने ऊपर ले लिया। अब अनु मेरे ऊपर थी। मैंने उसको कहा- "मेरे लण्ड पर अपनी चत को ऊपर-नीचे करो..."

अनु ने कोशिश ता की पर उसका जिम थोड़ा भारी था इसलिए वो सही से उठ बैठ नहीं पा रही थी।

मैंने उसको कहा- "हो नहीं रहा क्या?"

अन् बोली- "में ऐसे कर नहीं पाऊँगी."

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मैंने ये सुनकर उसकी गाण्ड के नीचे अपने दोनों हाथ से सहारा दे दिया और अपने हाथ से उसको ऊपर उठाया,

और कहा- "अब करो.."

अनु को बस इतनी ही सपोर्ट की जरुरत थी। वो अब सही से करने लगी।

मैंने अब अनु को कहा- "अपनी चूची मेरे मुह में डाल दो.."

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अनु ने अपनी चूची मेरे मुँह के पास कर दी। मैं अब अनु की चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। अनु को इससे और मजा आने लगा। मैंने अब नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। अनु की चूत मेरे लण्ड को पूरा लिए हए थी। में कुछ देर ऐसे ही मशीन चलाता रहा। फिर मैंने अनु की कमर पर हाथ रखकर उसको अपने से चिपका लिया और उसकी चूत में अपना माल झाड़ दिया।

अनु बोली- "मुझे उठजे दो.."

मैंने कहा- "नहीं ऐसे ही पड़ी रहो मेरे ऊपर....

अनु पड़ी रही। थोड़ी देर बाद जब लण्ड देवता को रिलैक्स मिल गया तो मैंने अनु से कहा- "अब उत्तर जाओ...

अनु मुश्कुरा के मुझे किस करते हुए मेरी बगल में लेट गई।
 
अनु पड़ी रही। थोड़ी देर बाद जब लण्ड देवता को रिलैक्स मिल गया तो मैंने अनु से कहा- "अब उत्तर जाओ...

अनु मुश्कुरा के मुझे किस करते हुए मेरी बगल में लेट गई।

मैंने भी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा. "मैंने तुम्हें अपने लण्ड के झूले पर झुलाया, कैसा लगा?"

अनु बोली- "मजा आ गया."

मैंने अपने लण्ड की तरफ इशारा करते हुए कहा "अब इसको साफ तो कर दो.."

अनु इस स्टाइल से कुछ ज्यादा ही थक गई थी, बोली- "प्लीज... दो मिनट रुक जाओ, अभी साफ करती हूँ.."

में मश्कुराकर लेटा रहा। तभी मेरे दिमाग में एक शरारत सझी। में उठकर ऋतु के पास चला गया। मैंने उसको सीधा करके लिटा दिया और उसके होंठों पर अपना लौड़ा रख दिया।

अनु देखकर हँसने लगी, बोली- "ये क्या कर रहे हो?"

मैंने कहा- देखती जाओ।

ऋतु ने धीरे से अपना मुँह खोला और मेरे लौड़े को अंदर ले लिया। ऋतु नींद में मेरे लौड़े को चूस रही थी।

मैंने अनु से कहा- "देखो तुम्हारी बहन नींद में भी मेरे लण्ड को पहचान लेती है। कैसे लण्ड चूस रही है."

अन् हँसने लगी।

इतने में ऋतु बंद आँखों में हू बोली- “क्या हुआ? आप लोग हस क्यों रहे हो?"

मैंने कहा- "तुम नींद में लण्ड चूस रही थी, इसलिए अनु हँस रही थी."

ऋतु ने आँखें खोली और शर्माते हए अन् को कहा "दीदी आप भी इनके साथ मिल गई?"

मैंने ऋतु में कहा- "अच्छा ये बताओं नींद पूरी हो गई या फिर से सोना है?"

ऋतु बोली- "हाँ, अब नींद भाग गई.."

मैंने कहा- "मुझे तो आने लगी है। मैं तो अब साऊँगा..."

ऋतु ने कहा- "मुझे सुलाकर आप दोनों में मजे ले लिए। अब मैं उठी हूँ तो आप दोनों सो रहे हो."

मैंने ऋतु में कहा- "मैं तुम्हें अपनी बाहों में लेकर सुला देता हूँ... फिर मैंने ऋतु को अपनी बाहों में ले लिया। ऋतु मेरे से चिपक कर सोने लंगी, अब ऋतु की तरफ मेरा मुँह था और अनु की तरफ मेरी पीठ थी।

अनु ने मेरी तरफ अपना मुँह करते हुए अपनी टांग मेरे ऊपर रख दी।

ऋतु मुझसे कसकर चिपकी हुई थी। मैं भी अब कुछ करने के मूड में नहीं था। इसलिए ऋतु से चिपक कर चुपचाप सो गया। सुबह करीब 5:00 बजे मेरी नींद खुली, तो मैंने देखा अनु और ऋतु दोना गहरी नींद में थी। मैंने उनको सोने दिया और मैं उठकर बाथरूम चला गया। फ्रेश हुआ और बाहर आ गया। बाहर आकर देखा तो वो दोनों अभी तक वैसे ही पड़ी थी, जिस हाल में में छोड़कर गया था।

मैंने ऋतु को देखा, तो उसकी दोनों टाँगें खुली हुई थी। जिसकी वजह से उसकी चिकनी चूत साफ नजर आ रही थी। फिर मैंने अनु को गौर से देखा। अन् जरा करवट से लेटी थी, उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सांसों के साथ उठ गिर रही थी। मैं बैंड के पास पड़े सोफे पर जाकर बैठ गया। मुझे चाय की तलब लगने लगी थी। मैंने अन् को देखा वो पक्की नींद में थी, अनु की कमर मेरी तरफ थी। मैं अनु के साथ जाकर लेट गया, और उसकी गाण्ड पर अपना लण्ड मटा दिया और अपनी टांग अनु के ऊपर रख दी।

फिर मैंने उसके गाल पर अपना हाथ फेरतें हए प्यार से कहा- "अन् डार्लिंग उठो..."

पर अन् सच में बड़ी पक्की नींद में थी। उसने कोई जवाब नहीं दिया। मैंने अब उसकी चूचियों को सहलाते हए उसको उठाया। अबकी बार अन् की नींद खुल गई। अन् मेरी तरफ घूम गई। अब अनु का चेहरा मेरी तरफ था, पर उसकी आँखें बंद थी। मैंने उसकी तरफ देखा तो उसका चेहरा नींद में बड़ा प्यारा लग रहा था। मैंने उसके गाल पर प्यार से हाथ फिराया तो अन् ने हल्के से अपनी आँखों को खोला, और फिर से मुझे चिपक गई, और कुछ देर तक वा ऐसे ही चिपकी रही।

फिर अनु के मुंह से निकला. "उम्म्म्म... अभी सोने दो ना..."

मैंने उसको कहा- "उठ जाओ, हमें वापिस भी जाना है.."

सुनते ही अनु की नींद एकदम से उड़ गई, मुझे बड़ी मासूम निगाहों से देखकर बोली- "आज ही जाना पड़ेगा?"

मैंने हँसते हुए कहा- "मेरा भी मन जाने का नहीं है, पर मजबूरी है जाना तो पड़ेगा...

अनु बोली- "हाँ ये तो है। आज तो जाना ही पड़ेगा..' फिर मेरे गाल को चूमते हुए कहा- "आप कब उठे थे?"

मैंने उसको कहा- "मुझे तो बड़ी देर हो गई उठे हुए.."

अनु ने पूछा- "आप इतनी देर से क्या कर रहे थे?"

मैंने उसको कहा- "मैं तुम्हें दंख रहा था। तुम नौद में बड़ी प्यारी लग रही थी..."

मेरी बात सुनकर अनु को एहसास हआ की वो तो बिल्कुल नंगी है। अन् को शर्म आ गई। वो मेरे से चिपक कर अपना मुँह मेरे सीने में छुपाकर कहने लगी- "आपको शर्म नहीं आती?" ‘
 
मैंने कहा- "इसमें शर्म की क्या बात है? अब तो हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे हैं.."

अनु ये सुनकर बेड से नीचे उतरकर खड़ी हो गई। अनु ने खड़े होकर अंगड़ाई ली और कहा- "मैं फ्रेश होने जा रही हूँ...

मैंने कहा- "तुम फ्रेश होकर आओ, फिर चाय पीते हैं." अनु के जाने के बाद मैंने ऋतु को उठाया।

ऋतु ने पूछा- "दीदी कहां है?"

मैंने कहा- वो फ्रेश होने गई है, तुम भी जल्दी से उठ जाओ।

ऋतु ने मुझे गुस्से से देखा और कहा- "मेरा तो यहां आना ही बेकार रहा.."

मैंने कहा- "ऐसा क्यों कह रही हो?"

ऋतु ने कहा- "आपने तो सिर्फ दीदी को ही प्यार किया। मुझे तो कुछ किया ही नहीं.."

मैंने उसको प्यार से कहा- "चलो अब कर लेता है."

ऋतु बोली- "अब क्या करना है? रहने दीजिए.."

इतने में अनु आ गई। अनु अब सलवार सूट में थी। अनु ने मुझे देखकर स्वीट सी स्माइल दी। मैंने भी उसको स्माइल से जवाब दिया।

मैंने ऋतु से कहा- "अब तुम भी जल्दी से फ्रेश हो जाओ.."

ऋतु बेमन से उठकर चली गई।

मैंने अनु से कहा- "ऋतु को आने दो फिर चाय का आईर देता है।

अनु ने हुम्म कहा।

मैंने अनु का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- "अनु तुम्हारे साथ गुजारी एक रात कितनी छोटी लग रही है..."

अनु ने कहा- "पता ही नहीं चला टाइम कैसे बीत गया? और आज बापिस भी जाना है. कहते-कहतें अनु मेरे सीने से लग गई और मुझे अपने से चिपकाती हुई बोली- "प्लीज... कुछ करो ना? मुझे आज वापिस नहीं जाना.."

मैंने कहा- "मन तो मेरा भी नहीं है। पर क्या करेम? कोई रुकने की वजह भी तो नहीं है."

अनु ने कहा- "कुछ भी करो, मुझे नहीं पता.."

मैंने उसको कहा- "अब तो काई चमत्कार ही हो सकता है. और शायद कुदरत ने मेरी बात सुन ली।

ऋतु आते ही बोली- "जल्दी से चाय का आईर दीजिए..."

मैंने कहा- "अभी देता है." मैंने अनु से पूछा- "साथ में कुछ और भी आर्डर करं?"

अनु ने कहा- जो आपका मन हो मंगवा लीजिए।

मैंने 3 चाय और बटर टोस्ट का आर्डर दे दिया। फिर हम लोग बातें करने लेगे की बैकफस्ट कहां करना है?

ऋतु ने कहा- मुझे तो गरमा-गरम पराठे खाने हैं।

अनु ने कहा- मुझे भी।

मैंने कहा- चला फिर माल रोड पर चलते हैं। वहां बेकफस्ट करेंगे।

इतने में चाय आ गई हम चाय पीने लगे। मैंने चाय का कप रखते हए कहा- "अब कुछ अच्छा लग रहा है." कहते हुए मैं उठकर बाहर बाल्कनी में चला गया।
 
मैंने 3 चाय और बटर टोस्ट का आर्डर दे दिया। फिर हम लोग बातें करने लेगे की बैकफस्ट कहां करना है?

ऋतु ने कहा- मुझे तो गरमा-गरम पराठे खाने हैं।

अनु ने कहा- मुझे भी।

मैंने कहा- चला फिर माल रोड पर चलते हैं। वहां बेकफस्ट करेंगे।

इतने में चाय आ गई हम चाय पीने लगे। मैंने चाय का कप रखते हए कहा- "अब कुछ अच्छा लग रहा है." कहते हुए मैं उठकर बाहर बाल्कनी में चला गया।

दो मिनट बाद ऋतु और अनु दोनों मेरे पास आ गई।

मैंने कहा- मौसम कितना साफ है आज।

अनु बोली- "भगवान करे, इतनी जोर की बारिश आए की रात तक रूके ही नहीं..."

ऋतु ने अन् को चौक कर देखा और बोली- "दीदी बारिश हो गई तो घूमने कैसे जाएंगे? और वापिस भी तो जाना

-

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मैंने कहा- "मौसम बिल्कुल साफ है, बारिश नहीं आने वाली। चलो तैयार होते हैं.." फिर हम सब गम में आ गये।

मैंने रूम में आते ही अनु से कहा- "चलो एक-एक करके नहाकर आओ..."

अनु ने ऋतु की तरफ देखा तो ऋतु बाली- "सब साथ में नहाते हैं। मजा आएगा.

मैंने कहा- "ऋतु तुमने सच में बदिया आइडिया दिया है। चलो सब साथ नहाते हैं..."

अनु भी खुश हो गई। हम सब बाथरूम में चले गये। वहां जाकर मैंने अपने कपड़े उतार दिया, अपना जाकी भी उतार दिया।

मुझे ये सब करता देखकर अनु ने मुझसे कहा- "आपको शर्म नहीं आती, सबके सामने नंगा होने में?"

मैंने अनु को अपनी बाहों में लेकर कहा- "तुम भी हो जाओ। तुम भी मेरी तरह बेशर्म बन जाओ.."

अनु हँसने लगी, और बोली "ना बाबा ना.. मैं तो कपड़ों में ही नहा लेंगी.."

ऋतु तो अपने कपड़े उतरने लगी थी। उसने अपनी सलवार कमीज उतार दी, ब्रा पैटी उसने पहनी ही नहीं थी। वो बिल्कुल नंगी थी।

मैंने अन् को पकड़कर उसकी कमीज को उतार दिया फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया तो उसकी

सलवार भी उत्तार गई। अनु भी अब नंगी थी।

मैंने कहा- "अब तुम दोनों भी मेरे जैसी नंगी हो। चलो शावर में आ जाओ." और शावर चला दिया अनु और ऋतु दोनों मेरे साथ अब शाबर के नीचे थी हम तीनों एक दूसरे से मस्ती कर-करके नहा रहे थे।

मैं अन् की चूची सहला देता था तो अन् मेरे लौड़ें को पकड़कर सहलाती थी। कभी ऋतु मेरे लण्ड को पकड़ती थी। काफी देर तक हम लोग ऐसे ही मजा करते रहे। इस सबसे हम सब में सेक्स करने की इच्छा जाग गई।

मैंने अनु को कहा- "मेरा लण्ड नहीं चूसोगी?"

अनु ने बिना कुछ कहे लण्ड को मुँह में ले लिया।

मैंने ऋतु से कहा- "तुम भी मेरे लण्ड को शेयर कर लो अनु के साथ."

ऋत् भी नीचे बैठ गई। अब वो दोनों मेरे लौड़े को बारी-बारी से चूस रही थी। मैं जन्नत के मजे ले रहा था। अन् मेरे लौड़े को जब चूसती थी तब ऋतु मेरे टट्टों को सहलाती थी। इस तरह मेरा लौड़ा विकराल रूप में आ गया।

मैंने उन दोनों से कहा- "चलो अब मैं तुमको चोदूंगा.."

ऋतु ने चुटकी लेटे हुए कहा- "दोनों को एक साथ?"

मैंने कहा- "ही.... फिर हम तीनों रूम में आ गये। मैं बेड पर सीधा लेट गया, फिर कहा- "मेरा लण्ड तुम दोनों का झला है, पहले कौन झूला झलेगा?"

दोनों एक दूसरे को देखने लगी। फिर ऋतु मेरे लौड़े पर बैठ गई। मैंने ऋतु की चूत में अपना लण्ड घुसाकर नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए। ऋतु आह ... करने लगी। मैंने जब महसूस किया की ऋतु की चूत में पानी आना शुरू हो गया है, तब मैंने ऋतु से कहा- "अब अनु को आने दो.."
 
ऋतु के हटते ही अनु झट से लण्ड पे अपनी चूत रखकर बैठ गई। अब अनु की चूत में मेरा लण्ड अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने फिर से अनु की गाण्ड के नीचे अपने हाथों से सपोर्ट दे रखी थी। मैं अन् को चोदने लगा।

फिर मैंने अनु से कहा- "तुम अब घोड़ी बनो.."

अन् बैंड पर घोड़ी बन गई। फिर मैंने उसके साथ ऋतु को भी घोड़ी बना दिया। अब वो दोनों अपनी चिकनी चूत को मेरे सामने सजाकर घोड़ी बनी हुई थी। मैं सोचा पहले किसकी चत में लण्ड डालं? मैंने सोचा राउंड के हिसाब से डालता हैं। ऋतु का नम्बर ही बनता है। मैंने ऋतु की चूत में लण्ड डाल दिया।

ऋतु तो कल से लण्ड की प्यासी थी, वो लौड़ा चूत में लेकर मस्त हो गई। मैंने ऋतु की चूत में 20-25 शार मारे इस बीच में अन् की चूत में उंगली डालकर उसको मजा देता रहा था। मैंने अब अपना लण्ड ऋतु की चत से निकालकर अनु की चूत में डाल दिया। अब में ऋतु की गाण्ड को सहला रहा था। दोनों चूतें अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रही थी पर मेरा लण्ड कोई मशीन तो नहीं है।

मैंने अनु से कहा- "में तुम दोनों में से जिसकी चूत में झडॅगा उसको मैं एक बार फिर से चोदूंगा."

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अन् ने मस्ती में कहा- "मेरी चूत में झड़ना..."

ऋतु की आवाज आई- “नहीं मेरी चूत में..."

पर मेरे मन में तो कुछ और ही था। मैंने अन् की चूत में अपना लौड़ा झाड़ दिया।

ऋतु ने गुस्से से कहा- "ये चीटिंग है। आपने जानकर ऐसा किया है.."

मैंने कहा- "नहीं, सच में में कंट्रोल नहीं कर पाया..."

मैंने अनु को कहा- "अब एक बार तुम और चुदागी..."

अनु ने खुश होते हुए कहा- "आई आम लकी.."

लण्ड झड़ने के बाद मैं बेड पर लेटा हआ था अत ने मेरे लौड़े को साफ कर दिया था वो दोनों भी मेरे दाएं-बाएं लेट गई।

मैंने कहा- "एक काम करते हैं। अभी रूम में ही कुछ मंगवा लेते हैं। बाद में बाहर जाकर जो मन होगा वो खाएंगे."

ऋतु ने कहा- "हाँ, ये सही है.." क्योंकी तब तक 9:00 बज चुके थे।

मैंने कहा- तुम लोग अपने कपड़े पहन लो। मैं आईर देता हूँ।

दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए। मैंने रूम सर्विस पर फोन किया और कहा- "3 आमलेट और 3 चाय भेज दो...

हम तीनों अपने आईर का इंतजार कर रहे थे, और बातें कर रहे थे। इतने में आईर सर्व हो गया। मैंने एक

आमेलेट उठा लिया और खाने लगा। अनु और ऋतु भी अपना-अपना आमलेट खाने लगी। आमेलेंट का टेस्ट मस्त था चाय की चुस्किया लेटे हुए हमने ये डिसाइड किया की हम रूम से 12:00 बजे तक निकल जाएंगे।

फिर अनु ने कहा- "मैं अभी आई." और वो उठकर बाथरूम में चली गई।

अनु के बाथरूम में जाते ही मैंने ऋतु को अपनी बाहों में भरकर उसके कान में कहा- "तु तुमने मेरे लिए जो किया है, वो और कोई भी नहीं कर सकता था। तुमने अनु से मुझे मिलवाकर मेरी वो तमन्ना पूरी कर दी, जो मुझे एक ख्वाब लग रही थी.." फिर मैंने ऋतु से कहा- "बस मेरे लिए एक काम और कर दो.."

ऋत् ने कहा- अब कौन सा काम?

मैंने कहा- "मुझे अनु की गाण्ड मारजी है.."

ऋतु ने मुझे चौंकते हुए कहा- "क्या?"

मैंने कहा- "मैं जब अनु की गाण्ड मारूंगा तुम मेरी हेल्प करना.."

ऋतु ने कहा- "वो इतनी आसानी से नहीं मानेंगी। उन्होंने आज तक पीछे से करवाया ही नहीं। आप रहने ही दो...

मैंने कहा- "अच्छा मैंने उसका प्यार से अगर राजी कर लिया तब?"

ऋतु बोली- "आप कोशिश करके देखो। हो सकता है शायद मान जाए..."

मैं बैंड पर अपनी आँखों को बंद करके लेट था, और मेरे दिमाग में सिर्फ अनु का जिस्म घूम रहा था। मैं अनु को जितना भोग चुका था, वो मुझे उतना ही कम लग रहा था। सच में अनु का जिशम था ही ऐसा। उसके गदराए हए जिम की बात ही अलग थी। उसकी मस्त गाण्ड को देखकर मेरे लण्ड में तफान आ जाता था। उसके जिम के उतार चढाब मुझे दीवाना बना रहे थे। मैं अनु को खुद से दूर नहीं होने देना चाहता था। मैं तो अनु को अभी और भोगना चाहता था। मैं अनु के बारे में ही सोच रहा था।

फिर अचानक अनु मेरे पास आई और बोली "आप तो फिर से सो गये..'

मैंने आँखें खोलते हुए कहा- "नहीं तो."

अनु भी मेरे पास आकर लेट गई और उसने मेरे ऊपर अपनी टांग रखकर मुझे अपने जिएम से चिपका दिया अन् की गर्म सांसें मेरी सांसों से टकराने लगी। अन् बोली- "लग रहा है आपका मन जाने का नहीं कर रहा है..."

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मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं है।

अनु बोली- "फिर क्या सोच रहे हो?"
 
मैंने अनु को अपनी बाहों में कसकर भर लिया और उसके होंठों पर किस किया और कहा- "अनु तुमने मुझे अपना दीवाना बना लिया है। मुझे जो सुख तुमने दिया है वो सुख मुझे आज तक नहीं मिला था .."

अनु ने भी मुझे अपनी आँखों को बंद करते हए कहा- "बाब, तुमने भी मुझे वो सुख दिया है जिसकी मुझे कब से चाहत थी."

अनु के मुँह से ये सुनकर मैंने अनु के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा। अनु को भी अच्छा लग रहा था, वो भी पूरे प्यार से अपने होंठों को चुसवा रही थी। मेरे हाथ अब तक अनु की बड़ी बड़ी चूचियों को सहलाने लगे थे। अनु भी मस्ती में आती जा रही थी

मैंने अनु से कहा- "तुम अपने कपड़े उतारों"

अनु ने प्यार से कहा- "बाबू फिर से करोगे क्या?"

मैंने कहा- "हौं जान, जाने से पहले एक बार और कर लं। फिर कब मोका मिले पता नहीं."

अनु के कहा- "आपको तो मस्ती आ रही है, तैयार कब होंगे?"

मैंने कहा- हो जाएंगे पहले तुम कपड़े तो उतारी।

अनु उठकर बेड पर बैठ गई। मैंने झट से अपनी शर्ट उतार दी। मैं सिर्फ अपने जाकी में था। मैंने अनु को देखा बा अभी ऐसे ही बैठी थी

मैंने उसको कहा- उत्तरी ना?

अनु ने मुझे बड़े प्यार से देखते हुए कहा- "खुद उतार लो.."

मैंने उसकी कुरती को उसकी चूचियों तक उठा दिया। अनु ने अपनी बाहों को ऊपर कर दिया। मैंने उसके गले में उसकी कुरती को निकालकर फेंक दिया फिर मैंने कहा- "सलबार भी तो उतरों ना.."

अनु बेड पर खड़ी होकर अंगड़ाई लेते हए बोली- "सिर्फ करना आता है खोलना नहीं आता?"

मैं उसके नाड़े को खोलकर उसकी सलवार को नीचे की तरफ खींच लिया। अब अनु की चिकनी जांघे मेरे सामने थीं। उसकी मोटी-मोटी जांघा में छुपी चूत देखकर, लण्ड में सुरसुरी होने लगी। मैंने अनु की जांघों पर किस करते हुए कहा- "तुम्हारी जांघे कितनी गोरी हैं..."

अनु ने अपनी दाना जांघों का आपस में चिपका कर कहा- "आपको अच्छी लगती है?"

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..

मैंने कहा- हाँ तुम्हारी जाधों को प्यार करने का मन करता है।

अनु ने हँसते हुए कहा- "मुझे खुद को इतनी भारी-भारी लगती है."

मैंने मुश्कुराकर कहा- "नहीं, बिल्कुल भी नहीं। तुम लेट जाओ..." और मैंने उसके ऊपर रजाई डाल दी और खुद भी रजाई में घुस गया। अब हम दोनों रजाई में थे अनु को कसकर मैंने खुद से चिपका लिया।

अनु का गरम जिम मेरे जिएम से रगड़ खाने लगा। अनु की चूचियां मेरे जिम में रगड़ खाने लगी थी। मैं अनु को किस करने लगा, कभी उसकी गर्दन पर, कभी उसके गाल पर, कभी उसके गलें पर किस करने लगा। मेरे हाथ उसकी गाण्ड को सहलाने में बिजी थे। अनु की गाण्ड पर हाथ फेरने में मुझे बड़ा अच्छा लगता है। उसकी गोल मटोल गाण्ड की शेप बड़ी मस्त है। मैं अनु की गाण्ड को सहलाता रहा। उसके दोनों चतड़ों को अलग-अलग करके उसकी गाण्ड की दरार में अपनी उंगली फेरने लगा। मेरी हरकतों से अब तक अनु भी गरम हो चुकी थी।

अनु ने मेरे लण्ड का पकड़ लिया और जोर से दबाते हुए कहा- "मुझे नंगी कर दिया और खुद को टके हए हो.."

मैंने हँसते हुए अपने जाकी को उतार दिया और कहा- "ला कर लो, जो करना है.."

अनु ने मेरा नंगा लौड़ा को हाथ में कसकर पकड़ा और बोली- "इसको तो मैं मरोड़ दगी."

मैंने कहा- "इसपर इतना गुस्सा क्यों हो?"

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अनु ने मुझे चिपटाते हुए कहा- "गुस्सा नहीं, इसपर तो प्यार आ रहा है."

मैंने कहा- "फिर प्यार करो ना.."

अनु मेरे लौड़े को अपनी मुट्ठी में भरकर आगे-पी करने लगी। मैंने अनु की चूची को अपने मह में ले लिया। अनु ने सस्स्सी किया। मैं अनु के निपल को चूसकर उसका दूध पीने लगा। मुझे अब अनु के दूध का चस्का लग | था। अनु भी मुझे जब चूचियां चुसवाती थी तब उसको बड़ा मजा आता था। क्योंकी चूची चुसवाते समय उसकी सिसकियों से अंदाज लग जाता था की उसको कितना मजा आ रहा है।

मैं अनु के दूध को पीते-पीते उसकी गाण्ड के छेद पर अपनी उंगली फेरता रहा। अनु को अब तक समझ में नहीं

आ रहा था की मैं अब उसकी गाण्ड मारने की तैयारी कर रहा हूँ। मैं जानता था की अनु ने कभी गाण्ड नहीं मरवाई, उसके मन में डर होगा। इसलिए मैं उसके डर को धीरे-धीरे खतम करना चाहता था। ताकी अनु पो प्यार से गाण्ड मरवाने का मजा ले सके।

मैंने ऋतु से कहा- "कोई कोल्ड क्रीम देना..."

ऋतु ने मुझसे कहा- "क्या करना है कीम का?"

मैंने कहा- "दो तो पहले..."

ऋतु ने अपने हैंडबैग से मुझे काम निकालकर दी। मैंने रजाई से हाथ निकालकर क्रीम को अपनी पर ले लिया।

अनु ने अब मुझसे पूछा "क्या कर रहे हो?"

मैंने कहा- "अभी पता लग जाएगा..." कहकर अनु की गाण्ड के छेद पर अपनी उंगली रखकर अंदर घुसा दी।
 
अनु चंक पड़ी। उसने अपनी गाण्ड को सिकोड़ लिया, और बोली- "बाब, वहां कुछ मत करो...

मैंने कहा- "मुझे सिर्फ अपनी उंगली डालनी है और कुछ नहीं करेंगा.."

अनु ने अपनी गाण्ड को फिर से टीला छोड़ दिया। मैंने उसकी गाण्ड में उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। मैं अब उसकी चूची चूसते हए अपनी उंगली से उसकी गाण्ड को टौलाल करने लगा। दो-तीन मिनट बाद मुझे लगनें लगा उसकी गाण्ड में मेरी उंगली फ्री आ जा रही है। अनु को भी मजा आने लगा था। मैंने अपनी एक और उंगली भी डालने की कोशिश कि, तो अनु को फिर से दर्द हआ।

अनु ने कहा- "बाबू दर्द होता है..."

मैंने उसके होंठों को चसना शुरू कर दिया। क्योंकी इससे उसको दर्द का एहसास नहीं होगा। मेरी दोनों उंगलियां भी जब फ्री हो गई तब मैंने अनु की चूची से मुँह हटा लिया और उसके पेट पर किस करते हुये उसकी नाभि तक आ गया। हम दोनों के ऊपर रजाई अभी तक थी। मैं अनु की दोनों जांघों के बीच में लेट गया मैंने अपने मुह को अनु की चूत पर रख दिया और ऐसा चूसना शुरू किया की अनु की सिसकियां जब तक पूरे रूम में नहीं गूंजने लगी मैंने अपना मुँह नहीं हटाया।

अनु अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी उसकी चूत लौड़ा मांग रही थी। पर मैं तो अनु की गाण्ड मारने की फिराक में था। मैंने अनु को बेड के कार्नर पर घोड़ी बना दिया और नीचे फर्श पर खड़ा हो गया।

ऋतु मुश्कुराकर सब देख रही थी। उसने मुझं आँख मारी की काम बन गया।

मैंने भी उसको इशारे में जवाब दे दिया। मैंने ऋतु को लण्ड चूसने का इशारा किया, तो ऋतु मेरे पास आकर घुटनों के बल बैठ गई। मैं ऋतु के मुँह में लौड़ा डालकर उसको लौड़ा चुसवाने लगा और साथ-साथ अनु की गाण्ड में उंगली घुसाता रहा। ऋतु की चूसा से लण्ड फुल तैयार हो गया। मैंने ऋतु के मुँह में लण्ड निकाल लिया और अनु की चूत में डाल दिया।

अनु की प्यासी चूत को राहत मिलने लगी। अनु की चूत मेरे लौड़े को एक बार में पूरा गटक गई और अब अनु अपनी गाण्ड को घुमा-घुमाकर लण्ड का मजा लेने लगी।

मैंने ऋतु को फिर से इशारा किया। वो अनु के मुँह के पास जाकर उसके होंठों को चूसने लगी और उसकी चूचियों से खेलने लगी। अनु और ऋतु दोनों एक दूसरे को किस करने लगी, तो मुझे अब पक्का यकीन हो गया की अनु पूरी मदहोशी में है।

मैंने अभी तक अनु की गाण्ड में अपनी उंगली को डाला हए था। मैंने अपनी उंगली बाहर निकाल ली। फिर मैंने

अनु की चत से लण्ड को बाहर निकाला और अनु की गाण्ड पर लगाकर जोर से दबा दिया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा अनु की गाण्ड में आसानी से चला गया।

अनु जोर से चीखी- "बाब नहीं..." अनु ने कहा- "प्लीज वहां मत डालो, दर्द हो रहा है..."

मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा और जोर से दबाया और थोड़ा सा अंदर कर दिया। अनु की दर्द भरी आईईई उईईई

की सिसकियां सुनाई देने लगी। मैंने ऋतु को इशारे से कहा- "अनु का ध्यान दूसरी तरफ कर दे.."

ऋतु ने अनु की चूत को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। मैंने अनु की गाण्ड में अब तक अपने लण्ड को पूरा डाल दिया था।

अनु की गाण्ड पहली बार लण्ड ले रही थी, और अनु की गाण्ड का छेड़ थोड़ा कसा हआ भी था। मैंने अनु के चूतड़ों का हाथ से पकड़कर फैलाते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए। इससे अनु की गाण्ड का छेद घोड़ा और फैल गया। अब अनु की गाण्ड को भी मेरे लौड़े की चोट अच्छी लगने लगी। अनु की सिसकियों में जो दर्द था, वो अब मजे में बदल गया।

अनु अब "आहह... मेरा बाबू उईईई... आह्ह.." करने लगी।
 
अनु की गाण्ड पहली बार लण्ड ले रही थी, और अनु की गाण्ड का छेड़ थोड़ा कसा हआ भी था। मैंने अनु के चूतड़ों का हाथ से पकड़कर फैलाते हुए धक्के मारने शुरू कर दिए। इससे अनु की गाण्ड का छेद घोड़ा और फैल गया। अब अनु की गाण्ड को भी मेरे लौड़े की चोट अच्छी लगने लगी। अनु की सिसकियों में जो दर्द था, वो अब मजे में बदल गया।

अनु अब "आहह... मेरा बाबू उईईई... आह्ह.." करने लगी।

अनु की गाण्ड पर जब मैं चोट मारता था तब उसकी भुलभुले चूतड़ों पर शिरकन आ जाती थी, और उसके चूतड़ों पर चोट पड़ने से पट-पट की आवाज आ रही थी। मुझे ऐसा मजा कभी नहीं आया था। अनु की गरम और टाइट गाण्ड में मेरा लौड़ा खुद को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और फिर मैंने अनु की गाण्ड में अपने माल को छोड़ दिया। अनु की गाण्ड में मेरा लण्ड झड़ने के बाद भी ऐसे ही तना रहा, जैसे झाड़ा ही ना हो।

मेरा मन नहीं हआ की में उसकी गाण्ड से अपने लण्ड को बाहर निकालूं। मैंने अपने लण्ड को अंदर ही पड़े रहने दिया जब तक की लण्ड टीला नहीं पड़ गया। अनु भी घोड़ी बनी रही। जब अनु की गाण्ड में लौड़ा टीला पड़ गया

तो मैंने अनु की गाण्ड में अपने लौड़े को बाहर खींचा, तो पुच्च की आवाज हुई। अनु बैंड पर झटके से पेंट के बाल लेट गई। मैं अपने लण्ड को पकड़कर सीधा बाथरूम में चला गया। वहां जाकर मैंने अपने लण्ड को देखा तो मेरे माल और अनु की शिट का मिक्स्चर लगा हुआ था। मैंने जल चला दिया और लण्ड नीचे रख दिया। लण्ड धोने के बाद मैं तौलिया से पोंछता हुआ बाहर आ गया।

अनु अभी तक वैसे ही लेटी थी। ऋतु उसके चूतड़ों को सहला रही थी।

मुझे देख कर ऋतु ने कहा- "पता है दीदी को अभी तक दर्द हो रहा है.."

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मैं अनु के पास जाकर लेट गया। मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- "अनु डियर सारी... मुझे माफ कर दो। मैंने जानबूझ कर तुम्हें दर्द नहीं दिया.."

अनु पहले तो कुछ नहीं बोली। फिर एकदम से मुझे चिपक गई और मुझे चूमने लगी। बेहतशा चमने के बाद अनु ने मेरे सीने में अपना मुँह छुपा लिया। उसके गरम औंस मुझे सीने पर महसूस हुए।

मैंने अनु का चेहरा ऊपर किया और कहा- "अनु मेरी जान प्लीज... रोना नहीं, नहीं तो मुझे लगेगा की मैंने तुम्हें सलाया है। मैं तो तुम्हें यहां खुशियां देने के लिए लाया हूँ। अगर तुमको मेरी वजह से कोई तकलीफ हुई तो मुझं दोषी महसूस होगा..."

अनु ने सिसकते हए कहा- "नहीं-नहीं, मैं उस वजह से नहीं रो रही। मेरा तो मन वैसे ही भारी हो गया था..."

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मैंजे अनु के आँसू पोंछे और उसके गाल को चूमते हुए कहा- "गुड़ अब जरा स्माइल दो.."

अनु ने स्माइल दी। मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और कहा- "तुम सिर्फ मकराती हई अच्छी लगती हो। रोए तुम्हारे दुश्मन ..."

अनु फिर से मेरे गले से लगकर बोली- "मेरा बाबू कितना स्वीट है."

मैंने अनु को कहा- "अब दर्द कुछ कम हुआ?"

अनु ने कहा- "हो तो अब भी रहा है, पर उतना नहीं जितना पहले था..."

मैंने अनु को कहा- "चलो तुम्हारा बाकी दर्द भी दूर करता हैं... उठकर खड़ी हो जाओ..."

अनु थोड़ा सा मुश्किल से खड़ी हुई।
 
मैंने उसको अपनी बाहों का सहारा दिया और कहा- "चलो तुम्हें टायलेट तक छोड़ आऊँ." सच में अनु के कदम लड़खड़ा रहे थे। मैं अनु को अपनी बाहों में भरकर टायलेट तक ले गया। वहां मैने अनु से कहा- "तुम फ्रेश हो जाओ, मैं बाहर जाता हूँ.."

अनु ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली"मझे छोड़कर मत जाओ..."

मैंने अनु को बड़े प्यार में लेजाकर कमोड पर बैठा दिया, और कहा- "तुम फ्रेश हो जाओ, मैं 10 मिनट में आता हूँ... और मैं बाहर आ गया।

ऋतु ने मुझसे कहा- "पता नहीं दीदी को इतना दर्द क्यों हुआ?"

मैंने हँसते हुए कहा- "तुमको नहीं हुआ था क्या?"

ऋतु शर्माते हुए बोली- "हआ तो था पर ऐसे नहीं जितना दीदी को हो रहा है..."

मैंने कहा- "अनु ने एक तो पहली बार पीछे से करवाया है, दूसरा उसका छेद कुछ ज्यादा ही टाइट है। पर आज के बाद उसको कभी दर्द नहीं होगा.. और मैं अत से बात करने लगा। फिर मुझे याद आया अनु को मैं 10 मिनट में आने को बोलकर आया हैं।

मैं बाथरूम में गया तो अनु तब तक फ्रेश हो चुकी थी और वो मिरर के आगे खड़ी थी। मैंने उसको जाकर पीछे से बाहों में भर लिया और कहा- "अनु जान, तुमको नया जररत है खुद को निहारने की। तुम तो वैसे ही इतनी खूबसूरत हो..."

अनु शर्माकर मेरे कंधे पर अपना सिर रखकर बोली- "सिर्फ आपको ही अच्छी लगती हैं मैं और तो किसी ने नहीं कहा मुझे ...

मैंने कहा- "अनु इसमें तुम्हारी क्या गलती? देखने वाले ही अंधे है.."

अनु खिलखिलाकर हँस पड़ी। मुझे उसके चेहरे पर हँसी देखकर अच्छा लगा।

मैंने कहा- "चलो अब तुम नहा लो फिर चलना भी है...'

अनु बोली- "आप नहीं नहाओंगे क्या?"

मैंने कहा- "तुम्हारा मतलब मैं समझ रहा हूँ.."

कहकर मैंने उसको अपनी बाहों में लिया और शाबर के नीचे खड़ा हो गया। मैंने शाबर चलाया। अनु की हाइट मेरे से कम है, वो मेरे कंधों तक ही आती है। अनु मेरे सीने पर अपना सिर रखें हए थी। मैं उसकी कमर को सहला रहा था।

अचानक अनु बोली- "यहां से जाने के बाद भी आप मुझे इतना ही प्यार करोगे?"

मैंने कहा- तुमको क्या लगता है?

अनु ने कहा- आप बताओ ना?

मैंने कहा- "मैं जिंदगी भर तुमको इतना ही प्यार करता रहूँगा..."

अनु ने कहा- "सच या मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो?"

मैंने अनु से कहा- "मैं कसम तो नहीं खाता, पर जब भी किश्मत में कोई ऐसा मौका आया तो मैं प्रमाणित कर दूँगा की मैं तुमसे कितना प्यार करता है?"

अनु ने मुझसे चिपकते हुए कहा- "आपका कहना ही मेरे लिए काफी है."

हम नहाकर बाहर आए तो मैंने ऋतु में कहा "जाओ तुम भी तैयार हो जाओ.."

ऋतु कहने लगी- "आप दोनों नहा चुके?"

मैंने कहा- "हौं हम दोनों तैयार हैं। तुम भी हो जाओ."

ऋतु भी 15 मिनट में तैयार हो गई। अब हम सब तैयार थे तो रुकने की कोई वजह ही नहीं थी। मैंने अनु से कहा- "अपना-अपना लगेज भी पैक कर लो। कार में रखकर जहां चलना है चलते हैं."

अनु ने कहा- हमारा लगेज पैक है।

मैंने वेटर को बुलाया और लगेज उसको दे दिया। मैंने अनु को कार की चाभी देते हुए कहा- "तुम लोग कार में जाकर सामान रखवाओं। मैं होटेल का बिल में करके आता हैं..." फिर रिसेप्शन पर जाकर बिल पे करने लगा बिल में करके में जब कार तक पहुँचा तो अनु आगे की सीट पर बैठी थी।

मैने अत को देखा तो वो बैंक सीट पर आराम से लेटी हुई थी। मैंने कार स्टार्ट कर दी। कार माल रोड की पार्किंग में पार्क की और कहा- "चलो यहां से पैदल चलते हैं..."

हम लोग माल रोड पर आ गये। वहां हमने मनपसंद बैकफास्ट किया। फिर मैंने अनु और ऋतु से कहा तुम लोगों ने शापिंग ता नहीं करनी?"

दोनों ने मना कर दिया।

मैंने कहा- "फिर यहां रुकने का क्या फायदा चलो घर के लिए निकालते हैं। टाइम से निकलेंगे तो टाइम से पहुँचेंगे..."

अनु ने कहा- हाँ ठीक बात है।

हम जब वहां से चले तो 3:00 बज चुके थे। मैंने अनु से कहा- "कुछ लेना है तो बताओं रास्ते के लिए?"

अनु ने कहा- "मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक ले लीजिए.."

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मैंने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स के पैकेट ले लिए। मैंने कार स्टार्ट की। हम जैसे ही टोल तक आए तो पता चला की रास्ते में कहीं लैंड स्लाइडिंग हो गई है, जिसकी वजह से रास्ता बंद है। मैंने अनु की तरफ देखा।

अनु ने कहा- "अब क्या होगा, कैसे जाएंगे?"

मैंने कहा- "इसमें मेरी तो कोई गलती नहीं है..."

ऋतु बोली- "आज तो हम रुक भी नहीं सकते, मम्मी गुस्सा हो जाएंगी...'

मैंने वहां एक टक्सी वाले से पूछा- "कच तक रास्ता खुलने की उम्मीद है?"

उसने कहा- साब आज तो मुश्किल है।

मैंने अनु से कहा- "हम यहां से वापिस होटेल चलते हैं। जब रोड साफ हो जाएगा तब चलेंगे। इसके सिवा कोई आप्षन ही नहीं था..' मैंने कार वापिस होटेल की पार्किंग में लगा दी। में रिसेप्शन पर गया और उसको बताया की हम लोगों को दो-तीन घंटे यहां रुकना पड़ेगा।

उसको भी लैंड स्लाइडिंग का पता था। उसने कहा- "सर, आप उसी रूम में जाकर आराम कर सकते हैं..."

हम सब फिर से उसी रूम में आ गये। मैंने रूम में आते ही टीवी आन कर दिया और लोकल चैंजेल लगा दिया। उसपर जो न्यूज चल रही थी उसको देखकर ऋतु में मस्ती में झमना शुरू कर दिया और जोर-जोर से चिल्लाने लगी।

उसमें दिखा रहें थे की रोड कल से पहले साफ नहीं हो सकती। मैंने अनु की तरफ देखा तो उसका चेहरा भी खुशी से चमक रहा था। मैंने उसको कहा- "ऋतु को इतनी खुशी हो रही है तुमको नहीं हुई क्या?"

अनु का चेहरा लाल हो गया, उसने कहा- "मुझे नहीं पता.." और वो भी ऋतु के साथ जाकर मस्ती में उछलने लगी। उन दोनों की मस्ती देखकर मुझे भी मस्ती चढ़ने लगी।

मत ने मेरा हाथ पकड़कर खींच लिया, और बोली- "आप भी हमारे साथ सेलीब्रेट करिए."

मैं भी उनके साथ मस्ती करने लगा। अनु ने मुझे देखते हुए कहा- "आपके मन की बात सच हो गई.."

मैंने अनु को कहा- "मैंने तो ऐसा नहीं सोचा था। तुम्हारे मन की बात सच हुई है, तभी तो नाच रही हो.."

ऋतु बोली- "आपने अभी दीदी का डान्स देखा ही कहां है? देख लोगे तो होश उड़ जाएंगे..."

मैंने अनु की तरफ देखा तो अनु ने कहा- "ये तो ऐसे ही बोल रही है."

मैंने अनु में कहा- "प्लीज... मुझे एक बार डान्स करके दिखाओं ना..."

अनु ने शर्माते हुए कहा- "मुझे नहीं आता डान्स करना..."

मैंने कहा- "झूठी, मैंने देखा था तुमको.."

अनु ने कहा- कब?

मैंने कहा- "वीडियो में..."

अनु ने ऋतु की तरफ देखा, तो ऋतु ने कहा- "दीदी करो ना... मैं भी आपके साथ करेंगी."

मैंने कहा- "अनु मेरे लिए करो ना..."

अनु ने अपने दुपट्टे को उतारकर फेंक दिया और, मुझे शर्माते हुए देखा और कहने लगी. "मुझे सच में डान्स नहीं आता, आप क्यों जिद्द कर रहे हो?"

मैंने कहा- "अच्छा जैसे भी आता है वैसे करके दिखा दो.."

अनु बोली- "आप मेरा मजाक बनाओगे...'

...

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मैंने कहा- "नहीं जान... मैं सच में तुमको डान्स करते हए देखना चाहता हैं... मैंने अनु को फिर प्यार से कहा "करो तो सही..."

अनु ने मुँह बनाकर कहा- "ऐसे कैसे कर म्यूजिक के बिना?"

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मैंने टीवी पर म्यूजिक चैनेल लगा दिया। उसपर गाना आ रहा था

मौजा ही मौजा शाम सवेरे हैं, मौजा ही मौजा।

अनु उसपर डान्स करने लगी। पहले तो वो शर्मा रही थी। पर जब ऋतु ने उसका साथ दिया तो अनु रंग में रंग गई। फिर तो उसने में तुमके मारे की लण्ड को बैंकाबू कर दिया। मैं अनु को देखता ही रह गया। अनु की कमर पतली तो नहीं थी पर उसकी लचक सच में गजब की थी। उसके दोनों चतड़ डान्स करते वक्त ऐसे थिरक उठते थे जैसे की बिजली गिरने वाली हो। में उसका डान्स देखता रहा।
 
अचानक ऋतु ने चैनेल चेंज कर दिया उसपर। गाना आने लगा

जब कोई बात बिगड़ जाए,

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ये गाना सुनते ही अनु ने मेरे हाथ को पकड़कर मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर मेरी आँखों में आँखें डालकर मुझे अपने साथ डान्स करवाने लगी। मैं भी पता नहीं इस गाने पर खुद को रोक नहीं पाया। मैं भी उसके साथ डान्स करने लगा। डान्स करते-करते हम दोनों इतनें खो गयें की कुछ खबर ही नहीं रही।

शायद हम दोनों ने स्पेशल ही परफार्म कर लिया इस गाने पर। जैसे ही गाना खतम हआ ऋतु ने जोर-जार से ताली बजानी शुरू कर दी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाया, और अनु शर्माकर बैड पर अपने हाथों से मुँह को छुपाकर बैठ गई और तेज-तेज सांस लेने लगी। उसकी बड़ी-बड़ी छातियां उठने गिरने लगी।

मैंने ऋतु को देखते हुए कहा- "ऋतु सच बताओ क्या हुआ?"

ऋतु ने कहा- "काश आप दोनों का डान्स मैं ऐकाई करके आप दोनों को दिखा पाती। आप दोनों ऐसे परफार्म कर रहे थे जैसे प्रोफेशनल डान्सर करते हैं..."

मैं अनु के पास गया और उसके हाथों को उसके चेहरा से हटाते हुए कहा- "इतना क्यों शर्म महसूस कर रही हो?

अनु ने मेरे सीने में मुंह छुपा लिया।

मैंने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा- "क्या हआ? इतना क्यों शर्मा रही हो? ऋतु तो तुम्हारी तारीफ कर

अनु ने शर्माते हुए कहा- "मुझे नहीं पता."

फिर मैंने ऋतु से कहा, "तुम में बताओं किसने ज्यादा अच्छा डान्स किया?"

अत् बोली- "दोनों ने परफक्ट डान्स किया, जैसे की ये पर फक्ट कपल डान्स था."

अनु फिर में शर्मा गई।

मैंने कहा- "हमें आज यहीं रुकना पड़ेगा। घर फोन करके बता तो दो.."

ऋतु बोली- "ना बाबा ना... मैं तो नहीं करेंगी..."

अनु भी बोली- "मुझे डर लग रहा है.."

मैंने कहा- "चला में ही कर देता हैं.." मैने ऋतु से कहा- "कल झठ बोलने में डर नहीं लग रहा था, आज सच बोलने में डर रही हो?" कहकर मैंने शोभा के सेल पर फोन किया।

शोभा बोली- "आप लोग वहां से चल दिए, कब तक आओगे?"

मैंने कहा- "हम वापिस आ रहे थे पर रास्ते में लैंड स्लाइडिंग की वजह से हमको आज वहीं रूकना पड़ेगा."

शोभा बोली- "ऊऊह्ह..."

मैंने कहा- "आप टीवी पर देखो, सब पता चल जाएगा.. आज हमको यहां रुकना पड़ेगा, मजकी है..."

शोभा ने कहा- "हाँ, अब तो रुकना ही पड़ेंगा..

." वैसे भी शोभा मुझसे ज्यादा बोल नहीं सकती थी। उसने कहा

"ऋतु से बात करवा दीजिए."

मैंने ऋतु का फोन दिया। ऋतु ने भी यही सब बता दिया। फिर फान रखकर बाली- "अब यहां रुकना ही है ता कहीं घूमकर आते हैं..."

मैंने कहा- हाँ चलो, घूमने चलते हैं।

अनु बोली- "मेरे पास तो कोई और ड्रेस ही नहीं बची। मैं तो सिर्फ एक दिन के हिसाब से इस लाई थी..."

मैंने अनु के गले में हाथ डालकर उसकी चूचियों को सहलाया और कहा- "इसमें क्या सोचना, चलो बाजार से खरीद लेते हैं."

अनु मुझे देखते हुए बोली- "आप तो मुझे पूरा नैनीताल खरीद कर दें दोगे..'

मैंने भी हँसते हुए कहा- "काश मेरे बस में होता.."

अनु बाली- "मेरे साइज की ड्रेस मिले ना मिले पता नहीं."

ऋतु बोली- "दीदी चलकर देखते हैं, हो सकता है मिल जाए."

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