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चूतो का समुंदर

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कुसुम- आहह..मज़ा आया ना बेटा...

रोशनी- हाँ माँ..बहुत...क्या मस्त लंड है...अंदर तक चीर डाला...

कुसुम- ह्म्म...तभी तो मुझे पसंद है....

रोशनी- चल माँ...अब मैं तुझे चुदवाती हूँ....देखो तो लंड अभी भी खड़ा हुआ है...

कुसुम(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..वो इतनी आसानी से नही रुकेगा....

रोशनी(मुस्कुरा कर)- तो चलो...हम दोनो माँ-बेटी इसे निचोड़ देते है...

मैं- अच्छा...तो आओ फिर...देखे तो कौन निचोड़ता है...आजा...

रोशनी- चल माँ...अब तुम सवारी करो....आओ बैठो...तब तक मैं चूत चुसवाती हूँ....मज़ा आयगा...

और फिर रोशनी ने लंड पकड़ कर कुसुम की चूत मे पेल दिया और खुद मेरे मुँह पर चूत खोल कर बैठ गई...

दोनो माँ-बेटी मेरे उपर चढ़ कर आपस मे किस करने लगी और अपनी-अपनी कमर को घूमाते हुए मज़ा लेने लगी....

कुसुम- आओउउंम्म...आअहह..मज़ा आ गया...उउउंम्म..

रोशनी- सस्स्रररुउउप्प्प...आअहह..हाँ माँ...तेरे होठ तो मस्त है..अब तो रोज चूसूगी....उूउउंम्म...

कुसुम- उउउंम्म...आहह...चूस लेना बेटी...अब तो जो चाहे...वो चूसना...उउउंम्म..

रोशनी- माँ...मुझे तेरी चूत चुस्वावगी ना...उउंम्म....

कुसुम- उउउंम्म...उउउंम्म..आअहह..हाँ बेटा....चुसवाउन्गी....पर अभी बाते कम...काम ज़यादा...इसे निचोड़ना है...याद है ना...

रोशनी- हाँ माँ..याद है...ज़ोर से उच्छलो...तेज माँ...तेजज...

और फिर दोनो माँ-बेटी अपने काम मे लग गई...कुसुम तेज़ी से मेरे लंड पर उछल कर चुदने लगी और रोशनी मेरे मुँह मे चूत घुसाने लगी...

मैं भी दोनो की तड़प देख कर ख़ुसी-ख़ुसी अपना काम करने लगा...

करीब 10 मिनट बाद कुसुम थक कर बैठ गई...तो मैने दोनो को नीचे उतरा और रोशनी को लिटा कर उसकी चूत मे लंड पेलने लगा....

मैं- अब तेरी बेटी की फाड़ुँगा....और तू ...तू इसे अपनी चूत चूसा दे...ईएह....

फिर मैं रोशनी को जम कर चोदने लगा और कुसुम अपनी चूत खोल कर रोशनी के मुँह के पास बैठ गई....और रोशनी ने भी झट से अपनी माँ की चूत को चाटना शुरू कर दिया....

रोशनी- आअहह....सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प..आहह...मा....सस्स्रररुउउप्प्प्प...

कुसुम- चाट ले बेटी....आअहह...तेरी जीभ तो मुझे पागल कर रही है...चाट....ज़ोर से...

मैं- ईएह....ले साली....अब मज़ा ले....इसे कहते है चुदाई....ये ले....

रोशनी- आअहह.....मार दिया...आअहह...माआअ....उउउम्म्म्म...

कुसुम- आअहह..बेटी...मज़ा कर....दर्द मे ही...उउउंम्म...मज़ा है....

फिर थोड़ी देर तक रूम मे फिर से सिर्फ़ सिसकारिया गूँजती रही...और कुछ देर बाद दोनो माँ बेटी झड्ने लगी...

कुसुम- आअहह...ले बेटी...मैं आई....पी जा ...आअहह....पी जा....उउउफफफफ्फ़.....

रोशनी- हाँ माँ....आआहह...मैं..मैं भी गई...उूउउंम्म...आआहह..उउउंम्म..उउउंम्म..उउंम्म...

और फिर रोशनी ने झड्ते हुए अपनी माँ के चूतरस का मज़ा चख लिया...और यहा मैं रोशनी की चूत से लंड निकाल कर लेट गया...

मैं- चल आजा.....अब मेरा पानी भी पी ले...आजा...

मेरे बोलते ही दोनो माँ-बेटी ने झपट कर मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया....और कुछ ही देर बाद मैं झड्ने लगा...

मेरे झड्ते ही दोनो ने बारी-बारी मेरे लंड रस को पिया और फिर दोनो ने साथ मे चाट-चाट कर मेरा लंड सॉफ कर दिया....

कुसुम- उउउंम्म...मज़ा आ गया आज तो...

रोशनी- हाँ माँ....चुदाई का असली मज़ा आया है...अब हम ऐसे ही चुदाई करेंगे ...

कुसुम(मुस्कुरा कर)- क्यो नही बेटा....अब तू देखती जा..मैं तुझे कितना मज़ा कराती हूँ ....

मैं- मज़ा बाद मे करना....पहले मुझे पानी पिलाओ ....

रोशनी(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...सारा पानी तो हम ने निकाल लिया...प्यास तो लगेगी ही...

और फिर रोशनी गांद मटकाती हुई पानी लेने रूम से निकल गई....

मैं(रोशनी की गांद देख कर)- उफ्फ...क्या मस्त गांद है साली की....

कुसुम(मुस्कुरा कर)- तुम नही सुधरोगे...ठीक है....मार लेना गांद भी....पर थोड़ा आराम से...अभी कच्ची है...

मैं(कुसुम का बूब मसल कर)- डोंट वरी...मैं हूँ ना...

फिर थोड़ी देर बाद मैं पानी कर बैठा ही था कि डोरबेल बजी...जिसे सुनकर दोनो माँ-बेटी चौंक गये...

कुसुम- अभी कौन आया...

रोशनी(डरते हुए)- डॅड तो नही ...

कुसुम- नही...वो नही हो सकते...

मैं- फिर क्या...तुम लोग डरो मत...चलो कपड़े पहनो....देखते है कौन है.....

फिर रोशनी और कुसुम ने जल्दी से नाइटी पहनी और मैने एक बॉक्सर और टी-शर्ट...जो शायद रफ़्तार का था...

और जैसे ही कुसुम ने गेट खोला तो सामने रफ़्तार खड़ा था....

रफ़्तार को देख कर कुसुम और रोशनी की फटी की फटी रह गई....और रफ़्तार सिर्फ़ मुझे घूरे जा रहा था.....

मैं(मन मे)- मैने ऐसा तो सोचा ही नही था.......अब क्या होगा......???????
 
गेट खुलते ही रफ़्तार की नज़र मुझ पर गई...और फिर अपनी बीवी और बेटी पर....जिससे उसके माथे पर शिकन आने लगी....

मैं भी समझ रहा था कि रफ़्तार के माइंड मे क्या चल रहा है...पर अभी मैने खामोश रहना ही सही समझा....

वहाँ दूसरी तरफ अपने पति को सामने खड़ा देख कर कुसुम की हालत पतली हो रही थी...और यही हाल उसकी बेटी रोशनी का था....क्योकि इस वक़्त दोनो ने सिर्फ़ नाइटी से ही अपने जिस्म को ढका हुआ था...और दोनो ही नीचे से नंगी थी.....

रफ़्तार ने बारी-बारी हम तीनो को घूरा और अपने कदम बढ़ाता हुआ अंदर आ गया....

रफ़्तार के अंदर आते ही कुसुम और रोशनी ने अपनी नज़रे झुका ली और बार-बार अपने आपको देखते हुए अपने जिस्म को संभालने लगी.....

रफ़्तार(थोड़ा गुस्से मे)- ये सब क्या है....

रफ़्तार ने अपनी बात कुसुम को घूर कर बोली...जिससे कुसुम घबरा गई...और वो सोच ही रही थी कि क्या बोलू...तब तक मैं बीच मे बोल पड़ा....

मैं- एक मिनट....इससे पहले कि तुम कुछ ग़लत समझो...और अपने दिमाग़ मे कुछ ग़लत कहानी बना लो....मैं बताता हूँ कि ये सब क्या है....

रफ़्तार(मुझे घूर कर)- हुह...

मैं- असल मे ये सब तुम्हारे घर के बाहर जमा हो चुके पानी की वजह से हुआ है.....

रफ़्तार(हैरानी से)- हाँ...पानी से....पर इस सब मे पानी कहाँ से आ गया.....

मैं- वही बता रहा हूँ...सुनो तो...

रफ़्तार(कुसुम और रोशनी को देख कर)- ह्म्म...सूनाओ फिर.....

मैं- असल मे हुआ क्या...कि मैं यहाँ तुमसे मिलने आया था....पर जब तुम नही आ जाते तब तक क्या करूँ...ये सोच कर मैं कुसुम जी के साथ घर के बाहर ही तुम्हारा वेट करने लगा....

कुसुम(चौंक कर, मन मे)- कुसुम जी....ये तो बड़ा चालू है....

मैं- और फिर हम दोनो वहाँ वेट ही कर रहे थे कि तभी रोशनी भी आ गई...और हमारे साथ ही गप-शप करने लगी.....

रोशनी(मन मे)- क्या कहानी बनाई...लगे रहो....

मैं- तो हम तीनो वहाँ टाइम पास कर ही रहे थे कि अचानक एक तेज स्पीड कार निकली और सड़क पर भरा हुआ पानी हमारे उपर आ गया....और हमारे सारे कपड़े खराब हो गये....

रफ़्तार(सिर हिला कर)- ओह्ह...ऐसी बात है...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...और इसीलिए हमारी ये हालत है...बस...

रफ़्तार- ठीक है...

मैं- कुसुम जी....ज़रा देखिए मेरे कपड़े सूखे या नही ...

कुसुम(हैरानी से)- ह..हाँ...वो रूम मे है..मैं देखती हूँ..

रोशनी- डॅड...मैं अभी आई...

इतना बोलकर दोनो माँ-बेटी अपने-अपने रूम मे निकल गई.....

मैं- उम्म...मैं चेंज कर के आता हूँ....एक मिनट....

और ये बोलकर मैं भी कुसुम के रूम मे चला गया....

मैं रूम मे गया तो कुसुम मेरे कपड़े हाथ मे लिए ही खड़ी थी.....

कुसुम(मुझे देखते ही)- तुम...तुम जल्दी से कपड़े पहनो...कहीं मेरे पति ने देख लिया तो ....

मैं(उंगली मुँह पर लगाकर)-श्ह्ह्ह...चुप रहो...कपड़े दो और खुद भी कपड़े पहनो....

थोड़ी देर बाद मैं वापिस रफ़्तार के पास पहुँच गया...और मेरे आने के बाद कुसुम और रोशनी भी चेंज कर के आ गई.....

रोशनी- डॅड...आप कहाँ थे इतने दिनो तक....

रफ़्तार बेचारा अपनी बेटी को क्या बोलता...बस वो मुझे देखने लगा....मैने उसकी परेशानी समझी और कुसुम को इशारा कर दिया.....

कुसुम(रोशनी से)- बेटी...चलो पहले अपने डॅड को अपने हाथ की कॉफी पिलाओ...फिर बातें करना ओके...

रोशनी- ओके माँ...

और फिर रोशनी और कुसुम किचन मे चली गई और उनके जाते ही रफ़्तार एक बार फिर से मुझे घूर्ने लगा.....

मैं- कुछ कहना चाहते हो.....???

रफ़्तार- हुह...तुमने मुझे हवालात मे पहुँचाया...राइट....

मैं- ह्म्म...पहुँचाया....

रफ़्तार- तो फिर बाहर क्यो निकलवाया....

मैं- क्यो...तुम आज़ाद हो कर खुश नही क्या....

रफ़्तार- ये मेरे सवाल का जवाब नही...

मैं- कुछ सवालो के जवाब वक़्त पर छोड़ देना चाहिए....फिलहाल अपनी फॅमिली के साथ ख़ुसीया मनाओ....बाद मे सारे जवाब मिल जायगे...ओके ...

तभी रोशनी और कुसुम वापिस आ गई...और हम ने मिलकर कॉफी न्ड स्नॅक एंजाय किया और फिर मैं वहाँ से निकल गया....

पर पीछे छोड़ गया रफ़्तार के माइंड मे कई सवाल....जिनके जवाब पाने के लिए रफ़्तार तड़प रहा था....

तभी रफ़्तार को एक कॉल आया और उसने रात की मीटिंग सेट कर ली और आराम करने लगा.......
 
वर्मा के ऑफीस मे......

वर्मा के ऑफीस मे इस वक़्त वर्मा, अपने पुराने पार्ट्नर साक्शेणा और एमएलए के साथ बैठा हुआ था....

वर्मा(पेग उठा कर)- लो भाई....पार्टी शुरू करो....साक्शेणा....एमएलए साब...लो...

एमएलए(वर्मा को आँखे दिखा कर)- तुम दिन मे भी शुरू हो गये....हुह...

वर्मा- अरे एमएलए साब....पार्टी करने के लिए क्या दिन और क्या रात.....और वैसे भी आज तो ख़ुसी की बात है...

साक्शेणा- ख़ुसी की बात...सीसी..क्या...क्या आकाश मान गया.....

वर्मा(मुँह बना कर)- कहाँ माना साला....बड़ी अकड़ है साले को...और उससे ज़्यादा अकड़ उसके लोंडे को....बीसी...

साक्शेणा- तो फिर ख़ुसी की बात क्या है....

वर्मा- अरे...आज अपना आदमी जैल से बाहर आ गया.....हाहाहा...

एमएलए- कौन आदमी....

वर्मा(शिप मार कर)- वही...जिसे तुम भी नही छुड़ा पाए थे.....रफ़्तार....

एमएलए(हैरानी से)- क्या...रफ़्तार बाहर आ गया...पर कैसे....मतलब...उस पर तो बड़ा संगीन आरोप लगा था....उसकी जमानत भी नही हो सकती थी....मैने पता किया था...हाँ...तो ऐसा कैसे हो सकता है...

वर्मा(मुस्कुरा कर)- अरे एमएलए साब...दिमाग़ पर इतना ज़ोर देना ठीक नही....वेल...वजह कुछ भी हो...बस वो बाहर आ गया...यही बहुत है अपने लिए.....

साक्शेणा(आँखे उठा कर)- अपने लिए...??

वर्मा- हाँ....अब वो आकाश और उसके एंप्लायी को इतना परेशान करेगा कि आकाश मजबूर हो जायगा हमारे पैसे देने को....और फिर उसके बुरे दिन स्टार्ट...हाहहाहा.....

साक्शेणा(सिर हिला कर)- पर ये इतना आसान नही....आकाश इतनी जल्दी हार नही मानने वाला...और फिर उसका बेटा...वो भी तो है....

वर्मा- ह्म...बस देखते जाओ....कैसे दोनो बाप-बेटो को लाइन पर लाता हूँ....

साक्शेणा- पर तुम ये करोगे कैसे....

वर्मा(दूसरा पेग बना कर)- असल मे , हमे कुछ ने दोस्त मिले है...जिनकी मदद से हम दोनो बाप-बेटो को सबक सीखा सकते है...

साक्शेणा- कौन है वो...??

वर्मा(पेग गतक कर)- अरे छोड़ ना...फिर कभी बताउन्गा...अभी मज़े कर...

एमएलए(खड़ा हो कर)- ठीक है...तुम लोग मज़े करो..मैं चलता हूँ...कुछ काम याद आ गया....

वर्मा- अरे एमएलए साब...ये क्या बात हुई...रुकिये तो....आज खास आपके लिए माल को बुलाया है...और आप ही...

एमएलए- नही वर्मा...आज मूड नही...चलता हूँ....

वर्मा-पर्र....

वर्मा कुछ बोलता उससे पहले ही एमएलए अपना कुर्ता ठीक करते हुए रूम से निकल गया....

वर्मा(गुस्से से)- ये भी साला...पता नही क्या मूड है इसका....

साक्शेणा(मुस्कुरा कर)- वैसे वर्मा...कौन सा माल आ रहा है...मुझे भी थोड़ा...

वर्मा(बीच मे)- नही साक्शेणा...वो माल तेरे लिए नही....तू दारू पी और निकल...फिर कभी दिलाउन्गा तुझे...ओके...

साक्शेणा(बुझे मन से)- ठीक है...मत दिला...मैं भी जाता हूँ....मुझे दारू नही पीनी...थॅंक्स...

और इतना बोलकर साक्शेणा भी वहाँ से निकल गया....पर उसे जाते देख वर्मा को गुस्सा नही आया...बल्कि चेहरे पर एक कमिनि मुस्कान आ गई....और वो उठा और गेट लगा कर एक कॉल किया...

कॉल करने के थोड़ी देर बाद ही उस रूम मे अंदर वाले गेट से दो औरते दाखिल हुई....जिसमे से एक सिर्फ़ ब्रा-पैंटी मे थी...उसे देख कर वर्मा मुस्कुरा उठा...

वर्मा- आओ मेरी रानी...आओ....अब पार्टी का असली मज़ा आयगा....

फिर दूसरी औरत ने ब्रा-पैंटी पहने हुई औरत को वर्मा की गोद मे धकेल दिया और खुद वापिस जाने लगी...

वर्मा- अरे सविता...तुम कहाँ चली...

सविता- मैं घर जा रही हूँ...वैसे भी आपको मज़ा देने के लिए ये रंडी तो है ही....मैं चली अपने बेटे के पास....

वर्मा- ह्म्म...ये तो है....जाओ तुम....

फिर सविता निकल गई और वर्मा अपनी गोद मे बैठी औरत के बूब्स दवाते हुए मज़े लेने लगा ....

वर्मा- वाह रानी...क्या कड़क माल है तू....जब भी तुझे छुता हू तब-तब एक नया आनंद मिलता है...वाह से ...साक्शेणा कितना लक्की है जो तुझ जैसी बीवी मिली....

वर्मा की बात सुनकर वो औरत ना चाहते हुए भी आह भर कर रह गई....

वर्मा(बूब्स मसल्ते हुए)- साला आज तो तेरा पति भी मज़ा लेने के मूड मे था....बेचारा...उसे क्या पता कि मेरा माल और कोई नही ...बल्कि उसकी ही पत्नी है....साशि.....हाहाहा.....

साशि(साक्शेणा की बीवी, मान मे)- तू कर ले तेरे मन की कमीने.....तेरे सारे कुकर्मो की सज़ा तुझे बहुत जल्दी मिलेगी....और उस दिन मैं भी दिल खोल कर हसुगी....

यहाँ साशि अपने मन मे वर्मा को गालियाँ देती रही और वर्मा बुरी तरह से उसके जिस्म के मज़े मारता रहा.....

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रिचा के घर.....शाम ढलने के बाद......

रफ़्तार(ज़ोर से)- मुझे इस वक़्त क्यो बुलाया......

रिचा-श्ह्ह्ह...आवाज़ धीमी रखो....समझे....

रफ़्तार(गुस्से से)- हुह...अब बताओ...क्या हो गया....

रिचा(सोफे पर बैठते हुए)- असल मे कोई तुमसे मिलना चाहता था....

रफ़्तार(हैरानी से)- मुझसे....पर क्यो....

तभी अंदर वाले रूम से बॉस2 आया...जो इस वक़्त मास्क मे था.....

बॉस2- क्यो भी पता चल जायगा....पहले ये तो जान लो कि तुमसे मिलना कौन चाहता था....

रफ़्तार(बॉस2 को देख कर)- तुम कौन हो....

बॉस2- हम ही वो...जो तुमसे मिलने आया है....

रफ़्तार- अच्छा....हम से मिलने आय हो...पर ये मास्क क्यो....हटाओ इसे...ज़रा चेहरा भी तो देखे...

बॉस2(कड़क आवाज़ मे)- ये चेहरा सबको दिखाने के लिए नही.....समझे....

रफ़्तार(गुस्से से)- तो फिर मैं चलता हूँ....

रफ़्तार जाने के लिए मुड़ा ही था कि रिचा ने लपक कर उसका हाथ पकड़ लिया....

रिचा- अरे रफ़्तार...गुस्सा क्यो होते हो....तुम आम खाओ ना...गुठलियाँ क्यो गिनने लगे.....

रफ़्तार- क्या मतलब....

रिचा(रफ़्तार को बैठा कर)- असल मे ...ये मेरे बॉस है....और तुम मेरे साथी...तो अच्छा यही होगा कि तुम अपने काम से मतलब रखो....चेहरे से नही....ठीक....

रफ़्तार- हुह..ठीक है....अब जल्दी बोलो मुझे बुलाया क्यो....

रिचा- ह्म्म...असल मे हम ने प्लान थोड़ा चेंज कर दिया है....जो काम बाद मे होने वाला था...उसे कल रात ही करना होगा....

रफ़्तार(चौंक कर)- कल रात....पर क्यो....अचानक ये बदलाब क्यो....

बॉस2(बीच मे)- क्योकि ऐसा हम चाहते है....

रफ़्तार(अकड़ कर)- और मैं तुम्हारी बात क्यो सुनू....

बॉस2(गुस्से से)- सुनना पड़ेगा...और करना भी पड़ेगा......

रिचा- अरे...तुम दोनो शांत रहो...और रफ़्तार...तुम्हे क्या प्राब्लम है....बेटी मेरी...प्लान मेरा...तुम्हे बस उसकी जगह वो नकली रिया की लाश रखनी है बस ....

रफ़्तार- पर मैं अभी तक सस्पेंडेड हूँ....उसका क्या.....

बॉस2- उसकी टेन्षन मत लो....कल सुबह तक तुम्हारी बहाली के ऑर्डर्स आ जायगे...ठीक है....

रफ़्तार(खड़ा हो कर)- ठीक है...तो कल रात को तुम्हारा काम भी हो जायगा....बाइ....

रफतात 2-3 कदम ही बड़ा था कि बॉस2 की आवाज़ ने उसे फिर से रोक दिया....

बॉस2- अभी हमारी बात ख़त्म नही हुई....

रफ़्तार(रुक कर)- अब क्या है....

बॉस2- अंकित तुम्हारे घर पर क्यो गया था....

रफ़्तार(चौंक कर)- तुम क्या मेरा पीछा करवा रहे हो....

बॉस2- वो सब छोड़ो....तुम जवाब दो...

रफ़्तार- वो ...वो मुझे अपने साथ मिलने आया था....

रिचा(डर कर)- क्या....कही उसे सब पता तो नही चल गया....हाँ...

रफ़्तार- नही...ऐसा कुछ नही हुआ....मैने उसे गालियाँ दे कर निकाल दिया था ....

रिचा- ओह्ह..अच्छा किया...

बॉस2- वैसे तुम्हे अंकित के साथ हो जाना चाहिए.....

रिचा- क्या...क्या कह रहो हो तुम....

बॉस2- तुमने ठीक सुना...असल मे रफ़्तार का अंकित के साथ रहना हमारे लिए फ़ायदे का सौदा है ....

रफ़्तार- तुम कहना क्या चाहते हो....

रिचा- हाँ...क्या चल रहा है तुम्हते दिमाग़ मे.....

बॉस2- बैठो....समझाता हूँ...

और फिर बॉस2 ने रिचा और रफ़्तार को अपना प्लान समझाया...जिसे सुन कर रिचा मुस्कुरा उठी पर रफ़्तार के माथे पर शिकन बढ़ गई.....

रफ़्तार- चलो...ऐसा ही सही...मैं अभी जाता हूँ उसके पास.....

बॉस2- ह्म्म...और याद रखना...वो बड़ा शातिर है....उसे इस प्लान की हवा भी ना लगने पाए....

रफ़्तार- ऐसा ही होगा...बाइ....

बॉस2- और हाँ...अपनी बीवी और बेटी को उससे दूर ही रखना....कही वो उनके साथ...

रफ़्तार(गुस्से से)- चुप रहो....

और रफ़्तार पैर पटकता हुआ बाहर निकल गया और रिचा बॉस2 के पास आ गई....
 
रिचा- क्या यार...उसे परेशान क्यो करते हो....

बॉस2- क्योकि मैं जानता हूँ कि अंकित इसकी बीवी और बेटी को छोड़ने वाला नही....या यू कहे कि वो दोनो अंकित को छोड़ने वाली नही....

रिचा(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...खैर ..उन्हे छोड़ो...अभी तो मैं तुम्हे छोड़ने वाली नही....

बॉस2- नही...अभी नही...मुझे घर जाना है....

रिचा- हुह हू...चले जाना....बस एक राउंड..ह्म...

बॉस2(मुस्कुरा कर)- तू नही सुधरोगी रंडी...चल...तेरी गान्ड मारता हूँ....

और फिर रिचा की गांद चुदाई चालू हो गई......

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अंकित के घर.........

यहाँ जब मैं अपने घर पहुँचा तो सामने का नज़ारा देख कर शॉक्ड हो गया.....

मेरे सामने सुजाता मेरे डॅड की गोद मे बैठी हुई उनके गाल सहला रही थी....

मैं(मन मे)- ये क्या...लगता है सुजाता का जादू चल गया....

तभी मेरे डॅड ने मुझे देखा और जल्दी से सुजाता को साइड कर के खड़े हो गये....अब सुजाता ने भी मुझे देख लिया था.....

सुजाता(हड़बड़ाते हुए)- आ..अंकित...तुम..तुम आ गये....वो ...इन्हे...मतलब तुम्हारे डॅड को सिर मे दर्द हो रहा था....तो मैं सिर दबा रही थी....

मैं- ह्म....

आकाश- अरे अंकित....वहाँ खड़े क्यो हो....आओ ना....

सुजाता- आओ अंकित....मैं तुम्हे कॉफी बनाती हूँ....पियोगे ना.....

मैं- हाँ..वो मैं अपने रूम मे जा रहा हूँ...कुछ काम है....वही दे देना....

फिर मैने एक नज़र अपने डॅड पर डाली और अपने रूम मे निकल गया.....

फिर मैने कॉफी पी और करीब 2घंटे तक रूम मे ही बैठा रहा....फिर मुझे रफ़्तार का कॉल आया.....

(कॉल पर )

मैं- हाँ रफ़्तार...बोलो....

रफ़्तार- रिचा को हमारी मुलाक़ात का पता चल गया है.....और उसने प्लान भी चेंज कर दिया है....

मैं- क्या...क्या चेंज किया....

रफ़्तार- अब काम कल होगा....

मैं- इतनी जल्दी ....पर रिया....उसका क्या....

रफ़्तार- वो शायद मानेगी नही....

मैं- तब तो गड़बड़ हो जाएगी....

रफ़्तार- गड़बड़ ठीक हो सकती है....

मैं- वो कैसे....

रफ़्तार- नकली लाश की जगह असली लाआह ही भेज दे तो...

मैं- क्या....रिया को...नही-नही...उसने क्या किया....नही...

रफ़्तार- रिचा को सबक सीखना है तो यही ठीक रहेगा....और वैसे भी ...गेहू के साथ घुन तो पिसेगा ही....

मैं- पर वो बेचारी....नही...

रफ़्तार- सोच लो....वैसे भी उसे तकलीफ़ और दुख ही मिलने वाला है....तो अभी क्यो नही....

मैं- पर ...आहह...कोई दूसरा रास्ता नही...

रफ़्तार- रास्ते तो कई है...पर यही रास्ता सबसे अच्छा है....रिचा को वो सबक मिलेगा कि वो जीते जी मर जाएगी....सोच लो...

फिर मैं रफ़्तार की बात के बारे मे कुछ देर तक सोचता रहा.....
 
मैं(मन मे)- पता नही ...अपनी मज़िल पाने के लिए कितने मासूमो का खून बहाना पड़ेगा....सॉरी रिया....मैं मजबूर हूँ....

रफ़्तार- तो क्या सोचा.....

मैं- हाँ....करो....पर कल नही...आज ही करो .....जब रिया का खून बहाना ही है तो देर करने का क्या मतलब.....

रफ़्तार- ठीक है...आज रात को काम हो जायगा....

मैं- ठीक है....गन तुम्हे वही मिल जाएगी....ओके...बाकी तुम जानते हो कि क्या और कैसे करना है...

रफ़्तार- हां...जानता हूँ...बाइ....

और फिर कॉल कट हो गई...और कॉल कट होते ही मैने गुस्से से दीवाल मे एक हाथ मार दिया....

मैं- हो सके तो मुझे माफ़ कर देना रिया...माफ़ कर देना....

मैं रिया के बारे मे सोच-सोच कर मैं परेशान हो ही रहा था कि एक और कॉल आया और मुझे परेशानी दे गया....वो रक्षा का कॉल था....

मैं(कॉल पर)- हा रक्षा....क्या हुआ....

रक्षा(घबराई हुई)- भैया...आप अभी घर आ जाइए.....

मैं- पर हुआ क्या...बोल तो...

रक्षा- आप आइए तो...आपको कुछ बताना है...बहुत ज़रूरी है...प्ल्ज़ जल्दी आ जाइए...प्ल्ज़...

मैं- ओक...टेन्षन मत ले....मैं आता हूँ...आता हूँ...

और मैं जल्दी से रक्षा के घर निकल गया.....

करीब सुबह के 4-5 बजे एक अंधेरे कमरे मे रफ़्तार दाखिल हुआ....जिसके हाथ मे एक गन थी....

उस रूम मे रिया सोई हुई थी....और रूम की लाइट ऑन होते ही उसने हड़बड़ा कर आँखे खोली और सामने रफ़्तार को देख कर डर गई....

रिया- ये...ये क्या कर रहे हो तुम...

रफ़्तार- मुझे माफ़ करना....मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नही....

और इससे पहले की रिया कुछ बोल पाती...रूम मे एक गोली चलने की आवाज़ आई और रिया की चीख से रूम थर्रा उठा......

संजू के घर..........

जैसे ही मेरी कार संजू के घर के सामने रुकी....वैसे ही घर का गेट ओपन हो गया....गेट पर रक्षा थी...जो बेसब्री से मेरा इंतज़ार कर रही थी....

मैं(गेट पर पहुँच कर)- क्या हुआ....

रक्षा(मुँह पर उंगली रख कर)- स्शह....धीरे भैया...कोई जाग ना जाए....

मैं(हैरानी से)- ओके...पर इतनी रात को ऐसा क्या हो गया जो तूने मुझे अर्जेंट मे बुलाया...सब ठीक तो है ना....

रक्षा- यहाँ नही...पहले आप अंदर आइए....गेस्ट रूम मे....आइए....

फिर हम दोनो गेस्ट रूम मे आए और रक्षा ने जल्दी से गेट लॉक कर दिया....

मैं(हैरानी से)- आख़िर बात क्या है...तू इतनी घबराई हुई क्यो है...हाँ...

रक्षा- बताती हूँ भैया....एक मिनट...आप बैठिए तो...आराम से बताती हूँ...

फिर मैं बेड पर बैठ गया और रक्षा ने मेरे हाथ मे एक पॅकेट पकड़ा दिया....जिस पर मेरा नाम लिखा हुआ था....

मैं- ये क्या है...और इस पर मेरा नाम कैसे....

रक्षा- यही तो वो वजह है...जिसके लिए मुझे आपको अभी बुलाना पड़ा....

मैं(पार्कल को साइड मे रख कर)- पर ये है क्या...और इस पर मेरा नाम क्यो है....

रक्षा- ये पार्कल मुझे डॅड(विनोद) के रूम मे मिला है...और ये बहुत ही ज़्यादा छिपा कर रखा हुआ था...और इस पर आपका नाम लिखा था...इसलिए मैने आपको बुलाया....

मैं(हैरानी से)- तुम्हारे डॅड के रूम मे....और मेरे नाम से....ये कैसे हो सकता है....

रक्षा- इसी बात ने तो मुझे भी परेशान कर दिया था...इसलिए मैने आपको बुलाया....

मैं(पार्सल उठा कर)- ये बात और किसी को पता है....

रक्षा- नही...मैने किसी को नही बताया....

मैं- ह्म...पर तू ये बात मुझे कल सुबह भी बता सकती थी...अभी बुलाने की क्या ज़रूरत थी....

रक्षा- असल मे ..मैं आपको कल ही बताने वाली थी...पर कुछ देर पहले कुछ ऐसा हुआ कि मुझे डर लगने लगा...इसलिए मैने आपको तुरंत बुला लिया....

मैं(चौंक कर)- क्या...क्या हुआ...सब ठीक तो....

रक्षा(बीच मे)- अब तक सब ठीक है....पर मुझे ऐसा लगा कि आगे शायद कुछ गड़बड़ हो जाएगी...इसलिए मैने आपको बुलाना ही सही समझा....क्योकि...मुझे लगा कि आप पर भरोशा करना ही सही होगा...

मैं(रक्षा को बैठा कर)- तू पहले आराम से बैठ..और घबरा मत...मैं आ गया ना....और अब आराम से बता....कि क्या हुआ था...और तूने क्या देख लिया जिसे देख कर तू घबरा गई..हूंम्म..

रक्षा- ह्म...तो सुनिए......

असल मे ...आज मैने डॅड का रूम सॉफ करने की सोची...क्योकि डॅड के जाने के बाद से उस रूम मे झाड़ू भी नही लगी थी...

इसलिए मैने मों को अनु के साथ उपेर वेल रूम मे भेज दिया और मैं सफाई करने लगी.. .

सफाई करते हुए मेरी झाड़ू बालकनी से टकराई तो वहाँ का कुछ हिस्सा खुल सा गया....

मैने ध्यान से देखा तो मुझे पता चला कि वो एक सीक्रेट कॉवर्ड है....

फिर मैने वो कवर्ड ओपन किया तो उसमे से एक थैल्ली नीचे गिरी....और उस थैल्ली मे मुझे ये पार्सल और कुछ पिक्स मिली....

मैं- पिक्स....वो कहाँ है....

रक्षा- वो पिक्स मेरे पास है...पर वो तो हम लोगो की ही पिक्स थी....

मैं- ह्म्म...पर कोई ऐसी पिक थी जो तुम्हारे लिए अंजान हो...

रक्षा- उउंम...हाँ...देती हूँ....मैं अभी लाती हूँ..आप शोर मत करना ..ओके...

मैं(मुस्कुरा कर)- मुझे समझाना बंद कर...जा जल्दी आना....

फिर थोड़ी देर मे रक्षा वो पिक्स ले कर वापिस आ गई.......उनमे से एक पिक मे एक औरत और आदमी था....जबकि दूसरी पिक मे 2 लड़के खड़े हुए थे...उनमे से एक तो मुझे रक्षा के डॅड ही लग रहे थे....

मैं(पिक देख कर)- ये लोग कौन है....

रक्षा(सिर हिला कर)- नही पता....मैने इन्हे पहले कभी नही देखा...
 
मैं- ह्म..चलो...ये मैं रखता हूँ...तू पहले ये बता कि आगे क्या हुआ...मतलब तूने ऐसा क्या देखा कि मुझे बुला लिया....

रक्षा- अरे हाँ....सुनिए....

तो मैने कवर्ड से निकला सामान अपने पास रख लिया और रूम की सफाई कर के वहाँ से निकल गई....सोचा कि आपको बाद मे सब बात....

पर जब मैं शाम को वापिस रूम मे गई तो गेट खोलते ही मैं चौंक गई....

जो रूम मैं कुछ घंटो पहले जमा कर गई थी....वो बिखरा पड़ा था...

रूम का सब सामान उथल-पुथल था....ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई रूम मे कुछ ढूँढने की कोशिस कर रहा था....

बस तभी मुझे ऐसा लगा की हो ना हो...ये सब इसी पार्कल के लिए किया गया है...जो आपके नाम पर था....इसलिए मैने देर करना ठीक नही समझा...बस आपको बुला लिया....

मैं- ह्म...पर तुम्हे ऐसा क्यो लगा कि वो सब इसी पार्सल के लिए था...

रक्षा- इसकी 2 वजह है....पहली ये कि उस रूम मे इस पार्सल के अलावा कुछ खास नही था...जिसके लिए कोई रूम को उथल-पुथल कर रख गया....

मैं- और दूसरी वजह....

रक्षा(नाम आँखो से)- मेरे डॅड की वो बात...जो उन्होने मुझसे कही थी...

मैं(हैरानी से)- कौन सी बात....

रक्षा- उन्होने कहा था कि कभी उन्हे कुछ हो जाए तो आप पर भरोशा करूँ....किसी और पर नही....

मैं(चौंक कर)- क्या....उन्होने ऐसा कहा....पर क्यो...

रक्षा- मैने भी पूछा था....पर उन्होने कहा की टेंशन मत लो...मैं अभी यही हूँ...ओके...और बात को टाल गये थे....

मैं(हैरानी से)- ह्म...अच्छा...फिर क्या हुआ...आइ मीन...जब तुमने रूम की हालत देखी तो किसी को बताया नही....और मुझे तभी क्यो नही बोला...

रक्षा- नही...मैने किसी को कुछ नही कहा...क्योकि सब वैसे ही टेन्षन मे है...तो मैने फिर से रूम को सही कर दिया और फिर सबके सोने का वेट करने लगी...कि आपको बुला लूँ...इसलिए...

मैं- ह्म...ठीक है....चलो अब ये पार्सल खोलते है...पता तो चले कि इसमे ऐसा क्या है जिसके पीछे लोग पड़े हुए है....

फिर मैने पार्सल खोला तो उसमे से मुझे 6 पिक्स और एक लेटर मिला....

उन पिक्स मे से 4 पिक्स सम्राट, सरद, सुजाता, और विनोद की पिक्स थी....जबकि 2 पिक्स मे से एक मे एक औरत और दूसरी मे एक लड़की थी....और बची हुई पिक मे एक आदमी की पिक थी...पर उसका चेहरा मिटाया हुआ था.....

मैं(मन मे)- ये सब आख़िर विनोद के पास कैसे आया....क्या विनोद सम्राट की फॅमिली को जानता था....??

रक्षा(पिक देख कर)- ये सब किसकी पिक है भैया....

मैं- हुह...पता नही...बाद मे देखेगे...पहले ये लेटर टाइप कुछ है...इसे देख लूँ....

और फिर मैने वो लेटर ओपन किया...जो मेरे नाम पर था....विनोद की तरफ से....और फिर मैने लेटर पढ़ना शुरू कर दिया....

हेलो अंकित...

ये लेटर लिखते वक़्त मैं नही जानता कि ये तुम्हे कब और किस के हाथो से मिलेगा....

पर एक बात यकीन के साथ कह सकता हूँ कि ये लेटर तुम्हे तब मिलेगा...जब मैं इस दुनिया से जा चुका होउंगा....

खैर....ये लेटर मैं इसलिए लिख रहा हूँ ताकि अपने दिल का बोझ कम कर सकूँ....शायद ये लेटर पढ़ने के बाद मेरे बारे मे तुम्हारी सोच बदल जाय और इससे मेरी आत्मा को सकून मिल जाए....

मैं जानता हूँ कि तुम मुझे अपना और अपने परिवार का दुश्मन समझते हो...और तुम्हारा ये सोचना बिल्कुल सही भी है....

क्योकि मैने ना चाहते हुए भी तुम्हारे दुश्मनो का साथ दिया और वो सब काम किए जिससे तुम्हारा बुरा ही होता....

पर आज मैं वो सच्चाई बताने जा रहा हूँ...जिसे जान कर शायद तुम मेरी मजबूरी समझ पाओगे....

अंकित, मैं ये सब सिर्फ़ सम्राट और उसके बेटो के कहने पर कर रहा था....उन्ही ने मुझे सफ़राज़ के बारे मे बताया और उसके साथ मिल कर तुम्हारे खिलाफ काम करने को कहा....

वो सम्राट ही है जिसने मुझे ये काम करने को कहा....और मैं ना चाहते हुए भी तुम्हारे खिलाफ हो गया....

अब तुम सोच रहे होगे कि आख़िर मेरी क्या मजबूरी थी कि मुझे सम्राट और उसके बेटो की बात माननी पड़ी....तो उसकी दो वजह है....

पहली वजह है मेरी वफ़ादारी....हाँ..मैं सम्राट के परिवार का वफ़ादार था...या यू कहूँ कि अहसानो के तले दबा हुआ था....

असल मे सम्राट और उसके बेटे के बड़े अहसान थे मुझ पर...इसलिए मैने बिना कुछ सोचे उनकी हर एक बात मानी...यहाँ तक कि माँ समान, रजनी भाभी के साथ नाजायज़ संबंध भी बनाए.....

और रही दूसरी वजह...तो वो मेरा परिवार है...खास कर मेरी बेटियाँ...उनकी खातिर मैं कुछ भी कर सकता था....इसलिए मैने चुपचाप सम्राट न्ड फॅमिली का कहा माना...क्योकि मैं जानता था कि अगर मैने ऐसा नही किया तो वो मेरे परिवार को ख़त्म करने मिस्टर हिचकिचायगे नही....

बस...इसीलिए मैं ना चाहते हुए भी चुप रहा....और सब करता रहा...जो सम्राट चाहता था....

मैं आज ये सब तुम्हे इस उम्मीद पर बता रहा हूँ ...क्योकि मुझे पूरा भरोशा है कि मेरे बाद सिर्फ़ तुम ही मेरे परिवार को बचा सकते हो...सिर्फ़ तुम...

और हाँ...एक बात और...रजनी भाभी का इस सब मे कोई कसूर नही....वो भी बेचारी मजबूर है...और शायद सच से अंजान भी....इसीलिए उन्होने भी तुम्हारे परिवार के खिलाफ मेरा और सरफ़राज़ का साथ दिया.....

खैर....मुझे उम्मीद है कि एक दिन रजनी भाभी को भी सच का पता चलेगा और उस दिन वो भी पश्चाताप की आग मे जलेगी....

खैर...अब तुम ये ज़रूर सोच रहे होगे कि मैने वो पिक्स तुम्हे क्यो दी...और वो किस की है...

असल मे...वो सब सम्राट की फॅमिली के मेंबर्ज़ की पिक्स है....

सम्राट, उसकी बीवी, उसकी 2 बेटियाँ और 2 बेटे.....

तुम इन पिक्स को अपने दादाजी को दिखाओगे तो वो तुम्हे सम्राट की दुश्मनी की वजह बता पायगे....क्योकि शायद ये बात तुम्हारे डॅड को भी ना पता हो....

और हाँ...इनमे से एक पिक का चेहरा नही है....और वो इसलिए क्योकि मैने अपनी बेटियों की कसम खाई थी कि कुछ भी हो जाए...मैं सम्राट के बड़े बेटे के बारे मे दुनियाँ को कुछ नही बताउन्गा.....इसे मेरी वदपरस्ति समझो या कसम रखने वाला....पर मैं उसके बारे मे किसी को कुछ नही बता सकता....

अब बाकी सब तुम्हे पता करना होगा....आगे मैं कुछ नही बता सकता....

लास्ट मे इतना ही कहुगा...कि मैं नही कहता कि तुम ये सब पढ़ कर मुझे माफ़ कर दो...या मुझे अच्छा इंसान समझो....बस एक रिक्वेस्ट करता हूँ...कि तुम मेरे पापो की सज़ा मेरी बीवी और बेटियों को मत देना....

बस इसी उम्मीद मे कि तुम मेरे परिवार का ख्याल रखोगे.....

एक लाचार पिता........
 
लेटर पढ़ने के बाद मेरा दिमाग़ हिल सा गया...विनोद की कही बातों ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया था....

मुझे समझ मे नही आ रहा था कि क्या करू...क्या ना करू....

क्योकि पहली बार किसी ने मुझसे इस तरह माफी मागी थी...वो भी उस इंसान ने जिसको मैने हमेशा अपना दुश्मन ही समझा....

आज उस इंसान ने पूरे ज़माने को छोड़ कर मुझ पर भरोशा जताया...जिस पर मैं कभी भरोशा करने की सोच भी नही सकता था....

रक्षा(मेरा कंधा हिला कर)- भैया....क्या हुआ...

मैं(चौंक कर)- हुह...कुछ...कुछ नही....सब ठीक है....

रक्षा- इसमे क्या लिखा है....

मैं(लेटर को फोल्ड कर के)- कुछ नही...तेरे काम का नही...तू..तू टेन्षन मत ले...ओके...

रक्षा(सिर हिला कर)- ह्म...अब..

मैं- अब...अब मैं घर जाउन्गा और तू आराम से सो जाना....

रक्षा- ह्म...और ये सब बात...वो रूम वाली...किसी से कुछ कहूँ कि...

मैं(बीच मे)- नही....किसी से कुछ मत कहना....और हाँ..ये सब ...जो ये सामान है ना...ये बात सिर्फ़ हमारे बीच रहेगी...ओके...

रक्षा- भैया...सब ठीक है ना....

मैं- हुह...सब ठीक है....तू मुझ पर भरोशा रख...मैं हूँ ना....

रक्षा- ह्म...आप पर पूरा भरोशा है....

मैं- चल फिर...मैं जाता हूँ...तू आराम कर....ओके...

और थोड़ी देर बाद मैं रक्षा को समझा कर वहाँ से घर निकल गया.....

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अंकित के घर......नेक्स्ट डे.....

सुबह जब मेरी आँख खुली तो कोई ज़ोर-ज़ोर से मेरे रूम का गेट पीट रहा था.....

आवाज़ से मेरी आँख तो खुल गई...पर मेरा सरीर अभी भी सो रहा था....मतलब थका हुआ था .....

""अंकित...अंकित बेटा....उठो....उठो बेटा....""

मैं(मन मे)- अफ हो...कोई सोने भी नही देता.....एक तो साला सारी रात उस लेटर मे लिखी बातों को सोचने मे निकल गई...और सुबह से ये...आअहह....

बड़ी मुस्किल से मैने अपनी बॉडी को मनाया और बेड पर बैठ गया....

मैं(ज़ोर से)- कौन है...

सुजाता- अरे बेटा मैं हूँ...सुजाता ...

मैं(गुस्से से)- तो मैं क्या करूँ...जाओ मुझे सोने दो...

सुजाता- अरे बेटा...ये सोने का टाइम नही...तुम जल्दी नीचे चलो....एक प्राब्लम हो गई है...

मैं- क्या...क्या हो गया अब....

सुजाता- अरे नीचे कोई वर्मा आया है...और वो तुम्हारे डॅड को सुनाए जा रहा है...कुछ पैसो का लफडा है शायद....

जैसे ही मैने वर्मा का नाम सुना तो मेरी झक्की खुल गई और मैं पूरी तरह होश मे आ गया....

मैं- वर्मा...इसकी तो मैं....ओके...आता हूँ...

और थोड़ी देर मे...मैं रेडी हो कर नीचे आ गया....मुझे देखते ही वर्मा ने एक कमीनी मुस्कान बिखेर दी....

वर्मा- आओ-आओ...तुम्हारा ही इंतज़ार था...

मैं(दाद से)- डॅड...आप प्ल्ज़ उपर जाइए....इन्हे मैं संभालता हूँ...ह्म..

मेरे कहने पर डॅड ने मुझे देखा और चुपचाप उपर चले गये....

मैं- हाँ तो वर्मा ...कैसे आना हुआ....

वर्मा(मुस्कुरा कर)- असल मे ...मैं यहाँ ये बताने आया हूँ कि मुझे नेक्स्ट 2 दिन मे पैसे चाहिए...वरना...तुम जानते हो...है ना...

मैं- 2 दिन मे...??

वर्मा- हाँ बच्चे....2 दिन...वर्ना तीसरा दिन तुम्हारे लिए बहुत बुरा हो सकता है...

मैं- अच्छा...चलो देखते है...

वर्मा(गुस्से से)- लगता है तेरे डॅड की इज़्ज़त नीलाम करनी ही होगी....बस 2 दिन रुक जा....फिर तो नीलामी होगी ही...

मैं- ह्म...अच्छा प्लान है...वेल..मेरे पास इससे अच्छा प्लान है...सुनोगे....

वर्मा(हैरानी से)- ह..हाँ..क्यो नही...बोलो...

मैं(वॉक करते हुए)- असल मे...मेरा प्लान 1 दिन का है...सिर्फ़ 1 दिन...

वर्मा(घूम कर)- और इस 1 दिन मे क्या होगा....

मैं- तुम मेरे डॅड की इज़्ज़त नीलाम करने के लिए 2 दिन चाहते हो....पर मैं...मैं 1 दिन मे सारा काम ख़त्म कर दूँगा....शायद तुम नीलामी करा ही सको....

वर्मा(मुस्कुरा कर)- अच्छा प्लान है....चलो देखते है...क्या करता है तू...

मैं(वर्मा को घूर कर)- मैं तेरी ऐसी हालत कर दूँगा कि तुझे अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए घूमना पड़ेगा....समझे....

वर्मा- वो तो वक़्त बातायगा...कि किसकी इज़्ज़त जाती है और किसकी बचती है...मैं जानता हूँ कि तू कुछ नही कर पायगा...और 2 दिन बाद मेरे कदमो मे ही गिरेगा..नही तो तेरे बाप की इज़्ज़त नीलाम होगी...समझा...हुह...

और इतना बोल कर वर्मा ने एक तरफ खड़ी सविता को देखा और पैर पटकते हुए घर से निकल गया....

मैं(सविता को देख कर)- चलो...अब एक कॉफी पीला दो....फिर इनका कुछ इंतज़ाम करते है...

इतना बोलकर मैं रूम मे आ गया और थोड़ी देर बाद कॉफी पी कर रेस्ट करने लगा....

करीब 2 घंटे के बाद सविता घबराई हुई सी मेरे रूम मे आई...
 
मैं(सविता को देख कर)- क्या हुआ...तुम इतनी घबराई हुई क्यो हो...

सविता- वो...नीचे...वो..पॉली...पोलीस....

मैं(बेड से उठ कर)- पोलीस...कहाँ...???

सविता- नीचे...तुम्हे गिरफ्तार करने....

मैं- मुझे गिरफ्तार....रूको...घबराओ मत...तुम रूको...मैं देखता हूँ....

जब मैं नीचे आया तो मेरे सामने रिचा, रफ़्तार और कुछ पोलीस के बड़े अधिकारी खड़े हुए थे....वहाँ मेरे डॅड और सुजाता भी थे...

आकाश- बेटा ये सब...ये क्या बोल रहे है...

मैं(हाथ दिखा कर)- एक मिनट डॅड....मैं बात करता हूँ...

मुझे देख कर एक अधिकारी आगे बढ़ा और बोला...

पोलीस- आपको हमारे साथ चलना होगा....

मैं- पर क्यो....

पोलीस- रिया का किडनॅप और खून करने के जुर्म मे....

रिया की बात सुन कर मैने रफ़्तार को देखा....जो मेरे देखते ही मुस्कुरा दिया....

मैं(रफ़्तार से)- रफ़्तार...ये सब क्या है....

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- क्या करे....ये क़ानून है....अब तो जाना ही होगा....

मैं(ज़ोर से)- पर हमारे बीच डील हुई थी रफ़्तार....

रफ़्तार(गुस्से से)- क्या बकता है...चुप...चलो...ले चलो इसे सर....

इतना बोल कर रफ़्तार मेरे पास आया और मुझे हथकड़ी डाल कर मुस्कुराया...

रफ़्तार(धीरे से)- क्या करू...कुत्ते की पूछ टेडी की टेडी ही रहती है...हाहाहा...

तभी मैने रिचा को देखा जो मुझे देख कर हल्का सा मुस्कुरा दी और फिर से रोने का नाटक जारी रखा....

मैं- ओह्ह..तो ये बात है....तुमने ये सही नही किया....तुम पछताओगे रफ़्तार...बहुत पछताओगे...

तभी रफ़्तार ने हवलदारों को इशारा किया और वो मुझे खीच कर ले गये...

और मेरे पीछे रफ़्तार और रिचा अपनी चाल पर ख़ुसीया मनाने लगे........

पोलीस स्टेशन मे...........

पोलीस मुझे पकड़ कर स्टेशन ले आई थी और मेरे फ़िंगर प्रिंट्स ले कर और कागज़ी कार्यबाही कर के मुझे एक साइड बैठा दिया गया था. ...मेरे लिए यही अच्छा था कि अब तक मुझे हवालात मे नही डाला गया था......

मैं- एक्सक्यूस मी...सर...एक मिनट...

पोलीस- हाँ बोलो....

मैं- क्या मुझे मेरा सेल फ़ोन मिल सकता है...(जो कि पोलीस ने ले लिया था )

पोलीस- सेल फ़ोन...नही...नही मिल सकता....हमारी जाँच पूरी होने तक नही....

मैं- सर मैं जानता हूँ कि क़ानून क्या है...बट बिलीव मे ....मैं आपकी जाँच मे आपका पूरा साथ दूँगा...मैं यहाँ से हिलुगा भी नही...बट सर...मुझे भी अपने बचाव मे कुछ करने का हक़ तो है ना....

पोलीस- ह्म...वो तो है...पर सॉरी...अभी आपकी कोई हेल्प नही कर सकता...बट शायद कुछ देर बाद मैं कुछ कर सकूँ....

मैं- ठीक है...थोड़ी देर और सही...

पोलीस- ओके..वेल...तुम जब तक टी/कॉफी एट्सेटरा. ज़रूर ले सकते हो...

मैं(मुस्कुरा कर)- 1 कॉफी प्ल्ज़....हो सके तो....

पोलीस(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...अभी मगवाता हूँ....

फिर थोड़ी देर मे कॉफी आ गई और मैं कॉफी पीते हुए आगे के बारे मे सोचने लगा....कि तभी वहाँ रफ़्तार पहुँच गया...साथ मे रिचा भी थी....

रफ़्तार(मुझे घूर कर)- ये क्या...इसे कॉफी किसने दी...और ये यहाँ क्यो बैठा हुआ है...इसे अंदर डालो...

पोलीस- मिस्टर.रफ़्तार.....रिलॅक्स....इसे मैने कॉफी दी है...और ये अंदर तभी जायगा...जब हमारी जाँच पूरी हो जाएगी...समझे....

रफ़्तार- बट सर....

पोलीस(बीच मे)- रफ़्तार...भूलो मत...हम सिर्फ़ शक़ की बिनाह पर किसी को अंदर नही डाल सकते...और हाँ ..मिस्टर.अंकित हमारी जाँच मे पूरा साथ दे रहे है...तो फिर टेन्षन की कोई बात ही नही...है ना...

रफ़्तार(दाँत पीस कर)- जी सर....आपने सही कहा....

तभी अचानक रिचा मुझ पर टूट पड़ी और मेरी कॉलर पकड़ कर मुझे 2-3 थप्पड़ जड़ दिए........

रिचा(चिल्लाते हुए)- कमीने...हरामजादे....क्या बिगाड़ा था मेरी बेटी ने...हाँ....तूने उस मासूम को.....

और इतना बोलकर रिचा फुट-फुट कर रोने लगी....इसी बीच पोलीस ऑफीसर ने एक लॅडीस पोलीस को रिचा को संभालने को बोल दिया और वो रिचा को खीच कर मुझसे दूर ले गई....

रफतात(मुस्कुरा कर)- मैने कहा था ना....तकलीफ़ तो होगी ही....

मैं(रफ़्तार को घूर कर)- मेरी छोड़.....मैं तो सह लूगा....पर जब मैं तकलीफ़ देना शुरू करूँगा ना...तो कोई नही सह पायगा....समझे....

रफ़्तार(ज़ोर से)- तुम जब दोगे तब...अभी तो तुम्हे और भी तकलाफ़ मिलने वाली है...देखते है कब तक सह पाते हो.....

पोलीस- रफ़्तार...तुम भी अंकित से दूर रहो ....याद रखो...तुम एक पोलीस वाले हो....सो....डोंट क्रॉस युवर लिमिट....

रफ़्तार- ओके सर...सॉरी...

और फिर रफ़्तार भी रिचा के पास पहुँच गया...

रिचा(रोते हुए)- सर....मेरी बेटी की डेड बॉडी....वो हमे कब मिलेगी...

पोलीस- मेडम...उसके लिए थोड़ा टाइम लगेगा...तब तक आप घर जाए....वहाँ आपका मन थोड़ा हल्का हो जायगा....

रिचा(चिल्लाती हुई)- नही...मेरा मन तो तब हल्का होगा जब ये(अंकित) कमीना फासी पर लटकेगा....तब....

पोलीस- मेडम प्ल्ज़....क़ानून अपना काम कर रहा है....हम भरोशा दिलाते है कि गुनहगार को छोड़ेगे नही...तब तक आप प्ल्ज़ घर जाए...प्ल्ज़...

पोलीस की बात का रिचा पर कोई असर नही हुआ...वो अपनी जगह पर बैठी हुई रोती रही....तभी पोलीस ने रफ़्तार को इशारा किया....और रफ़्तार उस लॅडीस पोलीस के साथ रिचा को घर ले कर निकल गया....

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