S
StoryPublisher
Guest
नेक्स्ट मॉर्निंग...........
सुबह -सुबह हॉल मे अंकित , आकाश , सुजाता और सोनू(सविता का बेटा) नाश्ता करने मे बिज़ी थे...तभी वहाँ रिचा आ धमकी और उसको देख कर सब लोग चौंक गये....
चौंकने की वजह थी रिचा की हालत....उसे देख कर सॉफ पता चल रहा था कि वो बहुत परेशान है....
आँख सूजी हुई , उपेर से सूखे हुए आँसुओ के निशान ...सॉफ बता रहे थे कि वो बहुत देर से रोती रही है....
उसके कपड़े भी बिगड़े हुए , बाल बिखरे हुए.....जो उसकी हालत को और ज़्यादा खराब दरसा रहे थे....
रिचा को देखते ही मैं अपनी जगह से उठा और उसके पास पहुँच गया...
मैं(झल्ला कर)- तुम यहाँ क्या कर रही हो ..और ये...कैसी हालत बना रखी है तुमने...
रिचा(रुआसी हो कर)- मेरी बेटी कहाँ है....
मैं(हैरानी से)- क्या...मुझे क्या पता...तुम्हारी बेटी से मुझे क्या लेना-देना....
रिचा(मेरी कॉलर पकड़ कर)- झूट मत बोलो....मेरी बेटी तुम्हारे पास है...बताओ कहाँ है वो...
मैं(गुस्से से अपनी कॉलर छुड़ा कर)- पागल हो गई क्या......
रिचा(रोना तेज कर के)- हाँ हाँ पागल हो गई हूँ...मुझे मेरी बेटी चाहिए...मेरी बेटी चाहिए बस...
मैं(गुस्से से)- तेरा दिमाग़ खराब है क्या...तेरी बेटी का तुझे पता होगा..मुझे क्या पता...
रिचा(चिल्ला कर)- अंकित...मेरी बेटी मुझे वापिस कर दो वरना...
मैं(दाँत पिसते हुए)- वरना...अरना क्या ....मैने कहा ना तेरी बेटी मेरे पास नही...बस...अब जा यहाँ से...नही तो मेरे आदमी तुझे बाहर फेक देगे...जा...
रिचा(चिल्ला कर)- तो फेक दो...पर मेरी बेटी मुझे लौटा दो प्ल्ज़....
और इतना बोल कर रिचा रोते हुए ज़मीन पर बैठ गई...
अब तक डॅड और बाकी सब भी हमारे पास आ गये थे...सबके चेहरे पर एक ही सवाल था कि ये औरत क्या बक रही है....
आकाश- अंकित...ये औरत क्या बोल रही है...
मैं(खीज कर)- पता नही...इसकी बेटी गायब हो गई....और इसका कहना है कि वो मेरे पास है...
रिचा(उपर देख कर)- कहना नही ....मैं जानती हूँ वो तुम्हारे पास है...
रिचा की बात का मैं जवाब देने ही वाला था कि डॅड ने मुझे रोक लिया....
आकाश- मुझे पूरी बात बताओ....क्या हुआ....
डॅड की बात सुनकर रिचा ने रोते हुए कल रात की सारी घटना बता दी...जिसे सुनकर बाकी सबके साथ मैं भी हैरान था...
आकाश- पर उस वक़्त तो अंकित मेरे साथ था....
रिचा- वो खुद नही आया था...उसने गुंडे भेजे थे...
मैं(गुस्से से)- मैने कोई गुंडा नही भेजा....मैं आख़िर क्यो करूँगा ये सब...हाँ...
रिचा(मुझे घूर कर)- क्योकि तुम उसे पाना चाहते थे....याद है ना...
मैं बैठ कर रिचा को घूरते हुए धीरे से बोला...
मैं- अगर उसे पाना ही होता तो अब तक वो मेरे नीचे होती...समझी....और सुन..मैं किसी को फोर्स कर के नीचे नही सुलाता....याद रखना...
सुजाता(चिल्ला कर)तो कहाँ है मेरी बच्ची...तुम्हारे अलावा और कौन है जो उसे...
मैं(बीच मे, कड़क आवाज़ मे)- चिल्लाओ मत....चिल्लाने से वो आने वाली नही...मेरी बात सुन...और पहले चुप हो जा...और मेरी बात ध्यान से सुन...
मेरी बात सुन कर रिचा चुप हो गई और हसरत भरी निगाहो से मुझे देखने लगी...
मैं- देखो...रिया मेरे पास नही...कसम से ...पर मैं यकीन दिलाता हूँ कि अगले 24 घंटे मे रिया तुम्हारे पास होगी...ओके...अब रोना-धोना बंद करो और अपने घर जाओ...रिया अब मेरी जवाबदारी है...ठीक...
मेरी बात सुनकर रिचा ने हाँ मे गर्दन हिला दी और फिर मैने सुजाता को इशारा किया तो उसने रिचा को संभाला और थोड़ी देर बाद रिचा अपने घर निकल गई...
आकाश(रिचा के जाते ही)- ये सब क्या चल रहा है...
मैं- आप टेन्षन मत लो...मुझे लगता है कि किसी ने मेरे नाम की आड मे रिया को उठा लिया है....पर वो कोई भी हो...मेरे हाथो से बचेगा नही....
और इतना बोल कर मैं भी घर से निकल गया......और तभी मुझे होटल से कॉल आ गया...
मैं(मन मे)- अब इसको क्या कहूँ...चलो डाइरेक्ट मिल ही लेगे...
और मैने कॉल इग्नोर करके कार चलाना जारी रखा.....
-------------------------------------------------------------------------
सुबह -सुबह हॉल मे अंकित , आकाश , सुजाता और सोनू(सविता का बेटा) नाश्ता करने मे बिज़ी थे...तभी वहाँ रिचा आ धमकी और उसको देख कर सब लोग चौंक गये....
चौंकने की वजह थी रिचा की हालत....उसे देख कर सॉफ पता चल रहा था कि वो बहुत परेशान है....
आँख सूजी हुई , उपेर से सूखे हुए आँसुओ के निशान ...सॉफ बता रहे थे कि वो बहुत देर से रोती रही है....
उसके कपड़े भी बिगड़े हुए , बाल बिखरे हुए.....जो उसकी हालत को और ज़्यादा खराब दरसा रहे थे....
रिचा को देखते ही मैं अपनी जगह से उठा और उसके पास पहुँच गया...
मैं(झल्ला कर)- तुम यहाँ क्या कर रही हो ..और ये...कैसी हालत बना रखी है तुमने...
रिचा(रुआसी हो कर)- मेरी बेटी कहाँ है....
मैं(हैरानी से)- क्या...मुझे क्या पता...तुम्हारी बेटी से मुझे क्या लेना-देना....
रिचा(मेरी कॉलर पकड़ कर)- झूट मत बोलो....मेरी बेटी तुम्हारे पास है...बताओ कहाँ है वो...
मैं(गुस्से से अपनी कॉलर छुड़ा कर)- पागल हो गई क्या......
रिचा(रोना तेज कर के)- हाँ हाँ पागल हो गई हूँ...मुझे मेरी बेटी चाहिए...मेरी बेटी चाहिए बस...
मैं(गुस्से से)- तेरा दिमाग़ खराब है क्या...तेरी बेटी का तुझे पता होगा..मुझे क्या पता...
रिचा(चिल्ला कर)- अंकित...मेरी बेटी मुझे वापिस कर दो वरना...
मैं(दाँत पिसते हुए)- वरना...अरना क्या ....मैने कहा ना तेरी बेटी मेरे पास नही...बस...अब जा यहाँ से...नही तो मेरे आदमी तुझे बाहर फेक देगे...जा...
रिचा(चिल्ला कर)- तो फेक दो...पर मेरी बेटी मुझे लौटा दो प्ल्ज़....
और इतना बोल कर रिचा रोते हुए ज़मीन पर बैठ गई...
अब तक डॅड और बाकी सब भी हमारे पास आ गये थे...सबके चेहरे पर एक ही सवाल था कि ये औरत क्या बक रही है....
आकाश- अंकित...ये औरत क्या बोल रही है...
मैं(खीज कर)- पता नही...इसकी बेटी गायब हो गई....और इसका कहना है कि वो मेरे पास है...
रिचा(उपर देख कर)- कहना नही ....मैं जानती हूँ वो तुम्हारे पास है...
रिचा की बात का मैं जवाब देने ही वाला था कि डॅड ने मुझे रोक लिया....
आकाश- मुझे पूरी बात बताओ....क्या हुआ....
डॅड की बात सुनकर रिचा ने रोते हुए कल रात की सारी घटना बता दी...जिसे सुनकर बाकी सबके साथ मैं भी हैरान था...
आकाश- पर उस वक़्त तो अंकित मेरे साथ था....
रिचा- वो खुद नही आया था...उसने गुंडे भेजे थे...
मैं(गुस्से से)- मैने कोई गुंडा नही भेजा....मैं आख़िर क्यो करूँगा ये सब...हाँ...
रिचा(मुझे घूर कर)- क्योकि तुम उसे पाना चाहते थे....याद है ना...
मैं बैठ कर रिचा को घूरते हुए धीरे से बोला...
मैं- अगर उसे पाना ही होता तो अब तक वो मेरे नीचे होती...समझी....और सुन..मैं किसी को फोर्स कर के नीचे नही सुलाता....याद रखना...
सुजाता(चिल्ला कर)तो कहाँ है मेरी बच्ची...तुम्हारे अलावा और कौन है जो उसे...
मैं(बीच मे, कड़क आवाज़ मे)- चिल्लाओ मत....चिल्लाने से वो आने वाली नही...मेरी बात सुन...और पहले चुप हो जा...और मेरी बात ध्यान से सुन...
मेरी बात सुन कर रिचा चुप हो गई और हसरत भरी निगाहो से मुझे देखने लगी...
मैं- देखो...रिया मेरे पास नही...कसम से ...पर मैं यकीन दिलाता हूँ कि अगले 24 घंटे मे रिया तुम्हारे पास होगी...ओके...अब रोना-धोना बंद करो और अपने घर जाओ...रिया अब मेरी जवाबदारी है...ठीक...
मेरी बात सुनकर रिचा ने हाँ मे गर्दन हिला दी और फिर मैने सुजाता को इशारा किया तो उसने रिचा को संभाला और थोड़ी देर बाद रिचा अपने घर निकल गई...
आकाश(रिचा के जाते ही)- ये सब क्या चल रहा है...
मैं- आप टेन्षन मत लो...मुझे लगता है कि किसी ने मेरे नाम की आड मे रिया को उठा लिया है....पर वो कोई भी हो...मेरे हाथो से बचेगा नही....
और इतना बोल कर मैं भी घर से निकल गया......और तभी मुझे होटल से कॉल आ गया...
मैं(मन मे)- अब इसको क्या कहूँ...चलो डाइरेक्ट मिल ही लेगे...
और मैने कॉल इग्नोर करके कार चलाना जारी रखा.....
-------------------------------------------------------------------------