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चूतो का समुंदर

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लंड बाहर आते ही सेतु का दर्द कम ही गया था....पर अब भी वो सर को टेबल पर रखे सिसक रही थी....

मैं- चल...तू अपनी गान्ड देख...मैं तुझे मज़ा देता हूँ...

और इतना बोल कर मैने उसे टेबल पर कुतिया बनाया और उसकी चूत मे लंड उतार दिया....

चूत मे लंड लेने मे सेतु को कोई तकलीफ़ नही हुई...बस सिसक कर रह गई....

फिर मैने उसकी कमर पकड़ कर जोरदार चुदाई शुरू कर दी...

सेतु को भी अब मज़ा आने लगा था...उसका दर्द भी ख़तम हो गया और वो मस्ती मे सिसकारियाँ लेने लगी.....

सेतु- आअहह...आअहह....अओउउंम्म....और तेज...आअहह...

मैं- आ गई रंडी अऔकात पर...ये ले....मज़ा कर ...

सेतु- आअहह...आअहह...ज़ोर से करो....अब कोई रहम नही...फाड़ दो...आअहह....

और मेरी जोरदार चुदाई से सेतु झड्ने लगी...और उसके चूत रस के साथ ही उसका सारा दर्द भी निकल गया ....

सेतु- आआअहह.....मज़ा...एयेए...गया....उूउउम्म्म्म....आअहह...

मैं- अब मज़ा ले लिया ना...अब सज़ा की बारी है......

और इतना बोलकर मैने सेतु को सीधा लिटाया और उसके पैर उठाकर उसकी गान्ड पर लंड सेट कर दिया...

सेतु ने भी इस बार अपने पैर अपने हाथो से थामकर अपनी गान्ड खोल दी ...और मैं समझ गया की अब साली रेडी है...

फिर क्या था...मैने दो धक्के मार कर लंड को गांद मे उतार दिया और तेज़ी से गांद चुदाई शुरू कर दी....

सेतु- आऐईयईईई.....आअहह....थोड़ा..आ..आराम से....आअहह

मैं- अब मज़ा आ रहा है साली....हा....तो ऐसे ही मज़ा ले.....ईएहह.....ईईहह...

सेतु- एस्स....करते रहो...अब...आअहह...ज़ोर से....आआहह..

मैं- ईएह..एस्स...लाइक दिस ...एस...एस्स....

सेतु-आअहह....लाइक दिस....उम्म्म..ईए...एस्स...एस्स...एस्स ..आआहह....

मैं- साली रंडी....ये ले...और तेज...और तेज....यहह.....

सेतु- एसस्स...आइ लाइक इट...एस्स....एस्स....आआहह...आअहह....

थोड़ी देर बाद मैने सेतु की कमर पर फसे स्कर्ट को भी निकाल फेका और साइड से उसकी गान्ड मारने लगा....

सेतु- ओह माइ गॉड....तुम तो मुझे मार दोगे...आआहह....धीरे करो ना...आआओउक्च्छ...

मैं- आज कोई रहम नही....बड़ी आग लगी थी ना.....अब कभी नही लगेगी...ये ले....

और मैने ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारते हुए सेतु की गान्ड का भोसड़ा बनाने लगा....

सेतु को भी अब मज़ा आ रहा था...लेकिन उसकी गांद मेरे लंड के प्रहार से ज़ख्मी हो गई थी...जिससे वो दर्द से कराह रही थी...

सेतु- आआहह....अब बस भी करो.....मेरी गांद छिल गई है...ओह माआ..

मैं- आज चाहे छिले या कटे....मैं नही रुकने वाला....ये ले....यीह..यीह..यीहह...

सेतु अपनी गांद चुदाइ से तड़प तो रही थी...पर उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था...और इसका सबूत उसकी चूत पानी बहा कर दे रही थी....

थोड़ी देर बाद मैने उसकी गान्ड मारना बंद किया और लंड उसके मुँह मे भर दिया....

मैं- आअहह...ले साली ...चूज़ इसे....मेरे लंड मे भी जलन होने लगी....ठंडा कर इसे....

थोड़ी देर तक मैने सेतु से लंड चुस्वाया और फिर मैं टेबल पर लेट गया....

मैं- अब मैं थक गया....अब तू मेहनत कर...

मेरा इतना बोलना था कि सेतु मेरे उपर आ गई और लंड को चूत मे भर कर उछलने लगी....

सेतु- आअहह....मैं तो इंतज़ार मे थी...अब मैं चोदुगि ....आओउउंम...

मैं- हाँ साली...तू भी खुश हो ले थोड़ी देर...फिर रुलाता हूँ तुझे...अब ज़ोर से कर नही तो गांद फाड़ दूँगा....उछाल...

और सेतु गान्ड उछाल -उछाल कर चूत चुदवाने लगी....

सेतु- आहह......तुम सच मे बहुत अच्छे हो...

मैं- क्यो...तेरी चुदाई करता हूँ इसलिए...

सेतु- नही...चुदाई मे मज़ा देते हो इसलिए...

मैं- ओह...तो मेरी स्टाइल पसंद आई....

सेतु- बहुत...देखो ना...इतनी पसंद आई कि चूत फिर से रोने लगी.....

मैं- हाँ साली...चूत तो गरम होगी ही....रंडी जो है....रुक...चूत के साथ गांद भी रोएगी अभी.....

सेतु- पर मेरी गान्ड जल रही है...

मैं- तो जलने दे....लंड जाते ही ठंडी हो जाएगी.....देखती जा...और तेज़ी से उछल....

फिर थोड़ी देर तक सेतु उछलती रही और झड्ने लगी....

सेतु- आआहह....मैं तो गई...उउउंम...आआहह...आहह..आहह..

सेतु झड कर शांत हो गई और सीने पर सिर रख कर लेट गई...

सेतु- उउउंम्म...मज़ा आ गया....आअहह...

मैं(सेतु के बाल पकड़ कर)- अभी कहा...अभी मेरा मज़ा और तेरी सज़ा तो बाकी है...चल उठ....

और मैने सेतु को एक बार फिर से टेबल पर झुका दिया और उसकी गांद मारना शुरू कर दिया....
 
सेतु- आअहह..आहह..आहह..आहब...आहह...आहह...आरामम्म...सस्सीए.....

मैं-अब आराम नही. ..बस जाम होगा... यह..एस्स...एस्स...एस्स..ईएसस...

सेतु-आअहह....आराम से...आहह...आहह.आहह..आहह..मम्मूऊम्मय्यी.....

मैं- चिल्ला...और चिल्ला...अब नही छोड़ने वाला........ये ले..और ज़ोर से ले..यीहह...

सेतु- उउंम..उउंम्म..आअहह...आअहह. ..आआईयइ.....

और इसी तरह मैं थोड़ी देर तक फुल स्पीड से सेतु की गांद मारता रहा और फाइनली मैं झड्ने के करीब आ गया.....

मैं- आअहह..आजा ...अब तेरी आज बुझाता हूँ....ले...पानी पी ले...

और मैने सेतु को टेबल पर लिटाया और उसके मुँह पर पिचकारियाँ मारने लगा....

सेतु को मैने अपने लंड रस से नहला दिया और सेतु मज़े से उस बारिश का मज़ा लेती हुई पड़ी रही......

जब मैं झड चुका तो मैने कपड़े पहने और सेतु को बोला...

मैं(सेतु को फ़ोन देते हुए)- ये ले फ़ोन...किसी फ्रेंड को बुला ले जो तुझे घर तक छोड़ दे....क्योकि तू तो चलने लायक नही रही....बुला ले....

और हाँ...आज के बाद ऐसा घटिया मज़ाक किया ना...तो इससे भी बुरा हाल करूँगा...

सेतु मेरी बातें सुनकर कुछ नही बोली...बस अपनी साँसे संभालती हुई लेटी रही ....

और मैं जैसे ही वापिस जाने के लिए मुड़ा तो गेट पर संजू को देख कर ठिठक गया....

संजू गेट पर खड़ा हुआ मुझे ही देख रहा था....मैने भी उसे देखा और बिना कुछ बोले बाहर आ गया....

तभी संजू ने पीछे से आवाज़ दी...जिसे सुनकर मैं ना चाहते हुए भी रुक गया...

संजू- ये सब क्या था...

मैं(पलट कर संजू को देख कर)- पहले यहाँ से चल...अनु लोग यहाँ आ जाए उससे पहले निकलो यहाँ से...

और इतना बोलकर मैं आगे बढ़ गया और संजू भी मेरे पीछे-पीछे आ गया...

संजू ने अपनी स्पीड बधाई और मेरे बाजू मे आ कर बोला...

संजू- वो सब घर निकल गये...अब बता...ये सब किसलिए....

मैं(रुक कर संजू को देख कर)- इससे तुझे क्या....ये मेरा मॅटर है...अच्छा होगा इससे दूर रहो...

मैने इतना बोलकर आगे बढ़ा ही था कि संजू फिर से बोल पड़ा......

संजू- क्या कहा....तुम्हारा मॅटर...कब्से...मतलब हमारे बीच मे ये तेरा -मेरा कहाँ से आ गया....

मैं(पलट कर)- अपने आप से पूछो...जवाब मिल जायगा....

और मैं बात ख़त्म कर के वहाँ से निकल गया...और मेरे पीछे संजू खड़ा-खड़ा अपने आप से बोल पड़ा...

संजू- मैं जानता हूँ कि तू किस बारे मे बोल रहा है....पर दोस्त...मैं जो भी कर रहा हूँ वो सिर्फ़ तेरे लिए ही है...आइ विश वो टाइम जल्दी आ जाए...जब मैं तुझे सब समझा सकूँ....और तू मुझे समझ सके....
 
स्कूल से निकल कर मैं सीधा घर आ गया...पर घर पर कोई नही था...ना डॅड, ना सविता....और पारूल तो अनु के साथ उसके घर निकल गई थी....

घर मे इस वक़्त सिर्फ़ सुजाता और सविता का बेटा सोनू था....

सुजाता(मुझे देख कर)- अरे अंकित...आ गया तू...बैठ मैं तेरे लिए कॉफी...

मैं(बीच मे)- सविता कहाँ है...आई नही अभी...

सुजाता(सकपका कर)- वो...वो अभी तो नही आई...आ जाएगी...तू उसकी टेन्षन मत ले...तब तक मैं हूँ ना तेरा ख्याल रखने को....

मैं(गुस्से से)- तुम चुप रहोगी थोड़ी देर...मैं सोनू से पूछ रहा हूँ कि उसकी माँ कहा है....और हाँ...सविता मेरे लिए माँ जैसी है...इसलिए अच्छा होगा कि उनके मॅटर मे तुम मुझे सलाह ना दो...समझी...बोल सोनू...कहाँ है तेरी माँ...

सोनू- भैया...वो अपनी सहेली के घर है ..वहाँ कोई मर गया तो वो आ नही पाई...शायद कुछ दिन बाद आयगी...

मैं- तुझे किसने बोला...

सोनू- उनका फ़ोन आया था सुबह....

मैं(हैरानी से)- कमाल है...मैने फ़ोन लगाया तो लगा नही...और तुझे फ़ोन आ गया....

सोनू- हाँ भैया...उनकी बॅट्री ख़त्म हो रही थी...और गाओं मे लाइट नही थी..तो शायद....

मैं(बीच मे)- ह्म..समझ गया...अब तू जा कर पढ़ाई कर...और सुजाता आंटी....जाओ कॉफी ले कर आओ...जल्दी...

सुजाता मेरी बात सुनकर मुँह बना कर कॉफी बनाने निकल गई ...

सुजाता(मन मे)- रुक जा बच्चे...कुछ दिन और...फिर मैं बताती हूँ तुझे की मैं क्या चीज़ हूँ...सारी हेकड़ी निकाल दुगी ....हा...

कॉफी पीकर मैं घर से निकला और बारी-बारी सोनू, अकरम और संजू के घर मिलने पहुँचा.....

सबके घर के हालात पहले से बेहतर थे...पर अभी भी पूरी तरह से ठीक नही...

मैं समझ सकता था कि अपनो को खोने का दर्द इतनी जल्दी दूर नही होता..

पर आज मेरे दिल मे भी एक टीस उठ रही थी...और उसकी वजह थी जूही और अनु...

आज ना तो जूही ने मेरी तरफ देखा और ना अनु ने....और जब मैने उनसे बात करनी चाही तो वो मुझसे दूर भाग गई...जैसे की मैं कोई अंजान इंसान हूँ...

मैं(मन मे)- क्या हो गया इन दोनो को....ये सदमे की वजह से ऐसा कर रही है...या फिर कोई और ही बात है...

मैं जूही और अनु का सोच ही रहा था कि मेरा फ़ोन बज उठा और स्क्रीन पर नाम देख कर मैने अपना सिर पकड़ लिया...

मैं- साला इसे तो भूल ही गया था...

और मैने फ़ोन ले कर कुछ बात की और अपनी कार दौड़ा दी.....

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रात को जब मैं वापिस आया तो डॅड हॉल मे बैठे हुए मिले ..पर वो इस समय बड़े डिस्टर्ब लग रहे थे....

इससे पहले कि मैं कुछ बोलता...वहाँ सुजाता आ गई ...जो किचन से कॉफी ले कर आई थी...

सुजाता को देख कर मैं चुप रह गया ...और फिर कॉफी पीने लगा...

मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- डॅड...मुझे आपसे कुछ बात करनी है...

आकाश(सुजाता को देखने के बाद)- हाँ ..बोलो...

मैं(सुजाता को घूर कर)- यहाँ नही...अकेले मे...आपके रूम मे चले....

मेरी बात सुनकर डॅड सुजाता की तरफ देखने लगे...और सुजाता ने उन्हे घूर कर देखा और फिर मुस्कुराते हुए बोली...

सुजाता- अरे बेटा....जो बात करनी है...यही कर्लो ...यहाँ तो सब अपने ही है...क्यो आकाश...

सुजाता ने फिर से आकाश को देखा और डॅड ने भी मजबूरी मे मुस्कुरा दिया...पर मुझे गुस्सा आ गया...

मैं(गुस्से मे खड़ा हो कर)- आपसे कितनी बार बोला आंटी कि आप हमारे घर के मामले मे टाँग मत अड़ाएँ....मुझे अपने डॅड से कब और क्या बात करनी चाहिए...ये सीखने की कोई ज़रूरत नही..समझी..

सुजाता(घबरा कर)- मैं तो बस...आकाश जी....आप ही कुछ...

मैं(बीच मे)- डॅड....प्ल्ज़ अपने रूम मे चलिए....

मेरी बात सुनकर डॅड ने सुजाता को देखा पर उठ कर रूम मे निकल गये...

मैं(सुजाता को देख कर)- तू भी सो जा अब....और आइन्दा से मेरे और मेरे डॅड के बीच बोलना भी मत...समझी..

और मैं भी पैर पटकते हुए डॅड के रूम मे आ गया....

मैं जानता था कि सुजाता मानेगी नही...और वही हुआ....हमारे रूम मे आने के कुछ देर बाद ही सुजाता गेट से कान लगा कर खड़ी हो गई...

मैने गेट के नीचे से आती रोशनी मे उसके पैर की परच्छाई देख ली थी..

मैं- क्या हुआ डॅड...आप ठीक तो है..

आकाश(झल्ला कर)- काहे का ठीक...मैं अब परेशान हो गया हूँ....अब मुझसे और सबर नही होता...

मैं- क्या हुआ डॅड...आप इतनी टेन्षन मे क्यो है..कुछ तो बताइए..

आकाश- क्या बताऊ तुझे...मुझे तो कहते हुए भी शर्म आती है...

और इतना बोलकर डॅड पलट गये और मुझसे नज़रें चुरा ली...

मैं डॅड के पास गया और धीरे से बोला...

मैं- डॅड....प्ल्ज़ बताइए ना....मुझसे कहने मे शर्म कैसी....

आकाश- बेटा...कुछ बातें ऐसी होती है जो कि एक बाप अपने बेटे से बोल नही पाता...

मैं- जानता हूँ डॅड...पर आप भी ये जानते है कि हम कितना ख़तरनाक खेल रहे है....तो प्ल्ज़ डॅड....बताओ मुझे...ये जानना मेरे लिए ज़रूरी है...हमारे प्लान के लिए .....

आकाश(पलट कर, ज़ोर से)- क्या बताऊ...सुनना चाहता है तो सुन....वो सुजाता...वो मुझे अपना पति समझ कर रोज रात को...

और इतना बोल कर डॅड चुप हो गये और एक बार फिर से दूसरी तरफ देखने लगे....
 
आकाश(नज़रें चुरा कर)- अब और नही अंकित...अब सुजाता तो सच बताना ही होगा...तू कुछ भी कर...पर अब मैं ये नाटक नही कर सकता....

ये बात सुनकर मैं तो नॉर्मल था...पर बाहर खड़ी सुजाता की फट गई थी....

मैं- ओके डॅड....बस 1वीक और ...फिर सब क्लियर कर दूँगा....प्रोमिस...

आकाश(ज़ोर से)- 1हफ़्ता....बहुत ज़्यादा हुआ...मैं इतने दिनो तक ...

तभी मैने डॅड को आँखो से इशारा किया और डॅड चुप हो गये...

आकाश- ओके...1 हफ़्ता और सही...

मैं- ह्म..अब चलिए...वो पार्टी मे जाना है ना...याद तो है...कि भूल गये...

आकाश- ओह माइ गॉड...मैं तो भूल ही गया था...अच्छा हुआ याद दिला दिया....चल...रेडी हो जा...चलते है...

मैं- ओके ..मैं आता हूँ...

और इतना बोलकर मैं गेट की तरफ बढ़ा ...और गेट को हाथ लगाते ही सुजाता दवे पैर भाग गई....उसकी हरक़त पर मुझे गुस्सा तो आया...पर मैने उसे इग्नोर किया और मुस्कुरा कर वहाँ से निकल गया....

थोड़ी देर बाद मैं डॅड के साथ बाहर निकल गया और सुजाता अपना सिर पीट कर बैठ गई...

सुजाता(मन मे)- ये मैने क्या किया....आकाश के साथ....मैं तो सोच रही थी कि वो मेरा पति है...पर ये तो...(गुस्से से)- आने दो साले को....1 हफ़्ता बोला है ना..अब मैं 1 हफ्ते मे ऐसी हालत करूगि कि मारने के पहले हज़ार मौत मरेगा.....

बाप-बेटे अपने आपको बहुत शातिर समझते है ना.....आप मैं बताती हूँ कि सुजाता क्या चीज़ है.....

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रेणु के घर...............

रेणु अपने बाप मदन और रघु के साथ पेग लगाते हुए आगे का प्लान डिसकस कर रही थी....

मदन(सीप मार कर)- तो तुम ही बताओ बेटी क्या करे...बिना अंकित को मारे आकाश को मारना मुस्किल है....और चलो मार भी दिया...तो दौलत का क्या....आकाश की सारी दौलत अंकित के नाम हो जाएगी...फिर हमे क्या फ़ायदा...

रेणु(मदन को देख कर)- तो अंकित को मार कर भी क्या फ़ायदा होने वाला है...दौलत तो तब भी हमे नही मिलेगी ना....

मदन(पेग गटक कर)- आ...जानता हूँ...तभी तो मैं चाहता था कि तुम अंकित को फसा कर सबकुछ हासिल कर लो...पर तुम तो...तुम तो बस...

मदन अपनी बात बोलते-बोलते अपना घुसा चेयर के हॅंडल पर मारने लगा....

रेणु(थोड़ा गुस्से मे)- मैने क्या किया...आप खुद तो यहाँ थे नही..और अब मुझ पर गुस्सा कर रहे है...मैं क्या करती....वो तो अच्छा हुआ कि वसीम मुझे मिल गया...वरना मैं अकेली क्या कर लेती....हां...

मदन(अपना गुस्सा काबू कर के)- अरे बेटी...मेरा वो मतलब नही था...वो तो बस ...आकाश का सोचते ही गुस्सा आ जाता है....उसने मेरी जिंदगी नरक बना दी...मैं उसे ....

रेणु(मदन का हाथ थाम कर)- डॅड....शांत हो जाइए....आकाश को अपने किए की सज़ा मिल कर रहेगी....बस थोड़ा सब्र करे...

मदन(रेणु का हाथ थपक कर)- ह्म...वैसे तूने क्या सोचा....अंकित का क्या करना है...

रेणु- अंकित को तो मैं संभाल लूगी....पर ये समझ नही आ रहा कि उसकी दौलत कैसे हाथ लगेगी...इस बारे मे सोचना पड़ेगा....

इतना बोलने के बाद मदन और रेणु शांति से कुछ सोचने लगे....
 
रात के सन्नाटे मे जब चारो तरफ सिर्फ़ हवा की सरसराहट सुनाई दे रही थी...तभी एक कार के टायर घसीटने की आवाज़ आई...जिससे रेणु और मदन चोंक पड़े ...

मदन- इतनी रात को कौन हो सकता है...

रेणु- अरे डॅड...किसी और के घर आया होगा....शायद सामने आया होगा...

मदन(सिर हिला कर)- ह्म्म...ऐसा ही होगा....तू पेग बना....

रेणु- ह्म्म...अब मैं नही पी रही...2 पेग ही बनाती हूँ...

तभी उस रूम मे एक आवाज़ आई...

""2 नही...3 पेग बनाओ...मैं भी पिउगा...""

आवाज़ सुनते ही मदन , रेणु और रघु खिड़की की तरफ देखने लगे....जहा एक सक्श चेहरा छिपाए खड़ा हुआ था...

उसे देखते ही रघु ने उस पर गन तान दी...

रघु- कौन है तू..हाँ..बोल कौन है...नही तो...

""पहले अंदर तो आने दो...फिर दिल करे तो गोली भी मार देना....""

रघु- साले बोलता है या .....

मदन(रघु का कंधा पकड़ कर)- रूको...जाओ ..ले आओ उसे...

थोड़ी देर बाद रघु उस सक्श को गन पॉइंट पर ले कर आ गया...

मदन(कड़क आवाज़ मे)- अब बताओ...कौन हो तुम...और यहाँ क्यो आए हो...

""तुम्हारी मदद करने....""

मदन(हैरानी से)- कैसी मदद....

""आकाश से बदला लेने मे....उसकी दौलत हथियाने मे...समझे...""

मदन और रेणु उस सक्श की बात सुनकर एक दूसरे को हैरानी से देखने लगे....

""ऐसे हैरान मत हो...मैं सब जानता हूँ....""

मदन- पर तुम हमारी मदद क्यो करना चाहते हो...हाँ...

""क्योकि मैं भी तुम्हारी ही तरह आज़ाद की फॅमिली से हिसाब चुकाना चाहता हूँ....""

रेणु- पर तुम हो कौन....

रेणु की बात सुनकर सामने खड़ा सक्श हँसने लगा....

""अभी बताता हूँ...मुझे यकीन है कि मदन मुझे ज़रूर पहचान लेगा...""

और इतना बोल कर उस सक्श ने अपने चेहरे का मास्क हटा दिया....और उसे देखते ही मदन की आँखे बड़ी हो गई....

मदन(चौंकते हुए)- तुम..तुम तो...हां...समर सिंग ....समर सिंग हो ना....

समर- क्या बात है...याददस्त अच्छी है तुम्हारी....हाहाहा....हाँ ..मैं समर ही हूँ.....

मदन- तुम..तुम जिंदा हो....तुम तो...

समर(बीच मे)- मर गया था....पर क्या करे...बदला लेने के लिए कभी-कभी दुनिया के लिए मरना ही पड़ता है....तुम तो अच्छी तरह जानते हो...है ना....

रेणु(हैरान हो कर)- नही डॅड...ये कोई समर नही...ये तो.....:)

समर(मुँह पर उंगली रख कर)- स्शह...बच्ची...सब समझता हूँ...पहले एक दमदार पेग तो पिला दो...हाँ...

इतना बोल कर समर मुस्कुराने लगा और उसके साथ मदन भी.....और सब बैठ कर पेग लगाने लगे......

मदन , समर और रेणु आपस मे मिलकर काफ़ी देर तक प्लान करते रहे और फिर अचानक रेणु ने एक बॉम्ब फोड़ दिया.....

रेणु(अपनी जगह पर खड़े हो कर)- आप लोगो का प्लान तो सही है...पर एक बात मेरी भी सुन लीजिए....अंकित को कुछ नही होना चाहिए....ओके...

रेणु की बात सुनकर समर गुस्से मे आ गया पर मदन ने उसका हाथ दबा कर शांत रहने का इशारा कर दिया....

मदन(मुस्कुरा कर)- ठीक है ना....हमें अंकित से कोई प्राब्लम नही...तो हम उसे कुछ क्यो करेंगे....ह्म..

समर(गुस्से से)- पर अंकित के होते हुए हमारा काम होना मुमकिन नही....मैं जानता हूँ उसे...वो बहुत तेज है...अपनी उमर से ज़्यादा चालाक....

रेणु(खिलखिला पड़ी)- हहहे...वो तो है....पर उसकी फ़िक्र आप मत करो...उसे मैं संभाल लूगी...आप लोग बस आकाश का ख्याल रखो....

समर(रेणु को देख कर)- तुम संभाल लोगि...तुम...हुह...वैसे मैं जान सकता हूँ कि तुम उसे कैसे संभालने वाली हो...हाँ...

रेणु(वापिस अपनी जगह बैठ कर)- आपको इससे कोई मतलब नही होना चाहिए....मैं क्या करती हूँ...ये मेरा काम है...आप बस रिज़ल्ट के बारे मे सोचो....वैसे आप बता सकते है कि आप आकाश को कैसे हॅंडल करेंगे...हाँ...

रेणु की बातों मे एक तरह का ताना था...जैसे वो बोल रही हो कि तुम क्या कर लोगे.....इसलिए रेणु की बात सुनकर समर गुस्से दाँत पीसने लगा....पर मदन का इशारा पा कर चुप रहा और फीकी मुस्कुराहट के साथ बोला....

समर(रेणु को देख कर)- तुम आकाश की फ़िक्र मत करो...उसे मैं पहले ही गायब कर चुका हूँ...और उसकी जगह अपना आदमी बैठा चुका हूँ...

अबकी बार रेणु के साथ-साथ मदन भी चौंक पड़ा....दोनो को समर की बात समझ ही नही आई थी शायद....

मदन(हैरानी से)- तुम कहना क्या चाहते हो...आकाश की जगह कोई दूसरा....मतलब क्या है इसका....

समर- मतलब ये कि आकाश की जगह उसका बाहरूपिया उसके घर मे पहुँच चुका है ...और आकाश हमारी गिरफ़्त मे है....समझे ...

समर की बात सुन कर रेणु और मदन एक दूसरे को देखने लगे...दोनो के मुँह हैरानी से खुल गये थे...और आँखे भी बड़ी हो चली थी...

मदन(समर को देख कर)- तो आकाश के घर, आकाश की जगह नकली आकाश रह रहा है...और अंकित...उसे शक़ नही हुआ...

समर(मुस्कुरा कर)- नही हुआ....बिल्कुल नही...क्योकि हम ने अपने आदमी को आकाश की तरह की ट्रेंड कर के भेजा था...और फिर वो आदमी आकाश को अच्छे से जानता भी है ...तो कोई दिक्कत नही हुई...

रेणु(अभी भी हैरान थी)- वो आदमी है कौन....

समर- उसका भाई....योगेन्द्र...

रेणु(चौंक कर)- आकाश का भाई...पर वो तुम्हारा साथ क्यो देगा...हां..

समर(कामिनी मुस्कान के साथ)- प्यार का मारा है बेचारा....अपनी बीवी के कहने पर जान भी दे देगा...ये तो छोटी सी बात थी उसके लिए...

रेणु(आँखे छोटी कर के)- क्या...बीवी के लिए...पर उसकी बीवी तुम्हारा साथ क्यो देने लगी...

समर(मुस्कुरा कर)- क्योकि उसकी बीवी मेरी छोटी बेहन है ...इसलिए..अब समझी...

मदन- ओह्ह...तुमने तो बड़ी लंबी प्लॅनिंग कर ली...पर एक बात समझ नही आई...तुम्हारी दुश्मनी होते हुए भी आज़ाद ने अपने बेटे की शादी तुम्हारी बेहन से क्यो की...

समर(लंबी साँस ले कर)- की नही...हम ने उसे मजबूर किया ये शादी करने को...

रेणु(आँखे मटकाते हुए)- ह्म्म...ज़रा मैं भी तो सुनू कि तुमने आज़ाद जैसे शातिर इंसान को मजबूर कैसे कर दिया...क्योकि जहा तक मैने सुना था...आज़ाद को छलना बच्चों का खेल नही....(मदन की देख कर)- है ना डॅड...

मदन(सिर हिला कर)- ह्म्म...बच्चों का क्या...बड़े-बड़े भी उसके सामने पानी माग जाते थे....

समर(मदन को देख कर)- तुम मुझसे बेहतर जानते हो आज़ाद को...और तुम बिल्कुल सही भी हो...आज़ाद को फसाना आसान नही...और ना ही आकाश को...वो भी अपने बाप के ही जैसा है....पर आज़ाद का दूसरा बेटा आज़ाद के जैसा नही...बेवकूफ़ है साला...

और इतना बोलकर समर फिर से एक पेग बनाने लगा और रेणु अपने बाप के साथ समर के आगे बोलने का इंतज़ार करने लगे.....
 
थोड़ी देर तक रूम मे खामोसी छाइ रही और फिर उस खामोशी को पेग गटकने के बाद समर ने ही तोड़ा....

समर(मुस्कुरा कर)- क्या हुआ...आप लोग इतने सीरीयस क्यो हो गये....

रेणु- नही...ऐसा कुछ नही...हम सिर्फ़ आपके बोलने का वेट कर रहे थे...तो आप बता रहे थे आज़ाद के दूसरे बेटे के बारे मे....

समर- ह्म्म...योगेन्द्र....आज़ाद का बेवकूफ़ और लालची बेटा...हाहाहा....

समर ठहाके मार कर हँसने लगा और फिर से एक पेग तैयार कर लिया...

समर(सीप मार कर)- योगेन्द्र हमारे साथ है...

इतना बोलकर समर चुपचाप पेग पीने लगा...पर शायद रेणु को ये अच्छा नही लगा और वो लगभग चिल्ला कर बोली...

रेणु- साथ है तो समझ आ गया...पर हम जानना चाहते है कि क्यो...और कैसे....

समर- रिलॅक्स बेटा...बता रहा हूँ....ये पेग ख़त्म कर लू...

फिर समर इतमीनान से पेग के मज़े मारने लगा....और रेणु गुस्से से दाँत पीसती रही....थोड़ी देर बाद....

रेणु(गुस्से से)- अब हो गया हो तो बता भी दो...

समर(मदन को देख कर)- लड़की तो पूरी माँ पर गई है...है ना...

समर की बात सुनकर मदन ने एक फीकी मुस्कान दे दी...और रेणु का गुस्सा और भी बढ़ गया...

समर- ओके..ओके..रिलॅक्स...असल मे मेरी बेहन ने योगेंद्र को अपने जाल मे फसा कर शादी कर ली थी...और फिर उसके दिमाग़ मे उसके पिता और भाई के खिलाफ ज़हर भरने लगी...और वो बुद्धू भी प्यार मे पागल होकर मेरी बेहन मे हाथ की कठपुतली बन गया....बस...

रेणु(कुछ सोच कर)- पर सवाल ये है कि आज़ाद ने इस शादी का विरोध क्यो नही किया...ये जानते हुए कि वो दुश्मन की बेटी है...

समर(मुस्कुराते हुए)- क्योकि वो जानता ही नही कि मेरी बेहन किसकी बेटी है...उसकी नज़र मे मेरी बेहन अनाथ है...ये हमारे प्लान का पहला स्टेप था...सुजाता को अनाथ बना कर योगेन्द्र की लाइफ मे पहुँचना....न्ड इट्स वर्क्ड....

रेणु- हम्म....काफ़ी लंबी प्लॅनिंग की...

समर- ह्म्म..बदले की आग कभी जल्दबाज़ी मे नही बुझानी चाहिए....पूरी प्लॅनिंग के साथ ही बार करो...ताकि ग़लती होने का कोई चान्स ना बने....

रेणु(खड़ी हो कर)- ह्म्म...ये तो ठीक है...पर एक बात समझ नही आई...

समर(आँखे उँची कर के)- कौन सी बात ....

रेणु(चहल कदमी करते हुए)- आकाश को बदलने से फ़ायदा क्या हुआ....और इस सब से प्रॉपर्टी हमारे हाथ कैसे आयगी...क्या पता योगेन्द्र पलट जाए...वो लालची तो है ही....

समर(मुस्कुरा कर)- जानता हूँ...इसीलिए मैने अपनी बेहन सुजाता को भी उसी घर मे भेज दिया....

रेणु(चौंक कर)- क्या...आपकी बेहन अंकित के घर मे है...

समर- हाँ...वो वहाँ रह कर योगेन्द्र पर नज़र रखेगी और साथ मे अंकित को भी शीशे मे उतार लेगी...

रेणु(मुस्कुरा कर)- अंकित को शीशे मे उतार पायगी ये तो पता नही...पर ये पक्का जानती हूँ कि वो अंकित के लिए अपने कपड़े ज़रूर उतार देगी...हहहे...

समर(गुस्से से खड़ा हो कर)- क्या बकवास कर रही हो...

मदन(खड़ा हो कर)- समर...आराम से...

रेणु(हँस कर)- गरम होने की कोई ज़रूरत नही...अंकित क्या चीज़ है ये मैं अच्छे से जानती हूँ...और हाँ...ये तो आप भी जानते होंगे कि अंकित के सामने कोई औरत ज़्यादा देर नही टिक पाती...वो उसके नीचे आ ही जाती है...बसरते अंकित ट्राइ करे बस...और 1 बार आई ना..तो बार-बार आती है...जानते हो ना...

रेणु बोलते-बोलते समर के पास पहुँच गई और उसकी आँखो मे देख कर मुस्कुराने लगी....

समर ये सब सुन कर चुप रहा....बस रेणु को गुस्से से देखता रहा....

रेणु- गुस्सा दिखाने से कोई फ़ायदा नही...कुछ करना ही है तो अपनी बेहन को समझा दो कि अंकित से दूर रहे...कही ऐसा ना हो कि सुजाता उसके साथ सो कर उसी की हो जाए...

समर(दाँत कटकाटते हुए)- ऐसा कभी नही होगा...कभी नही...

मदन(मौके की नज़ाकत देख कर)- समर..रेणु...रिलॅक्स...मुझे लगता है कि अब इस बात को आगे बढ़ाना ठीक नही...समर तुम सुजाता को समझा देना..और रेणु...तुम अब जा कर सो जाओ...रात बहुत हो गई है...

रेणु(समर को देखते हुए)- जी डॅड..गुड नाइट...

और रेणु पैर पटकते हुए अंदर निकल गई और समर गुस्से से मदन को देखने लगा....
 


मदन- रिलॅक्स समर...बच्ची है...खुल के बात करने की आदत है उसकी...तुम उसे छोड़ो....आओ बैठो...पेग लगाते है....

समर(गुस्से से)- बाकी सब तो मैं समझ गया..पर अंकित को छोड़ने वाली बात...मैं उसे भी नही छोड़ना चाहता...समझे ...

मदन(पेग बना कर)- फिलहाल चुप रहो....और टाइम आयगा तो कर लेना अपने मन की....मैं भी उस खानदान मे किसी को जिंदा नही देखना चाहता....नफ़रत है मुझे सबसे...

समर- पर तुम्हारी बेटी ने तो...

मदन(समर को पेग थमा कर)- अभी उसकी मान लो....पर हमेशा मानने को कौन कहता है....भाई ग़लती तो इंसान से ही होती है ना....और ग़लती से कोई मर भी सकता है...ह्म..

समर(मुस्कुरा कर)- आप भी कम कमीने नही..हाँ...

मदन(मुस्कुरा कर)- पेग पियो...आज़ाद की तबाही के नाम...चीएररससस्स...

और इसी के साथ दोनो जाम टकरा कर खुशी पेग गटकने लगे. ..

पर इन सारी बातों को छिप कर सुनने वाली आकृति अपना मुँह दवाए आँसू बहाने लगी.....

सेम नाइट.......अंकित के सीक्रेट हाउस पर.......

रात के सन्नाटे के बीच अंकित और आकाश सीक्रेट हाउस मे एक रूम मे बैठे हुए थे.....

जहाँ उनके साथ एक और सक्श था...जो चेयर से बँधा हुआ था...और उसका मुँह भी टेप से बंद था....

आकाश- अंकित...हम यहाँ क्यो आए...अब तो बताओ....

मैं- डॅड..बस 2 मिनट दो...फिर आपको सब बताता हूँ....

आकाश ने सिर हिला कर हाँ, बोला.....

फिर मैने अपने एक आदमी को बुला कर कुर्सी पर बैठे सक्श को आज़ाद करवाया और सबके लिए कॉफी भी मंगवा ली....

वो सक्श अपने हाथ मलते हुए हैरानी से हमे देखता रहा और जब मैने उसे कॉफी का कप पकड़ाया तो वा और ज़्यादा हैरान हो गया....और बोल ही पड़ा....

""आज इतने मेहरवाँ कैसे हो गये मुझ पर....""

मैं(मुस्कुरा कर)- अपनो पर मेहरवानी नही की जाती चाचा जी...

मेरी बात सुनकर योगेन्द्र की हैरानी का ठिकाना नही रहा...क्योकि उसे नही पता था कि मैं उसका असली रूप जानता हूँ....

मैं- चौंकिए मत...मैं जानता हूँ कि आप योगेन्द्र है...मेरे सगे चाचा...

योगेंद्र(हैरानी से)- तुम..तुम्हे कैसे पता कि मैं....

मैं- मैने कहा ना...हैरान होने की ज़रूरत नही ..आप पहले कॉफी पीजिए...फिर सब बताता हूँ ...

फिर रूम मे खामोशी छा गई.. कॉफी पीने की सुरसूराहट ही सुनाई दे रही थी....

आकाश(कॉफी ख़त्म कर के)- अंकित....

मैं समझ गया कि अब डॅड उतावले हो रहे है...वो जल्द से जल्द जानना चाहते थे कि मैं करने क्या वाला हूँ....

मैं(कप रखते हुए)- जी डॅड...मैं समझ गया....(योगेन्द्र को देख कर)- तो चाचा जी....कैसा लग रहा है अब...

योगेंद्र(हैरानी से देखते हुए)- अच्छा....पर तुमने बताया नही कि तुम ये सब कैसे जानते हो...कि मैं...

मैं- चुप क्यो हो गये....मैं योगेंद्रा हूँ...यही बोलना चाहते थे ना....

योगेंद्र- हाँ...तुम्हे कैसे पता चला...

योगेंद्र की बात सुनकर मैं मुस्कुराया और खड़े हो कर रूम मे घूमते हुए बोला....

मैं- मुझे कब पता चला...कैसे पता चला...इन बातों के अब कोई मायने नही....हाँ...इम्पोर्टेंट बात ये जानना है कि आपने डॅड का चेहरा क्यो अपनाया....खैर...मैं तो जानता हूँ...बट मैं चाहता हूँ कि आप डॅड के सामने सच बताए....उन्हे भी तो पता चले कि उनका भाई कितना होशियार हो गया है....हाँ तो बोलिए.....

योगेंद्र(आकाश को देख कर)- मैं...मैं इन्हे मार कर सारी दौलत पाना चाहता था.....

मैं(हँसते हुए)- ये तो डॅड समझ गये है....मैं चाहता हूँ कि आप पूरी बात बताए....वही जो आपकी बीवी ने आपसे कहा था....समझ गये ना...मैं क्या कहना चाहता हूँ...

योगेंद्र(मुझे देख कर)- उसने भी यही कहा था...ये सब हम ने दौलत पाने के लिए किया था....पूरी दौलत...जो कि अभी तक पिताजी ने सिर्फ़ आकाश भैया के नाम कर रखी है....

मैं- ह्म्म...लगता है आपको भी पूरी बात पता नही....क्या आपकी बीवी ने ये नही कहा कि आकाश को ख़त्म करना है...

योगेंद्र(आकाश को देख कर नज़रे झुका कर)- ह्म्म..कहा था...दौलत हाथ आते ही भैया को मारने का प्लान था...और तब तक भैया हमारे क़ब्ज़े मे रहते...पर ऐसा कुछ नही हुआ...

तभी डॅड को गुस्सा आ गया और उन्होने योगेंद्र का गला पकड़ के उसे झकज़ोर दिया...

 
आकाश- कमीने...कैसा भाई है तू...चन्द पैसो के लिए अपनो को धोखा दे रहा है....अपने सगे भाई को मारने चला...हाँ..

मैने- डॅड...प्ल्ज़....शांत हो जाइए...प्ल्ज़...

फिर मैने योगेन्द्र को छुड़वा कर डॅड को शांत किया और फिर से योगेन्द्र से मुखातिब हुआ.....

मैं(आँखे उचका कर)- ह्म..वो तो है...आपका सारा प्लान चौपट हो गया...और ....वैसे आपको एक शॉकिंग न्यूज़ दूं....

योगेंद्र मेरी बात सुनकर मेरी तरफ जिग्यासा भरी निगाहो से देखने लगा...साथ मे डॅड भी मुझे देखने लगे...

मैं- न्यूज़ ये है कि दौलत हाथ मे आते ही डॅड के साथ आपका भी पत्ता सॉफ होने वाला था....

योगेंद्र(आँखे फाड़ कर)- क्या...नही...तुम झूट बोल रहे हो....ऐसा नही हो सकता....मेरी बीवी ऐसा सोच भी नही सकती.....नही...मैं नही मानता...तुम झूट बोल रहे हो....

मैं- हो सकता है आप सही हो...आपकी बीवी आपको धोखा नही दे सकती ...पर सम्राट सिंग की बेटी आपको धोखा ज़रूर दे सकती है....है ना...

योगेंद्र(हैरानी से)- सम्राट सिंग...ये कौन है...और उसकी बेटी का इस सब से क्या मतलब...

मैं(झुक कर योगेन्द्र को घूरते हुए)- सम्राट सिंग वो इंसान है जो इस सब के पीछे है...वही आपका यूज़ करके मेरे डॅड को ख़त्म करना चाहता है...वही आपके पिता यानी मेरे दादाजी को ख़त्म करना चाहता है...और वही सारी दौलत ले कर आपको भी ठिकाने लगाना चाहता है...समझे...

योगेंद्र(हैरानी से)- पर ये सम्राट सिंग है कौन..और वो ये सब क्यो करेगा....उसकी हम से क्या दुश्मनी...

मैं(खड़ा हो कर)- यही बात तो अभी तक समझ नही आई की सम्राट की दुश्मनी है किससे.....

योगेंद्र- और उसकी बेटी...उसका क्या बोल रहे थे...

मैं(सिर खुज़ला कर)- ओह हाँ....उसका नाम है सुजाता...जो आपकी बीवी है...

मेरी बात सुनकर योगेन्द्र के पैरों से ज़मीन ही खिसक गई....

योगेंद्र- नही...ये नही हो सकता...सुजाता तो अनाथ है...

मैं(चिल्ला कर)- नही...वो सम्राट की बेटी है...सम्राट की...कोई अनाथ नही...ये बहुत लंबी प्लॅनिंग है...बहुत लंबी...

योगेंद्र- पर क्यो...किस लिए...

मैं- ये जानने का एक ही तरीका है...पर इसके लिए आपको मेरा साथ देना होगा....

योगेंद्र(हिरान हो कर)- तुम्हारा साथ....

मैं- हाँ...अगर आप सच जानना चाहते है तो मेरा साथ दीजिए...और अगर आपको मेरी बात ज़रा भी ग़लत लगे तो वही करना जो आपकी मर्ज़ी हो...ओके..

योगेंद्र- पर मैं तुम्हारा साथ क्यो दूं....और अपनी जान से प्यारी बीवी को धोखा दूं...सिर्फ़ तुम्हारे कहने पर...क्यो...

मैं- क्यो कि यही एक रास्ता है जिससे आप जिंदा रह सकते है...शायद आपको यकीन ना हो ...पर आप भी बचने वाले नही....पूरी दौलत आपके हाथ आते ही आप मारे जायगे....और फिर सारी दौलत पर सुजाता का राज होगा....समझे...

योगेंद्र(गुस्से से)- नही..ऐसा नही हो सकता...तुम झूट बोल रहे हो ...सुजाता मेरे साथ...

मैं(बीच मे)- यही सच है...और अगर मेरा यकीन नही तो एक बार मेरा साथ देकर देखिए...सच खुद जान जाओगे......

मेरी बात सुनकर थोड़ी देर तक रूम मे खामोशी छाइ रही...फिर योगेंद्र कुछ सोच कर बोला...

योगेंद्र- करना क्या है...

मैं- ह्म...सुनिए....और हाँ...सुनने के पहले ये बता दूं कि ये बात सिर्फ़ हम तीनो के बीच ही रहनी चाहिए...ओके...अब सुनो...

और कुछ देर तक मैने डॅड और योगेंद्र को एक प्लान सुनाया और फिर उनके रिक्षन जानने का इंतज़ार करने लगा....

आकाश(सिर हिलाते हुए)- मुझे नही लगता कि ये प्लान काम करेगा....इसमे बड़ा रिस्क है....

योगेंद्र(झटके से)- मैं तैयार हूँ...

मैं(योगेंद्र को घूर कर)- सच मे...

योगेंद्र(सिर हिला कर)- ह्म्म..मैं सच जानने के लिए कोई भी रिस्क ले सकता हूँ...मैं तैयार हूँ...

मैं- बहुत अच्छे...अब आप खाना खा लो...भूखे होगे ना....

और फिर मैं बिना कुछ सुने रूम से बाहर आ गया...और अपने आदमियों से बात करने लगा....

थोड़ी देर बाद मैं रूम मे गया...

मैं- चलिए..घर चलते है...और आप आराम कीजिए...अभी बहुत काम बाकी है....बस कुछ दिन और...फिर सब ठीक हो जायगा....

और फिर हम अपने घर निकल आया.....

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रिचा के घर...............

रिचा के घर रात के समय कुछ गुंडे टाइप के लोग घुसे....सब के सब नकाब मे थे...

घर मे आते ही उन्होने रिचा और उसकी बेटी रिया को गन पॉइंट पर खड़ा कर दिया ...

रिचा और रिया रोती-चिल्लाती हुई अपनी जान की भीख सी माँग रही थी...दोनो को समझ मे नही आ रहा था कि ये हो क्या रहा है...

अचानक से उन गुण्डों मे से एक ने रिचा को धक्का मारा .....

गुंडा- ये....हम तेरी लड़की को ले जा रहे है....और ये तभी वापिस आयगी जब तुम हमारी बातें मनोगी...वरना इसकी लाश वापिस आयगी...समझी...

गुंडा2- और सुन...पोलीस को खबर की ना तो इसको काट कर भेज दूँगा....चल अब दूर हट...

रिचा(रोती हुई)- नही...मेरी बच्ची को छोड़ दो...मैं कुछ भी करूगी...पर मेरी बच्ची...

गुंडा(बीच मे)- चुप कर....बात तो तू मानेगी ही...पर तेरी बेटी हमारे पास रहेगी जमानत के तौर पर....

रिचा(गिडगिडा कर)- नही ..उसे छोड़ दो...तुम बोलो करना क्या है...मैं सब करूगी....

गुंडा- वो तो हुमारा बॉस बातायगा...और तू फ़िक्र मत कर ...हम उसे हाथ भी नही लगाएँगे....लेकिन तूने होशियारी की तो....हा...हाहाहा...

रिया- मोम....मोम...

गुंडा- चुप साली.....वरना अभी दोनो को उड़ा देगे...चुप रह....बिल्कुल चुप ..

बेचारी रिया डर के मारे चुप हो गई और फिर एक गुंडा उसे ले कर कार मे आ गया...

रिचा उठकर बाहर भागी...पर दूसरे गुंडे ने उसके सिर पर पिस्टल मार कर बेहोश कर दिया और फिर वो लोग रिया को ले कर निकल गये.......

अंकित के घर.......

सीक्रेट हाउस से जब मैं और डॅड वापिस आए तो सुजाता हमे हॉल मे बैठी हुई मिली...और हमे देखते ही वो मुस्कुराने लगी...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अरे...आ गये आप लोग....बड़ी देर कर दी....

मैं- ह्म्म...पर आप अभी तक सोई क्यो नही...

सुजाता(प्यारा सा मुँह बना कर)- अरी...आप लोग लौटे नही और मैं सो जाउ....ये सही होता क्या....

मैं(मन मे)- अब इसे क्या हुआ...बड़ा प्यार दिखा रही है...कही कुछ गड़बड़ तो नही हो गई...

सुजाता- अब क्या खड़े ही रहोगे....चलो सोते है...मुझे भी नीद आ रही है...

और इतना बोलकर सुजाता ने अंगड़ाई ली और अपने बूब्स को हमारे सामने एक्सपोज़ कर दिया...

उसे देख कर मेरी नियत तो खराब हुई पर मौके की नज़ाकत देख कर मैने नज़रे चुरा ली....

मैं- ओके...डॅड...आप थक गये होंगे...रेस्ट कीजिए...और आंटी आप भी सो जाओ...मैं भी चलता हूँ...

फिर मैने डॅड को उनके रूम मे छोड़ा और अपने रूम मे निकल गया...

वहाँ सुजाता अपने रूम मे बैठी हुई इसी सोच मे डूबी थी कि जो सच्चाई उसे आज पता चली...वो अपने डॅड और भाइयों को बताए की नही...

सुजाता(मन मे)- इन दोनो बाप-बेटे का गेम सही समय पर सामने आ गया...वरना मेरा तो बुरा हाल होता...

पर अगर ये आकाश है तो मेरा पति...वो इन्ही की गिरफ़्त मे होगा...

अगर मैं अभी डॅड को कुछ बताती हूँ तो मेरे पति की जान भी ख़तरे मे पड़ सकती है....और वो मर गया तो हमे दौलत कभी नही मिलेगी....

नही...मैं किसी को नही बोलोगि...अब मुझे ही कुछ करना होगा...वैसे भी मुझे तो बस दौलत चाहिए....और उसे हासिल करने के लिए मुझे क्या करना है...ये मैं अच्छी तरह से जानती हूँ...

इतना सोच कर सुजाता बाथरूम मे घुस गई और थोड़ी देर बाद सज-सबर कर मेरे रूम मे आ गई....

मैने नॉक होते ही गेट खोला तो सामने सुजाता को देख कर मेरे जिस्म मे हलचल होना शुरू हो गई....

मैं- ह्म्म...तो आप है...लेकिन इस समय..वो भी इस रूप मे...इरादा क्या है...

सुजाता(इतराते हुए)- इरादा तो आग लगाने का है...पूरी रात....

मैं(मुस्कुरा कर)- अच्छा है...आओ फिर...देखते है कौन आग लगाता है और कौन बुझाता है...

और इतना बोल कर मैने सुजाता को अंदर खीच लिया और गेट लॉक कर के उसे बाहों मे समेट लिया....

और फिर चुदाई का खेल शुरू हो गया.....
 
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