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Adultery सेक्स स्लेव भाभी और हरामी देवर

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सेक्स स्लेव भाभी और हरामी देवर

कहानी के पात्रों का परिचय :

[1] विवेक की उम्र 25 साल की है. वह गांव के जमींदार दशरथ सिंह चौहान का बड़ा बेटा है . गोरे रंग का विवेक 5 फिट 7 इंच लम्बा है और आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक है-गाँव में स्कूल में उसने बारहवीं तक की पढाई की है और वह अपने पिता की जमींदारी का कामकाज ही देखता है

[2] विवेक के छोटे भाई गौरव की उम्र 21 साल की है. वह इसी साल शहर से ग्रेजुएशन की पढाई पूरी करके गाँव लौटा है. गौरव की लम्बाई 5 फिट 9 इंच है और वह सांवले रंग का है और देखने में भी औसत लगता है. गौरव का बदन कसरती है और वह काफी हट्टा कट्टा है और उसका व्यक्तित्व काफी रौबीला है

[3] गाँव के जमींदार दशरथ सिंह चौहान की उम्र लगभग 60 साल की है और उनकी पत्नी सुनीता देवी 56 साल की है. गांव में उनकी काफी जायदाद और खेती बाड़ी है और उससे होने वाली मोटी आमदनी से ही उनका घर बढ़िया तरीके से चल रहा है- इनकी कोई बेटी नहीं है और सिर्फ दो बेटे विवेक और गौरव ही हैं.

[4] एक महीने पहले विवेक की शादी शहर की लड़की शिवानी से हुई है. शिवानी 21 साल की है -अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया है. 5 फिट 4 इंच लम्बी शिवानी बेहद गोरे रंग, तीखे नयन नक्श और आकर्षक फिगर वाली है. शिवानी शहर में एक लोअर मिडल क्लास फैमिली से आती है और उसकी पिताजी एक सरकारी नौकरी से क्लर्क की पोस्ट से रिटायर हुए हैं. शिवानी के कोई भाई नहीं है और उसकी एक छोटी बहन रवीना है जो अभी 12 वीं क्लास में पढ़ रही है. पढ़ी लिखी और बेहद ख़ूबसूरत होने की वजह से शिवानी का रिश्ता जमींदार साहब के घर में विवेक के साथ हो गया था.
 
PART-1

आगरा के पास एक गाँव लखनपुर के जमींदार दशरथ सिंह चौहान अपनी पत्नी सुनीता और दो बेटों के साथ रहते थे.

बड़ा बेटा विवेक पिता के जमींदारी और खेती बाड़ी के काम काज में अपना हाथ बंटाता था और दूसरा बेटा गौरव अभी अभी आगरा से बी कॉम की पढाई पूरी करके वापस लौटा था. जबसे गौरव अपनी पढाई पूरी करके वापस आया था, जमींदार साहब ने हिसाब किताब का काम गौरव के जिम्मे लगा दिया था और गाँव में बाहर जाकर जमींदारी और खेती बाड़ी के कामकाज के देखभाल की जिम्मेदारी बड़े बेटे विवेक को सौंप दी थी.

कहानी की शुरुआत आगरा के डिग्री कालेज से होती है जहां गौरव अपनी बी कॉम की पढाई कर रहा था और वहीं पर आगरा की ही रहने वाली एक बेहद खूबसूरत लड़की शिवानी अंग्रेजी के बी ए की पढाई कर रही थी.

शिवानी हालांकि एक बेहद मामूली मध्यम वर्ग परिवार से आती थी लेकिन वह गज़ब की खूबसूरत थी और पूरे कालेज के लड़के उसके दीवाने हुए रहते थे. लेकिन वह किसी को भी भाव नहीं देती थी. उसका इरादा किसी तरह अपनी पढाई पूरी करके किसी सरकारी नौकरी को ज्वाइन करना था ताकि वह अपने परिवार की चिंता को कुछ कम कर सके. उसकी एक छोटी बहन रवीना भी थी जो इस समय 12 वीं क्लास में पढ़ रही थी.

गौरव रोजाना अपने गान से कालेज तक अपनी बाइक से आता जाता था क्योंकि उसके गाँव से कालेज महज़ 15 किलोमीटर की दूरी पर था.

गौरव पढाई लिखे में कोई बहुत बढ़िया नहीं था और बड़ी मुश्किल से जैसे तैसे करके पास हुआ था. उसे कोई नौकरी चाकरी तो करनी नहीं थी बस पिताजी की जमींदारी के कामकाज को ही आगे बढ़ाना था लिहाज़ा उसका ध्यान पढाई लिखाई में काम और कालेज की लड़कियों पर ज्यादा लगा रहता था.

गौरव के साथ उसके 4 दोस्त भी हर समय उसके साथ ही उसकी चापलूसी में लगे रहते थे क्योंकि गौरव जमींदार साहब का बेटा था और वह उन दोस्तों को खिलाता पिलाता रहता था -इसके बदले में वे चारों दोस्त अमित, मोहित, रोहित और पुनीत हर समय उसकी चापलूसी में लगे रहकर कालेज में आती जाती लड़कियों को यह कहकर तंग करते रहते थे कि गौरव जमींदार साहब का बेटा है- जो लड़की उससे दोस्ती करके उसकी बात मान लेगी उसकी लाइफ बन जाएगी.

कालेज में ज्यादातर लडकियां आगरा शहर की ही थीं और इसलिए वह गाँव के गौरव और उसके दोस्तों को ज्यादा भाव नहीं देती थीं.

एक दिन गौरव ने शिवानी को कालेज की कैंटीन से बहार आते हुए देखकर अपने दोस्तों से कहा : यह लड़की बहुत सेक्सी माल है और इसे मैं किसी न किसी तरह अपने चक्कर में फंसाकर ही मानूंगा

उसके चापलूस दोस्तों ने फौरन उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए , अपनी तरफ से गुजरती हुई शिवानी का रास्ता रोककर उससे कहा : कहाँ जा रही है मेरी जान. देख नहीं रही कि जमींदार साहब के बेटे गौरव जी को तेरी खूबसूरती भा गयी है -तू जल्दी से मान जा और उनसे दोस्ती कर ले-तेरी तो लाइफ सेट हो जाएगी

शिवानी उन लोगों की बातों को अनसुना करती हुई जैसे ही आगे बढ़ने लगी, गौरव ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला : आजा मेरी जान चल तुझे सिनेमा दिखाने ले चलता हूँ -हाल में ही फिल्म देखते हुए हम दोनों मस्ती भी कर लेंगे.

शिवानी ने गुस्से से अपना हाथ छुड़ाया और एक थप्पड़ गौरव के गाल पर रसीद करते हुए बोली : तुम जैसे आवारा लोफर लोगों के मैं मुंह नहीं लगना चाहती-तुम्हारी इतनी हिम्मत कैसे हुई कि मुझे इसे तरह से अपनी तरफ खींचकर इतनी बेहूदगी भरी बातें करो.

गौरव के गाल पर जैसे ही शिवानी ने थपप्ड़ लगाया, वह एकदम सकते में आ गया. बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद गौरव अपनी हेकड़ी में रहता था लेकिन उसे एक मामूली मिडिल क्लास फ़ैमिली की लड़की ने चार दोस्तों के सामने थपप्ड़ लगा दिया -इससे पहले कि वह इस थप्पड़ का कोई जबाब दे पाता, उसने देखा कि सामने से कालेज के प्रिंसिपल कुछ प्रोफेसरों के साथ उस तरफ ही आ रहे थे. उन सबको देखकर गौरव और उसके चारों दोस्त वहां से फटाफट रवाना हो गए और शिवानी भी वहां से चली गयी.

उस दिन के बाद से गौरव ने मन ही मन यह तय कर लिया कि किसी न किसी तरह इस घमंडी लड़की को वह अपने जाल में जरूर फँसायेगा और अपनी इस बेइज़्ज़ती का बदला लेगा.

वार्षिक परीक्षाओं के बाद कालेज की छुट्टियां हो गयीं थीं. छुट्टियों के बीच ही शिवानी और गौरव दोनों का रिजल्ट भी आ गया था और वे दोनों ही अपनी अपनी फाइनल ईयर की परीक्षा में पास हो गए थे.

एक दिन शिवानी अपने घर में बैठी हुई थी . अचानक उसने देखा कि उसके घर के आगे कोई बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी है. शिवानी के पापा कुछ समझ पाते कि कौन आया है, उससे पहले कार में से लखनपुर के जमींदार दशरथ सिंह चौहान और उनकी पत्नी सुनीता उतरकर शिवानी के घर में आ गए.

शिवानी के पापा ने उनका स्वागत करते हुए कुछ पूछने की कोशिश की तो उन्होंने खुद ही अपना परिचय देना शुरू कर दिया : मैं पास के गांव लखनपुर का जमींदार दशरथ सिंह चौहान और यह मेरी धर्मपत्नी सुनीता हैं. आपकी बेटी और मेरा बेटा गौरव एक ही कालेज में पढ़ते थे. बेटे ने आपकी बेटी की काफी तारीफ की है. मैं अपने बड़े बेटे विवेक के लिए आपकी सुपुत्री का हाथ मांगने आया हूँ.

शिवानी के मम्मी पापा को मानो फूले नहीं समा रहे थे. जमींदार साहब खुद उनकी लड़की का हाथ अपने बड़े बेटे के लिए मांगने आये थे. चाय नाश्ता आदि करने के बाद शिवानी की शादी की बात उसी समय तय कर दी गयी और अगले एक हफ्ते बाद का शादी का मुहूर्त भी निकालकर चट मँगनी पट ब्याह कर दिया गया और शिवानी अपने शहर से गाँव की हवेली में नयी दुल्हन बनकर आ गयी. शादी के दौरान ही उसे यह मालूम पड़ा कि जिस गौरव को उसने कालेज में थप्पड़ लगाया था, वह उसके पति विवेक का छोटा भाई और शिवानी का देवर है.

हवेली में दो मंजिलें थीं और निचली मंज़िल पर एक बड़ा सा ड्राइंग रूम और चार कमरे थे. पहली मंज़िल पर भी पांच कमरे थे.

जमींदार साहब और उनकी पत्नी निचली मंज़िल पर ही रहते थे और उनके दोनों बेटे पहली मंज़िल के एक एक कमरे में रहते थे. बाकी के कमरे आम तौर पर बंद रहते थे और किसी मेहमान के आने पर उन्हें खोला जाता था.

शिवानी और विवेक पहली मंज़िल के एक बड़े कमरे के आ गए थे. उनके कमरे से साथ वाले कमरे में गौरव रहता था.

शिवानी और विवेक की शादी हुए लगभग एक महीना हो चुका था. गौरव ने एक साज़िश के तहत शिवानी की शादी अपने बड़े भाई से करवाने के लिए अपने मम्मी पापा और बड़े भाई पर यह कहकर दबाब बनाया था कि घर में पढ़ी लिखी सुशील बहू आ जाने से घर में रौनक बढ़ जाएगी और क्योंकि शिवानी लोअर मिडिल क्लास फ़ैमिली से है, वह ज्यादा नखरे किये बिना घर के नियम कायदों को स्वीकार भी कर लेगी. सबको गौरव की यह बात जँच गयी थी और इस तरह यह शादी हो गयी थी.

शिवानी ने यहां आने के बाद यह नोटिस किया था कि जहां उसका पति विवेक काफी सौम्य और सीधा सादा है, उसका देवर गौरव उसके उलट एकदम दबंग, रौबीला और कड़क है

एक दिन जब विवेक और उसके मम्मी पापा किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे और हवेली में सिर्फ गौरव और शिवानी ही अकेले थे ,गौरव ने शिवानी को आवाज़ देकर अपने कमरे में बुलाया : इधर आओ शिवानी. ( गौरव हुए शिवानी लगभग एक ही आयु के थे और एक साथ कालेज में पढ़ भी चुके थे इसलिए गौरव उसे भाभी न कहकर उसके नाम से ही बुलाता था.)

शिवानी उसकी रौबीली कड़क आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकी और उसके कमरे में पहुँच गयी

शिवानी को देखकर गौरव कड़क आवाज़ में उससे बोला : जाओ मेरे लिए एक ग्लास पानी लेकर आओ

शेष अगले भाग में .............
 
PART-2

शिवानी जल्द ही पानी का गिलास लेकर गौरव के कमरे में पहुँच गयी

शिवानी ने इस समय हलके नीले रंग की साड़ी पहने हुई थी

गौरव टी शर्ट और जींस पहने हुए सोफे पर एक पैर दूसरे पैर पर रखा बैठा हुआ था

उसने शिवानी के हाथ से गिलास ले लिया और पानी पीने लगा

शिवानी पानी देकर वापस जाने लगी तो गौरव कड़क आवाज़ में बोला : यहीं खड़ी रहो. लगता है तुम्हे इस घर में रहने के तौर-तरीके मुझे ही समझाने पड़ेंगे

शिवानी उसकी रौबीली आवाज़ सुनकर एकदम रुक गयी और बोली : कैसे तौर तरीके ?

गौरव अब हल्के हल्के मुस्कराते हुए बोला : पहले तो यह समझ लो कि इस घर में मर्दों की बात फाइनल होती है और घर की औरतों को वही सब कुछ करना होता है जो उनसे करने के लिए कहा जाए जब मेरे पास पानी लेकर आयी हो तो यहां तब तक खड़ी रहो जब तक मैं तुमसे जाने के लिए न कहूँ -समझी कि नहीं ?

शिवानी हालांकि गौरव की इस दबंगई से काफी सहम गयी थी लेकिन फिर भी उसने इसका विरोध करते हुए कहा : मुझे क्या तुम लोगों ने अनपढ़ गंवार औरत समझा हुआ है जो मैं तुम्हारे इशारों पर नाचूंगी-आगे से मुझसे इस तरह से बात करने की जरूरत नहीं है- जिस तरह इशारों पर नाचने वाली औरत तुम्हे चाहिए तो तुम खुद अपनी शादी किसी ऐसी लड़की से कर लो जो तुम्हारे इशारों पर नाचती रहे.

गौरव : तेरी जुबान ज्यादा चलने लगी है -हमारे घर में औरतों को मर्दों से ऊंची आवाज़ में बात करने की इज़ाज़त नहीं है -रही बात तुझे इशारों पर नचाने की तो यह समझ ले कि तुझे न सिर्फ इशारों पर नाचना होगा बल्कि मैं जब चाहूँ और जैसे चाहूँ वैसे मुजरा भी करना होगा

इससे पहले शिवानी कुछ और बोल पाती, दरवाज़े पर घंटी बजने लगी और गौरव उससे बोला : चल अब जाकर दरवाज़ा खोल-लगता है भैया और मम्मी-पापा वापस आ गए हैं-तेरी खबर अब मैं बाद में लूँगा

शिवानी वहां से दरवाज़ा खोलने आ गयी और उसके बाद अपने पति विवेक को लेकर अपने कमरे में आ गयी -उसके मन में लगातार गौरव की कही हुए बातें चल रही थीं और वह इस उधेड़बुन में थी कि वह गौरव की उन बदतमीजियों को विवेक को बताये कि न बताये.

दोपहर को खाने के वक्त सब लोग एक साथ टेबल पर बैठकर खाना खा रहे थे. किचिन में खाना बनाने का काम हालांकि मेड करती थी लेकिन खाना परोसने का काम सुनीता देवी और अब शिवानी के जिम्मे आ गया था

शिवानी ने सुनीता देवी से कहा : मम्मी आप भी टेबल पर आकर खाना खाओ. खाना परोसने के काम मैं अकेले ही कर लूंगी

इसके बाद सुनीता देवी भी गौरव,विवेक और अपने पति के साथ खाना खाने बैठ गयीं

गौरव ने खाना खाते खाते अचानक यह नोटिस किया कि टेबल पर पानी नहीं रखा है. उसने तुरंत शिवानी को आवाज़ लगाते हुए कहा : भाभी, पानी देना -बहुत मिर्च लगी है

कुछ देर बाद शिवानी पानी लेकर आ गयी

गौरव ने शिवानी के हाथ से गिलास पकड़ते हुए उसे जमीन पर गिरा दिया और गुस्से में बोला : तुमसे कोई भी काम ढंग से नहीं होता है-जाओ अब पोछा लेकर आओ और फर्श पर पोछा लगाओ

शिवानी हालांकि यह समझ गयी थी कि गौरव ने जान बूझकर पानी का गिलास नीचे गिराया है लेकिन वह कुछ बोले बिना अपने पति विवेक की तरफ देखती हुई किचिन में चली गयी

इतनी देर में विवेक और उसके मम्मी पापा खाना खाकर टेबल से उठ चुके थे लेकिन गौरव अभी भी टेबल पर ही बैठा हुआ था

शिवानी पोछा लेकर वापस आयी और फर्श पर नीचे बैठकर पोछा लगाने लगी. घर में पोछा लगाने का काम वैसे तो सुबह सुबह मेड करती है लेकिन इस समय तो मेड जा चुकी थी

पोछा लगाते लगाते बार बार शिवानी की साड़ी का पल्लू नीचे गिर रहा था और गौरव को शिवानी के डीप कट ब्लाउज में से उसके मस्त मस्त मम्मे साफ़ नज़र आ रहे थे

शिवानी पोछा लगाकर उठने लगी तो गौरव ने उसे रोक दिया : उठो मत-मेरे पैरों पर भी पानी गिरा है-उन्हें भी साफ़ करो

शिवानी ने आस पास देखा कि वहां कोई और तो नहीं है और अपने हाथ में लिए पोछे से वह गौरव के पैरों को भी साफ़ करने लगी

गौरव ने शिवानी की तरफ हँसते हुए देखा और बोला : तुम्हारी असली जगह यहीं पर है-मेरे पैरों में. जितनी जल्दी तुम्हे यह बात समझ आ जाएगी उतना ही तुम्हारे लिए बेहतर होगा. चलो अब उठ जाओ और खाना खा लो

यह कहकर गौरव अपने कमरे की तरफ चला गया

खाना खाते खाते शिवानी के मन में तरह तरह के विचार आ रहे थे और जिस तरह से उसके साथ घटनाएं हो रही थीं, उसे गौरव की कही गयी बातें ध्यान आ रही थीं कि इस घर में सिर्फ मर्दों की चलती है और औरतों को सिर्फ उनका कहा मानना होता है. उसे ध्यान आने लगा कि जब से वह इस घर में आयी है, उसे सबसे ज्यादा डर गौरव से ही लगता है क्योंकि वह हमेशा ही उसे ज़लील करने की कोशिश में लगा रहता है-आज उसने सोचा कि वह इस बारे से खुलकर अपने पति विवेक से बात करेगी ताकि रोज रोज का यह झगड़ा हमेशा के लिए बंद हो सके.

शेष अगले भाग में ............
 
PART-3

दोपहर का खाना खाने के बाद सभी लोग अपने अपने कमरों में आराम कर रहे थे. शिवानी भी अपने पति विवेक के साथ कमरे में आराम कर रही थी. उसके मन में तरह तरह के ख़याल आ रहे थे. शादी के बाद से ही उसके देवर गौरव का उसके प्रति जो रवैया था, उसे लेकर अब वह बहुत टेंशन में आ गयी थी और जल्द ही उसका हल निकालना चाहती थी.

उसने पहले सोचा कि गौरव के बारे में अपने पति विवेक को सब कुछ बता दे लेकिन फिर उसे लगा कि कहीं बात और न बिगड़ जाए. फिर उसे अचानक ख्याल आया कि उसने कालेज में गौरव को उसके दोस्तों के सामने एक थप्पड़ जड़ दिया था और हो सकता है गौरव अपने उसी अपमान का बदला लेने के लिए उसे तंग कर रहा हो. हालांकि जब शिवानी ने थप्पड़ मारा था तो गलती गौरव की ही थी लेकिन गौरव शायद उस सार्वजानिक अपमान को अभी तक भूला नहीं है और उसका बदला ही शिवानी से ले रहा है. यही सब सोचते हुए उसने फैसला कर लिया कि वह अपने उस थप्पड़ के लिए गौरव से जाकर माफी मांग लेगी.

उसने पलटकर बिस्तर पर देखा. विवेक को नींद आ गयी थी. विवेक को बिस्तर पर सोता छोड़कर शिवानी उठकर पास वाले गौरव के कमरे में आ गयी. गौरव उस समय बिस्तर पर टी शर्ट और शार्ट पहने लेटा हुआ था और अपने मोबाइल पर पोर्न वीडियो देखते हुए अपने खड़े हुए लण्ड पर हाथ फिरा रहा था.

अचानक वहां पर शिवानी को देखकर वह सकपकाकर बिस्तर से उठ गया और मोबाइल को एक साइड में रखते हुए शिवानी से बोला : हाँ बोलो, मैंने तो तुम्हे नहीं बुलाया फिर यहां किसलिए आयी हो ?

शिवानी ने इस समय फ्रंट ज़िप वाला एक सफ़ेद रंग का गाउन पहना हुआ था जिसमे से उसकी खूबसूरत फिगर एकदम साफ़ नज़र आ रही थी

शिवानी : मैं आपसे माफी मांगने आयी हूँ

गौरव : कौन सी माफी

शिवानी : मैंने उस दिन कालेज में आपको आपके चार दोस्तों के सामने थप्पड़ मारा था उसके लिए माफी मांगने आयी हूँ

शिवानी की बात सुनकर गौरव का लण्ड और ज्यादा कड़क हो गया. उसे लगा कि बहुत दिनों बाद चिड़िया खुद अपना शिकार करवाने उसके पास आ गयी है

गौरव बोला : पर मैं भला तुम्हे क्यों माफ़ करूंगा ? तुमने मेरे चार दोस्तों के सामने मुझे थप्पड़ मारकर मुझे ज़लील किया और अब चुचाप अकेले में माफी मांगने चली आयी ?

शिवानी : आप मुझे जो चाहे सजा दे सकते हैं लेकिन प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिये

शिवानी ने जिस तरह से गिड़गिड़ाना शुरू किया उसे देखकर गौरव का हरामीपन एकदम जाग उठा था. वह तो कब से ऐसे ही मौके की तलाश में था.

गौरव : देखो वैसे तो तुमने जो हरकत की है, वह माफी के लायक नहीं है फिर भी मैं तुम्हे एक शर्त पर माफ़ करने के लिए तैयार हूँ

शिवानी : मुझे सभी शर्तें मंजूर हैं, बस मुझे माफ़ कर दीजिये

गौरव : आज के बाद से तुम मेरा हर हुक्म मानोगी-मैं जो भी कहूँ वह तुम करोगी और बिना किसी झिझक और हिचकिचाहट के करोगी ? बोलो यह शर्त मंजूर है ?

शिवानी कुछ सोचने के बाद बोली : पर मैं तो आपकी हर बात अभी भी मान ही रही हूँ -फिर इस शर्त की क्या जरूरत है

गौरव : शर्त की जरूरत इसलिए है ताकि मुझे बार बार तुम्हे यह याद न दिलाना पड़े कि तुम अब मेरी गुलाम हो -तुम्हारे दिमाग में यह बात हर समय रहनी चाहिए कि विवेक तुम्हारा सिर्फ पति है लेकिन तुम मेरी गुलाम हो-अंग्रेजी में कहें तो तुम अब मेरी "सेक्स स्लेव" हो. बोलो तुम मेरी सेक्स स्लेव बनने के लिए तैयार हो या नहीं ?

शिवानी : लेकिन मैंने तो आपको एक थप्पड़ एक ही बार मारा था -एक बार आप जो भी कहेंगे मैं वह कर दूंगी -आप कहकर देखिये

गौरव भी मस्ती में आ गया था : ठीक है-यह बताओ कि भैया कमरे में क्या कर रहे हैं

शिवानी : वह तो सो रहे हैं-इसलिए मैं यहां आ गयी हूँ

गौरव (शार्ट के अंदर अपने तने हुए लण्ड पर हाथ फिराते हुए) : अब तुम ऐसा करो अपना गाउन खोलकर अपना खूबसूरत बदन मुझे दिखाओ

शिवानी को गौरव से इस तरह की बात की उम्मीद नहीं थी-वह उसकी बात सुनकर एकदम स्तब्ध रह गयी और बोली : मैं तुम्हारी भाभी हूँ -तुम होश में आकर बात करो और यह सेक्स स्लेव वगैरा अपनी वाइफ को बनाना -तुम्हारी शादी की बात भी लगता है जल्दी ही करनी पड़ेगी

इससे पहले कि गौरव और कुछ बोलता, अचानक पास वाले कमरे से विवेक की आवाज़ आयी : कहाँ हो शिवानी

शायद विवेक जाग गया था. शिवानी तुरंत ही कमरे से बाहर चली गयी और गौरव दुबारा से अपने बिस्तर पर लेटकर मोबाइल में पोर्न फिल्म देखने लगा

शेष अगले भाग में
 
PART-4

उस दिन के बाद से शिवानी दुबारा गौरव से अकेले में नहीं मिली थी क्योंकि उसे गौरव के गंदे इरादों के बारे में पता चल गया था की वह उसे अपनी "सेक्स स्लेव" बनाकर अपनी हवस पूरी करना चाहता है. गौरव भी उससे बदला लेने के लिए उस पर अपनी दबंगई और रौब दिखा दिखाकर उसे परेशान करता रहता था.

शिवानी और विवेक की शादी को अब लगभग 6 महीने हो चुके थे-दोनों की सेक्स लाइफ बढ़िया चल रही थी. विवेक शिवानी की खूबसूरत जवानी और उसकी सेक्सी फिगर का दीवाना था और रात के अलावा जब भी मौका लगता वह शिवानी को जी भरकर पेलता रहता था-विवेक के मम्मी पापा इस बात की उम्मीद लगाए बैठे थे की जल्द ही उनके घर में एक नए मेहमान का आगमन होगा लेकिन जब 6 महीने के बाद भी शिवानी ने कंसीव नहीं किया (गर्भ धारण नहीं किया) तो उनकी चिंता बढ़ने लगी.

उन्होंने एक दिन शिवानी से ही पूछना शुरू कर दिया : बेटा तुम लोग मुझे दादी कब बना रहे हो

उसी समय विवेक भी वहीं पर आ गया और अपनी मम्मी की बात सुनकर कहने लगा : अरे मम्मी जल्दी क्या है -बच्चे तो भगवान की देन हैं. जब भगवान की कृपा होगी तो आपको नाती भी मिल जायेगा

उसी समय विवेक के पापा दशरथ सिंह और गौरव भी वहां आ पहुंचे और कहने लगे : हमें भी तो मालूम पड़े कि तुम लोगों में क्या बातचीत चल रही है

यह सुनते ही सुनीता देवी बोलने लगीं : मैं तो इन लोगों से यही जानना चाह रही थी कि इस आंगन में नन्हा मुन्ना मेहमान कब तक आने वाला है

दशरथ सिंह भी मामले की गंभीरता को समझ रहे थे क्योंकि 6 महीने शादी को हो चुके थे और अभी तक शिवानी कंसीव भी नहीं हुई थी

दशरथ सिंह ने गौरव की तरफ देखकर कहा : तुम्हारे दोस्त की मम्मी लेडी डॉक्टर हैं -क्या नाम है उनका ?

गौरव : डॉक्टर उर्मिला देवी, मेरे दोस्त पुनीत की मम्मी हैं-आप कहें तो मैं उनसे मिलने का समय ले लेता हूँ -भैया और भाभी जाकर उनसे मिल लेंगे

दशरथ सिंह : हाँ मेरा ख्याल यही है कि लेडी डॉक्टर से चेक अप करा लिए जाए ताकि अब और देरी न हो और अगर किसी इलाज़ की जरूरत हो तो वह समय रहते कर लिया जाए

विवेक : देखो यह सब काम बाद में कर लेंगे. मुझे फिलहाल कल जरूरी काम से लखनऊ निकलना है -वहां से आने के बाद देखेंगे कि डॉक्टर से कब मिलना है

सुनीता देवी : फिलहाल ऐसा करते हैं कि बहूरानी को तो दिखा देते हैं- यह गौरव के साथ डॉक्टर साहिबा के यहां चेक अप कराने चली जाएगी

विवेक : ठीक है, तुम लोगों की जो मर्ज़ी हो सो करो -मुझे सफर की तैयारी करनी है-मैं चलता हूँ

यह कहकर विवेक वहां से चला गया

गौरव ने डॉक्टर उर्मिला से बात करके उनसे कल सुबह दस बजे का समय ले लिया था

सब लोग इस बात पर राजी हो गए थे कि अगले दिन सुबह दस बजे शिवानी अपने देवर गौरव के साथ लेडी डॉक्टर उर्मिला देवी के यहां अपना चेक अप कराने जाएगी

इस बातचीत के बाद सब लोग अपने अपने काम में व्यस्त हो गए. गौरव अचानक बदले इस घटनाक्रम से बेहद उत्साहित और उत्तेजित था और थोड़ी थोड़ी देर बाद अपने लण्ड पर हाथ फिरा फिराकर आने वाले समय की कल्पनाओं में खोया हुआ था. वह इंटरनेट पर जिस तरह की फ़िल्में और कहानियां देखता-पढता रहता था, उनकी वजह से उसकी हरामी पंती बहुत ज्यादा बढ़ गयी थी -शादी के बाद से ही वह शिवानी को अपने जाल में फंसाकर उसे अपने इशारों पर नचाने के सपने देख रहा था लेकिन शिवानी उसकी लाख कोशिशों के बाबजूद उसे अपने ऊपर हाथ तक नहीं रखने दे रही थी.

गौरव को अब मेडिकल चेक अप के बहाने इस बात का सुनहरा मौका मिला था कि वह अपनी सभी हसरतों को पूरा कर ले -उसने इसके लिए पक्का प्लान भी बना लिया और लेडी डॉक्टर उर्मिला देवी के बेटे पुनीत (जो कि उसका पक्का दोस्त भी था) को भी अपने प्लान में पार्टनर बना लिया.

विवेक को सुबह 6 बजे लखनऊ के लिए निकलना था इसलिए वह सफर कि तैयारी करने के बाद खाना खाकर जल्दी ही सो गया लेकिन बिस्तर पर उसके साथ लेटी हुई शिवानी अभी तक जाग रही थी और दिन भर कि बातों के बारे में सोचते हुए कल होने वाले मेडिकल चेक अप को लेकर भी चिंता में थी कि पता नहीं डॉक्टर अपनी रिपोर्ट में क्या बताये

उधर गौरव भी अपने दोस्त पुनीत से फोन पर कल होने वाले मेडिकल चेक अप के बारे में लगातार बातचीत कर रहा था

रात के 10 बजे गौरव अचानक विवेक के कमरे में आया और शिवानी से बोला : भैया से कुछ जरूरी बात करनी है-उन्हें जगा दो

शिवानी ने विवेक को जगा दिया और विवेक गौरव के साथ उसके कमरे में आ गया : बताओ क्या बात है गौरव

गौरव : उर्मिला आंटी से मेरी बात हुई है-उन्होंने कहा है की एक शीशी में आपके वीर्य का सैंपल भी मैं उनके पास लेकर जाऊं ताकि वह उसे भी चेक करवा सकें -इसके बाद आपको उनके पास जाने कि जरूरत नहीं पड़ेगी

विवेक गौरव की बात समझ गया और बोला : ठीक है -मैं शीशी में वीर्य भरकर शिवानी को दे दूंगा

इसके बाद विवेक कमरे में आया और शिवानी से बोला : यह नयी मुसीबत डॉक्टर ने खड़ी कर दी है- इस समय मेरा मूड भी नहीं है और उसने मेरे वीर्य का सैंपल कल मंगवाया है -तुम ऐसा करो एक खाली शीशी लेकर आओ और मेरा मूड बनाओ

शेष अगले भाग में
 
PART-5

शिवानी एक खाली शीशी लेकर आयी और विवेक को देते हुए कहने लगी : मैं आपकी बात समझी नहीं-आप कह रहे हैं कि मूड बनाओ-मूड कैसे बनाते हैं ?

विवेक : तुम तो यार शहर की पढ़ी लिखी मॉडर्न लड़की हो और इतना भी नहीं जानतीं कि पति का मूड कैसे बनाया जाता है -चलो मैं तुम्हे बताता हूँ-फटाफट अपने कपडे उतारो और मेरे सामने आकर खड़ी हो जाओ

विवेक इस समय एक बनियान और बॉक्सर अंडरवियर पहने सोफे पर अपनी टाँगे फैलाकर बैठा हुआ था

शिवानी को अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन उसने अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए-उसने इस समय फ्रंट ज़िप वाला गाउन पहना हुआ था. उसने गाउन की ज़िप नीचे खिसकाई और धीरे धीरे उसे अपने बदन से अलग करके साइड में रख दिया-अब उसके बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी बची थी.

विवेक ने शिवानी को देखकर अंडरवियर के अंदर अपने लण्ड पर हाथ फिराया और बोला : ब्रा और पैंटी भी उतारो-पूरी तरह नंगी हो जाओ

शिवानी थोड़ी हैरान थी क्योंकि विवेक जिस तरह से आज व्यवहार कर रहा था, वह उसने पहले कभी नहीं किया था लेकिन क्योंकि वह उसका पति था शिवानी ने बिना कुछ ज्यादा सोचे समझे अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार फेंकी और विवेक के पास जाकर खड़ी हो गयी

बिना किसी भूमिका के विवेक उससे बोला : जल्दी से नीचे घुटनों के बल बैठो और मेरे लण्ड को अपने मुंह में लेकर उसे खड़ा करो

यह कहकर विवेक ने अपने अंडरवियर में से अपने लण्ड को बहार निकल लिया जो इस समय लगभग शिथिल अवस्था में था

शिवानी एकदम स्तब्ध थी. उसने पहले कभी किसी का लण्ड अपने मुंह में नहीं लिया था और विवेक भी आज उससे पहली बार ही उसका लण्ड मुंह में लेने के लिए कह रहा था.

शिवानी : क्या यह जरूरी है जी ? मैंने पहले कभी किसी का लण्ड अपने मुंह में नहीं लिया है -मुझे यह अच्छा भी नहीं लगता है

विवेक (कड़क आवाज़ में ) : तुम्हे क्या अच्छा लगता है क्या नहीं लगता है-उसका कोई मतलब नहीं है- अगर मैं कह रहा हूँ तो तुम्हे मेरा हुक्म मानना ही होगा. चलो अब जल्दी से अपना मुंह खोलो और जो मैं कहता हूँ वह करती जाओ

शिवानी अब बेबस थी. वह विवेक की टांगों के बीच में घुटन के बल बैठ गयी और उसके लण्ड को अपने हाथों में लेकर उस पर हाथ फिराने लगी -जैसे ही उसने विवेक के लण्ड पर अपना हाथ फिराना शुरू किया, उसका साइज बढ़ने लगा और वह कड़क भी होने लगा

विवेक : जल्दी से इसे अपने मुंह में लो और इसे अपनी जीभ और होंठों से सहलाओ

शिवानी ने उसके लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और अपनी जीभ को उसके लण्ड के इर्द गिर्द घुमाकर उसकी मालिश करने लगी

विवेक को अब मुख मैथुन का मज़ा आने लगा और उसका लण्ड भी उसके मुंह में एकदम कड़क होकर काफी लम्बा हो गया था

अपने लण्ड को उसके मुंह में अंदर बाहर करते हुए विवेक शिवानी के दोनों गालों पर बीच बीच में हल्के हल्के चपत भी मारता जा रहा था क्योंकि ऐसा करने पर उसे कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था.

जब विवेक को लगा कि उसके लण्ड की पिचकारी अब छूटने वाली है तो उसने लण्ड को उसके मुंह से बाहर निकाल लिया और अपने लण्ड की पिचकारी को खाली शीशी के अंदर छोड़ दिया. अब खाली शीशी उसके वीर्य से पूरी तरह भर गयी थी. शीशी को बंद करके उसने एक तरफ रख दिया और शिवानी से बोला : अब अपनी जीभ से मेरे लण्ड को साफ़ करो

शिवानी अपनी जीभ से सहला सहला कर उसके लण्ड को चाट चाट कर साफ़ करने लगी और शिवानी की इस मालिश से विवेक का लण्ड एक बार फिर से कड़क हो गया और वह बोला : जाओ अब बिस्तर पर जाकर लेटो. तुम्हारे साथ बाकी के मज़े अब बेड पर ही लिए जाएंगे.

शिवानी बिस्तर पर जाकर सीधी लेट गयी -वह पूरी तरह निर्वस्त्र थी. विवेक बिस्तर पर आया और उसके मम्मों को दबाने-सहलाने लगा -उसके हाथ सरकते हुए उसके चिकने समतल पेट पर आये और फिर उसने शिवानी के चिकने योनि प्रदेश पर अपना हाथ फिराते हुए उससे कहा : टाँगे खोलो

शिवानी ने जैसे ही अपनी टाँगे खोलीं, विवेक ने अपने खड़े लण्ड को उसकी योनि में डाल दिया और शिवानी के खूबसूरत बदन को अपने बदन के नीचे दबाते हुए उसकी तबियत से चुदाई करने लगा.

इसी तरह मौज़ मस्ती करते करते दोनों को कब नींद आ गयी, इसका उन्हें तब पता चला, जब सुबह 4 बजे अलार्म की घंटी बजने लगी

दोनों फटाफट उठकर विवेक के लखनऊ जाने की तैयारी करने लगे क्योंकि उसे हर हाल में 5 बजे निकलना था और 6 बजे की लखनऊ की ट्रेन पकड़नी थी.

शेष अगले भाग में
 
PART-6

विवेक एक हफ्ते के लिए लखनऊ चला गया था

शिवानी का देवर गौरव आज सुबह से ही शिवानी के मेडिकल चेक अप के बारे में सोच सोचकर अपना लण्ड सहलाये जा रहा था

ठीक साढ़े नौ बजे गौरव शिवानी को अपनी बाइक पर बिठाकर डॉक्टर उर्मिला देवी के क्लिनिक की तरफ चल दिया. गौरव ने एक टी शर्ट और जींस पहनी हुई थी और शिवानी ने एक नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी.

बाइक चलते चलते शिवानी के मस्त मस्त नरम मुलायम मम्मे गौरव की पीठ से बार बार टकरा रहे थे. शिवानी ने अपने एक हाथ को पहले से ही गौरव की कमर में डालकर उसे कसकर पकड़ रखा था ताकि झटका वगैरा लगने पर वह बाइक से नीचे न गिर जाए

जल्द ही वे दोनों क्लिनिक पहुँच गए. क्लिनिक काफी पुराना और बड़ा था और वहां काफी कर्मचारी काम करते थे.

क्लिनिक पर गौरव का दोस्त और डॉक्टर उर्मिला का बेटा पुनीत इंतज़ार कर रहा था

शिवानी ने पुनीत को देखा तो उसे याद आया कि यह तो वही है तो कालेज में गौरव को थप्पड़ मारते समय भी मौजूद था.

पुनीत गौरव से बोला : मम्मी को विधायक जी के यहां किसी अर्जेंट काम से जाना पड़ गया है और वह शाम तक ही वापस आएंगी लेकिन तुम्हारा केस वह अपने जूनियर डॉक्टर अनुराग को ठीक से समझाकर गयी हैं -आओ मैं तुम्हे डॉक्टर अनुराग से मिलवा देता हूँ.

यह कहकर वे लोग एक केबिन में डॉक्टर अनुराग के पास आ गए

पुनीत डॉक्टर अनुराग से बोला : इनके बारे में मम्मी ने आपसे बात की थी. यह मेरा दोस्त गौरव है और यह इसकी भाभी हैं-शिवानी

यह कहकर पुनीत वहां से चला गया

अब गौरव ने सबसे पहले वीर्य से भरी शीशी डॉक्टर अनुराग को देते हुए कहा : यह भैया के वीर्य का सैंपल है

डॉक्टर अनुराग ने वीर्य का सैंपल लैब में टेस्टिंग के लिए भिजवा दिया और गौरव से बोला : अब आप अपनी समस्या बताइये

डॉक्टर गौरव लगभग तीस साल का गेहुँआँ रंग का ६ फिट लम्बा था-गेहुआं रंग का होने के बाबजूद भी वह काफी आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक लग रहा था और उसने डॉक्टरों वाला सफ़ेद कोट पैंट और अंदर एक सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी.

गौरव ने अब डॉक्टर अनुराग को बताना शुरू किया : दरअसल भैया भाभी की शादी को ६ महीने हो चुके हैं और मम्मी-पापा को यह चिंता है कि अभी तक भाभी के बच्चा होने का कोई लक्षण नज़र नहीं आ रहा है -यह मामला सीरियस इसलिए है कि अगर यह पता चलता है कि भाभी को बच्चा नहीं हो सकता है तो हम लोगों को शायद यह शादी तोड़कर भैया की दूसरी शादी भी करनी पड़ सकती है

शिवानी गौरव की बातों को बड़े ध्यान से सुन रही थी और अब वह एकदम घबरा सी गयी थी क्योंकि उसे लग रहा था कि अगर उसके अंदर कोई कमी निकली कि वह बच्चा पैदा नहीं कर सकती तो उसका तलाक हो जाएगा और फिर ऐसी हालत में न तो उसका कहीं दूसरा विवाह होगा और उसकी छोटी बहन रवीना की शादी में भी अड़चन आ सकती है

अनुराग ने सारी बात सुनकर गौरव से कहा : इनके हस्बैंड यानी कि आपके बड़े भाई कहाँ हैं- उन्हें भी यहां आना चाहिए था

गौरव : उनको किसी जरूरी काम से एक हफ्ते के लिए लखनऊ जाना पड़ गया है. उर्मिला आंटी को हमने यह बता दिया था और इसीलिए हम शीशी में भैया के वीर्य का सैंपल लेकर आये हैं.

अनुराग : चलिए कोई बात नहीं. हमें इस चेक उप के लिए घर के किसी एक भरोसेमन्द आदमी की जरूरत होती है-इनके पति नहीं हैं लेकिन आप इनके देवर तो हैं ही-आपसे ही काम चला लेंगे -आइये मेडिकल चेक अप रूम में चलते हैं

शिवानी को सब कुछ बड़ा अजीब सा लग रहा था -वह तो यह सोचकर आयी थी कि चेक अप कोई लेडी डॉक्टर करेगी लेकिन यहां तो यह ३० साल का हट्टा कट्टा पुरुष डॉक्टर उसका चेक अप करने जा रहा था

(शिवानी इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि यह सारा का सारा नाटक उसके हरामी देवर गौरव का रचा हुआ था जिसे यह पहले से ही मालूम था कि डॉक्टर उर्मिला अगले तीन दिनों के लिए गाँव से बाहर किसी जरूरी काम से गयी हुई हैं-गौरव ने पुनीत सहित अपने चारों दोस्तों के साथ मिलकर क्या साज़िश रची थी इसका खुलासा अभी इसी कहानी में हो जाएगा)

मेडिकल चेक अप रूम काफी बड़ा था- वहां एक मेडिकल बेंच, एक मेडिकल बेड, चार पांच स्टील के स्टूल और कुर्सियां पडी हुई थीं -इसके अलावा काफी मेडिकल उपकरण भी वहां रखे हुए थे.

डॉक्टर अनुराग ने कुछ पेपर्स शिवानी के आगे रखते हुए कहा : आपका मेडिकल चेक अप शुरू करने से पहले आप इन पेपर्स पर अपने साइन कर दीजिये. यह एक जरूरी फॉर्मेलिटी है-हम किसी की मर्ज़ी के खिलाफ उसका मेडिकल चेक अप नहीं कर सकते हैं

शिवानी ने उन पेपर्स पर साइन कर दिए और उन्हें डॉक्टर अनुराग ने अपने बैग में रख लिया

इसके बाद गौरव और अनुराग एक एक कुर्सी पर बैठ गए

शिवानी भी कुर्सी पर बैठने लगी तो डॉक्टर ने उसे रोक दिया : नहीं नहीं आप खड़ी रहिये-आपका तो चेक अप होना है

शिवानी को बहुत अजीब सा डर भी लग रहा था और अब उसे बहुत शर्म भी आ रही थी कि इस कमरे में गौरव और अनुराग उसके साथ क्या करने वाले हैं

अनुराग कुछ देर तक शिवानी को देखता रहा दिर अचानक बोला : अपनी साड़ी उतारो मैडम

शिवानी एकदम सकते में आ गयी थी. उसने गौरव की तरफ देखकर कहा : यह क्या बेहूदगी है ? ऐसे भी कहीं मेडिकल चेक अप होता है-मुझे नहीं कराना इस तरह का चेक अप

शिवानी इस उम्मीद में थी कि गौरव उसकी कुछ मदद करेगा लेकिन उसने देखा कि गौरव और अनुराग दोनों के लण्ड उनकी पैंट में खड़े हो गए थे और वे दोनों अपने अपने लण्ड अपने हाथ से सहलाने में लगे हुए थे

गौरव तो एकदम बदमाशी पर उतर आया था. वह शिवानी से बेहद रौबीली आवाज़ में बोला : ज्यादा नखरे मत दिखा साली -अपने सारे कपडे उतार और हाथ ऊपर करके खड़ी हो जा

डॉक्टर अनुराग : देखो अगर आप सहयोग नहीं करोगी तो यह मेडिकल चेक अप नहीं हो पायेगा -अभी तो सिर्फ शुरुआत हुई है और आप अभी से इतनी घबरा शर्मा रही हैं-अभी तो पता नहीं आगे और क्या क्या होने वाला है-इस तरह का मेडिकल चेक अप इतना आसान थोड़ी है -चलो अब गुड गर्ल बनो और एकदम नंगी होकर दिखाओ

शिवानी अभी भी खड़ी हुई थी और लगातार कह रही थी : प्लीज़ मेरे कपडे मत उतरवाओ....मुझे इस तरह ज़लील मत करो...मुझे बहुत शर्म आ रही है...मुझे छोड़ दो घर जाने दो....

अब अनुराग ने गौरव की तरफ देखकर कहा : ऐसा करो आप खुद उठकर इनके कपडे उतारने में मदद करो-पहली पहली बार किसी अजनबी के सामने कपडे उतारने में सभी को शर्म आती है-भाभी को भी आ रही है -आप तो इनके देवर हैं-आपका इन पर पूरा हक़ है-आप इनके कपडे उतारने में भी मदद करें और उसके बाद आपको इनके मेडिकल चेक अप में भी मदद करनी पड़ेगी

शेष अगले भाग में
 
PART-7

गौरव तो अब पूरी मस्ती में था. उसकी जींस के अंदर उसका लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था. अपने लण्ड पर हाथ फिराता हुआ वह कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया और सामने खड़ी शिवानी की तरफ जाने लगा.

शिवानी अभी भी गिड़गिड़ा रही थी : मुझे नंगा मत करो प्लीज़...

गौरव ने एक झटके में ही शिवानी की साड़ी के पल्लू को पकड़कर खींचा और उसकी साड़ी को उसके बदन से अलग कर दिया

इसके बाद गौरव शिवानी के पीछे जाकर उसके नितम्बों और पीठ से सटकर खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथों से ब्लॉउज में बंद उसके मम्मों को दबाने लगा. गौरव की जींस के अंदर खड़ा लण्ड शिवानी के सुडौल नितम्बों में धंसा जा रहा था

सामने बैठा अनुराग अपनी आँखों पर यकीन ही नहीं कर पा रहा था. ब्लॉउज और पेटीकोट में शिवानी का बदन बेहद सेक्सी लग रहा था और उसकी फिगर एकदम मस्त और लाजबाब लग रही थी. अब तक गौरव ने उसकी ब्लाउज़ और ब्रा को उतार फेंका था और उसके हाथ उसके पेटीकोट के नाड़े तक पहुँच गए थे. कुछ ही देर में शिवानी का पेटीकोट और उसकी पैंटी भी उसके बदन से अलग हो चुकी थी और वह एकदम निर्वस्त्र अवस्था में गौरव की गिरफ्त में कसमसा रही थी.

शिवानी को पूरी तरह से नंगा करने के बाद जब गौरव वापस अपनी कुर्सी की तरफ आने लगा तो अनुराग ने उसे रोक दिया : आप वहीं पर रहिये,आपका असली काम तो अब शुरू होगा. दरअसल अब हम मेडिकल प्रोसीजर के हिसाब से यह जांचने की कोशिश करेंगे कि अलग अलग हालातों में इनके बदन पर क्या प्रतिक्रिया होती है और यह पुरुष द्वारा की गयी किसी भी क्रिया से उत्तेजना महसूस करती भी हैं या नहीं. कभी कभी ऐसा भी होता है कि लडकियां लेस्बियन ( समलैंगिक) होती हैं और उन पर पुरुष द्वारा किये गए सेक्स का कोई असर ही नहीं होता है और ऐसी हालत में वे बच्चे पैदा कर सकेंगी, यह सोचना भी मूर्खता ही होगी.

गौरव दुबारा से शिवानी के पास चला गया और अनुराग की तरफ देखने लगा

अनुराग ( गौरव से) : आप पहले की तरह इनके बदन के पीछे जाकर इनसे सटकर खड़े हो जाओ और अपने दोनों हाथों से इनके मम्मों को सहलाना शुरू करो.

गौरव तो यही चाहता था. शिवानी अपने दोनों हाथों से अपने मम्मे और अपने योनि प्रदेश को छिपाने का प्रयास कर रही थी लेकिन गौरव ने उसके नितम्बों पर जोर की चपत लगाते हुए कहा : हाथ ऊपर उठाकर खड़ी रहो और मेडिकल चेक अप में डॉक्टर साहब का सहयोग करो.

शर्म और ज़लालत से शिवानी का चेहरा एकदम लाल हो रहा था -अनजान डॉक्टर अनुराग के सामने वह एकदम निर्वस्त्र अवस्था में खड़ी हुई थी और उसका देवर गौरव उसके बदन से चिपककर उसके सीने की गोलाइओं को मसल रहा था

अनुराग भी मस्ती में था. अपने लण्ड पर हाथ फिराते हुए वह शिवानी की तरफ देखते हुए बोला : लौंडिया तो चिकनी है और एकदम मस्त माल है- इसके बच्चा क्यों नहीं हो रहा है, यह अपने आप में एक जांच का विषय है. तुम लोगों ने ठीक ही किया है जो इसे सही समय पर मेरे पास ले आये अब मैं इसकी ठीक से जांच करवाकर ही वापस भेजूंगा.

कुछ देर तक अनुराग जब शिवानी के मम्मों को मसल चुका तो अनुराग उससे बोला : अब ऐसा करो कि इसके बदन पर अलग अलग हिस्सों में कम से कम 25 बार किस करो

गौरव ने तड़ातड़ शिवानी के बदन पर एक के बाद एक चुम्बनों की बौछार सी लगा दी. उसके चेहरे, होंठों, उरोजों, चिकने पेट, नाभि प्रदेश और केले जैसी चिकनी जांघों को गौरव ने जी भरकर अपने चुम्बनों की बौछार से भिगो दिया.

अनुराग की अपनी हालत भी काफी ख़राब हो रही थी और उसका लण्ड भी बेकाबू होता जा रहा था लेकिन उसे अपनी जांच अभी जारी रखनी थी.

अनुराग ने अब गौरव से कहा : इस चिकनी लौंडिया को मेरे नज़दीक लेकर आओ

गौरव शिवानी के बदन से चिपके चिपके ही उसे धकेलते हुए अनुराग के एकदम नज़दीक लेकर आ गया -उसके हाथ अभी भी उसके मस्त मम्मों पर फिसल फिसल कर उसकी गोलाइओं को नाप रहे थे.

अनुराग ( शिवानी से ) : चल अपनी टाँगे खोल

शिवानी ने शर्म से अपनी ऑंखें अब बंद कर लीं थीं-उसके अपनी टाँगे खोल दीं

अनुराग ने अपने हाथ को उसके चिकने योनि प्रदेश पर सहलाना शुरू कर दिया और हँसते हुए कहने लगा : साली रंडी एकदम सेक्स बम है -भैया की ही गलती है जो इसे अभी तक माँ नहीं बना पाए-इतनी मस्त लौंडिया को तो कोई नामर्द भी छू ले तो इसे गर्भवती हो जाना चाहिए.

शिवानी ने जैसे ही अपनी टाँगे खोलीं, वैसे ही गौरव ने मौका देखकर अपनी जींस के अंदर से अपना खड़ा लण्ड बाहर निकाला और उसके दोनों नितम्बों में बीच घुसेड़ दिया

अनुराग गौरव से बोला : इसकी गांड मारते मारते अपनी एक उंगली इसके मुंह में डाल दो और उसे चुसवाओ

गौरव इस समय पूरी उत्तेजना में था. वह अपने हाथ को शिवानी के मुंह तक ले गया और अपनी उंगली को उसके होंठों के बीच में डालते हुए कडककर बोला : चूस इसे

अब अनुराग शिवानी से बोला : इस उंगली को चूसते समय यह समझकर चूस कि तू यह उंगली नहीं, मेरा लण्ड चूस रही है

शिवानी इस समय एक कैदी की तरह एकदम बेबस और लाचार खड़ी हुई थी. उसके दोनों हाथ ऊपर थे. उसके मुंह में गौरव की उंगली और पिछवाड़े में उसका लण्ड घुसा हुआ था. उसके आगे के पूरे नंगे बदन पर डॉक्टर अनुराग तबियत से दबा सहला कर अपना मन बहला रहा था

शेष अगले भाग में
 
PART-8

गौरव ने शिवानी के मुंह से अपनी उंगली निकाल ली थी. वह बेहत उत्तेजना में था और अपने क्लाइमेक्स पर पहुँच गया था. अपने लण्ड को उसने बाहर निकाला और कड़क आवाज़ में शिवानी से बोला : नीचे बैठ और मेरा लण्ड अपने मुंह में लेकर साफ़ कर

शिवानी फर्श पर घुटनों के बल बैठ गयी और अपने देवर के लण्ड को मुंह में लेकर उसे अपनी जीभ से साफ़ करने लगी

अनुराग अपने हाथों को शिवानी की नंगी चिकनी पीठ पर फिराता हुआ बोला : साली लण्ड चूसने में तो एकदम एक्सपर्ट लगती है

अचानक इण्टरकॉम की घंटी बजने लगी. अनुराग से फोन उठाया और कुछ सुनने के बाद बोला : ठीक है, रिपोर्ट लेकर अंदर आ जाओ.

शिवानी एकदम घबराई शरमाई कभी अनुराग की तरफ और कभी गौरव की तरफ देख रही थी-कोई और अनजान आदमी इस कमरे में कोई रिपोर्ट लेकर आने वाला था और वह इस तरह ने निर्वस्त्र हालत में अपने देवर का लण्ड साफ़ कर रही है

इससे पहले कि शिवानी कुछ और सोच या बोल पाती, कमरे का दरवाज़ा खुला और एक काला सा लड़का ( जो कि क्लिनिक में लैब असिस्टेंट था ) अंदर घुस आया और शिवानी की तरफ देखते हुए एक लिफाफे को अनुराग के हाथ में देकर वापस जाने लगा. लड़का लगभग 18-19 साल का था और देखने में एकदम औसत दर्ज़े का था.

अनुराग ने वापस जाते हुए लड़के को रोका : रमेश अभी रुको. मुझे रिपोर्ट पढ़ने दो.

लड़का वहीं रुक गया.

शिवानी अभी भी ऑंखें बंद किये हुए फर्श पर घुटनों के बल बैठी हुयी थी और गौरव के लण्ड को अपने मुंह में लेकर उसे साफ़ करने के बाद उस पर अपनी जीभ फिराए जा रही थी. गौरव मुख मैथुन की पूरी मौज़ ले रहा था

गौरव और शिवानी को इस तरह के एक्शन में देखकर लैब असिस्टेंट रमेश का लण्ड भी उसकी पैंट के अंदर काफी कड़क हो गया था जिसे उसे अपने हाथ से संभालना पड़ रहा था. अनुराग के चेहरे का रंग रिपोर्ट पढ़ने के बाद एकदम बदल गया था -रिपोर्ट में साफ़ लिखा था कि विवेक के वीर्य में जो शुक्राणु हैं, उनसे बच्चे पैदा नहीं किये जा सकते हैं. हालांकि विवेक नार्मल सेक्स कर सकता है लेकिन उसका वीर्य इस काबिल नहीं है जिससे बच्चे पैदा हो सकें.

अनुराग ने मन ही मन सोचा कि गलती लड़के में हैं क्योंकि उसका वीर्य इस काबिल नहीं है जो बच्चा पैदा कर सके और हम यहां अपने मज़े के लिए लड़की को पेले जा रहे हैं.

अब तक शिवानी गौरव का लण्ड चूस कर उसे एक बार फिर से साफ़ कर चुकी थी और गौरव पूरी तरह से संतुष्ट होकर अपने लण्ड को अंदर करके अपनी जींस पहन चुका था.

शिवानी अभी भी फर्श पर शर्म और ज़लालत में डूबी अपनी ऑंखें बंद किये हुए बैठी थी

अनुराग के साथ साथ लैब असिस्टेंट रमेश का लण्ड भी शिवानी को इस हालत में बैठा देखकर बेकाबू हुए जा रहा था

अनुराग ने रमेश की तरफ देखा : जाओ दरवाज़ा अंदर से बंद करके वापस आओ

रमेश : जी सर

कमरे के दरवाज़े को अंदर से बंद करके रमेश दुबारा से अनुराग के पास आ गया

गौरव अब अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ था और अनुराग के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहा था

अनुराग बोला : अब हम फाइनल टेस्ट करेंगे -इसके बाद ही यह कह सकेंगे कि यह चिकनी लौंडिया बच्चे पैदा कर सकती है या नहीं

अनुराग (रमेश की तरफ देखकर) : चलो मैडम को उठाकर स्टूल पर बिठाओ

रमेश की मौज़ लग चुकी थी. उसने शिवानी के बदन को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे फर्श पर से उठाकर खड़ा कर लिया और फिर उसे स्टील के गोल रिवॉल्विंग स्टूल पर बिठा दिया

अनुराग : अब मैडम के पीछे खड़े होकर इनके दोनों मम्मों को अपने हाथ में इस तरह से उठाओ ताकि यह नीचे की तरफ न लटकें

रमेश ने शिवानी के उरोजों पर हाथ फिराते हुए उन्हें नीचे से अपने हाथों में इस तरह पकड़कर थाम लिया मानो वह उन्हें नीचे गिरने या लटकने से रोक रहा हो

अनुराग रमेश की तरफ देखकर बोला : एकदम परफेक्ट . ऐसे ही पकडे खड़े रहो.

यह कहकर अनुराग अपनी कुर्सी से उठा और शिवानी के नज़दीक आकर अपने लण्ड को अपनी जींस से निकालकर उसे शिवानी के चेहरे पर फिराने लगा

शिवानी के दोनों गालों पर चपत लगाते हुए अनुराग कड़क आवाज़ में बोला : ऑंखें खोल साली और मेरी तरफ देख

अनुराग अब रमेश की तरफ देखकर भी मुस्कराने लगा : क्यों भाई मज़ा आ रहा है ना ? अपने लण्ड को मैडम की पीठ पर रगड़ रगड़ कर मज़ा लेता रह -खूबसूरत लडकियां मज़े लेने के लिए ही होती हैं -अनुराग की बात सुनकर रमेश की हिम्मत भी अब बढ़ गयी और वह भी अपने लण्ड को शिवानी की पीठ पर रगड़ रगड़कर मज़े लेने लगा.

शिवानी के खूबसूरत चेहरे पर काफी देर तक अपने लण्ड को घुमाने के बाद अनुराग ने एक बार फिर से उसके दोनों गालों पर चपत लगाई और बोला : चल अब अपना मुंह खोल और इसे अपने मुंह में लेकर चूस

शिवानी ने फटाफट अनुराग के लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और उसे अपने होंठों के बीच दबाकर उस पर अपनी जीभ को गोल गोल घुमाकर उसकी मालिश करने लगी

रमेश अपने दोनों हाथों से उसके नरम मुलायम मक्खन जैसे मम्मों को थामे खड़ा हुआ था और उसका लण्ड उसकी पैंट में से उसकी चिकनी पीठ पर जबरदस्त रगड़ा खा रहा था-उसे लग रहा था कि उसकी पिचकारी कहीं ऐसे ही न छूट जाए

जब तक शिवानी ने अनुराग के लण्ड को चूसा और उसे अपनी जीभ से साफ़ किया तब तक रमेश की पैंट में उसके बेकाबू हो रहे लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी थी -वह अभी भी उसके दोनों मम्मों को थामे हुए था

अनुराग अपनी पैंट की ज़िप बंद कर चुका था और अपनी सीट पर बैठते हुए रमेश से बोला : ठीक है रमेश, अब इसके मम्मे छोड़ दो

रमेश जैसे ही शिवानी को छोड़कर स्टूल से हटकर अनुराग के सामने आया तो अनुराग को पता चला कि रमेश की क्या हालत हुई है

अनुराग मुस्कुराकर रमेश से बोला : तेरी कोई गलती नहीं है- यह लौंडिया है ही इतनी खूबसूरत कि अच्छे अच्छों की पैंट गीली हो जाती है -चल कोई बात नहीं, अपने लण्ड को इस चिकनी से साफ़ करवा ले

शिवानी एकदम चिल्लाकर बोली : नहीं.......अब और नहीं. कितना ज़लील करोगे मुझे मेडिकल चेक अप के नाम पर ?

अनुराग : अभी तो कुछ हुआ ही नहीं है मैडम, आप ऐसे ही भड़क रही हो

अनुराग रमेश से फिर बोला : चल रमेश ....अपना लण्ड इसके मुंह में डालकर इससे साफ़ करवा

रमेश को तो बस अनुराग का इशारा ही काफी था. उसने अपनी पैंट में से अपना भीगा हुआ लण्ड निकाला और शिवानी के दोनों गालों पर उसे फिराने लगा -काफी देर तक उसके चेहरे पर अपने लण्ड को घुमाने के बाद उसने अपने लम्बे और काले लण्ड को उसके होंठो पर रखा और बोला : इसे अंदर लेकर अपनी जीभ से साफ़ करो

रमेश ने अपनी जींस और अंडरवियर भी नीचे खिसका दिया था और वह बड़ी आक्रामकता के साथ शिवानी के मुख मैथुन का आनंद ले रहा था -शिवानी को उसके अंडकोष और उसके बालों में से अजीब तरह की दुर्गन्ध आ रही थी और वह बार बार उसके लण्ड को अपने मुंह में से निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिन रमेश लगातार उसके गालों पर चपत मार मार कर बोल रहा था : अंदर कर रंडी और इसे ठीक से चूस

गौरव और अनुराग दोनों ही शिवानी के इस मुख मैथुन का आनंद भी ले रहे थे और उसकी अपने अपने मोबाइल में वीडियो भी बना रहे थे

जब रमेश ने भी शिवानी से अपना लण्ड चुसवाकर उसे साफ़ करवा लिया तो अनुराग उससे बोला : अब इस लौंडिया को पकड़कर मेरे पास लाओ -इसका फाइनल टेस्ट अब किया जाएगा

रमेश शिवानी के पीछे उसकी पीठ और नितम्बों से चिपककर खड़ा हुआ और इसे धकेलते हुए अनुराग के सामने ले आया -उसने शिवानी के मम्मे पहले की तरह ही अपने दोनों हाथों में थामे हुए थे.

अनुराग ने शिवानी की तरफ देखा और बोला : चलो अब फिर से अपनी टाँगे खोलो

शिवानी ने अपनी टाँगे खोल दीं

अनुराग ने उसके योनि प्रदेश को सहलाते हुए अपनी एक उंगली उसकी योनि के अंदर डाल दी और उसे आगे पीछे करने लगा

रमेश अब बोल्ड हो चुका था और वह अपने चेहरे को शिवानी की गर्दन पर रगड़ते हुए वहां लगातार चुम्बन जड़ रहा था

कुछ देर तक शिवानी को इस तरह से रौंदने के बाद अनुराग ने रमेश को कमरे के बाहर भेज दिया और शिवानी से भी कहा : अब तुम अपने कपडे पहन लो. तुम्हारी जांच पूरी हो चुकी है.

शिवानी हैरानी से अनुराग की तरफ देख रही थी कि वह अब क्या कहने वाला है

शेष अगले भाग में .........
 
PART-9

शिवानी और गौरव दोनों डॉक्टर अनुराग की तरफ देख रहे थे कि अपनी जांच पूरी होने के बाद अब वह क्या कहने वाला है

डॉक्टर अनुराग ने बोलना शुरू किया : मैंने अलग अलग तरीके से मैडम के साथ सेक्स के अलग अलग प्रयोग करने के बाद यह पाया है कि इन्हे सही समय पर सही तरीके से उत्तेजना नहीं होती है और उसकी वजह से अगर कोई ठीक ठाक पुरुष भी इनके साथ सेक्स करे तो इनको बच्चा होने की सम्भावना बहुत कम है

अनुराग की बात सुनकर जहां एक तरफ शिवानी बहुत ज्यादा हैरान और परेशान नज़र आ रही थी, वहीं गौरव बहुत खुश नज़र आ रहा था क्योंकि यह सब कुछ उसी की रची हुई साज़िश के तहत हो रहा था

गौरव ने बड़े नाटकीय अंदाज़ में अनुराग से पूछा : लेकिन डॉक्टर साहब, इस का कोई इलाज़ तो जरूर होगा. जरा सोचिये कि अगर मैं घर जाकर यह बता दूँ कि शिवानी अब कभी माँ नहीं बन सकती तो सबसे पहले तो इसका तलाक हो जाएगा. तलाकशुदा औरत से आजकल कौन शादी करता है. दूसरे इसकी एक छोटी बहन भी है-उसकी शादी में भी काफी अड़चन आ सकती है-आप कुछ न कुछ इलाज़ करिये ताकि शिवानी किसी तरह से माँ बन जाए

अब तक शिवानी उन लोगों की बातें सुन सुनकर काफी घबरा चुकी थी और उसे लग रहा था कि उसे चक्कर जैसा आ रहा था. वह अनुराग से बोली : मुझे वाशरूम जाना है

अनुराग ने कमरे में ही लगे वाशरूम की तरफ इशारा किया और शिवानी अंदर वाशरूम में चली गयी.

अब गौरव और अनुराग दोनों कमरे में अकेले रह गए

गौरव : अनुराग उस रिपोर्ट का क्या हुआ ?

अनुराग : अरे भाई, हम लोग तुम्हारी भाभी को जबरदस्ती ही पेले जा रहे हैं- तुम्हारे भैया की रिपोर्ट ही ठीक नहीं है-उनके वीर्य में बच्चे पैदा करने के शुक्राणु ही मौजूद नहीं हैं. और इसका कोई इलाज़ भी नहीं है- वह किसी भी लड़की से शादी कर लें लेकिन उन्हें बच्चा नहीं हो सकता है

गौरव ( कुछ सोचते हुए) : फिर तो और बढ़िया खबर है हमारे लिए- हमारी साज़िश अभी तक एकदम परफेक्ट तरीके से चल रही है-शिवानी को यह यकीन हो गया है कि उसके अंदर ही कुछ कमी है-हम इसे यही कहते रहेंगे कि इसमें कमी है और इलाज के बहाने इसे पेलते रहेंगे.हमारे पेलने से इसे बच्चा तो हो ही जाएगा -इसलिए हमें यह बात घर पर बताने की जरूरत नहीं है कि भैया की रिपोर्ट में क्या आया है-भैया अपना नार्मल सेक्स करते रहेंगे और जब बच्चा होगा तो यही समझेंगे कि यह उन्ही का बच्चा है.

भैया की रिपोर्ट को मैं अपने पास दबाकर रख लेता हूँ और किसी को नहीं बताऊंगा. शिवानी को हम ऐसे ही डरा धमकाकर उससे मज़े लेते रहेंगे -मैं घर जाकर यह कह दूंगा कि शिवानी में कुछ छोटी मोटी बीमारी थी जिसका डॉक्टर साहब ने इलाज़ कर दिया है और अब अगले एक साल के अंदर शर्तिया बच्चा हो जाएगा

अनुराग ( हँसते हुए) : तुम तो पूरी स्कीम बनाकर आये हो- लेकिन इस सब स्कीम को सीक्रेट रखने के लिए मुझे क्या मिलेगा ?

गौरव : अरे शिवानी का खूबसूरत बदन हम सब मिलकर इस्तेमाल करेंगे. मैं बीच बीच में रेगुलर चेक अप के बहाने इसे यहां लेकर आता रहूंगा और बस फिर क्या है तुम्हारी तो मौज ही मौज है

अनुराग : ठीक है भाई -जैसा तुम कहो. मैंने तुम्हारे सभी दोस्तों को भी यहां बुलाया हुआ है-अमित,रोहित,मोहित और पुनीत सभी बाहर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं

गौरव : ठीक है न- उन्हें भी मौज करा देंगे-शिवानी अब काफी घबरा चुकी है और इलाज़ के लिए फ़ौरन तैयार हो जाएगी- अभी इलाज़ के बहाने हम सब मिलकर उसके बदन से जी भरकर खेलेंगे और अपनी सभी दबी हुई इच्छाओं को भी पूरा करेंगे

अनुराग : चलो, ठीक है-ऐसा ही करते हैं

इतनी देर में शिवानी वाशरूम से फ्रेश होकर बाहर कमरे में आ गयी थी

गौरव : शिवानी, बताओ तुम्हारा क्या ख्याल है -मेरा तो कहना यही है कि तुम्हे इलाज़ करवा लेना चाहिए ताकि किसी भी तरीके से बच्चा हो जाए और तुम्हारी शादी भी बची रहे और तुम्हारी बहन की शादी में भी कोई अड़चन ना आने पाए

शिवानी अब तक पूरी तरह टूट चुकी थी. गौरव से बोली : जैसा आपको ठीक लगे-मैं वह करने के लिए तैयार हूँ.

गौरव : ठीक है डॉक्टर साहब, अब आप बताये कि इलाज़ में कितना समय लगेगा. आज ही हो जाएगा या हमें फिर किसी दिन आना पड़ेगा

अनुराग : आज ही शुरू कर देते हैं-एक घंटा लगेगा- इस इलाज़ से अगले 2-3 महीने में यह गर्भवती हो जाएंगी -इसके बाद बीच बीच में जब मैं कहूँ तब इन्हे रेगुलर मेडिकल चेक अप के लिए आपको यहाँ लेकर आना होगा

शेष अगले भाग में
 
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