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Guest
हीना बुरी तरह गुस्से में आ जाती है। आख़िरकार अमन ने उसके करक्टर को लेकर ताना दिया था-“मैं कोई बाजारू औरत नहीं हूँ अमन, वो तुम मुझे ऐसे कह रहे हो। मेरी मजबूरी थी। मैं जिस्म की हवस मिटने के लिये तुम्हारे नाना के नीचे नहीं सोई थी…”
अमन-“खाला, क्या वजह हो सकती है? ज़रा मैं भी तो सुनूं…”
हीना-“तुम सुनना चाहते हो ना तो सुनो…”
ये आज से 19 साल पहले की बात है। मेरी शादी को पूरा एक साल हो चुका था, पर मुझे कोई औलाद नहीं थी। तुम्हारे खालू मुझे प्यार करते थे, पर उस प्यार में वो दम नहीं था वो एक औरत को माँ बना दे। एक दिन मैंने तुम्हारे खालू की अम्मी, मेरी सास को ये कहते हुए सुना कि मैं बांझ हूँ और वो तुम्हारे खालू की दूसरी शादी करवाना चाहती हैं। ये बात मुझे अंदर तक तोड़ गई। मेरी मोहब्बत, मेरा भरोसा वो मैं तुम्हारे खालू पे करती थी वो खतम हो गया।
मैं अपने मायके चली गई वहाँ तुम्हारे नाना ने मुझे बहुत समझाया कि मैं समझदारी से काम लूँ। उस वक्त तुम्हारी नानी भी जिंदा थी। मुझे अच्छी तरह याद है। उस रात मैं अपने रूम में सोई हुई थी। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक मुझे किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
मैंने जब सामने देखा तो तुम्हारी नानी और नाना मेरे सामने खड़े थे। उस रात तुम्हारी नानी ने मेरे पूरे जिस्म की मालिश की और मुझे नहलाया भी। उसके बाद जब मैं रूम में आई तो पूरा रूम फूलों की पंखुड़ियों से सज़ा हुआ था और बेड पे भी ढेर सारे फूल थे।
मैंने अम्मी यानी तुम्हारी नानी से पूछा कि ये सब क्या है?
तब उन्होंने मुझसे वो बात कही वो मैंने ख्वाब में भी नहीं सोची थी। उन्होंने मुझसे कहा कि आज से लेकर पूरे अगले 15 दिनों तक मैं और तुम्हारे नाना यहीं इस रूम में रहेंगे, बिना कपड़ों के। कोई हमें परेशान नहीं केरेगा और इन 15 दिनों में तुम्हारे नाना मुझे प्रेगनेंट करेंगे। और 16 वें दिन वो मुझे मेरी ससुराल छोड़कर आएंगे, वहाँ मुझे कुछ रातें अपने शौहर, यानी कि तुम्हारे खालू के साथ गुजारनी होंगी। उसके बाद उन्हें ये एहसास दिलाना होगा कि तुम्हारे खालू ने मुझे प्रेगनेंट किया है।
अमन ये सब सुनकर एकदम खामोश हो चुका था। उसका गुस्सा गायब हो चुका था और एक नया बदलाव ये हुआ था कि उसका लण्ड पैंट में तंबू हो गया था। वो सोफे पे बैठ जाता है, और हीना का हाथ पकड़कर उसे अपने पास खींच लेता है। और पूछता है-आगे क्या हुआ?
हीना-मतलब… मैं प्रेगनेंट कैसे हुई?
अमन-“सब कुछ साफ-साफ सुनना है मुझे, तभी मैं अपना फैसला बदलने के बारे में सोचूँगा…”
अमन की आवाज़ हीना की समझ में आ चुकी थी। वो जान गई थी कि अमन क्या सुनना चाहता है? और वो भी उसे सब कुछ खुलकर बताना चाहती थी। पर इस वक्त शीबा के आने का वक्त हो गया था। वो अमन की आँखों में देखती है, और धीरे से कहती है-“अगर तुम सब सुनना चाहते हो तो तुम्हें आज रात यहाँ आना होगा। मैं तुम्हें सब कुछ सच-सच बताऊँगी कि कैसे मैंने अपनी जिंदगी के वो 15 दिन काटे? अभी शीबा आती ही होगी…”
अमन कुछ सोचते हुए-“ठीक है। मैं रात 8:00 बजे आऊँगा और साथ में नींद की टेबलेट भी लाऊँगा, ताकी तुम शीबा को सुलाकर मुझे अच्छे से सुना सको…” दोनों के आँखों में एक अजीब सी चमक थी और दिल-ए-नादान भी धड़कना भूलकर मचलने लगा था।
हीना उससे कहती है-तुम क्या सब कुछ सुनना चाहते हो?
अमन-हाँ।
हीना-“मुझमें कई राज हैं बतलाऊँ क्या? मुद्दतों से बंद हूँ, खुल जाऊँ क्या?”
अमन मुस्कुराता हुआ वहाँ से चला जाता है, और हीना को एक नया दर्द दे जाता है। उसे ये एहसास तो हो गया था कि शायद अमन अब शीबा से शादी के लिये इनकार ना करे। पर अब उसे एक और डर सताने लगा था कि कहीं अमन सब सुनने के बाद??
अमन-“खाला, क्या वजह हो सकती है? ज़रा मैं भी तो सुनूं…”
हीना-“तुम सुनना चाहते हो ना तो सुनो…”
ये आज से 19 साल पहले की बात है। मेरी शादी को पूरा एक साल हो चुका था, पर मुझे कोई औलाद नहीं थी। तुम्हारे खालू मुझे प्यार करते थे, पर उस प्यार में वो दम नहीं था वो एक औरत को माँ बना दे। एक दिन मैंने तुम्हारे खालू की अम्मी, मेरी सास को ये कहते हुए सुना कि मैं बांझ हूँ और वो तुम्हारे खालू की दूसरी शादी करवाना चाहती हैं। ये बात मुझे अंदर तक तोड़ गई। मेरी मोहब्बत, मेरा भरोसा वो मैं तुम्हारे खालू पे करती थी वो खतम हो गया।
मैं अपने मायके चली गई वहाँ तुम्हारे नाना ने मुझे बहुत समझाया कि मैं समझदारी से काम लूँ। उस वक्त तुम्हारी नानी भी जिंदा थी। मुझे अच्छी तरह याद है। उस रात मैं अपने रूम में सोई हुई थी। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। अचानक मुझे किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
मैंने जब सामने देखा तो तुम्हारी नानी और नाना मेरे सामने खड़े थे। उस रात तुम्हारी नानी ने मेरे पूरे जिस्म की मालिश की और मुझे नहलाया भी। उसके बाद जब मैं रूम में आई तो पूरा रूम फूलों की पंखुड़ियों से सज़ा हुआ था और बेड पे भी ढेर सारे फूल थे।
मैंने अम्मी यानी तुम्हारी नानी से पूछा कि ये सब क्या है?
तब उन्होंने मुझसे वो बात कही वो मैंने ख्वाब में भी नहीं सोची थी। उन्होंने मुझसे कहा कि आज से लेकर पूरे अगले 15 दिनों तक मैं और तुम्हारे नाना यहीं इस रूम में रहेंगे, बिना कपड़ों के। कोई हमें परेशान नहीं केरेगा और इन 15 दिनों में तुम्हारे नाना मुझे प्रेगनेंट करेंगे। और 16 वें दिन वो मुझे मेरी ससुराल छोड़कर आएंगे, वहाँ मुझे कुछ रातें अपने शौहर, यानी कि तुम्हारे खालू के साथ गुजारनी होंगी। उसके बाद उन्हें ये एहसास दिलाना होगा कि तुम्हारे खालू ने मुझे प्रेगनेंट किया है।
अमन ये सब सुनकर एकदम खामोश हो चुका था। उसका गुस्सा गायब हो चुका था और एक नया बदलाव ये हुआ था कि उसका लण्ड पैंट में तंबू हो गया था। वो सोफे पे बैठ जाता है, और हीना का हाथ पकड़कर उसे अपने पास खींच लेता है। और पूछता है-आगे क्या हुआ?
हीना-मतलब… मैं प्रेगनेंट कैसे हुई?
अमन-“सब कुछ साफ-साफ सुनना है मुझे, तभी मैं अपना फैसला बदलने के बारे में सोचूँगा…”
अमन की आवाज़ हीना की समझ में आ चुकी थी। वो जान गई थी कि अमन क्या सुनना चाहता है? और वो भी उसे सब कुछ खुलकर बताना चाहती थी। पर इस वक्त शीबा के आने का वक्त हो गया था। वो अमन की आँखों में देखती है, और धीरे से कहती है-“अगर तुम सब सुनना चाहते हो तो तुम्हें आज रात यहाँ आना होगा। मैं तुम्हें सब कुछ सच-सच बताऊँगी कि कैसे मैंने अपनी जिंदगी के वो 15 दिन काटे? अभी शीबा आती ही होगी…”
अमन कुछ सोचते हुए-“ठीक है। मैं रात 8:00 बजे आऊँगा और साथ में नींद की टेबलेट भी लाऊँगा, ताकी तुम शीबा को सुलाकर मुझे अच्छे से सुना सको…” दोनों के आँखों में एक अजीब सी चमक थी और दिल-ए-नादान भी धड़कना भूलकर मचलने लगा था।
हीना उससे कहती है-तुम क्या सब कुछ सुनना चाहते हो?
अमन-हाँ।
हीना-“मुझमें कई राज हैं बतलाऊँ क्या? मुद्दतों से बंद हूँ, खुल जाऊँ क्या?”
अमन मुस्कुराता हुआ वहाँ से चला जाता है, और हीना को एक नया दर्द दे जाता है। उसे ये एहसास तो हो गया था कि शायद अमन अब शीबा से शादी के लिये इनकार ना करे। पर अब उसे एक और डर सताने लगा था कि कहीं अमन सब सुनने के बाद??