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मैंने उसकी ब्रा का हक खोलकर उसकी चूचियों को आजाद कर दिया। मैंने भी अपनी जीन्स और शर्ट उतार दी। ऋतु ने अपनी पाजामी का नाड़ा खोलकर अपनी पाजामी को उतार दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैटी में थी।
मैंने उसको कहा- "इसको भी उतार दो...'
ऋतु ने बड़ी अदा से कहा- "इसको आप खुद उतार लो."
मैंने उसकी पैटी के एलास्टिक में अपनी उंगली डालकर पैटी को नीचे कर दिया, तो ऋतु की चूत मेरे सामने नंगी थी। मैंने ऋतु की चूत पर उंगली फेरते हुए कहा- "तुम जरा अपनी दोनों टाँगों को खोल लो.."
उसने खोल दी, तो मैंने उसकी चूत की दोनों फांकों को फैलाकर उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। ऋतु की चूत की महक मेरी सांसों में समा गईं। मैंने आज तक ऋतु की चूत जैसी महक किसी और चूत में नहीं महसूस की थी। ऋतु की चूत में कुछ अलग ही महक है। मैं कुछ देर तक ऋतु की चूत पर अपनी जीभ फेरता रहा। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को जरा सा घुसा दिया। ऐसा करते ही ऋतु में अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और सीईड... सीईईई की आवाजें करने लगी। उसको चूत चटवाने में कितना मजा आ रहा होगा मैं समझ सकता था।
फिर मैंने ऋतु में कहा "अब मेरा लण्ड को गुस्सा आ गया है."
ऋतु ने कहा- "इसको तो मैं अभी खुश कर दूँगी.."
फिर ऋत में मेरे लण्ड को अपने होंठों पर रखकर उसको हल्के-हल्के अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में दबाकर जीभ से छूने लगी। दिनों दि ऋतु का लण्ड चूसने का तरीका मस्त होता जा रहा था। अब वो नये-नये तरीकों से लण्ड को चूसती श्री। सच कहूँ तो उसको लण्ड चुसवाने में मुझे चुदाई से ज्यादा मजा आता था। क्योंकी ऋतु लण्ड पूरे दिल से चूसती थी और चूसते वक़्त मुझे ऐसे देखती थी जैसे बिल्ली मलाई चाट रही हो। ऋतु जब लण्ड चूसती है तब वो लण्ड को आइसक्रीम जैसे चाटती है, पूरा गीला कर देती हैं। अब मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जा रहा था।
मैंने ऋतु से कहा- "अब तुम सोफे पर घोड़ी बन जाओ..."
उसको घोड़ी बनाकर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला। उसकी चूत में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लण्ड गरम पानी में हो। मैं अत की चूत पर कस-कस के शाट मार रहा था, और मैंने ऋतु की दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ रखा था। बल्कि ऐसा समझो की मैं उसकी चूची को पकड़कर उसे आगे पीछे करके चोद रहा था। ऋत् भी मुझे पूरा सहयोग कर रही थी। फिर जोश बढ़ता गया और मेरा माल ऋतु की चूत में झड़ गया। मैंने अपना लण्ड ऋतु की चूत से निकाल लिया और सोफे पर बैठ गया।
मैंने ऋतु से कहा- "यहां कोई कपड़ा तो है नहीं, लण्ड कैसे साफ करं?"
ऋतु ने हँसते हुए कहा- "मेरे राजा जी आप चिंता मत करो.." फिर ऋतु में अपनी पैटी से मेरा लण्ड पोंक दिया।
उसकी इस हरकत से मेरे झड़े हुए लण्ड में भी जोश पैदा हो गया। ऋतु ने अपनी चूत भी अपनी पैटी में साफ की और पेंटी को अपने बैग में रख लिया।
मैंने कहा- "इसको कहीं फेंक देना.."
मैंने उसको कहा- "इसको भी उतार दो...'
ऋतु ने बड़ी अदा से कहा- "इसको आप खुद उतार लो."
मैंने उसकी पैटी के एलास्टिक में अपनी उंगली डालकर पैटी को नीचे कर दिया, तो ऋतु की चूत मेरे सामने नंगी थी। मैंने ऋतु की चूत पर उंगली फेरते हुए कहा- "तुम जरा अपनी दोनों टाँगों को खोल लो.."
उसने खोल दी, तो मैंने उसकी चूत की दोनों फांकों को फैलाकर उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी। ऋतु की चूत की महक मेरी सांसों में समा गईं। मैंने आज तक ऋतु की चूत जैसी महक किसी और चूत में नहीं महसूस की थी। ऋतु की चूत में कुछ अलग ही महक है। मैं कुछ देर तक ऋतु की चूत पर अपनी जीभ फेरता रहा। फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ को जरा सा घुसा दिया। ऐसा करते ही ऋतु में अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा दिया और सीईड... सीईईई की आवाजें करने लगी। उसको चूत चटवाने में कितना मजा आ रहा होगा मैं समझ सकता था।
फिर मैंने ऋतु में कहा "अब मेरा लण्ड को गुस्सा आ गया है."
ऋतु ने कहा- "इसको तो मैं अभी खुश कर दूँगी.."
फिर ऋत में मेरे लण्ड को अपने होंठों पर रखकर उसको हल्के-हल्के अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में दबाकर जीभ से छूने लगी। दिनों दि ऋतु का लण्ड चूसने का तरीका मस्त होता जा रहा था। अब वो नये-नये तरीकों से लण्ड को चूसती श्री। सच कहूँ तो उसको लण्ड चुसवाने में मुझे चुदाई से ज्यादा मजा आता था। क्योंकी ऋतु लण्ड पूरे दिल से चूसती थी और चूसते वक़्त मुझे ऐसे देखती थी जैसे बिल्ली मलाई चाट रही हो। ऋतु जब लण्ड चूसती है तब वो लण्ड को आइसक्रीम जैसे चाटती है, पूरा गीला कर देती हैं। अब मेरा लण्ड ऋतु के गले तक जा रहा था।
मैंने ऋतु से कहा- "अब तुम सोफे पर घोड़ी बन जाओ..."
उसको घोड़ी बनाकर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला। उसकी चूत में मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लण्ड गरम पानी में हो। मैं अत की चूत पर कस-कस के शाट मार रहा था, और मैंने ऋतु की दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ रखा था। बल्कि ऐसा समझो की मैं उसकी चूची को पकड़कर उसे आगे पीछे करके चोद रहा था। ऋत् भी मुझे पूरा सहयोग कर रही थी। फिर जोश बढ़ता गया और मेरा माल ऋतु की चूत में झड़ गया। मैंने अपना लण्ड ऋतु की चूत से निकाल लिया और सोफे पर बैठ गया।
मैंने ऋतु से कहा- "यहां कोई कपड़ा तो है नहीं, लण्ड कैसे साफ करं?"
ऋतु ने हँसते हुए कहा- "मेरे राजा जी आप चिंता मत करो.." फिर ऋतु में अपनी पैटी से मेरा लण्ड पोंक दिया।
उसकी इस हरकत से मेरे झड़े हुए लण्ड में भी जोश पैदा हो गया। ऋतु ने अपनी चूत भी अपनी पैटी में साफ की और पेंटी को अपने बैग में रख लिया।
मैंने कहा- "इसको कहीं फेंक देना.."