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***** *****वेलेनटाइन डे
सुबह के 8:00 बजे-
अमन और अनुम नाश्ता कर रहे थे। आज उनका दिल-ओ-दिमाग़ किसी खाने पीने की चीज़ में नहीं था। क्योंकी उन्हें शिमला जाना था और जल्दी जाना था। इसलिये वो जल्दी जल्दी नाश्ता खत्म कर रहे थे।
रजिया-“अनुम, मैं ज़रा रेहाना को बताकर आती हूँ की हम अमन के दोस्त की शादी अटेंड करने शिमला जा रहे हैं, घर का खयाल रखे।
अनुम-“जी अम्मी, जल्दी आइए हम आपका कार में इंतजार कर रहे हैं…”
रजिया रेहाना की तरफ चली जाती है। उसे पता था कि अगर उसने अमन को रेहाना की तरफ भेजा तो वो पहले उससे चुदवाएंगे और फिर शिमला आने की जिद करेंगे। ये रजिया कभी नहीं चाहती थी। रेहाना को इनफाम़ करने के बाद रजिया घर बंद करके कार में आकर बैठ जाती है। वहाँ पहले से अमन और अनुम उसका इंतजार कर रहे थे।
अमन-चलें स्वीट हार्ट?
दोनों औरतें-“चलिये…” और कार अपने स्पीड से शिमला की तरफ रवाना हो जाती हैं।
अनुम-“अम्मी, लाओ आपके हाथों में मेंहदी लगा दूं…” और वो रजिया के हाथों में मेंहदी लगाने लगती हैं।
दो घंटे का सफर था। इस दौरान अनुम पहले रजिया को और फिर खुद के हाथों पैरों में मेंहदी लगा चुकी थी। उसके सारे अरमान आज पूरे होने वाले थे। एक लड़की जब औरत बनती है, तो ये खुशी सिर्फ़ वही जानती हैं,
जिसके साथ ये सब होता है। हम और आप नहीं। शिमला पहुँचकर अमन कार एक ‘लाडली दुल्हन’ नाम की शाप के सामने रोक देता है। इस शाप में शादी की सारे चीज़ें मिलती थीं।
अमन-“तुम दोनों यहीं बैठो, मैं तुम दोनों की चीज़ें लेकर आता हूँ…”
अनुम-मैं चलूं?
रजिया-“नहीं, आज सब इनकी पसंद से होगा यहीं बैठो…”
फिर अमन मुस्कुराते हुए शाप में चला जाता है। करीब एक घंटा बाद वो 5 बैग्गस भरकर वापस आता है। और कार में रख देता है।
अनुम और रजिया एक-एक बैग खोल-खोलकर देखने लगती हैं। रजिया बोली-“सभी चीज़ें बहुत अच्छी हैं। पर आप लहंगा और ब्लाउज लेना भूल गये। सिर्फ़ लाल रंग से साड़ी है, इसमें ना ब्रा है, ना पैंटी…”
अमन-“तुम दोनों को मैं जिस चीज़ में देखना चाहता हूँ, बस वही लाया हूँ। और जैसे भी होटेल के रूम में तुम दोनों ये भी उतारने वाले हो…”
दोनों औरतें बुरी तरह शरमा जाती हैं।
अमन अनुम और रजिया को होटेल के रूम में पहुँचाकर काजी की तरफ चल देता है। अमन शिमला कई बार आ चुका था, इसलिये उसे यहाँ के सारे रोड मालूम थे। वो एक काजी से मिलता है, जिसका नाम मिर्ज़ा असद बेग था।
अमन-“काजी साहब हम लोग बिहार के रहने वाले हैं। हमारे गाँव में बढ़ आ गई थी सभी घर बह गए कई जाने गयीं। हम किसी तरह यहाँ तक पहुँच सके। मेरे साथ मेरी मंगेतर और एक गाँव की औरत है, वो अब बेसहारा है। मैं इन्हें ऐसे अपने साथ नहीं रख सकता, इसलिये मेरा इन दोनों से आप निकाह करवा दें, ताकी मैं इन्हें अपने साथ रख सकूँ…”
उस वक्त बिहार में सच में बाढ़ आई हुई थी।
काजी असद इस बात से बहुत खुश हुए कि अमन एक जिम्मेदार इंसान की तरह रहना चाहता है। वरना आजकल के जमाने में कौन इतनी अच्छी सोच रखता है।
काजी साहब-“ठीक है बेटा चलो…” और काजी साहब अपने साथ दो और आदमियों को लेकर जिनकी निकाह में ज़रूरत पड़नी थी, अमन के साथ होटेल पहुँच जाते हैं।
इधर रजिया बाथरूम में अनुम की चूत के सारे बाल निकालने के बाद उसकी तेल से मालिश करती है।
अनुम-“अम्मी आप भी तैयार हो जाओ, वो लोग आते ही होंगे…”
रजिया अनुम की चिकनी चूत को देखते हुए उसे अपने होंठों से छूना चाहती थी। तभी अनुम रजिया को रोक देती है-“नहीं अम्मी, इसपे सबसे पहला हक उनका है…” और वो रजिया को अपने सीने से चिपका लेती है।
30 मिनट बाद अमन काजी और दो आदमियों के साथ रूम में दाखिल होता है। रजिया और अनुम ने अभी नॉर्मल ड्रेस पहना हुआ था ताकी काजी को शक ना हो जाये।
काजी साहब रजिया और अनुम से निकाहनामे पर दस्तखत लेते हैं, और फिर पहले अनुम से पूछते है-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”
अनुम की आँखों के सामने अपने बचपन से अब तक का सारा मंज़र कुछ सेकेंड में घूम जाता है। वो धीमी आवाज़ में काजी से कहती है-“कुबूल है…”
उसके बाद रजिया से काजी साहब पूछते हैं-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”
रजिया-“जी हाँ, कुबूल किया…”
उसके बाद काजी साहब अपनी सारी जरूरी फामेलिटी पूरी करते है। वो अमन से भी अनुम और रजिया को कुबूल करवाते हैं।
और अमन भी खुशी-खुशी दोनों को अपने निकाह में कुबूल कर लेता है।
काजी साहब और वो दोनों आदमी अमन को मुबारकबाद देते हुए चले जाते हैं।
उन दोनों के जाने के बाद अमन रूम का दरवाजा बंद कर देता है। रूम का दरवाजा बंद होते ही अनुम और रजिया भागते हुए आकर अमन से चिपक जाती हैं।
रजिया-“मुबारक हो मेरे सरताज मुआहन्ह…”
अनुम-“मुबारक हो मेरी जान मैं बहुत बहुत-बहुत खुश हूँ आज कि आपने अपना वादा पूरा किया। मैं आज से आपकी हुई मुआह्म्मह…”
अमन दोनों को अपने से कसकर चिपका लेता है। अच्छा सुनो-“अभी रात के 7:00 बज रहे हैं। तुम दोनों तैयार हो जाओ और वो मैं तुम्हारे लिये ड्रेस लाया हूँ, उसे पहन लो और मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ…”
अमन-“रजिया, तुझे मैंने वो कहा था याद है ना?”
रजिया-“जी आप बिल्कुल फिकर ना करें…”
और अनुम अपना चेहरा शरमाकर रजिया के सीने में छुपा लेती है। दोनों औरतें एक रूम में चली जाती हैं। रजिया पूरे रूम में स्प्रे मारती है। बेड पे गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछा देती है, और अनुम का हल्का-हल्का मेकअप करती है। उसके बाद वो खुद भी लाल साड़ी पहन लेती है, बिना ब्रा-पैंटी के और लहंगे ब्लाउज के अलाजा सिर्फ़ एक लाल साड़ी अपने जिस्म पे लपेटने में उसे आज एक नया खुशगवार एहसास हो रहा था। उसके जिस्म से बार-बार साड़ी निकल जा रही थी। वो अपने काँपते हाथों से साड़ी पहन ही लेती है।
वो खुद से ज्यादा अनुम को तैयार कर रही थी। वो जानती थी कि ये रात अनुम की जिंदगी की ना भूलने वाले रात बन जाएगी, जिसे वो पूरी तरह खूबसूरत बनाने वाले थे।
अनुम-“अम्मी, मैं कैसी लग रही हूँ?” अनुम खुद को आईने के सामने देखते हुए कहा।
रजिया-“एकदम आसमान की परी जैसे…” अब चलो यहाँ बेड पे बैठ जाओ ऐसे, और वो अनुम को बेड पे बिठा देती है, उसके सर पे घूँघट डाल देती है। फिर खुद भी उसके बगल में घूँघट डालकर बैठ जाती है।
रजिया जोर से आवाज़ लगते हुए-“सुनिये, आप आ जाइए…”
अमन वो उस रूम से अटैच्ड रूम में एक नई नवेली शेरवानी पहने खुद को आईने में देख रहा था, रजिया की आवाज़ से खुश हो जाता है। जाने कितने दिनों से उसके दिल में एक ख्वाइश थी कि वो अपनी अम्मी और बहन को दुल्हन के रूप में एक बेड पे लाल साड़ी पहने घूँघट डाले देखे। आज वो पल आ गया था। वो धड़कते दिल के साथ रूम में दाखिल होता है।
अमन रूम में पहुँचकर दरवाजा बंद कर देता है। आज उसका दिल उसके बस में नहीं था। ऐसा नज़ारा उसकी आँखों ने पहली बार देखा था। एक बेड पे उसकी अपनी सगी अम्मी और बहन उसका बेसबरी से इंतजार कर रही थीं। अमन जाकर बेड पर बैठ जाता है।
सुबह के 8:00 बजे-
अमन और अनुम नाश्ता कर रहे थे। आज उनका दिल-ओ-दिमाग़ किसी खाने पीने की चीज़ में नहीं था। क्योंकी उन्हें शिमला जाना था और जल्दी जाना था। इसलिये वो जल्दी जल्दी नाश्ता खत्म कर रहे थे।
रजिया-“अनुम, मैं ज़रा रेहाना को बताकर आती हूँ की हम अमन के दोस्त की शादी अटेंड करने शिमला जा रहे हैं, घर का खयाल रखे।
अनुम-“जी अम्मी, जल्दी आइए हम आपका कार में इंतजार कर रहे हैं…”
रजिया रेहाना की तरफ चली जाती है। उसे पता था कि अगर उसने अमन को रेहाना की तरफ भेजा तो वो पहले उससे चुदवाएंगे और फिर शिमला आने की जिद करेंगे। ये रजिया कभी नहीं चाहती थी। रेहाना को इनफाम़ करने के बाद रजिया घर बंद करके कार में आकर बैठ जाती है। वहाँ पहले से अमन और अनुम उसका इंतजार कर रहे थे।
अमन-चलें स्वीट हार्ट?
दोनों औरतें-“चलिये…” और कार अपने स्पीड से शिमला की तरफ रवाना हो जाती हैं।
अनुम-“अम्मी, लाओ आपके हाथों में मेंहदी लगा दूं…” और वो रजिया के हाथों में मेंहदी लगाने लगती हैं।
दो घंटे का सफर था। इस दौरान अनुम पहले रजिया को और फिर खुद के हाथों पैरों में मेंहदी लगा चुकी थी। उसके सारे अरमान आज पूरे होने वाले थे। एक लड़की जब औरत बनती है, तो ये खुशी सिर्फ़ वही जानती हैं,
जिसके साथ ये सब होता है। हम और आप नहीं। शिमला पहुँचकर अमन कार एक ‘लाडली दुल्हन’ नाम की शाप के सामने रोक देता है। इस शाप में शादी की सारे चीज़ें मिलती थीं।
अमन-“तुम दोनों यहीं बैठो, मैं तुम दोनों की चीज़ें लेकर आता हूँ…”
अनुम-मैं चलूं?
रजिया-“नहीं, आज सब इनकी पसंद से होगा यहीं बैठो…”
फिर अमन मुस्कुराते हुए शाप में चला जाता है। करीब एक घंटा बाद वो 5 बैग्गस भरकर वापस आता है। और कार में रख देता है।
अनुम और रजिया एक-एक बैग खोल-खोलकर देखने लगती हैं। रजिया बोली-“सभी चीज़ें बहुत अच्छी हैं। पर आप लहंगा और ब्लाउज लेना भूल गये। सिर्फ़ लाल रंग से साड़ी है, इसमें ना ब्रा है, ना पैंटी…”
अमन-“तुम दोनों को मैं जिस चीज़ में देखना चाहता हूँ, बस वही लाया हूँ। और जैसे भी होटेल के रूम में तुम दोनों ये भी उतारने वाले हो…”
दोनों औरतें बुरी तरह शरमा जाती हैं।
अमन अनुम और रजिया को होटेल के रूम में पहुँचाकर काजी की तरफ चल देता है। अमन शिमला कई बार आ चुका था, इसलिये उसे यहाँ के सारे रोड मालूम थे। वो एक काजी से मिलता है, जिसका नाम मिर्ज़ा असद बेग था।
अमन-“काजी साहब हम लोग बिहार के रहने वाले हैं। हमारे गाँव में बढ़ आ गई थी सभी घर बह गए कई जाने गयीं। हम किसी तरह यहाँ तक पहुँच सके। मेरे साथ मेरी मंगेतर और एक गाँव की औरत है, वो अब बेसहारा है। मैं इन्हें ऐसे अपने साथ नहीं रख सकता, इसलिये मेरा इन दोनों से आप निकाह करवा दें, ताकी मैं इन्हें अपने साथ रख सकूँ…”
उस वक्त बिहार में सच में बाढ़ आई हुई थी।
काजी असद इस बात से बहुत खुश हुए कि अमन एक जिम्मेदार इंसान की तरह रहना चाहता है। वरना आजकल के जमाने में कौन इतनी अच्छी सोच रखता है।
काजी साहब-“ठीक है बेटा चलो…” और काजी साहब अपने साथ दो और आदमियों को लेकर जिनकी निकाह में ज़रूरत पड़नी थी, अमन के साथ होटेल पहुँच जाते हैं।
इधर रजिया बाथरूम में अनुम की चूत के सारे बाल निकालने के बाद उसकी तेल से मालिश करती है।
अनुम-“अम्मी आप भी तैयार हो जाओ, वो लोग आते ही होंगे…”
रजिया अनुम की चिकनी चूत को देखते हुए उसे अपने होंठों से छूना चाहती थी। तभी अनुम रजिया को रोक देती है-“नहीं अम्मी, इसपे सबसे पहला हक उनका है…” और वो रजिया को अपने सीने से चिपका लेती है।
30 मिनट बाद अमन काजी और दो आदमियों के साथ रूम में दाखिल होता है। रजिया और अनुम ने अभी नॉर्मल ड्रेस पहना हुआ था ताकी काजी को शक ना हो जाये।
काजी साहब रजिया और अनुम से निकाहनामे पर दस्तखत लेते हैं, और फिर पहले अनुम से पूछते है-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”
अनुम की आँखों के सामने अपने बचपन से अब तक का सारा मंज़र कुछ सेकेंड में घूम जाता है। वो धीमी आवाज़ में काजी से कहती है-“कुबूल है…”
उसके बाद रजिया से काजी साहब पूछते हैं-“क्या आपने अमन ख़ान को अपने निकाह में कुबूल किया?”
रजिया-“जी हाँ, कुबूल किया…”
उसके बाद काजी साहब अपनी सारी जरूरी फामेलिटी पूरी करते है। वो अमन से भी अनुम और रजिया को कुबूल करवाते हैं।
और अमन भी खुशी-खुशी दोनों को अपने निकाह में कुबूल कर लेता है।
काजी साहब और वो दोनों आदमी अमन को मुबारकबाद देते हुए चले जाते हैं।
उन दोनों के जाने के बाद अमन रूम का दरवाजा बंद कर देता है। रूम का दरवाजा बंद होते ही अनुम और रजिया भागते हुए आकर अमन से चिपक जाती हैं।
रजिया-“मुबारक हो मेरे सरताज मुआहन्ह…”
अनुम-“मुबारक हो मेरी जान मैं बहुत बहुत-बहुत खुश हूँ आज कि आपने अपना वादा पूरा किया। मैं आज से आपकी हुई मुआह्म्मह…”
अमन दोनों को अपने से कसकर चिपका लेता है। अच्छा सुनो-“अभी रात के 7:00 बज रहे हैं। तुम दोनों तैयार हो जाओ और वो मैं तुम्हारे लिये ड्रेस लाया हूँ, उसे पहन लो और मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ…”
अमन-“रजिया, तुझे मैंने वो कहा था याद है ना?”
रजिया-“जी आप बिल्कुल फिकर ना करें…”
और अनुम अपना चेहरा शरमाकर रजिया के सीने में छुपा लेती है। दोनों औरतें एक रूम में चली जाती हैं। रजिया पूरे रूम में स्प्रे मारती है। बेड पे गुलाब की पंखुड़ियाँ बिछा देती है, और अनुम का हल्का-हल्का मेकअप करती है। उसके बाद वो खुद भी लाल साड़ी पहन लेती है, बिना ब्रा-पैंटी के और लहंगे ब्लाउज के अलाजा सिर्फ़ एक लाल साड़ी अपने जिस्म पे लपेटने में उसे आज एक नया खुशगवार एहसास हो रहा था। उसके जिस्म से बार-बार साड़ी निकल जा रही थी। वो अपने काँपते हाथों से साड़ी पहन ही लेती है।
वो खुद से ज्यादा अनुम को तैयार कर रही थी। वो जानती थी कि ये रात अनुम की जिंदगी की ना भूलने वाले रात बन जाएगी, जिसे वो पूरी तरह खूबसूरत बनाने वाले थे।
अनुम-“अम्मी, मैं कैसी लग रही हूँ?” अनुम खुद को आईने के सामने देखते हुए कहा।
रजिया-“एकदम आसमान की परी जैसे…” अब चलो यहाँ बेड पे बैठ जाओ ऐसे, और वो अनुम को बेड पे बिठा देती है, उसके सर पे घूँघट डाल देती है। फिर खुद भी उसके बगल में घूँघट डालकर बैठ जाती है।
रजिया जोर से आवाज़ लगते हुए-“सुनिये, आप आ जाइए…”
अमन वो उस रूम से अटैच्ड रूम में एक नई नवेली शेरवानी पहने खुद को आईने में देख रहा था, रजिया की आवाज़ से खुश हो जाता है। जाने कितने दिनों से उसके दिल में एक ख्वाइश थी कि वो अपनी अम्मी और बहन को दुल्हन के रूप में एक बेड पे लाल साड़ी पहने घूँघट डाले देखे। आज वो पल आ गया था। वो धड़कते दिल के साथ रूम में दाखिल होता है।
अमन रूम में पहुँचकर दरवाजा बंद कर देता है। आज उसका दिल उसके बस में नहीं था। ऐसा नज़ारा उसकी आँखों ने पहली बार देखा था। एक बेड पे उसकी अपनी सगी अम्मी और बहन उसका बेसबरी से इंतजार कर रही थीं। अमन जाकर बेड पर बैठ जाता है।