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अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

हीना बुरी तरह गुस्से में आ जाती है। आख़िरकार अमन ने उसके करक्टर को लेकर ताना दिया था-“मैं कोई बाजारू औरत नहीं हूँ अमन, वो तुम मुझे ऐसे कह रहे हो। मेरी मजबूरी थी। मैं जिस्म की हवस मिटने के लिये तुम्हारे नाना के नीचे नहीं सोई थी…”

अमन-“खाला, क्या वजह हो सकती है? ज़रा मैं भी तो सुनूं…”

हीना-“तुम सुनना चाहते हो ना तो सुनो…”

ये आज से 19 साल पहले की बात है। मेरी शादी को पूरा एक साल हो चुका था, पर मुझे कोई औलाद नहीं थी। तुम्हारे खालू मुझे प्यार करते थे, पर उस प्यार में वो दम नहीं था वो एक औरत को माँ बना दे। एक दिन मैंने तुम्हारे खालू की अम्मी, मेरी सास को ये कहते हुए सुना कि मैं बांझ हूँ और वो तुम्हारे खालू की दूसरी शादी करवाना चाहती हैं। ये बात मुझे अंदर तक तोड़ गई। मेरी मोहब्बत, मेरा भरोसा वो मैं तुम्हारे खालू पे करती थी वो खतम हो गया।

मैं अपने मायके चली गई वहाँ तुम्हारे नाना ने मुझे बहुत समझाया कि मैं समझदारी से काम लूँ। उस वक्त तुम्हारी नानी भी जिंदा थी। मुझे अच्छी तरह याद है। उस रात मैं अपने रूम में सोई हुई थी। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक मुझे किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।

मैंने जब सामने देखा तो तुम्हारी नानी और नाना मेरे सामने खड़े थे। उस रात तुम्हारी नानी ने मेरे पूरे जिस्म की मालिश की और मुझे नहलाया भी। उसके बाद जब मैं रूम में आई तो पूरा रूम फूलों की पंखुड़ियों से सज़ा हुआ था और बेड पे भी ढेर सारे फूल थे।

मैंने अम्मी यानी तुम्हारी नानी से पूछा कि ये सब क्या है?

तब उन्होंने मुझसे वो बात कही वो मैंने ख्वाब में भी नहीं सोची थी। उन्होंने मुझसे कहा कि आज से लेकर पूरे अगले 15 दिनों तक मैं और तुम्हारे नाना यहीं इस रूम में रहेंगे, बिना कपड़ों के। कोई हमें परेशान नहीं केरेगा और इन 15 दिनों में तुम्हारे नाना मुझे प्रेगनेंट करेंगे। और 16 वें दिन वो मुझे मेरी ससुराल छोड़कर आएंगे, वहाँ मुझे कुछ रातें अपने शौहर, यानी कि तुम्हारे खालू के साथ गुजारनी होंगी। उसके बाद उन्हें ये एहसास दिलाना होगा कि तुम्हारे खालू ने मुझे प्रेगनेंट किया है।

अमन ये सब सुनकर एकदम खामोश हो चुका था। उसका गुस्सा गायब हो चुका था और एक नया बदलाव ये हुआ था कि उसका लण्ड पैंट में तंबू हो गया था। वो सोफे पे बैठ जाता है, और हीना का हाथ पकड़कर उसे अपने पास खींच लेता है। और पूछता है-आगे क्या हुआ?

हीना-मतलब… मैं प्रेगनेंट कैसे हुई?

अमन-“सब कुछ साफ-साफ सुनना है मुझे, तभी मैं अपना फैसला बदलने के बारे में सोचूँगा…”

अमन की आवाज़ हीना की समझ में आ चुकी थी। वो जान गई थी कि अमन क्या सुनना चाहता है? और वो भी उसे सब कुछ खुलकर बताना चाहती थी। पर इस वक्त शीबा के आने का वक्त हो गया था। वो अमन की आँखों में देखती है, और धीरे से कहती है-“अगर तुम सब सुनना चाहते हो तो तुम्हें आज रात यहाँ आना होगा। मैं तुम्हें सब कुछ सच-सच बताऊँगी कि कैसे मैंने अपनी जिंदगी के वो 15 दिन काटे? अभी शीबा आती ही होगी…”

अमन कुछ सोचते हुए-“ठीक है। मैं रात 8:00 बजे आऊँगा और साथ में नींद की टेबलेट भी लाऊँगा, ताकी तुम शीबा को सुलाकर मुझे अच्छे से सुना सको…” दोनों के आँखों में एक अजीब सी चमक थी और दिल-ए-नादान भी धड़कना भूलकर मचलने लगा था।

हीना उससे कहती है-तुम क्या सब कुछ सुनना चाहते हो?

अमन-हाँ।

हीना-“मुझमें कई राज हैं बतलाऊँ क्या? मुद्दतों से बंद हूँ, खुल जाऊँ क्या?”

अमन मुस्कुराता हुआ वहाँ से चला जाता है, और हीना को एक नया दर्द दे जाता है। उसे ये एहसास तो हो गया था कि शायद अमन अब शीबा से शादी के लिये इनकार ना करे। पर अब उसे एक और डर सताने लगा था कि कहीं अमन सब सुनने के बाद??

 
जब अमन घर पहुँचा तो रजिया खाना बना रही थी और अनुम अपने रूम में सोई हुए थी, रात की थकी हुई वो थी बेचारी।

अमन रजिया को पीछे से पकड़ते हुए अपने दोनों हाथों से उसकी चूची मसलने लगता है।

रजिया-“ऊऔउच… क्या जी डर गई ना मैं? अह्म्मह… चुभता है ना…”

अमन-“ह्म्मम्म्म्म… क्या मेरी जान?

रजिया-“आपका ए॰के॰47…”

अमन हँसते हुए रजिया का ब्लाउज खोलने लगता है-“तुझे कितनी बार कहा मैंने कि घर में ये सब नहीं पहना कर…”

रजिया-“अच्छा बाबा, अब नहीं पहनूंगी…”

अमन रजिया की ब्लाउज और साड़ी दोनों खोल देता है, और उसे सिर्फ़ लहंगे और पैंटी में खाना पकाने देता है। रजिया ऊपर से पूरी नंगी थी। उसकी चूत में सरसराहट सी होती है। और वो अमन को अपने से खींचकर चिपका लेती है। और अमन के कानों में धीरे से कहती है-“हैपी वेलेनटाइन डे जानू…”

अमन भी ये सुनकर उसे अपनी बाहों में समेट लेता है। और दोनों लव बड़्स देखते ही देखते पूरे नंगे हो जाते हैं। अमन रजिया को किचिन की शेल्फ से खड़ा कर देता है। और उसे झुकाकर पीछे से अपना खड़ा लण्ड उसकी चूत में पेल देता है।

रजिया-“अह्म्मह… आराम से ना जी…” और चिल्लाने लगती है-“अह्म्मह… ओये अम्मी जी अह्म्मह… उंह्म्मह…”

अमन पे तो जैसे हीना की बातों का भूत सवार था वो सटासट-सटासट रजिया की चिल्लाने की परवाह किए बिना अपने लण्ड को रजिया की चूत की गहराईयों में उतारने लगता है-“अह्म्मह… चोदने दे ना मेरी जान अह्म्मह… हमारे बेटे को इसकी ज़रूरत है… हाँ अह्म्मह…” उसके धक्कों की रफ़्तार तेज होने लगती है, और 10 मिनट बाद दोनों माँ-बेटे एक साथ झड़ने लगते हैं।

जब वो अपने साँसें संभालकर दरवाजे की तरफ देखते हैं तो हैरान रह जाते हैं। सामने रेहाना और फ़िज़ा खड़ी थीं। सामने खड़ी रेहाना और फ़िज़ा के चेहरे पे एक अजीब सी खुशी थी।

अमन रेहाना को आवाज़ देकर अपने पास बुलाता है।

रजिया अभी भी नंगी अमन से चिपकी हुई थी।

रेहाना अमन के पास आ जाती है। अमन उसे अपनी छाती से चिपका लेता है, एक तरफ रजिया और दूसरी तरफ रेहाना। दोनों औरतें अमन की आँखों में देखने लगती हैं। ये एक ऐसा मंज़र था वो हर किसी को नशीब नहीं होता। अमन वो खुश-किस्मत इंसान था जिसे अपने ही घर में वो सारी खुशियाँ मिली थीं, वो शायद बहुत काम लोगों को नशीब होती हैं।

अमन रजिया और रेहाना को अपनी चौड़ी छाती से और जोर से चिपका लेता है, और धीरे से पहले रजिया और फिर रेहाना के होंठों को चूमता है-“आज से तुम सभी मेरी अमानत हो। आज से रेहाना तू और फ़िज़ा यहीं हमारे साथ रहोगी इसी घर में। तुम देख चुकी हो कि रजिया और मेरे बीच कौन सा रिश्ता है? अब तुम्हें एक दूसरे से शरमाने की ज़रूरत नहीं है। बस सभी प्यार से रहो और एक दूसरे की ज़रूरत का खयाल रखो। ठीक है ना… रजिया?”

रजिया रेहाना की आँखों में देखते हुए-“जैसा आप कहें जानू…”

और रेहाना भी इकरार में सर हिला देती है।

अमन फ्रेश होकर फैक्टरी चला जाता है।

फिर रजिया के रूम में चारों औरतें बैठकर बातें करने लगती हैं। अभी थोड़ी झिझक बाकी थी। जब तक अमन इन चारों को एक साथ एक बिस्तर पे नहीं चोदता, तब तक ये एक दूसरे से खुलकर बातें नहीं कर सकती थीं और सभी को इसी रात का इंतजार था।

अमन का दिल फैक्टरी में नहीं लग रहा था। उसे रह-रहकर हीना की बातें याद आ रही थी। वो हीना के सेल पे रिंग करता है।

हीना-हेलो।

अमन-कैसी हो खाला जान?

हीना-ठीक हूँ अमन।

अमन-“सुनो, मैं थोड़ी देर में वहाँ आ रहा हूँ। शीबा क्या कर रही है?”

हीना-वो पढ़ाई कर रही है।

अमन-“इस वक्त 7:00 बजे रहे है। मैं एक घंटे में वहाँ पहुँचूंगा। ठीक है ना?”

हीना-“ओके…” हीना का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वो अपने रूम में जाकर एक बेड पे बैठ जाती है। उसे अमन ने ऐसे कहा था कि मैं एक घंटे में आ रहा हूँ। जैसे वो आकर हीना को चोदेगा। वो अलमारी में कुछ ढूँढ़ने लगती है। तभी उसे वो मिल जाता है, जिसे देखकर उसकी आँखें चमक जाती हैं।

 
अमन फैक्टरी से निकलकर मेडिकल शाप पहुँचता है। और वहाँ से नींद की टेबलेट लेकर हीना के घर की तरफ निकल जाता है। जब वो हीना के घर पहुँचता है, तब 8:00 बज रहे थे।

दरवाजा शीबा खोलती है, और इस वक्त अमन को यहाँ देखकर थोड़ा चकित हो जाती है। फिर उसे खयाल आता है, और वो दरवाजे के सामने से हटकर अमन को अंदर आने देती है।

शीबा के चेहरे पे हया के बादल छाये हुए थे।

अमन-कैसी हो?

शीबा-जी ठीक हूँ। आप कैसे हैं?

अमन-एकदम ठीक। खाला कहाँ हैं?

शीबा-जी वो शायद किचिन में होंगी। आप बैठिए मैं अम्मी को बुलाकर लाती हूँ।

अमन सोफे पे बैठ जाता है। कुछ देर बाद हीना और शीबा वहाँ आती है। दोनों के दिल की धड़कनें तेज थीं। पर वजह अलग-अलग थी। कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद शीबा अपने रूम में चली जाती है। उसे वहाँ अमन के सामने शरम आ रही थी।

अमन शीबा के जाने के बाद वो नींद वाली टेबलेट हीना को थमा देता है-“इसे शीबा के दूध में मिलाकर उसे देकर आओ…”

हीना किसी वफ़ादार नौकरानी की तरह ऐसा ही करती है।

शीबा को दूध पिये आधा घंटा हो चुका था। जब अमन शीबा के रूम में जाकर देखता है तो वो गहरी नींद में सो चुकी थी। उसके चेहरे पे उसकी जुल्फे बिखरी हुई थीं। अमन को उसपे बहुत प्यार आता है, और वो झुकके शीबा के होंठों को चूम लेता है।

तभी पीछे से हीना के खखारने की आवाज़ आती है।

अमन हीना को मुस्कुराकर देखता है, और दोनों हीना के रूम की तरफ चल देते हैं। रूम में पहुँचकर अमन दरवाजा बंद कर देता है, और बेड पे ठीक से बैठ जाता है। हीना अभी भी सामने खड़ी थी। अमन उसे बेड पे बैठने के लिये कहता है। और हीना धड़कते दिल के साथ बेड के एक कोने पे बैठ जाती है। ये मसचुयेशन थोड़ी आकवर्ड सी महसूस हो रही थी हीना को। पर उसे अपनी सफाई में कुछ कहना था। उसके बाद क्या होगा ये सिर्फ़ अमन जानता था।

अमन-“हाँ तो खाला बोलिये…”

हीना किसी सपने से जागते हुए-क्या बोलूं?

अमन-“सब कुछ सुनना है मुझे…” उसकी आवाज़ में नरमी नाम की चीज़ नहीं थी।

हीना-“अमन वो हुआ उसे एक बुरा ख्वाब समझकर भूल जाओ प्लीज़… और जिंदगी की नई शुरुआत करो। मैं भी इंसान हूँ, और ग़लतियाँ इंसानों से ही होती हैं…”

अमन-पहले इधर आ।

हीना-क्या?

अमन-“सुनी नहीं… मैंने कहा इधर आ…” वो जोर से चिल्लाया।

जिससे हीना बुरी तरह डर गई और उसके कदम अमन की तरफ बढ़ते चले गये। अमन हीना का हाथ पकड़कर अपने पास खींच लेता है। और हीना धड़ाम से अमन की छाती से जा टकराती है।

हीना-“छोड़ो ना अमन, ऐसे भी कोई करता है अपनी खाला के साथ?”

अमन हीना को दबोचते हुये-“तो जैसा नाना ने किया था, वैसे करूं?”

मारे शरम के हीना पानी-पानी हो जाती है। ओर उसका ऐतराज खतम हो जाता है। वो अमन की छाती से चिपकी हुई थी और अमन उसकी कमर को पकड़े हुए था।

अमन-“चलो बताओ कि नानी और नाना ने जब तुमसे वो 15 दिनों तक एक रूम में रहने के लिये कहा, उसके बाद क्या हुआ?”

हीना कांपती हुए आवाज़ के साथ बोलना शुरू करती है।

तुम्हारी नानी ने मुझसे ऐसे बात कही थी वो मेरे लिये नकबिल-ए-बर्दाश्त थी। मैंने उनसे बहुत बहस की पर आख़िरकार मुझे उनकी बात माननी पड़ी। उन्होंने मुझे समझाया कि अगर मैं ऐसा करती हूँ तो मेरा घर उजड़ने से बच जाएगा और मेरे माँ बनने से तुम्हारे खालू दूसरी शादी नहीं करेंगे। मुझे उस वक्त सबसे ज्यादा टेंशन तुम्हारे खालू के दूसरी शादी करने की बात से हो रही थी। अमन मुझे मेरी अम्मी की बात कुछ हद तक सही लगी, और इसीलिये मैंने उनकी बात मान ली।

अमन-फिर क्या हुआ?

हीना शरमाने लगती है-वहीं जो होता है।

अमन उसकी कमर दबाते हुए-बोलो ना खाला कैसे हुआ?

हीना-“अमन समझो ना बेटा मुझे शरम आती है…”

अमन-“ठीक है। मत बताओ कल मैं जब शादी से इनकार कर दूंगा तब वजह भी बता दूँगा…”

हीना थोड़ी परेशान होते हुए-क्या सुनना चाहते हो तुम?

अमन-यही कि नाना ने आपको कैसे चोदा?

अमन के मुँह से चोदा शब्द सुनकर हीना का बुरा हाल हो जाता है, और वो वहाँ से भाग जाना चाहती है। पर अमन हीना को घुमा कर अपने नीचे कर लेता है। जिससे अमन को खड़ा लण्ड उसकी जाँघ में चुभने लगता है। उस चुभन का असर हीना के मुँह से एक सिसकी के रूप में निकलता है।

हीना-“उंह्म्मह… क्या तुम सच में सुनना चाहते हो बेटा?”

अमन-“हाँ… एक-एक लम्हा वो तुमने और नाना ने साथ गुजारा…”

हीना-“तुम्हारी नानी मुझे और तुम्हारे नाना को एक रूम में बंद करके बाहर चली गईं। मुझे उस वक्त बहुत शरम आ रही थी। मैं सिर्फ़ चोली घाघरे में थी। तुम्हारे नाना एक एक्सपर्ट निकले। उन्होंने मुझे बेड पे लेटा दिया। हम दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं कर रहे थे उस वक्त। उन्होंने मेरी चोली को पीछे से खोलकर मेरे जिस्म से अलग कर दिया। उसके बाद मेरा घाघरा भी खींच लिया। और मैं पूरी नंगी हो गई थी।

पहला शब्द वो उनके मुँह से निकला वो था-“हीना बेटा, यहाँ आओ और ज़रा अब्बू के लण्ड को चूसो…”

 
मैं हैरान थी कि अब्बू ऐसा बोल रहे हैं। मेरी हालत उस वक्त ऐसी थी जैसे कोई गुलाम अपने मालिक का हर हुक्म मानने के लिये वहाँ हो। मैंने उनका लौड़ा अपने मुँह में लिया। उसके बाद उन्होंने मेरी चूत को रगड़कर चाटा। तुम्हारे नाना का लौड़ा बहुत मोटा है। अमन, जब मैंने उसे अपने मुँह में लिया तब वो मेरे गले में अटक गया था। ये पहली बार था जब मैंने अपने मुँह में लण्ड लिया था।

अब्बू ने मुझे अपने नीचे लेकर पूरी ताकत से मुझे चोदना शुरू कर दिया। मैं चिल्लाती रही पर उन्हें मुझपे कोई तरस नहीं आया। मेरी चूत वो तुम्हारे खालू के छोटे से लण्ड की आदी थी, वो इतने मोटे लण्ड की मार से चिर सी गयी थी।

उन्होंने मुझे समझाते हुए चोदना चालू रखा। ये सिलसिला रात भर चला और अगले 15 दिन तक अब्बू मुझे चोदते रहते। हम दोनों उस रूम में नंगे ही रहते थे। अम्मी हमें खाना देने आती थी और मेरी चूत की मालिश कर देती थी। टायलेट बाथरूम उसी रूम में अटैच्ड था।

उन 15 दिनों की चुदाई ने मुझे एहसास दिलाया था कि मर्द का लौड़ा क्या-क्या कर सकता है। मैं प्रेग्गनेंट हो गई थी, क्योंकी मुझे एम॰सी॰ पीरियड नहीं आई थी। हीना ने जानबूझकर चूत चुदाई जैसा शब्द इश्तेमाल किया। वो अमन को खुलकर किस वजह से बता रही थी, ये अमन भी जान चुका था।

अमन-“ह्म्मम्म्म्मम… तो ऐसे आपकी चूत ने नाना का लण्ड 15 दिनों तक खाया?”

हीना-ह्म्मम्म्म्म।

अमन-अब मेरा खाएगी।

हीना-क्या बेटा?

अमन-लौड़ा खाला।

हीना कसमसाते हुए-“नहीं… ना बेटा, मैंने वो किया वो तुम्हें बता दिया। इसीलिये कि तुमने सब सुन लिया था और शादी से इनकार कर रहे थे। इसका मतलब ये नहीं कि मैं तुम्हारे साथ भी वो सब करूँगी…”

अमन हीना की चूची मरोड़ते हुए-“साली, मुझे क्या बेवकूफ़ समझी है? मैंने तुझे इतनी डीटेल में तेरी चुदाई सुनाने को कहा था क्या? कमीनी, तूने जानबूझकर मुझे ये सब सुनाई। अब देख मेरे लण्ड का क्या हाल हो गया है? और अमन अपनी पैंट नीचे करके हीना को अपना मूसल लण्ड दिखाने लगता है।

हीना की आँखें फटी की फटी रह जाती हैं। उसने इससे पहले इतना मोटा और लंबा लण्ड नहीं देखा था-“ये क्या है? अमन, तुम इसे मेरे अंदर डालना चाहते हो? नहीं नहीं मुझसे ये नहीं होगा…”

अमन-“ऐसे कैसे नहीं होगा खाला जान…” ये कहते हुए अमन अपने होंठ से हीना के होंठ चूसता चला जाता है। और दोनों हाथों से हीना की शलवार खोल देता है। उसने पैंटी नहीं पहनी थी। ऊपर का कमीज़ उतारते ही वो पूरी तरह नंगी हो जाती है-“साली, अंदर कुछ नहीं पहनी और नखरे करती है। अगर प्यार से दोगी तो प्यार से करूँगा और अगर नखरे करोगी तो जबरदस्ती करना मुझे आता है…”

हीना तो शायद पहले से ही तैयार थी। उस वक्त से जब अमन की बर्थ-डे पे अमन ने उसे अपने सीने से लगाकर हवा में उठाया था। उस वक्त से हीना की चूत ने फैसला कर लिया था कि एक ना एक दिन वो अमन के लण्ड को ज़रूर गटक जाएगी।

अमन-बोलो खाला जान, कैसे करूँ?

हीना अमन को नीचे कर लेती है, और बिना कुछ बोले उसके लण्ड को अपने मुँह में ले लेती है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प… प्यार से करो बेटा… प्यार से चोदो अपनी खाला सास को… गलप्प्प… गलप्प्प…”

अमन का लण्ड पहले से तना हुआ था और ऊपर से हीना के नाज़ुक होंठ कहर बरपा रहे थे। वो हीना को 69 की पोजीशन में कर लेता है, और उसकी चिकनी चूत पे जीभ फेरते हुए चाटने लगता है-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” दोनों पागलों की तरह एक दूसरे की चूत और लण्ड को चाट-चाट के लाल करने पे तुले हुए थे।

हीना-“अह्म्मह… अमन बेटा, चोद ना अपनी खाला को… तरस गई है मेरी चूत कई सालों से लौड़े के लिये… मत तरसा बेटा… आह्म्मह…”

अमन भी हीना की बात मान लेता है, और हीना को अपने नीचे लेकर उसकी जांघें खोल देता है। उसका लण्ड हीना ने काफी गीला कर दिया था। वो हीना की आँखों में देखते हुए पूछता है-“इजाजत है खाला जान?”

हीना-“हाँ… इजाजत है अह्म्मह… अह्म्मह… अह्म्मह… अह्म्मह… ऊइईई मैं तो गये रे जालिम… मेरी चूत फट जाएगी उंह्म्मह… निकल ले रे… कुत्ते हरामी अह्म्मह…”

अमन ने इजाजत सुनते ही अपना लण्ड हीना की चूत में पेल दिया था। कई सालों से सुनसान पड़ी इस ज़मीन में जैसे किसी ने हल जोत दिया हो। वो चिल्लाने लगती है। पर उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था, वो उसे अमन के लण्ड से बचा सके। पर ये दर्द हीना को अंदर ही अंदर मज़ा देने लगा था। अपने जवान भान्जे से चुदना हर खाला का नशीब नहीं होता। ये सोच-सोचकर हीना की चूत पानी छोड़ने लगती है।

और अमन बड़े प्यार से मगर दमदार अंदाज में हीना को चोदने लगता है-“अह्म्मह… खाला बहुत टाइट चूत है आपकी… मेरा लण्ड फँस रहा है। अह्म्मह…”

हीना-“उंह्म्मह… चुदी नहीं ना बेटा… कई सालों से… इसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था ना… अब तू आ गया है मेरा लाल… अपनी खाला की चूत का मालिक अह्म्मह… मुझे खोल दे रे हरामी… अंदर तक खोल दे अह्म्मह…” वो दोनों एक दूसरे को नोंचते खरोंचते गालियाँ देते हुये चुदाई का मज़ा ले रहे थे।

 
अमन हीना की सुडौल चूची को मुँह में भर-भर के निपल्स को काट-काट के हीना की चुदाई किए जाता है। हाँ हाँ खाला मैं चोदा करूँगा, अपनी खाला सास को… रोज ऐसे ही… बोलो चुदोगी ना मुझसे? अह्म्मह…”

हीना-“हाँ मेरे बच्चे… रोज ऐसे ही… रात दिन बस चोदते रहना मुझे उंन्ह…” दोनों क्या बोल रहे थे वो खुद भी नहीं जानते थे। कभी एक दूसरे को गालियाँ देते, कभी सालों साल चुदाई के जादे करते, पर अपनी चूत की आग बुझने से हीना बहुत खुश थी।

वहीं अमन को एक और चूत मिल गई थी।

दोनों एक दूसरे को चूमते हुये झड़ने लगते हैं। अमन ने कहा-“खाला, कहाँ निकालूं पानी अपना आह्म्मह…”

हीना-“बेटा, अंदर ही निकाल दे, मेरा आपरेशान हो चुका है अह्म्मह… सुखी ज़मीन पे बारिश कर दे बेटा अह्म्मह…”

10 मिनट बाद वो दोनों अपनी साँसें संभालते हैं और एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हैं। हीना अमन के ऊपर चढ़ जाती है, और उसकी छाती पे अपना सर रखकर अमन की छाती के बालों से खेलने लगती है।

अमन हीना की कमर दबाने लगता है-“अह्म्मह… बहुत नरम है। खाला आपकी कमर एकदम मखमल है…”

हीना-“ऊइईई माँ… क्या कर रहे हो अमन बेटा?”

अमन-“देख रहा हूँ सील पैक है, या नाना तुम्हें पीछे से भी पेले थे क्या?” और वो अपनी एक उंगली उसकी गाण्ड में डाल देता है।

हीना-“अह्म्मह… नहीं, वहाँ नहीं कुछ करो दर्द होता है। अह्म्मह…”

अमन-“तेरी बहन को चोदूं। नाटक करने वाली को तो मैं वहीं चोदता हूँ, जहाँ वो मना करती है। अब तेरी लेकर ही रहूँगा पीछे से…”

हीना डर के मारे सहम जाती है। वो कितने दिनों बाद आगे से ले रही थी, और उसी दिन पीछे से भी… उसका जिस्म कांप जाता है, जब अमन एक जोरदार थप्पड़ हीना की गाण्ड पे रसीद कर देता है-“सटाक्क…”

हीना-“अह्म्मह… नहीं अमन बेटा, मेरा अच्छा बच्चा है ना… अपनी खाला को इतना दर्द मत दे रे अह्म्मह…”

अमन-“सटाक्क… ठीक है, आज रहने देता हूँ। पर अगली बार ज़रूर लूँगा, ये वादा है मेरा… सटाक्क…” ये तीसरा जोरदार थप्पड़ था वो हीना की गाण्ड लाल टमाटर की तरह कर देता है। अमन हीना की चूची मसलने लगता है। और हीना रोआंसी हो जाती है। उसके लिये ये सब नया था। वो तो कभी सोच भी नहीं सकती थी कि अमन इतना चुदक्कड़ इंसान निकलेगा।

हीना-एक बात पूछूँ अमन?

अमन-“हाँ पूछो ना खाला जान्…”

हीना-“कहीं तुमने बाजी को भी तो नहीं?”

अमन-“हाँ… अम्मी को भी, चाची को भी, अनुम और फ़िज़ा को भी पेल चुका हूँ। क्यों?”

हीना मुस्कुराते हुए-“मुझे पहले से शक था। आख़िरकार खून अपना असर तो दिखाएगा ही ना?”

अमन चौंकते हुए-क्या मतलब है तेरा?

हीना समझ गयी कि उसे वो राज नहीं पता है। वो बात बदलने की कोशिश करती है। पर अमन उसका चेहरा पकड़कर अपनी आँखें उसकी आँखों में गड़ा देता है-“बोल तेरा बोलने का क्या मतलब था? ‘खून अपना असर तो दिखायेगा ही’ बोल साली वरना…” और अमन हीना के बाल पकड़कर उसे उल्टा बेड पे लेटा देता है, और पीछे से अपना लण्ड उसकी कमर पे मारने लगता है, जिससे उसका लण्ड और अकड़ जाता है।

हीना-“अह्म्मह… मैं तो मज़ाक कर रही थी बेटा अह्म्मह… नहीं, वहाँ नहीं अह्म्मह…”

अमन-ठीक है, मत बोल… और वो अपने लण्ड पे थूक लगाकर उसकी नाज़ुक कमर के बीच में रगड़ने लगता है। अह्म्मह… अब भी वक्त है, बोल दे हीना वरना?”

हीना-“अह्म्मह… सच कोई बात नहीं। अमन बेटा मेरा भरोसा कर अह्म्मह…”

अमन-“तू ऐसे नहीं मानेगी खाला, ये ले… अह्म्मह…”

और वहीं हुआ जिसका हीना को डर था। अमन उसकी नाज़ुक सी छोटी सी गाण्ड को भी अंदर तक खोलता चला गया। हीना का बुरा हाल था। एक तो अमन अंदर तक पेल रहा था और ऊपर से सटासट थप्पड़ भी मार रहा था-“उंह्म्मह… हरामी की औलाद… छोड़ दे मुझे… हाय मेरी गाण्ड चिर गयी है। अह्म्मह…”

अमन-“तेरी मारनी थी कल, पर तूने मुझे गलत बात बोली तो आज की सज़ा आज अह्म्मह… बहुत मज़ा आ रहा है खाला अह्म्मह… नाना से भी ऐसे ही मरवाती थी क्या?”

हीना गुस्से में तिलमिला जाती है। अमन जब से उसके पास था उसे दिलावर ख़ान के बारें में बोल-बोलकर टॉर्चर कर रहा था। आख़िरकार एक औरत कब तक बर्दाश्त कर सकती है। वो चीखी और उसने वो बात कही वो अमन के लण्ड से लेकर गाण्ड तक को हिला गई।

हीना-“अह्म्मह… हरामी, तेरी अम्मी से पूछना कि वो कैसे लेती थी तेरे नाना का लण्ड अपनी चूत में और… गाण्ड में अह्म्मह… तू कौन सा अपने बाप की औलाद है? अह्म्मह… तू और तेरी बहन दोनों को मेरे बाप ने पैदा किया है, हाँ हरामी अह्म्मह…”

अमन पक्क से हीना की गाण्ड से लण्ड खींचकर बाहर निकाल लेता है, और हीना को सीधा करके पूछने लगता है-“खाला, आप झूठ बूल रही हो ना मुझे सताने के लिये?”

हीना अपनी कमर को नचाते हुए-“क्यूँ? अब अपने पे आई तो झूठ लग रहा है? हाँ ये सच है। अरे तेरे अब्बू और चाचा दोनों ना-मर्द थे, वो क्या औलाद पैदा करेंगे? वो तेरे नाना थे, जिन्होंने इस खानदान को चलाये रखा। मेरी बात का भरोसा न हो तो जा पूछ ले अपनी अम्मी से और चाची से कि तू, अनुम और फ़िज़ा किसकी औलाद हैं? और तेरी चाची कैसे भागती हुए चली जाती है, मेरे अब्बू से मिलने। जब उनकी तबीयत ज़रा सी भी खराब होती है। जा पूछ जाकर?”

अमन के होश गुम थे। उसे अपने कानों पे यकीन नहीं आ रहा था। तभी उसके मोबाइल पे रजिया का काल आता है, और वो काल रिसीव करता है।

रजिया-हेलो, कहाँ हो?

अमन-हीना के घर पे।

रजिया-तुम्हारी खाला हीना ना… तुम उसका नाम क्यूँ ले रहे हो?

अमन-क्योंकी मैंने अभी-अभी उसकी ली है।

रजिया चौंक जाती है। उसे यकीन नहीं होता कि अमन ने हीना को भी चोद दिया।

अमन-“मैं घर आ रहा हूँ, तुझसे कुछ सवाल पूछने हैं?”

रजिया-कैसे सवाल?

अमन-तेरे और नाना के रिश्ते के बारें में?

रजिया के हाथ से मोबाइल नीचे गिर जाता है, और वो जैसे बेहोश सी होने वाली थी कि तभी रेहाना उसे थाम लेती है।

रेहाना-“क्या हुआ बाजी? क्या कहा अमन ने? वो ठीक तो है ना…”

रजिया-“उसे सब पता चल गया। हीना ने उसे सब बता दिया…”

रेहाना अपने मुँह पे हाथ रखकर फटी-फटी आँखों से रजिया का मुँह ताकने लगती है-“अब क्या होगा बाजी?”

रजिया-“मुझे नहीं पता? अमन यहाँ पहुँचने वाला है कुछ ही देर में…”

अमन हीना को देखते हुए कपड़े पहनने लगता है। हीना को बहुत बुरा लग रहा था और फिकर भी हो रही थी कि अमन घर जाकर कुछ उल्टी सीधी हरकत ना कर दे। वो अमन को समझाना चाहती थी। पर अमन पे अभी कुछ और ही सवार था। वो अपने कपड़े पहनकर सीधा घर की तरफ निकल जाता है।

अमन कार बहुत तेज चला रहा था। वो तो उड़कर रजिया की पास पहुँच जाना चाहता था। वो आज हर एक राज रजिया से उगलवाना चाहता था। उसे रजिया पे बे-इंतेहा गुस्सा आ रहा था।

जब वो घर में पहुँचा तो रजिया और रेहाना उसी के रूम में बैठी हुई थीं। उन दोनों के चेहरे सफेद पड़े हुए थे। साफ नज़र आ रहा था कि उन्हें आने वाले तूफान की भनक लग चुकी थी। रजिया ने दूध में नींद की गोलियाँ मिलाकर कुछ देर पहले ही अनुम और फ़िज़ा को सुला दिया था। वो नहीं चाहती थी कि अमन का दहाड़ना दोनों लड़कियों को सुनाई दे।

अमन सीधा रजिया की तरफ बढ़ता है। उसकी चाल देखकर रेहाना उठकर अमन को पकड़ने लपकती है। पर अमन की आँखें आग उगल रही थीं। वो अपने तरफ आती रेहाना को एक जोरदार चाँटा रसीद कर देता है। जिससे वो दूर जाकर बेड पे गिर जाती है। उसके मुँह से खून बहने लगता है।

अमन-“खबरदार… छिनाल लौंडी अगर तू बीच में आई तो तुझे भी जान से मार दूंगा…”

रेहाना रोआंसी हो गई थी। आँसू और खून उसके चेहरे पे एक साथ बह रहे थे।

रजिया-“मेरी बात सुनो प्लीज़… कुछ करने से पहले मेरी अह्म्मह… अह्म्मह…”

अमन ने रजिया की गर्दन अपने दोनों हाथों में पकड़कर दबाना शुरू कर दिया था। वो तो उसे जान से मार देना चाहता था। अमन चीखते हुए-“छिनाल रंडी, तूने अपने बाप का लेकर मुझे पैदा किया है। कितनी छिनाल है तू… मैं तुझे क्या समझता था और तू क्या निकली? आज मैं तुझे जान से मार दूंगा…”

रेहाना लपक के अमन को पीछे धकेलती है। उसे पता था कि अमन की हालत क्या है? अगर वो बीच में नहीं आती तो आज रजिया को अमन के हाथों कोई नहीं बचा सकता था।

अमन बेड के एक कोने में बैठकर चिल्लाने लगता है-“तुम दोनों बाजारू औरतों से भी बदतर हो। साली, मैं तुम दोनों की सूरत भी नहीं देखना चाहता। निकल जाओ यहाँ से…” अमन का गुस्सा जायज़ था। जब किसी इंसान को ये पता चले की वो नाजायि है। तो उसकी वो हालत होती है, वो एक आम इंसान कभी भी महसूस नहीं कर सकता

 
नाजायज़-ये एक शब्द उस इंसान को अंदर तक झींझोड़ के रख देता है। आज अमन खुद को वो नाली का कीड़ा समझ रहा था, जिसके बाप का तो पता था पर उसे अपनी माँ पे भरोसा नहीं था कि इसने सिर्फ़ एक के साथ सोकर उसे पैदा किया है, या कइयों के साथ? क्योंकी जो बात रजिया को बतानी चाहिए थी, वो उसे किसी तीसरे के मुँह से सुनने को मिली थी।

रजिया और रेहाना अमन के पास पैरों में बैठ जाती हैं। रजिया कहती है-“अमन, मैं जानती हूँ कि तुम इस वक्त किस दौर से गुजर रहे हो। हाँ… मैंने बहुत बड़ी गलती की वो तुमसे ये राज छुपाया कि तुम ख़ान की औलाद नहीं… बल्की अपने नाना की औलाद हो?

अमन-“चुप कर और निकल जा मेरे रूम से…”

रेहाना-“अमन, एक बार… बस एक बार बाजी की बात सुन लो। उसके बाद तुम वो कहोगे हम वो मानेगी। तुम हमें घर से जाने के लिये कहोगे तो हम चली जाएंगी। बस एक बार हमारी बात सुन लो…”

अमन-“बोल… क्या कहना है तुम्हें अपनी सफाई में?”

रजिया वो अपन चेहरा नीचे झुकाये बैठी थी वो अमन के चेहरे को देखने लगती है। और अपनी बात शुरू करती है-“अमन, आज मैं वो तुमसे कहने जा रही हूँ, वो राज सिर्फ़ मैं जानती हूँ…”

तुम्हारे नाना और नानी कश्मीर के रहने वाले हैं। उनका बचपन वहीं गुज़रा। तुम्हारी नानी तुम्हारे नाना से 3 साल छोटी हैं। जब वो दोनों अपनी जवानी के उस पड़ाव पे थे। वहाँ इंसान को खाना नहीं बल्की कुछ और चाहिए होता है।

तुम्हारे नाना से तुम्हारी नानी बेपनाह प्यार करती थी। वो शादी करना चाहती थी पर उनके घर वाले इस चीज़ के लिये कभी राजी नहीं होते, बल्की अगर उनको इन दोनों के प्यार के बारें में पता चलता तो वो इन दोनों को जान से मार देते।

अमन-क्यूँ? `

रजिया-क्योंकी तुम्हारे नाना और नानी दोनों सगे भाई-बहन हैं।

अमन-क्याअ?

रजिया-हाँ अमन, वो दोनों सगे भाई-बहन है। उन दोनों ने अपने प्यार को अंजाम तक पहुँचाने के लिये कश्मीर छोड़ दिया और भागकर यहाँ आ गये। यहाँ उन्होंने शादी की और शादी के एक साल बाद मैं पैदा हुई-इनके प्यार की निशानी।

ये राज मुझे जिंदगी भर पता नहीं चलता। एक दिन मेरी तबीयत बहुत खराब थी, इसीलिये मैं तुम्हारे नाना और नानी के रूम में ही सो गई। उस वक्त मेरी उमर **** साल थी। पर मुझे सेक्स के बारें में काफी पता था। उस रात अचानक मेरी आँख खुल गई। मैंने वो सुना और देखा, वो देखकर मेरा जिस्म मानो जैसे पत्थर सा हो गया।

मेरी अम्मी अब्बू के नीचे पूरी नंगी सोई हुई थी और तुम्हारे नाना जान उनकी ले रहे थे। मैं अपनी आँखें बंद करके सोना चाहती थी। पर एक शब्द ने मेरी आँखों से नींद उड़ा दी। तुम्हारे नाना अम्मी को पेलते वक्त नाम से पुकार रहे थे और मेरी अम्मी अब्बू को भाईजान कहकर चिल्ला रही थीं।

वो जोर से चिल्ला रही थीं-“भाईजान, मेरे भाईजान मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ मुझे ऐसे ही प्यार करते रहो भाईजान…” ये वो शब्द थे वो मियां-बीवी के बीच नहीं होते।

कुछ महीने के बाद जब मैं उनके रूम के सामने से पानी पीने के लिये गुजरी, तब भी मैंने यही शब्द सुने। जब मैं 18 साल की हुई तो मेरा जिस्म बहुत भर सा गया था, कश्मीरी खून जो था। मैंने एक दिन हिम्मत करके अम्मी से पूछ लिया की अब्बू आपके भाई हैं न?

उन्होंने पहले मना किया पर मेरे दबाओ डालने पे उन्होंने सब कुछ बता दिया।

मैं कभी अपने अब्बू के साथ सोने का सोच भी नहीं सकती थी, पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मुझे बुखार आ गया था और पूरा जिस्म बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया था। मैं ठंड से काँप रही थी। अब्बू ने डाक्टर को बुलाया तो उसने कहा कि मुझे गर्म रखो, वरना मैं नहीं बच पाऊँगी।

अम्मी ने डाक्टर के जाने के बाद रूम का दरवाजा बंद किए और अब्बू और अम्मी ने अपने सारे कपड़े उतारकर और फिर मेरे कपड़े उतारकर मुझे आगे पीछे से जकड लिया।

 
आख़िरकार मैं भी इंसान हूँ। अब्बू मेरे आगे थे और अम्मी पीछे। अम्मी की चूची मेरे पेट में चुभ रही थी और अब्बू का वो हिस्सा मेरी जाँघ में धँस गया था। वो दोनों लगातार मुझे गरम रखने के लिये अपना जिस्म मेरे जिस्म पे रगड़ रहे थे।

मेरे पूरे जिस्म में एक अजीब सी सनसनाहट पैदा होने लगी थी। फिर अचानक अम्मी ने अब्बू के कानों में कुछ कहा और अब्बू ने मेरी एक टांग उठाकर उनके कंधे पे चढ़ा दिया, जिससे मेरी कुँवारी नाज़ुक सी चूत उनके मजबूत जवान लण्ड के सामने आ गई। जिस्म में ऐसा कुछ हो रहा था की मुझे होश ही नहीं रहा कि कब क्या हुआ? पर अचानक एक तेज धारदार चीज़ मेरी जांघों को चीरती हुई मेरी कुँवारी चूत में घुस गई और मैं उस दिन एक लड़की से औरत बन गई।

मैं चिल्लाई कि मुझे छोड़ दो।

पर अम्मी और अब्बू ने मुझे इतनी मजबूती से पकड़ा हुआ था की मैं कुछ ना कर पाई और उस रात अब्बू ने मुझे रात भर सोने नहीं दिया। मैं कितनी बार अब्बू से चुदती रही, मुझे याद नहीं। बस इतना याद है की अम्मी ने अब्बू से कहा था कि रात भर बाहर मत निकलना। और अब्बू मेरे अंदर ही रखे रहे और हर थोड़ी देर के बाद वो मुझे या तो अपने ऊपर चढ़ा लेती, या नीचे कर लेती। पर मैं बुखार के आलम में वो सब करती गयी वो वो करना चाहते थे।

तुम्हारे अब्बू, वो मेरे अब्बू की ही फैक्टरी में काम करते थे। एक दिन मुझे अम्मी ने ये खबर सुनाई की मेरी कुछ दिन बाद शादी होने वाली है। क्योंकी मैं प्रेग्गनेंट हो गई थी। मेरी शादी कुछ दिनों में कर दी गये और शादी के 7 महीने के बाद तुम इस दुनियाँ में आ गए। सब लोगों ने ये समझा कि तुम 7 महीने में ही पैदा हो गये। बस मैं जानती थी कि तुम 9 महीने का बाद पैदा हुए हो।

ख़ान साहब, तुम्हारे अब्बू और चाचू सऊदी काम के सिलसिले में जाते रहते थे और तुम्हारे नाना-नानी यहाँ मेरे साथ रुकते थे और इस दौरान तुम्हारे नाना ने कई बार मुझे अपने नीचे सुलाया। मैं भी अपने जिस्म के हाथों मजबूर हो गई थी। अमन तुम्हारे अब्बू में कोई ताकत नहीं थी बच्चा पैदा करने की।

एक दिन जब तुम्हारे नाना मेरी ले रहे थे, तभी अचानक रेहाना मेरे रूम में आ गई और उसने हम दोनों बाप बेटी को ऐसी हालत में देख लिया। पर मेरे कुछ समझने से पहले ही तुम्हारे नाना ने रेहाना का हाथ पकड़कर बेड पे खींच लिया और उसके सारे कपड़े उतारने लग गए। रेहाना भी उसी नाव में सवार थी जिसमें मैं बैठी थी। उसे भी औलाद की खुशी चाहिए थी, इसीलिये वो भी कुछ देर के बाद राजी हो गई।

तुम्हारे नाना कई बार आते थे और जब तुम्हारे अब्बू और चाचू आते तो वो नहीं आते थे। ऐसे ही कई दिन गुजरते चले गये और फिर मुझे और रेहाना को एक साथ अच्छी खबर मिली कि हम दोनों प्रेगनेंट हो गई हैं। तुम्हारे अब्बू और चाचू अपनी मर्दानगी पे बहुत खुश थे। पर हमें पता था कि कौन असल मर्द है, और कौन नहीं?”

देखो अमन, हाँ मुझसे गलती हुई है। पर मेरे साथ पहली बार वो हुआ उसमें मेरी कोई गलती नहीं है। और दूसरी बार मैं जिस्म के हाथों मजबूर हो गई थी। प्लीज़… अमन हमें माफ कर दो प्लीज़्ज़ज्ज्ज… वो रोए जा रही थी, पर अमन पता नहीं किन ख्यालों में गुम था।

अमन उन दोनों को अपने रूम से बाहर निकाल देता है, और बेड पे लेट जाता है। उसका दिमाग़ सोचने समझने की ताकत खो चुका था पर उसकी आँखों से नींद गायब थी।

इधर रजिया और रेहाना का भी यही हाल था। उन दोनों ने अपनी बात बता तो दी थी पर अमन इस सबके बाद क्या करने वाला है? ये उन दोनों को पता नहीं था।

आज की रात रजियाम रेहाना और अमन के लिये किसी कयामत से कम नहीं थी।

आधी रात के 3:00 बज रहे थे, पर रजिया और रेहाना की आँखों से नींद गायब थी। वो दोनों अपनी गुजरी हुई जिंदगी के पन्ने पलट रही थीं और वो उनसे जाने-अंजाने में हादसे हुए उसे याद कर-करके आँसू बहा रहीं थीं। जब रात का मंज़र ये था तो सुबह का आलम क्या होगा?

सुबह 8:00 बजे-

रजिया और रेहाना नाश्ता बना रही थी और अनुम और फ़िज़ा अपने रूम में बैठीं बातें कर रहे थीं। रजिया ने कहा-“रेहाना, जा जाकर अमन को उठा दे…”

रेहाना-“बाजी वो मैं…” वो हिचक रही थी। शायद अमन का सामना करने की उसकी हिम्मत नहीं थी।

रजिया भी इसी डर में जी रही थी। आख़िरकार वो खुद अमन के रूम की तरफ कदम बढ़ा देती है। जब रजिया अमन के रूम में पहुँची तो अमन सो रहा था। उसके चेहरे पे सुकून था जैसे किसी बड़े तूफान के गुजर जाने के बाद सब कुछ कैसे शांत हो जाता है।

रजिया वहाँ बेड पे अमन के पास बैठ जाती है। उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पर उसने हिम्मत करके अमन की पेशानी पे हाथ रख दिया तो उसे एक झटका सा लगा। अमन की पेशानी किसी भट्टी की तरह तप रही थी, उसे तेज बुखार आ गया था।

रजिया अमन के गले और छाती पे भी हाथ लगाकर देखती है। तब उसे एहसास होता है कि अमन को बहुत तेज बुखार है। वो रेहाना को चीखकर आवाज़ देती है। जिससे रेहाना के साथ-साथ अनुम और फ़िज़ा भी भागती हुई अमन के रूम में पहुँच जाती हैं।

अनुम-“क्या हुआ अम्मी?” वो सबसे पहले पहुँची थी।

रजिया घबराते हुए-“बेटा जल्दी से डाक्टर को फोन लगा, अमन को बहुत तेज बुखार है…”

रेहाना के साथ-साथ फ़िज़ा भी इस बात से जैसे ख़ौफजदा सी हो जाती है। और सभी औरतें अमन को घेरकर बैठ जाती हैं। अनुम डाक्टर को फोन लगाकर किचिन से आते-आते पानी के एक जग में कुछ गीले कपड़े भिगा लाती है, और अमन के सर पे रखने लगती है।

उन सभी से चेहरे से साफ जाहिर हो रहा था की उन्हें अमन की तबीयत की कितनी फिकर हो रही है। वहाँ रजिया की आँखों से आँसू टपक रहे थे, वहीं रेहाना अमन के तलवों को गीले कपड़े से पोंछ रही थी। फ़िज़ा के तो पसीने छूट गये थे। वो बेचारी जब किसी को बीमार देखती थी तो उसका यही हाल होता था।

अनुम-“अम्मी प्लीज़… आप रोना बंद करो ना। कुछ नहीं होगा इन्हें। डाक्टर अभी आते ही होंगे…”

इन सबके बीच अमन बुखार में कराह रहा था। उसे सर दर्द भी था, जिससे वो बीच-बीच में बड़बड़ा भी रहा था। एक हट्टा-कट्टा जवान इंसान जब बेड पे इतना बेबस पड़ जाता है। तो वो उसकी सांसों के नज़दीक होते हैं, उनका हाल बहुत बुरा हो जाता है। उनकी हालत मरीज से भी ज्यादा खराब नज़र आती है।

तकरीबन दस मिनट बाद डोरबेल बजती है, और अनुम के दरवाजा खोलने के बाद डाक्टर सानिया अंदर आती है। हालांके वो प्रेगनेंट थी। पर जब उसे अमन की बीमारी की खबर अनुम ने सुनाई तो वो सब कुछ छोड़-छाड़कर भागती हुए अमन के पास जैसे उड़ती हुए चली आई।

सानिया के शौहर अमन के घर के परिवारिक डाक्टरों में से एक थे। पर उनकी गैर मौजूदगी में सानिया ही मरीजों को चेक करती थी। सानिया अमन को चेक करके कहती है-“आंटी, अमन को वायरल फीवर हो गया है। मुझे कुछ ख़ून के नमूने लेने होंगे, उसके बाद ट्रीटमेंट शुरू होगी। मैं तब तक के लिये इंजेक्शन और कुछ टेबलेट दे देती हूँ। आप अमन को दे दीजिएगा और गीले कपड़े से पूरा जिस्म पोंछते रहें…”

रजिया-ओके बेटा।

 
सानिया कुछ देर बाद चली जाती है। उसे अमन की बहुत फिकर हो रही थी। वो सबसे पहले ख़ून के नमूने लैब में भिजाती है।

रजिया और रेहाना अमन के जिस्म को पोंछते रहते हैं।

दोपहर में सानिया उन्हें फोन करके बताती है की रिपोर्ट एकदम नॉर्मल है। घबराने की कोई बात नहीं है। मैं रात को एक बार और अमन को देखने आ जाऊँगी।

सुबह के 8:00 बजे से रात के 8:00 बजे तक उन चारों औरतों ने ना कुछ खाया, ना पिया। भला जब उनका शौहर इस हालत में था तो किसी के गले से निवाला उतर सकता था।

जब रात में सानिया की दवाओं ने और इन चारों की दुआओं ने अपना असर दिखाया तो उनकी जान में जान आई। अमन अब कुछ ठीक महसूस कर रहा था, और उसने हल्का-फुल्का नाश्ता भी किया था। उसके खाना खाने के बाद चारों औरतों ने भी खाना खाया।

रात 11:00 बजे-

सुबह से ठंडे पानी से जिस्म पोंछने से अमन को एक नई मुसीबत ने घेर लिया था। उसका बुखार जा चुका था पर जिस्म एकदम ठंडा पड़ चुका था। उसे कंपकंपाहट होने लगी थी। जिस्म पे दो चार ब्लंकेट डालने के बाद भी उसकी कंपकंपाहट खतम नहीं हो रही थी।

रजिया बहुत बेचैन सी हो गई थी। वो अमन के पैर के पंजों को घिस-घिसकर अमन को गरम रखने की कोशिश कर रही थी।

अनुम डाक्टर सानिया को फोन लगाती है, और उसे अमन की हालत बताती है। सानिया उस वक्त घर नहीं आ सकती थी। इसीलिये वो अनुम को सलाह देती है की अमन को गरम रखने की कोशिश करो, उसे गर्मी मिलेगी तो वो नॉर्मल हो जाएगा।

जब अनुम अमन के कमरे में आई तो रजिया ने उससे पूछा कि डाक्टर ने क्या कहा?

तब अनुम डाक्टर की कही बात रजिया को बताती है। रजिया रेहाना की तरफ देखती है। और रेहाना समझ जाती है की क्या करना है।

किस्मत-

जिस चीज़ ने रजिया की जिंदगी हमेशा के लिये बदलकर रख दी थी, आज वहीं चीज़ फिर से रजिया के सामने आ गई थी। ऐसी ही एक रात जब रजिया ठंड से कांप रही थी। उसके अब्बू ने उसे ऐसा गरम किया था की वो उसके बाद कभी ठंडी नहीं हुई।

रजिया दरवाजा बंद कर देती है, और रेहाना की तरफ देखती है।

रेहाना फ़िज़ा और अनुम को बताती है की उन्हें क्या करना है?

रजिया और रेहाना अमन के सारे कपड़े उतार देती हैं। वो बेड पे एकदम नंगा हो जाता है। उसे होश था पर सर्दी के मारे वो कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसका जिस्म बर्फ की तरह ठंडा हो चुका था। रजिया को वो भी करना था जल्दी करना था।

चारों औरतें भी पूरी तरह नंगी हो जाती हैं। ये पहला मौका था जब वो एक दूसरे के सामने ऐसी हालत में एक साथ खड़ी थीं।

रजिया अनुम को बोलती है-“बेटा, तू अमन का लौड़ा मुँह में लेकर चूसती रह, और फ़िज़ा बेटा तुम अमन के पैरों के पंजों को चाटो। रेहाना तुम मेरे साथ अमन की छाती से चिपक जाओ, उसे चारों तरफ से गरम रखना है…” सभी अपने-अपने काम में जुट जाती हैं।

पहले अनुम को अमन के लण्ड को चूसने में परेशानी हो रही थी, क्योंकी उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई बरफ का टुकड़ा उसके मुँह में किसी ने रख दिया हो। फिर धीरे-धीरे अमन के ठंडे लण्ड में जान आने लगी।

छाती से चिपकी रजिया और रेहाना अपनी चूची लगातार अमन से घिस रही थीं, और फ़िज़ा अमन के पैरों की उंगलियों को मुँह में डालकर गरम कर रही थी।

तकरीबन आधे घंटे बाद अमन का खून गरम हो जाता है, और साथ ही साथ वो सब भी गरम हो जातीं हैं। अमन का खड़ा लण्ड अब अनुम के गले के अंदर तक जा रहा था और ये सब देख-देखकर फ़िज़ा भी उसके पास आकर अमन के लण्ड को मुँह में डालकर चूसना शुरू कर देती है।

रजिया अनुम को देखते हुए-“बेटा अनुम, अपनी चूत में ले ले…”

अनुम रजिया की तरफ देखते हुए अमन के लण्ड को थामकर अपने दोनों पैर उसके इद़-गिद़ डाल देती है। फ़िज़ा अमन के खड़े लण्ड को अनुम की चूत पे लगा देती है।

फ़िज़ा-“अब नीचे बैठो बाजी…”

अनुम रजिया को देखती है। वो रेहाना के साथ अमन का मुँह खोलकर उसकी ठंडी जीभ को अपने मुँह में लेकर गरम कर रही थी। एक नज़र रजिया अनुम को देखती है और इशारा करती है।

और अनुम अमन के लण्ड पे बैठती चली जाती है। उसकी चूत इससे पहले कई बार अमन का लण्ड ले चुकी थी पर आज फ़िज़ा और रेहाना के सामने इस हालत में चुदना उसे एक नया सा अनुभव, एक दिलकश पुरसुकून खुशी दे रही थी। वो अमन के लण्ड पे अपनी कमर नीचे-ऊपर करने लगती है। उसे पता था की अमन इस वक्त थका हुआ है। इसलिये वो अमन का मेहनत भरा काम आज खुद कर रही थी। उसकी चूत से लगातार पानी रिस रहा था, वो नीचे अमन की आंड पे गिरने लगा था। जब फ़िज़ा इस पानी को देखती है तो उसकी जीभ अपने आप उस मीठे पानी को चाटने बढ़ जाती है।

फ़िज़ा-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” वो पीछे से अनुम की गाण्ड और अमन के आंड को भी चाटने लगती है। उसका एक हाथ अपनी चूत को मसल रहा था और उसमें से किसी भी वक्त ज्जालामुखी फट सकता था। एक लंबी चीख के साथ वो झड़ने लगती है-“अह्म्मह…”

रेहाना और रजिया अमन के होंठों को चूसने के साथ-साथ एक दूसरे के होंठों को भी एक दो बार चूम लेती हैं। उन दोनों की आँखें अनुम की चूत पे थी, वो किसी घुड़सवार की तरह अमन के लण्ड पे नीचे-ऊपर उछल-उछलकर सवारी कर रही थी।

अमन होश में तो था। वो जानता था क्या हो रहा है। पर आज उसका दिल कुछ मेहनत करने को नहीं कर रहा था। वो तो बस चारों औरतों के बीच पड़ा एक नये एहसास को महसूस करता जा रहा था।

कुछ देर बाद अनुम अपनी चूत की फुहार छोड़ने लगती है।

साथ ही साथ रेहाना और रजिया भी ठंडी पड़ जाती हैं। रात के 2:00 बज रहे थे। सभी वहीं उसी हालत में एक दूसरे से चिपके सो जाते हैं।

 
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