• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

अमन विला-एक सेक्सी दुनियाँ complete

रजिया आईने में अपने बाल सँवार रही थी। अमन उसे पीछे से चिपक जाता है-“मुआह्म्मह… तू खुले बालों में बहुत अच्छी लगती है…”

रजिया-“अच्छा…” और वो बाल सँवारते हुए जूड़ा बांधने के बजाए खुला ही रख देती है-“जैसा आप कहें मालिक…” और दोनों एक दूसरे की बाँहों में मुस्कुराने लगते हैं।

अमन रजिया की होंठ पे किस करके-“एक बात बता… तुझे कैसे पता चला कि तू प्रेगनेंट है?”

रजिया मुस्कुराते हुए-“अरे बाबा, जब हम शिमला पहुँचे उसके दो दिन बाद ही मेरी एम॰सी॰ पीरियड की डेट थी, पर पीररयड्स तो आए ही नहीं। मैंने और 5 दिन इंतजार किया, क्योंकी कभी-कभी लेट हो जाती है। पर जब 5 दिन भी नहीं आए तो मैं समझ गयी कि आपका बोया हुआ बीज पौधा बनना चाहता है…”

अमन रजिया के होंठ जोर से चूमते हुए-“मेरे जान, अब तो तेरा और खयाल रखना पड़ेगा। मैंने सुना है कि जब औरत प्रेग्गनेंट होती है, तो उसे रोज चोदना चाहिए, ऐसा क्यूँ?

रजिया अमन के सीने पे काटते हुए-“क्योंकी उससे चूत चिकनी रहती है, और डिलेवरी में भी आसानी होती है…”

अमन का दिल जोर से रजिया को चोदने का कर रहा था। अमन ने एक बात नोटिस किया था खुद को लेकर कि उसे एक रात में दो औरतें चाहिए चोदने के लिये, तभी उसका लण्ड ठंडा पड़ता है।

वो अनुम को आवाज़ देता है।

रजिया-“वो सो गई है, उसे एम॰सी॰ पीरियड शुरू हो गये हैं रात से। उसे सोने दो, 7 दिन तक वहाँ नो एंट्री है…”

अमन रजिया की साड़ी खोलते हुए-“और यहाँ?” अमन रजिया को पूरी नंगी कर देता है, और उसके निपल्स को मुँह में लेकर चूसने लगता है।

रजिया अपने हाथों से निचोड़-निचोड़ के अमन के मुँह में चुचियाँ डालने लगती है। वो पूरे जोश में थी। अमन के लण्ड से चुदना उसका शौक नहीं, उसे इसकी आदत सी हो गई थी। और एक बार औरत को जिस चीज़ की आदत हो जाती है, वो उसे किसी भी कीमत पे चाहिए।

रजिया अमन के मुँह से अपनी चुचियाँ निकालकर नीचे बैठ जाती है, और अमन की पैंट उतार देती है। अमन का लण्ड उसके मुँह के सामने आ जाता है, जिसे वो बड़े चाओ के साथ चाट-चाटकर मुँह में गटकने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो किसी रंडी की तरह नीचे अपने पैर खोलकर बैठी थी, जैसे पेशाब करने बैठी हो-“गलप्प्प उंह्म्मह… ओह्म्मह… अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…” वो अपनी चूत को एक हाथ से सहलाये जा रही थी।

अमन-“अह्म्मह… रजिया तुझे कितनी बार कहा है कि आराम से किया कर अह्म्मह… साली सुनती नहीं अह्म्मह…”

रजिया-“उंह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प… मुझे मुँह में लेने के बाद कुछ भी समझ में नहीं आता गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन उसके बाल पकड़कर उसे बेड पे पटक देता है, और बिना देर किए उसके ऊपर चढ़ जाता है। रजिया हाँफ रही थी और दोनों हाथों में अमन के लण्ड को लिये मसल रही थी-“अह्म्मह… डालो ना जल्दी अह्म्मह…”

अमन-क्या मेरी जान?

रजिया-ईई।

अमन-मुँह से बोल साली, क्या चाहिए?

रजिया-“आपका लौड़ा मेरे चूत में अह्म्मह… अह्म्मह…”

उसके मुँह से अल्फ़ाज़ पूरे भी नहीं हुए थे कि अमन का लण्ड उसकी चूत के दीजारों को चीरता हुआ अंदर जा चुका था-अह्म्मह… स्शह… ऐसे ना रजिया… ऐसे ना अह्म्मह… अह्म्मह… ले मेरी जान अह्म्मह…”

रजिया-“हाँ हाँ ऐसे… आराम से… सुनिए रोज-रोज चोदने से हमारे बेबी को कुछ होगा तो नही ना? अह्म्मह… उंह्म्मह…”

अमन-“कुछ नहीं होगा। तुझे रोज चोदने से हमारा बेबी एकदम मोटा होगा… तुझे रोज चाहिए ना रजिया अह्म्मह…”

रजिया-“हाँ रोज, दिन रात… ऐसे ही… मेरी चूत में डालकर रखो… चोदते रहो अपनी रजिया को उंह्म्मह… ओह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह…”

ये चुदाई तकरीबन आधी रात तक ऐसे ही चलती रही। अमन ने रजिया की चूत को पूरी तरह खोलकर रख दिया था। उसकी गाण्ड का सुराख और चूत के सुराख के बीच बहुत काम गैप था, जिससे अमन कभी उसकी चूत में लण्ड डालकर चोदता, तो कभी गाण्ड मारने लगता।

ये रजिया का ही कहना था कि उसे गाण्ड में लौड़ा बहुत अच्छा लगता है। इसीलिये अमन रात में उसकी गाण्ड एक बार ज़रूर मारता था। जब वो दोनों एक दूसरे की बाँहों में नंगे पड़े थे।

तब रजिया ने कहा-“सुनो कुछ दिनों में ख़ान यहाँ आ जायेगा, तब आप कैसे मुझे चोदोगे?”

अमन-“वही अपना पुराना फामू़ला-नींद की गोलियाँ…”

रजिया मुस्कुराते हुए-“ह्म्मम्म्म्मम…”

अमन-तुझे ख़ान ने चोदा है क्या ऐसे में?

रजिया-नहीं, जबसे वो आया था एक बार भी नहीं।

अमन-“तो तू क्या कहेगी उसे कि प्रेग्गनेंट कैसे हुई? वो तो तुझे जान से मार देगा…”

रजिया-आह्म्मह… ये आप मुझपे छोड़ दो। मैं एक औरत हूँ और मुझे अच्छी तरह पता है कि ये बात कैसे करनी है…”

फिर रजिया दिल में सोचने लगती है-“एक दो बार ख़ान का लण्ड चूत में लेना होगा और पानी चूत में गिराना होगा। उसके कुछ दिन बाद कह दूंगी कि आपके चोदने से मैं प्रेग्गनेंट हो गई हूँ। वो तो समझेगा कि उसने बीज बोया है। पर उसे क्या पता कि इस ज़मीन में पहले से ही अमन ने अपना बीज बो भी दिया है। और वो बीज कोंपल भी बन चुका है।

अमन-क्या हुआ, क्या सोच रही है?

रजिया-यही कि अब आप मेरी चूत मारोगे या गाण्ड?

अमन-“हाहाहाहा… साली तू वो कहेगी वो?”

रजिया-“मैं तो पूरी की पूरी आपकी हूँ, वहाँ चाहिए वहाँ डालो…” और अमन उसकी गाण्ड पेलने लगता है।

सुबह 10:00 बजे-

अमन फैक्टरी के लिये निकल जाता है। जब वो फैक्टरी पहुँचता है तो उसे केबिन में महक उसका बेसबरी से इंतजार करते हुए मिलती है।

महक उसे अपने सीने से लगा लेती है-“ऊऊऊऊ अमन, तुम मेरी उस बात का इतना बुरा मान गये कि मुझसे बात तक नहीं किया। तुम जानते हो मैंने तुम्हें कितना मिस किया?

अमन-“रियली आई मिस यू टू महक। अगर मुझे अर्जेंट शिमला जाना नहीं होता तो मैं तुम्हें ज़रूर इनफॉर्म करता।

महक-“जानती हूँ अमन, बैठो…” और वो अमन से अलग होकर उसे सोफे पे बैठा देती है-“तुम आज दिन भर मेरे साथ रहोगे, और रात में तुम मेरे साथ घर चलोगे। मेरी पार्टी तुम्हारे बिना अधूरी है, और मुझे तुम्हारे साथ केक भी तो काटना है…”

अमन-“ओके, जैसा तुम कहो…”

महक-“पर पहले हम जाएंगे ड्राइविंग सीखने…”

अमन-“ओके, आज तो तुम्हारा बर्थ-डे है ना? और बर्थ-डे वाले दिन बर्थ-डे गर्ल की बात कोई टाल सकता है क्या?” और दोनों ड्राइविंग के लिये निकल जाते हैं।

उसे सुनसान रोड पे वहाँ कोई नहीं होता। आज महक कुछ ज्यादा ही चहक रही थी। शायद 7 दिनों की दूरी ने उसकी चूत की आग को इस हद तक बढ़ा दिया था कि वो अमन से चुदना चाहती थी। इसीलिये तो वो बार-बार अमन के पैर को अपने पैर से छूती जाती है।

अमन उसके साथ हँस-हँस के बातें करने लगता है। जब वो उस रोड पे पहुँच जाती है, वहाँ महक ड्राइविंग करती थ। महक नीचे उतरकर ड्राइविंग सीट की तरफ आ जाती है। और जल्दी से अमन की गोद में उछलकरके बैठ जाती है। वो अपनी पीठ अमन के सीने से लगाकर ड्राइविंग करने लगती है।

अमन-“अरे वाह… तुम तो काफी अच्छी ड्राइविंग कर रही हो। मेरे पीछे लगता है कि तुमने काफी प्रेक्टिस की है…”

महक-“हाँ बोर हो जाती थे तो आ जाया करती थे यहाँ ड्राइविंग करने…” अचानक वो जोर से ब्रेक मारती है। जिससे अमन उसे पकड़ लेता है, और अपने दोनों हाथ उसकी चुचियाँ पे रख देता है।

अमन-आराम से चलाओ बाबा।

महक-हुन्न्णन्।

अमन उसकी नरम-नरम चुचियाँ मसलने लगता है।

महक-“उंह्म्मह… क्या कर रहे हो अमन?”

अमन-कुछ भी तो नहीं।

महक-मुझे पता है कि तुम क्या कर रहे हो?

अमन-क्या?

महक-मुझे मसल रहे हो।

अमन-क्यूँ तुझे बुरा लगा?

महक-नहीं।

अमन जोर से चुचियाँ मसलने लगता है।

महक-“उंह्म्मह… दर्द होता है ना…”

अमन-मसलूं नहीं क्या फिर?

महक उसके हाथ पे अपने हाथ रखकर कार के ब्रेक लगा देती है। और उसके हाथों को अपने हाथों से दबाने लगती है-“अह्म्मह… हाँ मत मसलो अह्म्मह…”

अमन उसकी गर्दन मोड़कर अपनी तरफ कर लेता है। दोनों की नज़रें एक दूसरे को देखने लगती हैं-“आई लव यू महक…”

महक-“आई लव यू टू अमन…”

पहले उनके होंठ मिलते हैं, उसके बाद जीभ। दोनों एक दूसरे का सलाइवा चाट-चाटकर किसिंग करने लगते हैं। दोनों इस खेल में मास्टर थे। अमन जानता था औरत को कैसे बस में किया जाए। वो किसिंग करते-करते महक के पैर खोलकर अपना हाथ उसकी चूत पे रख देता है, और उसे भी मसलने लगता है।

महक तड़प जाती है, और अपनी जीभ अमन के मुँह के और अंदर डालकर चूसने लगती है-“गलप्प्प-गलप्प्प उंह्म्मह…” वो इतने जोश में थी कि उसे होश ही नहीं रहा कि अमन ने कब उसकी शलवार का नाड़ा खोला और कब अपना हाथ उसकी पैंटी में डाल चुका था।

 
महक तो तब सिसक उठी, जब उसे उसकी चूत में अमन की एक उंगली घुसते हुए महसूस हुई-“अह्म्मह… उंह्म्मह… अमन अह्म्मह… ओह्म्मह…” वो मारे जोश के बस सिसक रही थी।

अमन उसे हर जगह मसल रहा था वो किसी भी वक्त उसे नंगा करके चोद सकता था। पर वो महक को और तड़पाना चाहता था। उसे उसके लण्ड का असली दीजाना बनाकर चोदना चाहता था।

महक बकाबू हो चुकी थी वो चिल्लाने लगती है-“अह्म्मह… फक मी अमन प्लीज़ फक मी उंह्म्मह… आह्म्मह… फक फक फक…” और वो ये बोलते-बोलते झड़ने लगती है। उसकी चूत का पानी अमन का हाथ भिगा देता है। जब वो पूरी तरह अपनी साँसें थाम लेती है।

तब अमन उसे चूत के पानी से भीगा हुआ हाथ दिखाता है। जिसे महक एक झटके में अपने मुँह में डालकर उसकी एक-एक उंगली चूस-चूसकर साफ करने लगती है।

महक-मुझे बर्थ-डे गिफ्ट क्या दोगे?

अमन-क्या चाहिए तुझे?

महक-“ऐसे चीज़ वो हमेशा मेरे पास हो और मुझे तेरे प्यार का सुबूत लगे…”

अमन-आज रात दूँगा पर तुझे लेना होगा। मना तो नहीं करेगी?

महक-बिल्कुल नहीं… वो देना हो दो, जितना देना हो दो, मैं एक लफ़्ज भी नहीं कहूंगी।

अमन-उसे चूमता चला जाता है, और रात होने लगती है।

रात 8:00 बजे-

अमन महक के साथ उसके घर पहुँचता है। दरवाजा एक नौकरानी खोलती है। महक अमन का हाथ पकड़कर उसे अपने बेडरूम में ले जाती है। वहाँ महक की नौकरानी ने पार्टी का पूरा इंतेजाम किया हुआ था। एक म्यूजिक सिस्टम ओन था जिसमें रोमांटिक म्यूजिक बज रहा था, सामने टेबल पे एक बड़ा सा केक रखा हुआ था। अमन को ये देखकर हैरानी हुए कि अब तक कोई गेस्ट नहीं आया था। वो महक से पूछ लेता है।

महक-“मैंने सिर्फ़ तुम्हें और मेरी बेस्ट दोस्त को इनवाइट किया है वो बस आती ही होगी…”

महक की नौकरानी उसे ये कहकर चली जाती है कि वो सुबह आ जाएगी।

महक उसे ये सब अरेंज करने के लिये थैंक्स कहती है। और कुछ पैसे देकर उसे गेट तक छोड़ने जाती है। वो गेट बंद करके मुड़ी ही थी कि डोरबेल बजती है। जब वो दरवाजा खोलती है तो उसकी बेस्ट दोस्त उसके सामने खड़ी एक बड़ा सा बूके लिये उसे मिलती है।

दोनों हँसते हुए महक के बेडरूम में पहुँचती हैं। वहाँ अमन बेड पे बैठा रजिया को फोन पे ये बता रहा था कि वो लेट हो जाएगा।

रजिया उससे वजह पूछती है तो वो झूठ बोल देता है कि इमरान का बर्थ-डे है, और वो ट्रीट दे रहा है।

अमन रजिया से बात करके फोन रखता ही है कि वो सामने खड़ी उस लड़की को देखकर चौंक जाता है। वो और कोई नहीं बल्की डाक्टर सानिया थी, जिसने कुछ दिन पहले उसके लण्ड की अच्छे से ट्रीटमेंट की थी। डाक्टर सानिया भी अमन को देखकर पहले चकित फिर खुश हो जाती है। दोनों आने वाले खतरे को भाँप गये थे।

महक-“सानिया, इनसे मिलो ये हैं अमन, हमारी फैक्टरी के नये मालिक और अमन ये हैं मेरी बेस्ट आउट आफ बेस्ट दोस्त डाक्टर सानिया…”

अमन सानिया से हैंड शेक करते हुए-“मैं इनसे मिल चुका हूँ बहुत अच्छे से…” और वो सानिया का हाथ दबा देता है।

सानिया मुस्कुराते हुए-“हाँ बहुत अच्छे से। अमन अब कैसा है?” और वो जोर-जोर से हँसने लगती है।

अमन थोड़ा झेंप जाता है। जबकी महक को उनके बातें समझ नहीं आ रही थीं।

महक-“अरे ये तो बड़ी अच्छी बात है कि तुम एक दूसरे को अच्छी तरह जानते हो…”

अमन-“ह्म्मम्म्म्म… चलो जल्दी से केक काटो…”

महक-“ओके…” और वो केक काटने लगती है।

अमन और सानिया हैपी बर्थ-डे, हैपी बर्थ-डे के साथ महक को मुबारक बाद देते हैं। महक पहले अमन को और फिर सानिया को केक खिलाती है। सानिया महक से गले मिलकर उसे मुबारक बाद देती है। और फिर अमन महक को कसकर गले से लगा लेता है, और उसके कमर को सानिया की आँखों में देखती हुए मसलने लगता है।

महक धीरे से-“ऊऊओह्म्मह… छोड़ो सानिया देख रही है…”

सानिया-“एक्सक्यूस मी, मैं ज़रा टायलेट से आती हूँ…” और वो वहाँ से खिसक जाती है।

महक अमन से अलग होते हुए-“क्या अमन, इतनी भी क्या बेसब्री। सानिया देख रही थी ना…”

अमन-“प्यार करने वाले किसी के बाप से नहीं डरते मेरी जान…” और वो महक को अपनी छाती से चिपकाकर चूमने लगता है।

महक को भी अमन की ऐसी हरकत कहीं ना कहीं बहुत अच्छी लगने लगती है। इसलिये वो भी अमन का साथ देने लगती है। दोनों एक दूसरे को चूमे जा रहे थी और सानिया दरवाजे के पास से उन्हें देख रही थी। जब वो दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो सामने सानिया को देखकर पहले थोड़े टठठके और फिर दुबारा शुरू हो गये।

सानिया-क्या मैं जाय्न हो सकती हूँ?

महक-“क्यों नहीं डियर, तुम्हें कोई प्राब्लम तो नहीं है ना… अमन…”

अमन-बिल्कुल नहीं।

और सानिया भी अमन से चिपकके उसे किसिंग करने लगती है। थ्रीसम अमन को हमेशा से पसंद था। जैसे भी उसे एक रात में दो चूत चाहिए होती थी, पठान वो था। कहते हैं कि पठान का लण्ड ना थकता है, और ना झुकता है।

महक तो सुबह से ही पनिया गई थी और सानिया के दिमाग़ में अमन का लण्ड पहली नज़र में ही घर कर चुका था। दोनों बड़ी बेसब्री से अमन के लण्ड को अपने मुँह में और चूत के अंदर उतारना चाहती थीं। वो दोनों जल्दी से अमन को खड़े-खड़े ही नंगा कर देती हैं, और खुद भी नंगी हो जाती हैं। तीनों एक दूसरे को मसल-मसलकर चूम रहे थे। अमन एक हाथ से सानिया की चूत सहला रहा था, तो दूसरे हाथ से महक की चुचियाँ दबा रहा था। महक और सानिया दोनों नीचे बैठ जाते हैं और अमन के लण्ड को, वो अब तक लगभग खड़ा हो चुका था, अपने मुँह में गटक जाती हैं।

महक-“गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… गलप्प्प…”

सानिया-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

 
वो दोनों बारी-बारी अमन के लण्ड को मुँह में लेकर चूस रही थीं। अमन को यकीन करना मुश्किल था कि ये दोनों औरतें जिनकी सोसाइटी में एक पहचान, एक इज़्ज़त है, वो ऐसे रंडियों की तरह उसका लण्ड अपने मुँह में खींच-खींचकर चूस रही थीं। ये चूत की आग ही थी, वो इन्हें ये करने पे मजबूर कर रही थी। अमन बुरी तरह सिसक उठता है। वो दोनों उसके लण्ड को और आंडे को मरोड़-मरोड़ के चूस रहे थे।

अमन-“अह्म्मह… बहन की लौड़ी खा जाएगी क्या? आह्म्मह… धीरे-धीरे चूस हरामज़ादी अह्म्मह…”

महक-“हाँ अह्म्मह… आज तेरा लौड़ा रहेगा या हमारी चूत… बहुत जान है ना तेरे लण्ड में… बता साले हम दोनों को गलप्प्प-गलप्प्प…”

सानिया-“महक, इसके लण्ड में बहुत ताकत है। इसके लण्ड का पानी हम अपनी बच्चेदानी में गिराकर उसका बीज अपनी चूत में बोएंगे अह्म्मह… गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन महक के बाल पकड़कर उसे बेड से टिका देता है। और उसके दोनों पैर चौड़े करके एक झटके में अपना लण्ड अंदर डालने लगता है-“अह्म्मह… छिनाल… मेरा बच्चा जनेगी? अह्म्मह… अह्म्मह… ले तेरी चूत को चीर ना दूं तो मेरा नाम भी अमन ख़ान नहीं…” वो किसी हथौड़े की तरह चूत पे जोर-जोर से जार करने लगा था।

महक के चिल्लाने की कोई इंतेहा नहीं थी, न जाने वो कितने दिनों बाद चुद रही थी। उसकी चूत लगभग पैक हो चुकी थी-“अह्म्मह… हराम के लौड़े आराम से चोद… मेरी चूत है, पत्थर नहीं वो तू हथौड़े से कूट रहा है। अह्म्मह… आराम से रे… अमन धीरे-धीरे चोद ना… अह्म्मह अम्मी… सानिया इससे बोल ना आराम से चोदे अह्म्मह…”

सानिया उसे आँखें फाड़े देख रही थी। उसने इससे पहले ये नज़ारा नहीं देखा था। कोई भला किसी को इतनी बेहरहमी से भी चोद सकता है? ये देख-देखकर उसकी चूत में पानी आने लगता है।

अमन-“छिनाल तू क्या देख रही है? इसके मुँह पे तेरी चूत लगा तो थोड़ा कम चिल्लाएगी ये हरामज़ादी…"

सानिया महक के मुँह के पास आकर बैठ जाती है। और अमन के धक्कों से महक के होंठ सानिया की चूत के पास पहुँच जाते हैं।

महक-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” करके किसी कुततया की तरह सानिया की चूत पे टूट पड़ती है। वो इतने जोर से इसलिये चूस चाट रही थी। अमन का लण्ड उसकी चूत में कोहराम मचा रहा था। उसके संभालने के पहले ही अमन उसे बिखेर देता है। महक एक जोर की चीख के साथ झड़ जाती है।

पर अमन नहीं झड़ा था, वो सानिया के बाल पकड़कर उसे बेड पे सुला देता है, और उसके पैर मोड़कर उसकी चुचियों से भिड़ा देता है, जिससे सानिया की चूत बुरी तरह फैल जाती है। अमन अपने लण्ड पे थूक लगाकर सानिया की नाज़ुक सी चूत में लण्ड पेलने लगता है-अह्म्मह… बच्चा चाहिए ना तुझे… मैं देता हूँ तुझे भी अह्म्मह… वो उसी तरह सानिया को चोदने लगता है, जैसे महक को चुद रहा था।

महक अमन के स्टैमिना और चोदने के अंदाज से इतने इंप्रेस हुई थी कि वो अमन के लण्ड की दीजानी हो चुकी थी। वो अपनी चूत को घिसते हुए टायलेट में घुस जाती है।

सानिया-“उंन्ह… अमन तेरे लण्ड ने मेरी चूत को चीर दिया रे अह्म्मह… कुत्ते क्या लण्ड है तेरा अह्म्मह… उंन्ह… मेरी चूत का भुर्ता बना दिया रे हरामी अह्म्मह…” वो दोनों ऐसे गालियाँ दे रही थीं, जैसे कोई कालगर्ल हों। ये औरतों का तरीका होता है। ख़ूँखार मदों से जमकर चुदाई कराने का, चुदते हुए उन्हें गालियाँ दो तो वो तुम्हारी चूत को चोद-चोदकर भोसड़ा बना देते हैं। और यही इस वक्त सानिया कर रही थी।

अमन तो जैसे पसीने में बेहाल था, पर सानिया को चोदने में उसे अजीब सा नशा छा रहा था। उसकी चिकनी चूत और भरी हुए चुचियाँ उसे रजिया की याद दिला रही थीं। उसे लगने लगा था कि वो रजिया को चोद रहा है। जब वो जवान हुआ करती थी तो बिल्कुल सानिया जैसी लगती होगी। यही बात उसके लण्ड को झड़ने से रोक रही थी।

सानिया चिल्ला-चिल्लाकर महक को पुकार रही थी-“अह्म्मह… महक इस हरामी से मेरी चूत को बचा… ये मुझे मार देगा उंन्ह…” और वो झड़ जाती है।

साथ ही अमन भी उसकी चूत में झड़ने लगता है।

महक ये सब देख-देखकर अपनी चूत मसले जाती है।

अमन ने सानिया और महक को दो बार और चोदा। ये चुदाई पूरे 3 घंटे चली। रात के 12:00 बज चुके थे और अमन का लण्ड ढीला पड़ चुका था, पर उसके दिल की मुराद पूरी हो चुकी थी।

महक अपनी चूत के साथ-साथ अपनी गाण्ड भी अमन को सौंप चुकी थी, इन 3 घंटों में।

वहीं सानिया दो बार चुदकर ही एक तरफ हो गई थी। उसे इतनी चुदाई की आदत नहीं थी।

अमन महक और सानिया को चूमते हुए अपने घर की तरफ निकल जाता है। उसे रजिया की फिकर हो रही थी। बैटरी डिस्चार्ज होने की वजह से वो परेशान हो गई होगी, क्योंकी अमन को काल लग नहीं रही थी। जब वो घर पहुँचा तो रात के 1:00 बज रहे थे।

रजिया गेट के पास उसका इंतजार कर रही थी । वो अमन को देखकर अंदर आ जाती है, और अमन के अंदर आने के बाद उससे कई सवाल करने लगती है।

पर अमन बुरी तरह थका हुआ था। वो रजिया के कुछ सवालों का जवाब देकर अपने रूम का रुख कर लेता है। आज रजिया को बिना लण्ड के ही सोना पड़ेगा।

सुबह अमन की आँख खुली तो उसने रजिया को उसके बेड पे लेटा हुआ पाया। वो जाग चुकी थी और अमन के बालों में प्यार से हाथ फेर रही थी।

अमन उसके गले में बाहें डालकर गुड मॉर्निंग कहता है। रजिया मुस्कुराते हुए जवाब देती है। पर उसके चेहरे पे एक किश्म की उदासी या चिंता के भाव साफ नज़र आ रहे थे, जिसे अमन पढ़ लेता है।

अमन-“क्या हुआ जानेमन परेशान लग रही हो?”

रजिया-“हाँ… कल ख़ान साहब का फोन आया था उन्होंने आपके अकाउंट में 5 करोड़ रूपये जमा करवाए हैं, और उनकी फ्लाइट सबेरे 11:00 बजे तक इंडिया पहुँच जाएगी…”

अमन-“ओह्म्मह… तो ये बात है। इसमें परेशान होने की क्या बात है। आने दे, मैं हूँ ना…” और अमन रजिया की नाइटी का बटन खोलकर उसकी चुचियाँ बाहर निकाल लेता है। इस वक्त सबेरे के 8:00 बज रहे थे। मतलब उनके पास 3 घंटे थे। अमन इस मौके को गँवाना नहीं चाहता था क्योंकी ख़ान साहब के आने के बाद उन्हें दिन रात चुदाई का मौका नहीं मिलने वाला था।

रजिया तो रात से तड़प रही थी। उसे ठीक से नींद भी कहाँ आई थी। वो अमन की मदद करती है, और दोनों कुछ ही पलों में नंगे एक दूसरे की बाहों में चिपक जाते हैं।

अमन-“आ जा मेरी रानी, अपने शौहर के नीचे आ जा…”

रजिया-“कल आपने मुझे चोदा भी नहीं। पता है, मैं ठीक से सो भी नहीं पाई…”

अमन-क्यूँ?

रजिया-“आपको पता है ना… मुझे चुदे बिना नींद नहीं आती…”

अमन-“ओह्म्मह… आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी…” और वो रजिया की टाँगें खोलकर अपना लण्ड उसकी चूत की गहराईयों में उतारता चला जाता है।

रजिया नीचे से गाण्ड ऊपर उछालकर लण्ड अपनी चूत में समाती जाती है। वो दोनों चुपचाप अपनी सुबह की चुदाई का मज़ा ले रहे थे। रजिया चुदते हुए-“अह्म्मह… ख़ान साहब के आने के बाद आप मुझे रोज कैसे चोदोगे जी? उंन्ह… अह्म्मह…”

अमन-“तू मेरी बीवी है रजिया, और बीवी को रोज चोदना मेरा फर्ज़ है… तू फिकर मत कर मेरी जान, ये लौड़ा तेरी चूत में रोज जाएगा ही…”

रजिया-“हाँ हाँ मुझे रोज-रोज ऐसे ही चाहिए आपके नीचे। हाँ, मेरे पेट में आपका बच्चा पल रहा है जानू… उसे आपकी ताकत रोज चाहिए अह्म्मह… उंन्ह…”

अमन-“हाँ रजिया ऐसे ही। रजिया मुझे दूध कब पिलाएगी?” और वो रजिया की एक चूची मुँह में लेकर चूसने लगता है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

रजिया-“बस… कुछ महीने बाद जानू… फिर आपको और आपके बच्चे को रोज दूध पिलाऊँगी नाआअ उंन्ह… अह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह… इतनी जोर से अह्म्मह…

आह्म्मह… आह्म्मह…”

 
ये अमन की मोहब्बत का ही असर था वो रजिया चुदते हुए झड़ती, फिर दुबारा तैयार हो जाती और अमन उसकी चूत में ही पानी निकालता चला जाता। वो 10:00 बजे तक अपनी चुदाई में बिजी रहते हैं। जब वहाँ अनुम आकर उनके पास बैठ जाती है, तब उन्हें होश आता है कि बहुत देर हो चुकी है।

अनुम अमन को देखते हुए-“अपनी जवान बीवी को भूल मत जाना…”

अमन उसकी चूची मसलते हुए-“तू कोई भूलने की चीज़ है क्या रानी?”

रजिया अपने चूत को सहलाते हुए नहाने बाथरूम में घुस जाती है। और अमन दूसरे बाथरूम में।

सुबह 11:00 बजे-

अमन टीवी देखते हुए नाश्ता कर रहा था। तभी आजतक न्यूज चैनेल पे उसे वो न्यूज दिखाई देती है, वो उसके हाथ से नाश्ते का निवाला गिरा देती है। जिसे सुनकर उसके पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक जाती है। और पास में बैठी रजिया जोर से चिल्लाते हुए ज़मीन पे गिर जाती है।

आजतक चैनेल पे न्यूज थी कि सऊदी से आने वाला इंडियन एयरलाइन्स का विमान 9126 क्रेश हो गया है। और उसमें बैठे सभी यात्रियों की मौत हो गई है। ये हादसा तब हुआ जब विमान (प्लेन) लैंडिंग के लिये उतर रहा था कि अचानक प्लेन का लैंडिंग गियर सिस्टम फेल होने से वो सीधा दूसरे खड़े प्लेन से जा टकराया।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ख़ान साहब और जमाल मलिक की मौत के 3 महीने बाद।

अमन और पूरे ख़ान परिवार के लिये ये वक्त बहुत मुश्किल था। दोनों परिवारों के मर्द दुनियाँ छोड़ चुके थे। सारी जिम्मेदारी अब अमन के कंधों पे थी और उसने ये बहुत अच्छे से निभानी थी।

महक के शौहर पाशा वापस आ चुके थे। पाशा ने अपनी फैक्टरी और शिमला वाला घर अमन को 3 करोण रूपये में बेच दिया। फैक्टरी का मालिक बनने के बाद अमन का सारा वक्त फैक्टरी और उससे जुड़े कामों में ही लगने लगा था। उसने पिछले 3 महीने से किसी को भी नहीं चोदा था। न जाने उसे क्या हो गया था। वो बस अपनी फैक्टरी और वहाँ से घर।

रजिया-समझ सकती थी कि अमन इस वक्त किस दौर से गुजर रहा है। जब किसी बच्चे के सिर से बाप का हाथ उठ जाता है, और उस बच्चे को पूरे परिवार की देख भाल करनी होती है। तब उस शख्स की वो हालत होती है, वही इस वक्त अमन की थी। बाप की मौत के बाद अमन के अंदर के मिचयोरिटी और काबिलियत सामने आई थी। उसे एहसास हुआ था कि घर की क्या-क्या जिम्मेदारियाँ होती हैं। दिन रात खानदान की औरतों को चोदने वाला अमन अब पूरी तरह बदल चुका था। अब उसे सेक्स पे काबू करना आ चुका था। उसके बात करने का अंदाज उसके रहन-सहन के तौर तरीके सब कुछ बदल चुके थे।

महक पाशा के साथ अमेरिका जा चुकी थी और साथ में अमन की निशानी भी साथ ले जा रही थी। उस बर्थ-डे वाली रात जब अमन ने महक और डाक्टर सानिया को चोदा था तो उसका ये असर हुआ था कि दोनों औरतें प्रेगनेंट हो गई थीं। महक बहुत खुश थी। उसकी जिंदगी की सबसे कीमती चीज़ उसे अमन से मिली थी।

वहीं डाक्टर सानिया भी अपने प्रेगनेंट होने से अमन का शुकिया अदा करती नहीं थकती थी। डाक्टर सानिया ने कई बार अमन से संपर्क करने की कोशिश की, पर अमन ने उससे दुबारा जिश्मानी संबंध नहीं बनाया।

अमन एक जानदार पठान था और पठानों की एक बात मशहूर है कि जिंदगी में कुछ ऐसा काम करो पठान कि जिस गली से गुजरो हर बच्चा कहे अब्बाजान, अब्बाजान, अब्बाजान।

रात 8:00 बजे-

जब अमन फैक्टरी से वापस घर आता है, वो सीधा अपने रूम में चला जाता है, और फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल पे आकर बैठ जाता है, वहाँ अनुम और रजिया उसका इंतजार कर रही थीं।

अमन खाना खाते हुये-“मैं सोच रहा था कि रेहाना और फ़िज़ा भी हमारे साथ रहेंगे। चाचू के जाने के बाद हमें उनका खयाल रखना पड़ेगा…”

रजिया-“आप सही कह रहे हैं। मैं कल रेहाना और फ़िज़ा को ये बात बता दूँगी…”

अमन खाना खाने लगता है।

अनुम उससे कुछ पूछना चाहती है, पर पूछ नहीं पाती। अमन के खाना खाकर अपने रूम में जाने के बाद अनुम रजिया से पूछती है-“अम्मी चाची और फ़िज़ा यहाँ रहेंगी तो फिर?”

रजिया उसकी बात समझ चुकी थी। वो अनुम को धीरे से बताती है कि रेहाना और फ़िज़ा अमन से चुद चुकी हैं, कई बार। ये सुनकर पहले अनुम को धक्का सा लगता है। पर रजिया उसे समझा देती है। और उसे समझ में भी आ जाती है बात कि अमन इस खानदान का मर्द है। उसका हम सभी औरतों पे पूरा-पूरा हक है।

अनुम-“तो क्या अमन खाला को भी चोद चुका है?”

रजिया-“मुझे नहीं पता? चल आज अमन से पूछते है…”

अनुम-तो क्या आज?

रजिया-हाँ।

उन दोनों की चूची ऊपर नीचे होने लगती है। आज पूरे 3 महीने हो गये हैं, अमन ने रजिया और अनुम को नहीं चोदा। एक प्यासी चूत कब तक खुद पे काबू रख सकती है?

वही हाल अमन का भी था। उसे भी शिद्दत से रजिया और अनुम चाहिए थी। पर वो खुद से बोलने से कतरा रहा था। कुछ देर बाद रजिया और अनुम अमन के रूम में दाखिल होती हैं। जब रजिया और अनुम दोनों अमन के रूम में दाखिल हुए तो अमन अपने बेड पे लेटा हुआ लैपटाप पे कुछ काम कर रहा था। वो दोनों को एकसाथ देखकर लैपटाप बंद करके साइड में रख देता है।

रजिया-अमन क्या कर रहे हो?

अमन-“कुछ खास नहीं बस थोड़ा ओफिस वर्क…”

अनुम अमन के बगल में बैठ जाती है। और रजिया दूसरी तरफ।

अमन खामोश था पर साँसें तीनों की तेज थीं।

रजिया-“अमन, मैं जानती हूँ कि वो हमारे साथ हुआ वो बहुत बुरा हुआ। मैं पिछले तीन महीने से देख रही हूँ कि तुम फैक्टरी जाते हो और फिर अपने रूम में बंद हो जाते हो। तुम अपने अब्बू का सपना पूरा करना चाहते हो पर एक सबसे बड़ी जिम्मेदारी वो तुम नहीं पूरी कर रहे हो उसके बारे में भी थोड़ा सोचो ना…”

अमन-वो क्या?

रजिया अमन का हाथ अपने पेट पे लगा देती है-“इसका… ये तुम्हारा खून, वो मेरी कोख में पल रहा है। इसे तुम्हारे प्यार की ज़रूरत है। और अनुम ये भी मेरी तरह तुमसे बहुत प्यार करती है। इसे तुमसे बे-इंतेहा प्यार चाहिए। अब तुम इस घर के मर्द हो और हमारे भी। अपनी दोनों बीवियों को प्यार करो ना… हम तुम्हारे प्यार के बिना जी नहीं पाएंगे अमन…” और अनुम और रजिया अमन के सीने पे सर रख देती हैं।

अमन उन दोनों का चेहरा अपने करीब करता है-“तुम सही कह रही हो रजिया। मैं सबसे अहम जिम्मेदारी नहीं निभा रहा था। अपनी दोनों बीवियों का खयाल रखना और अपने आने वाले बच्चे का भी। आज के बाद तुम्हें मैं किसी किश्म की शिकायत का मौका नहीं दूँगा…”

फिर दोनों औरतें अमन के होंठों से चिपक जाती हैं। वो कई महीने के प्यासी थीं और उनकी प्यास अमन अपनी जीभ उनके मुँह में डालकर बुझा रहा था। रजिया अनुम की नाइटी उतारने लगती है, और साथ में खुद भी नंगी हो जाती है।

अनुम अमन के सिर को चूमते हुये नीचे सरकती चली जाती है, और अंडरवेअर के पास पहुँचकर उसे नीचे उतार देती है। अमन का लण्ड थोड़ा टाइट था, बाकी उसे करना था। वो एक अच्छी बीवी की तरह अपने शौहर के लण्ड को अपने होंठों से चूमती है। और फिर उसपे जीभ फिराकर उसे अपने मुँह में भर लेती है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन रजिया को इशारे से अपने मुँह पे बैठने को कहता है, तो रजिया अपनी दोनों टाँगें खोलकर अमन के होंठों पे अपनी चूत लगा देती है। अमन अपनी लंबी जीभ को बाहर निकालकर रजिया की सूखी चूत में डालने लगता है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

रजिया की चूत कई दिनों के बाद अपने साजन के चूमने से सिहर उठती है, और उसमें चिंगारियाँ जलने लगती हैं-“उंह्म्मह… आह्म्मह… आह्म्मह… उंह्म्मह…”

अमन के दाँत रजिया की क्लटोरिस को कुरेदने लगते हैं, जिससे रजिया की चूत की फांकें पूरी तरह खुल सी जाती हैं। अमन बुरी तरह से रजिया की चूत चाट रहा था, क्योंकी उसके लण्ड को अनुम अपने गले तक उतार के चूस रही थी-अह्म्मह… आराम से कर अनुम अह्म्मह…”

अनुम-“नहीं, मुझे आज मत रोको ना जी… गलप्प्प-गलप्प्प उंन्ह… प्यासी है आपकी बीवी… गलप्प्प उंन्ह… पीने दो ना अपना पानी गलप्प्प…”

अमन-“मुझे पेशाब करके आने दे अह्म्मह…”

अनुम-“मेरे मुँह में करो अह्म्मह… मुझे पीना है…”

अनुम की ये बात सुनकर रजिया भी अमन के मुँह से उतरकर अमन के लण्ड के पास आ जाती है, और अमन के मूसल लण्ड को अनुम के मुँह से निकालकर अपने मुँह में भर लेती है-“गलप्प्प-गलप्प्प… अब मूतो जानू गलप्प्प…”

अनुम-“अम्मी मुझे भी पीना है। गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन-“अह्म्मह…” दोनों का सर पकड़कर पेशाब करने लगता है।

रजिया और अनुम बारी-बारी अपने मुँह में लण्ड डाल-डालकर अमन का सारा पेशाब पी जाती हैं-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

अमन का लण्ड खड़ा था और सामने दो चूतें उसका बेसब्री से इंतजार कर रही थीं।

रजिया अमन से कहती है कि अनुम की चूत में पहले डालो।

वो जानती थी कि अगर अमन झड़ गया तो उसके लण्ड को वो दुबारा खड़ा कर देगी और फिर दूसरी बार अमन जल्दी नहीं झड़ता। अनुभव हमेशा काम आता है।

 


अमन अनुम के पैर चौड़े करके उसे अपने कंधे पे रख लेता है, और रजिया अनुम के होंठ चूसने लगती है। अनुम को तो बस इंतजार था उस जोरदार धक्के का वो उसकी सोई हुई चूत को हमेशा के लिये जगा दे, और वो पूरा हो जाता है। क्योंकी अमन ने इतनी जोर से धक्का मारा था कि रजिया भी डर सी गई थी और अनुम सिसक उठी थी। ये डर उसे जिंदगी की सारी खुशियों से प्यारा था।

अनुम-“उंह्म्मह… अम्मी अह्म्मह…” वो सिसक रही थी और अमन आज पहली बार उसे बड़े प्यार से अपनी बीवी समझकर चोद रहा था। वो भी रजिया के साथ-साथ अनुम की एक चूची चूसने लगता है।

हमेशा औरतों को किसी बाजारू रंडी की तरह चोदने वाला अमन, आज अनुम को ऐसे अंदाज में चोद रहा था जैसे वो कोई काँच की बनी हुई चीज़ हो और अमन की जबरदस्ती से टूट सकती है।

अनुम अपनी कमर ऊपर उठा-उठाकर लण्ड को चूत की गहराईयों में ले रही थी-“अह्म्मह… उंह्म्मह… आह्म्मह… ऐसे ही… आ…आपका लण्ड मेरी बच्चेदानी को चुभ रहा है। आह्म्मह… अह्म्मह… अम्मी मेरी चूत उंह्म्मह…”

रजिया अनुम की चूची को मसलते हुये-“हाँ बेटी चोदने दे इन्हें, अपने गाण्ड ऐसे ऊपर उठा…” और रजिया अनुम की गाण्ड के नीचे हाथ डालकर उसे अमन के लण्ड की तरफ बढ़ाने लगती है।

अमन की रफ़्तार तेज होने लगी थी। वो अपनी जवान बहन, वो अब उसकी बीवी थी, उसकी चूत की अकड़न से मस्त होता जा रहा था। और अनुम इस दौरान एक बार झड़ चुकी थी, जिससे उसकी चूत बहुत चिकनी हो चुकी थी और अमन बड़ी आसानी से अपने लण्ड को उसकी चूत की गहराईयों में धकेलता चला जा रहा था। वो रजिया की चूची मसलता और रजिया अमन के आंड को मरोड़ती और तीनों अपनी नई जिंदगी का मज़ा लेते हुये बहुत खुश थे।

अनुम एक चीख के साथ अपनी गाण्ड ऊपर तक उठा लेती है। उसकी चूत से एक तेज धार बाहर निकलती है, जिसे अमन और रजिया दोनों मिलकर चाटने लगते हैं-“गलप्प्प-गलप्प्प…” अनुम का जिस्म झड़ने से और फिर इन दोनों का चाटने से बुरी तरह काँपने लगता है।

अमन का पानी नहीं निकला था और रजिया तैयार थी। वो जल्दी से अमन को अपने ऊपर खींच लेती है-“अह्म्मह डालो ना जी…”

अमन बिना देरी किए अपना मूसल लण्ड रजिया की चूत में डालने लगता है। दोनों माँ-बेटे एक दूसरे को बाहों में कसे हुए थे और अमन की गाण्ड ऊपर से और रजिया की गाण्ड नीचे से हिल रही थी। अमन जब भी रजिया को चोदता था उसे सबसे ज्यादा आनंद महसूस होता था। उसे हमेशा ये लगता कि जिस चूत से वो निकला था, उसी चूत को वो चोद रहा है-“अह्म्मह… रजिया मेरी जान अह्म्मह… मुझे तेरी इस चूत की बहुत याद आती है। अह्म्मह… अब मैं तुझे रोज चोदूंगा…”

रजिया-“हाँ, मैं भी बिना खाने के रह सकती हूँ, पर तुम्हारे लौड़े के बिना एक पल भी नहीं। हमारे बच्चे को तुम्हारे लौड़े के पानी की बहुत ज़रूरत है। आह्म्मह… आह्… जानू, मुझे रात दिन चोदो। हाँ, मैं डिलेवरी तक चुदना चाहती हूँ… ताकी आपका बच्चा आसानी से मेरी चूत से बाहर निकले उंन्ह…”

अमन हांफता हुआ-“अह्म्मह… हाँ रज्जो मेरी जानन्… मैं चोदूंगा आज से तुझे, हाँ दिन रात मेरी जान्… ऊऊओह्म्मह… तेरी चूत कभी भी तरसेगी नहीं मेरे लण्ड के लिये अह्म्मह…”

दोनों माँ-बेटे 30 मिनट तक एक दूसरे से चिपके अपने जिस्म की प्यास मिटाते हैं।

अनुम ये देखकर हैरान थी कि उसकी अम्मी अमन से कितना प्यार करती है। आज तक तो सिर्फ़ वो ये समझती थी कि वो ही अमन से सच्ची मोहब्बत करती है। पर इन दोनों की लगातार चुदाई और मोहब्बत भरी बातों से उसकी चूत की आग भड़कने लगती है, और वो दुबारा अमन के नीचे आना चाहती है।

पर अमन तो रजिया के होंठ उसकी चूची और चूत का दीवाना था। एक बार जब वो रजिया के ऊपर चढ़ जाता तो उसे बस रजिया दिखाई देती और कोई नहीं। ऐसे ही जबरदस्त चुदाई की वजह से रजिया और अमन दोनों एक साथ झड़ने लगते हैं, और एक दूसरे को चूमते चले जाते हैं।

अमन का लण्ड जब रजिया की चूत से बाहर निकलता है तो अनुम उसपे टूट पड़ती है। वो काफी देर से इन दोनों की चुदाई से पनिया गई थी। वो अपनी दोनों चुचियों के बीच में अमन के लण्ड को लेकर आगे पीछे करने लगती है।

अमन-“अह्म्मह… तू सच में पागल हो गई है अनुम…”

अनुम-“हाँ, आपकी बीवी आपके प्यार में पागल है…” और वो अमन के लण्ड पे अपना सलाइवा गिराकर उसे अपने मुँह में डाल लेती है। अमन के लण्ड पे रजिया की चूत का पानी भी लगा हुआ था जिसे चाट-चाटकर अनुम को और मज़ा आने लगता है-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…” वो अमन के लण्ड को 10 मिनट में ही फिर से तैयार कर देती है।

अमन पानी पीने के लिये किचिन की तरफ चला जाता है। अनुम और रजिया एक दूसरे की बाहों में चिपकी हुई थीं तभी रजिया अनुम की गाण्ड पे हाथ फेरती है-“यहाँ लेगी क्या अनुम?”

अनुम चौंकते हुये-“नहीं अम्मी, मेरी छोटी से गाण्ड में इनका लण्ड कैसे जाएगा?”

रजिया अपनी एक उंगली उसकी गाण्ड में डाल देती है। जिससे अनुम अपनी गाण्ड ऊपर उछालने लगती है।

अनुम-“उंह्म्मह… अम्मी क्या कर रहे हैं आप?”

रजिया-“बेटी, हमारे जानू को गाण्ड मारने का बहुत शौक है। वो तो अक्सर मेरी लेते हैं। पीछे से तू भी लेकर देख, तू भी दीवानी हो जाएगी…”

अनुम-“उंन्ह… अम्मी दर्द होगा ना?”

रजिया-“बेटी, जब तक एक औरत अपने शौहर का लौड़ा अपने तीनों सुराखों में नहीं लेती, वो पूरी तरह से अपने शौहर की नहीं होती…”

अनुम-सच्ची अम्मी।

रजिया-“हाँ बेटी… ला मैं तेरी गाण्ड की तेल से पहले मालिश कर देती हूँ…” और रजिया सामने पड़ी हुई तेल की बोटेल से तेल निकालकर अनुम की गाण्ड की अच्छे से मालिश करने लगती है। वो दो उंगालियाँ तेल में भिगा के उसकी गाण्ड में डाल देती है। पच्च के आवाज़ के साथ दोनों उंगलियाँ अनुम की गाण्ड की दीजारें चीरती हुई अंदर चली जाती हैं।

 
Happy new year Dosto

 
अनुम को एक नया सा एहसास होने लगता है-“उंन्ह… ओह्म्मह… अम्मी आपकी दो उंगलियों ने मेरी गाण्ड में दर्द कर दिया है, तो उनका कैसे? अह्म्मह…”

वो कुछ बोलने वाली थी कि अमन का जोर का थप्पड़ अनुम की गाण्ड पे पड़ता है। अनुम मारे दर्द के औउच… करती हुई अमन की तरफ देखने लगती है। वो अमन की तरफ बढ़ने वाली थी कि रजिया और अमन दोनों मिलकर अनुम की गाण्ड पे थप्पड़ों की बरसात कर देते हैं। पूरे रूम में सटासट-सटासट की आवाज़ें गूँजनी लगती है।

और अनुम चिल्लाने लगती है-“उंह्म्मह… आह्म्मह… उंह्म्मह मेरी गाण्ड उंन्ह… अह्म्मह…”

अमन-“बोल लेगी ना मेरा गाण्ड में सटासट…”

अनुम-“हाँ लूँगी ना अह्म्मह… डाल दो मेरी छोटी सी गाण्ड में आपका मूसल ऊिह उंह्म्मह…”

रजिया अमन के लण्ड पे भी तेल लगा देती है, और अनुम को डागी स्टाइल में करके अमन के लण्ड को अनुम की गाण्ड पे रगड़ने लगती है।

अनुम-“अह्म्मह… ओह्म्मह…” करके सिसक उठी थी।

अमन-“अनुम, पहले थोड़ा दर्द होगा, तू बर्दाश्त कर लेगी ना?”

अनुम-“हाँ जानू, आपका हर दर्द मुझे कुबूल है। मेरी फिकर ना करो बस डाल दो…” कहीं ना कहीं अनुम का भी दिल अमन के लण्ड को अपनी गाण्ड में लेने का हो रहा था। ऊपर से रजिया की बात उसे याद आ रही थी। वो अमन की थी और उसे इस बात का सबूत देना था।

अमन अपने लण्ड को अनुम की छोटी सी गाण्ड के सुराख पे लगाकर धकेलने लगता है-“अह्म्मह… ऊऊह्म्मह… रजिया, अनुम की बहुत छोटी है…” वो रजिया की तरफ देखते हुये कहता है।

रजिया-“तो क्या मैं मोहल्ले वालों से गाण्ड मरवाती थी? जब पहली बार आपने मेरी गाण्ड मारी थी तब मेरी भी ऐसी ही छोटी थी। देर मत करो और लगा दो मोहर…”

अमन की आँखें लाल हो गई थीं। वो दोनों हाथों से अनुम को पतली सी कमर पकड़कर पूरी ताकत से लण्ड अंदर पेलने लगता है। उसे कोई परवाह नहीं थी कि अनुम कितनी जोर से चिल्ला रही है।

रजिया-अनुम की दोनों चूची, वो नीचे हवा में लटक रही थी, अपने हाथों में लेकर सहलाने लगती है, और अनुम के होंठ चूसने लगती है। जिससे अनुम को दर्द का एहसास ना हो।

अमन गपागप अपना लण्ड अनुम की गाण्ड में पेलने लगता है। पहले-पहले उसे थोड़ी रुकावट का सामना करना पड़ा, पर थोड़ी देर बाद बड़ी आसानी से अमन अनुम की गाण्ड मार रहा था और उसे इसमें बहुत मज़ा भी आ रहा था-“अह्म्मह… ऊहूँ अह्म्मह… तेरी गाण्ड भी रजिया की तरह है अनुम अह्म्मह… मेरी जवान बीवी तेरी माँ को चोदूं अह्म्मह… ले ले अपने मर्द का लण्ड… तेरी गाण्ड पे भी मेरी मोहर लग गई है। अह्म्मह…”

उस रात अमन ने अनुम को एक बार और रजिया को दो बार और चोदा। उनकी चुदाई सुबह के 6:00 बजे तक चली। दोनों औरतें अमन की छाती से चिपकी सो गईं।

सुबह 8:00 बजे-

अमन की आँख फोन के बजने से खुल जाती है। जब वो फोन रिसीव करता है, तो खामोश सा हो जाता है। दूसरी तरफ अमन के मामू थे। वो अमन से कहते हैं कि दिलावर ख़ान, अमन के नानू की तबीयत रात में खराब हो गई थी। इसलिये उन्हें हॉस्पीटल लाना पड़ा। इसलिये अमन को हॉस्पीटल बुला रहे थे। उन्होंने कहा कि ये बात रजिया और अनुम को ना बताई जाए। वो लोग पहले ही परेशान हैं।

अमन-फ्रेश होकर हॉस्पीटल के लिये निकलने लगता है।

अनुम और रजिया बेड पे पड़ी थीं। दोनों जाग चुकी थी और अमन को ऐसे जल्दी में जाता देखकर रजिया पूछ बैठीं-“सुनिए, कहाँ जा रहे हैं आप?

अमन-“वो फैक्टरी में कुछ अर्जेंट काम है। मैं अभी आता हूँ…” और वो कार की चाबियाँ लेकर हॉस्पीटल के लिये निकल जाता है।

रजिया और अनुम एक दूसरे से अभी भी नंगी चिपकी हुई थीं।

अनुम-“अम्मी, मैं प्रेग्गनेन्सी की टेबलेट लेना बंद कर दूं?”

रजिया उसे सहलाते हुए-“नहीं बेटी अभी नहीं। जल्द ही तू भी उनके बच्चे की माँ बनेगी। पर हमें कोई जल्दबाज़ी नहीं करनी है, जिससे हमारे खानदान का नाम खराब हो। तू समझ रही है ना?”

अनुम-? ज…जी अम्मी। आप मेरी सबसे अच्छी अम्मी हैं…”

रजिया-“हाँ, और तू मेरी बहू भी है और सौतन भी…” दोनों हँसते हुए एक दूसरे को चूमते चली जाती हैं, और ये लेज्बियन सेक्स अगले दो घंटे तक चलता रहता है।

जब अमन हॉस्पीटल पहुँचता है। तो उसे उसके मामू बाहर मिलते है। वो अमन को बताते हैं कि अब नानू की तबीयत ठीक है। रात में हीना, अमन की खाला आ गई थी। अमन रूम की तरफ बढ़ जाता है, वहाँ दिलावर ख़ान थे। वो दरवाजे तक पहुँचा ही था कि उसके पैर कुछ ऐसी आवाज़ सुनकर रुक से गये।

दिलावर ख़ान-“हीना, मेरी बच्ची, मेरी जान, मैंने तेरे लिये कुछ नहीं किया। वो हुआ वो सब किस्मत का खेल था…”

हीना-“अब्बू, अपने मुझे शीबा देकर मुझ पे बहुत बड़ा एहसान किया है। वरना मेरी कोख हमेशा सूनी रहती। शीबा के अब्बू तो मुझे तलाक देना चाहते थे। पर अगर उस वक्त आप मुझे माँ नहीं बनाते तो आज मैं मर गई होती…”

 
दिलावर ख़ान-अपने आँसू पोछते हुये-“वो हुआ वो राज हमारे बीच है। वो किसी को पता नहीं चलना चाहिए…”

हीना-“जी अब्बू, पर एक भांजा अपनी खाला के साथ शादी कैसे?”

दिलावर ख़ान-“शीबा को तूने जनम दिया है। हाँ ये बात और है कि तुझे प्रेग्गनेंट मैंने किया था। पर वो अमन की खाला नहीं, बल्की कजिन हुई। तू क्यूँ फिकर करती है? ये बात सिर्फ़ तू और मैं जानते हैं…”

अमन खांसता हुआ रूम में दाखिल होता है। उसे देखकर दोनों अपनी बात बदल देते हैं। दिलावर ख़ान का हाल चाल पूछने के बाद उनसे इधर-उधर की बातें करने के एक घंटे बाद अमन उनसे घर जाने की इजाजत लेता है।

दिलावर ख़ान-“अच्छा बेटा तुम जाओ, तुम्हारे मामू ने खामखाह तुम्हें तकलीफ दी सुबह-सुबह…”

अमन दिल में-“अगर वो मुझे तकलीफ ना देते तो इतना बड़ा राज मुझे कैसे पता चलता?” और वो बाहर जाने लगता है।

तभी दिलावर ख़ान उसे कहते हैं के हीना को भी साथ ले जाओ ये बेचारी भी कल रात से मेरी खिदमत कर रही है।

फिर अमन हीना को लेकर घर की तरफ निकल जाता है। वो पूरे रास्ते हीना से बात नहीं करता। जब अमन हीना के घर पहुँचा तो सुबह के 10:00 बज रहे थे। शीबा ट्यूशन जा चुकी थी। अमन सोफे पे बैठ जाता है। और हीना उसके पास आकर बैठ जाती है।

हीना-क्या बात है अमन बेटा, चुप-चुप सा है?

अमन हीना की आँखों में घुरते हुये देखता है और कहता है-“खाला, मैं ये शादी नहीं कर सकता…”

अमन की ये बात हीना के पैरों के नीचे के ज़मीन खिसका देती है। उसे अपने कानों पे यकीन नहीं होता कि अमन ऐसा कैसे कह सकता है-“अमन बेटा, क्या हुआ? क्या कोई गलती हुई मुझसे या शीबा से? तुम ऐसा क्यूँ कह रहे हो बेटा? बोलो, जवाब दो तुम शादी से इनकार कैसे कर सकते हो अमन बेटा?” बेबसी और उलझन के मिले जुले असर हीना के चेहरे पे साफ बयान हो रही थी।

अमन-शीबा किसकी बेटी है?

हीना-“क्या मतलब?” उसके माथे की शिकन बता रही थी कि वो बात समझने लगी थी। वो काँपते होंठों से सिर नीचे झुकाकर धीमी आवाज़ में अमन से कहती है-“मेरी…”

अमन-“मैंने पूछा उसका बाप कौन है?” अमन की गुर्राने वाली आवाज़ मानो ऐसी लग रही थी जैसे कोई शेर जंगल में अपनी हुकूमत जताने के लिये दहाड़ रहा हो। जब हीना कोई जवाब नहीं देती तो वो उसके बाल पकड़कर खींचता है-“हराम की औलाद है क्या शीबा?”

हीना से ये जुमला ना-काबिल-ए-बर्दाश्त था। पर अमन का गुस्सैल चेहरा उसे अंदर तक डरा चुका था। उसने इससे पहले अमन का ये रूप नहीं देखा था। वो रो पड़ती है।

अमन उसके बाल छोड़ देता है, और उसके सामने बैठ जाता है। हीना काफी देर सिसकती रहती है। पर अमन उसे नहीं समझता।

जब आश्चय़ वाले बादल छट जाते हैं, तब हीना थोड़ा अच्छा महसूस करती है, और अपना चेहरा ऊपर उठाती है। उसे पता चल चुका था कि अमन शायद उसकी और दिलावर ख़ान के बीच की बात सुन चुका है। और ये उसी अमन का रेडी अमन है।

अमन उसे अपने चेहरे को ताकता देखकर फिर से पूछता है-“खाला, शीबा किसकी बेटी है?”

हीना-“तुम जानते हो अमन वो किसकी बेटी है। तो क्यूँ पूछ रहे हो?” अगर तुम सुनना ही चाहते हो तो सुनो… वो तुम्हारे नाना जान की बेटी है…”

अमन वहाँ से जाने के लिये खड़ा हो जाता है। पर हीना की आवाज़ उसके पैर रोक देती है।

हीना-“जब तुम्हें ये राज पता चल ही गया है, तो ये नहीं जानना चाहोगे कि मैंने ऐसा क्यूँ किया?”

अमन ताना देने के अंदाज में-“खाला, जिस्म की हवस इंसान को जानवर बना देती है…”

 
Back
Top