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चूतो का समुंदर

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एक सुनसान से रास्ते पर एक औरत छिपते-छिपाते कही जाने की जल्दी मे थी...

वो बहुत ही ज़्यादा डरी और घबराई हुई थी...इसलिए बार-बार पीछे मुड़कर देखती और फिर आगे बढ़ती....

पर उसकी सतर्कता काम ना आई...

अचानक ही उसके सामने एक आदमी आ गया....

औरत- त्त्त...तुम...य्यी..यह..यहाँ....

आदमी(कमीनी मुस्कान बिखेर कर)- अरे..कककक ...क्या हुआ....डर गई...हाहहाहा......

औरत(हाथ जोड़ कर)- मुझे जाने दो...प्ल्ज़...मुझे....

इससे पहले की वो कुछ और बोलती पीछे से किसी ने उस पर बार किया और वो बेहोश हो गई.....

आदमी(पीछे वाले सक्श को देख कर)- ये क्या ...तुम....मैं संभाल लेता ना...तुम्हे आने को किसने कहा था....

""मुझे ऑर्डर सुनना पसंद नही.....समझे...अब सम्भालो इसे....और हाँ...ध्यान से....सिर्फ़ क़ैद मे रखना है...और कुछ किया ना....तो भूलना मत....मुझे जान लेना भी आता है....""

और इतना बोलकर वो सक्श वहाँ से निकल गया और वो आदमी बस दाँत पीसता हुआ रह गया......

फिर वो सक्श उस औरत को उठा कर उसी घर मे ले गया...जहाँ से वो चोरी-छिपे भागने की कोसिस मे थी....वो घर था रेणु का घर.....

घर मे लाते ही रघु ने उस औरत को सोफे पर पटका और गुस्से से रेणु को देखने लगा...जो अपने बाप मदन के साथ खड़ी हुई रघु का वेट कर रही थी.....

रेणु(आँखे मटकाते हुए)- ऐसे क्या देख रहा है...मारेगा क्या...हाँ...जा...पहले गेट बंद कर के आ...

रेणु की बात सुनकर रघु गुस्से से अपनी मुट्ठी बाँध कर आगे बड़ा ही था कि तभी मदन ने उसे इशारा किया और रघु रुक गया....

रेणु(मुस्कुरा कर)- ओह्ह...इतना गुस्सा...सच मे...हहहे...तू कितना भी गुस्सा कर ले....मैं डरने वाली नही...चल जा कर गेट बंद कर...जा...

रघु को गुस्सा तो आ रहा था ...पर उसने मदन की तरफ देखा और चुपचाप मुड़कर गेट की तरफ चल पड़ा....

मदन(रेणु को देख कर)- बस कर बेटी...अब उसे और प्रेसां मत कर....ठीक है...

रेणु(थोड़ा गुस्से मे)- परेशान नही कर रही...बस मैं तो....खैर छोड़ो....वो एक काम का नही....काम था कि इस पर नज़र रखे...पर वो सोया रहा और ये भाग गई...

मदन(रेणु के सिर पर हाथ रख कर)- तो क्या हुआ....भाग तो नही पाई ना....चल ठंडी हो जा...और इसे होश मे ला...

मदन की बात सुनकर रेणु ने हाँ मे सिर हिलाया और पानी ले कर सोफे पर पड़ी आरती के मुँह पर फेक दिया....

पानी पड़ते ही आरती छॅट्पाटा कर होश मे आई और अगले ही पल रेणु और मदन को देख कर सहम गई....

रेणु(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ मोम....डर गई क्या....हाँ...हहहे.....

रेणु की बात सुनकर आकर्ती के चेहरे पर डर के भाव पैदा हो गये....और तब तक वहाँ रघु भी आ गया...जिसने आते ही आकर्ती को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया...जिससे बेचारी सोफे पर लूड़क गई....

रेणु(चिल्ला कर)- हे...तेरी हिम्मत कैसे हुई इनको मारने की...साला दो टके का नौकर....

इतना बोलकर रेणु रघु पर झपटने को हुई पर मदन ने उसे पकड़ लिया....

मदन- रेणु....शांत रहो...

रेणु(गुस्से से)- कैसे हो जाउ....ये साला...इसकी औकात ही क्या है...मेरी मोम पर हाथ उठाता है...मैं इसकी जान ले लुगी.....

मदन(ज़ोर से)- बस....ये तेरी मोम नही...समझी....

रेणु(मदन को घूर कर)- जानती हूँ...पर इसकी ही बदोलत आज मैं जिंदा हूँ....समझे आप....भले ही ये मेरी मोम नही...पर मोम से कम भी नही....और एक बात आप ध्यान से सुन लो....हमारा मक़सद आकाश है....सिर्फ़ आकाश....इस सब मे मेरी मोम को शामिल करने की भूल मत करना....ठीक है....

मदन को रेणु की बात अच्छी नही लगी...फिर भी उसने अपने गुस्से को दबा कर हाँ मे सिर हिला दिया....

मदन- ठीक है...जैसा तुम चाहो...वैसा ही होगा....(रघु को देख कर)- रघु...आइन्दा ऐसी हरक़त मत करना...समझे....

रघु(रेणु को घूर कर)- ठीक है....दोवरा ऐसा नही होगा....

रेणु(गुस्से से)- दोवरा ऐसा ना ही हो तो अच्छा होगा....क्योकि अगर दोवरा ऐसा हुआ...तो वो तुम्हारा आख़िरी दिन होगा ....समझे ना....अब दफ़ा हो यहाँ से....जाओ....

मदन- रघु...तुम जाओ....

रघु फिर से मदन की बात मान कर वहाँ से निकल गया.....रघु के जाते ही रेणु ने आरती को बैठाया और उसे घूर्ने लगी....

रेणु- मोम...मैं नही चाहती कि आपको कोई चोट पहुँचे...इसलिए कान खोल कर सुन लो....आपने अगर आकाश या अंकित को कुछ भी बताने की कोसिस की ना....तो फिर....फिर मैं कुछ नही कर पाउन्गी...ये लोग आपके बेटे को और आपको...दोनो को मार देगे....मेरी बात समझ रही है ना....हुह...

आकर्ती कुछ नही बोली बस रेणु की बात सुनकर उसकी आँखे नम हो गई....

रेणु- देखो मोम....आकाश ने जो भी किया...उसे उसकी सज़ा भुगतनी ही होगी....इसलिए बेहतर होगा कि आप इस सबसे दूर रहे....इसी मे सबकी भलाई है...और फिर आपको भी तो अपने पति के कातिल की मौत ही चाहिए ना...हाँ....

आकर्ती(सुबक्ते हुए)- म्म्म...मैं...नही...मत करो...छोड़ दो....प्ल्ज़्ज़...

रेणु(चिल्ला कर)- नही...नही छोड़ सकती....और ...अब कोई ग़लती मत करना प्ल्ज़...वरना मैं भी आपको बचा नही पाउन्गी....समझी....हुह...

और इतना बोलकर रेणु तेज़ी से आपने रूम मे निकल गई...क्योकि उससे आकर्ती की हालत नही देखी जा रही थी....

रेणु के जाते ही रघु वापस आ गया और मदन के इसारे पर आकर्ती को एक रूम मे बंद कर आया...और फिर वापिस आ कर मदन को घूर्ने लगा....

रघु- आप अपनी बेटी को समझा लो....वरना....

मदन(बीच मे)- सस्शीई....चुप हो जाओ....जब तक हमारा काम नही होता तब तक चुप रहने मे ही भलाई है....फिर...

रघु- फिर...रुक क्यो गये...फिर क्या....

मदन(पाइप निकाल कर)- फिर...फिर की बात फिर करेंगे...हुह....

और इतना बोल कर मदन ने पाइप जलाया और कस मार कर रघु को एक कामिनी स्माइल दी और बदले मे रघु भी मुस्कुरा उठा........

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रफ़्तार के घर.............

जब रफ़्तार की बेटी रोशनी अपनी माँ की कुसुम की चुदाई देख कर भाग गई...तो कुसुम रोने लगी....पर मैं वहाँ से निकल कर रोशनी के रूम मे पहुँच गया.....

रोशनी अपने रूम मे बैठी हुई थी....वो बड़े गुस्से मे थी...जो उसकी आँखे सॉफ-सॉफ बता रही थी.....

जब मैं रूम मे दाखिल हुआ तो उसने अपनी झुकी हुई गर्दन उठाई और मेरी हालत देख कर उसका गुस्सा और ज़्यादा बढ़ गया....

रोशनी- तुम...तुम यहाँ....दफ़ा हो जाओ यहाँ से....

मैं- सुनो ..रोशनी...मेरी बात सुनो...

रोशनी(खड़ी हो कर)- मुझे कुछ नही सुनना....तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की...हाँ...निकल जाओ यहाँ से....निकल जाओ....

मैं(कड़क आवाज़ मे)- नही...मैं जाने के लिए नही आया....समझी तुम....अब चुपचाप मेरी बात सुनो....समझी...

रोशनी(गुस्से मे आँखे दिखा कर)- तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुम मुझे ऑर्डर दो...हाँ....तेरी हिम्मत कैसे हुई...

मैं(बीच मे, चिल्ला कर)- चुप...हिम्मत...क्या हिम्मत-हिम्मत करती है...हाँ...मेरी हिम्मत देखनी है...अभी देखी नही...तेरी माँ का क्या हाल कर रहा था....अब तुझे दिखाऊ...हाँ....

रोशनी(तिलमिला कर)- शट अप...दफ़ा हो जाओ यहाँ से ..अभी ..

मैं- चुप कर....मैं दफ़ा होने नही आया...समझी....और तू समझती क्या है अपने आप को ...हाँ...ये गुस्सा किस लिए....तेरी माँ चुद रही थी इस बात पर या फिर.....

रोशनी(मुझे घूर कर)- या फिर....क्या...तुम कहना क्या चाहते हो...

मैं(आगे बढ़ कर)- वही...जो तुम्हारी आँखे कह रही है...पर तुम्हारी जवान नही कह पा रही...

रोशनी(झेन्पते हुए)- क्क़ ..क्या मतलब...हाँ...

मैं(रोशनी के पास पहुँच कर)- वही...जो तुम चाहती तो हो...पर कहने से डरती हो....

रोशनी(दूसरी तरफ घूम कर)- क्क..क्या...मैं कुछ नही चाहती....जाओ यहाँ से....

मैं- अच्छा....चलो तो फिर....मैं ही बता देता हूँ कि तुम चाहती क्या हो...और तुम्हारे गुस्से की असली वजह क्या है....ह्म...

इससे पहले की रोशनी कुछ बोलती मैने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.....उसने हाथ हटाना चाहा...पर मैने उसे हटाने नही दिया....

रोशनी(चौंक कर)- ये क्या है...तुम...तुम जाओ यहाँ से...

मैं(मुस्कुरा कर)- चला जाउन्गा.....पहले तुम्हारे गुस्से की वजह तो पता चले....है ना.....वैसे....हाथ बड़ा सॉफ्ट है तेरा....उउउंम...सच मे...मज़ा आ रहा है...

रोशनी(गुस्से से)- मेरा हाथ छोड़ो...वरना मुझसे बुरा कोई नही होगा...समझे .....

मैं(मुस्कुरा कर)- मुझे जो समझना था...वो तो मैं तभी समझ गया था जब तुम अपनी माँ की चुदाइ के मज़े ले रही थी....है ना...

रोशनी- मज़े....क्या बकवास है.....तुम...तुम मेरा हाथ छोड़ो....और जाओ यहाँ से....समझे ना....

फिर मैं कुछ नही बोला बस दूसरे हाथ से रोशनी की कमर कस ली...जिससे वो सिहर उठी....

रोशनी- आअहह....छोड़ो मुझे...नही तो मैं शोर मचाउन्गी....छोड़ो...

मैं फिर भी कुछ नही बोला बस धीरे -धीरे रोशनी की कमर और पेट सहलाता रहा....वहाँ रोशनी के हाथ का स्पर्श पा कर मेरा लंड फुल फॉर्म मे आ रहा था...और यहाँ मेरे हाथ की गर्मी रोशनी को गरम करने लगी थी.....

रोशनी(गुस्सा दिखा कर)- तुम मुझे छोड़ते हो कि नही....एयेए...छोड़ो...

मैं(रोशनी की नाभि मे उंगली डाल कर)- तुम्हे क्या लगता है...मैने तुझे छोड़ने को पकड़ा है...ह्म....

रोशनी- आहह....क्या मतलब....मेरा हाथ छोड़ो....उउउइ...

रोशनी की बात सुनकर मुझे हसी आ गई और मैने उसके कान के पास धीरे से बोला.....

मैं- हाथ तो तेरा कब्से छोड़ चुका हूँ....पर तू ही मेरा लंड हिलाने मे लगी है तो मैं क्या करूँ...हाँ...

मेरी बात सुनकर रोशनी को जैसे होश आया और वो पलट गई...और फिर अपने हाथ मे मेरा लंड देख कर शर्मा गई और आँखे झुका ली...

मैं(रोशनी का गाल सहला कर)- अब नखरे दिखाना बंद भी कर दे....ह्म...

रोशनी(सिर झुकाए हुए)- तुम जाओ यहाँ से...तुम...तुम बहुत गंदे हो....

मैं(रोशनी का सिर उठा कर)- तो तू मुझे अच्छा कर दे ना....हाँ ...चल ...तेरी नाराज़गी दूर कर देता हूँ....

रोशनी(मेरी आँखो मे देख कर)- क्या मतलब...

मैं(मुस्कुरा कर)- तेरे गुस्से की वजह यही है ना....कि तू इस लंड के लिए तरस रही थी...और मिला तेरी माँ को...है ना....

रोशनी(चौंक कर)- क्क.. .क्या मतलब....ऐसा कुछ नही...समझे...

मैं- ओह्ह..तो ठीक है...मैं जाता हूँ...तेरी माँ को ही चोदुन्गा...तू बैठी रह यहाँ ...

और फिर मैं जाने के लिए मुड़ा पर मूड नही पाया ...क्योकि रोशनी ने अपने हाथ मे मेरा लंड ज़ोर से दबा लिया....

मैं- आहह...क्या करती है साली...ये प्यार करने के लिए है....मसल्ने को नही...

रोशनी(मुस्कुरा कर)- तभी तो...बिना प्यार किए इसे कैसे जाने डू..हा...

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म...तो कर ले प्यार....मिटा ले अपने अरमान....

रोशनी(मेरे करीब आ कर)- वो तो मैं करूगी ही...पर पहले ये बताओ कि तुमसे किसने कहा कि मैं इसके लिए तरस रही हूँ...

मैं(मुस्कुरा कर)- वो...अरे वो तो पूनम ने बताया था....तभी से तुम मेरे माइंड मे थी...पर तुमसे पहले तुम्हारी माँ मिल गई....हाहाहा....

रोशनी(लंड छोड़ कर)- ओह...नही..मैं कुछ नही करूगी....कही माँ ने देख लिया तो....नही...तुम जाओ यहाँ से...

मैं(रोशनी का हाथ वापिस लंड पर रख कर)- कुछ नही होगा....तेरी माँ कुछ नही बोलेगी...बस तू वैसा ही कर जैसा मैं कहता हूँ...फिर देख...आज मे तेरा सपना भी पूरा कर दूगा....जो तूने पूनम को बोला था....

रोशनी- क्या...कौन सा सपना....

मैं- वही...तुझे तेरी माँ के साथ चोदने वाला....ऐसा ही था ना....कि कोई तुम दोनो माँ-बेटी को एक साथ जम कर चोदे....है ना....

मेरी बात सुनकर रोशनी फिर से शर्मा गई ....और तुरंत घुटनो पर बैठ गई....

रोशनी(लंड हिलाते हुए)- तुम ना...बड़े शैतान हो...और तुम्हारा ये भी...देखो कैसे फूल गया...

मैं- तो इसे प्यार कर के खुश कर दे ना....हो जा शुरू....ह्म्म..

और फिर रोशनी ने लंड को हिलाते हुए चूमना शुरू किया और कुछ ही देर बार सुपाडा मुँह मे भर कर चूसने लगी....

रोशनी- उूउउम्म्म्ममम......

मैं-आअहह....चूस साली....फिर तेरा सपना भी पूरा करना है....जल्दी से चूस....

इसके बाद रोशनी ने सूपड़ा चूस्ते हुए लंड को धीरे-धीरे कर के आधे से ज़्यादा मुँह मे भर लिया और जोरदार चुसाइ चालू कर दी.....

रोशनी-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प्प…ऊओंम्म्मममह…सस्स्रररुउउप्प्प...

मैं-आअहह…ज़ोर से...पूरा लो ना...

रोशनी-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्रररुउउप्प्प्प…उउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम.....

मैं- एसस्स...ऐसे ही...उूउउम्म्म्मम....और तेज...

थोड़ी देर बाद रोशनी पूरी तरह गरम हो गई...और ज़ोर-ज़ोर से लंड चूसने लगी....

रोशनी-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प...उूुुउउम्म्म्मम...

मैं- आहह...ज़ोर से ...क्या बात है....अपनी मा से भी अच्छा चूस्ति हो..करती रहो....आअहह...

रोशनी- सस्स्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प्प.....सस्स्स्रररुउप्प्प...सस्र्र्ररुउउप्प्प्प....

मैं- आअहह.....बहुत अच्छे....और तेज....तू तो मस्त है....आअहह......

रोशनी मस्ती मे लंड चूस रही थी और मैं भी आँखे बंद किए मस्त था....और हम दोनो को ही नही पता चला कि ये नज़ारा रोशनी की माँ कुसुम भी देख रही थी.....

रोशनी-सस्ररुउउप्प्प….सस्स्रररुउउप्प्प…ऊओंम्म्मममह…सस्स्रररुउउप्प्प...

मैं-आअहह…ज़ोर से..तेरी माँ की तरह...गले तक ले जा....आअहह.....

रोशनी-सस्स्ररुउउप्प्प….सस्रररुउउप्प्प्प…उउउम्म्म्म....उूुउउम्म्म्मम.....उउउम्म्म्ममम......

मैं- एसस्स...ऐसे ही...ओह माइ.....अंदर ही रख....आहह....

रोशनी- उउउंम...उउउंम्म....उउउंम.......उूुुउउम्म्म्मम...

मैं- आआहह...कम ऑन...ओह्ह्ह..एस्स..ईससस्स....आअहह......पी जा ....यीहह....ईईहह....

और मैं रोशनी का सिर लंड पर दबा कर उसके मुँह मे झड्ने लगा.....थोड़ी देर के बाद मेरा लंड रस रोशनी के पेट मे जा चुका था और वो लंड को बाहर कर के ख़ास रही थी....

रोशनी- ख़्हू...ख़्हू...आहह..साँस ही रुक गई थी...खू....खू....

मैं(मुस्कुरा कर)- साँसे संभाल कर रखो....अभी बहुत कुछ बाकी है.....

रोशनी- आअहह...कितना तगड़ा लंड है तुम्हारा.....ऐसा लग रहा था कि गला ही फाड़ देगा.....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...तेरी माँ का भी यही ख्याल है....

रोशनी(आँखे बड़ी कर के)- तुमने मेरी माँ की गांद भी मारी ना....कैसे ले गई वो इसे गांद मे...मैं तो सोच कर ही डर रही हू....

मैं- सोचने की ज़रूरत ही नही....थोड़ी देर मे ये तेरी गांद मे जायगा ना तो सब समझ जाओगी.....

रोशनी(सहम कर)- नही...मुझे नही लेना गांद मे....तुम माँ की गांद ही मारो....

कुसुम(चिल्ला कर)- ये सब क्या हो रहा है....हाँ.....

तभी रूम मे कुसुम की आवाज़ आई....जिसे सुन कर हम दोनो ने गेट की तरफ देखा तो सामने कुसुम खड़ी थी...जो गुस्से से हम दोनो को देख रही थी......

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रिचा के घर पर.........

रिचा अपने घर मे अकेली बैठी कुछ सोच रही थी कि तभी उसकी डोरबेल बजी.....

रिचा(गेट खोल कर)- ह्म्म...तो आ गये आप....बड़ी देर लगा दी.....

बॉस2(अंदर आते हुए)- ह्म्म...कुछ ज़रूरी काम आ गया था....और फिर तुझसे मिलने के पहले सब चेक करना होता है...कही कोई देख ना ले....

इस बीच रिचा ने गेट बंद किया और बॉस2 के पीछे चिपक गई.....

बॉस2- ये क्या...तू तो आते ही गरम हो गई....

रिचा- गर्मी तो बचपन से है...पता नही कब तक रहेगी....

बॉस2(रिचा को आयेज खीच कर)- साली....तेरी बेटी किडनॅप हो गई और तुझे गर्मी की पड़ी है...हाँ....

रिचा(बॉस2 के सीने को सहला कर)- अब जो हो गया सो हो गया....छोड़ो उसे....अभी तो मेरा मूड मज़े लेने का है.....

बॉस2(रिचा को पीछे कर के)- कैसी औरत है तू....अपनी बेटी की भी फ़िक्र नही...साली रंडी....बस लंड खाना है...हा...

रिचा(गुस्से से मुँह फूला कर)- रंडी नही हूँ मैं...समझे....मैं तो बस जिंदगी के मज़े लेने वाली हूँ....

बॉस2( गुस्से से)- तो मज़े लेती रह...पर कम से कम अपनी बेटी का तो सोच....पता नही कहाँ होगी वो....

रिचा(मुँह फूला कर)- जहा भी होगी ...ठीक होगी...अब छोड़ो उसे....और इधर आओ....

इतना बोलकर रिचा ने बॉस 2 का हाथ पकड़ा और उसे सोफे पर बैठा दिया और खुद उसकी गोद मे जा बैठी....

बॉस2(कुछ सोचते हुए)- ह्म...मतलब तुझे पता है कि तेरी बेटी कहाँ है...है ना...

रिचा(मुस्कुरा कर)- ह्म...ठीक समझे....

बॉस2(रिचा का बूब्स दबा कर)- तो ये नाटक किस लिए....अंकित के घर क्यो गई...और ये किडनॅप किया किसने...हाँ...बोल साली....

रिचा- आअहह...धीरे....बताती हूँ ना....इसी लिए तो बुलाया...आओउउक्च्छ...दर्द होता है...

बॉस2(बूब्स को मरोड़ कर)- तो जल्दी से बक दे वरना....

रिचा(बीच मे)- आअहह...नही...बताती हूँ...प्ल्ज़ छोड़ दो...आअहह....

बॉस2(बूब्स छोड़ कर)- चल बता फिर....

रिचा(बॉस2 के गले मे हाथ डाल कर)- रिया को रफ़्तार ने किडनॅप किया....मेरे कहने पर...ओके ..

बॉस2(सिर हिला कर)- ह्म्म....और अंकित के घर पर वो ड्रामा....क्यो...हाँ...

रिचा(मुस्कुरा कर)- ताकि आकाश को यकीन हो जाए कि अंकित ने ही रिया को किडनॅप करवाया....

बॉस2- पर उससे क्या होगा....इसमे फ़ायदा क्या है....

रिचा- फ़ायदा है...जितना मैं आकाश को जानती हूँ...उस हिसाब से आकाश कभी किसी को मारना नही चाहेगा....और वो ये भी नही चाहेगा कि उसका बेटा किसी की मौत की वजह बने....समझे....

बॉस2(मुँह बना कर)- तो इसमे मौत कहाँ से आ गई...ये तो किडनेपिंग....एक मिनट...कही तेरे दिमाग़ मे कुछ और भी तो नही...ह्म्म...

रिचा(मुस्कुरा कर)- सही समझे....मेरे प्लान के हिसाब से अब रिया की लाश ही वापिस आयगी...और तब मैं आकाश की नज़रों मे अंकित को गिरा दूगी....

बॉस2(हैरानी से)- क्या...मतलब तू अपनी ही बेटी को....

रिचा(बीच मे)- अरे नही...लाश तो किसी और की होगी....पर वो लगेगी बिल्कुल रिया की....मैने उसका इंतज़ाम कर दिया है...

बॉस2- ह्म्म....पर इससे क्या होगा....अंकित को जैल करवाएगी क्या...

रिचा- बिल्कुल...और तब आकाश अकेला पड़ जायगा...और फिर हमारे सारे मंसूबे पूरे हो जायगे...समझे....

बॉस2(कुछ सोच कर)- पर अंकित जैल कैसे जायगा...तुझे तो पता है कि वो इंस्पेक्टर.आलोक उसके साथ है...तूने देखा नही...कैसे सरफ़राज़ की मौत के बाद उसने अंकित के कहने पर अकरम को छोड़ दिया था...और सारे सबूत भी मिटा दिए थे....याद है ना....

रिचा- ह्म...याद है...इसीलिए मैने रफ़्तार को उसके सीनियर को बुलाने को कहा है...ताकि आलोक कुछ भी ना कर सके ....समझे. ..

बॉस2(मुस्कुरा कर)- वा रे...तू तो बहुत आगे की सोच रही है....

रिचा(मुस्कुरा कर)- आगे की सोच नही रखती तो अब तक कभी की मारी जाती...और साथ मे तुम भी.....पता है ना...अगर सरफ़राज़ जिंदा रहता तो क्या होता....अरे अंकित के साथ वो भी हमारे पीछे पड़ जाता....बेचारा....उसे तो सच का पता ही नही था....फालतू मे मारा गया....

बॉस2- ह्म..ये तो है....पर तूने क्या प्लान बनाया था उसकी बर्बादी का....उसी के हाथो जावेद की पूरी फॅमिली मिटा डाली...उसे कातिल बना दिया...और उसे अंकित के पीछे लगा डाला....गुड...

रिचा- करना पड़ता है यार....अगर सरफ़राज़ को अंकित का दुश्मन ना बनाती तो हम कुछ भी ना कर पाते....उल्टा सटफ़राज़ भी हमारे पीछे लग जाता....

बॉस2- ह्म...मानना पड़ेगा....तूने गेम तो बहुत बड़ा खेला....पहले आमिर को फसाया....जिससे उसने ख़ुदकुशी कर ली और फिर उसके परिवार की मौत का ज़िम्मेदार आज़ाद को बना दिया...फिर सरिता को सरफ़राज़ से मिला दिया और लास्ट मे सरिता को मार कर मदन को भी आज़ाद का दुश्मन बना दिया....कमाल कर दिया....

रिचा(मुस्कुरा कर)- ह्म....और तुम भी कम नही....अली की फॅमिली को जिंदा जलाने का प्लान तुमने ही बनाया था...तभी तो सरफ़राज़ को आज़ाद के खिलाफ कर पाए...और सरिता को गोली भी तुमने अपने हाथो से मारी थी...याद है ना...

बॉस2- ह्म्म..याद है....पर अगर तू वक़्त रहते मुझे आकाश के आने की बात ना बताती तो ये मुमकिन ना हो पाता.....

रिचा- ह्म...और लोग सोचते है कि आकाश ने ही सबको मारा...बेचारा आकाश....हहहे.....

बॉस2- ह्म...और अब तेरा प्लान कामयाब हो जाय तो अंकित भी गया...और आकाश भी....पर...एक बात बता...पोलीस को यकीन कैसे दिलाएगी कि रिया का किडनॅप अंकित ने किया था...

रिचा- वो भी सोच लिया....एक तो रफ़्तार के आदमी अंकित का नाम लेगे...और दूसरा वो सुजाता....उसे गवाह बना देगे.....

बॉस2(चौंक कर)- सुजाता....वो क्या कहेगी ...

रिचा- जिस दिन मैं अंकित के घर गई थी....रिया की किडनॅपिंग की बात बोलने....तब सुजाता ने सब कुछ मोबाइल से रेकॉर्ड कर लिया था....वही हमारे काम आयगा...हम उस वीडियो को एडिट कर के अपने हिसाब से उसे करेंगे....समझे ना...

बॉस2(आँखे फाड़ कर)- तेरी तो....कितना दिमाग़ चलता है तेरा...सच मे....ग्रेट ...

रिचा(मुस्कुरा कर)- जब मेरे अंदर लंड के धक्के पड़ते है ना...तब दिमाग़ ज़्यादा चलता है...समझे...

बॉस2(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...तो आजा फिर..तेरा दिमाग़ तेज करता हूँ...आजा....

और फिर रिचा बॉस2 के लंड से अपनी जीशम की गर्मी मिटाने लगी.....और घर मे बस चुदाई की आवाज़े शोर मचाने लगी........

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सहर से दूर एक कमरे मे......

कमरे मे इस वक़्त सिर्फ़ एक छोटा सा बल्ब टिमटिमा रहा था...जो रूम मे फैले अंधेरे को कुछ हद तक दूर करने मे सफल हो रहा था....

रूम के बीचो-बीच एक चेयर पर एक लड़की बँधी हुई थी...जो अभी होश मे नही थी....

और रूम के गेट पर 2 आदमी पहरा दे रहे थे.....जो बीच -बीच मे चेक कर रहे थे कि लड़की होश मे आई कि नही....

थोड़ी देर बाद लड़की की आँखे धीरे-धीरे खुली और जब उसकी आँखे पूरी तरह खुल गई तो ये नज़ारा देख कर वो डर गई और डर की वजह से अपने हाथ पैर हिलाने की कोसिस की....तब उसे समझ आया कि वो चेयर से बँधी हुई है....

अपने आपको इस हालत मे देखकर वो और ज़्यादा डर गई और ज़ोर से हाथ-पैर हिलाने लगी...और साथ मे उसके मुँह से बचाओ-बचाओ की चीखे गूज़्ने लगी....

उस लड़की की चीख सुनते ही गेट पर पहरा दे रहा एक आदमी भागता हुआ गया और लड़की को होश आने की खबर दे आया....

थोड़ी देर बाद उस पहरेदार ले साथ एक आदमी आया और आते ही रूम मे एंटर हुआ और बोला....

रफ़्तार- अरे रिया....अच्छा हुआ तुम्हे होश आ गया....सॉरी...मेरे आदमी ने बेहोशी का डोस कुछ ज़्यादा ही दे दिया था....

रफ़्तार की बात का जैसे रिया पर कोई असर ही नही पड़ा...वो लगातार चेयर को हिलाते हुए चीखे जा रही थी....

थोड़ी देर तक रफ़्तार उसे प्यार से शांत रहने को बोलता रहा ...पर रिया नही मानी....आख़िरकार रफ़्तार को गुस्सा आ गया और वो चिल्ला कर बोला.....

रफ़्तार- चुप....बिल्कुल चुप....और ये हाथ-पैर पटकना बंद करो....इससे कोई फ़ायदा नही होने वाला....समझी...

रिया(सहम कर)- तुम...तुम मुझे यहाँ क्यो लाए....कौन हो तुम....

रफ़्तार(आराम से)- रिया...देखो...डरो मत...मैं तुम्हे कुछ नही करूँगा...बस तुम शांत हो जाओ....फिर आराम से बात करते है...ओके...

रिया(चिल्ला कर)- आराम से...हाँ...मेरे हाथ-पैर बाँध कर रखा है और कहता है कि कुछ नही करेगा....मुझे क्या बेवकूफ़ समझा है...हाँ...

रफ़्तार(थोड़ा गुस्सा दिखा कर)- अगर तुम शांत नही हुई ना...तो मजबूरन मुझे तुमको फिर से बेहोश करना पड़ेगा....समझी...

रिया(गुस्से से)- बेहोश...तो कर दे ना...और कर ले अपने मन की....तुझ जैसे नमर्दो से उम्मीद ही क्या की जा सकती है....

रफ़्तार(दाँत पीस कर)- तेरी तो....चुप...चुप हो जा...और मेरी बात सुन....मैं तुझे तेरी माँ के कहने पर लाया हूँ...तेरी माँ के....समझी....

अपनी माँ का नाम आते ही रिया सन्न रह गई और शांत हो कर बैठ गई....

रिया(हैरानी से)- मेरी माँ ने मुझे किडनॅप करवाया...नही-नही...तुम झूठ बोल रहे हो...वो ऐसा सोच भी नही सकती....तुम..तुम झूट बोल रहे हो ...है ना...

रफ़्तार- नही रिया....यही सच है...गौर से देखो....शायद तुम मुझे पहचान जाओ....देखो....मैं रफ़्तार सिंग हूँ...जो तुम्हारी माँ के कहने पर पहले भी कई काम कर चुका हूँ....देखो....याद आया...हाँ...

रिया(रफ़्तार को घूर कर)- हाँ...मैने तुम्हे देखा है...पर तुम तो पोलीस वाले हो ना....

रफ़्तार- हाँ...मैं हूँ तो पोलीस वाला...पर पैसो के लिए कई बार तेरी माँ के लिए काम किए है....वो भी ग़लत काम....

रिया(हैरानी से)- तो क्या सच मे मेरी माँ ने ही मुझे किडनॅप....

इतना बोलकर रिया रफ़्तार को देखने लगी...अपने जवाब की उम्मीद मे.....

रफ़्तार- मैं जानता हूँ ये सुनकर तुम्हे दुख होगा...पर सच्चाई यही है....तुम्हारी माँ ने ही तुम्हारा किडनॅप करवाया है....

रिया(नम आँखो से)- पर क्यो....???

रफ़्तार- ह्म्म...अंकित से बदला लेने के लिए....

रिया(चौंक कर)- अंकित....पर मेरे किडनॅप होने से अंकित का क्या मतलब...

रफ़्तार(लंबी साँस ले कर)- असल मे तुम्हारी माँ ने इस बात के सबूत बना लिए है कि तुम्हारा किडनॅप अंकित ने करवाया...और फिर वो दुनिया के सामने तुम्हारी लाश दिखाएगी...और तुम्हारी मौत का ज़िम्मेदार अंकित को ठहराएगी....जिससे अंकित जैल मे होगा...बस...यही प्लान है ..

रिया(ज़ोर से)- क्या....बस....बस है ये.....मेरी माँ अंकित को फसाने के लिए मुझे मरवाना चाहती है और ये बस है तुम्हारे लिए...बस...

रफ़्तार- नही..मेरा मतलब....सुनो...ये तुम्हारी माँ का प्लान है...मेरा नही...समझी....

रिया(आँसू बहते हुए)- मेरी मोम इतना नीचे गिर सकती है....मैं कभी सोच भी नही सकती थी....

इतना बोल कर रिया रोने लगी...

रफ़्तार- रिया...रिया...रो मत...मेरी बात सुनो....

रिया(रोते हुए)- अब सुनने को बचा ही क्या है...मेरी मोम अपने मतलब के लिए मुझे मारने तैयार हो गई...अब और बचा ही क्या है....मैं तो ये सुनते ही मर गई....

रफ़्तार- नही...वो तुम्हे मारने वाली नही...असल मे उसका प्लान तुम्हारी सकल की लाश दिखाने का है....

रिया(चौंक कर)- क्या...क्या मतलब मेरी सकल की लाश....

रफ़्तार- बताता हूँ...

फिर रफ़्तार ने रिया को रिचा का पूरा प्लान बता दिया...जिसे सुनकर रिया की आँखो से आँसू बहते रहे...पर साथ मे उसकी आँखे गुस्से से दहकने लगी....

रिया- कुछ भी हो....मैं अपनी माँ को कभी माफ़ नही कारूगी....मेरे जीते जी मैं अंकित पर कोई आँच नही आने दूँगी....बिल्कुल नही....

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...वो तो वक़्त बातायगा....फिलहाल मैं तुम्हे खोल देता हूँ....तुम फ्रेश हो जाओ और कुछ खा लो....और हाँ...यहाँ से भागने की कोसिस मत करना ....वरना....

और फिर रफ़्तार रिया को आज़ाद कर के निकल गया और रिया आँसू बहाते हुए बैठी रही.....

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अंकित के घर पर..........

अंकित तो इस वक़्त रफ़्तार के घर मज़े लेने मे बिज़ी था....पर उसके घर मे 2 लोग अपने दिल और दिमाग़ के बीच फसे हुए थे.....

एक था आकाश ...जिसके दिल और दिमाग़ के बीच सुजाता को ले कर जंग छिड़ी हुई थी....और दूसरी थी सुजाता....जिसके साथ भी सेम कंडीशन थी....

आकाश का दिल कह रहा था कि सुजाता आज कुछ बदली हुई नज़र आ रही है....पर दिमाग़ ये बात मानने को तैयार नही था...दिमाग़ को सुजाता पर यकीन था....

पर इस समय सुजाता आकाश के सामने बैठी हुई चाय की चुस्किया मारती हुई आकाश को कुछ इस कदर देख रही थी...जैसे शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो...

ये सिचुयेशन आकाश को बार-बार चौंका रही थी...और यही वजह थी उसके दिल और दिमाग़ के बीच की कस्मकस की....

आकाश , सुजाता के इस बदले रूप को ज़्यादा देर तक सह नही पाया और जल्दी से अपनी चाय ख़त्म कर के अपने रूम मे निकल गया....

आकाश को यूँ जाते देख सुजाता के चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान फैल गई और फिर वो भी अपने रूम मे चली आई...

सुजाता आपमे रूम मे बैठी हुई फिर से अपने दिल और दिमाग़ के बीच चल रही उलझन मे डूब गई...

सुजाता दिल = स्डिल, सुजाता माइंड = स्मींड़ ....

स्डिल- ह्म...तो आग वहाँ भी लगी हुई है...साला हवसि.....इससे तो मेरा काम आसान हो जायगा....

स्मींड़- क्या...आसान....अरे आसान नही...मुस्किल होगी...तू फस जाएगी....ये दोनो बाप-बेटे तुझे रखेल बना के यूज़ करेंगे और छोड़ देगे....समझी...

स्डिल- नही...आकाश ऐसा नही है...उसकी आँखो मे हवस से ज़्यादा प्यार नज़र आता है.....उसे प्यार के जाल मे फसाना आसान रहेगा....और एक बार आकाश मुट्ठी मे आ गया तो बस...लाइफ सेट....

स्मींड़- क्या लाइफ सेट....अरे लाइफ नरक बन जाएगी तेरी....चलो मान लो कि आकाश मुट्ठी मे आ गया...पर अंकित...उसका क्या....वो नही फँसने वाला...और वो आकाश को भी नही फँसने देगा....समझी....

स्डिल- अंकित क्या कर पायगा...वो तो वैसे भी मरने वाला है...मेरे डॅड उसे छोड़ने वाले नही....

स्मींड- पर मेरे डॅड तो आकाश के दुश्मन है...वो पहले उसे मार देगे....फिर क्या....

स्डिल- नही...मैं आकाश को बचा लूगी...मैं कह दूगी कि ये मेरा पति है...वो मेरी बात मान जायगे....फिर क्या...मज़े ही मज़े....और वैसे भी....

तभी अचानक सुजाता का मोबाइल बजने लगा और वो दिल-फ़ीमाग़ के बीच चल रही जंग से बाहर निकली और अपने आपको नॉर्मल कर के फ़ोन पर बात करने लगी.....
 
रफ़्तार के घर.............................

यहाँ रोशनी ने पहली बार मेरे लंड रस का मज़ा लेकर मुँह खाली ही किया था कि तभी उसकी माँ कुसुम आँखो मे गुस्सा लिए जोरदार आवाज़ के साथ रूम मे दाखिल हुई....

अपनी माँ को यूँ देख कर एक पल के लिए तो रोशनी के चेहरे पर ख़ौफ़ छा गया...पर फिर उसे अपनी माँ की चुदाई याद आई और उसके चेहरे से डर गायब होने लगा....

दूसरी तरफ मुझे कुसुम के आने से कोई फ़र्क नही पड़ा...उल्टा उसे देख कर मैं मुस्कुराने लगा....

कुसुम- रोशनी....ये क्या कर रही थी तू...मुझे तुझसे ये उम्मीद बिल्कुल नही थी...छी....

कुसुम की बात सुनकर रोशनी ने सिर झुका लिया पर डरी नही...और मैं दोनो माँ-बेटी को देखते हुए मुस्कुराने लगा.....

कुसुम- अब बोलती क्यो नही...ये सब करते हुए तुझे शर्म नही आई....हाँ,...

रोशनी(हँसते हुए)- वाह माँ ...वाह...तुम करो तो सब ठीक ...और मैं करू तो ची....क्या इंसाफ़ है तुम्हारा...वा...

इतना बोलकर रोशनी ने तालिया बजानी शुरू कर दी...उसकी बातें सुन कर कुसुम चुप रह गई...उसके बाद बोलने के लिए कुछ बाकी ही नही था....

रोशनी- अब चुप क्यो हो गई...बोलो...हाँ...बोलो कौन सही है और कौन ग़लत....हाँ...

फिट थोड़ी देर तक रूम मे खामोसी छाई रही....और फिर मैने महॉल को नॉर्मल करने के लिए अपना मुँह खोला....

मैं- ह्म्म..हो गया तुम दोनो का...हाँ..या और कुछ बाकी है...

मेरी बात सुनकर दोनो मुझे देखने लगी पर बोली कुछ नही....

मैं- क्या हुआ....कुछ नही बोलना...ओके...मुझे भी बातों मे टाइम वेस्ट करने की आदत नही....चल रोशनी ...कपड़े निकाल अपने...अब मैं तुझे तेरी माँ के सामने ही चोदुन्गा...चल निकाल जल्दी...

रोशनी ने मेरी बात सुन कर एक नज़र अपनी माँ को देखा और फिर मुझे देखने लगी...

मैने उसे आँखो से इशारा किया तो वो जल्दी से अपने कपड़े निकालने लगी...ये देख कर कुसुम की आँखे बड़ी हो चली...

मैं(कुसुम को देख कर)- देख कुसुम...तेरी बेटी का जिस्म कैसा गदरा गया है..बिल्कुल तेरी तरह...मस्त मज़ा देगी....है ना....

कुसुम ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया...बस अपनी बेटी के नंगे बदन को घूर्ने लगी...तभी मैने रोशनी के पास जा कर इसकी गान्ड पर 2-3 थप्पड़ मारे और वो सिसक उठी...

रोशनी- आअहह...आअहह....नही ना...आहह...

मैं- उउंम...मस्त है यार...चल अब आजा...तेरी माँ को दिखा तू लंड कैसा चूस्ति है.....और डर मत...मैं हूँ ना....चल आजा....

इतना बोलकर मैं बेड पर बैठ गया और रोशनी मेरे मुरझाए हुए लंड को खड़ा करने लगी....

यहा रोशनी मेरे लंड को चूमती-चाट ती और ये सब देख कर कुसुम के बदन की आग सुलगती...

मैं- आअहह....ऐसे ही प्यार कर...उउउंम...कुसुम...अब तू भी आजा ना....दोनो साथ मे मज़ा करेंगे....आजा...

मेरी बात सुनकर कुसुम आई तो नही पर थोड़ी ही देर मे उसका हाथ उसकी चूत पर पहुँच गया...वो नाइटी के उपर से ही अपनी चूत सहलाने लगी...

रोशनी-उउंम..उउउंम..आहह...आ भी जाओ मा....मज़ा आयगा...उउउंम्म...देखो कितना प्याता लौंडा है...उउंम्म...

रोशनी की बात सुन कर कुसुम के साथ-साथ मैं भी शॉक्ड हो गया...मैने सोचा भी नही था कि रोशनी इतनी वाइल्ड होगी...पर ये मेरे लिए तो अच्छा था....

मैं(रोशनी का सिर सहला कर)- देख कुसुम...तेरी बेटी बुला रही है...अब मान भी जा...आ कर मज़ा कर...उउउंम...रोशनी...खा जाएगी क्या....आअहह...

रोशनी- उउउंम..उउंम..आहह...माँ..आओ ना...आज दोनो साथ मे मज़ा करते है...तुम मुझे चुदवाना और मैं तुम्हे...कम ऑन माँ...आ जाओ...देखो ये खड़ा भी हो गया....

मैं- जाने दे रोशनी...लगता है तेरी माँ को मेरा लंड पसंद नही रहा...चल ..तू मुझे अपनी चूत चखा...फिर मज़ा करते है...

और इतना बोलकर मैने रोशनी को बेड पर पटका और उसकी चूत चटाई शुरू कर दी...

मैं- सस्स्रररुउउप्प...सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्रररुउउ..आआहह....सस्स्रररुउउप्प्प्प...सस्स्रररुउुउउप्प्प्प...सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प...आअहह....

रोशनी- उउउफफफफ्फ़...माअस...आअहह...आअहब...उउउंम्म...ऊहह..माआ....उउउंम्म...उउंम्म...

रोशनी बार-बार अपनी माँ की तरफ देख रही थी और आहें भर रही थी...और उसकी माँ भी ये नज़ारा देख कर तेज़ी से अपनी चूत मसल्ने लगी थी...

धीरे-धीरे रोशनी ऊट चुस्वा कर मस्त होती जा रही थी...उसकी आवाज़े भी बढ़ने लगी थी...

मैं- सस्स्रररुउउप्प्प्प.....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प....

रोशनी- ओह...आअहह...आअहह...हहा....चूसो...आअहह...मज़ा आ गया...आहह...आअहह

अब रोशनी पूरे मज़े से चूत चुस्वा रही थी और अपनी गांद आगे कर के चूत को मुँह मेरे मुँह मे लगाने लगी....

मैने भी रोशनी के पैर पकड़ कर उसकी कमर को हवा मे कर दिया और चूत को मुँह मे भर कर चूसने लगा.....

रोशनी-आआहह...... अओउंम..तुम सच मे पागल हो..मेरी माँ के सामने...आओउउउंम..आअहह....

मैं- सस्स्रररुउउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प...उउउंम्म..

रोशनी- ओह्ह..जल्दी...और तेज...आआहह..आअहह..उउफ़फ्फ़...माआ...आअहह...

मैं- सस्स्र्र्ररुउप्प्प...आअहह...डोंट वरी मेरी जान...तुम्हारी माँ की भी चूसूगा...वो जल्दी आयगी...अभी तू मज़ा ले....उउउंम्म....

मैं रोशनी की चूत चूस्ता रहा और वो भी अपनी माँ को देखते हुए चूत चुस्वाती रही और इस एक्साइट्मेंट मे झड्ने लगी....

वहाँ कुसुम भी गरम हो चुकी थी...उसने अपनी नाइटी निकाल फेकि और नंगी ही अपनी चूत के दाने को मसल्ने लगी....

रोशनी- ओह्ह..मैं..आअहह...आऐईयइ...उउंम...उउउंम...आआहह...

मैं प्यार से रोशनी की चूत चूस कर पानी पी गया और फिर खड़ा हो गया...

मैं- मज़ा आया ना...

रोशनी- आअहह..बहुत....आहह...

मैं- अभी तो और भी मज़ा आयगा....चल अब लंड को थोड़ा गीला कर लूँ...

और इतना बोलकर मैने रोशनी को बेड पर उल्टा लिटाया और उसके मुँह मे लंड डाल के मुँह चोदने लगा...
 
रोशनी भी मज़े से मुँह चुदवाते हुए अपनी माँ को देखने लगी...जो अब उसके सामने नंगी खड़ी हुई चूत मसल रही थी....

रोशनी- उूउउम्म्म्म...उूुउउम्म्म्म...उूुउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....

मैं- आहह...कुसुम...तेरी बेटी का मुँह किसी चूत से कम नही....आअहह...

रोशनी- उउउंम्म....उूउउम्म्म्म....उूउउम्म्म्म....उूउउम्म्म्मम...क्क्हुउऊंम्म...

मैं- आअहह....रोशनी.....क्या मस्त है तू....आअहह...आजा कुसुम....मज़े ले ले...आअहह...

रोशनी का मुँह चोद्ते हुए मुझे अहसास हुआ कि कुसुम मेरे पीछे आ कर खड़ी हो गई है....

मैं- ओह्ह...तो आ गई...अब मज़ा कर...

कुसुम(मेरी पीठ सहला कर)- ह्म्म..अब मुँह ही चोदोगे कि छूट भी लोगे....चलो...अब मेरी बेटी की तड़पति चूत को ठंडा कर दो...

कुसुम की बात सुनकर मैं मुस्कुरा दिया और रोशनी के मुँह से लंड निकाल कर खड़ा हो गया...

रोशनी- ख़्हूंन...ख़्हूंन..खूंन्..आअहह...मर गई...आहह..

कुसुम(रोशनी को सहला कर)- मेरी बेटी की जान ही निकाल दी....ह्म्म...वैसे बेटी...कैसा लगा ये लंड...मस्त है ना...

रोशनी(मुस्कुरा कर)- हाँ माँ...मज़ेदार है....

कुसुम(रोशनी का सिर सहला कर)- तो तेरी चूत तैयार है इसे लेने को...

रोशनी(मुस्कुरा कर)- हाँ मोम...कब्से तैयार है...अब रुका नही जाता...

कुसुम(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..तो रुकना भी नही...चलो अंकित...लेट जाओ....मेरी बच्ची को लंड की सवारी कर्वाओ....ह्म..

मैं(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...अभी लो...

और इतना बोल कर मैं लेट गया और रोशनी मेरी तरफ पीठ कर के मेरे लंड को चूत मे लेने लगी...

उसकी चूत मे कुसुम ने खुद से मेरा लंड फसाया....

वैसे तो रोशनी की सील टूटी हुई थी...इसलिए उसे ज़्यादा दर्द नही हुआ....पर पूरा लंड लेने मे उसकी चीख निकल गई...

रोशनी- आआईयईई...माआअ...

कुसुम- बस बेटी...हो गया...अब मज़ा आयगा बस...चल सवारी शुरू कर दे....

कुसुम की बात सुन कर रोशनी ने लंड पर उछल्ना शुरू कर दिया...और मैने कुसुम को खीच कर उसे किस करना शुरू कर दिया....

मैं- सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प...उउउंम्म...आअहह..मज़ा आया मेरी जान...

कुसुम- आअहह...बहुत....पर मेरी बेटी को दर्द मत देना...आराम से करना...

मैं- क्यो नही...चल तू भी मज़ा कर ले...

और इतना बोल कर मैं कुसुम को किस करने लगा....और रोशनी फुल स्पीड मे चूत को लंड पर उच्छलती रही....

रोशनी- आआअहह....आअहह....माआ...ये तो...आहह...फाड़ रहा है...आअहह ...

कुसुम- उउउंम्म...उउउंम्म...आहह...कोई नही बेटा...जितनी फटेगी...उतना मज़ा आयगा....लेती रह....उउउम्म्म्म...उउउंम्म....

रोशनी- आआहह...हाँ माँ....मज़ा तो...आअहह...बहुत आआ रहा है....आअहह...

थोड़ी देर तक उछल्ने के बाद रोशनी थकने लगी ...और रुक कर अपनी गांद घुमाने लगी...

मैं- आहह...थक गई...कोई नही...रेस्ट कर ले....

कुसुम- ह्म्म..और जब तक मैं भी खुजली मिटा लेती हूँ...

इतना बिल कर कुसुम अपनी चूत मेरे मुँह पर रख कर बैठ गई...

मैने भी कुसुम की चूत के चटकारे लेते हुए उसकी बेटी को नीचे से धक्के मारना शुरू कर दिया...और थोड़ी ही देर मे रूम मे बस दोनो माँ-बेटी की सिसकियाँ सुनाई देने लगी...

रोशनी- आअहह....माआ...ज़ोर से...आअहह...ऐसे ही..एस्स...एस्स....

कुसुम- उउउंम्म...क्या चूस्ता है राजा...खा जा...आअहह...ज़ोर से...उउउफ़फ्फ़....

रोशनी- एस्स...एस्स...एस्स...आअहह....माँ...मेरी तो फट जाएगी...आआहह....

कुसुम- आअहह...फटने दे बेटा.....आआहह...ज़ोर से मार अंकित....और ज़ोर से...आआहह....

मैं थोड़ी देर तक मा-बेटी की सिसकारियाँ सुनते हुए दोनो को मज़े देता रहा और फिर दोनो लगभग एक साथ ही झड्ने लगी....

रोशनी- ओह्ह्ह..माँ...मैं गई...मैं गई...आआहह....आआअहह...

कुसुम- बेटी...मैं भी...आआओउउंम्म..मैं भी आई....उउउंम्म....आहह...

दोनो माँ बेटी झड कर शांत हो गई और मेरे उपर से उतार कर बेड पर बैठ गई....
 
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