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चूतो का समुंदर

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नेक्स्ट मॉर्निंग...........

सुबह -सुबह हॉल मे अंकित , आकाश , सुजाता और सोनू(सविता का बेटा) नाश्ता करने मे बिज़ी थे...तभी वहाँ रिचा आ धमकी और उसको देख कर सब लोग चौंक गये....

चौंकने की वजह थी रिचा की हालत....उसे देख कर सॉफ पता चल रहा था कि वो बहुत परेशान है....

आँख सूजी हुई , उपेर से सूखे हुए आँसुओ के निशान ...सॉफ बता रहे थे कि वो बहुत देर से रोती रही है....

उसके कपड़े भी बिगड़े हुए , बाल बिखरे हुए.....जो उसकी हालत को और ज़्यादा खराब दरसा रहे थे....

रिचा को देखते ही मैं अपनी जगह से उठा और उसके पास पहुँच गया...

मैं(झल्ला कर)- तुम यहाँ क्या कर रही हो ..और ये...कैसी हालत बना रखी है तुमने...

रिचा(रुआसी हो कर)- मेरी बेटी कहाँ है....

मैं(हैरानी से)- क्या...मुझे क्या पता...तुम्हारी बेटी से मुझे क्या लेना-देना....

रिचा(मेरी कॉलर पकड़ कर)- झूट मत बोलो....मेरी बेटी तुम्हारे पास है...बताओ कहाँ है वो...

मैं(गुस्से से अपनी कॉलर छुड़ा कर)- पागल हो गई क्या......

रिचा(रोना तेज कर के)- हाँ हाँ पागल हो गई हूँ...मुझे मेरी बेटी चाहिए...मेरी बेटी चाहिए बस...

मैं(गुस्से से)- तेरा दिमाग़ खराब है क्या...तेरी बेटी का तुझे पता होगा..मुझे क्या पता...

रिचा(चिल्ला कर)- अंकित...मेरी बेटी मुझे वापिस कर दो वरना...

मैं(दाँत पिसते हुए)- वरना...अरना क्या ....मैने कहा ना तेरी बेटी मेरे पास नही...बस...अब जा यहाँ से...नही तो मेरे आदमी तुझे बाहर फेक देगे...जा...

रिचा(चिल्ला कर)- तो फेक दो...पर मेरी बेटी मुझे लौटा दो प्ल्ज़....

और इतना बोल कर रिचा रोते हुए ज़मीन पर बैठ गई...

अब तक डॅड और बाकी सब भी हमारे पास आ गये थे...सबके चेहरे पर एक ही सवाल था कि ये औरत क्या बक रही है....

आकाश- अंकित...ये औरत क्या बोल रही है...

मैं(खीज कर)- पता नही...इसकी बेटी गायब हो गई....और इसका कहना है कि वो मेरे पास है...

रिचा(उपर देख कर)- कहना नही ....मैं जानती हूँ वो तुम्हारे पास है...

रिचा की बात का मैं जवाब देने ही वाला था कि डॅड ने मुझे रोक लिया....

आकाश- मुझे पूरी बात बताओ....क्या हुआ....

डॅड की बात सुनकर रिचा ने रोते हुए कल रात की सारी घटना बता दी...जिसे सुनकर बाकी सबके साथ मैं भी हैरान था...

आकाश- पर उस वक़्त तो अंकित मेरे साथ था....

रिचा- वो खुद नही आया था...उसने गुंडे भेजे थे...

मैं(गुस्से से)- मैने कोई गुंडा नही भेजा....मैं आख़िर क्यो करूँगा ये सब...हाँ...

रिचा(मुझे घूर कर)- क्योकि तुम उसे पाना चाहते थे....याद है ना...

मैं बैठ कर रिचा को घूरते हुए धीरे से बोला...

मैं- अगर उसे पाना ही होता तो अब तक वो मेरे नीचे होती...समझी....और सुन..मैं किसी को फोर्स कर के नीचे नही सुलाता....याद रखना...

सुजाता(चिल्ला कर)तो कहाँ है मेरी बच्ची...तुम्हारे अलावा और कौन है जो उसे...

मैं(बीच मे, कड़क आवाज़ मे)- चिल्लाओ मत....चिल्लाने से वो आने वाली नही...मेरी बात सुन...और पहले चुप हो जा...और मेरी बात ध्यान से सुन...

मेरी बात सुन कर रिचा चुप हो गई और हसरत भरी निगाहो से मुझे देखने लगी...

मैं- देखो...रिया मेरे पास नही...कसम से ...पर मैं यकीन दिलाता हूँ कि अगले 24 घंटे मे रिया तुम्हारे पास होगी...ओके...अब रोना-धोना बंद करो और अपने घर जाओ...रिया अब मेरी जवाबदारी है...ठीक...

मेरी बात सुनकर रिचा ने हाँ मे गर्दन हिला दी और फिर मैने सुजाता को इशारा किया तो उसने रिचा को संभाला और थोड़ी देर बाद रिचा अपने घर निकल गई...

आकाश(रिचा के जाते ही)- ये सब क्या चल रहा है...

मैं- आप टेन्षन मत लो...मुझे लगता है कि किसी ने मेरे नाम की आड मे रिया को उठा लिया है....पर वो कोई भी हो...मेरे हाथो से बचेगा नही....

और इतना बोल कर मैं भी घर से निकल गया......और तभी मुझे होटल से कॉल आ गया...

मैं(मन मे)- अब इसको क्या कहूँ...चलो डाइरेक्ट मिल ही लेगे...

और मैने कॉल इग्नोर करके कार चलाना जारी रखा.....

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sexi munda wrote: ↑ 22 Jul 2017 20:20
मस्त अपडेट है अगले अपडेट का इंतजार रहेगा
 
अकरम के घर......

अकरम के घर का महॉल अभी तक पूरी तरह से ठीक नही हुआ था....पर जूही को छोड़ कर बाकी सब ने जिंदगी मे आगे बढ़ाना शुरू कर दिया था...

अकरम , वसीम के रूम मे खड़ा हुआ था और सबनम उसे वसीम के कवरड ने निकाल-निकाल कर कुछ फाइल्स पकड़ा रही थी...

सबनम(फाइल्स देते हुए)- ये वर्मा कंपनी. की है...ये रही तनेजा ब्रदर्स की...और ये रही उस ऑफीस की जो अभी बनने वाला था....और...

तभी सबनम की नज़रें अकरम से मिली और वो चुप रह गई...अकरम ने इस वक़्त सबनम का हाथ पकड़ रखा था...

सबनम- क्या हुआ....

अकरम(सबनम के हाथ से फाइल्स ले कर)- मोम....आप ठीक है ना...

सबनम(नज़रें चुरा कर)- हाँ बेटा...मैं ठीक हूँ...तू ये फाइल्स...

सबनम इतना ही बोल पाई थी कि अकरम ने उसका चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ घुमा दिया....

अकरम(आँखो मे झाँकता हुआ)- मोम...आप ठीक नही हो...आप दर्द को छिपाने की नाकाम कोसिस कर रही हो बस...

सबनम(अकरम के हाथ थाम कर)- नही बेटा...दर्द कैसा...जिंदगी मे गम और खुशी तो आते-जाते रहते है...उसमे...उसमे...

और इतना बोल कर सबनम सिसकने लगी...

अकरम- नही मोम...प्ल्ज़...रोओ मत मोम..प्ल्ज़...

सबनम(सिसकते हुए)- हुह...क्या करूँ...ये आँसू मेरे बस मे नही बेटा...निकल ही पड़ते है...

अकरम- पर वो इन आँसुओ के लायक नही है.....

अकरम की बात सुन कर सबनम का दिल धक्क कर गया...और उसके रोते हुए चेहरे पर हैरानी के भाव उभर आए...

सबनम(अपना चेहरा छुड़वा कर)- क्या...क्या कहा तूने....तेरा दिमाग़ तो ठीक है ना...तू अपने डॅड के बारे मे ही बोल रहा है ना....हाँ...

अकरम(सिर हिलाते हुए , पलट कर)- हाँ...मैं वसीम ख़ान के बारे मे ही बोल रहा हूँ...वो इन आँसुओं के लायक नही है....नही है...

सबनम (अकरम के सामने आ कर, ज़ोर से)- तू पागल हो गया क्या....अपने डॅड को नाम से ...क्या हो गया है तुझे...हाँ..

सबनम ने अकरम के हाथ पकड़ कर उसे झकज़ोर दिया...और अगले ही पल अकरम ने अपने हाथ झटक कर अलग किए और सबनम के कंधे पकड़ लिए...और उसकी आँखो मे घूरते हुए कड़क आवाज़ मे बोला...

अकरम- नही...मैं वसीम ख़ान के बारे मे बोल रहा हूँ...वसीम ख़ान के...अपने डॅड के बारे मे नही...समझी आप....समझी...

अकरम की बात सुनकर सबनम कुछ ना बोली....बस वो फटी आखो से अकरम को देखती रही ...

अकरम(घूरते हुए)- हाँ मोम.....वसीम ख़ान मेरा बाप नही था....मेरा बाप अनवर ख़ान था...अनवर ख़ान.....

अकरम के मुँह से आनवार का नाम सुनकर तो सबनम को ज़्यादा रोना आने लगा.....पर बट बनी अकरम को देखती रही पर अभी भी कुछ नही बोली.....

अकरम- इसलिए ये आँसू जाया मत कीजिए....इन पर वसीम ख़ान का कोई हक़ नही ....

अकरम की बात सुनकर सबनम फिर से सुबकने लगी....पर इस बार आँसू अनवर के लिए थे...वसीम के लिए नही...

अकरम- मोम...प्ल्ज़...उस आदमी के लिए...

सबनम(बीच मे)- नही...चुप कर...वो आदमी...आदमी...क्या लगा रखा है...माना कि वो तेरे डॅड नही थे...पर थे तो डॅड की तरह ही...और मैने उनसे शादी की थी ...शादी...इस नाते वो तुम्हारे डॅड ही थे...समझा...

अकरम(झल्ला कर)- पर वो इंसान इस लायक ही नही था कि...

सबनम(चिल्ला कर)- बस...अब एक शब्द भी मत निकालना...समझा...

अकरम(गुस्से से सास ले कर)- हुह...लगता है आपको सच बताना ही पड़ेगा...तभी आप समझ पायगी कि मैं क्या कह रहा हूँ और क्यो कह रहा हूँ....

सबनम(हैरान हो कर)- सच...कैसा सच...तू कहना क्या चाहता है...हाँ..

अकरम ये बात सुन कर थोड़ा सोच मे पड़ गया और दूसरी तरफ सबनम का रोना बढ़ने लगा...

अकरम(पानी उठा कर)- मोम...आप पहले पानी पियो...और रोना मत प्ल्ज़....मैं आपको सब बताता हूँ...प्ल्ज़ मोम...रोना मत...

फिर अकरम ने सबनम को पानी पिलाया और जब सबनम कुछ नॉर्मल हुई तो अकरम ने अपनी बात बतानी शुरू की......

अकरम ने सबनम को सारी बात बता दी...सरफ़राज़ ख़ान कैसे वसीम बना...उसने किस-किस को मारा और दौलत हथिया ली...और अंकित से दुश्मनी....सब कुछ...

जिसे सुनते हुए सबनम की आँखो से आँसू बहते रहे और वसीम की सच्चाई सुनते हुए उसके दिल मे वसीम के लिए जो थोड़ा प्यार बाकी था ...वो जगह भी नफ़रत ने ले ली....

अकरम(सबनम को देख कर)- ये थी सरफ़राज़ की सच्चाई...उसने जो भी किया सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए किया....उसने आपके घर और ससुराल वालो को सिर्फ़ दौलत के लिए मारा....और मेरे डॅड और सकील अंकल को भी सिर्फ़ दौलत की खातिर ख़त्म किया....

सबनम का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था....तभी रूम मे सादिया आ गई और सबनम को संभालने लगी...

सादिया- नही सब्बो...मत रो...अकरम...क्या हुआ इसे...

अकरम- आज इन्हे रो लेने दो आंटी...

सादिया(अकरम को घूर कर)- ये क्या बोल रहा है...क्यो रोने दूं...चुप हो जा सबनम...

अकरम- आपको भी सच्चाई पता होना चाहिए आंटी ....

सादिया(चौंक कर)- क्या...कैसी सच्चाई...

अकरम- बताता हूँ...सुनिए...

और फिर अकरम ने वही बातें सादिया को भी बता दी...जिसे सुनकर सबनम के साथ सादिया भी रोने लगी....पर दोनो के आँसू अपने पतियों और घरवालो के लिए थे...वसीम से तो सिर्फ़ नफ़रत थी...नफ़रत...

अकरम(दूसरी तरफ पलट कर )- आप लोगो को एक और सच भी बताना है...

सादिया(रोते हुए)- अब क्या बाकी रह गया....दिल छलनी तो कर ही दिया...अब क्या जान भी ले लेगा....हाँ...

अकरम- नही...जान तो मैने ले ली...

सबनम(चौंक कर)- क्या..क्या मतलब तेरा...

अकरम(पलट कर दोनो को देखते हुए)- वसीम ख़ान को मैने मारा है...अपने हाथो से....

अकरम की बात सुन कर सबनम और सादिया के मुँह खुले के खुले रह गये...दोनो का रोना बंद हो गया और दोनो कभी अकरम को देखते तो कभी एक-दूसरे को....

अकरम(आह भर कर)- मैं बाद मे आता हूँ....

और इतना बोल कर अकरम वहाँ से निकल गया और दोनो बहने हैरानी से एक-दूसरे को देखने लगी.....

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पोलीस स्टेशन मे..........

घर से निकलने के कुछ देर बाद मैने एक के बाद एक कर के 10 कॉल कर डाले पर सामने वाले ने मेरा कॉल रिसीव ही नही किया....

परेशान हो कर मैने कार पोलीस स्टेशन की तरफ घुमा दी....जहा गेट पर ही मुझे इंस्पेक्टर.आलोक दिख गये .....

मैं(ज़ोर से)- हेलो सर...हेलो..

आलोक(पलट कर)- ओह..अंकित...आओ-आओ...

मैं(पास पहुँच कर)- मैं आपको कब्से कॉल कर रहा ....आपने लिया क्यो नही...

आलोक(जेब चेक कर के)- ओह..फ़ोन...अर्रे...वो फ़ोन अंदर रह गया...और मैं यहाँ कमिश्नर सर के साथ खड़ा था पिछले आधे घंटे से...

मैं- ओह...कोमिशनर....क्यो..कुछ कांड हो गया क्या...

आलोक- कांड..नही वो...वो बाद मे..पहले तुम बोलो...बड़े टेन्षन मे दिख रहे हो...क्या हुआ...

मैं- अरे हा..वो रिया किडनॅप हो गई...

आलोक(हैरानी से)- रिया...कौन ...वो रिचा की बेटी...

मैं- ....वही...और वो रिचा समझती है कि मैने उसे किडनॅप.....

तभी आलोक ने मुझे चुप रहने का . किया....

मैं(चौंक कर)- क्या हुआ...

फिर आलोक ने मुझे आस-पास खड़े हवलदरो को दिखाया और अंदर चलने को कहा...

फिर हम दोनो आलोक के कॅबिन मे चले गये....

आलोक- अब बोलो..क्या हुआ ....

फिर मैने आलोक को पूरी बात बता दी और फिर वहाँ से वापिस आने लगा...वापिस आते हुए मेरी नज़र हवालात की तरफ गई...जो खाली था...

मैं(चौंक कर)- रफ़्तार . है..

आलोक(सिर . कर)- ओह्ह..मैं बताना भूल ही गया...असल मे कल रात ही रफ़्तार को छोड़ दिया गया...जमानत पर....

मैं(गुस्से से)- क्या...कल रात को छोड़ दिया और आपने अब तक...

आलोक- कल मैं यहाँ था ही नही...तभी कमिशनर का कॉल आया और 1 आदमी उसे छुड़ा ले गया....

मैं- तो आज बता देते...

आलोक- आज मैं आया ही था कि कमिशनर आ गये...और उनके जाते ही तुम...अब कब बताता...

मैं(सिर पीट कर)- ये सही नही हुआ...वो साला ज़रूर कुछ बबाल करेगा ...बहुत बड़ा कमीना है साला...

आलोक- वो तो है...बट डोंट वरी..हम तुम्हारी सुरक्षा का इंतज़ाम कर लेगे..

मैं- अरे..मुझे टेन्षन नही...मैं संभाल लुगा...बस वो रक्षा को कुछ ना कर दे...उसका इंतज़ाम करना होगा...

आलोक- डोंट वरी...हो जायगा...

मैं(सोच कर)- वैसे उसे निकलवाया किसने ....

आलोक- पता नही...मैने बताया ना कि मैं यहाँ था ही नही....

मैं- ह्म..अच्छा..मैं चलता ...मुझे कुछ काम याद आ गया...आपको बाद मे कॉल करता हूँ..ओके...

और फिर मैं वहाँ से निकल आया और कार मे बैठे हुए सोचने लगा कि कहीं रफ़्तार ने ही तो नही रिया को किडनॅप कर लिया....

ये सोच दिमाग़ मे आते ही मैने कार को दूसरी तरफ दौड़ा दिया....

कॉल्लबेल बजते ही जब गेट खुला तो सामने खड़ा सक्श मुझे देखते ही . हो गया....

""ओह...तो आ गये आप....बड़ी देर कर दी आते-आते......आइए...अंदर आइए.....""

पोलीस स्टेशन से निकल कर मैं सीधा रफ़्तार के घर पहुँचा ....जहा पर रफ़्तार की बीवी मेरा ही इंतज़ार कर रही थी....

अंदर आते ही मैने गौर किया कि सुमन इस वक़्त घर मे अकेली ही थी....

मैं(अपनी आँखे चारों तरफ घुमा कर)- आपकी बेटी . है....

सुमन- वो तो बाहर गई है...पर आपको उससे क्या काम....आपके काम का सामान तो आपके सामने है...है ना...

इतना बोलकर सुमन ने एक तीखी मुस्कान बिखेर दी....

आज मुझे सुमन का अंदाज कुछ बदला-बदला नज़र आ रहा था....पर इसकी वजह क्या थी...अब ये तो पता करना ही होगा....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म..वो तो है...पर शायद आप भूल गई कि मैने आपसे कुछ काम बोला था...याद है ना....

सुमन(हैरानी से)- ...बोला तो था...पर ये मैं कैसे करू...नही...मैं नही कर सकती....

मैं(सिर हिला कर)- ना..ना...ये तो ग़लत है....आपने खुद कहा था कि आप मेरे लिए ये काम कर देगी...मैने आपको फोर्स नही किया था...सिर्फ़ पूछा था..और आपने . बोला था...याद है ना....

सुमन- मुझे याद है...पर ये इतना आसान नही...जितना मैने सोचा था....मैने अपने पति से कितनी बार पूछने की कोसिस की...पर वो बताते ही नही...बस गुस्सा करके मुझे चुप करा देते है.....

मैं(मुस्कुरा कर)-ह्म्म..तो इसमे उदास होने की क्या बात....अभी बात नही बनी तो आगे बन जाएगी...है ना...कम से कम अभी तो .....वरना मैं चला...

और इतना बोल कर मैने मुड़कर जाने का नाटक किया ...पर सुमन ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया......

सुमन- नही...आप ऐसे नही जा सकते...

मैं(घूम कर)- ये ऑर्डर है या धमकी. .हाँ...

सुमन(मुस्कुरा कर)- रिक्वेस्ट...

मैं(सुमन की तरफ बढ़ कर)- पर यहा रुकने की कोई वजह भी तो नही...क्या करूँगा रुक कर...

सुमन(अपना सिर झटक कर)- वजह आपके सामने है....

मैं(सुमन के गाल पर हाथ फिरा कर)- ओह्ह...तो ये वजह है....पर इसका मैं क्या करू...ह्म्म...

सुमन(मेरी आँखो मे देख कर)- जो आपका दिल करे....

मैं(मुस्कुरा कर)- क्यो...ये क्या मेरी प्रॉपर्टी है ....

सुमन(मुस्कुरा कर)- प्रॉपर्टी किसी की हो....आप उसे कर सकते हो ....

मैं- ओह्ह ऐसा क्या....

सुमन(शरमा कर)-ह्म...

मैं- . ..तो आज हम इस प्रॉपर्टी के बॅक साइड का मुआयना करेंगे...ओके...

सुमन(मुँह खोल कर)- आआ..बॅक साइड....क्या आपको फ्रंट साइड पसंद नही आई....

मैं(मुस्कुरा कर)- है...फ्रंट साइड भी पसंद है....पर आज फ्रंट के अलावा बॅक साइड घूमने का भी मन है...

सुमन(शरमा कर)- आप भी ना....ठीक है...जैसा आप कहे....फ्रंट , बॅक, टॉप, डाउन....सब घूम लेना ...अब तो रुकेगे ना....

मैं(सुमन को अपनी बॉडी से चिपका कर)- ह्म..अब तो प्रॉपर्टी चेक कर के ही जायगे.....आओउउम्म्म्म....

और मैने सुमन को एक किस कर दिया....
 
सुमन (शरमा कर)- तो अंदर चलिए ना....

मैं- चलते है...पर पहले कुछ पिलाओ तो....प्रॉपर्टी देखने वाले है....कुछ खातिर तो करो...

सुमन- ओह...सॉरी भूल ही गई...क्या लेगे आप...टी, कॉफी या कुछ और...

मैं- विस्की...मिलेगी क्या...??

सुमन(मुस्कुरा कर)- ह्म..क्यो नही मिलेगी...आप बैठिए...मैं अभी इंतज़ाम करती हूँ....

और फिर सुमन किचन मे चली गई और मैने अपने आदमी को कॉल कर दिया....

मैं(कॉल पर)- तुम लोग 3 घंटे के बाद आ जाना...ओके...

और फिर मैने कॉल कट की और सुमन का वेट करने लगा.....

थोड़ी देर बाद मैं पेग लगा रहा था और सुमन मेरे सामने बैठी शरमा रही थी...

मैं(सीप मार कर)- आ ...इतना शरमाओगी तो मज़ा नही आयगा ....छोड़ो ये शर्म...और खुल कर मज़ा लो...

सुमन- वो...कोसिस करूँगी...शायद जल्दी...

मैं(बीच मे)- ओके...ओके....मैं ठीक कर दूँगा....पर तुम मुझे ये बताओ कि आज तुम्हे इतना टाइम कैसे मिल गया...आइ मीन तुम्हारी बेटी....कहाँ है वो...

सुमन- वो आज पिक्निक मनाने गई है...अपने फरन्डस के साथ...

मैं(हैरानी से)- क्या....पिक्निक...उसका बाप जैल मे है और उसे पिक्निक दिख रही है....वाह...

सुमन- नही..नही...उसे तो पता भी नही कि उसके पापा गिरफ्तार हो गये....असल मे मैने उसे बताया नही....वरना वो टूट जाती....वो अपने पापा से बहुत प्यार करती है....इसलिए...

मैं- ओह्ह...कोई नही...तुमने ठीक किया....खैर...उसे छोड़ो...तुम इतनी दूर क्यो बैठी हो...ज़रा पास मे आओ....प्रॉपर्टी देखने का मूड तो बना लूँ...

फिर सुमन उठ कर मेरे पास आई और मैने उसे अपनी गोद मे बैठा लिया और उसकी गांद सहलाते हुए पेग लगाने लगा....

थोड़ी देर तक सुमन यू ही मेरी गोद मे बैठी रही....कभी मेरा सीना सहलाती तो कभी मेरे गाल....कभी मेरे होंठो को चूम लेती तो कभी मेरी पेंट मे क़ैद मेरे लंड को दबाती....

मैं भी पेग पीते हुए उसकी गांद को दबाता तो कभी उसकी कमर को...कभी उसके बूब्स दबाता तो कभी बूब्स को ब्लाउस के साथ ही काट लेता....

दोनो की ये मस्ती भरी हरक़ते हम दोनो को गरम कर चुकी थी....

फिर मैने पीना बंद किया और सुमन की साड़ी खोलने लगा....सुमन भी घूम कर अपनी . निकालती रही....

उसकी . अलग कर के मैने उसके ब्लाउस को भी बिना देर किए अलग कर दिया और उसके बूब्स को ब्रा के साथ मुँह मे भर लिया....

सुमन- ओह्ह्ह...अंकित....आअहह.....काटो मत..आऐईइ....

मैं हाथो से सुमन की गांद को मसल रहा था और उसके बूब्स को बारी-बारी चूस रहा था....

थोड़ी देर मे ही सुमन की ब्रा मेरे थूक से गीली हो गई और उसने खुद ही अपनी ब्रा को अलग कर दिया ....

सुमन(मेरा सिर बूब्स पर दबा कर)- आअहह....अब चूसो मेरे राजा...ज़्यादा मज़ा आयगा....उउउम्म्म्म....

मैं सुमन की ये तड़प देख कर हैरान था...पर मैने अपना जाम जारी रखा और एक झटके मे उसका पेटिकोट खोल कर उसके पैरों तक पहुँचा दिया....

सुमन आप पूरी नंगी हो गई थी....उसने पनटी नही पहनी थी...उसका नंगा . देख कर मेरा रुकना मुस्किल था...

मैने उसे झट से बाहो मे उठाया और बेडरूम मे आ गया और आते ही उसे बेड पर पटका और पलक झपकते ही खुद को नंगा कर दिया....

मेरा तना हुआ लंड देख कर सुमन ने अपने होंठ को अपने दातों से चबा लिया....

सुमन- उउउम्म्म्म....आओ मेरे राजा...अब देर ना करो...

मैं(मन मे)- ये साली तो आज कुछ ज़्यादा ही गरम हो रही है...बात क्या है....अरे छोड़ो...पहले इसके मज़े ले लूँ...फिर देखता हूँ...

और मैं मुस्कुराता हुआ सुमन के उपर आ गया और हम दोनो किस करने लगे ...

सुमन- सस्स्स्रररुउउउप्प्प....सस्स्रररुउउ....उउउंम्म...आअहह...उउउम्म्म्म...

मैं- उउउंम्म....उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...

सुमन- आअहह...अब और ना तडपाओ....उूउउंम्म....उउउंम्म...

मैं- उउउम्म्म्म...उउउंम्म..आहह...हा मेरी जान....अभी लो ...

और इतना बोल कर मैने उसके होंठो से उसके बूब्स पर और फिर कमर पर पहुँचा...और चूमने चाटने के बाद उसकी चूत पर मुँह लगा दिया....

सुमन- आअहह....खा जाओ इसे...उउउंम्म...बहुत परेशान करती है...आआहह....

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प्प...आअहह..मैं आज सारी परेशानी मिटा दूगा...सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प्प.....

सुमन-ओह्ह.....मज़ा...आ..गया...आअहह.......

मैं-सस्स्रररुउपप...सस्र्र्ररुउउप्प..सस्र्र्ररुउउप्प...

सुमन-ऊवू..मा...किसी ने...नही चॅटी थी...उउउंम्म....आअहह...मज़ा...आ...गया...ऊहूहह...

मैं थोड़ी देर तक सुमन की चूत चाट ता रहा ऑर फिर मैने चूत को मुँह मे भर लिया...

सुमन-ओह्ह..माआ….म्मार्र..ज्जाोऊऊगगीइ….

प्प्पागगाल्ल…क्कार्र…दडिईईय्या….आअहह…म्माआ....

मैं-उम्म्म्ममम…उउम्म्म्मम…उउहमम्म…उउउहमम्म..

सुमन—आहह…ऊओ..ययईसस…यईीसस….कचूस्स…ल्लूओ…म्म्मी.ररी…ररराज्ज्जज….प्पूउर्रा…आअहह...

सुमन की मस्ती इतनी बढ़ गई थी कि वो ठीक से बोल भी नही पा रही थी और तेज़ी से अपनी गांद हिला रही थी......

मैं-उउउंम्म..उउउंम्म..उउंम....

सुमन-आअहह..म्म्मैउईयाईिन्न्न…आईईइ…ऊहह…आईईइ…कच्छूस्स्स ल्लू..

सुमन पूरी मस्ती मे झड्ने लगी ऑर मैं उसकी चूत को मुँह मे भरे हुए उसके चूत रस को पीने लगा….

जब मैने चूत रस पी लिया तो उसकी चूत को मुँह से निकाल कर बैठ गया...

सुमन- आअहह….सच मे..मार ही डाला…क्या..करते हो..
 
मैं(मुस्कुरा कर)- नही...मरेगी तो अब...वो भी तेरी गांद....

और सुमन कुछ कहती उसके पहले ही मैने उसे पलटा दिया और उसकी गांद के फाके फैला कर गांद के छेद पर जीभ फिरा दी.....

सुमन- ऊहह...माआ....

मैं- सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प....सस्स्ररुउउप्प्प्प.....

सुमन- आअहह...क्या करते हो...

मैं- पिछला एंटरेस तो टाइट लगता है....ह्म...

सुमन- हाँ...वहाँ से कोई नही जाता....

मैं- ह्म्म...हम है ना...आज खोल देगे ...सस्स्स्रररुउउउप्प्प्प्प्प...

सुमन- ऊहह....मार दोगे.....आअहह...

और फिर थोड़ी देर तक मैने थूक से गांद को चिकना किया और एक उंगली से गांद मारने लगा....

सुमन- आआहह....मार दिया रे....

मैं(उंगली डालते हुए)- अभी तो मज़ा लो...मरने मे टाइम है...

और मैं तेज़ी से उंगली को अंदर-बाहर करता रहा....

थोड़ी देर बाद मैने उंगली को बाहर निकाल दिया और सुमन को अपना लंड दिखाने लगा....

मैं- अब आजा....किसका इंतज़ार है...

सुमन भी मेरे कहते ही समझ गई और मुझे लिटा कर मेरा लंड हिलाने लगी .....

और फिर सुमन ने मेरे लंड के टोपे को मुँह मे लेकर चूसा और मुँह से निकाल के टोपे पर जीभ चलाने लगी…

सुमन-उउंम..सस्स्रररुउउप्प…उउउंम्म..उउंम

मैं-आहह….अच्छा कर रही हो…. अंदर लो...…

सुमन-उउंम्म…सस्रररुउुुउउप्प….सस्स्रररुउउप्प….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प्प

मैं-यस..यस…अंदर ले लो…पूरा...आहह

थोड़ी देर बाद सुमन ने अपनी स्पीड तेज कर दी ऑर लंड को अपने गले की गहराई मे ले जाते हुए चूसने लगी

सुमन-उउउंम्म…उउउंम्म…उउउम्म्म्ममम…उूुुउउम्म्म्म…उूउउम्म्म्म…सस्स्स्स्रर्र्ररुउुुुउउ…स्रसरर्र्र्ररुउुुउउ…सस्रसरसरररुउुुउउ…..सस्स्र्र्ररुउउ…

उूउउम्म्म्मम.....ुआओओउउम्म्म्ममह….टेस्टी है….सच मे…

मैं- तो चूस ना...निकाला क्यो...

सुमन- आहह...उूउउम्म्म्म...स्स्सल्ल्लूउउग़गग...सस्स्रररूउउगग़गग...सस्स्रररूउउग़गग...उउम्म्म्म...उउंम्म...

मैं- ओह्ह्ह एस....और तेज....आअहह....तेज..तेज...तेजज्ज़...आआहह...

सुमन- उउउंम्म...उउउंम्म...उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्मम...उूउउम्म्म्म...

ऐसे ही थोड़ी देर तक सुमन मेरे लंड की चुसाइ करती रही और लंड को पूरा ताव मे कर दिया....

मैं(सुमन को रोक कर)- बस ....अब आजा...तेरा बॅक एंट्रेन्स ओपन कर दूं....

सुमन- थोड़ा तेल लगा लो...

फिर मैने सुमन को कुतिया बनाया और देर सारा तेल उसकी गांद के छेद पर डाल कर अपना लंड सेट किया....

सुमन-धीरे से डालल्ल्लनंनणन्नाआआअ....आाआऐययईईईई....

सुमन की बात पूरी होने से पहले ही मैने लंड पकड़ कर धक्का मारा और आधा . . मे डाल दिया....

सुमन की जोरदार चीख रूम मे गूँज उठी और उसकी आँखे नम हो गई ....

सुमन- आआआअहह.....धीरे...से कहा था...आआईयइ...

मैं- ये धीरे ही था...ये ले...

सुमन- आाऐययईईईईईईई....म्म्मा....माआ....आआहह.....न्न्ंहिी...निकालो...पल्लज़्ज़्ज़...

दूसरा धक्का मारते ही सुमन तड़पने लगी....अब आधा लंड उसकी गांद मे जा चुका था....

इससे पहले की सुमन सम्भल पाती मैने दो धक्के मारे और पूरा लंड गांद मे उतार दिया......

सुमन- आाआईयईईईईईई......म्म्मा आआआ.....आआआअहह....निकाल्लू.....आआहह....

मैं- बस...हो गया....अब सिर्फ़ मज़ा आयगा...बस....

और मैं प्यार से सुमन की पीठ सहलाने लगा....फिर मैने झुक कर उसकी पीठ पर किस करना शुरू कर दिया और साथ मे हाथ से उसके बूब्स दवाने लगा....

तभी मेरी नज़र ड्रेसिंग टेबल मे लगे आईने पर पड़ी और मैं मुस्कुरा दिया.....

मैं- सुमन....अब ठीक है ना...

स्यमान- नहिी...पूरा नही.....दर्द हो रहा है....

मैं- ह्म..अभी कम करता हूँ....और मैने पोज़िशन ली और हल्के धक्को के साथ गांद मारना शुरू कर दी....साथ मे हाथो से उसकी चूत भी सहलाने लगा....

थोड़ी देर बाद सुमन की सिसकी निकलना शुरू हो गई....ये इसरा था की उसको मज़ा आना शुरू हो गया है....

मैने तुरंत स्पीड बढ़ा कर गांद मारना शुरू कर दिया...और सुमन भी सिसकते हुए अपनी गांद को पीछे करने लगी....

सुमन- आअहह....आअहह...आअहह...

मैं- अब मज़ा आया ना...हा ...

सुमन- आअहह....हा...आआया....पर दर्द...आआहह...

मैं- वो भी चला जायगा....बस मज़े कर ...

और मैं तेज़ी से गांद मारने लगा....और रूम मे गांद चुदाई की आवाज़े . लगी .....

मैं- मूव युवर आस...एस्स...लाइक दिस बेबी...एस...एस्स....

सुमन-आअहह....लाइक तीस....उम्म्म..ईए...एस्स...एस्स...एस्स ..आआहह....

मैं- या बेबी ....मूव इट...फास्टर...एस्स...फास्ट...फास्ट...

सुमन- एसस्स...यू लाइक इट...एस्स....एस्स....आआहह...आअहह....

मैने सुमन की गांद पकड़ कर चुदाई की स्पीड बढ़ा दी...और सुमन की गांद तेज़ी से आगे-पीछे होती हुई...गांद मे लंड का मज़ा लेने लगी....

सुमन- ऊओ...अंकित...एसस्स...आअहह...आअहह..आअहह.....

मैं समझ गया कि वो दुबारा से झड्ने के करीब आ गई....तो मैं तेज धक्के मरने लगा...और कुछ धक्को बाद ही वो झड्ने लगी...

सुमन- ओह्ह्ह...एसस्स...ईीस्स...एसस्स...आआओउउंम्म...ऊओह...माइन गाऐयइ...आआहह...

सुमन के झड्ते ही मैने लंड उसकी गांद से निकाला तो पुउक्क की आवाज़ के साथ मेरा लंड बाहर आ गया ....और हवा मे लहराने लगा....

तभी मेरी नज़र गेट पर पड़ी और मैं चिल्ला पड़ा....

मैं- मर गये....

सुमन(उल्टी पड़ी हुई)- आहह...मारी तो मेरी है...आप कैसे मर गये...हम्म...

मैं(धीरे से)- पलट कर देख....समझ जाएगी....

मेरे कहते ही सुमन पलटी और गेट की तरफ देख कर उसकी आँखे फटी रह गई....
 
गेट पर सुमन की बेटी रोशनी खड़ी हुई थी....जो अपनी माँ की ये हालत देख कर पैर पटकते हुए गुस्से से निकल गई और सुमन फटी आँखो से मुझे देखने लगी....जैसे पूछ रही हो कि अब क्या करे.....?????

मैं कुछ बोलता ...उससे पहले ही सुमन को होश आया और उसने जल्दी से चद्दर से अपनी आप को ढक लिया और सिर घुटनो मे दवाए रोने लगी.....

मैं- सुमन...रो मत..प्ल्ज़.... अपने आप को...ओके...

सुमन(रोते हुए)- अब क्या संभालू...सब कुछ तो बर्बाद हो गया....कुछ नही बचा...कुछ नही...

मैं- नही...अरे...चलो उससे बात करते है...उसे समझाते है..शायद....

सुमन(बीच मे)- नही....मैं उसके सामने नही जा सकती...कभी नही....नही...

मैं(गुस्से से)- तो ठीक है...रो यहाँ बैठ कर....पर मैं नही रोने वाला...मैं जा रहा हूँ उससे बात कर ने...

और मैं तेज़ी से वहाँ से निकल गया....और सुमन मुझे हैरानी से जाता हुआ देखती रही...क्योकि मैं नंगा ही निकल गया था.....

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अकरम के घर...........

अकरम की बातें सुनने के बाद से सबनम और सादिया सकते मे थी......दोनो को अभी भी यकीन नही हो रहा था कि अकरम ने ही वसीम की जान ली....

दोनो ही इस वक़्त बस अपने मन मे चल रहे सवालों के तूफान से झूझ रही थी....

अकरम के जाने के बाद से ही रूम मे सन्नाटा पसरा हुआ था...हा...बीच मे थोड़ी बहुत सुबकने की आवाज़ सन्नाटा चीर देती थी...जो कि सबनम की आवाज़ थी...

अब उसे ना वसीम की फ़िक्र थी और ना अनवर की...फ़िक्र थी तो सिर्फ़ अकरम की....

थोड़ी देर बाद अकरम ने रूम मे दाखिल हो कर खामोशी को ख़त्म किया....

अकरम को देख कर दोनो बहनो की निगाहे उसी पर टिक गई....और साथ मे अकरम के हाथ मे दिख रहे लॅपटॉप पर....

अकरम ने बिना कुछ बोले लॅपटॉप को सादिया और सबनम के सामने रखा और एक तरह का प्रेज़ेंटेशन चालू कर दिया....

उस प्रेज़ेंटेशन मे वसीम उर्फ सरफ़राज़ की पूरी दास्तान दिख रही थी....शुरू से ले कर अंत तक....

सबनम और सादिया एक-तक लगाए लॅपटॉप को देखती रही और जब पूरा प्रेज़ेंटेशन ख़त्म हो गया तो दोनो की आँखे नम हो गई....

अकरम(लॅपटॉप बंद कर के)- ये मैने बनाया है....पर इसमे दिखाई हर बात सच है...

अकरम की बात पर सादिया और सबनम ने कोई जवाब नही दिया....दोनो बस अपने आँसू पोछने मे बिज़ी रही....

अकरम(दूसरी तरफ देख कर)- मैं जानता हूँ मैने ग़लत किया...शायद....पर मुझे इस बात का अफ़सोस नही...फिर भी...मैं आप लोगो का गुनहगार हूँ...तो...(आह भर कर) - सॉरी....हो सके तो...

सबनम(बीच मे, खड़ी हो कर)- नही....मेरा बेटा कभी ग़लती नही कर सकता....

सबनम की बात सुन कर अकरम फटी आँखो से सबनम को देखने लगा....तभी सादिया भी खड़ी हो गई....

सादिया-हाँ बेटा....तुम ग़लत नही हो...तुमने तो ग़लत इंसान को सज़ा दी...और ग़लत के साथ ग़लत करना ही सही मायने मे सही है....

अकरम दोनो की बात सुन कर भाबुक हो गया और तभी दोनो बहने अकरम के गले लग कर सुबकने लगी....

सबनम- मुझे तुझ पर नाज़ है मेरे बच्चे....नाज़ है.....

एक तरफ सादिया और सबनम को अकरम पर नाज़ हो रहा था तो वहाँ दूसरी तरफ उसी घर के एक रूम मे किसी का दिल जल रहा था.....और दिल जलने की वजह थी वसीम की मौत.....और जिसका दिल जल रहा था...वो थी जूही.....

जूही(आसू भरी आँखो मे गुस्सा लिए)- मैं अपने डॅड के कातिल को कभी माफ़ नही करूगी...वो कोई भी हो....हिसाब तो देना ही होगा.....मैं उसे छोड़ुगी नही....खून का बदला खून से लूगी....नही माफ़ करूगी...कभी नही....कभी नही......

और फिर रूम मे सिर्फ़ रोने की आवाज़ आने लगी......

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