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Guest
एक सुनसान से रास्ते पर एक औरत छिपते-छिपाते कही जाने की जल्दी मे थी...
वो बहुत ही ज़्यादा डरी और घबराई हुई थी...इसलिए बार-बार पीछे मुड़कर देखती और फिर आगे बढ़ती....
पर उसकी सतर्कता काम ना आई...
अचानक ही उसके सामने एक आदमी आ गया....
औरत- त्त्त...तुम...य्यी..यह..यहाँ....
आदमी(कमीनी मुस्कान बिखेर कर)- अरे..कककक ...क्या हुआ....डर गई...हाहहाहा......
औरत(हाथ जोड़ कर)- मुझे जाने दो...प्ल्ज़...मुझे....
इससे पहले की वो कुछ और बोलती पीछे से किसी ने उस पर बार किया और वो बेहोश हो गई.....
आदमी(पीछे वाले सक्श को देख कर)- ये क्या ...तुम....मैं संभाल लेता ना...तुम्हे आने को किसने कहा था....
""मुझे ऑर्डर सुनना पसंद नही.....समझे...अब सम्भालो इसे....और हाँ...ध्यान से....सिर्फ़ क़ैद मे रखना है...और कुछ किया ना....तो भूलना मत....मुझे जान लेना भी आता है....""
और इतना बोलकर वो सक्श वहाँ से निकल गया और वो आदमी बस दाँत पीसता हुआ रह गया......
फिर वो सक्श उस औरत को उठा कर उसी घर मे ले गया...जहाँ से वो चोरी-छिपे भागने की कोसिस मे थी....वो घर था रेणु का घर.....
घर मे लाते ही रघु ने उस औरत को सोफे पर पटका और गुस्से से रेणु को देखने लगा...जो अपने बाप मदन के साथ खड़ी हुई रघु का वेट कर रही थी.....
रेणु(आँखे मटकाते हुए)- ऐसे क्या देख रहा है...मारेगा क्या...हाँ...जा...पहले गेट बंद कर के आ...
रेणु की बात सुनकर रघु गुस्से से अपनी मुट्ठी बाँध कर आगे बड़ा ही था कि तभी मदन ने उसे इशारा किया और रघु रुक गया....
रेणु(मुस्कुरा कर)- ओह्ह...इतना गुस्सा...सच मे...हहहे...तू कितना भी गुस्सा कर ले....मैं डरने वाली नही...चल जा कर गेट बंद कर...जा...
रघु को गुस्सा तो आ रहा था ...पर उसने मदन की तरफ देखा और चुपचाप मुड़कर गेट की तरफ चल पड़ा....
मदन(रेणु को देख कर)- बस कर बेटी...अब उसे और प्रेसां मत कर....ठीक है...
रेणु(थोड़ा गुस्से मे)- परेशान नही कर रही...बस मैं तो....खैर छोड़ो....वो एक काम का नही....काम था कि इस पर नज़र रखे...पर वो सोया रहा और ये भाग गई...
मदन(रेणु के सिर पर हाथ रख कर)- तो क्या हुआ....भाग तो नही पाई ना....चल ठंडी हो जा...और इसे होश मे ला...
मदन की बात सुनकर रेणु ने हाँ मे सिर हिलाया और पानी ले कर सोफे पर पड़ी आरती के मुँह पर फेक दिया....
पानी पड़ते ही आरती छॅट्पाटा कर होश मे आई और अगले ही पल रेणु और मदन को देख कर सहम गई....
रेणु(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ मोम....डर गई क्या....हाँ...हहहे.....
रेणु की बात सुनकर आकर्ती के चेहरे पर डर के भाव पैदा हो गये....और तब तक वहाँ रघु भी आ गया...जिसने आते ही आकर्ती को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया...जिससे बेचारी सोफे पर लूड़क गई....
रेणु(चिल्ला कर)- हे...तेरी हिम्मत कैसे हुई इनको मारने की...साला दो टके का नौकर....
इतना बोलकर रेणु रघु पर झपटने को हुई पर मदन ने उसे पकड़ लिया....
मदन- रेणु....शांत रहो...
रेणु(गुस्से से)- कैसे हो जाउ....ये साला...इसकी औकात ही क्या है...मेरी मोम पर हाथ उठाता है...मैं इसकी जान ले लुगी.....
मदन(ज़ोर से)- बस....ये तेरी मोम नही...समझी....
रेणु(मदन को घूर कर)- जानती हूँ...पर इसकी ही बदोलत आज मैं जिंदा हूँ....समझे आप....भले ही ये मेरी मोम नही...पर मोम से कम भी नही....और एक बात आप ध्यान से सुन लो....हमारा मक़सद आकाश है....सिर्फ़ आकाश....इस सब मे मेरी मोम को शामिल करने की भूल मत करना....ठीक है....
मदन को रेणु की बात अच्छी नही लगी...फिर भी उसने अपने गुस्से को दबा कर हाँ मे सिर हिला दिया....
मदन- ठीक है...जैसा तुम चाहो...वैसा ही होगा....(रघु को देख कर)- रघु...आइन्दा ऐसी हरक़त मत करना...समझे....
रघु(रेणु को घूर कर)- ठीक है....दोवरा ऐसा नही होगा....
रेणु(गुस्से से)- दोवरा ऐसा ना ही हो तो अच्छा होगा....क्योकि अगर दोवरा ऐसा हुआ...तो वो तुम्हारा आख़िरी दिन होगा ....समझे ना....अब दफ़ा हो यहाँ से....जाओ....
मदन- रघु...तुम जाओ....
रघु फिर से मदन की बात मान कर वहाँ से निकल गया.....रघु के जाते ही रेणु ने आरती को बैठाया और उसे घूर्ने लगी....
रेणु- मोम...मैं नही चाहती कि आपको कोई चोट पहुँचे...इसलिए कान खोल कर सुन लो....आपने अगर आकाश या अंकित को कुछ भी बताने की कोसिस की ना....तो फिर....फिर मैं कुछ नही कर पाउन्गी...ये लोग आपके बेटे को और आपको...दोनो को मार देगे....मेरी बात समझ रही है ना....हुह...
आकर्ती कुछ नही बोली बस रेणु की बात सुनकर उसकी आँखे नम हो गई....
रेणु- देखो मोम....आकाश ने जो भी किया...उसे उसकी सज़ा भुगतनी ही होगी....इसलिए बेहतर होगा कि आप इस सबसे दूर रहे....इसी मे सबकी भलाई है...और फिर आपको भी तो अपने पति के कातिल की मौत ही चाहिए ना...हाँ....
आकर्ती(सुबक्ते हुए)- म्म्म...मैं...नही...मत करो...छोड़ दो....प्ल्ज़्ज़...
रेणु(चिल्ला कर)- नही...नही छोड़ सकती....और ...अब कोई ग़लती मत करना प्ल्ज़...वरना मैं भी आपको बचा नही पाउन्गी....समझी....हुह...
और इतना बोलकर रेणु तेज़ी से आपने रूम मे निकल गई...क्योकि उससे आकर्ती की हालत नही देखी जा रही थी....
रेणु के जाते ही रघु वापस आ गया और मदन के इसारे पर आकर्ती को एक रूम मे बंद कर आया...और फिर वापिस आ कर मदन को घूर्ने लगा....
रघु- आप अपनी बेटी को समझा लो....वरना....
मदन(बीच मे)- सस्शीई....चुप हो जाओ....जब तक हमारा काम नही होता तब तक चुप रहने मे ही भलाई है....फिर...
रघु- फिर...रुक क्यो गये...फिर क्या....
मदन(पाइप निकाल कर)- फिर...फिर की बात फिर करेंगे...हुह....
और इतना बोल कर मदन ने पाइप जलाया और कस मार कर रघु को एक कामिनी स्माइल दी और बदले मे रघु भी मुस्कुरा उठा........
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वो बहुत ही ज़्यादा डरी और घबराई हुई थी...इसलिए बार-बार पीछे मुड़कर देखती और फिर आगे बढ़ती....
पर उसकी सतर्कता काम ना आई...
अचानक ही उसके सामने एक आदमी आ गया....
औरत- त्त्त...तुम...य्यी..यह..यहाँ....
आदमी(कमीनी मुस्कान बिखेर कर)- अरे..कककक ...क्या हुआ....डर गई...हाहहाहा......
औरत(हाथ जोड़ कर)- मुझे जाने दो...प्ल्ज़...मुझे....
इससे पहले की वो कुछ और बोलती पीछे से किसी ने उस पर बार किया और वो बेहोश हो गई.....
आदमी(पीछे वाले सक्श को देख कर)- ये क्या ...तुम....मैं संभाल लेता ना...तुम्हे आने को किसने कहा था....
""मुझे ऑर्डर सुनना पसंद नही.....समझे...अब सम्भालो इसे....और हाँ...ध्यान से....सिर्फ़ क़ैद मे रखना है...और कुछ किया ना....तो भूलना मत....मुझे जान लेना भी आता है....""
और इतना बोलकर वो सक्श वहाँ से निकल गया और वो आदमी बस दाँत पीसता हुआ रह गया......
फिर वो सक्श उस औरत को उठा कर उसी घर मे ले गया...जहाँ से वो चोरी-छिपे भागने की कोसिस मे थी....वो घर था रेणु का घर.....
घर मे लाते ही रघु ने उस औरत को सोफे पर पटका और गुस्से से रेणु को देखने लगा...जो अपने बाप मदन के साथ खड़ी हुई रघु का वेट कर रही थी.....
रेणु(आँखे मटकाते हुए)- ऐसे क्या देख रहा है...मारेगा क्या...हाँ...जा...पहले गेट बंद कर के आ...
रेणु की बात सुनकर रघु गुस्से से अपनी मुट्ठी बाँध कर आगे बड़ा ही था कि तभी मदन ने उसे इशारा किया और रघु रुक गया....
रेणु(मुस्कुरा कर)- ओह्ह...इतना गुस्सा...सच मे...हहहे...तू कितना भी गुस्सा कर ले....मैं डरने वाली नही...चल जा कर गेट बंद कर...जा...
रघु को गुस्सा तो आ रहा था ...पर उसने मदन की तरफ देखा और चुपचाप मुड़कर गेट की तरफ चल पड़ा....
मदन(रेणु को देख कर)- बस कर बेटी...अब उसे और प्रेसां मत कर....ठीक है...
रेणु(थोड़ा गुस्से मे)- परेशान नही कर रही...बस मैं तो....खैर छोड़ो....वो एक काम का नही....काम था कि इस पर नज़र रखे...पर वो सोया रहा और ये भाग गई...
मदन(रेणु के सिर पर हाथ रख कर)- तो क्या हुआ....भाग तो नही पाई ना....चल ठंडी हो जा...और इसे होश मे ला...
मदन की बात सुनकर रेणु ने हाँ मे सिर हिलाया और पानी ले कर सोफे पर पड़ी आरती के मुँह पर फेक दिया....
पानी पड़ते ही आरती छॅट्पाटा कर होश मे आई और अगले ही पल रेणु और मदन को देख कर सहम गई....
रेणु(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ मोम....डर गई क्या....हाँ...हहहे.....
रेणु की बात सुनकर आकर्ती के चेहरे पर डर के भाव पैदा हो गये....और तब तक वहाँ रघु भी आ गया...जिसने आते ही आकर्ती को एक जोरदार थप्पड़ मार दिया...जिससे बेचारी सोफे पर लूड़क गई....
रेणु(चिल्ला कर)- हे...तेरी हिम्मत कैसे हुई इनको मारने की...साला दो टके का नौकर....
इतना बोलकर रेणु रघु पर झपटने को हुई पर मदन ने उसे पकड़ लिया....
मदन- रेणु....शांत रहो...
रेणु(गुस्से से)- कैसे हो जाउ....ये साला...इसकी औकात ही क्या है...मेरी मोम पर हाथ उठाता है...मैं इसकी जान ले लुगी.....
मदन(ज़ोर से)- बस....ये तेरी मोम नही...समझी....
रेणु(मदन को घूर कर)- जानती हूँ...पर इसकी ही बदोलत आज मैं जिंदा हूँ....समझे आप....भले ही ये मेरी मोम नही...पर मोम से कम भी नही....और एक बात आप ध्यान से सुन लो....हमारा मक़सद आकाश है....सिर्फ़ आकाश....इस सब मे मेरी मोम को शामिल करने की भूल मत करना....ठीक है....
मदन को रेणु की बात अच्छी नही लगी...फिर भी उसने अपने गुस्से को दबा कर हाँ मे सिर हिला दिया....
मदन- ठीक है...जैसा तुम चाहो...वैसा ही होगा....(रघु को देख कर)- रघु...आइन्दा ऐसी हरक़त मत करना...समझे....
रघु(रेणु को घूर कर)- ठीक है....दोवरा ऐसा नही होगा....
रेणु(गुस्से से)- दोवरा ऐसा ना ही हो तो अच्छा होगा....क्योकि अगर दोवरा ऐसा हुआ...तो वो तुम्हारा आख़िरी दिन होगा ....समझे ना....अब दफ़ा हो यहाँ से....जाओ....
मदन- रघु...तुम जाओ....
रघु फिर से मदन की बात मान कर वहाँ से निकल गया.....रघु के जाते ही रेणु ने आरती को बैठाया और उसे घूर्ने लगी....
रेणु- मोम...मैं नही चाहती कि आपको कोई चोट पहुँचे...इसलिए कान खोल कर सुन लो....आपने अगर आकाश या अंकित को कुछ भी बताने की कोसिस की ना....तो फिर....फिर मैं कुछ नही कर पाउन्गी...ये लोग आपके बेटे को और आपको...दोनो को मार देगे....मेरी बात समझ रही है ना....हुह...
आकर्ती कुछ नही बोली बस रेणु की बात सुनकर उसकी आँखे नम हो गई....
रेणु- देखो मोम....आकाश ने जो भी किया...उसे उसकी सज़ा भुगतनी ही होगी....इसलिए बेहतर होगा कि आप इस सबसे दूर रहे....इसी मे सबकी भलाई है...और फिर आपको भी तो अपने पति के कातिल की मौत ही चाहिए ना...हाँ....
आकर्ती(सुबक्ते हुए)- म्म्म...मैं...नही...मत करो...छोड़ दो....प्ल्ज़्ज़...
रेणु(चिल्ला कर)- नही...नही छोड़ सकती....और ...अब कोई ग़लती मत करना प्ल्ज़...वरना मैं भी आपको बचा नही पाउन्गी....समझी....हुह...
और इतना बोलकर रेणु तेज़ी से आपने रूम मे निकल गई...क्योकि उससे आकर्ती की हालत नही देखी जा रही थी....
रेणु के जाते ही रघु वापस आ गया और मदन के इसारे पर आकर्ती को एक रूम मे बंद कर आया...और फिर वापिस आ कर मदन को घूर्ने लगा....
रघु- आप अपनी बेटी को समझा लो....वरना....
मदन(बीच मे)- सस्शीई....चुप हो जाओ....जब तक हमारा काम नही होता तब तक चुप रहने मे ही भलाई है....फिर...
रघु- फिर...रुक क्यो गये...फिर क्या....
मदन(पाइप निकाल कर)- फिर...फिर की बात फिर करेंगे...हुह....
और इतना बोल कर मदन ने पाइप जलाया और कस मार कर रघु को एक कामिनी स्माइल दी और बदले मे रघु भी मुस्कुरा उठा........
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