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कार्तिक- मेरे सभी साथियों हमे एक शैतान को राज्य से बाहर करना है। उसकी शैतानी ताकत का सामना करना है। चाहे कुछ भी हो हमे कदम पीछे नही लेने है। हमारे पालनहार को उसने बंदी बना रखा है। जो सैनिक राजकुमार के साथ बाहर रहेंगे आपको सबसे ज्यादा होशियार रहने की जरूरत है। यदि आपने जरा भी सुस्ती दिखाई तो अंदर राजकुमारी के साथ बाकी सैनिक भी मुसीबत में पड़ जाएंगे।
राजकुमार- कार्तिक हमे बाहर से क्या करना होगा?
कार्तिक- आपको बाहर रहकर कुछ समय तक यह विशेष ध्यान रखना होगा कि कहीं वीरप्पा की कोई बाहर से मदद ना कर दे। हम अंदर 3/4 घण्टे तक उनसे लड़ सकते है। हमारे अनुमान के अनुसार अंदर की सेना हमसे ज्यादा बड़ी नही है। जैसे ही हमे अंदर कोई परेशानी हो या हमारे सैनिकों से ज्यादा यदि अंदर सैनिक हो तो हम आपको सूचित कर देंगे, आप अपनी सेना के साथ हमला कर देना। लेकिन पहले यह भी देखना होगा कि जब हम महल के अंदर जाकर वीरप्पा और उसकी सेना पर हमला करें तो बाहर से कोई अंदर ना आये। चाहे कोई सेना भी आये आपको उसे बाहर ही रोकना होगा।
राजकुमार- हां कार्तिक, आप निश्चिन्त रहें हम अपने प्राण गंवा देंगे लेकिन महल में बाहर से किसी परिन्दे को भी नही आने देंगे।
कार्तिक- ठीक है। और जब हम आपको सूचित करें तो अतिशीघ्र अंदर आना होगा।
राजकुमार- अवश्य,,, हम हर हाल मैं तैयार रहेंगे।
कार्तिक- मेरे साथियों हम ही अब इस राज्य के यौद्धा है, हमे किसी भी कीमत पर हमारा राज्य वापिस चाहिए और हमारे महाराज और महारानी को भी आजाद करवाना है।
सभी यौद्धा एक स्वर में जयघोष कर्तव्य है,,, हम वादा करते है कि अपनी गर्दन कटवाकर अपने प्राणों की आहुति देकर भी हम पीछे नही हटेंगे,, हम हर हाल में उस दुष्ट का सर्वनाश करेंगे और अपना राज्य वापिस हाशिल करेंगे।
राजकुमार, राजकुमारी और कार्तिक घोड़े पर सवार होतें है और बाकी सैनिक पैदल उनके पीछे। राज्य के अंदर जब यह दृश्य लोगों ने देखा और सबने राजकुमारी को पहचान तो अब तक जिन लोगों को पता नही था वो भी उनकी सेना में शामिल होते गए। कुछ ही पलों में आसपास मैं खबर फैल गई कि हमारी राजकुमारी सकुशल है और वीरप्पा से युद्ध करने जा रही है तो हर तरफ से लोग आकर उनकी सेना में शामिल होते गए। यह नजारा देख कर घोड़े पर सवार तीनो बहुत प्रशन्न हो गए। जितनी सेना की सोची भी नही थी अब उनके पास उतनी सेना हो गई थी। हथियारों की जगह कुदाल दरांती और घरेलू औजार भी लोग साथ मे लाने लगे।
अब पीछे एक विशाल कारवां बन गया था। इतने बड़ी तादाद में लोगों को देखकर राजकुमारी अब बस वीरप्पा की मौत के बारे में सोचने लगी। हालांकि यह आसान नही था। सेना तो वीरप्पा के पास भी है और शैतानी शक्ति भी। लेकिन राजकुमारी का हौसला अब सातवे आसमान से भी उप्पर जा चुका था। अपने दांत पीस रही थी और मन मे गुस्सा लिए बस वीरप्पा की दुर्गति के बारे में सोच रही थी।
उधर राजकुमार इससे अलग अपने माता पिता के बारे में सोच रहा था। कहाँ तो उसने शिक्षा पूरी होने के बाद सोचा था कि राज्य मैं जाऊंगा तो शानदार स्वागत होगा और अब राज्य ही उसका ना रहा। वो बस महाराज और महारानी के बारे में सोच रहा था कि इतने समय के बाद मिलूंगा और वो भी इस हालत में।
दूसरी तरफ कार्तिक भी अपने पिता के बारे में सोच रहा था। जो इंसान राज्य के राजदरबार में ताउम्र इज्जत पाता रहा आज वो उसी दराबर में एक शैतान की वजह से बंदी है। वर्षों बाद पिता से मिलने की खुशी और वो भी इस तरह तो दुःख भी कार्तिक के मन मे था। लेकिन शिक्षाविद होने के नाते कार्तिक ने सोचा कि अगर मैं इस गम में रहा तो हमारी योजना कैसे कामयाब होगी। यह सोचकर कार्तिक ने वापिस उन विचारों को भूला दिया।
कार्तिक ने देखा कि राजकुमार भी कहीं खोया से लग रहा है तो कार्तिक ने उसकी तन्द्रा तोड़ी,,
कार्तिक- राजकुमार कहाँ खो गए आप?
राजकुमार- कहीं नही, भाई, बस यों ही सोच रहा था।
कार्तिक- मुझे पता है, लेकिन इस वक्त यदि हम इस तरह से भावनाओ में बह जाएंगे तो कैसे चलेगा।
राजकुमार- सही है मित्र, तुम ठीक कह रहे हो। पहले अपनेआप को मजबूत करके हमे इस शैतान को खतम करना है।
कार्तिक- हाँ,,, अब बस हमे सिर्फ लक्ष्य के बारे मे ही सोचना है।
राजकुमार और कार्तिक की बाते सुनकर राजकुमार ने कहा,,
मुझे तो बस मेरा लक्ष्य ही दिख रहा है भैया,,, मैं जब तक उस दुष्ट वीरप्पा को खतम ना कर दूंगी तब तक मुझे कुछ और दिखाई ही नही देगा।। बस मैं तो उस नीच का सर कलम करके ही दम लुंगी।
कार्तिक- हमारी बहन एक महान यौद्धा है। सदियों तक आपको और आपकी वीरता को याद रखा जाएगा।
राजकुमार- कार्तिक हमे बाहर से क्या करना होगा?
कार्तिक- आपको बाहर रहकर कुछ समय तक यह विशेष ध्यान रखना होगा कि कहीं वीरप्पा की कोई बाहर से मदद ना कर दे। हम अंदर 3/4 घण्टे तक उनसे लड़ सकते है। हमारे अनुमान के अनुसार अंदर की सेना हमसे ज्यादा बड़ी नही है। जैसे ही हमे अंदर कोई परेशानी हो या हमारे सैनिकों से ज्यादा यदि अंदर सैनिक हो तो हम आपको सूचित कर देंगे, आप अपनी सेना के साथ हमला कर देना। लेकिन पहले यह भी देखना होगा कि जब हम महल के अंदर जाकर वीरप्पा और उसकी सेना पर हमला करें तो बाहर से कोई अंदर ना आये। चाहे कोई सेना भी आये आपको उसे बाहर ही रोकना होगा।
राजकुमार- हां कार्तिक, आप निश्चिन्त रहें हम अपने प्राण गंवा देंगे लेकिन महल में बाहर से किसी परिन्दे को भी नही आने देंगे।
कार्तिक- ठीक है। और जब हम आपको सूचित करें तो अतिशीघ्र अंदर आना होगा।
राजकुमार- अवश्य,,, हम हर हाल मैं तैयार रहेंगे।
कार्तिक- मेरे साथियों हम ही अब इस राज्य के यौद्धा है, हमे किसी भी कीमत पर हमारा राज्य वापिस चाहिए और हमारे महाराज और महारानी को भी आजाद करवाना है।
सभी यौद्धा एक स्वर में जयघोष कर्तव्य है,,, हम वादा करते है कि अपनी गर्दन कटवाकर अपने प्राणों की आहुति देकर भी हम पीछे नही हटेंगे,, हम हर हाल में उस दुष्ट का सर्वनाश करेंगे और अपना राज्य वापिस हाशिल करेंगे।
राजकुमार, राजकुमारी और कार्तिक घोड़े पर सवार होतें है और बाकी सैनिक पैदल उनके पीछे। राज्य के अंदर जब यह दृश्य लोगों ने देखा और सबने राजकुमारी को पहचान तो अब तक जिन लोगों को पता नही था वो भी उनकी सेना में शामिल होते गए। कुछ ही पलों में आसपास मैं खबर फैल गई कि हमारी राजकुमारी सकुशल है और वीरप्पा से युद्ध करने जा रही है तो हर तरफ से लोग आकर उनकी सेना में शामिल होते गए। यह नजारा देख कर घोड़े पर सवार तीनो बहुत प्रशन्न हो गए। जितनी सेना की सोची भी नही थी अब उनके पास उतनी सेना हो गई थी। हथियारों की जगह कुदाल दरांती और घरेलू औजार भी लोग साथ मे लाने लगे।
अब पीछे एक विशाल कारवां बन गया था। इतने बड़ी तादाद में लोगों को देखकर राजकुमारी अब बस वीरप्पा की मौत के बारे में सोचने लगी। हालांकि यह आसान नही था। सेना तो वीरप्पा के पास भी है और शैतानी शक्ति भी। लेकिन राजकुमारी का हौसला अब सातवे आसमान से भी उप्पर जा चुका था। अपने दांत पीस रही थी और मन मे गुस्सा लिए बस वीरप्पा की दुर्गति के बारे में सोच रही थी।
उधर राजकुमार इससे अलग अपने माता पिता के बारे में सोच रहा था। कहाँ तो उसने शिक्षा पूरी होने के बाद सोचा था कि राज्य मैं जाऊंगा तो शानदार स्वागत होगा और अब राज्य ही उसका ना रहा। वो बस महाराज और महारानी के बारे में सोच रहा था कि इतने समय के बाद मिलूंगा और वो भी इस हालत में।
दूसरी तरफ कार्तिक भी अपने पिता के बारे में सोच रहा था। जो इंसान राज्य के राजदरबार में ताउम्र इज्जत पाता रहा आज वो उसी दराबर में एक शैतान की वजह से बंदी है। वर्षों बाद पिता से मिलने की खुशी और वो भी इस तरह तो दुःख भी कार्तिक के मन मे था। लेकिन शिक्षाविद होने के नाते कार्तिक ने सोचा कि अगर मैं इस गम में रहा तो हमारी योजना कैसे कामयाब होगी। यह सोचकर कार्तिक ने वापिस उन विचारों को भूला दिया।
कार्तिक ने देखा कि राजकुमार भी कहीं खोया से लग रहा है तो कार्तिक ने उसकी तन्द्रा तोड़ी,,
कार्तिक- राजकुमार कहाँ खो गए आप?
राजकुमार- कहीं नही, भाई, बस यों ही सोच रहा था।
कार्तिक- मुझे पता है, लेकिन इस वक्त यदि हम इस तरह से भावनाओ में बह जाएंगे तो कैसे चलेगा।
राजकुमार- सही है मित्र, तुम ठीक कह रहे हो। पहले अपनेआप को मजबूत करके हमे इस शैतान को खतम करना है।
कार्तिक- हाँ,,, अब बस हमे सिर्फ लक्ष्य के बारे मे ही सोचना है।
राजकुमार और कार्तिक की बाते सुनकर राजकुमार ने कहा,,
मुझे तो बस मेरा लक्ष्य ही दिख रहा है भैया,,, मैं जब तक उस दुष्ट वीरप्पा को खतम ना कर दूंगी तब तक मुझे कुछ और दिखाई ही नही देगा।। बस मैं तो उस नीच का सर कलम करके ही दम लुंगी।
कार्तिक- हमारी बहन एक महान यौद्धा है। सदियों तक आपको और आपकी वीरता को याद रखा जाएगा।