S
StoryPublisher
Guest
रात 11.55 पर पंकज और अभ्युदय जी आ चुके थे।उन्होंने मेरे फोन पर मिस्ड काल करना शुरू कर दिया।मैंने फोन लगाया और पंकज को कहा कि चाबी तो खिड़की पर ही रखी है और रिया छत पर है।
पंकज ने रिया को काल किया।रिया ने आकर गेट खोला और पंकज को गले लगा कर रोने लगी।
"क्या हुआ बर्थडे गर्ल?इरादा बदल लिया क्या तूने? शादी मैं कर नही पाऊंगा देख।सुन न 12 बजने वाले हैं।रिया सुन तो वो भाभी ने देखा तो फिर समंझ ले.."
रिया पंकज से अलग होकर रूम में आ गयी और सीधे भागकर वाशरूम चली गयी।
अभ्युदय जी और पंकज अंदर आ गए।
"इसे क्या हुआ?"
"क्या हुआ?"
"रो रही है।"
"रिया रो रही है?क्यों?क्या बोला तूने?"
"मैंने?लो जी यंहा एक लड़का सुबह शाम खिदमत मे खड़ा है और मैंने ही कुछ कहा।"
"निशी पंकज ने कुछ नही कहा।रिया अचानक ही रो पड़ी।उससे पूछना होगा क्या हुआ?"
"जी अभ्युदय जी।लेकिन उसके लिए तो.."
मैंने पंकज की तरफ देखा।
"है। मेरे पास इंतजाम है।"
"क्या इंतजाम?"
"एक वोडका का शॉट और बस।"
"नहीं पंकज।कल शादी है उसकी।ये सब ठीक नही।"
"लेकिन अभ्यु.."
"मैंने कहा न,जो सही नही है वो सही नही है।"
"बस बोल दिया अभ्युदय जी ने।निशी तू बात करेगी तो वो सब बताएगी।"
रिया बाहर आ गई।हम तीनों साथ मे गाने लगे
"हैप्पी बर्थडे टू यू, हैप्पी बर्थडे डिअर रिया,हैप्पी बर्थडे टू यू।"
"थैंक्यू, थैंक्यू,, थैंक्यू।"
रिया ने हम तीनों की तरफ थोड़ा झुककर और देखकर कहा।
"जल्दी आ।" मैंने कहा तो रिया झट से आकर गले लग गयी।पंकज को चैन कंहा था वो भी आकर हम दोनों में मिल गया।मैंने अपना चेहरा उठाकर अभ्युदय जी को देखा ओर सिर हिला कर पास आने कहा।वो भी आ गए और हम चारो एक साथ थे।
ये सुकून का पल था।ये एक साथ होने का पल था।कल रिया कंहा रहेगी अब हमारी।पराई हो जाना है उसे।
"बस करो यार,दबा डाला मुझे।बर्थडे के दिन ही मारोगे क्या?"
"रात.."
"क्या रात?"
"बर्थडे की रात रिया।"
"तू बड़े अक्ल वाली बात कह रहा है।वाह वाह।"
"चल न केक काटे।"
पंकज ने केक निकाला चाकू रिया को पकड़ाया और कैंडल जला दी।
"कोई भी विश मांगो रिया।" अभ्युदय जी बोले।
रिया ने आंखे बंद कर लीं।जब आंखे खोली तो फिर आंसू से भरी थी उसकी पलकें।
"क्या हुआ रिया?"
"उहनहु.. कुछ नही।"
"क्या उनहूँ.. बता ना रिया क्या हुआ?मुझे नहीं बताएगी?ठीक है मत बता।"
"प..पापा.. निशी पापा।"
"बस कर इधर आ।"
गले लगकर रिया फिर रो पड़ी।
"ये तो शादी होने के पहले ही पिन्नी हो गई है यार।पंकज,अभ्युदय जी,शादी कैंसिल कीजिये।हमें नही करवानी कोई शादी।अच्छी खासी बहादुर लड़की को रोतड़ि बना दिया।"
"अभ्युदय जी मैं भी वही बोल रहा था।कैंसिल कर दें सब।"
"पागल है क्या?कुछ कंसल नही होगा।मैं भी आख़िर अपने पापा की ही बेटी हूँ।"
"पक्का बता दो रिया।तुम्हारा रोना इस तरह हम तीनों से नही देखा जाएगा।"
"मैं चुप हो जाती हूँ अभ्युदय जी पर.."
"निशी देखा तेरी और मेरी कोई औकात नही।अभ्युदय जी ने कहा मान गई।"
"सही बोला पंकज तू।लाइफ में पहली बार।"
"मैं सही ही बोलता।तुझे गलत लगता, तो मैं क्या करूँ?"
हम सभी हंस पड़े।
"क्या बोलती है निशी?इसकी शादी कैंसिल करा दूँ?"
"कैसे?"
"कैसे क्या कैसे?कल अंकल को फोन और रवीश को बताना है कि मैं दिलों जान से चाहता हूँ इस झल्ली को।"
कहते हुए पंकज बस मुझे देखे जा रहा था।अंदर एक बेचैनी बढ़ रही थी।क्या हो रहा है मुझे?क्यों पंकज का अब देखना,घूरना या अपने प्यार का इजहार करना बुरा नहीं लगता मुझे?क्या हो गया है?ये अट्रैक्शन है उसकी बातों की वजह से या4 ?
"पागल मत बन निशी।बस कर सोचना।कल शादी है रिया की।"
मन में चलती बातों को रोक कर रिया को देखा और कहा चाय चाहिए?
केक खाने के बाद सबने चाय के लिए हामी भर दी।अभ्युदय जी के रहते केक की वेस्टेज बच गई थी।उन्होंने केक मुँह पर लगाने को साफ मना कर दिया था।जिसके बाद मैं और पंकज तो शरीफ बन बैठ गए।पर रिया खुद कंहा मानने वाली थी।उसने केक लिलार सबसे पहले अभ्युदय जी फिर पंकज फिर मुझे लगा दिया।
सभी ने टिश्यू से केक हटाया और चाय के लिए तैयार हो गए।
"मैं कैसे जाऊंगी?"
"जैसे मैं जाता हूँ निशी।"अभ्युदय जी बोले।
"पर..दर्द?"
"गोद में उठाकर लें चलें रानी साहिबा?"
"नहीं बिल्कुल नहीं।तुम दोनों चाय ले आओ।यंही पियेंगे चाय।"
पंकज और रिया चाय लेने चले गए।रूम पर अकेले मैं और अभ्युदय जी।चुप्पी को तोड़कर अभ्युदय जी बोले।
"क्या गिफ्ट देना है रिया को?"
"मैं पैसे दूंगी।अभी काम आएंगे दोनो के।"
"कितने?"
"5 हजार?या दस हजार?कितना दूँ?"
"10 देना लेकिन 5 मेरी तरफ से मिला कर।"
"क्यों?"
"आप 5 हजार अलग दे दीजिये।"
"वो दोनों लेंगे नही।मन्दिर में फीस बहुत ले लेते है,जो कि यंहा लगी नहीं। रवीश को पता है कि यंहा सब मेरी वजह से हो गया तो थोड़ा फ्रेंडली है।"
"हम्म..समंझ गई।"
पंकज ने रिया को काल किया।रिया ने आकर गेट खोला और पंकज को गले लगा कर रोने लगी।
"क्या हुआ बर्थडे गर्ल?इरादा बदल लिया क्या तूने? शादी मैं कर नही पाऊंगा देख।सुन न 12 बजने वाले हैं।रिया सुन तो वो भाभी ने देखा तो फिर समंझ ले.."
रिया पंकज से अलग होकर रूम में आ गयी और सीधे भागकर वाशरूम चली गयी।
अभ्युदय जी और पंकज अंदर आ गए।
"इसे क्या हुआ?"
"क्या हुआ?"
"रो रही है।"
"रिया रो रही है?क्यों?क्या बोला तूने?"
"मैंने?लो जी यंहा एक लड़का सुबह शाम खिदमत मे खड़ा है और मैंने ही कुछ कहा।"
"निशी पंकज ने कुछ नही कहा।रिया अचानक ही रो पड़ी।उससे पूछना होगा क्या हुआ?"
"जी अभ्युदय जी।लेकिन उसके लिए तो.."
मैंने पंकज की तरफ देखा।
"है। मेरे पास इंतजाम है।"
"क्या इंतजाम?"
"एक वोडका का शॉट और बस।"
"नहीं पंकज।कल शादी है उसकी।ये सब ठीक नही।"
"लेकिन अभ्यु.."
"मैंने कहा न,जो सही नही है वो सही नही है।"
"बस बोल दिया अभ्युदय जी ने।निशी तू बात करेगी तो वो सब बताएगी।"
रिया बाहर आ गई।हम तीनों साथ मे गाने लगे
"हैप्पी बर्थडे टू यू, हैप्पी बर्थडे डिअर रिया,हैप्पी बर्थडे टू यू।"
"थैंक्यू, थैंक्यू,, थैंक्यू।"
रिया ने हम तीनों की तरफ थोड़ा झुककर और देखकर कहा।
"जल्दी आ।" मैंने कहा तो रिया झट से आकर गले लग गयी।पंकज को चैन कंहा था वो भी आकर हम दोनों में मिल गया।मैंने अपना चेहरा उठाकर अभ्युदय जी को देखा ओर सिर हिला कर पास आने कहा।वो भी आ गए और हम चारो एक साथ थे।
ये सुकून का पल था।ये एक साथ होने का पल था।कल रिया कंहा रहेगी अब हमारी।पराई हो जाना है उसे।
"बस करो यार,दबा डाला मुझे।बर्थडे के दिन ही मारोगे क्या?"
"रात.."
"क्या रात?"
"बर्थडे की रात रिया।"
"तू बड़े अक्ल वाली बात कह रहा है।वाह वाह।"
"चल न केक काटे।"
पंकज ने केक निकाला चाकू रिया को पकड़ाया और कैंडल जला दी।
"कोई भी विश मांगो रिया।" अभ्युदय जी बोले।
रिया ने आंखे बंद कर लीं।जब आंखे खोली तो फिर आंसू से भरी थी उसकी पलकें।
"क्या हुआ रिया?"
"उहनहु.. कुछ नही।"
"क्या उनहूँ.. बता ना रिया क्या हुआ?मुझे नहीं बताएगी?ठीक है मत बता।"
"प..पापा.. निशी पापा।"
"बस कर इधर आ।"
गले लगकर रिया फिर रो पड़ी।
"ये तो शादी होने के पहले ही पिन्नी हो गई है यार।पंकज,अभ्युदय जी,शादी कैंसिल कीजिये।हमें नही करवानी कोई शादी।अच्छी खासी बहादुर लड़की को रोतड़ि बना दिया।"
"अभ्युदय जी मैं भी वही बोल रहा था।कैंसिल कर दें सब।"
"पागल है क्या?कुछ कंसल नही होगा।मैं भी आख़िर अपने पापा की ही बेटी हूँ।"
"पक्का बता दो रिया।तुम्हारा रोना इस तरह हम तीनों से नही देखा जाएगा।"
"मैं चुप हो जाती हूँ अभ्युदय जी पर.."
"निशी देखा तेरी और मेरी कोई औकात नही।अभ्युदय जी ने कहा मान गई।"
"सही बोला पंकज तू।लाइफ में पहली बार।"
"मैं सही ही बोलता।तुझे गलत लगता, तो मैं क्या करूँ?"
हम सभी हंस पड़े।
"क्या बोलती है निशी?इसकी शादी कैंसिल करा दूँ?"
"कैसे?"
"कैसे क्या कैसे?कल अंकल को फोन और रवीश को बताना है कि मैं दिलों जान से चाहता हूँ इस झल्ली को।"
कहते हुए पंकज बस मुझे देखे जा रहा था।अंदर एक बेचैनी बढ़ रही थी।क्या हो रहा है मुझे?क्यों पंकज का अब देखना,घूरना या अपने प्यार का इजहार करना बुरा नहीं लगता मुझे?क्या हो गया है?ये अट्रैक्शन है उसकी बातों की वजह से या4 ?
"पागल मत बन निशी।बस कर सोचना।कल शादी है रिया की।"
मन में चलती बातों को रोक कर रिया को देखा और कहा चाय चाहिए?
केक खाने के बाद सबने चाय के लिए हामी भर दी।अभ्युदय जी के रहते केक की वेस्टेज बच गई थी।उन्होंने केक मुँह पर लगाने को साफ मना कर दिया था।जिसके बाद मैं और पंकज तो शरीफ बन बैठ गए।पर रिया खुद कंहा मानने वाली थी।उसने केक लिलार सबसे पहले अभ्युदय जी फिर पंकज फिर मुझे लगा दिया।
सभी ने टिश्यू से केक हटाया और चाय के लिए तैयार हो गए।
"मैं कैसे जाऊंगी?"
"जैसे मैं जाता हूँ निशी।"अभ्युदय जी बोले।
"पर..दर्द?"
"गोद में उठाकर लें चलें रानी साहिबा?"
"नहीं बिल्कुल नहीं।तुम दोनों चाय ले आओ।यंही पियेंगे चाय।"
पंकज और रिया चाय लेने चले गए।रूम पर अकेले मैं और अभ्युदय जी।चुप्पी को तोड़कर अभ्युदय जी बोले।
"क्या गिफ्ट देना है रिया को?"
"मैं पैसे दूंगी।अभी काम आएंगे दोनो के।"
"कितने?"
"5 हजार?या दस हजार?कितना दूँ?"
"10 देना लेकिन 5 मेरी तरफ से मिला कर।"
"क्यों?"
"आप 5 हजार अलग दे दीजिये।"
"वो दोनों लेंगे नही।मन्दिर में फीस बहुत ले लेते है,जो कि यंहा लगी नहीं। रवीश को पता है कि यंहा सब मेरी वजह से हो गया तो थोड़ा फ्रेंडली है।"
"हम्म..समंझ गई।"